WEBVTT

1
00:15:39.759 --> 00:16:30.759
आज चारों ओर के सम्पूर्ण समान बच्चों को देख रहे हैं ।

2
00:16:45.500 --> 00:17:15.000
समान बच्चे ही बाप के दिल में समाये हुए हैं ।

3
00:17:26.930 --> 00:19:04.799
समान बच्चों की विशेषता है वह सदा निर्विघ्न , निर्विकल्प , निमार्कण और निर्मल होंगे ।

4
00:19:18.599 --> 00:20:22.599
ऐसी आत्मायें सदा स्वतन्त्र होती हैं , किसी भी प्रकार के हद के बन्धन में बंधायमान नहीं होती ।

5
00:20:29.130 --> 00:21:02.500
तो अपने आप से पूछो ऐसी बेहद की स्वतन्त्र आत्मा बने हैं !

6
00:21:13.460 --> 00:21:33.930
सबसे पहली स्वतन्त्रता है देहभान से स्वतन्त्र ।

7
00:21:40.130 --> 00:22:00.059
जब चाहे तब देह का आधार ले , जब चाहे देह से न्यारे हो जाए ।

8
00:22:14.660 --> 00:22:24.430
देह की आकर्षण में नहीं आये ।

9
00:22:51.000 --> 00:23:38.430
दूसरी बात - स्वतन्त्र आत्मा कोई भी पुराने स्वभाव और संस्कार के बन्धन में नहीं होगी ।

10
00:23:52.930 --> 00:24:11.930
पुराने स्वभाव और संस्कार से मुक्त होगी ।

11
00:24:25.730 --> 00:25:04.259
साथ-साथ किसी भी देहधारी आत्मा के सम्बन्ध-सम्पर्क में आकर्षित नहीं होगी ।

12
00:25:12.130 --> 00:25:31.599
सम्बन्ध-सम्पर्क में आते न्यारे और प्यारे होंगे ।

13
00:25:45.559 --> 00:26:21.900
तो अपने को चेक करो - कोई भी छोटी सी कर्मेन्द्रियाँ बन्धन में तो नहीं बांधती ?

14
00:26:46.130 --> 00:26:57.059
अपना स्वमान याद करो -

15
00:26:58.000 --> 00:27:22.460
मास्टर सर्वशक्तिवान , त्रिकालदर्शी , त्रिनेत्री , स्वदर्शन चक्रधारी ,

16
00:27:29.599 --> 00:28:01.799
उसी स्वमान के आधार पर क्या सर्वशक्तिवान के बच्चे को कोई कर्मेन्द्रिय आकर्षित कर सकती ?

17
00:28:23.460 --> 00:28:44.329
क्योंकि समय की समीपता को देखते अपने को देखो -

18
00:28:55.130 --> 00:29:18.299
सेकण्ड में सर्व बन्धनों से मुक्त हो सकते हो ?

19
00:29:19.829 --> 00:29:31.730
कोई भी ऐसा बन्धन रहा हुआ तो नहीं है ?

20
00:29:36.529 --> 00:30:29.859
क्योंकि लास्ट पेपर में नम्बरवन होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है, सेकण्ड में जहाँ, जैसे मन-बुद्धि को लगाने चाहो वहाँ सेकण्ड में लग जाये।

21
00:30:31.329 --> 00:30:35.599
हलचल में नहीं आये ।

22
00:30:46.000 --> 00:31:06.430
जैसे स्थूल शरीर द्वारा जहाँ जाने चाहते हो , जा सकते हो ना ।

23
00:31:09.529 --> 00:31:32.359
ऐसे बुद्धि द्वारा जिस स्थिति में स्थित होने चाहो उसमें स्थित हो सकते हो ?

24
00:31:52.200 --> 00:32:07.730
जैसे साइंस द्वारा लाइट हाउस , माइट हाउस होता है ,

25
00:32:08.859 --> 00:32:26.859
तो सेकण्ड में स्विच आन करने से लाइट हाउस चारों ओर लाइट देने लगता है ,

26
00:32:35.059 --> 00:32:40.200
माइट देने लगते हैं ।

27
00:32:41.799 --> 00:32:56.529
ऐसे आप स्मृति के संकल्प का स्विच आन करने से

28
00:33:03.660 --> 00:33:26.329
लाइट हाउस , माइट हाउस होके आत्माओं को लाइट , माइट दे सकते हो ?

