शनिवार 9 जनवरी 1993 की अव्यक्त मुरली

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0> 109-01-93 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन 2अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना

0> > 09-01-93 Om Shanti Avyakt Bapdada Madhuban

3ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त फरिश्ता बनने के उमंग-उत्साह में रहने वाले बच्चों प्रति अव्यक्त बापदादा बोले - 4आज अव्यक्त बाप अपने अव्यक्तमूर्त बच्चों से मिलन मना रहे हैं। 5अव्यक्त अर्थात् व्यक्त भाव से न्यारे और अव्यक्त बाप समान प्यारे।

6सभी बच्चे विशेष इस वर्ष ऐसे बाप समान बनने का लक्ष्य रखते हुए यथा शक्ति बहुत अच्छा पुरूषार्थ कर रहे हैं। 7लक्ष्य के साथ लक्षण भी धारण करते चल रहे हैं। 8बापदादा सभी बच्चों का पुरूषार्थ देख हर्षित होते हैं।

9हर एक समझते हैं कि यही समान बनना स्नेह का सबूत है। 10इसलिए ऐसे सबूत देने वाले बच्चों को ही सपूत बच्चे कहा जाता है। 11तो सपूत बच्चों को देख बापदादा खुश भी होते हैं और विशेष एकस्ट्रा मदद भी देते हैं।

12जितना हिम्मतवान बनते हैं उतना पद्मगुणा बाप की मदद के स्वतः ही पात्र बन जाते हैं। 13ऐसे पात्र बच्चों की निशानी क्या होती है? 14जैसे बाप के लिए गायन है कि बाप के भण्डारे सदा भरपूर हैं, ऐसे सपूत बच्चों के सदा सर्व के दिल के स्नेह की दुआओं से, सर्व के सहयोग की अनुभूतियों से,सर्व खज़ानों से भण्डारे भरपूर रहते हैं।

15किसी भी खज़ाने से अपने को खाली नहीं अनुभव करेंगे। 16सदा उन्हों के दिल से यह गीत स्वतः बजता है-अप्राप्त नहीं कोई वस्तु बाप के हम बच्चों के भण्डारे में। 17उनकी दृष्टि से, वृत्ति से, वायब्रेशन्स से, मुख से,सम्पर्क से सदा भरपूर आत्माओं का अनुभव होता है।

18ऐसे बच्चे सदा बाप के साथ भी हैं और साथी भी हैं। 19यह डबल अनुभव हो।

1To celebrate the Avyakt Year means to become worthy and to give the proof of that.

20स्व की लगन में सदा साथ का अनुभव करते और सेवा में सदा साथी स्थिति का अनुभव करते। 21यह दोनों अनुभव ‘साथी’ और ‘साथ’ का स्वतः ही बाप समान साक्षी अर्थात् न्यारा और प्यारा बना देता है। 22जैसे ब्रह्मा बाप को देखा कि बाप और आप कम्बाइन्ड-रूप में सदा अनुभव किया और कराया।

23कम्बाइन्ड स्वरूप को कोई अलग कर नहीं सकता। 24ऐसे सपूत बच्चे सदा अपने को कम्बाइन्ड-रूप अनुभव करते हैं। 25कोई ताकत नहीं जो अलग कर सके।

2Today, avyakt BapDada is celebrating a meeting with His children who are the avyakt image.

26जैसे सतयुग में देवताओं की प्रकृति दासी रहती है अर्थात् सदा समय प्रमाण सहयोगी रहती है, ऐसे सपूत बच्चों की श्रेष्ठ स्थिति कारण सर्व शक्तियाँ और सर्व गुण समय प्रमाण सदा सहयोगी रहते हैं अर्थात् सर्व शक्तियों के,गुणों के राज्य-अधिकारी रहते हैं। 27साथ-साथ ऐसे सपूत बच्चों का सेवा का विशेष स्वरूप क्या रहता? 28जैसे सभी वाणी द्वारा वा मन्सा-सेवा द्वारा सेवा करते रहते हैं,ऐसे सेवा वे भी करते हैं लेकिन उन्हों की विशेष सेवा यही है कि सदा अन्य आत्माओं को प्राप्त हुए बाप के गुणों और शक्तियों का दान नहीं लेकिन सहयोग वा प्राप्ति का अनुभव कराना।

29अज्ञानियों को दान देंगे और ब्राह्मण आत्माओं को सहयोग वा प्राप्ति करायेंगे। 30क्योंकि सबसे बड़े ते बड़ा दान गुण दान वा शक्तियों का दान है। 31निर्बल को शक्तिवान बनाना-यही श्रेष्ठ दान है वा सहयोग है।

32तो ऐसा सहयोग देना आता है? 33कि अभी लेने के लिए सोचते हो? 34अभी तक लेने वाले हो या दाता के बच्चे देने वाले बने हो? 35वा कभी लेते हो, कभी देते हो-ऐसे?

3To be avyakt means to be beyond corporeal feelings and to be loving like the avyakt father.

36देने लग जाओ तो लेना स्वतः ही सम्पन्न हो जायेगा। 37क्योंकि बाप ने सभी को सबकुछ दे दिया है। 38कुछ अपने पास रखा नहीं है, सब दे दिया है। 39सिर्फ लेने वालों को सम्भालना और कार्य में लगाना नहीं आता है।

4This year, all the children are keeping the aim of becoming like the father and are making very good effort according to their capacity.

40तो जितना देते जायेंगे उतना ही सम्पन्नता का अनुभव करते जायेंगे। 41ऐसे सपूत हो ना! 42‘सपूत’ की लाइन में हो कि सपूत बनने की लाइन में हो?

5Together with this aim, you are also moving along while imbibing the qualifications for this aim.

43जैसे लौकिक में भी माँ-बाप बच्चों को अपने हाथों पर नचाते रहते हैं अर्थात् सदा खुश रखते,उमंग-उत्साह में रखते। 44ऐसे सपूत बच्चे सदा सर्व को उमंग-उत्साह में नचाते रहेंगे, उड़ती कला में उड़ाते रहेंगे। 45तो यह वर्ष अव्यक्त वर्ष मना रहे हो। 46अव्यक्त वर्ष अर्थात् बाप के सपूत बन सबूत देने वाला बनना।

6BapDada is happy to see the effort of all the children.

