WEBVTT

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आज परमात्म बाप अपने चारों ओर के परमात्म प्यार के अधिकारी बच्चों को देख रहे हैं ।

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00:14:25.899 --> 00:15:06.799
यह परमात्म प्यार विश्व में कोटों में से कोई को प्राप्त होता है ।

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00:15:33.159 --> 00:15:58.159
यह परमात्म प्यार निःस्वार्थ प्यार है

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00:16:10.159 --> 00:17:02.600
क्योंकि एक परमात्मा पिता ही निराकार , निरहंकारी है ।

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00:17:06.730 --> 00:17:48.430
मनुष्य आत्मा शरीरधारी होने के कारण कोई न कोई स्वार्थ में आ ही जाती है ।

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परमात्म बाप ही अपने बच्चों को ऐसा निःस्वार्थ प्यार देते हैं ।

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00:18:48.930 --> 00:19:17.630
परमात्म प्यार ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार है ।

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00:19:23.359 --> 00:19:34.359
ब्राह्मण जीवन का जीवनदान है ।

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00:19:43.960 --> 00:20:09.029
अगर ब्राह्मण जीवन में परमात्म प्यार का अनुभव कम है ,

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00:20:19.900 --> 00:20:41.960
तो प्यार के बिना जीवन रमणीक नहीं , सूखा जीवन हो जाता है ।

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00:20:57.960 --> 00:21:49.599
परमात्म प्यार ही जीवन में सदा साथ भी देता और साथी बन सदा सहयोगी रहता ।

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00:21:56.900 --> 00:22:39.400
जहाँ प्यार है , साथ है वहाँ सब कुछ बहुत सहज और सरल हो जाता है ।

13
00:22:46.630 --> 00:22:53.460
मेहनत का अनुभव नहीं होता है ।

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00:23:08.130 --> 00:23:14.230
ऐसा अनुभव है ना !

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परमात्म प्यारे कोइ भी व्यक्ति वा साधनों की आकर्षण में नहीं आ सकते

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क्योंकि परमात्म आकर्षण , परमात्म प्यार ऐसा अनुभव कराता

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जो सदा प्यार के कारण लवलीन रहते हैं ,

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00:25:41.029 --> 00:25:54.900
जिसको लोगों ने परमात्मा में लीन होना समझ लिया ।

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00:26:02.059 --> 00:26:19.660
परमात्मा में लीन नहीं होता लेकिन परमात्म प्यार में लवलीन हो जाता ।

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00:26:39.529 --> 00:26:52.799
बापदादा चारों आरे के बच्चों को देखतें हैं -

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00:26:57.329 --> 00:27:05.559
परमात्म प्यारे तो सभी बने हैं

22
00:27:06.700 --> 00:27:37.529
लेकिन एक है लवली बच्चे दुसरे हैं लवलीन बच्चे ।

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00:27:51.059 --> 00:28:03.799
तो अपने आपसे पूछो लवली तो सभी हैं ,

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00:28:08.329 --> 00:28:30.000
लेकिन लवलीन कहाँ तक रहते हैं ?

25
00:28:35.930 --> 00:29:33.630
लवलीन बच्चों की निशानी है वह सदा परमात्म फरमान में सहज चलते हैं ।

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00:29:35.859 --> 00:29:50.630
फरमान में भी रहते और देहभान से कुर्बान भी रहते हैं

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00:30:06.460 --> 00:30:20.529
क्योंकि प्यार में कुर्बान होना मुश्किल नहीं है ।

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00:30:34.099 --> 00:31:08.000
सबसे पहला फरमान है - योगी भव , पवित्र भव ।

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00:31:27.660 --> 00:32:16.500
बाप का बच्चों से प्यार होने के कारण बाप बच्चों को मेहनत करते देख नहीं सकते

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00:32:31.799 --> 00:32:54.099
क्योंकि बाप जानते हैं 63 जन्म बहुत मेहनत की ,

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00:32:59.029 --> 00:33:28.859
अभी यह अलौकिक जन्म मेहनत से मुक्त हो

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00:33:34.259 --> 00:33:46.700
अतीन्द्रिय सुख की मौज मनाने का है ।

33
00:34:19.360 --> 00:34:30.030
तो मौज मना रहे हो कि मेहनत करनी पड़ती है ?

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00:34:48.929 --> 00:35:12.000
प्यार में फरमान पर चलना मेहनत नहीं लगती ।

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00:35:13.530 --> 00:35:21.059
अगर मेहनत करनी पड़ती है

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00:35:31.760 --> 00:35:40.199
तो प्यार की परसेन्टेज कम है ।

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00:36:02.329 --> 00:36:37.699
कहाँ न कहाँ प्यार में कुछ न कुछ लीकेज है ।

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00:36:52.659 --> 00:37:12.059
दो बातों की लीकेज महेनत कराती है -

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00:37:18.599 --> 00:37:45.130
एक पुराने संस्कार का आकषर्ण् ।

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00:37:48.159 --> 00:38:13.199
संसार में सम्बन्ध , पदार्थ सब आ जाता है ।

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00:38:14.400 --> 00:38:29.199
और दूसरा - पुराने संस्कार की आकर्षण ।

42
00:38:36.860 --> 00:39:00.630
यह पुराना संसार और पुराने संस्कार अपने तरफ आकर्षित कर देते हैं ।

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00:39:04.199 --> 00:39:22.400
तो परमात्म प्यार में परसेन्टेज हो जाती है ।

44
00:39:46.300 --> 00:40:08.099
चेक करो - इन दोनों लीकेज से मुक्त हैं ?

