WEBVTT

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आज अखुट अविनाशी खज़ानों के मालिक बापदादा अपने चारों ओर के सम्पन्न बच्चों के जमा का खाता देख रहे हैं ।

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00:15:37.259 --> 00:16:02.129
तीन प्रकार के खाते देख रहे हैं -

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00:16:15.059 --> 00:16:54.600
एक है अपने पुरूषार्थ द्वारा श्रेष्ठ प्रालब्ध जमा का खाता ।

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00:17:03.259 --> 00:17:34.660
दूसरा है सदा सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना ,

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00:17:36.660 --> 00:17:55.059
यह सन्तुष्टता द्वारा दुवाओं का खाता ।

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तीसरा है मन्सा-वाचा-कर्मणा , सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा बेहद के निःस्वार्थ सेवा द्वारा पुण्य का खाता ।

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00:19:21.660 --> 00:19:54.059
आप सभी भी अपने इन तीन खातों को चेक करते ही हो ।

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यह तीनों खाते जमा कितने हैं ,

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00:20:38.059 --> 00:21:05.200
हैं वा नहीं हैं उसकी निशानी हैं -

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00:21:20.599 --> 00:21:59.259
सदा सर्व प्रति , स्वयं प्रति सन्तुष्टता स्वरूप ,

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सर्व प्रति शुभ भावना , शुभ कामना और सदा अपने को खुशनुमः ,

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00:22:53.660 --> 00:23:08.529
खुशनसीब स्थिति में अनुभव करना ।

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00:23:16.130 --> 00:23:54.799
तो चेक करो दोनों खाते की निशानियां स्वयं में अनुभव होती हैं ?

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इन सर्व खज़ानों को जमा करने की चाबी है -

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निमित्त भाव , निर्माण भाव , निःस्वार्थ भाव ।

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चेक करते जाओ और चाबी का नम्बर पता है !

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चाबी का नम्बर है तीन बिन्दी ।

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थ्री डॉट ।

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एक आत्मा बिन्दी , दूसरा बाप बिन्दी , तीसरा - ड्रामा का फुल स्टाप बिन्दी ,

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चाबी तो है ना आप सभी के पास ?

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00:27:39.930 --> 00:27:46.859
खज़ाने को खोलकर देखते रहते हो ना !

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00:28:32.859 --> 00:29:11.799
इन सभी खज़ानों के वृद्धि की विधि है - दृढ़ता ।

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00:29:25.529 --> 00:30:17.460
दृढ़ता होगी तो किसी भी कार्य में यह संकल्प नहीं चलेगा कि होगा या नहीं होगा ।

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00:30:19.460 --> 00:30:45.660
दृढ़ता की स्थिति है - हुआ ही पड़ा है , बना ही पड़ा है ।

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00:30:46.799 --> 00:30:56.529
बनेगा , जमा होगा , नहीं होगा , नहीं ।

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करते तो हैं , होना तो चाहिए , तो तो भी नहीं ।

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00:31:22.200 --> 00:31:49.460
दृढ़ता वाला निश्चयबुद्धि , निश्चिंत और निश्चित अनुभव करेगा ।

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बापदादा ने पहले भी सुनाया है -

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अगर ज्यादा से ज्यादा सर्व खज़ाने का खाता जमा करना है

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00:33:19.799 --> 00:33:34.059
तो मनमनाभव के मन्त्र को यन्त्र बना दो ।

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00:33:51.930 --> 00:34:29.659
जिससे सदा बाप के साथ और पास रहने का स्वतः अनुभव होगा ।

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पास होना ही है , तीन रूप के पास हैं -

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एक है पास रहना ,

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दूसरा है जो बीता सो पास हुआ

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और तीसरा है पास विद ऑनर होना ।

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अगर तीनों पास हैं , तो आप सबको राज्य अधिकारी बनने की फुल पास है ।

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तो फुल पास ले ली है वा लेनी है ?

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00:36:42.860 --> 00:36:49.059
जिन्होंने फुल पास ले ली है वह हाथ उठाओ ।

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लेनी नहीं है , ले ली है ?

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00:36:55.400 --> 00:37:04.860
पहली लाइन वाले नहीं उठाते , लेनी है आपको ?

