WEBVTT

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आज विश्व परिवर्तक बापदादा अपने साथी बच्चों से मिलने आये हैं ।

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00:13:36.200 --> 00:14:09.600
हर एक बच्चे के मस्तक में तीन परमात्म विशेष प्राप्तियां देख रहे हैं ।

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00:14:20.730 --> 00:14:57.600
एक है होलीएस्ट , 2 - हाइएस्ट और 3 - रिचेस्ट ।

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00:15:02.799 --> 00:15:34.730
इस ज्ञान का फाउण्डेशन ही है होली अर्थात् पवित्र बनना ।

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00:15:42.200 --> 00:16:17.059
तो हर एक बच्चा होलीएस्ट है , पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं

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00:16:19.059 --> 00:16:49.399
लेकिन मन-वाणी-कर्म , सम्बन्ध-सम्पर्क में पवित्रता ।

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00:16:54.529 --> 00:17:34.460
आप देखो , आप परमात्म ब्राह्मण आत्मायें आदि-मध्य-अन्त तीनों ही काल में होलीएस्ट रहती हो ।

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00:17:38.730 --> 00:17:59.599
पहले-पहले आत्मा जब परमधाम में रहते हो

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00:18:06.859 --> 00:18:28.859
तो वहाँ भी होलीएस्ट हो फिर जब आदि में आते हो

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00:18:30.859 --> 00:18:59.130
तो आदिकाल में भी देवता रूप में होलीएस्ट आत्मा रहे ।

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00:19:12.859 --> 00:19:34.599
होलीएस्ट अर्थात् पवित्र आत्मा की विशेषता है -

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प्रवृत्ति में रहते सम्पूर्ण पवित्र रहना ।

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और भी पवित्र बनते हैं लेकिन आपकी पवित्रता की विशेषता है -

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00:20:26.400 --> 00:20:49.460
स्वप्नमात्र भी अपवित्रता मन-बुद्धि में टच नहीं करे ।

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सतयुग में आत्मा भी पवित्र बनती और शरीर भी आपका पवित्र बनता ।

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00:21:34.599 --> 00:22:11.660
आत्मा और शरीर दोनों की पवित्रता जो देव आत्मा रूप में रहती है , वह श्रेष्ठ पवित्रता है ।

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जैसे होलीएस्ट बनते हो , इतना ही हाइएस्ट भी बनते हो ।

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00:22:44.329 --> 00:23:28.130
सबसे ऊंचे ते ऊंचे ब्राह्मण आत्मायें और ऊंचे ते ऊंचे बाप के बच्चे बने हो ।

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00:23:34.059 --> 00:23:59.529
आदि में परमधाम में भी हाइएस्ट अर्थात् बाप के साथ-साथ रहते हो ।

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00:24:08.730 --> 00:24:22.200
मध्य में भी पूज्य आत्मायें बनते हो ।

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00:24:27.059 --> 00:24:38.859
कितने सुन्दर मन्दिर बनते हैं और कितनी विधिपूर्वक पूजा होती है ।

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00:24:42.730 --> 00:25:04.200
जितनी विधिपूर्वक आप देवताओं के मन्दिर में पूजा होती है उतने औरों के मन्दिर बनते हैं

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00:25:04.200 --> 00:25:21.460
लेकिन विधिपूर्वक पूजा आपके देवता रूप की होती है ।

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00:25:32.599 --> 00:25:54.059
तो होलीएस्ट भी हो और हाइएस्ट भी हो , साथ में रिचेस्ट भी हो ।

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00:26:00.660 --> 00:26:12.859
दुनिया में कहते हैं रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड

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00:26:16.059 --> 00:26:29.660
लेकिन आप श्रेष्ठ आत्मायें रिचेस्ट इन कल्प हैं ।

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00:26:29.660 --> 00:26:42.859
सारा कल्प रिचेस्ट हो ।

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00:26:53.859 --> 00:27:08.930
अपने खज़ाने स्मृति में आते हैं , कितने खज़ानों के मालिक हो !

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00:27:16.599 --> 00:27:44.529
अविनाशी खज़ाने जो इस एक जन्म में प्राप्त करते हो वह अनेक जन्म चलते हैं ।

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00:27:46.529 --> 00:27:59.400
और कोई का भी खज़ाना अनेक जन्म नहीं चलते ।

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00:28:03.259 --> 00:28:13.660
लेकिन आपके खज़ाने आध्यात्मिक हैं ।

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00:28:19.200 --> 00:28:43.130
शक्तियों का खज़ाना , ज्ञान का खज़ाना , गुणों का खज़ाना , श्रेष्ठ संकल्प का खज़ाना

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00:28:46.599 --> 00:29:13.660
और वर्तमान समय का खज़ाना , यह सर्व खज़ाने जन्म-जन्म चलते हैं ।

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00:29:13.660 --> 00:29:29.930
एक जन्म के प्राप्त हुए खज़ाने साथ चलते हैं

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00:29:32.460 --> 00:29:57.799
क्योंकि सर्व खज़ानों के दाता परमात्मा बाप द्वारा प्राप्त होता है ।

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00:30:00.329 --> 00:30:20.200
तो यह नशा है कि हमारे खज़ाने अविनाशी हैं ?

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00:30:35.059 --> 00:31:02.059
इस आध्यात्मिक खज़ानों को प्राप्त करने के लिए सहजयोगी बने हो ।

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00:31:09.529 --> 00:31:22.000
याद की शक्ति से खज़ाने जमा करते हो ।

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00:31:29.259 --> 00:31:58.799
इस समय भी इन सर्व खज़ानों से सम्पन्न बेफिक्र बादशाह हो , कोई फिक्र है ?

