WEBVTT

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00:10:17.399 --> 00:11:19.600
आज होलीएस्ट बाप अपने होली बच्चों से मिलन मना रहे हैं ।

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00:11:24.460 --> 00:12:27.399
चारों ओर के होली बच्चे दूर बैठे भी समीप हैं ।

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00:12:34.059 --> 00:13:49.659
बापदादा ऐसे होली अर्थात् महान पवित्र बच्चों के मस्तक पर चमकता हुआ भाग्य का सितारा देख रहे हैं ।

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00:14:00.200 --> 00:14:38.730
ऐसे महान पवित्र सारे कल्प में और कोई नहीं बनता ।

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00:14:50.929 --> 00:15:34.860
इस संगमयुग पर पवित्रता का व्रत लेने वाले भाग्यवान बच्चे भविष्य में

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00:15:36.200 --> 00:15:57.659
डबल पवित्र शरीर से भी पवित्र और आत्मा भी पवित्र बनते हैं ।

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00:15:59.659 --> 00:16:41.399
सारे कल्प में चक्र लगाओ चाहे कितनी भी महान आत्मायें आये हैं

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00:16:41.399 --> 00:17:19.329
लेकिन शरीर भी पवित्र और आत्मा भी पवित्र , ऐसा पवित्र न धर्म आत्मा बने हैं , न महात्मा बने हैं ।

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00:17:27.059 --> 00:18:09.660
बापदादा को आप बच्चों के ऊपर नाज़ है वाह ! मेरे महान पवित्र बच्चे वाह !

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00:18:21.130 --> 00:19:12.000
डबल पवित्र , डबल ताजधारी भी कोई नहीं बनता , डबल ताजधारी भी आप श्रेष्ठ आत्मायें बनती हैं ।

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00:19:18.460 --> 00:19:44.000
अपना वह डबल पवित्र डबल ताजधारी स्वरूप सामने आ रहा है ना ।

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00:20:01.200 --> 00:20:39.130
इसलिए आप बच्चों की जो इस संगमयुग में प्रैक्टिकल जीवन बनी है ,

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00:20:42.730 --> 00:21:25.460
उस एक-एक जीवन की विशेषता का यादगार दुनिया वाले उत्सव के रूप में मनाते रहते हैं ।

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00:21:34.059 --> 00:22:01.730
आज भी आप सभी स्नेह के विमान में होली मनाने के लिए पहुँच गये हो ।

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00:22:01.730 --> 00:22:09.400
होली मनाने आये हो ना !

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00:22:14.259 --> 00:22:51.730
आप सभी ने अपने जीवन में पवित्रता की होली मनाई है ,

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00:22:57.400 --> 00:23:26.730
हर आध्यात्मिक रहस्य को दुनिया वालों ने स्थूल रूप दे दिया है ।

18
00:23:28.730 --> 00:23:35.730
क्योंकि बाडी कान्सेस हैं ना ।

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00:23:36.930 --> 00:24:02.599
आप सोल कान्सेस वाले हैं , आध्यात्मिक जीवन वाले हैं और वह बाडी कान्सेस वाले हैं ।

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00:24:04.130 --> 00:24:11.660
तो सब स्थूल रूप ले लिया ।

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00:24:13.329 --> 00:24:53.000
आपने योग अग्नि द्वारा अपने पुराने संस्कार स्वभाव को भस्म किया ,

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00:24:53.000 --> 00:25:17.000
जलाया और दुनिया वाले स्थूल आग में जलाते हैं ।

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00:25:20.329 --> 00:25:25.000
क्यों ?

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00:25:30.460 --> 00:25:52.460
पुराने संस्कार जलाने के बिना न परमात्म संग का रंग लग सकता ,

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00:25:53.859 --> 00:26:11.529
न परमात्म मिलन का अनुभव कर सकते ।

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00:26:16.259 --> 00:26:51.930
तो आपके जीवन की इतनी वैल्यु है जो एक-एक कदम आपका उत्सव के रूप में मनाया जाता है ।

27
00:26:55.730 --> 00:26:59.730
क्यों ?

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00:27:02.200 --> 00:27:24.730
आपने पूरा संगमयुग उत्साह उमंग की जीवन बनाई है ।

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00:27:31.460 --> 00:27:44.599
आपकी जीवन का यादगार एक दिन का उत्सव मना लेते हैं ।

30
00:27:56.130 --> 00:28:24.930
तो सभी की ऐसी सदा उत्साह , उमंग , खुशी की जीवन है ना !

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00:28:24.930 --> 00:28:35.599
है या कभी-कभी है ?

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00:28:36.599 --> 00:28:46.859
सदा उत्साह है वा कभी-कभी है ?

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00:28:51.660 --> 00:29:14.259
जो समझते हैं कि सदा उत्साह में रहते हैं , खुशी में रहते हैं ,

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00:29:14.259 --> 00:29:47.400
खुशी हमारे जीवन का विशेष परमात्म गिफ्ट है , ऐसे अनुभव होता है ?

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00:29:54.859 --> 00:30:36.859
कुछ भी हो जाए लेकिन ब्राह्मण जीवन की खुशी , उत्साह , उमंग जा नहीं सकता ।

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00:30:46.400 --> 00:31:26.730
बापदादा हर बच्चे का चेहरा सदा खुशनुमः देखने चाहते हैं

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00:31:28.730 --> 00:31:54.200
क्योंकि आप जैसा खुशनसीब न कोई बना है , न बन सकता है ।

38
00:32:02.460 --> 00:32:41.599
भिन्न-भिन्न वर्ग वाले बैठे हो तो ऐसा अनुभवी मूर्त बनने का स्व प्रति प्लैन बनाया है ?

