WEBVTT

1
00:16:28.330 --> 00:17:44.859
आज बापदादा चारों ओर के अपने परमात्म प्यार के पात्र स्वमान की सीट पर सेट बच्चों को देख रहे हैं ।

2
00:17:51.660 --> 00:18:09.259
सीट पर सेट तो सब बच्चे हैं

3
00:18:11.259 --> 00:18:45.059
लेकिन कई बच्चे एकाग्र स्थिति में सेट हैं

4
00:18:47.059 --> 00:19:12.400
और कोई बच्चे संकल्प में थोड़ा-थोड़ा अपसेट हैं ।

5
00:19:18.059 --> 00:19:41.529
बापदादा वर्तमान समय के प्रमाण हर बच्चे को

6
00:19:41.529 --> 00:20:11.799
एकाग्रता के रूप में स्वमानधारी स्वरूप में सदा देखने चाहते हैं ।

7
00:20:19.400 --> 00:20:57.000
सभी बच्चे भी एकाग्रता की स्थिति में स्थित होना चाहते हैं ।

8
00:21:01.799 --> 00:21:44.200
अपने भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वमान जानते भी हैं , सोचते भी हैं

9
00:21:46.859 --> 00:22:19.259
लेकिन एकाग्रता हलचल में ले आती है ।

10
00:22:27.660 --> 00:22:55.660
सदा एकरस स्थिति कम रहती है ।

11
00:22:57.000 --> 00:23:24.329
अनुभव होता है और यह स्थिति चाहते भी हैं

12
00:23:27.400 --> 00:23:55.930
लेकिन कब-कब क्यों होती है , कारण !

13
00:23:57.259 --> 00:24:06.660
सदा अटेन्शन की कमी ।

14
00:24:23.130 --> 00:24:54.130
अगर स्वमान की लिस्ट निकालो तो कितनी बड़ी है ।

15
00:24:58.329 --> 00:25:54.200
सबसे पहला स्वमान है - जिस बाप को याद करते रहे,उनके डायरेक्ट बच्चे बने हो,नम्बरवन सन्तान हो।

16
00:25:59.529 --> 00:26:34.730
बापदादा ने आप कोटों में से कोई बच्चों को कहाँ-कहाँ से चुनकर अपना बना लिया ।

17
00:26:40.460 --> 00:27:06.599
5 ही खण्डों से डायरेक्ट बाप ने अपने बच्चों को अपना बना लिया ।

18
00:27:10.200 --> 00:27:17.130
कितना बड़ा स्वमान है ।

19
00:27:18.130 --> 00:27:35.599
सृष्टि रचता की पहली रचना आप हो ।

20
00:27:40.460 --> 00:27:49.059
जानते हो ना इस स्वमान को !

21
00:27:57.930 --> 00:28:41.799
बापदादा ने अपने साथ-साथ आप बच्चों को सारे विश्व की आत्माओं के पूर्वज बनाया है ।

22
00:28:42.730 --> 00:28:59.529
विश्व के पूर्वज हो , पूज्य हो ।

23
00:29:08.730 --> 00:29:42.200
बापदादा ने हर बच्चे को विश्व के आधारमूर्त , उदाहरणमूर्त बनाया है ।

24
00:29:43.529 --> 00:29:47.000
नशा है ?

25
00:29:47.000 --> 00:29:58.130
थोड़ा-थोड़ा कभी कम हो जाता है ।

26
00:29:58.130 --> 00:30:27.130
सोचो , सबसे अमूल्य जो सारे कल्प में ऐसा मूल्य तख्त किसको नहीं प्राप्त होता ।

27
00:30:30.529 --> 00:31:00.059
वह परमात्म तख्त , लाइट का ताज , स्मृति का तिलक दिया ।

28
00:31:01.329 --> 00:31:08.799
स्मृति आ रही है ना - मैं कौन !

29
00:31:08.799 --> 00:31:13.259
मेरा स्वमान क्या !

30
00:31:13.259 --> 00:31:20.000
नशा चढ़ रहा है ना !

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00:31:22.000 --> 00:31:34.059
कितना भी सारे कल्प में सतयुगी अमूल्य तख्त है

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00:31:34.059 --> 00:31:59.930
लेकिन परमात्म दिलतख्त आप बच्चों को ही प्राप्त होता है ।

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00:32:03.799 --> 00:32:41.329
बापदादा सदा लास्ट नम्बर बच्चे को भी फरिश्ता सो देवता स्वरूप में देखते हैं ।

34
00:32:49.000 --> 00:33:14.529
अभी-अभी ब्राह्मण हैं , ब्राह्मण से फरिश्ता , फरिश्ता से देवता बनना ही है ।

35
00:33:18.460 --> 00:33:28.460
जानते हो अपने स्वमान को ?

36
00:33:32.460 --> 00:34:05.400
क्योंकि बापदादा जानते हैं कि स्वमान को भूलने के कारण ही देहभान , देह अभिमान आता है ।

37
00:34:07.599 --> 00:34:33.260
परेशान भी होते हैं , जब बापदादा देखते हैं देह-अभिमान वा देहभान आता है

38
00:34:33.260 --> 00:34:38.730
तो कितने परेशान होते हैं ।

39
00:34:40.730 --> 00:34:47.400
सभी अनुभवी हैं ना !

40
00:34:53.460 --> 00:35:20.199
स्वमान की शान में रहना और इस शान से परे परेशान रहना , दोनों को जानते हो ।

41
00:35:25.260 --> 00:35:54.059
बापदादा देखते हैं कि सभी बच्चे मैजॉरिटी नॉलेजफुल तो अच्छे बने हैं ,

42
00:36:00.199 --> 00:36:09.800
लेकिन पावर में फुल , पावरफुल नहीं हैं ।

43
00:36:09.800 --> 00:36:17.860
परसेन्टेज में हैं ।

44
00:36:41.199 --> 00:37:43.199
बापदादा ने हर एक बच्चे को अपने सर्व खज़ानों के बालक सो मालिक बनाया,सभी को सर्व खज़ाने दिये हैं, कम ज्यादा नहीं दिये हैं क्योंकि अनगिनत खज़ाना है, बेहद खज़ाना है।

45
00:37:48.599 --> 00:38:06.329
इसलिए हर बच्चे को बेहद का बालक सो मालिक बनाया है ।

46
00:38:13.800 --> 00:38:22.659
तो अभी अपने आपको चेक करो -

47
00:38:31.260 --> 00:38:51.400
बेहद का बाप , हद का बाप नहीं है , बेहद का बाप है , बेहद खज़ाना है ।

48
00:39:00.329 --> 00:39:10.260
तो आपके पास भी बेहद है ?

