WEBVTT

1
00:15:44.200 --> 00:16:45.330
आज प्रेम के सागर अपने परमात्म प्रेम के पात्र बच्चों से मिलने आये हैं ।

2
00:16:52.730 --> 00:17:16.130
आप सब भी स्नेह के अलौकिक विमान से यहाँ पहुंच गये हो ना !

3
00:17:17.259 --> 00:17:32.059
साधारण प्लेन में आये हो वा स्नेह के प्लेन में उड़कर पहुंच गये हो ?

4
00:17:37.460 --> 00:18:00.059
सभी के दिल में स्नेह की लहरें लहरा रही हैं

5
00:18:05.799 --> 00:18:29.329
और स्नेह ही इस ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन है ।

6
00:18:30.259 --> 00:18:44.329
तो आप सभी भी जब आये तो स्नेह ने खींचा ना !

7
00:18:44.329 --> 00:19:06.799
ज्ञान तो पीछे सुना , लेकिन स्नेह ने परमात्म स्नेही बना दिया ।

8
00:19:15.660 --> 00:19:38.599
कभी स्वप्न में भी नहीं होगा कि हम परमात्म स्नेह के पात्र बनेंगे ।

9
00:19:38.599 --> 00:19:44.799
लेकिन अब क्या कहते हो ?

10
00:19:44.799 --> 00:19:51.599
बन गये ।

11
00:20:02.930 --> 00:20:29.799
स्नेह भी साधारण स्नेह नहीं है , दिल का स्नेह है ।

12
00:20:31.000 --> 00:20:55.660
आत्मिक स्नेह है , सच्चा स्नेह है , निःस्वार्थ स्नेह है ।

13
00:21:04.259 --> 00:21:34.400
यह परमात्म स्नेह बहुत सहज याद का अनुभव कराता है ।

14
00:21:36.400 --> 00:21:58.859
स्नेही को भूलना मुश्किल होता है , याद करना मुश्किल नहीं , भूलना मुश्किल होता है ।

15
00:22:03.200 --> 00:22:19.660
स्नेह एक अलौकिक चुम्बक है ।

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00:22:28.000 --> 00:22:39.730
स्नेह सहज योगी बना देता है ।

17
00:22:41.730 --> 00:22:48.200
मेहनत से छुड़ा देता है ।

18
00:22:50.200 --> 00:23:02.400
स्नेह से याद करने में मेहनत नहीं लगती ।

19
00:23:08.000 --> 00:23:17.130
मुहब्बत का फल खाते हैं ।

20
00:23:31.400 --> 00:23:50.059
स्नेह की निशानी विशेष चारों ओर के बच्चे तो हैं ही

21
00:23:50.930 --> 00:24:13.660
लेकिन डबल विदेशी स्नेह में दौड़-दौड़ कर पहुंच गये हैं ।

22
00:24:22.859 --> 00:24:38.329
देखो , 90 देशों से कैसे भागकर पहुंच गये हैं !

23
00:24:43.059 --> 00:25:11.599
देश के बच्चे तो हैं ही प्रभु प्रेम के पात्र , लेकिन आज विशेष डबल विदेशियों को गोल्डन चांस है ।

24
00:25:22.329 --> 00:25:27.400
आप सबका भी विशेष प्यार है ना !

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00:25:27.400 --> 00:25:30.059
स्नेह है ना ।

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00:25:30.059 --> 00:25:37.200
स्नेह है कितना !

27
00:25:37.200 --> 00:25:41.400
कितना ?

28
00:25:41.400 --> 00:25:46.660
तुलना कर सकते हो किससे !

29
00:25:46.660 --> 00:25:52.259
कोई तुलना नहीं हो सकती ।

30
00:25:59.130 --> 00:26:32.059
आप सबका एक गीत है ना - न आसमान में इतने तारे हैं, ना सागर में इतना जल है…, बेहद का प्यार, बेहद का स्नेह है।

31
00:27:02.730 --> 00:27:26.930
बापदादा भी स्नेही बच्चों से मिलने पहुंच गये हैं ।

32
00:27:27.730 --> 00:28:04.660
आप सब बच्चों ने स्नेह से याद किया और बापदादा आपके प्यार में पहुंच गये हैं ।

33
00:28:15.599 --> 00:28:40.329
जैसे इस समय हर एक के चेहरे पर स्नेह की रेखा चमक रही है ।

34
00:29:14.259 --> 00:29:29.200
ऐसे ही अब एडीशन क्या करना है ?

35
00:29:32.930 --> 00:29:38.930
स्नेह तो है , यह तो पक्का है ।

36
00:29:38.930 --> 00:29:54.200
बापदादा भी सर्टीफिकेट देते हैं कि स्नेह है ।

37
00:29:55.529 --> 00:30:01.730
अभी क्या करना है ?

38
00:30:12.730 --> 00:30:19.930
समझ तो गये हो ।

39
00:30:26.059 --> 00:30:40.599
अभी सिर्फ अण्डरलाइन करना है -

40
00:30:43.130 --> 00:30:51.130
सदा स्नेही रहना है , सदा ।

41
00:30:51.130 --> 00:30:56.730
समटाइम नहीं ।

42
00:31:11.130 --> 00:31:29.599
स्नेह है अटूट लेकिन परसेन्टेज में अन्तर पड़ जाता है ।

43
00:31:36.059 --> 00:32:10.000
तो अन्तर मिटाने के लिए क्या मन्त्र है ?

44
00:32:31.859 --> 00:33:00.059
हर समय महादानी , अखण्डदानी बनो ।

45
00:33:20.000 --> 00:33:56.859
सदा दाता के बच्चे विश्व सेवाधारी समान ।

46
00:33:58.859 --> 00:34:17.260
कोई भी समय मास्टर दाता बनने के बिना नहीं रहें

47
00:34:24.599 --> 00:35:05.260
क्योंकि कार्य विश्व कल्याण का बाप के साथ-साथ आपने भी मददगार बनने का संकल्प किया है ।

48
00:35:09.130 --> 00:35:34.460
चाहे मन्सा द्वारा शक्तियों का दान वा सहयोग दो ।

49
00:35:36.460 --> 00:36:08.929
वाचा द्वारा ज्ञान का दान दो , सहयोग दो , कर्म द्वारा गुणों का दान दो

50
00:36:12.929 --> 00:36:26.329
और स्नेह सम्पर्क द्वारा खुशी का दान दो ,

51
00:36:32.659 --> 00:36:58.460
कितने अखण्ड खज़ानों के मालिक , रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड हो ।

52
00:37:02.059 --> 00:37:09.400
अखुट और अखण्ड खज़ाने हैं ।

53
00:37:10.130 --> 00:37:22.329
जितने देंगे उतने बढ़ते जाते हैं ।

54
00:37:23.460 --> 00:37:29.260
कम नहीं होंगे , बढ़ेंगे

55
00:37:39.800 --> 00:38:26.730
क्योंकि वर्तमान समय इन खज़ानों के मैजॉरिटी आप सबके आत्मिक भाई और बहनें प्यासी हैं ।

56
00:38:31.199 --> 00:39:08.730
तो क्या अपने भाई बहिनों के ऊपर तरस नहीं पड़ता !

57
00:39:11.730 --> 00:39:25.800
क्या प्यासी आत्माओं की प्यास नहीं बुझायेंगे ?