39
00:32:43.599 --> 00:33:00.329
बापदादा खुश होते हैं , आज फलाना वर्ग , फलाना वर्ग आये हैं , वेलकम ।

40
00:33:00.930 --> 00:33:05.730
मुबारक हो आये हैं ।

41
00:33:05.730 --> 00:33:17.059
सेवा का उमंग उत्साह अच्छा है ।

42
00:33:20.730 --> 00:33:39.730
लेकिन पहले स्व का प्लैन ,

43
00:33:51.059 --> 00:34:14.400
बापदादा ने देखा है प्लैन्स सभी वर्ग वाले एक दो से आगे बनाते हैं और बहुत अच्छे बनाते हैं ,

44
00:34:35.659 --> 00:35:11.860
साथ-साथ स्व उन्नति का प्लैन बनाना बहुत आवश्यक है ।

45
00:35:15.860 --> 00:35:51.659
बापदादा यही चाहते हैं हर वर्ग स्व-उन्नति के प्रैक्टिकल प्लैन बनाये और नम्बर लेवे ।

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00:35:59.000 --> 00:36:08.599
जैसे संगठन में इकट्ठे होते हो ,

47
00:36:08.599 --> 00:36:31.929
चाहे फॉरेन वाले , चाहे देश वाले मीटिंग करते हो , प्लैन बनाते हो ,

48
00:36:35.530 --> 00:36:55.130
बापदादा उसमें भी राजी है लेकिन जैसे उमंग-उत्साह से संगठित रूप में सेवा का प्लैन बनाते हो

49
00:36:58.400 --> 00:37:34.460
ऐसे ही इतने ही उमंग-उत्साह सेस्व-उन्नति का नम्बर और अटेन्शन देके बनाना है ।

50
00:37:39.800 --> 00:38:08.199
बापदादा सुनने चाहते हैं कि इस मास में इस वर्ग वालों ने स्व-उन्नति का प्लैन प्रैक्टिकल में लाया है ?

51
00:38:08.199 --> 00:38:15.130
जो भी वर्ग वाले आये हैं वह हाथ उठाओ ।

52
00:38:15.130 --> 00:38:18.130
सब वर्ग वाले ।

53
00:38:18.130 --> 00:38:24.599
अच्छा इतने आये हैं , बहुत आये हैं ।

54
00:38:24.599 --> 00:38:29.730
सुना है 5-6 वर्ग आये हैं ।

55
00:38:31.730 --> 00:38:36.800
बहुत अच्छा भले आये ।

56
00:38:44.730 --> 00:38:58.000
अभी एक लास्ट टर्न रहा हुआ है ,

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00:39:00.000 --> 00:39:13.860
बापदादा ने होम वर्क तो दे ही दिया था ।

58
00:39:16.599 --> 00:39:32.260
बापदादा तो रोज रिजल्ट देखते हैं , आप समझेंगे बापदादा हिसाब लेगा लास्ट टर्न में ,

59
00:39:34.260 --> 00:39:59.130
लेकिन बापदादा रोज देखते हैं , अभी भी और 15 दिन हैं ।

60
00:40:03.659 --> 00:42:39.800
इस 15 दिन में हर वर्ग वाले जो आये हैं वह भी,जो नहीं भी आये हैं उन वर्ग के निमित्त बने हुए बच्चों को बापदादा यही इशारा देते हैं कि हर वर्ग अपने स्व-उन्नति का कोई भी प्लैन बनाओ, कोई विशेष शक्तिस्वरूप बनने का वा विशेष कोई गुणमूर्त बनने का वा विश्व कल्याण प्रति कोई न कोई लाइट-माइट देने का हर एक वर्ग आपस में निश्चित करो और फिर चेक करो कि जो भी वर्ग के मेम्बर हैं,मेम्बर बने बहुत अच्छा किया है लेकिन हर मेम्बर नम्बरवन होना चाहिए।

61
00:42:41.000 --> 00:42:59.260
सिर्फ नाम नोट हो गया फलाने वर्ग के मेम्बर हैं नहीं , फलाने वर्ग के स्व उन्नति के मेम्बर हैं ।

62
00:43:02.530 --> 00:43:10.530
यह हो सकता है जो वर्ग के निमित्त हैं वह उठो ।

63
00:43:10.530 --> 00:43:26.400
हाँ जो भी वर्ग हैं जो निमित्त हैं , निमित्त वाले उठो ।

64
00:43:26.730 --> 00:43:29.929
फॉरेन वाले भी उठो ।

65
00:43:29.929 --> 00:43:35.800
फॉरेन में जो निमित्त हैं वह उठो ।

66
00:43:37.800 --> 00:43:46.730
फॉरने वाले जो 4-5 निमित्त हैं वह उठो ।

67
00:43:54.199 --> 00:44:07.659
बापदादा को तो सभी बहुत शक्तिशाली मूर्तें लगती हैं ।

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00:44:07.659 --> 00:44:14.199
बहुत अच्छी मूर्तें हैं ।

69
00:44:23.260 --> 00:44:32.400
तो आप सभी समझते हो 15 दिन में कुछ करके दिखायेंगे ।

70
00:44:32.800 --> 00:44:35.860
हो सकता है ?

71
00:44:36.860 --> 00:44:43.530
बोलो , हो सकता है ?

72
00:44:54.860 --> 00:45:19.059
( पूरा पुरूषार्थ करेंगे ) और बोलो , क्या हो सकता है ?