49
00:39:10.860 --> 00:39:25.800
सदा है कि कभी-कभी कुछ चोरी हो जाता है ?

50
00:39:27.800 --> 00:39:32.659
गुम हो जाता है ?

51
00:39:44.800 --> 00:39:57.460
बाबा क्यों अटेन्शन दिला रहे हैं ?

52
00:40:00.460 --> 00:40:13.599
परेशान न हो , स्वमान की सीट पर सेट रहो , अपसेट नहीं ।

53
00:40:14.130 --> 00:40:26.530
63 जन्म तो अपसेट का अनुभव कर लिया ना !

54
00:40:28.530 --> 00:40:37.000
अभी और करने चाहते हो ?

55
00:40:39.000 --> 00:40:47.730
थक नहीं गये हो ?

56
00:41:08.329 --> 00:41:29.659
अभी स्वमान में रहना अर्थात् अपने ऊंचे ते ऊंचे शान में रहना ।

57
00:41:36.730 --> 00:41:39.860
क्यों ?

58
00:41:39.860 --> 00:41:44.329
कितना समय बीत गया ।

59
00:41:44.329 --> 00:41:51.860
70 साल मना रहे हो ना !

60
00:42:07.599 --> 00:42:23.400
तो स्वयं की पहचान अर्थात् स्वमान की पहचान , स्वमान में स्थित रहना ।

61
00:42:24.000 --> 00:43:06.860
समय अनुसार अभी सदा शब्द को प्रैक्टिकल लाइफ में लाना , शब्द को अण्डरलाइन नहीं करना लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ में अण्डरलाइन करो ।

62
00:43:08.860 --> 00:43:26.599
रहना है , रहेंगे , कर तो रहे हैं … कर लेंगे ।

63
00:43:30.599 --> 00:43:44.199
यह बेहद के बालक और मालिक का बोल नहीं है ।

64
00:43:48.730 --> 00:44:30.400
अभी तो हर एक के दिल से यह अनहद शब्द निकले , पाना था वह पा लिया ।

65
00:44:38.460 --> 00:45:04.400
पा रहे हैं , यह बेहद खज़ाने के बेहद बाप के बच्चे नहीं बोल सकते ।

66
00:45:04.400 --> 00:45:30.659
पा लिया , जब बापदादा को पा लिया , मेरा बाबा कह दिया , मान लिया , जान भी लिया , मान भी लिया ,

67
00:45:32.659 --> 00:45:45.130
तो यह अनहद शब्द पा लिया …

68
00:45:48.059 --> 00:46:36.860
क्योंकि बापदादा जानते हैं कि बच्चे स्वमान कभी-कभी होने के कारण समय के महत्व को भी स्मृति में कम रखते हैं ।

69
00:46:39.929 --> 00:46:57.199
एक स्वयं का स्वमान , दूसरा है समय का महत्व ।

70
00:47:02.599 --> 00:47:38.730
आप साधारण नहीं हो , पूर्वज हो , आप एक-एक के पीछे विश्व की आत्माओं का आधार है ।

71
00:47:47.929 --> 00:48:12.329
सोचो , अगर आप हलचल में आयेंगे तो विश्व की आत्माओं का क्या हाल होगा !

72
00:48:21.929 --> 00:48:36.730
ऐसे नहीं समझो कि जो महारथी कहलाये जाते हैं , उनके पीछे विश्व का आधार है ,

73
00:48:42.329 --> 00:48:57.000
अगर नये-नये भी हैं , क्योंकि आज नये भी बहुत आये होंगे ।

74
00:49:00.199 --> 00:49:13.199
नये हैं , जिसने दिल से माना मेरा बाबा ।

75
00:49:13.929 --> 00:49:16.460
मान लिया है ?

76
00:49:16.460 --> 00:49:20.659
जो नये नये आये हैं वह मानते हैं ?

77
00:49:21.130 --> 00:49:33.199
जानते हैं नहीं , मानते हैं मेरा बाबा वह हाथ उठाओ । लम्बा उठाओ ।

78
00:49:33.530 --> 00:49:36.599
नये नये हाथ उठा रहे हैं ।

79
00:49:36.599 --> 00:49:59.800
पुराने तो पक्के ही हैं ना , जिसने दिल से माना मेरा बाबा और बाप ने भी माना मेरा बच्चा ,

80
00:50:01.800 --> 00:50:14.659
वह सभी जिम्मेवार हैं ।

81
00:50:18.199 --> 00:50:21.260
क्यों ?

82
00:50:21.260 --> 00:50:34.929
जब से आप कहते हो मैं ब्रह्माकुमार , ब्रह्माकुमारी हूँ ,

83
00:50:36.929 --> 00:50:51.659
ब्रह्माकुमार और कुमारी हो वा शिवकुमार शिवकुमारी हो , या दोनों के हो ?

84
00:50:56.400 --> 00:51:02.000
फिर तो बंध गये ।

85
00:51:11.800 --> 00:51:17.000
जिम्मेवारी का ताज पड़ गया ।

86
00:51:17.000 --> 00:51:19.730
पड़ गया है ना ?

87
00:51:19.730 --> 00:51:26.599
पाण्डव बताओ जिम्मेवारी का ताज पड़ा है ?

88
00:51:26.599 --> 00:51:31.659
भारी तो नहीं लग रहा है ?

89
00:51:33.000 --> 00:51:37.059
हल्का है ना !

90
00:51:37.059 --> 00:51:40.329
है ही लाइट का ।

91
00:51:40.460 --> 00:51:47.260
तो लाइट कितनी हल्की होती है ।

92
00:51:51.530 --> 00:52:03.860
तो समय का भी महत्व अटेन्शन में रखो ।

93
00:52:05.199 --> 00:52:11.530
समय पूछ के नहीं आना है ।

94
00:52:13.530 --> 00:52:28.400
कई बच्चे अभी भी कहते हैं , सोचते हैं , कि थोड़ा सा अन्दाज मालूम होना चाहिए ।

95
00:52:30.400 --> 00:52:38.659
चलो 20 साल हैं , 10 साल हैं , थोड़ा मालूम हो ।

96
00:52:40.199 --> 00:52:55.659
लेकिन बापदादा कहते हैं समय का फाइनल विनाश का छोड़ो ,

97
00:52:55.659 --> 00:53:04.860
आपको अपने शरीर के विनाश का पता है ?

