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1
00:15:35.129 --> 00:17:00.559
आज भाग्य विधाता बापदादा अपने सर्व बच्चों के मस्तक बीच भाग्य की रेखायें देख रहे हैं ।

2
00:17:18.200 --> 00:18:27.359
हर एक बच्चे के मस्तक में चमकते हुए दिव्य सितारे की रेखा दिखाई दे रही हैं ।

3
00:18:29.359 --> 00:19:28.460
हर एक के नयनों में स्नेह और शक्ति की रेखा देख रहे हैं ।

4
00:19:30.460 --> 00:20:30.160
मुख में श्रेष्ठ मधुर वाणी की रेखा देख रहे हैं ।

5
00:20:44.099 --> 00:21:13.599
होठों पर मीठे मुस्कान की रेखा चमक रही है ।

6
00:21:15.599 --> 00:22:12.329
दिल में दिलाराम के स्नेह में लवलीन की रेखा देख रहे हैं ।

7
00:22:23.359 --> 00:23:01.029
हाथों में सदा सर्व खज़ानों के सम्पन्नता की रेखा देख रहे हैं ।

8
00:23:07.059 --> 00:23:52.359
पांव में हर कदम में पदम की रेखा देख रहे हैं ।

9
00:23:54.359 --> 00:25:08.130
ऐसा श्रेष्ठ भाग्य सारे कल्प में किसी का नहीं होता , जो आप बच्चों को इस संगमयुग में भाग्य प्राप्त हुआ है ।

10
00:25:28.730 --> 00:25:43.000
ऐसा अपना भाग्य अनुभव करते हो ?

11
00:26:08.400 --> 00:26:30.200
इतने श्रेष्ठ भाग्य का रूहानी नशा अनुभव करते हो ?

12
00:26:41.859 --> 00:27:07.460
दिल में स्वतः गीत बजता है - वाह मेरा भाग्य !

13
00:27:29.460 --> 00:27:46.759
यह संगमयुग का भाग्य अविनाशी भाग्य हो जाता ।

14
00:27:54.730 --> 00:27:56.500
क्यों ?

15
00:28:03.829 --> 00:28:24.529
अविनाशी बाप द्वारा अविनाशी भाग्य प्राप्त हुआ है ।

16
00:28:38.430 --> 00:28:55.829
लेकिन प्राप्त इस संगम पर ही होता है ।

17
00:29:13.099 --> 00:30:06.259
इस संगमयुग पर ही अनुभूति करते हो , यह विशेष संगमयुग की प्राप्ति अति श्रेष्ठ है ।

18
00:30:24.029 --> 00:30:53.730
तो ऐसे श्रेष्ठ भाग्य का अनुभव सदा इमर्ज रहता है या कभी मर्ज , कभी इमर्ज रहता है ?

19
00:31:11.400 --> 00:31:15.759
और पुरुषार्थ क्या किया ?

20
00:31:24.599 --> 00:31:48.599
इतने बडे भाग्य की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ कितना सहज हुआ ।

21
00:32:09.460 --> 00:32:37.529
सिर्फ दिल से जाना , माना और अपना बनाया मेरा बाबा ।

22
00:32:53.000 --> 00:33:07.660
दिल से पहचाना , मैं बाबा का , बाबा मेरा ।

23
00:33:29.259 --> 00:33:42.400
मेरा मानना और अधिकारी बन जाना ।

24
00:34:02.130 --> 00:34:06.660
अधिकार भी कितना बडा है !

25
00:34:11.059 --> 00:34:29.760
सोचो , कोई पूछे क्या-क्या मिला है ?

26
00:34:40.960 --> 00:34:44.000
तो क्या कहेंगे ?

27
00:34:55.400 --> 00:35:03.730
जो पाना था वह पा लिया ।

28
00:35:07.360 --> 00:35:29.159
अप्राप्त नहीं कोई वस्तु परमात्म खज़ाने में ।

29
00:35:46.099 --> 00:36:19.130
ऐसे प्राप्ति स्वरूप का अनुभव कर लिया वा कर रहे हैं ?

30
00:36:44.199 --> 00:37:04.860
भविष्य की बात अलग है , इस संगमगुग का ही प्राप्ति स्वरूप का अनुभव है ।

31
00:37:06.860 --> 00:37:34.130
अगर संगमयुग पर अनुभव नहीं किया तो भविष्य में भी नहीं हो सकता ।

32
00:37:42.400 --> 00:37:44.400
क्यों ?

33
00:37:47.130 --> 00:38:10.360
भविष्य प्रालब्ध है लेकिन प्रालब्ध इस पुरुषार्थ के श्रेष्ठ कर्म से बनती है ।

34
00:38:24.199 --> 00:38:35.760
ऐसे नहीं कि लास्ट में अनुभव स्वरूप बनेंगे ।

35
00:38:44.630 --> 00:38:54.659
संगमयुग के बहुतकाल का यह अनुभव है ।

36
00:38:59.500 --> 00:39:27.960
जीवनमुक्त का विशेष अनुभव अब का है ।

37
00:39:33.599 --> 00:39:44.599
बेफिक्र बादशाह बनने का अनुभव अब है ।

38
00:39:51.960 --> 00:39:58.530
तो सभी बेफिक्र बादशाह हो कि फिकर है ?