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00:31:58.799 --> 00:32:01.660
है फिक्र ?

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00:32:01.660 --> 00:32:23.859
क्योंकि यह खज़ाने जो हैं इसको न चोर लूट सकता , न राजा खा सकता , न पानी डुबो सकता ,

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00:32:29.730 --> 00:32:37.130
इसलिए बेफिक्र बादशाह हो ।

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00:32:53.259 --> 00:33:14.200
तो यह खज़ाने सदा स्मृति में रहते हैं ना !

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00:33:21.000 --> 00:33:30.329
और याद भी सहज क्यों है ?

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00:33:31.400 --> 00:33:54.200
क्योंकि सबसे ज्यादा याद का आधार होता है एक सम्बन्ध और दूसरा प्राप्ति ।

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00:33:56.200 --> 00:34:13.260
जितना प्यारा सम्बन्ध होता है उतनी याद स्वतः आती है

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00:34:18.659 --> 00:34:32.860
क्योंकि सम्बन्ध में स्नेह होता है और जहाँ स्नेह होता है

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00:34:32.860 --> 00:34:48.929
तो स्नेही की याद करना मुश्किल नहीं होता , लेकिन भूलना मुश्किल होता है ।

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00:34:59.130 --> 00:35:23.260
तो बाप ने सर्व सम्बन्ध का आधार बना दिया है ।

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00:35:32.599 --> 00:35:44.400
सभी अपने को सहजयोगी अनुभव करते हो ?

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00:35:44.400 --> 00:35:49.800
वा मुश्किल योगी हैं ?

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00:35:49.800 --> 00:35:54.000
सहज है ?

53
00:35:54.000 --> 00:36:02.400
कि कभी सहज है , कभी मुश्किल है ?

54
00:36:11.260 --> 00:36:47.059
जब बाप को सम्बन्ध और स्नेह से याद करते हो तो याद मुश्किल नहीं होती और प्राप्तियों को याद करो ।

55
00:36:51.530 --> 00:37:04.730
सर्व प्राप्तियों के दाता ने सर्व प्राप्तियां करा दी ।

56
00:37:20.199 --> 00:37:38.599
तो अपने को सर्व खज़ानों से सम्पन्न अनुभव करते हो ?

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00:37:50.329 --> 00:38:07.000
खज़ानों को जमा करने की सहज विधि भी बापदादा ने सुनाई -

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00:38:07.000 --> 00:38:32.329
जो भी अविनाशी खज़ाने हैं उन सभी खज़ानों की प्राप्ति करने की विधि है - बिन्दी ।

59
00:38:35.260 --> 00:38:49.260
जैसे विनाशी खज़ानों में भी बिन्दी लगाते जाओ तो बढ़ता जाता है ना ।

60
00:38:49.260 --> 00:39:06.599
तो अविनाशी खज़ानों की जमा करने की विधि है बिन्दी लगाना ।

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00:39:12.130 --> 00:39:39.059
तीन बिन्दियां हैं - एक मैं आत्मा बिन्दी , बाप भी बिन्दी और ड्रामा में जो भी बीत जाता वह फुलस्टाप अर्थात् बिन्दी ।

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00:39:42.460 --> 00:39:47.659
तो बिन्दी लगाने आती है ?

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00:39:47.659 --> 00:39:54.130
सबसे ज्यादा सहज मात्रा कौन सी है ?

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00:39:54.130 --> 00:39:59.460
बिन्दी लगाना ना !

65
00:40:05.530 --> 00:40:26.800
तो आत्मा बिन्दी हूँ , बाप भी बिन्दी है , इस स्मृति से स्वतः ही खज़ाने जमा हो जाते हैं ।

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00:40:39.929 --> 00:41:02.599
तो बिन्दी को सेकण्ड में याद करने से कितनी खुशी होती है !

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00:41:22.800 --> 00:41:43.929
यह सर्व खज़ाने आपके ब्राह्मण जीवन का अधिकार हैं

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00:41:46.860 --> 00:42:02.000
क्योंकि बच्चे बनना अर्थात् अधिकारी बनना ।

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00:42:13.929 --> 00:42:29.659
और विशेष तीन सम्बन्ध का अधिकार प्राप्त होता है -

70
00:42:31.130 --> 00:42:49.059
परमात्मा को बाप भी बनाया है , शिक्षक भी बनाया है और सतगुरू भी बनाया है ।

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00:42:51.059 --> 00:43:22.059
इन तीनों सम्बन्ध से पालना , पढ़ाई से सोर्स आफ इनकम और सतगुरू द्वारा वरदान मिलता है ।

72
00:43:30.329 --> 00:43:36.730
कितना सहज वरदान मिलता है ?

