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आज बापदादा चारों ओर के अपने प्रभु प्यारे बच्चों को देख रहे हैं ।

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सारे विश्व के चुने हुए कोटों में से कोई इस परमात्म प्यार के अधिकारी बनते हैं ।

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परमात्म प्यार ने ही आप बच्चों को यहाँ लाया है ।

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यह परमात्म प्यार सारे कल्प में इस समय ही अनुभव करते हो ।

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और सभी समय आत्माओं का प्यार , महान आत्माओं का , धर्म आत्माओं का प्यार अनुभव किया

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00:13:43.000 --> 00:14:11.129
लेकिन अभी परमात्म प्यार के पात्र बन गये ।

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00:14:30.259 --> 00:14:54.129
कोई आपसे पूछे परमात्मा कहाँ है ?

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00:14:57.259 --> 00:15:04.000
तो क्या कहेंगे ?

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परमात्म बाप तो हमारे साथ ही है ।

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00:15:36.529 --> 00:15:44.399
हम उनके साथ रहते हैं ।

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परमात्मा भी हमारे बिना रह नहीं सकता और हम भी परमात्मा के बिना रह नहीं सकते ।

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00:16:32.659 --> 00:17:02.399
इतना प्यार अनुभव कर रहे हो ।

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फलक से कहेंगे वह हमारे दिल में रहता और हम उनके दिल में रहते ।

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ऐसे अनुभवी हैं ना !

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हैं अनुभवी ?

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क्या दिल में आता ?

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अगर हम नहीं अनुभवी होंगे तो कौन होगा !

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बाप भी ऐसे प्यार के अधिकारी बच्चों को देख हर्षित होते हैं ।

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परमात्म प्यार की निशानी -

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जिससे प्यार होता है उसके पीछे सब कुर्बान करने के लिए सहज तैयार हो जाते हैं ।

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00:22:15.460 --> 00:22:54.930
तो आप सब भी जो बाप चाहते हैं

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कि हर एक बच्चा बाप समान बन जाए ,

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00:23:57.930 --> 00:25:19.599
हर एक के चेहरे से बाप प्रत्यक्ष दिखाई दे , ऐसे बने हो ना ?

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बापदादा की दिलपसन्द स्थिति जानते हो ना ।

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00:26:36.529 --> 00:27:38.400
बाप के दिलपसन्द स्थिति है ही सम्पूर्ण पवित्रता ।

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00:27:45.730 --> 00:28:12.000
इस ब्राह्मण जन्म का फाउण्डेशन भी सम्पूर्ण पवित्रता है ।

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सम्पूर्ण पवित्रता की गुण को तो जानते हो ?

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00:29:20.130 --> 00:30:06.460
संकल्प और स्वप्न में भी रिंचक मात्र अपवित्रता का नामनिशान न हो ।

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00:30:30.660 --> 00:31:26.799
बापदादा आजकल के समय की समीपता प्रमाण बार-बार अटेन्शन खिंचवा रहे हैं

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कि सम्पूर्ण पवित्रता के हिसाब से व्यर्थ संकल्प , यह भी सम्पूर्णता नहीं है ।

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00:33:17.660 --> 00:34:24.800
तो चेक करो व्यर्थ संकल्प चलते हैं ?

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00:34:33.800 --> 00:35:40.400
किसी भी प्रकार के व्यर्थ संकल्प सम्पूर्णता से दूर तो नहीं करते ?

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00:35:50.059 --> 00:36:18.260
जितना-जितना पुरूषार्थ में आगे बढ़ते जाते हैं ,

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00:36:30.599 --> 00:37:21.599
उतना रॉयल रूप के व्यर्थ संकल्प ,

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व्यर्थ समय तो समाप्त नहीं कर रहे हैं ?

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रॉयल रूप में अभिमान और अपमान व्यर्थ संकल्प के रूप में वार तो नहीं करते ?

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00:41:00.530 --> 00:42:22.659
अगर अभिमान रूप में कोई भी परमात्म देन को अपनी विशेषता समझते हैं

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तो उस विशेषता का भी अभिमान नीचे ले आता है ।

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00:42:53.329 --> 00:44:02.260
विघ्न रूप बन जाता है और अभिमान भी सूक्ष्म रूप में यही आता ,

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00:44:25.199 --> 00:45:00.000
जो जानते भी हो - मेरापन आया , मेरा नाम , मान , शान होना चाहिए ।

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00:45:24.599 --> 00:45:51.929
यह मेरापन अभिमान का रूप ले लेता है ।

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यह व्यर्थ संकल्प भी सम्पूर्णता से दूर कर लेते हैं

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क्योंकि बापदादा यही चाहते हैं - स्वमान , न अभिमान , न अपमान ।

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यही कारण बनते हैं व्यर्थ संकल्प आने के ।

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00:48:10.000 --> 00:48:59.059
बापदादा हर बच्चे को डबल मालिकपन के निश्चय और नशे में देखने चाहते हैं ।

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00:49:03.599 --> 00:49:11.329
डबल मालिकपन क्या है ?