98
00:53:06.860 --> 00:53:18.059
कोई है जिसको पता है कि मैं फलाने तारीख में शरीर छोडूंगा है पता ?

99
00:53:19.599 --> 00:53:34.329
और आजकल तो ब्राह्मणों के जाने का भोग बहुत लगाते हो ।

100
00:53:40.929 --> 00:53:46.460
कोई भरोसा नहीं ।

101
00:53:48.059 --> 00:53:58.460
इसलिए समय का महत्व जानो ।

102
00:54:01.059 --> 00:54:10.929
यह छोटा सा युग है आयु में छोटा ,

103
00:54:10.929 --> 00:54:22.460
लेकिन बड़े ते बड़ी प्राप्ति का युग है

104
00:54:27.260 --> 00:54:47.659
क्योंकि बड़े ते बड़ा बाप इस छोटे से युग में ही आता है और बड़े युगो में नहीं आता ।

105
00:54:54.329 --> 00:55:18.199
यही छोटा सा युग है जिसमें सारे कल्प की प्राप्ति का बीज डालने का समय है ।

106
00:55:22.400 --> 00:55:47.659
चाहे विश्व का राज्य प्राप्त करो , चाहे पूज्य बनो , सारे कल्प के बीज डालने का समय यह है

107
00:55:51.000 --> 00:55:57.929
और डबल फल प्राप्त करने का समय है ।

108
00:55:59.000 --> 00:56:14.530
भवि त का फल भी अभी मिलता और प्रत्यक्षफल भी अभी मिलता है ।

109
00:56:18.199 --> 00:56:31.000
अभी-अभी किया , प्रत्यक्ष फल मिलता है और भविष्य भी बनता है ।

110
00:56:37.130 --> 00:56:46.130
ऐसा सारे कल्प में देखो , है कोई युग ऐसा ?

111
00:56:49.260 --> 00:57:15.800
क्योंकि इस समय ही बाप ने हर बच्चे की हथेली पर बड़े ते बड़ी सौगात दी है , याद है सौगात अपनी ?

112
00:57:17.800 --> 00:57:24.599
स्वर्ग का राज़-भाग ।

113
00:57:26.059 --> 00:57:39.199
नई दुनिया के स्वर्ग की गिफ्ट , हर बच्चे की हथेली में दी है ।

114
00:57:39.199 --> 00:57:53.000
इतनी बड़ी गिफ्ट कोई नहीं देता और कभी नहीं दे सकता । अभी मिलती है ।

115
00:58:04.260 --> 00:58:35.000
अभी आप मास्टर सर्वशक्तिवान बनते हो और कोई युग में मास्टर सर्वशक्तिवान का मर्तबा नहीं मिलता है ।

116
00:58:41.460 --> 00:58:58.199
तो स्वयं के स्वमान में भी एकाग्र रहो और समय के महत्व को भी जानो ।

117
00:58:58.199 --> 00:59:21.599
स्वयं और समय , स्वयं को स्वमान है , समय का महत्व है ।

118
00:59:26.599 --> 00:59:31.530
अलबेला नहीं बनना ।

119
00:59:31.530 --> 01:00:03.260
70 साल बीत चुके हैं , अभी अगर अलबेले बनें तो बहुत कुछ अपनी प्राप्ति कम कर देंगे ।

120
01:00:05.260 --> 01:00:18.730
क्योंकि जितना आगे बढ़ते हैं ना उतना एक अलबेलापन ,

121
01:00:18.730 --> 01:00:44.599
बहुत अच्छे हैं , बहुत अच्छे चल जायेंगे , पहुंच जायेंगे , देखना पीछे नहीं रहेंगे , हो जायेगा , यह अलबेलापन और रॉयल आलस्य ।

122
01:00:51.000 --> 01:01:01.260
अलबेलापन और आलस्य ।

123
01:01:26.329 --> 01:01:48.059
कब शब्द है आलस्य , अब शब्द है तुरत दान महापुण्य ।

124
01:01:57.000 --> 01:02:06.929
तो अभी आज पहला टर्न है ना !

125
01:02:17.659 --> 01:02:30.199
तो बापदादा अटेन्शन खिंचवा रहा है ।

126
01:02:35.800 --> 01:02:59.130
इस सीजन में न स्वमान से उतरना है , न समय के महत्व को भूलना है ।

127
01:03:00.059 --> 01:03:09.130
अलर्ट , होशियार , खबरदार ।

128
01:03:17.530 --> 01:03:21.199
प्यारे हैं ना !

129
01:03:21.199 --> 01:03:39.800
जिससे प्यार होता है ना उसकी जरा भी कमज़ोरी-कमी देखी नहीं जाती है ।

130
01:03:41.800 --> 01:04:01.199
सुनाया ना कि बापदादा का लास्ट बच्चा भी है तो उससे भी अति प्यार है ।

131
01:04:03.199 --> 01:04:10.599
बच्चा तो है ना ।

132
01:04:17.260 --> 01:04:36.530
तो अभी इस चलती हुई सीजन में , सीजन भले इन्डिया वालों की है

133
01:04:36.530 --> 01:04:50.059
लेकिन डबल विदेशी भी कम नहीं हैं , बापदादा ने देखा है ,

134
01:04:50.059 --> 01:04:59.530
कोई भी टर्न ऐसा नहीं होता जिसमें डबल विदेशी नहीं हो ।

135
01:04:59.530 --> 01:05:03.530
यह उन्हों की कमाल है ।

136
01:05:03.530 --> 01:05:07.659
अभी हाथ उठाओ डबल विदेशी ।

137
01:05:07.659 --> 01:05:13.400
देखो कितने हैं !

138
01:05:14.599 --> 01:05:23.599
स्पेशल सीजन बीत गई , फिर भी देखो कितने हैं !

139
01:05:25.599 --> 01:05:28.260
मुबारक है ।

140
01:05:28.260 --> 01:05:36.730
भले पधारे , बहुत-बहुत मुबारक है ।

141
01:05:40.929 --> 01:05:47.800
तो सुना अभी क्या करना है ?