73
00:43:41.199 --> 00:44:01.530
क्योंकि बच्चे का जन्म सिद्ध अधिकार है बाप के वरदान प्राप्त करने का ।

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00:44:12.929 --> 00:44:37.659
बापदादा हर बच्चे का जमा का खाता चेक करते हैं ।

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00:44:39.659 --> 00:44:59.659
आप सभी भी अपने हर समय का जमा का खाता चेक करो ।

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00:45:02.730 --> 00:45:31.260
जमा हुआ वा नहीं हुआ , उसकी विधि है जो भी कर्म किया , उस कर्म में स्वयं भी सन्तुष्ट

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00:45:31.530 --> 00:45:41.860
और जिसके साथ कर्म किया वह भी सन्तुष्ट ।

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00:45:43.260 --> 00:45:58.659
अगर दोनों में सन्तुष्टता है तो समझो कर्म का खाता जमा हुआ ।

79
00:46:02.199 --> 00:46:26.730
अगर स्वयं में वा जिससे सम्बन्ध है , उसमें सन्तुष्टता नहीं आई तो जमा नहीं होता ।

80
00:46:40.730 --> 00:47:06.730
बापदादा सभी बच्चों को समय की सूचना भी देते रहते हैं ।

81
00:47:15.800 --> 00:47:37.400
यह वर्तमान संगम का समय सारे कल्प में श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ समय है

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00:47:50.000 --> 00:48:06.730
क्योंकि यह संगम ही श्रेष्ठ कर्मो के बीज बोने का समय है ।

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00:48:10.000 --> 00:48:26.400
प्रत्यक्ष फल प्राप्त करने का समय है ।

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00:48:41.659 --> 00:49:03.730
इस संगम समय में एक एक सेकण्ड श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ है ।

85
00:49:54.530 --> 00:50:41.800
सभी एक सेकण्ड में अशरीरी स्थिति में स्थित हो सकते हो ?

86
00:51:07.130 --> 00:51:34.929
बापदादा ने सहज विधि सुनाई है कि निरन्तर याद के लिए एक विधि बनाओ -

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00:51:34.929 --> 00:51:55.130
सारे दिन में दो शब्द सभी बोलते हो और अनेक बार बोलते हो

88
00:51:56.730 --> 00:52:08.730
वह दो शब्द हैं मैं और मेरा ।

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00:52:10.059 --> 00:52:31.329
तो जब मैं शब्द बोलते हो तो बाप ने परिचय दे दिया है कि मैं आत्मा हूँ ।

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00:52:33.130 --> 00:52:54.659
तो जब भी मैं शब्द बोलते हो तो यह याद करो कि मैं आत्मा हूँ ।

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00:52:54.659 --> 00:53:07.659
अकेला मैं नहीं सोचो , मैं आत्मा हूँ , यह साथ में सोचो

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00:53:08.329 --> 00:53:32.199
क्योंकि आप तो जानते हो ना कि मैं श्रेष्ठ आत्मा हूँ , परमात्म पालना के अन्दर रहने वाली आत्मा हूँ

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00:53:34.199 --> 00:53:46.730
और जब मेरा शब्द बोलते हो तो मेरा कौन ?

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00:53:47.460 --> 00:53:57.599
मेरा बाबा अर्थात् बाप परमात्मा ।

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00:53:59.599 --> 00:54:22.059
तो जब भी मैं और मेरा शब्द कहते हो उस समय यह एडीशन करो , मैं आत्मा और मेरा बाबा ।

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00:54:24.059 --> 00:54:43.929
जितना मेरापन लायेंगे बाप में , उतना याद सहज होती जायेगी

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00:54:44.599 --> 00:54:52.530
क्योंकि मेरा कभी भूलता नहीं है ।

98
00:54:54.530 --> 00:55:06.530
सारे दिन में देखो मेरा ही याद आता है ।

99
00:55:10.329 --> 00:55:26.929
तो इस विधि से सहज निरन्तर योगी बन सकते हो ।

100
00:55:44.599 --> 00:56:06.059
बापदादा ने हर बच्चे को स्वमान की सीट पर बिठाया है ।

101
00:56:17.130 --> 00:56:32.530
स्वमान की लिस्ट अगर स्मृति में लाओ तो कितनी लम्बी है !

102
00:56:35.199 --> 00:56:49.400
क्योंकि स्वमान में स्थित हैं तो देह अभिमान नहीं आ सकता ।

103
00:56:49.400 --> 00:56:58.059
या देह अभिमान होगा या स्वमान होगा ।

104
00:56:58.059 --> 00:57:20.530
स्व मान का अर्थ ही है - स्व अर्थात् आत्मा का श्रेष्ठ स्मृति का स्थान ।

105
00:57:33.659 --> 00:57:54.460
तो सभी अपने स्वमान में स्थित हैं ?

106
00:58:03.800 --> 00:58:24.530
जितना स्वमान में स्थित होंगे उतना दूसरे को सम्मान देना स्वतः ही हो जाता है ।

107
00:58:38.659 --> 00:58:59.530
तो स्वमान में स्थित रहना कितना सहज है !

108
01:00:04.860 --> 01:00:21.800
तो सभी खुशनुमा रहते हैं ?

109
01:00:27.199 --> 01:00:44.059
क्योंकि खुशनुमा रहने वाला दूसरे को भी खुशनुमा बना देता है ।

110
01:00:44.059 --> 01:01:09.260
बापदादा सदा कहते हैं कि सारे दिन में खुशी कभी नहीं गंवाओ ।

111
01:01:13.730 --> 01:01:17.530
क्यों ?