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00:49:14.800 --> 00:49:49.730
एक तो बाप के खज़ानों के मालिक और दूसरा स्वराज्य के मालिक ।

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00:49:55.199 --> 00:50:36.400
दोनों ही मालिकपन क्योंकि सभी बालक भी हो और मालिक भी हो ।

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00:50:39.130 --> 00:51:01.260
लेकिन बापदादा ने देखा बालक तो सभी हैं ही क्योंकि सभी कहते हैं मेरा बाबा ।

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00:51:01.260 --> 00:51:10.059
तो मेरा बाबा अर्थात् बालक हैं ही ।

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00:51:12.530 --> 00:51:30.929
लेकिन बालक के साथ दोनों प्रकार के मालिक ।

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00:51:37.659 --> 00:51:59.059
तो मालिकपन में नम्बरवार हो जाते हैं ।

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00:52:09.730 --> 00:52:17.199
मैं बालक सो मालिक भी हूँ ।

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00:52:23.260 --> 00:52:44.400
वर्से का खज़ाना प्राप्त है इसलिए बालकपन का निश्चय और नशा रहता है

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00:52:50.800 --> 00:53:24.730
लेकिन मालिकपन का प्रैक्टिकल में निश्चय का नशा उसमें नम्बरवार हो जाते हैं ।

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00:53:50.929 --> 00:54:37.000
स्वराज्य अधिकारी मालिक , इसमें विशेष विघ्न डालता है मन ।

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00:55:12.000 --> 00:55:31.460
मन के मालिक बन कभी भी मन के परवश नहीं हो ।

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00:56:11.329 --> 00:56:26.329
कहते हैं स्वराज्य अधिकारी हैं ,

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00:56:28.329 --> 00:56:38.730
तो स्वराज्य अधिकारी अर्थात् राजा हैं ,

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00:56:54.800 --> 00:57:39.199
जैसे ब्रह्मा बाप ने हर रोज चेकिंग कर मन के मालिक बन विश्व के मालिक का अधिकार प्राप्त कर लिया ।

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00:57:45.860 --> 00:58:09.059
ऐसे यह मन बुद्धि राजा के हिसाब से तो मन्त्री हैं ,

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00:58:27.599 --> 00:58:37.130
यह व्यर्थ संकल्प भी मन में उत्पन्न होते हैं ,

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00:58:37.130 --> 00:58:51.599
तो मन व्यर्थ संकल्प के वश कर देता है ।

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अगर आर्डर से नहीं चलाते तो मन चंचल बनने के कारण परवश कर लेता है ।

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00:59:50.530 --> 00:59:56.260
तो चेक करो ।

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01:00:05.860 --> 01:00:22.599
वैसे भी मन को घोड़ा कहते हैं , क्योंकि चंचल है ना ।

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01:00:22.599 --> 01:00:36.400
और आपके पास श्रीमत का लगाम है ।

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01:00:42.000 --> 01:01:08.000
अगर श्रीमत का लगाम थोड़ा भी ढीला होता है तो मन चंचल बन जाता है ।

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01:01:21.329 --> 01:01:27.860
क्यों लगाम ढीला होता ?

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01:01:27.860 --> 01:01:51.130
क्योंकि कहाँ न कहाँ साइडसीन में देखने लग जाते हैं ।

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01:01:58.130 --> 01:02:07.860
और लगाम ढीला होता तो मन को चांस मिलता है ।

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01:02:21.059 --> 01:02:37.860
तो मैं बालक सो मालिक हूँ , इस स्मृति में सदा रहो ।

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01:02:49.730 --> 01:03:08.400
चेक करो खज़ाने का भी मालिक तो स्वराज्य का भी मालिक , डबल मालिक हूँ ?

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01:03:24.260 --> 01:03:52.130
अगर मालिकपन कम होता है तो कमज़ोर संस्कार इमर्ज हो जाते हैं ।

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01:04:07.130 --> 01:04:14.599
और संस्कार को क्या कहते हो ?

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01:04:14.599 --> 01:04:29.929
मेरा संस्कार ऐसा है , मेरी नेचर ऐसी है , लेकिन क्या यह मेरा है ?

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01:04:29.929 --> 01:04:36.260
कहने में तो ऐसे ही कहते हो , मेरा संस्कार ।

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01:04:36.260 --> 01:04:39.130
यह मेरा है ?

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01:04:39.130 --> 01:04:46.059
राइट है कहना मेरा संस्कार ?

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01:04:50.260 --> 01:04:52.800
राइट है ?

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01:04:52.800 --> 01:04:56.000
मेरा है ?

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01:04:57.199 --> 01:05:03.199
कि रावण की जायदाद है ?

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01:05:05.199 --> 01:05:19.130
कमज़ोर संस्कार रावण की जायदाद है , उसको मेरा कैसे कह सकते हैं ।

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01:05:19.130 --> 01:05:24.199
मेरा संस्कार कौन सा है ?

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01:05:24.199 --> 01:05:31.199
जो बाप का संस्कार वह मेरा संस्कार ।

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01:05:31.659 --> 01:05:36.000
तो बाप का संस्कार कौन सा है ?

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01:05:36.000 --> 01:05:41.460
विश्व कल्याण ।

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01:05:43.730 --> 01:05:50.059
शुभ भावना , शुभ कामना ।

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01:05:52.059 --> 01:06:04.599
तो कोई भी कमज़ोर संस्कार को मेरा संस्कार कहना ही रांग है ।

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01:06:09.659 --> 01:06:24.000
और मेरा संस्कार अगर मानो दिल में बिठाया है , अशुद्ध चीज़ बिठा दी है दिल में ।

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01:06:24.800 --> 01:06:30.530
मेरी चीज़ से तो प्यार होता है ना ।

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01:06:31.659 --> 01:06:42.329
तो मेरा समझने से अपने दिल में जगह दे दी है ।

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01:06:48.199 --> 01:07:00.800
इसीलिए कई बार बच्चों को युद्ध बहुत करनी पड़ती है

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01:07:00.800 --> 01:07:12.000
क्योंकि अशुभ और शुभ दोनों को दिल में बिठा दिया है तो दोनों क्या करेंगे ?