58
00:39:35.530 --> 00:40:27.059
कानों में आवाज नहीं आता हे हमारे देव देवियाँ हमें शक्ति दो , सच्चा प्यार दो ।

59
00:40:31.199 --> 00:41:13.199
आपके भक्त और दुःखी आत्मायें दोनों ही दया करो , कृपा करो ,

60
00:41:13.199 --> 00:41:30.000
हे कृपा के देव और देवियाँ कहकर चिल्ला रहे हैं ।

61
00:42:02.730 --> 00:42:22.260
समय की पुकार सुनाई देती है ना !

62
00:42:30.199 --> 00:42:45.000
और समय भी देने का अब है ।

63
00:42:47.000 --> 00:42:50.730
फिर कब देंगे ?

64
00:42:50.730 --> 00:43:15.260
इतना अखुट अखण्ड खज़ाने जो आपके पास जमा हैं , तो कब देंगे ?

65
00:43:22.659 --> 00:43:31.599
क्या लास्ट टाइम , अन्तिम समय देंगे ?

66
00:43:47.800 --> 00:43:59.659
उस समय सिर्फ अंचली दे सकेंगे ।

67
00:44:07.329 --> 00:44:35.059
तो अपने जमा हुए खज़ाने कब कार्य में लगायेंगे ?

68
00:44:42.730 --> 00:45:16.860
चेक करो हर समय कोई न कोई खज़ाना सफल कर रहे हैं !

69
00:45:20.199 --> 00:45:25.530
इसमें डबल फायदा है ,

70
00:45:25.530 --> 00:45:46.460
खज़ाने को सफल करने से आत्माओं का कल्याण भी होगा

71
00:45:46.460 --> 00:46:09.260
और साथ में आप सब भी महादानी बनने के कारण विघ्न-विनाशक ,

72
00:46:09.260 --> 00:46:24.260
समस्या स्वरूप नहीं , समाधान स्वरूप सहज बन जायेंगे ।

73
00:46:27.659 --> 00:46:32.599
डबल फायदा है ।

74
00:46:34.599 --> 00:46:49.659
आज यह आया , कल यह आया , आज यह हो गया , कल वह हो गया ।

75
00:46:52.260 --> 00:47:17.400
विघ्न-मुक्त , समस्या मुक्त सदा के लिए बन जायेंगे ।

76
00:47:21.400 --> 00:47:37.000
जो समस्या के पीछे समय देते हो , मेहनत भी करते हो ,

77
00:47:39.260 --> 00:47:59.460
कभी उदास बन जाते , कभी उल्हास में आ जाते , उससे बच जायेंगे

78
00:47:59.460 --> 00:48:16.659
क्योंकि बापदादा को भी बच्चों की मेहनत अच्छी नहीं लगती ।

79
00:48:16.659 --> 00:48:29.659
जब बापदादा देखते हैं , बच्चे मेहनत में हैं ,

80
00:48:34.730 --> 00:48:49.659
तो बच्चों की मेहनत बाप से देखी नहीं जाती ।

81
00:48:57.730 --> 00:49:16.199
तो मेहनत मुक्त , पुरूषार्थ करना है लेकिन कौन सा पुरूषार्थ ?

82
00:49:17.130 --> 00:49:46.199
क्या अभी तक अपनी छोटी-छोटी समस्याओं में पुरूषार्थी रहेंगे !

83
00:49:46.199 --> 00:50:15.800
अब पुरूषार्थ करो अखण्ड महादानी , अखण्ड सहयोगी , ब्राह्मणों में सहयोगी बनो

84
00:50:16.860 --> 00:50:32.329
और दुःखी आत्मायें , प्यासी आत्माओं के लिए महादानी बनो ।

85
00:50:32.329 --> 00:50:42.599
अब इस पुरूषार्थ की आवश्यकता है ।

86
00:51:05.659 --> 00:51:09.000
पसन्द है ना !

87
00:51:09.000 --> 00:51:12.860
पसन्द है !

88
00:51:12.860 --> 00:51:15.659
पीछे वाले पसन्द है !

89
00:51:15.659 --> 00:51:28.059
तो अभी कुछ चेंज भी करना चाहिए ना , वही स्व प्रति पुरूषार्थ बहुत टाइम किया ।

90
00:51:38.260 --> 00:51:41.460
कैसे पाण्डव !

91
00:51:41.460 --> 00:51:48.400
पसन्द है ?

92
00:51:48.860 --> 00:51:52.730
तो कल से क्या करेंगे ?

93
00:51:52.730 --> 00:51:57.400
कल से ही शुरू करेंगे या अब से ?

94
00:51:57.400 --> 00:52:22.199
अब से संकल्प करो - मेरा समय , संकल्प विश्व प्रति , विश्व की सेवा प्रति ।

95
00:52:22.199 --> 00:52:34.460
इसमें स्व का ऑटोमेटिक हो ही जायेगा , रहेगा नहीं , बढ़ेगा ।

96
00:52:36.460 --> 00:52:38.460
क्यों ?

97
00:52:38.460 --> 00:53:19.460
किसी को भी आप उसकी आशायें पूरी करेंगे , दुःख के बजाए सुख देंगे , निर्बल आत्माओं को शक्ति देंगे , गुण देंगे , तो वह कितनी दुआयें देंगे ।

98
00:53:24.730 --> 00:53:39.329
और दुआयें लेना सबसे लेना सबसे सहज साधन है , आगे बढ़ने का ।

99
00:53:39.329 --> 00:54:01.260
चाहे भाषण नहीं करो , प्रोग्राम ज्यादा नहीं कर सकते हो , कोई हर्जा नहीं , कर सकते हो तो और ही करो ।

100
00:54:01.260 --> 00:54:17.599
लेकिन नहीं भी कर सकते हो तो कोई हर्जा नहीं , सफल करो खज़ानों को ।

101
00:54:22.329 --> 00:54:39.599
सुनाया ना - मन्सा से शक्तियों का खज़ाना देते जाओ ।

102
00:54:41.599 --> 00:54:49.730
वाणी से ज्ञान का खज़ाना ,

103
00:54:51.730 --> 00:55:24.059
कर्म से गुणों का खज़ाना और बुद्धि से समय का खज़ाना , सम्बन्ध-सम्पर्क से खुशी का खज़ाना सफल करो ।

104
00:55:26.059 --> 00:55:39.659
तो सफल करने से सफलता मूर्त बन ही जायेंगे , सहज ।

105
00:55:40.730 --> 00:55:59.400
उड़ते रहेंगे क्योंकि दुआयें एक लिफ्ट का काम करती हैं , सीढ़ी का नहीं ।

106
00:56:00.260 --> 00:56:17.599
समस्या आई , मिटाया , कभी दो दिन लगाया , कभी दो घण्टा लगाया , यह सीढ़ी चढ़ना है ।

107
00:56:17.599 --> 00:56:26.130
दुआयें सफल करो , सफलता मूर्त बनो ,

108
00:56:26.130 --> 00:56:31.730
तो लिफ्ट में सेकण्ड में पहुंच जायेंगे , जहाँ चाहो ।

109
00:56:31.730 --> 00:56:45.000
चाहे सूक्ष्मवतन में पहुंचों , चाहे परमधाम में पहुंचो , चाहे अपने राज्य में पहुंचो , सेकण्ड में ।

110
00:56:47.000 --> 00:56:52.730
लण्डन में प्रोग्राम किया था ना वन मिनट ।

111
00:56:52.730 --> 00:56:59.260
बापदादा तो कहते हैं वन सेकण्ड ।

112
00:57:01.260 --> 00:57:12.199
वन सेकण्ड में दुआओं की लिफ्ट में चढ़ जाओ ।

113
00:57:13.000 --> 00:57:23.659
सिर्फ स्मृति का स्वीच दबाओ बस , मेहनत मुक्त ।

114
00:57:24.329 --> 00:57:34.199
तो बापदादा आज डबल विदेशियों का दिन है ना

115
00:57:34.199 --> 00:57:42.530
तो पहले डबल विदेशियों को किस स्वरूप में देखने चाहते हैं ?

