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आज प्यार और शक्ति के सागर बापदादा अपने स्नेही , सिकीलधे , लाडले बच्चो से मिलने के लिए आये है ।

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सभी बच्चे भी दूर-दूर से स्नेह की आकर्षण से मिलन मनाने के लिए पहुंच गये है ।

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चाहे सम्मुख बैठे है , चाहे देश विदेश मे बैठे हुए स्नेह का मिलन मना रहे है ।

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बापदादा चारो ओर के सर्व स्नेही , सर्व सहयोगी साथी बच्चो को देख हर्षित होते हैं ।

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बापदादा देख रहे हैं मैजॉरिटी बच्चो के दिल में एक ही संकल्प है कि अभी जल्दी से जल्दी बाप को प्रत्यक्ष करें ।

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बाप कहते है सभी बच्चो का उमंग बहुत अच्छा है ,

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00:13:38.169 --> 00:14:29.769
लेकिन बाप को प्रत्यक्ष तब कर सकेंगे जब पहले अपने को बाप समान सम्पन्न सम्पूर्ण प्रत्यक्ष करेंगे ।

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00:14:32.570 --> 00:14:45.480
तो बच्चे पूछते है बाप से कि कब प्रत्यक्ष होगा ?

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और बाप बच्चों से पूछते है कि आप बताओ , आप कब स्वयं को बाप समान प्रत्यक्ष करेंगे ?

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00:15:28.679 --> 00:15:41.600
अपने सम्पन्न बनने की डेट फिक्स की है ?

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फ़ोरिन वाले तो कहते है एक साल पहले डेट फिक्स की जाती है ।

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तो अपने को बाप समान बनने की आपस मे मीटिंग करके डेट फिक्स की है ?

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बापदादा देखते हैं आजकल तो हर वर्गकी भी मीटिंग्स बहुत होती है ।

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डबल फारेनर्स की भी मीटिंग बापदादा ने सुनी ।

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बहुत अच्छी लगी ।

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सब मीटिंग्स बापदादा के पास तो पहुच ही जाती हैं ।

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तो बापदादा पूछते है कि इसकी डेट कब फिक्स की है ?

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क्या यह डेट ड़ामा फिक्स करेगा या आप फिक्स करेंगे ?

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कौन करेगा ?

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00:18:18.970 --> 00:18:25.480
लक्ष्य तो आपको रखना ही पड़ेगा ।

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00:18:27.480 --> 00:18:43.200
और लक्ष्य बहुत अच्छे ते अच्छा , बढिये ते बढिया रखा भी है ,

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अभी सिर्फ जैसा लक्ष्य रखा है उसी प्रमाण लक्षण , श्रेष्ठ लक्ष्य के समान बनाना है ।

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अभी लक्ष्य और लक्षण मे अन्तर है ।

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जब लक्ष्य और लक्षण समान हो जायेंगे तो लक्ष्य प्रैक्टिकल में आ जायेगा ।

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सभी बच्चे जब अमृतवेले मिलन मनाते है

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और संकल्प करते है तो वह बहुत अच्छे करते है ।

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बापदादा चारो ओर के हर बच्चे की रूहरिहान सुनते है ।

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बहुत सुन्दर बाते करते है ।

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पुरुषार्थ भी बहुत अच्छा करते है

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00:21:49.309 --> 00:22:12.569
लेकिन पुरुषार्थ में एक बात की तीव्रता चाहिए ।

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00:22:12.569 --> 00:22:22.049
पुरुषार्थ है लेकिन तीव्र पुरुषार्थ चाहिए ।

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तीव्रता की दृढ़ता उसकी एडीशन चाहिए ।

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00:22:53.769 --> 00:23:13.140
बापदादा की हर बच्चे के प्रति यही आश है कि समय प्रमाण हर एक तीव पुरुषार्थी बने ।

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चाहे नम्बरवार है , बापदादा जानते है

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लेकिन नम्बरवार मे भी तीव्र पुरुषार्थ सदा रहे , उसकी आवश्यकता है ।

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समय सम्पन्न होने मे तीव्रता से चल रहा है

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00:25:09.140 --> 00:25:41.880
लेकिन अभी बच्चो को बाप समान बनना ही है ,

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00:25:43.480 --> 00:26:13.079
यह भी निश्चित ही है सिर्फ इस में तीव्रता चाहिए ।

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00:26:30.619 --> 00:27:01.250
हर एक अपने को चेक करे कि मै सदा तीव्र पुरुषार्थी हूँ ?

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00:27:05.140 --> 00:27:39.650
क्योंकि पुरुषार्थ मे पेपर तो बहुत आते ही हैं और आने ही है

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00:27:40.910 --> 00:28:08.799
लेकिन तीव्र पुरुषार्थी के लिए पेपर मे पास होना इतना ही निश्चित है

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00:28:09.250 --> 00:28:21.140
कि तीव्र पुरुषार्थी पेपर मे पास हुआ ही पडा है ।

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होना है नही , हुआ ही पड़ा है , यह निश्चित है ।

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सेवा भी सभी अच्छी रूचि से कर रहे है

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लेकिन बापदादा ने पहले भी कहा है

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कि वर्तमान समय के प्रमाण एक ही समय पर मन्सा-वाचा और कर्मणा

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अर्थात् चलन और चेहरे द्वारा तीनो ही प्रकार की सेवा चाहिए ।

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00:30:12.799 --> 00:30:36.619
मन्सा द्वारा अनुभव कराना , वाणी द्वारा ज्ञान के खजाने का परिचय कराना

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00:30:37.599 --> 00:31:25.480
और चलन वा चेहरे द्वारा समूर्ण योगी जीवन के प्रैक्टिकल रूप का अनुभव कराना , तीनो ही सेवा एक समय करनी है ।

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00:31:28.680 --> 00:31:55.200
अलग - अलग नहीं , समय कम है और सेवा अभी भी बहुत करनी है ।

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बापदादा ने देखा कि सबसे सहज सेवा का साधन है -

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00:32:25.819 --> 00:32:47.599
वृत्ति द्वारा वायब्रेशन बनाना और वायब्रेशन द्वारा वायुमण्डल बनाना

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00:32:50.170 --> 00:33:07.079
क्योकि वृत्ति सबसे तेज साधन है ।

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00:33:09.079 --> 00:33:20.450
जैसे साइंस की राकेट फास्ट जाती है

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00:33:22.450 --> 00:33:54.910
वैसे आपकी रूहानी शुभ भावना , शुभ कामना की वृत्ति , दृष्टि और सृष्टि को बदल देती है ।

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00:33:56.910 --> 00:34:11.420
एक स्थान पर बैठे भी वृत्ति द्वारा सेवा कर सकते है ।

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00:34:17.820 --> 00:34:39.940
सुनी हुई बात फिर भी भूल सकती है लेकिन जो वायुमण्डल का अनुभव होता है , वह भूलता नही है ।

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00:34:44.170 --> 00:35:21.079
जैसे मधुबन मे अनुभव किया है कि ब्रह्मा बाप की कर्मभूमि , योग भूमि , चरित्र भूमि का वायुमण्डल है ।

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00:35:22.170 --> 00:35:43.820
अब तक भी हर एक उसी वायुमण्डल का जो अनुभव करते है वह भूलता नही है ।

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00:35:43.820 --> 00:35:53.820
वायुमण्डल का अनुभव दिल मे छप जाता है ।

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00:35:57.139 --> 00:36:06.909
तो वाणी द्वारा बडे-बड़े प्रोग्राम तो करते ही हो

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00:36:06.909 --> 00:36:39.480
लेकिन हर एक को अपनी श्रेष्ठ रूहानी वृत्ति से , वायब्रेशन से वायुमण्डल बनाना है ,

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00:36:48.800 --> 00:37:28.000
लेकिन वृत्ति रूहानी और शक्तिशाली तब होगी जब अपने दिल मे , मन मे किसी के प्रति भी उल्टी वृत्ति का वायब्रेशन नही होगा ।

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00:37:32.510 --> 00:38:37.250
अपने मन की वृत्ति सदा स्वच्छ हो क्योंकि किसी भी आत्मा के प्रति अगर कोई व्यर्थ वृत्ति या ज्ञान के हिसाब से निगेटिव वृत्ति है तो निगेटिव माना किचडा, अगर मन में किचडा है तो शुभ वृत्ति से सेवा नहीं कर सकेंगे ।

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00:38:41.019 --> 00:39:03.599
तो पहले अपने आपको चेक करो कि मेरे मन की वृत्ति शुभ रूहानी है ?