112
01:01:18.400 --> 01:01:39.000
खुशी ऐसी चीज़ है जो एक ही खुशी में हेल्थ भी है , वेल्थ भी है और हैपी भी है ।

113
01:01:42.130 --> 01:01:50.460
खुशी नहीं तो जीवन नीरस रहती है ।

114
01:01:50.460 --> 01:02:04.530
खुशी को ही कहा जाता है - खुशी जैसा कोई खज़ाना नहीं ।

115
01:02:06.199 --> 01:02:24.130
कितने भी खज़ाने हो लेकिन खुशी नहीं तो खज़ाने से भी प्राप्ति नहीं कर सकते हैं ।

116
01:02:25.530 --> 01:02:37.659
खुशी के लिए कहा जाता है - खुशी जैसी कोई खुराक नहीं ।

117
01:02:40.329 --> 01:02:57.000
तो वेल्थ भी है खुशी और खुशी हेल्थ भी है और नाम ही खुशी है तो हैपी तो है ही है ।

118
01:02:57.000 --> 01:03:07.130
तो खुशी में तीनों ही चीजे हैं ।

119
01:03:09.130 --> 01:03:34.599
और बाप ने अविनाशी खुशी का खज़ाना दिया है , बाप का खज़ाना गंवाना नहीं ।

120
01:03:38.929 --> 01:03:43.530
तो सदा खुश रहते ?

121
01:03:43.530 --> 01:04:02.130
बापदादा ने होमवर्क दिया तो खुश रहना है और खुशी बांटनी है

122
01:04:04.130 --> 01:04:17.400
क्योंकि खुशी ऐसी चीज़ है जो जितनी बांटेंगे उतनी बढ़ेगी ।

123
01:04:20.599 --> 01:04:24.199
अनुभव करके देखा है !

124
01:04:24.199 --> 01:04:28.260
किया है ना अनुभव ?

125
01:04:28.260 --> 01:04:40.860
अगर खुशी बांटते हैं तो बांटने से पहले अपने पास बढ़ती है ।

126
01:04:45.059 --> 01:04:54.329
खुश करने वाले से पहले स्वयं खुश होते हैं ।

127
01:04:59.929 --> 01:05:05.800
तो सभी ने होमवर्क किया है ?

128
01:05:05.800 --> 01:05:08.400
किया है ?

129
01:05:08.400 --> 01:05:12.199
जिसने किया है वह हाथ उठाओ ।

130
01:05:12.199 --> 01:05:27.329
जिसने किया है - खुश रहना है , कारण नहीं निवारण करना है , समाधान स्वरूप बनना है ।

131
01:05:27.329 --> 01:05:33.000
हाथ उठाओ ।

132
01:05:42.059 --> 01:05:52.059
अभी यह तो नहीं कहेंगे ना - यह हो गया !

133
01:05:56.929 --> 01:06:22.460
बापदादा के पास कई बच्चों ने अपनी रिजल्ट भी लिखी है कि हम कितने परसेन्ट ओ के रहे हैं ।

134
01:06:28.400 --> 01:06:44.329
और लक्ष्य रखेंगे तो लक्ष्य से लक्षण स्वतः ही आते हैं ।

135
01:07:15.260 --> 01:07:19.659
अच्छा ।

136
01:07:21.059 --> 01:07:27.460
अभी क्या करना है ?

137
01:07:42.260 --> 01:07:59.800
सेवा का टर्न कर्नाटक का है :- कर्नाटक वाले उठो ।

138
01:08:23.000 --> 01:08:41.060
अच्छा है कर्नाटक वालों ने सेवा का गोल्डन चांस ले लिया है

139
01:08:44.460 --> 01:08:59.329
क्योंकि अब संगमयुग में प्रत्यक्ष फल मिलता है ।

140
01:08:59.329 --> 01:09:16.399
जमा भी होता है लेकिन प्रत्यक्षफल मिलता है जो उसी समय खुशी प्राप्त होती है ।

141
01:09:16.399 --> 01:09:35.130
तो जितना दिन भी सेवा की है , तो प्रत्यक्षफल अपने में खुशी अनुभव किया ?

142
01:09:35.130 --> 01:09:38.600
खुशी मिली ?

143
01:09:38.600 --> 01:09:41.399
हाथ उठाओ ।

144
01:09:48.600 --> 01:09:51.130
माया आई ?

145
01:09:51.130 --> 01:09:53.529
नहीं आई ?

146
01:09:53.529 --> 01:10:01.930
जिसको माया नहीं आई वह हाथ उठाओ ।

147
01:10:03.930 --> 01:10:07.600
पाण्डवों को माया आई ?

148
01:10:07.600 --> 01:10:12.859
थोड़ी-थोड़ी आई है ?

149
01:10:14.859 --> 01:10:32.600
अच्छा है , यहाँ का वायुमण्डल बहुत सहयोग देता है ।

150
01:10:35.130 --> 01:10:51.130
जैसे साइन्स वाले साइन्स की शक्ति से वायुमण्डल को परिवर्तन कर देते हैं ना ।

151
01:10:51.130 --> 01:11:03.260
गर्मी में सर्दी , हवा का वायुमण्डल बना देते हैं ना !

152
01:11:03.260 --> 01:11:11.000
सर्दी में गर्मी का वायुमण्डल बना देते हैं ,

153
01:11:11.000 --> 01:11:35.800
तो साइलेन्स की शक्ति आध्यात्मिक स्मृति का वायुमण्डल बना देता है

154
01:11:36.460 --> 01:11:49.130
क्योंकि यहाँ सेवा करते वृत्ति में क्या रहता है ?

155
01:11:49.130 --> 01:12:03.659
यज्ञ सेवा है , यज्ञ का पुण्य बहुत बड़ा होता है ।

156
01:12:05.659 --> 01:12:25.600
तो इस अविनाशी यज्ञ में सेवा करने से वृत्ति श्रेष्ठ बन जाती है ।

157
01:12:25.600 --> 01:12:32.260
तो वायुमण्डल भी श्रेष्ठ बन जाता है ।

158
01:12:35.729 --> 01:12:47.529
अभी कर्नाटक वाले क्या विशेषता दिखायेंगे ?

