WEBVTT

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00:15:39.399 --> 00:16:41.200
आज सर्व खज़ानों के मालिक बापदादा अपने चारों ओर के सर्व खज़ाने सम्पन्न बच्चों को देख रहे हैं ।

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00:16:50.460 --> 00:17:44.059
बापदादा ने हर एक बच्चे को सर्व खज़ाने का मालिक बनाया है ।

3
00:17:46.059 --> 00:18:18.059
एक ही देने वाला और सर्व को एक जैसे सर्व खज़ाने दिये हैं ।

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00:18:20.059 --> 00:18:28.859
किसको कम , किसको ज्यादा नहीं दिये हैं ।

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00:18:33.259 --> 00:18:38.130
क्यों ?

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00:18:42.000 --> 00:18:56.730
बाप अखुट खज़ाने के मालिक हैं ।

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00:19:01.000 --> 00:19:47.400
बेहद का खज़ाना है इसलिए हर एक बच्चा अखुट खज़ाने का मालिक है ।

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00:20:03.259 --> 00:20:41.529
बापदादा ने सर्व बच्चों को एक जितना एक जैसा दिया है ।

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00:20:44.460 --> 00:21:22.329
लेकिन धारण करने वाले कोई सर्व खज़ाने धारण करने वाले हैं

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00:21:22.329 --> 00:21:40.259
और कोई यथा शक्ति धारण करने वाले हैं ।

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00:21:48.859 --> 00:22:03.329
कोई नम्बरवन हैं और कोई नम्बरवार हैं।

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00:22:15.259 --> 00:22:34.460
जिन्होंने जितना भी धारण किया है

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00:22:42.859 --> 00:23:19.599
उन्हों के चेहरे से , नयनों से खज़ानों का नशा स्पष्ट दिखाई देता है ।

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00:23:28.000 --> 00:24:17.259
खज़ाने से भरपूर आत्मा चेहरे से , नयनों से भरपूर दिखाई देती है ।

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00:24:23.799 --> 00:24:41.799
जैसे स्थूल खज़ाना प्राप्त करने वाली आत्मा के

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00:24:50.059 --> 00:25:04.059
चलन से , चेहरे से मालूम पड़ जाता है ,

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00:25:06.059 --> 00:25:38.329
तो यह अविनाशी खज़ानों का नशा , खुशी स्पष्ट दिखाई देती है ।

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00:25:59.259 --> 00:26:28.000
सम्पन्नता का फखुर बेफिकर बादशाह बना देती है ।

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00:26:32.000 --> 00:27:07.059
जहाँ ईश्वरीय फखुर है वहाँ फिकर हो नहीं सकता , बेफिकर बादशाह , बेगमपुर के बादशाह बन जाते हैं ।

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00:27:18.059 --> 00:27:55.599
तो आप सभी ईश्वरीय सम्पन्नता के खज़ाने वाले बेफिकर बादशाह हो ना !

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00:28:02.599 --> 00:28:09.930
बेगमपुर के बादशाह हो ।

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00:28:11.930 --> 00:28:14.859
कोई फिकर है क्या ?

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00:28:14.859 --> 00:28:21.130
कोई गम है ?

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00:28:34.259 --> 00:28:48.329
क्या होगा , कैसा होगा इसका भी फिकर नहीं ।

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00:28:50.329 --> 00:29:11.730
त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित रहने वाले जानते हो

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00:29:13.730 --> 00:29:36.460
जो हो रहा है वह सब अच्छा , जो होने वाला है वह और अच्छा ।

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00:29:47.000 --> 00:29:51.400
क्यों ?

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00:30:06.200 --> 00:30:27.660
सर्वशक्तिवान बाप के साथी हो , साथ रहने वाले हो ।

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00:30:37.130 --> 00:30:50.460
हर एक को नशा है , फखुर है

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00:30:52.460 --> 00:31:27.930
कि बापदादा सदा हमारे दिल में रहते हैं और हम सदा बाप के दिलतख्त पर रहते हैं ।

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00:31:37.529 --> 00:31:44.329
तो ऐसा नशा है ना !

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00:31:46.329 --> 00:32:30.329
जो दिलतख्त नशीन हैं उसके संकल्प तो क्या स्वप्न में भी दुःख की लहर , लैस भी नहीं आ सकती उसमें ।

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00:32:45.660 --> 00:32:49.400
क्यों ?

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00:32:49.400 --> 00:33:16.130
सर्व खज़ानों से भरपूर हो , जो भरपूर चीज़ होती है उसमें हलचल नहीं होगी ।

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00:33:25.730 --> 00:33:58.599
तो चारों ओर के बच्चों की सम्पन्नता देख रहे थे ,

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00:34:08.059 --> 00:34:23.130
हर एक का बापदादा ने जमा का खाता चेक किया ।

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00:34:34.059 --> 00:34:43.130
खज़ाना तो अखुट मिला है

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00:34:45.130 --> 00:35:33.400
लेकिन जो मिला है उस खज़ाने को कार्य में लगाते खत्म किया है

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00:35:48.599 --> 00:36:14.000
वा मिले हुए खज़ाने को कार्य में भी लगाया है लेकिन और ही बढ़ाया है ?

40
00:36:21.329 --> 00:36:42.460
कितनी परसेन्ट में हर एक के खाते में जमा है ?

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00:36:45.730 --> 00:36:59.329
क्योंकि यह खज़ाना सिर्फ अब इस समय के लिए नहीं है ,

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00:37:01.329 --> 00:37:19.199
यह खज़ाना भविष्य में भी साथ में चलना है ।

43
00:37:22.800 --> 00:37:34.130
जमा हुआ ही साथ जायेगा ।

44
00:37:49.530 --> 00:37:55.929
तो परसेन्टेज देख रहे थे ।

45
00:38:00.059 --> 00:38:07.599
क्या देखा ?

46
00:38:18.400 --> 00:38:56.329
सेवा तो सभी बच्चे यथा योग वा यथा शक्ति कर रहे हैं

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00:39:03.460 --> 00:39:55.800
लेकिन सेवा का फल जमा होना उसमें अन्तर हो जाता है ।

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00:40:02.460 --> 00:40:27.460
कई बच्चों का जमा खाता देखा , सेवा बहुत करते

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00:40:36.329 --> 00:41:00.599
लेकिन सेवा करने का फल जमा हुआ या नहीं ,

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00:41:02.599 --> 00:41:09.800
उसकी निशानी है -

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00:41:11.800 --> 00:41:53.329
अगर सेवा करने वाली आत्मा चाहे मन्सा , चाहे वाचा , चाहे कर्मणा तीनों में 100 परसेन्ट मार्क होती हैं ।

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00:41:53.329 --> 00:42:00.059
तीनों में 100 हैं ।

53
00:42:06.059 --> 00:42:58.059
सेवा तो की लेकिन अगर सेवा करने के समय वा सेवा के बाद स्वयं अपने मन में , अपने से सन्तुष्ट हैं