29
00:34:01.730 --> 00:34:43.730
एक सेकण्ड का आर्डर हो अशरीरी बन जाओ , बन जायेंगे ना ।

30
00:34:48.000 --> 00:34:51.860
कि युद्ध करनी पड़ेगी ?

31
00:35:02.429 --> 00:35:36.800
यह अभ्यास बहुतकाल का ही अन्त में सहयोगी बनेगा ।

32
00:35:44.530 --> 00:36:29.829
अगर बहुतकाल का अभ्यास नहीं होगा तो उस समय अशरीरी बनना , मेहनत करनी पड़ेगी ।

33
00:36:36.699 --> 00:36:47.000
इसलिए बापदादा यही इशारा देते हैं -

34
00:36:59.559 --> 00:37:26.659
कि इस अभ्यास को सारे दिन में कर्म करते हुए भी अभ्यास करो ।

35
00:37:46.230 --> 00:38:09.030
इसके लिए मन के कन्ट्रोलिंग पावर की आवश्यकता है ।

36
00:38:12.099 --> 00:38:28.730
अगर मन कन्ट्रोल में आ गया तो कोई भी कर्मेन्द्रिय वशीभूत नहीं कर सकती ।

37
00:38:38.929 --> 00:39:32.659
अभी सर्व आत्माओं को आपके द्वारा शक्ति का वरदान चाहिए ।

38
00:39:43.130 --> 00:40:08.460
आत्माओं की आप मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं के प्रति

39
00:40:16.059 --> 00:40:59.829
यही शुभ इच्छा है कि बिना मेहनत के वरदान द्वारा , दृष्टि द्वारा , वायब्रेशन द्वारा हमें मुक्त करो ।

40
00:41:08.599 --> 00:41:14.800
अभी मेहनत करके सब थक गये हैं ।

41
00:41:48.630 --> 00:41:53.199
आप सब तो मेहनत से मुक्त हो गये हो ना !

42
00:41:53.199 --> 00:41:58.199
कि अभी भी मेहनत करनी पड़ती है ?

43
00:42:13.860 --> 00:42:33.000
सुनाया था - मेहनत से मुक्त होने का सहज साधन है

44
00:42:38.900 --> 00:42:57.800
दिल से बाप के अति स्नेही बन जाना ।

45
00:43:07.929 --> 00:43:30.030
आप ब्राह्मण आत्माओं का जन्म का वायदा है , याद है वायदा ?

46
00:43:31.460 --> 00:43:52.059
जब बाप ने अपना बनाया , ब्राह्मण जीवन दी तो ब्राह्मण जीवन का आप सबका वायदा क्या है ?

47
00:43:58.530 --> 00:44:04.800
एक बाप दूसरा न कोई ।

48
00:44:06.130 --> 00:44:09.130
याद है वायदा ?

49
00:44:09.130 --> 00:44:11.929
याद है ?

50
00:44:11.929 --> 00:44:14.429
कांध हिलाओ ।

51
00:44:14.429 --> 00:44:18.460
अच्छा हाथ हिला रहे हैं ।

52
00:44:19.329 --> 00:44:27.860
याद है पक्का या कभी-कभी भूल जाता है ?

53
00:44:40.460 --> 00:44:52.429
देखो 63 जन्म तो भूलने वाले बने ,

54
00:44:56.230 --> 00:45:11.800
अब यह एक जन्म स्मृति स्वरूप बने हो ।

55
00:45:18.599 --> 00:45:31.530
तो बाप बच्चों से पूछ रहे हैं बचपन का वायदा याद है ?

56
00:45:44.360 --> 00:45:56.829
कितना सहज करके दिया है - एक बाप में संसार है ।

57
00:46:02.429 --> 00:46:09.460
एक बाप से सर्व सम्बन्ध हैं ।

58
00:46:11.630 --> 00:46:17.960
एक बाप से सर्व प्राप्तियां हैं ।

59
00:46:33.329 --> 00:46:47.260
एक ही पढ़ाने वाला भी है और पालना करने वाला भी है ।

60
00:46:51.099 --> 00:46:54.860
सबमें एक है ।

61
00:47:13.199 --> 00:47:37.929
चाहे परिवार भी है , ईश्वरीय परिवार लेकिन परिवार भी एक बाप का है ।

62
00:47:40.630 --> 00:47:45.860
अलग-अलग बाप का परिवार नहीं है ।

63
00:47:47.199 --> 00:47:50.659
एक ही परिवार है ।

64
00:48:01.360 --> 00:48:21.400
परिवार में भी एक दो में आत्मिक स्नेह है , स्नेह नहीं आत्मिक स्नेह ।

65
00:48:30.300 --> 00:48:42.599
बापदादा याद दिला रहे हैं , जन्म के वायदे ।

66
00:48:48.599 --> 00:48:52.929
और क्या वायदा किया ?

