WEBVTT

1
00:18:41.710 --> 00:19:48.970
आज बापदादा चारों ओर के बच्चों के भाग्य की रेखायें देख हर्षित हो रहे हैं ।

2
00:20:03.369 --> 00:21:03.250
सभी बच्चों के मस्तक में चमकती हुई ज्योति की रेखा चमक रही है ।

3
00:21:12.000 --> 00:21:50.799
नयनों में रूहानियत् की भाग्य रेखा दिखाई दे रही है ।

4
00:22:00.000 --> 00:22:33.769
मुख में श्रेष्ठ वाणी के भाग्य की रेखा दिखाई दे रही है ।

5
00:22:43.019 --> 00:23:21.019
होठों में रूहानी मुस्कराहट देख रहे हैं ।

6
00:23:24.400 --> 00:23:56.849
हाथों में सर्व परमात्म खज़ाने की रेखा दिखाई दे रही है ।

7
00:24:09.309 --> 00:24:42.970
हर याद के कदम में पदमों की रेखा देख रहे हैं ।

8
00:24:50.680 --> 00:25:34.799
हर एक के ह्दय में बाप के लव में लवलीन की रेखा देख रहे हैं ।

9
00:25:43.539 --> 00:26:22.339
ऐसा श्रेष्ठ भाग्य हर एक बच्चा अनुभव कर रहे हैं ना !

10
00:26:25.539 --> 00:27:26.049
क्योंकि यह भाग्य की रेखायें स्वयं बाप ने हर एक के श्रेष्ठ कर्म के कलम से खींची है ।

11
00:27:45.480 --> 00:28:11.880
ऐसा श्रेष्ठ भाग्य जो अविनाशी है , सिर्फ इस जन्म के लिए नहीं है

12
00:28:13.079 --> 00:28:47.309
लेकिन अनेक जन्मों की अविनाशी भाग्य रेखायें हैं ।

13
00:28:54.220 --> 00:29:09.769
अविनाशी बाप है और अविनाशी भाग्य की रेखायें हैं ।

14
00:29:28.509 --> 00:30:07.019
इस समय श्रेष्ठ कर्म के आधार पर सर्व रेखायें प्राप्त होती हैं ।

15
00:30:25.140 --> 00:30:53.369
इस समय का पुरूषार्थ अनेक जन्म की प्रालब्ध बना देती है ।

16
00:31:05.710 --> 00:31:53.420
बापदादा सभी बच्चों के इस समय भी जो प्रालब्ध अनेक जन्म मिलनी है

17
00:31:56.000 --> 00:32:30.450
वह इस जन्म में पुरूषार्थ की प्रालब्ध की प्राप्ति अभी देखने चाहते हैं ।

18
00:32:33.539 --> 00:33:13.940
सिर्फ भविष्य नहीं लेकिन अभी भी यह सब रेखायें सदा अनुभव में आयें

19
00:33:23.140 --> 00:33:58.680
क्योंकि अभी के यह दिव्य संस्कार आपका नया संसार बना रहा है ।

20
00:34:15.480 --> 00:34:28.280
तो चेक करो , चेक करना आता है ना !

21
00:34:28.739 --> 00:34:39.250
स्वयं ही स्वयं के चेकर बनो ।

22
00:34:51.480 --> 00:35:24.969
तो सर्व भाग्य की रेखायें अभी भी अनुभव होती हैं ?

23
00:35:34.800 --> 00:36:02.170
ऐसे तो नहीं समझते कि यह प्रालब्ध अन्त में दिखाई देगी ?

24
00:36:11.599 --> 00:36:29.019
प्राप्ति भी अब है तो प्रालब्ध का अनुभव भी अभी करना है ।

25
00:36:47.480 --> 00:37:31.710
भविष्य संसार के संस्कार अभी प्रत्यक्ष जीवन में अनुभव होना है ।

26
00:37:36.570 --> 00:37:42.570
तो क्या चेक करो ?

27
00:37:45.480 --> 00:38:26.679
भविष्य संसार के संस्कारों का गायन करते हो कि भविष्य संसार में एक राज्य होगा ।

28
00:38:30.050 --> 00:38:35.480
याद है ना वह संसार !

29
00:38:35.480 --> 00:38:52.510
कितने बार उस संसार में राज्य किया है ?

30
00:38:53.369 --> 00:38:56.909
याद है ?

31
00:38:56.909 --> 00:39:06.570
कि याद दिलाने से याद आता है ?

32
00:39:10.340 --> 00:39:25.309
क्या थे , वह स्मृति में है ना ?

33
00:39:26.050 --> 00:39:53.420
लेकिन वही संस्कार अभी के जीवन में प्रत्यक्ष रूप में हैं ?

34
00:39:58.280 --> 00:40:39.139
तो चेक करो अभी भी मन में , बुद्धि में , सम्बन्ध-सम्पर्क में , जीवन में एक राज्य है ?

35
00:40:41.820 --> 00:41:02.909
वा कभी-कभी आत्मा के राज्य के साथ-साथ माया का राज्य भी तो नहीं है ?

36
00:41:10.170 --> 00:41:25.309
जैसे भविष्य प्रालब्ध में एक ही राज्य है , दो नहीं है ।

37
00:41:26.219 --> 00:41:42.000
तो अभी भी दो राज्य तो नहीं है ?

38
00:42:04.800 --> 00:42:36.170
जैसे भविष्य राज्य में एक राज्य के साथ एक धर्म है , वह धर्म कौन सा है ?

39
00:42:36.849 --> 00:42:50.800
सम्पूर्ण पवित्रता की धारणा का धर्म है ।

40
00:42:57.250 --> 00:43:17.880
तो अभी चेक करो कि पवित्रता सम्पूर्ण है ?