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सोचते हैं अभी सम्पूर्ण नहीं बने हैं , इसीलिए ।

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00:37:26.460 --> 00:37:42.260
लेकिन निश्चयबुद्धि विजयी हैं ही , या होना है ?

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00:37:50.199 --> 00:38:22.059
अभी तो समय की पुकार , भक्तों की पुकार , अपने मन की आवाज क्या आ रही है ?

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अभी-अभी सम्पन्न और समान बनना ही है ।

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00:39:01.130 --> 00:39:19.130
वा यह सोचते हैं बनेंगे , सोचेंगे , करेंगे … !

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00:39:29.730 --> 00:40:14.400
अब समय के अनुसार हर समय एवररेडी का पाठ पक्का रहना ही है।

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जब मेरा बाबा कहा , प्यारा बाबा , मीठा बाबा मानते ही हैं ।

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तो जो प्यारा होता है उसके समान बनना मुश्किल नहीं होता ।

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बापदादा ने देखा है कि समय प्रति समय समान बनने में

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जो विघ्न पड़ता है वह सबके पास प्रसिद्ध शब्द है , सब जानते हैं अनुभवी हैं ।

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00:42:43.860 --> 00:42:59.260
वह है मैं , मैंपन ।

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00:43:05.260 --> 00:43:24.530
इसलिए बापदादा ने पहले भी कहा है जब भी मैं शब्द बोलते हो

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00:43:25.599 --> 00:43:39.460
तो सिर्फ मैं नहीं बोलो , मैं आत्मा ।

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00:43:40.329 --> 00:43:46.599
जुड़वा शब्द बोलो ।

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00:43:56.730 --> 00:44:29.000
तो मैं कभी अभिमान ले आता , बॉडी कान्सेस वाला मैं , आत्मा वाला नहीं ।

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00:44:31.000 --> 00:44:42.659
कभी अभिमान भी लाता , कभी अपमान भी लाता है ।

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कभी दिलशिकस्त भी बनाता ।

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00:45:06.460 --> 00:45:34.460
इसलिए इस बॉडी कान्सेस के मैंपन को स्वप्न में भी नहीं आने दो ।

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00:46:06.059 --> 00:46:56.599
बापदादा ने देखा है स्नेह की सब्जेक्ट में मैजॉरिटी पास हैं ।

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00:47:05.659 --> 00:47:21.659
आप सभी को किसने यहाँ लाया ?

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00:47:25.599 --> 00:47:39.530
सभी चाहे प्लेन में आये हो , चाहे ट्रेन में , चाहे बस में आये हो ,

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00:47:41.530 --> 00:48:05.000
लेकिन वास्तव में बापदादा के स्नेह के विमान में यहाँ पहुंचे हो ।

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00:48:14.530 --> 00:48:26.460
तो जैसे स्नेह की सबजेक्ट में पास है ,

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00:48:27.599 --> 00:48:54.460
अब यह कमाल करो समान बनने की सबजेक्ट में भी पास विद आनर बनके दिखाओ ।

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00:48:56.000 --> 00:48:58.460
पसन्द है ?

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00:48:58.460 --> 00:49:01.929
समान बनना पसन्द है ?

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00:49:01.929 --> 00:49:11.929
पसन्द है लेकिन बनने में थोड़ा मुश्किल है !

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00:49:15.400 --> 00:49:34.800
समान बन जाओ तो समाप्ति सामने आयेगी ।

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00:49:40.130 --> 00:49:57.599
लेकिन कभी-कभी जो दिल में प्रतिज्ञा करते हो , बनना ही है ।

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00:50:00.860 --> 00:50:19.659
तो प्रतिज्ञा कमज़ोर हो जाती और परीक्षा मजबूत हो जाती है ।

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00:50:28.059 --> 00:50:33.800
चाहते सभी हैं

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लेकिन चाहना एक होती है प्रैक्टिकल दूसरा हो जाता है

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00:51:30.199 --> 00:51:49.400
क्योंकि प्रतिज्ञा करते हो लेकिन दृढ़ता की कमी पड़ जाती है ।

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00:52:03.730 --> 00:52:17.530
समानता दूर हो जाती है , समस्या प्रबल हो जाती है ।

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तो अब क्या करेंगे ?