47ऐसा सबूत देना अर्थात् मनाना। 48अव्यक्त का अर्थ ही है व्यक्त भाव और व्यक्त भावना से परे।

7All of you understand that to become the same is to give the proof of love.

49जीवन में उड़ती कला वा गिरती कला का आधार दो बातें ही हैं-(1) भावना और (2) भाव। 50अगर किसी भी कार्य में कार्य प्रति या कार्य करने वाले व्यक्ति के प्रति भावना श्रेष्ठ है, तो भावना का फल भी श्रेष्ठ स्वतः ही प्राप्त होता है। 51एक-है सर्व प्रति कल्याण की भावना; दूसरी है-कोई कैसा भी हो लेकिन सदा स्नेह और सहयोग देने की भावना; तीसरी है-सदा हिम्मत-उल्लास बढ़ाने की भावना; चौथी है-कोई कैसा भी हो लेकिन सदा अपनेपन की भावना और पाँचवी है-इन सबका फाउन्डेशन आत्मिक-स्वरूप की भावना।

52इनको कहा जाता है सद्भावनायें वा पॉजिटिव भावनायें। 53तो अव्यक्त बनना अर्थात् ये सर्व सद्भावनायें रखना।

8This is why the children who give such proof are called worthy children.

54अगर इन सदभावनाओं के विपरीत हैं तब ही व्यक्त भाव अपनी तरफ आकर्षित करता है। 55व्यक्त भाव का अर्थ ही है इन पांचों बातों के नैगेटिव अर्थात् विपरीत स्थिति में रहना। 56इसके विपरीत को तो स्वयं ही जानते हो, वर्णन करने की आवश्यकता नहीं।

57जब भावना विपरीत होती है तो अव्यक्त स्थिति में स्थित नहीं हो सकते। 58माया के आने के विशेष यही दरवाजे हैं।

9So, BapDada becomes pleased seeing the worthy children and also gives extra special help.

59किसी भी विघ्न को चेक करो-उसका मूल प्रीत के बजाए विपरीत भावनायें ही होती हैं। 60भावना पहले संकल्प रूप में होती है,फिर बोल में आती है और उसके बाद फिर कर्म में आती है। 61जैसी भावना होगी वैसे व्यक्तियों के हर एक चलन वा बोल को उसी भाव से देखेंगे,सुनेंगे वा सम्बन्ध में आयेंगे।

62भावना से भाव भी बदलता है। 63अगर किसी आत्मा के प्रति किसी भी समय ईर्ष्या की भावना है अर्थात् अपनेपन की भावना नहीं है तो उस व्यक्ति के हर चलन, हर बोल से मिस-अन्डरस्टैण्ड (Misunderstand-गलतफहमी) का भाव अनुभव होगा। 64वह अच्छा भी करेगा लेकिन आपकी भावना अच्छी न होने के कारण हर चलन और बोल से आपको बुरा भाव दिखाई देगा।

65तो भावना भाव को बदलने वाली है। 66तो चेक करो कि हर आत्मा के प्रति शुभ भावना, शुभ भाव रहता है? 67भाव को समझने में अन्तर पड़ने से‘मिस-अन्डरस्टैण्डिंग’ माया का दरवाजा बन जाती है।

10o the extent that they become courageous, so they automatically become multimillion times worthy of receiving Baba's help.

68अव्यक्त स्थिति बनाने के लिए विशेष अपनी भावना और भाव को चेक करो तो सहज अव्यक्त स्थिति में विशेष अनुभव करते रहेंगे। 69कई बच्चे अशुद्ध भावना वा अशुभ भाव से अलग भी रहते हैं। 70लेकिन एक है-शुभ भाव और भावना; दूसरी है-व्यर्थ भाव और भावना, तीसरी है साधारण भावना वा भाव। 71क्योंकि ब्राह्मण अर्थात् सेवा-भाव।

11What is the sign of such worthy children?

72तो साधारण भावना वा साधारण भाव नुकसान नहीं करता लेकिन जो ब्राह्मण जीवन का कर्तव्य है शुभ भावना से सेवा-भाव, वह नहीं कर सकते हैं। 73इसलिए ब्राह्मण जीवन में जो सेवा का फल जमा होने का विशेष वरदान है उसका अनुभव नहीं कर सकेंगे। 74तो साधारण भावना और भाव को भी श्रेष्ठ भावना, श्रेष्ठ भाव में परिवर्तन करो।

75चेक करेंगे तो चेंज करेंगे और अव्यक्त फरिश्ता बाप समान सहज बन जायेंगे। 76तो समझा, अव्यक्त वर्ष कैसे मनाना है? 77‘शुभ भावना’ मन्सा-सेवा का बहुत श्रेष्ठ साधन है और ‘श्रेष्ठ भाव’ सम्बन्ध-सम्पर्क में सर्व के प्यारे बनने का सहज साधन है। 78जो सदा हर एक प्रति श्रेष्ठ भाव धारण करता वही माला का समीप मणका बन सकता है।

12Just as it is remembered of the Father that the Father's treasure­store is constantly full, in the same way, the worthy children's treasure­store constantly remains full with the blessings of love from the heart, with the experience of co­ operation from everyone and with all treasures.

79क्योंकि माला सम्बन्ध-सम्पर्क में समीप और श्रेष्ठता की निशानी है। 80कोई किसी भी भाव से बोले वा चले लेकिन आप सदा हर एक प्रति शुभ भाव,श्रेष्ठ भाव धारण करो। 81जो इसमें विजयी होते हैं वही माला में पिरोने के अधिकारी हैं। 82चाहे सेवा के क्षेत्र में भाषण नहीं कर सकते, प्लैन नहीं बना सकते लेकिन जो हर एक से सम्बन्ध-सम्पर्क में शुभ भाव रख सकते हैं,तो यह ‘शुभ भाव’ सूक्ष्म सेवा-भाव में जमा हो जायेगा।

13They will never experience themselves to be lacking any of the treasures.

83ऐसे शुभ भाव वाला सदा सभी को सुख देगा, सुख लेगा। 84तो यह भी सेवा है और यह सेवा-भाव आगे नम्बर लेने का अधिकारी बना देगा। 85इसलिए माला का मणका बन जायेंगे। 86समझा?