73
00:45:23.260 --> 00:46:08.059
( प्रशासक वर्ग ने प्लैन बनाया है कि कोई भी गुस्सा नहीं करेंगे ) उनकी इन्क्वायरी भी करते हो ?

74
00:46:08.860 --> 00:46:21.530
आप बहनें ( टीचर्स से ) हिम्मत रखते हैं - 15 दिन में इन्क्वायरी करके रिजल्ट बता सकते हैं ।

75
00:46:21.530 --> 00:46:29.260
फॉरेन वाले तो हाँ कर रहे हैं ।

76
00:46:32.199 --> 00:46:40.130
आप क्या समझती हो , हो सकता है ?

77
00:46:44.599 --> 00:46:49.260
भारत वाले बताओ हो सकता है ।

78
00:47:00.599 --> 00:47:18.659
बापदादा को तो आप सभी की सूरतें देख लगता है कि रिजल्ट अच्छी है ।

79
00:47:19.400 --> 00:47:46.059
लेकिन अगर 15 दिन भी अटेन्शन रखने का पुरूषार्थ करेंगे तो यह अभ्यास आगे भी काम में आयेगा ।

80
00:47:47.059 --> 00:48:18.329
अभी ऐसे मीटिंग करना जो जिसको लक्ष्य लेना हो किसी भी गुण का , किसी भी शक्ति रूप का , इसमें बापदादा नम्बर देंगे ।

81
00:48:18.329 --> 00:48:23.530
बापदादा तो देखते रहते हैं ।

82
00:48:32.329 --> 00:48:43.000
नम्बरवन वर्ग स्व सेवा में कौन-कौन हैं?

83
00:48:46.199 --> 00:49:15.800
क्योंकि बापदादा ने देखा

84
00:49:17.800 --> 00:49:26.329
कि प्लैन बहुत अच्छे बनते हैं

85
00:49:28.329 --> 00:49:51.929
लेकिन सेवा और स्व-उन्नति दोनों अगर साथ-साथ नहीं हैं

86
00:49:53.659 --> 00:50:14.199
तो सेवा के प्लैन में जितनी सफलता चाहिए , उतनी नहीं होती है ।

87
00:50:28.929 --> 00:51:02.059
इसलिए समय की समीपता को सामने देखते हुए सेवा और स्व-उन्नति को कम्बाइन्ड रखो ।

88
00:51:06.329 --> 00:51:16.130
सिर्फ स्व-उन्नति भी नहीं चाहिए , सेवा भी चाहिए

89
00:51:16.860 --> 00:51:34.199
लेकिन स्व-उन्नति की स्थिति से सेवा में सफलता अधिक होगी ।

90
00:51:44.599 --> 00:52:07.199
सेवा के या स्व-उन्नति के सफलता की निशानी है -

91
00:52:09.199 --> 00:52:34.059
स्वयं भी दोनों में स्वयं से भी सन्तुष्ट हो और जिनकी सेवा करते हैं ,

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00:52:34.059 --> 00:52:47.130
उन्हों को भी सेवा द्वारा सन्तुष्टता का अनुभव हो ।

93
00:52:52.460 --> 00:53:07.400
अगर स्व को वा जिनकी सेवा के निमित्त हैं

94
00:53:07.400 --> 00:53:18.329
उन्हों को सन्तुष्टता का अनुभव नहीं होता

95
00:53:22.860 --> 00:53:34.130
तो सफलता कम , मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है ।

96
00:53:45.730 --> 00:54:25.929
आप सभी जानते हो कि सेवा में वा स्व-उन्नति में सफलता सहज प्राप्त करने की गोल्डन चाबी कौन-सी है ?

97
00:54:37.659 --> 00:54:43.599
अनुभव तो सभी को है ।

98
00:54:44.929 --> 00:55:29.329
गोल्डन चाबी है - चलन चेहरे , सम्बन्ध सम्पर्क में निमित्त भाव , निमार्कणभाव , निर्मल वाणी ।

99
00:55:33.530 --> 00:55:52.130
जैसे ब्रह्मा बाप और जगदम्बा को देखा

100
00:55:57.599 --> 00:56:21.860
लेकिन अभी कहाँ-कहाँ सेवा की सफलता में परसेन्टेज होती है

101
00:56:25.800 --> 00:56:56.329
उसका कारण , जो चाहते हैं , जितना करते हैं , जितना प्लैन बनाते हैं , उसमें परसेन्टेज क्यों हो जाती है ?

102
00:56:59.659 --> 00:57:12.260
बापदादा ने मैजारिटी में कारण देखा है

103
00:57:13.130 --> 00:57:32.199
कि सफलता में कमी का कारण है एक शब्द , वह कौन सा ?

104
00:57:32.199 --> 00:57:38.000
मैं ।

105
00:57:41.400 --> 00:57:54.460
मैं शब्द तीन प्रकार से यूज होता है ।

106
00:57:55.929 --> 00:58:09.460
देही-अभिमानी में भी मैं आत्मा हूँ , मैं शब्द आता है ।

107
00:58:09.460 --> 00:58:25.059
देह-अभिमान में भी मैं जो कहता हूँ , करता हूँ वह ठीक है ,

108
00:58:27.059 --> 00:58:46.800
मैं बुद्धिवान हूँ , यह हद की मैं , मैं देह अभिमान में भी मैं आता है

109
00:58:47.929 --> 00:58:59.599
और तीसरी मैं जब कोई दिलशिकस्त हो जाता है तो भी मैं आता है ।

