सोमवार 10 अप्रैल 2017 की दैनिक मुरली
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010/04/17 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन
1मुरली सार:- “मीठे बच्चे - बाप है भक्तों और बच्चों की रखवाली करने वाला भक्त-वत्सलम्, पतित से पावन बनाकर घर ले जाने की जिम्मेवारी बाप की है, बच्चों की नहीं''
2प्रश्न:- बाप का कल्प-कल्प फ़र्ज क्या है?
3कौन सा ओना बाप को ही रहता है?
4उत्तर:- बाप का फ़र्ज है बच्चों को राजयोग सिखलाकर पावन बनाना, सभी को दुःख से छुड़ाना।
5बाप को ही ओना (फिकर) रहता है कि मैं जाकर अपने बच्चों को सुखी बनाऊं।
6गीत:- मुखड़ा देख ले प्राणी…
7ओम् शान्ति।
8यह कौन पूछ रहा है?
9बाप जिसको आलमाइटी अथॉरिटी कहते हैं।
10बाप की महिमा तो करते हैं वा लिबरेटर, गाईड भी कहते हैं।
11वह है सबकी सद्गति करने वाला।
12वह सर्व का दुःख-हर्ता सुख कर्ता है।
13समझते हैं कि वह है परमधाम का रहने वाला।
14परन्तु अज्ञान के वश कह दिया है, सर्वव्यापी है।
15सब भगत हैं बच्चे और भगवान है बाप।
16यह तो जरूर सब बच्चों को समझाना चाहिए कि दुःख हर्ता सुख कर्ता हमारा बाप है।
17उनका नाम गाया जाता है - भगत वत्सलम्।
18यह नाम कोई गुरू गोसाई को नहीं दे सकते हैं।
19अब बच्चे या भक्त तो बहुत हैं उन पर रहम करने वाला एक ही बाप है।
20सारी दुनिया को एक बाप ही आकर सुख शान्ति देते हैं।
21समझाते भी हैं लक्ष्मी-नारायण के राज्य को बैकुण्ठ वा स्वर्ग कहा जाता है।
22इस समय कलियुग है, तो बाबा को कितना ओना होगा।
23हद के बाप को भी फुरना होता है।
24यह है बेहद का बाप।
25मालूम होना चाहिए कि सभी भक्तों का कल्याणकारी एक बाप ही है, उनको ही फुरना रहता है कि बच्चों को जाकर सुखी बनाऊं।
26जब मनुष्यों पर आफतें आती हैं तो सभी भगवान को याद करते हैं, पुकारते हैं हे परमपिता परमात्मा बचाओ।
27अभी तुम बच्चों के सम्मुख बाप बैठा है।
28बाप कहते हैं क्या मुझे ख्याल नहीं होगा कि अभी सब पतित हो गये हैं।
29मैं जाकर सबको राजयोग सिखलाकर पावन बनाऊं।
30यह तो मेरा कल्प-कल्प का फ़र्ज है।
31भल इस समय पुकारते तो सभी हैं परन्तु वह लव नहीं है।
32अब तुम सारे ड्रामा को समझ गये हो।
33बाप कहते हैं मैं तुमको पावन बनाने आया हूँ।
34यह मेरी बात मानों तो सही ना।
35सन्यासी भी इन विकारों को छोड़ते हैं।
36उन्हों का है हद का सन्यास।
37हमारा है बेहद का सन्यास, सारी पुरानी दुनिया का।
38बाप कितना अच्छी तरह समझाते हैं।
39प्रजापिता ब्रह्माकुमार और कुमारियाँ प्रैक्टिकल में हैं ना।
40बोर्ड भी लगा हुआ है।
41कितने ढेर बच्चे हैं, सब कहते हैं मम्मा बाबा।
42गांधी को भी फादर ऑफ नेशन कहते हैं।
43वह भी भारत का फादर था, उनको सारी दुनिया का तो नहीं कहेंगे ना।
44सारी दुनिया का पिता तो एक ही है।
45वह बाप कहते हैं काम महाशत्रु है, तुम इन पर जीत पहनो।
46इनमें कोई सुख नहीं है।
47पवित्र देवी देवताओं के आगे जाकर सिर झुकाते हैं।
48समझते कुछ नहीं।
49बाप सिर्फ कहते हैं बच्चे यह अन्तिम जन्म पवित्र बनो तो 21 जन्मों के लिए तुम्हारी काया कल्पतरू कर दूँगा।
50बहुत सहज है।
51परन्तु माया ऐसी है जो हरा देती है।
52भल 4-6 मास पवित्र रहते हैं फिर भी कमर टूट पड़ती है।
53तुम जानते हो बाबा कल्प पूर्व के समान समझा रहे हैं।
54कौरव पाण्डव भाई-भाई दिखाते हैं।
55दूसरे गाँव वा देश के नहीं हैं।
56पतित-पावन बाप, अविनाशी खण्ड भारत में ही आते हैं।
57यह बर्थ प्लेस है।
58शिव जयन्ती भी मनाते हैं।
59निराकार शिव परमात्मा जन्म लेते, नाम शिव है।
60शरीर तो नहीं है।
61और सबके ब्रह्मा विष्णु शंकर के भी चित्र हैं।
62ऊंचे ते ऊंचा एक भगवान है, वह इनमें प्रवेश करते हैं।
63परन्तु आया कैसे?
