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आज बापदादा चारों ओर के बच्चों में तीन विशेष भाग्य की रेखायें मस्तक में चमकती हुई देख रहे हैं ।

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सभी के मस्तक भाग्य की रेखाओं से चमक रहे हैं ।

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एक है परमात्म पालना के भाग्य की रेखा ।

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00:16:02.129 --> 00:16:34.330
दूसरी है श्रेष्ठ शिक्षक द्वारा शिक्षा के भाग्य की रेखा ।

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तीसरी है सतगुरू द्वारा श्रीमत के भाग्य की रेखा ।

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वैसो भाग्य आपका अथाह है फिर भी आज यह विशेष तीन रेखायें देख रहे हैं ।

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आप भी अपने मस्तक में चमकती हुई रेखायें अनुभव कर रहे हो ना !

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सबसे श्रेष्ठ है परमात्म प्यार के पालना की रेखा ।

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जैसे बाप ऊंचे ते ऊंचा है तो परमात्म पालना भी ऊंचे ते ऊंची है ।

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यह पालना कितने थोड़ों को प्राप्त होती है , लेकिन आप सब इस पालना के पात्र बने हो ।

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यह पालना सारे कल्प में आप बच्चों को एक ही बार प्राप्त होती है ।

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अब नहीं तो कब प्राप्त नहीं हो सकती ।

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यह परमात्म पालना , परमात्म प्यार , परमात्म प्राप्तियां कोटों में कोई आत्माओं को ही अनुभव होती हैं ।

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आप सभी तो अनुभवी हो ना !

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अनुभव है ?

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पालना का भी अनुभव है , पढ़ाई का भी और श्रीमत का भी ।

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अनुभवी मूर्त हो ।

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तो सदा अपने मस्तक में यह भाग्य का सितारा चमकता हुआ दिखाई देता है , सदा ?

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कि कभी चमकता हुआ सितारा डल भी हो जाता है क्या !

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ढीला नहीं होना चाहिए ।

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00:23:54.400 --> 00:24:17.130
अगर चमकता हुआ सितारा ढीला होता है , उसका कारण क्या है ?

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जानते हो ?

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00:24:34.930 --> 00:25:05.059
बापदादा ने देखा है कि कारण यह होता है , स्मृति स्वरूप नहीं बने हो ।

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00:25:05.930 --> 00:25:37.059
सोचते हो मैं आत्मा हूँ , लेकिन सोचता स्वरूप बनते हो , स्मृति स्वरूप कम बनते हो ।

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जब तक स्मृति स्वरूप सदा नहीं बनते तो स्मृति ही समर्थी दिलाती है ।

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स्मृति स्वरूप ही समर्थ स्वरूप है ।

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00:26:21.200 --> 00:26:38.859
इसलिए भाग्य का सितारा कम चमकता है ।

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अपने आपसे पूछो कि ज्यादा समय सोच स्वरूप बनते हो वा स्मृति स्वरूप बनते हो ?

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00:27:22.059 --> 00:27:45.259
सोच स्वरूप बनने से सोचते बहुत अच्छा हो , मैं यह हूँ , मैं यह हूँ , मैं यह हूँ …

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00:27:46.329 --> 00:28:21.930
लेकिन स्मृति न होने के कारण सोचते , व्यर्थ संकल्प साधारण संकल्प भी मिक्स हो जाते हैं ।

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वास्तव में देखा जाए तो आपका अनादि स्वरूप स्मृति सो समर्थ स्वरूप है ।

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सोचने वाला नहीं , स्वरूप है ।

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00:29:23.400 --> 00:29:46.599
और आदि में भी इस समय के स्मृति स्वरूप की प्रालब्ध प्राप्त होती है ।

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तो अनादि और आदि स्मृति स्वरूप है

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और इस समय अन्त में संगम समय पर भी स्मृति स्वरूप बनते हो ।

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तो आदि अनादि और अन्त तीनों कालों में स्मृति स्वरूप हो ।

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सोचना स्वरूप नहीं हो ।

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इसलिए बापदादा ने पहले भी कहा कि वर्तमान समय अनुभवी मूर्त बनना श्रेष्ठ स्टेज है ।

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सोचते हो आत्मा हूँ , परमात्म प्राप्ति है ,

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00:32:24.329 --> 00:32:42.599
लेकिन समझना और अनुभव करना इसमें बहुत अन्तर है ।

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00:32:46.000 --> 00:33:19.460
अनुभवी मूर्त कभी भी न माया से धोखा खा सकता , न दुःख की अनुभूति कर सकता ।

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यह जो बीच-बीच में माया के खेल देखते हो , या खेल खेलते भी हो ,

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उसका कारण है अनुभवी मूर्त की कमी है ।

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00:34:10.460 --> 00:34:26.730
अनुभव की अथॉरिटी सबसे श्रेष्ठ है ।

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तो बापदादा ने देखा कि कई बच्चे सोचते हैं लेकिन स्वरूप की अनुभूति कम है ।

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आज की दुनिया में मैजॉरिटी आत्मायें देखने और सुनने से थक गये हैं

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लेकिन अनुभव द्वारा प्राप्ति करने चाहते हैं ।

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तो अनुभव कराना , अनुभवी ही करा सकता है ।

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और अनुभवी आत्मा सदा आगे बढ़ती रहेगी , उड़ती रहेगी

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क्योंकि अनुभवी आत्मा में उमंग-उत्साह सदा इमर्ज रूप में रहता है ।

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00:37:29.800 --> 00:37:49.130
तो चेक करो हर प्वाइंट के अनुभवी मूर्त बने हैं ?