159
01:12:48.460 --> 01:12:54.329
कोई नया कार्य करके दिखाओ ।

160
01:12:56.329 --> 01:13:16.729
देखो कर्नाटक में संख्या बहुत है और एरिया भी बहुत है ।

161
01:13:16.729 --> 01:13:24.199
सेवा की एरिया बहुत बड़ी है ।

162
01:13:36.199 --> 01:14:01.260
कर्नाटक वाले बड़े ते बड़ी सेवा यही कर सकते हैं

163
01:14:01.260 --> 01:14:24.460
जो कर्नाटक के कोई भी छोटे बड़े कोई स्थान नहीं रहें जो आपको उल्हना देवें

164
01:14:25.729 --> 01:14:43.260
कि हमारा बाप आया और हमें आपने सूचना नहीं दी , सन्देश नहीं दिया ।

165
01:14:43.260 --> 01:14:49.529
यह उल्हना नहीं रह जाये ।

166
01:14:52.060 --> 01:15:17.659
जैसे अफ्रीका वालों ने अपनी एरिया को सन्देश देने का कार्य सफल किया है ।

167
01:15:21.260 --> 01:15:46.659
बापदादा को यह कार्य अच्छा लगता है , कोई का भी उल्हना नहीं रह जाना चाहिए ।

168
01:15:46.659 --> 01:16:15.529
आपका काम है सन्देश देना , वह अभी आवे या पीछे आवे लेकिन आपने अपना कार्य सम्पन्न किया

169
01:16:17.529 --> 01:16:28.930
तो कर्नाटक वाले दूसरे वर्ष में जब आयेंगे , क्या करके आयेंगे ?

170
01:16:30.930 --> 01:16:40.000
कोई भी एरिया खाली नहीं रहनी चाहिए ।

171
01:16:43.060 --> 01:16:49.460
क्योंकि आप तो जानते हो ना -

172
01:16:50.399 --> 01:17:10.729
कि बाप का परिचय मिलने से , बाप के सम्बन्ध में आने से आत्मायें कितनी सुखी बन जायेंगी ।

173
01:17:12.729 --> 01:17:27.329
अभी तो दिन-प्रतिदिन दुःख और अशान्ति बढ़ती जा रही है

174
01:17:29.329 --> 01:17:51.060
क्योंकि दिन-प्रतिदिन भ्रष्टाचार , पापाचार बढ़ रहा है ।

175
01:17:51.930 --> 01:17:58.529
अति में जा रहा है ।

176
01:18:04.000 --> 01:18:22.260
लेकिन आप जानते हो कि अति के बाद क्या होता है ?

177
01:18:26.600 --> 01:18:30.329
अन्त आती है ।

178
01:18:30.329 --> 01:18:35.199
और अन्त किसको लाती है ?

179
01:18:35.199 --> 01:18:37.930
आदि को ।

180
01:18:41.930 --> 01:19:04.859
तो अपने भाई फिर भी बाप तो एक ही है ना , चाहे जाने चाहे मानें , नहीं भी मानें लेकिन बाप तो बाप ही है ।

181
01:19:06.329 --> 01:19:19.529
तो अपने भाईयों को , अपनी बहनों को सन्देश जरूर दे दो ।

182
01:19:27.130 --> 01:19:30.859
तो क्या करेंगे ?

183
01:19:30.859 --> 01:19:35.659
रिकार्ड बनायेंगे , टीचर्स ?

184
01:19:35.659 --> 01:19:41.460
कोई गांव भी नहीं रहना चाहिए ।

185
01:19:42.659 --> 01:19:54.399
हाथ उठाओ , जो करेगा , ऐसेही नहीं हाथ उठाना ।

186
01:19:56.399 --> 01:20:01.260
करेंगे ?

187
01:20:03.260 --> 01:20:10.859
रिजल्ट जाके भेजना , प्लैन बनाना ।

188
01:20:15.930 --> 01:20:22.600
कमाल तो करना है ना !

189
01:20:23.460 --> 01:20:34.800
जितनी कमाल करने में लग जायेंगे , उतनी छोटी छोटी धमाल खत्म हो जायेगी ।

190
01:20:38.859 --> 01:21:01.399
तो बहुत अच्छा चांस मिला है , चांस लिया है और चांस का जो काम मिला है वह भी करके आयेंगे ।

191
01:21:01.399 --> 01:21:03.800
पक्का है ना ?

192
01:21:03.800 --> 01:21:07.659
पाण्डव , पक्का ?

193
01:21:07.659 --> 01:21:13.060
थक नहीं जाना ।

194
01:21:15.060 --> 01:21:19.930
कितना पुण्य जमा होगा !

195
01:21:24.930 --> 01:21:32.460
तो अच्छा है , बापदादा को भी खुशी होती है

196
01:21:32.460 --> 01:21:52.000
कि बच्चे अपने पुण्य का खाता भिन्नभिन्न विधि से आगे बढ़ा रहे हैं ।

197
01:21:55.130 --> 01:22:17.199
बापदादा ने सुनाया ना - तीन खाते जमा करने हैं - एक अपने पुरूषार्थ से जमा हुआ खाता और दूसरा है -

198
01:22:18.060 --> 01:22:30.060
दूसरी आत्माओं को सन्तुष्ट करने में पुण्य का खाता ।

199
01:22:30.859 --> 01:22:58.000
सन्तुष्टता पुण्य का खाता जमा करती है और तीसरा है मन्सा-वाचा-स्नेह सम्बन्ध द्वारा सेवा का खाता ।

200
01:22:58.859 --> 01:23:02.930
तो तीनों खाते चेक करना ।

201
01:23:02.930 --> 01:23:08.060
तीनों में कमी नहीं होनी चाहिए ।

202
01:23:09.199 --> 01:23:12.529
तो नम्बरवन लेंगे?