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00:43:01.130 --> 00:43:24.730
और साथ में जिनकी सेवा की , जो सेवा में साथी बनते हैं

55
00:43:26.730 --> 00:43:51.000
वा सेवा करने वाले को देखते हैं , सुनते हैं वह भी सन्तुष्ट हैं तो समझो जमा हुआ ।

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00:43:53.000 --> 00:44:10.929
स्व की सन्तुष्टता , सर्व की सन्तुष्टता नहीं है

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00:44:16.000 --> 00:44:24.199
तो परसेन्टेज जमा का कम हो जाता है ।

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00:44:37.929 --> 00:44:59.059
यथार्थ सेवा की विधि पहले भी बताई है

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00:45:01.059 --> 00:45:17.400
तीन बातें विधि पूर्वक हैं तो जमा है ,

60
00:45:21.199 --> 00:46:11.000
वह सुनाया है - एक निमित्त भाव , दूसरा निर्माण भावना , तीसरा निर्मल स्वभाव , निर्मल वाणी ।

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00:46:17.260 --> 00:46:59.329
भाव , भावना और स्वभाव , बोल अगर यह तीन बातों से एक बात भी कम है ,

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00:46:59.329 --> 00:47:14.329
एक है दो नहीं है , दो हैं एक नहीं है

63
00:47:14.329 --> 00:47:29.730
तो वह कमज़ोरी जमा की परसेन्टेज कम कर देती है ।

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00:47:44.460 --> 00:48:01.000
तो चार ही सबजेक्ट में अपने आप चेक करो -

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00:48:17.929 --> 00:48:50.929
क्या चार ही सबजेक्ट में हमारा खाता जमा हुआ है ?

66
00:49:15.730 --> 00:49:43.130
क्यों ? बापदादा ने देखा कि कईयों की चार बातें जो सुनाई , भाव , भावना …

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00:49:50.000 --> 00:50:24.860
उस प्रमाण कई बच्चों का सेवा समाचार बहुत है लेकिन जमा का खाता कम है ।

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00:50:45.659 --> 00:50:55.929
हर खज़ाने को चेक करो -

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00:51:03.460 --> 00:52:04.000
ज्ञान का खज़ाना अर्थात् जो भी संकल्प , कर्म किया वह नॉलेजफुल हो करके किया ?

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00:52:19.929 --> 00:52:28.199
साधारण तो नहीं हुआ ?

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00:52:36.130 --> 00:52:47.929
योग अर्थात् सर्व शक्ति का खज़ाना भरपूर हो ।

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00:52:49.929 --> 00:53:14.000
तो चेक करो हर दिन की दिनचर्या में समय प्रमाण

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00:53:16.000 --> 00:53:47.199
जिस शक्ति की आवश्यकता है , उसी समय वह शक्ति आर्डर में रही ?

74
00:53:51.530 --> 00:54:03.260
मास्टर सर्वशक्तिवान का अर्थ ही है मालिक ।

75
00:54:06.460 --> 00:54:41.260
ऐसे तो नहीं समय बीतने के बाद शक्ति का सोचते ही रह जायें ।

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00:54:48.530 --> 00:55:05.000
अगर समय पर आर्डर पर शक्ति इमर्ज नहीं होती ,

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00:55:07.000 --> 00:55:17.260
जब एक शक्ति को आर्डर में नहीं चला सकते

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00:55:23.059 --> 00:55:37.800
तो निर्विघ्न राज्य के अधिकारी कैसे बनेंगे ?

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00:55:51.800 --> 00:55:57.000
तो शक्तियों का खज़ाना कितना जमा है ?

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00:55:57.000 --> 00:56:08.460
जो समय पर कार्य में लगाते हैं , वह जमा होता है ।

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00:56:25.800 --> 00:56:30.260
चेक करते जा रहे हो ?

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00:56:30.260 --> 00:56:35.530
मेरा खाता क्या है ?

83
00:56:39.659 --> 00:57:00.400
क्योंकि बापदादा को सभी बच्चों से अति प्यार है ,

84
00:57:03.599 --> 00:57:33.929
बापदादा यही चाहते हैं कि सभी बच्चों का जमा का खाता भरपूर हो ।

85
00:57:47.400 --> 00:58:22.929
धारणा में भी , धारणा की निशानी है हर कर्म , गुण सम्पन्न होगा ।

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00:58:33.260 --> 00:58:56.400
जिस समय जिस गुण की आवश्यकता है

87
00:58:58.400 --> 00:59:28.329
वह गुण चेहरे , चलन में इमर्ज दिखाई दे ।

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00:59:48.659 --> 01:00:23.260
अगर कोई भी गुण की कमी है , मानों सरलता के गुण की कर्म के समय आवश्यकता है ,

89
01:00:25.260 --> 01:00:42.659
मधुरता की आवश्यकता है , चाहे बोल में , चाहे कर्म में

90
01:00:44.659 --> 01:01:15.059
अगर सरलता , मधुरता के बजाए थोड़ा भी आवेशता या थकावट के कारण मधुर नहीं है ,

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01:01:15.659 --> 01:01:32.400
बोल मधुर नहीं है , चेहरा मधुर नहीं है , सीरियस है

92
01:01:42.059 --> 01:01:49.199
तो गुण सम्पन्न तो नहीं कहेंगे ना ।

93
01:01:51.199 --> 01:02:22.000
कैसे भी सरकामस्टॉन्स हो लेकिन मेरा जो गुण है , वह मेरा गुण इमर्ज होना चाहिए ।

94
01:02:36.460 --> 01:02:42.059
अभी शार्ट में सुना रहे हैं ।

95
01:02:42.059 --> 01:03:23.400
ऐसे ही सेवा - सेवा में सबसे अच्छी निशानी सेवाधारी की है -

96
01:03:23.400 --> 01:03:38.929
स्वयं भी सदा हल्का , लाइट और खुशनुमा दिखाई दे ।

97
01:03:40.929 --> 01:03:48.130
सेवा का फल है खुशी ।

98
01:03:50.130 --> 01:04:01.130
अगर सेवा करते खुशी गायब हो जाती है तो सेवा का खाता जमा नहीं होता ।

99
01:04:02.059 --> 01:04:11.599
सेवा की , समय लगाया , मेहनत की

100
01:04:12.599 --> 01:04:21.530
तो थोड़ी परसेन्टेज में वह जमा होगा , फालतू नहीं जायेगा ।

101
01:04:22.460 --> 01:04:32.860
लेकिन जितनी परसेन्टेज में जमा होना चाहिए उतना नहीं होता ।

102
01:04:38.460 --> 01:05:06.599
ऐसे ही सम्बन्ध-सम्पर्क की निशानी - दुआओं की प्राप्ति हो ।

103
01:05:15.130 --> 01:05:35.659
जिसके भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आये उनके मन से आपके प्रति दुआयें निकलें - बहुत अच्छा ।

104
01:05:37.659 --> 01:06:06.199
बाहर से नहीं , दिल से , दिल से दुआयें निकले और दुआयें अगर प्राप्त हैं ,