41
00:43:18.909 --> 00:43:36.969
स्वप्न में भी अपवित्रता का नामनिशान नहीं हो ।

42
00:43:43.880 --> 00:44:30.909
पवित्रता अर्थात् संकल्प , बोल , कर्म और सम्बन्ध-सम्पर्क में एक ही धारणा सम्पूर्ण पवित्रता की हो ।

43
00:44:32.909 --> 00:44:39.599
ब्रह्माचारी हो ।

44
00:44:57.420 --> 00:45:02.340
अपनी चेकिंग करने आती है ?

45
00:45:02.340 --> 00:45:10.340
जिसको अपनी चेकिंग करनी आती है वह हाथ उठाओ ।

46
00:45:10.340 --> 00:45:14.969
आती है और करते भी हैं ?

47
00:45:14.969 --> 00:45:25.710
करते हैं , करते हैं ?

48
00:45:31.369 --> 00:45:36.340
टीचर्स को आता है ?

49
00:45:38.340 --> 00:45:44.969
डबल फारेनर्स को आता है ?

50
00:45:58.449 --> 00:46:02.800
क्यों ?

51
00:46:05.199 --> 00:46:37.539
अभी की पवित्रता के कारण आपके जड़ चित्र से भी पवित्रता की मांग करते हैं ।

52
00:46:41.820 --> 00:47:06.679
पवित्रता अर्थात् एक धर्म अब की स्थापना है जो भविष्य में भी चलती है ।

53
00:47:13.019 --> 00:47:25.420
ऐसे ही भविष्य का क्या गायन है ?

54
00:47:26.909 --> 00:48:09.369
एक राज्य , एक धर्म और साथ में सदा सुख-शान्ति , सम्पत्ति , अखण्ड सुख , अखण्ड शान्ति , अखण्ड सम्पत्ति ।

55
00:48:11.710 --> 00:48:41.769
तो अब के आपके स्वराज्य के जीवन में , वह है विश्व राज्य और इस समय है स्वराज्य ,

56
00:48:44.969 --> 00:49:24.679
तो चेक करो अविनाशी सुख , परमात्म सुख , अविनाशी अनुभव होता है ?

57
00:49:30.800 --> 00:50:02.510
ऐसे तो नहीं , कोई साधन वा कोई सैलवेशन के आधार पर सुख का अनुभव तो नहीं होता ?

58
00:50:06.050 --> 00:50:40.280
कभी दुःख की लहर किसी भी कारण से अनुभव में नहीं आनी चाहिए ।

59
00:50:51.309 --> 00:51:15.480
कोई नाम , मान-शान के आधार पर तो सुख अनुभव नहीं होता है ?

60
00:51:16.619 --> 00:51:19.710
क्यों ?

61
00:51:20.170 --> 00:51:43.769
यह नाम मान शान , साधन , सैलवेशन यह स्वयं ही विनाशी हैं , अल्पकाल के हैं ।

62
00:51:45.769 --> 00:52:02.219
तो विनाशी आधार से अविनाशी सुख नहीं मिलता ।

63
00:52:19.650 --> 00:52:23.019
चेक करते जाओ ।

64
00:52:23.019 --> 00:52:40.679
अभी भी सुनते भी जाओ और अपने में चेक भी करते जाओ तो पता पड़ेगा

65
00:52:41.480 --> 00:53:02.510
कि अब के संस्कार और भविष्य संसार की प्रालब्ध में कितना अन्तर है !

66
00:53:04.510 --> 00:53:26.340
आप सबने जन्मते ही बापदादा से वायदा किया है , याद है वायदा ?

67
00:53:26.340 --> 00:53:32.679
है याद वायदा कि भूल गया है ?

68
00:53:33.079 --> 00:53:54.219
यही वायदा किया कि हम सभी बाप के साथी बन ,

69
00:53:54.219 --> 00:54:15.940
विश्व कल्याणकारी बन नया सुख शान्तिमय संसार बनाने वाले हैं ।

70
00:54:16.219 --> 00:54:19.250
याद है ?

71
00:54:19.250 --> 00:54:24.400
याद है अपना वायदा ?

72
00:54:24.400 --> 00:54:26.400
है याद ?

73
00:54:26.400 --> 00:54:28.400
हाथ उठाओ ।

74
00:54:28.400 --> 00:54:32.449
पीछे वाले भी उठा रहे हैं ।

75
00:54:32.969 --> 00:54:45.769
यहाँ भी उठा रहे हैं , पक्का वायदा है या थोड़ा गड़बड़ हो जाती है ?

76
00:54:53.539 --> 00:55:11.019
नया संसार अब परमात्म संस्कार के आधार से बनाने वाले हैं ।

77
00:55:14.000 --> 00:55:34.050
तो सिर्फ अभी पुरूषार्थ नहीं करना है लेकिन पुरूषार्थ की प्रालब्ध भी अभी अनुभव करनी है ।

78
00:55:39.480 --> 00:55:49.769
सुख के साथ शान्ति को भी चेक करो -

79
00:55:51.539 --> 00:56:36.400
अशान्त सरकमस्टांश , अशान्त वायुमण्डल उसमें भी आप शान्ति सागर के बच्चे

80
00:56:39.199 --> 00:57:17.769
सदा कमल पुष्प समान अशान्ति को भी शान्ति के वायुमण्डल में परिवर्तन कर सकते हो ?

81
00:57:21.250 --> 00:57:39.650
शान्त वायुमण्डल है , उसमें आपने शान्ति अनुभव की , यह कोई बड़ी बात नहीं है

82
00:57:40.570 --> 00:58:12.909
लेकिन आपका वायदा है अशान्ति को शान्ति में परिवर्तन करने वाले हैं ।

83
00:58:22.800 --> 00:58:33.420
तो चेक करो - कर रहे हैं ना चेक ?

84
00:58:37.710 --> 00:58:43.880
परिवर्तक हो ?

85
00:58:50.619 --> 00:58:55.710
परवश तो नहीं हो ना ?

86
00:58:55.710 --> 00:58:59.940
परिवर्तक हो ।

87
00:58:59.940 --> 00:59:13.019
परिवर्तक कभी परवश नहीं हो सकता ।

88
00:59:21.599 --> 00:59:46.400
इसी प्रकार से सम्पत्ति , अखुट सम्पत्ति , वह स्वराज्य अधिकारी की क्या है ?