67
00:48:56.130 --> 00:49:25.260
सभी ने बड़े उमंग-उत्साह से बाप के आगे दिल से कहा , सबकुछ आपका है ।

68
00:49:26.800 --> 00:49:35.329
तन-मन-धन सब आपका है ।

69
00:49:42.260 --> 00:50:04.059
तो दी हुई चीज़ बाप की अमानत के रूप में बाप ने कार्य में लगाने के लिए दिया है ,

70
00:50:09.800 --> 00:50:17.000
आपने बाप को दे दी , दे दी है ना ?

71
00:50:17.000 --> 00:50:21.730
या वापस थोड़ा-थोड़ा ले लेते हो ?

72
00:50:27.530 --> 00:50:36.800
वापस लेते हो तो अमानत में ख्यानत हो जाती है ।

73
00:50:45.500 --> 00:50:52.800
कोई-कोई बच्चे कहते हैं , रूहरिहान करते हैं ना

74
00:50:52.800 --> 00:51:08.900
तो कहते हैं मेरा मन परेशान रहता है , मेरा मन आया कहाँ से ?

75
00:51:14.429 --> 00:51:23.760
जब मेरा तेरे को अर्पण किया ,

76
00:51:27.429 --> 00:51:33.329
तो मेरा मन आया कहाँ से ?

77
00:51:44.530 --> 00:51:54.460
आप सभी तो बिन कौड़ी बादशाह हो गये ,

78
00:51:58.059 --> 00:52:06.329
अभी आपका कुछ नहीं रहा , बिन कौड़ी हो गये लेकिन बादशाह हो गये ।

79
00:52:06.329 --> 00:52:08.329
क्यों ?

80
00:52:09.530 --> 00:52:20.530
बाप का खज़ाना वह आपका खज़ाना हो गये , तो बादशाह हो गये ना ।

81
00:52:23.059 --> 00:52:31.659
परमात्म खज़ाना वह बच्चों का खज़ाना ।

82
00:52:34.929 --> 00:52:47.230
तो बापदादा वायदे याद दिला रहे हैं ।

83
00:53:00.159 --> 00:53:04.800
तेरे में मेरा नहीं करो ।

84
00:53:19.329 --> 00:53:24.099
बाप कहते हैं -

85
00:53:37.360 --> 00:54:07.059
जब बाप ने आप सबको परमात्म खज़ानों से मालामाल कर दिया ,

86
00:54:12.460 --> 00:54:25.159
जिम्मेवारी बाप ने ले ली , किन शब्दों में ?

87
00:54:26.159 --> 00:54:36.900
आप मुझे याद करो तो सर्वप्राप्ति के अधिकारी हो ही ।

88
00:54:38.400 --> 00:54:42.000
सिर्फ याद करो ।

89
00:54:48.929 --> 00:55:04.429
और आपने कहा हम आपके , आप हमारे ।

90
00:55:09.000 --> 00:55:13.429
यह वायदा है ना !

91
00:55:35.360 --> 00:55:40.059
तो बाप कहते हैं

92
00:55:45.860 --> 00:56:08.630
खज़ानों को सदा स्व प्रति और सर्व आत्माओं के प्रति कार्य में लगाओ ।

93
00:56:16.730 --> 00:56:29.860
जितना कार्य में लगायेंगे उतना ही खज़ाना बढ़ता जायेगा ।

94
00:56:43.000 --> 00:56:56.599
सर्वशक्तियों का खज़ाना , सर्व शक्तियाँ कार्य में लगाओ ।

95
00:56:58.329 --> 00:57:06.860
सिर्फ बुद्धि में नॉलेज नहीं रखो मैं सर्वशक्तिवान हूँ ,

96
00:57:10.000 --> 00:57:22.400
लेकिन सर्व शक्तियों को समय प्रमाण कार्य में लगाओ और सेवा में लगाओ ।

