WEBVTT

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00:06:08.459 --> 00:06:47.259
आज विशेष शिव बाप अपने सालिग्राम बच्चों का

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00:06:54.029 --> 00:07:12.329
बर्थ डे मनाने आये हैं ।

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00:07:21.430 --> 00:07:42.060
आप बच्चे बाप का जन्म दिन मनाने आये हो

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00:07:44.560 --> 00:07:57.160
और बापदादा बच्चों का बर्थ डे मनाने आये हैं

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00:08:04.100 --> 00:08:25.899
क्योंकि बाप का बच्चों से बहुत प्यार है ।

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00:08:36.759 --> 00:08:54.399
बाप अवतरित होते ही यज्ञ रचते हैं

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00:09:00.500 --> 00:09:21.259
और यज्ञ में ब्राह्मणों के बिना यज्ञ सम्पन्न नहीँ होता है ।

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00:09:25.759 --> 00:09:55.929
इसलिए यह बर्थ डे अलौकिक है , न्यारा और प्यारा है ।

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00:10:05.659 --> 00:10:19.129
ऐसा बर्थ डे जो बाप और बच्चों का इकठ्ठा हो

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00:10:24.129 --> 00:10:40.629
यह सारे कल्प में न हुआ है , न कभी हो सकता है ।

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00:10:58.700 --> 00:11:15.500
बाप है निराकार , एक तरफ निराकार है दूसरे तरफ जन्म मनाते हैं ।

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00:11:34.899 --> 00:11:49.529
एक ही शिव बाप है जिसको अपना शरीर नहीँ होता

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इसलिए ब्रह्मा बाप के तन में अवतरित होते हैं ,

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00:12:29.100 --> 00:12:51.230
यह अवतरित होना ही जयन्ती के रूप में मनाते है ।

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00:13:04.500 --> 00:13:23.559
तो आप सभी बाप का जन्म दिन मनाने आये हो वा अपना मनाने आये हो ?

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00:13:26.299 --> 00:13:35.629
मुबारक देने आये हो वा मुबारक लेने आये हो ?

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00:13:47.559 --> 00:14:05.230
यह साथ-साथ का वायदा बच्चों से बाप का है ।

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अभी भी संगम पर कम्बाइण्ड साथ है ,

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00:14:48.360 --> 00:15:08.659
अवतरण भी साथ है , परिवर्तन करने का कार्य भी साथ है

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00:15:14.559 --> 00:15:25.700
और घर परमधाम में चलने में भी साथ-साथ है ।

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यह है बाप और बच्चों के प्यार का स्वरूप ।

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00:16:10.529 --> 00:16:23.700
शिव जयन्ती भगत भी मनाते है

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00:16:31.299 --> 00:16:40.399
लेकिन वह सिर्फ पुकारते हैं , गीत गाते हैं ।

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00:16:52.529 --> 00:17:12.829
आप पुकारते नहीं , आपका मनाना अर्थात् समान बनना ।

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00:17:27.160 --> 00:17:56.759
मनाना अर्थात् सदा उमंग-उत्साह से उडते रहना ।

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00:18:07.430 --> 00:18:13.630
इसीलिए इसको उत्सव कहते है ।

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00:18:17.900 --> 00:18:27.759
उत्सव का अर्थ ही है उत्साह में रहना ।

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00:18:36.759 --> 00:18:49.059
तो सदा उत्सव अर्थात् उत्साह में रहने वाले हो ना !

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00:18:51.859 --> 00:18:59.430
सदा है या कभी-कभी है ?

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00:19:06.529 --> 00:19:26.660
वैसे देखा जाए तो ब्राह्मण जीवन का श्वास ही है - उमंग-उत्साह ।

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00:19:45.059 --> 00:19:54.900
जैसे श्वास के बिना रह नहीँ सकते हैं ,

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00:19:56.900 --> 00:20:13.160
ऐसे ब्राह्मण आत्माये उमंग-उत्साह के बिना ब्राह्मण जीवन में रह नहीँ सकते हैं ।

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00:20:56.430 --> 00:21:03.000
ऐसे अनुभव करते हो ना ?

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00:21:08.599 --> 00:21:28.099
देखो विशेष जयन्ती मनाने के लिए कहाँ-कहाँ से , दूर-दूर से भाग करके आये हैं ।

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00:21:44.430 --> 00:22:04.759
बापदादा को अपने जन्म दिन की इतनी खुशी नहीँ है जितनी बच्चों के जन्म दिन की है ।

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00:22:13.759 --> 00:22:54.200
इसलिए बापदादा एक-एक बच्चे को पदमगुणा खुशी की थालियां भर - भर के मुबारक दे रहे है ।

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00:22:59.029 --> 00:23:07.559
मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

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00:23:32.759 --> 00:23:53.029
बापदादा को आज के दिन सच्चे भगत भी बहुत याद आ रहे हैं ।

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00:24:24.829 --> 00:24:48.400
वह व्रत रखते हैं एक दिन का और आपने व्रत रखा है

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00:24:52.900 --> 00:25:05.430
सारे जीवन में सम्पूर्ण पवित्र बनने का ।

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00:25:24.329 --> 00:25:30.599
वह खाने का व्रत रखते हैं

42
00:25:44.960 --> 00:26:19.960
आपने भी मन के भोजन व्यर्थ संकल्प , निगेटिव संकल्प , अपवित्र संकल्पो का व्रत रखा है ।

43
00:26:26.630 --> 00:26:30.400
पक्का व्रत रखा है ना ?