89
00:59:47.710 --> 01:00:09.880
ज्ञान , गुण और शक्तियां स्वराज्य अधिकारी की सम्पत्तियां यह हैं ।

90
01:00:11.250 --> 01:00:41.940
तो चेक करो - ज्ञान के सारे विस्तार के सार को स्पष्ट जान गये हो ना ?

91
01:00:43.019 --> 01:01:02.739
ज्ञान का अर्थ यह नहीं है कि सिर्फ भाषण किया , कोर्स कराया , ज्ञान का अर्थ है समझ ।

92
01:01:09.250 --> 01:01:40.570
तो हर संकल्प , हर कर्म बोल ज्ञान अर्थात् समझदार , नॉलेजफुल बनके करते हैं ?

93
01:01:42.570 --> 01:02:03.420
सर्वगुण प्रैक्टिकल जीवन में इमर्ज रहते हैं ?

94
01:02:07.539 --> 01:02:17.480
सर्व हैं वा यथाशक्ति हैं ?

95
01:02:25.019 --> 01:03:04.000
इसी प्रकार सर्व शक्तियां आपका टाइटिल है - मास्टर सर्वशक्तिवान , शक्तिवान नहीं हैं ।

96
01:03:07.480 --> 01:03:21.199
तो सर्व शक्तियां सम्पन्न हैं ?

97
01:03:24.510 --> 01:03:42.449
और दूसरी बात सर्व शक्तियां समय पर कार्य करती हैं ?

98
01:03:42.449 --> 01:03:57.599
समय पर हाजिर होती हैं या समय बीत जाता है फिर याद आता है ?

99
01:04:09.480 --> 01:04:33.940
तो चेक करो तीनों ही बातें एक राज्य , एक धर्म और अविनाशी सुख-शान्ति , सम्पत्ति ।

100
01:04:40.510 --> 01:05:17.820
क्योंकि नये संसार में यह बातें जो अभी स्वराज्य के समय का अनुभव है वह नहीं हो सकेगा ।

101
01:05:18.909 --> 01:05:33.940
अभी इन सभी बातों का अनुभव कर सकते हैं ।

102
01:05:37.019 --> 01:06:06.280
अभी से यह संस्कार इमर्ज होंगे तब अनेक जन्म प्रालब्ध के रूप में चलेंगे ।

103
01:06:12.739 --> 01:06:34.400
ऐसे तो नहीं समझते हैं कि धारण कर रहे हैं , हो जायेगा , अन्त तक तो हो ही जायेंगे !

104
01:06:36.909 --> 01:06:52.280
बापदादा ने पहले से ही इशारा दे दिया है

105
01:06:52.280 --> 01:07:13.710
कि बहुतकाल का अभी का अभ्यास बहुतकाल की प्राप्ति का आधार है ।

106
01:07:15.710 --> 01:07:35.539
अन्त में हो जायेगा नहीं सोचना , हो जायेगा नहीं , होना ही है ।

107
01:07:41.880 --> 01:07:45.650
क्यों ?

108
01:07:46.400 --> 01:08:12.280
स्वराज्य का जो अधिकार है वह अभी बहुतकाल का अभ्यास चाहिए ।

109
01:08:12.280 --> 01:08:37.710
अगर एक जन्म में अधिकारी नहीं बन सकते , अधीन बन जाते तो अनेक जन्म कैसे होंगे !

110
01:08:40.340 --> 01:09:05.369
इसलिए बापदादा सभी चारों ओर के बच्चों को बार-बार इशारा दे रहे हैं

111
01:09:08.680 --> 01:09:33.020
कि अभी समय की रफ्तार तीव्रगति में जा रही है

112
01:09:38.739 --> 01:10:13.250
इसलिए सभी बच्चों को अभी सिर्फ पुरूषार्थी नहीं बनना है लेकिन तीव्र पुरूषार्थी बन ,

113
01:10:21.020 --> 01:10:42.000
पुरूषार्थ की प्रालब्ध का अभी बहुतकाल से अनुभव करना है ।

114
01:10:44.000 --> 01:11:20.800
तीव्र पुरूषार्थ की निशानियां बापदादा ने पहले भी सुनाई हैं ।

115
01:11:24.170 --> 01:11:53.710
तीव्र पुरूषार्थी सदा मास्टर दाता होगा , लेवता नहीं देवता , देने वाला ।

116
01:11:55.710 --> 01:12:17.140
यह हो तो मेरा पुरूषार्थ हो , यह करे तो मैं भी करूं ,

117
01:12:17.420 --> 01:12:45.369
यह बदले तो मैं भी बदलूं , यह बदले , यह करे , यह दातापन की निशानी नहीं है ।

118
01:12:56.109 --> 01:13:23.880
कोई करे न करे , लेकिन मैं बापदादा समान करूं , ब्रह्मा बाप समान भी , साकार में भी देखा ,

119
01:13:25.880 --> 01:13:38.170
बच्चे करें तो मैं करूं , कभी नहीं कहा , मैं करके बच्चों से कराऊं ।

120
01:13:44.800 --> 01:14:16.170
दूसरी निशानी है तीव्र पुरूषार्थ की , सदा निर्मान , कार्य करते भी निर्मान ,

121
01:14:19.250 --> 01:14:36.220
निर्माण और निर्मान दोनों का बैलेन्स चाहिए ।

122
01:14:40.909 --> 01:14:44.680
क्यों ?