45
00:40:23.059 --> 00:41:02.260
याद करो आप आत्मा के अनादि संस्कार और आदि संस्कार क्या थे

46
00:41:08.599 --> 00:41:37.900
और अभी अन्त के ब्राह्मण जीवन के संस्कार क्या हैं ?

47
00:41:44.000 --> 00:42:08.460
अनादि भी हैं , आदि भी हैं और अन्त में भी श्रेष्ठ संस्कार हैं ।

48
00:42:20.599 --> 00:42:38.500
यह पुराने संस्कार मध्य के हैं , न अनादि हैं , न आदि हैं , न अन्त के हैं ।

49
00:42:52.230 --> 00:43:16.929
लेकिन लक्ष्य क्या है सभी का ?

50
00:43:20.860 --> 00:43:39.130
किसी भी बच्चे से पूछो तो एक ही उत्तर देते हैं लक्ष्य है बाप समान बनने का ।

51
00:43:40.530 --> 00:43:42.659
यही है ना !

52
00:43:42.929 --> 00:43:48.000
है तो हाथ उठाओ ।

53
00:43:48.860 --> 00:43:54.530
यही लक्ष्य है पक्का ?

54
00:43:55.199 --> 00:44:02.030
या बीच-बीच में बदली हो जाती है ?

55
00:44:33.659 --> 00:44:46.900
तो बाप बच्चों से पूछते हैं

56
00:44:50.530 --> 00:45:07.800
कि बाप और दादा दोनों के समान संस्कार कौन से हैं ?

57
00:45:33.730 --> 00:46:12.800
सदा बाप हर आत्मा के प्रति उदारचित्त रहे हैं ।

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00:46:35.360 --> 00:47:09.059
हर आत्मा के प्रति स्नेह और सम्मान स्वरूप में सहयोगी रहे हैं ।

59
00:47:32.329 --> 00:48:21.500
ऐसे स्वयं भी अपने को हर आत्मा के प्रति सहयोगी अनुभव करते हो ?

60
00:48:31.329 --> 00:48:41.400
सहयोग दे तो सहयोगी बनें , नहीं ।

61
00:48:45.500 --> 00:48:52.329
स्नेह दे तो स्नेही बनें , नहीं ।

62
00:49:03.260 --> 00:49:39.929
जैसे ब्रह्मा बाप हर बच्चे के प्रति सहयोगी बनें , स्नेही बनें ,

63
00:49:47.260 --> 00:50:04.530
ऐसे सर्व के सदा स्नेही और सहयोगी ।

64
00:50:14.900 --> 00:50:27.230
इसको कहा जाता है समान बनना ।

65
00:50:57.230 --> 00:51:13.460
अगर कोई भी बच्चे को मेहनत करनी पड़ती है ,

66
00:51:13.460 --> 00:51:29.329
संस्कार परिवर्तन करने में , उसका कारण क्या है ?

67
00:51:40.329 --> 00:51:53.300
ब्रह्मा बाप ने अपने ऊपर अटेन्शन रखा लेकिन मेहनत नहीं की ,

68
00:52:02.130 --> 00:52:16.730
संस्कार परिवर्तन में मेहनत का कारण है -

69
00:52:20.329 --> 00:52:28.800
लवली बने हैं लवलीन नहीं बने हैं ।

70
00:52:40.130 --> 00:53:11.130
बापदादा तो हर बच्चे को लवली बच्चे समझते हैं , जानते भी हैं , जन्मपत्री हर एक का जानते हैं ।

71
00:53:11.130 --> 00:53:17.429
परिवार भी क्या कहेंगे ?