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00:37:49.130 --> 00:38:11.800
अनुभव की अथॉरिटी आपके हर कर्म में दिखाई देती है ?

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00:38:15.929 --> 00:38:44.199
हर बोल , हर संकल्प अनुभव की अथॉरिटी से है या सिर्फ समझने के आधार पर है ?

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00:38:46.199 --> 00:39:01.860
एक है समझना , दूसरा है अनुभव करना ।

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00:39:20.260 --> 00:39:42.000
हर सबजेक्ट में , ज्ञान की प्वाइंट्स वर्णन करना , वह तो बाहर के स्पीकर भी बहुत स्पीच कर लेते हैं ।

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00:39:47.199 --> 00:40:13.659
लेकिन हर प्वाइंट का अनुभवी स्वरूप बनना , यह है ज्ञानी तू आत्मा ।

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00:40:18.860 --> 00:40:29.530
योग लगाने वाले बहुत हैं , योग में बैठने वाले बहुत हैं ,

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00:40:31.530 --> 00:41:28.730
लेकिन योग का अनुभव अर्थात् शक्ति स्वरूप बनना और शक्ति स्वरूप की परख यह है

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00:41:30.730 --> 00:42:07.329
कि जिस समय जिस शक्ति की आवश्यकता है , उस समय उस शक्ति को आह्वान कर निर्विघ्न स्वरूप बन जाए ।

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00:42:14.260 --> 00:42:31.929
अगर एक भी शक्ति की कमी है , वर्णन है लेकिन स्वरूप नहीं है

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00:42:33.929 --> 00:42:45.000
तो भी समय पर धोखा खा सकते हैं ।

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00:42:47.000 --> 00:43:01.800
चाहिए सहनशक्ति और आप यूज करो सामना करने की शक्ति ,

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00:43:04.400 --> 00:43:17.199
तो योगयुक्त अनुभवी स्वरूप नहीं कहेंगे ।

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00:43:22.800 --> 00:43:52.059
चार ही सबजेक्ट में स्मृति स्वरूप वा अनुभवी स्वरूप की निशानी क्या होगी ?

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00:43:59.260 --> 00:44:54.130
स्थिति में निमित्त भाव , वृत्ति में सदा शुभ भाव , आत्मिक भाव , निःस्वार्थ भाव ।

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00:44:58.860 --> 00:45:41.929
वायुमण्डल में वा सम्बन्ध-सम्पर्क में सदा निर्माण भाव , वाणी में सदा निर्मल वाणी ।

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यह विशेषतायें अनुभवी मूर्त की हर समय नेचुरल नेचर होगी ।

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00:46:23.929 --> 00:46:30.059
नेचुरल नेचर ।

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00:46:33.130 --> 00:46:59.659
अभी कई बच्चे कभी-कभी कहते हैं कि हम चाहते नहीं हैं यह करें लेकिन मेरी पुरानी नेचर है ।

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00:47:03.260 --> 00:47:26.860
नेचर नेचुरल काम वही करती है , सोचना नहीं पड़ता , लेकिन नेचर नेचुरल काम करती है ।

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00:47:33.059 --> 00:47:47.260
तो अपने को चेक करो - मेरी नेचुरल नेचर क्या है ?

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00:47:52.059 --> 00:48:10.659
अगर कोई भी पुरानी नेचर अंश मात्र भी है ,

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00:48:23.730 --> 00:48:42.460
तो हर समय वह कार्य में आते-आते पक्का संस्कार बन जाता है ।

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00:49:02.599 --> 00:49:42.130
उसको समाप्त करने के लिए पुरानी नेचर , पुराना स्वभाव , पुराना संस्कार को समाप्त करने के लिए चाहते हो

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00:49:42.130 --> 00:49:50.929
लेकिन कर नहीं पाते हो , उसका कारण क्या है ?

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00:49:52.929 --> 00:49:59.460
नॉलेजफुल तो सबमें बन गये हो ,

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00:50:05.000 --> 00:50:34.460
लेकिन जो चाहते हो होना नहीं चाहिए लेकिन हो जाता है , कारण क्या है ?

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00:50:36.460 --> 00:51:19.130
परिवर्तन करने की शक्ति कम है।

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00:51:24.730 --> 00:52:36.599
मैजॉरिटी में दिखाई देता है कि परिवर्तन की शक्ति, समझते हैं, वर्णन भी करते हैं,अगर सभी को परिवर्तन शक्ति की टॉपिक पर लिखने के लिए कहें या भाषण करने के लिए कहें तो बापदादा समझते हैं सभी बहुत होशियार हैं, बहुत अच्छा भाषण भी कर सकते हैं,लिख भी सकते हैं और दूसरा कोई आता है उसको समझाते भी बहुत अच्छा है - कोई हर्जा नहीं, परिवर्तन कर लो।