105
01:06:11.059 --> 01:06:28.800
तो दुआयें मिलना यह बहुत सहज पुरूषार्थ का साधन है ।

106
01:06:28.800 --> 01:06:32.000
भाषण नहीं करो ।

107
01:06:32.000 --> 01:06:41.199
चलो मन्सा सेवा भी इतनी पावरफुल नहीं है ।

108
01:06:45.599 --> 01:06:55.000
कोई नये-नये प्लैन नहीं बनाने आते हैं , कोई हर्जा नहीं ।

109
01:06:57.000 --> 01:07:13.929
सबसे सहज पुरूषार्थ का साधन है दुआयें लो , दुआयें दो ।

110
01:07:17.260 --> 01:07:32.329
ऐसे कई बच्चों के बापदादा मन के संकल्प रीड करते हैं ।

111
01:07:34.329 --> 01:07:51.659
कई बच्चे समय अनुसार , सरकामस्टॉन्स अनुसार कहते हैं

112
01:07:55.530 --> 01:08:08.599
कि अगर कोई खराब काम करता है तो उसको दुआयें कैसे दें ?

113
01:08:11.800 --> 01:08:18.260
उस पर तो क्रोध आता है ना , दुआयें कैसे देंगे ?

114
01:08:18.260 --> 01:08:27.600
चलो क्रोध के बाल-बच्चे भी तो बहुत हैं ।

115
01:08:29.600 --> 01:08:44.460
लेकिन उसने खराब काम किया , वह खराब है

116
01:08:45.800 --> 01:08:59.260
आपने ठीक समझा कि यह खराब है । यह अच्छा है निर्णय तो अच्छा किया , समझा अच्छा

117
01:08:59.260 --> 01:09:29.329
लेकिन एक होता है समझना , दूसरा होता है उनके खराब काम , खराब बातों को अपने दिल में समाना ।

118
01:09:29.329 --> 01:09:36.729
समझना और समाना फर्क है ।

119
01:09:36.729 --> 01:09:54.859
अगर आप समझदार हो , क्या समझदार कोई खराब चीज़ अपने पास रखेगा !

120
01:09:56.859 --> 01:10:16.529
लेकिन वह खराब है , आपने दिल में समाया अर्थात् आपने खराब चीज़ अपने पास रखी , सम्भाली ।

121
01:10:17.930 --> 01:10:27.800
समझना अलग चीज़ है , समाना अलग चीज़ है ।

122
01:10:32.460 --> 01:10:40.859
समझदार बनना तो ठीक है , बनो लेकिन समाओ नहीं ।

123
01:10:42.859 --> 01:10:50.460
यह तो है ही ऐसा , यह समा लिया ।

124
01:10:53.000 --> 01:11:12.600
ऐसे समझ करके व्यवहार में आना , यह समझदारी नहीं है ।

125
01:11:18.460 --> 01:11:29.800
तो बापदादा ने चेक किया ,

126
01:11:37.260 --> 01:11:51.399
अभी समय समीप आना नहीं है , आपको लाना है ।

127
01:11:51.399 --> 01:12:09.729
कई पूछते हैं थोड़ा सा इशारा तो दे दो ना - 10 साल लगेंगे , 20 साल लगेंगे , कितना समय लगेगा !

128
01:12:11.729 --> 01:12:27.399
तो बाप बच्चों से प्रश्न करता है , बाप से तो प्रश्न बहुत करते हैं ना ,

129
01:12:27.399 --> 01:12:48.000
तो आज बाप बच्चों से प्रश्न करता है समय को समीप लाने वाले कौन ?

130
01:12:50.000 --> 01:13:00.859
ड्रामा है लेकिन निमित्त कौन ?

131
01:13:02.859 --> 01:13:11.329
आपका एक गीत भी है , किसके रोके रूका है सवेरा ।

132
01:13:11.329 --> 01:13:15.529
है ना गीत ?

133
01:13:16.729 --> 01:13:22.859
तो सवेरा लाने वाला कौन ?

134
01:13:24.060 --> 01:13:49.930
विनाशकारी तो तड़प रहे हैं कि विनाश करें , विनाश करें … लेकिन नव निर्माण करने वाले इतना रेडी हैं ?

135
01:13:56.329 --> 01:14:07.930
क्या पुराना खत्म हो जाए , नया निर्माण हो नहीं तो क्या होगा ?

136
01:14:19.460 --> 01:14:32.659
इसलिए बापदादा ने अभी बाप के बजाए टीचर का रूप धारण किया है ।

137
01:14:39.399 --> 01:14:42.729
होमवर्क दिया है ना ?

138
01:14:42.729 --> 01:14:47.460
कौन होमवर्क देता है ? टीचर ।

139
01:14:49.460 --> 01:14:56.600
लास्ट में है सतगुरू का पार्ट ।

140
01:15:05.800 --> 01:15:27.529
तो अपने आपसे पूछो सम्पन्न और सम्पूर्ण स्टेज कहाँ तक बनी है ?

141
01:15:43.329 --> 01:16:07.529
क्या आवाज से परे वा आवाज में आना , दोनों ही समान हैं ?

142
01:16:11.130 --> 01:16:25.800
जैसे आवाज में आना जब चाहो सहज है ,

143
01:16:25.800 --> 01:16:46.199
ऐसे ही आवाज से परे हो जाना जब चाहे , जैसे चाहे वैसे है ?

144
01:16:50.130 --> 01:17:12.060
सेकण्ड में आवाज में आ सकते हैं , सेकण्ड में आवाज से परे इतनी प्रैक्टिस है ?

145
01:17:18.130 --> 01:17:36.529
जैसे शरीर द्वारा जब चाहो , जहाँ चाहो वहाँ आ-जा सकते हो ना ।

146
01:17:38.529 --> 01:17:59.859
ऐसे मन बुद्धि द्वारा जब चाहो जहाँ चाहो वहाँ आ-जा सकते हो ?

147
01:18:07.130 --> 01:18:40.329
क्योंकि अन्त में पास मार्क्स उसको मिलेगी जो सेकण्ड में जो चाहे जैसा चाहे , जो आर्डर करना चाहे उसमें सफल हो जाए ।

148
01:18:41.060 --> 01:18:49.930
साइन्स वाले भी यही प्रयत्न कर रहे हैं ,

149
01:18:49.930 --> 01:19:06.199
सहज भी हो और समय भी कम में हो ।

150
01:19:08.199 --> 01:19:13.930
तो ऐसी स्थिति है ?

151
01:19:13.930 --> 01:19:28.130
क्या मिनटों तक आये हैं , सेकण्ड तक आये हैं , कहाँ तक पहुंचे हैं ?

152
01:19:38.329 --> 01:20:00.260
जैसे लाइट हाउस माइट हाउस सेकण्ड में ऑन करो और अपनी लाइट फैलाते हैं ,

153
01:20:02.260 --> 01:20:22.529
ऐसे आप सेकण्ड में लाइट हाउस बन चारों ओर लाइट फैला सकते हो ?