44
00:26:30.400 --> 00:26:35.730
यह डबल फोरेनेर्सआगे आगेबैठे हैं ।

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00:26:42.299 --> 00:26:51.500
यह कुमार बोलो , कुमारों ने व्रत रखा है , पक्का ?

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00:26:51.700 --> 00:26:54.359
कच्चा नहीँ ।

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माया सुन रही है ।

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00:27:03.460 --> 00:27:11.660
सब झण्डिया हिला रहे है ना तो माया देख रही है,झण्डियां हिला रहे हैं।

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00:27:26.160 --> 00:27:38.029
जब व्रत रखते हैं - पवित्र बनना ही है ,

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00:27:48.430 --> 00:27:59.130
तो व्रत रखना अर्थात् श्रेष्ठ वृत्ति बनाना ।

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00:28:09.059 --> 00:28:27.430
तो जैसी वृत्ति होती है वैसे ही दृष्टि , कृति स्वतः ही बन जाती है ।

52
00:28:38.160 --> 00:28:43.029
तो ऐसा व्रत रखा है ना ?

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00:29:00.160 --> 00:29:27.460
पवित्र शुभ वृत्ति,पवित्र शुभ दृष्टि, जब एक दो को देखते हो तो क्या देखते हो?

54
00:29:35.059 --> 00:29:53.660
फेस को देखते हो या भृकुटी के बीच चमकती हुई आत्मा को देखते हो ?

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00:30:03.759 --> 00:30:18.000
कोई बच्चे ने पूछा कि जब बात करना होता है ,

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00:30:23.430 --> 00:30:28.329
काम करना होता है

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00:30:32.730 --> 00:30:38.400
तो फेस को देख करके ही बात करनी पड़ती है ,

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00:30:49.599 --> 00:30:54.599
आंखो के तरफ ही नज़र जाती है ,

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00:30:57.130 --> 00:31:10.230
तो कभी-कभी फेस को देख करके थोडा वृत्ति बदल जाती है ।

60
00:31:20.059 --> 00:31:43.599
बापदादा कहते है आंखो के साथ-साथ भृकुटी भी है ,

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00:31:51.130 --> 00:32:02.000
तो भृकुटी के बीच आत्मा को देख बात नहीं कर सकते हैं !

62
00:32:09.460 --> 00:32:27.059
अभी बापदादा सामने बैठे बच्चों के आंखो में देख रहे है या भृकुटी में देख रहे है , मालूम पडता है ?

63
00:32:28.000 --> 00:32:31.859
साथ-साथ ही तो है ।

64
00:32:36.130 --> 00:32:55.000
तो फेस में देखो लेकिन फेस में भृकुटी में चमकता हुआ सितारा देखो ।

65
00:33:07.660 --> 00:33:17.500
तो यह व्रत लो , लिया है लेकिन और अटेन्शन दौ ।

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00:33:20.230 --> 00:33:31.029
आत्मा को देख बात करना है , आत्मा से आत्मा बात कर रहा है ।

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00:33:34.200 --> 00:33:37.960
आत्मा देख रहा है ।

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00:33:49.900 --> 00:34:17.199
तो वृत्ति सदा ही शुभ रहेगी और साथ-साथ दूसरा फायदा है

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00:34:19.199 --> 00:34:29.460
जैसी वृत्ति वैसा वायुमण्डल बनता है ।

70
00:34:39.030 --> 00:35:12.230
वायुमण्डल श्रेष्ठ बनाने से स्वयं के पुरुषार्थ के साथ-साथ सेवा भी हो जाती है ।

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00:35:19.659 --> 00:35:24.130
तो डबल फायदा है ना !

72
00:35:34.800 --> 00:35:49.260
ऐसी अपनी श्रेष्ठ वृत्ति बनाओ

73
00:35:59.630 --> 00:36:49.699
जो कैसा भी विकारी , पतित आपके वृत्ति के वायुमण्डल से परिवर्तन हो जाए ।

74
00:37:00.500 --> 00:37:22.260
ऐसा व्रत सदा स्मृति में रहे स्वरूप में रहे ।

75
00:37:36.929 --> 00:37:53.699
आजकल बापदादा ने बच्चों का चार्ट देखा ,

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00:38:09.960 --> 00:38:47.159
अपने वृत्ति से वायुमण्डल बनाने के बजाए कहाँ-कहाँ , कभी-कभी दूसरों के वायुमण्डल का प्रभाव पड़ जाता है ।

77
00:39:04.429 --> 00:39:07.760
कारण क्या होता ?

78
00:39:18.429 --> 00:39:27.000
बच्चे रूहरिहान में बहुत मीठी-मीठी बातें करते हैं ,

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00:39:32.300 --> 00:39:44.559
कहते हैं इसकी विशेषता अच्छी लगती है ,

80
00:39:49.159 --> 00:39:54.900
इनका सहयोग बहुत अच्छा मिलता है ,

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00:40:13.559 --> 00:40:31.530
लेकिन विशेषता प्रभु की देन है ।

82
00:40:35.730 --> 00:41:06.030
ब्राह्मण जीवन में जो भी प्राप्ति है , जो भी विशेषता है , सब प्रभु प्रसाद है , प्रभु देन है ।

83
00:41:10.000 --> 00:41:17.829
तो दाता को भूल जाए , लेवता को याद करे !