80
00:52:38.599 --> 00:53:14.400
लेकिन स्वयं में परिवर्तन करने की शक्ति और वर्तमान समय के महत्व को जानते हुए परिवर्तन करने में समय नहीं लगाना चाहिए ।

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00:53:21.460 --> 00:53:34.400
सेकण्ड में परिवर्तन की शक्ति , क्योंकि जब समझते हो - होना नहीं चाहिए ,

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00:53:34.400 --> 00:53:49.530
समझते हुए भी अगर परिवर्तन नहीं कर पाते हो , उसका कारण है -

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00:53:50.860 --> 00:54:02.460
सोचते हो लेकिन स्वरूप नहीं बने हो ।

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00:54:04.460 --> 00:54:23.800
सोचना स्वरूप ज्यादा सारे दिन में बनते हो , स्मृति सो समर्थ स्वरूप वह मैजॉरिटी कम है ।

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00:54:28.460 --> 00:54:49.400
अभी तीव्रगति का समय है , तीव्र पुरूषार्थ का समय है , साधारण पुरूषार्थ का समय नहीं है ,

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00:55:00.599 --> 00:55:11.260
सेकण्ड में परिवर्तन का अर्थ है -

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00:55:16.130 --> 00:55:51.530
स्मृति स्वरूप द्वारा एक सेकण्ड में निर्विकल्प , व्यर्थ संकल्प निवृत्त हो जाए , क्यों ?

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00:55:51.530 --> 00:56:07.800
समय को समाप्ति को समीप लाने वाले निमित्त हो ।

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00:56:15.530 --> 00:56:33.000
तो अभी के समय के महत्व प्रमाण जब जानते भी हो

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00:56:33.000 --> 00:56:44.329
कि हर कदम में पदम समाया हुआ है ,

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00:56:48.059 --> 00:57:04.400
तो बढ़ाने का तो बुद्धि में रखते हो लेकिन गवॉने का भी तो बुद्धि में रखो ।

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00:57:06.400 --> 00:57:23.800
अगर कदम में पदम बनता भी है तो कदम में पदम गंवाते भी तो हो , या नहीं ?

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00:57:34.059 --> 00:57:49.800
तो अभी मिनट की बात भी गई , दूसरों के लिए कहते हो वन मिनट साइलेन्स में रहो

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00:57:51.800 --> 00:58:06.800
लेकिन आप लोगों के लिए सेकण्ड की बात होनी चाहिए ।

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00:58:10.059 --> 00:58:21.059
जैसे हाँ और ना सोचने में कितना टाइम लगता है ?

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00:58:21.659 --> 00:58:26.260
सेकण्ड ।

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00:58:26.260 --> 00:58:37.130
तो परिवर्तन शक्ति इतनी फास्ट चाहिए ।

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00:58:37.130 --> 00:58:54.260
समझा ठीक है , नहीं ठीक है , ना ठीक को बिन्दी और ठीक को प्रैक्टिकल में लाना है ।

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00:59:06.460 --> 00:59:18.000
अभी बिन्दी के महत्व को कार्य में लगाओ ।

100
00:59:24.000 --> 00:59:29.659
तीन बिन्दियों को तो जानते हो ना !

101
00:59:29.659 --> 00:59:41.000
लेकिन बिन्दी को समय पर कार्य में लगाओ ।

102
00:59:49.530 --> 01:00:02.400
जैसे साइंस वाले सब बात में तीव्रगति कर रहे हैं ,

103
01:00:14.800 --> 01:00:28.059
और परिवर्तन की शक्ति भी ज्यादा कार्य में लगा रहे हैं ।

104
01:00:31.260 --> 01:00:54.599
तो साइलेन्स की शक्ति वाले अभी लक्ष्य रखो अगर परिवर्तन करना है , नॉलेजफुल हो

105
01:00:54.599 --> 01:01:04.860
तो अभी पावरफुल बनो , सेकण्ड की गति से ।

106
01:01:05.659 --> 01:01:17.730
कर रहे हैं, हो जायेंगे… कर लेंगे…, नहीं।

107
01:01:27.400 --> 01:01:35.000
हो सकता है या मुश्किल है ?

108
01:01:39.730 --> 01:01:51.130
क्योंकि लास्ट समय सेकण्ड का पेपर आना है , मिनट का नहीं ,

109
01:01:53.130 --> 01:02:13.929
तो सेकण्ड का अभ्यास बहुतकाल का होगा तब तो सेकण्ड में पास विद आनर बनेंगे ना !

110
01:02:20.599 --> 01:02:41.530
परमात्म स्टूडेन्ट हैं , परमात्म पढ़ाई पढ़ रहे हैं , तो पास विद ऑनर बनना ही है ना !

111
01:02:41.530 --> 01:02:49.400
पास मार्क्स लिया तो क्या हुआ ।

112
01:02:53.000 --> 01:02:59.130
पास विद ऑनर ।

113
01:02:59.130 --> 01:03:04.059
क्या लक्ष्य रखा है ?

114
01:03:04.059 --> 01:03:22.000
जो समझते हैं पास विद ऑनर बनना है वह हाथ उठाओ , पास विद ऑनर , ऑनर शब्द अण्डरलाइन करना ।

115
01:03:22.000 --> 01:03:25.659
अच्छा ।

116
01:03:25.659 --> 01:03:37.260
तो अभी क्या करना पड़ेगा ?