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00:53:01.860 --> 00:53:19.730
बापदादा को एक बात पर बहुत हंसी आ रही है ।

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00:53:22.460 --> 00:53:27.530
कौन सी बात ?

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हैं महावीर लेकिन जैसे शास्त्रों में हनुमान को महावीर भी कहा है

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लेकिन पूंछ भी दिखाया है ।

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00:54:25.659 --> 00:54:37.000
यह पूंछ दिखाया है मैंपन का ।

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00:54:40.730 --> 00:54:56.730
जब तक महावीर इस पूंछ को नहीं जलायेंगे

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00:54:56.730 --> 00:55:09.460
तो लंका अर्थात् पुरानी दुनिया भी समाप्त नहीं होगी ।

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00:55:17.659 --> 00:55:44.730
तो अभी इस मैं , मैं की पूंछ को जलाओ तब समाप्ति समीप आयेगी ।

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00:56:18.000 --> 00:56:47.000
जलाने के लिए ज्वालामुखी तपस्या , साधारण याद नहीं ।

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00:56:53.659 --> 00:57:04.929
ज्वालामुखी याद की आवश्यकता है ।

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00:57:08.329 --> 00:57:24.199
इसीलिए ज्वाला देवी की भी यादगार है ।

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00:57:26.199 --> 00:57:34.199
शक्तिशाली याद ।

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00:58:04.260 --> 00:58:09.059
तो सुना क्या करना है ?

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00:58:09.059 --> 00:58:18.530
अब यह मन में धुन लगी हुई हो -

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00:58:18.530 --> 00:58:34.599
समान बनना ही है , समाप्ति को समीप लाना ही है ।

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00:58:46.000 --> 00:58:59.599
आप कहेंगे संगमयुग तो बहुत अच्छा है ना तो समाप्ति क्यों हो ?

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00:59:01.599 --> 00:59:33.929
लेकिन आप बाप समान दयालु , कृपालु , रहमदिल आत्मायें हो ,

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00:59:33.929 --> 01:00:03.929
तो आज की दुःखी आत्मायें और भक्त आत्माओं के ऊपर हे रहमदिल आत्मायें रहम करो ।

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01:00:04.460 --> 01:00:10.860
मर्सीफुल बनो ।

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01:00:14.730 --> 01:00:49.800
दुःख बढ़ता जा रहा है , दुःखियों पर रहम कर उन्हों को मुक्तिधाम में तो भेजो ।

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01:01:46.059 --> 01:02:11.460
सिर्फ वाणी की सेवा नहीं लेकिन अभी आवश्यकता है

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01:02:17.400 --> 01:02:32.130
मन्सा और वाणी की सेवा साथ-साथ हो ।

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01:02:32.130 --> 01:02:41.730
एक ही समय पर दोनों सेवा साथ हो ।

99
01:02:50.659 --> 01:03:13.400
सिर्फ चांस मिले सेवा का , यह नहीं सोचो ,

100
01:03:13.400 --> 01:03:43.860
चलते फिरते अपने चेहरे और चलन द्वारा बाप का परिचय देते हुए चलो ।

101
01:03:45.860 --> 01:04:07.260
आपका चेहरा बाप का परिचय दे ।

102
01:04:16.460 --> 01:04:34.400
आपकी चलन बाप को प्रत्यक्ष करती चले ।

103
01:04:52.059 --> 01:05:09.460
तो ऐसे सदा सेवाधारी भव !

104
01:05:40.659 --> 01:05:44.860
अच्छा ।

105
01:05:45.530 --> 01:06:12.260
बापदादा के सामने स्थूल में तो आप सभी बैठे हो

106
01:06:13.199 --> 01:06:52.059
लेकिन सूक्ष्म स्वरूप से चारों ओर के बच्चे दिल में हैं ।

107
01:06:57.460 --> 01:07:09.659
देख भी रहे हैं , सुन भी रहे हैं ।

108
01:07:28.730 --> 01:08:09.260
देश विदेश के अनेक बच्चों ने ईमेल द्वारा , पत्रों द्वारा , सन्देशों द्वारा यादप्यार भेजी है ।

109
01:08:11.260 --> 01:08:29.199
सभी की नाम सहित बापदादा को याद मिली है

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01:08:31.199 --> 01:09:06.329
और बापदादा दिल ही दिल में सभी बच्चों को सामने देख गीत गा रहे हैं - वाह बच्चे वाह !