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01:07:12.000 --> 01:07:17.530
युद्ध ही तो करेंगे !

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01:07:31.329 --> 01:07:46.530
जब यह संकल्प में आता है , वाणी में भी आता है , मेरा संस्कार ।

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01:07:46.530 --> 01:08:06.059
तो चेक करो यह अशुभ संस्कार मेरा संस्कार नहीं है ।

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01:08:24.060 --> 01:08:36.729
तो संस्कार परिवर्तन करना पड़े ।

99
01:08:57.859 --> 01:09:52.399
बापदादा हर एक बच्चे को पदम-पदमगुणा भाग्यवान चलन और चेहरे में देखने चाहते हैं ।

100
01:09:58.130 --> 01:10:04.199
कई बच्चे कहते हैं

101
01:10:28.399 --> 01:11:13.329
भाग्यवान तो बने हैं लेकिन चलते-फिरते भाग्य इमर्ज हो ,

102
01:11:15.460 --> 01:12:01.600
वह मर्ज हो जाता है और बापदादा हर समय , हर बच्चे के मस्तक में भाग्य का सितारा चमकता हुआ देखने चाहते हैं ।

103
01:12:33.060 --> 01:13:01.859
कोई भी आपको देखे तो चेहरे से , चलन से भाग्यवान दिखाई दे

104
01:13:16.529 --> 01:13:29.859
तब आप बच्चों द्वारा बाप की प्रत्यक्षता होगी

105
01:13:35.329 --> 01:13:58.800
क्योंकि वर्तमान समय मैजारिटी अनुभव करने चाहते हैं ,

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01:14:04.930 --> 01:14:19.659
जैसे आजकल की साइन्स प्रत्यक्ष रूप में दिखाती है ना !

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अनुभव कराती है ना !

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01:14:24.060 --> 01:14:29.859
गर्म का भी अनुभव कराती है ,

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01:14:29.859 --> 01:14:36.930
ठण्डाई का भी अनुभव कराती है

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01:14:42.859 --> 01:14:56.529
तो साइलेन्स की शक्ति से भी अनुभव करने चाहते हैं ।

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01:15:09.529 --> 01:15:29.000
जितना-जितना स्वयं अनुभव में रहेंगे तो औरों को भी अनुभव करा सकेंगे ।

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01:15:33.659 --> 01:15:49.199
बापदादा ने इशारा दिया ही है कि अभी कम्बाइन्ड सेवा करो ।

113
01:15:50.659 --> 01:16:19.199
सिर्फ आवाज से नहीं , लेकिन आवाज के साथ अनुभवीमूर्त बन अनुभव कराने की भी सेवा करो ।

114
01:16:30.399 --> 01:17:19.460
कोई न कोई शान्ति का अनुभव, खुशी का अनुभव, आत्मिक प्यार का अनुभव…, अनुभव ऐसी चीज़ है जो एक बारी भी अनुभव हुआ तो छोड़ नहीं सकते हैं।

115
01:17:24.460 --> 01:17:40.329
सुनी हुई ची ज भूल सकती है लेकिन अनुभव की चीज़ भूलती नहीं है ।

116
01:17:40.329 --> 01:17:49.859
वह अनुभव कराने वाले के समीप लाती है ।

117
01:18:24.600 --> 01:18:46.800
सभी पूछते हैं कि अभी आगे के लिए क्या नवीनता करें ?

118
01:18:46.800 --> 01:19:04.800
तो बापदादा ने देखा सर्विस तो सभी उमंग-उत्साह से कर रहे हो ,

119
01:19:08.460 --> 01:19:13.930
हर एक वर्ग भी कर रहा है ।

120
01:19:13.930 --> 01:19:36.460
आज भी बहुत वर्ग इकट्ठे हुए है नाक मेगा प्रोग्राम भी कर लिया ,

121
01:19:36.460 --> 01:19:50.399
सन्देश तो दे दिया , अपना उलाहना निकाल लिया , इसकी मुबारक हो ।

122
01:19:52.399 --> 01:20:16.000
लेकिन अब तक यह आवाज नहीं फैला है

123
01:20:18.000 --> 01:20:25.600
कि यह परमात्म ज्ञान है ।

124
01:20:26.130 --> 01:20:31.460
ब्रह्माकुमारियाँ कार्य अच्छा कर रही हैं ,

125
01:20:31.460 --> 01:20:37.329
ब्रह्माकुमारियों का ज्ञान बहुत अच्छा है

126
01:20:37.329 --> 01:21:10.800
लेकिन यही परमात्म ज्ञान है , परमात्म कार्य चल रहा है यह आवाज फैले ।

127
01:21:14.529 --> 01:21:21.130
मेडीटेशन कोर्स भी कराते हो ,

128
01:21:21.859 --> 01:21:29.600
आत्मा का परमात्मा से कनेक्शन भी जोड़ते हो

129
01:21:31.600 --> 01:21:47.600
लेकिन अब परमात्म कार्य स्वयं परमात्मा करा रहा है ,