117
01:03:37.260 --> 01:03:47.059
मिनट मोटर तो कामन है , सेकण्ड का काम है अभी ।

118
01:03:52.800 --> 01:04:01.800
हाँ पंजाब वाले , सेकण्ड का मामला है अभी ।

119
01:04:03.800 --> 01:04:08.199
इसमें नम्बरवन कौन होगा?पंजाब।

120
01:04:16.460 --> 01:04:21.199
क्या बड़ी बात है ।

121
01:04:24.130 --> 01:04:54.400
जितना फलक से कहते हो , बहुत अच्छा कहते हो , फलक से कहते हो , बापदादा जब सुनते हैं बहुत खुश होते हैं , कहते हो - क्या बड़ी बात है , बापदादा साथ है ।

122
01:05:07.260 --> 01:05:32.199
तो साथ तो अथॉरिटी है , तो क्या करना है अभी ?

123
01:05:32.199 --> 01:05:39.260
तीव्र बनना पड़ेगा अभी ।

124
01:05:41.260 --> 01:05:51.929
सेवा तो कर रहे हो , और सेवा के बिना और करेंगे भी क्या ?

125
01:05:51.929 --> 01:05:57.000
खाली बैठेंगे क्या ?

126
01:05:59.000 --> 01:06:10.130
सेवा तो ब्राह्मण आत्माओं का धर्म है , कर्म है ।

127
01:06:12.130 --> 01:06:30.059
लेकिन अभी सेवा के साथ-साथ समर्थ स्वरूप ,

128
01:06:33.400 --> 01:06:49.130
जितना सेवा का उमंग-उत्साह दिखाया है , बापदादा खुश है , मुबारक भी देते हैं ।

129
01:06:50.460 --> 01:07:01.730
लेकिन जैसे सेवा का ताज मिला है ना , ताज पहना हुआ है देखो कितना अच्छा लग रहा है ।

130
01:07:02.329 --> 01:07:16.199
अभी स्मृति स्वरूप बनने का ताज पहनके दिखाना ।

131
01:07:18.199 --> 01:07:21.000
यूथ ग्रुप है ना !

132
01:07:21.000 --> 01:07:23.929
तो कमाल क्या करेंगे ?

133
01:07:23.929 --> 01:07:37.000
सेवा में भी नम्बरवन और समर्थ स्वरूप में भी नम्बरवन।

134
01:07:44.730 --> 01:07:57.000
सन्देश देना भी ब्राह्मण जीवन का धर्म और कर्म है

135
01:08:00.659 --> 01:08:29.529
लेकिन अभी बापदादा इशारा दे रहा है कि परिवर्तन की मशीनरी तीव्र करो ।

136
01:08:37.000 --> 01:08:48.930
नहीं तो पास विद आनर होने में मुश्किल हो जायेगा ।

137
01:08:48.930 --> 01:08:54.060
बहुतकाल का अभ्यास चाहिए ।

138
01:08:54.060 --> 01:09:01.800
सोचा और किया ।

139
01:09:07.000 --> 01:09:26.659
सिर्फ सोचना स्वरूप नहीं बनो , समर्थ स्मृति सो समर्थ स्वरूप बनो ।

140
01:10:01.399 --> 01:10:13.529
व्यर्थ को तीव्र गति से समाप्त करो ।

141
01:10:15.529 --> 01:10:42.260
व्यर्थ संकल्प , व्यर्थ बोल , व्यर्थ कर्म , व्यर्थ समय और सम्बन्ध-सम्पर्क में भी व्यर्थ विधि , रीति सब समाप्त करो ।

142
01:10:47.659 --> 01:11:03.130
जब ब्राह्मण आत्मायें तीव्रगति से यह स्व के व्यर्थ की समाप्ति करेंगे

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01:11:03.130 --> 01:11:24.460
तब आत्माओं की दुआयें और अपने पुण्य का खाता तीव्रगति से जमा करेंगे ।

144
01:11:32.800 --> 01:11:47.199
बापदादा ने पहले भी सुनाया कि बापदादा तीन खाते चेक करते हैं ।

145
01:11:49.199 --> 01:11:59.659
पुरूषार्थ की गति का खाता , दुआओं का खाता , पुण्य का खाता

146
01:11:59.659 --> 01:12:21.930
लेकिन मैजॉरिटी के खाते अभी भरपूर कम हैं ।

147
01:12:30.130 --> 01:13:05.399
इसलिए बापदादा आज यही स्लोगन याद दिला रहे हैं कि अब तीव्र बनो , तीव्र पुरूषार्थी बनो ।

148
01:13:05.399 --> 01:13:11.130
तीव्र गति से समाप्ति वाले बनो ।

149
01:13:11.130 --> 01:13:27.399
तीव्र गति से मन्सा द्वारा वायुमण्डल परिवर्तन वाले बनो ।

150
01:13:42.060 --> 01:13:54.130
बापदादा एक बात में सभी बच्चों पर बहुत खुश भी है ।

151
01:13:55.000 --> 01:13:59.529
किस बात में ?

152
01:14:01.529 --> 01:14:19.000
प्यार सबका बाप से जिगरी है , इसकी मुबारक है ।

153
01:14:21.000 --> 01:14:31.800
लेकिन बोलूं क्या करो !

