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आज बापदादा सर्व बच्चों के मस्तक में प्युरिटी की रेखायें देख रहे हैं

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क्योंकि ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन ही है पवित्रता ।

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00:16:57.230 --> 00:17:47.430
पवित्रता की रेखायें कौन-सी हैं , जानते हो ?

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पवित्रता सर्व को प्रिय है ।

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पवित्रता सुख , शान्ति , प्रेम , आनन्द की जननी है ।

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पवित्रता मानव का सच्चा श्रृंगार है ।

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पवित्रता नहीं तो मानव जीवन का मूल्य नहीं ।

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जैसे देखते हो देवतायें पवित्र हैं ,

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00:20:20.299 --> 00:20:32.759
इसलिए ही माननीय और पूजनीय हैं ।

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00:20:40.700 --> 00:21:01.329
पवित्रता नहीं तो मानव जीवन को आजकल देख रहे हो ।

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00:21:14.359 --> 00:21:50.430
बापदादा ने आप सभी बच्चों को बाह्मण जन्म का वरदान यही दिया - पवित्र भव , योगी भव ।

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00:21:55.000 --> 00:22:29.359
जिस आत्मा में पवित्रता है , उसकी चाल , चलन , चेहरा चमकता है

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इसलिए पवित्रता ही जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली है ।

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वास्तव में आपसब बच्चों का आदि स्वरूप ही पवित्रता है ।

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अनादि स्वरूप भी पवित्रता है ।

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ऐसी पवित्र आत्माओं की विशेषतायें उनकी जीवन में सदा पवित्रता की पर्सनैलिटी दिखाई देती है ।

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पवित्रता की रियलिटी , पवित्रता की रॉयल्टी चेहरे और चाल में दिखाई देती है ।

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यह रेखायें जीवन का श्रृंगार है ।

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रीयल्टी है मेरा अनादि-आदि स्वरूप पवित्र है , यह स्मृति समर्थ बना देती है ।

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रॉयल्टी है - स्वयं भी स्वमान में और हर एक को सम्मान देकर चलने वाला ।

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पर्सनैलिटी है सदा सन्तुष्टता और प्रसन्नता ।

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स्वयं भी सन्तुष्ट और अन्य को भी सन्तुष्ट करने वाले ।

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पवित्रता से प्राप्तियाँ भी बहुत है ।

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बापदादा ने आप सभी बच्चों को क्या-क्या प्राप्ति कराई है , वह जानते हो ना !

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कितने खज़ानों से भरपूर किया है ।

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अगर प्राप्तियों को स्मृति में रखें तो भरपूर हो जायें ।

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सबसे पहला खज़ाना दिया है - ज्ञान का खज़ाना ।

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जिससे जीवन में रहते दुख-अशान्ति से मुक्त हो जाते ।

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व्यर्थ संकल्प , निगेटिव संकल्प , विकल्प , विकर्म से मुक्त हो जाते हैं ।

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अगर कोई भी व्यर्थ संकल्प व विकल्प आता भी है , तो ज्ञान के बल से विजयी बन जाते हैं ।

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दूसरा खज़ाना है - याद , योग ।

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जिससे शक्तियों की प्राप्ति होती है और शक्तियों के आधार से सर्व समस्याओं को , सर्व विघ्नों को सहज पार कर लेते हैं ।

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तीसरा खज़ाना है - धारणाओं का , जिससे सर्वगुणों की प्राप्ति होती है ।

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और चौथा खज़ाना है - सेवा का ।

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सेवा करने से , जिसकी सेवा करते हो उसकी दुआयें मिलती है , खुशी प्राप्त होती हैं ।

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इतने खज़ाने बाप से आप सभी बच्चों को प्राप्त होते हैं ।

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बाप सभी को एक जैसे ही खज़ाने देते हैं ।

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00:34:23.829 --> 00:34:29.800
कोई को कम , कोई को ज्यादा नहीं देते हैं ।

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00:34:32.260 --> 00:34:47.530
लेकिन लेनेवालों में फर्क हो जाता है ।

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कोई बच्चे तो खज़ाने को प्राप्त कर खाते , पीते , मौज करते और फिर मौज में खत्म कर देते हैं ।

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और कोई बच्चे खाते , पीते , मौज करते जमा भी करते हैं ।

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और कोई बच्चे कार्य में भी लगाते और बढाते भी जाते हैं ।

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बढाने की चाबी है - खज़ाने को स्व के प्रति और दूसरों के प्रति यूज करना ।

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जो यूज करता है वह बढ़ाता है ।

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तो अपने आपसे पूछो कि यह विशेष खज़ाने जमा हैं ?

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00:37:47.199 --> 00:37:49.929
जमा हैं ?

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क्या कहेंगे ?

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00:37:53.260 --> 00:37:56.829
हाँ या थोड़ा-थोड़ा ?

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जिसके पास यह खज़ाने जमा हैं वह सदा भरपूर रहता है ।

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देखो कोई भी चीज़ भरपूर रहती है ना , तो हलचल नही होती है ।

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00:38:46.400 --> 00:38:54.130
अगर भरपूर नहीं होती तो हलचल होती है , हिलती है ।

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कोई भी चीज़ को अगर पूरी रीति से भर नहीं दो तो वह हिलती है , तो यहाँ भी अगर सर्व खज़ानों से भरपूर नही हैं , तो हलचल होती है ।

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सदा यह नशा रहे कि बाप के खज़ाने मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है ।

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00:40:01.360 --> 00:40:12.360
बाप ने दिया , आपने लिया तो सब खज़ाने किसके हुए ?

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आपके हो गये ना ।

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00:40:21.900 --> 00:40:36.730
तो जिसके पास खज़ाने हैं , वह कितना नशे में रहता है ?

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00:40:41.000 --> 00:40:51.030
जैसे छोटा-सा राजा का लड़का राजकुमार होता है ।

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00:40:52.659 --> 00:41:00.460
पता भी नही होता है कि बाप के पास क्या-क्या खज़ाना है

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00:41:00.929 --> 00:41:28.860
लेकिन नशा रहता है कि बाप के खज़ाने मेरे खज़ाने हैं और खज़ाने की खुशी में रहता है ।

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00:41:41.000 --> 00:41:49.829
अगर खुशी कम रहती है तो उसका कारण क्या होता है ?

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00:41:52.929 --> 00:42:00.530
बाप ने तो खज़ाने दिये हैं , सुना ।

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00:42:02.159 --> 00:42:15.699
लेकिन एक हैं सुननेवाले , दूसरे हैं समानेवाले ।

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जो समानेवाले हैं वह नशे में रहते हैं ।

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आज नये-नये बच्चे भी आये हैं ।

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बापदादा आप लक्की बच्चों को आप सबके भाग्य की मुबारक दे रहे हैं ।

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अपने भाग्य को पहचाना ।

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00:43:42.329 --> 00:43:46.599
पहचाना है ?

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परमात्म-प्यार , अविनाशी प्यार जो सिर्फ एक जन्म नहीं चलता , अनेक जन्म सदा ही प्यार कायम रहता है

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00:44:41.360 --> 00:45:01.760
क्योकि यह जो समय चल रहा है , यह समय भी संगमयुग भाग्यवान युग है ।

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00:45:07.800 --> 00:45:29.329
सतयुग को भी भाग्यवान कहते हैं लेकिन वर्तमान संगमयुग का समय उससे भी भाग्यवान है ।

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00:45:33.659 --> 00:45:35.730
क्यों ?