39
00:39:59.300 --> 00:40:06.829
जो बेफिक्र बादशाह बने हैं वह हाथ उठाओ ।

40
00:40:10.099 --> 00:40:15.699
बन गये हैं कि बन रहे हैं ?

41
00:40:17.699 --> 00:40:20.860
बन गये हैं ना !

42
00:40:21.530 --> 00:40:24.400
क्या फिकर है ?

43
00:40:34.429 --> 00:40:50.860
जब दाता के बच्चे बन गये तो फिकर क्या रह गया ?

44
00:40:58.829 --> 00:41:14.829
मेरा बाबा माना और फिकर की अनेक टोकरियों का बोझ उतर गया ।

45
00:41:18.429 --> 00:41:20.559
बोझ है क्या ?

46
00:41:20.559 --> 00:41:22.559
हैं ?

47
00:41:29.159 --> 00:41:56.199
प्रकृति का खेल भी देखते हो , माया का खेल भी देखते हो लेकिन बेफिक्र बादशाह होकर , साक्षी होकर खेल देखते हो ।

48
00:42:04.929 --> 00:42:20.860
दुनिया वाले तो डरते हैं , पता नहीं क्या होगा !

49
00:42:28.000 --> 00:42:30.530
आपको डर है ?

50
00:42:30.530 --> 00:42:33.000
डरते हो ?

51
00:42:38.429 --> 00:42:54.929
निक्षय और निश्चिंत हैं जो होगा वह अच्छे ते अच्छा होगा ।

52
00:43:15.329 --> 00:43:17.099
क्यों ?

53
00:43:26.460 --> 00:43:36.800
त्रिकालदर्शी बन कर दृश्य को देखते हो ।

54
00:43:41.199 --> 00:44:10.659
आज क्या है , कल क्या होने वाला है , इसको अच्छी तरह से जान गये हो , नॉलेजफुल हो ना !

55
00:44:29.760 --> 00:45:01.329
संगम के बाद क्या होना है , आप सबके आगे स्पष्ट है ना !

56
00:45:08.230 --> 00:45:20.230
नव युग आना ही है ।

57
00:45:29.730 --> 00:45:34.599
दुनिया वाले कहेंगे , आयेगा ?

58
00:45:35.000 --> 00:45:39.199
क्वेश्चन है आयेगा ?

59
00:45:39.860 --> 00:45:42.530
और आप क्या कहते हैं ?

60
00:45:42.530 --> 00:45:44.530
आया ही पडा है ।

61
00:45:56.730 --> 00:46:07.059
इसलिए क्या होगा , क्वेश्चन नहीं है ।

62
00:46:09.059 --> 00:46:26.699
पता है - स्वर्ण युग आना ही है ।

63
00:46:29.599 --> 00:46:49.860
रात के बाद अब संगम प्रभात है , अमृतवेला है , अमृतवेले के बाद दिन आना ही है ।

64
00:47:04.099 --> 00:47:34.829
निश्चय जिसको भी होगा वह निश्चिन्त , कोई चिंता नहीं होगी , बेफिकर ।

65
00:47:50.829 --> 00:48:13.099
विश्व रचता द्वारा रचना की स्पष्ट नॉलेज मिल गई है ।

66
00:48:38.300 --> 00:49:42.500
बापदादा देख रहे हैं सभी बच्चे स्नेह के , सहयोग के और सम्पर्क के प्यार में बँधे हुए अपने घर में पहुच गये हैं ।

67
00:49:58.630 --> 00:50:46.829
बापदादा सभी स्नेही बच्चों को , सहयोगी बच्चों को , सम्पर्क वाले बच्चों को अपने अधिकार लेने के लिए अपने घर में पहुँचने की मुबारक दे रहे हैं ।

68
00:50:47.460 --> 00:50:51.559
मुबारक हो , मुबारक हो ।

69
00:51:33.559 --> 00:51:50.429
बापदादा का प्यार बच्चों से ज्यादा है वा बच्चों का बापदादा से ज्यादा है ?

70
00:51:54.099 --> 00:51:56.559
किसका है ?

71
00:51:58.559 --> 00:52:03.860
आपका या बाप का ?

72
00:52:10.559 --> 00:52:14.230
बाप कहते बच्चों का ज्यादा है ।

73
00:52:24.000 --> 00:52:33.300
देखो , बच्चों का प्यार है तब तो कहाँ-कहाँ से पहुँच गये हैं ना !

74
00:52:42.030 --> 00:52:45.230
कितने देशों से आये हैं ?

75
00:52:45.659 --> 00:52:49.699
( 50 देशों से ) 50 देशो से आयें हैं ।

76
00:52:59.929 --> 00:53:07.300
लेकिन सबसे दूर से दूर कौन आया है ?