203
01:23:12.529 --> 01:23:18.460
जमा के खाते में नम्बरवन लेना।

204
01:23:18.460 --> 01:23:29.729
कर्नाटक है , कम थोड़ेही है ।

205
01:23:37.060 --> 01:23:47.399
बापदादा की नज़र में है कर्नाटक ।

206
01:23:47.800 --> 01:23:56.930
बहुत कुछ कर सकते हैं , इस नज़र में है ।

207
01:23:58.930 --> 01:24:18.399
हाँ आगे लाइन में खड़े हुए क्या करेंगे ?

208
01:24:18.399 --> 01:24:23.260
कमाल करेंगे ना !

209
01:24:23.260 --> 01:24:30.729
करो कमाल , लो नम्बर ।

210
01:24:33.659 --> 01:24:49.329
स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति , दोनों का बैलेन्स रखना ।

211
01:24:50.859 --> 01:24:56.729
ठीक है बैठ जाओ ।

212
01:25:00.199 --> 01:25:47.260
( बैंगलोर की सेवा मम्मा ने शुरू की और दादी ह्दयपुष्पा और सुन्दरी बहन ने बहुत प्यार से सेवा की है ) ह्दयपुष्पा बच्ची ने बहुत प्यार से सेवा की है ।

213
01:25:49.260 --> 01:25:53.600
तो प्यार का सबूत देना है ।

214
01:25:53.600 --> 01:26:03.529
जगदम्बा माँ की सेवा का रिटर्न करना है ।

215
01:26:05.529 --> 01:26:11.329
तो कितने दिनों में समाचार देंगे ।

216
01:26:14.060 --> 01:26:34.600
हर मास अपने समाचार देते रहना , कि यह कर रहे हैं और यह हुआ है , यह होना है ।

217
01:26:40.329 --> 01:27:06.329
बापदादा तो हर जोन को कहते हैं लेकिन जिसका विशेष टर्न होता है उसको विशेष अटेन्शन रखना है ।

218
01:27:15.659 --> 01:27:34.729
तो सभी सदा मन को बिजी रखो

219
01:27:37.399 --> 01:27:55.659
क्योंकि मन ही धोखा देता , मन में ही टेन्शन आता , मन ही यहाँ वहाँ भागता है ।

220
01:27:57.659 --> 01:28:17.399
तो मन को बिजी रखना अर्थात् सम्पन्न स्थिति में जल्दी से जल्दी स्थित रहना ।

221
01:28:19.399 --> 01:28:44.399
बापदादा कहते हैं जब स्थूल कर्मेन्द्रियों को मेरा कहते हो , मेरा हाथ कहते हो , तो हाथ को कन्ट्रोल कर सकते हो ना !

222
01:28:44.399 --> 01:28:52.199
जहाँ चाहे जैसे चाहे वैसे करते हो ना !

223
01:28:52.199 --> 01:29:00.529
तो मन मेरा है , या आप मन के हो ?

224
01:29:02.199 --> 01:29:06.600
मन के मालिक भी तो आप हो ना !

225
01:29:06.600 --> 01:29:11.260
मैं मन तो नहीं है ना ?

226
01:29:11.859 --> 01:29:19.529
मन राजा तो नहीं है , आत्मा राजा है ।

227
01:29:24.329 --> 01:29:53.460
तो कन्ट्रोलिंग पावर रूलिंग पावर धारण करेंगे तो मन आपके अच्छे ते अच्छा नम्बरवन सहयोगी साथी बन जायेगा।

228
01:29:53.460 --> 01:29:57.800
करके देखो ।

229
01:30:01.130 --> 01:30:10.000
सिर्फ मालिक बनो , राजा बनो ।

230
01:30:12.000 --> 01:30:29.729
इस दुनिया में तीन शक्तियां तो चल रही हैं - देखो यह राजनीति की आई है ना ?

231
01:30:32.729 --> 01:30:41.930
( राजस्थान की राज्यपाल महामहिम प्रतिभा पाटिल जी बापदादा से मिलने आई हैं ) तो तीन सत्तायें तो चल रही हैं , राज्य सत्ता भी चल रही है ।

232
01:30:41.930 --> 01:30:56.800
धर्मसत्ता भी चल रही है और साइन्स की सत्ता भी चल रही है , लेकिन रिजल्ट ?

233
01:31:01.060 --> 01:31:06.199
आपमें कितनी सत्तायें हैं ?

234
01:31:07.260 --> 01:31:32.399
आपमें चार सत्तायें हैं क्योंकि विश्व में आध्यात्मिक शक्ति की कमी है ।

235
01:31:33.659 --> 01:31:39.199
आपमें राज्य सत्ता है ?

236
01:31:39.199 --> 01:31:46.000
अपनी कर्मेन्द्रियों के राजा बने हो ना !

237
01:31:48.000 --> 01:31:55.000
स्वराज्य अधिकारी हो ना !