97
00:57:31.130 --> 00:58:22.000
बापदादा ने मैजॉरिटी बच्चों के पोतामेल में देखा है दो शक्तियाँ अगर सदा याद रहें और कार्य में समय पर लगाओ तो सदा ही निर्विघ्न रहो।

98
00:58:24.130 --> 00:58:36.199
विघ्न की ताकत नहीं है आपके आगे आने की ।

99
00:58:37.130 --> 00:58:41.130
यह बाप की गैरन्टी है ।

100
00:58:47.400 --> 00:58:57.059
वैसे तो सर्वशक्तियाँ चाहिए लेकिन मैजारिटी देखा गया

101
00:59:04.429 --> 00:59:37.059
कि सहनशक्ति और रियलाइजेशन की शक्ति , रियलाइज करते भी हो

102
00:59:44.300 --> 01:00:19.860
लेकिन उसको प्रैक्टिकल में स्वरूप में लाने में अटेन्शन कम है ।

103
01:00:27.360 --> 01:00:51.130
इसलिए जिस समय रियलाइज करते हो उस समय चलन और चेहरा बदल जाता है ।

104
01:00:53.329 --> 01:00:57.460
बहुत अच्छे उमंग-उत्साह में आते हो ।

105
01:00:59.300 --> 01:01:13.630
हाँ रियलाइज किया लेकिन फिर क्या हो जाता है ?

106
01:01:29.400 --> 01:01:33.260
अनुभवी तो सभी हैं ना !

107
01:01:35.530 --> 01:01:39.429
फिर क्या हो जाता है ?

108
01:01:47.130 --> 01:02:07.000
उसको हर समय स्वरूप में लाना , उसकी कमी हो जाती है ।

109
01:02:32.400 --> 01:02:42.230
क्योंकि यहाँ स्वरूप बनना है ।

110
01:02:43.260 --> 01:02:51.260
सिर्फ बुद्धि से जानना अलग चीज़ है ,

111
01:02:52.059 --> 01:03:04.599
लेकिन उसको स्वरूप में लाना , इसकी आवश्यकता है ।

112
01:03:22.659 --> 01:03:44.860
कभी-कभी बापदादा को कोई-कोई बच्चों पर रहम भी आता है ,

113
01:03:59.630 --> 01:04:09.230
बाप समझते हैं बच्चे से मेहनत नहीं होती है

114
01:04:10.000 --> 01:04:16.000
तो बच्चे के बजाए बाप ही कर ले ।

115
01:04:17.860 --> 01:04:37.929
लेकिन ड्रामा का राज़ है जो करेगा वह पायेगा ।

116
01:04:55.030 --> 01:05:05.659
इसलिए बापदादा सहयोग जरूर देता है

117
01:05:06.630 --> 01:05:12.329
लेकिन करना फिर भी बच्चे को ही पड़ता है ।

118
01:05:53.199 --> 01:05:58.659
बापदादा ने देखा है

119
01:06:27.059 --> 01:06:32.760
बच्चे संकल्प बहुत अच्छे-अच्छे करते हैं ।

120
01:06:44.260 --> 01:07:05.460
अमृतवेले बापदादा के पास अच्छे-अच्छे संकल्पों की बहुत-बहुत मालायें आती हैं ।

121
01:07:19.400 --> 01:07:31.929
यह करेंगे,यह करेंगे,यह करेंगे…,बापदादा भी खुश हो जाते हैं, वाह!

122
01:07:31.929 --> 01:07:35.199
बच्चे वाह !

123
01:07:50.800 --> 01:08:01.829
फिर करने में कमज़ोर क्यों बन जाते हैं ?

124
01:08:08.929 --> 01:08:14.730
इसका कारण देखा गया -

125
01:08:26.659 --> 01:08:40.699
ब्राह्मण परिवार में संगठन का वायुमण्डल ।

126
01:08:49.930 --> 01:09:04.300
कहाँ-कहाँ वायुमण्डल कमज़ोर भी होता है , उसका असर जल्दी पड़ जाता है ।

127
01:09:16.859 --> 01:09:22.130
फिर उन्हों की भाषा बतायें क्या होती है ?

128
01:09:22.130 --> 01:09:26.329
भाषा बड़ी मीठी होती है ,

129
01:09:31.529 --> 01:09:45.600
भाषा होती है यह तो चलता है , यह तो होता है …

130
01:10:13.130 --> 01:10:24.100
ऐसे समय पर क्या संकल्प करो !