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00:45:37.730 --> 00:46:02.429
इस सगमयुग में ही बाप द्वारा अखण्ड भाग्य का वरदान , वर्सा प्राप्त होता है ।

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तो ऐसे संगमयुग में , भाग्यवान समय में आप सभी अपना भाग्य लेने के लिए पहुँच गये हो ।

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00:46:40.630 --> 00:47:11.900
बापदादा बच्चों को बहुत एक सहज पुरुषार्थ की विधि सुनाते हैं - सहज चाहते हो ना ।

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00:47:12.199 --> 00:47:15.829
मुश्किल तो नहीं चाहते हो ना ।

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00:47:20.760 --> 00:47:29.159
इन बच्चों को तो भाग्य की सहज विधि मिल गई है ।

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00:47:29.159 --> 00:47:31.159
मिली है ना ?

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00:47:33.000 --> 00:47:48.460
सबसे सहज , और कुछ भी नही करना , सिर्फ एक बात करना ।

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00:47:48.460 --> 00:47:52.730
एक बात तो कर सकते हो ना !

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00:47:52.730 --> 00:47:58.929
हाँ करो या ना करो ।

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00:47:58.929 --> 00:48:04.730
कहो हाँ जो ।

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00:48:05.159 --> 00:48:41.400
तो सबसे सहज विधि है - अमृतवेले से लेके सबको जो भी मिले , उससे दुआयें लो और दुआयें दो ।

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00:48:44.860 --> 00:49:16.030
चाहे क्रोधी भी आवे , लेकिन आप उसको भी दुआयें दो और दुआयें लो

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00:49:21.059 --> 00:49:37.199
क्योंकि दुआयें तीव्र पुरुषार्थ का बहुत सहज यन्त्र है ।

85
00:49:39.000 --> 00:49:52.059
जैसे साइन्स में रॉकेट है ना , तो कितना जल्दी कार्य कर लेता है ।

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00:49:52.429 --> 00:50:16.429
ऐसे दुआयें देना और दुआयें लेना , यह भी एक बहुत सहज साधन है आगे बढ़ने का ।

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00:50:21.230 --> 00:50:44.500
अमृतवेले बाप से सहज याद से दुआयें लो और सारा दिन दुआयें दो और दुआयें लो ।

88
00:50:45.530 --> 00:50:48.460
यह कर सकते हो ?

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00:50:49.000 --> 00:50:55.199
कर सकते हो तो हाथ उठाओ ।

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00:50:57.860 --> 00:51:03.630
कोई बददुआ दे तो क्या करेंगे ?

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00:51:08.099 --> 00:51:12.829
आपको बार-बार तंग करे तो ?

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00:51:18.829 --> 00:51:33.500
देखो , आप परमात्मा के बच्चे दाता के बच्चे दाता हो ना ?

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00:51:33.500 --> 00:51:36.130
मास्टर दाता तो हो ।

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00:51:37.659 --> 00:51:42.199
तो दाता का काम क्या होता है ?

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00:51:42.199 --> 00:51:44.199
देना ।

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00:51:45.860 --> 00:51:54.260
तो सबसे अच्छी चीज़ है दुआयें देना ।

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कैसा भी व्यक्ति हो , लेकिन है तो आपका भाई-बहन ।

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00:52:18.199 --> 00:52:23.030
परमात्मा के बच्चे तो भाई-बहन हो ना ।

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00:52:25.730 --> 00:52:39.760
तो परमात्मा का बच्चा है , मेरा ईश्वरीय भाई है , ईश्वरीय बहन है , उसको क्या देंगे ?

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00:52:40.460 --> 00:52:43.659
बददुआ देंगे क्या ?

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00:52:44.630 --> 00:52:48.530
बाप कभी बद्दुआ देता है ?

102
00:52:48.530 --> 00:52:50.530
देगा ?

103
00:52:50.530 --> 00:52:52.530
देता है ?

104
00:52:53.130 --> 00:52:55.059
हाँ या ना ?

105
00:52:57.300 --> 00:52:59.800
हाँ-ना करो ।

106
00:53:05.760 --> 00:53:09.730
बहुत खुश रहेंगे ।

107
00:53:14.730 --> 00:53:16.329
क्यों ?

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00:53:19.059 --> 00:53:38.099
अगर बद्दुआ वाले को भी आप दुआ देंगे , वह दे न दे , लेकिन आप दुआ लेंगे , तो दुःख क्यों होगा ।

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00:53:41.329 --> 00:53:54.929
बापदादा आप आये हुए बच्चों को एक वरदान देता है -

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00:53:59.900 --> 00:54:11.659
वरदान याद रखेंगे तो सदा खुश रहेंगे ।

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वरदान सुनेंगे ?

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सुनेंगे ।

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00:54:21.800 --> 00:54:44.800
वरदान है - अगर आपको कोई दुख दे तो भी आप दुख लेना नहीं ।

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00:54:44.800 --> 00:54:51.460
वह दे लेकिन आप नही लेना ।

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00:54:53.800 --> 00:55:01.329
क्योंकि देनेवाले ने दे दिया , लेकिन लेनेवाले तो आप हो ना ।

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00:55:02.929 --> 00:55:07.829
देनेवाला , लेनेवाला नहीं है ।

117
00:55:11.429 --> 00:55:22.400
अगर वह बुरी चीज़ देता है , दुख देता है , अशान्ति देता है , तो बुरी चीज़ है ना ।

118
00:55:23.260 --> 00:55:25.960
आपको दुख पसन्द है ?

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00:55:25.960 --> 00:55:28.829
नहीं पसन्द है ना ।

120
00:55:30.699 --> 00:55:32.800
तो बुरी चीज़ हो गई ना ।

121
00:55:32.800 --> 00:55:36.960
तो बुरी चीज़ ली जाती है क्या ?

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00:55:39.500 --> 00:55:45.599
कोई आपको बुरी चीज़ देवे तो आप ले लेंगे ?

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लेंगे ?

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नही लेंगे ।

125
00:55:53.400 --> 00:55:55.730
तो लेते क्यों हो ?

126
00:55:57.760 --> 00:56:01.400
ले तो लेते हो ना ।

127
00:56:07.530 --> 00:56:14.559
अगर दुख ले लेते हो तो दुःखी कौन होता है ?

128
00:56:14.559 --> 00:56:18.460
आप होते हो या वह होता है ?

129
00:56:20.000 --> 00:56:24.159
लेने वाला ज्यादा दुःखी होता है ।

130
00:56:28.530 --> 00:56:44.400
अगर अभी से दुःख लेंगे नहीं तो आधा दुःख तो आपका दूर हो गया ।

131
00:56:44.400 --> 00:56:47.199
लेंगे ही नहीं ना ।

132
00:56:51.599 --> 00:57:03.800
और आप दुःख के बजाए उसको सुख देंगे तो दुआयें मिलेगी ना ।

133
00:57:06.329 --> 00:57:18.599
तो सुखी भी रहेंगे और दुआओं का खज़ाना भी भरपूर होता जायेगा ।

134
00:57:23.730 --> 00:57:35.929
हर आत्मा से , कैसी भी हो आप दुआयें लो ।

135
00:57:37.599 --> 00:57:47.760
शुभभावना , शुभकामना रखो ।

136
00:57:52.230 --> 00:57:55.800
कभी-कभी क्या होता है ?