116
00:57:42.530 --> 00:57:53.860
मेहनत मुक्त , सफलता मूर्त , दुआओं के पात्र ।

117
00:57:57.199 --> 00:58:04.329
बनेंगे ना ?

118
00:58:10.059 --> 00:58:22.000
क्योंकि डबल विदेशियों का बाप से प्यार अच्छा है , शक्ति चाहिए लेकिन प्यार अच्छा है ।

119
00:58:27.530 --> 00:58:32.130
कमाल तो की है ना ?

120
00:58:34.730 --> 00:59:20.929
देखो90 देशों से अलग-अलग देश,अलग-अलग रसम-रिवाज लेकिन 5 ही खण्डों के एक चन्दन के वृक्ष बन गये हैं।

121
00:59:24.730 --> 00:59:29.530
एक वृक्ष में आ गये हैं ।

122
00:59:29.530 --> 00:59:43.530
एक ही ब्राह्मण कल्चर हो गया , अभी है क्या इंगलिश है , कल्चर हमारा इंगलिश है , नहीं ना ।

123
00:59:43.530 --> 00:59:46.730
ब्राह्मण है ना ?

124
00:59:46.730 --> 00:59:54.199
जो समझते हैं अभी तो हमारा ब्राह्मण कल्चर है वह हाथ उठाओ ।

125
00:59:54.199 --> 01:00:01.929
ब्राह्मण कल्चर और एडीशन नहीं ।

126
01:00:05.199 --> 01:00:09.000
एक हो गये ना ।

127
01:00:12.059 --> 01:00:28.929
इसकी मुबारक दे रहे हैं बापदादा कि सभी एक वृक्ष के बन गये ।

128
01:00:30.929 --> 01:00:33.659
कितना अच्छा लगता है !

129
01:00:33.659 --> 01:00:46.199
किसी से भी पूछो , अमेरिका से पूछो , यूरोप से पूछो , आप कौन हो ?

130
01:00:46.199 --> 01:00:48.599
तो क्या कहेंगे ?

131
01:00:48.599 --> 01:00:51.400
ब्राह्मण है ना !

132
01:00:51.400 --> 01:01:11.000
कि नहीं , यू के के हैं , अफ्रीकन हैं , अमेरिकन हैं नहीं , सब एक ब्राह्मण हो गये ।

133
01:01:15.130 --> 01:01:36.659
एक मत हो गये , एक स्वरूप के हो गये ब्राह्मण और एक मत श्रीमत ।

134
01:01:38.659 --> 01:01:42.599
मजा आता है ना इसमें ।

135
01:01:42.599 --> 01:01:44.599
मजा है ?

136
01:01:46.199 --> 01:01:48.730
कि मुश्किल है ?

137
01:01:48.730 --> 01:01:52.599
मुश्किल तो नहीं है ना !

138
01:01:52.599 --> 01:01:57.929
कांध हिला रहे हैं , अच्छा है ।

139
01:02:04.929 --> 01:02:24.929
बापदादा सेवा में नवीनता क्या चाहता है ?

140
01:02:25.659 --> 01:02:41.530
जो भी सेवा कर रहे हो - बहुत-बहुत-बहुत अच्छी कर रहे हो , उसकी तो मुबारक है ही ।

141
01:02:42.329 --> 01:02:48.460
लेकिन आगे एडीशन क्या करना है ?

142
01:02:48.460 --> 01:02:58.260
आप लोगों के मन में है ना कोई नवीनता चाहिए ।

143
01:03:00.260 --> 01:03:19.530
तो बापदादा ने देखा , जो भी प्रोग्राम किये हैं , समय भी दिया है ,

144
01:03:21.530 --> 01:03:44.260
और मुहब्बत से ही किया है , मेहनत भी मुहब्बत से की है और अगर स्थूल धन भी लगाया है

145
01:03:44.260 --> 01:03:57.860
तो वह तो पदमगुणा होके आपके परमात्म बैंक में जमा हो गया है ।

146
01:03:58.530 --> 01:04:05.929
वह लगाया क्या , जमा किया है ।

147
01:04:09.599 --> 01:04:32.059
रिजल्ट में देखा गया कि सन्देश पहुँचाने का कार्य , परिचय देने का कार्य सभी ने बहुत अच्छा किया है ।

148
01:04:32.860 --> 01:04:59.199
चाहे कहाँ भी किया , अभी दिल्ली में हो रहा है , लण्डन में हुआ और बापदादा को डबल फारेनर्स का कॉल ऑफ टाइम करते हैं , पीस ऑफ माइण्ड करते हैं , यह सब प्रोग्राम बहुत अच्छे लगते हो ।

149
01:05:00.059 --> 01:05:40.860
जो भी और काम कर सको करते रहो , लेकिन सन्देश मिलता है , स्नेही भी बनते हैं , सहयोगी भी बनते हैं , सम्बन्ध में भी कोई-कोई आ जाते हैं

150
01:05:42.860 --> 01:06:16.130
लेकिन अभी एडीशन चाहिए - कि जब भी कोई बड़ा प्रोग्राम करते हो उसमें सन्देश तो मिलता है ,

151
01:06:17.260 --> 01:06:38.800
अनुभव करके जायें कुछ , अनुभव बहुत जल्दी आगे बढ़ाता है ।

152
01:06:39.460 --> 01:06:53.000
जैसे यह कॉल ऑफ टाइम में , या पीस ऑफ माइन्ड में थोड़ा-थोड़ा अनुभव ज्यादा करते हैं ।

153
01:06:53.000 --> 01:07:05.000
लेकिन जो बड़े प्रोग्राम होते हैं उसमें सन्देश तो अच्छा मिल जाता है ,

154
01:07:05.000 --> 01:07:26.329
लेकिन जो भी आवे उसके पीठ करके कुछ न कुछ अनुभव करे ,

155
01:07:27.199 --> 01:07:51.400
क्योंकि अनुभव कभी भूलता नहीं है और अनुभव ऐसी चीज़ है जो न चाहते हुए भी उस तरफ खीचेंगे ।

156
01:07:52.329 --> 01:08:02.730
तो पहले बापदादा कहते हैं जो सभी ब्राह्मण भी हैं ,

157
01:08:03.800 --> 01:08:19.529
जो भी ज्ञान की प्वाइंटस हैं , उनका स्वयं अनुभवी बने हो ?

158
01:08:21.529 --> 01:08:32.260
हर शक्ति का अनुभव किया है , हर गुण का अनुभव किया है ?

159
01:08:33.260 --> 01:08:45.800
आत्मिक स्थिति का अनुभव किया है ?

160
01:08:45.800 --> 01:08:56.130
परमात्म प्यार का अनुभव किया है ?

161
01:08:59.130 --> 01:09:19.930
ज्ञान समझना इसमें तो पास हो , नॉलेजफुल तो बन गये हो , इसमें तो बापदादा भी रिमार्क्स देते हैं , ठीक है ।

162
01:09:19.930 --> 01:09:31.130
आत्मा क्या , परमात्मा क्या , ड्रामा क्या , ज्ञान तो समझ लिया है ,

163
01:09:31.130 --> 01:09:51.529
लेकिन जब चाहे जितना समय चाहें , जिस भी परिस्थिति में हो ,

164
01:09:51.529 --> 01:10:16.930
उस परिस्थिति में आत्मिक बल का अनुभव हो , परमात्म शक्ति का अनुभव हो , वह होता है ?