154
01:20:30.199 --> 01:20:43.600
यह स्थूल ऑख एक स्थान पर बैठे दूर तक देख सकती है ना !

155
01:20:43.600 --> 01:20:49.130
फैला सकती है ना अपनी दृष्टि !

156
01:20:49.130 --> 01:21:20.399
ऐसे आप तीसरे नेत्र द्वारा एक स्थान पर बैठे चारों ओर वरदाता , विधाता बन नजर से निहाल कर सकते हो ?

157
01:21:27.859 --> 01:21:36.060
चेक कर रहे हो अपने को सब बातों में ?

158
01:21:43.600 --> 01:21:59.329
इतना तीसरा नेत्र क्लीन और क्लीयर है ?

159
01:22:12.199 --> 01:22:44.930
अगर थोड़ी भी कमज़ोरी है , सभी बातों में तो कारण पहले ही सुनाया है ।

160
01:22:49.060 --> 01:23:24.399
यह हद का लगाव मैं और मेरा , जैसे मैं के लिए स्पष्ट किया था - होमवर्क भी दिया था ।

161
01:23:24.399 --> 01:23:33.130
दो मैं को समाप्त कर एक मैं रखनी है ।

162
01:23:33.130 --> 01:23:37.659
सभी ने यह होमवर्क किया ?

163
01:23:39.659 --> 01:23:48.529
जो सफल हुए , इस होमवर्क में , वह हाथ उठाओ ।

164
01:23:48.529 --> 01:24:00.930
सफल हुए , बापदादा ने सबको देखा है ।

165
01:24:03.399 --> 01:24:06.659
हिम्मत रखो ऐसी , डरो नहीं ।

166
01:24:06.659 --> 01:24:11.600
अच्छा है मुबारक मिलेगी ।

167
01:24:11.600 --> 01:24:19.260
बहुत थोड़े हैं ।

168
01:24:21.260 --> 01:24:30.199
किया है तो हाथ उठाओ ।

169
01:24:36.329 --> 01:24:45.800
यह टी वी में हाथ दिखाओ ।

170
01:24:54.000 --> 01:25:01.130
पीछे भी दिखाओ ।

171
01:25:08.659 --> 01:25:16.659
बहुत थोड़े ने हाथ उठाया है ।

172
01:25:16.659 --> 01:25:20.729
अभी क्या करें ?

173
01:25:41.859 --> 01:25:50.399
सभी को अपने ऊपर हँसी भी आ रही है ।

174
01:25:58.000 --> 01:26:08.930
अच्छा - दूसरा होमवर्क था , क्रोध को छोड़ना है , यह तो सहज है ना !

175
01:26:08.930 --> 01:26:20.000
तो क्रोध को किसने छोड़ा , क्रोध नहीं किया इतने दिनों में ?

176
01:26:25.659 --> 01:26:35.000
( इसमें बहुतों ने हाथ उठाया ) इसमें थोड़े ज्यादा हैं ।

177
01:26:41.800 --> 01:26:55.399
जिन्होंने क्रोध नहीं किया , आपके आस पास रहने वालों से भी पूछेंगे ।

178
01:27:03.000 --> 01:27:07.659
बहुत हैं ।

179
01:27:09.659 --> 01:27:12.600
क्रोध नहीं किया है ?

180
01:27:12.600 --> 01:27:22.000
संकल्प में , मन में क्रोध आया ?

181
01:27:25.930 --> 01:27:38.130
चलो , फिर भी मुबारक हो , अगर मन में आया मुख से नहीं किया तो भी मुबारक है ।

182
01:27:38.130 --> 01:27:44.000
बहुत अच्छा ।

183
01:28:34.329 --> 01:29:08.529
तो आप ही देखो रिजल्ट के हिसाब से क्या स्थापना का कार्य , स्व को सम्पन्न बनाना और सर्व आत्माओं को

184
01:29:09.600 --> 01:29:25.399
मुक्ति का वर्सा दिलाना , यह सम्पन्न हुआ है ?

185
01:29:27.399 --> 01:29:54.000
स्वयं को जीवनमुक्ति स्वरूप बनाना और सर्व आत्माओं को मुक्ति का वर्सा दिलाना -

186
01:29:55.130 --> 01:30:15.529
यह है स्थापना कर्ता आत्माओं का श्रेष्ठ कर्म ।

187
01:30:21.800 --> 01:30:52.329
तो बापदादा इसीलिए पूछता है कि सर्व बन्धनों से मुक्त , जीवनमुक्त की स्टेज पर संगम पर ही पहुंचना है वा सतयुग में पहुंचना है ?

188
01:30:54.329 --> 01:31:11.600
संगमयुग में सम्पन्न होना है या वहाँ भी राजयोग करके सीखना है ?

189
01:31:13.600 --> 01:31:18.600
सम्पन्न तो यहाँ बनना है ना ?

190
01:31:18.600 --> 01:31:24.460
सम्पूर्ण भी यहाँ ही बनना है ।

191
01:31:26.460 --> 01:31:38.060
संगमयुग के समय का भी सबसे बड़े ते बड़ा खज़ाना है ।

192
01:31:50.130 --> 01:31:57.529
तो किसके रोके रूका है सवेरा ? बताओ ।

193
01:32:09.000 --> 01:32:15.329
तो बापदादा क्या चाहते हैं ?

194
01:32:15.329 --> 01:32:29.659
क्योंकि बाप की आशाओं का दीपक बच्चे ही हैं ।

195
01:32:40.930 --> 01:32:48.859
तो अपना खाता चेक करो अच्छी तरह से ।

196
01:32:48.859 --> 01:33:03.130
कई बच्चों को तो देखा कई बच्चे तो मौजीराम हैं , मौज में चल रहे हैं ।

197
01:33:05.130 --> 01:33:10.529
जो हुआ सो अच्छा ।

198
01:33:11.529 --> 01:33:14.460
अभी तो मौज मना लो ।

199
01:33:14.460 --> 01:33:23.000
सतयुग में कौन देखता , कौन जानता ।

200
01:33:29.800 --> 01:33:45.329
तो जमा के खाते में ऐसे मौजीलाल कहो , मौजीराम कहो , ऐसे भी बच्चे देखे ।

201
01:33:49.399 --> 01:33:52.460
मौज कर लो ।

202
01:33:52.460 --> 01:33:58.460
दूसरों को भी कहते अरे क्या करना है , मौज करो ।

203
01:33:58.460 --> 01:34:04.529
खाओ , पिओ मौज करो ।

204
01:34:10.130 --> 01:34:15.329
कर लो मौज , बाप भी कहते कर लो ।

205
01:34:15.329 --> 01:34:27.199
अगर थोड़े में राजी रहने वाले हो तो थोड़े में राजी हो जाओ ।

206
01:34:29.199 --> 01:34:41.930
विनाशी साधनों की मौज अल्पकाल की होती है ।

207
01:34:43.930 --> 01:35:09.260
सदाकाल की मौज को छोड़ अगर अल्पकाल के साधन की मौज में रहना चाहते हैं तो बापदादा क्या कहेगा ?

