शुक्रवार 24 फ़रवरी 2017 की दैनिक मुरली
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024/02/17 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन
1“मीठे बच्चे - एक बाप ही है जिसकी अपरमअपार महिमा है, बाप जैसी महिमा और किसी की भी हो नहीं सकती''
2प्रश्न:- तुम बच्चों को इस पढ़ाई का बहुत-बहुत कदर होना चाहिए - क्यों?
3उत्तर:- क्योंकि सारे कल्प में एक ही बार बाप परमधाम से पढ़ाने के लिए आते हैं।
4मनुष्य पढ़ने के लिए भारत से विदेश में जाते, यह कोई बड़ी बात नहीं।
5यहाँ तो पढ़ाने वाला कितनी दूर से आता है।
6तो बच्चों को पढ़ाई का बहुत कदर होना चाहिए।
7थोड़ी दिक्कत भी हो तो हर्जा नहीं।
8तुम्हारे स्कूल गली-गली में बनने चाहिए, नहीं तो इतने सब पढ़ेंगे कैसे!
9बाबा का परिचय तो सबको मिलना है जरूर।
10ओम् शान्ति।
11मीठे-मीठे बच्चे कहते हैं यह कौन है?
12यह कोई साधू-सन्यासी मनुष्य तो नहीं है।
13यह तो और चीज़ है।
14मनुष्य को तो झट पहचान लें फलाना साधू सन्यासी है, नाम लेकर कहेंगे - फलाना महात्मा है।
15यह सिर्फ बच्चे जानते हैं।
16बच्चा कहा जाता है आत्मा को।
17आत्मा ही सब जानती है, शरीर नहीं।
18आत्मा ही कहती है यह फलाना है।
19आरगन्स द्वारा जानती है।
20अगर आत्मा न हो तो यह ऑखे काम न कर सकें।
21सब कुछ आत्मा ही जानती है।
22अभी तुम बच्चों को आत्म-अभिमानी बनाया जाता है।
23आत्मा कहती है इन कर्मेन्द्रियों से फलाना कर्तव्य करता हूँ।
24वास्तव में आत्मा को मेल कहा जायेगा, फीमेल नहीं।
25मेल है क्योंकि हम सब भाई-भाई हैं।
26अभी तुम नई बातें सुनते हो।
27यह कौन आया?
28उनका कोई अपना मनुष्य का रूप नहीं है।
29तुम जानते हो बेहद का बाप है शिवबाबा, जो इनके द्वारा समझाते हैं।
30ऐसे नहीं फलाना सन्यासी है, उनकी आत्मा बोलती है।
31नहीं, मनुष्यों का सारा नाम रूप में अटेन्शन जाता है।
32तुम्हारी बुद्धि समझती है - यह हमारा बेहद का बाप है।
33वह शरीर द्वारा हमको अपना वर्सा देते हैं।
34राजयोग सिखलाते हैं।
35यह है सबका बाप।
36सर्व का पतित-पावन, सिर्फ मनुष्यों का नहीं, 5 तत्वों का भी है।
37सर्व की सद्गति करने वाला है ऊंचे ते ऊंचा बाप।
38सृष्टि में महिमा करने लायक है तो एक बाप ही है, दूसरा न कोई।
39न ब्रह्मा, विष्णु, शंकर की महिमा कर सकते हैं।
40उनका बर्थ डे मनाकर क्या करेंगे!
41लक्ष्मी-नारायण जिसका कम्बाइन्ड रूप विष्णु है - अभी वह कहाँ है?
42लक्ष्मी-नारायण पुनर्जन्म लेते-लेते अभी अन्तिम जन्म में हैं।
43फिर शिवबाबा लायक बना रहे हैं।
44सर्व का सद्गति दाता वह एक ही है।
45महिमा भी एक की है।
46उस पतित-पावन बिगर देखो सृष्टि का क्या हाल हो गया है।
47कृष्ण के भक्तों से पूछो राधे कृष्ण कहाँ हैं तो कहेंगे सर्वव्यापी है।
48राधे के पुजारी कहेंगे राधे ही राधे है।
49हनूमान के पुजारी कहेंगे - जिधर देखो हनूमान ही हनूमान।
50परन्तु नहीं।
51बाप अपनी महिमा तो नहीं करेंगे।
52अपने पार्ट से सिद्ध करते हैं और कोई की महिमा गाई नहीं जा सकती।
53लक्ष्मी-नारायण ही राजाई करते हैं, छोटेपन में राधे कृष्ण हैं।
54वह तो है प्रालब्ध।
55तो उनकी महिमा क्या करेंगे।
56ब्रहमा की भी महिमा नहीं, विष्णु की भी कोई महिमा नहीं।
57महिमा तो एक की ही है।
58उनको ही पतित-पावन कहा जाता है।
59अभी तुम बच्चे जानते हो कि विष्णु कौन है!