72
00:53:17.429 --> 00:53:21.800
लवली हैं ।

73
00:54:11.329 --> 00:54:56.000
बापदादा हर बच्चे को एक ही पढ़ाई , एक ही पालना , एक ही वरदान सदा देते हैं ।

74
00:55:11.699 --> 00:55:50.329
चाहे लास्ट नम्बर भी जानते हैं फिर भी बापदादा किसी भी बच्चे का अवगुण , कमज़ोरी संकल्प में भी नहीं रखते ।

75
00:56:09.500 --> 00:56:22.000
लाडला है , सिकीलधा है , मीठा-मीठा है …

76
00:56:38.460 --> 00:57:02.130
इसी दृष्टि और वृत्ति से देखते क्योंकि बापदादा जानते हैं

77
00:57:02.929 --> 00:57:16.800
इसी वृत्ति और श्रेष्ठ दृष्टि से कमज़ोर महावीर बन जायेगा ।

78
00:57:34.000 --> 00:58:18.059
ऐसे ही अपने श्रेष्ठ वृत्ति और शुभभावना , शुभकामना द्वारा किसी का भी परिवर्तन कर सकते हो ।

79
00:58:21.659 --> 00:58:33.130
जब आपने चैलेन्ज किया है कि प्रकृति को भी परिवर्तन करके दिखायेंगे

80
00:58:34.000 --> 00:58:40.860
तो क्या आत्माओं का परिवर्तन नहीं कर सकते !

81
00:58:50.730 --> 00:58:56.429
प्रकृतिजीत बनते हो

82
00:59:00.530 --> 00:59:18.429
तो आत्मा , आत्मा की श्रेष्ठ भावना से ,

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00:59:23.599 --> 00:59:38.599
कल्याण की कामना से परिवर्तन नहीं कर सकते हैं ?

84
00:59:58.460 --> 01:00:05.559
अभी नया वर्ष शुरू होने वाला है ना -

85
01:00:11.730 --> 01:00:35.860
तो नये वर्ष में सर्व बेहद के ब्राह्मण परिवार के बीच

86
01:00:51.730 --> 01:02:11.230
एक दो के प्रति अपने शुभभावना , श्रेष्ठ कामना द्वारा हरेक एक दो के परिवर्तन करने में सहयोगी बनो ,

87
01:02:14.829 --> 01:02:40.730
चाहे कमज़ोर है , जानते हो इसके संस्कार में यह कमज़ोरी है

88
01:02:46.929 --> 01:03:12.199
लेकिन आप स्नेह और सहयोग की शक्ति द्वारा सहयोगी बनो ।

89
01:03:42.659 --> 01:03:54.099
एक दो को सहयोग का हाथ मिलाओ ।

90
01:03:57.730 --> 01:04:41.530
इस सहयोग के हाथ मिलाने का दृश्य ऐसा बन जायेगा जैसे हाथ में हाथ स्नेह का मिलाना , सहयोग का मिलाना , माला बन जाये ।

91
01:05:05.460 --> 01:05:13.900
शिक्षा नहीं दो , स्नेह भरा सहयोग दो ।

92
01:05:33.960 --> 01:05:44.059
न्यारा नहीं बनो , किनारा नहीं करो , सहारा बनो

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01:06:14.059 --> 01:06:27.199
क्योंकि आपका यादगार विजयमाला है ।

94
01:06:28.329 --> 01:06:42.929
हर एक मणका , मणके के साथी सहयोगी है तब माला का चित्र बना है ।

95
01:06:50.800 --> 01:07:02.460
तो सभी बापदादा से पूछते हैं नये साल में क्या करना है ?

96
01:07:10.599 --> 01:07:21.599
सन्देश देने का कार्य तो बहुत किया , कर रहे हैं , करते रहेंगे ।

97
01:07:30.730 --> 01:07:52.960
अब सन्देश-वाहकों के सहयोग और स्नेह की रूपरेखा स्टेज पर लाओ ।

98
01:08:22.829 --> 01:08:45.300
महादानी बनो , अपने गुणों का सहयोगी बनो , बनाओ ।

99
01:08:57.130 --> 01:09:09.430
ऐसे अपने गुणों का , हैं तो परमात्म गुण लेकिन जो अपने में बनाया है ,

100
01:09:09.430 --> 01:09:22.430
उस गुण की शक्ति से उन्हों की कमज़ोरी दूर करो ।

101
01:09:35.560 --> 01:09:38.529
यह कर सकते हैं ?

102
01:09:38.529 --> 01:09:42.560
कर सकते हैं या मुश्किल है ?

103
01:09:45.229 --> 01:09:51.029
टीचर्स बताओ , कर सकते हैं ?

104
01:09:51.029 --> 01:09:55.500
कर सकते हैं या करना ही है ?

105
01:09:56.260 --> 01:10:01.729
करना ही है ?

106
01:10:02.529 --> 01:10:10.800
कोई कमज़ोर नहीं रहे , क्योंकि कोटों में कोई है ना !

107
01:10:12.859 --> 01:10:19.600
चाहे लास्ट दाना भी है , है तो कोटों में कोई ।

108
01:10:41.960 --> 01:10:55.829
आपका टाइटिल ही है - मास्टर सर्वशक्तिवान ।

109
01:10:57.359 --> 01:11:03.800
तो सर्वशक्तिवान का कर्तव्य क्या है ?

110
01:11:06.430 --> 01:11:16.029
शक्ति की लेन-देन करना ।

111
01:11:43.060 --> 01:12:03.399
बाप द्वारा मिला हुआ गुण आपस में लेन-देन करो ।

112
01:12:23.159 --> 01:12:32.529
यही सहयोग की गिफ्ट एक दो में दो ।

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01:12:38.229 --> 01:12:45.100
नये वर्ष में एक दो को गिफ्ट देते हैं ना !