130
01:21:48.529 --> 01:21:56.000
यह बहुत कम अनुभव करते हैं ।

131
01:22:06.260 --> 01:22:22.000
आत्मा और धारणायें यह प्रत्यक्ष हो रहा है ,

132
01:22:47.329 --> 01:23:01.729
अच्छा कार्य कर रहे हैं , अच्छा बोलते हैं , अच्छा सिखाते हैं , यहाँ तक ठीक है ।

133
01:23:08.329 --> 01:23:18.930
नॉलेज अच्छी है इतना भी कहते हैं लेकिन परमात्म नॉलेज है …

134
01:23:29.460 --> 01:23:59.460
यह आवाज बाप के नजदीक लायेगा और जितना बाप के नजदीक आयेंगे उतना अनुभव स्वतः ही करते रहेंगे ।

135
01:24:16.729 --> 01:24:36.800
तो ऐसा प्लैन और भाषणों में ऐसा कुछ जौहर भरो , जिसमें परमात्मा के नजदीक आ जायें ।

136
01:24:41.930 --> 01:24:54.800
दिव्यगुणों की धारणा इसमें अटेन्शन गया है ,

137
01:24:56.800 --> 01:25:07.460
आत्मा का ज्ञान देते हैं , परमात्मा का ज्ञान देते हैं , यह कहते हैं

138
01:25:07.460 --> 01:25:34.859
लेकिन परमात्मा आ चुका है , परमात्म कार्य स्वयं परमात्मा चला रहा है ,

139
01:25:41.529 --> 01:26:02.460
यह प्रत्यक्षता चुम्बक की तरह समीप लायेगी ।

140
01:26:05.399 --> 01:26:21.600
आप लोग भी समीप तब आये जब समझा बाप मिला है , बाप से मिलना है ।

141
01:26:32.199 --> 01:26:49.600
स्नेही मैजॉरिटी बनते हैं , वह क्या समझके ?

142
01:26:49.600 --> 01:26:55.060
कार्य बहुत अच्छा है ।

143
01:27:01.199 --> 01:27:16.329
जो कार्य कर रही हैं ब्रह्माकुमारियाँ , वह कार्य कोइ और कर नहीं सकता , परिवतर्न् कराती हैं ।

144
01:27:30.659 --> 01:27:49.659
लेकिन परमात्मा बोल रहा है , परमात्मा से वर्सा लेना है , इतना नजदीक नहीं आते ।

145
01:27:58.260 --> 01:28:28.529
क्योंकि अभी जो पहले समझते नहीं थे कि ब्रह्माकुमारियाँ क्या करती हैं , क्या इन्हों की नॉलेज है , वह समझने लगे हैं ।

146
01:28:34.600 --> 01:28:52.260
लेकिन परमात्म प्रत्यक्षता , अगर समझ सकते कि परमात्मा का ज्ञान है तो रूक सकते हैं क्या ।

147
01:28:54.260 --> 01:29:14.199
जैसे आप भागकर आ गये हो ना , ऐसे भागेंगे ।

148
01:29:26.460 --> 01:30:02.329
तो अभी ऐसा प्लैन बनाओ , ऐसे भाषण तैयार करो , ऐसे परमात्म अनुभूति के प्रैक्टिकल सबूत बनो ।

149
01:30:13.529 --> 01:30:44.329
तभी बाप की प्रत्यक्षता प्रैक्टिकल में दिखाई देगी ।

150
01:31:07.800 --> 01:31:23.930
अभी अच्छा है यहाँ तक पहुंचे हैं , अच्छा बनना है ,

151
01:31:25.800 --> 01:31:43.930
वह लहर परमात्म प्यार की अनुभूति से होगी ।

152
01:31:49.859 --> 01:31:59.199
तो अनुभवी मूर्त बन अनुभव कराओ ।

153
01:32:23.729 --> 01:32:29.260
अच्छा ।

154
01:32:37.060 --> 01:32:56.600
अभी डबल मालिकपन की स्मृति से समर्थ बन समर्थ बनाओ ।

155
01:33:05.060 --> 01:33:09.659
अच्छा अभी क्या करना है ?

156
01:33:25.130 --> 01:34:11.529
सेवा का टर्न पंजाब जोन का है :- हाथ हिलाओ ।

157
01:34:19.800 --> 01:34:32.930
अच्छा है जिस भी जोन को टर्न मिलता है वह खुली दिल से आ जाते हैं ।

158
01:34:40.600 --> 01:34:44.460
अच्छा चांस ले लेते हैं ।

159
01:34:44.460 --> 01:35:02.199
बापदादा को भी खुशी होती है कि हर एक जोन सेवा का चांस अच्छा ले लेते हैं ।

160
01:35:05.399 --> 01:35:18.800
पंजाब को सभी कामन रीति से शेर कहते हैं , पंजाब शेर ।

161
01:35:20.060 --> 01:35:30.000
और बापदादा कहते हैं शेर अर्थात् विजयी ।

162
01:35:32.460 --> 01:35:52.859
तो सदा पंजाब वालों को अपने मस्तक के बीच विजय का तिलक अनुभव करना है ।

163
01:35:53.529 --> 01:36:00.199
विजय का तिलक मिला हुआ है ।

164
01:36:04.199 --> 01:36:18.460
यह सदा स्मृति रहे हम ही कल्प कल्प के विजयी हैं ।

165
01:36:18.460 --> 01:36:28.729
थे , हैं और कल्प-कल्प बनेंगे ।

166
01:36:34.729 --> 01:36:38.000
अच्छा है ।

167
01:36:38.000 --> 01:37:00.529
पंजाब भी वारिस क्वालिटी को बाप के आगे लाने का प्रोग्राम बना रहे हैं ना !