123
01:14:49.369 --> 01:15:20.050
निर्मान बनकर कार्य करने में सर्व द्वारा दिल का स्नेह और दुआयें मिलती हैं ।

124
01:15:24.800 --> 01:15:58.800
बापदादा ने देखा कि निर्माण अर्थात् सेवा के क्षेत्र में आजकल सभी अच्छे उमंग उत्साह से नये-नये प्लैन बना रहे हैं ।

125
01:15:58.800 --> 01:16:15.600
इसकी बापदादा चारों ओर के बच्चों को मुबारक दे रहे हैं ।

126
01:16:20.109 --> 01:16:43.420
बापदादा के पास निर्माण के , सेवा के प्लैन बहुत अच्छे-अच्छे आये हैं ।

127
01:16:45.880 --> 01:17:04.000
लेकिन बापदादा ने देखा कि निर्माण के कार्य तो बहुत अच्छे

128
01:17:04.000 --> 01:17:24.569
लेकिन जितना सेवा के कार्य में उमंग-उत्साह है

129
01:17:25.199 --> 01:17:50.510
उतना अगर निर्मान स्टेज का बैलेन्स हो

130
01:17:51.420 --> 01:18:19.079
तो निर्माण अर्थात् सेवा के कार्य में और सफलता और ज्यादा प्रत्यक्ष रूप में हो सकती है ।

131
01:18:22.909 --> 01:19:04.109
बापदादा ने पहले भी सुनाया है निर्मान स्वभाव , निर्मान बोल और निर्मान स्थिति से सम्बन्ध-सम्पर्क में आना ,

132
01:19:12.170 --> 01:19:22.170
देवताओं का गायन करते हैं लेकिन है ब्राह्मणों का गायन ,

133
01:19:22.170 --> 01:20:04.220
देवताओं के लिए कहते हैं उनके मुख से जो बोल निकलते वह जैसे हीरे मोती , अमूल्य , निर्मल वाणी , निर्मल स्वभाव ।

134
01:20:07.539 --> 01:20:22.850
अभी बापदादा देखते हैं , रिजल्ट सुना दें ना , क्योंकि इस सीजन का लास्ट टर्न है ।

135
01:20:22.850 --> 01:21:16.909
तो बापदादा ने देखा कि निर्मल वाणी , निर्मान स्थिति उसमें अभी अटेन्शन चाहिए ।

136
01:21:24.170 --> 01:21:46.970
बापदादा ने पहले खज़ाने के तीन खाते जमा करो , यह पहले बताया है ।

137
01:21:47.770 --> 01:21:54.510
तो रिजल्ट में क्या देखा ?

138
01:21:55.819 --> 01:21:59.539
तीन खाते कौन से हैं ?

139
01:21:59.539 --> 01:22:04.800
वह तो याद होगा ना !

140
01:22:06.800 --> 01:22:32.449
फिर भी रिवाइज कर रहे हैं - एक है अपने पुरूषार्थ से जमा का खाता बढ़ाना ।

141
01:22:34.449 --> 01:22:58.619
दूसरा है - सदा स्वयं भी सन्तुष्ट रहे और दूसरे को भी सन्तुष्ट करे ,

142
01:23:02.220 --> 01:23:28.050
भिन्न-भिन्न संस्कार को जानते हुए भी सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना इससे दुआओं का खाता जमा होता है ।

143
01:23:30.399 --> 01:24:03.079
अगर किसी भी कारण से सन्तुष्ट करने में कमी रह जाती है तो पुण्य के खाते में जमा नहीं होता ।

144
01:24:04.449 --> 01:24:13.939
सन्तुष्टता पुण्य की चाबी है ।

145
01:24:13.939 --> 01:24:18.970
चाहे रहना , चाहे करना ।

146
01:24:19.819 --> 01:24:44.680
और तीसरा है - सेवा में भी सदा निःस्वार्थ , मैं पन नहीं ।

147
01:24:45.369 --> 01:25:21.199
मैंने किया , या मेरा होना चाहिए , यह मैं और मेरापन जहाँ सेवा में आ जाता है

148
01:25:23.199 --> 01:25:41.079
वहाँ पुण्य का खाता जमा नहीं होता ।

149
01:25:47.079 --> 01:26:06.680
मेरापन , अनुभवी हो यह रॉयल रूप का भी मेरापन बहुत है ।

150
01:26:06.680 --> 01:26:21.020
रॉयल रूप के मेरेपन की लिस्ट साधारण मेरेपन से लम्बी है ।

151
01:26:26.449 --> 01:26:43.600
तो जहाँ भी मैं और मेरेपन का स्वार्थ आ जाता है ,

152
01:26:43.600 --> 01:26:59.600
निःस्वार्थ नहीं है वहाँ पुण्य का खाता कम जमा होता है ।

153
01:27:02.850 --> 01:27:16.739
मेरेपन की लिस्ट फिर कभी सुनायेंगे , बड़ी लम्बी है और बड़ी सूक्ष्म है ।

154
01:27:19.819 --> 01:27:43.710
तो बापदादा ने देखा कि अपने पुरूषार्थ से यथाशक्ति सभी अपना-अपना खाता जमा कर रहे हैं

155
01:27:43.710 --> 01:28:13.020
लेकिन दुआओं का खाता और पुण्य का खाता वह अभी भरने की आवश्यकता है ।

156
01:28:21.819 --> 01:28:45.939
इसलिए तीनों खाते जमा करने का अटेन्शन ।

157
01:28:58.220 --> 01:29:35.420
संस्कार वैरायटी अभी भी दिखाई देंगे , सबके संस्कार अभी सम्पन्न नहीं हुए हैं

158
01:29:35.420 --> 01:30:07.880
लेकिन हमारे ऊपर औरों के कमज़ोर स्वभाव , कमज़ोर संस्कारों का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए ।

159
01:30:09.880 --> 01:30:35.250
मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ , कमज़ोर संस्कार शक्तिशाली नहीं हैं ।

160
01:30:36.449 --> 01:30:57.479
मुझ मास्टर सर्वशक्तिवान के ऊपर कमज़ोर संस्कार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए ।

161
01:31:03.539 --> 01:31:25.539
सेफ्टी का साधन है बापदादा की छत्रछाया में रहना ।

162
01:31:25.539 --> 01:31:32.220
बापदादा के कम्बाइण्ड रहना ।

163
01:31:32.220 --> 01:31:40.619
छत्रछाया है श्रीमत ।

164
01:31:50.800 --> 01:32:16.680
अभी इस सीजन का लास्ट टर्न है , दूसरी सीजन समय प्रमाण चालू होगी

165
01:32:16.680 --> 01:33:00.340
लेकिन जैसे नई सीजन मिलन मनाने की चालू होगी , उसम्रें नवीनता क्या दिखायेंगे ?