110
00:59:00.599 --> 00:59:10.000
मैं यह करनहीं सकता , मेरे में हिम्मत नहीं ।

111
00:59:10.460 --> 00:59:20.059
मैं यह सुन नहीं सकता , मैं यह समा नहीं सकता …

112
00:59:21.730 --> 00:59:38.929
तो बापदादा तीनों प्रकार के मैं , मैं के गीत बहुत सुनते रहते हैं ।

113
00:59:43.860 --> 00:59:56.730
ब्रह्मा बाप ने , जगत अम्बा ने जो नम्बर लिया

114
00:59:58.329 --> 01:00:19.929
उसकी विशेषता यही रही - उल्टे मैं पन का अभाव रहा , अविद्या रही ।

115
01:00:20.599 --> 01:00:35.730
कभी ब्रह्मा बाप ने यह नहीं कहा मैं राय देता हूँ , मैं राइट हूँ ,

116
01:00:36.400 --> 01:00:45.599
बाबा , बाबा … बाबा करा रहा है , मैं नहीं करता ।

117
01:00:45.929 --> 01:00:53.929
मैं नहीं होशियार हूँ , बच्चे होशियार हैं ।

118
01:00:57.400 --> 01:01:11.530
जगत अम्बा का भी स्लोगन था याद है , पुरानों को याद होगा ।

119
01:01:11.530 --> 01:01:24.329
जगत अम्बा यही कहती हुक्मी हुक्म चलाए रहा ।

120
01:01:25.400 --> 01:01:36.659
मैं नहीं , चलाने वाला बाप चला रहा है ।

121
01:01:36.659 --> 01:01:44.860
करावनहार बाप करा रहा है ।

122
01:01:54.329 --> 01:02:16.860
तो पहले सभी अपने अन्दर से यह अभिमान और अपमान की मैं को समाप्त कर आगे बढ़ो ।

123
01:02:17.929 --> 01:02:29.860
नेचुरल हर बात में बाबा बाबा निकले ।

124
01:02:34.659 --> 01:03:02.860
नेचुरल निकले क्योंकि बाप समान बनने का संकल्प तो सभी ने लिया ही है ।

125
01:03:02.860 --> 01:03:19.000
तो समान बनने में सिर्फ इस एक रॉयल मैं को जला दो ।

126
01:03:19.659 --> 01:03:30.130
अच्छा क्रोध भी नहीं करेंगे । क्रोध क्यों आता है ? मैं पन आता है ।

127
01:03:40.059 --> 01:03:52.130
तो होली मनाने आये हो , होली मनाने आये हो ना ?

128
01:03:52.130 --> 01:03:55.929
तो पहले होली कौन सी मनाते हैं ?

129
01:03:55.929 --> 01:04:01.599
जलाने की ।

130
01:04:05.460 --> 01:04:14.730
वैसे बहुत अच्छे हो , बहुत योग्य हो ।

131
01:04:18.000 --> 01:04:32.329
बाप की आशाओं के दीपक हो , सिर्फ यह थोड़ा सा मैं को कट कर दो ।

132
01:04:36.260 --> 01:04:44.130
दो मैं कट करो , एक मैं रखो ।

133
01:04:58.400 --> 01:05:01.329
क्यों ?

134
01:05:02.329 --> 01:05:52.059
बापदादा देख रहे हैं , आपके ही अनेक भाई बहिनें , ब्राह्मण नहीं अज्ञानी आत्मायें , अपनी जीवन से हिम्मत हार चुकी हैं ।

135
01:05:59.460 --> 01:06:13.860
अभी उन्हों को हिम्मत के पंख लगाने पड़ेंगे ।

136
01:06:26.599 --> 01:06:39.000
बिल्कुल बेसहारे हो गये हैं , नाउम्मीद हो गये हैं ।

137
01:06:47.059 --> 01:07:20.059
तो हे रहमदिल , कृपा दया करने वाले विश्व की आत्माओं के इष्ट देव आत्मायें

138
01:07:32.199 --> 01:08:11.530
अपनी शुभ भावना , रहम की भावना , आत्म भावना द्वारा उन्हों की भावना पूर्ण करो ।

139
01:08:34.000 --> 01:08:44.130
आपको वायब्रेशन नहीं आता दुःख , अशान्ति का ।

140
01:08:47.859 --> 01:09:19.260
निमित्त आत्मायें हो , पूर्वज हो , पूज्य हो , वृक्ष के तना हो , फाउण्डेशन हो ।

141
01:09:29.260 --> 01:09:44.199
सब आपको ढूँढ रहे हैं , कहाँ गये हमारे रक्षक ।

142
01:09:49.859 --> 01:09:59.000
कहाँ गये हमारे इष्ट देव ।

143
01:10:04.659 --> 01:10:13.800
बाप को तो बहुत पुकारें सुनने आती हैं ।

144
01:10:35.329 --> 01:11:02.529
अब स्व-उन्नति द्वारा भिन्न-भिन्न शक्तियों की सकाश दो ।

145
01:11:05.659 --> 01:11:13.000
हिम्मत के पंख लगाओ ।

146
01:11:23.130 --> 01:11:33.399
अपने दृष्टि द्वारा , दृष्टि ही आपकी पिचकारी है ,

147
01:11:33.930 --> 01:11:58.930
तो अपनी दृष्टि की पिचकारी द्वारा सुख का रंग लगाओ , शान्ति का रंग लगाओ ,

148
01:12:01.800 --> 01:12:11.399
प्रेम का रंग लगाओ , आनंद का रंग लगाओ ।

149
01:12:27.859 --> 01:12:41.859
आप तो परमात्म संग के रंग में आ गये ।

150
01:12:54.060 --> 01:13:22.000
और आत्माओं को भी थोड़ा सा आध्यात्मिक रंग का अनुभव कराओ ।