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00:41:44.199 --> 00:41:57.400
प्रसाद कभी किसका पर्सनल गाया नहीँ जाता , प्रभु प्रसाद कहा जाता है ।

85
00:41:58.360 --> 00:42:02.500
फलाने का प्रसाद नहीँ कहा जाता है ।

86
00:42:20.130 --> 00:42:34.099
सहयोग मिलता है , अच्छी बात है लेकिन सहयोग दिलाने वाला दाता तो नहीँ भूले ना !

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00:42:45.400 --> 00:42:55.199
तो पक्का-पक्का बर्थ डे का व्रत रखा है ?

88
00:42:56.530 --> 00:43:00.829
वृत्ति बदल गई है ?

89
00:43:13.300 --> 00:43:38.030
सम्पन्न पवित्रता , यह सच्चा-सच्चा व्रत लेना वा प्रतिज्ञा करना ।

90
00:43:54.329 --> 00:44:44.300
चेक करो - बड़े-बड़े विकार का व्रत तो रखा है लेकिन छोटे-छोटे उनके बाल-बच्चों से मुक्त हैं ?

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00:44:58.630 --> 00:45:13.159
वैसे भी देखो जीवन में प्रवृत्ति वालों का बच्चों से ज्यादा पोत्रे - धोत्रे से प्यार होता है ।

92
00:45:13.159 --> 00:45:16.960
माताओं का प्यार होता है ना ।

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00:45:20.099 --> 00:45:47.659
तो बड़े बड़े रूप से तो जीत लिया लेकिन छोटे-छोटे सूक्ष्म स्वरूप में वार तो नहीं करते ?

94
00:46:07.630 --> 00:46:25.559
जैसे कई कहते हैं - आसक्ति नहीं है लेकिन अच्छा लगता है ।

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00:46:33.900 --> 00:46:41.400
यह चीज ज्यादा अच्छी लगती है लेकिन आसक्ति नहीं है ।

96
00:46:47.860 --> 00:46:51.159
विशेष अच्छा क्यों लगता ?

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00:47:04.260 --> 00:47:33.099
तो चेक करो छोटे-छोटे रूप में भी अपवित्रता का अंश तो नहीँ रह गया हैं ?

98
00:47:40.460 --> 00:47:49.659
क्योंकि अंश से कभी वंश पैदा हो सकता है ।

99
00:48:21.500 --> 00:49:04.599
कोई भी विकार चाहे छोटे रूप में , चाहे बड़े रूप में आने का निमित्त एक शब्द का भाव है ,

100
00:49:12.059 --> 00:49:19.559
वह एक शब्द है - मैं ।

101
00:49:19.929 --> 00:49:23.159
बॉडीकानसेस का मैं।

102
00:49:35.099 --> 00:50:05.929
इस एक मैं शब्द से अभिमान भी आता है और अभिमान अगर पूरा नहीँ होता

103
00:50:09.960 --> 00:50:23.530
तो क्रोध भी आता है क्योंकि अभिमान की निशानी है -

104
00:50:23.530 --> 00:50:35.599
वह एक शब्द भी अपने अपमान का सहन नहीँ कर सकता ,

105
00:50:47.159 --> 00:50:50.260
इसलिए क्रोध आ जाता ।

106
00:51:02.599 --> 00:51:34.630
तो भगत तो बलि चढाते हैं लेकिन आप आज के दिन जो भी हद का मैं पन हो ,

107
00:51:50.500 --> 00:52:02.400
उसको बाप को देकर समर्पित करो ।

108
00:52:19.460 --> 00:52:36.030
यह नहीँ सोचो करना तो है , बनना तो है … तो तो नहीँ करना ।

109
00:53:05.730 --> 00:53:20.199
समर्थ हो और समर्थ बन समाप्ति करो ।

110
00:53:29.730 --> 00:53:51.230
कोई नई बात नहीँ हैं , कितने कल्प , कितने बार सम्पूर्ण बने हो , याद है ?

111
00:54:00.199 --> 00:54:03.130
कोई नई बात नहीँ हैं ।

112
00:54:06.000 --> 00:54:13.699
कल्प - कल्प बने हो , बनी हुई बन रही है ,

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00:54:15.699 --> 00:54:28.929
सिर्फ रिपीट करना है । बनी को बनाना है , इसलिए कहा जाता है बना बनाया ड़ामा ।

114
00:54:33.699 --> 00:54:43.900
बना हुआ है सिर्फ अभी रिपीट करना अर्थात् बनाना है ।

115
00:54:48.199 --> 00:54:54.199
मुश्किल है कि सहज है ?