208
01:35:12.460 --> 01:35:20.000
इशारा देगा और क्या करेगा ?

209
01:35:22.000 --> 01:35:47.930
कोई हीरों की खान पर जाये और दो हीरे लेकर खुश हो जाए उसको क्या कहेंगे ?

210
01:35:51.529 --> 01:35:56.199
तो ऐसे नहीं बनना ।

211
01:36:01.529 --> 01:36:14.600
अतीन्द्रिय सुख के मौज के झूले में झूलो ।

212
01:36:16.600 --> 01:36:28.529
अविनाशी प्राप्तियों के झूले की मौज में झूलो ।

213
01:36:32.859 --> 01:36:44.199
ड्रामा में देखो , माया का पार्ट भी विचित्र है ।

214
01:36:46.199 --> 01:37:03.800
इसी समय ऐसे ऐसे साधन निकले हैं , जो पहले थे ही नहीं ।

215
01:37:17.659 --> 01:37:39.000
लेकिन बिना साधन के भी जिन्होंने साधना की , सेवा की वह भी तो एक्जैम्पुल सामने हैं ना !

216
01:37:45.930 --> 01:37:51.060
क्या यह साधन थे ?

217
01:37:53.060 --> 01:37:59.460
लेकिन सेवा कितनी हुई ?

218
01:38:01.460 --> 01:38:06.600
क्वालिटी तो निकली ना !

219
01:38:11.000 --> 01:38:16.800
आदि रत्न तो तैयार हो गये ना !

220
01:38:22.859 --> 01:38:30.659
यह साधनों की आकर्षण है ।

221
01:38:43.800 --> 01:38:53.199
साधनों को यूज करना रांग नहीं कहते हैं

222
01:38:53.199 --> 01:39:08.460
लेकिन साधना को भूल साधन में लग जाना , इसको बापदादा रांग कहते हैं ।

223
01:39:18.199 --> 01:39:32.130
साधन जीवन के उड़ती कला का साधन नहीं है , आधार नहीं है ।

224
01:39:34.130 --> 01:39:38.199
साधना आधार है ।

225
01:39:38.930 --> 01:39:53.800
अगर साधना के बजाए साधनों को आधार बनाया तो रिजल्ट क्या होगी ?

226
01:39:55.260 --> 01:40:03.000
साधन विनाशी हैं , रिजल्ट क्या ?

227
01:40:04.060 --> 01:40:14.000
साधना अविनाशी है , उसकी रिजल्ट क्या होगी ?

228
01:40:32.000 --> 01:40:42.659
तो बापदादा बच्चों से प्रश्न पूछता है -

229
01:40:48.130 --> 01:41:12.000
कब तक हर एक स्वयं को सम्पन्न और सम्पूर्ण बनायेंगे ?

230
01:41:14.000 --> 01:41:25.130
दूसरे को नहीं देखो , यह अलबेलापन आ जाता है ।

231
01:41:25.130 --> 01:41:33.859
दूसरे भी करते हैं , मैंने किया तो क्या हुआ !

232
01:41:34.659 --> 01:41:39.260
यह अलबेलापन है ।

233
01:41:44.399 --> 01:41:55.800
मुझे स्व को सम्पन्न बनाना है ।

234
01:42:03.930 --> 01:42:11.399
अब इसके लिए कितना टाइम चाहिए ?

235
01:42:16.399 --> 01:42:24.729
इसका भी हिसाब रखें या नहीं ?

236
01:42:31.000 --> 01:42:47.000
संगठन है , बाप जानते हैं , संगठन में बहुत कुछ सुनना भी पड़ता है ,

237
01:42:47.000 --> 01:43:09.000
देखना भी पड़ता है , बहुत कुछ चलने में भी सामने बातें आती हैं , लेकिन यह तो आयेंगी ।

238
01:43:09.800 --> 01:43:19.460
बातें खत्म हों तो सम्पन्न बनें , वह होना नहीं है ।

239
01:43:24.529 --> 01:43:39.260
जितना आगे बढ़ेंगे , रूप जरूर चेंज होगा लेकिन बातें तो आयेंगी ।

240
01:43:40.600 --> 01:43:47.930
लास्ट पेपर में ही देखो कितनी बातें हैं ।

241
01:43:54.659 --> 01:44:05.930
बातें दिखाई न दें , बाबा दिखाई दे ।

242
01:44:06.859 --> 01:44:15.529
बाबा ने क्या कहा , बातें क्या करती हैं , बातें क्या कहती हैं , नहीं ।

243
01:44:15.529 --> 01:44:20.800
बाबा ने क्या कहा ।

244
01:44:22.800 --> 01:44:28.130
बाबा को फॉलो करना है ।

245
01:44:38.729 --> 01:44:48.529
फॉलो बातें करना है , या फॉलो फादर करना है ?

246
01:45:00.859 --> 01:45:10.060
और बापदादा अभी यह देखने चाहते हैं ,

247
01:45:10.060 --> 01:46:04.199
अगर वतन में स्विच ऑन करें तो सब बच्चे चाहे देश में , चाहे विदेश में , चाहे गांवों में , चाहे बड़े शहरों में सब बच्चे सम्पन्न रूप में राजा बच्चे दिखाई दें ।

248
01:46:08.460 --> 01:46:31.529
अभी बाप की हर एक बच्चे में यही श्रेष्ठ आशा है ।

249
01:46:35.060 --> 01:46:47.529
तो आप सभी बाप के आशा के दीपक बनेंगे ?

250
01:46:47.529 --> 01:46:50.600
बनेंगे ?

251
01:46:50.600 --> 01:46:52.600
हाथ उठाओ ।

252
01:46:52.600 --> 01:46:55.199
ऐसे नहीं हाथ उठाओ ।

253
01:46:55.199 --> 01:47:03.000
फाइल में पत्र डाल दें हाँ का , नहीं फाइनल ।

254
01:47:05.000 --> 01:47:12.130
सभी पूरी करेंगे ।

255
01:47:13.199 --> 01:47:17.659
अच्छा मुबारक हो ।

256
01:47:18.060 --> 01:47:22.460
जिसने नहीं उठाया वह उठाओ ।

257
01:47:23.859 --> 01:47:26.460
कोई है ?

258
01:47:26.460 --> 01:47:37.130
अच्छा इन्हों को टाइम चाहिए ?

259
01:47:37.130 --> 01:47:42.529
एक साल चाहिए ?