64कब आया?
65किसको भी यह मालूम नहीं है।
66भारत में ही शिव जयन्ती मनाते हैं।
67मन्दिर भी सबसे बड़ा यहाँ ही है, इसमें भी लिंग रख दिया है।
68समझाना चाहिए शिव जरूर आते हैं।
69शरीर बिगर तो कुछ होना ही नहीं है।
70सुख दुःख आत्मा शरीर के साथ ही भोगती है।
71आत्मा अलग हो जाती है तो कुछ भी कर नहीं सकती।
72शिवबाबा ने भी कुछ किया होगा।
73वह पतित-पावन है परन्तु कैसे आकर सबको पावन बनाते हैं, यह कोई जानते नहीं।
74अब बाबा साधारण तन में प्रवेश कर पार्ट बजाते हैं।
75गाते भी हैं ब्रह्मा द्वारा स्थापना।
76तो पतित दुनिया में ब्रह्मा कहाँ से आया?
77परमात्मा स्वयं कहते हैं मेरा शरीर तो है नहीं।
78मैंने इनमें प्रवेश किया है।
79मेरा नाम शिव है।
80तुम आकर मेरे बने हो, तभी तुम्हारा भी नाम बदलता है।
81सन्यासियों के पास जाकर सन्यास करते हैं तो उन्हों के भी नाम बदली होते हैं।
82अब बाप सम्मुख आया है।
83ईश्वर जिसको आधाकल्प तुमने याद किया फिर चलते-चलते तुम उनको भी भूल जाते हो।
84सन्यासी तो सुख को मानते नहीं, वह सुख को काग विष्टा के समान समझते हैं।
85स्वर्ग का नाम तो बाला है।
86कोई मरता है तो भी कहते हैं स्वर्ग गया।
87नई दुनिया को सुखधाम, पुरानी दुनिया को दुःखधाम कहा जाता है।
88बाप इतना समझाते हैं तो क्यों नहीं उनकी मत पर पूर्ण रूप से चलना चाहिए।
89बाबा आया है सबको मुक्ति-जीवनमुक्ति देने।
90बाबा का पार्ट है बच्चों को वर्सा देना।
91निराकार रचयिता बाप से वर्सा कैसे मिलता है, यह भी तुम जानते हो।
92मेरा परिचय तुमको कहाँ से मिला?
93भगवानुवाच।
94क्या मैं कृष्ण हूँ!
95मैं ब्रह्मा हूँ!
96नहीं।
97मैं तो सभी आत्माओं का निराकार बाप हूँ।
98और कोई नहीं कह सकता।
99भल अपने को शिवोहम् कहते हैं परन्तु यह नहीं कह सकते कि मैं सभी आत्माओं का बाप हूँ।
100वह अपने को गुरू कहलाते हैं।
101वहाँ बाप तो मिला नहीं, टीचर मिला नहीं, फट से गुरू मिल गया।
102यहाँ कायदे का ज्ञान है।
103यहाँ तुम्हारा बाप टीचर गुरू मैं एक ही हूँ।
104वन्डर खाना चाहिए - सारी पतित दुनिया को कैसे पावन बनाते होंगे!
10521 जन्म का वर्सा देने वाले बाप की मत पर कदम-कदम चलो।
106माया दुश्तर है।
107बाबा-बाबा कहते हैं, पढ़ते भी हैं, फिर भी अहो माया वश बाप को फारकती दे देते हैं इसलिए कहते हैं खबरदार रहना।
108बाप को बच्चे फारकती देवे तो कहेंगे ना - मैंने तुम्हारी इतनी पालना की फिर भी मुझे छोड़ दिया।
109यहाँ तो औरों की सेवा करनी है, औरों को आप समान बनाने की।
110यह मदद मेरी नहीं करेंगे?