151
01:13:29.930 --> 01:13:42.260
परमात्म मिलन का , मंगल मेले का अनुभव कराओ ।

152
01:14:01.130 --> 01:14:21.060
भटकती हुई आत्माओं को ठिकाने की राह बताओ ।

153
01:14:44.460 --> 01:15:14.859
तो स्व-उन्नति के प्लैन बनायेंगे , इसमें स्वयं के चेकर बनकर चेक करना ,

154
01:15:14.859 --> 01:15:39.130
यह रॉयल मैं तो नहीं आ रही है क्योंकि आज होली मनाने आये हो ।

155
01:15:39.130 --> 01:15:50.460
तो बापदादा यही संकल्प देते हैं

156
01:15:52.460 --> 01:16:13.399
तो आज देह-अभिमान और अपमान की जो मैं आती है ,

157
01:16:16.199 --> 01:16:31.399
दिलशिकस्त की मैं आती है , इसको जलाके ही जाना , साथ नहीं ले जाना ।

158
01:16:35.659 --> 01:16:38.659
कुछ तो जलायेंगे ना ।

159
01:16:38.659 --> 01:16:42.460
आग जलायेंगे क्या !

160
01:16:44.460 --> 01:16:52.199
ज्वालामुखी योग अग्नि जलाओ ।

161
01:16:59.659 --> 01:17:02.600
जलाने आती है ?

162
01:17:02.600 --> 01:17:07.859
हाँ ज्वालामुखी योग , आता है ?

163
01:17:07.859 --> 01:17:13.529
कि साधारण योग आता है ?

164
01:17:17.399 --> 01:17:22.460
ज्वालामुखी बनो ।

165
01:17:28.000 --> 01:17:34.859
लाइट माइट हाउस ।

166
01:17:42.460 --> 01:17:47.130
तो यह पसन्द है ?

167
01:17:48.460 --> 01:17:58.859
अटेन्शन प्लीज , मैं को जलाओ ।

168
01:18:11.130 --> 01:18:29.930
बापदादा जब मैं-मैं का गीत सुनता है ना तो स्विच बन्द कर देता है ।

169
01:18:40.329 --> 01:18:49.800
वाह ! वाह ! के गीत होते हैं तो आवाज बड़ा कर देते हैं ।

170
01:19:06.130 --> 01:19:14.859
क्योंकि मैं-मैं में खिंचावट बहुत होती है ।

171
01:19:23.859 --> 01:19:35.399
हर बात में खिंचावट करेंगे , यह नहीं , यह नहीं , ऐसा नहीं , वैसा नहीं ।

172
01:19:36.329 --> 01:19:47.729
तो खिंचावट होने के कारण तनाव पैदा हो जाता है ।

173
01:19:56.329 --> 01:20:16.729
बापदादा को लगाव , तनाव और स्वभाव , उल्टा स्वभाव ।

174
01:20:16.729 --> 01:20:23.260
वास्तव में स्वभाव शब्द बहुत अच्छा है ।

175
01:20:23.260 --> 01:20:29.130
स्वभाव , स्व का भाव ।

176
01:20:29.130 --> 01:20:36.859
लेकिन उसको उल्टा कर दिया है ।

177
01:20:46.329 --> 01:20:56.529
न बात की खिंचावट में करो , न अपने तरफ कोई को खिंचाओ ।

178
01:20:56.529 --> 01:21:03.600
वह भी बहुत परेशानी करता है ।

179
01:21:04.529 --> 01:21:12.800
कोई कितना भी आपको कहे , लेकिन अपने तरफ नहीं खींचो ।

180
01:21:12.800 --> 01:21:21.659
न बात को खीचों , न अपने तरफ खींचो , खिंचावट खत्म ।

181
01:21:25.659 --> 01:21:32.600
बाबा , बाबा और बाबा ।

182
01:21:40.529 --> 01:21:44.130
पसन्द है ना !

183
01:21:44.130 --> 01:21:59.260
तीन बातें या एक मैं को छोड़कर जाना यहाँ , साथ नहीं लेके जाना , ट्रेन में बोझ हो जायेगा ।

184
01:22:10.060 --> 01:22:16.729
आपका गीत है ना - मैं बाबा की , बाबा मेरा ।

185
01:22:16.729 --> 01:22:20.399
है ना ।

186
01:22:20.399 --> 01:22:28.859
तो एक मैं रखो , दो मैं खत्म ।

187
01:22:53.329 --> 01:22:57.930
तो होली मना ली , जला दिया ।

188
01:22:57.930 --> 01:22:59.930
संकल्प में ।

189
01:22:59.930 --> 01:23:03.130
अभी तो संकल्प करेंगे ।

190
01:23:03.130 --> 01:23:07.199
संकल्प किया ?

191
01:23:07.199 --> 01:23:09.199
हाथ उठाओ ।

192
01:23:09.199 --> 01:23:16.729
किया या थोड़ा-थोड़ा रहेगा ।

193
01:23:16.729 --> 01:23:20.260
थोड़ा-थोड़ा छुट्टी देवें ।

194
01:23:20.260 --> 01:23:23.460
हाँथोड़े की छुट्टी दें ?

195
01:23:28.000 --> 01:23:37.529
जो समझते हैं थोड़े थोड़े की छुट्टी होनी चाहिए वह हाथ उठाओ ।

196
01:23:37.529 --> 01:23:46.060
थोड़ा तो रहेगा ना , नहीं रहेगा ?

