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1
00:15:09.830 --> 00:16:04.629
आज बापदादा अपने चारों ओर के श्रेष्ठ स्वराज्य अधिकारी , स्वमानधारी बच्चों को देख रहे हैं ।

2
00:16:13.100 --> 00:16:43.230
बाप ने बच्चोंको अपने से भी ऊँचा स्वमान दिया है ।

3
00:16:51.500 --> 00:17:27.599
हर एक बच्चे को पाँव में गिरने से छुड़ाए सिर का ताज बना दिया ।

4
00:17:35.630 --> 00:18:02.160
स्वयं कोसदा ही प्यारे बच्चों का सेवाधारी कहलाया ।

5
00:18:10.799 --> 00:18:33.930
इतनी बड़ी अथॉरिटी का स्वमान बच्चों को दिया ।

6
00:18:37.900 --> 00:19:00.059
तो हर एक अपने कोइतना स्वमानधारी समझते हैं ?

7
00:19:03.660 --> 00:19:25.400
स्वमानधारी का विशेष लक्षण क्या होता है ?

8
00:19:28.130 --> 00:19:52.900
जितना जो स्वमानधारी होगा उतना हीसर्व को सम्मान देने वाला होगा ।

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00:19:58.759 --> 00:20:31.130
जितना स्वमानधारी उतना ही निमार्कण , सर्व का स्नेही होगा ।

10
00:20:34.960 --> 00:21:05.130
स्वमानधारी की निशानीहै - बाप का प्यारा साथ में सर्व का प्यारा ।

11
00:21:07.700 --> 00:21:19.500
हद का प्यारा नहीं , बेहद का प्यारा ।

12
00:21:25.160 --> 00:21:34.130
जैसे बाप सर्व के प्यारे हैं ,

13
00:21:37.660 --> 00:22:00.630
चाहे एकमास का बच्चा है , चाहे आदि रत्न भी है

14
00:22:02.160 --> 00:22:13.960
लेकिन हर एक मानता है मैं बाबा का , बाबा मेरा ।

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00:22:21.559 --> 00:22:52.359
यह निशानी है सर्व केप्यारेपन की , श्रेष्ठ स्वमान की , क्योंकि ऐसे बच्चे फालो फादर करने वाले हैं ।

16
00:23:02.099 --> 00:23:41.059
देखो बाप ने हर वर्ग के बच्चों को , छोटेबच्चों से लेके , बुजुर्ग समान बच्चों को स्वमान दिया ।

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00:23:43.230 --> 00:24:03.559
यूथ को विनाशकारी से विश्वकल्याणकारी का स्वमान दिया ।

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00:24:10.900 --> 00:24:15.829
महान बनाया ।

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00:24:21.960 --> 00:24:46.930
प्रवृत्ति वालों को महात्मायें , बड़े-बड़े जगतगुरू उनसे भी ऊँचा ,

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00:24:53.900 --> 00:25:16.029
प्रवृत्ति में रहते , पर-वृत्ति वाले महात्माओंका भी सिर झुकाने वाला बनाया ।

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00:25:23.230 --> 00:25:46.460
कन्याओं को शिव शक्ति स्वरूप का स्वमान याद दिलाया , बनाया ।

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00:25:56.230 --> 00:26:18.059
बुजुर्ग बच्चोंको ब्रह्मा बाप की हमजिन्स अनुभवी का स्वमान दिया ।

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00:26:26.900 --> 00:26:55.329
ऐसे ही स्वमानधारी बच्चे हर आत्मा को ऐसे स्वमान से देखेंगे ।

24
00:27:02.829 --> 00:27:16.029
सिर्फ देखेंगे नहीं लेकिन सम्बन्ध-सम्पर्क में आयेंगे ।

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00:27:26.900 --> 00:27:48.029
क्योंकि स्वमान देहअभिमान को मिटाने वाला है ।

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00:27:53.559 --> 00:28:04.529
जहाँ स्वमानहोगा वहाँ देह का अभिमान नहीं होगा ।

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00:28:06.930 --> 00:28:24.029
बहुत सहज साधन है , देह अभिमान को मिटाने का - सदा स्वमान में रहना ।

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00:28:24.630 --> 00:28:35.099
सदा हर एक को स्वमान से देखना ।

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00:28:38.829 --> 00:28:56.500
चाहे प्यादा है , 16 हजार की माला में लास्ट नम्बर भी है

30
00:28:58.029 --> 00:29:25.900
लेकिन लास्ट नम्बरमें भी ड्रामानुसार बाप द्वारा कोई न कोई विशेषता है ।

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00:29:32.299 --> 00:29:44.630
स्वमानधारी विशेषता को देख स्वमान देते हैं ।

32
00:29:49.400 --> 00:30:18.099
उनकी दृष्टि में , वृत्ति में , कृति में , हर एक की विशेषता समाई हुई होती है ।

33
00:30:29.630 --> 00:31:01.829
जो भी बाप का बना वह विशेष आत्मा है , चाहे नम्बरवारहै लेकिन दुनिया के कोटों में कोई है ।

34
00:31:24.230 --> 00:31:36.960
ऐसे अपने को सभी विशेष आत्मा समझते हो ?

35
00:31:38.829 --> 00:31:47.230
स्वमान में स्थित रहना है ।

36
00:31:57.359 --> 00:32:04.160
देह-अभिमान में नहीं , स्वमान ।

37
00:32:09.430 --> 00:32:16.160
बाप को हर एक बच्चे से प्यार क्यों है ?

38
00:32:26.029 --> 00:32:47.960
क्योंकि बाप जानते हैं मेरे को पहचान , मेरे बने हैं ना ।

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00:32:55.230 --> 00:33:29.500
चाहे आज इस मेलेमें भी पहली बार आये हैं , फिर भी बाबा कहा , तो बाप के प्यार के पात्र हैं ।

40
00:33:46.000 --> 00:34:18.300
बापदादा को चारों ओर के सर्व बच्चे सर्वसे प्यारे हैं ।

41
00:34:28.429 --> 00:34:42.960
ऐसे ही फालो फादर ।

42
00:34:56.829 --> 00:35:14.699
कोई भी अप्रिय नहीं , सर्व प्रिय हैं ।

43
00:35:22.230 --> 00:35:41.900
देखो , जो भी बच्चे मेरा बाबा कहते हैं , तोमेरापन किसने लाया ?

44
00:35:43.300 --> 00:35:48.099
स्नेह ने ।

45
00:35:55.460 --> 00:36:15.500
जो भी यहाँ बैठे हैं , वह समझते हो कि स्नेह ने बाप का बना लिया ।

46
00:36:17.000 --> 00:36:48.000
बाप का स्नेहचुम्बक है , स्नेह के चुम्बक से बाप के बन गये ।

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00:36:51.059 --> 00:37:00.099
दिल का स्नेह , कहने मात्र स्नेह नहीं ।

48
00:37:00.760 --> 00:37:17.960
दिल का स्नेह इस ब्राह्मणजीवन का फाउण्डेशन है ।

49
00:37:27.699 --> 00:37:31.730
मिलने क्यों आते हो ?