77
00:53:13.230 --> 00:53:16.900
अमेरिका वाले दूर से आये हैं ?

78
00:53:26.829 --> 00:53:36.559
आप भी दूर से आये हैं लेकिन बापदादा तो परमधाम से आया है ।

79
00:53:41.500 --> 00:53:45.230
उसकी भेंट में अमेरिका क्या है !

80
00:53:53.630 --> 00:53:58.230
अमेरिका दूर है या परमधाम दूर है ?

81
00:54:07.159 --> 00:54:15.960
सबसे दूरदेशी बापदादा है ।

82
00:54:23.530 --> 00:54:32.960
बच्चे याद करते और बाप हाजिर हो जाते हैं ।

83
00:54:54.099 --> 00:55:02.099
अभी बाप बच्चों से क्या चाहते हैं ?

84
00:55:02.460 --> 00:55:08.360
पूछते हैं ना - बाप क्या चाहते हैं ?

85
00:55:13.559 --> 00:55:41.929
तो बापदादा यही मीठे-मीठे बच्चों से चाहते हैं कि एक-एक बच्चा स्वराज्य अधिकारी राजा हो ।

86
00:55:52.030 --> 00:55:54.800
सभी राजा हो ?

87
00:55:54.900 --> 00:55:57.500
स्वराज्य है ?

88
00:55:58.000 --> 00:56:01.260
स्व पर राज्य तो है ना ।

89
00:56:02.260 --> 00:56:13.159
जो समझते हैं स्वराज्य अधिकारी राजा बना हूँ , वह हाथ उठाओ ।

90
00:56:26.429 --> 00:56:28.960
बहुत अच्छा ।

91
00:56:41.429 --> 00:57:11.400
बापदादा को बच्चों को देखकर प्यार आता कि 63 जन्म बहुत मेहनत की है , दुःख - अशान्ति से दूर होने की ।

92
00:57:20.929 --> 00:57:42.699
तो बाप यही चाहते हैं कि हर बच्चा अभी स्वराज्य अधिकारी बने ।

93
00:57:43.159 --> 00:57:53.329
मन-बुद्धि-संस्कार का मालिक बने , राजा बने ।

94
00:57:57.400 --> 00:58:29.860
जब चाहे , जहाँ चाहे , जैसे चाहे वैसे मन-बुद्धि-संस्कार को परिवर्तन कर सके ।

95
00:58:39.099 --> 00:58:56.099
टेंशन फ्री लाइफ का अनुभव सदा इमर्ज हो ।

96
00:58:58.829 --> 00:59:08.260
बापदादा देखते हैं कभी मर्ज भी हो जाता है ।

97
00:59:10.260 --> 00:59:29.400
सोचते हैं यह नहीं करना है , यह राइट है , यह रांग है , लेकिन सोचते है स्वरूप में नहीं लाते हैं ।

98
00:59:38.559 --> 00:59:50.460
सोचना माना मर्ज रहना , स्वरूप में लाना अर्थात् इमर्ज होना ।

99
00:59:57.599 --> 01:00:02.630
समय के लिए तो नहीं इन्तजार कर रहे हो ना !

100
01:00:06.460 --> 01:00:10.099
कभी-कभी करते हैं ।

101
01:00:12.099 --> 01:00:24.659
रूहरिहान करते हैं ना तो कई बच्चे कहते हैं , समय आने पर ठीक हो जायेंगे ।

102
01:00:38.230 --> 01:00:42.760
समय तो आपकी रचना है ।

103
01:00:49.429 --> 01:00:57.230
आप तो मास्टर रचता हो ना !

104
01:00:59.500 --> 01:01:08.099
तो मास्टर रचता , रचना के आधार पर नहीं चलते ।

105
01:01:13.829 --> 01:01:27.460
समय को समाप्ति के नजदीक आप मास्टर रचता को लाना है ।

106
01:02:57.760 --> 01:03:29.599
एक सेकण्ड में मन के मालिक बन मन को आर्डर कर सकते हो ?

107
01:03:38.300 --> 01:03:40.900
कर सकते हो ?

108
01:03:54.260 --> 01:03:59.159
मन को एकाग्र कर सकते हो ?

109
01:04:07.760 --> 01:04:51.099
फुलस्टॉप लगा सकते हो कि लगायेंगे फुलस्टॉप और लग जायेगा क्वेश्चन मार्क?

110
01:05:00.659 --> 01:05:18.159
क्यों , क्या , कैसे यह क्या , वह क्या , आश्चर्य की मात्रा भी नहीं ।

111
01:05:26.059 --> 01:05:39.900
फुलस्टॉप, सेकण्ड में पॉइंट बन जाओ।

112
01:05:49.329 --> 01:06:07.659
और कोई मेहनत नहीं है , एक शब्द सिर्फ अभ्यास में लाओ पॉइंट ।

113
01:06:18.730 --> 01:07:05.099
पॉइंट स्वरूप बनना हैं , वेस्ट को पॉइंट लगानी हैं और महावाक्य जो सुनते हो उस पॉइंट पर मनन करना है , और कोई भी तकलीफ नहीं हैं ।

114
01:07:06.659 --> 01:07:15.900
पॉइंट याद रखो , पॉइंट लगाओ , पॉइंट बन जाओ ।

115
01:07:37.130 --> 01:08:15.960
यह अभ्यास सारे दिन में बीच-बीच में करो , कितने भी बिजी हो लेकिन यह ट्रायल करो एक सेकण्ड में पॉइंट बन सकते हो ?