168
01:37:00.529 --> 01:37:11.329
अभी बापदादा के आगे वारिस क्वालिटी लाई नहीं है ।

169
01:37:20.529 --> 01:37:39.930
स्नेही क्वालिटी लाई है , सभी जोन ने स्नेही सहयोगी क्वालिटी लाई है लेकिन वारिस क्वालिटी नहीं लाये हैं ।

170
01:38:00.600 --> 01:38:05.130
तैयारी कर रहे हैं ना !

171
01:38:08.659 --> 01:38:13.000
सब प्रकार के चाहिए ना ।

172
01:38:13.000 --> 01:38:30.130
वारिस भी चाहिए , स्नेही भी चाहिए , सहयोगी भी चाहिए , माइक भी चाहिए , माइट भी चाहिए ।

173
01:38:30.130 --> 01:38:36.329
सब प्रकार के चाहिए ।

174
01:38:49.130 --> 01:39:02.130
अच्छा है , सेन्टरों में वृद्धि तो हो रही है ।

175
01:39:05.930 --> 01:39:22.600
हर एक उमंग-उत्साह से सेवा में वृद्धि कर भी रहे हैं ,

176
01:39:31.130 --> 01:39:51.930
अभी देखेंगे कि किस जोन में यह प्रत्यक्ष होता है - परमात्मा आ चुका है ।

177
01:39:59.529 --> 01:40:11.199
बाप को प्रत्यक्ष कौन सा जोन करता है , वह बापदादा देख रहे हैं ।

178
01:40:11.199 --> 01:40:15.399
फॉरेन करेगा ?

179
01:40:15.399 --> 01:40:21.729
फॉरेन भी कर सकता है ।

180
01:40:33.529 --> 01:40:37.399
पंजाब नम्बर ले लो ।

181
01:40:37.399 --> 01:40:43.000
ले लो अच्छा है ।

182
01:40:43.000 --> 01:40:49.260
सब सहयोग देंगे आपको ।

183
01:40:59.800 --> 01:41:17.000
बहुत समय से प्रयत्न कर रहे हैं , यही है , यही है , यही है , यह आवाज फैलाने का ।

184
01:41:22.859 --> 01:41:31.130
अभी है यह भी है , यही है नहीं है ।

185
01:41:40.600 --> 01:41:43.329
तो पंजाब क्या करेगा ?

186
01:41:43.329 --> 01:41:48.859
यह आवाज आ जाये यही है, यही है…।

187
01:41:48.859 --> 01:41:53.130
ठीक है टीचर्स ?

188
01:41:53.130 --> 01:41:56.329
कब तक करेंगे ?

189
01:41:56.329 --> 01:42:02.199
इस साल में करेंगे ?

190
01:42:03.859 --> 01:42:08.600
नया साल शुरू हुआ है ना !

191
01:42:08.600 --> 01:42:17.399
तो नये साल में कोई नवीनता होनी चाहिए ना !

192
01:42:19.859 --> 01:42:29.399
यह भी है , यह तो बहुत सुन लिया ।

193
01:42:39.260 --> 01:42:54.529
जैसे आपके मन में बस बाबा , बाबा , बाबा स्वतः याद रहता है

194
01:42:54.529 --> 01:43:07.260
ऐसे उनके मुख से निकले हमारा बाबा आ गया ।

195
01:43:11.199 --> 01:43:32.060
वह भी सभी मेरा बाबा , मेरा बाबा , यह आवाज चारों कोनों से निकले , लेकिन शुरूआत तो एक कोने से होगी ना ।

196
01:43:38.260 --> 01:43:45.260
तो पंजाब कमाल करेगा ?

197
01:43:45.260 --> 01:43:48.329
क्यों नहीं करेंगे ।

198
01:43:48.329 --> 01:43:53.130
करना ही है ।

199
01:43:58.659 --> 01:44:01.130
बहुत अच्छा ।

200
01:44:01.130 --> 01:44:08.000
इन एडवांस मुबारक हो ।

201
01:44:14.060 --> 01:44:19.199
अच्छा ।

202
01:44:37.800 --> 01:45:09.659
इस ग्रुप में 6 वर्गो की मीटिंग चल रही है :- ( साइंस एण्ड इंजीनियर विंग , बिजनेस विंग , धार्मिक प्रभाग , समाज सेवा प्रभाग , मीडिया प्रभाग , सुरक्षा प्रभाग ) सभी उठो ।

203
01:45:36.659 --> 01:45:57.399
( सभी अपने-अपने प्रभाग का बैनर दिखा रहे हैं ) अच्छा सब बिजी हो गये हो तो सेवा में बिजी रहने की मुबारक हो ।

204
01:46:00.529 --> 01:46:12.260
हर एक अपनी-अपनी विधि अपना रहे हैं ।

205
01:46:14.529 --> 01:46:24.729
देखो , साइस्ं इंजनियर का बैनर देख रहे हैं ,

206
01:46:26.329 --> 01:46:53.000
लेकिन कमाल यह है जैसे साइंस प्रत्यक्ष प्रमाण दिखा रही है , ऐसे साइलेन्स पावर ।