14There is the song emerging automatically from their hearts: There is nothing lacking in the treasure of the children of the Father.

87कभी भी ऐसे नहीं सोचना कि हमको तो भाषण करने का चांस ही नहीं मिलता है, बड़ी-बड़ी सेवा का चांस नहीं मिलता। 88लेकिन यह सेवा-भाव का गोल्डन चांस लेने वाला चान्सलर की लाइन में आ जायेगा अर्थात् विशेष आत्मा बन जायेगा। 89इसलिए इस वर्ष में विशेष यह ‘शुभ भावना’और ‘श्रेष्ठ भाव’ धारण करने का विशेष अटेन्शन रखना।

90अशुभ भाव और अशुभ भावना को भी अपने शुभ भाव और शुभ भावना से परिवर्तन कर सकते हो। 91सुनाया था ना कि गुलाब का पुष्प बदबू की खाद से खुशबू धारण कर खुशबूदार गुलाब बन सकता है। 92तो आप श्रेष्ठ आत्मायें अशुभ, व्यर्थ,साधारण भावना और भाव को श्रेष्ठता में नहीं बदल सकते!

93वा कहेंगे-क्या करें, इसकी है ही अशुभ भावना, इनका भाव ही मेरे प्रति बहुत खराब है, मैं क्या करूँ? 94ऐसे तो नहीं बोलेंगे ना! 95आपका तो टाइटल ही है विश्व-परिवर्तक।

15From their vision, attitude, vibrations, lips and through contact with them, they are experienced to be souls who are constantly full.

96जब प्रकृति को तमोगुणी से सतोगुणी बना सकते हो;तो क्या आत्माओं के भाव और भावना के परिवर्तक नहीं बन सकते? 97तो यही लक्ष्य बाप समान अव्यक्त फरिश्ता बनने के लक्षण सहज और स्वतः लायेगा। 98समझा,कैसे अव्यक्त वर्ष मनाना है?

99मनाना अर्थात् बनना-यह ब्राह्मणों की भाषा का सिद्धान्त है। 100बनना है ना। 101कि सिर्फ मनाना है?

16So, such worthy children are constantly with the Father and are also His companions.

102तो ब्राह्मणों में वर्तमान समय इसी पुरूषार्थ की विशेष आवश्यकता है और यही सेवा माला के मणकों को समीप लाए माला प्रसिद्ध करेगी। 103माला के मणके अलग-अलग तैयार हो रहे हैं। 104लेकिन माला अर्थात् दाने,दाने की समीपता। 105तो यह दो बातें दाने की दाने से समीपता का साधन हैं।

17There should be this double experience.

106इसको ही कहा जाता है सपूत अर्थात् सबूत देने वाले। 107अच्छा! 108चारों ओर के सर्व स्नेह का सबूत देने वाले सपूत बच्चों को,सदा बाप समान फरिश्ता बनने के उमंग-उत्साह में रहने वाली आत्माओं को,सदा सर्व प्रति श्रेष्ठ भावना और श्रेष्ठ भाव रखने वाली विजयी आत्माओं को,सदा हर आत्मा को श्रेष्ठ भावना से परिवर्तन करने वाले विश्व-परिवर्तक आत्माओं को,सदा विजयी बन विजय माला में समीप आने वाले विजयी रत्नों को बापदादा का अव्यक्त वर्ष की मुबारक के साथ-साथ याद,प्यार और नमस्ते।

109दादियों से मुलाकात 110(जानकी दादी से)अपनी हिम्मत और सर्व के सहयोग की दुआयें शरीर को चला रही हैं। 111समय पर शरीर भी सहयोग दे देता है। 112इसको कहते हैं एकस्ट्रा दुआओं की मदद।

18They have the experience of constant company through their love, and they constantly experience the stage of being a companion in service.

113तो विशेष आत्माओं को यह एकस्ट्रा मदद मिलती ही है। 114थोड़ा शरीर को रेस्ट भी देना पड़ता है। 115अगर नहीं देते हैं तो वो खिटखिट करता है। 116जैसे औरों को जो चाहता है वो दे देते हो ना!

19The experience of both of these, that is, of having His company and of being a companion, automatically makes you a detached observer, that is, detached and loving like the father.

117किसको शान्ति चाहिए,किसको सुख चाहिए, किसको हिम्मत चाहिए-तो देते हो ना! 118तो शरीर को जो चाहिए वो भी दे दिया करो। 119इसको भी तो कुछ चाहिए ना! 120क्योंकि यह शरीर भी अमानत है ना!

20You saw how Father Brahma constantly experienced himself to be in a combined form with the Father and also gave this experience to others.

121इसको भी सम्भालना तो पड़ता है ना!

21No one can separate a combined form.

122अच्छी हिम्मत से चला रही हो और चलना ही है। 123समय पर आवश्यकतानुसार जैसे शरीर आपको सहयोग दे देता है, तो आप भी थोड़ा-थोड़ा सहयोग दे दो। 124नॉलेजफुल तो हो ही। 125अच्छा है।

22In the same way, worthy children constantly experience themselves to be in a combined form with the Father; there is no power that can separate them.

126क्योंकि इस शरीर द्वारा ही अनेक आत्माओं का कल्याण होना है। 127आप लोगों के सिर्फ साथ के अनुभव से ही सब बहुत बड़ी मदद का अनुभव करते हैं। 128हाजिर होना भी सेवा की हाजिरी हो जाती है। 129चाहे स्थूल सेवा न भी करें लेकिन हाजिर होने से हाजिरी पड़ जाती है।

23Just as in the golden age the elements are the servants of the deities, that is, they constantly remain co­operative according to the time, in the same way, because of the elevated stage of the worthy children, all the powers and all the virtues constantly remain co­operative with them according to the time.

130सेकेण्ड भी सेवा के बिना न रह सकते हो,न रहते हो। 131इसलिए सेवा का जमा का खाता जमा हो ही रहा है।

24That is, they remain sovereigns over all the powers and all the virtues.