114
01:12:52.029 --> 01:13:06.500
तो इस वर्ष में एक दो में गुणों की गिफ्ट दो ।

115
01:13:16.899 --> 01:13:22.029
अगर कल्याण की भावना रखेंगे

116
01:13:22.029 --> 01:13:27.899
तो जैसे भाषण करके सन्देश देते हो ना ,

117
01:13:28.699 --> 01:13:41.560
वाणी द्वारा वैसे अपने कल्याण की भावना द्वारा ,

118
01:13:42.630 --> 01:13:52.659
कल्याण की वृत्ति द्वारा , कल्याण के वायुमण्डल द्वारा

119
01:13:55.329 --> 01:14:07.229
यह गुणों की गिफ्ट दो , शक्तियों की गिफ्ट दो ।

120
01:14:16.699 --> 01:14:27.300
कमज़ोर को सहयोग देना , यह समय पर गिफ्ट देना है ,

121
01:14:29.159 --> 01:14:39.560
गिरे हुए को गिराओ नहीं , चढ़ाओ , ऊँचा चढ़ाओ ।

122
01:14:47.029 --> 01:14:51.359
यह ऐसा है, यह ऐसा है…, नहीं।

123
01:14:51.359 --> 01:14:56.829
यह प्रभु प्यार के पात्र है ,

124
01:14:58.359 --> 01:15:17.699
कोटों में कोई आत्मा है , विशेष आत्मा है , विजयी बनने वाली आत्मा है , यह दृष्टि रखो ।

125
01:15:21.729 --> 01:15:31.930
अभी वृत्ति , दृष्टि , वायुमण्डल चेंज करो ।

126
01:15:35.630 --> 01:15:40.630
कुछ नवीनता करनी चाहिए ना !

127
01:15:43.029 --> 01:15:52.329
कमज़ोरी देखते , देखो नहीं , उमंग दो , सहयोग दो ।

128
01:16:14.630 --> 01:16:39.560
ऐसा ब्राह्मण संगठन तैयार करो तो बापदादा विजय की ताली बजायेगा ।

129
01:16:42.930 --> 01:17:06.760
आप भी बार-बार तालियाँ बजाते हो ना , बापदादा मुबारक हो , बधाई हो , ग्रीटिंग्स हो , उसकी तालियाँ बजायेगा ।

130
01:17:19.829 --> 01:17:28.930
आप भी साथ में ताली बजायेंगे ना ।

131
01:17:36.159 --> 01:17:47.029
अभी ताली बजाई तो अच्छा किया लेकिन विश्व के आगे ताली बजे ।

132
01:17:53.229 --> 01:18:09.859
सबके मुख से यह आवाज निकले , हमारे ईष्ट आ गये ।

133
01:18:11.600 --> 01:18:22.359
हमारे पूज्य आ गये ।

134
01:18:37.899 --> 01:18:40.960
लक्ष्य पक्का है ना !

135
01:18:40.960 --> 01:18:46.029
पक्का है लक्ष्य , करना ही है ?

136
01:18:46.029 --> 01:18:51.800
या देखेंगे , प्लैन बनायेंगे !

137
01:18:51.800 --> 01:18:59.260
करना ही है , प्लैन क्या , करना ही है ।

138
01:19:09.500 --> 01:19:14.960
अभी सभी इन्तजार कर रहें हैं ।

139
01:19:15.500 --> 01:19:24.300
अभी इन्हों का इन्तजार समाप्त करें

140
01:19:24.300 --> 01:19:35.699
प्रत्यक्ष हाने का इन्तजाम करें ,

141
01:19:50.960 --> 01:19:58.500
देखे प्रकृति भी अभी कितनी तंग हो रही है ।

142
01:19:59.630 --> 01:20:06.460
तो प्रकृति को भी शान्त बना दो ।

143
01:20:14.159 --> 01:20:25.300
आप प्रत्यक्ष हो जायेंगे तो विश्व शान्ति स्वतः हो जायेगी ।

144
01:20:35.930 --> 01:20:40.699
अच्छा ।

145
01:20:41.899 --> 01:20:48.159
इस बारी भी नये-नये बच्चे बहुत आये हैं ।

146
01:20:48.159 --> 01:20:52.899
अच्छा है ।

147
01:20:56.460 --> 01:21:00.960
बापदादा खुश होते हैं

148
01:21:00.960 --> 01:21:17.960
कि जो भी कोने-कोने में छिपे हुए कल्प पहले वाले बच्चे हैं , वह पहुँच रहे हैं ।

149
01:21:25.630 --> 01:21:42.899
अभी पीछे आने वाले भी ऐसा लक्ष्य रखो समय कम है

150
01:21:43.529 --> 01:21:57.899
इसलिए तीव्र पुरूषार्थ द्वारा नम्बर आगे ले सकते हो ।

151
01:21:58.630 --> 01:22:09.829
अभी भी टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है , लेट का लगा है ।

152
01:22:11.960 --> 01:22:22.800
इसलिए जितना पुरूषार्थ करने चाहो उतना आगे बढ़ सकते हो ।

153
01:22:33.930 --> 01:22:40.699
तो पहले बारी आने वाले हाथ उठाओ ।

154
01:22:41.300 --> 01:22:44.300
अच्छा ।

155
01:22:54.699 --> 01:23:08.560
सभी ने , जिन्होंने भी हाथ उठाया है , तीव्र पुरूषार्थ करना है ना !