50
00:37:34.699 --> 00:37:38.099
स्नेह ले आया है ना !

51
00:37:38.099 --> 00:37:50.199
जो भी सभी बैठे हैं , आये हैं , क्यों आये हो ?

52
00:37:58.300 --> 00:38:02.599
स्नेह ने खींचा ना ।

53
00:38:09.360 --> 00:38:12.360
स्नेह भी कितना है ?

54
00:38:12.360 --> 00:38:17.360
100 परसेन्ट है वा कम है ?

55
00:38:17.360 --> 00:38:28.400
जो समझते हैं स्नेह में हम 100 परसेन्ट हैं , वह हाथ उठाओ ।

56
00:38:28.400 --> 00:38:32.130
स्नेह में 100 परसेन्ट ।

57
00:38:39.829 --> 00:38:44.000
थोड़ा भी कम नहीं ?

58
00:38:44.659 --> 00:38:46.800
अच्छा ।

59
00:38:50.730 --> 00:39:00.260
तो इतना ही स्नेह आपस में ब्राह्मणों में है ?

60
00:39:03.900 --> 00:39:06.530
इसमें हाथ उठायें ?

61
00:39:10.159 --> 00:39:15.300
इसमें परसेन्टेज है ।

62
00:39:19.059 --> 00:39:45.800
जैसे बाप का सभी से स्नेह है , ऐसे ही बच्चों का भी सर्व से स्नेह , सर्व केस्नेही ।

63
00:39:52.960 --> 00:40:03.860
दूसरे की कमज़ोरी को देखो नहीं ।

64
00:40:14.429 --> 00:40:25.730
अगर कोई संस्कार के वशीभूत है , तो फालो किसको करना है ?

65
00:40:26.230 --> 00:40:30.829
वशीभूतवाले को ?

66
00:40:34.099 --> 00:40:59.429
आप वशीभूत मन्त्र देने वाले हो , वशीभूत से छुड़ाने वाला मन्त्र , छुड़ाने वाले हो ना !

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00:40:59.429 --> 00:41:02.630
या देखने वाले हो ?

68
00:41:04.900 --> 00:41:09.360
कि दिखाई दे देता है ?

69
00:41:17.800 --> 00:41:28.000
अगर कोई खराब चीज़ दिखाई भी देती है , तो क्या करते हैं ?

70
00:41:28.000 --> 00:41:36.829
देखते रहते हैं या किनारा करलेते हैं ?

71
00:41:46.030 --> 00:42:15.159
क्योंकि बापदादा ने देखा कि जो दिल के स्नेही हैं , बाप के दिल के स्नेही , सर्व के स्नेही अवश्य होंगे ।

72
00:42:30.329 --> 00:42:55.099
दिलका स्नेह बहुत सहज विधि है सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने की ।

73
00:43:00.500 --> 00:43:35.500
चाहे कोई कितना भी ज्ञानी हो , लेकिन अगरदिल का स्नेह नहीं है तो ब्राह्मण जीवन में रमणीक जीवन नहीं होगी ।

74
00:43:36.030 --> 00:43:39.000
रूखी जीवन होगी ।

75
00:43:48.400 --> 00:44:14.900
क्योंकि ज्ञान में स्नेह बिनाअगर ज्ञान है तो ज्ञान में प्रश्नउठते हैं क्यों , क्या !

76
00:44:14.900 --> 00:44:36.360
लेकिन स्नेह ज्ञानसहित है तो स्नेही सदा स्नेह में लवलीन रहतेहैं ।

77
00:44:39.059 --> 00:44:47.230
स्नेही को मेहनत करनी नहीं पड़ती याद करने की ।

78
00:44:50.559 --> 00:45:02.559
सिर्फ ज्ञानी है , स्नेह नहीं है तो मेहनत करनी पड़ती है ।

79
00:45:10.800 --> 00:45:19.130
वहमेहनत का फल खाता , वह मुहब्बत का फल खाता ।

80
00:45:25.460 --> 00:45:36.829
ज्ञान है बीज लेकिन पानी है स्नेह ।

81
00:45:36.829 --> 00:45:49.360
अगर बीज को स्नेह का पानीनहीं मिलता तो फल नहीं निकलता है ।

82
00:45:58.059 --> 00:46:19.199
तो आज बापदादा सर्व बच्चों के दिल का स्नेह चेक कर रहे थे ।

83
00:46:22.630 --> 00:46:32.130
चाहे बाप से , चाहे सर्व से ।

84
00:46:43.699 --> 00:46:48.460
तो आप सभी अपनेको क्या समझते हैं ?

85
00:46:48.460 --> 00:46:51.429
स्नेही हैं ?

86
00:46:51.429 --> 00:46:54.230
हैं स्नेही ?

87
00:46:54.860 --> 00:47:01.500
जो समझते हैं दिल के स्नेही हैं , वह हाथ उठाओ ।

88
00:47:01.500 --> 00:47:04.329
सर्व के स्नेही ?

89
00:47:04.329 --> 00:47:11.900
सर्वके स्नेही ?

90
00:47:12.760 --> 00:47:22.000
अच्छा - बाप के तो दिल के स्नेही हैं , सर्व के स्नेही हैं ?

91
00:47:22.659 --> 00:47:25.099
सर्व के ?

92
00:47:26.230 --> 00:47:32.230
हर एक समझता है - यह मेरा भाई-बहन है ?

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00:47:32.230 --> 00:47:37.099
हर एक समझता है यह मेरा है ?

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00:47:37.099 --> 00:47:39.099
समझता है ?

95
00:47:39.099 --> 00:47:46.530
कि कोई-कोई समझता है ?

96
00:47:53.159 --> 00:48:03.699
जैसे बाप के स्नेह में सभी हाथउठाते हैं , हाँ बाप के स्नेही हैं

97
00:48:05.400 --> 00:48:16.460
ऐसे आप हर एक के लिए हाथ उठायेंगे , कि हाँ यह सर्व के स्नेही हैं ?

98
00:48:20.760 --> 00:48:24.659
यह सर्टीफिकेटमिलेगा ?