116
00:54:59.329 --> 00:55:12.760
बापदादा समझते है संगमयुग का वरदान है - सहज पुरुषार्थ ।

117
00:55:27.400 --> 00:55:47.929
इस जन्म में सहज पुरुषार्थ के वरदान से 21 जन्म सहज जीवन स्वतः ही प्राप्त होगी ।

118
00:55:56.130 --> 00:56:10.030
बापदादा हर बच्चे को मेहनत से मुक्त करने आये हैं ।

119
00:56:20.860 --> 00:56:45.800
63 जन्म मेहनत की , एक जन्म परमात्म प्यार , मुहब्बत से मेहनत से मुक्त हो जाओ ।

120
00:56:51.860 --> 00:57:00.630
जहाँ मुहब्बत है वहाँ मेहनत नहीँ , जहाँ मेहनत है वहाँ मुहब्बत नहीँ ।

121
00:57:07.199 --> 00:57:27.860
तो बापदादा सहज पुरुषार्थी भव का वरदान दे रहा है

122
00:58:00.460 --> 00:58:18.559
और मुक्त होने का साधन है - मुहब्बत , बाप से दिल का प्यार ।

123
00:58:22.500 --> 00:58:59.059
प्यार में लवलीन और महामन्त्र है - मनमना भव का मन्त्र ।

124
00:59:09.599 --> 00:59:18.300
तो यन्त्र को काम में लगाओ ।

125
00:59:54.199 --> 00:59:59.659
काम में लगाना तो आता है ना ।

126
01:00:09.900 --> 01:00:55.460
बापदादा ने देखा संगमयुग में परमात्म प्यार द्वारा , बापदादा द्वारा कितनी शक्तियां मिली हैं , गुण मिले हैं , ज्ञान मिला है , खुशी मिली है ,

127
01:01:12.329 --> 01:01:32.260
इन सब प्रभु देन को , खज़ानों को समय पर कार्य में लगाओ ।

128
01:02:05.230 --> 01:02:13.260
तो बापदादा क्या चाहते हैं , सुना ?

129
01:02:14.559 --> 01:02:27.900
हर एक बच्चा सहज पुरुषार्थी , सहज भी , तीव्र भी ।

130
01:02:41.300 --> 01:02:45.559
द्रढ़ता को यूज करो ।

131
01:03:04.929 --> 01:03:15.460
बनना ही है , हम नहीँ बनेंगे तो कौन बनेगा ।

132
01:03:23.329 --> 01:03:40.000
हम ही थे , हम ही हैं और हर कल्प हम ही होंगे ।

133
01:03:45.329 --> 01:04:06.300
इतना दृढ निच्च्य स्वयं में धारण करना ही है ।

134
01:04:07.159 --> 01:04:13.860
करेंगे नहीँ कहना , करना ही हैं ।

135
01:04:18.130 --> 01:04:20.699
होना ही है ।

136
01:04:21.360 --> 01:04:23.300
हुआ पड़ा है ।

137
01:04:41.960 --> 01:04:54.300
बापदादा देश विदेश के बच्चों को देख खुश है ।

138
01:04:54.300 --> 01:05:04.030
लेकिन सिर्फ आप सामने सम्मुख वालों को नहीँ देख रहे हैं ,

139
01:05:10.730 --> 01:05:24.159
चारों ओर के देश और विदेश के बच्चों को देख रहे हैं ।

140
01:05:39.960 --> 01:05:58.329
मैजारिटी जहाँ-तहॉ से बर्थ डे की मुबारक आई हैं ,

141
01:06:00.400 --> 01:06:16.300
कार्ड भी मिले हैं , ई-मेल भी मिलै हैं , दिल का संकल्प भी मिला है ।

142
01:06:35.500 --> 01:06:47.300
बाप भी बच्चों के गीत गाते हैं , आप लोग गीत गाते हो ना -

143
01:06:47.300 --> 01:07:03.130
बाबा आपने कर दी कमाल , तो बाप भी गीत गाते हैं मीठे बच्चों ने कर दी कमाल ।

144
01:07:25.760 --> 01:07:35.360
बापदादा सदा कहते हैं कि आप तो सन्मुख बैठे हो

145
01:07:36.059 --> 01:07:47.030
लेकिन दूर वाले भी बापदादा के दिल पर बैठे हैं ।

146
01:08:04.630 --> 01:08:22.829
आज चारो ओर बच्चों के संकल्प में है - मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

147
01:08:29.399 --> 01:08:45.060
बापदादा के कानो में आवाज पहुंच रहा है और मन में संकल्प पहुंच रहे हैं ।

148
01:08:58.560 --> 01:09:29.560
यह निमित्त कार्ड हैं , पत्र हैं लेकिन बहुत बडे हीरे से भी ज्यादा मूल्यवान गिफ्ट हैं ।

149
01:09:38.729 --> 01:09:44.029
सभी सुन रहे हैं , हर्षित हो रहे हैं ।

150
01:09:55.159 --> 01:10:03.060
तो सभी ने अपना बर्थ डे मना लिया ।

151
01:10:03.060 --> 01:10:13.659
चाहे दो साल का हो , चाहे एक साल का हो , चाहे एक सप्ताह का हो ,

152
01:10:13.659 --> 01:10:26.930
लेकिन यज्ञ की स्थापना का बर्थ डे है ।

153
01:10:29.460 --> 01:10:34.560
तो सभी ब्राह्मण यज्ञ निवासी तो हैं ही ।

154
01:10:41.430 --> 01:11:12.060
इसलिए सभी बच्चों को बहुत-बहुत दिल का यादप्यार भी है , दुआयें भी हैं ,

155
01:11:14.560 --> 01:11:25.630
सदा दुआओं में ही पलते रहो , उड़ते रहो ।

156
01:11:46.729 --> 01:11:53.260
दुआयें देना और लेना सहज है ना !

