गुरुवार 8 दिसंबर 2016 की दैनिक मुरली
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008/12/16 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन 1``मीठे बच्चे - तुम जो भी सुनते हो उस पर विचार सागर मंथन करो तो बुद्धि में सारा दिन यह ज्ञान टपकता रहेगा'' 2प्रश्न:- यहाँ का कौन सा हुनर नई दुनिया की स्थापना में काम आयेगा?
3उत्तर:- यहाँ जो साइंस का हुनर है - जिससे एरोप्लेन, मकान आदि बनाते हैं, यह संस्कार वहाँ भी साथ ले जायेंगे। 4यहाँ भल ज्ञान न लें लेकिन वहाँ यह हुनर साथ जायेगा। 5तुम अभी सतयुग से लेकर कलियुग अन्त तक की हिस्ट्री-जॉग्राफी जानते हो।
6तुम्हें पता है कि इन आंखों से जो कुछ पुरानी दुनिया का देखते हैं, वह सब अभी खत्म होना है। 7गीत:- तूने रात गवाई सो के… 8ओम् शान्ति।
9बाप बैठ बच्चों को समझाते हैं।
10हूबहू जैसे 5 हजार वर्ष पहले समझाया था, वैसे फिर भी समझा रहे हैं कि पुरानी दुनिया का विनाश और नई दुनिया सतयुग की स्थापना कैसे होती है। 11अभी है पुरानी दुनिया और नई दुनिया का संगमयुग। 12बाप ने समझाया है नई दुनिया सतयुग से लेकर अब कलियुग अन्त तक क्या-क्या हो रहा है!
13क्या-क्या सामग्री है! 14क्या-क्या देखते हो! 15यज्ञ, तप, दान-पुण्य आदि क्या करते हैं।
16यह जो कुछ देखने में आता है यह कुछ भी रहना नहीं है। 17पुरानी कोई भी चीज़ रहने वाली नहीं है। 18जैसे पुराना मकान तोड़ते हैं तो उनमें जो मार्बल के पत्थर आदि अच्छी चीज़ें होती हैं, वह रख देते हैं।
19बाकी तोड़ फोड़ देते हैं।
20तुम बच्चे जानते हो यह पुराना सब खत्म होना है। 21बाकी यह जो साइंस का हुनर है, वह कायम रहेगा। 22तुम सब जानते हो कि यह सृष्टि चक्र कैसे फिरता है।
23सतयुग से कलियुग अन्त तक क्या-क्या होता है। 24यह साइंस भी एक विद्या है, उनसे एरोप्लेन, बिजली आदि सब कुछ बने हैं। 25पहले यह नहीं था, अब बना है।
26दुनिया तो चलती रहती है।
27भारत है अविनाशी खण्ड, प्रलय तो होती नहीं। 28यह साइंस जिससे अभी इतना सुख मिलता है, वह हुनर भी वहाँ रहता है। 29सीखी हुई चीज़ें दूसरे जन्म में भी काम आती हैं।
30कुछ न कुछ रहता है। 31यहाँ भी अर्थक्वेक जहाँ होती है तो फिर जल्दी में सारा नया बना देते हैं। 32वहाँ नई दुनिया में विमान आदि बनाने वाले भी होंगे।
33सृष्टि तो चलती ही रहती है। 34यह बनाने वाले फिर भी आयेंगे। 35अन्त मती सो गति होगी।
36भल उन्हों में यह ज्ञान नहीं है परन्तु वह आयेंगे जरूर और आकर नई-नई चीज़ें बनायेंगे। 37यह ख्यालात अभी तुम्हारी बुद्धि में हैं। 38यह सब खत्म हो जायेंगे, बाकी सिर्फ भारत खण्ड ही रहेगा।
39तुम वारियर्स हो। 40अपने लिए योगबल से स्वराज्य की स्थापना कर रहे हो। 41वहाँ सब कुछ नया होगा।
42तत्व भी जो तमोप्रधान हैं वह सतोप्रधान बन जायेंगे। 43तुम भी नई पवित्र दुनिया में जाने के लिए अब पवित्र बन रहे हो। 44तुम जानते हो हम बच्चे यह सीखकर बहुत होशियार हो जायेंगे।
45बहुत मीठे फूल बन जायेंगे। 46तुम कोई को भी यह बातें सुनाते हो तो वह बहुत खुश होते हैं। 47जो जितना अच्छी रीति समझाते हैं, उन पर बहुत खुश होते हैं।
48कहते हैं यह समझाते तो बहुत अच्छा हैं, परन्तु जब ओपीनियन लिखने लिए कहते हैं तो कहते हैं विचार करेंगे। 49इतने में हम कैसे लिख दें। 50एक बार सुनने से बाप से योग कैसे रखें, यह सीख नहीं सकते।