156
01:23:09.829 --> 01:23:22.359
अभी ढीले पुरूषार्थ का समय गया , चलने का गया , अभी उड़ने का समय है ।

157
01:23:24.899 --> 01:23:33.130
तो डबल लाइट बनके उड़ो ।

158
01:23:37.630 --> 01:23:43.960
जो भी बनने चाहो , बन सकते हो ।

159
01:23:53.560 --> 01:24:07.100
उलाहना नहीं देना - बाबा हमको पीछे बुलाया , अभी भी डबल लाइट बनके उड़ सकते हो ।

160
01:24:21.800 --> 01:24:25.100
इतना उमंग है ?

161
01:24:25.100 --> 01:24:30.760
जिन्होंने हाथ उठाया , इतना उमंग है ?

162
01:24:31.229 --> 01:24:44.000
जिसको इतना उमंग है , आगे जाकर ही दिखाना है , वह हाथ उठाओ ।

163
01:24:47.760 --> 01:24:55.229
बापदादा तो इन्हें एडवांस मुबारक दे रहे हैं ।

164
01:24:59.760 --> 01:25:04.630
अच्छा ।

165
01:25:09.800 --> 01:25:29.100
गुजरात की ही सेवा है , गुजरात वाले ही मिलन मनाने आये हैं :- गुजरात वाले जो भी हैं , चाहे आये हैं , चाहे सेवा में आये हैं , वह हाथ उठाओ ।

166
01:25:45.699 --> 01:25:51.760
बहुत हैं , बहुत अच्छा ।

167
01:25:57.359 --> 01:26:03.260
अच्छा चांस लिया है ।

168
01:26:23.060 --> 01:26:40.100
गुजरात को बापदादा कहते हैं , सिन्धी में कहावत है जो चुल पर वह दिल पर ।

169
01:26:46.829 --> 01:26:55.460
तो सबसे नजदीक में नजदीक गुजरात है ।

170
01:27:05.930 --> 01:27:15.229
परिवार को नहीं देखेंगे क्या करेंगे , आ जायेंगे ?

171
01:27:17.229 --> 01:27:21.699
एवररेडी हैं।

172
01:27:27.500 --> 01:27:45.229
अच्छा है गुजरात , साकार ब्रह्मा के प्रेरणा से स्थापन हुआ है ।

173
01:27:50.500 --> 01:28:01.000
गुजरात ने गुजरात को निमन्त्रण नहीं दिया , ब्रह्मा बाप ने गुजरात को खोला है ।

174
01:28:07.029 --> 01:28:20.699
तो गुजरात के ऊपर विशेष ब्रह्मा बाप की नजर पड़ी हुई है ।

175
01:28:32.060 --> 01:28:46.159
और गुजरात ने पुरूषार्थ भी किया है , सेन्टर अच्छे खुले हैं ।

176
01:28:46.159 --> 01:28:51.029
कितने सेन्टर हैं ?

177
01:28:55.760 --> 01:29:33.960
300 सेवाकेन्द्र , उपसेवाकेन्द्र हैं और 3 हजार गीता पाठशालाये हैं ।

178
01:29:38.159 --> 01:29:46.159
अच्छा सबसे ज्यादा सेंटर किस जोन के हैं ?

179
01:29:48.800 --> 01:29:55.500
( बम्बई-महाराष्ट्र ) अच्छा ।

180
01:29:55.500 --> 01:30:04.199
महाराष्ट्र वाले आये हैं ?

181
01:30:05.430 --> 01:30:43.500
( आज नहीं आये हैं ) सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में हैं गुजरात सेवा तो अच्छी कर रहे हैं ।

182
01:30:43.600 --> 01:30:48.760
गुजुरात का विस्तार तो अच्छा है ।

183
01:30:51.000 --> 01:30:52.960
अभी क्या करना है ।

184
01:30:53.159 --> 01:31:16.500
विस्तार तो है विस्तार तो अच्छा किया है,अभी गुजरात वाले नम्बरवन वारिस तैयार करें।

185
01:31:22.859 --> 01:31:43.630
कम से कम जो बड़े सेवाकेन्द्र हैं , जो पुराने वारिस हैं , वह तो हैं ही लेकिन नया कोई वारिस निकालो ।

186
01:31:46.229 --> 01:31:53.899
चलो एक-एक तो निकालो ,

187
01:32:11.329 --> 01:32:26.159
क्योंकि माला में मणके वही बनेंगे जो वारिस क्वालिटी होंगे ।

188
01:32:27.560 --> 01:32:33.560
तो माला तो तैयार करना है ना ।

189
01:32:50.029 --> 01:33:00.359
16108 की भी माला बनी हुई है ।

190
01:33:01.630 --> 01:33:12.899
अभी अगर बापदादा बोले 108 की माला बनाओ , तो बना सकते हो ?