60विष्णु को स्वदर्शन चक्र सूक्ष्मवतन में क्यों दिखाते हैं?
61मनुष्य को तो जास्ती भुजा होती नहीं।
62सूक्ष्मवतन में भी 4 भुजा दिखाई हैं - प्रवृत्ति मार्ग को सिद्ध करने के लिए।
63बाप कहते हैं मीठे बच्चे - अब तुम जान गये हो 84 जन्म हम कैसे लेते हैं।
64तुम्हारा गृहस्थ व्यवहार पवित्र था।
65मन्दिरों में जाकर गाते हैं ना सर्वगुण सम्पन्न… तुम मात पिता... अब यह महिमा फिर रांग हो जाती है।
66यह महिमा है सिर्फ एक की।
67देवताओं की नहीं है।
68जो कुछ महिमा है सो एक की।
69वह है परमपिता परम आत्मा।
70परम बाप, परम टीचर, परम सतगुरू अकाल कहते हैं ना।
71उनको याद करते हैं, वही अकालमूर्त है।
72शिवबाबा को बैल पर दिखाते हैं।
73वह फिर अकाल तख्त दिखाते हैं, अब यह तो कोई को पता नहीं है शिवबाबा क्या है!
74मन्दिर में जो रखते हैं वह उनका अंश है।
75वह तो है ज्ञान सागर पतित-पावन।
76उनको तो मनुष्य का तन चाहिए ना।
77तुम बच्चे जानते हो कि उनका तख्त यह ब्रह्मा ही है।
78धर्म स्थापकों की क्या महिमा है।
79वह तो सिर्फ आकर धर्म स्थापन करते हैं।
80वह कोई जीवनमुक्ति नहीं देते।
81मनुष्य कहते हैं मोक्ष मिले, फिर आयें ही नहीं।
82वह धर्म स्थापक तो अपने धर्म वालों को नीचे ले आने के निमित्त बनते हैं।
83उनको तो आकर अपना धर्म स्थापन करना है।
84ड्रामा का पार्ट है।
85जो भी आते हैं उनको पुनर्जन्म लेना ही है, यह तो स्थापना बाप करते हैं, वह सबका पतित-पावन है और कोई पावन नहीं बनाते हैं।
86वह तो आते हैं अपना-अपना पार्ट बजाते हैं।
87सतो रजो तमों में आना ही हैं उन्हों ने धर्म स्थापन किया, बस।
88जो शिक्षा दी फिर उसके शास्त्र बनें।
89जो धर्म स्थापन करते हैं उनको फिर पालना जरूर करनी है।
90वापिस कोई जाता नहीं।
91सभी इस समय भिन्न-भिन्न नाम रूप में यहाँ पतित दुनिया में हैं।
92पहले नम्बर में लक्ष्मी-नारायण देखो।
93वह भी अब यहाँ हैं।
94प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण रचते हैं।
95फिर यह जाकर राधे कृष्ण बनेंगे।
96जब तक शिवबाबा न आये तब तक कोई पावन बन न सके।
97बलिहारी उस एक की है।
98उनकी ही महिमा है।
99कहते भी हैं - शिवाए नमः, तुम मात-पिता...सब याद करते हैं।
100सबसे जास्ती महिमा उस बाप की ही है।
101पुकारते भी हैं ओ गॉड फादर, बाप को ही पुकारते हैं।
102यह नाटक बना हुआ है।
103जब सृष्टि पुरानी होती है तब बाप आते हैं।
104मूलवतन, सूक्ष्मवतन, स्थूलवतन तीनों लोकों का ज्ञान देते हैं।
105ज्ञान एक ही बार मिलता है।
106उनको ज्ञान का सागर कहा जाता है।
107बाकी यह सूर्य चांद आदि तो बेहद मांडवे की रोशनी देने वाली बत्तियां हैं।
108वह रात, वह दिन, यह माण्डवे की बत्तियां हैं।
109ऐसे नहीं कि सूर्य देवता नमः कहेंगे।