116
01:08:20.300 --> 01:08:25.329
एक सेकण्ड में पॉइंट लगा सकते हो ?

117
01:08:58.729 --> 01:09:33.199
जब यह अध्यास बार-बार का होगा तब ही आने वाले अन्तिम समय में कुल प्पॉइंट्स ले सकेंगे ।

118
01:09:46.399 --> 01:09:50.130
पास विद ऑनर बन जायेंगे ।

119
01:10:03.430 --> 01:10:15.359
यही परमात्म पढ़ाई है , यही परमात्म पालना है ।

120
01:11:07.659 --> 01:11:33.760
तो जो भी आये हैं , चाहे पहली बारी आने वाले हैं , जो पहली बारी मिलन मनाने के लिए आये हैं वह हाथ उठाओ ।

121
01:11:44.800 --> 01:11:46.859
बहुत आये हैं ।

122
01:11:47.800 --> 01:11:49.760
वेलकम ।

123
01:11:56.529 --> 01:12:08.460
जैसे अभी पहले बारी आये हो ना , तो पहला नम्बर भी लेना ।

124
01:12:13.100 --> 01:12:51.600
चांस हैं , आप सोचेंगे हम तो अभी - अभी पहले बारी आये हैं , हमारे से पहले वाले तो बहुत हैं लेकिन ड्रामा में यह चांस रखा हुआ है कि लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट हो सकते हो ।

125
01:13:02.659 --> 01:13:15.760
चांस हैं और चांस लेने वालो को बापदादा चांसलर कहते हैं ।

126
01:13:17.760 --> 01:13:20.829
तो चांसलर बनी ।

127
01:13:36.000 --> 01:13:38.760
बनना हैं चांसलर ?

128
01:13:38.760 --> 01:13:41.899
चांसलर बनना है ?

129
01:13:43.899 --> 01:13:50.300
जो समझते हैं चांसलर बनेंगे , वह हाथ उठाओ ।

130
01:13:50.560 --> 01:13:56.029
चांसलर बनेंगे ?

131
01:13:57.560 --> 01:13:58.960
वाह !

132
01:13:58.960 --> 01:14:00.960
मुबारक हो ।

133
01:14:04.060 --> 01:14:18.760
बापदादा ने देखा यहाँ तो जो भी आये हैं वह सब हाथ उठा रहे हैं , मैजारिटी उठा रहे हैं , मुबारक हो , मुबारक हो ।

134
01:14:25.359 --> 01:14:54.229
बापदादा ने आप सभी आने वाले मीठे-मीठे, प्यारे-प्यारे बच्चों को विशेष याद किया है, क्यों याद किया?(आज सभा में देश-विदेश के बहुत से वी.आई.पीज बैठे हैं) क्यों निमन्त्रण दिया?

135
01:14:54.229 --> 01:14:56.229
पता है ?

136
01:14:59.100 --> 01:15:13.359
दखो , निमन्त्रण तो बहुतों को मिला लेकिन आने वाले आप पहुँच गये हो ।

137
01:15:17.199 --> 01:15:22.130
क्यों बापदादा ने याद किया ?

138
01:15:24.130 --> 01:15:55.359
क्योंकि बापदादा जानते हैं कि जो भी आयें हैं वह स्नेही , सहयोगी से सहजयोगी बनने वाली क्वालिटी हैं ।

139
01:16:06.560 --> 01:16:34.659
अगर हिम्मत रखेंगे तो आप सहजयोगी बन औरों को भी सहज योग का मैसेन्जर बन मैसेज दे सकते हो ।

140
01:16:49.329 --> 01:17:01.859
मैसेज देना अर्थात् गॉडली मैसेन्जर बनना ।

141
01:17:15.229 --> 01:17:27.960
आत्माओं को दुःख , अशान्ति से छुडाना ।

142
01:17:43.859 --> 01:17:49.960
फिर भी आपके ही भाई-बहनें हैं ना ।

143
01:17:51.960 --> 01:18:06.630
तो अपने भाई वा बहनों को गॉडली मैंसेज देना अर्थात् मुक्त करना ।

144
01:18:14.500 --> 01:18:18.300
इसकी दुआयें बहुत मिलती है ।

145
01:18:19.130 --> 01:18:52.829
किसी भी आत्मा को दुख , अशान्ति से छुडाने की दुआयें बहुत मिलती है और दुआयें मिलने से अतीन्द्रिय सुख आन्तरिक खुशी की फीलिंग बहुत आती है ।

146
01:19:00.729 --> 01:19:02.399
क्यों ?