132बहुत अच्छा पार्ट बजा रही हो,बजाती रहेंगी। 133अच्छा पार्ट मिला है ना! 134इतना बढ़िया पार्ट ड्रामा अनुसार दुआओं के कारण मिला है!

25Together with this, what is the special form of service of such worthy children?

135ये ब्राह्मण जन्म के आदि के संस्कार ‘रहमदिल’ और‘सहयोग की भावना’ का फल है। 136चाहे तन से, चाहे मन से-रहमदिल और सहयोग की भावना का पार्ट आदि से मिला हुआ है। 137इसलिए उसका फल सहज प्राप्त हो रहा है। 138शारीरिक सहयोग की भी सेवा दिल से की है।

26Just as all of you continually serve through words and through the mind, so they too do such service, but their special service is that they do not just give the donation of the powers and virtues attained from the Father to all souls, but they also give the experience of co­operation and attainment.

139इसलिए शरीर की आयु इन दुआओं से बढ़ रही है। 140अच्छा! 141(दादी जी से) अच्छा,सर्विस करके आई हो! 142यह ड्रामा भी सहयोगी बनता है और ये शुभ भावना का फल और बल मिलता है।

27They give donations to the souls who have no knowledge and they give co­operation and attainment to the Brahmin souls, because the greatest donation is the donation of virtues and powers.

143संगठित रूप में शुभ भावना ये फल देती है। 144तो अच्छा रहा और अच्छे ते अच्छा रहना ही है।

28To make those who are weak powerful is the greatest donation and co­operation.

145अभी तो और भी अव्यक्त स्थिति द्वारा विश्व की आत्माओं को और सेवा में आगे बढ़ने का बल मिलेगा। 146सिर्फ ब्राह्मणों के दृढ़ परिवर्तन के लिए विश्व-परिवर्तन रूका हुआ है। 147ब्राह्मणों का परिवर्तन कभी पॉवरफुल होता है, कभी हल्का होता है। 148तो ये हलचल भी कभी जोर पकड़ती है,कभी ढीली होती है।

29Do you know how to give such co­operation?

149सम्पन्न बनने तो यही ब्राह्मण हैं। 150अच्छा!

30Or, are you at present thinking about taking?

151(चन्द्रमणि दादी से)बेहद की चक्रवर्ती बन गई-आज यहाँ,कल वहाँ! 152तो इसको ही कहा जाता है विश्व की आत्माओं से स्वतः और सहज सम्बन्ध बढ़ना।

31Are you still those who are taking or have you become the children of the Bestower who give?

153विश्व का राज्य करना है, विश्व-कल्याणकारी हैं, तो कोने-कोने में पांव तो रखने चाहिए ना। 154इसलिए देश-विदेश में चांस मिल जाता है। 155प्रोग्राम न भी बनाओ लेकिन यह ड्रामानुसार संगम की सेवा भविष्य को प्रत्यक्ष कर रही है। 156इसलिए बेहद की सेवा और बेहद के सम्बन्ध-सम्पर्क बढ़ रहे हैं और बढ़ते रहेंगे।

32Is it that sometimes you give and sometimes you take?

157स्टेट का राजा तो नहीं बनना है, विश्व का बनना है! 158पंजाब का राजा तो नहीं बनना है! 159वो तो निमित्त डयुटी है, डयुटी समझकर निभाते हो।

33Start to give and, in your taking, you will automatically become full, because the Father has given everything to everyone.

160बाकी ऑर्डर करें कि मधुबन निवासी बनना है, तो सोचेंगे क्या कि पंजाब का क्या होगा? 161नहीं।

34He has not kept anything for Himself; He has given everything.

162जब तक जहाँ की जो डयुटी है, बहुत अच्छी तरह से निभाना ही है। 163(जानकी दादी से)अभी कहें कि आप फॉरेन से यहाँ आ जाओ तो बैठ जायेंगी ना!

35It is just that those who take (from Baba) do not know how to look after it or how to use it in the task.

164बाप भेजते हैं, खुद नहीं जाती हो। 165आखिर तो सभी को यहाँ आना ही पड़ेगा ना! 166इसलिए बार-बार आते-आते फिर रह जायेंगे। 167चक्कर लगाकर आ जाते हो ना!

36So the more you continue to give, the more you will have the experience of becoming complete.

168इसलिए न्यारे भी हो और सेवा के प्यारे भी।

37You are such worthy children, are you not?

169देश और व्यक्तियों के प्यारे नहीं, सेवा के प्यारे।

38Are you in the line of those who are worthy?

170अच्छा! 171सबको याद देना, अव्यक्त वर्ष की मुबारक देना। 172अव्यक्त बापदादा की पर्सनल मुलाकात 173ग्रुप नं.1

39Or, are you in the line of those who are becoming worthy?

174बचने के लिये बुद्धि को शुद्ध संकल्पों में बिजी रखो 175सदा खुश रहते हो! 176या कभी खुश रहते और कभी खुशी के बजाए कोई व्यर्थ संग वा संकल्प में आ जाते हो? 177अगर कोई भी व्यर्थ संकल्प वा व्यर्थ संग मिलता है वा चलता है तो खुशी समाप्त हो जाती है।

40Just as, in a worldly way, parents make their children dance in their hands, that is, they constantly keep them happy, full of zeal and enthusiasm, in the same way, worthy children will make others dance with zeal and enthusiasm and make them fly in the flying stage.

178क्योंकि व्यर्थ संग वा व्यर्थ संकल्प बोझ है और खुशी हल्की चीज़ है!

41This year, you are celebrating the Avyakt Year.

179इसलिए देखो, जब खुश होते हैं तो नाचते हैं। 180जो हल्का होगा वह खुशी में नाचता है!

42The Avyakt Year means to give the proof of being worthy of the Father.

181शरीर कितना भी भारी हो लेकिन मन हल्का होगा तो भी नाचेगा। 182मन भारी होगा तो हल्का भी नाचेगा नहीं। 183तो खुशी है हल्कापन और व्यर्थ संकल्प वा व्यर्थ संग है भारी,बोझ। 184बोझ सदा नीचे ले आता है और हल्की चीज़ सदा ऊंची जाती है।

43To give such proof means to celebrate.