110नहीं, देवतायें तो ब्रह्मा विष्णु शंकर हैं।
111कोई मूलवतन से आत्मायें यहाँ आती हैं तो सीधा गर्भ में जाती हैं, सूक्ष्मवतन में नहीं जाती।
112सीधा सतयुग में आयेंगी गर्भ महल में।
113वहाँ तो कोई पाप कर्म होते नहीं।
114यहाँ पाप करते हैं तब त्राहि-त्राहि करते हैं।
115धर्मराज हमें बाहर निकालो फिर हम पाप नहीं करेंगे।
116बाहर निकलने से फिर पाप करने लग पड़ते हैं।
117वहाँ की वहाँ रही... यह भी ड्रामा में है।
118भारत का सबसे बड़ा दुश्मन रावण ही है, द्वापर से रावण राज्य शुरू होता है।
119द्वापर में ही देवी देवतायें वाम मार्ग में जाते हैं।
120उन्हों का फिर मन्दिर है।
121पुरी में देखो कैसा मन्दिर बना हुआ है।
122अन्दर जगत नाथ की मूर्ति है और बाहर में देवताओं के बड़े गन्दे चित्र हैं।
123ऐसे-ऐसे चित्र मन्दिर में नहीं होने चाहिए।
124तुम तो अभी श्रीमत पर श्रेष्ठ बनने का पुरूषार्थ कर रहे हो।
125सतयुग आदि में लक्ष्मी-नारायण श्रेष्ठ हैं ना।
126उन्हों ने यह श्रेष्ठ पद कैसे पाया।
127अब तुम फिर से पढ़ रहे हो।
128बाप कहते हैं मैं कल्प-कल्प, कल्प के संगमयुगे फिर से आता हूँ, आता ही रहूँगा।
129फिर से तुम बच्चों को राजयोग सिखलाऊंगा।
130फिर सतो रजो तमों में आना है।
131तुमको 84 जन्म भोगना पड़ता है, जो पहले-पहले आते हैं।
132सब नहीं भोगते।
13384 लाख तो हैं नहीं।
134मनुष्यों को जो कुछ कोई ने कहा, वह सत-सत कहते रहते हैं।
135अगर 84 लाख जन्म हों तो कल्प की आयु बड़ी हो जाए।
136बाप कहते हैं 84 जन्म हैं, सो भी देवी देवताओं के।
137अच्छा फिर इस्लामी, बौद्धी, क्रिश्चियन आदि कितने जन्म लेते होंगे।
138हिसाब है ना।
139आते तो बहुत हैं, टाल टालियां हैं।
140तुम सारे सृष्टि के आदि मध्य अन्त को जानते हो।
141भारत ही पहले नम्बर विश्व का मालिक था, और कोई धर्म था ही नहीं।
142अभी उस देवी-देवता धर्म की टांग है नहीं।
143उनका शास्त्र भी नहीं हैं।
144यह गीता आदि शास्त्र फिर बनेंगे।
145ऐसे नहीं तुम जो सच्ची गीता बनाते हो, वह होगी।
146निकलेगी फिर भी वही गीता।
147भक्ति मार्ग के लिए तो सब चाहिए ना।
148ब्रह्मा द्वारा समझाते हैं बच्चों को।
149अब बरोबर ब्रह्मा द्वारा भगवान की प्राप्ति होती है।
150बाबा कहते हैं यह सब है भक्ति मार्ग।
151मेरी प्राप्ति तब होती है जब मैं यहाँ आता हूँ भारत में।
152भारत ही अविनाशी खण्ड है।
153भारत ही कितना साहूकार था।
154सोमनाथ का मन्दिर कितना बड़ा है।
155सब लूट ले गये।
156बिड़ला के पास बहुत पैसे हैं तो कितने बड़े मन्दिर बनाये हैं।
157बाप कितना अच्छी रीति समझाते हैं, यह और कोई समझा न सके।
158ज्ञान सागर बाप जब बच्चों को समझाते हैं तब बच्चे समझ जाते हैं।
159यह कौन पढ़ाते हैं?