99
00:48:31.300 --> 00:48:44.400
क्योंकि बापदादा ने पहले भी कहा था कि सिर्फ बाप से सर्टीफिकेट नहीं लेना है ,

100
00:48:57.099 --> 00:49:04.659
ब्राह्मण परिवार से भीलेना है

101
00:49:15.559 --> 00:49:35.159
क्योंकि इस समय बाप धर्म और राज्य दोनों साथ-साथ स्थापन कर रहे हैं ।

102
00:49:39.429 --> 00:49:48.500
राज्य में सिर्फ बाप नहीं होंगे , परिवार भी होगा ।

103
00:49:50.829 --> 00:49:58.800
बाप के भी प्यारे , परिवार के भी प्यारे ।

104
00:50:27.900 --> 00:50:42.030
ज्ञानी बने हो लेकिन साथ में स्नेही भी जरूरी है ।

105
00:51:03.500 --> 00:51:16.429
स्वमान में रहना और सम्मान देना , यह दोनों जरूरी हैं ।

106
00:51:26.199 --> 00:51:55.630
बापने ब्राह्मण जन्म लेते ही हर एक बच्चे को सम्मान दिया , तब तो ऊँचे बनें ।

107
00:52:11.500 --> 00:52:36.960
इस एक जन्म में सम्मान देना है और साराकल्प उसकी प्रालब्ध सम्मान प्राप्त होता है ।

108
00:52:41.130 --> 00:53:07.030
आधाकल्प राज्य अधिकारी का सम्मान मिलता है , आधाकल्प भक्ति मेंभक्तों द्वारा सम्मान मिलता है ।

109
00:53:10.829 --> 00:53:33.500
लेकिन इसका , सारे कल्प का आधार है इस एक जन्म में सम्मान देना , सम्मान लेना ।

110
00:54:04.559 --> 00:54:21.230
देखो आज इस सीजन का पहला मिलन है ।

111
00:54:31.159 --> 00:54:47.400
चारों ओर से सब बच्चे स्नेह से इकट्ठे हुए हैं ।

112
00:55:06.429 --> 00:55:13.030
तो जो पहले बारी आयेँ हैं , वह हाथ उठाओ ।

113
00:55:27.230 --> 00:55:30.059
बहुत आये हैं ।

114
00:55:40.630 --> 00:55:53.300
पहले बारी आये हैं और पहला चांस लिया है , तो पहले चांस लेने वालों कोमुबारक है ।

115
00:56:03.199 --> 00:56:22.000
सभी को अपने परिवार में वृद्धि देख करके खुशी होती है ना ।

116
00:56:23.059 --> 00:56:26.300
वाह हमारे भाई !

117
00:56:26.300 --> 00:56:31.800
वाह हमारी बहिनें पहुँचगये !

118
00:56:39.559 --> 00:56:45.099
बापदादा को भी बहुत खुशी होती है ।

119
00:56:46.059 --> 00:57:00.829
बिछुड़े हुए बच्चे फिर से अपना अधिकार लेने के लिए पहुँच गये हैं ।

120
00:57:10.900 --> 00:57:22.130
तोसभी खुश हैं या बहुत-बहुत-बहुत खुश हैं ?

121
00:57:22.929 --> 00:57:26.500
बहुत-बहुत खुश ।

122
00:57:48.260 --> 00:57:53.960
अच्छा-डबल फारेनर्स भी आये हुए हैं ।

123
00:57:58.699 --> 00:58:11.429
होशियार हैं डबल फारेनर्स ।

124
00:58:11.960 --> 00:58:15.599
कोई भी टर्न छोड़ते नहीं हैं ।

125
00:58:21.300 --> 00:58:23.460
अच्छा है ।

126
00:58:24.460 --> 00:58:33.360
चांस लेने वाले को चांसलर कहते हैं ।

127
00:58:37.730 --> 00:58:42.559
तो चांस लेने में होशियार हैं ।

128
00:58:54.829 --> 00:59:22.260
डबल फारेनर्स को विशेष बापदादा एक बात कीविशेष मुबारक देते हैं ।

129
00:59:24.860 --> 00:59:27.599
कौन सी ?

130
00:59:30.829 --> 00:59:58.559
जो कहाँ-कहाँ बिखर गये , देश भी बदल गया , धर्म भी कईयों का बदल गया , कल्चर भी बदल गया

131
00:59:58.559 --> 01:00:34.699
लेकिन बदलते हुए पहचानने की आँख बहुत तेज निकली , जो भिन्न होते भी पहचानने मेंहोशियार निकले ।

132
01:00:42.300 --> 01:00:51.360
पहचान लिया , बाप को अपना बना दिया ।

133
01:00:51.360 --> 01:00:56.559
परिवार को अपना बना लिया ।

134
01:00:57.630 --> 01:01:06.059
ब्राह्मण कल्चर को अपनाबना लिया ।

135
01:01:07.699 --> 01:01:10.429
तो होशियार निकले ना !

136
01:01:17.559 --> 01:01:32.659
और बापदादा सदा यह विशेषता देखते हैं

137
01:01:36.030 --> 01:01:51.199
कि बाप से भी प्यार है लेकिन सेवा सेभी बहुत प्यार है ।

138
01:01:58.800 --> 01:02:13.960
सेवा से प्यार होने के कारण बहुत बिजी होते हो ना !

139
01:02:13.960 --> 01:02:17.900
डबल सेवा करते हो ।

140
01:02:18.960 --> 01:02:50.329
डबल भी नहीं , तीनसेवा करते हो , एक लौकिक जॉब , एक ज्ञान की सेवा और साथ में बापदादा ने मैजारिटी को देखा है

141
01:02:51.159 --> 01:03:02.000
कि सेन्टर मेंभी कर्मणा सेवा में सहयोगी बनते हैं ।

142
01:03:05.500 --> 01:03:33.599
तो बापदादा जब देखते हैं तीनों तरफ की सेवा में बच्चे बिजी रहते हैं , खुश होतेहैं और दिल ही दिल में मुबारक देते रहते हैं ।

143
01:03:39.360 --> 01:04:02.800
अभी-अभी भी बापदादा देख रहे हैं चारों ओर विदेश में कोई रात में , कोई दिन में मिलन मना रहे हैं ।

144
01:04:21.400 --> 01:04:43.929
अच्छी पुरूषार्थ की गति को बढ़ाने के लिए आपको दादी भी अच्छी मिली है ।

145
01:04:56.059 --> 01:04:58.900
है नाऐसे ?

146
01:04:58.900 --> 01:05:10.159
जरा सी कोई कमी देखती है , फौरन क्लास पर क्लास कराती है ।

147
01:05:27.929 --> 01:06:01.730
किसी भी बच्चे को , चाहे देश वाले चाहेविदेश वालों को , किसी भी सबजेक्ट में मेहनत लगती है , उसका मूल कारण है दिल का स्नेह ।

148
01:06:07.960 --> 01:06:12.000
स्नेह माना लवलीन ।

149
01:06:12.000 --> 01:06:21.159
याद करना नहीं पड़ता , याद भुलाना मुश्किल होता ।

150
01:06:30.429 --> 01:06:50.960
अगर मेहनत करनी पड़ती है तो कारण है दिल के स्नेह कोचेक करो ।

151
01:06:58.260 --> 01:07:02.599
कहाँ लीकेज तो नहीं है ?

