WEBVTT

1
00:11:05.200 --> 00:12:46.740
आज सत बाप , सत शिक्षक , सतगुरू अपने चारों ओर के सत्यता स्वरूप , शक्ति स्वरूप बच्चों को देख रहे हैं

2
00:13:14.509 --> 00:13:41.309
क्योंकि सत्यता की शक्ति सर्वश्रेष्ठ है ।

3
00:13:52.399 --> 00:14:31.820
इस सत्यता की शक्ति का आधार है सम्पूर्ण पवित्रता ।

4
00:14:43.710 --> 00:15:30.450
मन-वचन-कर्म , सम्बन्ध-सम्पर्क , स्वप्न में भी अपवित्रता का नाम निशान न हो ।

5
00:15:50.909 --> 00:16:23.019
ऐसी पवित्रता का प्रत्यक्ष स्वरूप क्या दिखाई देता ?

6
00:16:29.879 --> 00:17:08.400
ऐसी पवित्र आत्मा के चलन और चेहरे में स्पष्ट दिव्यता दिखाई देती है ।

7
00:17:30.049 --> 00:19:04.509
उनके नयनों में रूहानी चमक , चेहरे में सदा हर्षितमुखता और चलन में हर कदम में बाप समान कर्मयोगी ।

8
00:19:18.109 --> 00:20:02.000
ऐसे सत्यवादी सत बाप द्वारा इस समय आप सभी बन रहे हो ।

9
00:20:12.509 --> 00:20:34.049
दुनिया में भी कई अपने को सत्यवादी कहते हैं ,

10
00:20:34.910 --> 00:21:14.680
सच भी बोलते हैं लेकिन सम्पूर्ण पवित्रता ही सच्ची सत्यता शक्ति है ।

11
00:21:27.420 --> 00:22:02.450
जो इस समय इस संगमयुग में आप सभी बन रहे हो ।

12
00:22:17.140 --> 00:22:59.250
इस संगमयुग की श्रेष्ठ प्राप्ति है - सत्यता की शक्ति , पवित्रता की शक्ति ।

13
00:23:16.220 --> 00:24:04.740
जिसकी प्राप्ति सतयुग में आप सभी ब्राह्मण सो देवता बन आत्मा और शरीर दोनों से पवित्र बनते हो ।

14
00:24:09.769 --> 00:24:38.339
सारे सृष्टि चक्र में और कोई भी आत्मा और शरीर दोनों से पवित्र नहीं बनते ।

15
00:24:41.200 --> 00:24:54.109
आत्मा से पवित्र बनते भी हैं लेकिन शरीर पवित्र नहीं मिलता ।

16
00:25:09.769 --> 00:25:56.339
तो ऐसी सम्पूर्ण पवित्रता इस समय आप सब धारण कर रहे हो ।

17
00:26:00.569 --> 00:26:13.309
फलक से कहते हो , याद है क्या फलक से कहते हो ?

18
00:26:13.309 --> 00:26:17.599
याद करो ।

19
00:26:19.599 --> 00:26:32.279
सभी दिल से कहते हैं , अनुभव से कहते हैं

20
00:26:32.279 --> 00:26:49.309
कि पवित्रता तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ,

21
00:26:59.200 --> 00:27:04.509
जन्म सिद्ध अधिकार सहज प्राप्त होता है

22
00:27:25.250 --> 00:27:56.970
क्योंकि पवित्रता वा सत्यता प्राप्त करने के लिए

23
00:28:03.250 --> 00:28:29.140
आप सभी ने पहले अपने सत स्वरूप आत्मा को जान लिया ।

24
00:28:33.019 --> 00:28:46.680
अपने सत बाप , शिक्षक , सतगुरू को पहचान लिया ।

25
00:28:52.970 --> 00:29:02.450
पहचान लिया और पा लिया ।

26
00:29:12.450 --> 00:29:29.309
जब तक कोई अपने सत स्वरूप वा सत बाप को नहीं जानते

27
00:29:33.200 --> 00:29:56.279
तो सम्पूर्ण पवित्रता , सत्यता की शक्ति आ नहीं सकती ।

28
00:30:10.220 --> 00:30:36.450
तो आप सभी सत्यता और पवित्रता की शक्ति के अनुभवी है ना !

29
00:30:39.819 --> 00:30:42.450
हैं अनुभवी ?

30
00:30:42.450 --> 00:30:47.250
अनुभवी हैं ?

31
00:30:59.200 --> 00:31:07.019
वह लोग प्रयत्न रते हैं

32
00:31:08.049 --> 00:31:39.369
लेकिन यथार्थ रूप में ना अपने स्वरूप , न सत बाप के यथार्थ स्वरूप को जान सकते ।

33
00:31:51.369 --> 00:32:19.880
और आप सबने इस समय के अनुभव द्वारा पवित्रता को ऐसे सहज अपनाया

34
00:32:21.200 --> 00:32:54.509
जो इस समय की प्राप्ति का प्रालब्ध देवताओं की पवित्रता नेचरल है और नेचर है ।

35
00:33:01.880 --> 00:33:31.650
ऐसी नेचरल नेचर का अनुभव आप ही प्राप्त करते हो ।

36
00:34:20.170 --> 00:35:03.369
तो चेक करो कि पवित्रता वा सत्यता की शक्ति नेचरल नेचर के रूप में बनी है ?

37
00:35:19.250 --> 00:35:22.739
आप क्या समझते हो ?

38
00:35:22.739 --> 00:35:42.050
जो समझते हैं कि पवित्रता तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है वह हाथ उठाओ ।

39
00:35:44.050 --> 00:35:53.369
जन्म सिद्ध अधिकार है कि मेहनत करनी पड़ती है ?

40
00:35:55.369 --> 00:35:59.019
मेहनत करनी तो नहीं पड़ती ना !

41
00:35:59.019 --> 00:36:02.570
सहज है ना !

42
00:36:02.570 --> 00:36:17.019
क्योंकि जन्मसिद्ध आधिकार तो सहज प्राप्त हाता है मेहनत नह करनी पड़ती ।

43
00:36:21.250 --> 00:36:32.570
दुनिया वाले असम्भव समझते हैं

44
00:36:42.400 --> 00:36:59.019
और आपने असम्भव को सम्भव और सहज बना दिया है ।

45
00:37:11.079 --> 00:37:22.800
जो नये नये बच्चे आये हैं , जो पहले बारी आये हैं वह हाथ उठाओ ।

46
00:37:40.110 --> 00:37:59.139
अच्छा जो नये नये बच्चे हैं , मुबारक हो नये पहली बार आने वालों को

47
00:37:59.139 --> 00:38:26.800
क्योंकि बापदादा कहते हैं कि भले लेट तो आये हो लेकिन टू लेट में नहीं आये हो ।

48
00:38:32.849 --> 00:38:45.199
और नये बच्चों को बापदादा का वरदान है

49
00:38:50.340 --> 00:39:10.909
कि लास्ट वाला भी फास्ट पुरूषार्थ कर फर्स्ट डिवीजन में आ सकते हैं ।

50
00:39:10.909 --> 00:39:21.769
फर्स्ट नम्बर नहीं लेकिन फर्स्ट डिवीजन में आ सकते हैं ।

51
00:39:23.769 --> 00:39:34.570
तो नये बच्चों को इतनी हिम्मत है , हाथ उठाओ जो फर्स्ट आयेंगे ।

52
00:39:34.570 --> 00:39:44.449
देखना टी वी में आपका हाथ दिखाई दे रहा है ।

53
00:39:47.940 --> 00:39:50.570
अच्छा ।

54
00:39:50.570 --> 00:39:54.170
हिम्मत वाले हैं ।

55
00:39:54.170 --> 00:39:58.679
मुबारक हो हिम्मत की ।

56
00:39:58.679 --> 00:40:07.820
और हिम्मत है तो बाप की तो मदद है ही

57
00:40:07.820 --> 00:40:34.400
लेकिन सर्व ब्राह्मण परिवार की भी शुभ भावना , शुभ कामना आप सबके साथ है ।

58
00:40:34.400 --> 00:40:51.539
इसलिए जो भी नये पहले बारी आये हैं

59
00:40:53.539 --> 00:41:26.909
उन सबके प्रति बापदादा और परिवार की तरफ से दुबारा पदमगुणा बधाई हो , बधाई हो , बधाई हो ।

60
00:41:34.110 --> 00:41:51.079
आप सभी जो पहले आने वाले हैं उन्हों को भी खुशी हो रही है ना !

61
00:41:51.079 --> 00:42:07.139
बिछुड़ी हुई आत्मायें फिर से अपने परिवार में पहुंच गये हैं ।

62
00:42:11.599 --> 00:42:24.619
तो बापदादा भी खुश हो रहे हैं और आप सब भी खुश हो रहे हैं ।

63
00:42:33.769 --> 00:43:06.909
बापदादा ने वतन में दादी के साथ एक रिजल्ट देखी ।

64
00:43:13.599 --> 00:43:19.250
क्या रिजल्ट देखी ?

65
00:43:30.570 --> 00:43:58.110
आप सभी जानते हो , मानते हो कि हम मालिक सो बालक हैं ।

66
00:43:58.110 --> 00:44:00.110
हैं ना !

67
00:44:00.110 --> 00:44:03.250
मालिक भी हो , बालक भी हो ।

68
00:44:03.250 --> 00:44:06.340
सभी हैं ?

69
00:44:06.340 --> 00:44:08.679
हाथ उठाओ ।

70
00:44:08.679 --> 00:44:16.170
सोच के उठाना , ऐसे नहीं ।

71
00:44:16.739 --> 00:44:20.849
हिसाब लेंगे ना !

72
00:44:20.849 --> 00:44:26.909
अच्छा , हाथ नीचे करो ।

73
00:44:36.000 --> 00:45:04.969
बापदादा ने देखा कि बालकपन का निश्चय और नशा यह तो सहज रहता है

74
00:45:06.969 --> 00:45:22.909
क्योंकि ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारी कहलाते हो तो बालक हो तभी तो ब्रह्माकुमार कुमारी कहलाते हो ।

75
00:45:24.280 --> 00:45:47.369
और सारा दिन मेरा बाबा , मेरा बाबा यही स्मृति में लाते हो फिर भूल भी जाते हो लेकिन बीच-बीच में याद आता है ।

76
00:45:52.110 --> 00:46:06.800
और सेवा में भी बाबा बाबा शब्द नेचरल मुख से निकलता है ।

77
00:46:08.800 --> 00:46:22.110
अगर बाबा शब्द नहीं निकलता तो ज्ञान का कोई प्रभाव नहीं पड़ता ।

78
00:46:28.969 --> 00:46:52.000
प्रभाव जो भी सेवा करते हो , भाषण करते हो , कोर्स कराते हो , भिन्न-भिन्न टॉपिक पर करते हो ।

79
00:46:54.000 --> 00:47:38.400
सच्ची सेवा का प्रत्यक्ष स्वरूप वा प्रत्यक्ष प्रमाण यही है कि सुनने वाले भी अनुभव करें कि मैं भी बाबा का हूँ ।

80
00:47:40.400 --> 00:47:49.369
उनके मुख से भी बाबा बाबा शब्द निकले ।

81
00:47:52.280 --> 00:47:57.769
कोई ताकत है , यह नहीं ।

82
00:47:59.769 --> 00:48:04.739
अच्छा है , यह नहीं ।

83
00:48:06.739 --> 00:48:34.800
लेकिन मेरा बाबा अनुभव करें इसको कहेंगे सेवा का प्रत्यक्ष फल ।

84
00:48:43.199 --> 00:49:04.619
तो बालकपन का नशा वा निश्चय फिर भी अच्छा रहता है ।

85
00:49:06.619 --> 00:49:29.420
लेकिन मालिकपन का निश्चय और नशा नम्बरवार रहता है ।

86
00:49:31.420 --> 00:50:01.820
बालकपन से मालिकपन का प्रैक्टिकल चलन और चेहरे से नशा कभी दिखाई देता है , कभी कम दिखाई देता है ।

87
00:50:06.679 --> 00:50:32.340
वास्तव में आप डबल मालिक हो एक बाप के खज़ानों के मालिक हो ।

88
00:50:33.710 --> 00:50:39.650
सभी मालिक हो ना खज़ानों के ?

89
00:50:39.650 --> 00:50:52.000
और बाप ने सभी को एक जितना ही खज़ाना दिया है ।

90
00:50:55.250 --> 00:51:03.480
कोई को लाख दिया हो , कोई को हजार दिया हो , ऐसा नहीं है ।

91
00:51:03.480 --> 00:51:17.199
सभी को सब खज़ाने बेहद के दिये हैं

92
00:51:21.599 --> 00:51:32.000
क्योंकि बाप के पास बेहद के खज़ाने हैं ।

93
00:51:35.250 --> 00:51:39.599
कम नहीं हैं ।

94
00:51:39.599 --> 00:52:00.050
तो बापदादा ने सभी को सर्व खज़ाने दिये हैं और एक जैसे , एक जितने दिये हैं ।

95
00:52:04.170 --> 00:52:17.309
और दूसरा मालिक है - स्व राज्य के मालिक हो ।

96
00:52:24.849 --> 00:52:46.800
इसीलिए बापदादा फलक से कहते हैं कि मेरा एक एक बच्चा राजा बच्चा है ।

97
00:52:50.400 --> 00:52:55.820
तो राजा बच्चे हो ना !

98
00:52:55.820 --> 00:52:59.250
प्रजा तो नहीं ?

99
00:52:59.250 --> 00:53:07.599
राजयोगी हो कि प्रजायोगी हो ?

100
00:53:07.599 --> 00:53:12.170
राजयोगी हो ना !

101
00:53:12.170 --> 00:53:22.340
तो स्वराज्य के मालिक हो ।

102
00:53:25.940 --> 00:53:56.510
लेकिन बापदादा ने दादी के साथ रिजल्ट देखा - तो जितना बालकपन का नशा रहता है , उतना मालिकपन का कम रहता है ।

103
00:54:04.849 --> 00:54:08.449
क्यों ?

104
00:54:08.449 --> 00:54:24.619
अगर स्वराज्य के मालिकपन का नशा सदा रहता

105
00:54:27.539 --> 00:54:58.969
तो यह जो बीच-बीच में समस्यायें वा विघ्न आते हैं वह आ नहीं सकते ।

106
00:55:02.800 --> 00:55:34.400
वैसे देखा जाता है तो समस्या वा विघ्न आने का आधार विशेष मन है ।

107
00:55:40.400 --> 00:55:47.369
मन ही हलचल में आता है ।

108
00:55:47.369 --> 00:56:01.480
इसीलिए बापदादा का महामन्त्र भी है मनमनाभव ।

109
00:56:02.400 --> 00:56:14.110
तनमनाभव , धनमनाभव नहीं है , मनमनाभव है ।

110
00:56:16.110 --> 00:56:31.940
तो अगर स्वराज्य का मालिक है तो मन मालिक नहीं है ।

111
00:56:31.940 --> 00:56:47.019
मन आपका कर्मचारी है , राजा नहीं है ।

112
00:56:50.000 --> 00:56:58.739
राजा अर्थात् अधिकारी ।

113
00:56:58.739 --> 00:57:06.449
अधीन वाले को राजा नहीं कहा जाता है ।

114
00:57:14.619 --> 00:57:19.769
तो रिजल्ट में क्या देखा ?

115
00:57:22.909 --> 00:57:52.110
कि मन का मालिक मैं राज्य अधिकारी मालिक हूँ ।

116
00:57:59.250 --> 00:58:28.570
यह स्मृति , यह आत्म स्थिति की सदा स्थिति कम रहती है ।

117
00:58:29.769 --> 00:58:40.050
है पहला पाठ , आप सबने पहला पाठ क्या किया था ?

118
00:58:40.050 --> 00:58:52.000
मैं आत्मा हूँ , परमात्मा का पाठ दूसरा नम्बर है ।

119
00:58:53.710 --> 00:59:22.170
लेकिन पहला पाठ मैं मालिक राजा इन कर्मेन्द्रियों का अधिकारी आत्मा हूँ ।

120
00:59:24.170 --> 00:59:28.280
शक्तिशाली आत्मा हूँ ।

121
00:59:29.199 --> 00:59:44.679
सर्वशक्तियां आत्मा के निजीगुण हैं ।

122
00:59:47.539 --> 01:00:11.139
तो बापदादा ने देखा कि जो मैं हूँ , जैसा हूँ ,

123
01:00:14.110 --> 01:00:36.800
उसको नेचरल स्वरूप स्मृति में चलना , रहना , चेहरे से अनुभव होना ,

124
01:00:37.710 --> 01:01:02.449
समस्या से किनारा होना , इसमें अभी और अटेन्शन चाहिए ।

125
01:01:08.849 --> 01:01:20.510
सिर्फ मैं आत्मा नहीं , लेकिन कौन सी आत्मा हूँ ,

126
01:01:26.400 --> 01:02:06.800
अगर यह स्मृति में रखो तो मास्टर सर्वशक्तिवान आत्मा के आगे समस्या वा विघ्न की कोई शक्ति नहीं जो आ सके ।

127
01:02:20.000 --> 01:03:14.619
अभी भी रिजल्ट में कोई न कोई समस्या वा विघ्न दिखाई देता है ।

128
01:03:25.650 --> 01:04:14.800
जानते हैं लेकिन चलन और चेहरे में निश्चय का प्रत्यक्ष स्वरूप रूहानी नशा वह और ही प्रत्यक्ष होना है ।

129
01:04:22.969 --> 01:05:15.480
इसके लिए यह मालिकपन का नशा इसको बार-बार चेक करो ।

130
01:05:17.480 --> 01:05:24.050
सेकण्ड की बात है चेक करना ।

131
01:05:26.050 --> 01:05:36.510
कर्म करते , कोई भी कर्म आरम्भ करते हो ,

132
01:05:44.570 --> 01:05:59.480
आरम्भ करने टाइम चेक करो -

133
01:06:02.619 --> 01:06:51.940
मालिकपन की अथॉरिटी से कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म कराने वाला कन्ट्रोलिंग पावर , रूलिंग पावर वाली आत्मा हूँ ?

134
01:06:55.820 --> 01:07:02.110
कि साधारण कर्म शुरू हुआ ?

135
01:07:04.110 --> 01:07:26.570
स्मृति स्वरूप से कर्म आरम्भ करना और साधारण स्थिति से कर्म आरम्भ करना उसमें बहुत फर्क है ।

136
01:07:42.909 --> 01:08:05.309
जैसे हद के मर्तबे वाले अपना कार्य करते हैं

137
01:08:05.940 --> 01:08:18.569
तो कार्य की सीट पर सेट होके फिर कार्य आरम्भ करते हैं

138
01:08:21.420 --> 01:08:52.050
ऐसे अपने मालिकपन के स्वराज्य अधिकारी की सीट पर सेट होके फिर हर कार्य करो ।

139
01:09:01.770 --> 01:09:26.850
इस मालिकपन के अथॉरिटी की चेकिंग को और बढ़ाना है ।

140
01:09:32.399 --> 01:09:50.000
और इसकी निशानी है , मालिकपन के अथॉरिटी की निशानी है

141
01:09:54.680 --> 01:11:06.909
सदा हर कार्य में डबल लाइट और खुशी की अनुभूति होगी और रिजल्ट सफलता सहज अनुभव होगी ।

142
01:11:20.279 --> 01:11:58.000
अभी कहाँ-कहाँ , अभी तक भी अधिकारी के बजाए अधीन बन जाते हो ।

143
01:12:03.710 --> 01:12:09.539
अधीनता की निशानी क्या दिखाई देती ?

144
01:12:17.079 --> 01:12:44.050
जो बार-बार कहते हैं मेरे संस्कार हैं , चाहते नहीं हैं लेकिन मेरे संस्कार हैं , मेरी नेचर है ।

145
01:13:06.220 --> 01:13:36.970
बापदादा ने पहले भी सुनाया कि जिस समय यह कहते हैं कि मेरे संस्कार हैं , मेरी नेचर है ,

146
01:13:39.770 --> 01:13:56.909
क्या यह कमज़ोरी के संस्कार आपके संस्कार हैं ?

147
01:14:01.710 --> 01:14:06.399
मेरे हैं ?

148
01:14:11.250 --> 01:14:20.109
यह तो रावण के मध्य के संस्कार हैं , रावण की देन है ।

149
01:14:22.109 --> 01:14:29.140
उसको मेरा कहना ही रांग है ।

150
01:14:40.340 --> 01:14:56.680
आपके संस्कार तो जो बाप के संस्कार हैं वही संस्कार हैं ।

151
01:15:06.510 --> 01:15:27.250
उस समय सोचो कि मेरा-मेरा कहके मेरे हैं ,

152
01:15:28.850 --> 01:15:43.819
तो वह अधिकारी बन गये हैं और आप अधीन बन जाते हैं ।

153
01:15:46.449 --> 01:16:07.369
समान बाप जैसे बनना है तो मेरे संस्कार नहीं , जो बाप के संस्कार वह मेरे संस्कार ।

154
01:16:10.909 --> 01:16:16.850
बाप के संस्कार क्या हैं ?

155
01:16:30.000 --> 01:16:54.510
विश्व कल्याणकारी , शुभ भावना , शुभ कामनाधारी ।

156
01:17:10.109 --> 01:17:24.399
तो उस समय बाप के संस्कार सामने लाओ , लक्ष्य है

157
01:17:24.399 --> 01:17:37.199
बाप समान बनने का और लक्षण रहे हुए हैं रावण के ।

158
01:17:55.420 --> 01:18:09.199
तो मिक्स हो जाते हैं , कुछ अच्छे बाप के , कुछ वह मेरे पास्ट के संस्कार ।

159
01:18:12.739 --> 01:18:24.449
इसीलिए दोनों मिक्स रहते हैं ना तो खिटखिट होती रहती है ।

160
01:18:42.680 --> 01:18:48.739
और संस्कार बनते कैसे हैं ?

161
01:18:49.420 --> 01:18:53.600
वह तो सभी जानते हैं ना !

162
01:18:55.600 --> 01:19:19.770
संस्कार मन और बुद्धि के संकल्प और कार्य से संस्कार बनते हैं ।

163
01:19:21.079 --> 01:19:39.420
पहले मन संकल्प करता , बुद्धि सहयोग देती और अच्छे या बुरे संस्कार बन जाते ।

164
01:19:44.170 --> 01:20:24.399
तो बापदादा ने दादी के साथ-साथ रिजल्ट में देखा कि मालिकपन का नेचुरल और नचर का नशा रहे

165
01:20:27.710 --> 01:20:39.140
वह बालकपन की भेंट में अभी भी कम है ।

166
01:20:43.310 --> 01:21:14.850
इसीलिए बापदादा देखते हैं कि समाधान करने के लिए फिर युद्ध करने लग पड़ते हैं ।

167
01:21:15.819 --> 01:21:26.800
हैं ब्राह्मण लेकिन बीच-बीच में क्षत्रिय बन जाते हैं ।

168
01:21:41.600 --> 01:21:47.199
तो क्षत्रिय नहीं बनना है ।

169
01:21:47.199 --> 01:21:53.310
ब्राह्मण सो देवता बनना है ।

170
01:21:54.449 --> 01:22:15.939
क्षत्रिय बनने वाले तो बहुत आने वाले हैं , वह पीछे आने वाले हैं आप तो अधिकारी आत्मायें हैं ।

171
01:22:23.250 --> 01:22:26.569
तो सुना रिजल्ट ।

172
01:22:26.569 --> 01:22:57.020
इसलिए बारबार मैं कौन , यह स्मृति में लाओ ।

173
01:22:57.020 --> 01:23:04.739
है ही , नहीं लेकिन स्मृति स्वरूप में लाओ ।

174
01:23:16.449 --> 01:23:19.079
ठीक है ना ।

175
01:23:19.079 --> 01:23:21.880
अच्छा ।

176
01:23:21.880 --> 01:23:27.420
रिजल्ट भी सुनाई ।

177
01:23:28.569 --> 01:24:49.649
अभी समस्या का नाम,विघ्न का नाम, हलचल का नाम, व्यर्थ संकल्प का नाम,व्यर्थ कर्म का नाम,व्यर्थ सम्बन्ध का नाम, व्यर्थ स्मृति का नाम समाप्त करो और कराओ।

178
01:24:59.770 --> 01:25:05.199
ठीक है ना , करेंगे ?

179
01:25:05.199 --> 01:25:08.680
करेंगे ?

180
01:25:08.680 --> 01:25:16.220
जो दृढ़ संकल्प का हाथ उठायें , यह हाथ उठाना तो कामन हो गया है

181
01:25:16.220 --> 01:25:30.739
इसलिए हाथ नहीं उठवाते हैं , मन में दृढ़ संकल्प का हाथ उठाओ ।

182
01:25:30.739 --> 01:25:42.050
मन में , शरीर का हाथ नहीं , वह बहुत देख लिया है ।

183
01:25:51.250 --> 01:26:32.510
जब सभी का मिलकर मन से दृढ़ संकल्प का हाथ उठेगा तब ही विश्व के कोने-कोने में सभी का खुशी से हाथ उठेगा -

184
01:26:32.510 --> 01:26:49.250
हमारा सुखदाता , शान्तिदाता बाप आ गया ।

185
01:27:15.939 --> 01:27:23.939
बाप को प्रत्यक्ष करने का बीड़ा उठाया है ना !

186
01:27:23.939 --> 01:27:26.680
उठाया है ?

187
01:27:26.680 --> 01:27:29.710
पक्का ?

188
01:27:29.710 --> 01:27:32.510
टीचर्स ने उठाया है ?

189
01:27:32.510 --> 01:27:34.510
अच्छा ।

190
01:27:37.310 --> 01:27:42.739
पाण्डवों ने उठाया है , पक्का ।

191
01:27:42.739 --> 01:27:46.800
अच्छा डेट फिक्स की है ।

192
01:27:46.800 --> 01:27:51.020
डेट नहीं फिक्स है ?

193
01:27:51.649 --> 01:27:55.199
कितना टाइम चाहिए ?

194
01:27:55.199 --> 01:28:06.449
एक वर्ष चाहिए , दो वर्ष चाहिए ? कितना वर्ष चाहिए ?

195
01:28:19.539 --> 01:28:54.680
बापदादा ने कहा था हर एक अपने पुरूषार्थ की यथा शक्ति प्रमाण अपनी नेचुरल चलने की या उड़ने की

196
01:28:54.680 --> 01:29:14.170
विधि समान अपनी डेट सम्पन्न बनने की खुद ही फिक्स करो ।

197
01:29:18.000 --> 01:29:44.569
बापदादा तो कहेगा अब करो , लेकिन यथाशक्ति अपने पुरूषार्थ अनुसार अपनी डेट फिक्स करो

198
01:29:47.369 --> 01:30:17.079
और समय प्रति समय उसको चेक करो कि समय प्रमाण मन्सा की स्टेज , वाचा की स्टेज ,

199
01:30:18.680 --> 01:30:32.170
सम्बन्ध-सम्पर्क की स्टेज में प्रोग्रेस हो रहा है ?

200
01:30:39.600 --> 01:30:47.539
क्योंकि डेट फिक्स करने से स्वतः ही अटेन्शन जाता है ।

201
01:31:07.649 --> 01:31:27.310
बाकी सभी की तरफ से , चारों ओर की तरफ से सन्देश भी आये हैं ।

202
01:31:29.310 --> 01:31:34.909
ईमेल भी आये हैं ।

203
01:31:39.819 --> 01:31:57.770
तो बापदादा के पास तो ईमेल जब तक पहुंचे उसके पहले ही पहुंच जाता है ,

204
01:31:57.770 --> 01:32:07.250
दिल के संकल्प का ईमेल बहुत रफ्तार का होता है ।

205
01:32:10.279 --> 01:32:14.680
वह पहले पहुंच जाता है ।

206
01:32:17.199 --> 01:32:56.739
तो जिन्होंने भी यादप्यार , समाचार अपने स्थिति का , अपनी सेवा का भेजा है ,

207
01:32:56.739 --> 01:33:25.020
उन सबको बापदादा ने स्वीकार किया , यादप्यार सभी ने बहुत अच्छे उमंग-उत्साह से भी भेजी है ।

208
01:33:27.020 --> 01:33:52.340
तो बापदादा उन सभी को चाहे विदेश चाहे देश सभी को रिटर्न में यादप्यार

209
01:33:53.479 --> 01:34:14.800
और दिल की दुआओं सहित प्यार और शक्ति की सकाश भी दे रहे हैं ।

210
01:34:41.199 --> 01:34:45.020
अच्छा ।

211
01:34:59.250 --> 01:35:14.909
सेवा का टर्न राजस्थान और इन्दौर का है :-

212
01:35:49.710 --> 01:36:17.079
अच्छा है , दोनों ने यज्ञ सेवा की सेवा का चांस लिया है ,

213
01:36:17.079 --> 01:36:34.399
यह भी गोल्डन चांस लेने वाले गोल्डन चांसलर हैं ।

214
01:36:38.170 --> 01:36:54.399
बापदादा ने देखा है कि सभी को इन्तजार रहता है

215
01:36:56.399 --> 01:37:19.369
कि कब हमारा टर्न सेवा का बल और सेवा का फल मिलने का आयेगा ।

216
01:37:20.279 --> 01:37:39.140
तो आप दोनों का तो प्रत्यक्ष फल पाने का चांस आ गया ।

217
01:37:41.140 --> 01:37:57.539
और बापदादा ने देखा है कि हर जोन जो भी निमित्त बनते हैं

218
01:37:58.569 --> 01:38:34.800
वह रूचि से सेवा करते हैं क्योंकि संगमयुग में सेवा का वा हर कर्म का प्रत्यक्षफल मिलता है ।

219
01:38:38.050 --> 01:39:11.649
अभी अभी दिल से सेवा की और अभी अभी ही दिल की खुशी में नाचते रहते हैं ।

220
01:39:13.649 --> 01:39:27.479
तो जब भी जितने दिन भी मधुबन में चांस मिला है

221
01:39:28.510 --> 01:39:49.600
तो सभी ने हर समय मन की खुशी का डांस का अनुभव किया ?

222
01:39:51.020 --> 01:40:12.800
और डांस तो कामन है , लेकिन आपके मन की डांस , माइंड डांस , पांव की डांस नहीं , अनुभव किया है ना !

223
01:40:12.800 --> 01:40:17.539
मन की खुशी की डांस का अनुभव किया ?

224
01:40:17.539 --> 01:40:26.970
हाथ उठाओ जिन्होंने किया , थकावट तो नहीं हुई ना ।

225
01:40:27.819 --> 01:40:36.970
अथकपन का अनुभव किया ना ।

226
01:40:38.970 --> 01:40:44.850
और पुण्य कितना जमा किया ?

227
01:40:45.880 --> 01:40:59.420
लोग तो एक ब्राह्मण को खिलाते हैं , सेवा करते हैं तो समझते हैं बड़ा पुण्य जमा हो गया ।

228
01:41:01.420 --> 01:41:32.279
और आपने कितने ब्राह्मणों को खिलाया , सम्भाला , क्लास कराया , रिफ्रेश किया , तो आपके पुण्य का खाता कितना जमा हो गया !

229
01:41:40.970 --> 01:42:06.569
और सबसे खुशी की बात तो यह है कि अपना ब्राह्मण परिवार एक समय में एक साथ कितने बड़े परिवार को देखा ।

230
01:42:16.109 --> 01:42:41.770
और विश्व के चारों ओर के भाई बहिनें अपना ईश्वरीय परिवार देखने का चांस मधुबन में ही मिलता है ।

231
01:42:45.079 --> 01:42:54.220
विदेश से भी आते , देश से भी आते हैं ।

232
01:42:56.220 --> 01:43:24.399
इतना बड़ा परिवार का मिलन यह भी एक विशेष खुशी की बात है ।

233
01:43:26.399 --> 01:43:39.649
दिल में उमंग आता है ना वाह बाबा और वाह मेरा ब्राह्मण परिवार !

234
01:43:46.279 --> 01:44:03.369
तो बहुत अच्छा किया , हिम्मत आपकी , मदद मधुबन निवासियों की और बाप की ।

235
01:44:10.909 --> 01:44:21.710
क्योंकि मधुबन निवासी भी साथी बनते हैं तब तो कार्य कर सकते हो ।

236
01:44:29.079 --> 01:44:32.619
तो लाटरी ले ली ।

237
01:44:32.619 --> 01:44:38.800
लाटरी की मुबारक हो ।

238
01:44:41.369 --> 01:44:43.600
अच्छा है ।

239
01:44:43.600 --> 01:45:04.510
टीचर्स को भी चांस मिलता , परिवार वालों को भी चांस मिलता , छोटे बड़े साथी टीचर्स को भी चांस मिलता ।

240
01:45:06.510 --> 01:45:09.539
देखो कितनी टीचर्स आई हैं ?

241
01:45:09.819 --> 01:45:15.020
दोनों जोन कीकितनी टीचर्स आई हैं ?

242
01:45:18.680 --> 01:45:56.050
( 350 दोनों जोन की टीचर्स आई हैं ) अच्छा है , तो मुबारक तो है ही और आगे भी चांस लेते रहना ।

243
01:45:56.050 --> 01:46:19.600
बाकी दोनों में एक साल में हर एक जोन बताये तो वारिस कितने निकाले ?

244
01:46:20.399 --> 01:46:23.649
जोन हेड कौन है ?

245
01:46:23.649 --> 01:46:25.649
हाथ उठाओ ।

246
01:46:37.539 --> 01:46:49.649
तो सारे जोन में कितने वारिस निकले , कितने माइक निकले ?

247
01:46:50.510 --> 01:46:57.880
लिस्ट निकाली है ?

248
01:47:01.770 --> 01:47:05.539
चुप हो गये क्यों ?

249
01:47:10.399 --> 01:47:23.649
अभी वारिस क्वालिटी एक साल में तो निकलनी चाहिए ना !

250
01:47:24.170 --> 01:47:32.510
क्योंकि हर साल के बाद जोन को चांस मिलता है ।

251
01:47:33.020 --> 01:47:35.369
ठीक है ना !

252
01:47:35.369 --> 01:47:44.399
एक साल में कुछ तो वारिस या माइक निकलने चाहिए ना !

253
01:47:49.539 --> 01:47:52.449
बोलो ना हाँ जी ।

254
01:47:53.600 --> 01:47:56.970
ऐसे ही हाँ जी नहीं ।

255
01:47:58.970 --> 01:48:02.569
लिस्ट चाहिए ।

256
01:48:07.649 --> 01:48:12.050
अच्छा अगले साल निकालकर आना ।

257
01:48:13.420 --> 01:48:23.020
अभी तैयार कर रहे होंगे , फिर लिस्ट ले आना ।

258
01:48:23.020 --> 01:48:41.939
अभी जिसका भी जोन का टर्न होगा इनएडवांस बापदादा कह रहे हैं कि हर जोन से यह दोनों रिजल्ट लेंगे।

259
01:48:41.939 --> 01:48:47.020
पहले ही तैयारी करके आना ।

260
01:48:47.020 --> 01:48:54.680
कितने माइक निकले और कितने वारिस निकले ?

261
01:48:56.680 --> 01:49:08.850
पहले वाले हैं वह तो लक्की और लवली हैं , अभी कितने निकले ?

262
01:49:09.649 --> 01:49:12.619
ठीक है ना ?

263
01:49:12.619 --> 01:49:16.220
रिजल्ट निकलनी चाहिए ना ?

264
01:49:24.399 --> 01:49:42.109
बापदादा ने अभी तक हर विंग द्वारा भी वारिस या माइक की लिस्ट नहीं देखी है ।

265
01:49:42.109 --> 01:49:54.909
हर साल विंग मिलते हैं , बापदादा खुश भी होते हैं लेकिन रिजल्ट अभी तक नहीं आई है ।

266
01:49:54.909 --> 01:50:06.569
यह विंग्स का प्रोग्राम कितने साल से चल रहा है ?

267
01:50:08.569 --> 01:50:13.079
कितने साल हुए हैं ?

268
01:50:16.909 --> 01:50:27.710
( 22 साल ) तो 22 साल में हर साल में एक तो निकलना चाहिए ।

269
01:50:28.279 --> 01:50:32.850
लिस्ट नहीं आई है ।

270
01:50:34.850 --> 01:50:41.079
एक विंग की भी लिस्ट नहीं आई है ।

271
01:50:53.479 --> 01:51:24.850
तो अच्छा है , आप लोगों ने दिल से सेवा की है इसीलिए दिलाराम बाप की तरफ से बहुत-बहुत-बहुत दिल की दुआयें हैं ।

272
01:51:29.539 --> 01:51:32.970
अच्छा ।

273
01:51:34.970 --> 01:51:41.770
दूसरे वर्ष के लिए तैयारी करके आना ।

274
01:51:59.310 --> 01:52:34.680
डबल विदेशी :- डबल विदेशी चतुर बहुत हैं ।

275
01:52:37.420 --> 01:52:46.850
हर टर्न में अपना अच्छा अधिकार रखा है ।

276
01:52:48.170 --> 01:53:11.880
बापदादा को और सभी ब्राह्मण परिवार को खुशी होती है कि बापदादा का संगठन इन्टरनेशनल संगठन है ।

277
01:53:13.880 --> 01:53:19.310
अच्छी हिम्मत करके आते हैं ।

278
01:53:19.310 --> 01:53:25.420
सबसे ज्यादा ग्रुप कहाँ का है ?

279
01:53:25.420 --> 01:54:10.850
( मलेशिया से 61 आये हैं ) अच्छा है , जितना बड़ा ग्रुप है ना , उतनी बड़ी बड़ी बड़ी मुबारक हो ।

280
01:54:17.539 --> 01:54:28.449
अच्छा है फारेन का विशेष गायन है

281
01:54:28.449 --> 01:54:58.050
कि वहाँ की लाइफ फास्ट लाइफ होती है तो जो डबल विदेशी ब्राह्मण परिवार के बन गये उनका भी फास्ट पुरूषार्थ है ?

282
01:54:58.800 --> 01:55:15.140
जब देश की फास्ट लाइफ है तो ब्राह्मण परिवार की फास्ट पुरूषार्थ की लाइफ है ?

283
01:55:16.399 --> 01:55:22.170
फास्ट है या स्लो है ?

284
01:55:22.170 --> 01:55:25.649
फास्ट है ?

285
01:55:26.220 --> 01:55:28.970
हाँ या ना कहो ।

286
01:55:28.970 --> 01:55:35.600
जिसकी फास्ट है वह हाथ उठाओ ।

287
01:55:44.850 --> 01:55:49.939
आधा है , आधा नहीं है ।

288
01:55:49.939 --> 01:56:01.420
अभी अगले वर्ष जब आओ ना , आना ही पड़ेगा ना ।

289
01:56:02.739 --> 01:56:33.479
तो इस साल में लक्ष्य रखो कि पुरूषार्थी तो हैं लेकिन पुरूषार्थ के आगे तीव्र शब्द एड कर दो ।

290
01:56:34.739 --> 01:56:48.510
पुरूषार्थी बनना कामन है , तीव्र पुरूषार्थी बनना विशेष है ।

291
01:56:49.250 --> 01:56:59.479
तो आप सभी विशेष आत्मायें हो , साधारण थोड़ेही हो , विशेष हो ।

292
01:57:00.170 --> 01:57:13.250
तो विशेष आत्माओं की पहली निशानी है तीव्र पुरूषार्थी ।

293
01:57:14.220 --> 01:57:20.619
सोचा और किया ।

294
01:57:21.079 --> 01:57:37.250
ऐसे नहीं करेंगे , हो जायेगा … होना तो है ही … नहीं ।

295
01:57:41.310 --> 01:57:44.970
करना ही है ।

296
01:57:45.539 --> 01:57:49.310
उड़ना ही है ।

297
01:57:49.310 --> 01:58:06.050
बाप समान बनना ही है , इसको कहते हैं तीव्र पुरूषार्थी ।

298
01:58:09.710 --> 01:58:12.970
तो क्या करेंगे ?

299
01:58:12.970 --> 01:58:18.170
तीव्र पुरूषार्थ है ना !

300
01:58:24.619 --> 01:58:31.939
अभी समय तीव्र समीप आ रहा है ।

301
01:58:32.739 --> 01:59:11.539
समय में तीव्रता आ गई है लेकिन दुःख के अशान्ति के समय को समाप्त करने वाले , उन्हों को तो समय से भी तीव्र बनना ही है ।

302
01:59:17.420 --> 01:59:41.880
फिर भी अच्छे हैं , लगन है , पहुंच गये हो , उसकी मुबारक है ।

303
01:59:52.449 --> 01:59:55.649
अच्छा ।

304
01:59:55.649 --> 01:59:58.850
तीव्र पुरूषार्थी ?

305
01:59:58.850 --> 02:00:06.619
ठीक है , जो कहते हैं हाँ , वह हाथ उठाओ ।

306
02:00:06.619 --> 02:00:13.880
साधारण पुरूषार्थ नहीं , तीव्र पुरूषार्थ ?

307
02:00:17.140 --> 02:00:24.109
कि बीच बीच में साधारण पुरूषार्थ करेंगे ?

308
02:00:24.109 --> 02:00:34.569
साधारण नहीं सदा तीव्र पुरूषार्थ ।

309
02:00:43.199 --> 02:01:01.939
बस मालिकपन का नशा हर समय चेहरे से ही दिखाई दे ।

310
02:01:06.340 --> 02:01:14.800
मुख से भी ज्यादा चेहरा बोलता है ।

311
02:01:19.420 --> 02:01:28.109
तो बहुत अच्छा , अगले साल रिजल्ट देखेंगे ।

312
02:01:30.109 --> 02:01:33.140
अच्छा ।

313
02:01:33.140 --> 02:01:38.000
बैठ जाओ , बहुत-बहुत मुबारक हो ।

314
02:01:38.909 --> 02:03:14.340
धार्मिक विंग , सोशल विंग और ट्रांसपोर्ट विंग मीटिंग के लिए आये हैं :- समाज सेवा में कोई न कोई सेवा का साधन लोगों को देते हैं , कुछ न कुछ सेवा करते हैं ।

315
02:03:15.079 --> 02:03:35.819
तो समाज सेवा वाले यही लक्ष्य रखो जो भी आत्मायें सम्पर्क में आती हैं

316
02:03:37.310 --> 02:04:05.420
उनको कोई न कोई गुण , कोई न कोई ज्ञान की प्वाइंट , कोई न कोई खज़ाना , जो बाप से मिला है , वह देना है ।

317
02:04:05.420 --> 02:04:26.510
यह सोशल सेवा हर एक की करनी है , खाली हाथ कोई न जाए , कुछ लेकर ही जाये

318
02:04:26.970 --> 02:04:41.020
क्योंकि दाता के बच्चे हैं , कैसे भी लोगों को चाहे किसी साधन द्वारा ,

319
02:04:41.020 --> 02:04:57.369
चाहे डायरेक्ट कनेक्शन द्वारा लेकिन कुछ न कुछ देना है ।

320
02:05:01.939 --> 02:05:22.170
यह सोशल सेवा , आध्यात्मिक सेवा चारों ओर फैलानी है , चाहे किसी भी विधि से ,

321
02:05:27.710 --> 02:05:47.140
जो हर एक के मुख से निकले कि हमें बहुत अच्छी सेवा का साधन मिला ।

322
02:05:47.600 --> 02:05:52.619
बहुत अच्छी प्राप्ति कराई ।

323
02:05:55.539 --> 02:06:24.449
आजकल बहुत प्यासी भी हैं , तो कुछ न कुछ प्राप्ति कराके भरपूर बनाओ ।

324
02:06:28.569 --> 02:06:34.909
अच्छा ।

325
02:06:36.170 --> 02:06:44.739
एक बात जो बापदादा ने फिर से कही , लिस्ट आनी चाहिए ।

326
02:06:44.739 --> 02:06:51.649
एक भी विंग की लिस्ट नहीं आई है ।

327
02:06:57.539 --> 02:07:17.079
और उन्हों की जो आप लिस्ट लिखो , उसमें उनकी प्राप्ति का अनुभव भी शार्ट में साथ में हो ।

328
02:07:27.079 --> 02:07:35.140
जैसे यहाँ कहकर जाते हैं ना बहुत प्राप्ति हुई बहुत मिला ।

329
02:07:35.140 --> 02:07:44.279
लेकिन जो प्राप्ति हुई वह इकट्ठा रहा , उसको बढ़ाया ?

330
02:07:47.250 --> 02:08:02.399
बापदादा ने देखा है जो भी विंग्स है , चाहे ट्रांसपोर्ट का है चाहे धार्मिक है ।

331
02:08:03.199 --> 02:08:32.170
लेकिन जब प्रोग्राम करते हैं कनेक्शन में आते हैं , उनसे लगातार कनेक्शन में रखते रहें , वह नहीं होता है ।

332
02:08:33.539 --> 02:08:47.199
जब फिर प्रोग्राम होगा तब पत्र भेजेंगे , निमन्त्रण भेजेंगे , फिर से आओ ।

333
02:08:47.939 --> 02:09:08.399
बापदादा ने एक फारेन का समाचार सुना है , जो कॉल ऑफ टाइम का प्रोग्राम करते हैं ,

334
02:09:09.369 --> 02:09:35.649
उसमें जो भी आते हैं , अच्छा लगता है , जिज्ञासा उठती है , कनेक्शन होता है

335
02:09:36.170 --> 02:09:41.140
तो उन्हें रिलेशन में लाने के लिए समय प्रति समय लगातार हर सप्ताह कुछ न कुछ भेजते रहते हैं ।