131
01:10:30.100 --> 01:10:38.630
यह होता है , यह चलता है , यह अलबेलापन लाता है

132
01:10:40.000 --> 01:10:49.600
लेकिन उस समय इस भाषा को परिवर्तन करो

133
01:10:53.130 --> 01:10:59.000
कि बाप का फरमान क्या है ?

134
01:11:03.460 --> 01:11:10.260
बाप की पसन्दी क्या है ?

135
01:11:10.260 --> 01:11:15.829
बाप किस बात को पसन्द करता है ?

136
01:11:20.729 --> 01:11:24.460
बाप ने यह कहा है ?

137
01:11:24.460 --> 01:11:27.960
किया है ?

138
01:11:32.029 --> 01:11:56.630
अगर बाप याद आ गया तो अलबेलापन समाप्त हो , उमंग-उत्साह आ जायेगा ।

139
01:12:00.960 --> 01:12:07.260
अलबेलापन भी कई प्रकार का आता है ।

140
01:12:09.460 --> 01:12:28.000
आप लोग आपस में क्लास करना , लिस्ट निकालना , एक है साधारण अलबेलापन , एक है रॉयल अलबेलापन ।

141
01:12:42.630 --> 01:13:11.659
तो अलबेलापन दृढ़ता नहीं लाता है और दृढ़ता सफलता का साधन है ।

142
01:13:21.130 --> 01:13:32.300
इसलिए संकल्प तक रह जाता है लेकिन स्वरूप में नहीं आता ।

143
01:13:47.100 --> 01:13:51.260
तो आज क्या सुना ?

144
01:13:52.000 --> 01:13:56.460
वायदे याद कराये हैं ना !

145
01:14:06.199 --> 01:14:16.130
वायदे इतने अच्छे अच्छे करते , बापदादा इतना खुश हो जाते वायदे सुनके ।

146
01:14:17.600 --> 01:14:27.399
लेकिन जितने वायदे करते हो ना उतना फायदा नहीं उठाते ।

147
01:14:36.329 --> 01:14:49.130
तो बापदादा यही चाहते हैं , पूछते हैं ना बाप क्या चाहते हैं हमसे ?

148
01:14:50.630 --> 01:15:09.729
तो बापदादा यही चाहते हैं कि समय से पहले सब एवररेडी बन जाओ।

149
01:15:10.399 --> 01:15:16.100
समय आपका मास्टर नहीं बने ।

150
01:15:25.329 --> 01:15:29.300
समय के मास्टर आप हो

151
01:15:32.760 --> 01:16:13.130
इसलिए यही बापदादा चाहता है कि समय के पहले सम्पन्न बन विश्व की स्टेज पर बाप के साथ-साथ आप बच्चे भी प्रत्यक्ष हो ।

152
01:16:20.930 --> 01:16:24.930
अच्छा ।

153
01:16:28.500 --> 01:16:53.029
जो नये नये बच्चे आये हैं मिलने के लिए , वह हाथ उठाओ ।

154
01:16:55.329 --> 01:17:01.399
बड़ा हाथ उठाओ , लम्बा ।

155
01:17:09.399 --> 01:17:36.300
अच्छा - बापदादा नय नये बच्चों को देख खुश होते हैं

156
01:17:37.329 --> 01:17:51.300
कि भाग्यवान बच्चे अपना भाग्य लेने के लिए पहुँच गये हैं ।

157
01:17:51.729 --> 01:17:57.960
इसलिए मुबारक हो , मुबारक हो ।

158
01:18:19.560 --> 01:18:33.760
अभी जो भी नये बच्चे आये हैं उनमें से देखेंगे कमाल कौन करके दिखाता है ?

159
01:18:35.329 --> 01:18:42.729
भले आये पीछे हैं लेकिन आगे जाके दिखाओ ।

160
01:18:44.130 --> 01:18:49.800
बापदादा के पास तो सब रिजल्ट पहुंचती है ।

161
01:18:55.260 --> 01:18:59.000
अच्छा ।

162
01:19:03.729 --> 01:19:32.260
सेवा का टर्न दिल्ली-आगरा का है :- अच्छा दिल्ली वाले उठो , हाथ हिलाओ ।

163
01:19:40.060 --> 01:19:48.630
बहुत अच्छा किया है , चांस लिया है ।

164
01:19:50.800 --> 01:19:55.159
टीचर्स भी बहुत आई हैं ।

165
01:19:58.260 --> 01:20:00.930
अच्छा है ।

166
01:20:01.699 --> 01:20:07.300
टीचर्स को देखकर बापदादा खुश होते हैं ।

167
01:20:07.300 --> 01:20:09.300
क्यों ?