165
01:10:20.930 --> 01:10:34.600
जिस समय , जितना समय , जैसे अनुभव करने चाहो वैसे होता है ?

166
01:10:36.600 --> 01:10:42.060
कि कभी कैसे कभी कैसे ?

167
01:10:42.060 --> 01:11:02.859
सोचो आत्मा हूँ , और फिर बार-बार देहभान आ जाए , तो क्या अनुभव काम में आया ?

168
01:11:06.130 --> 01:11:32.130
अनुभवी मूर्त हर सब्जेक्ट के अनुभवी मूर्त , हर शक्तियों के अनुभवी मूर्त ।

169
01:11:38.460 --> 01:12:01.800
तो स्वयं में भी अनुभव को और बढ़ाओ , है , ऐसे नहीं कि नहीं है , लेकिन कभी-कभी है , समटाइम ।

170
01:12:01.800 --> 01:12:17.130
तो बापदादा समटाइम नहीं चाहते हैं , समाथिंग हो जाता है , तो समटाइम भी हो जाता है

171
01:12:20.329 --> 01:12:39.000
क्योंकि आप सबका लक्ष्य है , पूछते हैं क्या बनने का लक्ष्य है ?

172
01:12:39.000 --> 01:12:42.399
तो कहते हो बाप समान ।

173
01:12:42.399 --> 01:12:49.460
एक ही जवाब सभी देते हो ।

174
01:12:53.529 --> 01:13:29.659
तो बाप समान , तो बाप समटाइम और समाथिंग नहीं था , ब्रह्मा बाप सदा राज़युक्त , योगयुक्त ,

175
01:13:35.529 --> 01:13:43.659
हर शक्ति में सदा , कभी-कभी नहीं ।

176
01:13:46.859 --> 01:13:59.800
अनुभव जो होता है , वह सदाकाल चलता है , वह सम टाइम नहीं होता है ।

177
01:14:08.130 --> 01:14:26.800
तो स्वयं अनुभवी मूर्त बन हर बात में , हर सबजेक्ट में अनुभवी ,

178
01:14:28.399 --> 01:14:53.399
ज्ञान स्वरूप में अनुभवी , योगयुक्त में अनुभवी , धारणा स्वरूप में अनुभवी ।

179
01:14:53.399 --> 01:15:19.260
आलराउण्ड सेवा मन्सा वाचा कर्मणा , सम्बन्ध-सम्पर्क सबमें अनुभवी , तब कहेंगे पास विद आनर ।

180
01:15:22.399 --> 01:15:25.859
तो क्या बनने चाहते हो ?

181
01:15:25.859 --> 01:15:35.399
पास होने चाहते हो या पास विद ऑनर बनने चाहते हो ?

182
01:15:37.399 --> 01:15:55.800
पास करने वाले तो पीछे भी आयेंगे , आप तो टूलेट से पहले आ गये हो , चाहे अभी नये भी आये हैं

183
01:15:55.800 --> 01:16:01.329
लेकिन टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है ।

184
01:16:01.329 --> 01:16:09.130
लेट का लगा है , टूलेट का नहीं लगा है ।

185
01:16:12.659 --> 01:16:42.600
इसीलिए चाहे कोई नये भी हैं लेकिन अभी भी तीव्र पुरूषार्थ करे , पुरूषार्थ नहीं तीव्र , तो आगे जा सकता है ।

186
01:16:42.859 --> 01:16:47.800
क्योंकि नम्बर आउट नहीं हुआ है ।

187
01:16:47.800 --> 01:16:56.600
सिर्फ दो नम्बर आउट हुए हैं , बाप और माँ ।

188
01:16:57.930 --> 01:17:06.729
अभी कोई भी भाई बहन का तीसरानम्बर आउट नहीं हुआ है ।

189
01:17:11.529 --> 01:17:26.600
भले आप कहेंगे दादियों से बहुत प्यार है , बाप का भी दादियों से प्यार है , लेकिन नम्बर आउट नहीं हुआ है ।

190
01:17:31.260 --> 01:17:51.930
इसीलिए आप बहुत-बहुत सिकीलधे , लाडले भाग्यवान हो ,

191
01:17:57.600 --> 01:18:26.000
जितना उड़ने चाहो उड़ो क्योंकि देखो जो छोटे बच्चे होते हैं ना उसको बाप अपनी अंगुली देके चलाता है , एकस्ट्रा प्यार करता है ,

192
01:18:26.000 --> 01:18:37.000
और बड़े को अंगुली से नहीं चलाता है , अपने पांव से चलता है ।

193
01:18:38.130 --> 01:18:45.060
तो नया भी कोई मेकप कर सकता है।

194
01:18:45.060 --> 01:18:51.199
गोल्डन चांस है ।

195
01:18:54.199 --> 01:19:06.859
लेकिन जल्दी में जल्दी टूलेट का बोर्ड लगना है , इसलिए पहले ही कर लो ।

196
01:19:24.859 --> 01:19:32.930
नये जो आये हैं पहली बारी , वह हाथ उठाओ ।

197
01:19:34.930 --> 01:19:37.260
अच्छा ।

198
01:19:48.329 --> 01:19:52.060
मुबारक हो ।

199
01:19:52.060 --> 01:20:12.260
पहले बारी अपने घर मधुबन में पहुंच गये हो ,

200
01:20:12.260 --> 01:20:43.930
इसलिए बापदादा और सारे परिवार चाहे देश वाले , चाहे विदेश वाले सबकी तरफ से पदम-पदमगुणा मुबारक हो ।

201
01:20:53.260 --> 01:21:11.659
अभी सुना - जितना हो सके योग्य आत्मायें देख करके अनुभवी मूर्त बनाओ ।

202
01:21:13.659 --> 01:21:21.529
फिर आपको कहना नहीं पड़ेगा , आते रहो ।

203
01:21:21.529 --> 01:21:28.130
आप कहेंगे नहीं आओ , तो भी आयेंगे ।

204
01:21:30.130 --> 01:21:35.060
अनुभव ऐसी चीज़ है ।

205
01:21:43.659 --> 01:22:02.060
स्वयं को भी अनुभव में बढ़ाओ , जितना-जितना अनुभव में और महादानी बनके सेवा में बिजी रहेंगे ना ,

206
01:22:02.060 --> 01:22:21.260
तो यह जो टाइम वेस्ट होता है ना समस्याओं में , दादियों को भी समय देना पड़ता है और अपने को भी समय देना पड़ता है ,

207
01:22:21.659 --> 01:22:38.729
वह समय बच जायेगा क्योंकि समय के महत्व को भी जानते हो , अचानक होना है ।

208
01:22:38.729 --> 01:22:54.729
कई भाई बहिनें सोचते हैं थोड़ा सा इशारा मिल जाए ना , 10 साल हैं , 20 साल है , कितना है ,

209
01:22:54.859 --> 01:23:06.199
लेकिन बापदादा ने कह दिया है , अचानक होना है ।

210
01:23:07.329 --> 01:23:13.260
एवररेडी रहना है।

211
01:23:23.260 --> 01:23:37.000
फास्ट गति करो अभी - स्वयं की भी , औरों को भी योग्य बनाने की ।