185तो खुश रहने का सहज साधन है-सदा हल्के रहो। 186शुद्ध संकल्प हल्के हैं और व्यर्थ संकल्प भारी हैं।

44The meaning of avyakt is to be beyond corporeal feelings and desires.

187जब भी किसके व्यर्थ संकल्प चलते हैं तो क्या अनुभव करते हो? 188माथा भारी हो जाता है। 189बोझ है तभी तो माथा भारी करता है ना! 190तो सदा बाप के संग में रहना और सदा बाप के दिये हुए शुद्ध संकल्पों में रहना!

45Generally, in life, the basis of the stages of ascent and descent are these two aspects: one is loving feelings (bhavna) and the other is intentions (bhav).

191यह रोज़ की मुरली रोज के लिए शुद्ध संकल्प हैं। 192तो कितने शुद्ध संकल्प बाप द्वारा मिले हैं! 193जब कोई अच्छी चीज़ वा बढ़िया चीज़ मिल जाती है तो हल्की (घटिया) चीज़ को क्या करेंगे? 194खत्म करेंगे ना!

46If in any task you have elevated feelings for both the task and the one who is carrying out the task, then the result attained by those feelings is automatically elevated.

195सारा दिन बुद्धि को बिजी रखने के लिए रोज़ सवेरे-सवेरे बाप शुद्ध संकल्प देते हैं। 196जहाँ शुद्ध होंगे वहाँ व्यर्थ नहीं होंगे। 197बुद्धि को खाली रखते हो, इसलिए व्यर्थ आते हैं। 198यही सहज उपाय है, साधन है कि सदा शुद्ध संकल्पों से बुद्धि को बिजी रखो।

47One is to have a feeling of benevolence for everyone.

199सिर्फ ‘खुश’ रहना है-यही याद नहीं रखना लेकिन ‘सदा खुश’ रहना है! 200यह सोचो कि ब्राह्मण खुश नहीं रहेंगे तो कौन रहेगा! 201ब्राह्मण ही श्रेष्ठ हैं ना।

48The second is to have a feeling of giving love and co­operation no matter what anyone is like.

202देवताओं से भी ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं। 203ब्राह्मणों की खुराक ही खुशी है।

49The third is of constantly increasing zeal and enthusiasm.

204इसलिये गाते हैं-खुशी जैसी कोई खुराक नहीं। 205अगर कोई सदा खुश रहता है तो पूछते हैं-आपको क्या मिला है! 206आप लौकिक जीवन से अलौकिक जीवन वाले हो गये।

50The fourth is to have a feeling of everyone belonging to you, no matter what someone may be like.

207तो यह अलौकिकता की झलक चेहरे पर दिखाई देनी चाहिए। 208ऐसे नहीं-मैं अन्दर से तो खुश रहती हूँ,बाहर से दिखाई नहीं देता।

51The fifth is the foundation of all of these, and that is the feeling of soul consciousness.

209अन्दर का बाहर अवश्य आता है।

52These are called positive feelings.

210तो सदा चेक करो कि हमारा चेहरा और चलन अलौकिकता की झलक दिखाता है? 211अच्छा! 212ग्रुप नं.2

53Therefore, to become avyakt means to have all these positive feelings.

213अचल-अडोल बनने के लिये रोज़ तीन बिन्दियों का तिलक लगाओ 214अपने को त्रिकालदर्शी अनुभव करते हो? 215संगमयुग पर बाप सभी आत्माओं को त्रिकालदर्शी बनाते हैं। 216क्योंकि संगमयुग है श्रेष्ठ, ऊंचा।

54Only when your feelings are the opposite of these positive feelings do corporeal feelings attract you towards themselves.

217तो जो ऊंचा स्थान होता है वहाँ खड़ा होने से सब कुछ दिखाई देता है। 218तो संगमयुग पर खड़े होने से तीनों ही काल दिखाई देते हैं। 219एक तरफ दुःखधाम का ज्ञान है,दूसरे तरफ सुखधाम का ज्ञान है और वर्तमान काल संगमयुग का भी ज्ञान है।

220तो त्रिकालदर्शी बन गये ना! 221तीनों ही काल का ज्ञान इमर्ज है? 222तीनों ही काल स्मृति में रखो-कल दुःखधाम में थे,आज संगमयुग में हैं और कल सुखधाम में जायेंगे।

55The meaning of corporeal feelings is to be negative, that is, to be the opposite of all these five aspects.

223जो भी कर्म करो वह त्रिकालदर्शी बनकर के करो तो हर कर्म श्रेष्ठ होगा। 224व्यर्थ नहीं होगा, समर्थ होगा! 225समर्थ कर्म का फल समर्थ मिलता है।

56You yourselves know what the opposite of these is; there is no need to speak about it.

226त्रिकालदर्शी बनने से-यह क्यों हुआ, यह क्या हुआ, ‘ऐसा नहीं वैसा होना चाहिए’…-यह सब क्वेश्चन-मार्क खत्म हो जाते हैं। 227नहीं तो बहुत क्वेश्चन उठते हैं। 228‘क्यों’ का क्वेश्चन उठने से व्यर्थ संकल्पों की क्यू लग जाती है और त्रिकालदर्शी बनने से फुलस्टॉप लग जाता है।

229नथिंग न्यु,तो फुल स्टॉप लग गया ना! 230फुलस्टॉप अर्थात् बिन्दी लगाने से बिन्दु रूप सहज याद आ जाता है।

57When your feelings are the opposite of these, you cannot stabilise yourself in the avyakt stage.

231बापदादा सदा कहते हैं कि अमृतवेले सदा तीन बिन्दियों का तिलक लगाओ। 232आप भी बिन्दी,बाप भी बिन्दी और जो हो गया,जो हो रहा है,नथिंग न्यु,तो फुलस्टॉप भी बिन्दी। 233यह तीन बिन्दी का तिलक अर्थात् स्मृति का तिलक। 234मस्तक स्मृति का स्थान है, इसलिए तिलक मस्तक पर ही लगाते हैं।

58They are the special doors for Maya to come through.

235तीन बिन्दियों का तिलक लगाना अर्थात् स्मृति में रखना। 236फिर सारा दिन अचल-अडोल रहेंगे। 237यह ‘क्यूं’ और‘क्या’ही हलचल है। 238तो अचल रहने का साधन है-अमृतवेले तीन बिन्दियों का तिलक लगाओ।

59Check any obstacle that comes, and you’ll find that the reason is that, instead of having loving feelings, you have the opposite feelings.