111
01:09:24.729 --> 01:09:39.659
हर एक को इस समय इमर्ज रूप में याद रहती है ।

112
01:09:43.600 --> 01:09:54.260
सब सन्देशी को अलग-अलग कहते हैं फलाने ने याद भेजी है , फलाने ने याद भेजी है ।

113
01:09:54.260 --> 01:10:10.060
बाप कहते हैं , बाप के पास तो जब संकल्प करते हो ,

114
01:10:10.060 --> 01:10:29.130
साधन द्वारा पीछे मिलती है लेकिन स्नेह का संकल्प साधन से पहले पहुंच जाता है ।

115
01:10:53.260 --> 01:10:55.659
ठीक है ना !

116
01:10:55.659 --> 01:11:02.060
कईयों को याद मिली है ना !

117
01:11:21.130 --> 01:11:24.600
अच्छा ।

118
01:11:29.000 --> 01:11:39.460
अच्छा - पहले हाथ उठाओ जो पहले बारी आये हैं ।

119
01:11:45.600 --> 01:11:50.930
यह सेवा में भी पहले बारी आये हैं ।

120
01:11:50.930 --> 01:12:14.729
अच्छा बापदादा कहते हैं , भले पधारे , आपके आने की मौसम है ।

121
01:12:21.800 --> 01:12:25.399
अच्छा अभी बोलो ।

122
01:12:25.399 --> 01:12:51.800
इन्दौर जोन ( आरती बहन ) के सेवाधारी आये हैं :- ( सबके हाथ में मेरा बाबा का दिल के सेप में सिम्बल है ) हाथ तो बहुत अच्छे हिला रहे हैं , लेकिन दिल को भी हिलाना ।

123
01:13:33.930 --> 01:13:44.800
सिर्फ सदा याद रखना , भूलना नहीं मेरा ।

124
01:13:46.130 --> 01:13:57.529
अच्छा चांस लिया है , बापदादा सदा कहते हैं ,

125
01:13:58.659 --> 01:14:13.600
हिम्मत रखने वालों को बापदादा पदमगुणा मदद देता है ।

126
01:14:13.600 --> 01:14:17.460
तो हिम्मत रखी है ना !

127
01:14:17.460 --> 01:14:20.460
अच्छा किया है ।

128
01:14:20.460 --> 01:14:26.460
इन्दौर जोन है ।

129
01:14:28.460 --> 01:14:51.460
अच्छा है इन्दौर जोन साकार बाबा का लास्ट स्मृति का स्थान है ।

130
01:15:00.000 --> 01:15:03.329
अच्छा है ।

131
01:15:03.600 --> 01:15:09.930
सभी बहुत खुश हो रहे हो ना !

132
01:15:09.930 --> 01:15:15.329
गोल्डन लाटरी मिली है ।

133
01:15:20.859 --> 01:15:32.130
जोन की सेवा मिलने से सभी सेवाधारियों को छुट्टी मिल जाती है

134
01:15:32.130 --> 01:15:44.199
और वैसे संख्या में मिलती है इतने लाओ और अभी देखो इतने हैं ।

135
01:15:44.199 --> 01:15:57.600
यह भी जोन-जोन को अच्छा चांस है ना , जितने लाने हो लाओ ।

136
01:16:02.060 --> 01:16:20.329
तो आप सभी का थोड़े समय में पुण्य का खाता कितना बड़ा इकट्ठा हो गया ।

137
01:16:21.800 --> 01:16:44.859
यज्ञ सेवा दिल से करना अर्थात् अपने पुण्य का खाता तीव्रगति से बढ़ाना

138
01:16:46.859 --> 01:17:00.600
क्योंकि संकल्प , समय और शरीर तीनों सफल किया ।

139
01:17:02.600 --> 01:17:08.859
संकल्प भी चलेगा तो यज्ञ सेवा का ,

140
01:17:08.859 --> 01:17:29.729
समय भी यज्ञ सेवा में व्यतीत हुआ और शरीर भी यज्ञ सेवा में अर्पण किया ।

141
01:17:30.859 --> 01:17:34.859
तो सेवा है या मेवा है ?

142
01:17:37.930 --> 01:17:57.800
प्रत्यक्ष फल किसी के पास यज्ञ सेवा करते कोई व्यर्थ संकल्प आया ?