157
01:11:53.829 --> 01:11:55.930
सहज है ?

158
01:11:56.060 --> 01:11:59.859
जो समझते है सहज है , वह हाथ उठाओ ।

159
01:11:59.859 --> 01:12:03.329
झण्डियां हिलाओ ।

160
01:12:08.199 --> 01:12:13.100
तो दुआयें छोडते तो नहीं ?

161
01:12:16.199 --> 01:12:25.699
सबसे सहज पुरुषार्थ ही है - दुआयें देना , दुआयें लेना ।

162
01:12:30.460 --> 01:12:42.229
इसमें योग भी आ जाता , ज्ञान भी आ जाता , धारणा भी आ जाती , सेवा भी आ जाती ।

163
01:12:47.699 --> 01:12:54.560
चारों ही सबजैक्ट आ जाती है दुआयें देने और लेने में ।

164
01:13:04.029 --> 01:13:11.300
तो डबल फारेनर्स दुआयें देना और लेना सहज है ना !

165
01:13:11.300 --> 01:13:13.300
सहज है ?

166
01:13:16.260 --> 01:13:28.359
2० साल वाले जो आये है वह हाथ उठाओ ।

167
01:13:37.329 --> 01:13:53.460
आपको तो 2० साल हुए हैं लेकिन बापदादा आप सबको पदम गुणा मुबारक दे रहे हैं ।

168
01:14:07.229 --> 01:14:11.460
कितने देशों के आये है ?

169
01:14:20.560 --> 01:14:54.500
( 69 देशों के ) मुबारक हो 69 वाँ बर्थ डे मनाने के लिए 69 देशों से आये हैं ।

170
01:15:14.029 --> 01:15:16.630
कितना अच्छा है ।

171
01:15:19.760 --> 01:15:23.100
आने में तकलीफ तो नहीँ हुई ना ।

172
01:15:23.100 --> 01:15:26.359
सहज आ गये ना !

173
01:15:29.130 --> 01:15:34.300
जहाँ मुहब्बत है वहाँ कुछ मेहनत नहीँ ।

174
01:15:46.829 --> 01:15:56.029
तो आज का विशेष वरदान क्या याद रखेगें ?

175
01:15:57.560 --> 01:16:02.359
सहज पुरुषार्थी ।

176
01:16:05.500 --> 01:16:12.300
सहज कार्य जल्दी-जल्दी किया ही जाता है ।

177
01:16:13.899 --> 01:16:21.199
मेहनत का काम मुश्किल होता है ना तो टाइम लगता है ।

178
01:16:24.060 --> 01:16:26.359
तो सभी कौन हो ?

179
01:16:26.359 --> 01:16:30.560
सहज पुरुषार्थी ।

180
01:16:30.560 --> 01:16:39.430
बोलो , याद रखना ।

181
01:16:39.859 --> 01:16:45.630
अपने देश में जाके मेहनत में नहीँ लग जाना ।

182
01:16:51.630 --> 01:17:10.899
अगर कोई मेहनत का काम आवे भीं तो दिल से कहना , बाबा , मेंरा बाबा , तो मेहनत खत्म हो जायेगी ।

183
01:17:30.829 --> 01:17:34.399
अच्छा ।

184
01:17:34.399 --> 01:17:37.159
मना लिया ना !

185
01:17:38.430 --> 01:17:43.159
बाप ने भी मना लिया आपने भी मना लिया ।

186
01:18:01.800 --> 01:18:03.760
अच्छा ।

187
01:18:08.060 --> 01:18:59.029
डबल विदेशी 6 ग्रुप में अलग अलग भट्टियाँ कर रहे हैं

188
01:19:02.460 --> 01:19:10.859
कुमारियोंसे - एक-एक कुमारी 1०० ब्राह्मणों से उत्तम है ।

189
01:19:18.159 --> 01:19:35.460
तो चेक करना जो गायन है हर एक कुमारी को कम से कम 1०० ब्राह्मण जरूर बनाने पड़ेगे ।

190
01:19:41.829 --> 01:19:44.000
बनायेंगे ?

191
01:19:44.000 --> 01:19:46.359
बनाना है ।

192
01:19:46.359 --> 01:19:48.899
हाँ तो हाथ हिलाओ ।

193
01:19:53.659 --> 01:19:57.000
कितने समय में बनायेंगे ?

194
01:20:06.600 --> 01:20:15.229
समय नजदीक है ना , तो आप बताओ कितना समय चाहिए ?

195
01:20:16.000 --> 01:20:19.729
रिजल्ट भेजनी पडेगी ।

196
01:20:20.300 --> 01:20:24.899
( एक साल में ) एक साल !

197
01:20:30.199 --> 01:20:40.399
आपको एक साल कलियुगी दुनिया में रहना है !

198
01:20:46.159 --> 01:20:52.159
चलो , आपके मुख में गुलाबजामुन ।

199
01:20:59.029 --> 01:21:23.130
तो 6 मास में 5० बनाना , एक साल में 1०० , तो 6 मास में 5० , 6 मास के बाद रिपोर्ट भेजना , पसन्द है ?