168
01:20:10.199 --> 01:20:16.060
बाप की गद्दी के अधिकारी बने हो ।

169
01:20:18.199 --> 01:20:29.260
बापदादा टीचर्स को सदा भाई कहते हैं ।

170
01:20:36.560 --> 01:21:04.260
बाप समान सेवाधारी बने और प्रवृत्ति में रहने वाले जो भी आये हैं , कुमारियाँ भी आई हैं , कुमार भी आये हैं ।

171
01:21:12.430 --> 01:21:26.800
अभी देहली में कोई नवीनता करके दिखाओ ।

172
01:21:28.659 --> 01:21:48.899
मेगा प्रोग्राम भी हो गये , कानफरेन्स भी बहुत हुई , वर्गों के प्रोग्राम भी बहुत हुए हैं , अभी नवीनता क्या करनी है ?

173
01:21:48.899 --> 01:21:53.899
कोई नया प्लैन बनाया है दिल्ली वालों ने ?

174
01:21:53.899 --> 01:21:56.829
बनाया है ?

175
01:21:58.199 --> 01:22:01.430
बना रहे हैं ?

176
01:22:09.829 --> 01:22:20.430
बापदादा के पास वर्गों की सेवा की रिपोर्ट आती है

177
01:22:20.930 --> 01:22:31.729
लेकिन हर एक वर्ग ने जो इतना वर्ष सेवा की है ,

178
01:22:32.500 --> 01:22:50.329
उसमें फास्ट तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप कितना निकला हर वर्ग का , वह नहीं लाया है ।

179
01:22:51.600 --> 01:22:55.260
गुलदस्ता नहीं लाया है अभी ।

180
01:22:55.899 --> 01:23:03.960
चलो बड़ी माला को छोड़ो , गुलदस्ता तो लाओ ।

181
01:23:10.829 --> 01:23:37.060
हर एक वर्ग के कोई ऐसे एक्जैम्पुल चाहिए जो माइक भी हो और माइट भी हो सिर्फ माइक नहीं , माइट भी हो माइक भी हो ।

182
01:23:39.930 --> 01:23:49.560
जिसका अनुभव सुनकर औरों में भी उमंग आ जाए ।

183
01:24:14.029 --> 01:24:20.130
बापदादा हर वर्ग का चाहता है ।

184
01:24:27.729 --> 01:24:36.930
जो ग्रुप वर्ल्ड में सेवा के योग्य बन जाये ।

185
01:24:54.729 --> 01:25:17.130
अच्छा है , दिल्ली वाले दिल्ली को राजधानी बनाना है , तो पहले तो दिल्ली में ऐसा वायुमण्डल पैदा करो ।

186
01:25:21.829 --> 01:25:31.729
दिल्ली का आवाज तो चारों ओर सहज ही फैलता है , यह तो बात है ही ।

187
01:25:37.729 --> 01:25:41.300
अच्छा किया है , चांस लिया है ।

188
01:25:41.300 --> 01:25:46.460
आधा क्लास तो दिल्ली दिखाई दे रहा है ।

189
01:25:55.100 --> 01:26:13.229
अभी नवीनता , दूसरे बारी कोई नवीनता लेके ही आना , सिर्फ दिल्ली को ही नहीं कह रहे हैं , कोई भी जोन कोई नया प्लैन बनाके आये

190
01:26:13.229 --> 01:26:26.399
उसको बापदादा एक्स्ट्रा स्नेह शक्ति का वरदान देंगे ।

191
01:26:31.130 --> 01:26:39.659
जो कर रहे हैं वह तो कर रहे हैं , नया कोई प्लैन हो ।

192
01:26:39.659 --> 01:26:47.460
यह यात्रा निकालना , फार्म भराना , यह बहुत हो चुका ।

193
01:26:47.460 --> 01:26:52.260
अभी कोई नया प्लैन बनाओ ।

194
01:26:54.460 --> 01:27:03.859
कान्रेन्सफ भी बहुत हो गई , प्रोग्राम भी बहुत हो गये ।