152
01:07:14.659 --> 01:08:14.860
चाहे लगाव कोई व्यक्ति से , चाहे व्यक्ति की विशेषता से , चाहे कोई साधन से , सैलवेशन से , एकस्ट्रा सैलवेशन , कायदे प्रमाण सैलवेशन ठीक है ,

153
01:08:14.860 --> 01:08:24.430
लेकिन एकस्ट्रा सैलवेशन से भी प्यार होता है , लगाव होता है ।

154
01:08:26.300 --> 01:08:30.100
वह सैलवेशन याद आती रहेगी ।

155
01:08:37.460 --> 01:08:47.300
उसकी निशानी है - कहाँ भी लीकेज होगी

156
01:08:48.659 --> 01:09:06.500
तो सदा जीवन में किसी भी कारण से सन्तुष्टता की अनुभूति नहीं होगी ।

157
01:09:11.159 --> 01:09:25.100
कोई न कोई कारण असन्तुष्टता का अनुभव करायेंगे ।

158
01:09:28.159 --> 01:09:43.560
और सन्तुष्टताजहाँ होगी उसकी निशानी सदा प्रसन्नता होगी ।

159
01:09:56.500 --> 01:10:14.029
सदा रूहानी गुलाब के मुआफिक मुस्कराता रहेगा , खिला हुआरहेगा ।

160
01:10:20.359 --> 01:10:44.359
मूड आफ नहीं होगी , सदा डबल लाइट ।

161
01:10:55.859 --> 01:11:02.229
तो समझा मेहनत से अभी बच जाओ ।

162
01:11:02.229 --> 01:11:07.960
बापदादा को बच्चों कीमेहनत नहीं अच्छी लगती ।

163
01:11:11.699 --> 01:11:19.460
आधाकल्प मेहनत की है , अभी मौज करो ।

164
01:11:20.859 --> 01:11:49.630
मुहब्बत में लवलीन हो , अनुभव के मोती ज्ञानसागर के तले में अनुभव करो ।

165
01:11:57.600 --> 01:12:08.359
सिर्फ डुबकी लगाकर निकल नहीं आओ सागर से , लवलीन रहो ।

166
01:12:22.500 --> 01:12:32.460
सभी ने वायदा तो किया है ना !

167
01:12:34.760 --> 01:12:42.029
कि साथ रहेंगे , साथ चलेंगे ?

168
01:12:42.859 --> 01:12:45.500
किया है , वायदा किया है ?

169
01:12:45.500 --> 01:12:50.659
साथ चलेंगे या पीछे-पीछे आयेंगे ?

170
01:12:51.560 --> 01:12:58.699
जो साथ चलने के लिए तैयार हैं वह हाथ उठाओ ।

171
01:12:59.029 --> 01:13:13.859
तैयार हैं , सोचकर उठाओ , तैयार हैं अर्थात् बापसमान हैं ।

172
01:13:18.560 --> 01:13:20.500
कौन साथ चलेगा ?

173
01:13:20.500 --> 01:13:24.529
समान साथ चलेगा ना !

174
01:13:26.300 --> 01:13:28.300
तो चलेंगे ?

175
01:13:28.300 --> 01:13:33.960
एवररेडी?

176
01:13:33.960 --> 01:13:42.600
पहली लाइन एवररेडी?

177
01:13:42.600 --> 01:13:44.600
एवररेडी?

178
01:13:44.600 --> 01:13:53.560
कल चलने के लिए आर्डर करें , चलेंगे ?

179
01:13:57.300 --> 01:14:00.930
अच्छा प्रवृत्ति वाले चलेंगे ?

180
01:14:00.930 --> 01:14:04.399
बच्चे नहीं याद आयेंगे ?

181
01:14:07.430 --> 01:14:09.930
मातायें चलेंगी ?

182
01:14:09.930 --> 01:14:13.029
मातायेंतैयार हैं ?

183
01:14:14.100 --> 01:14:17.229
याद नहीं आयेगी ?

184
01:14:19.159 --> 01:14:28.029
टीचर्स को सेन्टर याद आयेगा , जिज्ञासु याद आयेंगे ?

185
01:14:28.029 --> 01:14:30.760
नहीं याद आयेगा ?

186
01:14:30.760 --> 01:14:32.760
अच्छा ।

187
01:14:34.229 --> 01:14:37.960
सभी निर्मोही हो गये हो ?

188
01:14:39.630 --> 01:14:44.560
फिर तो बहुत अच्छी बात है ।

189
01:14:51.630 --> 01:14:57.130
फिर तो मेहनत नहीं करनी पड़ेगी ना ।

190
01:14:58.800 --> 01:15:19.159
आज बापदादा सभी को चाहे सम्मुख बैठे हैं , चाहे दूर बैठे भी बाप के दिल में बैठे हैं ,

191
01:15:20.560 --> 01:15:35.760
सभी को आज का दिन मेहनत मुक्त बनाने चाहते हैं ।

192
01:15:42.930 --> 01:15:44.760
बनेंगे ?

193
01:15:44.760 --> 01:15:53.229
ताली तो बजा दी , बनेंगे ?

194
01:15:53.729 --> 01:16:00.000
कल से कोई दादियों के पास नहीं आयेगा ।

195
01:16:00.000 --> 01:16:02.859
मेहनतनहीं करायेंगे ?

196
01:16:02.859 --> 01:16:05.659
मौज से मिलेंगे ।

197
01:16:08.329 --> 01:16:16.800
जोनहेड के पास नहीं जायेंगे , कम्पलेन नहीं करेंगे , कम्पलीट ।

198
01:16:18.300 --> 01:16:20.100
ठीक है ?

199
01:16:20.630 --> 01:16:23.430
अभी हाथ उठाओ ।

200
01:16:23.430 --> 01:16:30.699
देखो सोच के हाथ उठाना , ऐसे नहीं उठा लेना ।

201
01:16:30.699 --> 01:16:34.430
पहली लाइन नहीं उठा रही है ।

202
01:16:37.529 --> 01:16:42.829
आप लोगों ने उठाया ।

203
01:16:44.130 --> 01:16:47.359
कोई कम्पलेन नहीं ।

204
01:16:47.359 --> 01:16:53.729
कोई मेरा मेरा नहीं , कोई मेरा नहीं ।

205
01:16:55.500 --> 01:17:01.529
मैं भी नहीं , मेरा भी नहीं , खत्म ।

206
01:17:07.800 --> 01:17:23.329
देखो वायदा तो किया है , अच्छा है मुबारक हो लेकिन क्या है , वायदे का फायदा नहीं उठाते हो ।

207
01:17:25.029 --> 01:17:47.060
वायदा बहुत जल्दी कर लेते हो लेकिन फायदा उठाने के लिए रोज एक तो रियलाइजेशन दूसरा रिवाइज करो ,

208
01:17:47.630 --> 01:17:54.630
वायदे को रोज रिवाइज करो क्या वायदा किया ?

209
01:17:54.630 --> 01:18:10.229
अमृतवेले मिलने के बाद वायदा और फायदा दोनों के बैलेन्स का चार्ट बनाओ ।

210
01:18:13.229 --> 01:18:16.359
वायदा क्या किया ?

211
01:18:16.359 --> 01:18:21.699
और फायदा क्या उठा रहे हैं ?