212
01:23:49.000 --> 01:24:02.130
अच्छा है , फॉरेन की सेवा भी अच्छी वृद्धि को प्राप्त कर रही है ।

213
01:24:04.130 --> 01:24:15.329
90 देशों तक पहुंच गये हो , बाकी क्या रहा ! 10 तो और बढ़ाओ , 100 तो हो जायें ।

214
01:25:05.130 --> 01:25:51.399
( जयन्ती बहन ने सुनाया , 129 कन्ट्री तक पहुंच गये हैं , 100 में रजिस्ट्री भी हो चुकी है , बाकी में कुछ न कुछ बाबा का कार्य चल रहा है ) अच्छा है , बापदादा ने अफ्रीका का भी समाचार सुना , वह भी थोड़े टाइम में अच्छी वृद्धि कर ली है ।

215
01:25:51.399 --> 01:25:55.000
अच्छा है ।

216
01:25:55.000 --> 01:26:09.329
बापदादा खुश होते हैं , कि मर्सीफुल आत्मायें हैं ।

217
01:26:15.199 --> 01:26:46.930
आत्माओं के प्रति प्यार है , और देखो कहाँ-कहाँ से बच्चे पहुंचे हुए हैं चाहे और धर्म में भी चले गये हैं , कितने बिखर गये हैं ।

218
01:26:50.659 --> 01:26:59.399
तो अपने परिवारको तो ढूंढकर निकालना है ना ।

219
01:27:01.399 --> 01:27:05.930
अच्छा कर रहे हैं सभी ।

220
01:27:05.930 --> 01:27:24.130
अभी दिल्ली में भी बड़ा प्रोग्राम , है तो मेला कामन , लेकिन नये रूप से करने से लोगों को भी रूचि होती है ।

221
01:27:28.460 --> 01:27:48.729
लण्डन का प्रोग्राम भी बहुत अच्छा किया , और इतने लोगों को परिचय भी मिला ,

222
01:27:48.729 --> 01:28:08.600
अभी जो एड्रेसेज हैं उससे कान्टैक्ट करके , जहाँ से भी आये , जिस प्रोग्राम में भी कोई आते हैं

223
01:28:08.600 --> 01:28:31.460
तो एड्रेस और फोन जरूर लिखाओ , चाहे 8-10 जगह पर रखो , क्योंकि तभी उन्हों को बुला करके , समय दे करके फिर उनको आगे बढ़ा सकेंगे ।

224
01:28:38.859 --> 01:28:57.930
बाकी समय का बिगुल तो अचानक बजना है , उसके पहले अपने भाई बहिनों का कल्याण तो करना है ना ।

225
01:28:57.930 --> 01:29:03.529
तरस आता है ना ?

226
01:29:06.329 --> 01:29:12.460
अब छोटी-छोटी बातों में टाइम नहीं लगाओ ।

227
01:29:14.460 --> 01:29:27.800
जैसे देखो मक्खी आती है , मच्छर आता है , ठहरने देते हो , फौरन उड़ा देते हो , कि बैठने देंगे ।

228
01:29:27.800 --> 01:29:33.130
अच्छा मच्छर भले आओ ।

229
01:29:33.130 --> 01:29:38.329
कोई भी समस्या क्या है ?

230
01:29:38.329 --> 01:29:44.199
मच्छर और मक्खी तो है ।

231
01:29:44.199 --> 01:29:49.260
फौरन भगाओ ।

232
01:29:49.260 --> 01:29:59.930
उन्हों का काम है आना , माया आने का काम नहीं छोड़ती है ,

233
01:29:59.930 --> 01:30:09.460
लेकिन ब्राह्मण भगाने के काम में कभी कभी थोड़ी देरी लगा देते हैं ।

234
01:30:11.460 --> 01:30:33.260
बाकी बापदादा ने सभी देशों का कुछ-कुछ परिवर्तन किया है , वह लिखत देखी , 5-6 खण्डों का देखा ।

235
01:30:35.260 --> 01:30:51.529
लेकिन परिवर्तन किया और लिखा है , उसकी मुबारक तो है लेकिन इसको अविनाशी बनाना ।

236
01:30:52.859 --> 01:31:06.260
ऐसे नहीं कि कोई छोटी सी बात आ गई , परिवर्तन बदल जाये , यह नहीं करना ।

237
01:31:06.260 --> 01:31:13.600
अमरभव का वरदान लो ।

238
01:31:15.600 --> 01:31:28.460
जो परिवर्तन किया है , बापदादा ने सुना , कोई कोई ने परिवर्तन अच्छा किया है

239
01:31:28.460 --> 01:31:42.060
लेकिन सदा शब्द को कभी नहीं भूलना

240
01:31:43.199 --> 01:31:59.529
क्योंकि माया भी सुन रही है तो यह प्रतिज्ञा कर रहे हैं , वह भी तो अपना अजमाइस करेगी ना ,

241
01:32:01.529 --> 01:32:16.460
लेकिन आप तो मायाजीत हो ना , मायाजीत तब तो जगतजीत बनेंगे ।

242
01:32:20.130 --> 01:32:49.859
तो माया को देख करके , माया का आना देख करके आप याद करो मेरा काम भगाना है ।

243
01:32:49.859 --> 01:33:04.329
वह भी आपको सिखलाती है , कि मैं आना नहीं छोडूंगी , आप विजय पाना नहीं छोड़ो , तो क्या ?

244
01:33:07.460 --> 01:33:19.600
अभी छोटे-छोटे मच्छर और मक्खी को आने नहीं देना ।

245
01:33:23.399 --> 01:33:35.800
सम्पूर्ण स्थिति के आगे यह छोटी-छोटी चीज़ें क्या हैं !

246
01:33:51.729 --> 01:34:06.930
अच्छा आप सबकी प्यारी-प्यारी मीठी दादी सम्मुख आ गई है ।

247
01:34:06.930 --> 01:34:22.060
( वीडियो कानफ्रेनसिंग से ) बहुत मीठा मुस्करा रही है

248
01:34:26.729 --> 01:34:44.859
देखो सभी हाथ हिलाओ , देखेगी वहाँ दिखाई देगा ।

249
01:34:49.130 --> 01:34:54.600
अच्छा है ।

250
01:34:55.529 --> 01:35:17.060
देखो , दादी ने ब्रह्मा बाप से भी ज्यादा समय सेवा का पार्ट बजाया है ।

251
01:35:19.060 --> 01:35:34.800
तो विशेष हीरो एक्टर है ना ।

252
01:35:38.859 --> 01:36:00.529
देखो दादी आपको देख करके सभी बहुत-बहुत खुश हो रहे हैं ।

253
01:36:00.529 --> 01:37:32.859
( दादी ने सभी डबल विदेशियों को खास याद देते दीवाली की मुबारक दी ) देखो , यह भी प्रैक्टिकल दिवाली है ना , आप प्रैक्टिकल इतने जगे हुए दीपक चमक रहे हो तो दादी को दीवाली याद आ रही है ।

254
01:37:37.600 --> 01:37:56.800
कितनी रिमझिम है , एक एक के मस्तक में आत्मा चमक रही है , तो यह दीपक कितने अच्छे हैं , अविनाशी दीपक हैं ।

255
01:37:58.800 --> 01:38:49.399
( दादी ने कहा - सभी बाबा-बाबा कर रहे हैं , बाबा आपकी बहुत याद आ रही है ) अभी जल्दी आ जायेगी ।

256
01:38:54.460 --> 01:39:09.399
देखो , बीमारी कितनी भी हो लेकिन दर्द की फीलिंग नहीं हो तो वह बीमारी आराम देती है ।