166
01:33:03.880 --> 01:33:15.310
अपने लिए कोई नया प्लैन बनाया है ?

167
01:33:15.310 --> 01:33:42.680
जैसे सेवा के लिए नये-नये प्लैन सोचते हो ना , तो स्व के प्रति , जो पुरानी बातें हैं उसमें नवीनता क्या सोची है ?

168
01:33:44.680 --> 01:34:05.020
अगर नहीं सोची भी है तो बापदादा इशारा दे रहे हैं

169
01:34:09.479 --> 01:34:42.909
कि स्व प्रति हर एक को संकल्प , बोल , सम्पर्क-सम्बन्ध ,

170
01:34:46.850 --> 01:35:17.819
कर्म में नवीनता लाने का प्लैन बनाना ही है ।

171
01:35:23.020 --> 01:35:32.399
बापदादा पहले रिजल्ट देखेंगे क्या नवीनता लाया ?

172
01:35:32.399 --> 01:35:44.109
क्या पुराना संस्कार दृढ़ संकल्प से परिवर्तन किया ?

173
01:35:44.109 --> 01:35:50.970
यह रिजल्ट पहले देखेंगे ।

174
01:36:00.050 --> 01:36:03.420
क्या सोचते हो ?

175
01:36:03.420 --> 01:36:06.680
ऐसा करें ?

176
01:36:06.680 --> 01:36:08.680
करें ?

177
01:36:11.649 --> 01:36:22.050
हाथ उठाओ जो कहते हैं करेंगे , करेंगे ?

178
01:36:22.050 --> 01:36:25.600
अच्छा ।

179
01:36:28.970 --> 01:36:33.250
करेंगे या दूसरे को देखेंगे ?

180
01:36:33.250 --> 01:36:37.369
क्या करेंगे ?

181
01:36:37.369 --> 01:36:53.140
दूसरे को नहीं देखना , बापदादा को देखना , अपनी बड़ी दादी को देखना ।

182
01:36:58.850 --> 01:37:08.449
कितनी न्यारी और प्यारी स्टेज है ।

183
01:37:09.770 --> 01:37:44.800
बापदादा कहते हैं अगर किसको मैं और हद का मेरापन से न्यारा देखना हो

184
01:37:44.800 --> 01:38:12.800
तो अपने बापदादा के दिलतख्तनशीन दादी को देखो ।

185
01:38:15.649 --> 01:38:40.909
सारी लाइफ में हद का मेरापन , हद का मैं-पन से न्यारी रही है ,

186
01:38:41.539 --> 01:39:04.449
उसकी रिजल्ट बीमारी कितनी भी है लेकिन दुःख दर्द की भासना से न्यारी है ।

187
01:39:11.079 --> 01:39:29.310
एक ही शब्द पक्का है , कोई भी पूछता दादी कुछ दर्द है , दादी कुछ हो रहा है ?

188
01:39:29.310 --> 01:39:33.770
क्या उत्तर मिलता ? कुछ नहीं ।

189
01:39:34.340 --> 01:40:23.079
क्योंकि निरस्वार्थ और दिल बड़ी , सर्व को समाने वाली , सर्व की प्यारी , इसकी प्रैक्टिकल निशानी देख रहे हैं ।

190
01:40:31.310 --> 01:40:45.819
तो जब ब्रह्मा बाप की बात कहते हैं , तो कहते हैं उसमें तो बाप था ना ,

191
01:40:45.819 --> 01:41:10.220
लेकिन दादी तो आपके साथ प्रभू पालना में रही , पढ़ाई में रही , सेवा में साथी रही ,

192
01:41:10.619 --> 01:41:38.680
तो जब एक बन सकता है , निःस्वार्थ स्थिति में तो क्या आप सभी नहीं बन सकते ?

193
01:41:39.310 --> 01:41:42.399
बन सकते हैं ना !

194
01:41:42.399 --> 01:41:58.340
बापदादा को निश्चय है कि आप ही बनने वाले हैं ।

195
01:41:59.710 --> 01:42:03.020
कितने बार बने हैं ?

196
01:42:03.020 --> 01:42:06.850
याद है ?

197
01:42:07.880 --> 01:42:30.909
अनेक कल्प बाप समान बने हैं और अभी भी आप ही बनने वाले हो ।

198
01:42:42.800 --> 01:42:57.369
इसी उमंग से , उत्साह से उड़ते चलो ।

199
01:42:59.649 --> 01:43:47.420
बाप को आपमें निश्चय है तो आप भी अपने में सदा निश्चयबुद्धि , बनना ही है ऐसा निश्चयबुद्धि बन उड़ते चलो ।

200
01:44:04.800 --> 01:44:30.619
जब बाप से प्यार है , प्यार में 100 परसेन्ट से भी ज्यादा है , ऐसे कहते हो ।

201
01:44:30.619 --> 01:44:32.909
यह ठीक है ?

202
01:44:32.909 --> 01:44:53.710
जो भी सभी बैठे हैं वा जो भी अपने-अपने स्थान पर सुन रहे हैं , देख रहे हैं

203
01:44:53.710 --> 01:45:14.619
वह सभी प्यार की सबजेक्ट में अपने को 100 परसेन्ट समझते हैं ?

204
01:45:14.619 --> 01:45:17.140
वह हाथ उठाओ ।

205
01:45:17.539 --> 01:45:20.680
100 परसेन्ट ?