260
01:47:51.659 --> 01:47:55.000
तीव्र पुरूषार्थ करो ।

261
01:47:55.000 --> 01:48:04.729
करना ही है , होना ही है ।

262
01:48:09.000 --> 01:48:13.399
मैजारिटी ने तो उठाया है ।

263
01:48:13.399 --> 01:48:26.529
बापदादा को यह खुशी है और दिल की दुआयें दे रहे हैं , अब प्रैक्टिकल करके दिखाना ।

264
01:48:26.529 --> 01:48:31.659
फिर बापदादा आयेगा । अभी टीचर बनेगा ।

265
01:48:31.659 --> 01:48:37.260
ऐसे नहीं आयेगा ।

266
01:48:40.060 --> 01:48:44.460
अभी तो बीच में समय है ।

267
01:48:44.859 --> 01:49:00.329
जब पहला टर्न बापदादा आवे , पहला टर्न फॉरेन वालों को मिलता है , तो पहले फॉरेन वालों को तैयार होना पड़ेगा ।

268
01:49:02.329 --> 01:49:04.729
रेडी ।

269
01:49:04.729 --> 01:49:09.460
फॉरेन वाले तैयार हो जायेंगे ?

270
01:49:11.460 --> 01:49:22.930
अगर फॉरेन तैयार नहीं होगा तो पहला टर्न इन्डिया को देंगे ।

271
01:49:47.130 --> 01:49:55.529
पहले मधुबन वालों को तैयार होना पड़ेगा

272
01:49:58.329 --> 01:50:12.800
क्योंकि बापदादा को मधुबन में ही आना है ना और तो कहाँ भी जाते नहीं ।

273
01:50:18.460 --> 01:50:32.060
बापदादा को फॉरेन वालों पर फेथ है , ऐसे नहीं इन्डिया वालों पर नहीं है ।

274
01:50:32.060 --> 01:50:39.859
लेकिन फॉरेन का पहला टर्न होता है तो फॉरेन वाले बनकर ही दिखायेंगे ।

275
01:50:39.859 --> 01:50:42.859
ठीक है ना !

276
01:50:42.859 --> 01:51:04.600
आप बोलो , फॉरेन के लिए ( दादी जानकी से ) साकार में तो निमित्त आपको बनना पड़ेगा ।

277
01:51:08.060 --> 01:51:16.460
अभी तो टाइम है , 5-6 मास है ।

278
01:51:20.000 --> 01:51:54.460
नहीं तो फिर ऐसा करेंगे , राय बताओ कि जो सच्ची दिल से लिखते हैं , बापदादा तो देखता है ना , बापदादा के पास भी दिखाई देता है , कि थोड़ा मिक्स है ।

279
01:51:56.460 --> 01:52:08.260
तो जो लिखेंगे एवररेडी, उन्हों से बापदादा मिलेंगे, औरों से नहीं।

280
01:52:08.260 --> 01:52:13.729
चाहे मधुबन में हो चाहे कहाँ भी हो ।

281
01:52:17.600 --> 01:52:19.930
ठीक है ?

282
01:52:22.000 --> 01:52:26.930
मधुबन वाले ठीक है ?

283
01:52:32.199 --> 01:52:36.800
डबल फॉरेनर्स तो एवररेडी होंगे ना!

284
01:52:40.930 --> 01:52:48.659
बापदादा सबका सम्पन्न स्वरूप देखेगा।एवररेडी होंगे?

285
01:52:51.329 --> 01:52:53.659
ठीक है ?

286
01:53:04.460 --> 01:53:10.060
मैजारटी ने तो हाथ उठाया है ।

287
01:53:12.060 --> 01:53:15.930
मुबारक हो ।

288
01:53:17.930 --> 01:53:25.329
सभी को मुबारक एडवांस में दे रहे हैं ।

289
01:53:30.859 --> 01:53:49.000
फिर सभी एक दो को मुबारक देंगे , वाह ! सम्पूर्ण वाह ! वाह ! सम्पन्न वाह !

290
01:53:51.000 --> 01:53:56.060
क्योंकि बहुत दुःख बढ़ रहा है ,

291
01:53:56.859 --> 01:54:04.060
आप आवाज नहीं सुनते हो ना , बापदादा सुनता है ।

292
01:54:07.199 --> 01:54:21.800
बिल्कुल हिम्मतहीन , दिलशिकस्त हो गये हैं ।

293
01:54:40.060 --> 01:55:04.460
मन्सा सेवा से , जैसे साइन्स वाले अपने जगह पर रहते हुए जहाँ अपना यन्त्र भेजने चाहें वहाँ भेज सकते हैं ,

294
01:55:05.199 --> 01:55:11.460
ऐसे आप मन्सा सेवा को बढ़ाओ ।

295
01:55:13.060 --> 01:55:30.659
वाचा तो करनी है लेकिन सारी विश्व की आत्माओं को वर्सा दिलाना ,

296
01:55:31.729 --> 01:55:43.130
दुःख से छुड़ाना , उसके लिए आपको सम्पन्न बनना पड़ेगा ।

297
01:55:45.130 --> 01:56:02.729
और मन्सा सेवा चारों ओर फैलाओ तब विश्व का कल्याण होगा ।

298
01:56:13.729 --> 01:56:22.460
मन्सा सेवा कर सकते हो ?

299
01:56:22.460 --> 01:56:40.460
जिन्हों को मन्सा सेवा का अभ्यास है , चाहे थोड़ा है चाहे बहुत है लेकिन अभ्यास है , कर सकते हैं , वह हाथ उठाओ ।

300
01:56:46.130 --> 01:56:51.000
इसमें तो सब पास हैं ।

301
01:56:54.329 --> 01:57:14.859
इतनी आत्मायें अगर मन्सा सेवा से वायुमण्डल फैला सकते हो तो क्या बड़ी बात है !

302
01:57:16.859 --> 01:57:29.729
जितना मन्सा सेवा में बिजी रहेंगे उतना समस्याओं से मुक्त हो जायेंगे

303
01:57:31.729 --> 01:57:40.060
क्योंकि आपका मन बुद्धि बिजी रहेगी ।

304
01:57:41.060 --> 01:57:51.460
फ्री नहीं होगी तो माया आयेगी कहाँ , वापस चली जायेगी ।

305
01:57:53.460 --> 01:57:59.060
समस्या हिम्मत नहीं रख सकती ।

306
01:58:00.199 --> 01:58:04.199
तो मन्सा सेवा को बढ़ाओ ।

307
01:58:04.729 --> 01:58:08.060
समझा ।

308
01:58:08.529 --> 01:58:47.329
अच्छा । अभी एक मिनट के लिए सभी लाइट हाउस , माइट हाउस स्थिति द्वारा विश्व में अपनी लाइट माइट फैलाओ ।

309
02:01:31.399 --> 02:02:03.659
अच्छा - ऐसा अभ्यास समय प्रति समय कार्य में होते हुए भी करते रहो ।

310
02:02:05.659 --> 02:02:19.729
बापदादा ने सुना लण्डन के प्रोग्राम के लिए टॉपिक बहुत अच्छी रखी है ।

311
02:02:19.729 --> 02:03:44.329
सुनाओ सभी को ( जस्ट ए मिनट - एक मिनट में साइलेन्स का अनुभव , अपने परिवर्तन का अनुभव , विश्व के लिए ) अच्छी टॉपिक रखी है और ऐसा अभ्यास उस समय सब इन्डिया में वा फॉरेन में ब्राह्मण भी करेंगे ना !