147
01:19:04.399 --> 01:19:14.430
क्योंकि खुशी बांटी ना तो खुशी बांटने से खुशी बढती है ।

148
01:19:37.000 --> 01:19:40.630
सभी खुश हो ?

149
01:19:42.630 --> 01:19:55.960
विशेष बापदादा मेहमानों से नहीं , अधिकारियों से पूछते हैं ।

150
01:19:57.699 --> 01:20:04.800
अपने को मेहमान नहीं समझना , अधिकारी हैं ।

151
01:20:06.800 --> 01:20:09.699
तो सभी खुश हैं ?

152
01:20:10.229 --> 01:20:28.130
हाँ आप आने वालों से पूछते हैं , कहने में आता है मेहमान लेकिन मेहमान नहीं हो , महान बन महान बनाने वाले हो ।

153
01:20:36.500 --> 01:20:39.430
तो पूछो खुश हैं ?

154
01:20:44.359 --> 01:20:49.159
खुश हैं तो हाथ हिलाओ ।

155
01:20:54.829 --> 01:21:02.859
सभी खुश हैं , अभी जाकरके क्या करेंगे ?

156
01:21:03.960 --> 01:21:06.930
खुशी बांटेगे ना !

157
01:21:07.529 --> 01:21:11.060
सबको खूब खुशी बांटना ।

158
01:21:14.000 --> 01:21:19.630
जितनी बांटेगे उतनी बढेगी , ठीक हैं ।

159
01:21:26.329 --> 01:21:48.729
अच्छा - खूब ताली बजाओ ।

160
01:22:27.829 --> 01:22:40.159
( सभी ने खूब तालिया बजाई ) जैसे अभी ताली बजाई , ऐसे सदा खुशी की तालियाँ आटोमेटिक बजती रहे ।

161
01:23:02.029 --> 01:23:05.500
अच्छा ।

162
01:23:24.300 --> 01:23:33.029
सेवा का टर्न - भोपाल जोन :- भोपाल वाले उठो ।

163
01:23:55.060 --> 01:24:07.829
सेवा का चांस लेने में कितने पदम , कदम में जमा किये ?

164
01:24:09.829 --> 01:24:12.899
जमा किया ?

165
01:24:15.100 --> 01:24:28.300
क्योंकि यहाँ तो सेवा और यज्ञ पिता की याद रहती है ।

166
01:24:30.630 --> 01:24:40.300
यज्ञ सेवा करते हो तो यज्ञ पिता की याद तो स्वतः आती है ।

167
01:24:44.699 --> 01:24:47.630
यहाँ क्या किया ?

168
01:24:48.930 --> 01:24:54.359
दो काम थे ना , बस , और तो कोई काम नहीं था ।

169
01:24:55.329 --> 01:25:07.130
बाप को याद करना और सेवा करना और कोई ड्यूटी थी क्या ?

170
01:25:07.130 --> 01:25:09.130
यही थी ना !

171
01:25:14.899 --> 01:25:28.199
सेवा करना अर्थात् शक्तिशाली मेवा खाना ।

172
01:25:34.199 --> 01:26:01.899
तो बहुत अच्छी सेवा की , अपने लिए भी दुआयें जमा किया और दूसरों को भी आराम दिया अर्थात् बाप की याद दिलाई ।

173
01:26:08.159 --> 01:26:40.260
तो अच्छा गोल्डन चांस लिया और यहाँ का जमा किया हुआ वहाँ जाके स्वयं प्रति भी बढाना और दूसरों को भी बांटना ।

174
01:26:46.199 --> 01:26:48.729
अच्छा है ।

175
01:26:48.899 --> 01:26:55.029
इसमें टीचर्स हाथ उठाओ ।

176
01:27:15.060 --> 01:27:36.300
बापदादा सदा टीचर्स को कहते हैं , टीचर्स अर्थात् जिसके फीचर्स से फ्यूचर दिखाई दे ।

177
01:27:46.829 --> 01:27:50.699
ऐसी टीचर्स हो ना !

178
01:27:52.659 --> 01:28:03.430
आपको देखकर स्वर्ग के सुख की फीलिंग आये ।

179
01:28:14.329 --> 01:28:21.630
शान्ति की अनुभूति हो ।

180
01:28:32.699 --> 01:28:39.229
चलते-फिरते फरिश्ते दिखाई दें ।

181
01:28:51.029 --> 01:28:54.699
ऐसी टीचर्स हो ना ।

182
01:29:00.859 --> 01:29:03.100
अच्छा है ।

183
01:29:03.100 --> 01:29:35.199
चाहे प्रवृत्ति में रहने वाले हैं , चाहे सेवा के निमित्त बने हुए हैं लेकिन सभी बापदादा समान बनने वाले निष्चयबुद्धि विजयी हैं ।

184
01:29:43.760 --> 01:29:49.760
तो सेवा करना बहुत अच्छा लगा ना ।

185
01:29:50.560 --> 01:29:53.500
सन्तुष्ट रहे ?