206
01:45:26.970 --> 01:45:30.510
( सभी ने उठाया ) अच्छा ।

207
01:45:34.399 --> 01:45:41.250
पीछे वाले लम्बे हाथ उठाओ , हिलाओ ।

208
01:45:52.000 --> 01:45:58.510
इसमें तो सभी ने हाथ उठाया ।

209
01:46:07.079 --> 01:46:20.449
तो प्यार की निशानी है समान बनना ।

210
01:46:20.449 --> 01:46:53.819
जिससे प्यार होता है उस जैसा बोलना , उस जैसा चलना , उस जैसा सम्बन्ध-सम्पर्क निभाना , यह है प्यार की निशानी ।

211
01:47:10.569 --> 01:47:34.510
तो अगली सीजन में सभी की सूरत में बाप की सूरत दिखाई दे ।

212
01:47:40.569 --> 01:48:14.850
हर एक के सम्बन्ध-सम्पर्क में बाप जैसे संस्कार दिखाई दें ।

213
01:48:18.569 --> 01:48:38.510
यह है स्नेह का रिटर्न , स्वयं को टर्न करना ।

214
01:48:56.680 --> 01:49:56.569
देखो , आप सबके एक संकल्प की वृत्ति ने , योग की शक्ति ने दादी के परिवर्तन में ( तबियत के परिवर्तन में ) चार चांद लगा दिये ।

215
01:50:02.170 --> 01:50:39.539
साइलेन्स की शक्ति से एकमत होके एक वृत्ति से विधि ने प्रत्यक्ष फल दिखाया , इसकी मुबारक हो सभी को ।

216
01:50:40.449 --> 01:50:49.140
हाँ भले ताली बजाओ ।

217
01:50:57.819 --> 01:51:23.369
जब एक बात का प्रत्यक्ष प्रमाण देख लिया , दृढ़ संकल्प संगठन की साइलेन्स , याद की शक्ति का ।

218
01:51:25.369 --> 01:51:45.479
जब एक प्रमाण देख लिया तो आगे के लिए स्वपरिवर्तन के लिए ,

219
01:51:49.420 --> 01:52:08.000
अपने को देखना है , अपने को बदलना है , अगर झुकना पड़े तो झुकना है

220
01:52:08.000 --> 01:52:24.399
लेकिन परिवर्तन करने से स्व को हटाना नहीं है ।

221
01:52:26.619 --> 01:52:54.569
ऐसे दृढ़ संकल्प कर हर एक को सबूत देना है क्योंकि सभी सपूत बच्चे हो ।

222
01:52:54.569 --> 01:53:08.850
सपूत बच्चे का काम ही है प्रत्यक्ष सबूत देना ।

223
01:53:42.909 --> 01:53:46.510
अच्छा ।

224
01:53:47.020 --> 01:54:02.399
जो बापदादा ने होम वर्क दिया था - 15 दिन के लिए ।

225
01:54:03.819 --> 01:54:15.420
एक बात का होमवर्क दिया , याद रहा ?

226
01:54:19.819 --> 01:54:49.140
जिसने संकल्प तक भी न दुःख दिया , न दुःख लिया , स्वप्न में भी नहीं , संकल्प में भी नहीं , वह हाथ उठाओ ।

227
01:54:49.420 --> 01:54:52.739
उठ के खड़े हो ।

228
01:54:55.140 --> 01:55:09.369
जिन्होंने पास मार्क्स ली , थोड़ी मार्क्स वाले नहीं , पास मार्क्स ली , क्यों ! पहली लाइन ने नहीं ली ।

229
01:55:13.369 --> 01:55:19.199
पहली लाइन वाले क्यों नहीं उठते !

230
01:55:20.000 --> 01:55:24.680
अगर किया है तो उठो ।

231
01:55:25.140 --> 01:55:29.539
अगर दुःख नहीं दिया है तो उठो ।

232
01:55:38.970 --> 01:56:00.510
स्वप्न में भी , संकल्प में भी नहीं , फिर तो ताली बजाओ इन्हों के लिए ।

233
01:56:04.800 --> 01:56:09.710
डबल फारेनर्स ने भी उठाया है ।

234
01:56:09.710 --> 01:56:12.619
अच्छा ।

235
01:56:13.770 --> 01:56:17.020
अच्छा ।

236
01:56:19.420 --> 01:56:24.850
अमर रहेंगे ना !

237
01:56:24.850 --> 01:56:28.970
अमरभव का वरदान याद रखना ।

238
01:57:11.140 --> 01:57:18.619
अच्छा ।

239
01:57:34.279 --> 01:58:54.680
सेवा का टर्न ईस्टर्न जोन का है , ( बंगाल-बिहार , उड़ीसा , आसाम , नेपाल , तामिलनाडु जोन ) :- यह तो बहुत अच्छा , सभी जोन वालों ने चांस लेने की विधि अच्छी बनाई है ।

240
01:58:58.109 --> 01:59:31.310
बंगाल , बिहार , उड़ीसा , आसाम , नेपाल और तामिलनाडु कितनी राजधानियां हैं ।

241
01:59:36.800 --> 01:59:57.140
बहुत हैं ।

242
02:00:00.449 --> 02:00:22.449
तो सेवा में चमत्कारी सेवा का चांस है ।

243
02:00:24.449 --> 02:00:42.850
अच्छा आप सबने कोई नई इन्वेन्शन निकाली है , सेवा की नवीनता सोची है ?

244
02:00:46.449 --> 02:00:56.800
जोन के सभी तरफ की विशेष टीचर्स हाथ उठाओ ।

245
02:01:11.539 --> 02:01:26.399
भिन्न-भिन्न स्थान की हेड , एक जोन हेड नहीं , लेकिन भिन्न-भिन्न स्थान की एक एक हेड ।

246
02:01:33.819 --> 02:01:37.880
अच्छा ।

247
02:01:40.050 --> 02:01:51.420
तो आप सभी ने सेवा में नवीनता का प्लैन क्या बनाया ?

248
02:01:52.220 --> 02:01:56.000
कोई बनाया है ?

249
02:01:57.020 --> 02:02:05.020
आगे वाली टीचर्स बनाया है ?