154
01:14:31.800 --> 01:14:42.199
इस सीजन की समाप्ति तक , अभी तो टाइम पड़ा है ,

155
01:14:42.199 --> 01:15:02.800
इस सीजन के समाप्त तक तीव्र गति का कुछ न कुछ जलवा दिखाओ ।

156
01:15:02.800 --> 01:15:05.930
पसन्द है ?

157
01:15:05.930 --> 01:15:09.529
पसन्द है ?

158
01:15:09.529 --> 01:15:19.930
जो समझते हैं लक्ष्य और लक्षण दोनों ही स्मृति में रखेंगे वह हाथ उठाओ ।

159
01:15:19.930 --> 01:15:32.460
लक्ष्य और लक्षण दोनों सामने रखेंगे वह हाथ उठाओ ।

160
01:15:32.460 --> 01:15:51.260
डबल फारेनर्स भी रखेंगे , टीचर्स भी रखेंगे और यूथ भी रखेगा , और पहली लाइन वाले भी रखेंगे ।

161
01:15:51.260 --> 01:16:07.659
तो पदम, पदम,पदमगुणा इनएडवांस मुबारक हो।

162
01:16:14.800 --> 01:16:21.399
अच्छा अभी क्या करना है ?

163
01:16:25.260 --> 01:16:58.460
सेवा का टर्न पंजाब का है :- आधा क्लास तो पंजाब है ।

164
01:16:59.399 --> 01:17:03.130
बहुत अच्छा किया है ।

165
01:17:03.130 --> 01:17:19.130
सेवा में एवररेडी बन पहुंच गये हो, इसकी मुबारक है।

166
01:17:25.130 --> 01:17:36.930
अच्छा , पंजाब वाले क्या कोई नया प्लैन बना रहे हैं ?

167
01:17:36.930 --> 01:17:49.659
जो किसने नहीं किया हो , कोई ऐसा प्लैन टच होता है ?

168
01:17:51.000 --> 01:17:54.460
होता है ।

169
01:17:54.460 --> 01:18:00.800
सुबह को हो जायेगा ।

170
01:18:02.800 --> 01:18:27.130
ऐसा करके दिखाओ , जो सब ब्राह्मण थैंक्स भी दें , मुबारक भी दें , वाह ! वाह ! के गीत भी गायें ।

171
01:18:29.130 --> 01:18:39.399
अभी तक जो किया है , वह तो कर ही रहे हैं , अच्छा कर रहे हैं ।

172
01:18:39.399 --> 01:19:04.600
बापदादा सेवा के समाचार सुनते रहते हैं और सुनकर दिल में दिल का प्यार भी देते हैं ।

173
01:19:11.000 --> 01:19:18.659
अभी कुछ और नवीनता करके दिखाओ ।

174
01:19:34.199 --> 01:19:41.930
पंजाब को शेर कहा जाता है ना ।

175
01:19:47.060 --> 01:20:14.659
तो ऐसी कोई गजघोर करके दिखाओ जो सबकी नज़र बापदादा की तरफ सहज ही आ जाए ।

176
01:20:27.930 --> 01:20:30.000
हो जायेगा ।

177
01:20:30.000 --> 01:20:48.529
बापदादा को संकल्प है , पंजाब कोई नवीनता करेगा ही ।

178
01:20:55.260 --> 01:21:11.600
अभी भी गोल्डन चांस मिला है , सेवा का गोल्डन चांस लिया और हर साल लेते भी रहते हैं

179
01:21:11.600 --> 01:21:27.399
और अच्छे हिम्मत उमंग से सभी मिल करके कर भी रहे हैं ।

180
01:21:36.260 --> 01:21:43.399
संख्या तो बहुत अच्छी आई है ।

181
01:22:08.060 --> 01:22:14.130
अच्छे-अच्छे महावीर हैं ।

182
01:22:27.000 --> 01:22:40.460
देखो ब्रह्मा बाप का भी पंजाब से प्यार रहा तो पंजाब में पहुंच गये थे ।

183
01:22:42.460 --> 01:22:51.859
तो ब्रह्मा बाप का भी विशेष प्यार देखा ।

184
01:23:00.399 --> 01:23:11.529
सभी महारथियों का भी पंजाब में पांव पड़ा है ।

185
01:23:15.130 --> 01:23:21.729
कोई ऐसी नवीनता करके दिखाओ ।

186
01:23:30.329 --> 01:23:35.060
कर सकते हैं ।

187
01:23:35.399 --> 01:23:44.800
पंजाब की पांच नदियां मशहूर हैं ।

188
01:23:56.600 --> 01:24:11.399
बापदादा तो देख रहे हैं कि अच्छे ब्रह्मा बाप की पालना वाले भी हैं ।

189
01:24:13.399 --> 01:24:22.529
तो पालना का रिटर्न तो देना पड़ेगा ना ।

190
01:24:30.600 --> 01:24:47.399
अच्छा है बापदादा की बहुत बढ़िया उम्मींद है पंजाब में ।

191
01:24:55.000 --> 01:24:57.859
करेंगे ना !