51अच्छा तो लगता है।
52तुम यह जरूर समझाते होंगे कि अब पुरानी दुनिया का विनाश होना है। 53पापों का बोझा सिर पर बहुत है। 54यह पतित दुनिया है, पाप बहुत किये हुए हैं।
55रावणराज्य में सब पतित हैं तब तो पतित-पावन बाप को बुलाते हैं। 56यह ज्ञान अभी तुमको है। 57सतयुग में यह कोई नहीं जानते कि इनके बाद त्रेता आयेगा।
58वहाँ तो प्रालब्ध भोगते हैं।
59अब तुम बच्चे कितने बुद्धिवान बनते हो, जानते हो हमको रूहानी बाप पढ़ाते हैं। 60बाबा है वर्ल्ड आलमाइटी अथॉरिटी, वह है शास्त्रों की अथॉरिटी। 61उन शास्त्र पढ़ने वालों को आलमाइटी नहीं कहा जाता है।
62यह सब भक्ति मार्ग के शास्त्र हैं। 63बाकी यह जो बाबा तुमको पढ़ा रहे हैं, यह हैं नई दुनिया के लिए नई बातें। 64तो तुम बच्चों को बहुत खुशी होनी चाहिए।
65बुद्धि में सारा दिन यह ज्ञान टपकता रहे। 66स्टूडेन्ट जो पढ़ते हैं उसको फिर रिवाइज़ भी करते हैं, जिसको ही विचार सागर मंथन कहा जाता है। 67तुम यह समझते हो कि बाबा हमको बेहद की पढ़ाई अथवा सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का सारा राज़ बैठ समझाते हैं, जिसको तुम्हारे सिवाए कोई समझ नहीं सकते इसलिए तुमको बहुत खुशी होनी चाहिए।
68तुम बहुत बड़े आदमी हो।
69तुमको पढ़ाने वाला भी ऊंचे ते ऊंचा बाप है। 70तो तुमको सदैव खुशी का पारा चढ़ा रहना चाहिए। 71सदैव बुद्धि में यह बातें रिवाइज करो कि पहले-पहले हम पावन थे।
72फिर 84 जन्म ले पतित बन गये, अब ड्रामा प्लैन अनुसार बाबा पावन बना रहे हैं। 73साधू-सन्त सब कहते हैं कि हम रचता बाप और रचना के आदि मध्य अन्त को नहीं जानते। 74तुम जानते हो क्राइस्ट फिर अपने समय पर आयेगा।
75क्रिश्चियन का जैसे सारी पृथ्वी पर राज्य था, अब सब अलग-अलग हो गये हैं, आपस में लड़ झगड़ रहे हैं। 76अब कहते हैं एक राज्य एक भाषा हो। 77मतभेद न हो, यह कैसे हो सकता है।
78अब तो आपस में लड़ झगड़ कर और ही पक्के हो गये हैं। 79अभी यह तो हो नहीं सकता जो सबकी एक देवताई मत हो जाए। 80भल कहते हैं रामराज्य चाहिए परन्तु समझते कुछ नहीं हैं।
81तुमको भी पहले कुछ पता नहीं था। 82अभी तुम ब्राह्मण बने हो, तुम जानते हो कि हमारा युग ही अलग है। 83इस संगमयुग पर ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण धर्म की स्थापना होती है।
84तुम ब्राह्मण हो राजऋषि। 85तुम पवित्र भी हो और शिवबाबा से राज्य प्राप्त करते हो। 86वह योग रखते हैं ब्रह्म से, एक बाप से नहीं रखते।
87कोई किससे रखते, कोई किससे। 88कोई किसका पुजारी, तो कोई किसका। 89यह किसको पता ही नहीं कि ऊंचे ते ऊंचा कौन है इसलिए बाप ने कहा है यह सब हैं आसुरी सम्प्रदाय, तुच्छ बुद्धि।
90रावण के मुरीद हैं। 91तुम अभी शिवबाबा के बने हो। 92तुमको बाप से वर्सा मिलता है नई दुनिया सतयुग का।
93बाप कहते हैं - हे आत्मायें तुमको अब तमोप्रधान से सतोप्रधान जरूर बनना है इसलिए सिर्फ मुझे याद करो। 94कितनी सहज बात है। 95गीता में कृष्ण का नाम डाल दिया है फिर उनको द्वापर युग में ले गये हैं।
96भूल तो भारी की है परन्तु यह बातें उनकी ही बुद्धि में बैठेंगी जो स्थाई यहाँ आते रहेंगे। 97मेले में आते तो ढेर हैं उनमें से देखो सैपक्रलिंग कैसे लगता है। 98अनेक धर्म वाले आते हैं, उसमें भी जास्ती हिन्दू धर्म वाले आते हैं, जो देवी-देवताओं के पुजारी होंगे।