191
01:33:13.630 --> 01:33:16.630
बन सकती है ?

192
01:33:20.159 --> 01:33:30.329
दादियाँ बतावें , 108 की माला बन सकती है ?

193
01:33:34.329 --> 01:33:46.060
( दादीजी ने कहा बन सकती है ।

194
01:33:47.159 --> 01:33:49.430
) तैयार हैं ?

195
01:33:49.430 --> 01:33:56.729
108 की माला तैयार हो गई है ?

196
01:34:03.359 --> 01:34:19.760
( हाँ बाबा तैयार है ) अच्छा लिखकर दिखाना ।

197
01:34:23.159 --> 01:34:31.130
तैयार है तो बहुत अच्छा , मुबारक है ।

198
01:34:34.229 --> 01:34:42.500
अच्छा 16 हजार की , आधे तक बनी है ?

199
01:34:56.460 --> 01:35:15.630
( आधा तो क्या उनसे भी ज्यादा बनी है ) अच्छा है ना ।

200
01:35:16.329 --> 01:35:26.500
देखो गुप्त रूप में बनी है और आपकी दादी ने देख ली है ।

201
01:35:36.699 --> 01:35:39.760
अच्छा है ।

202
01:35:46.600 --> 01:35:56.960
अभी आपसे सभी पूछेंगे कि मेरा माला में नाम है ?

203
01:36:19.460 --> 01:36:22.500
अच्छा है ।

204
01:36:23.329 --> 01:36:33.399
ऐसी शुभभावना , शुभउम्मीदें तैयार ही कर लेती हैं ।

205
01:36:35.229 --> 01:36:48.729
अभी सभी ने सुना ना,अपने को चेक करना मैं उस माला में एवररेडी हूँ?

206
01:36:56.430 --> 01:36:57.460
अच्छा ।

207
01:36:57.460 --> 01:37:00.260
और क्या करना है ?

208
01:37:14.300 --> 01:38:09.560
कैड ग्रुप :- अच्छा है , यह भी आवाज फैलाने का साधन बहुत अच्छा है

209
01:38:09.930 --> 01:38:17.399
क्योंकि प्रैक्टिकल सबूत देखते हैं ना

210
01:38:20.159 --> 01:38:33.500
और बिना खर्चे के मैडिटेशन द्वारा ठीक हो जाना ,

211
01:38:34.560 --> 01:38:46.600
तो सबको बहुत अच्छा लगता है अभा धीरे-धीरे इसकी वृद्धि करते जाओ ।

212
01:38:46.899 --> 01:39:13.159
सुना है , कर रहे हैं और सफलता भी मिल रही है और भी मिलती रहेगी बाकी बापदादा इस कार्य के लिए

213
01:39:13.159 --> 01:39:24.430
निमित्त बनने वालों को मुबारक दे रहे हैं ।

214
01:39:30.930 --> 01:39:53.529
आफिशियल गवर्मेन्ट तक पहुँच रही है और भी फैलाते रहेंगे तो मेडीटेशन का महत्व बढ़ता जायेगा ।

215
01:39:56.430 --> 01:40:05.130
बाकी बापदादा को यह विधि पसन्द है ।

216
01:40:12.260 --> 01:40:14.300
अच्छा ।

217
01:40:14.300 --> 01:41:07.560
डबल विदेशी :- डबल विदेशी तो सदा डबल पुरूषार्थ करते होंगे ना !

218
01:41:12.430 --> 01:41:36.630
पुराना संसार और पुराने संस्कार का नामोनिशान नहीं रहे , यह है डबल पुरूषार्थ ।

219
01:41:40.430 --> 01:41:48.430
तो ऐसा डबल पुरूषार्थ चल रहा है ?

220
01:41:48.560 --> 01:41:51.800
चलता है ?