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00:39:10.050 --> 00:39:38.570
निगेटिव वृत्ति को भी अपनी शुभ भावना शुभ कामना से निगेटिव को भी पॉजिटिव में चेंज कर सकते हो

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00:39:42.849 --> 00:39:57.880
क्योंकि निगेटिव से अपने ही मन में परेशानी तो होती है ना !

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00:39:59.880 --> 00:40:05.710
वेस्ट थोट्स तो चलते हैं ना !

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00:40:09.369 --> 00:40:19.019
तो पहले अपने को चेक करो कि मेरे मन में कोई खिटखिट तो नही है ?

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00:40:20.679 --> 00:40:38.170
नम्बरवार तो हैं , अच्छे भी है तो साथ मे खिटखिट वाले भी हैं ,

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00:40:41.480 --> 00:41:01.420
लेकिन यह ऐसा है , यह समझना अच्छा है ।

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00:41:03.139 --> 00:41:20.909
जो रोंग है उसको रोंग समझना है , जो राइट है उसको राइट समझना है लेकिन दिल में बिठाना नही है ।

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00:41:22.400 --> 00:41:33.369
समझना अलग है , नॉलेजफुल बनना अच्छा है , रांग को रांग तो कहौ ना !

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00:41:33.369 --> 00:41:44.000
कई बच्चे कहते हैं बाबा आपको पता नही यह कैसे है !

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00:41:44.000 --> 00:41:49.820
आप देखो ना तो पता पड जाए ।

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00:41:49.820 --> 00:41:57.139
बाप मानते है आपके कहने से पहले ही मानते है

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00:41:57.880 --> 00:42:28.510
कि ऐसे है , लेकिन ऐसी बातों को अपनी दिल में वृत्ति में रखने से स्वयं भी तो परेशान होते हो ।

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00:42:29.250 --> 00:42:43.710
और खराब चीज अगर मन में है , दिल में है तो जहाँ खराब चीज है ,

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00:42:44.449 --> 00:42:59.940
वेस्ट थॉटस है , वह विश्व कल्याणकारी कैसे बनेंगे ?

80
00:43:02.849 --> 00:43:09.820
आप सभी का आक्यूपेशन क्या है ?

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00:43:11.820 --> 00:43:29.599
कोई कहेगा हम लण्डन के कल्याणकारी हैं , दिल्ली के कल्याणकारी हैं , यूपी के कल्याणकारी हैं ?

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00:43:29.599 --> 00:43:41.480
या जहाँ भी रहते हो , चलो देश नहीं तो शहर के कल्याणकारी है ,

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00:43:42.110 --> 00:43:55.539
आक्यूपेशन सब यही बताते कि विश्व कल्याणकारी हैं ।

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00:44:02.739 --> 00:44:05.820
तो सब कौन हो ?

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00:44:05.820 --> 00:44:09.539
विश्व कल्याणकारी हो ?

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00:44:09.539 --> 00:44:12.849
हैं तो हाथ उठाओ ।

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00:44:12.849 --> 00:44:18.849
( सभी ने हाथ उठाया ) विश्व कल्याणकारी !

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00:44:18.849 --> 00:44:22.619
विश्व कल्याणकारी !

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00:44:22.619 --> 00:44:26.400
अच्छा ।

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00:44:27.309 --> 00:44:36.909
तो मन में कोई भी खराबी तो नही है ?

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00:44:39.539 --> 00:44:54.909
समझना अलग चीज है , समझो भले , यह राइट है यह रोंग है , लेकिन मन में नही बिठाओ ।

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00:44:57.480 --> 00:45:09.710
मन में वृत्ति रखने से दृष्टि और सृष्टि भी बदल जाती है ।

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00:45:13.250 --> 00:45:25.820
बापदादा ने होम वर्क दिया था - क्या दिया था ?

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00:45:25.820 --> 00:45:47.079
सबसे सहज पुरुषार्थ है जो सभी कर सकते है , मातायें भी कर सकती हैं , बूढ़े भी कर सकते हैं , युवा भी कर सकते हैं , बच्चे भी कर सकते हैं ,

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00:45:48.570 --> 00:46:15.650
वह यही विधि है सिर्फ एक काम करो किसी से भी सम्पर्क में आओ - दुआ दो और दुआ लो ।

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00:46:20.219 --> 00:46:36.340
चाहे वह बददुआ देता है , लेकिन आप कोर्स क्या कराते हो ?

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00:46:38.849 --> 00:46:50.679
निगेटिव को पॉजिटिव में बदलने का , तो अपने को भी उस समय कोर्स कराओ ।

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00:46:54.280 --> 00:46:58.219
चैलेन्ज क्या है ?

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00:46:58.219 --> 00:47:15.369
चैलेन्ज है कि प्रकृति को भी तमोगुणी से सतोगुणी बनाना ही है ।

100
00:47:16.969 --> 00:47:20.570
यह चैलेन्ज है ना !

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00:47:20.570 --> 00:47:22.570
है ?

102
00:47:22.570 --> 00:47:34.110
आप सबने यह चैलेन्ज की है कि प्रकृति को भी सतोप्रधान बनाना है ?

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00:47:34.110 --> 00:47:38.219
बनाना है ?

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00:47:38.219 --> 00:47:42.849
कांध हिलाओ , हाथ हिलाओ ।

105
00:47:43.420 --> 00:47:52.570
देखो , देखादेखी नहीं हिलाना ।

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00:47:52.570 --> 00:48:17.250
दिल से हिलाना , क्योकि अभी समय प्रमाण वृत्ति से वायुमण्डल बनाने के तीव्र पुरुषार्थ की आवश्यकता है ।

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00:48:18.050 --> 00:48:30.739
तो वृत्ति में अगर जरा भी किचडा होगा ,

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00:48:32.110 --> 00:48:38.449
तो वृत्ति से वायुमण्डल कैसे बनायेंगे ?

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00:48:42.969 --> 00:48:54.280
प्रकृति तक आपका वायब्रेशन जायेगा , वाणी तो नहीं जायेगी ।

110
00:48:58.050 --> 00:49:20.110
वायब्रेशन जायेगा और वायब्रेशन बनता है वृत्ति से , और वायब्रेशन से वायुमण्डल बनता है ।

111
00:49:24.170 --> 00:49:37.480
मधुबन में भी सब एक जैसे तो नही है ।

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00:49:39.480 --> 00:50:08.280
लेकिन ब्रह्मा बाप और अनन्य बच्चो के वृत्ति द्वारा , तीव्र पुरुषार्थ द्वारा वायुमण्डल बना है ।

113
00:50:13.199 --> 00:50:27.880
आज आपकी दादी याद आ रही है , दादी की विशेषता क्या देखी ?

114
00:50:27.880 --> 00:50:33.539
कैसे कंट्रोल किया ?