197
01:23:46.060 --> 01:23:49.329
आप तो बहुत बहादुर हो ।

198
01:23:49.329 --> 01:23:53.399
मुबारक हो ।

199
01:24:02.000 --> 01:24:07.460
खुशी में नाचो , गाओ ।

200
01:24:07.460 --> 01:24:10.659
तनाव में नहीं ।

201
01:24:10.659 --> 01:24:16.329
खींचातान में नहीं ।

202
01:24:27.659 --> 01:24:30.329
अच्छा ।

203
01:24:30.329 --> 01:24:33.930
आज होली है ना ।

204
01:24:33.930 --> 01:24:41.000
इसीलिए बापदादा भी जलाने का कहता है ।

205
01:24:45.930 --> 01:24:51.399
अभी क्या करना है ?

206
01:25:17.460 --> 01:25:27.729
सेवा का टर्न राजस्थान का है , साथ में भोपाल वाले भी सहयोगी हैं :-

207
01:25:49.130 --> 01:26:06.859
बापदादा को एक बात की खुशी है कि जिस जोन का टर्न होता है , वह जी भरके आ जाते हैं ।

208
01:26:18.800 --> 01:26:21.260
अच्छा है ।

209
01:26:21.260 --> 01:26:33.260
चांस मिलता है और चांस लेना यह बहुत अच्छी बात है ।

210
01:26:35.260 --> 01:26:54.529
एकस्ट्रा सेवा और याद का वायुमण्डल , मदद मिलती है ।

211
01:26:56.529 --> 01:27:17.199
अपने जीवन की कहानी में यह दिन विशेष प्राप्ति के सदा याद रखना ।

212
01:27:21.260 --> 01:27:36.729
मधुबन में जितने भी दिन रहे , कोई विघ्न आया ?

213
01:27:37.000 --> 01:27:42.329
जिसको कोई विघ्न आया हो वह हाथ उठाओ ।

214
01:27:42.329 --> 01:27:46.399
मातायें भी ।

215
01:27:50.800 --> 01:28:01.859
अगर नहीं आया तो जमा खाता कितना किया ?

216
01:28:02.859 --> 01:28:15.130
विघ्न नहीं आया इसकी मुबारक हो लेकिन आपको जमा का चांस मिला ।

217
01:28:15.130 --> 01:28:19.859
गोल्डन चांस ।

218
01:28:19.859 --> 01:28:27.399
कितना ज़मा किया , वह चेक किया ?

219
01:28:27.399 --> 01:28:34.329
एकस्ट्रा कमाई जमा हुई ?

220
01:28:34.329 --> 01:28:44.600
जिसकी हुई वह हाथ उठाओ ।

221
01:28:46.600 --> 01:28:51.130
जमा हुई ?

222
01:29:01.399 --> 01:29:19.399
अब यह दिन गोल्डन दिन जमा के दिन सदा अपने जीवन में विशेष यादगार रखना ।

223
01:29:19.399 --> 01:29:32.729
कभी भी कोई विघ्न आयेभी तो यह दिन याद करना ।

224
01:29:37.800 --> 01:29:46.800
बिना ट्रेन के टिकेट के ( बुद्धि द्वारा ) मधुबन में पहुँच जाना ।

225
01:30:02.329 --> 01:30:16.800
क्योंकि यहाँ बापदादा के कर्म का वायुमण्डल है ।

226
01:30:18.800 --> 01:30:23.859
कैच करना आपका काम है ।

227
01:30:23.859 --> 01:30:49.930
लेकिन मधुबन अर्थात् बापदादा के कर्म के किरणों का वायुमण्डल है ।

228
01:30:57.000 --> 01:31:06.130
इतने बड़े-बड़े महारथी है , जो एडवांस पार्टी में भी गये हैं ,

229
01:31:06.130 --> 01:31:22.060
उन्हों के भी कर्म की रेखायें मधुबन में वायुमण्डल के रूप में हैं ।

230
01:31:29.000 --> 01:31:41.199
इसलिए गोल्डन चांसलर बने हो ।

231
01:31:41.199 --> 01:31:49.399
चांसलर नहीं , गोल्डन चांसलर बने हो ।

232
01:31:57.859 --> 01:32:07.800
कमाल तो करनी ही है ना राजस्थान को भी ।

233
01:32:18.529 --> 01:32:36.600
राजस्थान की आत्मा ने कमाल की है लेकिन आबू के वायुमण्डल ने कमाल की ।

234
01:32:36.600 --> 01:32:47.000
ज्ञान सरोवर के निमित्त राजस्थान का गवर्नर बना ।

235
01:32:47.000 --> 01:33:00.000
था राजस्थान का लेकिन वायुमण्डल मधुबन का लगा ।

236
01:33:02.000 --> 01:33:12.399
फिर भी आधा लाभ तो राजस्थान को भी मिलेगा ।

237
01:33:18.399 --> 01:33:34.260
अब ऐसे सहयोगी निकालो जो स्वयं आफर करे सहयोग की ।

238
01:33:39.659 --> 01:33:50.199
क्योंकि राजस्थान से यहाँ आने के लिए कोई बहाना नहीं है ।

239
01:33:50.199 --> 01:34:22.130
कितना भी बड़ा वी आई पी हो अगर बड़ा वी आई पी है तो राजस्थान से प्लेन में भी आना मुश्किल नहीं , स्पेशल प्लेन ।

240
01:34:33.859 --> 01:34:36.729
अभी करके दिखाना ।

241
01:34:36.729 --> 01:34:44.800
टीचर्स तो बहुत हैं , बहुत अच्छी-अच्छी टीचर्स हैं ।