239यह भूलो नहीं। 240जिस समय कोई बात होती है उस समय फुलस्टॉप लगाओ। 241ऐसे नहीं कि याद था लेकिन उस समय भूल गया।

60Feelings first come in the form of thoughts, then in words and then in actions.

242गाड़ी में यदि समय पर ब्रेक न लगे तो फायदा होगा या नुकसान? 243तो समय पर फुलस्टॉप लगाओ। 244नथिंग न्यु-होना था,हो रहा है। 245और साक्षी होकर के देखकर आगे बढ़ते चलो।

61As are your feelings, so you will see the activity and words of others with that intention, and that is how you will listen to them and come into relationship with them.

246तो त्रिकालदर्शी अर्थात् आदि,मध्य, अन्त-तीनों को जान जैसा समय, वैसा अपने को सदा सेफ रख सको। 247ऐसे नहीं कहो कि-यह समस्या बहुत बड़ी थी ना, छोटी होती तो मैं पास हो जाती लेकिन समस्या बहुत बड़ी थी! 248कितनी भी बड़ी समस्या हो लेकिन आप तो मास्टर सर्वशक्तिवान हो ना! 249तो बड़े हुए ना!

62Feelings can change intentions.

250बड़े के आगे समस्या नहीं है लेकिन खेल है! 251इसको कहा जाता है त्रिकालदर्शी। 252त्रिकालदर्शी आत्मा सदा ही निश्चिंत रहती है क्योंकि उसे निश्चय है कि हमारी विजय हुई ही पड़ी है। 253जब अपने को जिम्मेवार समझते हो तब चिंता होती है और बाप को जिम्मेवार समझते हो तो निश्चिंत हो जाते हो।

63If, at any time, you have feelings of jealousy of any soul, that is, if you do not have the feeling of that one belonging to you, you will find that through every activity and word of that soul a misunderstanding will arise.

254कई बार कहते हैं ना-क्या करें,जिम्मेवारी है ना, निभाना पड़ता है। 255लेकिन ट्रस्टी बन निभाओ। 256गृहस्थी बनकर निभा नहीं सकेंगे। 257ट्रस्टी बनकर के निभाने से सहज भी होगा और सफल भी होंगे।

64That one may be doing something good, but, because your feelings are not good, you will only see a bad intention in that one's activity and words.

258तो सब चिंता छोड़कर जाना। 259जिनके पास थोड़ी-बहुत हो,तो छोड़कर जाना, साथ नहीं ले जाना।

65Feelings change intentions, and so check whether you have good wishes and pure feelings for all souls.

260वैसे तीर्थ पर कुछ छोड़कर आते हैं ना। 261तो यह भी महान तीर्थ है ना! 262तो सदा के लिए निश्चिंत, निश्चयबुद्धि। 263समझा?

66Because there is a difference in understanding their intention, this misunderstanding becomes a door for Maya.

264किचड़ा साथ में नहीं रखा जाता है। 265माताओं को आदत होती है-पुरानी चीज़ भी होगी तो गांठ बांधकर रख देंगी! 266तो यह भी गांठ बाँधकर नहीं जाना। 267मातायें गठरी बांधती हैं, पाण्डव जेब में रखते हैं।

67In order to create the avyakt stage, especially check your wishes and feelings and you will easily have special experiences through the avyakt stage.

268तो इसे छोड़कर निश्चिंत अर्थात् सदा अचल-अडोल स्थिति में रहना। 269अच्छा! 270ग्रुप नं.3

68Many children remain beyond impure wishes and impure feelings.

271सफलतामूर्त बनने का साधन है-जीवनमुक्त स्थिति 272ब्राह्मण जीवन अर्थात् सदा जीवन-मुक्त स्थिति वाले,सर्व बंधनों से मुक्त। 273पहला बंधन है अपने देहभान का बंधन। 274ब्राह्मण जीवन में देह का बंधन, संबंध का बंधन, साधनों का बंधन-सब खत्म हो गया ना!

69However, one is pure wishes and pure feelings, the next is wasteful wishes and wasteful feelings and the third is ordinary wishes and ordinary feelings, because to be a Brahmin means to have the feeling of doing service.

275मोटा धागा खत्म हो गया। 276महीन धागा रह तो नहीं गया? 277अभी सम्बन्ध है लेकिन बंधन नहीं। 278बंधन अपने वश में करता है और संबंध स्नेह का सहयोग देता है।

70However, even having ordinary wishes and ordinary feelings, that is the service for Brahmins, because to be a Brahmin means to do service through feelings.

279लेकिन शुद्ध संबंध। 280देह के सम्बन्धियों का देह के नाते से सम्बन्ध नहीं लेकिन आत्मिक संबंध।

71So, do not cause any loss even through ordinary feelings and ordinary wishes.

281तो बंधन में हो या सम्बन्ध में? 282अगर वश होते हो,परवश हो जाते हो तो बंधन है और मुक्त रहते हो तो संबंध है!

72It means that you are not able to carry out the duty of Brahmin life, which is to do service through feelings and good wishes.

283कैसे रहते हो? 284थोड़ा-थोड़ा आकर्षित होते हो? 285ब्राह्मण अर्थात् जीवन-मुक्त। 286तो चेक करो-कोई भी कर्म मुक्त होकर के करते हैं?

73This is why you will not be able to experience the special blessing of accumulating the fruit of service in Brahmin life.

287क्योंकि कर्म के बिना तो रह नहीं सकते हैं, जब कर्मेन्द्रियों का आधार है तो कर्म तो करना ही है, लेकिन कर्म-बन्धन नहीं, कर्म-सम्बन्ध। 288जीवन-मुक्त अवस्था अर्थात् सफलता भी ज्यादा और कर्म का बोझ भी नहीं। 289जो मुक्त हैं वो सदा ही सफलतामूर्त हैं।

290जीवन-मुक्त आत्मा सदा फलक से कहेगी कि सफलता जन्मसिद्ध अधिकार है। 291जो बंधन में होगा वो सदा सोचता रहेगा कि सफलता होगी या नहीं, यह करें या नहीं करें, ठीक होगा या नहीं होगा? 292लेकिन ब्राह्मण आत्माओं की सफलता निश्चित है,विजय निश्चित है।

293ऐसे नहीं समझना कि भविष्य में जीवन-मुक्त होंगे! 294अभी जीवन-मुक्त होना है।

74So, transform ordinary feelings and ordinary wishes into elevated feelings and elevated wishes.