186
01:29:57.560 --> 01:30:04.300
रहे तो हाथ हिलाओ ।

187
01:30:06.300 --> 01:30:13.199
बहुत अच्छा , मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

188
01:31:11.329 --> 01:31:41.430
मीडिया विंग :- ( बैनर दिखा रहे हैं मूल्य निष्ठ मीडिया , सत्यता , निर्भयता , दिव्यता परमात्म प्रत्यक्षता ) अच्छा लक्ष्य रखा है , मीडिया अर्थात् बापदादा की प्रत्यक्षता का आवाज फैलाने वाले ।

189
01:31:44.430 --> 01:32:38.130
प्रत्यक्षता का विशेष साधन मीडिया है क्योंकि लोग कहते हैं कि आपका आवाज इतना चारों ओंर नहीं फैला है , तो मीडिया ऐसा साधन है जो चारो ओर आवाज फैला सकते हैं ।

190
01:32:38.130 --> 01:33:17.000
अभी थोडा - थोडा आवाज फैलाया है इसलिए अभी ऐसा वायुमण्डल बनाओ जो हर मीडिया के साधन वाले स्वयं ऑफर करे कि हमें कुछ सेवा दो ।

191
01:33:33.699 --> 01:34:05.229
कनेक्शन रख रहे हो लेकिन कनेक्शन वालों को रिलेशन वाला बनाओ , जिससे वह खुद समझें कि हमारी भी जिम्मेवारी है ।

192
01:34:15.760 --> 01:34:18.529
कर रहे हैं ।

193
01:34:19.960 --> 01:34:31.359
करते रहेंगे और अवश्य आवाज फैलना ही है ।

194
01:34:33.899 --> 01:34:42.029
फैलाने वाले होशियार हैं तो आवाज फैलेगा ना !

195
01:34:45.560 --> 01:34:51.560
शुरू किया है , अच्छा किया है , अभी उसको बढ़ाओ ।

196
01:34:59.859 --> 01:36:21.229
( दादी जी की इच्छा है - एक करोड लोगों को सन्देश मिले , तो इस शिव जयन्ती पर वह सन्देश सबको मिल जाये , ऐसा प्लैन बनाया है , और भी कई प्लैन बापदादा को सुनाये ) मुबारक हो ।

197
01:36:22.300 --> 01:36:30.659
प्रैक्टिकल में करेंगे फिर गिफ़्ट भी देंगे , अभी मुबारक हो ।

198
01:36:41.060 --> 01:37:50.729
साइंटिस्ट एवम इंजीनियर विंग :- ( बैनर दिखाया निमित्त , निर्मानता से नवनिर्माण , ज्ञान विज्ञान जागृति अभियान ) अच्छा बनाया है ।

199
01:37:54.100 --> 01:38:39.460
अभी साइंटिस्ट और इंजीनियर डिपार्टमेंट को ऐसा कुछ करके दिखाना हैं जो लोगों को अनुभव हो कि साईलेन्स की शक्ति साइंस को भी रिफाइन और प्रगति में ला सकती है ।

200
01:38:41.460 --> 01:39:09.760
साइंस और साइलेन्स का मिलन क्या-क्या कर सकता है , वह विशेष पहले पॉइंट्स निकालो और फिर वह फैलाओ ।

201
01:39:12.430 --> 01:39:47.399
साइंस वालों को पता पडे कि साइलेन्स हमारे साइंस में क्या सहयोग दे सकती हैं , क्या उन्नति हो सकती है , ऐसा अनुभव स्वयं करो भी और कराओ भी ।

202
01:39:51.829 --> 01:40:20.529
अच्छा हैं बापदादा खुश हैं , हर एक वर्ग काम में तो लगा हुआ है , मनन करना शुरू है , अभी मनन से मक्खन निकालो ।

203
01:40:32.130 --> 01:40:52.859
कोई ऐसे विशेष अनुभव उन्हीं के सामने रखो क्योंकि आजकल प्रैक्टिकल अनुभव का प्रभाव ज्यादा पडता है ।

204
01:40:58.029 --> 01:41:16.159
टॉपिक पर भाषण करते हो लेकिन भाषण में भी विशेष प्रैक्टिकल अनुभव सुनाने का लक्ष्य रखो ।

205
01:41:25.859 --> 01:41:45.430
बाकी अच्छा कर रहे हैं , अच्छा है , यह भी चांस मिल जाता है , विधि अच्छी बनाई है ।

206
01:41:54.159 --> 01:42:06.159
अच्छा - मुबारक हो , किया है उसकी भी मुबारक , और आगे करेंगे उसकी इन एडवांस मुबारक हो ।

207
01:42:06.159 --> 01:45:14.460
( इस विंग के सदस्यों ने दो गुण विशेष धारणा के लिए रखे हैं निमित्त भाव और निर्मान ) बहुत अच्छा किया है , करते रहना और लक्ष्य को पक्का रखना ।