99आपेही पूज्य आपेही पुजारी…इसका भी अर्थ समझाना पड़ता है। 100मेले प्रदर्शनी में इतना अधिक समझा नहीं सकते। 101कोई तो 4-5 मास आते हैं, समझते हैं।
102कोई थोड़ा अच्छी रीति समझते हैं। 103तुम जितने जास्ती प्रदर्शनी मेले आदि करेंगे उतने बहुत आयेंगे। 104समझेंगे ज्ञान बड़ा अच्छा है, जाकर समझें।
105सेन्टर पर इतने चित्र नहीं होते हैं। 106प्रदर्शनी में बहुत चित्र होते हैं। 107तुम समझाते हो - तो अच्छा भी उन्हों को लगता है परन्तु बाहर जाने से माया का वायुमण्डल है, अपने धन्धेधोरी में लग जाते हैं।
108अभी यह पुरानी दुनिया खत्म हो नई बनेगी और बाबा हमारे लिए स्वर्ग की बादशाही स्थापन कर रहे हैं। 109नई दुनिया में हम जाकर नये महल बनायेंगे। 110ऐसे नहीं नीचे से महल निकल आयेंगे।
111पहली-पहली मुख्य यह बात निश्चय करनी है कि वह हमारा बाप भी है, टीचर भी है। 112मनुष्य सृष्टि का बीजरूप है। 113उनमें सारी नॉलेज है, तब तो महिमा गाते हैं ज्ञान का सागर…वह बीज जड़ होता है।
114वह बोल न सके। 115यह चैतन्य है। 116बाप ने तुमको सारी नॉलेज दी है जो औरों को अच्छी रीति समझानी है।
117मेले वा प्रदर्शनी में ढेर आते हैं। 118निकलते कोटों में कोई हैं। 1197-8 दिन आकर फिर गुम हो जाते हैं।
120ऐसे करते-करते कोई न कोई निकल आयेगा। 121समय थोड़ा है, विनाश सामने खड़ा है। 122कर्मातीत अवस्था को पाना है जरूर। 123पतित से पावन होने के लिए याद बहुत जरूरी है।
0 08/12/16 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban
124अपनी सम्भाल करनी है। 125मुझे सतोप्रधान बनना है - यह चिंता लगी रहे क्योंकि सिर पर जन्म-जन्मान्तर का बोझा है। 126रावण राज्य होने से सीढ़ी उतरते ही आये हो।
127अब योगबल से चढ़ना है। 128रात दिन यही फिकरात रहे कि मुझे सतोप्रधान बनना है और सृष्टि चक्र की नॉलेज भी बुद्धि में चाहिए। 129स्कूल में भी यह रहता है कि हम फलानी-फलानी सबजेक्ट में पास हो जायें, इसमें मुख्य सब्जेक्ट है याद की।
130सृष्टि के आदि मध्य अन्त का भी ज्ञान चाहिए। 131तुम्हारी बुद्धि में सारा सीढ़ी का ज्ञान है कि अब हम बाबा की याद से सतयुगी सूर्यवंशी घराने की सीढ़ी चढ़ते हैं। 13284 जन्म लेते सीढ़ी उतरते आये, अब फट से चढ़ जाना है।
133गायन है ना - सेकेण्ड में जीवनमुक्ति। 134इस जन्म में ही बाप से जीवनमुक्ति का वर्सा लेकर सो देवता बन जायेंगे। 135बाबा कहते हैं बच्चे तुम ही सूर्यवंशी थे, फिर चन्द्रवंशी, वैश्य वंशी बने।
136अभी तुमको ब्राह्मण बनाता हूँ। 137ब्राह्मण हैं चोटी। 138ऊंचे ते ऊंचा परमपिता परमात्मा आकर ब्राह्मण, देवता, क्षत्रिय तीन धर्मों की स्थापना करते हैं।
139तुम जानते हो अभी हम ब्राह्मण वर्ण में हैं। 140फिर देवता वर्ण में आयेंगे। 141बच्चों को रोज़ कितना बुद्धि में ज्ञान भरते रहते हैं, जिसको धारण करना है।
142नहीं तो आप समान कैसे बनायेंगे। 143सूर्यवंशी घराने में बहुत थोड़े आयेंगे, जो अच्छी रीति पढ़ेंगे और पढ़ायेंगे। 144इस समय तुम्हारी गत मत दुनिया से बिल्कुल न्यारी है।
145जैसे कहते हैं ईश्वर की गत मत न्यारी है। 146तुम्हारे सिवाए कोई भी बाप से योग लगाते नहीं हैं। 147प्रदर्शनी में आते हैं फिर चले जाते हैं।