137
00:57:56.599 --> 00:58:07.059
कोई ऐसा काम करता है ना , तो कोशिश करते हैं शिक्षा देने की ।

138
00:58:07.059 --> 00:58:12.730
इसको ठीक कर दूँ , शिक्षा देते हो ।

139
00:58:12.730 --> 00:58:33.130
शिक्षा दो लेकिन शिक्षा देने की सर्वोत्तम विधि है कि क्षमा का रूप बनके शिक्षा दो ।

140
00:58:34.500 --> 00:58:45.000
सिर्फ शिक्षा नहीं दो , रहम-क्षमा भी करो और शिक्षा भी दो ।

141
00:58:45.000 --> 00:58:54.559
दो शब्द याद रखो - शिक्षा और क्षमा-रहम ।

142
00:58:57.400 --> 00:59:08.230
अगर रहमदिल बनके उसको शिक्षा देंगे तो आपकी शिक्षा काम करेगी ।

143
00:59:09.130 --> 00:59:22.400
अगर रहमदिल बनके नहीं देंगे , तो शिक्षा एक कान से सुनेंगे दूसरे कान से निकल जायेगी ।

144
00:59:25.130 --> 00:59:28.599
शिक्षा धारण नहीं होगी ।

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00:59:30.860 --> 00:59:32.429
ऐसे है ना ?

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00:59:32.429 --> 00:59:34.030
अनुभव है ?

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00:59:36.130 --> 00:59:39.429
आप भी किसीका शिक्षक तो नही बन जाते ?

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00:59:39.429 --> 00:59:52.030
शिक्षक बनना जल्दी आता है लेकिन क्षमा करना , दोनों साथ-साथ चाहिए ।

149
00:59:56.159 --> 01:00:02.530
अभी से रहम ।

150
01:00:03.460 --> 01:00:11.599
रहम करने की विधि है शुभभावना , शुभकामना ।

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01:00:21.760 --> 01:00:35.260
जैसे कहते हैं ना सच्चा प्यार पत्थर को भी पानी कर देता है ,

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01:00:36.300 --> 01:01:04.599
ऐसे ही क्षमा स्वरूप से शिक्षा देने से आपका कार्य जो चाहते हो , यह नही करे , यह नहीं हो , वह प्रत्यक्ष दिखाई देगा ।

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01:01:09.000 --> 01:01:23.659
आपके रहमदिल बन शिक्षा देने का प्रभाव उसकी कठोरदिल भी परिवर्तन हो जायेगी ।

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01:01:32.230 --> 01:01:35.659
तो क्या वरदान मिला ?

155
01:01:35.659 --> 01:01:43.230
न दुःख देना , न दुःख लेना ।

156
01:01:46.329 --> 01:01:50.800
पसन्द है ?

157
01:01:50.800 --> 01:01:57.829
पसन्द है तो अभी लेना नहीं ।

158
01:01:57.829 --> 01:02:00.599
गलती नही करना ।

159
01:02:05.400 --> 01:02:14.860
जब बाप दुःख नहीं देता तो फालो फादर तो करना है ना ?

160
01:02:15.500 --> 01:02:18.329
कर रहे हैं ।

161
01:02:18.329 --> 01:02:24.000
कभी-कभी थोड़ा डाँट देते हो ।

162
01:02:25.360 --> 01:02:27.659
डाँटना नहीं ।

163
01:02:27.960 --> 01:02:30.059
रहम करो ।

164
01:02:30.559 --> 01:02:33.900
रहम के साथ शिक्षा दो ।

165
01:02:38.599 --> 01:02:50.860
बार-बार किसको डाँटने से और ही आत्मा जो है ना , वह दुश्मन बन जाती है ।

166
01:02:53.800 --> 01:02:56.400
घृणा आ जाती है ।

167
01:03:02.929 --> 01:03:07.400
परमात्म बच्चे हो ना ।

168
01:03:08.800 --> 01:03:23.599
तो जैसे बाप पतित को भी पावन बनाने वाला है , तो आप दुःखी को सुख नही दे सकते हो ?

169
01:03:32.230 --> 01:03:41.030
अभी जाकर ट्रायल करना , ट्रायल करेंगे ना ।

170
01:03:42.159 --> 01:03:47.860
तो पहले चैरिटी बिगन्स एट होम ।

171
01:03:49.360 --> 01:04:02.260
परिवार में अगर कोई दुःख देवे , तो भी दुःख लेना नहीं ।

172
01:04:04.260 --> 01:04:08.300
दुआयें देना , रहमदिल बनना ।

173
01:04:08.300 --> 01:04:11.800
पहले घरवालों पर करो ।

174
01:04:13.000 --> 01:04:34.199
आपके घर का प्रभाव मोहल्ले में पड़ेगा , मोहल्ले का प्रभाव देश में पड़ेगा , १ देश का प्रभाव विश्व में पड़ेगा ।

175
01:04:38.000 --> 01:04:40.429
सहज है ना ।

176
01:04:40.429 --> 01:04:58.400
अपने परिवार में शुरू करो क्योंकि देखो एक भी अगर क्रोध करता है तो घर का वातावरण क्या हो जाता है ?

177
01:05:01.000 --> 01:05:07.760
घर लगता है या युद्ध का मैदान लगता है ?

178
01:05:10.030 --> 01:05:13.000
उस समय अच्छा लगता है ?

179
01:05:13.000 --> 01:05:16.099
नहीं लगता है ना ?

180
01:05:22.860 --> 01:05:33.500
आप लोगों के लिए भी है (आज वी. आई.पी. के साथ मधुबन वाले समर्पित भाई-बहनें भी सामने बैठे हैं)।

181
01:05:34.860 --> 01:05:55.429
अपने-अपने साथियों से , अपने-अपने कार्यकर्ताओं से न दुख लेना , न दुःख देना ।

182
01:05:55.429 --> 01:06:01.059
दुआयें देना और दुआयें लेना ।

183
01:06:05.460 --> 01:06:38.599
अगर आप अधिकार से ऐसे समय पर भी दिल से मेरा बाबा कहेंगे , परमात्मा बाबा , मेरा बाबा , तो कहावत है

184
01:06:38.599 --> 01:06:46.230
कि भगवान सदा हाजिर है ।

185
01:06:50.130 --> 01:07:09.199
अगर आपने दिल से , अधिकार रूप में ऐसे समय पर मेरा बाबा कहा ,

186
01:07:12.260 --> 01:07:18.929
तो बाप जरूर हाजिर हो जायेगा ।

187
01:07:27.960 --> 01:07:31.199
क्योंकि बाप किसलिए है ?

188
01:07:32.260 --> 01:07:35.059
बच्चों के लिए तो है ।

189
01:07:37.059 --> 01:07:45.730
और अधिकारी बच्चे को बाप सहयोग नहीं दे , यह हो ही नहीं सकता है ।

190
01:07:45.730 --> 01:07:48.800
असम्भव ।

191
01:07:58.159 --> 01:08:02.659
तो परिवर्तन करके जाना ।

192
01:08:04.230 --> 01:08:11.230
जैसे आये वैसे नही जाना , परिवर्तन करके ही जाना ।

193
01:08:15.030 --> 01:08:24.930
क्योंकि टेखो , इतना खर्चा करके आये हो , टिकट तो लगी ना ।

194
01:08:26.060 --> 01:08:36.130
खर्चा भी किया , समय भी दिया , तो उसकी वैल्यू तो रखेंगे ना ।

195
01:08:39.199 --> 01:09:01.260
तो वैल्यू है - स्वपरिवर्तन से पहले घर का परिवर्तन , फिर विश्व का , देश का परिवर्तन ।

196
01:09:04.960 --> 01:09:12.460
आपका घर आश्रम बन जाये ।

197
01:09:15.130 --> 01:09:18.500
घर नहीं , आश्रम ।

198
01:09:20.100 --> 01:09:32.630
वैसे भी आश्रम ही कहते हैं , गृहस्थ आश्रम , लेकिन आज आश्रम नहीं हैं ।

199
01:09:32.630 --> 01:09:37.500
आश्रम अलग है , घर अलग है ।

200
01:09:43.500 --> 01:09:47.859
तो घर को आश्रम बनाना ।

201
01:09:49.699 --> 01:09:56.399
दुआयें देना और लेना , यह आश्रम का कार्य है ।

202
01:09:57.359 --> 01:10:01.060
आपका घर मन्दिर बन जायेगा ।

203
01:10:05.399 --> 01:10:08.760
मन्दिर में मूर्ति क्या करती है ?