242
01:34:46.529 --> 01:34:53.930
बापदादा तो एक-एक की विशेषता देख रहे हैं ।

243
01:34:56.260 --> 01:35:13.130
अभी अपनी विशेषता से विशेष स्नेही सहयोगी यावारिस क्वालिटी निकालो ।

244
01:35:27.399 --> 01:35:43.659
जैसे दिल्ली वालों ने प्रेजीडेंट को सेवा में सहयोगी बनाया है ।

245
01:35:43.659 --> 01:35:54.529
समीप सहयोगीनहीं लेकिन सेवा में सहयोगी बनाया है ।

246
01:35:56.529 --> 01:36:11.329
उनकी दिल में यह है कि ब्रह्माकुमारियाँ जो कार्य कर रही हैं वह बहुत अच्छा है ।

247
01:36:18.460 --> 01:36:29.399
लेकिन थोड़ा-थोड़ा सहयोगी बनाया है , अभी ज्यादा बनाओ ।

248
01:36:34.460 --> 01:37:02.399
ऐसे ही आन्ध्र प्रदेश का निमित्त बना , ऐसे कोई निमित्त बनाओ , किसी भी कार्य प्रति निमित्त बनाओ ।

249
01:37:12.729 --> 01:37:16.529
कोई बना है निमित्त ?

250
01:37:34.930 --> 01:37:37.260
अच्छा ।

251
01:37:37.260 --> 01:37:40.859
गोल्डन चांस को भूलना नहीं ।

252
01:37:40.859 --> 01:37:45.130
समय प्रति समय याद रखना ।

253
01:37:45.130 --> 01:37:50.529
चाहे भोपाल चाहे राजस्थान ।

254
01:37:55.399 --> 01:38:01.859
भोपाल वालों ने निमित्त बनाया है ?

255
01:38:11.130 --> 01:38:44.859
( आज मध्य प्रदेश का गवर्नर आया था ) आया बहुत अच्छा , लेकिन कोई कार्य में सहयोगी बने , या सहयोगी बनाओ या स्नेही बनाओ या वारिस बनाओ ।

256
01:38:44.859 --> 01:38:50.729
तीनों में से कुछ बनाओ ।

257
01:38:54.729 --> 01:39:01.859
सभी को बापदादा कहते हैं , सब जोन को ।

258
01:39:03.260 --> 01:39:07.460
जो भी आगे आवे ।

259
01:39:11.659 --> 01:39:20.260
अभी वारिस की लिस्ट नहीं आई है ।

260
01:39:28.859 --> 01:39:38.859
स्नेहियों की लिस्ट आती है वारिस की लिस्ट नहीं आई है ।

261
01:39:48.399 --> 01:39:53.800
अच्छा ।

262
01:39:57.399 --> 01:41:04.600
1000 डबल विदेशी 60 देशों से आये हैं :- डबल विदेशी मधुबन के श्रृंगार हो ।

263
01:41:14.000 --> 01:41:39.260
बापदादा देख करके खुश होते हैं कि अनेक देश , अनेक भाषायें , अनेक कल्चर अभी क्या हो गया ?

264
01:41:39.260 --> 01:41:44.199
एक ब्राह्मण कल्चर ।

265
01:41:44.199 --> 01:41:47.659
पसन्द है ?

266
01:41:47.659 --> 01:41:51.460
ब्राह्मण कल्चर पसन्द है ?

267
01:41:53.460 --> 01:41:57.529
कि थोड़ा मुश्किल लगता है ?

268
01:41:57.529 --> 01:42:02.199
मुश्किल नहीं लगता ?

269
01:42:09.930 --> 01:42:37.930
जब स्थापना हुई , बोर्डिंग की तो ब्रह्मा बाप कहते थे सभी को मिलाकर एक चंदन का वृक्ष बनाना है ।

270
01:42:40.329 --> 01:43:00.600
तो सब तरफ के विदेशी अभी ब्राह्मण वृक्ष का एक पत्ता बन गये हैं ।

271
01:43:01.800 --> 01:43:16.460
सेवा अर्थ भिन्न-भिन्न देश में हो लेकिन कहाँ के हो ?

272
01:43:16.460 --> 01:43:23.399
परमानेंट एड्रेस कौन सी है ?

273
01:43:23.399 --> 01:43:28.329
मधुबन , पक्का ?

274
01:43:43.800 --> 01:43:46.659
अच्छे हैं ।

275
01:43:46.659 --> 01:44:11.329
बापदादा ने समाचार सुना कि कैसे स्व के प्रतिभी और सेवा के प्रति भी भिन्न-भिन्न ग्रुप बना करके पुरूषार्थ अच्छा किया है ।

276
01:44:13.329 --> 01:44:17.130
यह कुमारों का ग्रुप है ।

277
01:44:27.729 --> 01:44:42.460
माताओं की भी रिट्रीट चल रही है ना ।

278
01:44:47.529 --> 01:44:51.729
आई टी ग्रुप वाले हाथ उठाओ ।

279
01:44:57.600 --> 01:45:07.329
समाचार सुना है बापदादा ने हिम्मत बहुत अच्छी रखी है ।

280
01:45:07.329 --> 01:45:15.199
सब अपने हैं , सब अपना है ।

281
01:45:17.199 --> 01:45:22.199
यह हिम्मत बहुत अच्छी रखी है ।

282
01:45:24.199 --> 01:45:46.930
अभी बापदादा देखेंगे कि यह आई टी ग्रुप अपने साधनों द्वारा प्रत्यक्षता का झण्डा कहाँ-कहाँ लहराते हैं ।