200
01:21:24.000 --> 01:21:33.159
क्या नहीँ कर सकते हो , जो चाहो वह कर सकते हो ।

201
01:21:36.300 --> 01:21:42.329
अच्छा है कुमारियोँ का ग्रुप अच्छा है ।

202
01:21:45.659 --> 01:22:09.960
बापदादा कुमारियोँ को देख विशेष खुश होता है क्योंकि कुमारियां सेवा में सहयोगी नम्बरवन बन सकती हैं।

203
01:22:18.659 --> 01:22:22.560
अच्छा । बहुत अच्छा किया है ।

204
01:24:06.800 --> 01:24:19.029
कुमार ग्रुप - ( गीत गाया - मै बाबा का , बाबा मेरा ) अच्छा है , कुमार , डबल कुमार हो गये हो ।

205
01:24:19.729 --> 01:24:41.060
एक दुनिया के हिसाब से भी कुमार हो और इस ब्राह्मण जीवन में भी ब्रह्माकुमार हो ।

206
01:24:42.399 --> 01:24:45.060
तो डबल कुमार हो ।

207
01:24:54.029 --> 01:24:58.399
तो डबल काम करना पडेगा ।

208
01:25:03.659 --> 01:25:07.529
करेंगे ? हुआ ही पड़ा है ।

209
01:25:09.300 --> 01:25:16.760
दृढ़ संकल्प किया और सफलता हुई पडी है ।

210
01:25:23.060 --> 01:25:25.460
अच्छा ।

211
01:25:25.460 --> 01:25:33.500
सभी ने बहुत अच्छे बैनर बनाये हैं ।

212
01:25:34.260 --> 01:26:08.829
( हर ग्रुप अपना - अपना बैनर बापदादा को दिखा रहा है )

213
01:26:37.600 --> 01:26:41.529
माताओं से - बहुत अच्छा ।

214
01:26:41.529 --> 01:26:53.760
बापदादा देख रहे हैं माताओं में बहुत अच्छा उमंग-उत्साह है ।

215
01:26:41.529 --> 01:27:07.300
इसलिए बापदादा ने माताओं को ही निमित्त बनाया है ।

216
01:27:18.029 --> 01:27:23.029
बहुत अच्छा बापदादा को पसन्द है ।

217
01:27:44.029 --> 01:27:58.960
अधर कुमार - अधर कुमार भी कमाल करेंगे ।

218
01:28:00.560 --> 01:28:26.829
हर एक अधरकुमार अपना परिवर्तन का अनुभव सुनाकर सभी को बाप के समीप का बना सकते हैं

219
01:28:28.029 --> 01:28:45.430
क्योंकि दुनिया वाले समझते हैं कि अधरकुमार जीवन बहुत मुश्किल है

220
01:28:45.430 --> 01:28:54.560
लेकिन आप सभी नं मुश्किल को सहज बनाया है ।

221
01:29:03.100 --> 01:29:14.300
बस सिर्फ अपना अनुभव सुनाते जाओ , ऐसे मुश्किल को मिटा सकते हो ।

222
01:29:15.460 --> 01:29:32.899
एक शब्द का अन्तर करने से , गृहस्थी से ट्रस्टी बनने से मुश्किल से सहज हो जाता है ।

223
01:29:35.930 --> 01:29:49.500
तो ऐसे अधरकुमार सेवा में सफलता प्राप्त है और होती रहेगी ।

224
01:29:52.430 --> 01:29:55.159
अच्छा ।

225
01:29:58.300 --> 01:30:34.600
युगलों से - ( बैनर दिखा रहे है ) लक्ष्मी-नारायण का सिम्बल अच्छा बनाया है ।

226
01:30:43.529 --> 01:30:48.899
आप तो विजयी रत्नो में हैं ।

227
01:30:49.630 --> 01:30:56.800
साथ रहते न्यारे और प्यारे ।

228
01:30:59.529 --> 01:31:14.500
युगलों को बापदादा कहते हैं यह कमल पुथ समान न्यारे और प्यारे हैं ।

229
01:31:17.430 --> 01:31:35.359
रहते भी साकार में आपस में परिवार में रहते लेकिन मन से सदा बाप के साथ रहते हैं ।

230
01:31:38.529 --> 01:31:41.260
बहुत अच्छा ।

231
01:31:42.199 --> 01:32:04.529
सभी डबल फारेनर्स ने रिफ्रेशमेंट अच्छी ली है , अभी ली हुई रिफ्रेशमेंट औरो को देनी है ।

232
01:32:06.529 --> 01:32:10.500
मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

233
01:32:20.260 --> 01:33:01.359
सेन्टर वासी - ( बैनर - प्रेम और दया की ज्योति जगा कर रखेंगे ) बहुत अच्छा संकल्प लिया है ।

234
01:33:04.600 --> 01:33:22.800
अपने पर भी दया दृष्टि , साथियोँ के ऊपर भी दया दृष्टि और सर्व के ऊपर भी दया दृष्टि ।

235
01:33:26.130 --> 01:33:44.930
ईश्वरीय लव चुम्बक है , तो आपके पास ईश्वरीय लव का चुम्बक है ।

236
01:33:47.899 --> 01:34:06.729
किसी भी आत्मा को ईश्वरीय लव के चुम्बक से बाप का बना सकते हो ।

237
01:34:08.729 --> 01:34:29.159
बापदादा सेन्टर पर रहने वालों को विशेष दिल की दुआयें देते हैं ,

238
01:34:39.460 --> 01:34:49.130
जो आप सभी ने विश्व में नाम बाला किया है ।

239
01:35:00.300 --> 01:35:14.100
कोने-कोने में ब्रह्माकुमारीज का नाम तो फैलाया है ना !