257
01:39:11.399 --> 01:39:21.659
हीरो एक्टर है ना , शान्ति की देवी है ।

258
01:39:30.399 --> 01:39:36.800
अभी जल्दी आ जायेगी , मिलेगी आप सबसे ।

259
01:41:31.399 --> 01:42:09.659
अच्छा , लण्डन के प्रोग्राम का जस्ट ए मिनट ग्रुप :-

260
01:42:11.659 --> 01:42:39.260
बहुत अच्छा यह विशेषता अच्छी रही जो एक साथ और देशों ने भी भाग लिया या देखा भी ,

261
01:42:39.260 --> 01:43:03.659
तो यह नवीनता अच्छी रही और इसको और भी रिफाइन कर एक ही समय पर अनेक तरफ एक ही सेवा का आवाज हो ।

262
01:43:03.659 --> 01:43:07.000
तो यह अच्छा है ।

263
01:43:07.859 --> 01:43:13.529
रिफाइन होता जायेगा और बढ़ता जायेगा

264
01:43:13.529 --> 01:43:29.000
तो सभी को पता पड़ेगा कि एक ही समय पर एक ही आवाज चारों ओर गूंज रहा है ,

265
01:43:31.000 --> 01:43:57.060
तो सभी ने मेहनत बहुत अच्छी की और दिल से किया और विशेषता लण्डन की यह रही कि बड़ी दिल से बेफिक्र होकरके किया ।

266
01:43:57.060 --> 01:44:06.659
इसकी मुबारक हो ।

267
01:44:13.460 --> 01:44:27.529
कोई भी प्रोग्राम अगर बड़ी दिल से करते हैं तो अच्छा होता है ।

268
01:44:27.529 --> 01:44:49.600
क्या होगा , कैसे होगा , यह कै कै नहीं आवे , होना ही है , करना ही है , सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ।

269
01:44:51.600 --> 01:44:55.930
तो यह अच्छा रिजल्ट है ।

270
01:44:55.930 --> 01:45:07.000
बड़ी दिल लण्डन की है ही ।

271
01:45:10.859 --> 01:45:30.260
जनक बच्ची की बड़ी दिल नम्बरवन है क्यों, क्या नहीं सोचती।

272
01:45:31.060 --> 01:45:34.000
और हो ही जाता है ।

273
01:45:34.000 --> 01:45:41.399
सभी ने देखा होगा तो कितना सहज हो गया ।

274
01:45:41.399 --> 01:45:54.930
बापदादा ने सुना कि खर्चा तो हुआ लेकिन और ही बचत हुई ।

275
01:45:56.930 --> 01:46:01.859
बच गया , और ही बढ़ गया , कम नहीं हुआ ।

276
01:46:01.859 --> 01:46:06.460
तो यह किसकी कमाल है ? बड़े दिल की ।

277
01:46:06.460 --> 01:46:19.130
कभी भी कोई भी प्रोग्राम करो तो पहले बड़ी दिल करेंगे तो सफलता होगी ।

278
01:46:21.130 --> 01:46:24.600
तो मुबारक है ।

279
01:46:24.600 --> 01:46:32.460
बड़ी दिल की और बड़े प्रोग्राम की ।

280
01:46:36.260 --> 01:46:41.130
बाकी रिफाइन तो होता रहेगा ।

281
01:46:41.130 --> 01:46:46.460
एडीशन तो होती रहेगी ।

282
01:46:46.460 --> 01:47:11.600
अभी पीठ करना , इतने जो आये , उनसे कम से कम कुछ तो सम्बन्ध सम्पर्क वाले स्टूडेन्ट तो बने ना , बनेंगे ।

283
01:47:24.600 --> 01:47:53.659
( अमेरिका की मोहिनी बहन का बहुत अच्छा सहयोग रहा ) सभीने मिलके किया है ना ।

284
01:47:53.659 --> 01:47:57.000
अच्छा है ।

285
01:47:57.000 --> 01:47:59.000
बहुत अच्छा ।

286
01:47:59.000 --> 01:48:07.399
संगठन की शक्ति कमाल करती ही है ।

287
01:48:07.399 --> 01:48:19.600
तो संगठित होकरके किया , सफलता है , सफलता रहेगी ।

288
01:48:21.600 --> 01:48:27.399
थकावट नहीं हुई ना ।

289
01:48:27.399 --> 01:48:29.659
खुशी हो गई ।

290
01:48:29.659 --> 01:48:38.859
जब देखा सभा में रौनक हो गई तो खुशी हो गई ।

291
01:48:40.859 --> 01:48:42.460
अच्छा ।

292
01:48:42.460 --> 01:48:47.529
मुबारक हो ।

293
01:48:50.659 --> 01:49:31.800
आई टी ग्रुप :- अच्छा है आप लोगों के कार्य से सभी तरफ जो समाचार मिलता है

294
01:49:31.800 --> 01:49:50.060
तो सभी की दिल खुश हो जाती है क्योंकि परिवार है ना , तो परिवार में समाचार मिलने से खुशी होती है ।

295
01:49:51.130 --> 01:49:58.000
तो अच्छा किया है , चलता तो रहता था काम ,

296
01:49:58.000 --> 01:50:22.000
लेकिन अभी संगठित रूप में मिल करके कायदे प्रमाण कर रहे हैं , बढ़ा रहे हैं , यह बहुत अच्छा बनाया भी है और बढ़ाया भी है ।

297
01:50:26.859 --> 01:50:44.600
इसमें आपोजीशन तो होगी लेकिन आप अपनी पोजीशन में दृढ़ हैं तो आपोजीशन खत्म हो जायेगी ।

298
01:50:44.600 --> 01:51:12.600
आपोजीशन हो तब तो आपको उमंग आवे , यह करें , यह करें … तो आपोजीशन पोजीशन को बढ़ा लेती है और सफलता मिलती भी है और मिलती रहेगी ।

299
01:51:12.600 --> 01:51:16.399
यह निश्चित है ।

300
01:51:16.399 --> 01:51:25.130
कभी भी कुछ भी हो जाए घबराना नहीं , सफलता आपके साथ है ।

301
01:51:25.130 --> 01:51:30.000
आपोजीशन के साथ नहीं है , पोजीशन वालों के साथ है ।

302
01:51:32.729 --> 01:51:40.600
बहुत अच्छा कर रहे हैं , हर एक देश में सिस्टम अच्छी बनाई है ।

303
01:51:46.260 --> 01:52:05.260
( आई टी ग्रुप की मुख्य मोहिनी बहन हैं ) अच्छा है , कोई कायदे प्रमाण निमित्त बनता है ना तो जो भी कार्य होता है उसमें कायदे से फायदा होता है ।

304
01:52:06.000 --> 01:52:12.399
अच्छा हिम्मत रखकर उठाया है , इसकी बहुत-बहुत मुबारक हो ।

305
01:52:17.199 --> 01:52:25.659
हर एक देश से बापदादा के पास समाचार आते रहते हैं ,

306
01:52:26.329 --> 01:52:45.800
कैसे आपस में मीटिंग करते हो , कैसे आगे का प्लैन बनाते हो वह बापदादा के पास पहुंचते हैं इसीलिए मुबारक हो , मुबारक हो ।

307
01:53:00.260 --> 01:53:55.060
आर सी ओ ग्रुप :- अच्छा यह प्लैनिंग बुद्धि वाली आत्मायें हैं ।