207
01:46:54.060 --> 01:47:22.130
ऐसा प्रैक्टिकल में अनुभव फैलाओ जो हर एक के मुख से निकले कि साइंस तो साइंस है लेकिन साइलेन्स अपरमअपार है

208
01:47:33.260 --> 01:48:08.529
क्योंकि धर्मवाले आरै साइंसवाले दोनों को प्रैक्टिकल में साइलेन्स का चमत्कार नहीं लेकिन साइलेन्स का कार्य सिद्ध करके दिखाना पड़ेगा ।

209
01:48:08.529 --> 01:48:34.800
धर्म वालों को प्रैक्टिकल में एक परमात्मा है और परमात्मा का कार्य चल रहा है यह सिद्ध करके दिखाना पड़ेगा ।

210
01:48:36.800 --> 01:48:45.800
अनेक तरफ से बुद्धि हटकर एक तरफ लग जाए ।

211
01:48:45.800 --> 01:48:52.399
एकाग्र बुद्धि हो जाए ।

212
01:49:08.600 --> 01:49:21.329
जो भी विंग हैं , बापदादा ने कह दिया कि काम तो सभी कर रहे हैं ,

213
01:49:22.460 --> 01:49:36.460
प्लैन भी अच्छे अच्छे बनाते हैं लेकिन अभी समय की रफ्तार तेज जा रही है

214
01:49:37.529 --> 01:50:09.000
तो समय के प्रमाण अभी ऐसा कोई प्लैन बनाओ जो सबकी बुद्धि में परमात्मा के सिवाए कुछ सूझे नहीं , मैजारिटी के मुख से बाबा , बाबा निकले ।

215
01:50:17.260 --> 01:50:24.199
प्लैन भी अच्छे बनाये हैं , बापदादा ने सुने हैं ।

216
01:50:24.199 --> 01:50:32.399
लेकिन अभी फास्ट करना पड़ेगा ।

217
01:50:34.729 --> 01:50:49.130
साइन्स भी देखो , समय को , चीजों को बिल्कुल सूक्ष्म बनाती जाती है ना ।

218
01:50:50.329 --> 01:51:11.659
तो साइलेन्स पावर कितना शक्तिशाली बना रही है यह अनुभव कराओ ।

219
01:51:18.329 --> 01:51:31.729
जो भी वर्ग आये हैं , सभी को बापदादा मुबारक दे रहे हैं ।

220
01:51:43.260 --> 01:51:58.529
वैसे तो मीडिया और मेडिकल यह भी आगे बढ़ रहे हैं ।

221
01:52:05.399 --> 01:52:19.199
बापदादा ने सुना तो मीडिया भी विस्तार को प्राप्त कर रही है

222
01:52:19.199 --> 01:52:37.000
लेकिन मीडिया के लिए भी सुनाया था तो जिसके हाथ में अखबार आये , जिसके रेडियो का स्विच खुले ,

223
01:52:38.260 --> 01:52:55.729
टी वी का स्विच खुले , आवाज आये हमारा बाबा आ गया ।

224
01:53:08.460 --> 01:53:27.329
ऐसे नहीं और वर्ग नहीं कर रहे हैं,सब कर रहे हैं लेकिन बापदादा देख रहे हैं लेकिन कौन सा वर्ग नम्बरवन निमित्त बनता है।

225
01:53:31.000 --> 01:53:38.859
कौन सा जोन नम्बरवन निमित्त बनता है।

226
01:53:39.600 --> 01:54:02.000
चलो और तो छोड़ो लेकिन जहाँ भी प्रोग्राम करते हैं वह प्रोग्राम वाले ही सभी कहें कि बाबा आ गया , यह तो शुरू हो

227
01:54:07.329 --> 01:54:24.529
कि आप कहेंगे , हम अभी पुरूषार्थ कर रहे हैं , सम्पन्न बन जायेंगे जल्दी जल्दी तो यह कार्य भी हो जायेगा

228
01:54:24.529 --> 01:54:41.260
क्योंकि कनेक्शन है , आपका सम्पन्न बनना और प्रत्यक्षता का झण्डा लहरना ।

229
01:54:47.399 --> 01:55:01.930
तो बापदादा ने सुनाया कि अभी वेस्ट थॉट्स यह अभी भी चलते हैं ,

230
01:55:05.260 --> 01:55:17.260
रॉयल रूप में भी चलते , साधारण रूप में भी चलते हैं ,

231
01:55:23.529 --> 01:55:46.930
सभी मन के मालिक बन जायें , परमात्म बालक सो मालिक ।

232
01:55:51.529 --> 01:56:01.659
अच्छा मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

233
01:56:08.659 --> 01:57:02.199
डबल विदेशी :- बापदादा कहते हैं कि डबल फॉरेनर्स सबसे पहले तो मधुबन का बहुत बढ़िया श्रृंगार हैं ।

234
01:57:05.859 --> 01:57:11.130
कितना अच्छा लगता है ।

235
01:57:12.329 --> 01:57:32.600
देश विदेश एक मत होके एकाग्र बुद्धि से विश्व सेवा कर रहे हैं ।

236
01:57:34.859 --> 01:58:01.729
एक ही स्टेज पर सब इन्टरनेशनल हैं , काले भी तो गोरे भी , सांवले भी , सब प्रकार के एक स्टेज पर बैठते हैं ।

237
01:58:07.529 --> 01:58:16.930
और सब एक बाप दूसरा न कोई , है ?