192
01:24:57.859 --> 01:25:09.529
कोई ऐसा कार्य करके दिखाओ जो सबकी नज़र बाप की तरफ पड़ जाए ।

193
01:25:11.529 --> 01:25:16.460
है पाण्डवों में हिम्मत है ?

194
01:25:16.460 --> 01:25:23.460
पाण्डव हिम्मत वाले हैं ?

195
01:25:27.529 --> 01:25:39.060
अच्छा है , माताओं की संख्या भी काफी है , टीचर्स भी बहुत हैं ।

196
01:25:44.329 --> 01:25:49.130
अच्छा - प्लैन बनाना आपस में ।

197
01:25:49.130 --> 01:25:54.329
पाण्डव प्लैन बनाना ।

198
01:25:54.329 --> 01:26:00.399
कमाल का प्लैन बनाना ।

199
01:26:05.659 --> 01:26:09.529
अच्छा ।

200
01:26:17.930 --> 01:27:15.060
सारे भारत से युवा पद यात्री आये हैं :- अच्छा - बापदादा ने स्वागत समारोह भी देखा

201
01:27:17.060 --> 01:27:28.600
और जो युवा वर्ग वालों ने सेवा की , वह समाचार भी सुना ।

202
01:27:28.600 --> 01:27:57.399
तो सेवा तो बहुत अच्छी की है और हिम्मत और उमंग से अथक बन सेवा की है , यह भी सर्टीफिकेट अच्छा दिखाया है ।

203
01:28:01.859 --> 01:28:16.930
जहाँ उमंग-उत्साह होता है वहाँ सफलता होती ही है ।

204
01:28:16.930 --> 01:28:31.800
तो देखा गया कि विशेष सब यात्राओं में उमंग-उल्हास अच्छा रहा ।

205
01:28:33.800 --> 01:28:47.329
उमंग-उत्साह के कारण निरोगी भी रहे , निर्विघ्न भी रहे ।

206
01:28:53.060 --> 01:29:28.859
अभी जैसे यात्रा के समय निर्विघ्न रहे , ऐसे इस ब्राह्मण जीवन में सदा निर्विघ्न , निर्विकल्प , निरव्यर्थ संकल्प ,

207
01:29:28.859 --> 01:29:42.800
अगर सभी कुमार एक मास भी यह बहुत अच्छा चार्ट दिखायें ,

208
01:29:42.800 --> 01:30:00.199
तो बापदादा और सुनहरी पुष्पों की वर्षा करेंगे ।

209
01:30:02.199 --> 01:30:10.859
बिल्कुल स्वप्न मात्र भी निर्विघ्न ।

210
01:30:10.859 --> 01:30:29.060
बोल और कर्म तो बड़ी चीज़ है लेकिन स्वप्न मात्र भी निर्विघ्न हो ।

211
01:30:31.930 --> 01:30:54.659
स्व को देखो , समय को देखो , दूसरे की कमी को देखो ही नहीं ,

212
01:30:56.199 --> 01:31:06.600
अगर देखते भी हो तो अपने मन में नहीं रखो ।

213
01:31:09.600 --> 01:31:21.529
अगर किसी की कमज़ोरी मन में रखेंगे , तो बाप कैसे याद आयेगा !

214
01:31:21.529 --> 01:31:29.529
कमज़ोरी के साथ बाप नहीं ठहरता ।

215
01:31:31.529 --> 01:31:49.260
एक सेकण्ड की तीव्रगति का , सभी यूथ जैसे उमंग उत्साह से यात्रा में सफल हुए ,

216
01:31:49.260 --> 01:32:04.729
वैसे इस विषय पर सफल होके दिखाओ , फिर सेरीमनी बापदादा मनायेगा ।

217
01:32:08.329 --> 01:32:12.930
करेंगे ! ऐसी हिम्मत है ?

218
01:32:12.930 --> 01:32:14.930
पक्का ?

219
01:32:14.930 --> 01:32:24.199
क्योंकि यहाँ से जाने के बाद , माया सुन रही है ।

220
01:32:25.399 --> 01:32:34.930
माया को पता है कि यह प्रामिस कर रहे हैं ।

221
01:32:41.260 --> 01:33:12.859
अगर कोई भी कमी देखी तो विधिपूर्वक अपने जो निमित्त बड़े हैं उन्हों को सुना दिया लेकिन पीठ नहीं करो , उसको सजा मिली , नहीं मिली , क्या कदम उठाया गया , क्यों नहीं उठाया गया !

222
01:33:12.859 --> 01:33:17.659
इस व्यर्थ में नहीं जाओ ।

223
01:33:22.659 --> 01:33:39.399
हिसाब-किताब बापदादा देख रहे हैं , देखते रहते हैं ।

224
01:33:45.930 --> 01:33:54.529
तो निर्विघ्न भव का वरदान जीवन में लायेंगे ?

225
01:33:54.529 --> 01:33:56.529
लायेंगे ?