312
02:03:45.329 --> 02:04:11.729
( यह विचार है सब जगह विश्वव्यापी यह प्रोग्राम हो ) अच्छा है , यह अभ्यास जरूरी है ।

313
02:04:12.800 --> 02:04:24.600
एक मिनट भी अगर यह चारों ओर वायुमण्डल बन जाए

314
02:04:26.600 --> 02:04:43.659
तो यह भी सभी को मालूम पड़ जायेगा कि ब्रह्माकुमारियां क्या चाहती हैं , क्या करती हैं ।

315
02:04:45.659 --> 02:04:50.659
यह भी फैलेगा अच्छा ।

316
02:04:50.659 --> 02:05:04.130
अगर चारों ओर यह साथ साथ हो जाए तो सेवा का साधन अच्छा है ।

317
02:05:08.130 --> 02:05:10.859
अच्छा ।

318
02:05:10.859 --> 02:05:16.329
आज टर्न किसका है ?

319
02:05:20.729 --> 02:05:59.800
सेवा का टर्न महाराष्ट्र , बम्बई और आंध्र प्रदेश :- जिसका टर्न होता है , आधा क्लास उन्हों का ही होता है ।

320
02:06:07.060 --> 02:07:00.199
अच्छा - महाराष्ट्र सदा महान स्थिति में रहने वाले और विश्व में जीवन की महानता प्रत्यक्ष करने वाले , अच्छा है , संख्या भी काफी है ।

321
02:07:06.000 --> 02:07:17.399
लेकिन अभी तक 9 लाख नहीं पूरे हुए हैं ना ।

322
02:07:17.399 --> 02:07:22.060
9 लाख पूरे हुए हैं ?

323
02:07:22.060 --> 02:07:26.529
नहीं हुए हैं ?

324
02:07:28.529 --> 02:08:31.729
तो महाराष्ट्र को जब संख्या भी इतनी है तो जब दूसरी सीजन में बापदादा आवे तो जितने भी आये हैं,कितनी संख्या है आने वालों की (महाराष्ट्र 5500 आये हैं), तो महाराष्ट्र सामने बैठे हो तो काम भी तो करेंगे ना।

325
02:08:31.729 --> 02:08:43.930
तो जितने आये हो दूसरी सीजन में एक-एक को एक तैयार करके लाना है ।

326
02:08:43.930 --> 02:08:54.130
अच्छा तैयार करना , क्योंकि 6 मास है , आपका नियम एक वर्ष का है ।

327
02:08:54.130 --> 02:09:02.729
तो 6 मास में इतना तैयार करो जो एक वर्ष जितना हो ।

328
02:09:13.260 --> 02:09:20.060
9 लाख तो पूरा करना चाहिए , कितने हैं ।

329
02:09:22.729 --> 02:09:26.460
टोटल संख्या कितनी है ?

330
02:09:29.600 --> 02:09:48.460
(8 लाख 12 हजार,) तो बाकी थोड़े ही चाहिए, तो ऐसे करो।

331
02:09:48.460 --> 02:09:53.800
अभी मीटिंग है ना ।

332
02:09:54.329 --> 02:10:11.800
हर जोन को अपने-अपने जोन के हिसाब से संख्या बांटना और बापदादा आवे

333
02:10:11.800 --> 02:10:23.930
तो यहाँ रूबरू भले नहीं आवें लेकिन तैयार करके आवे , वह लिस्ट लेके आवे ।

334
02:10:25.930 --> 02:10:32.260
तो यह होमवर्क ठीक है ?

335
02:10:32.260 --> 02:10:34.260
जोन वाले ?

336
02:10:34.260 --> 02:10:38.199
करेंगे जोन वाले ।

337
02:10:39.460 --> 02:10:44.199
अच्छा , 9 लाख तो पूरा करो ।

338
02:10:44.199 --> 02:10:47.930
क्या बड़ी बात है ।

339
02:10:47.930 --> 02:10:59.260
डबल फॉरेनर्स चाहे इन्डिया 9 लाख इस बारी पूरी करना ही है ।

340
02:11:00.600 --> 02:11:07.000
होना चाहिए ना कि अभी पीछे होना चाहिए ?

341
02:11:10.329 --> 02:11:23.260
मधुबन वाले भी करेंगे , आस पास सेवा तो करते हो ना , तैयार करके आना सब जोन ।

342
02:11:23.260 --> 02:11:28.729
यहाँ नहीं हैं तो भी सुनेंगे तो सही ।

343
02:11:28.729 --> 02:11:44.060
और मीटिंग में फाइनल करना , फिर अच्छा है , बापदादा को इतनी संख्या देख करके भी खुशी होती है ।

344
02:11:44.060 --> 02:11:49.529
( 9 लाख ब्राह्मण होंगे ना ।

345
02:11:49.529 --> 02:12:23.260
करोड़ों को सन्देश देना है ना ) वह प्रोग्राम तो करते हो ना !

346
02:12:23.260 --> 02:12:28.800
वह तो करना ही है ।

347
02:12:40.800 --> 02:12:52.399
लेकिन पहले स्व को सम्पन्न बनाना है साथ में यह सेवा करनी है ।

348
02:12:52.399 --> 02:12:56.130
वह तो हाथ उठाया है ना ।

349
02:12:56.130 --> 02:13:00.859
तैयार करेंगे ना !

350
02:13:04.000 --> 02:13:31.600
अभी धीरे-धीरे चलने का समय गया , अभी उड़ो , जब चाहो जहाँ चाहो सेवा में हाजिर हो जाओ ।

351
02:13:37.930 --> 02:13:40.859
अच्छा ।

352
02:13:40.859 --> 02:13:49.130
आप सभी भी तैयार करके आयेंगे ना , और ज्यादा नहीं एक-एक ।

353
02:13:50.329 --> 02:13:55.800
अगर ज्यादा करेंगे तो मुबारक हो ।

354
02:14:01.329 --> 02:14:11.859
अच्छा है महाराष्ट्र ने गोल्डन चांस लिया है ,

355
02:14:12.800 --> 02:14:38.329
स्वयं को सम्पूर्ण बनाने का , क्योंकि यहाँ का वायुमण्डल सहज ही अशरीरी बनने में मदद करता है ।

356
02:14:39.800 --> 02:14:53.399
तो जो भी जोन चांस लेता है , उसको यह गोल्डन प्राप्ति होती है ।

357
02:14:57.199 --> 02:15:08.199
कर्मणा का भी फल और वायुमण्डल में स्थिति का भी फल मिलता है ।

358
02:15:09.060 --> 02:15:13.800
डबल फल की प्राप्ति हो जाती है ।

359
02:15:18.199 --> 02:15:22.600
अच्छा है ।

360
02:15:22.600 --> 02:15:36.060
बापदादा को हर बच्चा एक दो से प्यारा लगता है ।

361
02:15:40.329 --> 02:15:54.659
कैसा भी बच्चा हो लेकिन परमात्म प्यार के पात्र तो बनता ही है ।

362
02:15:57.260 --> 02:16:08.000
और यह परमात्म प्यार सिर्फ अभी मिलता है ।

363
02:16:13.329 --> 02:16:26.000
प्यार तो सभी का बापदादा से 100 परसेन्ट है , या कम है ?