212
01:18:22.960 --> 01:18:30.630
रियलाइज करो , रिवाइज करो , बैलेन्स हो जायेगा तो ठीक हो जायेगा ।

213
01:18:30.630 --> 01:18:37.560
बापदादा को पता है मीटिंग वालों ने वायदा किया है ।

214
01:18:37.560 --> 01:18:45.000
मीटिंग वाले उठो ।

215
01:19:12.699 --> 01:19:16.100
अच्छा पक्का वायदा किया ?

216
01:19:16.100 --> 01:19:20.300
या फाइल के लिए वायदा किया ?

217
01:19:22.000 --> 01:19:29.100
फाइल के लिए किया या फाइनल किया ?

218
01:19:31.100 --> 01:19:33.359
फाइनल किया ?

219
01:19:36.029 --> 01:19:39.130
ताली बजाओ ।

220
01:19:50.100 --> 01:19:55.960
अच्छी तरह सेबजाओ ।

221
01:20:08.500 --> 01:20:12.130
बहुत अच्छा किया , बैठ जाओ ।

222
01:20:16.760 --> 01:20:31.300
देखो , इतने भी फाइनल हो जायेंगे तो पीछे नम्बर तो जरूर फाइनल होजायेंगे

223
01:20:34.800 --> 01:21:03.930
क्योंकि आप विशेष सेवा के आधारमूर्त निमित्त हो और सेवा की सफलता स्व सेवा से ही होती है ।

224
01:21:05.159 --> 01:21:15.029
स्व की सेवाविश्व की सेवा का आधार है ।

225
01:21:18.060 --> 01:21:43.000
तो इतने सब वायदा और फायदा उठाने वाले ही हैं , तो आपका निमित्त भाव औरों कोभी सहयोग देगा ।

226
01:21:50.300 --> 01:21:55.159
बार-बार रियलाइज करना ।

227
01:21:59.460 --> 01:22:07.460
दिल से रियलाइज करना , क्या करना है , क्या नहीं करना है ।

228
01:22:09.159 --> 01:22:25.630
ना को 21 जन्म के लिए आलमाइटी गवर्मेन्ट की सील लगा देना ।

229
01:22:28.729 --> 01:22:33.659
और हाँ जी , हाँ जी करते रहना ।

230
01:22:42.960 --> 01:23:05.430
मास्टर सर्वशक्तिमानहैं , जो चाहे वह कर सकते हैं , इतनी अथॉरिटी बाप द्वारा मिली हुई है ।

231
01:23:13.399 --> 01:23:37.829
पहले कोई भी संकल्प , बोल , कर्म करने केपहले बाप समान है या नहीं ?

232
01:23:38.829 --> 01:23:45.359
यह चेक करो फिर प्रैक्टिकल में लाओ ।

233
01:23:54.460 --> 01:24:07.260
जब आपका विवेक हाँ करें , हाँ जी तभी प्रैक्टिकलमें लाओ ।

234
01:24:11.729 --> 01:24:20.729
समान बनना है तो समान करना भी है ।

235
01:24:21.430 --> 01:24:23.960
चलना भी है ।

236
01:24:30.560 --> 01:24:52.659
बापदादा तो हर बच्चे को बहुत-बहुत बड़ी बड़ीउम्मीदों से देखते हैं कि यही बनने हैं ,

237
01:24:52.659 --> 01:25:03.300
बने थे और अवश्य बनना ही है ।

238
01:25:23.130 --> 01:25:36.399
सिर्फ दो शब्द याद रखना - निमित्त औरनिमार्कण ।

239
01:25:42.699 --> 01:25:50.560
इसमें मैं , मेरा दोनों ही खत्म हो जायेगा ।

240
01:25:58.159 --> 01:26:10.800
निमित्त हूँ और निमार्कण बनना ही है ।

241
01:26:25.500 --> 01:26:35.100
आप जो 70 वर्ष मना रहे हो , यह समाचार भी सुना ।

242
01:26:36.229 --> 01:26:44.729
विदेश भी तैयारी कर रहे हैं और देश वाले भी कर रहे हैं ।

243
01:26:44.729 --> 01:26:49.159
यही मीटिंग की ना !

244
01:26:51.159 --> 01:27:07.460
तो बापदादा इस 70 वें वर्ष को किस विधि से मनाने चाहते हैं ।

245
01:27:08.300 --> 01:27:12.500
सभी को उमंग है ना मनाने का ?

246
01:27:12.500 --> 01:27:16.100
उमंग है ?

247
01:27:16.100 --> 01:27:29.029
माताओं को है , डबल विदेशियों को है ?

248
01:27:29.029 --> 01:27:31.029
मनाना है ?

249
01:27:41.699 --> 01:27:52.500
सेवा का प्रोग्राम तो आप बनाते ही हो और बनायेंगेभी , इसमें तो होशियार हो ।

250
01:27:52.500 --> 01:28:02.600
बापदादा ने देखा है प्लैन बहुत अच्छे अच्छे बनाते हैं बापदादा को पसन्द हैं ।

251
01:28:03.960 --> 01:28:07.699
बापदादाक्या चाहते हैं ?

252
01:28:09.029 --> 01:28:30.300
बापदादा सिर्फ एक शब्द चाहता है - एक शब्द है - सफल करो , सफल बनो ।

253
01:28:35.329 --> 01:29:07.430
जो भी खज़ाने हैं , शक्तियाँ हैं , संकल्प हैं , बोल हैं , कर्म भी शक्ति है , यह समय भी खज़ाना है , शक्ति है , खज़ाना है ।

254
01:29:08.729 --> 01:29:13.300
सबको सफलकरना है ।

255
01:29:13.300 --> 01:29:25.829
चाहे स्थूल धन , चाहे अलौकिक खज़ाने , सबको सफल करना है ।

256
01:29:26.829 --> 01:29:42.460
सफलतामूर्त का सर्टिफिकेट लेना हीहै ।

257
01:29:44.630 --> 01:29:52.029
सफल करो और सफल कराओ ।

258
01:29:53.760 --> 01:30:03.159
अगर कोई असफल करता है ,

259
01:30:04.760 --> 01:30:43.859
तो बोल द्वारा शिक्षा द्वारा नहीं , अपने शुभभावना , शुभकामना और सदा शुभसम्मान देने द्वारा सफल कराओ ।

260
01:30:47.229 --> 01:31:14.560
सिर्फ शिक्षा नहीं दो , अगर शिक्षा देनी भी पड़ती हैलेकिन क्षमा और शिक्षा , क्षमा रूप बनकर शिक्षा दो ।

261
01:31:22.960 --> 01:31:30.229
मर्सीफुल बनो , रहमदिल बनो ।

262
01:31:35.430 --> 01:31:52.829
आपका मर्सीफुल रूप अवश्यशिक्षा का फल दिखायेगा ।

263
01:31:59.899 --> 01:32:14.159
देखो आजकल साइंस वाले भी पहले आपरेशन करते हैं , लेकिन पहले क्या करते हैं ?