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00:50:34.739 --> 00:50:55.309
कभी भी कैसी भी वृत्ति वाले की कमी दादी ने मन में नही रखी ।

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00:50:59.769 --> 00:51:05.480
सभी को उमंग दिलाया ।

117
00:51:08.340 --> 00:51:17.420
आपकी जगदम्बा माँ ने वायुमण्डल बनाया ।

118
00:51:17.420 --> 00:51:45.480
जानते हुए भी अपनी वृत्ति सदा शुभ रखी, जिसके वायुमण्डल का अनुभव आप सभी कर रहे हो ।

119
00:51:51.079 --> 00:52:02.170
चाहे फॉलो फादर है लेकिन बापदादा हमेशा कहते हैं

120
00:52:02.170 --> 00:52:16.849
कि हर एक की विशेषता को जान उस विशेषता को अपना बनाओ ।

121
00:52:22.170 --> 00:52:42.849
और हर एक बच्चे में यह नोट करना , बापदादा का जो बच्चा बना है

122
00:52:44.849 --> 00:52:55.420
उस एक एक बच्चे मे , चाहे तीसरा नम्बर है

123
00:52:57.420 --> 00:53:11.539
लेकिन यह ड़ामा की विशेषता है , बापदादा का वरदान है ,

124
00:53:12.340 --> 00:53:33.650
सभी बच्चों में चाहे 99 गलतियां भी हो लेकिन एक विशेषता जरूर है ।

125
00:53:36.570 --> 00:53:48.510
जिस विशेषता से मेरा बाबा कहने का हकदार है ।

126
00:53:53.369 --> 00:54:16.570
परवश है लेकिन बाप से प्यार अटूट होता है ।

127
00:54:26.400 --> 00:54:47.539
इसीलिए बापदादा अभी समय की समीपता अनुसार हर एक जो भी बाप के स्थान हैं ,

128
00:54:47.539 --> 00:55:02.570
चाहे गांव मे है , चाहे बड़े जोन मे है , सेंटर्स पर है

129
00:55:04.570 --> 00:55:38.570
लेकिन हर एक स्थान और साथियों मे श्रेष्ठ वृत्ति का वायुमण्डल आवश्यक है ।

130
00:55:50.400 --> 00:56:09.480
बस एक अक्षर याद रखो अगर कोई बददुआ देता भी है , तो लेने वाला कौन ?

131
00:56:10.280 --> 00:56:20.510
क्या देने वाला , लेने वाला एक होता है या दो ?

132
00:56:24.170 --> 00:56:37.139
अगर कोई आपको कोई खराब चीज़ दे , आप क्या करेंगे ?

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00:56:37.940 --> 00:56:43.539
अपने पास रखेंगे ?

134
00:56:45.539 --> 00:56:59.940
या वापस करेगे या फेंक देंगे कि अलमारी मे सम्भाल के रखेंगे ?

135
00:57:03.880 --> 00:57:27.880
तो दिल में सम्भाल के नही रखना क्योंकि आपकी दिल बापदादा का तख्त है ।

136
00:57:38.449 --> 00:58:09.079
इसीलिए एक शब्द अभी मन में पक्का याद कर लो , मुख मे नहीं मन में याद करो - दुआ देना है , दुआ लेना है ।

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00:58:11.079 --> 00:58:15.079
कोई भी निगेटिव बात मन में नहीं रखो ।

138
00:58:15.079 --> 00:58:32.449
अच्छा एक कान से सुना , दूसरे कान से निकालना तो आपका काम है कि दूसरे का काम है ?

139
00:58:36.280 --> 00:59:15.199
तब ही विश्व मे , आत्माओ में फास्ट गति की सेवा वृत्ति से वायुमण्डल बनाने की कर सकेंगे ।

140
00:59:17.199 --> 00:59:24.449
विश्व परिवर्तन करना है ना !

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00:59:35.769 --> 00:59:39.420
तो क्या याद रखेंगे ?

142
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याद रखा मन से ?

143
00:59:45.599 --> 01:00:00.570
दुआ शब्द याद रखो , बस क्योंकि आपके जड़ चित्र क्या देते है ?

144
01:00:02.570 --> 01:00:10.849
दुआ देते है ना ! मन्दिर में जाते हैं तो क्या मांगते है ?

145
01:00:11.880 --> 01:00:15.079
दुआ मागते हैं ना !

146
01:00:15.079 --> 01:00:23.710
दुआ मिलती है तभी तो दुआ मागते हैं ।

147
01:00:26.800 --> 01:00:51.769
आपके जड़ चित्र लास्ट जन्म में भी दुआ देते है , वृत्ति से उनकी कामनाये पूरी करते है ।

148
01:00:56.340 --> 01:01:25.769
तो आप बार-बार ऐसे दुआ देने वाले बने हो तब आपके चित्र भी आज तक दुआये देते हैं ।

149
01:01:29.309 --> 01:02:07.420
चलो परवश आत्माओ को अगर थोडा सा क्षमा के सागर के बच्चे क्षमा दे दी तो अच्छा ही है ना !

150
01:02:13.880 --> 01:02:22.969
तो आप सभी क्षमा के मास्टर सागर हो ?

151
01:02:22.969 --> 01:02:26.510
हो या नही हो ?

152
01:02:26.510 --> 01:02:28.510
हो ना !

153
01:02:29.820 --> 01:02:33.480
कहो पहले मै ।

154
01:02:34.800 --> 01:02:40.909
इसमें हे अर्जुन बनो ।

155
01:02:49.250 --> 01:02:57.199
ऐसा वायुमण्डल बनाओ

156
01:03:01.250 --> 01:03:23.880
जो कोई भी सामने आये वह कुछ न कुछ स्नेह ले , सहयोग ले ,

157
01:03:25.369 --> 01:03:50.219
क्षमा का अनुभव करे , हिम्मत का अनुभव करे , सहयोग का अनुभव करे , उमंग-उत्साह का अनुभव करे ।

158
01:04:00.219 --> 01:04:04.000
ऐसे हो सकता है ?

159
01:04:04.000 --> 01:04:07.420
हो सकता है ?

160
01:04:07.420 --> 01:04:14.400
पहली लाइन वाले हो सकता है ?

161
01:04:14.400 --> 01:04:16.400
हाथ उठाओ ।

162
01:04:16.400 --> 01:04:19.369
पहले करना पडेगा ।

163
01:04:21.369 --> 01:04:36.449
तो सभी करेगे ? टीचर्स करेगी ?

164
01:04:36.449 --> 01:04:54.679
अच्छा - अभी लास्ट टर्न मे 15 दिन पडे हैं , ठीक है ना ।

165
01:04:54.679 --> 01:05:14.739
मधुबन मे तो मदद है ही , आप सभी जितने भी है , जहाँ के भी हो

166
01:05:14.739 --> 01:05:40.050
लेकिन यह 15 दिन यह प्रैक्टिस करना कि दुआ देना है और दुआ लेना है ।

167
01:05:42.050 --> 01:05:44.219
ठीक है ?

168
01:05:44.219 --> 01:05:47.769
यह होमवर्क ठीक है ?

169
01:05:49.769 --> 01:05:52.110
करेंगे ?

170
01:05:52.110 --> 01:06:03.599
मधुबन वाले , अच्छा है , मधुबन वालो को सीट बहुत अच्छी मिली है , सीट अच्छी ले ली है ,

171
01:06:04.219 --> 01:06:11.880
होशियार है मधुबन वाले , सीट अच्छी पकड ली है ।

172
01:06:13.880 --> 01:06:28.219
अभी नम्बरवन की भी सीट लेनी है क्योकि मधुबन वासी बनना, भाग्य की निशानी है ।

173
01:06:28.219 --> 01:06:32.800
और अभी सभी कहाँ के हो ?

174
01:06:32.800 --> 01:06:42.170
लण्डन के , अमेरिका के , अभी सभी मधुबन के हो ।

175
01:06:42.849 --> 01:06:47.199
इस समय तो मधुबन के हो ना ?

176
01:06:47.199 --> 01:06:50.400
कितना अच्छा है ।

177
01:06:50.400 --> 01:06:56.170
अभी सब मधुबन निवासी हैं ।

178
01:07:02.000 --> 01:07:16.110
तो 15 दिन के बाद बापदादा रिजल्ट लेगे , ठीक है ?

179
01:07:20.000 --> 01:07:25.599
पीछे वाले ठीक है ?

180
01:07:25.599 --> 01:07:29.480
ऊपर गैलरी मे भी बैठे है ।

181
01:07:29.480 --> 01:07:32.739
गैलरीवाले ठीक है ?