221
01:41:52.930 --> 01:41:57.329
कंधा तो हिलाओ ।

222
01:41:59.329 --> 01:42:10.930
जिसका अटेन्शन है इस डबल पुरूषार्थ पर वह हाथ उठाओ ।

223
01:42:10.930 --> 01:42:25.899
अच्छा-फिर तो प्रत्यक्षता विदेश से होगी ।

224
01:42:28.159 --> 01:42:40.000
डबल पुरूषार्थ करनेवालों की विजय प्रत्यक्ष हो जायेगी ।

225
01:42:42.159 --> 01:43:07.329
बापदादा को खुशी है कि डबल फारेनर्स सेवा और पुरूषार्थ दोनों तरफ अटेन्शन दे आगे बढ़ रहे हैं ।

226
01:43:16.899 --> 01:43:39.300
बढ़ रहे हैं इसकी मुबारक है लेकिन आगे इस अटेन्शन में और भी तीव्रता लाओ ।

227
01:43:43.729 --> 01:44:00.460
जिस भी सेन्टर पर जायें वहाँ ऐसा अनुभव हो जैसे मधुबन का वायुमण्डल ।

228
01:44:08.300 --> 01:44:23.560
अब हर एक स्थान ऐसे वायुमण्डल का अनुभव करावे ।

229
01:44:28.300 --> 01:44:46.560
जैसे मधुबन में कोई भी आता है , प्रभावित होकर ही जाता है किसी भी बात में ,

230
01:44:47.399 --> 01:45:08.300
ऐसे कोई भी आत्मा आवे , किसी न किसी बात में ऐसे प्रभावित होके जाये जो बार-बार आता ही रहे ।

231
01:45:08.859 --> 01:45:12.229
आगे बढ़ता रहे ।

232
01:45:23.359 --> 01:45:34.430
बाकी अटेन्शन है , पुरूषार्थ भी है , लक्ष्य भी है

233
01:45:34.430 --> 01:45:54.529
अब प्रैक्टिकल ऐसा प्रभावित हो जो कोई भी आने के बिना , बनने के बिना रह नहीं सके ।

234
01:46:04.159 --> 01:46:21.960
अच्छा है , हर टर्न में विदेशी आते हैं , इससे भी मधुबन अच्छा सुन्दर लगता है ।

235
01:46:21.960 --> 01:46:28.500
इन्टरनेशनल हो जाता है ना !

236
01:46:49.329 --> 01:47:16.359
विजयी हैं और विजय का तिलक सदा अपने मस्तक पर प्रत्यक्ष दिखाई दे यह और थोड़ा विजय का तिलक स्पष्ट करो ।

237
01:47:16.960 --> 01:47:27.229
जो भी देखे विजय का चमकता हुआ तिलक दिखाई दे ।

238
01:47:33.000 --> 01:47:37.300
कितने बार विजयी बने हैं ?

239
01:47:38.630 --> 01:47:53.229
अनेक बार बने हैं , अभी भी बने हैं , फिर भी बनते रहेंगे ।

240
01:48:02.500 --> 01:48:20.899
तो दोनों बातों में विजयीभव का वरदान चलन और चेहरे से दिखाई दे ।

241
01:48:34.859 --> 01:48:38.229
निश्चय और नशा तो है ही !

242
01:48:38.229 --> 01:48:46.699
हम नहीं विजयी बनेंगे तो कौन बनेगा , यह नशा है ना !

243
01:48:46.699 --> 01:48:51.229
निश्चय भी है , नशा भी है ।

244
01:49:05.300 --> 01:49:19.859
अभी एक दो के सहयोगी बन विजय का झण्डा विश्व के आगे लहराओ ।

245
01:49:28.430 --> 01:49:44.430
क्योंकि डबल विदेशियों के संस्कार हैं जो करना है वह पूरा करना है , अधूरा नहीं ।

246
01:49:46.229 --> 01:49:55.159
तो इसमें भी सम्पन्न बनना ही है ।

247
01:50:00.000 --> 01:50:02.359
ठीक है ।

248
01:50:03.029 --> 01:50:04.859
पक्का है ना !

249
01:50:04.859 --> 01:50:07.760
कच्चा तो नहीं ना !

250
01:50:15.760 --> 01:50:20.300
अच्छा ।

251
01:51:33.260 --> 01:51:56.859
आजकल विश्व में दो बातें विशेष चलती हैं -

252
01:51:58.060 --> 01:52:25.100
एक एक्सरसाइज और दूसरा भोजन के ऊपर अटेन्शन ।

253
01:52:31.329 --> 01:52:48.500
तो आप भी यह दोनों बातें करते हो ?

254
01:53:02.560 --> 01:53:08.699
आपकी एक्सरसाइज कौन सी है ?

255
01:53:12.699 --> 01:53:20.829
शारीरिक एक्सरसाइज तो सब करते हैं

256
01:53:20.829 --> 01:53:47.600
लेकिन मन की एक्सरसाइज अभी-अभी ब्राह्मण , ब्राह्मण सो फरिश्ता और फरिश्ता सो देवता ।

257
01:53:51.500 --> 01:54:09.229
यह मन्सा ड्रिल का अभ्यास सदा करते रहो ।

258
01:54:15.560 --> 01:54:31.699
और शुद्ध भोजन , मन का शुद्ध संकल्प ।

259
01:54:32.930 --> 01:54:53.430
अगर व्यर्थ संकल्प , निगेटिव संकल्प चलता है तो यह मन का अशुद्ध भोजन है ।

260
01:54:59.829 --> 01:55:19.229
तो मन में सदा शुद्ध संकल्प रहे , दोनों करना आता है ना !