204
01:10:11.859 --> 01:10:14.699
दुआयें देती है ना ।

205
01:10:16.300 --> 01:10:19.800
मूर्ति के आगे जाकर क्या कहते हैं ?

206
01:10:20.600 --> 01:10:22.600
दुआ दो ।

207
01:10:23.800 --> 01:10:28.229
मर्सी , मर्सी कहके चिल्लाते हैं ।

208
01:10:34.359 --> 01:10:38.300
तो आपको भी क्या देना है ?

209
01:10:39.060 --> 01:10:41.130
दुआ ।

210
01:10:45.300 --> 01:10:49.399
ईश्वरीय प्यार दो , आत्मिक प्यार ।

211
01:10:49.399 --> 01:10:56.800
शरीर का प्यार नहीं , आत्मिक प्यार ।

212
01:11:00.529 --> 01:11:17.199
आज प्यार है तो स्वार्थ का प्यार है ।

213
01:11:19.359 --> 01:11:25.800
सच्ची दिल का प्यार नहीं है ।

214
01:11:32.260 --> 01:11:42.829
स्वार्थ होगा तो प्यार देंगे, स्वार्थ नहीं होगा तो डोंट-केयर।

215
01:11:45.159 --> 01:11:49.399
तो आप क्या करेंगे ?

216
01:11:50.300 --> 01:12:05.930
आत्मिक प्यार देना , दुआ देना , दुख न लेना , न दुःख देना ।

217
01:12:11.659 --> 01:12:21.529
देखो आपको चांस मिला है , बापदादा को भी ख़ुशी है ।

218
01:12:24.529 --> 01:12:32.859
इतने जो भी सब आये हैं , ( भारत के करीब २५० वी आई पी रिट्रीट में आये हुए हैं ) इतने घर तो आश्रम बनेंगे ना ।

219
01:12:33.359 --> 01:12:36.859
बनायेंगे ना ?

220
01:12:36.859 --> 01:12:39.359
पक्का ?

221
01:12:39.800 --> 01:12:42.800
कि थोड़ा-थोडा कच्चा ?

222
01:12:49.859 --> 01:13:07.659
जो समझते हैं कुछ भी हो जाए , थोडा सहन तो करना पडेगा , समाने की शक्ति कार्य में लगानी पड़ेगी ,

223
01:13:08.329 --> 01:13:17.930
लेकिन सहनशक्ति का फल बड़ा मीठा होता है ।

224
01:13:17.930 --> 01:13:25.430
सहन करना पड़ता है लेकिन फल बड़ा मीठा होता है ।

225
01:13:29.130 --> 01:13:46.060
तो जो पक्का वायदा करते हैं , घर-घर को स्वर्ग बनायेंगे , मन्दिर बनायेंगे , आश्रम बनायेंगे , वह हाथ उठाओ ।

226
01:13:50.460 --> 01:14:00.359
देखा-देखी में नहीं उठाना क्योंकि बापदादा हिसाब लेगा ना फिर ।

227
01:14:00.960 --> 01:14:02.630
देखकर नहीं उठाना ।

228
01:14:02.630 --> 01:14:10.199
सच्चा-सच्चा मन का हाथ , मन से हाथ उठाओ ।

229
01:14:11.659 --> 01:14:15.729
अच्छा ।

230
01:14:19.000 --> 01:14:25.000
दादियाँ , इनको इसकी क्या प्राइज देंगे ?

231
01:14:29.229 --> 01:14:40.859
हाँ बोलो , दादी इतने मन्दिर बन जायेंगे तो आप उसको क्या प्राइज देंगी ?

232
01:14:45.729 --> 01:14:49.460
(अपने घरवालों को ले आवे)।

233
01:14:49.460 --> 01:14:59.899
यह तो प्राइज नहीं दी , यह तो काम सुना दिया ।

234
01:15:08.600 --> 01:15:15.329
(बाबा जो आज्ञा करेंगे)।

235
01:15:16.659 --> 01:15:27.859
देखो , प्राइज तो आपको मिल जायेगी , कोई बड़ी बात नहीं है , लेकिन - लेकिन है ?

236
01:15:28.000 --> 01:15:30.600
लेकिन बोलो ।

237
01:15:34.000 --> 01:16:01.130
आप जाने के बाद अपनी धारणा से परिवर्तन करना और 15 दिन के बाद , मास के बाद अपनी रिजल्ट लिखना ।

238
01:16:01.729 --> 01:16:13.630
जो एक मास भी दुख नही लेगा , न देगा , उसको बहुत अच्छी प्राइज देंगे ।

239
01:16:18.800 --> 01:16:34.329
अगर आप आयेंगे तो मुबारक है , अगर नहीं आ सकेंगे तो भी सेंटर पर भेजेंगे ।

240
01:16:39.899 --> 01:16:57.229
आज विशेष इन्हों के प्रति आना हुआ है ना तो कमाल करके दिखाना ।

241
01:16:58.460 --> 01:17:05.659
परमात्म बच्चे हो , कमाल नहीं करेंगे तो क्या करेंगे ?

242
01:17:05.659 --> 01:17:10.729
धमाल नहीं करना , कमाल करना ।

243
01:17:20.460 --> 01:17:41.899
अगर कोई गलती से आपके पास बुरा संकल्प आ जाये , तो क्या करेंगे ?

244
01:17:48.460 --> 01:17:59.300
आयेगा तो सही , क्योंकि आपने बहुत समय बुराई को पाल के रखा है ,

245
01:18:00.899 --> 01:18:15.800
तो देखो , पशु जिसे पालते हैं उसको अगर दूर भी छोड़कर आते हैं , तो वह फिर वापस आ जाता है ।

246
01:18:15.800 --> 01:18:32.899
तो मानो आपने हाथ तो उठाया , बहुत अच्छा किया लेकिन गलती से कोई कमज़ोरी आ जाए , तो क्या करेंगे ?

247
01:18:37.930 --> 01:18:41.500
कमज़ोरी लाने देंगे ?

248
01:18:44.560 --> 01:18:48.500
देखो , इसकी भी विधि बताते हैं ।

249
01:18:53.300 --> 01:19:00.659
आपने वायदा तो किया ना , बुराई दे दिया ना ।

250
01:19:01.529 --> 01:19:04.960
बुराई बाप को दे दी ना ।

251
01:19:04.960 --> 01:19:20.460
अच्छा कोई को कोई चीज़ दे देते हैं , फिर अगर गलती से आपके पास आ जाती है तो आप क्या करेंगे ?

252
01:19:20.460 --> 01:19:30.300
अपने पास रखेंगे कि वापस करेंगे ?

253
01:19:31.359 --> 01:19:34.630
वापस करेंगे ना ?