182
01:07:40.280 --> 01:07:43.139
अच्छा ।

183
01:07:43.139 --> 01:07:49.369
अभी विश्व को बहुत आवश्यकता है ।

184
01:07:50.400 --> 01:07:57.420
आप निवारण मूर्त बन जाओ ।

185
01:07:57.420 --> 01:08:13.539
आपके निवारण मूर्त बनने से आत्माये निर्वाण में जा सकेंगी ।

186
01:08:14.570 --> 01:08:29.310
अगर आप निवारण मूर्त नहीं बनेगे तो आत्माये बिचारी निर्वाण में जा नही सकेगी ।

187
01:08:29.310 --> 01:08:38.619
निर्वाण का गेट आपको ही खोलना है ।

188
01:08:38.619 --> 01:08:44.109
बाप के साथ-साथ गेट खोलेगे ना ?

189
01:08:44.109 --> 01:08:49.310
गेट की सेरीमनी करेंगे ना ?

190
01:08:49.310 --> 01:08:55.880
अभी डेट बनाना आपस मे ।

191
01:08:56.909 --> 01:09:08.109
बापदादा सब मीटिंग सुनते है , बापदादा को क्या है , स्वीच आन किया , सुना ।

192
01:09:12.279 --> 01:09:34.909
एक ही समय पर सभी जोन , सभी देश की बातें सुन सकते है , सुनने चाहे तो ।

193
01:09:39.710 --> 01:09:45.140
अभी बेहद मे आओ ।

194
01:09:49.020 --> 01:09:59.770
कोई कोई बच्चे थोड़े ज्यादा गम्भीर बनते है , गम्भीरता अच्छी है

195
01:09:59.770 --> 01:10:12.340
लेकिन ज्यादा गम्भीरता सीरियस लगता है , तो सीरियस किसको अच्छा नहीँ लगता है ।

196
01:10:17.140 --> 01:10:35.939
गम्भीर बनो लेकिन अन्दर गम्भीरता हो , बाहर चेहरा मुस्कराता हो ।

197
01:10:46.739 --> 01:10:55.250
मुस्कराता हुआ चेहरा सभी को पसन्द आता है

198
01:10:56.050 --> 01:11:06.850
और ऐसे ज्यादा गम्भीर वाला चेहरा उससे डरते है , दूर भागते है ।

199
01:11:06.850 --> 01:11:12.399
सहयोगी नही बनेगे ।

200
01:11:15.539 --> 01:11:40.510
ब्रह्मा बाप का मुस्कराना , जगत अम्बा माँ का मुस्कराना , अपनी दादी का मुस्कराना , याद है ना !

201
01:11:41.310 --> 01:11:48.850
डबल फारेनर्स को भी दादी का मुस्कराता चेहरा अच्छा लगता है ना !

202
01:11:48.850 --> 01:11:59.079
हाथ हिला रहे है ।

203
01:12:07.649 --> 01:12:10.850
हँसो नहीं , मुस्कराओ ।

204
01:12:12.000 --> 01:12:27.880
जोर से हंसना नही , मुस्कराना क्योंकि बापदादा को अभी तीव्र पुरुषार्थ चाहिए ।

205
01:12:27.880 --> 01:12:30.680
क्यों ?

206
01:12:30.680 --> 01:12:46.909
क्योंकि बापदादा ने देखा कि बहुत काल का संस्कार आवश्यक है ।

207
01:12:48.220 --> 01:12:58.850
अगर अन्त में तीव्र पुरुषार्थ करेंगे तो बहुतकाल में जमा नही होगा ।

208
01:12:58.850 --> 01:13:22.050
और बहुतकाल में अगर आपका जमा नहीं होगा तो 21 जन्म का बहुतकाल का अधिकार भी कम हो जायेगा ।

209
01:13:22.050 --> 01:13:47.140
तो बापदादा नहीं चाहता है कि एक भी बच्चे का अधिकार कम हो , जब मेरा बाबा कहा , तो मेरा बाबा कहने वाले बच्चे का अधिकार कम नहीं होना चाहिए

210
01:13:47.600 --> 01:14:00.109
क्योंकि बाप का तो चाहे लास्ट बच्चा है , बाप जानता है , लास्ट है

211
01:14:00.340 --> 01:14:04.739
लेकिन कभी मुरली में नहीं कहा कि वह लास्ट बच्चा है ।

212
01:14:05.250 --> 01:14:18.739
मीठे मीठे बच्चे कहते है तो जो कडुवे है उन्हो को छोडके मीठे बच्चों को याद प्यार , यह कभी कहा है ?

213
01:14:19.310 --> 01:14:33.020
जानते तो हैं कि वह लास्ट बच्चा है लेकिन फिर भी मीठे मीठे बच्चे कहते है , कडुवा नही कहते है ।

214
01:14:38.850 --> 01:14:43.479
तो बाप समान बनना है ना !

215
01:14:44.909 --> 01:14:53.079
बापदादा को खुशी होती है , जब सभी का लक्ष्य पूछते हैं

216
01:14:53.079 --> 01:15:01.420
तो कहते हैं बाप समान बनना है , लास्ट नम्बर भी यही कहता है ,

217
01:15:02.739 --> 01:15:19.880
तो बापदादा खुश होते है , फिर भी लक्ष्य ऊंचा रखा है तो लक्षण भी आते जायेंगे ।

218
01:15:21.880 --> 01:15:38.000
बहुतकाल जरूर इकट्ठा करना है फिर लास्ट में नही उल्हना देना कि हमें तो बहुतकाल याद ही नही था ।

219
01:15:41.250 --> 01:15:54.170
63 जन्म के बहुतकाल का प्रभाव अभी तक भी देख रहे हैं ।

220
01:15:56.170 --> 01:16:02.909
चाहते नही है हो जाता है , यह क्या है ?

221
01:16:02.909 --> 01:16:08.510
बहुतकाल का प्रभाव है ।

222
01:16:10.279 --> 01:16:41.310
इसलिए बापदादा हर एक प्यारे से प्यारे बच्चों को यही कहते हैं तीव्र पुरुषार्थी भव !

223
01:16:59.250 --> 01:17:08.569
होमवर्क याद रखना , 15 दिन के बाद रिजल्ट पूंछेगें ।

224
01:17:15.079 --> 01:17:20.000
15 दिन मे संस्कार पड जायेगे ना !

225
01:17:20.000 --> 01:17:22.619
तो आगे भी होगा ।

226
01:17:22.619 --> 01:17:27.479
यहाँ तो वायुमण्डल की मदद है ना ।

227
01:17:28.000 --> 01:17:45.310
और सब मधुबन वाले ड्यूटी में हैं या जोन जिसका टर्न है , वह ड्यूटी पर है और तो सब फ्री है ।

228
01:17:53.819 --> 01:17:57.079
तो क्या करेंगे ?

229
01:17:57.079 --> 01:18:03.420
दादी ( दादी जानकी से ) सुनाओ क्या करेंगे ?

230
01:18:08.739 --> 01:18:12.850
करके दिखायेंगे ?

231
01:18:12.850 --> 01:18:19.539
करके ही दिखाना है ।

232
01:18:25.939 --> 01:18:45.819
( बाबा जरूर आपको प्रत्यक्ष करके दिखायेंगे ) पहले अपने को प्रत्यक्ष करो तब बाप प्रत्यक्ष होगा ।

233
01:18:45.819 --> 01:18:51.939
क्योकि आप द्वारा होना है ना !

234
01:18:51.939 --> 01:18:59.880
तो बाप कहते है आप कब अपने को प्रत्यक्ष करेंगे ?

235
01:19:00.619 --> 01:19:06.970
आपसे तो बाप प्रत्यक्ष हो ही जायेगा ।

236
01:19:08.970 --> 01:19:11.880
है उमंग ?

237
01:19:11.880 --> 01:19:14.449
कितना उमंग है ?

238
01:19:14.449 --> 01:19:17.020
बहुत उमंग है ?