111फारकती दे नाम बदनाम कर देते हैं।
112कितना मुश्किल होती है।
113अबलाओं पर बहुत अत्याचार होते हैं।
114ज्ञान यज्ञ में विघ्न पड़ते हैं।
115माया कितने तूफान लाती है।
116भक्ति मार्ग में यह नहीं होता।
117बाप कहते हैं - सयाने बच्चे, तुम मेरी मत पर चलो।
118अपने दिल रूपी दर्पण में देखना चाहिए कि मैंने कोई विकर्म तो नहीं किया।
119बाप का बन थोड़ा भी विकर्म करते हो तो सौ गुणा दण्ड हो जाता है।
120बहुत नुकसान कर देते हैं।
121देखना है हम अपना खाता जमा करते हैं या ना करते हैं।
122माया के भूतों को भगा देना चाहिए।
123ऐसी अवस्था हो तब दिल पर चढें तो तख्त पर भी बैठेंगे।
124वह भी समझते हो हमारा तख्त क्या होगा।
125शिवबाबा का मन्दिर बनाते हो तो तुम्हारा महल कितना सुन्दर और ऊंच होगा।
126मैं तुमको विश्व का मालिक बनाता हूँ, तुम्हारे पास अथाह धन होगा।
127फिर तुम मेरा मन्दिर बनाते हो।
128सारा धन मन्दिर बनाने में तो नहीं लगायेंगे।
129अभी तुम जानते हो हम विश्व के मालिक थे।
130वहाँ विश्व महाराजन को धन दाता कहेंगे, उसने भक्ति मार्ग में कितना बड़ा मन्दिर बनाया।
131तुम भी बनाते हो।
132वहाँ द्वापर में सभी राजाओं के पास मन्दिर रहता है।
133पहले-पहले बनाते हैं शिव का मन्दिर फिर देवताओं का बनाते हैं।
134अभी बाप तुम बच्चों को कितना सत्य समाचार सुनाते हैं।
135तुम बच्चों को इस पढ़ाई से बहुत खुशी होनी चाहिए।
136तुम बच्चे जानते हो पुरुषार्थ से हम यह बनेंगे, फिर श्रीमत पर क्यों नहीं चलते।
137तुम भूल क्यों जाते हो।
138यह तो कहानी है।
139घर में मित्र सम्बन्धी कहानियाँ सुनाते हैं।
140बाप भी तुमको सारे सृष्टि के आदि मध्य अन्त की कहानी सुनाते हैं।
141तुम 5 हजार वर्ष पहले विश्व के मालिक थे।
142बाबा रोज़ यह कहानी सुनाते हैं।
143तुम बच्चे बन जाओ।
144अपने को लायक बनाओ - राज्य-भाग्य लेने के।
145यह है सत्य-नारायण की कहानी।
146यह कहानी तुमको सुनकर फिर औरों को सुनानी है, अमर बनाने के लिए।
147फिर भक्ति मार्ग में कथायें सुनायेंगे।
148फिर सतयुग त्रेता में यह ज्ञान भूल जायेगा।
149बाप कितना साधारण चलते हैं।
150कहते हैं मैं तुम बच्चों का सर्वेन्ट हूँ।
151जब तुम दुःखी बनते हो तो मुझे बुलाते हो कि हमको आकर विश्व का मालिक बनाओ।
152पतितों को पावन बनाओ।
153मनुष्य समझते थोड़ेही हैं।
154तुम समझते हो कि बाबा हमको पतित से पावन बना रहे हैं, तो बाबा को भूलना नहीं चाहिए।
155तुम्हें ऊंच सर्विस करनी है।
156बाप को याद करना है और घर चलना है।
157अच्छा।
158मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग।
159रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
160धारणा के लिए मुख्य सार:-
1611) रोज़ अपने दिल रूपी दर्पण में देखना है कि कोई भी विकर्म करके अपना वा दूसरों का नुकसान तो नहीं करते हैं!
162सयाना बन बाप की मत पर चलना है, भूतों को भगा देना है।
1632) बाप जो सत्य समाचार वा कहानी सुनाते हैं वह सुनकर औरों को भी सुनानी है।
164वरदान:- “मैं और मेरा बाबा'' इस विधि द्वारा जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने वाले सहजयोगी भव 165ब्राह्मण बनना अर्थात् देह, सम्बन्ध और साधनों के बन्धन से मुक्त होना। 166देह के सम्बन्धियों का देह के नाते से सम्बन्ध नहीं लेकिन आत्मिक सम्बन्ध है। 167यदि कोई किसी के वश, परवश हो जाते हैं तो बन्धन है, लेकिन ब्राह्मण अर्थात् जीवनमुक्त।
0 10/04/17 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban
168जब तक कर्मेन्द्रियों का आधार है तब तक कर्म तो करना ही है लेकिन कर्मबन्धन नहीं, कर्म-सम्बन्ध है।
169ऐसा जो मुक्त है वो सदा सफलतामूर्त है।
170इसका सहज साधन है-मैं और मेरा बाबा।
171यही याद सहजयोगी, सफलतामूर्त और बन्धनमुक्त बना देती है।
172स्लोगन:- मैं और मेरेपन की अलाए (खाद) को समाप्त करना ही रीयल गोल्ड बनना है।