264
01:32:14.600 --> 01:32:17.500
पहले सुला देते हैं ।

265
01:32:18.899 --> 01:32:32.630
पीछे काटते हैं , पहले ही नहीं काटते हैं , टिंचर भी लगाते हैं , पहले फूँक देते हैं फिरटिंचर लगातेहैं ।

266
01:32:39.460 --> 01:32:54.359
तो आप भी पहले मर्सीफुल बनो , फिर शिक्षा दो तो प्रभाव डालेगी नहीं तो क्या होता है ?

267
01:32:54.359 --> 01:33:03.060
आप शिक्षा देने लगतेहो वह पहले ही आपसे ज्यादा शिक्षक है ।

268
01:33:07.300 --> 01:33:15.560
तो शिक्षक , शिक्षक की शिक्षा नहीं मानता ।

269
01:33:19.630 --> 01:33:32.859
जो प्वाइंट आप देंगे , ऐसे नहींकरो , ऐसे करो , उसके पास कट करने की 10 प्वाइंट होंगी ।

270
01:33:37.159 --> 01:34:03.960
इसीलिए क्षमा और शिक्षा साथ-साथ हो , तो इस 70 वें वर्ष का थीम है - सफल करो , सफल कराओ ।

271
01:34:03.960 --> 01:34:08.130
सफलतामूर्त बनो ।

272
01:34:09.159 --> 01:34:12.899
सब सफल करो ।

273
01:34:25.229 --> 01:34:30.100
डबल लाइट बनना है नातो सफल कर लो ।

274
01:34:35.159 --> 01:34:39.159
संस्कार को भी सफल करो ।

275
01:34:46.229 --> 01:35:12.699
जो ओरीज्नल आपके आदि संस्कार , देवताई संस्कार , अनादिसंस्कार आत्मा के उसको इमर्ज करो ।

276
01:35:22.430 --> 01:35:31.229
उल्टे संस्कारों का संस्कार करो ।

277
01:35:36.460 --> 01:35:46.029
आदि अनादि संस्कार इमर्ज करो ।

278
01:35:51.930 --> 01:36:05.000
अभीसभी की कम्पलेन विशेष एक ही रह गई है , संस्कार नहीं बदलते , संस्कार नहीं बदलते ।

279
01:36:15.829 --> 01:36:21.460
तो 70 वें वर्ष में कुछ तोकमाल करेंगे ना ।

280
01:36:30.399 --> 01:36:39.800
तो यह परिवर्तन की विशेषता दिखाओ ।

281
01:36:49.859 --> 01:36:52.300
ठीक है ना ।

282
01:36:52.300 --> 01:36:56.329
70 वें वर्ष में करना है ना ?

283
01:36:56.329 --> 01:37:02.000
करना है , करेंगे ?

284
01:37:02.000 --> 01:37:06.659
करेंगे या हुआ ही पड़ा है ?

285
01:37:07.729 --> 01:37:11.729
सिर्फ निमित्त बनना है ।

286
01:37:21.729 --> 01:37:42.899
अच्छा बापदादा सभी बच्चों को देख गीत गाते हैं - वाह !

287
01:37:42.899 --> 01:37:50.699
बच्चे वाह !

288
01:38:01.060 --> 01:38:04.930
अच्छा - अभी क्या करना है ?

289
01:38:18.729 --> 01:38:52.630
सेवा का टर्न इन्दौर जोन का है :- बहुत सेवाधारी आये हैं ।

290
01:38:52.630 --> 01:39:00.000
संगठन अच्छा है ।

291
01:39:11.260 --> 01:39:38.529
जो सेवा की , दिल के स्नेह सेसेवा की है , उसका प्रत्यक्ष फल भी खुशी अनुभव की ?

292
01:39:39.260 --> 01:39:41.159
खुशी मिली ?

293
01:39:41.859 --> 01:40:00.659
सेवा का फल है , प्रत्यक्षफल है खुशी औरभविष्य सेवा का फल पुण्य जमा हुआ ।

294
01:40:02.029 --> 01:40:08.199
पुण्य का खाता बढ़ गया ।

295
01:40:11.329 --> 01:40:21.300
तो वर्तमान भी फल मिला और भविष्य भी जमा होगया ।

296
01:40:28.899 --> 01:40:47.529
अच्छा है हर जोन को चांस मिलता है , विशेष चांस मिलने से वायुमण्डल का फायदा ,

297
01:40:47.529 --> 01:41:11.960
यज्ञ सेवा के पुण्य काखाता और सेवा से सर्व ब्राह्मणों से सम्बन्ध-सम्पर्क का ईश्वरीय प्यार का नाता बढ़ता है ।

298
01:41:15.000 --> 01:41:25.600
तो बहुत अच्छा कर रहे हैंऔर कल से तो समाप्ति भी शुरू हो जायेगी ।

299
01:41:26.600 --> 01:41:41.000
तो बहुत अच्छा किया , सेवा का बल सदा के लिए भरके जाना ।

300
01:41:46.800 --> 01:41:49.029
अच्छाहै ।

301
01:41:50.199 --> 01:41:57.460
मातायें भी हैं , कुमारियाँ भी हैं , सब सेवाधारी हैं ।

302
01:41:59.029 --> 01:42:01.699
पाण्डव तो हैं ही हैं ।

303
01:42:03.359 --> 01:42:05.729
पाण्डव हाथ उठाओ ।

304
01:42:05.729 --> 01:42:09.000
पाण्डव ज्यादा हैं ।

305
01:42:09.000 --> 01:42:14.100
मातायें हाथ उठाओ ।

306
01:42:19.029 --> 01:42:24.329
कुमारियाँ हाथ उठाओ ।

307
01:42:32.930 --> 01:43:02.100
जो सेवा का चांस लिया है , तो जो वायदा करके जा रहे हो उसका फायदा विशेष सेवा के रिटर्न में देते रहना ।

308
01:43:09.399 --> 01:43:12.729
वायदे का फायदा उठाना ।

309
01:43:12.729 --> 01:43:18.260
सिर्फ वायदा नहीं , फायदा ।

310
01:43:21.199 --> 01:43:23.699
अच्छा ।

311
01:43:27.460 --> 01:43:43.500
इन्दौर-नडियाद होस्टल की कुमारियाँ भी हैं :- नडियाद की थोड़ी हैं ।

312
01:44:19.729 --> 01:44:28.159
नडियाद की कुमारियाँ ठीक हैं ।

313
01:44:30.760 --> 01:44:38.760
स्व-उन्नति , सेवा की उन्नति दोनों ही हो रही है ?

314
01:44:44.560 --> 01:44:56.960
अच्छा है , कुमारियाँ ट्रेनिंग करती हैं और भी ट्रेनिंग की कुमारियाँ आई हैं ना ।

315
01:45:08.329 --> 01:45:11.600
नडियाद वाली भी आगे आ जाओ ।

316
01:45:22.159 --> 01:45:25.130
अच्छा ।

317
01:45:25.130 --> 01:45:39.460
इन सभी कुमारियों ने चाहे नडियाद में हैं , चाहे मधुबन मेंहैं , अभी तो मधुबन की हैं ना ।

318
01:45:41.260 --> 01:45:49.859
तो सभी ने लक्ष्य पूरा रखा है ?

