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आज विश्व रचता बापदादा अपनी पहली रचना अति लवली और लक्की बच्चों से मिलन मेला मना रहा है ।

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कई बच्चे सम्मुख हैं , नयनों से देख रहे हैं

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00:19:41.369 --> 00:20:08.970
और चारों ओर के कई बच्चे दिल में समाये हुए हैं ।

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बापदादा हर बच्चे के मस्तक में तीन भाग्य के तीन सितारे चमकते हुए देख रहे हैं ।

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00:21:14.970 --> 00:21:37.769
एक भाग्य है - बापदादा की श्रेष्ठ पालना का ,

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दूसरा है शिक्षक द्वारा पढ़ाई का ,

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तीसरा है सतगुरू द्वारा सर्व वरदानों का चमकता हुआ सितारा ।

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00:22:30.970 --> 00:23:06.680
तो आप सब भी अपने मस्तक पर चमकते हुए सितारे अनुभव कर रहे हो ना !

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सर्व सम्बन्ध बापदादा से है फिर भी जीवन में यह तीन सम्बन्ध आवश्यक हैं

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00:24:05.200 --> 00:24:33.369
और आप सभी सिकीलधे लाडले बच्चों को सहज ही प्राप्त हैं ।

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00:24:35.369 --> 00:24:40.740
प्राप्त हैं ना !

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00:24:42.109 --> 00:24:46.450
नशा है ना !

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00:24:51.140 --> 00:25:00.109
दिल में गीत गाते रहते हैं ना -

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00:25:00.970 --> 00:25:08.279
वाह ! बाबा वाह !

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00:25:08.619 --> 00:25:14.509
वाह ! शिक्षक वाह !

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वाह ! सतगुरू वाह !

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दुनिया वाले तो लौकिक गुरू जिसको महान आत्मा कहते हैं ,

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उस द्वारा भी एक वरदान पाने के लिए कितना प्रयत्न करते हैं

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और आपको बाप ने जन्मते ही सहज वरदानों से सम्पन्न कर दिया ।

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00:27:17.539 --> 00:28:07.140
इतना श्रेष्ठ भाग्य क्या स्वप्न में भी सोचा था कि भगवान बाप इतना हमारे ऊपर बलिहार जायेगा !

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भक्त लोग भगवान के गीत गाते हैं और भगवान बाप किसके गीत गाते ?

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00:28:59.019 --> 00:29:12.339
आप लक्की बच्चों का ।

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अभी भी आप सभी भिन्न-भिन्न देशों से किस विमान में आये हो ?

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00:29:50.910 --> 00:30:16.849
स्थूल विमानों में कि परमात्म प्यार के विमान में सब तरफ से पहुंच गये हैं !

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परमात्म विमान कितना सहज ले आता है , कोई तकलीफ नहीं ।

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तो सभी परमात्म प्यार के विमान में पहुंच गये हो इसकी मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

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बापदादा एक एक बच्चे को देख चाहे पहले बार आये हैं , चाहे बहुतकाल से आ रहे हैं ।

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लेकिन बापदादा एक-एक बच्चे की विशेषता को जानते हैं ।

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00:32:47.250 --> 00:33:19.140
बापदादा का कोई भी बच्चा चाहे छोटा है , चाहे बड़ा है , चाहे महावीर है , चाहे पुरूषार्थी है ,

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00:33:20.450 --> 00:33:46.279
लेकिन हर एक बच्चा सिकीलधा है , क्यों ?

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00:33:48.279 --> 00:34:30.219
आपने तो बाप को ढूंढा मिला नहीं , लेकिन बापदादा ने आप हर बच्चे को बहुत प्यार , सिक , स्नेह से कोने-कोने से ढूंढा है ।

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00:34:38.800 --> 00:34:46.449
तो प्यारे हैं तब तो ढूंढा ।

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00:34:49.079 --> 00:35:09.199
क्योंकि बाप जानते हैं मेरा कोई एक भी बच्चा ऐसा नहीं है जिसमें कोई भी विशेषता नहीं हो ।

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00:35:14.219 --> 00:35:23.369
कोई विशेषता ने ही लाया है ।

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00:35:30.739 --> 00:35:56.800
कम से कम गुप्त रूप में आये हुए बाप को पहचान तो लिया ।

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00:36:00.280 --> 00:36:12.679
मेरा बाबा कहा , सब कहते हो ना मेरा बाबा !

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00:36:12.679 --> 00:36:19.019
कोई है जो कहता है नहीं तेरा बाबा , कोई है ?

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00:36:19.019 --> 00:36:25.420
सब कहते हैं मेरा बाबा ।

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00:36:32.849 --> 00:36:36.570
तो विशेष है ना ।

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00:36:36.570 --> 00:36:58.449
इतने बड़े बड़े साइन्सदान , बड़े बड़े वी आई पी पहचान नहीं सके , लेकिन आप सबने तो पहचान लिया ना ।

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00:36:58.449 --> 00:37:03.710
अपना बना लिया ना ।

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00:37:04.050 --> 00:37:10.909
तो बाप ने भी अपना बना लिया ।

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00:37:25.079 --> 00:37:47.940
इसी खुशी में पलते हुए उड़ रहे हो ना !

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00:37:49.940 --> 00:38:03.079
उड़ रहे हो , चल नहीं रहे हो , उड़ रहे हो

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00:38:10.219 --> 00:38:30.170
क्योंकि चलने वाले बाप के साथ अपने घर में जा नहीं सकेंगे ।

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क्योंकि बाप तो उड़ने वाले हैं , तो चलने वाले कैसे साथ पहुंचेंगे !

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00:38:46.000 --> 00:39:01.019
इसलिए बाप सभी बच्चों को क्या वरदान देते हैं ?