143
01:17:57.800 --> 01:18:04.529
आया किसके पास ?

144
01:18:06.529 --> 01:18:14.600
खुश रहे और खुशी बांटी ।

145
01:18:21.529 --> 01:18:32.000
तो यह जो यहाँ गोल्डन अनुभव किया ,

146
01:18:33.460 --> 01:18:43.460
इस अनुभव को वहाँ भी इमर्ज कर बढ़ाते रहना ।

147
01:18:43.460 --> 01:18:53.199
कभी भी कोई माया का संकल्प भी आवे

148
01:18:53.199 --> 01:19:03.000
तो मन के विमान से शान्तिवन में पहुंच जाना ।

149
01:19:05.000 --> 01:19:09.600
मन का विमान तो है ना !

150
01:19:09.600 --> 01:19:16.060
सभी के पास मन का विमान है ।

151
01:19:16.060 --> 01:19:37.859
बापदादा ने हर ब्राह्मण को जन्म की सौगात श्रेष्ठ मन का विमान दे दिया है ।

152
01:19:38.529 --> 01:19:46.199
इस विमान में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती ।

153
01:19:46.199 --> 01:19:53.000
स्टार्ट करना है तो मेरा बाबा , बस ।

154
01:19:53.930 --> 01:20:00.060
चलाना आता है ना विमान !

155
01:20:00.600 --> 01:20:09.659
तो जब भी कुछ हो मधुबन में पहुंच जाओ ।

156
01:20:14.600 --> 01:20:30.199
भक्ति मार्ग में चार धाम करने वाले अपने को बहुत भाग्यवान समझते हैं

157
01:20:30.199 --> 01:20:46.060
और मधुबन में भी चार धाम हैं , तो चार धाम किये ?

158
01:20:46.060 --> 01:20:53.329
पाण्डव भवन में देखो , चार धाम हैं ।

159
01:20:53.329 --> 01:21:07.930
जो भी आते हो पाण्डव भवन तो जाते हो ना , एक शान्ति स्तम्भ महाधाम ।

160
01:21:07.930 --> 01:21:20.060
दूसरा बापदादा का कमरा , यह स्नेह का धाम ।

161
01:21:20.060 --> 01:21:32.460
और तीसरा झोपड़ी , यह स्नेहमिलन का धाम

162
01:21:33.260 --> 01:21:47.659
और चौथा - हिस्ट्री हाल , तो आप सभी ने चार धाम किये ?

163
01:21:47.659 --> 01:21:54.529
तो महान भाग्यवान तो हो ही गये ।

164
01:21:57.460 --> 01:22:17.460
अभी किसी भी धाम को याद कर लेना , कब उदास हो जाओ तो झोपड़ी में रूहरिहान करने आ जाना ।

165
01:22:19.460 --> 01:22:30.859
शक्तिशाली बनने की आवश्यकता हो

166
01:22:31.859 --> 01:22:46.199
तो शान्ति स्तम्भ में पहुंच जाना और वेस्ट थॉट्स बहुत तेज हो ,

167
01:22:46.199 --> 01:22:56.930
बहुत फास्ट हों तो हिस्ट्री हाल में पहुंच जाना ।

168
01:23:06.260 --> 01:23:21.529
समान बनने का दृढ़ संकल्प उत्पन्न हो तो बापदादा के कमरे में आ जाना ।

169
01:23:24.729 --> 01:23:33.659
अच्छा है , सभी ने गोल्डन चांस लिया है

170
01:23:33.659 --> 01:23:47.600
लेकिन सदा वहाँ रहते भी गोल्डन चांस लेते रहना ।

171
01:23:49.600 --> 01:23:52.000
अच्छा ।

172
01:23:52.000 --> 01:23:59.199
हिम्मतवान अच्छे हैं ।

173
01:24:06.260 --> 01:24:45.199
कैड ग्रुप :- ( दिल वाले बैठे हैं , बहुत अच्छी कानफरेन्स सबने मिलकर की ) :-

174
01:24:45.199 --> 01:25:06.460
अच्छा किया है , आपस में मीटिंग भी की है और प्रेजीडेंट जो है उसकी भी इच्छा है यह कार्य होना चाहिए ।