142
01:05:47.800 --> 01:06:02.530
इस सीजन में क्या-क्या करना है , वह होम वर्क दे दिया ।

143
01:06:11.130 --> 01:06:41.530
स्वयं को रियलाइज करो , स्वयं को ही करो , दूसरे को नहीं और रीयल गोल्ड बनो

144
01:06:51.260 --> 01:07:09.530
क्योकि बापदादा समझते हैं जिसने मेरा बाबा कहा वह साथ में चले ।

145
01:07:09.530 --> 01:07:15.199
बराती होके नहीं चले ।

146
01:07:16.400 --> 01:07:46.329
बापदादा के साथ श्रीमत का हाथ पकड़ साथ चले और फिर ब्रह्मा बाप के साथ पहले राज्य में आवे ।

147
01:07:49.329 --> 01:07:58.059
मजा तो पहले नये घर में होता है ना ।

148
01:07:58.059 --> 01:08:05.130
एक मास के बाद भी कहते , एक मास पुराना है ।

149
01:08:06.599 --> 01:08:38.460
नया घर , नई दुनिया , नई चाल , नया रसम रिवाज और ब्रह्मा बाप के साथ राज्य में आये ।

150
01:08:40.729 --> 01:08:49.130
सभी कहते हैं ना , ब्रह्मा बाप से हमारा बहुत प्यार है ।

151
01:08:49.130 --> 01:08:54.260
तो प्यार की निशानी क्या होती है ?

152
01:08:54.260 --> 01:09:03.729
साथ रहे , साथ चले , साथ आये ।

153
01:09:05.729 --> 01:09:12.930
यह है प्यार का सबूत ।

154
01:09:16.859 --> 01:09:19.600
पसन्द है ?

155
01:09:19.600 --> 01:09:29.800
साथ रहना , साथ चलना , साथ आना , पसन्द है ?

156
01:09:29.800 --> 01:09:31.800
है पसन्द ?

157
01:09:32.399 --> 01:09:39.600
तो जो चीज़ पसन्द होती है उसको छोड़ा थोड़ेही जाता है !

158
01:09:45.659 --> 01:10:12.000
तो बाप की हर बच्चे के साथ प्रीत की रीत यही है कि साथ चलें , पीछे-पीछे नहीं ।

159
01:10:14.000 --> 01:10:27.260
अगर कुछ रह जायेगा तो धर्मराज की सजा के लिए रूकना पड़ेगा ।

160
01:10:31.729 --> 01:10:45.800
हाथ में हाथ नहीं होगा , पीछे-पीछे आयेंगे ।

161
01:10:45.800 --> 01:10:49.000
मजा किसमें है ?

162
01:10:49.000 --> 01:10:54.199
साथ में है ना !

163
01:11:03.260 --> 01:11:06.659
तो पक्का वायदा है ना ?

164
01:11:06.659 --> 01:11:15.399
पक्का वायदा है साथ चलना है या पीछे-पीछे आना है ?

165
01:11:15.399 --> 01:11:20.199
देखो हाथ तो बहुत अच्छा उठाते हैं ।

166
01:11:23.199 --> 01:11:36.460
हाथ देख करके बापदादा खुश तो होते हैं लेकिन श्रीमत का हाथ उठाना ।

167
01:11:37.659 --> 01:11:47.199
शिवबाबा को तो हाथ होगा नहीं , ब्रह्मा बाबा , आत्मा को भी हाथ नहीं होगा ,

168
01:11:47.199 --> 01:12:02.859
आपको भी यह स्थूल हाथ नहीं होगा , श्रीमत का हाथ पकड़कर साथ चलना ।

169
01:12:07.130 --> 01:12:09.930
चलेंगे ना !

170
01:12:14.000 --> 01:12:17.130
कांध तो हिलाओ ।

171
01:12:17.800 --> 01:12:23.460
अच्छा हाथ हिला रहे हैं ।

172
01:12:26.460 --> 01:12:40.729
बापदादा यही चाहते हैं एक भी बच्चा पीछे नहीं रहे , सब साथ-साथ चलें ।

173
01:12:47.399 --> 01:12:53.859
एवररेडी रहना पड़ेगा।

174
01:13:02.329 --> 01:13:07.130
अच्छा ।

175
01:13:08.329 --> 01:13:22.800
अब बापदादा चारों ओर के बच्चों का रजिस्टर देखता रहेगा ।

176
01:13:30.930 --> 01:13:45.060
वायदा किया , निभाया अर्थात् फायदा उठाया ।

177
01:13:49.930 --> 01:13:56.729
सिर्फ वायदा नहीं करना , फायदा उठाना ।

178
01:14:06.859 --> 01:14:11.399
अच्छा ।

179
01:14:11.399 --> 01:14:43.529
अभी सभी दृढ़ संकल्प करेंगे !

180
01:14:43.529 --> 01:15:00.800
दृढ़ संकल्प की स्थिति में स्थित होकर बैठो , करना ही है , चलना ही है ।

181
01:15:00.800 --> 01:15:05.199
साथ चलना है ।

182
01:15:05.199 --> 01:15:17.659
अभी यह दृढ़ संकल्प अपने से करो , इस स्थिति में बैठ जाओ ।

183
01:15:24.729 --> 01:15:28.800
गे गे नहीं करना ।

184
01:15:28.800 --> 01:15:34.260
करना ही है ।

185
01:20:20.130 --> 01:20:23.260
अच्छा ।

186
01:20:23.260 --> 01:20:29.930
अभी क्या करना है !

187
01:20:33.460 --> 01:21:08.460
सेवा का टर्न का राजस्थान का है , इन्दौर , गुजरात सहयोगी है :- अच्छा जो भी सेवा के लिए आये हैं , सब उठो ।

188
01:21:14.729 --> 01:21:24.800
अच्छा है , आधा क्लास तो सहयोगी है ।

189
01:21:28.060 --> 01:21:44.460
सहयोग देना , देना नहीं है बहुत-बहुत दुआयें लेना है

190
01:21:44.460 --> 01:22:04.729
क्योंकि जिसकी भी सेवा करते हैं , वह खुश होते हैं ।

191
01:22:05.729 --> 01:22:21.800
तो जो खुश होते हैं , उनकी दुआयें ऑटोमेटिकली निकलती हैं , तो कितनी दुआयें जमा की !