250
02:02:05.770 --> 02:02:09.600
कि बना रहे हैं ?

251
02:02:10.449 --> 02:02:14.680
बना रहे हैं ।

252
02:02:16.000 --> 02:02:32.449
क्योंकि आपका जोन जो है उसमें विस्तार बहुत है ,

253
02:02:34.449 --> 02:02:47.310
कितनी आत्मायें हैं , कितने देश हैं , कितने गांव हैं ,

254
02:02:49.310 --> 02:03:15.420
तो ऐसा प्लैन बनाओ , जैसे बापदादा ने देखा तो फारेन में अफ्रीका वालों ने सिर्फ प्लैन नहीं बनाया ,

255
02:03:15.880 --> 02:03:37.649
लेकिन प्रैक्टिकल में सब एरिया कवर की है , तो आपकी तरफ तो बहुत एरिया है

256
02:03:38.449 --> 02:03:54.739
तो कितने लोग समय समाप्त होने पर वंचित रह जायेंगे ना !

257
02:03:54.739 --> 02:04:06.279
तो मिल करके ऐसा कोई प्लैन बनाओ ,

258
02:04:08.279 --> 02:04:28.279
ऐसे ही बापदादा के पास रशिया वालों का भी प्लैन आया और आज समाचार सुनाया

259
02:04:28.279 --> 02:04:42.050
कि आज से उन्होंने प्रोग्राम चालू कर दिया है ।

260
02:04:45.079 --> 02:05:21.250
आज गांव वालों ने भी सुनाया ( ग्राम विकास प्रभाग की ओर से इस वर्ष अखिल भारतीय मोटर साइकिल अभियान निकालने के बारे में सन्देशी द्वारा बापदादा को सन्देश भेजा गया था ) तो बापदादा के पास समाचार पहुंचा कि इन्डिया में , हर जोन के गांव-गांव में सन्देश पहुंचाने के लिए मोटरसाइकिल यात्रा का प्रोग्राम बनाया है ।

261
02:05:21.710 --> 02:05:29.369
सभी जोन मिलकर करेंगे ।

262
02:05:29.819 --> 02:05:54.279
तो आप भी ऐसा आपस में प्लैन बनाओ , कोई एरिया रह नहीं जाये , कम से कम सन्देश तो मिल जाये , नहीं तो आपको बहुत उल्हनें मिलेंगे ।

263
02:05:55.479 --> 02:06:05.710
हमारा बाबा आया , और हमें सूचना नहीं दी ।

264
02:06:11.079 --> 02:06:27.819
और दूसरा तामिलनाडु भी है , वह भी देखे ऐसा प्लैन बनाया है ?

265
02:06:27.819 --> 02:06:45.539
हर जोन को ऐसा प्लैन आपस में मिलकर बनाना ही चाहिए ।

266
02:06:49.479 --> 02:07:16.970
खुशी होती है , अपने मन में सैटिस्फैक्शन होता है हमने अपनी सेवा का कार्य सन्देश देने का तो पूरा किया ।

267
02:07:18.970 --> 02:07:22.510
तो अभी बनाना ।

268
02:07:22.510 --> 02:07:25.939
बना सकते हैं ना !

269
02:07:29.420 --> 02:07:35.539
बंगाल वाले हाथ उठाओ ।

270
02:07:40.569 --> 02:08:15.539
बिहार वाले हाथ उठाओ , नेपाल वाले , उड़ीसा वाले तो बहादुर हैं ।

271
02:08:18.850 --> 02:08:24.909
और भी हैं ना , आसाम ।

272
02:08:24.909 --> 02:08:36.680
देखो कितनी एरिया ली है , बहुत बड़ी एरिया ली है , बड़ा राजा बनना है ना ।

273
02:08:41.250 --> 02:08:58.399
तो दूसरी सीजन में यह सन्देश देने का कार्य का प्लैन बनाके प्रैक्टिकल में शुरू कर लेना ।

274
02:08:58.399 --> 02:09:04.569
कर सकते हैं ना !

275
02:09:04.569 --> 02:09:08.909
कर सकते हैं ?

276
02:09:12.170 --> 02:09:24.680
क्योंकि बापदादा को भी कोई बच्चे का उल्हना अच्छा नहीं लगता ।

277
02:09:33.140 --> 02:09:43.479
प्लैन बापदादा ने सुने हैं , प्लैन सभी ने बहुत अच्छा बनाया है

278
02:09:43.479 --> 02:10:01.199
लेकिन बापदादा हमेशा कहते हैं कि प्लैन के साथ प्लेन बुद्धि ।

279
02:10:01.199 --> 02:10:12.000
प्लेन बुद्धि और प्लैन दोनों साथ-साथ हों ।

280
02:10:15.369 --> 02:10:28.220
तो सफलता बहुत सहज और श्रेष्ठ निकलती है ।

281
02:10:30.220 --> 02:10:33.479
तो तामिलनाडु भी करेगा ना !

282
02:10:33.479 --> 02:10:37.369
करेंगे ?

283
02:10:38.220 --> 02:11:22.800
देखो , बापदादा ने सभी बच्चों को उमंग-उत्साह और हिम्मत का वरदान एक जैसा दिया है ।

284
02:11:22.800 --> 02:11:30.850
किसको ज्यादा , किसको कम नहीं दिया है ।

285
02:11:30.850 --> 02:12:36.680
तो जहाँ उमंग-उत्साह है , वहाँ हिम्मत हैं तो क्या नहीं हो सकता है ।

286
02:12:37.140 --> 02:12:45.539
असम्भव भी सम्भव हो सकता है ।

287
02:12:49.420 --> 02:13:01.250
सभी पूछते हैं आगे क्या करना है ?