261
01:55:32.930 --> 01:55:50.560
जितना समय चाहो उतना समय शुद्धसंकल्प स्वरूप बन जाओ ।

262
01:56:18.960 --> 01:56:22.359
अच्छा ।

263
01:56:24.229 --> 01:59:40.100
चारों ओर के परमात्म प्यार के अधिकारी विशेष आत्माओं को, सदा एक दो के सहयोगी बनने वाले बाप के स्नेही और सहयोगी आत्माओं को,सदा विजयी है और विजय का झण्डा विश्व में फैलाना है,इस लक्ष्य को प्रैक्टिकल में लाने वाले विजयी बच्चों को, सदा इस पुराने संसार और संस्कार के आकर्षण से परे रहने वाले बाप समान बच्चों को दिलाराम बाप का दिल से यादप्यार और नमस्ते।

264
02:00:10.829 --> 02:00:21.500
दादियों से :- ( दादीजी से ) अच्छी खुशखबरी सुनाई ।

265
02:00:27.560 --> 02:01:01.430
( मोहिनी बहन से ) अच्छा है मुक्त होकर आ गई ।

266
02:01:03.560 --> 02:01:08.399
सहज हो गया ना !

267
02:01:08.399 --> 02:01:16.399
सब ब्राह्मणों की दुआयें भी थी ।

268
02:01:56.560 --> 02:02:01.859
सूली से काँटा करके आ गई ।

269
02:02:03.130 --> 02:02:14.399
बापदादा खुश है , आपकी मन्सा शक्ति का प्रमाण अच्छा है ।

270
02:03:00.560 --> 02:03:08.159
( दादीजी से ) बहुत अच्छा पार्ट बजा रही हो ।

271
02:03:08.760 --> 02:03:26.560
आपको देखकर सभी को फरिश्ता लाइफ याद आती है ।

272
02:03:27.899 --> 02:03:32.300
न्यारा और प्यारा ।

273
02:14:09.729 --> 02:15:09.560
गुजरात की मुख्य 13 बहिनों से :- अच्छे-अच्छे महावीर हैं ।

274
02:15:15.399 --> 02:15:26.760
महावीरों का काम है विजयी बन विजयी बनाना ।

275
02:15:32.159 --> 02:15:47.699
तो सभी अच्छी सेवा कर रहे हैं और आगे भी सेवा होती रहेगी ।

276
02:15:55.159 --> 02:16:08.159
बापदादा बच्चों के उमंग-उत्साह को देख खुश होते हैं ।

277
02:16:12.630 --> 02:16:18.829
अच्छा गुजरात में फैला रहे हो ।

278
02:16:24.760 --> 02:16:30.729
और भी आगे फैलाते रहेंगे ।

279
02:16:32.430 --> 02:16:46.159
बापदादा को सभी बच्चे आशाओं के दीपक लग रहे हैं ।

280
02:16:53.459 --> 02:16:55.200
अच्छा है ।

281
02:16:55.430 --> 02:16:59.229
संगठन भी अच्छा है ।

282
02:17:02.030 --> 02:17:06.829
एक-एक की विशेषता है ।

283
02:17:17.829 --> 02:17:20.159
अच्छा ।

284
02:17:21.430 --> 02:17:26.930
खुश , खुशी बांटने वाले ।

285
02:17:27.860 --> 02:17:46.959
( सरला दीदी पूछ रही हैं , दादी ने माला में किसको रखा है ) आप क्या समझती हो ?

286
02:17:46.959 --> 02:17:52.500
हम तो होंगे ही ना , ऐसे समझती हो ।

287
02:18:10.629 --> 02:18:23.129
थोड़ा बहुत एक दो को सहयोग दे और जो कुछ भी रहा हुआ है , वह खत्म हो जायेगा ।

288
02:18:26.159 --> 02:18:35.799
सब बाप समान बनने वाले ही हैं ।

289
02:18:50.959 --> 02:19:00.360
( नवीनता क्या करें ) सुनाया ना - एक एक सेंटर कम से कम एक वारिस तो तैयार करे ।

290
02:19:00.360 --> 02:19:12.159
तो इस वर्ष वह लेकर आना , 21 वारिस तो लेके आना ।

291
02:19:16.559 --> 02:19:19.299
यह शुरू करो ।

292
02:19:19.629 --> 02:19:23.100
पहला नम्बर आओ ।

293
02:19:36.229 --> 02:19:39.959
सभी हाँ कर रहे हैं ।

294
02:19:43.559 --> 02:19:49.329
वारिस की क्वालिफिकेशन जानते हैं ना ।

295
02:19:58.959 --> 02:20:06.760
यह सब बाबा के ही बनायेंगे ना , अपना तो बनायेंगी नहीं ।

296
02:20:32.629 --> 02:20:36.329
अच्छा ।