254
01:19:34.630 --> 01:20:00.359
तो अगर आपके पास थोड़ी क्रोध की रेखा , लोभ की , मोह की , अभिमान की , गलती से आ भी जाये , क्योंकि बहुत समय रखा है , तो उसे वापस कर देना ।

255
01:20:00.359 --> 01:20:07.159
बाबा , बाबा आप अपनी चीज़ आप सम्भालो , मेरी नहीं है ।

256
01:20:12.300 --> 01:20:14.659
बाप तो सागर है ना ।

257
01:20:14.659 --> 01:20:17.699
सागर में समा देना ।

258
01:20:19.699 --> 01:20:35.600
आप यूज नहीं करना क्योंकि अमानत हो गई ना , तो अमानत में खयानत नहीं की जाती है ।

259
01:20:36.500 --> 01:20:41.760
बाप को दे दो , बाबा आप जानो , यह जाने ।

260
01:20:42.159 --> 01:20:45.630
मैं नहीं यूज करूँगा ।

261
01:20:46.960 --> 01:20:56.329
छोटे बच्चों को भी आप सिखाते हो , मिट्टी नहीं खाना ।

262
01:20:56.329 --> 01:20:58.329
सिखाते हो ना ?

263
01:20:58.329 --> 01:21:01.960
और बच्चा फिर मिट्टी खा लेता है ।

264
01:21:01.960 --> 01:21:10.359
उसको मिट्टी अच्छी लगती है फिर आप क्या करते हो ?

265
01:21:11.899 --> 01:21:19.500
बार-बार उसके हाथ को छुड़ाते हो या खाने देते हो ?

266
01:21:20.560 --> 01:21:22.100
छुड़ाते हो ना ।

267
01:21:22.699 --> 01:21:26.560
तो यहाँ अपने मन को छुड़ाना ।

268
01:21:28.260 --> 01:21:31.529
मन में ही तो आयेगा ना ।

269
01:21:32.159 --> 01:21:39.899
तो अपने मन का मालिक बनके इस चीज़ को छोड़ना ।

270
01:21:41.300 --> 01:21:45.229
विधि ठीक है ना ।

271
01:21:45.229 --> 01:21:47.859
करेंगे तो सहज हो जायेगा ।

272
01:21:47.859 --> 01:21:50.430
हिम्मत नहीं छोडना ।

273
01:21:51.859 --> 01:22:06.760
आपकी हिम्मत का एक कदम और हजार कदम बाप की मदद का है ही ।

274
01:22:09.229 --> 01:22:12.300
अनुभव करके देखना ।

275
01:22:12.560 --> 01:22:17.529
हिम्मत नहीं हारना , दिलशिकस्त नहीं होना ।

276
01:22:19.529 --> 01:22:30.229
सर्वशक्तिवान के बच्चे हैं , दिलशिकस्त नहीं होना ।

277
01:22:30.229 --> 01:22:45.630
हिम्मत नहीं हारना , दृढ़सकल्प करना , सफलता आपका जन्मसिद्ध अधिकार है ।

278
01:22:54.899 --> 01:22:58.359
बहुत अच्छा किया ।

279
01:23:02.399 --> 01:23:06.729
अच्छा अभी क्या करना है ?

280
01:23:07.529 --> 01:23:10.930
इसको कहते हैं वी आई पी ग्रुप ।

281
01:23:10.930 --> 01:23:14.930
देखो , आपको टाइटल अच्छा मिला है ।

282
01:23:14.930 --> 01:23:21.159
अभी वी आई पी नही बनना , वी वी आई पी ।

283
01:23:23.659 --> 01:23:35.430
वी आई पी तो कॉमन है , लेकिन वी वी आई पी ।

284
01:23:35.430 --> 01:23:40.800
विशेष आत्मा आई पी ।

285
01:23:51.130 --> 01:23:54.729
अच्छा ।

286
01:24:01.100 --> 01:24:11.159
आज मधुबन निवासियों को चांस मिला है ।

287
01:24:11.659 --> 01:24:32.300
यह सभी मधुबन निवासी आप सब आये हुए भाई-बहनों को बहुत थैंक्स दे रहे हैं कि आपके कारण मधुबन निवासी भी मिले

288
01:24:45.029 --> 01:24:48.630
क्योंकि आपका ग्रूप छोटा है ।

289
01:24:48.630 --> 01:24:54.159
नहीं तो बहुत हजारों का ग्रुप होता है ।

290
01:25:01.359 --> 01:25:12.729
तो एक मास के बाद अपने सेन्टर की तरफ से रिजल्ट लिखना ।

291
01:25:12.729 --> 01:25:19.699
फिर प्राइज जरूर देंगे ।

292
01:25:30.060 --> 01:25:33.329
अच्छा।अच्छा,अभी क्या करना है?

293
01:26:06.529 --> 01:26:26.960
( जोन वाइज मिलना है )

294
01:26:49.960 --> 01:27:16.630
दिल्ली जोन - दिल्ली निवासियों को तो सेवा का चांस बहुत अच्छा है क्योंकि दिल्ली की जो भी सेवायें होती हैं , वह विश्व में फैलती है ।

295
01:27:16.630 --> 01:27:25.029
दिल्ली का आवाज विश्व तक पहुँचता है ।

296
01:27:28.100 --> 01:27:37.000
तो दिल्ली से अभी कितने आये हैं ?

297
01:27:47.199 --> 01:28:04.930
( ५० ) तो जब दिल्ली में ५० घर आश्रम बन जायेंगे तो नाम कितना होगा ।

298
01:28:04.930 --> 01:28:28.699
वायुमण्डल तो बदलेगा ना क्योंकि कोशिश तो सब करते हैं कि घर-घर में हर आत्मा शान्त हो जाए , सुखी हो जाए ।

299
01:28:29.560 --> 01:28:52.529
तो जब दुआ देंगे और लेंगे तो घर में सुख और शान्ति का वायब्रेशन होगा और वह आवाज वायुमण्डल में फैलेगा ।

300
01:28:53.960 --> 01:28:59.529
एक तो घर आश्रम बनेगा और वायुमण्डल भी फैलेगा ।

301
01:28:59.529 --> 01:29:02.260
डबल सेवा हो जायेगी ।

302
01:29:04.699 --> 01:29:07.229
तो क्या बनेंगे ?

303
01:29:07.229 --> 01:29:14.859
दिल्ली वाले नम्बर वन बनेंगे या दो भी चलेगा ?

304
01:29:15.460 --> 01:29:21.229
एक नम्बर लेना है या दो भी चलेगा ?

305
01:29:24.199 --> 01:29:37.359
( एक नम्बर लेना है ) अच्छा , फिर तो सब ताली बजाओ ।

306
01:29:45.159 --> 01:30:03.699
बहुत अच्छा हिम्मतवान बच्चों को बापदादा की पदमगुणा मदद है ही है ।

307
01:30:05.899 --> 01:30:08.699
अच्छा ।

308
01:30:09.359 --> 01:30:42.630
पंजाव-हरियाणा , हिमाचल , जम्बू कश्मीर और उत्तरांचल-अच्छा है पंजाब में नदियाँ बहुत है ।

309
01:30:46.159 --> 01:30:49.699
तो नदियों का काम क्या है ?