240
01:35:19.659 --> 01:35:35.229
और बापदादा को बहुत अच्छी बात लगती है

241
01:35:36.829 --> 01:35:47.859
कि जैसे डबल विदेशी हो , वैसे डबल जॉब करने वाले हो ।

242
01:35:47.859 --> 01:36:00.760
मैजारिटी लौकिक जॉब भी करते हैं तो अलौकिक जॉब भी करते हैं

243
01:36:03.760 --> 01:36:19.760
और बापदादा देखते हैं , बापदादा की टीवी बहुत बडी है , ऐसी बड़ी टी वी यहाँ नहीँ है ।

244
01:36:21.760 --> 01:36:44.100
तो बापदादा देखते हैं कैसे फटाफट क्लास करते , नाश्ता खड़े-खड़े करते , जॉब में टाइम पर पहुंचते , कमाल करते हैं ।

245
01:36:46.659 --> 01:36:55.659
बापदादा देखते-देखते दिल का प्यार देते रहते हैं ।

246
01:36:58.600 --> 01:37:24.560
बहुत अच्छा , सेवा के निमित्त बने हो और निमित्त बनने की गिफ्ट बाप सदा विशेष दृष्टि देते रहते है ।

247
01:37:31.100 --> 01:37:41.930
बहुत अच्छा लक्ष्य रखा हैं , अच्छे हो , अच्छे रहेंगे , अच्छे बनायेंगे ।

248
01:37:47.500 --> 01:38:06.199
आई टी ग्रुप

249
01:38:13.199 --> 01:38:28.399
सेवा का कोई नया प्लैन बनाया है ?

250
01:38:42.699 --> 01:39:27.729
( व्रह्माकुमारीज वेबसाइट को और अच्छा बवनाना है , जो विश्व में वापदादा को प्रत्यक्ष करने की सेवा में यूज किया जा सके ) जो बनाया है , वह प्रैक्टिकल करके रिजल्ट लिखना ।

251
01:39:28.829 --> 01:39:39.760
जैसे अफ्रीका वालो ने रिजल्ट लिखी ना , ऐसे आप लोग भी रिजल्ट भेजना ।

252
01:39:39.760 --> 01:39:48.729
मुबारक हो बनाया , उमंग है , उत्साह है ।

253
01:39:50.729 --> 01:39:58.100
जहाँ उमंग-उत्साह है , वहाँ सफलता है ही है ।

254
01:39:59.630 --> 01:40:01.800
बहुत अच्छा किया ।

255
01:40:32.199 --> 01:40:39.359
सेवा का टर्न राजस्थान और यु पी जोन

256
01:40:58.359 --> 01:41:09.300
अच्छा है , रूहानी लश्कर है ।

257
01:41:15.659 --> 01:41:32.000
बहुत अच्छा , सेवा दिल से की भी है और सभी को सन्तुष्ट भी किया है ।

258
01:41:34.000 --> 01:41:58.960
तो जो सन्तुष्ट करता है उसको दिल से जो सन्तुष्टता की लहरे पहुचती हैं , उससे बहुत खुशी होती है ।

259
01:42:01.159 --> 01:42:05.229
तो बहुत खुशी मिली है ना ।

260
01:42:06.529 --> 01:42:23.229
आपने स्थूल सेवा की और सभी भाई बहिनों ने आपको खुशी की सौगात दी है ।

261
01:42:25.100 --> 01:42:32.430
सन्तुष्टता सबसे बडी खुशी की खुराक है ।

262
01:42:34.930 --> 01:42:43.300
सारा ग्रुप सन्तुष्टमणियोँ का हो गया ।

263
01:42:43.300 --> 01:42:48.600
सन्तुष्ट करने वाले सन्तुष्टमणि ।

264
01:42:50.100 --> 01:43:02.460
सन्तुष्टमणियोँ को बापदादा और सारे परिवार की मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

265
01:43:11.300 --> 01:43:43.029
अच्छा - भारत की मातायें देख रही है , हमारा नाम नहीँ लिया बाबा ने ।

266
01:43:53.760 --> 01:44:10.529
बापदादा कहते है कि जहाँ भी मातायें होती है ना , तो माताओं की विशेषता है

267
01:44:11.100 --> 01:44:24.659
कि उस स्थान का भण्डारा और भण्डारी भरपूर होती है ।

268
01:44:32.699 --> 01:44:41.529
माताओं को वरदान है , फुरी - फुरी ( बूंद-बूंद ) तलाब भरने का ।

269
01:44:45.229 --> 01:44:57.659
तो मातायें बहुत भाग्यवान है , बाप की भण्डारी भर देती है ।

270
01:45:04.600 --> 01:45:07.560
भण्डारा भी भर जाता है ।

271
01:45:11.500 --> 01:45:19.100
इसलिए माताओं को बहुत-बहुत मुबारक है ।

272
01:45:25.699 --> 01:45:31.729
अच्छा - भाई भी कम नहीं है ।

273
01:45:38.960 --> 01:45:48.229
देखो जहाँ भाई हैं ना , वहाँ सेवा को चार चाँद लग जाते हैं ।