148वह बन जाते हैं प्रजा। 149बाकी जो अच्छी रीति पढ़ेंगे, पढ़ायेंगे वह अच्छा पद पा सकते हैं। 150फिर तुम्हारी यह मिशनरी भी जोर भरती जायेगी।
151बहुतों को कशिश होगी, आते रहेंगे। 152नई बात को फैलने में समय तो लगता है ना। 153चित्र भी फट से बहुत बन जायेंगे।
154दिन-प्रतिदिन मनुष्य भी वृद्धि को पाते जाते हैं। 155तुम जानते हो यह जो बाम्ब्स आदि की लड़ाई लगेगी फिर क्या हाल होगा। 156दिन-प्रतिदिन दुःख अपार होता जायेगा।
157आखरीन यह दुःख की दुनिया खत्म होगी। 158टोटल विनाश नहीं होगा।
159शास्त्रों में गायन है यह भारत अविनाशी खण्ड है। 160तुम जानते हो हमारा यादगार हूबहू आबू में है। 161उस पर समझाना चाहिए, वह है जड़ यादगार।
162यहाँ प्रैक्टिकल स्थापना हो रही है। 163राजयोग सीख रहे हो वैकुण्ठ के लिए। 164देलवाड़ा मन्दिर कितना अच्छा बना हुआ है।
165हम भी यहाँ आकर बैठे हैं।
166पहले से ही हमारा यादगार बना हुआ है। 167तुम स्वर्ग की राजाई पाने के लिए यहाँ बैठे हो। 168कहते हैं बाबा हम आपसे राज्य लेकर ही छोड़ेंगे।
169जो अच्छी तरह सारा दिन सिमरण करते और कराते होंगे, खुशी भी उन्हों को रहेगी। 170स्टूडेन्ट खुद समझते हैं - हम पास होंगे वा नहीं। 171लाखों करोड़ों में से स्कालरशिप कितने थोड़ों को मिलती है।
172मुख्य हैं 8 सोने के फिर 108 चांदी के, बाकी 16000 तॉम्बे के। 173जैसे देखो पोप मेडल्स देते थे तो सबको सोने का थोड़ेही देंगे। 174कोई को सोने का, कोई को चांदी का।
175माला भी ऐसे बनती है।
176तुम चाहते हो गोल्डन प्राइज लेवें। 177चांदी की लेने से चन्द्रवंशी में आ जायेंगे। 178बाबा कहते हैं मुझे याद करो तो विकर्म विनाश होंगे और कोई उपाय ही नहीं है।
179यही फुरना रखो पास होने का। 180लड़ाई का थोड़ा जास्ती हंगामा होगा फिर जोर से पुरूषार्थ करने लग पड़ेंगे। 181इम्तहान के टाइम स्टूडेन्ट भी गैलप करने पुरूषार्थ में लग जाते हैं।
182यह बेहद का स्कूल है। 183प्रदर्शनी पर खूब प्रैक्टिस करते रहो। 184प्रोजेक्टर से इतने प्रभावित नहीं होते हैं, जितना प्रदर्शनी देख वन्डर खाते हैं।
185अच्छा।
186मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। 187रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते। 188धारणा के लिए मुख्य सार:-
1891) पुरानी दुनिया का विनाश हो उसके पहले अपनी कर्मातीत अवस्था बनानी है, याद में रह सतोप्रधान बनना है। 1902) सदा यही खुशी रहे कि हमें पढ़ाने वाला स्वयं ऊंचे ते ऊंचा बाप है। 191पढ़ाई अच्छी रीति पढ़नी और पढ़ानी है।
192सुनकर विचार सागर मंथन करना है। 193वरदान:- मैंपन के बोझ को समाप्त कर प्रत्यक्षफल का अनुभव करने वाले बालक सो मालिक भव 194जब किसी भी प्रकार का मैं पन आता है तो बोझ सिर पर आ जाता है।
195लेकिन जब बाप आफर कर रहे हैं कि सब बोझ मुझे दे दो आप सिर्फ नाचों, उड़ो…फिर यह क्वेश्चन क्यों - कि सर्विस कैसे होगी, भाषण कैसे करेंगे-आप सिर्फ निमित्त समझकर कनेक्शन पावर हाउस से जोड़कर बैठ जाओ, दिलशिकस्त नहीं बनो तो बापदादा सब कुछ स्वतः करा देंगे। 196बालक सो मालिक समझकर श्रेष्ठ स्टेज पर स्थित रहो तो प्रत्यक्ष फल की अनुभूति करते रहेंगे। 197स्लोगन:- ज्ञान दान के साथ-साथ गुणदान करो तो सफलता मिलती रहेगी।