310
01:30:52.960 --> 01:31:01.130
नदियाँ सभी को शीतलता देती है ।

311
01:31:03.729 --> 01:31:31.199
तो आप परमात्म बच्चे पंजाब में शीतलता , शान्ति का वायुमण्डल फैलायेंगे ।

312
01:31:33.760 --> 01:31:37.729
वैसे पंजाब को शेर भी कहते हैं ।

313
01:31:37.729 --> 01:31:48.100
पंजाब शेर है , तो शेर किससे डरता नहीं है , डराता है ।

314
01:31:48.100 --> 01:31:57.859
डरता नहीं है तो आप भी माया से डरना नहीं ।

315
01:32:00.060 --> 01:32:10.600
मास्टर सर्वशक्तिवान बन सामना करना , ठीक है ।

316
01:32:10.600 --> 01:32:15.300
इतनी ताकत है पंजाब में ?

317
01:32:15.300 --> 01:32:21.060
करेंगे ?

318
01:32:32.430 --> 01:32:44.829
चाहे उत्तरांचल हो , चाहे क्या भी हो , सभी करेंगे ?

319
01:32:50.430 --> 01:32:57.659
तो हिम्मते बच्चे मददे बाप ।

320
01:32:58.529 --> 01:33:05.659
कुछ भी आवे , मेरा बाबा कहने से सब खत्म हो जायेगा ।

321
01:33:05.659 --> 01:33:15.760
दिल से कहना , सिर्फ मुख से नही , मन से कहेंगे तो सब दुःख दूर हो जायेंगे ।

322
01:33:17.229 --> 01:33:19.659
अच्छा ।

323
01:33:35.300 --> 01:34:11.960
आन्ध्र प्रदेश - ( करीब ४० हैं ) सदा अपने को , हम विजयीरत्न हैं

324
01:34:13.560 --> 01:34:27.300
क्योंकि परमात्मा का साथ है तो परमात्मा जिसका साथी है वह सदा विजयी है ही है ।

325
01:34:31.699 --> 01:34:50.199
तो सदा अपने को परमात्म साथी पाण्डव अनुभव करना ।

326
01:34:51.500 --> 01:35:13.729
विजय आपके गले का हार है , यही सदा स्मृति में रखना ।

327
01:35:15.899 --> 01:35:20.829
गले में विजय की माला पिरोई हुई है ।

328
01:35:23.560 --> 01:35:28.260
यह निश्चय और नशा रखना ।

329
01:35:29.829 --> 01:35:31.659
ठीक है ना !

330
01:35:32.760 --> 01:35:36.729
अभी आन्ध्रा नम्बर लेना ।

331
01:35:37.029 --> 01:35:59.829
वह कहते हैं नम्बरवन और आप भी नम्बरवन बनना है तो नंबरटू बनके क्या करेंगे।

332
01:35:59.829 --> 01:36:07.560
तो आप भी नम्बरवन बनना।

333
01:36:07.560 --> 01:36:12.260
विन करेंगे तो वन होंगे ।

334
01:36:13.359 --> 01:36:21.029
विन करना आता है ना , तो विन , वन ।

335
01:36:22.600 --> 01:36:25.199
अच्छा ।

336
01:36:28.029 --> 01:36:59.359
मुम्बई और महाराष्ट्र-महाराष्ट्र का अर्थ ही है महान , महान हो ना ।

337
01:37:00.430 --> 01:37:26.659
अभी बाप की याद और सेवा द्वारा अपने को महान बनाये औरों को भी महान बनाना ।

338
01:37:29.130 --> 01:37:33.060
जैसा नाम है ना महाराष्ट्र ।

339
01:37:33.829 --> 01:37:37.560
तो कोई महान कार्य करेंगे ना ।

340
01:37:40.500 --> 01:37:54.229
तो महान बनना ही है , और महान कार्य करके दिखाना है ।

341
01:37:54.729 --> 01:37:57.229
ऐसे पक्के हैं ?

342
01:37:57.229 --> 01:37:59.229
पक्के ?

343
01:38:01.630 --> 01:38:05.159
महान तो पक्के ही होते हैं ।

344
01:38:06.659 --> 01:38:23.899
बापदादा को खुशी है हर एक जो भी आये हैं वह हिम्मतवाले हैं ।

345
01:38:24.229 --> 01:38:27.699
घबराने वाले नहीं हैं ।

346
01:38:27.699 --> 01:38:34.460
इमलिए मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

347
01:38:52.159 --> 01:39:30.359
कर्नाटक-कर्नाटक वालों को बापदादा कहते हैं , देखो नाम है , कर-नाटक , नाटक कर ।

348
01:39:30.359 --> 01:39:38.500
तो इस सृष्टि को भी नाटक कहते हैं , बेहद का ड्रामा ।

349
01:39:38.500 --> 01:39:49.029
इसमें कर्नाटक वाले क्या बजायेंगे ?

350
01:39:49.029 --> 01:39:52.359
हीरो पार्ट बजाएंगे ?

351
01:39:52.359 --> 01:39:54.359
हीरो ।

352
01:40:01.829 --> 01:40:06.500
अच्छा इसके लिए क्या करना पडेगा ।

353
01:40:06.899 --> 01:40:16.500
बहुत छोटी-सी बात है , जीरो का याद करना तो हीरो बन जायेंगे ।

354
01:40:20.899 --> 01:40:23.859
सहज है ना ।

355
01:40:25.359 --> 01:40:48.329
और जीरो स्वयं आत्मा भी है , और जीरो बाप भी है , तो जीरो को याद करना , हीरो बन पार्ट बजाना , ठीक है ना ।

356
01:40:48.329 --> 01:40:54.000
बहुत अच्छा ।

357
01:40:54.000 --> 01:40:55.500
भले आये ।

358
01:40:55.500 --> 01:40:57.500
मुबारक हो ।

359
01:41:05.359 --> 01:41:40.899
तामिलनाडु-देखो पाण्डव भी पाँच थे आप अगर थोडे हैं , कोई हर्जा नही ।

360
01:41:40.899 --> 01:41:51.260
लेकिन पाँच पाण्डव थाडे होते भी विजयी बन गये ।

361
01:41:52.100 --> 01:42:06.399
तो आप आये थोड़े हो लेकिन विजयीरत्न हैं , और सदा विजयी रहेंगे ,

362
01:42:11.760 --> 01:42:21.829
संख्या कम है तो कोई हर्जा नहीं लेकिन विजयी हैं , विजयी रहेंगे ।

363
01:42:21.829 --> 01:42:29.229
तो विजय का वरदान आप सबका विशेष है ।

364
01:42:30.899 --> 01:42:36.560
ठीक है , विजयी बनेंगे ।

365
01:42:46.630 --> 01:43:35.729
गुजरात-बापदादा आप सबके मस्तक में क्या देख रहें हैं ?

366
01:43:39.760 --> 01:43:53.399
बापदादा आपके मस्तक में तीन बिन्दुओं का तिलक देख रहें हैं ।

367
01:43:59.630 --> 01:44:09.699
वह तीन बिन्दियाँ हैं , एक आप आत्मा बिन्दी , बिन्दी हो ना ।

368
01:44:10.229 --> 01:44:32.800
बाप भी बिन्दी , और जो कुछ ड्रामा में बीत जाता है तो उसको फुलस्टॉप लगाया जाता है , तो फुलस्टॉप भी बिन्दी होता है ना ।

369
01:44:32.800 --> 01:44:44.529
तो आप सबके मस्तक में तीन बिन्दुओं का तिलक देख रहें हैं ।

370
01:44:48.500 --> 01:45:21.600
अभी रोज अमृतवेले उठकर बापदादा से मिलन मनायें शक्ति लें , दुआयें लें , अपने आपको तीन बिन्दुओं का तिलक लगाना ।

371
01:45:23.600 --> 01:45:35.199
तिलक मस्तक में ही लगाया जाता है क्योंकि मस्तक स्मृति का स्थान है ।

372
01:45:37.399 --> 01:45:48.060
तो आप स्मृति का , तीन बिन्दुओं का रोज तिलक लगाना ।

373
01:45:49.560 --> 01:45:53.630
तिलक लगाना आता है ना ।

374
01:45:54.430 --> 01:46:02.859
अभी यह तिलक लगाना तो सारा दिन बहुत सहयोग मिलेगा ।

375
01:46:04.859 --> 01:46:11.430
तिलकधारी बन ताजधारी बन जायेंगे , तख्तधारी बन जायेंगे ।

376
01:46:15.159 --> 01:46:17.630
अच्छा ।

377
01:46:22.560 --> 01:46:55.229
ईस्टर्न-ईस्ट से क्या निकलता है ?