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00:39:01.019 --> 00:39:09.019
फरिश्ता स्वरूप भव ।

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00:39:14.340 --> 00:39:26.570
फरिश्ता उड़ता है , चलता नहीं है , उड़ता है ।

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00:39:28.570 --> 00:39:38.280
तो आप सभी भी उड़ती कला वाले हो ना !

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00:39:38.280 --> 00:39:44.570
हो ?

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00:39:46.050 --> 00:39:59.019
हाथ उठाओ जो उड़ती कला वाले हैं , कि कभी चलती कला , कभी उड़ती कला ? नहीं ?

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00:40:01.019 --> 00:40:21.539
सदा उड़ने वाले , डबल लाइट हो ना !

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00:40:22.570 --> 00:40:24.969
क्यों ?

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00:40:24.969 --> 00:41:02.570
सोचो , बाप ने आप सभी से गैरन्टी ली है कि जो भी किसी भी प्रकार का बोझ अगर मन में , बुद्धि में है

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00:41:03.539 --> 00:41:14.449
तो बाप को दे दो , बाप लेने ही आये हैं ।

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00:41:17.369 --> 00:41:27.139
तो बाप को बोझ दिया है या थोड़ा-थोड़ा सम्भाल के रखा है ?

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जब लेने वाला ले रहा है , तो बोझ देने में भी सोचने की बात है क्या ?

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00:41:51.710 --> 00:42:16.849
कि 63 जन्म की आदत है बोझ सम्भालने की , तो कई बच्चे कभी कभी कहते हैं चाहते नहीं हैं , लेकिन आदत से मजबूर हैं ।

60
00:42:20.849 --> 00:42:25.309
अभी तो मजबूर नहीं हो ना !

61
00:42:25.309 --> 00:42:32.110
मजबूर हो कि मजबूत हो ?

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00:42:32.849 --> 00:42:37.880
मजबूर कभी नहीं बनना ।

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00:42:38.570 --> 00:42:42.400
मजबूत हैं ।

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00:42:44.400 --> 00:42:50.679
शक्तियां मजबूत हो या मजबूर ?

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00:42:50.679 --> 00:42:53.769
मजबूत हैं ना ?

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00:42:53.769 --> 00:42:59.369
आगे बैठी हुई क्या हैं ?

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00:42:59.369 --> 00:43:04.170
मजबूत हैं ना !

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00:43:07.019 --> 00:43:13.199
बोझ रखना अच्छा लगता है क्या ?

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00:43:13.199 --> 00:43:22.050
दिल लग गई है , बोझ से दिल लग गई है ?

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00:43:24.739 --> 00:43:31.019
छोड़ो , छोड़ो तो छूटो ।

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00:43:31.019 --> 00:43:37.199
छोड़ते नहीं हैं तो छूटते नहीं हैं ।

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00:43:43.250 --> 00:43:55.250
छोड़ने का साधन है - दृढ़ संकल्प ।

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00:43:58.219 --> 00:44:19.139
कई बच्चे कहते हैं दृढ़ संकल्प तो करते हैं , लेकिन , लेकिन … कारण क्या है ?

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00:44:20.000 --> 00:44:44.280
दृढ़ संकल्प करते हो लेकिन किये हुए दृढ़ संकल्प को रिवाइज नहीं करते हो ।

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00:44:53.079 --> 00:45:19.820
बार-बार मन से रिवाइज करो और रियलाइज करो , बोझ क्या और डबल लाइट का अनुभव क्या !

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00:45:21.820 --> 00:45:45.139
रियलाइजेशन का कोर्स अभी थोड़ा और अण्डरलाइन करो ।

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00:45:55.019 --> 00:46:09.820
कहना और सोचना यह करते हो ,

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00:46:11.019 --> 00:46:31.139
लेकिन दिल से रियलाइज करो - बोझ क्या है और डबल लाइट क्या होता है ?

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00:46:33.539 --> 00:47:22.340
अन्तर सामने रखो क्योंकि बापदादा अभी समय की समीपता प्रमाण हर एक बच्चे में क्या देखने चाहते हैं ?

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00:47:36.449 --> 00:47:52.050
जो कहते हैं वह करके दिखाना है ।

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00:48:01.539 --> 00:48:41.650
जो सोचते हो वह स्वरूप में लाना है क्योंकि बाप का वर्सा है , जन्म सिद्ध अधिकार है मुक्ति और जीवनमुक्ति ।

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00:48:46.679 --> 00:49:07.139
सभी को निमन्त्रण भी यही देते हो ना तो आकर मुक्ति जीवनमुक्ति का वर्सा प्राप्त करो ।

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00:49:10.110 --> 00:49:32.739
तो अपने से पूछो क्या मुक्तिधाम में मुक्ति का अनुभव करना है

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00:49:33.650 --> 00:49:44.800
वा सतयुग में जीवनमुक्ति का अनुभव करना है

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00:49:44.800 --> 00:50:07.139
वा अब संगमयुग में मुक्ति , जीवनमुक्ति का संस्कार बनाना है ?

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00:50:11.079 --> 00:50:44.170
क्योंकि आप कहते हो कि हम अभी अपने ईश्वरीय संस्कार से दैवी संसार बनाने वाले हैं ।

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00:50:49.309 --> 00:51:02.280
अपने संस्कार से नया संसार बना रहे हैं ।

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00:51:04.280 --> 00:51:23.480
तो अब संगम पर ही मुक्ति जीवनमुक्ति के संस्कार इमर्ज चाहिए ना !

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00:51:34.400 --> 00:52:02.219
तो चेक करो सर्व बंधनों से मन और बुद्धि मुक्त हुए हैं ?

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00:52:12.570 --> 00:52:39.420
क्योंकि ब्राह्मण जीवन में कई बातों से जो पास्ट लाइफ के बन्धन हैं , उससे मुक्त हुए हो ।

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00:52:42.449 --> 00:53:20.000
लेकिन सर्व बन्धनों से मुक्त हैं या कोई कोई बंधन अभी भी अपने बन्धन में बांधता है ?

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00:53:23.820 --> 00:53:52.050
इस ब्राह्मण जीवन में मुक्ति जीवनमुक्ति का अनुभव करना ही ब्राह्मण जीवन की श्रेष्ठता है

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00:53:56.400 --> 00:54:18.000
क्योंकि सतयुग में जीवनमुक्त , जीवनबंध दोनों का ज्ञान ही नहीं होगा ।

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00:54:20.000 --> 00:54:32.739
अभी अनुभव कर सकते हो , जीवनबंध क्या है , जीवनमुक्त क्या है ,

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00:54:41.369 --> 00:55:01.880
क्योंकि आप सबका वायदा है , सबका वायदा है , अनेक बार वायदा किया है , क्या करते हो वायदा , याद है ?

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00:55:02.449 --> 00:55:18.170
किसी से भी पूछते हैं आपके इस ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य क्या है ?

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00:55:18.969 --> 00:55:23.019
क्या जवाब देते हो ?

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00:55:23.019 --> 00:55:26.679
बाप समान बनना है ।

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00:55:26.679 --> 00:55:28.679
पक्का है ना ?

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00:55:28.679 --> 00:55:32.170
बाप समान बनना है ना ?

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00:55:32.170 --> 00:55:35.599
कि थोड़ा थोड़ा बनना है ?

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00:55:35.599 --> 00:55:39.769
समान बनना है ना !

103
00:55:40.280 --> 00:55:43.250
बनना है समान ?

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00:55:43.250 --> 00:55:47.820
कि थोड़ा भी बन गये तो चलेगा !

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00:55:47.820 --> 00:55:50.619
चलेगा ?

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00:55:52.170 --> 00:55:58.800
उसको समान तो नहीं कहेंगे ना ।

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00:55:59.820 --> 00:56:12.050
तो बाप मुक्त है , या बंधन है ?

108
00:56:15.420 --> 00:56:41.420
अगर किसी भी प्रकार का चाहे देह का , चाहे कोई देह के सम्बन्ध , माता पिता बंधु सखा नहीं , देह के साथ जो कर्मेन्द्रियों का सम्बन्ध है ,

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00:56:41.420 --> 00:57:04.280
उस कोई भी कर्मेन्द्रियों के सम्बन्ध का बंधन है , आदत का बंधन है , स्वभाव का बंधन है ,

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00:57:06.280 --> 00:57:23.369
पुराने संस्कार का बंधन है , तो बाप समान कैसे हुए ?

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00:57:26.849 --> 00:57:34.800
और रोज वायदा करते हो बाप समान बनना ही है ।

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00:57:34.800 --> 00:57:41.019
हाथ उठवाते हैं तो सभी क्या कहते हैं ?

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00:57:41.019 --> 00:57:47.139
लक्ष्मी नारायण बनना है ।

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00:57:51.250 --> 00:58:05.079
बापदादा को खुशी होती है , वायदा बहुत अच्छे अच्छे करते हैं

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00:58:10.619 --> 00:58:24.280
लेकिन वायदे का फायदा नहीं उठाते हैं ।

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00:58:33.650 --> 00:58:48.340
वायदा और फायदा का बैलेन्स नहीं जानते ।

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00:58:50.679 --> 00:59:04.679
वायदों का फाइल बापदादा के पास बहुत बहुत बहुत बड़ा है , सभी का फाइल है ।

118
00:59:09.199 --> 00:59:30.280
ऐसे ही फायदे का भी फाइल हो , बैलेन्स हो , तो कितना अच्छा लगेगा ।

119
00:59:34.449 --> 00:59:40.449
यह सेन्टर्स की टीचर्स बैठी है ना ।

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00:59:40.449 --> 00:59:47.420
यह भी सेन्टर निवासी बैठे हैं ना ?

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00:59:53.199 --> 00:59:56.800
तो समान बनने वाले हुए ना ।

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00:59:56.800 --> 01:00:09.940
सेन्टर निवासी निमित्त बने हुए बच्चे तो समान चाहिए ना !

123
01:00:09.940 --> 01:00:11.940
हैं ?

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01:00:11.940 --> 01:00:21.539
हैं भी लेकिन कभी-कभी थोड़ा नटखट हो जाते हैं ?

125
01:00:29.940 --> 01:00:52.170
बापदादा तो सभी बच्चों का सारे दिन का हाल और चाल दोनों देखते रहते हैं ।

126
01:00:57.199 --> 01:01:16.679
आपकी दादी भी वतन में थी ना , तो दादी भी देखती थी तो क्या कहती थी ?

127
01:01:16.679 --> 01:01:25.309
पता है , कहती थी बाबा ऐसा भी है क्या ?

128
01:01:25.309 --> 01:01:36.739
ऐसा होता है , ऐसे करते हैं , आप देखते रहते हैं ?

129
01:01:43.420 --> 01:01:51.820
सुना , आपकी दादी ने क्या देखा ।

130
01:01:56.000 --> 01:02:10.800
अभी बापदादा यही देखने चाहते हैं

131
01:02:10.800 --> 01:02:33.420
कि एक-एक बच्चा मुक्ति जीवनमुक्ति के वर्से का अधिकारी बने , क्योंकि वर्सा अभी मिलता है ।

132
01:02:35.420 --> 01:03:02.219
सतयुग में तो नेचरल लाइफ होगी , अभी के अभ्यास की नेचुरल लाइफ , लेकिन वर्से का अधिकार अभी संगम पर है ।

133
01:03:06.340 --> 01:03:49.769
इसीलिए बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक स्वयं चेक करे अगर कोई भी बंधन खींचता है , तो कारण सोचो ।

134
01:03:51.769 --> 01:04:02.449
कारण सोचो और कारण के साथ निवारण भी सोचो ।

135
01:04:05.250 --> 01:04:37.369
निवारण बापदादा ने अनेक बार भिन्न-भिन्न रूप से दे दिये हैं ।

136
01:04:47.539 --> 01:05:14.000
सर्वशक्तियों का वरदान दिया है , सर्वगुणों का खज़ाना दिया है , खज़ाने को यूज करने से खज़ाना बढ़ता है ।

137
01:05:17.599 --> 01:05:26.340
खज़ाना है , सबके पास है , बापदादा ने देखा है ।

138
01:05:26.340 --> 01:05:32.050
हर एक के स्टॉक को भी देखता है ।

139
01:05:34.050 --> 01:05:39.599
बुद्धि है स्टॉक रूम ।

140
01:05:41.599 --> 01:05:47.139
तो बापदादा ने सबका देखा है ।

141
01:05:47.139 --> 01:06:03.820
है , स्टॉक में है लेकिन खज़ाने को समय पर यूज नहीं करते हैं ।

142
01:06:07.250 --> 01:06:24.280
सिर्फ प्वाइंट के रूप से सोचते हैं , हाँ यह नहीं करना है , यह करना है ,

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01:06:24.280 --> 01:06:42.110
प्वाइंट के रूप से यूज करते हैं , सोचते हैं लेकिन प्वाइंट बनके प्वाइंट को यूज नहीं करते हैं ।

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01:06:45.420 --> 01:07:01.940
इसीलिए प्वाइंट रह जाती है , प्वाइंट बनके यूज करो तो निवारण हो जाए ।

145
01:07:08.340 --> 01:07:18.909
बोलते भी हैं , यह नहीं करना है , फिर भूलते भी हो ।

146
01:07:18.909 --> 01:07:24.909
बोलने के साथ भूलते भी हो ।

147
01:07:37.079 --> 01:08:06.570
इतना सहज विधि सुनाई है , सिर्फ है ही संगमयुग में बिन्दी की कमाल , बस बिन्दी यूज करो और कोई मात्रा की आवश्यकता नहीं ।

148
01:08:07.139 --> 01:08:12.510
तीन बिन्दी को यूज करो ।

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01:08:14.510 --> 01:08:28.909
आत्मा बिन्दी , बाप बिन्दी और ड्रामा बिन्दी है ।

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01:08:30.909 --> 01:08:45.710
तीन बिन्दी यूज करते रहो तो बाप समान बनना कोई मुश्किल नहीं ।

151
01:08:48.050 --> 01:09:08.800
लगाने चाहते हो बिन्दी लेकिन लगाने के समय हाथ हिल जाता , तो क्वेश्चन मार्क हो जाता या आश्चर्य की रेखा बन जाती है ।

152
01:09:10.000 --> 01:09:16.279
वहाँ हाथ हिलता , यहाँ बुद्धि हिलती है ।

153
01:09:24.399 --> 01:09:36.970
नहीं तो तीन बिन्दी को स्मृति में रखना क्या मुश्किल है ?

154
01:09:38.340 --> 01:09:44.220
है मुश्किल है ?

155
01:09:49.140 --> 01:10:04.449
बापदादा ने तो दूसरी भी सहज युक्ति बताई है , वह क्या ?

156
01:10:08.170 --> 01:10:15.250
दुआ दो और दुआ लो ।

157
01:10:20.170 --> 01:10:39.199
अच्छा , योग शक्तिशाली नहीं लगता , धारणायें थोड़ी कम होती हैं ,

158
01:10:41.199 --> 01:10:49.199
भाषण करने की हिम्मत नहीं होती है ,

159
01:10:53.420 --> 01:11:16.449
लेकिन दुआ दो और दुआ लो , एक ही बात करो और सब छोड़ो , एक बात करो , दुआ लेनी है दुआ देनी है ।

160
01:11:16.449 --> 01:11:29.479
कुछ भी हो जाए , कोई कुछ भी दे लेकिन मुझे दुआ देनी है , लेनी है ।

161
01:11:31.020 --> 01:11:38.340
एक बात तो पक्की करो , इसमें सब आ जायेगा ।

162
01:11:38.800 --> 01:11:50.800
अगर दुआ देंगे और दुआ लेंगे तो क्या इसमें शक्तियां और गुण नहीं आयेंगे ?

163
01:11:51.079 --> 01:11:56.510
आटोमेटिकली आ जायेंगे ना !

164
01:11:58.170 --> 01:12:13.199
एक ही लक्ष्य रखो , करके देखो , एक दिन अभ्यास करके देखो , फिर सात दिन करके देखो ,

165
01:12:16.220 --> 01:12:25.420
चलो और बातें बुद्धि में नहीं आती , एक तो आयेगी ।

166
01:12:27.819 --> 01:12:37.199
कुछ भी हो जाए लेकिन दुआ देनी और लेनी है ।

167
01:12:41.420 --> 01:12:45.420
यह तो कर सकते हैं या नहीं ?

168
01:12:45.420 --> 01:12:47.770
कर सकते हैं ?

169
01:12:47.770 --> 01:12:59.420
अच्छा , तो जब भी जाओ ना तो यह ट्रायल करना ।

170
01:12:59.420 --> 01:13:05.880
इसमें सब योगयुक्त आपेही हो जायेंगे ।

171
01:13:05.880 --> 01:13:15.939
क्योंकि वेस्ट कर्म करेंगे नहीं तो योगयुक्त हो ही गये ना ।

172
01:13:15.939 --> 01:13:23.939
लेकिन लक्ष्य रखो दुआ देना है , दुआ लेनी है ।

173
01:13:23.939 --> 01:13:41.819
कोई कुछ भी देवे , बददुआ भी मिलेगी , क्रोध की बातें भी आयेंगी

174
01:13:43.020 --> 01:14:01.250
क्योंकि वायदा करेंगे ना , तो माया भी सुन रही हैं , कि यह वायदा करेंगे , वह भी अपना काम तो करेगी ना ।

175
01:14:01.250 --> 01:14:29.199
मायाजीत बन जायेंगे फिर नहीं करेंगी,अभी तो मायाजीत बन रहे हैं ना,तो वह अपना काम करेगी लेकिन मुझे दुआ देनी है और दुआ लेनी है।

176
01:14:29.770 --> 01:14:32.739
हो सकता है ?

177
01:14:32.739 --> 01:14:36.449
हो सकता है ?

178
01:14:36.449 --> 01:14:42.619
हाथ उठाओ जो कहते हैं हो सकता है ।

179
01:14:42.619 --> 01:14:51.539
अच्छा , शक्तियां हाथ उठाओ ।

180
01:14:51.539 --> 01:14:58.680
हाँ , हो सकता है !

181
01:15:01.479 --> 01:15:06.569
तो सब तरफ की टीचर्स आई हैं ना ।

182
01:15:06.569 --> 01:15:12.170
सब तरफ की टीचर्स आई है ना ।

183
01:15:12.170 --> 01:15:34.619
तो जब आप अपने देश में जाओ तो पहले पहले सभी को एक सप्ताह यह होमवर्क करना है

184
01:15:35.140 --> 01:16:06.000
और रिजल्ट भेजनी है , कितने जने क्लास के मेम्बर कितने हैं , कितने ओ के हैं और कितने थोड़े कच्चे और कितने पक्के हैं , तो ओ के के बीच में लाइन लगाना बस ऐसे समाचार देना ।

185
01:16:06.000 --> 01:16:15.079
इतने जने ओ के , इतने जनों में ओ के में लकीर लगी है ।

186
01:16:15.079 --> 01:16:29.079
इसमें देखो डबल फारेनर्स आये हैं तो डबल काम करेंगे ना ।

187
01:16:30.739 --> 01:16:45.140
एक सप्ताह की रिजल्ट भेजना फिर बापदादा देखेंगे , सहज है ना , मुश्किल तो नहीं है ।

188
01:16:45.140 --> 01:17:01.199
माया आयेगी , आप कहेंगे बाबा मेरे को पहले तो कभी नहीं आता था , अभी आ गया , यह होगा ,

189
01:17:01.199 --> 01:17:17.079
लेकिन दृढ़ निश्चय वाले की निश्चित विजय है ।

190
01:17:19.819 --> 01:17:29.649
दृढ़ता का फल है सफलता ।

191
01:17:30.909 --> 01:17:41.369
सफलता न होने का कारण है दृढ़ता की कमी ।

192
01:17:43.369 --> 01:17:56.220
तो दृढ़ता की सफलता प्राप्त करनी ही है ।

193
01:18:05.649 --> 01:18:10.399
डबल फारेनर्स नम्बर वन हो जाना ।

194
01:18:10.399 --> 01:18:17.140
डबल है ना , डबल फारेनर्स हैं ना , तो कमाल दिखाना ।

195
01:18:23.020 --> 01:18:28.619
विदेश के कितने आये हैं ?

196
01:19:04.909 --> 01:19:21.420
( 90 देशों से 300 सेन्टर्स के आये हैं ) तो 90 कमाल करेंगे ना ?

197
01:19:22.680 --> 01:19:39.420
90 देश के डबल फारेनर्स हैं , और 10 इन्डिया के एड हो जायेंगे तो 100 हो जायेंगे ।

198
01:19:42.449 --> 01:19:45.079
तो करेंगे ?

199
01:19:47.079 --> 01:19:57.539
जो भी आये हैं , कुछ भी हो , करके ही दिखाना है ।

200
01:19:57.880 --> 01:20:09.649
है इतने दृढ़ कि सोचते हैं देखेंगे , कोशिश करेंगे …

201
01:20:10.510 --> 01:20:23.020
कोई है ऐसा , जो समझते हैं कोशिश करेंगे , कोशिश वाले हाथ उठाओ ।

202
01:20:23.020 --> 01:20:25.649
कोई नहीं ।

203
01:20:25.649 --> 01:20:34.680
तो मुबारक हो , ताली बजाओ ।

204
01:20:37.250 --> 01:20:45.140
दादियां कहाँ हैं ?

205
01:20:46.170 --> 01:20:50.909
पक्का है ।

206
01:20:52.220 --> 01:20:54.340
अच्छा है ।

207
01:20:54.340 --> 01:21:12.109
क्योंकि डबल फारेनर्स का वैसे नेचर , संस्कार भी गाये हुए हैं कि जो सोचते हैं करना है , वह करके ही छोड़ते हैं ,

208
01:21:12.109 --> 01:21:26.680
यह डबल फारेनर्स की नेचर गाई हुई है , अभी इस नेचर को इस कार्य में लगाना ।

209
01:21:27.939 --> 01:21:32.279
ठीक है ना !

210
01:21:32.279 --> 01:21:40.510
करके ही दिखाना है , कुछ भी हो जाए ।

211
01:21:43.310 --> 01:21:58.619
सहनशक्ति का वरदान विशेष लेके जाना ।

212
01:22:01.819 --> 01:22:24.050
लेकिन बापदादा ने समय प्रति समय बच्चों की एक सीन देखी है , बच्चों की सीन बाप देखता रहता है ना तो क्या देखा !

213
01:22:24.050 --> 01:22:30.220
कि बच्चों ने सहन बहुत अच्छा किया ,

214
01:22:30.220 --> 01:22:38.279
बापदादा वाह ! वाह ! कर रहे थे बहुत अच्छा बहुत अच्छा देख रहे थे ना ,

215
01:22:38.279 --> 01:22:50.340
लेकिन बाद में क्या किया , सहन कर लिया , पास हो गये

216
01:22:50.340 --> 01:23:05.310
लेकिन पीछे समाने की शक्ति कम होने के कारण , समा नहीं सके ना , तो जहाँ तहाँ वर्णन करते रहे ,

217
01:23:05.310 --> 01:23:16.399
समाने की शक्ति नहीं थी , सहन करने की शक्ति थी , पार्ट अच्छा बजाया

218
01:23:16.399 --> 01:23:29.250
लेकिन समाने की शक्ति कम होने के कारण फिर वर्णन करने लगे ऐसा हुआ , ऐसा हुआ तो गंवा दिया ना ।

219
01:23:30.170 --> 01:23:33.310
तो ऐसे नहीं करना ।

220
01:23:33.310 --> 01:23:51.939
बापदादा बहुत दृश्य देखते हैं बच्चों के , पहले ताली बजाते हैं फिर चुप हो जाते हैं , तो ऐसे नहीं करना ।

221
01:24:01.710 --> 01:24:17.199
सहनशक्ति , समाने की शक्ति , सर्वशक्तियों का एक दो से कनेक्शन है ,

222
01:24:18.619 --> 01:24:28.850
इसीलिए बाप को सर्वशक्तिवान कहा है , शक्तिवान नहीं कहा है ,

223
01:24:28.850 --> 01:24:42.000
आपका भी टाइटल मास्टर सर्वशक्तिवान है , शक्तिवान है क्या ?

224
01:24:42.000 --> 01:24:45.880
सर्वशक्तिवान है ना ?

225
01:24:45.880 --> 01:24:59.939
तो सर्वशक्तियों का एक दो से कनेक्शन है इसीलिए यह अटेन्शन रखना ।

226
01:25:03.020 --> 01:25:07.310
अच्छा ।

227
01:25:08.279 --> 01:25:34.680
बापदादा खुश है , डबल फारेनर्स ने अपने अपने स्थानों में वृद्धि की है ।

228
01:25:39.420 --> 01:25:58.970
प्रैक्टिकल में रहमदिल मर्सीफुल का पार्ट अच्छा बजा रहे हैं ।

229
01:26:08.109 --> 01:26:17.020
बापदादा के पास समाचार तो आते रहते हैं ।

230
01:26:20.050 --> 01:26:43.600
बापदादा ने अभी भी सुना अफ़्रीका और रशिया दोनों ही तरफ जो भी रहे हुए स्थान हैं ,

231
01:26:43.600 --> 01:27:29.880
उसमें सन्देश अच्छा दे रहे हैं और भारत में हर एक वर्ग वाले अच्छे हिम्मत और उमंग से अपने अपने वर्ग के तरफ से मर्सीफुल बन आत्माओं को सन्देश देने का ,

232
01:27:30.510 --> 01:27:48.970
परिचय देने का और सम्बन्ध जोड़ने का कार्य अच्छे उमंग उत्साह से कर रहे हैं ।

233
01:27:48.970 --> 01:27:58.800
इसकी भी बापदादा मुबारक दे रहे हैं ।

234
01:28:00.000 --> 01:28:07.369
हाँ ताली बजाओ भले ।

235
01:28:13.819 --> 01:28:29.539
जैसे इसकी ताली बजाई ना अभी 6 मास बापदादा देते हैं

236
01:28:29.539 --> 01:28:46.109
क्योंकि अभी सीजन तो शुरू होनी ही है , तो 6 मास , ज्यादा टाइम दे रहे हैं ।

237
01:28:46.109 --> 01:28:57.939
जैसे सेवा उमंग-उत्साह से कर रहे हैं

238
01:28:57.939 --> 01:29:09.880
ऐसे स्वयं को भी स्व के प्रति सेवा ,

239
01:29:10.510 --> 01:29:37.079
स्व सेवा और विश्व सेवा , स्व सेवा अर्थात् चेक करना और अपने को बाप समान बनाना ।

240
01:29:37.710 --> 01:29:52.340
कोई भी कमी , कमज़ोरी बाप को दे दो ना , क्यों रखी है , बाप को अच्छा नहीं लगता है ।

241
01:29:53.250 --> 01:29:56.909
क्यों कमज़ोरी रखते हो ?

242
01:29:57.770 --> 01:30:00.109
दे दो ।

243
01:30:00.109 --> 01:30:07.479
देने के टाइम छोटे बच्चे बन जाओ ।

244
01:30:08.050 --> 01:30:21.649
जैसे छोटा बच्चा कोई भी चीज़ सम्भाल नहीं सकता , कोई भी चीज़ पसन्द नहीं आती है तो क्या करता है ?

245
01:30:21.649 --> 01:30:28.340
मम्मी पापा यह आप ले लो ।

246
01:30:29.079 --> 01:30:51.310
ऐसे ही कोई भी प्रकार का बोझ , बंधन जो अच्छा नहीं लगता , क्योंकि बापदादा देखता है , एक तरफ यह सोच रहे हैं है तो अच्छा नहीं ,

247
01:30:51.310 --> 01:31:03.649
ठीक तो नहीं है लेकिन क्या करूं , कैसे करूं , तो यह तो अच्छा नहीं है ।

248
01:31:03.649 --> 01:31:16.399
एक तरफ अच्छा नहीं है कह रहे हैं , दूसरे तरफ सम्भाल के रख रहे हैं , तो इसको क्या कहें !

249
01:31:17.199 --> 01:31:19.880
अच्छा कहें ?

250
01:31:19.880 --> 01:31:23.600
अच्छा तो नहीं है ना ।

251
01:31:23.600 --> 01:31:28.619
तो आपको क्या बनना है ? अच्छे ते अच्छा ना ।

252
01:31:29.369 --> 01:31:34.220
अच्छा भी नहीं , अच्छे ते अच्छा ।

253
01:31:35.140 --> 01:31:58.399
तो जो भी कोई ऐसी बात हो , बाबा हाजिरा हजूर है , उसको दे दो , और अगर वापस आवे तो अमानत समझके फिर दे दो ।

254
01:31:58.399 --> 01:32:04.170
अमानत में ख्यानत नहीं की जाती है ।

255
01:32:04.170 --> 01:32:23.250
क्योंकि आपने तो दे दी , तो बाप की चीज़ हो गई , बाप की चीज़ या दूसरे की चीज़ आपके पास गलती से आ जाए , आप अलमारी में रख देंगे ?

256
01:32:23.250 --> 01:32:27.079
रख देंगे ?

257
01:32:28.739 --> 01:32:31.140
निकालेंगे ना ।

258
01:32:31.140 --> 01:32:37.079
कैसे भी करके , निकालेंगे , रखेंगे नहीं ।

259
01:32:37.079 --> 01:32:41.649
सम्भालेंगे तो नहीं ना ।

260
01:32:42.449 --> 01:32:45.539
तो दे दो ।

261
01:32:45.539 --> 01:32:50.680
बाप लेने के लिए आया है ।

262
01:32:50.680 --> 01:32:54.909
और तो कुछ आपके पास है नहीं जो दो ।

263
01:32:54.909 --> 01:32:59.600
लेकिन यह तो दे सकते हो ना ।

264
01:33:01.600 --> 01:33:07.140
अक के फूल हैं , वह दे दो ।

265
01:33:13.420 --> 01:33:18.510
सम्भालना अच्छा लगता है क्या ?

266
01:33:19.140 --> 01:33:34.109
तो 6 मास जैसे अभी उमंग से कर रहे हैं सेवा , रशिया का भी समाचार सुना ,

267
01:33:34.109 --> 01:33:44.680
और अफ़्रीका का भी समाचार सुना , औरों का भी समाचार सुनते रहते हैं , कर रहे हैं ।

268
01:33:46.000 --> 01:33:56.050
अभी स्व सेवा के प्रति खास समय दे रहे हैं ।

269
01:33:56.050 --> 01:34:24.170
अभी देख तो लिया , बापदादा ने कितने समय से दो शब्द बार-बार रिवाइज कराये हैं , वह दो शब्द कौन से हैं ?

270
01:34:24.170 --> 01:34:33.199
अचानक और एवररेडी।

271
01:34:33.199 --> 01:34:36.170
याद है ना !

272
01:34:36.170 --> 01:34:38.909
याद है ?

273
01:34:38.909 --> 01:34:51.600
आपकी बहुत अच्छी दादी चन्द्रमणि , अचानक गई थी , याद है ?

274
01:34:51.600 --> 01:35:33.079
तभी से , कितना टाइम हो गया , ( 10 साल ) और उसके बाद कितने अचानक के हुए हैं ?

275
01:35:33.079 --> 01:35:38.800
आपकी दादी कैसे गई ? अचानक गई ना ।

276
01:35:39.420 --> 01:35:52.399
अच्छा दादी से प्यार है , तो यह अचानक का पाठ दादी को याद करके याद करो ।

277
01:35:55.539 --> 01:36:09.420
जैसे दादी अपने लक्ष्य को पूरा करके गई , ऐसे नहीं गई ।

278
01:36:10.739 --> 01:36:26.970
उसको सर्टीफिकेट मिला , कर्मातीत , कर्मेन्द्रियों ने भी अपनी आकर्षण में नहीं बांधा ,

279
01:36:26.970 --> 01:36:39.310
साक्षी होके कर्मेन्द्रियां शीतल होती रही , होती रही ।

280
01:36:40.449 --> 01:37:19.710
आकर्षण ने नहीं खींचा , न कर्मेन्द्रियों ने खींचा , न किसी आत्मा के मोह ने खींचा , निर्मोही , नष्टोमोहा , नहीं तो कई लोग जाते जाते याद में बोल पड़ते हैं , फलाना , फलाना , फलाना …

281
01:37:20.449 --> 01:37:44.399
लेकिन दादी नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप में गई , कर्मेन्द्रियां जीत बनके गई ।

282
01:37:46.399 --> 01:37:57.710
कोई कर्मेन्द्रिय ने अपने तरफ दुःख की लहर में नहीं खींचा ।

283
01:38:01.079 --> 01:38:14.510
तो दादी कहते हो,याद आती है ना, आनी ही चाहिए क्योंकि नम्बरवन थी ना।

284
01:38:14.510 --> 01:38:19.710
तो वन नम्बर ने विन तो किया ना ।

285
01:38:19.710 --> 01:38:41.880
लेकिन जब भी दादी की याद आवे तो सिर्फ चित्र नहीं देखना लेकिन यह याद करो कि मैं भी एवररेडी हूँ।

286
01:38:43.199 --> 01:38:51.880
मुझे भी अचानक का पाठ याद है ?

287
01:38:52.449 --> 01:39:09.420
अभी-अभी मैं भी अचानक चली जाऊं , तो नष्टोमोहा , प्रकृतिजीत हूँ ?