238
01:58:16.930 --> 01:58:18.529
दूसरा है ?

239
01:58:18.529 --> 01:58:27.130
व्यर्थ संकल्प हैं तो भी दूसरा है ।

240
01:58:35.529 --> 01:58:56.659
आज बापदादा सब संकल्प की विधि को एक शुभ संकल्प बनाने चाहते हैं

241
01:59:01.000 --> 01:59:14.729
क्योंकि मन के संकल्प में बहुत समय से जो कमज़ोरी चलती है

242
01:59:14.729 --> 01:59:24.659
वह बहुत कारण से मन बुद्धि को भी सहयोगी बना देता है

243
01:59:24.659 --> 01:59:42.060
और मन बुद्धि में जो भी संकल्प चलता रहता है कमज़ोरी का , वह संस्कार बन जाता है ।

244
01:59:47.130 --> 01:59:56.800
क्योंकि बहुत समय चलता है ना तो वह संस्कार का रूप हो जाता है ।

245
02:00:00.130 --> 02:00:09.060
लेकिन मेरा संस्कार अभी कभी नहीं कहना , अगर मेरा संस्कार कहेंगे ना

246
02:00:09.060 --> 02:00:21.800
तो बापदादा और ब्राह्मण समझेंगे कि इसको रावण की जायदाद से प्यार है ।

247
02:00:25.930 --> 02:00:31.460
तो डबल विदेशियों ने तो विदाई दे दी है ना !

248
02:00:31.460 --> 02:00:33.460
दे दी ?

249
02:00:35.460 --> 02:00:39.199
व्यर्थ स्टॉप ।

250
02:00:47.529 --> 02:00:58.060
समर्थ बाप , समर्थ हम , व्यर्थ खत्म ।

251
02:01:01.199 --> 02:01:17.000
ठीक है ना - फारेनर्स की एक विशेषता है जो बाप को अच्छी लगती है , वह क्या है ?

252
02:01:17.460 --> 02:01:29.199
अन्दर नहीं रखते हैं , सब बोल देते हैं , छिपाते नहीं है , मैजारिटी ।

253
02:01:30.399 --> 02:01:34.060
मैजारिटी ऐसे हैं ।

254
02:01:34.060 --> 02:01:47.659
और जो संकल्प किया दृढ़ , उसको प्रैक्टिकल में लाने की भी आदत है

255
02:01:50.859 --> 02:02:05.859
इसीलिए डबल फॉरेनर्स शुरू करो दृढ़ संकल्प , वेस्ट खत्म , बेस्ट ।

256
02:02:05.859 --> 02:02:08.199
ठीक है ?

257
02:02:08.199 --> 02:02:11.399
करेंगे डबल फॉरेनर्स ?

258
02:02:11.399 --> 02:02:13.399
करेंगे ?

259
02:02:30.659 --> 02:02:47.130
आप में संस्कार रूप में भी है , जो संकल्प किया वह करके दिखाते हो ।

260
02:02:52.729 --> 02:03:02.600
तो सारे फॉरेन में वेस्ट का नाम निशान न हो ,

261
02:03:02.600 --> 02:03:21.800
न वेस्ट टाइम , न वेस्ट बोल , न वेस्ट संकल्प , न वेस्ट कर्म , न वेस्ट सम्बन्ध-सम्पर्क ।

262
02:03:25.729 --> 02:03:28.060
ठीक है ?

263
02:03:30.399 --> 02:03:34.460
पसन्द है ?

264
02:03:34.460 --> 02:03:36.460
अच्छा ।

265
02:03:36.460 --> 02:03:40.859
तो कब रिजल्ट यह आयेगी ?

266
02:03:42.000 --> 02:03:46.260
एक्जैम्पुल बनेंगे ना !

267
02:03:47.399 --> 02:03:51.130
तो कब तक रिजल्ट आयेगी ?

268
02:03:51.130 --> 02:03:57.260
कब तक यह रिजल्ट आयेगी ?

269
02:04:02.199 --> 02:04:09.460
तीन मास में या साल में ?

270
02:04:11.800 --> 02:04:14.399
क्या सोचती हैं ?

271
02:04:14.399 --> 02:04:19.199
टीचर्स क्या सोचती हैं ?

272
02:04:30.060 --> 02:05:26.399
( दादी जानकी कह रही हैं अभी शिवरात्रि आ रही है , अभी-अभी करेंगे , बाबा ने कहा , हो गया ) अच्छा है देखो दृढ़संकल्प रखेंगे , करना ही है , कुछ भी हो जाए , करना ही है ।

273
02:05:40.529 --> 02:05:51.930
( सभी कह रहे हैं शिवजयन्ती तक हो जायेगा ) मुबारक हो लाख , लाख मुबारक हो ।

274
02:05:57.800 --> 02:06:08.460
बहुत अच्छा आप सभी के मुख में गुलाबजामुन ।

275
02:06:13.800 --> 02:06:19.930
अच्छा ।

276
02:06:43.529 --> 02:07:01.000
जो भी उमंग-उत्साह से आगे बढ़ने चाहे वह बढ़ सकता है ।

277
02:07:01.000 --> 02:07:09.460
ऐसे नहीं डबल फारेनर्स ने हाथ उठाया और आप सभी क्या करेंगे ?