238
01:31:59.659 --> 01:32:21.659
और धर्मसत्ता भी है , धर्म का अर्थ है दिव्य गुणों की धारणा , श्रेष्ठ चरित्र की धारणा , श्रेष्ठ कर्म की धारणा ।

239
01:32:26.930 --> 01:32:33.930
जहाँ चरित्र है वहाँ सब कुछ है ।

240
01:32:35.260 --> 01:32:45.529
चरित्र नहीं तो सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है ।

241
01:32:52.060 --> 01:33:09.529
और साइन्स की सत्ता , उसके साधन हैं आपके साइलेन्स की साधना है ।

242
01:33:19.930 --> 01:33:33.930
तो चारों ही सत्ता जब इकट्ठी होती है तब विश्व परिवर्तन होता है ।

243
01:33:36.399 --> 01:33:49.460
इसलिए बापदादा कहते हैं , बच्ची को भी कहते हैं , बहुत अच्छा किया पहुंच गई है ।

244
01:33:49.460 --> 01:34:07.399
राज्य सत्ता में है ना तो अभी कम से कम राजस्थान को तो आध्यात्मिक सत्ता से भरपूर करो ।

245
01:34:11.930 --> 01:34:23.859
राजस्थान पान का बीड़ा उठावे , विश्व परिवर्तन तो आपेही हो जायेगा ।

246
01:34:23.859 --> 01:34:31.729
पहले राजस्थान को परिवर्तन करो ।

247
01:34:42.130 --> 01:35:19.859
( बाबा राजस्थान तो आध्यात्मिकता का गढ़ है , यहाँ से विश्व में परिवर्तन का कार्य चल रहा है ) विश्व को मिल तो रही है लेकिन राजस्थान के राज्य अधिकारी भी सहयोगी बन जायें ।

248
01:35:21.859 --> 01:35:37.529
देखो आप शक्ति रूप हो , बापदादा ने शक्तियों को आगे रखा है ।

249
01:35:39.859 --> 01:35:47.199
तो आप भी शिव शक्ति हो ।

250
01:35:49.930 --> 01:35:57.000
शक्ति जो चाहे वह कर सकती है ।

251
01:36:02.130 --> 01:36:15.600
अच्छा है , बापदादा ने देखा है उमंग इनको बहुत है , राजस्थान को बहुत अच्छे ते अच्छा बनायें ,

252
01:36:15.600 --> 01:36:30.060
लेकिन आपके सभी सहयोगी भी हैं , सब मिल करके करेंगे तो क्या नहीं हो सकता ।

253
01:36:33.000 --> 01:36:48.399
राजस्थान दीपक जगायेगा , चरित्र का और वह दीपक चारों ओर दौड़ेगा ।

254
01:36:54.930 --> 01:36:58.729
अच्छा किया ।

255
01:36:58.729 --> 01:37:22.199
बापदादा को बच्चों का इस कार्य में सहयोगी बनने का उमंग-उत्साह देख खुशी होती है ।

256
01:37:24.199 --> 01:37:28.130
आपके साथ और भी तो आये हैं ना ।

257
01:37:28.130 --> 01:37:32.460
जो साथ में आये हैं वह हाथ उठाओ ।

258
01:37:39.659 --> 01:38:02.329
बापदादा को बहुत अच्छा लगता है , अभी आप सभी आपस में मीटिंग करना , प्लैन बनाना कि क्या-क्या कर सकते हैं ।

259
01:38:02.329 --> 01:38:07.930
और सब यहाँ के आपके सहयोगी बनेंगे ।

260
01:38:07.930 --> 01:38:11.000
उमंग है ना !

261
01:38:11.000 --> 01:38:15.000
अच्छा है ।

262
01:38:15.930 --> 01:38:24.060
राजस्थान को निमित्त बनना चाहिए ।

263
01:38:29.000 --> 01:38:33.000
अच्छा है ।

264
01:38:34.199 --> 01:39:22.659
डबल विदेशी :- विदेशियों को अपना ओरीज्नल विदेश तो नहीं भूलता होगा ।

265
01:39:24.659 --> 01:39:35.729
ओरीज्नल आप किस देश के हो , वह तो याद रहता है ना ।

266
01:39:35.729 --> 01:39:42.000
इसलिए सभी आपको कहते हैं डबल विदेशी ।

267
01:39:42.000 --> 01:39:49.859
सिर्फ विदेशी नहीं हो , डबल विदेशी ।

268
01:39:50.329 --> 01:40:00.199
तो आपको अपना स्वीट होम कभी भूलता नहीं होगा ।

269
01:40:07.460 --> 01:40:11.659
तो कहाँ रहते हो ?

270
01:40:11.659 --> 01:40:22.460
बापदादा के दिलतख्त नशीन हो ना ।

271
01:40:25.800 --> 01:40:42.859
बापदादा कहते हैं जब कोई भी छोटी मोटी समस्या आये ,

272
01:40:43.399 --> 01:40:52.199
समस्या नहीं है लेकिन पेपर है आगे बढ़ाने के लिए ।

273
01:40:52.199 --> 01:41:00.130
तो बापदादा का दिलतख्त तो आपका अधिकार है ।

274
01:41:01.659 --> 01:41:14.000
दिलतख्तनशीन बन जाओ तो समस्या खिलौना बन जायेगी ।

275
01:41:15.000 --> 01:41:22.600
समस्या से घबरायेंगे नहीं , खेलेंगे ।

276
01:41:22.600 --> 01:41:26.729
खिलौना है ।

277
01:41:35.659 --> 01:41:40.659
सब उड़ती कला वाले हो ना ?

278
01:41:40.659 --> 01:41:43.600
उड़ती कला है ?

279
01:41:43.600 --> 01:41:48.060
या चलने वाले हो ?

280
01:41:48.800 --> 01:41:53.060
उड़ने वाले हो या चलने वाले हैं ?