239
01:19:17.020 --> 01:19:46.619
सभी को जितना बहुत-बहुत उमंग है उतना ही बापदादा पदम-पदम-पदमगुणा इन एडवांस मुबारक दे रहे है ।

240
01:19:56.510 --> 01:20:00.340
अच्छा ।

241
01:20:00.970 --> 01:20:20.000
जगह जगह से बच्चो के ईमेल और पत्र तो आते ही हैं ।

242
01:20:23.880 --> 01:20:36.569
तो जिन्होंने पत्र भी नही लिखा है लेकिन संकल्प किया है

243
01:20:38.170 --> 01:20:52.680
तो संकल्प वालों का भी याद प्यार बापदादा के पास पहुंच गया है ।

244
01:20:54.680 --> 01:21:00.619
पत्र बहुत मीठे मीठे लिखते हैं ।

245
01:21:02.619 --> 01:21:15.140
पत्र ऐसे लिखते है जो लगता है कि यह उमंग-उत्साह में उडते ही रहेंगे ।

246
01:21:20.340 --> 01:21:37.369
फिर भी अच्छा है , पत्र लिखने से अपने को बंधन में बांध लेते हैं , वायदा करते है ना !

247
01:21:39.369 --> 01:21:54.739
तो चारों ओर के जो जहाँ देख रहे है या सुन रहे हैं ,

248
01:21:56.739 --> 01:22:16.569
उन सभी को भी बापदादा सम्मुख वालों से भी पहले यादप्यार दे रहे हैं

249
01:22:18.569 --> 01:22:29.310
क्योंकि बापदादा जानते हैं कि कहाँ कोई टाइम है , कहाँ कोई टाइम है

250
01:22:29.310 --> 01:22:45.020
लेकिन सब बड़े उत्साह से बैठे हैं , याद में सुन भी रहे है ।

251
01:22:46.220 --> 01:22:52.109
अच्छा ।

252
01:22:55.079 --> 01:23:53.939
सेवा का टर्न - यूपी और इन्दौर लोन का है - ( सामने टीचर्स खड़ी है ) यह सब टीचर्स है ।

253
01:23:58.000 --> 01:24:02.279
दोनो तरफ की टीचर्स है ।

254
01:24:06.170 --> 01:24:09.199
अच्छा है ।

255
01:24:09.199 --> 01:24:20.000
बापदादा को टीचर्स पर भी नाज है

256
01:24:22.000 --> 01:24:53.819
क्योंकि हिम्मत रखकर सरेण्डर होके सारी जीवन सेवा के प्रति लगाने का संकल्प ले लिया है ।

257
01:24:54.170 --> 01:24:57.250
टीचर्स पक्की है ना ?

258
01:24:57.369 --> 01:25:05.079
पक्के है कि थोड़े थोडे कच्चे है ?

259
01:25:05.369 --> 01:25:11.140
टीचर्स कच्चे नहीं बनना ।

260
01:25:14.050 --> 01:25:33.710
टीचर्स अर्थात् अपने फीचर्स से फ्यूचर दिखाने वाली ।

261
01:25:39.020 --> 01:25:51.880
अभी संगमयुग का फ्यूचर है - फरिश्ता भव ।

262
01:25:53.880 --> 01:26:04.109
और भविष्य का फीचर्स है - देवता भव ।

263
01:26:05.250 --> 01:26:25.250
तो जो भी सेवाधारी ग्रुप आया है , उनको डबल नशा है कि फरिश्ता सो देवता बनना ही है !

264
01:26:25.939 --> 01:26:30.279
सभी पक्के है ना ?

265
01:26:31.079 --> 01:26:55.600
हाँ देखो , आपका फोटो आ रहा है , तो ऐसा नहीं हो कि फोटो दिखाई नहीं दे , पक्के रहना ।

266
01:27:01.199 --> 01:27:17.880
क्योकि जब कहाँ थोड़ी बहुत हलचल होती है ना तो कई बहुत जल्दी घबरा जाते हें ।

267
01:27:17.880 --> 01:27:26.050
गहराई में नही जाते , घबरा जाते है ।

268
01:27:27.079 --> 01:27:50.619
अगर गहराई में जाये ना , तो कभी भी कितना भी बडा हलचल वाला पेपर हो या बात हो

269
01:27:50.619 --> 01:28:01.479
लेकिन गहराई मे जाने वाले जैसे समुद्र होता है ना ,

270
01:28:01.479 --> 01:28:13.250
तो समुद्र के तले में जाने वाले बहुत माल लेके आते हैं ।

271
01:28:14.619 --> 01:28:32.800
ऊपर-ऊपर वाले नही , ऊपर वालो को तो मछली मिलेगी लेकिन गहराई मे जाने वाले बहुत चीज़ें ले आते हैं ।

272
01:28:34.109 --> 01:28:49.710
तो यहाँ भी कोई भी बात होवे , बातें तो आयेगी , बाते नहीं आयेगी - यह बापदादा नही कहेगा ।

273
01:28:50.220 --> 01:29:09.479
जितना आगे जायेगे उतनी सूक्ष्म बाते आयेगी क्योकि पास विद आनर होना है ना ।

274
01:29:10.399 --> 01:29:13.880
टीचर्स ने क्या सोचा है ?

275
01:29:13.880 --> 01:29:21.710
पास विद आनर होना है या 33 मार्क्स से पास होना है ?

276
01:29:22.109 --> 01:29:26.680
पास विद आनर होना है तो हाथ उठाओ ।

277
01:29:26.680 --> 01:29:35.079
इन्हो का अच्छी तरह से फोटो निकालो ।

278
01:29:38.399 --> 01:29:41.250
अच्छा ।

279
01:29:42.170 --> 01:29:50.619
तो हलचल मे घबराना नहीं ।

280
01:29:51.369 --> 01:30:04.449
बापदादा को उस समय भूल जाते हो , अकेले बन जाते हो ना तो छोटी बात भी बडी लगती है ।

281
01:30:04.449 --> 01:30:28.449
बापदादा कम्बाइण्ड है , कम्बाइण्ड रखो , अनुभव करो तो देखो पहाड भी रूई बन जायेगा ।

282
01:30:30.449 --> 01:30:34.399
कोई बडी बात नही है ।

283
01:30:34.800 --> 01:30:42.220
कितने बारी पास हुए हो , कितने कल्प पास हुए हो , पता है ?

284
01:30:42.220 --> 01:30:44.220
नशा है ?

285
01:30:45.310 --> 01:30:58.850
अनेक बार मैं ही पास हुआ हूँ , अभी रिपीट करना है ।

286
01:30:58.850 --> 01:31:13.140
नई बात नहीं है , सिर्फ रिपीट करना है , यह स्मृति रखो ।

287
01:31:17.939 --> 01:31:38.619
तो इन्दौर और यूपी , यूपी को तो साकार माँ बाप की बहुत पालना मिली है ।

288
01:31:41.880 --> 01:31:48.050
तो यूपी को तो कमाल करना है ।

289
01:31:49.020 --> 01:32:01.710
और इन्दौर की भी विशेषता है कि साकार बाप की प्रेरणा से सेण्टर खुला है ।

290
01:32:01.710 --> 01:32:05.770
ऐसे है ना ?

291
01:32:08.399 --> 01:32:21.770
दोनों की विशेषता है , तो अभी दोनों ही करो कमाल ।

292
01:32:24.850 --> 01:32:49.140
ऐसा वायुमण्डल बनाके दिखाओ , जैसे अभी किसको भी परिचय देते हो तो क्या कहते हो ? मधुबन में आके देखो , कहते हो ना !

293
01:32:49.140 --> 01:33:12.569
तो अभी अपने जोन को , अपने स्थान को ऐसा बनाओ जो किसको भी कहें कि इन्दौर मे जाके देखो , यूपी मे जाके देखो ।

294
01:33:18.619 --> 01:33:20.970
ठीक है ना ?

295
01:33:20.970 --> 01:33:26.340
पसन्द है ना ?

296
01:33:28.340 --> 01:33:31.939
क्या नही हो सकता है !