274
01:46:00.899 --> 01:46:09.859
भाइयोँ द्वारा आलराउण्ड सेवा होती है ।

275
01:46:15.829 --> 01:46:34.859
भण्डारा भरपूर तो करते ही है , लेकिन सेवा बढाने के निमित्त विशेष भाई निमित्त बनते हैं ।

276
01:46:42.659 --> 01:46:52.229
तो सेवा की रौनक बढाने वाले भाई हैं ।

277
01:46:56.960 --> 01:47:20.300
इसलिए बापदादा सभी माताओं को , सभी भाइयोँ को बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं ।

278
01:47:28.600 --> 01:47:36.229
भले पधारे अपने घर में ।

279
01:47:38.359 --> 01:47:53.930
देखो हाल की रौनक कौन बढाता है आप बच्चे जब आते हैं तो डायमण्ड हाल , डायमण्ड बन जाता है ।

280
01:48:04.000 --> 01:48:07.800
अच्छा दृश्य लगता है ।

281
01:48:14.859 --> 01:48:22.000
अच्छा है दादी को डायमण्ड हाल बहुत पसन्द आ गया है ।

282
01:48:31.430 --> 01:48:36.359
अच्छा , नचाती अच्छा है ।

283
01:48:38.500 --> 01:48:51.729
खुश हो जाते हो ना , जब दादी आके नचाती है तो खुश हो जाते हैं ।

284
01:49:00.500 --> 01:49:03.430
बहुत अच्छा ।

285
01:49:15.159 --> 01:49:24.960
अभी एक सेकण्ड में ड्रिल कर सकते हो ?

286
01:49:26.960 --> 01:49:29.630
कर सकते हो ना ।

287
01:51:28.500 --> 01:51:31.100
अच्छा ।

288
01:51:32.630 --> 01:51:54.829
चारों ओर के सदा उमंग-उत्साह में रहने वाले श्रेष्ठ बच्चों को ,

289
01:51:58.159 --> 01:52:21.229
सदा सहज पुरुषार्थी संगमयुग के सर्व बरदानी बच्चों को ,

290
01:52:23.329 --> 01:52:52.300
सदा बाप और मैं आत्मा इसी स्मृति से मैं बोलने वाले ,

291
01:52:56.630 --> 01:53:33.300
मैं आत्मा , सदा सर्व आत्माओं को अपने वृत्ति से वायुमण्डल का सहयोग देने वाले

292
01:53:36.760 --> 01:54:11.729
ऐसे मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को बापदादा का यादप्यार , दुआयें , मुबारक और नमस्ते ।

293
01:54:41.659 --> 01:54:46.060
दादियोंसे :-

294
01:54:47.399 --> 01:54:52.430
आप सबसे मधुबन की रौनक है ।

295
01:54:57.430 --> 01:55:08.829
विशेष आज बाप के साथ उसी समय अवतरण तो आपका भी है ।

296
01:55:14.199 --> 01:55:24.529
विशेष आप सबका है , आदि रत्नो का आदि समय में अवतरण है ।

297
01:55:28.199 --> 01:55:33.329
तो आप लोगों को विशेष मुबारक है ।

298
01:55:33.729 --> 01:55:41.100
हैपी बर्थ डे है ।

299
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एक गीत है ना - आप मधुबन की रौनक हैं ।

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आदि से कुछ तो चल गये , लेकिन आप अमर हो ।

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( बाबा की दुआयें है , सबकी दुआयें है ) यह अच्छा है , ऊपर ही हाथ जाता है नीचे नहीं जाता है ।

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अच्छा है ।

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दादियोँ को देखकर सभी खुश होते हो ना !

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ग्रुप-ग्रुप बनाया है ना तो मेहनत अच्छी की है ।

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और यहाँ वायुमण्डल भी अच्छा है , संगठन की भी शक्ति है , तो सबको रिफ्रेशमेंट अच्छी मिल जाती है और आप निमित्त बन जाते हो ।

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अच्छा है ।

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दूर-दूर रहते हैं ना , तो संगठन की जो शक्ति होती है वह भी बहुत अच्छी है ।

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इतना सारा परिवार इकट्ठा होता है तो हर एक की विशेषता का प्रभाव तो पडता है ।

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अच्छा प्लैन बनाया है ।

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बापदादा खुश है ।

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सबकी खुशबू आप ले लेते हो ।

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वह खुश होते हैं आपको दुआयें मिलती हैं ।

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अच्छा है , यह जो सभी इकट्ठे हो जाते हो यह बहुत अच्छा है , आपस में लेन देन भी हो जाती है और रिफ्रेशमेंट भी हो जाती है ।

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एक दो की विशेषता जो अच्छी पसन्द आती है , उसको यूज करते है , इससे सगठन अच्छा हो जाता है ।

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यह ठीक है ।

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जयन्ती बहन से :-

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अभी थोडा-थोड़ा सेवा में पार्ट लिया क्योंकि खुशी मिलेगी । सबकी दुआयें , वह भी दवा का काम करेगी ।

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बहुत अच्छा ।