226
01:33:56.529 --> 01:34:05.930
टी वी में इनका फोटो निकालो ।

227
01:34:08.600 --> 01:34:16.930
देखो , सभी सेवाकेन्द्र से , मैजॉरिटी सब जोन से हैं ।

228
01:34:16.930 --> 01:34:40.600
अगर आप जो भी हैं , बहनें भी हैं , भाई भी हैं , अगर आप स्वयं हर जोन में करके दिखायेंगे तो आपकी वृत्ति का वायुमण्डल फैलेगा ।

229
01:34:40.600 --> 01:34:48.659
यह नहीं सोचना वायुमण्डल फैला या नहीं फैला , यह नहीं सोचना ।

230
01:34:48.659 --> 01:34:53.729
अवश्य फैलेगा ।

231
01:34:55.729 --> 01:35:09.729
तो यूथ ऐसी कमाल करके दिखायें तो गवर्मेन्ट को रिजल्ट दिखायेंगे ।

232
01:35:11.729 --> 01:35:21.329
स्वप्न मात्र भी पास विद ऑनर हो ।

233
01:35:28.000 --> 01:35:43.729
बाकी जो सेवा की , वह अच्छी की है , सबको पसन्द भी आई , आपकी सेवा बाप को भी पसन्द है

234
01:35:43.729 --> 01:35:51.659
लेकिन आगे के लिए कोई कमाल करके दिखाओ ।

235
01:36:06.460 --> 01:36:12.000
संख्या भी अच्छी है ।

236
01:36:16.930 --> 01:36:30.199
देखो यह अनुभव करके देखा कि सेवा के उमंग-उत्साह में रहे तो चार्ट ठीक रहा ना ।

237
01:36:33.329 --> 01:36:43.399
कोई खिटखिट नहीं हुई ना , न शरीर की , न विघ्न की , मैजॉरिटी ।

238
01:36:45.399 --> 01:37:02.460
तो ऐसे ही उमंग-उत्साह से कोई भी संकल्प करेंगे तो विजय है ही है ।

239
01:37:07.000 --> 01:37:18.529
तो याद रखना - यूथ का स्लोगन है - करना ही है ।

240
01:37:18.529 --> 01:37:27.000
बुरा नहीं करना , अच्छा करना ।

241
01:37:32.329 --> 01:37:36.729
विजयी बनना ही है ।

242
01:37:36.729 --> 01:37:44.729
सफलता का सितारा बनना ही है ।

243
01:37:46.729 --> 01:37:52.329
ठीक है । अच्छा ।

244
01:37:57.130 --> 01:38:22.260
डबल विदेशी :- बहुत अच्छा सितारा हिला रहे हैं ।

245
01:38:25.800 --> 01:38:41.130
बापदादा कहते हैं डबल विदेशी मधुबन का विशेष श्रृंगार हैं ।

246
01:38:41.130 --> 01:38:51.729
डबल विदेशी आते हैं तो मधुबन का श्रृंगार हो जाता है ।

247
01:39:00.460 --> 01:39:14.600
अभी देखेंगे तीव्र गति के पुरूषार्थ में नम्बरवन कौन सा जोन जाता है।

248
01:39:16.600 --> 01:39:22.930
मधुबन जायेगा , मधुबन वाले बैठे हैं ना ।

249
01:39:22.930 --> 01:39:28.460
मधुबन वाले उठो ।

250
01:39:35.000 --> 01:39:37.329
अच्छा ।

251
01:39:37.329 --> 01:39:42.060
मधुबन वाले तो बहुत हैं ।

252
01:39:42.060 --> 01:39:46.000
तो क्या करेगा मधुबन ।

253
01:39:46.000 --> 01:39:52.000
तीव्र पुरूषार्थ में नम्बरवन।

254
01:39:52.000 --> 01:39:54.199
है !

255
01:39:54.199 --> 01:39:56.199
हिम्मत है ?

256
01:39:56.199 --> 01:39:58.460
हिम्मत है ?

257
01:39:58.460 --> 01:40:03.329
हिम्मत वाले हाथ उठाओ ।

258
01:40:05.329 --> 01:40:22.000
अभी मधुबन की कोई भी , ऐसी कोई भी बात बापदादा के पास नहीं आयेगी , यह हुआ , यह हुआ नहीं आयेगा ।

259
01:40:22.000 --> 01:40:30.859
अच्छा हुआ , अच्छा हुआ , अच्छा हुआ … ठीक है ।

260
01:40:30.859 --> 01:40:32.859
पक्का ?

261
01:40:32.859 --> 01:40:34.859
पक्का ?

262
01:40:34.859 --> 01:40:37.529
देखो ।

263
01:40:37.529 --> 01:40:42.859
हाथ उठाया है या मन का हाथ उठाया है ?

264
01:40:42.859 --> 01:40:47.659
मन का हाथ उठाया है ना ?

265
01:40:47.659 --> 01:40:54.859
थोड़ों ने अभी हाथ उठाया ।

266
01:40:54.859 --> 01:41:01.130
मन का हाथ उठा रहे हो ना ।

267
01:41:03.130 --> 01:41:10.600
अभी बापदादा हर मास की रिजल्ट पूछेंगे ।

268
01:41:10.600 --> 01:41:12.600
पूछें ?

269
01:41:12.600 --> 01:41:14.600
पूछें ?