297
01:33:31.939 --> 01:33:56.680
आप एक-एक मास्टर सर्वशक्तिवान के संकल्प में इतनी ताकत है जो चाहो वह हो सकता है ।

298
01:33:57.479 --> 01:34:01.710
सिर्फ दृढता चाहिए ।

299
01:34:05.020 --> 01:34:14.800
दृढता की चाबी कभी-कभी माया चोरी कर देती है ।

300
01:34:17.310 --> 01:34:37.420
इस चाबी को सदा यूज करो , ऐसे नही सम्भाल के रखो , दिमाग में है , चाबी है लेकिन समय पर यूज करो ।

301
01:34:38.000 --> 01:34:50.970
समय बीत जाता है ना , फिर क्या कहते हैं , करना तो ऐसे था , था , था करते है ।

302
01:34:52.449 --> 01:34:56.680
तो था , था नही करना ।

303
01:35:01.600 --> 01:35:05.880
समय पर करना ।

304
01:35:09.600 --> 01:35:14.800
तो जोन नम्बरवन हो जायेगा ।

305
01:35:16.000 --> 01:35:24.220
सभी का लक्ष्य अच्छा है, नम्बरवन होना है ।

306
01:35:24.220 --> 01:35:33.369
यही लक्ष्य है ना , कि जो भी नम्बर मिले ठीक है ?

307
01:35:37.710 --> 01:35:56.569
बापदादा को भी हर जोन प्यारे ते प्यारा है , क्योंकि हर जोन में कोई न कोई विशेषता है ,

308
01:35:56.800 --> 01:36:06.800
लेकिन अभी खास विशेषता प्रत्यक्ष नहीं किया है ।

309
01:36:08.800 --> 01:36:13.020
होना तो है ही ।

310
01:36:15.649 --> 01:36:23.600
होना तो है ! नही , हुआ ही पडा है , सिर्फ रिपीट करो ।

311
01:36:25.600 --> 01:36:29.250
तो सब खुश है ?

312
01:36:29.250 --> 01:36:33.140
कभी खुशी तो नही गंवाते ?

313
01:36:33.140 --> 01:36:39.649
खुशी गई जीवन गई ।

314
01:36:39.649 --> 01:36:45.770
नीरस जीवन में कोई मजा नहीं ।

315
01:36:50.279 --> 01:36:57.710
तो अच्छा है , कोई कमाल करके दिखाओ ।

316
01:36:59.539 --> 01:37:07.310
अभी बापदादा ने सभी जोन को कहा है कोई नवीनता करके दिखाओ ।

317
01:37:07.310 --> 01:37:13.250
अभी नवीनता नहीं दिखाई है ।

318
01:37:13.250 --> 01:37:30.279
यह बड़े प्रोग्राम करना , यह वर्गीकरण के प्रोग्राम करना , यह तो हो रहे है , होते रहेंगे ।

319
01:37:30.850 --> 01:37:35.250
अब कोई नवीनता दिखाओ ।

320
01:37:35.770 --> 01:37:45.600
उसमें देखे कौन सा जोन आगे जाता है , विदेश जावे या देश जाये ।

321
01:37:46.109 --> 01:37:53.819
जो सब कापी कर सके , ऐसी नवीनता हो ।

322
01:38:00.109 --> 01:38:05.140
देखेंगे , कौन करता है ।

323
01:38:05.140 --> 01:38:09.369
करना तो है ही ।

324
01:38:10.510 --> 01:38:13.140
अच्छा ।

325
01:38:13.140 --> 01:38:35.819
बहुत अच्छा चांस लिया , बापदादा कहते है जो हर विशेषता मे चांस लेते हैं वह चांसलर बन जाते है ।

326
01:38:40.340 --> 01:38:53.420
यज्ञ सेवा का पुण्य जमा किया , बहुत बडा पुण्य जमा किया

327
01:38:55.420 --> 01:39:17.819
क्योंकि यहाँ वायुमण्डल और बेफिकर की मदद है , कोई जिम्मेवारी का फिकर नही , जो ड्यूटी मिली वही करनी है , बस ।

328
01:39:18.800 --> 01:39:26.220
तो दोनो जोन ने बहुत-बहुत कमाई जमा की ?

329
01:39:26.220 --> 01:39:31.770
थोडी तो नही की , बहुत की ?

330
01:39:31.770 --> 01:39:35.649
अच्छा ।

331
01:39:40.340 --> 01:40:45.539
96 देशों से 900 विदेशी भाई-बहिनें आये हैं - विदेश वाले संख्या बढाने मे अच्छा रिकार्ड दिखा रहे है ।

332
01:40:46.449 --> 01:41:02.569
एक तरफ संख्या बढा रहे है और दूसरी तरफ एरिया को सम्पन्न बनाने का भी उमंग अच्छा है ।

333
01:41:02.569 --> 01:41:21.140
बापदादा ने सुना कि मैजॉरिटी सभी तरफ अभी एक दो को उमंग आ रहा है ,

334
01:41:21.140 --> 01:41:34.680
हर एक अपनी एरिया को चेक करके सन्देश देने का प्रोग्राम बना रहे है ।

335
01:41:34.680 --> 01:41:46.000
भिन्न-भिन्न विधि से कर रहे है लेकिन जो भी कर रहे हो वह अच्छा कर रहे हो ।

336
01:41:46.619 --> 01:41:51.710
अपना उल्हना उतार रहे हो ।

337
01:41:56.340 --> 01:42:13.770
यह उमंग-उत्साह स्वयंम को भी उड़ाता है , और औरो मे भी खुशी की लहर फैलाता है ।

338
01:42:13.770 --> 01:42:46.170
जैसे कोई डूबे हुए को पत्ते का भी सहारा मिल जाता है , तिनके का सहारा मिल जाता है ना , ऐसे दुःखी आत्माओं को सहारा मिल जाता है ।

339
01:42:48.170 --> 01:43:05.369
उनके मन से जो दुआये निकलती है वह आपके पुण्य के खाते मे जमा हो जाती है ।

340
01:43:05.369 --> 01:43:11.420
यह गुह्य हिसाब है ।

341
01:43:17.020 --> 01:43:28.000
जितनों को जो प्राप्ति होती है , आपके खाते मे वो प्राप्ति जमा हो जाती है ।

342
01:43:31.199 --> 01:43:46.399
बाकी अच्छा मीटिंग का भी समाचार सुना , अच्छा अटेंशन दे रहे है ।

343
01:43:48.399 --> 01:44:10.510
अपनी अवस्था का भी अच्छा चांस लेते है और सेवा के प्रोग्राम मे भी अच्छा भविष्य प्रोग्राम बना देते है ।

344
01:44:17.310 --> 01:44:40.909
एक उमंग अच्छा है , कि जो स्नेही सहयोगी है उन्हो को और सहजयोगी बनाने मे समीप लाये है ।

345
01:44:46.279 --> 01:44:56.449
यह भारत वाले भी करते है लेकिन फारेन वाले भी अच्छा कर रहे है ।

346
01:45:11.369 --> 01:45:36.739
अभी सभी मैजॉरिटी जहाँ-जहाँ सेवा करते हो चाहे वीआईपी है , चाहे साधारण है लेकिन समझते है कि यहाँ कुछ मिलता है ।

347
01:45:39.819 --> 01:45:59.310
कुछ नवीनता है , अभी यह वायुमण्डल पहले से काफी चेंज हो गया है ।

348
01:46:02.510 --> 01:46:21.939
पहले कितना मुश्किल से बुलाने पर आते थे , अभी तो वह खुद कहते हैं कि हमको चांस लेने दो , फर्क हो गया ना ।

349
01:46:26.399 --> 01:46:33.710
तो विदेश की सेवा पर भी बापदादा खुश है ।

350
01:46:33.710 --> 01:46:42.739
लेकिन स्व की सेवा में क्या सुनाया ?