208
01:45:23.859 --> 01:46:35.199
प्राशासक वर्ग :- अच्छा आप लोगों ने भी प्लैन बनाये हैं और बनाते ही रहते हैं ।

209
01:46:37.829 --> 01:47:09.899
अच्छा है अगर प्रशासक परिवर्तन हो जाए तो सब परिवर्तन हो सकते हैं क्योंकि कहावत है यथा राजा तथा प्रजा ।

210
01:47:11.899 --> 01:47:57.800
तो अगर सभी तरफ प्रशासक अपने जीवन में परिवर्तन करे तो औरों को भी परिवर्तन करने के निमित्त बना सकते हैं , क्योंकि हर देश में प्रशासन करने वाले तो होते ही हैं ।

211
01:47:59.800 --> 01:48:22.260
तो हर देश में विशेष उन्हों को परिवर्तन का सन्देश देकर योग्य बनाओ औरो को परिवर्तन करने के ।

212
01:48:23.729 --> 01:48:32.930
बाकी अच्छी सेवा है , बहुतों का फायदा कर सकते हो ।

213
01:48:34.930 --> 01:49:03.460
एक अनेकों के निमित्त बनने वाले होते हैं इसलिए कर भी रहे हो और , और भी तीव्रगति से परिवर्तन का प्लैन प्रैक्टिकल में लाओ ।

214
01:49:05.460 --> 01:49:09.260
आवश्यकता है इस वर्ग की ।

215
01:49:12.699 --> 01:49:17.229
सबकी नजर आज इसी वर्ग के ऊपर है ।

216
01:49:24.829 --> 01:49:33.630
तो निमित्त बने हो , निर्माण करेंगे ही ।

217
01:49:36.600 --> 01:49:39.630
अच्छा ।

218
01:50:49.000 --> 01:51:14.859
डबल विदेशी :- डबल विदेशी विश्व के कोने-कोने में सन्देश देने का कार्य बहुत अच्छा कर रहे हैं ।

219
01:51:20.460 --> 01:51:45.460
बापदादा सुनते हैं 50 देशों से आयें हैं , तो 50 देशों में सन्देश वाहक बैठे हैं ।

220
01:51:47.460 --> 01:52:20.659
सन्देश देने का कार्य कर रहे हैं और अभी प्लैन भी अच्छा बना रहे हैं कि जहाँ भी सन्देश नहीं पहुँचा हैं वहाँ निमित्त बनना ही हैं ।

221
01:52:25.399 --> 01:52:52.659
कर भी रहे हैं यह भी ब्रापदादा के पास पहुंचता हैं , अभी उमंग-उत्साह हैं और जहाँ उमंग-उत्साह हैं वहाँ सफलता है ही है ।

222
01:52:55.829 --> 01:52:58.960
तो डबल विदेशी कौन हो ?

223
01:52:59.430 --> 01:53:04.600
सफलता के सितारे हो ।

224
01:53:09.930 --> 01:53:11.329
हैं ना !

225
01:53:11.760 --> 01:53:14.600
सफलता के सितारे हैं ।

226
01:53:16.800 --> 01:53:19.430
अच्छा कर रहे हैं ।

227
01:53:23.460 --> 01:53:33.460
एक-एक के दिल का आवाज बापदादा तक पहुँचता रहता है ।

228
01:53:34.500 --> 01:53:49.329
यह करें , यह करें , यह भी करें , वह भी करें , उमंग-उत्साह अच्छा हैं और सफलता तो होनी ही है ।

229
01:53:49.829 --> 01:53:58.359
आपके चरणों में गले में सफलता है ही है ।

230
01:54:09.229 --> 01:54:16.260
और आप सबको देख करके सभी खुश भी होते हैं ।

231
01:54:17.000 --> 01:54:22.800
आपका आह्वान करते हैं , डबल विदेशी जरूर होने चाहिए ।

232
01:54:28.600 --> 01:54:32.199
लाडले हो गये हो ना ।

233
01:54:42.500 --> 01:54:52.159
तो बहुत अच्छा कर रहे हो , करते रहेंगे ।

234
01:54:52.159 --> 01:54:57.500
उड रहे हो , उडाते रहेंगे ।

235
01:55:02.859 --> 01:55:08.000
सब टीचर्स बहुत उमंग में हैं ना ।

236
01:55:08.000 --> 01:55:23.800
देखो आपके उमंग-उत्साह से यह महान अधिकारी आत्मायें भी पहुँच गई हैं ।