195
01:27:06.229 --> 01:27:08.560
सोचो ।

196
01:27:10.159 --> 01:27:22.000
दिल्ली को नम्बरवन होना चाहिए क्योंकि दिल्ली में सबकी नजर है।

197
01:27:26.930 --> 01:27:39.199
और देखो ड्रामानुसार सेवा का आदि स्थान दिल्ली रहा ।

198
01:27:41.600 --> 01:27:49.199
चाहे जमुना किनारा ही था लेकिन आरम्भ तो हुआ ना ।

199
01:27:54.800 --> 01:28:06.300
जमुना किनारे पर राज्य करना है , तो जमुना किनारे पर ही सेवा आरम्भ की ।

200
01:28:10.229 --> 01:28:14.659
अभी इसमें भी नम्बरवन लो।

201
01:28:15.399 --> 01:28:27.300
हैं , अच्छे अच्छे हैं , नया प्लैन बनाने वाले हैं , बापदादा देखते हैं , है ।

202
01:28:27.300 --> 01:28:29.300
देख रहे हैं ।

203
01:28:36.000 --> 01:28:47.329
तो मुबारक हो दिल्ली वालों को , लेकिन नया प्लैन लगायेंगे तो पदमगुणा मुबारक देंगे ।

204
01:29:11.899 --> 01:29:55.199
950 यूथ आये हैं :- अच्छा , बड़ा ग्रुप आया है ।

205
01:30:00.699 --> 01:30:06.029
बापदादा ने समाचार तो सुना ।

206
01:30:07.560 --> 01:30:12.130
यात्रा का प्लैन बना रहे हैं ।

207
01:30:15.000 --> 01:30:31.100
लेकिन बापदादा यह चाहते हैं कि जो भी सब जोन हैं ,

208
01:30:31.100 --> 01:30:45.060
जहाँ तहाँ जोन हैं , और सारे ब्राह्मण परिवार के यूथ कितने हैं ,

209
01:30:46.560 --> 01:31:13.130
और क्या-क्या उन्हों में परिवर्तन आया है , वह प्रैक्टिकल नाम , स्थान और परिवर्तन , उसका प्रैक्टिकल लिखित हो जो गवर्मेन्ट को दिया जाए ।

210
01:31:13.130 --> 01:31:18.729
गवर्मेन्ट तो खुद यूथ को बुलायेगी

211
01:31:19.229 --> 01:31:50.760
लेकिन पहले चारों ओर के यूथ के नाम स्थान और परिवर्तन शार्ट में , लम्बा चौड़ा नहीं , परिवर्तन का बुक , नाम स्थान का बुक हो , जो उन्हों को दिखाया जाए ।

212
01:31:52.229 --> 01:31:57.859
फिर वह यूथ को आपेही निमन्त्रण देंगे ।

213
01:32:04.930 --> 01:32:08.399
तो ऐसा प्लैन बनाओ ।

214
01:32:12.060 --> 01:32:15.529
अभी कितने आये हैं ?

215
01:32:18.199 --> 01:32:30.699
( 950 ) तो थोड़े हैं ना !

216
01:32:31.729 --> 01:32:36.600
हजारों के करीब यूथ होंगे ।

217
01:32:42.029 --> 01:33:02.829
उनका एक बुक बनाओ अच्छा , परिवर्तन सहित क्योंकि लोग सिर्फ यह नहीं देखते परिवर्तन क्या हुआ और उसमें परिपक्व हैं ?

218
01:33:03.600 --> 01:33:07.329
यह रिजल्ट चाहिए ।

219
01:33:13.659 --> 01:33:23.130
क्योंकि गवर्मेन्ट यूथ के पीछे खर्चा भी बहुत कर रही है ।

220
01:33:28.460 --> 01:33:33.430
परिवर्तन की कोई कमाल दिखाओ ।

221
01:33:47.300 --> 01:34:02.029
अच्छा है , फिर भी बापदादा ने देखा है कि यूथ वर्ग कुछ न कुछ कार्य करता रहता है ।

222
01:34:06.859 --> 01:34:11.659
अटेन्शन है सेवा का ।

223
01:34:21.260 --> 01:34:28.699
इसलिए परिवर्तन करके दिखाओ ।

224
01:34:28.699 --> 01:34:33.000
ट्रेनिंग की है ना !

225
01:34:34.760 --> 01:34:38.760
यह सब ट्रेनिंग में आये हैं ना !