364
02:16:26.000 --> 02:16:33.659
जो समझते हैं प्यार में 100 परसेन्ट है , वह हाथ उठाओ ।

365
02:16:33.659 --> 02:16:41.659
100 परसेन्ट प्यार है ?

366
02:16:41.659 --> 02:16:52.000
तो प्यार में तो थोड़ा बहुत है वह कुर्बान करना सहज है ।

367
02:16:52.000 --> 02:16:56.600
मुबारक हो ।

368
02:16:58.600 --> 02:17:07.459
प्यार का प्रमाण है कुर्बान होना ।

369
02:17:09.459 --> 02:17:26.729
तो सपूत बच्चे हो ना , तो सपूत बच्चा वही है जो प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाता है ।

370
02:17:29.799 --> 02:17:43.799
बापदादा को बच्चों का प्यार तो पहुँचता है लेकिन शक्तिशाली स्थिति कम पहुंचती है ।

371
02:17:44.659 --> 02:17:55.129
प्यार में बापदादा भी अच्छी परसेन्ट देखते हैं

372
02:17:56.200 --> 02:18:12.000
लेकिन अभी शक्ति स्वरूप सम्पन्न स्वरूप में सबसे ज्यादा मार्क्स लेनी हैं ।

373
02:18:15.000 --> 02:18:19.729
तो महाराष्ट्र नम्बरवन जायेगा?

374
02:18:19.729 --> 02:18:23.329
जायेगा ?

375
02:18:23.329 --> 02:18:27.930
अच्छा है ।

376
02:18:34.260 --> 02:18:38.059
जो ओटे वह अर्जुन ।

377
02:18:38.059 --> 02:18:43.799
अर्जुन नम्बरवन।

378
02:18:49.000 --> 02:18:53.729
अच्छा ।

379
02:19:21.129 --> 02:19:51.059
चारों ओर के बच्चों के पुरूषार्थ और प्यार के समाचार पत्र बापदादा को मिले हैं ,

380
02:19:52.329 --> 02:20:25.129
बापदादा बच्चों का उमंग-उत्साह देख यह करेंगे , यह करेंगे , यह समाचार सुन खुश होते हैं ।

381
02:20:25.129 --> 02:20:54.530
अभी सिर्फ जो हिम्मत रखी है , उमंग-उत्साह रखा है , इसको बार-बार अटेन्शन दे प्रैक्टिकल में लाना ।

382
02:20:56.530 --> 02:21:27.399
यही सभी बच्चों के प्रति बापदादा के दिल की दुआयें हैं और सभी चारों ओर के संकल्प ,

383
02:21:28.860 --> 02:21:48.860
बोल और कर्म में , सम्बन्ध-सम्पर्क में सम्पन्न बनने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को

384
02:21:49.860 --> 02:22:11.930
सदा स्वदर्शन करने वाले , स्वदर्शन चक्रधारी बच्चों को ,

385
02:22:11.930 --> 02:22:46.930
सदा दृढ़ संकल्प द्वारा मायाजीत बन बाप के आगे स्वयं को प्रत्यक्ष करने वाले और विश्व के आगे बाप को प्रत्यक्ष करने वाले

386
02:22:47.459 --> 02:23:23.799
सर्विसएबुल , नॉलेजफुल , सक्सेसफुल बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिल से पदम-पदमगुणा दुआयें हो , नमस्ते हो ।

387
02:23:23.799 --> 02:23:29.799
नमस्ते ।

388
02:23:37.059 --> 02:23:54.200
दादियों से :- आपका भी लक्ष्य यही है ना कि जल्दी से जल्दी प्रत्यक्षता हो ।

389
02:23:58.459 --> 02:24:05.530
इसीलिए बापदादा होमवर्क देता है ।

390
02:24:15.530 --> 02:24:24.329
सतगुरू का पार्ट चलेगा तो समाप्ति हो जायेगी ।

391
02:24:30.000 --> 02:24:36.930
इसके लिए सबको तैयार कर रहे हैं ।

392
02:24:45.329 --> 02:25:00.729
( हमारे सामने तीनों हैं ) बापदादा को स्वरूप आफीशल धारण करना पड़ता है ।

393
02:25:02.729 --> 02:25:08.129
है तो सदा ही तीन रूप में ।

394
02:25:23.399 --> 02:25:40.399
अभी बापदादा यही चाहते हैं कि सभी कहें विजयी हो गये ।

395
02:25:42.399 --> 02:25:46.930
होना है , हो रहे हैं , नहीं ।

396
02:25:46.930 --> 02:25:51.200
हो गये ।

397
02:25:52.600 --> 02:26:10.329
सबके मस्तक में चमकता हुआ सितारा स्पष्ट अनुभव हो ।

398
02:26:12.329 --> 02:26:25.260
यह अनुभव की आंख अभी दूसरों को अनुभव करायेगी ।

399
02:26:30.260 --> 02:26:35.930
अभी अनुभव चाहते हैं ।

400
02:26:37.000 --> 02:26:49.799
स्वयं भी हर शक्ति , हर गुण के अनुभवी बनें , तभी अनुभव करा सकेंगे ।

401
02:27:06.200 --> 02:27:16.329
तो अपने अनुभव को बढ़ाओ तो औरों को अनुभव हो ही जायेगा ।

402
02:27:26.799 --> 02:27:29.260
अच्छा है ।

403
02:27:29.260 --> 02:27:41.260
आप सभी की दिल की आशायें पूर्ण होनी ही हैं ।

404
02:27:47.000 --> 02:27:50.600
ठीक है ना !

405
02:27:50.600 --> 02:27:53.799
ठीक है ?

406
02:27:55.530 --> 02:27:59.930
कितना अच्छा है ।

407
02:28:10.200 --> 02:28:21.059
अच्छा है , ब्राह्मण कुल की शोभा हो ।

408
02:28:28.729 --> 02:28:38.530
सभी दादियों को देखकर खुश होते हैं ना !

409
02:28:48.000 --> 02:29:04.659
देखो इन्हों की कमाल यह है , कि बिना साधनों के सफलता प्राप्त की ।

410
02:29:10.459 --> 02:29:41.260
(कितना पैदल चले होंगे, न मोटर न गाड़ी…) इसी तपस्या ने इतना विस्तार पैदा किया।

411
02:30:15.659 --> 02:30:27.860
अभी थोड़े साधन प्राप्त हुए हैं ना , तो थोड़ी आकर्षण होती है ।

412
02:30:41.530 --> 02:30:47.799
अच्छा ।