175
01:25:06.460 --> 01:25:29.329
तो जैसे उसकी भी इच्छा है , उसको भी साथ मिलाते हुए आगे बढ़ते रहो और साथ-साथ जो ब्राह्मणों की मीटिंग है ,

176
01:25:29.329 --> 01:25:51.260
उसमें भी अपने प्रोग्राम का समाचार सुना करके राय ले लेना तो सर्व ब्राह्मणों की राय से और शक्ति भर जाती है ।

177
01:25:51.260 --> 01:26:14.060
बाकी कार्य अच्छा है , करते चलो , फैलाते चलो और भारत की विशेषता प्रगट करते चलो ।

178
01:26:14.800 --> 01:26:19.260
मेहनत अच्छी कर रहे हो ।

179
01:26:19.260 --> 01:26:36.260
प्रोग्राम भी अच्छा किया है , और दिल वालों ने अपनी बड़ी दिल दिखाई , उसकी मुबारक हो ।

180
01:26:36.260 --> 01:26:41.000
अच्छा ।

181
01:26:41.000 --> 01:27:52.060
डबल विदेशी भाई बहिनें :- अच्छा है हर टर्न में डबल विदेशियों का आना इस संगठन को चार चांद लगा देता है ।

182
01:27:54.060 --> 01:28:07.000
डबल विदेशियों को देखकर सभी को उमंग भी आता है ,

183
01:28:09.000 --> 01:28:38.060
सब डबल विदेशी डबल उमंग उत्साह से आगे उड़ रहे हैं , चल नहीं रहे हैं , उड़ रहे हैं , ऐसे है ।

184
01:28:38.060 --> 01:28:43.800
उड़ने वाले हो या चलने वाले हो ?

185
01:28:46.659 --> 01:28:54.859
जो सदा उड़ता रहता है , चलता नहीं वह हाथ उठाओ ।

186
01:28:58.859 --> 01:29:02.260
अच्छा ।

187
01:29:04.260 --> 01:29:16.930
वैसे भी देखो विमान में उड़ते ही आना पड़ता है ।

188
01:29:18.930 --> 01:29:23.800
तो उड़ने का तो आपको अभ्यास है ही ।

189
01:29:23.800 --> 01:29:43.130
वह शरीर से उड़ने का , यह मन से उड़ने का , हिम्मत भी अच्छी रखी है ।

190
01:29:48.060 --> 01:30:07.260
बापदादा ने देखो कहाँ कोने-कोने से अपने बच्चों को ढूंढ लिया ना !

191
01:30:24.000 --> 01:30:42.000
बहुत अच्छा है , डबल विदेशी है कहलाने में , वैसे तो ओरीज्नल भारत के हैं ।

192
01:30:44.000 --> 01:30:47.729
और राज्य भी कहाँ करना है ?

193
01:30:47.729 --> 01:30:52.729
भारत में करना है ना !

194
01:30:54.729 --> 01:31:07.859
लेकिन सेवा अर्थ पांच ही खण्डों में पहुंच गये हो ।

195
01:31:11.000 --> 01:31:29.260
और पांच ही खण्डों में भिन्न-भिन्न स्थान में सेवा भी अच्छी उमंग-उत्साह से कर रहे हैं ।

196
01:31:31.260 --> 01:31:36.060
विघ्न विनाशक हो ना !

197
01:31:36.060 --> 01:31:49.199
कोई भी विघ्न आवे घबराने वाले तो नहीं हो ना , यह क्यों हो रहा है , यह क्या हो रहा है , नहीं ।

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01:31:49.199 --> 01:32:06.130
जो होता है उसमें हमारी और हिम्मत बढ़ाने का साधन है ।

199
01:32:06.130 --> 01:32:17.399
घबराने का नहीं , उमंग उत्साह बढ़ाने का साधन है ।

200
01:32:22.199 --> 01:32:25.600
ऐसे पक्के हो ना !

201
01:32:25.600 --> 01:32:29.000
पक्के हो ?

202
01:32:29.000 --> 01:32:33.130
या थोड़ा-थोड़ा कच्चे ?