378
01:46:56.699 --> 01:47:00.430
सूर्य निकलता है ।

379
01:47:01.699 --> 01:47:12.359
तो आप ईस्टर्न जोन की तरफ से आये हो तो क्या जाकर करेंगे ?

380
01:47:13.529 --> 01:47:29.630
ज्ञानसूर्य उदय हो चुका है , इसका परिचय सबको देना ।

381
01:47:32.430 --> 01:47:47.500
जैसे सूर्य सबको सकाश देता है ना , रोशनी देता है ना , ऐसे आप भी मास्टर हो ना ।

382
01:47:47.500 --> 01:47:54.760
आप मास्टर ज्ञानसूर्य हो गये तो आप क्या करेंगे ?

383
01:47:54.760 --> 01:48:02.560
सबको रोशनी देना , सकाश देना ।

384
01:48:02.560 --> 01:48:08.659
यह है ईस्टर्न जोन का कार्य ।

385
01:48:08.659 --> 01:48:10.659
ठीक है ?

386
01:48:12.300 --> 01:48:14.600
बहुत अच्छा ।

387
01:48:16.300 --> 01:48:30.500
वैसे ईस्टर्न से ही ब्रह्मा बाप निकला , लक्की है ।

388
01:48:31.430 --> 01:48:34.930
तो आप लोग तो डबल लकी हो गये ।

389
01:48:34.930 --> 01:48:39.960
स्थान भी लकी आत्मायें भी लकी ।

390
01:48:44.029 --> 01:48:45.829
अच्छा ।

391
01:48:45.829 --> 01:48:47.829
बहुत अच्छा ।

392
01:48:47.829 --> 01:49:18.000
राजस्थान-नाम ही है राजस्थान ।

393
01:49:19.100 --> 01:49:26.359
तो राजस्थान में राजायें रहते थे ।

394
01:49:27.560 --> 01:49:32.359
अभी तो नहीं हैं लेकिन रहते थे ।

395
01:49:34.630 --> 01:49:42.600
तो आप भी राजा बनके जा रहे हैं ।

396
01:49:43.100 --> 01:49:45.300
राजा बने ?

397
01:49:45.500 --> 01:49:47.760
स्वराज्य ।

398
01:49:47.760 --> 01:49:53.930
स्वराज्य का तिलक लगाया ना ।

399
01:49:55.930 --> 01:50:08.829
तो हमेशा यही याद रखना कि हम राजस्थान के स्वराज्य अधिकारी हैं ।

400
01:50:10.630 --> 01:50:20.699
जो स्वराज्य अधिकारी बनता है वह विश्व का राज्य अधिकारी अन्डस्टुड बनता है ।

401
01:50:22.430 --> 01:50:33.029
तो स्वराज्य कभी ढीला नहीं करना , राजा तो राजा होता है ना ।

402
01:50:33.829 --> 01:50:41.960
कभी भी कोई कमेंन्द्रियों के वश नहीं होना ।

403
01:50:43.659 --> 01:50:51.100
राजा बनके ऑर्डर करना , राजा बनके कायदे से चलाना ।

404
01:50:52.760 --> 01:51:04.000
तो राजस्थान को स्वराज्य अधिकारी का वरदान है ।

405
01:51:05.630 --> 01:51:12.359
ठीक है ना स्वराज्य है ना पक्का ।

406
01:51:12.359 --> 01:51:22.699
देखो राजस्थान बहुत नजदीक है तो जो नियरेस्ट होता है वह डियरेस्ट होता है ।

407
01:51:28.500 --> 01:51:36.430
तो ऐसे ही अपने को अनुभव करना ।

408
01:51:37.130 --> 01:51:39.699
अच्छा ।

409
01:52:09.630 --> 01:52:32.100
यूपी :- तीन हैं ।

410
01:52:32.100 --> 01:52:36.060
तीन तो त्रिमूर्ति गाई हुई है ।

411
01:52:41.329 --> 01:52:53.899
तो एक है मास्टर ब्रह्मा , मास्टर विष्णु , मास्टर शंकर , त्रिमूर्ति हो गई ।

412
01:52:53.899 --> 01:52:55.899
बहुत अच्छा ।

413
01:52:59.300 --> 01:53:10.600
देखो , परमात्मा भी त्रिमूर्ति शिव कहलाया जाता है ।

414
01:53:12.960 --> 01:53:20.699
तो आप त्रिमूर्ति भी कमाल करके दिखायेंगे ।

415
01:53:23.300 --> 01:53:34.859
बापदादा हमेशा छोटा जो होता है ना उसको समान बाप कहते हैं ।

416
01:53:36.029 --> 01:53:42.699
तो आपकी संख्या थोडी है लेकिन हैं बाप समान ।

417
01:53:45.359 --> 01:53:55.829
अभी दूसरी बारी अपना ज्यादा संगठन बनाके आना ।

418
01:53:55.829 --> 01:54:00.760
बनायेंगे ना ?

419
01:54:01.760 --> 01:54:12.229
आप समान बनाके फिर बड़े संगठन से प्राइज आके लेना ।

420
01:54:14.029 --> 01:54:17.159
अच्छा ।

421
01:54:19.630 --> 01:54:47.199
मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ :- अच्छा है ।

422
01:55:33.659 --> 01:55:56.199
आप सभी इन्दौर और भोपाल दोनों ऐसी कमाल करके दिखाना जो अबतक किसने की नहीं हो

423
01:55:58.960 --> 01:56:18.300
क्योंकि इन्दौर ब्रह्मा बाप ने अपने संकल्प से स्थापन किया था ।

424
01:56:23.630 --> 01:56:36.960
इन्दौर की विशेषता है , ब्रह्मा बाप की नजर इन्दौर के ऊपर पड़ी थी ।

425
01:56:38.800 --> 01:56:47.300
तो इन्दौर वाले और भोपाल वाले , हैं तो मध्यप्रदेश ।

426
01:56:50.359 --> 01:57:07.729
लेकिन ऐसी कमाल करके दिखाना , कम-से-कम एक कमाल यह करना , इजी है

427
01:57:07.729 --> 01:57:26.930
कोई-न-कोई ऐसा माइक तैयार करो जिसकी आवाज सुनकर सभी पर , अनेकों के ऊपर , प्रभाव पड़े ।

428
01:57:28.060 --> 01:57:33.000
अनेकों का कल्याण करने के निमित्त बन जाए ।

429
01:57:33.829 --> 01:57:42.500
जैसे देखो एक माइक कितना कार्य कर रहा है , कितने सुन रहे हैं ।

430
01:57:43.600 --> 01:58:00.960
तो ऐसा अथॉरिटी वाला बोल हो , जो अनेक सुन करके परिवर्तन हो जाए , उसको बापदादा कहते हैं माइक ।

431
01:58:01.699 --> 01:58:06.560
तो कम-से-कम एक माइक तैयार करके आना ।

432
01:58:07.199 --> 01:58:09.000
ठीक है ?