319
01:45:50.960 --> 01:45:52.729
लक्ष्य क्या रखा है ?

320
01:45:52.729 --> 01:45:56.199
सफलतामूर्त बनने का ।

321
01:45:57.930 --> 01:46:06.529
समस्यानहीं बनना है , समाधानमूर्त बनना है ।

322
01:46:09.100 --> 01:46:14.060
वायुमण्डल के प्रभाव में नहीं आना है ।

323
01:46:15.100 --> 01:46:27.029
अपने वायुमण्डल का प्रभाव डालना है , इतनी ताकत भरी है ?

324
01:46:27.529 --> 01:46:36.800
आपको वायुमण्डल की मदद नहीं मिले तो क्या करेंगी ?

325
01:46:39.359 --> 01:46:43.460
अपना वायुमण्डल दिखायेंगी ?

326
01:46:44.930 --> 01:46:47.829
इतनीताकत है ?

327
01:46:49.529 --> 01:46:53.359
फिर तो ताली बजाओ , मुबारक हो ।

328
01:47:01.260 --> 01:47:13.760
बहुत अच्छा , देखो आपका चित्र तो इसमें आ रहा है , यह फोटोनिकल रहा है ।

329
01:47:13.760 --> 01:47:27.899
तो बापदादा हर मास आपके निमित्त से रिपोर्ट लेगा ।

330
01:47:30.199 --> 01:47:33.260
मुबारक भी देगा ।

331
01:47:35.560 --> 01:47:50.859
क्योंकि सफलतामूर्त , सफलताके अधिकारी हैं ।

332
01:47:53.600 --> 01:47:59.260
तो सफलता के अधिकारी बनना है ना ।

333
01:48:00.800 --> 01:48:13.060
अच्छा है , एक बात की तो मुबारक है अभी , कि हिम्मत रखकरके आ गई हो ।

334
01:48:13.899 --> 01:48:24.659
तो आपकी हिम्मत के कदम पर बापदादा की पदमगुणा मदद है ही है ।

335
01:48:30.899 --> 01:48:36.460
दिलशिकस्त नहीं होना , दिलखुश ।

336
01:48:38.359 --> 01:48:51.229
अगर कोई भी समस्या आवे ना , तो उसी समय बाप के आगे रख देना , अपने दिल में नहीं रखना ।

337
01:48:52.859 --> 01:49:00.100
बाबाआप लो , हम तो समाधान स्वरूप हैं ।

338
01:49:03.199 --> 01:49:04.829
ठीक है ?

339
01:49:04.829 --> 01:49:11.500
अच्छी हिम्मत वाली हो , और हिम्मत सदा रखती रहना ।

340
01:49:12.859 --> 01:49:14.699
अच्छा ।

341
01:49:20.600 --> 01:49:40.630
कटक में बहुत अच्छा मेगा प्रोग्राम रहा , पुरी में भी बहुत अच्छा प्रोग्राम रहा :-

342
01:49:42.829 --> 01:50:01.729
प्रोग्राम तो सब अच्छे कर रहे हो , सन्देश का जो कार्य करना है वह सन्देश तो सबको पहुँच रहा है ,

343
01:50:03.399 --> 01:50:24.199
सबको पतापड़ता है कि ब्रह्माकुमारियाँ भी हैं और ब्रह्माकुमारियाँ यह कार्य करने चाहती हैं , यह भी मालूम पड़ता जाता है ।

344
01:50:26.000 --> 01:50:44.130
लेकिनबापदादा की जो पुराने-पुराने बड़े-बड़े सेन्टर चल रहे हैं ,

345
01:50:44.130 --> 01:50:54.829
उनके प्रति जो शुभ आशा है वह अभी तक पूर्ण नहीं कीहै ।

346
01:50:56.829 --> 01:51:02.000
यह बापदादा का उलाहना है ।

347
01:51:08.760 --> 01:51:41.260
वारिस क्वालिटी वा सेवा से भी ऐसे पुरूषार्थ में तीव्र क्वालिटी , वह बापदादा केसामने और अधिक आनी चाहिए ।

348
01:51:48.329 --> 01:52:14.260
वी आई पी भी आते हैं लेकिन वी आई पी भी वी वी आई पी बन जायें , वी आई पी , वी आई पी नहीं रहें , आई पी , आई पी नहीं रहें , ब्राह्मण जीवन का अनुभव करें ।

349
01:52:22.430 --> 01:52:39.529
क्वान्टिटी तो हो रही हैं अभीक्वालिटी का गुलदस्ता हर एक जोन में निकलना चाहिए ।

350
01:52:39.529 --> 01:53:07.329
हर एक जोन को चारों ओर के ऐसे उम्मींदवार आत्माओंकी विशेष पालना कर समीप सम्बन्ध में लाना है ।

351
01:53:09.329 --> 01:53:18.800
प्लैन तो बनाते हो अभी इस प्लैन को तीव्र गति दो ।

352
01:53:28.659 --> 01:53:50.399
क्योंकि कम-से-कम अपने राज्य के पहले जन्म की पावरफुल संख्या , कभी-कभी आने वाले , कभी-कभी नियम वाले नहीं ,

353
01:53:50.399 --> 01:54:10.829
पक्के जोविन करने वाले वन तारीख , वन जन्म में आने वाले हों , ऐसा गुलदस्ता तैयार करो ।

354
01:54:20.729 --> 01:54:28.260
चाहे प्रजा भी बने लेकिन प्रजाभी विशेष होगी ।

355
01:54:28.260 --> 01:54:44.930
प्रजा भी मालिक का अधिकार रखेगी क्योंकि पहले जन्म की शोभा पहले जन्म का भभका तो अलगहोता है ना ।

356
01:54:48.899 --> 01:55:05.930
तो हर एक जोन अपनी रिजल्ट निकाले , प्रोग्राम तो बहुत किया है , उसकी मुबारक हो ।

357
01:55:06.729 --> 01:55:15.100
बापदादा उसकोअच्छा समझते हैं ,

358
01:55:16.659 --> 01:55:38.260
सफल करते हैं , उमंग-उत्साह में आते हैं , और बड़ों-बड़ों के सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हैं , यहअच्छा कर रहे हैं लेकिन रिजल्ट निकालो ।

359
01:55:43.260 --> 01:55:56.630
कम-से-कम डेढ लाख , लाख आते हैं उनमें से कुछ तो विन करने वाले हों ।

360
01:56:04.729 --> 01:56:25.699
तो ऐसा प्रोग्राम बनाओ और पुराने सेन्टर वारिस क्वालिटी नये-नये निकालो , जो पुराने हैं उनको तो मुबारकमिलती है ,

361
01:56:26.600 --> 01:56:30.460
नये-नये वारिस क्वालिटी तैयार करो ।

362
01:56:31.560 --> 01:56:46.659
रॉयल फैमिली , रॉयल सम्बन्ध-सम्पर्क वाले भी तो चाहिए ना ।

363
01:56:57.460 --> 01:57:02.300
अच्छा ।

364
01:57:13.729 --> 01:57:28.729
अभी एक मिनट , एक मिनट मशहूर है ना !