351
01:46:42.739 --> 01:47:08.739
तीव्र पुरुषार्थी , पुरुषार्थी सभी हैं लेकिन तीव्र पुरुषार्थी बनना है , जो सोचा वह किया , बाप ने कहा बच्चों ने किया ।

352
01:47:16.220 --> 01:47:31.649
यही आपके जगत अम्बा की युक्ति थी, नम्बरवन हो गई ।

353
01:47:40.220 --> 01:48:06.449
तो रात को और चलते फिरते भी चेक करो कि जो बाप ने कहा करना है , चलना है , सोचना है , वह किया ?

354
01:48:09.369 --> 01:48:20.109
जो बाप ने कहा वह करना ही है ।

355
01:48:24.680 --> 01:48:32.050
बाकी वृद्धि भी है और अटेंशन भी है ।

356
01:48:34.050 --> 01:48:39.310
प्रोग्राम भी अच्छे बनाये है ।

357
01:48:48.619 --> 01:48:54.050
डबल मुबारक हो ।

358
01:49:00.909 --> 01:49:04.449
अच्छा ।

359
01:49:08.909 --> 01:49:26.170
भिन्न-भिन्न वर्ग वाले भी आये हैं , बापदादा को मालूम है , अपनी अपनी मीटिंग्स कर रहे हैं ।

360
01:49:26.170 --> 01:49:39.310
जो भी वर्ग वाले आये है , प्लैन तो बहुत अच्छा बना रहे है ,

361
01:49:41.310 --> 01:49:56.909
अभी सिर्फ एडीशन यह करो कि जब भी मीटिंग करते है

362
01:49:58.909 --> 01:50:20.449
तो हमेशा स्व और सेवा दोनो का बैलेन्स रख एक दो को सेवा का उमंग भी दिलाओ ,

363
01:50:20.449 --> 01:50:33.199
लेकिन साथ में स्वउन्नति का उमंग-उत्साह भी दिलाओ ।

364
01:50:35.199 --> 01:50:40.109
बैलेन्स रखो ।

365
01:50:42.109 --> 01:50:49.939
तो डबल करने से डबल ब्लैसिंग मिलेगी ।

366
01:50:50.850 --> 01:51:03.649
यह ऑटोमेटिक ब्लैसिंग मिलती है , देनी नहीं पड़ती है ऑटोमेटिक मिलती है ।

367
01:51:05.199 --> 01:51:20.279
बापदादा ने देखा है - स्व-उन्नति का भी समाचार भेजा है ।

368
01:51:20.279 --> 01:51:40.970
( स्पार्क मीटिंग का समाचार रमेश भाई ने लिखकर सन्देशी द्वारा बापदादा के पास भेजा था ) रमेश जो कर रहे हैं ना , उसमे स्व-उन्नति का भी लिखा है , उसको बार-बार अटेंशन दिलाओ ।

369
01:51:43.140 --> 01:51:55.420
जैसे सेवा में प्रैक्टिकल कर लेते हो ना , ऐसे स्व-उन्नति में प्रैक्टिकल किया या नही उसका भी चार्ट रखो ।

370
01:51:55.420 --> 01:52:03.539
बाकी समाचार मिला था , सोचा अच्छा है ।

371
01:52:10.619 --> 01:52:20.050
जिन्होंने भी मीटिग की है बापदादा को समाचार मिला है ।

372
01:52:29.479 --> 01:52:46.510
अभी तक बापदादा को एक बात का वर्ग वालो ने रेसपान्ड नही दिया है , याद है ?

373
01:52:46.510 --> 01:52:51.539
कौन सा रेसपान्ड नही दिया है ?

374
01:52:52.680 --> 01:53:25.939
बापदादा चाहते है हर एक वर्ग का एक एक विशेष स्नेही भी हो , सहयोगी भी हो , वीआईपी भी हो , माइक भी हो और सहजयोग के इंटरेस्ट वाला भी हो ,

375
01:53:26.340 --> 01:53:50.050
ऐसा हर वर्ग का एक-एक का ग्रुप बाप के आगे आवे , सभी वर्ग का , एक वर्ग का नहीं , कभी कोई आईपी आते हैं , वीआईपी आते हैं वह वेलकम ।

376
01:53:50.050 --> 01:54:13.020
लेकिन बापदादा एक ही समय पर हर वर्ग के ऐसे क्वालिफिकेशन वाले ग्रुप को देखने चाहता है ।

377
01:54:15.020 --> 01:54:35.420
आईपीज का ग्रुप आता है लेकिन वर्गीकरण का एक विशेष माइक हो , आप सकाश बनो वह स्पीकर बने ।

378
01:54:37.420 --> 01:54:43.939
आप माइट वह माइक ।

379
01:54:46.850 --> 01:54:51.819
तो यह अभी करके दिखाना ।

380
01:54:57.479 --> 01:55:08.109
फारेन वाले तो प्रोग्राम करते है , उसमे आ जाते है ।

381
01:55:09.250 --> 01:55:18.909
काल आफ टाइम भी करते हैं , उसमें भी आईपी आ जाते हैं ।

382
01:55:21.250 --> 01:55:26.399
यह वर्गीकरण के रूप में माइक लाना ।

383
01:55:26.399 --> 01:55:31.020
यह ध्यान रखना ।

384
01:55:47.770 --> 01:56:23.020
( ऐसे हर वर्ग के भारत में तैयार हैं , बापदादा मिलने की डेट दें ) अभी सभी वर्गो से एक-एक माइक हो , ऐसा ग्रुप लाओ , उसके लिए टाइम देंगे ।

385
01:56:31.420 --> 01:56:35.539
अच्छा ।

386
01:56:35.880 --> 01:57:00.449
सभी ने संकल्प किया, तीव्र पुरुषार्थ कर नम्बरवन बनना ही है ।

387
01:57:00.449 --> 01:57:03.649
किया ?

388
01:57:03.649 --> 01:57:07.420
हाथ उठाओ ।

389
01:57:07.420 --> 01:57:33.710
अच्छा अभी टीचर्स उठा रही हैं ।

390
01:57:37.710 --> 01:57:43.079
पहली लाइन तो है ही ना ।

391
01:57:47.539 --> 01:57:52.000
अच्छा है -

392
01:57:53.369 --> 01:58:19.710
बापदादा ने यह भी डायरेकशन दिया कि सारे दिन मे बीच-बीच में 5 मिनिट भी मिले ,

393
01:58:20.680 --> 01:58:38.340
उसमे मन की एक्सरसाइज करो क्योंकि आजकल का जमाना एक्सरसाइज़ का है ।

394
01:58:41.310 --> 01:59:01.819
तो 5 मिनट में मन की एक्सरसाइज करो , मन को परमधाम मे लेके आओ ,

395
01:59:02.510 --> 01:59:21.600
सूक्ष्मवतन में फरिश्तेपन को याद करो फिर पूज्य रूप याद करो , फिर ब्राह्मण रूप याद करो , फिर देवता रूप याद करो ।

396
01:59:21.600 --> 01:59:23.600
कितने हुए ?

397
01:59:23.600 --> 01:59:25.600
पांच ।

398
01:59:27.020 --> 01:59:51.539
तो पांच मिनट मे 5 - यह एक्सरसाइज करो और सारे दिन में चलते फिरते यह कर सकते हो ।

399
01:59:51.539 --> 02:00:10.569
इसके लिए मैदान नही चाहिए , दौड़ नही लगानी है , न कुर्सी चाहिए , न सीट चाहिए , न मशीन चाहिए ।

400
02:00:14.000 --> 02:00:29.710
जैसे और एक्सरसाइज शरीर की आवश्यक है , वह भले करो , उसकी मना नहीं है ।

401
02:00:30.510 --> 02:00:46.510
लेकिन यह मन की ड्रील , एक्सरसाइज , मन को सदा खुश रखेगी ।

402
02:00:47.310 --> 02:00:56.569
उमंग-उत्साह में रखेगी , उड़ती कला का अनुभव करायेगी ।

403
02:00:58.050 --> 02:01:19.819
तो अभी - अभी यह ड्रील सभी शुरू करो - परमधाम से देवता तक ।

404
02:04:12.739 --> 02:04:17.020
( बापदादा ने ड्रील कराई ) अच्छा -

405
02:04:18.050 --> 02:05:05.939
चारों ओर के सदा अपने वृत्ति से रूहानी शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने वाले तीब्र पुरुषार्थी बच्चों को ,

406
02:05:06.739 --> 02:06:07.420
सदा अपने स्थान और स्थिति को शक्तिशाली वाईब्रेशन में अनुभव कराने वाले दृढ़ संकल्प वाले श्रेष्ठ आत्माओं को ,

407
02:06:09.939 --> 02:06:39.310
सदा दुआ देने और दुआ लेने वाले रहमदिल आत्माओं को ,

408
02:06:42.170 --> 02:07:40.220
सदा अपने आपको उड़ती कला का अनुभव करने वाले डबल लाइट आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते ।

409
02:08:01.140 --> 02:08:19.369
दादियों से - आप लोगो का संगठन सभी को सकाश देता है ।

410
02:08:19.369 --> 02:08:24.399
देता है ना ?