160यह कोई सन्यासी नहीं।
161उनका नाम ही है शिव।
162सब आत्मायें उनके बच्चे हैं।
163उन्हों के शरीरों के नाम बदलते रहते हैं।
164इनका नाम ही है एक।
165कहते हैं मेरा कोई दूसरा नाम नहीं है।
166तुम तो जन्म-मरण में आते हो, देह-अभिमानी भी बनते हो।
167मैं कभी देह-अभिमानी नहीं बनता हूँ।
168बाप है ही फार एवर देही-अभिमानी क्योंकि पुनर्जन्म में नहीं आते हैं।
169शिवरात्रि मनाते हो ना।
170परन्तु रात्रि का अर्थ कुछ भी समझ नहीं सकते हैं।
171कितनी भूलें हैं।
172अभी है रात, फिर दिन होना है।
173अब कल्प का अन्त अर्थात् रात हुई है।
174सतयुग त्रेता है दिन।
175द्वापर कलियुग है रात।
176मुझे आना ही है संगम पर।
177यह है बेहद की रात और दिन।
178भगवानुवाच, समझाते हो यह वेला मुख्य है।
179परन्तु शिवबाबा की वेला नहीं ले सकते।
180वह कब आते हैं, पता थोड़ेही लगता है।
181तो यह है बेहद की दिन और रात, इसको कल्प का संगम कहेंगे।
182बर्थ डे भी अगर मनाते हैं तो एक का।
183शिवबाबा आते हैं फिर चले जाते हैं।
184उनका न जन्म है और न ही मौत है।
185कहेंगे बाबा चला गया, यह खेल है।
186बाप बैठ समझाते हैं, गाते भी हैं रास्ते चलते ब्राह्मण फँस गया।
187इस बाबा को थोड़ेही पता था।
188अचानक प्रवेशता हो गई।
189पहले थोड़ेही मालूम पड़ता है।
190धीरे-धीरे मालूम पड़ता है कि यह बाबा का काम है।
191इस ज्ञान यज्ञ से विनाश ज्वाला प्रज्वलित होनी है।
192बेहद के यज्ञ में बेहद की सामग्री स्वाहा होनी है।
193बेहद बाप का यह यज्ञ है।
194इनके बाद फिर कोई यज्ञ नहीं रचा जाता है।
195भक्ति मार्ग ही खलास हो जाता है।
196यह नॉलेज बुद्धि में रखनी चाहिए।
197पढ़ाई पढ़ने के लिए आना पड़े।
198थोड़ी दिक्कत (तकलीफ) होती है।
199मनुष्य पढ़ने के लिए भारत से लण्डन अमेरिका भी जाते हैं।
200यह तो क्या है।
201बाप कहते हैं मैं कल्प, कल्प, कल्प के संगम युगे-युगे परमधाम से पढ़ाने के लिए आता हूँ, तो बच्चों को कितना कदर होना चाहिए।
202आगे चलकर तुम्हारे स्कूल गली-गली में बनेंगे।
203नहीं तो सब पढ़ेंगे कैसे।
204बाबा का परिचय सबको मिलना चाहिए।
205बाप को जरूर जानेंगे।
206अच्छा।
207मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निंग।
208रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
209धारणा के लिए मुख्य सार:-
2101) श्रीमत पर सदा श्रेष्ठ बनने का पुरूषार्थ करना है।
211पढ़ाई के लिए बहाना नहीं देना है।
212पढ़ाई पढ़नी जरूर है।
2132) जैसे आदि में पवित्र गृहस्थ आश्रम था, ऐसे अभी अपना पवित्र गृहस्थ आश्रम बनाना है।
214बलिहारी एक बाप की है, उसका ही गुणगान करना है।
215वरदान:- मन से दृढ़ प्रतिज्ञा कर मनमनाभव के मंत्र को यत्र बनाने वाले सदा शक्तिशाली भव
216जो बच्चे सच्चे मन से प्रतिज्ञा करते हैं तो मन मन्मनाभव हो जाता है और यह मन्मनाभव का मंत्र किसी भी परिस्थिति को पार करने में यत्र बन जाता है।
217लेकिन मन में आये कि मुझे यह करना ही है।
218यही संकल्प हो कि जो बाप ने कहा वह हुआ ही पड़ा है इसलिए कोई भी प्रतिज्ञा मन से करो और दृढ़ करो तो शक्तिशाली बन जायेंगे। 219बार-बार अपने को चेक करो कि प्रतिज्ञा पावरफुल है या परीक्षा पावरफुल है? 220परीक्षा प्रतिज्ञा को कमजोर न कर दे। 221स्लोगन:- जो स्वमान में रहने वाली श्रेष्ठ आत्मा हैं उन्हें अपमान की फीलिंग नहीं आ सकती।
0 24/02/17 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban