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आज बापदादा अपने चारों ओर के श्रेष्ठ स्वमानधारी विशेष बच्चों को देख रहे हैं ।

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हर एक बच्चे का स्वमान इतना विशेष है जो विश्व में कोई भी आत्मा का नहीं है ।

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आप सभी विश्व की आत्माओं के पूर्वज भी हो और पूज्य भी हो ।

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सारे सृष्टि के वृक्ष की जड़ में आप आधारमूर्त हो ।

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सारे विश्व के पूर्वज पहली रचना हो ।

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बापदादा हर एक बच्चे की विशेषता को देख खुश होते हैं ।

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चाहे छोटा बच्चा है , चाहे बुजुर्ग मातायें हैं , चाहे प्रवृत्ति वाले हैं ।

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हर एक की अलग-अलग विशेषतायें हैं ।

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आजकल कितने भी बड़े ते बड़े साइंसदान हैं ,

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दुनिया के हिसाब से विशेष हैं लेकिन प्रकृतिजीत तो बनें ,

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चन्द्रमां तक भी पहुंच गये लेकिन इतनी छोटी सी ज्योति स्वरूप आत्मा को नहीं पहचान सकते ।

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और यहाँ छोटा सा बच्चा भी मैं आत्मा हूँ , ज्योति बिन्दु को जानता है ।

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फलक से कहता है मैं आत्मा हूँ ।

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कितने भी बड़े महात्मायें हैं और ब्राह्मण मातायें हैं ,

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मातायें फलक से कहती हमने परमात्मा को पा लिया ।

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पा लिया है ना !

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और महात्मायें क्या कहते ?

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परमात्मा को पाना बहुत मुश्किल है ।

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प्रवृत्ति वाले चैलेन्ज करते हैं कि हम सब प्रवृत्ति में रहते ,

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साथ रहते पवित्र रहते हैं क्योंकि हमारे बीच में बाप है ।

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इसलिए दोनों साथ रहते भी सहज पवित्र रह सकते हैं क्योंकि पवित्रता हमारा स्वधर्म है ।

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पर धर्म मुश्किल होता है , स्व धर्म सहज होता है ।

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और लोग क्या कहते ?

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आग और कपूस साथ में रह नहीं सकते ।

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बड़ा मुश्किल है और आप सब क्या कहते ?

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बहुत सहज है ।

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आप सबका शुरू शुरू का एक गीत था - कितने भी सेठ , स्वामी हैं लेकिन एक अल्फ को नहीं जाना है ।

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छोटी सी बिन्दी आत्मा को नहीं जाना लेकिन आप सभी बच्चों ने जान लिया , पा लिया ।

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इतने निश्चय और फखुर से बोलते हो , असम्भव सम्भव है ।

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बापदादा भी हर एक बच्चे को विजयी रत्न देख हर्षित होते हैं

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क्योंकि हिम्मते बच्चे मददे बाप है ।

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इसलिए दुनिया लिए जो असम्भव बातें हैं वह आपके लिए सहज और सम्भव हो गई हैं ।

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फखुर रहता है कि हम परमात्मा के डायरेक्ट बच्चे हैं ।

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इस नशे के कारण , निश्चय के कारण परमात्म बच्चे होने के कारण माया से भी बचे हुए हो ।

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बच्चा बनना अर्थात् सहज बच जाना ।

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तो बच्चे हो और सब विघ्नों से , समस्याओं से बचे हुए हो ।

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तो अपने इतने श्रेष्ठ स्वमान को जानते हो ना !

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क्यों सहज है ?

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क्योंकि आप साइलेन्स की शक्ति द्वारा , परिवर्तन शक्ति को कार्य में लगाते हो ।

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निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन कर लेते हो ।

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माया कितने भी समस्या के रूप में आती है

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लेकिन आप परिवर्तन की शक्ति से , साइलेन्स की शक्ति से समस्या को समाधान स्वरूप बना देते हो ।

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कारण को निवारण रूप में बदल देते हो ।

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है ना इतनी ताकत , कोर्स भी कराते हो ना !

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निगेटिव को पॉजिटिव करने की विधि सिखाते हो ।

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यह परिवर्तन शक्ति बाप द्वारा वर्से में मिली है ।

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एक ही शक्ति नहीं , सर्वशक्तियां परमात्म वर्सा मिला है ,

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इसीलिए बापदादा हर रोज कहते हैं , हर रोज मुरली सुनते हो ना !

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तो हर रोज बापदादा यही कहते - बाप को याद करो और वर्से को याद करो ।

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बाप की याद भी सहज क्यों आती है ?

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जब वर्से की प्राप्ति को याद करते तो बाप की याद प्राप्ति के कारण सहज आ जाती है ।

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00:30:30.450 --> 00:31:17.599
हर एक बच्चे को यह रूहानी फखुर रहता है , दिल में गीत गाते हैं - पाना था वो पा लिया ।

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00:31:24.279 --> 00:31:39.480
सभी के दिल में यह स्वतः ही गीत बजता है ना !

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फखुर है ना !

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जितना इस फखुर में रहेंगे तो फखुर की निशानी है , बेफिक्र होंगे ।

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अगर किसी भी प्रकार का संकल्प में , बोल में या सम्बन्ध-सम्पर्क में फिकर रहता है तो फखुर नहीं है ।

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00:33:00.450 --> 00:33:15.650
बापदादा ने बेफिक्र बादशाह बनाया है ।

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बोलो , बेफिक्र बादशाह हो ?

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00:33:26.450 --> 00:33:32.680
है , हाथ उठाओ जो बेफिकर बादशाह हैं ?

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00:33:32.680 --> 00:33:39.940
बेफिकर कि कभी कभी फिकर आ जाता है ?

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00:33:45.880 --> 00:33:50.509
अच्छा है ।

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जब बाप बेफिक्र है , तो बच्चों को क्या फिकर है ।

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00:34:08.110 --> 00:34:45.019
बापदादा ने तो कह दिया है सब फिक्र वा किसी भी प्रकार का बोझ है तो बापदादा को दे दो ।

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बाप सागर है ना ।

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तो बोझ सारा समा जायेगा ।

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कभी बापदादा बच्चों का एक गीत सुनके मुस्कराता है ।

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पता है कौन सा गीत ?

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00:35:36.510 --> 00:35:55.250
क्या करें , कैसे करें … कभी कभी तो गाते हो ।

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00:35:55.250 --> 00:36:01.650
बापदादा तो सुनता रहता है ।

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00:36:05.420 --> 00:36:40.969
लेकिन बापदादा सभी बच्चों को यही कहते हैं हे मीठे बच्चे ,

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लाडले बच्चे साक्षी-दृष्टा के स्थिति की सीट पर सेट हो जाओ

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00:37:47.250 --> 00:38:22.000
और सीट पर सेट होके खेल देखो , बहुत मजा आयेगा , वाह !

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00:38:24.000 --> 00:38:44.000
त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित हो जाओ ।

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00:38:52.619 --> 00:39:10.570
सीट से नीचे आते इसलिए अपसेट होते हो ।

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00:39:10.570 --> 00:39:18.679
सेट रहो तो अपसेट नहीं होंगे ।

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यह तीन चीज़ें बच्चों को परेशान करती हैं ।

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कौन सी तीन चीज़ें ?

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- चंचल मन , भटकती बुद्धि और क्या कहते हैं ?

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00:40:12.340 --> 00:40:17.880
पुराने संस्कार ।

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बापदादा को बच्चों की एक बात सुनके हंसी आती है , पता है कौन सी बात है ?

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00:40:48.739 --> 00:41:05.940
कहते हैं बाबा क्या करें , मेरे पुराने संस्कार हैं ना !

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बापदादा मुस्कराता है ।

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00:41:17.769 --> 00:41:36.849
जब कह ही रहे हो , मेरे संस्कार , तो मेरा बनाया है ?

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00:41:38.000 --> 00:41:42.800
तो मेरे पर तो अधिकार होता ही है ।

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00:41:42.800 --> 00:42:02.570
जब पुराने संस्कार को मेरा बना दिया , तो मेरा तो जगह लेगा ना ।

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क्या यह ब्राह्मण आत्मा कह सकती है मेरे संस्कार ?

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00:42:21.880 --> 00:42:32.679
मेरा-मेरा कहा है तो मेरे ने अपनी जगह बना दी है ।

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00:42:34.679 --> 00:42:47.480
आप ब्राह्मण मेरा नहीं कह सकते ।

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00:42:50.739 --> 00:42:58.110
यह पास्ट जीवन के संस्कार हैं ।

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00:43:01.019 --> 00:43:06.739
शूद्र जीवन के संस्कार हैं ।

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00:43:06.739 --> 00:43:13.420
ब्राह्मण जीवन के नहीं है ।

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तो मेरा-मेरा कहा है तो वह भी मेरे अधिकार से बैठ गये हैं ।

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ब्राह्मण जीवन के श्रेष्ठ संस्कार जानते हो ना !

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और यह संस्कार जिनको आप पुराने कहते हो , वह भी पुराने नहीं हैं ,

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आप श्रेष्ठ आत्माओं का पुराने ते पुराना संस्कार अनादि और आदि संस्कार है ।

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00:44:55.079 --> 00:45:02.619
यह तो द्वापर मध्य के संस्कार हैं ।

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00:45:04.619 --> 00:45:40.000
तो मध्य के संस्कार को समाप्त कर देना , बाप की मदद से कोई मुश्किल नहीं है ।

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होता क्या है ?

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कि समय पर बाप कम्बाइन्ड है , उसे कम्बाइन्ड जान , कम्बाइन्ड का अर्थ ही है समय पर सहयोगी ।

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00:46:32.170 --> 00:46:56.170
लेकिन समय पर सहयोग न लेने के कारण मध्य के संस्कार महान बन जाते हैं ।

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बापदादा जानते हैं कि सभी बच्चे बाप के प्यार के पात्र हैं , अधिकारी हैं ।

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बाबा जानते हैं कि प्यार के कारण ही सभी पहुंच गये हैं ।

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00:48:18.000 --> 00:48:28.110
चाहे विदेश से आये हैं , चाहे देश से आये हैं ,

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लेकिन सभी परमात्म प्यार की आकर्षण से अपने घर में पहुंचे हैं ।

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बापदादा भी जानते हैं प्यार में मैजॉरिटी पास हैं ।

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00:49:47.820 --> 00:49:58.219
विदेश से प्यार के प्लेन में पहुंच गये हो ।

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00:50:13.539 --> 00:50:34.110
बोलो , सभी प्यार की डोर में बंधे हुए यहाँ पहुंच गये हो ना !

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यह परमात्म प्यार दिल को आराम देने वाला है ।

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00:51:39.710 --> 00:52:00.679
अच्छा - जो पहली बार यहाँ पहुचे हैं वह हाथ उठाओ ।

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हाथ हिलाओ ।

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भले पधारे ।

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अभी बापदादा ने होम वर्क दिया था , याद है होमवर्क ?

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याद है ?

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00:53:27.199 --> 00:53:45.420
बापदादा के पास कई तरफ से रिजल्ट आई है ।

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लेकिन अभी क्या करना है ?

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00:54:04.280 --> 00:54:12.050
सभी की रिजल्ट नहीं आई है ।

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कोई की कितने परसेन्ट में भी आई है ।

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बापदादा क्या चाहते हैं ?

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00:54:38.340 --> 00:55:06.170
बापदादा यही चाहते हैं कि सब पूज्यनीय आत्माये हैं ।

120
00:55:13.650 --> 00:55:36.340
तो पूज्यनीय आत्माओं का विशेष लक्षण दुआ देना ही है ।

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00:55:44.909 --> 00:56:11.369
तो आप सभी जानते हो कि आप सभी पूज्यनीय आत्मायें है ,

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00:56:14.400 --> 00:56:38.969
तो यह दुआ देना , दुआ देना अर्थात् दुआ लेना अण्डरस्टुड हो जाता है ।

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जो दुआ देता है , जिसको देते हैं उसकी दिल से बार-बार देने वाले के लिए दुआ निकलती है ।

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00:57:15.880 --> 00:57:37.019
तो पूज्य आत्मायें आपका तो निजी संस्कार है - दुआ देना ।

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अनादि संस्कार है दुआ देना ।

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जब आपके जड़ चित्र भी दुआ दे रहे हैं

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00:58:08.619 --> 00:58:37.199
तो आप चैतन्य पूज्य आत्मायें दुआ देना यह तो नेचुरल संस्कार है ।

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00:58:43.599 --> 00:58:50.170
इसको कहो मेरा संस्कार ।

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00:58:55.250 --> 00:59:05.369
मध्य द्वापर के संस्कार नेचुरल हो गया है ।

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00:59:05.940 --> 00:59:12.170
नेचर हो गया है ।

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00:59:16.449 --> 00:59:41.309
वास्तव में यह संस्कार दुआ देने का नेचुरल नेचर है ।

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00:59:47.710 --> 01:00:12.219
जब किसी को दुआ देते हैं , तो वह आत्मा कितनी खुश होती है ,

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01:00:19.019 --> 01:00:41.420
वह खुशी का वायुमण्डल कितना सुखदाई होता है !

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01:00:46.969 --> 01:01:16.909
तो जिन्होंने भी किया है उन सबको , चाहे आये हैं , चाहे नहीं आये हैं , लेकिन बापदादा के सामने हैं ।

135
01:01:18.909 --> 01:01:32.909
तो उन्हों को बापदादा मुबारक दे रहे हैं ।

136
01:01:35.880 --> 01:02:06.400
किया है और अपनी नेचुरल नेचर बनाते हुए आगे भी करते , कराते रहना ।

137
01:02:08.400 --> 01:02:26.170
और जिन्होंने थोड़ा बहुत किया भी है , नहीं भी किया है

138
01:02:30.280 --> 01:02:57.940
तो वह सभी अपने को सदा मैं पूज्य आत्मा हूँ ,

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01:03:03.139 --> 01:03:29.019
मैं बाप की श्रीमत पर चलने वाली विशेष आत्मा हूँ ,

140
01:03:31.019 --> 01:03:51.650
इस स्मृति को बार-बार अपनी स्मृति और स्वरूप में लाना

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01:03:54.619 --> 01:04:19.199
क्योंकि हर एक से जब पूछते हैं कि आप क्या बनने वाले हो ?

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01:04:21.599 --> 01:04:31.019
तो सब कहते हैं हम लक्ष्मी-नारायण बनने वाले हैं ।

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01:04:31.019 --> 01:04:38.400
राम-सीता में कोई नहीं हाथ उठाता ।

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01:04:41.369 --> 01:04:58.909
जब लक्ष्य है , 16 कला बनने का ।

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01:05:04.800 --> 01:05:43.650
तो 16 कला अर्थात् परमपूज्य , पूज्य आतमा का कर्तव्य ही है दुआ देना ।

146
01:05:52.000 --> 01:06:28.909
यह संस्कार चलते फिरते सहज और सदा के लिए बनाओ ।

147
01:06:30.050 --> 01:06:34.110
हो ही पूज्य ।

148
01:06:34.739 --> 01:06:38.800
हो ही 16 कला ।

149
01:06:38.800 --> 01:06:44.449
लक्ष्य तो यही है ना !

150
01:06:48.679 --> 01:07:25.079
बापदादा खुश है कि जिन्होंने भी किया है , उन्होंने अपने मस्तक में विजय का तिलक बाप द्वारा लगा दिया ।

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01:07:33.480 --> 01:08:00.909
साथ में सेवा के समाचार भी बापदादा के पास सबकी तरफ से ,

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01:08:03.539 --> 01:08:26.340
वर्गो की तरफ से , सेन्टर्स की तरफ से बहुत अच्छी रिजल्ट सहित पहुंच गये हैं ।

153
01:08:29.310 --> 01:08:52.340
तो एक होमवर्क करने की मुबारक और साथ में सेवा की भी मुबारक ।

154
01:08:54.340 --> 01:09:00.109
पदम-पदमगुणा है ।

155
01:09:03.020 --> 01:09:40.000
बाप ने देखा कि गांव-गांव में सन्देश देने की सेवा बहुत अच्छे तरीके से मैजॉरिटी एरिया में की है ,

156
01:09:44.569 --> 01:10:17.479
तो यह सेवा भी रहमदिल बनकर सेवा के उमंग-उत्साह में रिजल्ट भी अच्छी दिखाई दी है ।

157
01:10:21.819 --> 01:10:51.819
जिन्होंने भी मेहनत नहीं , लेकिन बाप से प्यार अर्थात् सन्देश देने से प्यार ,

158
01:10:53.140 --> 01:11:37.539
तो प्यार के मुहब्बत में सेवा की है तो बाप की भी पदम पदमगुणा प्यार का रिटर्न सब सेवाधारियों को स्वतः ही प्राप्त है , होगा ।

159
01:11:43.939 --> 01:12:33.250
साथ में सभी ने अपनी प्यारी दादी को बहुत स्नेह से याद करते हुए ,

160
01:12:39.140 --> 01:13:27.649
दादी को प्यार का रिटर्न दे रहे हैं , यह प्यार की खुशबू बापदादा के पास बहुत अच्छी तरह से पहुंच गई है ।

161
01:13:32.220 --> 01:14:06.850
और अभी भी जो भी मधुबन में कार्य चल रहे हैं , चाहे विदेशियों के , चाहे भारत के

162
01:14:08.850 --> 01:14:51.420
वह सब कार्य भी एक दो के सहयोग , सम्मान के आधार से बहुत अच्छे सफल हुए हैं

163
01:14:51.420 --> 01:15:20.970
और आगे भी होने वाले कार्य सफल हुए पड़े हैं क्योंकि सफलता तो आपके गले का हार है ।

164
01:15:27.420 --> 01:15:50.619
बाप के गले के भी हार हो , बाप ने याद दिलाया था कि कभी भी हार खाना नहीं क्योंकि आप बाप के गले के हार हो ।

165
01:15:50.619 --> 01:16:01.819
तो गले का हार कभी हार नहीं खा सकता ।

166
01:16:04.569 --> 01:16:10.399
तो हार बनना है या हार खानी है ?

167
01:16:10.399 --> 01:16:12.399
नहीं ना !

168
01:16:12.399 --> 01:16:18.170
हार बनना अच्छा है ना !

169
01:16:20.800 --> 01:16:25.819
तो हार कभी नहीं खाना ।

170
01:16:29.369 --> 01:16:49.369
हार खाने वाले तो अनेक करोड़ों आत्मायें हैं , आप हार बनके गले में पिरोये गये हो ।

171
01:16:59.649 --> 01:17:04.279
ऐसे है ना !

172
01:17:10.399 --> 01:17:57.479
तो संकल्प करो बाप के प्यार में कितना भी माया तूफान सामने लाये

173
01:17:57.479 --> 01:18:26.220
लेकिन मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं के आगे तूफान भी तोहफा बन जायेगा ।

174
01:18:40.109 --> 01:18:53.199
ऐसा वरदान सदा याद करो ।

175
01:18:53.199 --> 01:19:09.250
कितना भी ऊंचा पहाड़ हो , पहाड़ बदल के रूई बन जायेगा ।

176
01:19:19.079 --> 01:19:56.739
अभी समय की समीपता प्रमाण वरदानों को हर समय अनुभव में लाओ ।

177
01:20:01.539 --> 01:20:09.819
अनुभव की अथॉरिटी बनो ।

178
01:22:31.079 --> 01:23:16.399
जब चाहो तब अपने अशरीरी बनने की , फरिश्ता स्वरूप बनने की एक्सरसाइज करते रहो ।

179
01:23:21.539 --> 01:23:44.800
अभी-अभी ब्राह्मण , अभी-अभी फरिश्ता , अभी-अभी अशरीरी ,

180
01:23:54.170 --> 01:24:23.939
चलते फिरते , कामकाज करते हुए भी एक मिनट , दो मिनट निकाल अभ्यास करो ।

181
01:24:25.250 --> 01:24:49.079
चेक करो जो संकल्प किया , वही स्वरूप अनुभव किया ?

182
01:25:17.420 --> 01:25:20.850
अच्छा ।

183
01:26:48.000 --> 01:27:08.449
चारों ओर के सदा श्रेष्ठ स्वमानधारी ,

184
01:27:10.449 --> 01:27:39.199
सदा स्वयं को परमपूज्य और पूर्वज अनुभव करने वाले ,

185
01:27:41.199 --> 01:28:11.250
सदा अपने को हर सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनाने वाले ,

186
01:28:14.399 --> 01:28:41.020
सदा बाप के दिलतख्त नशीन , भृकुटी के तख्तनशीन ,

187
01:28:44.449 --> 01:29:38.050
सदा श्रेष्ठ स्थिति के अनुभवों में स्थित रहने वाले , चारों ओर के सभी बच्चों को यादप्यार और नमस्ते ।

188
01:29:38.970 --> 01:30:07.079
सभी तरफ से सभी के पत्र , ईमेल , समाचार सभी बापदादा के पास पहुंच गये हैं ,

189
01:30:07.079 --> 01:30:33.020
तो सेवा का फल और बल , सभी सेवाधारियों को प्राप्त है और होता रहेगा ।

190
01:30:33.600 --> 01:30:46.399
प्यार के पत्र भी बहुत आते हैं , परिवर्तन के पत्र भी बहुत आते हैं ।

191
01:30:49.479 --> 01:31:13.020
परिवर्तन की शक्ति वालों को बापदादा अमर भव का वरदान दे रहे हैं ।

192
01:31:15.020 --> 01:31:28.449
सेवाधारियों को जिन्होंने बहुत श्रीमत को फॉलो किया है ,

193
01:31:28.449 --> 01:31:53.250
ऐसे फॉलो करने वाले बच्चों को बापदादा सदा फरमानबरदार बच्चे वाह !

194
01:31:53.250 --> 01:32:37.369
यह वरदान दे रहे हैं और प्यार वालों को बहुत-बहुत प्यार से दिल में समाने वाले अति प्यारे और अति माया के विघ्नों से न्यारे ऐसा वरदान दे रहे हैं ।

195
01:32:38.220 --> 01:32:42.739
अच्छा ।

196
01:32:45.369 --> 01:33:41.420
सेवा का टर्न कर्नाटक जोन का है :- सभी के हाथ में झण्डे झण्डियां हैं , सभी झण्डियों तो बहुत अच्छी हिला रहे हैं , अच्छा है ।

197
01:33:41.420 --> 01:34:00.000
कर्नाटक वालो ने प्रोग्राम भी बहुत अच्छा स्वार्णिम कर्नाटक ऐसा किया है ना ।

198
01:34:00.000 --> 01:34:18.340
तो यह प्रोग्राम भी बापदादा ने भिन्न-भिन्न स्थानों का देखा भी है , सुना भी है

199
01:34:18.340 --> 01:34:40.220
और मैजारिटी ने अच्छे उमंग-उत्साह से गांव-गांव में बापदादा का सन्देश पहुंचाया है ।

200
01:34:40.220 --> 01:35:16.000
इसीलिए बापदादा कर्नाटक के सेवाधारियों को बहुत-बहुत सेवा की और श्रीमत के पालन करने की मुबारक दे रहे हैं ।

201
01:35:16.000 --> 01:35:22.050
मुबारक हो , मुबारक हो ।

202
01:35:27.539 --> 01:35:49.020
अच्छा है , सेवा का जो चांस लिया है वह भी सभी सन्तुष्ट है और सन्तुष्ट किया है ,

203
01:35:49.020 --> 01:36:05.710
इससे अपने जमा का खाता बहुत अच्छा जमा किया है ।

204
01:36:05.710 --> 01:36:20.000
कर्नाटक की संख्या भी कम नहीं है , संख्या अच्छी है

205
01:36:20.850 --> 01:36:48.000
और जैसे अभी संगठित रूप में मिलकर निर्विघ्न सेवा का रिकार्ड दिखाया है ,

206
01:36:48.000 --> 01:37:08.739
ऐसे ही आगे भी कर्नाटक संगठित रूप में बहुत कुछ कमाल कर सकते हैं ।

207
01:37:09.020 --> 01:37:17.250
बापदादा के पास नक्शा है , कमाल कर सकते हैं ।

208
01:37:17.250 --> 01:37:32.850
इसलिए संगठित रूप का जलवा दिखाना ।

209
01:37:33.770 --> 01:37:36.569
अभी अच्छा किया है ।

210
01:37:36.569 --> 01:37:44.680
सारा परिवार कर्नाटक पर खुश है ।

211
01:37:50.800 --> 01:38:02.739
अच्छा - बापदादा ने कर्नाटक वालों को काम दिया था , याद है ।

212
01:38:02.739 --> 01:38:05.369
क्या दिया था !

213
01:38:05.369 --> 01:38:15.880
वारिस क्वालिटी निकाले के लिए , याद है ?

214
01:38:19.310 --> 01:38:44.000
सेवा में तो नम्बर लिया अच्छा,अभी इतने वारिस निकालो जो नम्बरवन आ जाओ।

215
01:38:46.000 --> 01:38:55.539
जो निमित्त हैं वह तो हैं , नये नये निकालो ।

216
01:39:04.909 --> 01:39:21.600
तो बापदादा सभी बच्चों को देख खुश है ।

217
01:39:22.970 --> 01:39:27.649
आप भी खुश है , बाप भी खुश है ।

218
01:39:27.649 --> 01:39:41.600
जितना आप बाप को देखकर खुश होते हैं , उससे ज्यादा बच्चों को देख बाप खुश होते हैं ।

219
01:39:46.170 --> 01:40:08.000
( कर्नाटक ने शुरू से अच्छे अच्छे वारिस निकाले हैं ) अभी और भी निकालेंगे ।

220
01:40:19.600 --> 01:40:29.819
ह्दयपुष्पा को रिटर्न तो देंगे ना ।

221
01:40:33.369 --> 01:40:46.279
एडवांस पार्टी में वह भी वतन में इमर्ज होती है ना तो सब समाचार सुनते हैं ।

222
01:40:49.310 --> 01:40:55.420
उसने अच्छे अच्छे वारिस निकाले हैं ।

223
01:40:57.600 --> 01:41:05.710
लेकिन नम्बरवन वारिस निकालने में अभी नम्बरवन।

224
01:41:05.710 --> 01:41:14.510
पहले के तो हैं ही , है ना हिम्मत ।

225
01:41:14.510 --> 01:41:19.140
टीचर्स हिम्मत है ?

226
01:41:19.140 --> 01:41:24.970
हाथ उठाओ , हिम्मत है ?

227
01:41:24.970 --> 01:41:32.170
सभी में हिम्मत है , बहुत हिम्मत है ।

228
01:41:32.170 --> 01:41:38.970
तो बाप की भी बहुत-बहुत मदद है ।

229
01:41:44.449 --> 01:41:47.539
अच्छा है ।

230
01:41:47.539 --> 01:41:55.539
सेवा भी अच्छी की है , फर्स्ट टर्न मिला है ।

231
01:41:56.220 --> 01:42:08.399
फर्स्ट टर्न में सब बात में फास्ट , तीव्र पुरूषार्थ ।

232
01:42:12.109 --> 01:42:24.340
अच्छा - सबने बहुत दिल से सेवा की ना ।

233
01:42:24.340 --> 01:42:28.279
थकावट तो नहीं हुई ?

234
01:42:28.279 --> 01:42:33.369
थके नहीं ना !

235
01:42:33.369 --> 01:42:38.000
अथक बनके सेवा की ।

236
01:42:38.850 --> 01:42:42.220
अच्छा ।

237
01:42:50.510 --> 01:44:07.600
डबल विदेशी , 60 देशों से 600 आये हैं :- अभी बापदादा ने देखा है कि विदेश में भी सेवा का उमंग अच्छा बढ़ रहा है ।

238
01:44:09.310 --> 01:44:29.819
पहले कहते थे विदेश में स्टूडेन्ट बनना बड़ा मुश्किल है और अभी क्या है ?

239
01:44:29.819 --> 01:44:34.279
अभी मुश्किल है या सहज है ?

240
01:44:34.279 --> 01:44:37.880
सहज है ?

241
01:44:38.850 --> 01:45:12.000
और बापदादा को बहुत अच्छा लगा कि आपस में मिलकर निर्विघ्न बनाने का प्लैन बनाया है

242
01:45:12.000 --> 01:45:28.619
और निर्विघ्न बनाने का प्लैन बहुत विधि पूर्वक निर्विघ्न बनाया है ।

243
01:45:29.199 --> 01:45:38.619
इसकी बहुत-बहुत मुबारक हो , पदमगुणा मुबारक हो ।

244
01:45:41.020 --> 01:45:53.939
जो भी प्रोग्राम किये हैं वह बहुत सफल रहे हैं ।

245
01:45:53.939 --> 01:46:12.000
तो सदा सफलता की मुबारक है और सदा मुबारक पात्र रहेंगे ।

246
01:46:16.109 --> 01:46:28.569
बापदादा को सेवा का प्रत्यक्ष फल देख करके भी खुशी है ।

247
01:46:29.420 --> 01:46:34.800
यह काल आफ टाइम के आये हैं ना !

248
01:46:35.250 --> 01:46:44.449
हाथ उठाओ जो काल आफ टाइम में आये हैं ।

249
01:46:48.510 --> 01:46:51.479
अच्छा ।

250
01:46:53.479 --> 01:46:56.800
बहुत अच्छा किया ।

251
01:46:56.800 --> 01:46:59.710
बहुत चतुर हैं ।

252
01:46:59.710 --> 01:47:04.170
पहले ही आ गये हैं ।

253
01:47:04.170 --> 01:47:10.170
अच्छा किया , बाप को भी बहुत प्यारे हो ।

254
01:47:10.170 --> 01:47:17.539
और आपका भी बाप से प्यार है इसीलिए पहुंच गये हो ।

255
01:47:17.539 --> 01:47:40.680
तो सभी ब्राह्मण परिवार की तरफ से , बाप की तरफ से भी आप एक एक को पदमगुणा मुबारक है , मुबारक है , मुबारक है ।

256
01:47:47.710 --> 01:48:13.250
अच्छा है यह सभी बहुत अच्छे फॉरेन सेवा के लिए माइक और बच्चे दोनों पार्ट बजायेंगे ।

257
01:48:14.000 --> 01:48:32.800
बच्चों का भी पार्ट बजायेंगे और माइक और लाइट बनके सेवा में और वृद्धि को प्राप्त करायेंगे ।

258
01:48:36.000 --> 01:48:51.539
तो सभी ब्राह्मणों की तरफ से , बाप की तरफ से आप सबको मुबारक हो ।

259
01:49:02.279 --> 01:49:05.600
अच्छा है ।

260
01:49:06.970 --> 01:49:25.250
इस ईश्वरीय नॉलेज की प्रोपोगण्डा अब विदेश में भी निमित्त बनके कर रहे हो ।

261
01:49:25.250 --> 01:49:34.970
अभी वहाँ भी आवाज फैल रहा है , अच्छी तरह से फैल रहा है

262
01:49:36.399 --> 01:49:56.340
और ड्रामानुसार आप सबकी और बाप की प्यारी दादी के निमित्त भी चारों ओर

263
01:49:56.800 --> 01:50:09.600
ब्राह्मण परिवार का बाप का नाम अच्छा प्रत्यक्ष हो गया है ।

264
01:50:10.970 --> 01:50:51.369
दादी ने नाम प्रत्यक्ष किया , नाम और काम दो चीज़ होती हैं तो दादी ने नाम बहुत अच्छा फैलाया , अभी उन आत्माओं को अपना बनाना यह काम आपका है ।

265
01:50:59.369 --> 01:51:32.109
बापदादा ने देखा कि जैसे अभी हर साल वृद्धि करके बाप के सामने ला रहे हो , ऐसे आगे भी ज्यादा से ज्यादा वृद्धि करते रहेंगे ।

266
01:51:32.109 --> 01:51:40.050
बाप और अपनी प्रत्यक्षता करते रहेंगे ।

267
01:51:43.140 --> 01:51:48.220
अच्छा ग्रुप है ।

268
01:51:50.220 --> 01:52:10.510
सभी निश्चयबुद्धि और ईश्वरीय नशे में रहने वाले , उड़ने वाले हैं ।

269
01:52:10.510 --> 01:52:16.569
चलने वाले नहीं बनना , उड़ने वाले ।

270
01:52:16.569 --> 01:52:26.399
चलने वाले समय पर नहीं पहुंच सकेंगे , उड़ने वाले बनना ।

271
01:52:26.399 --> 01:52:30.050
डबल लाइट ।

272
01:52:30.050 --> 01:52:35.310
बाकी बापदादा खुश है ।

273
01:52:35.310 --> 01:52:41.479
जो किया वह सफल हो गया ।

274
01:52:42.340 --> 01:52:45.819
तो आप सब कौन हुए ?

275
01:52:45.819 --> 01:52:53.369
सफलता के सितारे ।

276
01:53:00.449 --> 01:53:05.710
अच्छा है ।

277
01:53:14.220 --> 01:53:19.199
बहुत अच्छा ।

278
01:53:22.340 --> 01:54:52.340
पोलीटिशियन , महिला और सिक्युरिटी तीन विंग आई हैं :- देखों कितने उमंग-उत्साह से सभी विंग सेवा कर रहे हैं ।

279
01:54:53.539 --> 01:54:58.399
तीनों की रिजल्ट अच्छी है ।

280
01:54:59.649 --> 01:55:09.079
गवर्मेन्ट में भी आवाज अच्छा फैल रहा है ।

281
01:55:10.109 --> 01:55:21.600
तो सेवा की है तभी आवाज फैल रहा है ।

282
01:55:23.600 --> 01:55:45.479
तो आपके वर्ग ने अच्छे प्लैन बनाके बाप की प्रत्यक्षता का झण्डा अच्छा फैला रहे हैं ।

283
01:55:51.479 --> 01:56:08.800
पहले तो कोई मुश्किल से आता था और अभी खुद कहते हैं हम भी आने चाहते हैं ।

284
01:56:08.800 --> 01:56:14.739
फर्क हो गया ना ।

285
01:56:24.619 --> 01:56:43.880
अभी खुद ही कहते हैं कि आपके यहाँ कार्य बहुत अच्छा सफल होता है ।

286
01:56:44.510 --> 01:56:50.449
तो अभी आंख खुलने शुरू हो गई है ।

287
01:56:50.449 --> 01:56:57.140
धीरे-धीरे आंख खुल जायेगी ।

288
01:57:01.539 --> 01:57:15.649
वैसे सभी वर्ग अपने अपने वर्ग में सेवा अच्छी कर रहे हैं ।

289
01:57:16.109 --> 01:57:28.340
महिला वर्ग भी कर रहा है , सिक्युरिटी वर्ग भी कर रहा है , पोलीटिशन भी कर रहा है ।

290
01:57:28.340 --> 01:57:54.220
लेकिन बापदादा ने देखा है कि दिनप्रतिदिन वर्गो के प्रमाण सेवा करने का उमंग अच्छा बढ़ रहा है ।

291
01:57:59.649 --> 01:58:07.310
लोगों को रोकना पड़ता है , नहीं आओ ।

292
01:58:07.310 --> 01:58:21.420
पहले आने के लिए मेहनत करनी पड़ती थी अभी संख्या से ज्यादा आ जाते हैं ।

293
01:58:27.710 --> 01:58:37.140
क्वान्टिटी और क्वालिटी दोनों ही आ रहे हैं ।

294
01:58:37.140 --> 01:58:51.710
लेकिन क्वालिटी भी आने शुरू हो गई है इसीलिए तीनों ही वर्गो के सेवाधारियों को

295
01:58:51.710 --> 01:59:07.310
बापदादा की तरफ से और ब्राह्मण परिवार की तरफ से मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

296
01:59:14.970 --> 01:59:33.020
और आपकी दादी ने तो सभी वर्गो में सेवा की वृद्धि का कलम लगा दिया है ।

297
01:59:35.880 --> 01:59:45.140
दादी भी आप सभी को बहुत याद देती है ।

298
01:59:51.020 --> 02:00:06.619
उसका भी मन संगम पर है और तन एडवांस पार्टी की तरफ है ।

299
02:00:20.340 --> 02:00:25.939
अच्छा है ।

300
02:01:08.510 --> 02:01:22.909
ट्रेनिंग की टीचर्स और इन्दौर ,

301
02:01:49.250 --> 02:01:56.399
नडियाद होस्टल की कुमारियां :- ( बाबा ही हमारा संसार है यह बैनर दिखा रहे हैं ) अच्छा है स्लोगन तो बहुत अच्छा लिखा है ,

302
02:02:00.569 --> 02:02:26.739
ऐसा ही रोज अमृतवेले यह स्लोगन याद करना , सभी कुमारियां चाहे इन्दौर की हैं , चाहे मधुबन की ट्रेनिंग की है चाहे नड़ियाद की हैं

303
02:02:26.739 --> 02:02:50.739
लेकिन सभी कुमारियां अमृतवेले से यह स्लोगन याद करना है क्योंकि बाबा ही हमारा संसार है ।

304
02:02:54.449 --> 02:03:06.220
तो सारी आकर्षण , सारा दिल का प्यार कहाँ जायेगा ?

305
02:03:06.220 --> 02:03:10.220
बाबा में ।

306
02:03:11.199 --> 02:03:20.569
नयनों में सदा कौन दिखाई देगा ?

307
02:03:20.569 --> 02:03:23.369
बाबा ।

308
02:03:23.369 --> 02:03:30.279
मुख में सदा क्या निकलेगा ?

309
02:03:30.279 --> 02:03:32.279
बाबा ।

310
02:03:33.649 --> 02:03:48.220
और चेहरे में सदा बाप का नशा दिखाई देगा ।

311
02:03:49.600 --> 02:04:06.970
सम्बन्ध-सम्पर्क में सदा ही बाप से सर्व सम्बन्ध जुटे रहेंगे ।

312
02:04:08.970 --> 02:04:12.340
तो क्या हो जायेंगे ?

313
02:04:12.340 --> 02:04:16.909
नो प्राब्लम ।

314
02:04:26.850 --> 02:04:31.310
दादी के दो अक्षर याद है ।

315
02:04:31.310 --> 02:04:44.000
दादी बार बार कहती है निर्विघ्न और निर्विकल्प ।

316
02:04:45.020 --> 02:04:52.970
तो दादी से प्यार है ना , सभी कुमारियों का प्यार है दादी से ।

317
02:04:52.970 --> 02:04:57.369
बहुत प्यार है ।

318
02:04:57.880 --> 02:05:12.000
तो जो प्यारा होता है ना , उनके बोल , उनके शब्द सदा कानों में गूंजते रहते हैं ।

319
02:05:16.619 --> 02:05:37.710
तो सदा यह बुद्धि में कानों में आवाज आता रहे निर्विघ्न और निर्विकल्प बनना ही है ।

320
02:05:37.710 --> 02:05:41.420
बनेंगी ना ।

321
02:05:41.420 --> 02:05:48.340
बनेंगी , बनेंगी , जरूर बनेंगी ।

322
02:05:48.340 --> 02:06:06.510
क्योंकि बापदादा का कुमारियों के तरफ बहुत अटेन्शन है और कुमारियां लकी भी हैं ।

323
02:06:10.970 --> 02:06:29.770
भाई , पाण्डव सेना जो हैं ना , वह हंसती है , कहते हैं कुमारियां तो जल्दी दादी बन जाती हैं ।

324
02:06:30.739 --> 02:06:37.939
और पाण्डव को दादा नहीं कहते हैं ।

325
02:06:38.569 --> 02:06:42.619
भाई कहते हैं ।

326
02:06:42.619 --> 02:06:47.600
तो देखो आपका लक कितना बढ़िया है ।

327
02:06:47.600 --> 02:06:54.739
आते ही लक प्राप्त हो जाता है ।

328
02:06:54.739 --> 02:07:03.649
बापदादा का , गुरू का तख्त मिल जाता है ।

329
02:07:05.649 --> 02:07:12.510
यह मुरली का तख्त गुरू का तख्त है ।

330
02:07:14.510 --> 02:07:24.000
इसीलिए बापदादा टीचर्स को गुरूभाई कहता है ।

331
02:07:26.000 --> 02:07:30.569
तो याद रखना गुरूभाई हैं ।

332
02:07:30.569 --> 02:07:36.050
गुरू का तख्त मिला है ।

333
02:07:36.909 --> 02:07:39.140
अच्छा है ।

334
02:07:39.140 --> 02:07:51.600
यह ट्रेनिंग की जो विधि रखी है उससे अच्छी रिजल्ट निकलेगी ।

335
02:07:51.600 --> 02:08:04.279
लेकिन आप सभी आपेही अपना चार्ट मधुबन में भेजते रहना ।

336
02:08:04.279 --> 02:08:10.000
सिर्फ ओ के लिखना ज्यादा नहीं लिखना ।

337
02:08:10.000 --> 02:08:28.050
अगर और कोई कारण हो या कुछ न कुछ कमज़ोरी हो तो ओ के के बीच में लाइन लगा देना ।

338
02:08:30.050 --> 02:08:35.770
बाकी ज्यादा नहीं पत्र लिखना , बस ।

339
02:08:36.340 --> 02:08:39.369
अच्छा है ।

340
02:08:39.369 --> 02:08:43.880
टीचर्स भी अच्छी मेहनत कर रही हैं ।

341
02:08:43.880 --> 02:09:02.619
बापदादा तो देखते हैं कि किसी भी डिपार्टमेंट के लिए मेहनत नहीं कर रहे हैं , अभी यह नहीं है , मेहनत सब कर रहे हैं ।

342
02:09:03.310 --> 02:09:11.140
चाहे स्थूल सेवा वाले भी मेहनत बहुत कर रहे हैं ।

343
02:09:11.140 --> 02:09:18.619
अभी एक बात चाहिए सुनाये क्या ?

344
02:09:22.340 --> 02:09:48.800
एक बात जैसे सेवा में , कार्य में हर डिपार्टमेंट , हर वर्ग , हर सेन्टर , हर जोन , सेवा बढ़ा रहा है ।

345
02:09:48.800 --> 02:10:05.310
लेकिन अभी आवश्यकता है - एकता और एकानामी की ।

346
02:10:07.770 --> 02:10:22.279
यह दो चीज़ें , सम्मान देना और सम्मान लेना ।

347
02:10:26.109 --> 02:10:38.569
तो एकता , हर एक के सहयोग की अंगुली है ही है ।

348
02:10:39.539 --> 02:11:01.020
चाहे महारथी हैं , चाहे थोड़ा कम पुरूषार्थी हैं , लेकिन हर एक का सहयोग तो है ।

349
02:11:01.020 --> 02:11:22.680
अगर कर्मणा करने वाले का सहयोग नहीं मिलता तो आप सेवा कैसे करते , टाइम पर कैसे निकलते , टाइम पर कैसे सेवा करते ।

350
02:11:24.680 --> 02:11:28.449
ठीक है ना । हर एक विशेष है ।

351
02:11:28.449 --> 02:11:48.000
सम्मान के अधिकारी हैं इसीलिए हरेक छोटे बड़े को सम्मान दो और सम्मान लो ।

352
02:11:48.000 --> 02:12:01.369
दो अक्षर याद रखना - एकता और एकॉनामी ।

353
02:12:03.369 --> 02:12:06.970
बाकी सब अच्छा है ।

354
02:12:06.970 --> 02:12:39.770
( ट्रेनिंग कराने वाली टीचर्स ) बहुत अच्छा , उमंग उल्हास में लाया , इसकी मुबारक हो ।

355
02:12:41.770 --> 02:12:45.770
अच्छा ।

356
02:12:45.770 --> 02:13:03.880
बापदादा तो एक-एक को देखकर , एक-एक की विशेषता को देखकर बहुत खुश होते हैं ।

357
02:13:16.909 --> 02:13:20.619
कर्नाटक की माताओं से :- मातायें ठीक हैं ?

358
02:13:20.619 --> 02:13:25.770
मातायें हाथ उठाओ ।

359
02:13:26.739 --> 02:13:29.250
बहुत हैं ।

360
02:13:40.510 --> 02:13:49.199
कर्नाटक की मातायें उठो ।

361
02:14:06.680 --> 02:14:17.420
अच्छा है , माताओं की संख्या तो अच्छी है ।

362
02:14:27.079 --> 02:14:39.539
अभी कर्नाटक की मातायें क्या कमाल दिखायेंगी ?

363
02:14:41.539 --> 02:14:45.880
कोई नई कमाल दिखाना ।

364
02:14:46.619 --> 02:15:05.140
सेवा तो करती हो लेकिन अभी कोई नई मातायें अपनी चलन दिखाना

365
02:15:06.569 --> 02:15:26.000
और बापदादा का वरदान है माताओं को , कि जहाँ सेन्टर पर मातायें ज्यादा होती हैं ,

366
02:15:26.000 --> 02:15:47.020
सेन्टर पर सेवा करती हैं , वहाँ भण्डारा और भण्डारी दोनों बहुत भरपूर रहती हैं ।

367
02:15:55.369 --> 02:16:05.600
चाहे कमाती नहीं हैं लेकिन दिल बड़ी है ।

368
02:16:07.600 --> 02:16:41.370
तो माताओं की महिमा बापदादा भी करते हैं , आदि से शुरूआत से , जब सेवाकेन्द्र खुले तो जहाँ मातायें रही हैं वहाँ कभी भी न भण्डारा खाली रहा है , न भण्डारी खाली रही है ।

369
02:16:43.370 --> 02:16:54.399
इसीलिए मातायें पालन करने वाली है ना !

370
02:16:54.969 --> 02:17:04.680
तो नई नई आत्माओं की पालना बहुत अच्छी होती है ।

371
02:17:13.139 --> 02:17:16.340
अच्छा ।

372
02:17:16.340 --> 02:18:28.110
कर्नाटक के पाण्डव :- अच्छा , हर सेन्टर पर पाण्डवों की भी आवश्यकता है क्योंकि पाण्डव आलराउण्ड सेवा में मददगार बनते हैं ।

373
02:18:30.110 --> 02:18:50.399
चाहे हार्ड वर्कर में चाहे बाहर अन्दर सन्देश फैलाने में पाण्डव अच्छे मददगार बनते हैं

374
02:18:51.420 --> 02:19:07.709
और पाण्डव सेन्टर को चलाने और आगे बढ़ाने के लिए भी निमित्त बनते हैं ।

375
02:19:07.709 --> 02:19:13.940
पाण्डव भी कम नहीं हैं ।

376
02:19:16.450 --> 02:19:35.540
इसीलिए आपको याद है , पाण्डव और शक्तियां दोनों की आवश्यकता है इसका चतुर्भुज रूप दिखाया गया है ।

377
02:19:36.340 --> 02:19:44.170
चतुर्भुज रूप में एक नहीं है , दोनों साथ हैं ।

378
02:19:46.170 --> 02:19:55.649
मातायें पाण्डवों से आगे हैं , और पाण्डव माताओं से आगे हैं ।

379
02:19:58.049 --> 02:20:10.340
तो अच्छा है कर्नाटक में पाण्डवों की भी कमी नहीं हैं , माताओं की भी कमी नहीं हैं

380
02:20:11.879 --> 02:20:33.600
और अच्छे-अच्छे जैसे जनक बच्ची ने कहा ना , तो कर्नाटक में बहुत वारिस पहले-पहले निकले हैं , यह राइट है ।

381
02:20:36.969 --> 02:20:53.020
अभी उन्हों को ऐसे वारिस तैयार करने हैं , ठीक है ना ।

382
02:20:53.020 --> 02:20:55.020
उमंग है ना ।

383
02:20:55.020 --> 02:21:02.450
तो दूसरे वर्ष रिजल्ट तो बतायेंगे ना , कितने वारिस निकले ।

384
02:21:02.450 --> 02:21:08.000
रिजल्ट बताना फिर बापदादा बुलायेगा ।

385
02:21:08.000 --> 02:21:11.649
पहले रिजल्ट देखेगा ।

386
02:21:11.649 --> 02:21:35.879
वर्ग वाले भी पहले लिस्ट निकालो , फॉरेन वाले भी ऐसे , नये नये वारिस निकालो , उसकी लिस्ट अगले वर्ष में ले आना फिर बापदादा बुलायेगा ।

387
02:21:38.340 --> 02:21:42.569
ठीक है , टीचर्स ।

388
02:21:42.569 --> 02:22:10.680
टीचर्स सभी उठो :- टीचर्स भी कम नहीं हैं ।

389
02:22:17.940 --> 02:22:30.739
बापदादा तो सभी टीचर्स को गुरूभाई देखते हैं ।

390
02:22:33.139 --> 02:22:42.049
गुरूभाई का अर्थ है बाप समान ।

391
02:22:45.370 --> 02:23:02.680
तो टीचर्स को विशेष हर कर्म बाप समान करना ही है ।

392
02:23:02.680 --> 02:23:45.709
करेंगे नहीं , करना ही है क्योंकि टीचर्स बाप की तरफ से स्टूडेन्ट के आगे एक निमित्त साकार रूप में बाप समान हैं ।

393
02:23:48.799 --> 02:24:04.450
टीचर का हर कर्म स्टूडेन्ट के आगे बाप समान दिखाई दे ।

394
02:24:06.450 --> 02:24:20.450
सबके मुख से निकले यह तो बाप को फॉलो कर बाप समान बने हुए हैं ।

395
02:24:21.879 --> 02:24:25.020
तो ऐसा लक्ष्य है ना ।

396
02:24:25.020 --> 02:24:27.420
यही लक्ष्य है ना ।

397
02:24:27.420 --> 02:24:31.420
कांध हिलाओ ।

398
02:24:34.739 --> 02:24:38.850
टीचर निमित्त हैं ।

399
02:24:39.600 --> 02:24:48.850
तो निमित्त के ऊपर जिम्मेवारी भी है ना ।

400
02:24:53.770 --> 02:24:57.139
तो कर रही हो ।

401
02:24:57.139 --> 02:25:03.600
लेकिन और भी आगे करना है ।

402
02:25:04.850 --> 02:25:09.770
लक्ष्य बहुत अच्छा है ।

403
02:25:09.770 --> 02:25:32.049
और बाप तो यही हर टीचर में शुभ भावना रखते हैं कि बाप समान बनना ही है ।

404
02:25:35.479 --> 02:25:37.940
और क्या करेंगी ?

405
02:25:37.940 --> 02:26:06.569
और कोई रास्ता है क्या , समान बाप के बनने के और कोई रास्ता नहीं है इसीलिए देखो इन्होंने यह स्लोगन बनाया है , बाप ही संसार है ।

406
02:26:08.569 --> 02:26:11.540
अच्छा बनाया है ।

407
02:26:11.540 --> 02:26:22.739
लेकिन कपड़े पर नहीं रह जाये , दिल में रह जाए ।

408
02:26:26.850 --> 02:26:30.170
अच्छी हैं टीचर्स ।

409
02:26:30.340 --> 02:26:33.250
संगठन तो बहुत बढ़िया है ।

410
02:26:34.450 --> 02:26:38.450
अभी कमाल करेंगी ।

411
02:26:38.450 --> 02:26:43.709
जैसे अभी कमाल करके दिखाई ना ।

412
02:26:43.709 --> 02:26:56.110
स्वार्णिम कनार्टक का अच्छा जलवा दिखाया अच्छा , ऐसे आगे भी कमाल दिखायेंगी ।

413
02:26:58.110 --> 02:27:03.649
बाप की शुभ भावना है ।

414
02:27:06.340 --> 02:27:08.399
ठीक है ।

415
02:27:08.399 --> 02:27:12.340
अच्छा ।

416
02:27:27.940 --> 02:27:37.479
अभी सबके दिल में क्या उमंग आ रहा है ?

417
02:27:37.479 --> 02:27:49.540
एक ही उमंग बाप समान बनना ही है ।

418
02:27:49.540 --> 02:27:52.450
है यह उमंग ?

419
02:27:52.450 --> 02:27:56.680
पाण्डव , हाथ उठाओ ।

420
02:27:56.680 --> 02:27:59.600
बनना ही है ।

421
02:27:59.600 --> 02:28:02.739
बनेंगे , गे गे नहीं करना ।

422
02:28:02.739 --> 02:28:15.420
देखेंगे , बनेंगे , गे गे नहीं करना … लेकिन बनना ही है ।

423
02:28:15.420 --> 02:28:17.940
पक्का ।

424
02:28:17.940 --> 02:28:21.370
पक्का ?

425
02:28:22.680 --> 02:28:24.909
अच्छा ।

426
02:28:24.909 --> 02:28:41.479
हर एक अपना ओ के का कार्ड अपने टीचर के पास चार्ट के रूप में देते रहना ।

427
02:28:41.479 --> 02:28:54.510
ज्यादा नहीं लिखो , बस एक कार्ड ले लो उसमें ओ के लिखो या लाइन डालो बस ।

428
02:28:54.510 --> 02:28:57.940
यह तो कर सकते हो ना ।

429
02:28:57.940 --> 02:29:02.739
लम्बा पत्र नहीं ।

430
02:29:07.370 --> 02:29:09.420
अच्छा ।

431
02:29:23.250 --> 02:29:46.620
दादियों से :- ( जानकी दादी ने बापदादा को गले लगाया ) सभी आपस में हाथ मिलाओ ।

432
02:30:11.709 --> 02:30:38.850
आप सभी भी सभी को हिम्मत , उमंग उत्साह दिलाने के निमित्त बन यही सेवा करते रहते हो ना !

433
02:30:38.850 --> 02:31:00.510
क्योंकि आज हिम्मत और उमंग उत्साह सदा कायम रहे , इसी की आवश्यकता है ।

434
02:31:04.909 --> 02:31:35.540
तो सभी को जो भी सामने आये , उसको हिम्मत उमंग उत्साह सेकेण्ड की दृष्टि से भी प्राप्त हो ।

435
02:31:37.540 --> 02:31:48.569
क्योंकि आप सभी मास्टर दाता हो ।

436
02:31:49.370 --> 02:31:59.139
जो भी आवे , कुछ ले जावे ।

437
02:32:01.139 --> 02:32:08.799
चाहे स्नेह ले जाये , चाहे सहयोग ले जाये ।

438
02:32:08.799 --> 02:32:12.850
चाहे हिम्मत ले जाये ।

439
02:32:12.850 --> 02:32:23.200
चाहे उमंग ले जाये , कुछ न कुछ ले जावे क्योंकि दाता के बच्चे हैं ।

440
02:32:31.879 --> 02:32:54.049
वैसे तो सभी का काम यह है , कभी भी किससे मिलते हो , कोई मिलने आता है , खाली हाथ नहीं जाये ।

441
02:32:56.799 --> 02:33:34.680
चलो दृष्टि का स्नेह ले जाये , टाइम नहीं है , बात करने की आवश्यकता भी नहीं रहती है , लेकिन जो आया वह गया कैसे ?

442
02:33:36.680 --> 02:33:40.909
कुछ ले गया ।

443
02:33:42.909 --> 02:33:51.879
सेकण्ड की दृष्टि से भी बहुत कुछ ले सकते हैं ।

444
02:33:57.370 --> 02:34:21.079
दृष्टि की रूहानियत वा दृष्टि से दिल का स्नेह तो सेकण्ड में भी ले सकते हैं ।

445
02:34:23.079 --> 02:34:39.540
अभी ब्राह्मणों का आपस में मिलना यह होना चाहिए ।

446
02:34:48.450 --> 02:35:07.709
तभी आपका वायुमण्डल विश्व में स्नेह , सहयोग , हिम्मत फैलायेगा ।

447
02:35:27.879 --> 02:35:49.600
सभी ब्राह्मण जो अपने को ब्रह्माकुमार कुमारी समझते हैं , उनको ऐसे ही सेवा में बिजी रहना है ।

448
02:36:05.940 --> 02:36:14.049
ऐसे नहीं टाइम नहीं मिला , सेकण्ड तो मिला ना ।

449
02:36:14.510 --> 02:36:19.770
मिनट भी मिला ना ।

450
02:36:26.969 --> 02:36:36.000
गाया हुआ है नज़र से निहाल ।

451
02:36:43.649 --> 02:37:01.079
तो ऐसे संगठन में लहर फैलाओ फिर टाइम देने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी ।

452
02:37:21.020 --> 02:37:24.340
अच्छा ।

453
02:37:25.020 --> 02:37:40.909
डबल विदेशी टीचर्स बहनों से :- आप सबने आपस में मिलकर अच्छा पार्ट बजाया ।

454
02:37:44.739 --> 02:37:53.879
सब प्रोग्राम अच्छे ते अच्छे रहे ।

455
02:38:02.170 --> 02:38:24.000
ऐसे ही सदा एक दो को सम्मान देते हुए , सहयोग देते हुए कार्य को सफल कर सकते हो ।

456
02:38:26.000 --> 02:38:30.909
सफलता का तो वरदान है ही ।

457
02:38:34.280 --> 02:38:54.110
निमित्त बनने वालों को तो विशेष बापदादा की तरफ से एकस्ट्रा सहयोग मिलता है ।

458
02:38:58.110 --> 02:39:04.680
तो हर एक ने अपना-अपना अच्छा पार्ट बजाया ।

459
02:39:06.680 --> 02:39:11.819
बापदादा खुश है ।

460
02:39:20.510 --> 02:39:30.850
अपना कार्य पूरा किया तो अभी रहो या जाओ आपके ऊपर है ।

461
02:39:46.049 --> 02:39:55.200
जिसकी ड्युटी होगी वह तो रूकेगी ।

462
02:39:58.850 --> 02:40:26.280
बाकी अच्छी हिम्मत की और ड्रामानुसार आप लोग ही निमित्त बने हुए हो क्योंकि कन्ट्रोलिंग पावर है आपमें , चला सकती हो ।

463
02:40:29.600 --> 02:40:37.479
अच्छा है , बापदादा खुश है ।