308
01:53:57.060 --> 01:54:02.399
नये-नये प्लैन बनाते रहते हो ।

309
01:54:02.399 --> 01:54:35.930
चारों ओर सेवा की वृद्धि और ब्राह्मण आत्माओं में भी वृद्धि कैसे हो , विधि क्या हो , यह आपस में मिलकर जो मीटिंग करते हो वह बहुत अच्छा है ।

310
01:54:37.930 --> 01:54:51.199
बापदादा के पास सब समाचार तो उसी समय ही पहुंच जाते हैं ,

311
01:54:51.199 --> 01:55:06.260
क्योंकि बाप स्विच आन करता है टी वी का तो उसमें सब दिखाई-सुनाई देता है , तो बापदादा को पसन्द है ।

312
01:55:06.260 --> 01:55:23.859
आपस में मिलके प्लैन और प्रोग्राम बनाते हो और प्रैक्टिकल में लाने का अच्छा पुरूषार्थ करते हो ।

313
01:55:25.859 --> 01:55:41.130
बढ़ते चलो , बढ़ना है और सफलता बच्चों के गले का हार है ।

314
01:55:45.260 --> 01:55:47.460
अच्छा है ।

315
01:55:47.460 --> 01:56:02.000
मुख्य सभी इकट्ठे हो जाते हैं तो प्लैन भी ऐसे ही बड़े अच्छे बनते हैं ।

316
01:56:03.460 --> 01:56:11.000
सभी देश के मिल जाते हैं ।

317
01:56:20.399 --> 01:56:24.659
अच्छा , बहुत अच्छा ।

318
01:56:24.659 --> 01:56:34.729
बढ़ते रहो , उड़ते रहो ।

319
01:56:34.729 --> 01:58:16.659
सेवा के निमित्त और भी मुख्य बहिनें बाबा के सामने खड़ी हुई :- अच्छा यह भिन्न-भिन्न देश की हैं , आपस में मिलके भविष्य सेवा के प्लैन बनाते हैं ,

320
01:58:18.659 --> 01:58:44.930
चारों ओर के वायुमण्डल को जानकर , वायुमण्डल को भी एक दो की राय से पावरफुल बनाते हो

321
01:58:46.260 --> 01:58:57.859
क्योंकि वायुमण्डल का प्रभाव बहुत जल्दी पड़ता है ।

322
01:58:57.859 --> 01:59:25.859
तो सेवा के भी प्लैन वृद्धि के बनाते हो और फिर सेन्टर्स के भी वायुमण्डल को शक्तिशाली बनाने के प्लैन जो आपस में राय सलाह करके बनाते हो ,

323
01:59:25.859 --> 01:59:38.800
उससे देखा गया है कि समय प्रति समय वायुमण्डल अच्छा ही बनता जाता है ।

324
01:59:38.800 --> 01:59:45.659
वृद्धि भी अच्छी है और विधि भी अच्छी है ।

325
01:59:45.659 --> 01:59:51.729
और विधि की सिद्धि भी है ।

326
01:59:52.930 --> 01:59:58.529
तो संगठन की शक्ति है ना !

327
01:59:59.600 --> 02:00:11.460
संगठन की शक्ति बहुत कमाल करती है , करना ही है ।

328
02:00:13.460 --> 02:00:32.000
आपस का मिलना भी हो जाता है और सेवा की वृद्धि विधि भी हो जाती और एक दो के समीप भी आ जाते हैं ।

329
02:00:32.000 --> 02:00:40.600
तो यह जो प्रोग्राम बनाया है , बापदादा को पसन्द है ।

330
02:00:40.600 --> 02:00:50.060
और ड्रामानुसार आपको मधुबन का भी चांस मिल जाता है ।

331
02:00:50.060 --> 02:00:57.460
यह संगठन बहुत करके मधुबन के वायुमण्डल में होता है ।

332
02:01:03.199 --> 02:01:10.060
और भी संगठन की शक्ति को बढ़ाते जाओ ।

333
02:01:13.199 --> 02:01:26.800
जब शक्ति सेना अपने को प्रत्यक्ष करेगी तब बाप प्रत्यक्ष होगा

334
02:01:28.260 --> 02:01:38.000
क्योंकि शक्ति और पाण्डवों के द्वारा ही बाप प्रत्यक्ष होना है ।

335
02:01:38.000 --> 02:01:54.399
तो पहले शक्तियां या पाण्डव खुद अपने को सम्पूर्ण प्रत्यक्ष करेंगे तब बाप प्रत्यक्ष होगा ।

336
02:01:55.130 --> 02:02:03.329
हर एक के चेहरे में बाप ही दिखाई देगा ।

337
02:02:06.260 --> 02:02:12.399
इतनी संगठन में शक्ति है ।

338
02:02:14.130 --> 02:02:16.800
तो अच्छा लगा ।

339
02:02:16.800 --> 02:02:23.000
आप सभी को भी अच्छा लग रहा है ना ।

340
02:02:29.000 --> 02:02:36.659
संगठन की शक्ति को बढ़ाते चलो ।

341
02:02:36.659 --> 02:02:44.529
बाप को प्रत्यक्ष करते चलो ।

342
02:02:44.529 --> 02:02:48.399
मुबारक हो ।

343
02:02:49.329 --> 02:02:57.529
अच्छा है , मैजारटी भारत की बहनें हैं ।

344
02:02:58.000 --> 02:03:15.199
देखो , पहले भारत गया है विदेश को जगाने , अभी विदेश भारत में जगायेगा ।

345
02:03:20.130 --> 02:03:25.329
मैजारिटी भारत की है ।

346
02:03:33.199 --> 02:03:41.000
तो विदेश भारत को कब जगायेंगे ?

347
02:03:43.000 --> 02:03:46.460
यह आई टी ग्रुप जगायेगा ?

348
02:03:50.000 --> 02:03:57.460
अच्छा है , कनेक्शन अच्छा हो रहा है ।

349
02:04:43.600 --> 02:05:15.729
सर्व अफ्रीका ग्रुप :- देखो , अफ्रीका वालों को एक बात की बहुत-बहुत मुबारक है - जो वायदा किया वह पूरा निभाया है ।

350
02:05:19.199 --> 02:06:22.060
संगठन की शक्ति से एक दो के सहयोगी अच्छे बने हैं और ऐसे देश जहाँ अपने परिवार के लोग पहुंच गये हैं, उन भाई बहिनों को ढूंढकर निकालना, मेहनत भी की है, तो विधि भी अच्छी की है और समय पर सफलता प्राप्त कर ली है, उसकी बहुत-बहुत मुबारक हो।

351
02:06:26.529 --> 02:06:30.659
अच्छा किया है , मेहनत अच्छी की है ।

352
02:06:30.659 --> 02:06:47.800
जो निमित्त बने हैं ना , वह भी आपस में संगठित रूप में अच्छे चले हैं और चल रहे हैं , यह भी है ना ?