192
01:22:22.529 --> 01:22:29.199
राजस्थान है ना । निमित्त राजस्थान है

193
01:22:32.060 --> 01:22:47.859
तो यह गोल्डन चांस मिलता है , पुण्य का खाता जमा करने का ।

194
01:22:55.130 --> 01:22:59.800
अच्छा है , राजस्थान को तो

195
01:23:01.000 --> 01:23:13.930
सहज नशा है कि बापदादा राजस्थान में ही आया है ।

196
01:23:26.600 --> 01:23:33.260
बापदादा को राजस्थान अच्छा लगा ना ।

197
01:23:42.800 --> 01:23:58.930
अच्छा है साथ देने वाले गुजरात तो है ही साथी , जब भी कुछ होता है तो पहले गुजरात ही मददगार बनता है ।

198
01:24:03.800 --> 01:24:15.260
तो गुजरात को टाइटल है एवररेडी ग्रुप।

199
01:24:21.130 --> 01:24:24.600
अच्छा है ।

200
01:24:24.600 --> 01:24:32.399
कभी ना नहीं करते हैं , पहुंच ही जाते हैं ।

201
01:24:33.399 --> 01:24:37.260
कहाँ है सरला ?

202
01:24:42.199 --> 01:24:47.729
अच्छा गुजरात को साथी बनाया है ।

203
01:24:48.930 --> 01:25:06.460
राजस्थान के नजदीक गुजरात ही है , इसलिए ज्यादा पुण्य जमा होता है ।

204
01:25:14.260 --> 01:25:24.859
अभी टर्न निमित्त राजस्थान है ।

205
01:25:25.930 --> 01:25:40.729
तो अगली सीजन बीती , अभी दूसरी सीजन शुरू हुई है , 6 मास बीच में पड़ता है

206
01:25:40.729 --> 01:25:45.800
तो उसमें राजस्थान ने कितने वारिस तैयार किये हैं ?

207
01:25:47.399 --> 01:26:08.859
नाम ही है राजस्थान , बाप भी राजस्थान में आया है , तो बोलो कितने वारिस तैयार विये हैं ?

208
01:26:10.859 --> 01:26:19.930
क्योंकि बापदादा ने कहा था कि वारिस निकालने हैं ,

209
01:26:19.930 --> 01:26:32.000
तो पहला टर्न आपका आया है , निकले हैं , हाथ उठाओ ।

210
01:26:32.000 --> 01:26:45.000
दो निकला हो एक निकला हो या निकलने की उम्मींद हो तो हाथ उठाओ ।

211
01:26:45.000 --> 01:26:54.600
कितने एक या 5 , कितने ?

212
01:27:02.460 --> 01:27:45.199
( जयपुर से 3-4 निकले हैं , पुरूषार्थ जारी है , जोधपुर से 2 निकले हैं ) 5 तो हो गये ना ।

213
01:27:45.199 --> 01:27:52.600
और कितने हैं !

214
01:28:00.600 --> 01:28:12.199
देखेंगे 5 कौन से निकले हैं , तैयार किया उसकी मुबारक है ।

215
01:28:13.460 --> 01:28:19.859
अभी कभी बुलायेंगे उन वारिसों को ।

216
01:28:19.859 --> 01:28:37.399
अच्छा है , जो जोन सेवा में आये , अभी तो पहला टर्न है ना , तो जो जोन सेवा में आये उनको वारिसों की लिस्ट जरूर लानी है ।

217
01:28:40.260 --> 01:28:46.600
ठीक है ना , आपको पसन्द है ना ।

218
01:28:46.600 --> 01:28:49.399
डबल फारेन भी लेकर आना ।

219
01:28:49.460 --> 01:29:10.130
डबल फारेनर्स ने किस देश में कितने वारिस निकाले , देखेंगे क्योंकि अभी 108 की माला तो तैयार करनी है ना ।

220
01:29:13.460 --> 01:29:20.729
बापदादा ने सुना है आबू वाले भी सेवा करते हैं ।

221
01:29:21.130 --> 01:29:38.329
आबू के आस पास भी आबू वाले बहुत सेवा करते हैं , आबू वाले उठो ।

222
01:29:38.859 --> 01:29:51.130
ज्ञान सरोवर , पाण्डव भवन सभी उठो ।

223
01:29:54.329 --> 01:29:56.800
अच्छा ।

224
01:29:56.800 --> 01:30:05.399
आबू निवासी नीचे ऊपर एक ही आबू है ।

225
01:30:05.399 --> 01:30:15.199
तो आबू निवासी कहते हैं कि बापदादा हमको यादप्यार नहीं देते हैं ।

226
01:30:15.199 --> 01:30:30.000
तो आज विशेष आबू निवासियों को चाहे चार भुजायें हैं विशेष ,

227
01:30:30.000 --> 01:30:39.260
दादी को कहते हैं बहुत भुजाधारी है , तो 4 मुख्य भुजायें हैं

228
01:30:39.260 --> 01:30:56.460
तो सभी को बापदादा सेवा के पुण्य के आरम्भ की दुआयें और मुबारक दे रहे हैं

229
01:30:56.460 --> 01:31:13.659
क्योंकि चाहे सेवाधारी कितने भी आये लेकिन फिर भी आबू निवासियों के बिना तो काम नहीं चलता ।

230
01:31:13.659 --> 01:31:27.460
इसीलिए आपके पुण्य के खाते की भण्डारी खुल गई है ।

231
01:31:27.460 --> 01:31:33.130
अभी देखेंगे कितनी-कितनी भरते हैं ।

232
01:31:33.130 --> 01:31:44.859
गवर्मेन्ट वह भण्डारी बंद कराती हैं ना तो बापदादा पुण्य की भण्डारी खोल रहे हैं ।

233
01:31:46.859 --> 01:31:59.000
आबू निवासियों को नशा है ना , खुशी है ना , घर बैठे पुण्य जमा होता रहता है ,

234
01:32:01.000 --> 01:32:16.399
प्यार और निःस्वार्थ से सेवा करते तो पुण्य की भण्डारी भरती जाती , ऑटोमेटिक ।

235
01:32:16.399 --> 01:32:29.060
हाथ से डालने की जरूरत नहीं है सिर्फ प्यार से सेवा करने की बात है ।

236
01:32:29.060 --> 01:32:35.130
तो दिल और चुल पर तो हो ही ।

237
01:32:35.859 --> 01:32:52.199
चुल पर भी हो दिल पर भी हो , अभी आबू वालों ने कितने वारिस निकाले , हिसाब तो पूछेंगे ना !