411
02:08:26.399 --> 02:08:33.600
क्योकि फिर भी अनुभवी हो ना !

412
02:08:35.600 --> 02:08:45.020
तो अनुभवी का प्रभाव ज्यादा पडता है ।

413
02:08:47.020 --> 02:09:12.000
आदि से आप आत्माओं मे बाप और माँ ने अनुभवी मूर्त बनने का संस्कार डाल दिया है ।

414
02:09:14.000 --> 02:09:17.600
डाला है ना !

415
02:09:24.050 --> 02:09:30.850
बापदादा भी खुश होते हैं ।

416
02:09:32.340 --> 02:09:55.939
अच्छा है , ठीक है ?

417
02:09:57.939 --> 02:10:06.510
कैसी भी तबियत है लेकिन यज्ञ का श्रंगार हो ।

418
02:10:08.510 --> 02:10:22.050
( दादी शान्तामणि को देखकर ) चाहे भागदौड नही भी कर सकते है लेकिन आप लोगो को देख करके भी ,

419
02:10:22.050 --> 02:10:32.000
आप लोगो की हाजिरी भी सभी को बल देती है ।

420
02:10:38.739 --> 02:10:45.140
आदि रत्न हो ना !

421
02:10:46.739 --> 02:11:07.140
तो आदि के संस्कार पावरफुल , आदि की भट्ठी सभी याद करते है ना !

422
02:11:09.140 --> 02:11:18.800
वह साकार की पालना सभी याद करते है ।

423
02:11:22.850 --> 02:11:26.279
अच्छा ।

424
02:11:38.800 --> 02:11:47.420
बाप को सिर्फ याद नही है , सभी को याद है ।

425
02:11:51.369 --> 02:11:55.770
बाप भी याद करते है ।

426
02:11:56.970 --> 02:12:19.199
इसीलिए जैसे ब्रह्मा बाप एक एग्जाम्पल था , वैसे दादी भी एक एग्जाम्पल है ।

427
02:12:20.800 --> 02:12:32.050
अचानक के पार्ट को कितना सहज कर दिया ।

428
02:12:35.140 --> 02:12:57.479
ब्रह्मा बाप ने यज्ञ को रचा , लेकिन दादी ने ब्रह्मा बाप से भी ज्यादा समय यज्ञ सम्भाला ।

429
02:13:02.970 --> 02:13:12.279
इसीलिए सभी के दिल मे दादी की याद है ही ।

430
02:13:13.539 --> 02:13:39.310
क्योंकि उनके गुण , उसका चेहरा , उसकी चलन विशेष रही है , इसीलिए सबके दिल मे विशेष याद है ही है ।

431
02:13:40.399 --> 02:13:48.000
अभी सभी ने योग किया ना , यह प्यार की निशानी है ।

432
02:13:48.000 --> 02:13:59.369
अभी और जोर से योग करो जो दादी मधुबन मे पहुंच जायेगी ।

433
02:14:03.079 --> 02:14:27.310
जैसे वह आक्सीजन देते है ना , वेंटीलेटर से देते है तो सायंस पावर से आपकी साइलेन्स पावर कम थोडे ही है ।

434
02:14:31.880 --> 02:14:37.939
और योग लगाओ , पावरफुल योग ।

435
02:14:39.310 --> 02:14:51.079
देखो , आपके योग से डाक्टर्स को टचिंग हुई , कोई तो विधि चेंज की ना ।

436
02:14:52.000 --> 02:15:07.199
अभी धीरे - धीरे कर रहे है , आप सभी के दृढ संकल्प से विधि भी निकल आयेगी ।

437
02:15:12.739 --> 02:15:15.710
ठीक है ना !

438
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और योग लगाओ , योग को कम नही करना ।

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02:15:29.079 --> 02:15:34.970
अच्छा ।

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जो भी सेवाधारी हैं मुन्नी है , योगिनी है , गुप्ता है और कुमारियां भी है

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02:15:48.000 --> 02:16:10.970
सभी दिल से सेवा कर रहे है , बापदादा आपके दिल की मेहनत देख खुश हैं और आपकी मेहनत अवश्य रूप दिखायेगी ।

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निर्वेर भाई ने सबकी याद दी - सभी का मन यहाँ है , तन वहाँ है ।

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( अभी सबका एक ही संकल्प है दादी चले , फिरे ) होना तो है ही ।

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अच्छा है ।

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बृजमोहन भाई से - दिल्ली में कोई ऐसी नई इन्वेशन करो जो सब कर सके , छोटे बडे सब कर सके ।

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विदेश की मुख्य बहनों से - बहुत अच्छा है ,

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विदेश को अनुभवी आत्मायें होने के कारण अच्छा आगे बढ़ा रहे हो

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क्योंकि जो आप लोगों में बाप की डायरेक्ट पालना का बीज है , वह बीज फल दे रहा है ।

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अभी सेवा की वृद्धि और उमंग-उत्साह बढ रहा है ।

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पहले जो नाजुकपन था , अभी नाजुकपन खत्म हो गया है ।

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वह कलचर भी खत्म हो गया है , क्योकि आप लोग एग्जाम्पल हो ना ,

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तो आपके एग्जाम्पल को देखकर अभी समझ गये है कि क्या करना है ।

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बाकी प्लैन बहुत अच्छा बनाया है ।

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यह ग्रुप-ग्रुप बनाके जो उन्होंने के अनुसार ट्रेनिंग देते है ना , वह बहुत अच्छा ।

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टीचर्स भी रिफ्रेश और आने वाले भी रिफ्रेश हो जाते हें ।

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02:20:54.280 --> 02:21:04.450
जिस डिपार्टमेंट को जो चाहिए वह मिलता है , यह अच्छा है ।

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और अटेंशन दिलाना भी बहुत जरूरी है ।

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अच्छा किया है ।

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02:21:24.000 --> 02:21:41.370
यज्ञ में भी अटेंशन दिया , यह भी बहुत अच्छा किया है क्योकि यज्ञ के हो ।

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02:21:41.370 --> 02:21:46.280
सिर्फ सेवा के लिए बाहर गये हैं ।

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02:21:46.799 --> 02:22:00.110
तो आप लोगो का जरा भी इशारा अच्छा होता है , इसमे खराब नही मानो , अच्छा है ।

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02:22:05.309 --> 02:22:09.709
बापदादा खुश है ।

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02:22:19.770 --> 02:22:24.110
इतना टाइम भी देते तो हो ना ।

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02:22:24.110 --> 02:22:39.370
अभी ऐसा एक दो के विचारो में समीप आओ जो सभी समझे कि यह सब एक है ,

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02:22:39.879 --> 02:22:51.770
6 नही है एक है , इतना एक दो के विचारो के भी नजदीक ।

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हो रहा है , बापदादा देख रहे हैं किया है और आगे भी करते रहेंगे ।

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02:23:11.649 --> 02:23:23.819
( दिल से बहुत थैक्स ) आपको बहुत थैक्स ।