353
02:06:52.859 --> 02:07:02.800
( जयन्ती बहन को , आप भी उठो ) अच्छा किया , एक दो का सहयोग अच्छा है ।

354
02:07:06.130 --> 02:07:22.260
बापदादा को दिखाया था शक्तियां भी निमित्त हैं और पाण्डव भी निमित्त हैं ।

355
02:07:29.060 --> 02:07:35.399
बहुत अच्छा रिकार्ड रखा है ।

356
02:07:38.329 --> 02:07:51.199
बहुत अच्छा , सफलता की माला तो बापदादा पहना रहा है ,

357
02:07:51.199 --> 02:08:09.130
वह माला तो क्या पहनायेंगे फिर उतार देंगे लेकिन सफलता की माला एक एक को बापदादा पहना रहा है ।

358
02:08:16.000 --> 02:08:19.329
अच्छा ।

359
02:08:19.329 --> 02:08:27.460
पदमगुणा मुबारक हो ।

360
02:09:03.600 --> 02:09:26.729
दिल्ली ओ आर सी में एस एम एल की ट्रेनिंग करने , कराने वाला ग्रुप :- अच्छा है जितना अभ्यास करते हैं उतना पुण्य कमाते हैं ,

361
02:09:27.329 --> 02:09:49.460
दूसरों को सेवा करके परिवर्तन कराना , यह सेवा का पुण्य जमा हो जाता है

362
02:09:51.460 --> 02:10:06.930
और यह पुण्य वर्तमानसमय खुशी दिलाता है और भविष्य में भी जमा होता है ।

363
02:10:11.199 --> 02:10:17.930
जितनों को करायेंगे , किसलिए किया है ?

364
02:10:17.930 --> 02:10:20.800
कराने के लिए ना !

365
02:10:20.800 --> 02:10:29.460
तो इतने सारे हैण्ड कराने के लिए तैयार हो गये ।

366
02:10:29.460 --> 02:10:34.529
तो कितने पुण्य जमा होंगे !

367
02:10:36.060 --> 02:10:43.600
सेवा अर्थात् पुण्य जमा करना , कोई भी ग्रुप हो ।

368
02:10:43.600 --> 02:10:51.329
जितने भी ग्रुप ने भिन्न-भिन्न प्रकार की सेवायें की हैं ,

369
02:10:51.329 --> 02:11:00.260
उन्हों का पुण्य जमा हो गया और जमा करते रहना ।

370
02:11:00.260 --> 02:11:03.800
इसीलिए सीखे हो ना !

371
02:11:03.800 --> 02:11:07.729
होशियार हो गये ना !

372
02:11:07.729 --> 02:11:11.729
औरों को भी करा सकेंगे ना ?

373
02:11:16.600 --> 02:11:28.800
एक दो को आगे बढ़ाना , यह भी अच्छा किया , निमित्त बने ना ?

374
02:11:28.800 --> 02:11:35.460
निमित्त बनने वाले का भी पुण्य जमा होता है ।

375
02:11:38.659 --> 02:11:51.930
तो बापदादा खुश है, लेकिन जो सीखा है वह सिखाने में नम्बरवन आना।

376
02:11:55.199 --> 02:11:58.859
अपने तक नहीं रखना ।

377
02:11:58.859 --> 02:12:01.399
काम में लगाना ।

378
02:12:01.399 --> 02:12:15.060
समय दिया है और निमित्त का समय लिया है तो और आगे बढ़ाना ।

379
02:12:19.800 --> 02:12:25.659
मुबारक हो , मुबारक हो ।

380
02:12:51.729 --> 02:13:08.399
बहुत अच्छा , जो ग्रुप में नहीं भी उठे हैं , उन्हों को भी बहुत-बहुत मुबारक है ।

381
02:13:15.060 --> 02:13:31.729
किसी न किसी सेवा में तो आपका भी ग्रुप है, इसीलिए इनएडवांस मुबारक हो।

382
02:13:36.800 --> 02:14:11.460
अच्छा - अभी सेकण्ड में जिस स्थिति में बापदादा डायरेक्शन दे उसी स्थिति में सेकण्ड में पहुंच सकते हो !

383
02:14:12.130 --> 02:14:18.130
कि पुरूषार्थ में समय चला जायेगा ?

384
02:14:20.130 --> 02:14:40.260
अभी प्रैक्टिस चाहिए सेकण्ड की क्योंकि आगे जो फाइनल समय आने वाला है ,

385
02:14:40.260 --> 02:14:58.130
जिसमें पास विद ऑनर का सर्टीफिकेट मिलना है , उसका अभ्यास अभी से करना है ।

386
02:14:58.130 --> 02:15:14.399
सेकण्ड में जहाँ चाहे , जो स्थिति चाहिए उस स्थिति में स्थित हो जाएं ।

387
02:15:18.000 --> 02:15:21.060
तो एवररेडी।

388
02:15:21.060 --> 02:15:26.529
रेडी हो गये ।

389
02:15:26.529 --> 02:20:44.059
अभी पहले एक सेकण्ड में पुरूषोत्तम संगमयुगी श्रेष्ठ ब्राह्मण हूँ,इस स्थिति में स्थित हो जाओ… अभी मैं फरिश्ता रूप हूँ, डबल लाइट हूँ…, अभी विश्व कल्याणकारी बन मन्सा द्वारा चारों ओर शक्ति की किरणें देने का अनुभव करो।

390
02:22:01.600 --> 02:22:19.459
ऐसे सारे दिन में सेकण्ड में स्थित हो सकते हैं !

391
02:22:19.459 --> 02:22:32.129
इसका अनुभव करते रहो क्योंकि अचानक कुछ भी होना है ।

392
02:22:33.729 --> 02:22:37.659
ज्यादा समय नहीं मिलेगा ।

393
02:22:37.659 --> 02:23:09.600
हलचल में सेकण्ड में अचल बन सकें इसका अभ्यास स्वयं ही अपना समय निकाल बीच-बीच में करते रहो ।

394
02:23:09.600 --> 02:23:20.329
इससे मन का कन्ट्रोल सहज हो जायेगा ।

395
02:23:20.329 --> 02:23:29.729
कन्ट्रोलिंग पावर , रूलिंग पावर बढ़ती जायेगी ।

396
02:23:39.530 --> 02:23:55.600
अच्छा - चारों ओर के बच्चों के पत्र भी बहुत आये हैं ,

397
02:23:57.600 --> 02:24:03.600
अनुभव भी बहुत आये हैं ,

398
02:24:05.600 --> 02:24:38.860
तो बापदादा बच्चों को रिटर्न में बहुत-बहुत दिल की दुआयें और दिल का याद प्यार पदम-पदमगुणा दे रहे हैं ।

399
02:24:51.930 --> 02:25:09.399
बापदादा देख रहे हैं - चारों ओर के बच्चे सुन भी रहे हैं , देख भी रहे हैं ।

400
02:25:18.000 --> 02:25:33.729
जो नहीं भी देख रहे हैं , वह भी याद में तो हैं ।

401
02:25:35.729 --> 02:25:44.930
सबकी बुद्धि इस समय मधुबन में ही है ।

402
02:25:50.200 --> 02:26:11.860
तो चारों ओर वे हर एक बच्चे को नाम सहित यादप्यार स्वीकार हो ।

403
02:26:25.200 --> 02:27:10.530
सभी सदा उमंग-उत्साह के पंखों द्वारा ऊंची स्थिति में उड़ते रहने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को ,

404
02:27:11.329 --> 02:27:40.260
सदा स्नेह में लवलीन रहने वाले समाये हुए बच्चों को ,

405
02:27:40.260 --> 02:28:08.260
सदा मेहनत मुक्त , समस्या मुक्त , विघ्न मुक्त , योगयुक्त , राज़युक्त बच्चों को ,

406
02:28:09.200 --> 02:29:17.059
सदा हर परिस्थिति में सेकण्ड में पास होने वाले , हर समय सर्व शक्ति स्वरूप रहने वाले मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते ।

407
02:29:18.659 --> 02:29:39.530
आप सबकी प्यारी दादी को भी बहुत-बहुत दुआयें और यादप्यार ।