295इस समय ही जीवनबंध और जीवन-मुक्त का ज्ञान है! 296सतयुग में यह ज्ञान नहीं होगा! 297मजा है तो इस समय का है!

75If you check, you will be able to change and easily become avyakt angels like the father.

298जीवनबंध का भी अनुभव किया और जीवन-मुक्त का भी अनुभव कर रहे हो!

76So do you understand how you have to celebrate the avyakt year?

299सदा जीवन-मुक्त रहने का सहज साधन है-’मैं’और ‘मेरा बाबा’! 300क्योंकि मेरे-मेरे का ही बंधन है। 301मेरा बाबा हो गया तो सब मेरा खत्म। 302जब‘एक मेरा’में ‘सब मेरा-मेरा’ समाप्त हो गया, तो बंधन-मुक्त हो गये।

77Having pure feelings is a very elevated way to do service through the mind, and having elevated wishes is an easy way to be loved by those who come into connection and relationship with you.

303तो यह सहज साधन आता है ना! 304कर्म के पहले चेक करो कि बंधन में फँस के तो कर्म नहीं कर रहे हैं? 305दुनिया वाले तो बहुत कठिन तप करते हैं मुक्ति प्राप्त करने को। 306और आपको सहज मिला ना!

78Those who always have elevated wishes for everyone can become close beads of the rosary, because the rosary is a sign of closeness and elevated feelings for those with whom you come into contact and relationship.

307‘मेरा बाबा’ कहा और बंधन खत्म। 308तो जो सहज होता है, उसको सदा अपनाया जाता है। 309जो मुश्किल होता है उसे सदा नहीं कर सकते हैं। 310तो सदा सहज है या कभी-कभी थोड़ा मुश्किल लगता है?

79No matter with what intention someone speaks or moves along, you must constantly have elevated feelings for that one.

311तो यही याद रखना कि हम ब्राह्मण जीवन-मुक्त आत्मा हैं। 312सहजयोगी अर्थात् सफलतामूर्त। 313अच्छा! 314ग्रुप नं.4

80Only those who are victorious in this have a right to be threaded in the rosary of victory.

315स्वमान में रहो तो सर्व हद की इच्छायें समा जायेंगी 316स्वयं को श्रेष्ठ स्वमानधारी आत्मा अनुभव करते हो? 317जितना स्वमान में स्थित होते हो,तो स्वमान,देहभान को भुला देता है। 318आधा कल्प देहभान में रहे और देह-भान के कारण अल्पकाल के मान प्राप्त करने के भिखार रहे।

81Even if someone cannot give lectures on the field of service or cannot make plans, however if that one is able to have good wishes for each one he or she comes into connection and relationship with, then these good wishes will be accumulated in the account of subtle service through feelings, because those who have good wishes constantly give happiness to others and receive happiness.

319अभी बाप ने आकर स्वमानधारी बना दिया।

82So, this too is service.

320स्वमान में स्थित रहते हो या कभी हद के मान की इच्छा रखते हो?

83This feeling of service enables you to claim a right to a number in the front.

321जो स्वमान में रहता उसे हद के मान प्राप्त करने की कभी इच्छा नहीं होती, इच्छा मात्रम् अविद्या हो जाते। 322एक स्वमान में सर्व हद की इच्छायें समा जाती हैं, मांगने की आवश्यकता नहीं रहती। 323क्योंकि यह हद की इच्छायें कभी भी पूर्ण नहीं होती हैं। 324एक हद की इच्छा अनेक इच्छाओं को उत्पन्न करती है, सम्पन्न नहीं करती लेकिन पैदा करती है।

84Therefore, you will become a bead of the rosary.

325स्वमान सर्व इच्छाओं को सहज ही सम्पन्न कर देता है। 326तो जब बाप सदा के लिए स्वमान देता है, तो कभी-कभी क्यों लेवें! 327स्वमानधारी सदा बेफिक्र बादशाह होता है, सर्व प्राप्ति स्वरूप होता है। 328उसे अप्राप्ति की अविद्या होती है।

85Do you understand?

329तो सदा स्वमानधारी आत्मा हूँ-यह याद रखो। 330स्वमानधारी सदा बाप के दिलतख्तनशीन होता है क्योंकि बेफिक्र बादशाह है!

86Do not ever think that you never have a chance to give lectures or that you do not have a chance to do important service.

331बादशाह का जीवन कितना श्रेष्ठ है! 332दुनिया वालों के जीवन में कितनी फिक्र रहती हैं-उठेंगे तो भी फिक्र, सोयेंगे तो भी फिक्र। 333और आप सदा बेफिक्र हो। 334पाण्डवों को फिक्र रहता है?

87Those who take this golden chance of doing service through feelings will come into the line of chancellors, that is, they will become special souls.

335कल व्यापार ठीक होगा या नहीं,कल देश में शान्ति होगी या अशान्ति…-यह फिक्र रहता है? 336कल बच्चे अच्छी तरह से सम्भाल सकेंगे या नहीं-यह फिक्र माताओं को रहता है? 337दुनिया में कुछ भी हो लेविन अशान्ति के वायुमण्डल में आप तो शान्तस्वरूप आत्मायें हो,औरों को भी शान्ति देने वाले।

338या अशान्ति होगी तो आप भी घबरा जायेंगे? 339आपके घर के बाहर बहुत हंगामा हो रहा हो, तो आप उस समय क्या करते हो?

88Therefore, in this year, pay special attention to imbibing good wishes and elevated feelings.

340याद में बैठ जाते हो ना! 341बाप को याद करके शान्ति लेकर औरों को देना-यह सेवा करो।

89You can transform bad wishes and impure feelings with your good wishes and pure feelings.