288
02:13:02.510 --> 02:13:30.970
बापदादा का संकल्प है कि अभी ज्यादा में ज्यादा बनी बनाई स्टेज पर चांस लो ।

289
02:13:34.909 --> 02:13:48.050
उन्हों को सहयोगी बनाओ और आप सकाश दो ।

290
02:13:50.850 --> 02:14:07.770
70 साल अपने हिम्मत से किया ।

291
02:14:07.770 --> 02:14:13.369
अभी दूसरों का भाग्य बनाओ ।

292
02:14:13.369 --> 02:14:23.649
भाग्य बनाने का चांस दो उन्हों को ।

293
02:14:25.649 --> 02:14:45.939
भाग्य बनाने के लिए सिर्फ स्वयं सकाश कौन सी दो ?

294
02:14:45.939 --> 02:14:55.420
एक तो रहमदिल बहुत बनो ।

295
02:14:57.420 --> 02:15:07.420
क्षमा में बाप के साथी बनो ।

296
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शक्तिशाली वृत्ति से वायुमण्डल ऐसा बनाओ जो स्वयं आफर करें , ऐसे आफर चारों ओर से आये ।

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02:15:41.600 --> 02:16:11.819
हर जोन में आफर आये , यहाँ आओ , यहाँ आओ , यहाँ आओ , तब यही है , यही है , यह स्वतः ही प्रसिद्ध हो जायेगा ।

298
02:16:17.539 --> 02:16:34.280
अभी उन्हों को भी सहयोगी स्नेही बनने का चांस दो ।

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02:16:37.370 --> 02:17:08.799
उन्हों को भी चांस दो क्योंकि बापदादा ने देखा है कि स्नेही , सहयोगी हर जोन में यथा शक्ति है

300
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लेकिन उन्हों को सेवा के साथी बनाओ ।

301
02:17:20.680 --> 02:17:31.200
उन्हों को भी उमंग उत्साह के पंख दो ।

302
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हैं चारों ओर क्योंकि बापदादा चक्कर तो लगाते हैं ना !

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तो अपने बच्चों को भी देखते हैं और स्नेही-सहयोगी आत्माओं को भी देखते हैं ।

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बापदादा की नज़र में हैं लेकिन चांस नहीं दिया है , प्रैक्टिकल चांस नहीं लिया है ।

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तो यह वर्ष उन्हों को निमित्त बनाओ , स्नेही-सहयोगियों को उमंग-उत्साह में लाओ ।

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लाना पड़ता है ।

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02:19:00.110 --> 02:19:13.139
नहीं तो वह भी आपको उल्हना देंगे कि हमको तो आपने बताया ही नहीं कि ऐसा भी कर सकते हैं ।

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इसलिए अभी चांस देने वाले बनो ।

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कैसे फारेन वाले हो सकता है ना ?

310
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हो सकता है फारेन वाले ?

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फारेन के भाई उठो ।

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जो सेवा में निमित्त हैं वह उठो ।

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देखो कितने अच्छे अच्छे सकाश देने वाली आत्मायें हो ।

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02:20:54.739 --> 02:21:08.450
तो अभी देखेंगे सबसे कौन से जोन ने बनी बनाई स्टेज ली है ।

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जैसे एक वर्ष में मेगा प्रोग्राम करने की धुन लगा दी थी ।

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ऐसे अभी बनी बनाई स्टेज का चांस लेने की धूम मचाओ ।

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हो सकता है ?

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फारेन वाले हो सकता है ?

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हो सकता है !

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02:21:53.250 --> 02:22:08.909
आपको सामने कह रहे हैं ( आस्ट्रेलिया के ब्रायन को कह रहे हैं ) कमाल करके दिखाना ।

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02:22:08.909 --> 02:22:20.569
दादी जानकी की राय से करते चलो ।

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02:22:24.000 --> 02:22:31.600
बापदादा साथी दे रहे हैं ।

323
02:22:33.819 --> 02:22:47.879
सभी कर सकते हैं क्योंकि सभी पुराने और सर्विसएबुल हो ।

324
02:22:51.600 --> 02:23:58.280
( जयन्ती बहन ने सुनाया - विदेश में इस वर्ष ऐसे इन्टरनेशनल 4 निमन्त्रण मिले हैं , जिसमें दादियां आकर आशीर्वाद दें , लण्डन में जो बाबा का दुकान है उसको सेवा के लिए गोल्ड मैडल मिला है ) अच्छा है मुबारक हो ।

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02:23:58.280 --> 02:24:10.450
सभी के तालियों की मुबारक उसको दे देना ।

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02:24:21.709 --> 02:24:54.850
500 डबल विदेशी आये हैं :- बापदादा सदा कहता है कि डबल विदेशी मधुबन का विशेष श्रृंगार हैं ।

327
02:25:03.079 --> 02:25:21.600
जैसे देश अपने-अपने उमंग-उत्साह से बढ़ रहे हैं ऐसे विदेश भी कम नहीं हैं ।

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विदेश ने भी थोड़े समय में विस्तार अच्छा किया है ।

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02:25:41.540 --> 02:26:01.139
अभी विदेश को सिर्फ एक ही इनाम लेना है , बतायें कौन सा इनाम लेना है , खास डबल विदेशियों को ?

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02:26:02.510 --> 02:26:19.600
चारों ओर स्व और सेवा के बैलेन्स का इनाम लेना है ।

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02:26:19.600 --> 02:26:22.799
पसन्द है ?

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विदेशी पसन्द है ?

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लेना है ?

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हाथ उठाओ ।

335
02:26:38.510 --> 02:26:40.909
वेलकम ।

336
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मुबारक इन एडवांस मुबारक ।

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( जर्मनी में एक बड़े गुरू ने अपने प्रोग्राम में ब्रह्माकुमारियों को प्रवचन के लिए निमन्त्रण दिया है ) बहुत अच्छा ।

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ऐसे तो कभी कभी इन्डिया में भी मिलते हैं ।

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लेकिन अभी लहर फैलाओ ।

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कभी कभी तो मिलते हैं लेकिन अभी चारों ओर हर जोन में देश में विदेश में यह लहर फैलाओ ।

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02:27:59.139 --> 02:28:03.940
अच्छा ।