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01:32:33.659 --> 01:32:37.659
नहीं , कच्चा शब्द अच्छा नहीं लगता ।

204
01:32:37.659 --> 01:32:52.260
पक्के हैं , पक्के रहेंगे , पक्के होके साथ चलेंगे ।

205
01:32:54.260 --> 01:32:58.460
अच्छा ।

206
01:33:00.460 --> 01:33:23.529
दादी जानकी आस्ट्रेलिया का चक्कर लगाकर आई हैं , उन्होंने बहुत याद दी है :- बापदादा के पास ईमेल में भी सन्देश आये हैं ,

207
01:33:24.859 --> 01:33:43.800
और बापदादा देखते हैं कि आजकल बड़े प्रोग्राम भी ऐसे हो गये हैं जैसे हुए ही पड़े हैं ।

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01:33:45.800 --> 01:33:52.130
सभी सीख गये हैं ।

209
01:33:53.000 --> 01:34:06.329
सेवा के साधनों को कार्य में लगाने का अच्छा अभ्यास हो गया है ।

210
01:34:06.329 --> 01:34:46.060
बापदादा को आस्ट्रेलिया नम्बरवन दिखाई देता है लेकिन अभी, पहले-पहले नम्बरवन लिया अभी यू.के. थोड़ा नम्बर आगे जा रहा है लेकिन आस्ट्रेलिया को नम्बरवन होना ही है।

211
01:34:46.060 --> 01:34:57.000
यू के नम्बर दो नहीं होगा , वह भी नम्बर वन ही होगा ।

212
01:35:04.329 --> 01:35:13.800
पुराने-पुराने आस्ट्रेलिया के बच्चे बापदादा को याद हैं ।

213
01:35:19.060 --> 01:35:29.659
और बापदादा की लाडली निर्मल आश्रम ,

214
01:35:32.659 --> 01:35:41.199
आप लोग तो कहते हैं निर्मला दीदी , दीदी कहते हो ना ,

215
01:35:41.659 --> 01:35:52.199
लेकिन बापदादा ने शुरू से उसको टाइटल दिया है निर्मल आश्रम ,

216
01:35:52.199 --> 01:36:10.060
जिस आश्रम में अनेक आत्माओं ने सहारा लिया और बाप के बने हैं और बन रहे हैं , बनते जायेंगे ।

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01:36:10.060 --> 01:36:25.130
तो एक-एक आस्ट्रेलिया निवासी बच्चों को विशेष याद है , यह सामने बैठे हैं , आस्ट्रेलिया के हैं ना !

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01:36:25.130 --> 01:36:32.399
आस्ट्रेलिया वाले उठो ।

219
01:36:43.130 --> 01:36:48.600
बहुत अच्छे ।

220
01:36:50.600 --> 01:37:04.329
कितना अच्छा उमंग आ रहा है इन्हों को , विश्व की सेवा के लिए खूब तैयारियां कर रहे हैं ।

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01:37:04.329 --> 01:37:14.729
बापदादा की मदद है और सफलता भी है ही ।

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01:37:25.060 --> 01:37:54.600
अच्छा - अभी क्या दृढ़ संकल्प कर रहे हो ?

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01:38:05.130 --> 01:38:31.800
अभी इसी संकल्प में बैठो कि सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ।

224
01:38:32.600 --> 01:38:42.460
विजय हमारे गले की माला है ।

225
01:38:53.529 --> 01:39:14.399
इस निश्चय और रूहानी नशे में अनुभवी स्वरूप होके बैठो ।

226
01:43:12.060 --> 01:43:17.460
अच्छा ।

227
01:43:17.460 --> 01:43:39.529
चारों ओर के फिकर से फारिग बेफिक्र बादशाहों को ,

228
01:43:41.529 --> 01:44:07.130
सदा बेगमपुर के बादशाह स्वरूप में स्थित रहने वाले बच्चों को ,

229
01:44:12.600 --> 01:44:45.329
सर्व खज़ानों से सम्पन्न रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड सर्व बच्चों को ,

230
01:44:47.329 --> 01:45:15.130
सदा उमंग - उत्साह के पंखों से उड़ती कला वाले बच्चों को ,

231
01:45:16.329 --> 01:45:47.659
सदा समाप्ति को समीप लाने वाले बापदादा समान बच्चों को

232
01:45:48.460 --> 01:46:23.529
बापदादा का यादप्यार , दिल की दुवायें , वरदाता के वरदान और नमस्ते ।