342क्योंकि जो अच्छी चीज अपने पास है और दूसरों को उसकी आवश्यकता है,तो देनी चाहिए ना! 343तो अशान्ति के समय पर मास्टर शान्ति-दाता बन औरों को भी शान्ति दो, घबराओ नहीं। 344क्योंकि जानते हो कि-जो हो रहा है वो भी अच्छा और जो होना है वह और अच्छा!

345विकारों के वशीभूत मनुष्य तो लड़ते ही रहेंगे। 346उनका काम ही यह है। 347लेकिन आपका काम है-ऐसी आत्माओं को शान्ति देना। 348क्योंकि विश्व कल्याणकारी हो ना!

90You were told that a rose can imbibe fragrance from the bad odour of manure and become a fragrant rose.

349विश्व-कल्याणकारी आत्मायें सदा मास्टर दाता बन देती रहती हैं। 350तो सभी शक्ति-रूप हो ना! 351मातायें चार दीवारी में रहने वाली अबलायें हीं हो, शक्तियाँ हो। 352तो शक्ति सदा वरदानी होगी और पाण्डव भी सदा महावीर।

91So can you elevated souls not transform impure, wasteful and ordinary feelings and wishes into elevated feelings and wishes?

353महावीर की सदा विजय है।

92Or would you say: "What can I do?

354कभी हार नहीं खा सकते। 355अच्छा! 356ग्रुप नं.5 357सम्पन्न बनने का सहज साधन - सदा बाप के साथ रहो

93This one has impure feelings; this one has very bad intentions towards me; what can I do?"

358(डबल विदेशी बच्चों से)सदा अपने को इस सृष्टि-ड्रामा की बेहद स्टेज पर पार्ट बजाने वाले हीरो एक्टर समझते हो? 359ऊंचे ते ऊंचे बाप के साथ पार्ट बजाने वाले ऊंचे ते ऊंचे एक्टर हो गये ना। 360बाप के साथ पार्ट बजा रहे हो, इसलिए विशेष पार्टधारी बन गये। 361हीरो एक्टर के ऊपर सभी की नज़र होती है।

94You will not say this, will you?

362तो सारे विश्व के आत्माओं की नजर अभी आप सबके तरफ है! 363तो एक नशा यह है कि हम बाप के साथ पार्ट बजाने वाले हैं और दूसरा नशा है कि सारे विश्व की नजर हम श्रेष्ठ आत्माओं के ऊपर है! 364तो डबल नशा है। 365डबल खुशी है-एक श्रेष्ठ आत्मा बनने की खुशी, दूसरी बाप से मिलने की!

95Your title is, "A world transformer".

366डबल हीरो हो-एक हीरे तुल्य जीवन बनाई है और दूसरा विशेष पार्टधारी हो! 367ऐसा कभी सोचा था कि इतना विशेष पार्ट बजाने वाली आत्मा हूँ? 368सोचा नहीं था लेकिन सेकेण्ड में बन गये।

96Since you can change tamoguni matter into satoguni matter, can you not become the ones who transform the feelings and intentions of souls?

369सेकेण्ड का सौदा है ना! 370सहज प्राप्त किया या मेहनत लगी? 371फॉरेन कल्चर से ब्राह्मण कल्चर बदलने में मेहनत नहीं लगी? 372कितनी बार ब्राह्मण कल्चर में रहे हो?

97Then this aim will easily and automatically bring about the qualifications for becoming an avyakt angel, equal to the father.

373अनेक बार के संस्कार याद आते हैं?

98Do you understand how you have to celebrate?

374या इमर्ज करने में मेहनत लगती है?

99To celebrate means to become.

375यह समटाइम (Sometime;कभी-कभी) कब तक रहेगा?

100This is the principle of the language of Brahmins.

376अगर अभी विनाश हो जाए तो एवररेडी हुए? 377अच्छा!

101Do you have to become or just celebrate?

378भारत वाले तैयार हो? 379कल विनाश हो जाए-इतने सम्पन्न बने हो?

102There is a special need for Brahmins to make this effort.

380एवररेडी बनना ही सेफ्टी का साधन है। 381अगर समय मिलता है तो संगमयुग की मौज मनाओ लेकिन रहो एवररेडी।

103And this service will bring the beads of the rosary close and reveal the rosary.

382क्योंकि फाइनल विनाश की डेट कभी भी पहले मालूम नहीं पड़ेगी,अचानक होना है। 383एवररेडी नहीं होंगे तो धोखा हो जायेगा।

104The beads of the rosary are becoming ready individually, but a rosary means closeness between each bead.

384इसलिए एवररेडी बनो। 385सदा ये याद रखो कि हम और बाप सदा साथ हैं।

105So these two aspects are the method to bring about closeness between each bead.

386तो जैसे बाप सम्पन्न है वैसे साथ रहने वाले भी सम्पन्न हो जायेंगे।

106This is known as becoming worthy, that is, those who give the proof of that.

387जब साथ का अनुभव करेंगे तो निरन्तर योगी सहज बन जायेंगे। 388सदा साथ हैं, साथ रहेंगे और स्वीट होम में साथ चलेंगे। 389जो कम्पैनियन होंगे वे साथ चलेंगे और बराती होंगे,देखने वाले होंगे तो पीछे-पीछे चलेंगे। 390समान बनने वाले ही साथ चलेंगे।

107Achcha.

391तो यह प्लैन बनाओ कि समान बनना ही है और साथ चलना ही है। 392अच्छा! 393(डबल विदेशी बच्चों प्रति)सबको बापदादा की तरफ से नये वर्ष की मुबारक और याद,प्यार देना। 394बापदादा देख रहे हैं-सभी अपने को बाप समान बनाने के उमंग-उत्साह में उड़ रहे हैं।

108To all the worthy children everywhere who give the proof of love, to the souls who constantly have zeal and enthusiasm for becoming like the father, to the victorious souls who constantly have elevated feelings and elevated wishes for all souls, to the world­ transformer souls who transform every soul with their elevated feelings, to the victorious jewels who are constantly victorious and are coming close in the rosary of victory, together with greetings for the Avyakt Year, BapDada's love, remembrance and namaste.

395तो उड़ रहे हैं और सदा उड़ते रहेंगे।

109* * * O MS H A N T I * * *