237
01:55:29.260 --> 01:55:32.460
ग्रुप अच्छा लाया है ।

238
01:55:33.529 --> 01:55:39.960
जिन्होंने भी लाया है उनको मुबारक है ।

239
01:55:41.829 --> 01:55:44.760
क्वालिटी अच्छी लाये हैं ।

240
01:56:10.500 --> 01:56:15.399
अभी और आवाज फैलेगा जरूर ।

241
01:56:18.859 --> 01:56:22.260
अच्छा , मुबारक हो , मुबारक हो ।

242
01:56:22.260 --> 01:56:23.930
मुबारक हो ।

243
01:57:09.100 --> 01:57:12.199
अच्छा ।

244
01:57:15.829 --> 02:00:04.399
चारों ओर के चाहे साकार रूप में सामने हैं , चाहे दूर बैठे भी दिल के नजदीक हैं , ऐसे सदा श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं को , सदा निमित्त बन निर्माण का कार्य सफल करने वाले विशेष आत्माओं को , सदा बाप के समान बनने के उमंग-उत्साह में आगे बढने वाले हिम्मतवान बच्चों को , सदा हर कदम में पदमों की कमाई जमा करने वाले बहुत-बहुत वर्ल्ड में पदमगुणा धनवान , भरपूर आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते ।

245
02:00:17.930 --> 02:00:32.000
दादी और दादी जानकी जी से :- आप ( दादी ) रूप हो और यह ( दादी जानकी ) बसन्त है ।

246
02:00:45.960 --> 02:00:50.800
आप दृष्टि से ही काम उतार देती हो ।

247
02:01:20.729 --> 02:01:29.329
ऐसे ऊपर हाथ करके नाचती हैं ना ।

248
02:01:48.930 --> 02:01:50.729
अच्छा है ।

249
02:02:18.930 --> 02:02:25.800
( सबको हल्का बना देती हैं ) अच्छा है , आपके साथी भी अच्छे हैं ना ।

250
02:02:57.560 --> 02:03:11.500
अच्छा है , वायुमण्डल बनाना , यह भी सबसे ऊँचे ते ऊँची सेवा है ।

251
02:03:13.060 --> 02:03:17.260
आप आदि रत्नों से वायुमण्डल बनता है ।

252
02:03:17.960 --> 02:03:24.659
चाहे बोलो , चाहे नहीं बोली लेकिन वायुमण्डल बनाने वाले हो ।

253
02:03:29.399 --> 02:03:33.000
देखो , कितनी सेवा कर रही हो ।

254
02:03:40.399 --> 02:03:48.859
( मनोहर दादी से ) बहुत अच्छा सभी को हँसा देती हो , यह सेवा बहुत अच्छी करती हो ।

255
02:03:51.460 --> 02:04:03.130
अच्छा है , ( मुन्नी बहन से ) बिजी रहती हो , बिजी रखने में भी होशियार हो ।

256
02:04:13.329 --> 02:04:17.899
( नीलू बहन से ) बहुत अच्छा पार्ट बजा रही हो ।

257
02:04:17.899 --> 02:04:28.430
( ईशू दादी से ) यह गुप्त रहती है लेकिन वाइब्रेशन अच्छा बनाती है ।

258
02:04:36.560 --> 02:04:42.930
बहुत अच्छा ( निर्मलशान्ता दादी से ) अभी प्रकृतिजीत बन गई ।

259
02:04:43.329 --> 02:04:47.859
अभी प्रकृति के वश नहीं , प्रकृतिजीत ।

260
02:05:03.899 --> 02:05:08.729
देखो संगठन में कितनी अच्छी लग रही हो ।

261
02:05:10.430 --> 02:05:14.000
सबसे फ्रेश तो आप लग रही हो ।

262
02:05:27.500 --> 02:05:30.229
सबको हाथ हिलाओ ।

263
02:06:04.260 --> 02:06:10.829
( रुकमणी बहन से ) ठीक हो , सेवा प्यार से करती हो ।

264
02:11:41.430 --> 02:11:49.260
डबल विदेशी निमित्त बड़ी बहनों से :- अच्छा सर्विस का सबूत दे रहे हैं ।

265
02:11:57.600 --> 02:12:01.529
इससे ही आवाज फैलेगा ।

266
02:12:07.029 --> 02:12:15.529
अनुभव सुनाने से औरों का भी अनुभव बढ़ता है ।

267
02:12:20.529 --> 02:12:43.000
तो बापदादा खुश हैं , फॉरिन की सेवा में निमित्त बनने वाले अच्छे उमंग-उत्साह से सेवा में बिजी रहते हैं ।

268
02:12:54.760 --> 02:13:17.229
गये देश से हैं लेकिन विदेश वालों की सेवा ऐसे ही निमित्त बनके कर रहे हैं जैसे वहाँ के ही हैं ।

269
02:13:20.000 --> 02:13:23.829
अपनेपन की भासना देते हो ।

270
02:13:30.729 --> 02:13:36.899
और सब तरफ के हैं ।

271
02:13:38.029 --> 02:13:47.930
एक तरफ के नहीं हैं , लण्डन के या अमेरिका के नहीं , बेहद सेवाधारी हैं ।

272
02:13:52.130 --> 02:13:56.060
जिम्मेवारी तो विश्व की है ना ।

273
02:14:07.329 --> 02:14:12.529
तो बापदादा मुबारक दे रहे हैं ।

274
02:14:16.460 --> 02:14:26.430
कर रहे हो , आगे और अच्छे ते अच्छा उड़ते और उड़ाते रहेंगे ।

275
02:14:30.659 --> 02:14:32.930
अच्छा ।