365
01:57:32.260 --> 01:57:51.760
तो एक मिनट जो सभी ने मेहनत मुक्त का वायदा किया है , किया हैना ?

366
01:57:51.760 --> 01:57:53.760
किया है ?

367
01:57:55.600 --> 01:57:59.529
फोटो निकालो ।

368
01:58:06.399 --> 01:58:30.729
तो अभी एक मिनट के लिए अपने दिल से इस वायदे को दृढ़ता का अण्डरलाइनलगाओ ।

369
01:58:33.829 --> 01:58:37.930
अपने मन में पक्का करो ।

370
02:00:42.329 --> 02:00:45.300
अच्छा ।

371
02:00:48.800 --> 02:01:08.260
सर्व चारों ओर के स्वमानधारी बच्चों को ,

372
02:01:09.760 --> 02:01:23.529
सदा बाप के दिल के स्नेही ,

373
02:01:24.600 --> 02:01:38.500
सर्व के स्नेही श्रेष्ठ आत्माओं को ,

374
02:01:40.199 --> 02:02:07.859
सदामेहनत मुक्त , जीवनमुक्त अनुभव करने वाले तीव्र पुरूषार्थी बच्चों को

375
02:02:09.859 --> 02:02:38.500
सदा वायदा और वायदे का फायदा लेने वाले , बैलेन्स रखने वाले ब्लिसफुल बच्चों को ,

376
02:02:41.130 --> 02:03:25.630
सदा मौज में रहने वाले , मौज में औरों को भी रहाने वाले , ऐसे संगमयुगी श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी बच्चों को

377
02:03:27.199 --> 02:03:47.960
बापदादा का यादप्यार और दिलाराम के दिल की दुआयें स्वीकार हों ।

378
02:03:48.859 --> 02:03:58.500
यादप्यारऔर नमस्ते ।

379
02:04:37.630 --> 02:04:44.130
दादियों से :- ठीक है ना ।

380
02:04:50.460 --> 02:04:58.029
सभी आप लोगों को देखकर खुश होते हैं ।

381
02:05:16.029 --> 02:05:21.800
बाप और बच्चों , दोनों को देखकर खुशहोते हैं ।

382
02:05:28.399 --> 02:05:31.460
दोनों समान ।

383
02:05:42.930 --> 02:05:47.460
सभी के सिकीलधे हो ।

384
02:05:59.729 --> 02:06:05.229
सभी का दादियों से विशेष प्यार है ना !

385
02:06:05.229 --> 02:06:07.229
बहुत प्यार है ।

386
02:06:22.699 --> 02:06:40.060
क्योंकि जोनिमित्त बनते हैं , तो निमित्त बनने वालों के ऊपर जिम्मेवारी भी होती है ,

387
02:06:40.060 --> 02:06:59.659
तो स्नेह भी इतना होता है क्योंकि सबके प्यारऔर दुआओं की उनके जीवन में लिफ्ट मिल जाती है ।

388
02:07:07.329 --> 02:07:26.699
आप भी जो निमित्त बनते हो उन्हों को भी लिफ्ट मिलती हैलेकिन लिफ्ट की गिफ्ट को कायम रखें तो बहुत फायदा हो सकता है ।

389
02:07:32.000 --> 02:07:36.500
यह एकस्ट्रा वरदान मिलता है ।

390
02:07:39.529 --> 02:08:03.130
किसी भीकार्य के लिए , ईश्वरीय कार्य में , यज्ञ सेवा में , विशेष निमित्त बनता है उसको दुआयें और प्यार दोनों की लिफ्ट मिलतीहै ।

391
02:08:10.329 --> 02:08:19.529
प्यार एक ऐसी चीज़ है जो क्या से क्या बना देती है ।

392
02:08:25.199 --> 02:08:31.760
आज दुनिया में भी किसी से पूछो क्या चाहिए ?

393
02:08:31.760 --> 02:08:35.460
कहेंगे प्यारचाहिए ।

394
02:08:38.060 --> 02:08:42.760
शान्ति चाहिए , वह भी प्यार से मिलेगी ।

395
02:08:48.930 --> 02:09:03.659
तो प्यार , आत्मिक प्यार सबसे श्रेष्ठ है ।

396
02:09:28.000 --> 02:09:56.159
( फ्रांस वालों ने बहुत याद दी है ) बापदादा भी बच्चों को विशेष सेवा में परिवर्तन की मुबारक देते हैं ।

397
02:10:03.729 --> 02:10:14.130
( मार्क नेबहुत मेहनत की है ) खास मुबारक हो , ताली बजाओ ।

398
02:10:23.630 --> 02:10:38.159
देखो जो पुराना गवर्मेन्ट का रिकार्ड था , कल्ट का , वह सभीजगह मिट जायेगा ।

399
02:10:38.159 --> 02:10:44.560
अच्छी हिम्मत रखी ।

400
02:10:45.800 --> 02:10:49.300
हिम्मत की मदद मिलती है ।

401
02:10:49.300 --> 02:10:59.800
योग किया ना दिल से , तो योग का फल मिला , बल मिला ।

402
02:10:59.800 --> 02:11:03.600
बापदादा भी खुश है ।

403
02:11:03.600 --> 02:11:08.729
परिवार भी खुश है तब तालियां बजाई ना ।

404
02:11:09.159 --> 02:11:26.029
दादी जी से बाबा पूछ रहा है :- तबियत खराब है , बुखार है क्या ?

405
02:11:26.930 --> 02:11:47.960
यह तो बहादुर है , देखो ठण्डा है या गर्महै ?

406
02:11:48.600 --> 02:12:04.060
खेल दिखा रही है ।

407
02:12:09.329 --> 02:12:13.399
तबियत की कमज़ोरी हो जाती है ।

408
02:12:13.399 --> 02:12:18.329
अभी तो ताकत आ रही है ।

409
02:12:21.800 --> 02:12:25.630
सभी को कहो मैं ठीक हूँ ।

410
02:12:25.630 --> 02:12:27.630
बोलो , ठीक हूँ ।

411
02:12:32.560 --> 02:12:59.560
( मैं बिल्कुल ठीक हूँ ) सभी का प्यार है ना ।

412
02:13:00.260 --> 02:13:13.630
देखो साकारअव्यक्त हुए और व्यक्त में निमित्त बनाया ।

413
02:13:13.630 --> 02:13:24.529
ऐसे टाइम पर निमित्त बनना , कितनी हिम्मत की बात है ।

414
02:13:25.760 --> 02:13:39.899
ऐसे टाइम पर हिम्मत दिखाने वाले को सारे आयु तक मददमिलती है ।

415
02:14:14.100 --> 02:14:17.199
अच्छा ।