278
02:07:09.460 --> 02:07:16.329
इन्डिया वाले क्या करेंगे ?

279
02:07:19.399 --> 02:07:26.729
नम्बरवन तो लेना चाहते हैं ना!

280
02:07:27.859 --> 02:07:45.930
सभी के दिल में यह उमंग आना चाहिए कि हमने कहा नहीं है लेकिन करके दिखायेंगे ।

281
02:07:47.260 --> 02:07:51.199
तो इन्डिया वाले ऐसे करेंगे ?

282
02:07:51.199 --> 02:07:54.199
हिम्मत दिखायेंगे ?

283
02:07:54.199 --> 02:07:55.859
हिम्मत दिखायेंगे ?

284
02:07:55.859 --> 02:08:04.600
पहली लाइन हाथ नहीं उठा रही है ।

285
02:08:05.130 --> 02:08:10.130
हाँ मधुबन वाले भी करेंगे ?

286
02:08:10.130 --> 02:08:13.800
मधुबन वाले बड़ा हाथ उठाओ ।

287
02:08:22.859 --> 02:08:47.600
मधुबन वालों के लिए बापदादा कहते हैं जो चुल पर सो दिल पर , मधुबन वालों को बहुत बड़ी लिफ्ट है ।

288
02:08:47.600 --> 02:08:59.399
लिफ्ट पर अगर चढ़ने चाहो तो बहुत जल्दी सम्पन्न बन सकते हो ।

289
02:09:01.930 --> 02:09:11.859
लोग तो मधुबन में आते हैं , आप मधुबन में रहते हैं ।

290
02:09:14.329 --> 02:09:19.930
सिर्फ अलबेले नहीं बनना बस ।

291
02:09:19.930 --> 02:09:29.329
लिफ्ट को छोड़कर सीढ़ी नहीं चढ़ो , लिफ्ट में चढ़ो ।

292
02:09:29.329 --> 02:09:40.930
बाकी बापदादा मधुबन वालों को हर सीजन की मुबारक देते हैं ।

293
02:09:40.930 --> 02:09:47.199
सेवा अच्छी करते हैं ।

294
02:09:48.329 --> 02:09:52.930
लेकिन … लेकिन है ।

295
02:09:52.930 --> 02:10:03.800
कहें लेकिन वाला , कि प्राइवेट कहें ?

296
02:10:07.930 --> 02:10:24.060
मधुबन वाले समझदार बहुत हैं , समझ तो गये हैं अन्दर में , इसीलिए कहते नहीं हैं ।

297
02:10:33.729 --> 02:10:58.060
देखो , मधुबन वालों को हर साल , हर सीजन में सम्मुख मुरली सुनने का मिलता है , औरों को नहीं मिलता है ।

298
02:11:04.329 --> 02:11:28.329
तो मधुबन वाले सभी को मुस्कराके मिलते अपने चेहरे से बाप को प्रत्यक्ष कर सकते हैं ।

299
02:11:28.329 --> 02:11:45.130
जो मेरा बाबा कहते हैं ना , वह मेरे बाबा का चेहरे से चलन से दिखाई दे ।

300
02:11:45.130 --> 02:11:53.800
कर भी रहे हैं , ऐसे नहीं है नहीं कर रहे हैं , कर रहे हैं ।

301
02:11:53.800 --> 02:12:01.800
अभी और थोड़ा फास्ट करना है , बाकी कर भी रहे हैं ।

302
02:12:03.199 --> 02:12:17.800
मधुबन का नाम सुनके जहाँ भी जाते हो ना , मधुबन वाले हैं , मधुबन वाले हैं ।

303
02:12:17.800 --> 02:12:26.329
देखो , कितना रिगार्ड से देखते हैं ।

304
02:12:30.399 --> 02:12:39.729
मधुबन से प्यार है , तो मधुबन निवासियों से भी प्यार है ।

305
02:12:44.199 --> 02:12:51.130
तो अच्छा आज तो मिल लिया ना मधुबन वालों से ।

306
02:12:52.729 --> 02:13:02.199
आज किसने कहा था मधुबन वालों से मिलना है , तो बापदादा मिला ना ।

307
02:13:02.199 --> 02:13:07.399
तो बापदादा मिला ?

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02:13:12.060 --> 02:13:16.930
अच्छा ।

309
02:13:21.399 --> 02:13:41.529
सभी तरफ के सर्व रूहानी , गुलाब बच्चों को

310
02:13:43.000 --> 02:14:14.859
सदा बाप के अति प्यारे और देहभान से अतिन्यारे , बापदादा के दिल के दुलारे बच्चों को ,

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02:14:16.460 --> 02:14:47.260
सदा एक बाप , एकाग्र मन और एकरस स्थिति में स्थित रहने वाले बच्चों को ,

312
02:14:50.659 --> 02:15:21.199
चारों ओर के भिन्न-भिन्न समय पर भिन्न-भिन्न स्थान में रहते भी साइंस के साधनों से मधुबन में पहुँचने वाले ,

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02:15:21.659 --> 02:15:46.260
सम्मुख देखने वाले , सभी लाडले , सिकीलधे , कल्प-कल्प के परमात्म प्यार के पात्र अधिकारी बच्चों को

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02:15:47.130 --> 02:16:22.000
बापदादा का यादप्यार और दिल की दुआयें , पदम-पदम गुणा स्वीकार हो और साथ में डबल मालिक बच्चों को बापदादा की नमस्ते ।