283
01:45:48.930 --> 01:45:58.060
और शिवशक्तियाँ मातायें क्या कमाल दिखाती हैं ।

284
01:45:58.399 --> 01:46:05.260
कुमार क्या जलवा दिखाते हैं ।

285
01:46:05.260 --> 01:46:07.260
अच्छा है ।

286
01:46:11.329 --> 01:46:26.659
सभी अलग अलग ग्रुप में पुरूषार्थ की अच्छी-अच्छी बातें निकालते हो ,

287
01:46:26.659 --> 01:46:47.199
सिर्फ बापदादा एक शब्द को अण्डरलाइन करने चाहता हैं , वह है दृढ़ रहना ।

288
01:46:47.199 --> 01:46:51.130
दृढ़ पुरूषार्थी रहना ।

289
01:46:51.130 --> 01:46:54.529
ढीला नहीं करना ।

290
01:46:55.060 --> 01:47:07.130
कितना भी कोई हिलावे हिलना नहीं , अचल रहना , अडोल रहना ।

291
01:47:08.060 --> 01:47:21.859
दृढ़ता ब्राह्मण जीवन का हिम्मत का हाथ है ।

292
01:47:23.859 --> 01:47:33.529
और जहाँ हिम्मत है वहाँ सफलता हैही है ।

293
01:47:39.260 --> 01:47:45.800
बहुत अच्छी रौनक लग जाती है मधुबन में ।

294
01:47:50.859 --> 01:48:02.329
कोई सुनते भी हैं ना तो अच्छा लगता है ना उन्हों कोकि यह विश्व कल्याणकारी हैं ।

295
01:48:02.329 --> 01:48:09.060
सिर्फ भारत कल्याणकारी नहीं हैं ।

296
01:48:11.060 --> 01:48:17.260
इसलिए मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

297
01:48:50.260 --> 01:49:13.399
6 विंग्स आई हैं ( ग्राम विकास , स्पोर्ट , ट्रांसपोर्ट , महिला , प्रशासक , स्पार्क ग्रुप ) विंग्स को काम दे दिया , अभी 15 दिन के बाद फिर देखेंगे ।

298
01:49:44.060 --> 01:50:01.329
अच्छा बच्चे भी आये हैं , ( 5 विकारों की मल्लयुद्ध दिखाई है ) अच्छा ।

299
01:54:03.060 --> 01:54:11.060
स्पोर्ट विंग है ।

300
01:54:25.859 --> 01:54:33.529
माया के खेल को तो जान गये हो ना ।

301
01:54:33.529 --> 01:54:40.060
उसमें तो बहादुर हो ना ।

302
01:54:40.060 --> 01:54:46.000
खेल वाले हमेशा बहादुर होते हैं ।

303
01:54:46.000 --> 01:54:52.260
तो मायाजीत में भी बहादुर हो ना ।

304
01:54:52.260 --> 01:54:58.529
कभी हार खाना नहीं है ।

305
01:54:58.529 --> 01:55:05.000
बापदादा के गले का हार बनना है ।

306
01:55:05.000 --> 01:55:09.729
हार नहीं खाना है ।

307
01:55:12.529 --> 01:55:16.130
ऐसे पक्के हो ना ।

308
01:55:16.130 --> 01:55:18.130
बहादुर हो ?

309
01:55:18.130 --> 01:55:24.930
बहादुर हैं वाह !

310
01:55:25.930 --> 01:55:29.329
बहुत अच्छा ।

311
01:55:34.130 --> 01:55:36.859
अच्छा ।

312
01:55:43.199 --> 01:55:51.000
तो मायाजीत का भी सिखाती हो ना अच्छा ।

313
01:55:51.399 --> 01:55:55.260
बैठ जाओ ।

314
01:56:23.659 --> 01:56:27.930
अच्छा ।

315
01:56:28.600 --> 01:56:33.659
अब क्या करेंगे ?

316
01:56:43.800 --> 01:57:27.529
अभी एक सेकण्ड में अपने मन से सब संकल्प समाप्त कर

317
01:57:34.000 --> 01:58:27.260
एक सेकण्ड में बाप के साथ परमधाम में ऊँचे ते ऊँचे स्थान ,

318
01:58:27.260 --> 01:58:59.060
ऊँचे ते ऊँचा बाप , उनके साथ ऊँची स्थिति में बैठ जाओ ।

319
01:59:07.000 --> 01:59:51.529
और बाप समान मास्टरसर्वशक्तिवान बन विश्व की आत्माओं को शक्तियों की किरणें दो ।

320
02:02:25.460 --> 02:02:31.930
अच्छा ।

321
02:02:31.930 --> 02:03:01.260
चारों ओर के होलीएस्ट , हाइएस्ट बच्चों को

322
02:03:03.260 --> 02:04:04.199
सर्व विश्वकल्याणकारी विशेष आत्माओं का , सर्व पूवर्ज और पूज्य आत्माओं को ,

323
02:04:10.329 --> 02:04:35.000
सर्व बाप के दिलतख्तनशीन बच्चों को

324
02:04:40.260 --> 02:05:28.859
बापदादा का यादप्यार और दिल की दुआयें सहित , दिल की दुलार और नमस्ते ।

325
02:05:30.859 --> 02:06:24.399
दूर-दूर से आये हुए पत्र , कार्ड ईमेल , कम्प्युटर द्वारा सन्देश बापदादा को मिले और बापदादा उन बच्चों को सम्मुख देख पदमगुणा यादप्यार दे रहे हैं ।

326
02:06:26.659 --> 02:06:32.060
होली की मुबारक दे रहे हैं ।

327
02:06:34.060 --> 02:06:38.329
अच्छा ।