281
01:41:53.060 --> 01:41:58.130
जो उड़ने वाले हैं वह हाथ उठाओ ।

282
01:41:58.130 --> 01:42:01.329
उड़ने वाले ।

283
01:42:01.329 --> 01:42:07.000
आधा आधा हाथ उठा रहे हैं ।

284
01:42:09.000 --> 01:42:12.600
उड़ने वाले हैं ?

285
01:42:12.600 --> 01:42:15.329
अच्छा ।

286
01:42:15.329 --> 01:42:21.659
कभी कभी उड़ना छोड़ते हैं क्या ?

287
01:42:22.199 --> 01:42:34.460
चल रहे हैं नहीं , कई बापदादा को कहते हैं बाबा हम बहुत अच्छे चल रहे हैं ।

288
01:42:35.399 --> 01:42:44.460
तो बापदादा कहते हैं चल रहे हो या उड़ रहे हो ?

289
01:42:44.460 --> 01:42:53.800
अभी चलने का समय नहीं है , उड़ने का समय है ।

290
01:42:55.130 --> 01:43:11.000
उमंग-उत्साह के , हिम्मत के पंख हर एक को लगे हुए हैं ।

291
01:43:11.000 --> 01:43:17.329
तो पंखों से उड़ना होता है ।

292
01:43:17.329 --> 01:43:31.800
तो रोज चेक करो , उड़ती कला में उड़ रहे हैं ?

293
01:43:34.729 --> 01:43:51.600
अच्छा है , रिजल्ट में बापदादा ने देखा है कि सेन्टर्स विदेश में भी बढ़ रहे हैं ।

294
01:43:57.930 --> 01:44:05.199
और बढ़ते जाने ही हैं ।

295
01:44:11.060 --> 01:44:36.199
जैसे डबल विदेशी हैं वैसे डबल सेवा मंसा भी , वाचा भी साथ-साथ करते चलो ।

296
01:44:37.600 --> 01:44:52.060
मन्सा शक्ति द्वारा आत्माओं की आत्मिक वृत्ति बनाओ ।

297
01:44:58.600 --> 01:45:04.659
वायुमण्डल बनाओ ।

298
01:45:12.329 --> 01:45:24.800
अभी दुःख बढ़ता हुआ देख रहम नहीं आता है ?

299
01:45:26.800 --> 01:45:44.060
आपके जड़ चित्र के आगे चिल्लाते रहते हैं , मर्सी दो , मर्सी दो ,

300
01:45:51.199 --> 01:45:58.859
अब दयालु कृपालु रहमदिल बनो ।

301
01:45:58.859 --> 01:46:09.260
अपने ऊपर भी रहम और आत्माओं के ऊपर भी रहम ।

302
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अच्छा है - हर सीजन में , हर टर्न में आ जाते हैं ।

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यह सभी को खुशी होती है ।

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तो उड़ते चलो और उड़ाते चलो ।

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अच्छा है , रिजल्ट में देखा है कि अभी अपने को परिवर्तन करने में भी फास्ट जा रहे हैं ।

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तो स्व के परिवर्तन की गति विश्व परिवर्तन की गति बढ़ाता है ।

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अच्छा ।

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जो पहली बार आये हैं वह उठो :- तो आप सभी को ब्राह्मण जन्म की मुबारक हो ।

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अच्छा मिठाई तो मिलेगी लेकिन बापदादा दिलखुश मिठाई खिला रहे हैं ।

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पहले बारी मधुबन आने की यह दिलखुश मिठाई सदा याद रखना ।

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वह मिठाई तो मुख में डाला और खत्म हो जायेगी लेकिन यह दिलखुश मिठाई सदा साथ रहेगी ।

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भले आये , बापदादा और सारा परिवार देश विदेश में आप अपने भाई बहनों को देख खुश हो रहे हैं ।

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सभी देख रहे हैं , अमेरिका भी देख रही है , रशिया वाले भी देख रहे हैं , लण्डन वाले भी देख रहे हैं , 5 खण्ड ही देख रहे हैं ।

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तो जन्म दिन की आप सबको वहाँ बैठे बैठे मुबारक दे रहे हैं ।

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अच्छा ।

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बापदादा की रूहानी ड्रिल याद है ना !

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अभी बापदादा हर बच्चे से चाहे नये हैं , चाहे पुराने हैं , चाहे छोटे हैं चाहे बड़े हैं , छोटे और ही समान बाप जल्दी बन सकते हैं ।

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तो अभी सेकण्ड में जहाँ मन को लगाने चाहो वहाँ मन एकाग्र हो जाए ।

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यह एकाग्रता की ड्रिल सदा ही करते चलो ।

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अभी एक सेकण्ड में मन के मालिक बन मैं और मेरा बाबा संसार है ,

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दूसरा न कोई , इस एकाग्र स्मृति में स्थित हो जाओ ।

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अच्छा ।

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01:57:25.399 --> 01:57:45.130
चारों ओर के सर्व तीव्र पुरूषार्थी बच्चों को

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सदा उमंग-उत्साह के पंखों से उड़ती ला के अनुभवी मूर्त बच्चों को ,

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सदा अपने स्वमान की सीट पर सेट रहने वाले बच्चों को ,

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सदा रहमदिल बन विश्व की आत्माओं को मन्सा शक्ति द्वारा कुछ न कुछ अंचली सुख-शान्ति की देने वाले दयालु , कृपालु बच्चों को ,

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सदा बाप के स्नेह में समाये हुए दिलतख्तनशीन बच्चों को , बापदादा का यादप्यार और नमस्ते ।