238
01:32:54.199 --> 01:32:56.729
ऊपर का निमित्त कौन है ?

239
01:32:56.729 --> 01:32:59.659
पाण्डव भवन का ।

240
01:32:59.659 --> 01:33:04.000
कौन है निमित्त !

241
01:33:05.260 --> 01:33:24.800
मृत्युंजय , हाँ आप बताओ , आबू की एरिया से कितने वारिस निकले ?

242
01:33:25.930 --> 01:33:30.600
निकले हैं कि हिसाब करना है !

243
01:33:30.600 --> 01:33:47.800
अभी हिसाब देखना है कितने निकले , चलो दूसरे टर्न में सुनाना और नीचे कौन है !

244
01:33:47.800 --> 01:33:55.930
( भूपाल भाई ) हाँ कितने वारिस निकले , 6 मास तो पक्का हो गया ।

245
01:33:55.930 --> 01:34:04.329
और इसमें सभी ने सेवा कहाँ न कहाँ की है ,

246
01:34:06.329 --> 01:34:19.260
अभी हिसाब नहीं निकाला है चलो कोई हर्जा नहीं , बहुत बिजी रहे होंगे , दूसरे टर्न में पूछेंगे ।

247
01:34:19.260 --> 01:34:23.199
नहीं निकाले हो तो निकालना ।

248
01:34:25.199 --> 01:34:37.199
क्योंकि आबू तो हेड क्वार्टर है ना , तो हेड क्वार्टर का समाचार भी हेड हो ।

249
01:34:39.199 --> 01:34:42.600
अच्छा है ।

250
01:34:44.600 --> 01:35:15.659
इन्दौर होस्टल की कुमारियाँ :- सभी कुमारियाँ 100 ब्राह्मण से उत्तम गाई जाती हैं ।

251
01:35:15.659 --> 01:35:23.060
साधारण कुमारियां नहीं , ब्रह्माकुमारियाँ ।

252
01:35:24.000 --> 01:35:33.800
तो हर एक ब्रह्माकुमारी 100 ब्राह्मण से उत्तम गाई जाती है

253
01:35:33.800 --> 01:35:47.529
तो आप कुमारियों ने कितने स्टूडेन्ट तैयार किये हैं !

254
01:35:47.529 --> 01:36:04.800
वारिस नहीं पूछ रहे हैं , वारिस पीछे पूछेंगे , स्टूडेन्ट कितने तैयार किये हैं या अपने को ही तैयार कर रहे हैं ?

255
01:36:06.199 --> 01:36:12.199
बोलो , आपकी टीचर कहाँ है !

256
01:36:26.859 --> 01:36:38.260
( हॉस्टल की टीचर , करूणा बहन , शकुन्तला बहन ) आगे आओ ।

257
01:36:50.000 --> 01:37:00.930
अच्छा कितने स्टूडेन्ट तैयार हुए हैं ।

258
01:37:36.000 --> 01:39:05.800
( कई कुमारियां , ब्रह्माकुमारियां बनी हैं , उनके माता पिता भी ज्ञान में आ जाते हैं ) कितने स्टूडेन्ट बने हैं , एवरेज बताओ ।

259
01:39:12.859 --> 01:39:31.460
अच्छा है , कुमारियां तैयार होके सेन्टर सम्भालेगी ना , कि नौकरी करेंगी ?

260
01:39:31.930 --> 01:39:44.460
जो सेन्टर सम्भालने के लिए तैयार हो रही हैं , वह हाथ उठाओ ।

261
01:39:47.199 --> 01:39:51.930
यह बहुत हैं ।

262
01:39:51.930 --> 01:39:59.600
तो इन्हों की ट्रेनिंग कब पूरी होगी !

263
01:40:01.800 --> 01:40:19.199
( अभी पढ़ाई चल रही हैं ) कब तक पढ़ेंगी ?

264
01:40:23.460 --> 01:40:41.329
जिसका ग्रेजुएशन पूरा हुआ है वह हाथ उठाओ ।

265
01:40:55.859 --> 01:41:09.800
3-4 हैं , यह 3-4 ही सेन्टर सम्भालेगी या नौकरी करेंगी या दोनों करेंगी !

266
01:41:58.000 --> 01:42:47.729
( ओम प्रकाश भाई ने सुनाया - अभी तक लगभग 450 कुमारियाँ ऐसी हैं , जो पढ़कर सेन्टर सम्भाल रही हैं ) फिर तो अच्छा है ।

267
01:42:47.729 --> 01:43:00.000
अच्छा है , हैण्डस तो बनते हैं , तो टीचर्स को मुबारक हो ।

268
01:43:04.199 --> 01:43:15.930
आप जो भी आई हो , वह पुरूषार्थ में सन्तुष्ट हो ?

269
01:43:16.529 --> 01:43:25.529
अपने पुरूषार्थ में सन्तुष्ट हो , पढ़ाई में सन्तुष्ट हो ?

270
01:43:25.529 --> 01:43:33.329
हाँ या अभी नई नई हैं !

271
01:43:40.199 --> 01:43:45.859
खुश रहती हैं , सन्तुष्ट रहती हैं ?

272
01:43:45.859 --> 01:43:55.060
अच्छा हैण्डस तैयार करो क्योंकि समय कम है , सेवा बहुत है ।

273
01:43:55.060 --> 01:44:01.399
सेवा बहुत-बहुत रही हुई है ।

274
01:44:02.529 --> 01:44:20.000
आपका गीत भी है , समय की पुकार का प्रोग्राम भी करते हो ना , तो समय की पुकार टीचर्स की बहुत है ।

275
01:44:20.800 --> 01:44:26.529
इसलिए जल्दी-जल्दी तैयार करो ।

276
01:44:28.529 --> 01:44:49.000
अच्छा - खुश रहना और खुशी से उड़ती रहना ।

277
01:44:53.460 --> 01:45:17.399
30 देशों से लगभग 300 डबल विदेशी भाई बहिनें आये हुए हैं :-

278
01:45:28.399 --> 01:45:51.060
तो डबल विदेशियों का डबल पुरूषार्थ चलता है , एक है सेवा का , दूसरा है स्वयं का ।

279
01:45:51.060 --> 01:46:05.729
तो टाइटल तो डबल विदेशी अच्छा है , डबल सेवा चल रही है सबकी , इन्डिविज्युअल ।

280
01:46:05.729 --> 01:46:09.130
डबल सेवा ।

281
01:46:11.130 --> 01:46:22.729
किस समय एक चलती , किस समय दूसरी चलती या साथ-साथ चलती है !