270
01:41:17.460 --> 01:41:21.130
बहुत अच्छा ।

271
01:41:21.130 --> 01:41:34.859
मधुबन वालों का स्वमान , सारे विदेश में , इन्डिया में हैं ।

272
01:41:35.659 --> 01:41:43.329
मधुबन वासियों को बहुत ऊंची नज़र से देखते हैं ।

273
01:41:43.329 --> 01:41:50.399
अति स्नेह की नज़र से देखते हैं ।

274
01:41:52.399 --> 01:41:59.930
तो ऐसा ही रिजल्ट सुनते रहेंगे अभी ।

275
01:42:02.859 --> 01:42:21.260
मन में तो सभी जानते हैं क्या करना है , क्या नहीं करना है , बापदादा क्या चाहते हैं , समझते तो सभी हैं , अभी सिर्फ करना है ।

276
01:42:21.260 --> 01:42:30.000
नॉलेजफुल हो लेकिन अभी पावरफुल बनना ।

277
01:42:47.930 --> 01:43:16.199
अच्छा डबल विदेशी बापदादा को बहुत प्यारे लगते हैं , प्यारे तो सभी हैं लेकिन इसीलिए प्यार करते कि सच्ची दिल वाले हैं ।

278
01:43:17.329 --> 01:43:32.060
महसूस जल्दी करते हैं लेकिन परिवर्तन की शक्ति अभी और एड करनी है ।

279
01:43:34.060 --> 01:43:37.859
एड करेंगे ना ।

280
01:43:37.859 --> 01:43:43.729
परिवर्तन की शक्ति एडीशन करो ।

281
01:43:43.729 --> 01:44:02.859
बाकी महसूस करते हो , जानते हो , इसीलिए बाबा का प्यार है कि सच्चे हैं लेकिन परिवर्तन करने की थोड़ी और एडीशन करो ।

282
01:44:07.329 --> 01:44:12.600
ठीक है सभी खुश हैं ?

283
01:44:14.000 --> 01:44:24.399
खुशी में नाचते रहते , और बाप के गुणों के गीत गाते रहते ।

284
01:44:26.399 --> 01:44:30.930
बहुत अच्छा ।

285
01:44:32.930 --> 01:44:44.859
अच्छा । जो पहली बारी आये हैं वह हाथ उठाओ ।

286
01:44:46.199 --> 01:44:52.060
खड़े हो जाओ ।

287
01:45:02.729 --> 01:45:09.800
अच्छा - बहुत आये हैं ।

288
01:45:11.800 --> 01:45:21.399
पहले बारी वाले बहुत हैं ।

289
01:45:22.729 --> 01:45:52.199
बापदादा पहले बारी आने वालों को यही कहते हैं कि जैसे पहले बारी आये हो वैसे हर सबजेक्ट में पहला नम्बर आना ।

290
01:45:55.000 --> 01:46:00.729
आने में देखो उमंग उत्साह से आये हो ना ।

291
01:46:01.399 --> 01:46:07.529
प्यार के विमान में चढ़के पहुंच गये हो ।

292
01:46:09.529 --> 01:46:27.000
अभी उमंग और उत्साह के पंखों से सब सबजेक्ट में नम्बरवन आना है, यह दृढ़ संकल्प रखो।

293
01:46:29.000 --> 01:46:38.460
अच्छा है मुबारक हो ।

294
01:46:56.930 --> 01:47:03.859
अच्छा ।

295
01:47:08.260 --> 01:47:52.260
अभी-अभी अभ्यास करो - एक सेकण्ड में निर्विकल्प , निरव्यर्थ संकल्प बन एकाग्र ,

296
01:47:53.659 --> 01:48:17.729
एक बाप दूसरा न कोई , इस एक ही संकल्प में एकाग्र होकर बैठ सकते हो !

297
01:48:19.729 --> 01:48:24.600
और कोई संकल्प नहीं हो ।

298
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एक ही संकल्प की एकाग्रता शक्ति के अनुभव में बैठ जाओ ।

299
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टाइम नहीं लगाना , एक सेकण्ड में ।

300
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अच्छा ।

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चारों ओर के बच्चों के जिन्होंने भी विशेष याद प्यार भेजा है ,

302
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वह हर एक बच्चा अपने नाम से यादप्यार और दिल की दुआयें स्वीकार करना ।

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बापदादा देख रहे हैं कि सभी के दिल में आता है हमारी भी याद , हमारी भी याद ,

304
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लेकिन आप बच्चे संकल्प करते हो और बापदादा के पास उसी समय ही पहुंच जाता है ।

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इसलिए सभी बच्चों को हर एक को नाम और विशेषता सम्पन्न यादप्यार दे रहे हैं ।

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तो सभी सदा स्मृति स्वरूप , समर्थ स्वरूप , अनुभव स्वरूप श्रेष्ठ बच्चों को ,

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सदा जो सोचा शुभ , वह तुरत किया , जैसे तुरत दान का महत्व है वैसे तुरत परिवर्तन का भी महत्व है ।

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तो तुरत परिवर्तन करनेवाले विश्व परिवर्तक बच्चों को, सदा परमात्म पालना, परमात्म प्यार, परमात्म पढ़ाई और परमात्म श्रीमत को हर कर्म में लाने वाले महावीर बच्चों को, सदा हिम्मत और एकाग्रता,एकता द्वारा नम्बरवन तीव्र पुरूषार्थ करने वाले बच्चों को बापदादा का दिल का यादप्यार और दिल की दुआयें और नमस्ते।