226
01:34:40.659 --> 01:34:56.229
तो ट्रेनिंग को प्रैक्टिकल में रिजल्ट में दिखाना फिर सारा परिवार आपको मुबारक देगा ।

227
01:35:01.159 --> 01:35:04.600
अच्छा ।

228
01:35:32.029 --> 01:36:43.199
डबल विदेशी :- अच्छा है डबल विदेशी स्व पर और सेवा पर अटेन्शन अच्छा दे रहे हैं ।

229
01:36:47.630 --> 01:36:58.260
लेकिन सिर्फ इसमें एक मात्रा लगानी है ।

230
01:37:03.260 --> 01:37:42.300
अण्डरलाइन करनी है , जो परिवर्तन का संकल्प लेते हो और अच्छा उमंग-उत्साह , हिम्मत से लेते हो , सिर्फ इसको अण्डरलाइन करते जाओ , करना ही है ।

231
01:37:42.300 --> 01:37:46.130
बदलना ही है ।

232
01:37:46.130 --> 01:37:53.060
बदलकर विश्व को बदलना है ।

233
01:37:55.800 --> 01:38:06.229
यह दृढ़ता की अण्डरलाइन बार-बार करते जाओ ।

234
01:38:09.300 --> 01:38:27.760
बाकी बापदादा खुश है , वृद्धि भी कर रहे हैं और सेवा और स्व के ऊपर अटेन्शन भी है ।

235
01:38:27.760 --> 01:38:47.229
लेकिन पूरा टेन्शन नहीं गया है , अटेन्शन है थोड़ा बीच-बीच में टेन्शन भी है , वह समाप्त करना ही है ।

236
01:38:49.960 --> 01:38:53.500
बाकी हिम्मत अच्छी है ।

237
01:38:57.300 --> 01:39:17.000
हिम्मत की मुबारक है , सभी जो भी बैठे हैं बाप सहित आपके हिम्मत की मुबारक दे रहे हैं ।

238
01:39:17.000 --> 01:39:21.600
ताली बजाओ ।

239
01:40:02.029 --> 01:40:04.560
अच्छा ।

240
01:40:05.659 --> 01:40:31.460
आप तो यहाँ बैठे हो लेकिन बापदादा को दूर बैठे बहुत बच्चों का यादप्यार मिला है ,

241
01:40:32.859 --> 01:40:59.659
और बापदादा एक-एक बच्चे को नयनों में समाते हुए बहुत-बहुत दिल की दुआयें दे रहे हैं ।

242
01:41:04.500 --> 01:41:27.500
चाहे भारत से , चाहे विदेश से , बहुत बच्चों की याद आ रही है , पत्र आते हैं , ईमेल आते हैं , सब बाबा के पास पहुँच गये हैं ।

243
01:41:43.130 --> 01:41:46.760
अच्छा ।

244
01:42:03.399 --> 01:42:34.430
बापदादा एक सेकण्ड में अशरीरी भव की ड्रिल देखने चाहते हैं ,

245
01:42:40.760 --> 01:43:02.060
अगर अन्त में पास होना है तो यह ड्रिल बहुत आवश्यक है ।

246
01:43:03.460 --> 01:43:52.199
इसलिए अभी इतने बड़े संगठन में बैठे एक सेकण्ड में देहभान से परे स्थिति में स्थित हो जाओ ।

247
01:43:54.000 --> 01:44:00.029
कोई आकर्षण आकर्षित नहीं करे ।

248
01:46:24.260 --> 01:46:27.359
( ड्रिल ) अच्छा ।

249
01:46:31.300 --> 01:47:29.359
चारों ओर के तीव्र पुरूषार्थी बच्चों को , सदा स्व-परिवर्तन और विश्व परिवर्तन की सेवा में तत्पर रहनेवाले विशेष आत्माओं को ,

250
01:47:30.930 --> 01:48:13.560
सदा ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी , कर्म की , कर्मेन्द्रियों की आकर्षण से मुक्त आत्माओं को ,

251
01:48:20.699 --> 01:49:05.359
सदा दृढ़ता को हर संकल्प , हर बोल , हर कर्म में स्वरूप में लाने वाले बाप के समीप और समान बच्चों को

252
01:49:10.260 --> 01:49:41.960
बापदादा का दिल की दुआयें और दिल का यादप्यार स्वीकार हो और नमस्ते ।