282
01:46:22.729 --> 01:46:36.729
जो समझते हैं कि दोनों ही सेवा स्वयं की और साथ की

283
01:46:38.329 --> 01:46:54.329
जो भी आत्मायें हैं उनकी सेवा साथ-साथ चलती है वह हाथ उठाओ ।

284
01:46:55.399 --> 01:47:01.060
मैजारिटी पास हैं ।

285
01:47:01.529 --> 01:47:13.800
ठीक रफ्तार से चलती है और आगे बढ़ाओ

286
01:47:13.800 --> 01:47:28.060
क्योंकि अभी समय के अनुसार एक ही समय डबल सेवा चाहिए ।

287
01:47:28.859 --> 01:47:36.060
विश्व की भी और स्वयं की भी ।

288
01:47:37.130 --> 01:47:50.130
सारे वर्ल्ड में सुख शान्ति की किरणें देना है ।

289
01:47:50.130 --> 01:47:58.600
तो आप सोचो अभी कितनी आत्मायें रही हुई हैं ।

290
01:47:59.729 --> 01:48:10.529
चाहे विदेश में चाहे देश में , तो वह सेवा करनी है ना ।

291
01:48:12.529 --> 01:48:23.930
हर रोज यह चेक करो - कि डबल सेवा हुई ?

292
01:48:24.060 --> 01:48:27.859
कितनी परसेन्ट में हुई ?

293
01:48:27.859 --> 01:48:35.529
पावरफुल हुई या परसेन्टेज में हुई ?

294
01:48:36.130 --> 01:48:49.000
वैसे सभी के लिए यह कह रहे हैं , सिर्फ डबल विदेशियों के लिए नहीं है , भारतवासियों को भी करनी है ।

295
01:48:49.000 --> 01:49:18.600
अभी थोड़ी फास्ट गति करो , फास्ट गति से आत्मायें निकलें , कम से कम इतना तो कहें कि हमारा बाबा आ गया ।

296
01:49:18.600 --> 01:49:29.729
बाबा शब्द तो बोले दिल से । मुख से नहीं , दिल से ।

297
01:49:31.729 --> 01:49:37.260
तो यह अभी चार्ट रखना ।

298
01:49:37.260 --> 01:49:47.260
क्योंकि डबल विदेशी तो डबल रफ्तार में जाने वाले है ना ?

299
01:49:49.260 --> 01:49:56.930
बापदादा खुश होते हैं क्यों ?

300
01:49:56.930 --> 01:50:07.399
बापदादा को एक विशेषता डबल विदेशियों की बहुत प्यारी लगती है ।

301
01:50:08.329 --> 01:50:13.000
जानते हो ना वह !

302
01:50:18.460 --> 01:50:21.529
सच बोलते हैं ।

303
01:50:21.529 --> 01:50:32.130
चाहे गिरते भी हैं तो भी सच बोलते हैं , चढ़ते हैं तो भी सच बोलते हैं ।

304
01:50:33.399 --> 01:50:41.130
तो सच्ची दिल पर साहेब राजी होता है ।

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01:50:43.130 --> 01:51:11.659
अब ऐसा वायुमण्डल बनाओ जो एक दो को देखकर सभी जैसे रेस करते हैं ना, रीस नहीं रेस करते हैं तो कोशिश करते हैं नम्बर आगे जायें।

306
01:51:12.399 --> 01:51:29.659
लेकिन आप खुद तो आगे जाओ लेकिन साथियों को भी ऐसी लिफ्ट दो जो वह भी आगे जायें ।

307
01:51:34.659 --> 01:51:37.460
ठीक है ना ?

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01:51:37.460 --> 01:51:40.600
ऐसी हिम्मत है ना ?

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01:51:40.600 --> 01:51:51.329
हर एक सेन्टर का वायुमण्डल ऐसा हो जैसे मधुबन का वायुमण्डल ।

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01:52:00.460 --> 01:52:23.399
मधुबन वाले सम्पूर्ण नहीं बन गये हैं लेकिन जो भी आते हैं वह मधुबन के वायुमण्डल से खुश हो जाते हैं , ऐसा सेन्टर का वायुमण्डल हो ।

311
01:52:29.859 --> 01:52:38.859
जो गाया हुआ है ना , घर घर स्वर्ग बनेगा ।

312
01:52:40.859 --> 01:52:57.800
तो सब सेन्टर इन्डिया वालों के लिए भी है , तो सब सेन्टर ऐसे हों जो स्वर्ग का नक्शा हो ।

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01:52:58.600 --> 01:53:06.199
तब तो कहेंगे घर-घर स्वर्ग बन गया ।

314
01:53:08.199 --> 01:53:25.529
अच्छा है , फारेनर्स की यह भी विशेषता है अगर दृढ़ संकल्प किया किसी भी बात का , तो वह करके दिखाते हैं ।

315
01:53:26.600 --> 01:53:38.399
अभी इस संस्कार को इस कार्य में लगाओ , करके ही छोड़ना है ।

316
01:53:40.399 --> 01:53:43.130
ठीक है ।

317
01:53:43.130 --> 01:53:46.600
करना है ना ?

318
01:53:46.600 --> 01:53:51.930
तो अगली सीजन में यह रिजल्ट पूछेंगे ।

319
01:53:51.930 --> 01:53:59.260
हर एक सेन्टर स्वर्ग का नक्शा हो ।

320
01:54:03.600 --> 01:54:08.329
अच्छा । मुबारक हो ।

321
01:54:12.329 --> 01:54:58.130
स्प्रीचुअल्टी इन रिसर्चेज डायलाग करने के लिए प्लैनिंग ग्रुप :- ( रमेश भाई ने बापदादा को सुनाया कि हर वर्ग में जो कोई न कोई विशेष किसी विषय पर रिसर्च कर रहे हैं , उन मुख्य लोगों का एक डायलाग करने काविचार है , उसकी मीटिंग चल रही है ) अच्छा कोई प्रोग्राम बनाया ।

322
01:56:05.859 --> 01:56:20.600
अच्छा - हर एक विंग अपनी सेवा करके उसमें से निकालेंगे , फिर उसका डायलाग रखेंगे ,