433
01:58:10.500 --> 01:58:12.960
कमाल करना ।

434
01:58:12.960 --> 01:58:21.699
बस सिर्फ मेरा बाबा , मेरी सेवा , यह याद रखना तो सब काम हो जायेगा ।

435
01:58:25.760 --> 01:58:27.560
अच्छा ।

436
01:58:40.029 --> 01:59:23.229
श्रीलंका , मलेशिया , यू एस ए :- देखो विदेश की भी सौगात देख ली ना ।

437
01:59:24.159 --> 01:59:33.029
श्रीलंका में सेवा बहुत अच्छी की है ।

438
01:59:33.029 --> 02:00:07.159
बापदादा ने समाचार सुना कि प्रकृति के जल सुनामी की हालत में श्रीलंका वालों ने बहुत सहयोग दिया , आध्यात्मिक भी और चीजों का भी ।

439
02:00:09.500 --> 02:00:37.500
और बापदादा ने बहुत अच्छी खबर सुनी है कि वहाँ सेवाकेन्द्र खोलने की कोशिश कर रहे हैं , जहाँ आपदायें आई थी , तो यह भी अच्छा प्लैन बना रहे हैं

440
02:00:38.630 --> 02:00:49.760
और श्रीलंका का नाम सुन करके तो रावण को जीतने का संकल्प आता है ।

441
02:00:54.560 --> 02:01:12.699
तो श्रीलंका में रावण का नामनिशान नहीं रहे , रावण वह नहीं , यह 5 बुराईयाँ ही रावण है ।

442
02:01:15.329 --> 02:01:31.060
5 विकार नारी में भी है , 5 विकार नर में भी है , तो दोनों का मिला हुआ १० शीश वाला रावण दिखाते हैं ।

443
02:01:32.229 --> 02:01:46.630
बाकी १० शीशवाला मनुष्य सोयेगा कैसे , खायेगा कैसे , लेकिन यह बुराईयों का सूचक है ।

444
02:01:47.760 --> 02:02:05.659
तो लंका निवासी बहुत अच्छा प्लैन बना रहें हैं और सारे ब्राह्मण परिवार आपके सहयोगी हैं , बापदादा तो है ही ।

445
02:02:05.659 --> 02:02:15.760
पहले बापदादा फिर सर्व परिवार भी इस सेवा के सहयोगी हैं ।

446
02:02:17.430 --> 02:02:21.560
अच्छी उन्नति कर रहे हैं ।

447
02:02:22.630 --> 02:02:29.630
इसके लिए मुबारक है , पदमगुणा मुबारक ।

448
02:02:37.159 --> 02:02:39.800
अच्छा ।

449
02:02:43.300 --> 02:03:07.300
मलेशिया में भी सेवा का उमंग बहुत है ।

450
02:03:08.699 --> 02:03:13.359
बापदादा के पास तो सब समाचार भी आते हैं ।

451
02:03:13.359 --> 02:03:17.960
और अभी-अभी याद भी भेजी है ना ।

452
02:03:20.300 --> 02:03:35.300
तो मलेशिया में सर्विस का शौक अच्छा है और सेंटर के पीछे सेन्टर खोलते ही जाते हैं और सफलता भी मिलती जाती है

453
02:03:36.529 --> 02:04:10.760
इसीलिए मलेशिया वाली सभी ब्राह्मण आत्माओं को जिन्होंने भी यादप्यार भेजा है , पत्र भेजा है , उन सभी बच्चों को पदमगुणा दुआयें और यादप्यार ।

454
02:04:14.199 --> 02:04:17.500
अच्छा ।

455
02:04:30.899 --> 02:04:51.630
आप सभी मधुबन निवासी अपने भाई-बहनों को देखकर बहुत खुश हुए ना ।

456
02:04:55.060 --> 02:05:02.699
आप लोगों ने मधुबन में रौनक कर दी ।

457
02:05:02.699 --> 02:05:13.760
बापदादा कहतें है कि बच्चे मधुबन का श्रृंगार हैं ।

458
02:05:16.029 --> 02:05:22.060
तो मधुबन वाले , देखो आप लोगों को देखकर बहुत खुश हो रहें हैं ।

459
02:05:24.760 --> 02:05:38.729
सेवा का चांस दिया तो कितना पुण्य जमा हो गया , इसीलिए खुश हो रहे हैं ।

460
02:05:41.560 --> 02:05:44.960
अच्छा ।

461
02:05:47.630 --> 02:06:14.829
यह भी आज का मिलन ड्रामा में नूँधा हुआ था जो रिपीट हुआ और हर कल्प रिपीट होता रहेगा ।

462
02:06:26.260 --> 02:06:29.229
अच्छा ।

463
02:06:30.029 --> 02:06:46.859
चारों ओर के देश विदेश के बच्चों की याद बापदादा को मिली है ।

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चाहे फोन द्वारा याद भेजी है , चाहे पत्र द्वारा , चाहे दिल में याद किया है ,

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तो बापदादा सभी बच्चों को चाहे भारत के , चाहे विदेश के रिटर्न में दुआयें और यादप्यार पदमगुणा दे रहें हैं ।

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02:07:34.229 --> 02:08:29.159
चारों ओर के परमात्म प्यार के अधिकारी बच्चों को , चारों ओर सर्व खज़ानों से भरपूर , निर्विघ्न , निर्विकल्प , निरव्यर्थ संकल्प रहने वाली श्रेष्ठ आत्माओं को ,

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साथ-साथ सर्व परिवर्तन करने और कराने के उमंग-उत्साह में उड़ने वाले बच्चों को ,

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02:09:02.229 --> 02:09:58.829
साथ-साथ बापदादा को सच्ची दिल का समाचार देनेवाले सच्चे दिलवाले बच्चों को विशेष दिलाराम के रूप में , बाप के रूप में , शिक्षक के रूप में , सतगुरू के रूप में पदमगुणा यादप्यार और नमस्ते ।

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बी के गाइड और सेवाधारी-बापदादा सेवाधारी बच्चों को सेवा की मुबारक दे रहे हैं ।

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बहुत अच्छी-अच्छी आत्मायें लाई हैं , हिम्मत वाली लाई हैं , और हिम्मत का प्रत्यक्ष प्रमाण दिखलाने वाली आत्मायें लाई है ,

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इसलिए जो भी जितनों को भी लाये हैं , उतने पदमगुणा मुबारक हो ।

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02:11:59.229 --> 02:12:01.699
अच्छा है ।

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गोल्डन चांस भी मिल गया ।

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सेवा का प्रत्यक्ष फल तो मिल गया ।

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ऐसे ही सारे विश्व को बाप के प्यार , बाप के सन्देश का जरूर कार्य करते रहेंगे ।

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करना ही है ।

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है ही इसीलिए निमित्त ।

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तो सच्चे-सच्चे पण्डे तो आप हो ।

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कितनी अच्छी यात्रा करा दी है ।

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बापदादा बच्चों की सेवाको देख खुश होते हैं ।

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तो देख लिया , अच्छे हैं , महारथी हैं , सेवा में महारथी बनके आये हैं ।

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02:13:28.100 --> 02:13:29.630
अच्छा ।

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02:13:29.930 --> 02:13:34.460
टीचर्स को भी अच्छा चांस मिला है ।

484
02:13:35.630 --> 02:13:39.760
पाण्डवों को भी अच्छा चांस मिला है ।