288
01:39:10.619 --> 01:39:21.539
यही दादी की सौगात सब अपने पास रखो ।

289
01:39:29.199 --> 01:39:34.619
समझा ।

290
01:39:56.680 --> 01:40:22.449
अच्छा - चारों ओर के आये हुए पत्र सन्देश ईमेल सब बापदादा के पास पहुंच गये हैं ।

291
01:40:23.199 --> 01:40:45.479
सबने अपने प्यार की निशानी , खुद नहीं आ सके तो पत्र द्वारा ईमेल द्वारा भेज दी है ।

292
01:40:46.000 --> 01:41:26.000
बापदादा ने एक-एक दिल के प्यार के पत्र सन्देश सौगात स्वीकार की और हर एक को बापदादा अपने नयनों में इमर्ज कर ,

293
01:41:27.420 --> 01:41:39.710
प्यार का रेसपान्ड यादप्यार के रूप में दे रहे है ।

294
01:41:41.020 --> 01:41:59.939
अच्छा है यह परमात्म प्यार बहुत पुरूषार्थ में सहयोग देता है ।

295
01:42:05.369 --> 01:42:37.199
तो हर एक बच्चा प्यारा है , प्यारे रहेंगे और प्यार के झूले में झूलते हुए बापदादा के साथ अपने घर चलेंगे ।

296
01:42:39.199 --> 01:42:43.539
वह भी टाइम आ जायेगा ।

297
01:42:44.220 --> 01:42:50.850
जो सब साथ चलेंगे , साथ चलने वाले हो ना ।

298
01:42:50.850 --> 01:42:57.770
पीछे पीछे नहीं आना , मजा नहीं आयेगा ।

299
01:42:58.399 --> 01:43:12.850
मजा है हाथ में हाथ , साथ में साथ , हाथ है श्रीमत , श्रीमत बुद्धि में होगी ,

300
01:43:12.850 --> 01:43:23.600
आत्मा परमात्मा का साथ होगा और घर चलेंगे ।

301
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चलने वाले हो ना सभी , रह नहीं जाना ।

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अभी भी साथ है , चाहे किसी भी कोने में हो ,

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लेकिन बाप साथ है , साथ रहेंगे , साथ चलेंगे और फिर ब्रह्मा बाप के साथ राज्य करेंगे ।

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पक्का वायदा है ना ।

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बीच में नहीं रह जाना ।

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कोई कस्टम की चीज़ होगी तो रूक जायेगी ।

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01:44:25.199 --> 01:44:30.109
रावण की चीज़ हुई ना कस्टम ।

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01:44:30.680 --> 01:44:47.420
कोई भी रावण का संस्कार , स्वभाव वह धर्मराज पुरी कस्टम में फंसा देगी ।

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और बाप के साथ चले जायेंगे , और कोई अगर होगा तो कस्टम में रूकना पड़ेगा , अच्छा लगेगा ।

310
01:45:05.649 --> 01:45:08.619
नहीं लगेगा ना ?

311
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बाप को भी अच्छा नहीं लगेगा ।

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जब वायदा है साथ का , तो सदा साथ रहना ।

313
01:45:33.710 --> 01:45:45.539
पीछे वाले वायदा है ना पक्का , पीछे वाले हाथ उठाओ , पक्का वायदा है !

314
01:45:45.539 --> 01:45:53.600
अच्छा , ठीक है ।

315
01:45:53.600 --> 01:46:24.619
जो भी आये हैं , जहाँ से भी आये हैं , एक तो साथ नहीं छोड़ना , हर समय बाप और आप , कितना मजा आयेगा ।

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01:46:24.619 --> 01:46:32.170
बाप और आप , मजा है ना ।

317
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टीचर्स मजा है ना इसमें ।

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कि कभी कभी अलग-अलग भी हो जाएं , अच्छा है , बाबा का साथ छोड़ देंगे !

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नहीं छोड़ना , पक्का ?

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01:46:52.220 --> 01:46:57.199
एक सेकेण्ड भी नहीं ।

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इसी को ही सच्चा प्यार कहा जाता है ।

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ठीक है ना ?

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पक्का , पक्का , पक्का है !

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यह फोटो निकल रहा है आपका , वतन में निकल रहा है ।

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इस कैमरा में तो आयेगा नहीं , वतन में निकल रहा है , बहुत अच्छा ।

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अच्छा , चारों ओर के सभी बापदादा के दिल पसन्द बच्चे , दिलाराम है ना ,

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01:48:38.170 --> 01:49:09.649
तो दिलाराम के दिल पसन्द बच्चे , प्यार के अनुभवों में सदा लहराने वाले बच्चे ,

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एक बाप दूसरा न कोई , स्वप्न में भी दूसरा न कोई , ऐसे बापदादा के अति प्यारे और अति देहभान से न्यारे , सिकीलधे , पदमगुणा भाग्यशाली बच्चों को

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दिल का यादप्यार और पदम-पदमगुणा दुआयें हों , साथ में बालक सो मालिक बच्चों को बापदादा का नमस्ते ।

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01:51:01.020 --> 01:51:49.140
अफ्रीका के 28 देशों से जो पहली बार आये हैं वह खड़े हुए :- बहुत अच्छा , भले पधारे ।

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अफ्रीका के निमित्त बने हुए कहाँ है !

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देखो , आप कितने भाग्यवान हैं , स्वयं बाप ने आप बच्चों को याद किया और कोई न कोई द्वारा सन्देश भिजवाया ।

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01:53:10.399 --> 01:53:24.850
तो अपने भाग्य को देख करके खुश हो रहे हो ना !

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सभी आपको देखके खुश हो रहे हो , क्योंकि ब्राह्मण परिवार में वृद्धि हो गई ना ।

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01:53:42.909 --> 01:53:51.420
परिवार में कोई भी बढ़ता है तो खुशी होती है ना ।

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तो सब देखो खुश हो रहे हैं आप सबको देख करके ।

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01:54:04.340 --> 01:55:01.770
दूसरे देशों से जो पहली बार आये हैं वह उठो :- मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