323
01:56:21.260 --> 01:56:37.600
तो हर एक विंग का बापदादा भी देखेंगे , किस विंग ने क्या निकाला , कौन सी , कौन सी आत्मायें रूचि वाली निकाली ,

324
01:56:38.600 --> 01:56:47.460
अच्छा है फिर सब मिलकर डायलाग करेंगे , बहुत अच्छा ।

325
01:56:47.460 --> 01:57:16.060
( सभी विंग्स और सभी जोन के कनेक्शन से सबके सहयोग से यहाँ डायलाग का कार्यक्रम होगा ) पहले हर एक विंग अपने अपने जोन में करेंगे , फिर उसमें जो निकले उन्हें यहाँ इकट्ठे करो , फिर यहाँ डायलाग करो ।

326
01:57:16.859 --> 01:57:20.329
ठीक है ना ।

327
01:57:25.529 --> 01:57:33.859
साथ-साथ समाचार देते रहे , सहयोग देते रहें ।

328
01:57:40.260 --> 01:57:45.859
करो हर एक वर्ग , देखें किसमें कितने निकलते हैं ।

329
01:57:46.800 --> 01:57:48.930
बहुत अच्छा ।

330
01:57:54.329 --> 01:58:15.060
दिल्ली का प्रोग्राम बहुत अच्छा रहा :- जो दिल्ली से आये हैं वह उठो ।

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01:58:21.260 --> 01:58:32.529
अच्छा इतने आये हैं , भले आये ।

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01:58:33.729 --> 01:58:40.600
दिल्ली का मेला तो अच्छा हुआ , आवाज फैला ।

333
01:58:40.600 --> 01:58:43.060
आवाज फैला ना !

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01:58:47.600 --> 01:58:54.329
क्योंकि टी वी द्वारा भी सन्देश मिला ।

335
01:58:54.329 --> 01:59:06.199
यह तो अच्छा हुआ क्योंकि 10 दिन करने से लोगों को सन्देश मिल गया ।

336
01:59:06.199 --> 01:59:14.800
एक दिन में तो जितने आते हैं उतने ही सुनते हैं सन्देश ।

337
01:59:14.800 --> 01:59:25.399
लेकिन 10 दिन में वैरायटी आई होगी और अपना अपना सन्देश लिया होगा ।

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01:59:25.859 --> 01:59:27.930
तो अच्छा लगा ।

339
01:59:27.930 --> 01:59:31.060
आप सबको अच्छा लगा ?

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01:59:31.060 --> 01:59:36.859
मेला करना अच्छा लगा ?

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01:59:38.859 --> 02:00:18.800
( बहुत अच्छा लगा , बाबा को स्पेशल थैंक्स दिल्ली वालों की तरफ से ) बापदादा ने देखा कि चारों ओर और जोन वालों में भी उमंग है कि ऐसा हम भी करें , तो दिल्ली निमित्त बन गई , औरों को भी प्रेरणा देने के लिए ।

342
02:00:18.800 --> 02:00:27.130
अच्छा हुआ बहुत समय के बाद मेला शुरू किया है ।

343
02:00:27.130 --> 02:00:30.800
पहले तो मेला ही था ना ।

344
02:00:30.800 --> 02:00:46.460
चारों ओर मेले होते थे , अभी बड़े प्रोग्राम हो गये हैं , तो मेला भी वैरायटी अच्छा है ।

345
02:00:47.199 --> 02:00:51.399
तो मुबारक हो सभी दिल्ली वालों को ।

346
02:00:51.399 --> 02:01:01.329
और दिल्ली वालों ने ही किया इसकी भी मुबारक ।

347
02:01:05.460 --> 02:01:35.930
( इन्टरनेशनल था , आबू का भी था ) फारेन वालों को भी मुबारक , आबू वालों को भी मुबारक है ।

348
02:01:37.930 --> 02:01:45.460
अच्छा रहा , बापदादा को समाचार मिला ।

349
02:02:17.859 --> 02:02:24.130
एक दो को देख करके आगे बढ़ते चलो ।

350
02:02:24.130 --> 02:02:39.729
बापदादा यही देखने चाहते हैं कि इतनी करोड़ आत्माओं को कम से कम यह सन्देश तो मिले ।

351
02:02:41.329 --> 02:02:58.260
अभी काफी रहे हुए हैं , जैसे अफ़्रीका ने किया , बापदादा ने सुना कि यूरोप में भी कोई देश नहीं रहा है ना ।

352
02:02:58.260 --> 02:03:14.930
यूरोप और अफ्रीका दोनों तरफ कोई विशेष देश नहीं रहे हैं , ऐसे सब तरफ होना चाहिए ।

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02:03:15.729 --> 02:03:21.399
सन्देश तो पहुंचे ना ।

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02:03:22.529 --> 02:03:28.199
नहीं तो उलाहना बहुत मिलेंगे आपको ।

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सब उल्हना देंगे हमारा बाप आया और आपने हमको सुनाया भी नहीं ।

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उल्हना नहीं रह जाए ।

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02:03:49.199 --> 02:03:53.199
अच्छा ।

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02:03:53.199 --> 02:05:26.529
हैदराबाद , सिकन्द्राबाद से ओल्डएज होम का ग्रुप आया है :- ( फरिश्ता भवन , ओमनिवास बूढ़ा घर बनाया है ।

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02:06:05.659 --> 02:06:40.600
उसमें अनेक वी आई पीज देखने के लिए आते हैं , सभी मिलकर बहुत अच्छा पुरूषार्थ करते हैं ) भिन्न भिन्न सेवाओं से आगे बढ़ रहे हैं , बढ़ते रहो ।

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02:06:41.329 --> 02:06:46.600
अच्छा ।

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02:07:03.729 --> 02:07:32.260
सब तरफ के डबल सेवाधारी बच्चों को , चारों ओर के

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02:07:32.260 --> 02:08:04.529
सदा एकाग्र स्वमान की सीट पर सेट रहने वाले बापदादा के मस्तक मणियां ,

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02:08:06.529 --> 02:08:35.460
चारों ओर के समय के महत्व को जान तीव्र पुरूषार्थ का सबूत देने वाले सपूत बच्चों को ,

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02:08:37.460 --> 02:09:24.460
चारों ओर के उमंग-उत्साह के पंखों से सदा उड़ते , उड़ाने वाले डबल लाइट फरिश्ते बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते ।