336
02:09:41.140 --> 02:09:58.850
ऐसे आप पीठ नहीं करते हो , 6 मास , साल के बाद वह याद आ गया तो आ गया , कनेक्शन हो गया तो हो गया ।

337
02:09:58.850 --> 02:10:12.050
लेकिन हर एक की एड्रेस प्रमाण उनको कुछ न कुछ सप्ताह में भेजना चाहिए ,

338
02:10:14.050 --> 02:10:29.649
जिससे उन्हों की पालना होती रहे , बिना पालना के वृक्ष भी नहीं बड़ा होता ।

339
02:10:35.880 --> 02:10:39.479
तो यह करना चाहिए ।

340
02:10:39.479 --> 02:10:52.279
हर एक विंग को , सिर्फ प्रोग्राम नहीं , प्रोग्रेस भी उन्हों की करानी चाहिए ।

341
02:10:52.279 --> 02:10:56.909
नजदीक आते जायें ।

342
02:11:07.939 --> 02:11:15.199
और रिजल्ट अपने पास रखते रहो ।

343
02:11:16.279 --> 02:11:24.909
इस वर्ष में कितने नजदीक रिलेशन में आये ?

344
02:11:36.739 --> 02:11:40.279
समझा , सुना ना ।

345
02:11:41.310 --> 02:11:59.250
अच्छा है फारेन का रिजल्ट अच्छा है यह भी करते होंगे लेकिन बापदादा के पास रिजल्ट नहीं आई है ।

346
02:12:15.420 --> 02:12:26.800
बाकी अच्छा है जब यह वर्गो की सेवा हुई है ,

347
02:12:27.770 --> 02:12:37.079
तो कनेक्शन में बहुत आये हैं और परिवर्तन भी हुआ है ,

348
02:12:37.649 --> 02:12:52.170
पहले बुलाना पड़ता था अभी बिना बुलाये भी आने चाहते हैं , फर्क तो है ।

349
02:12:52.170 --> 02:13:01.770
लेकिन इसकी रिजल्ट सारे परिवार को पता होना चाहिए ।

350
02:13:01.770 --> 02:13:08.800
एक दो की रिजल्ट से उमंग आता है ।

351
02:13:08.800 --> 02:13:20.970
और एक का सुनके दूसरे को आता है , हम भी कर सकते हैं , हिम्मत भी आती है ।

352
02:13:22.970 --> 02:13:44.680
बाकी बापदादा खुश है कि वर्गो की डिपार्टमेंट बनने से भिन्न भिन्न प्रकार की भिन्न भिन्न वर्गो की सेवा बढ़ती जा रही है

353
02:13:46.050 --> 02:14:09.310
इसलिए सभी वर्ग वालों को सेवा की मुबारक भी है और आगे बढ़ने का और भी साधन करेंगे तो प्रत्यक्ष फल दिखाई देगा ।

354
02:14:15.539 --> 02:14:32.449
आखिर तो सभी वर्ग वाले मिलकरके कहें हम सब एक बाप के एक हैं ।

355
02:14:35.250 --> 02:14:49.649
इस विश्व की स्टेज पर एक है , एक मत हैं , एक के ही हैं ।

356
02:14:52.109 --> 02:14:56.000
यह आवाज फैले ।

357
02:14:57.199 --> 02:15:04.050
धार्मिक लोग भी कहें हम एक हैं ।

358
02:15:04.050 --> 02:15:07.819
एक के हैं ।

359
02:15:19.199 --> 02:15:23.140
बाकी सेवा की है उसकी मुबारक ।

360
02:15:23.140 --> 02:15:27.310
अच्छा ।

361
02:15:34.569 --> 02:16:19.600
कैड ग्रुप भी आया है :- इसमें ब्राह्मण भी हैं , फायदा उठाया है ?

362
02:16:28.909 --> 02:16:38.399
तो दिल वालों ने दिलाराम को तो पहचान लिया ।

363
02:16:38.399 --> 02:16:52.280
इसीलिए दिलाराम को पहचाना तो दिल खुश हो गई और अच्छा है

364
02:16:54.280 --> 02:17:12.510
जितना-जितना आप साथ वालों को अनुभवसुनायेंगे , उतना यह सेवा फैलती जायेगी ।

365
02:17:12.850 --> 02:17:17.250
क्योंकि प्रत्यक्ष प्रमाण है ना ।

366
02:17:17.540 --> 02:17:33.649
आप स्वयं ही प्रत्यक्ष प्रमाण है तो कोई भी प्रत्यक्ष प्रमाण देख करके जल्दी खुश हो जाते हैं ।

367
02:17:33.649 --> 02:17:36.739
हिम्मत आती है ।

368
02:17:38.049 --> 02:17:59.600
तो अपना अनुभव जो भी सम्पर्क में आये वा सम्पर्क करके भी फैलाते जाओ ।

369
02:18:03.250 --> 02:18:06.620
क्योंकि आवश्यकता तो है ।

370
02:18:06.620 --> 02:18:24.620
गरीबी बढ़ती जाती है और गरीबी के समय अगर सहज साधन मिल जाए तो सभी खुश होते हैं ।

371
02:18:26.620 --> 02:18:29.649
तो अच्छा है ।

372
02:18:29.649 --> 02:18:39.139
समय प्रति समय करते भी रहते हैं और आगे भी करते चलो ।

373
02:18:41.139 --> 02:18:44.850
अच्छा । मुबारक हो ।

374
02:18:47.479 --> 02:18:50.850
अच्छा

375
02:19:06.450 --> 02:19:37.250
ट्रेनिंग में आई हुई टीचर्स से :- ट्रेनिंग तो की , बहुत अच्छा किया

376
02:19:37.250 --> 02:19:59.819
लेकिन ट्रेनिंग करने के बाद दिल में स्टैम्प कितनी पक्की लगाई ?

377
02:20:03.250 --> 02:20:21.020
क्या सदा निर्विघ्न बन औरों को भी निर्विघ्न बनाती रहेंगी ?

378
02:20:21.020 --> 02:20:24.799
यह वायदा किया ?

379
02:20:26.799 --> 02:20:30.680
निर्विघ्न रहेंगी ?

380
02:20:30.680 --> 02:20:35.020
कि थोड़ा थोड़ा बीच में विघ्न आयेगा ?

381
02:20:35.709 --> 02:20:50.850
अच्छा आ भी जाए तो परिवर्तन करने की शक्ति विघ्न को ,

382
02:20:51.479 --> 02:21:08.110
समस्या को समाधान के रूप में परिवर्तन करने की शक्ति अनुभव करते हो ?

383
02:21:08.110 --> 02:21:37.420
जो समझते हैं कि परिवर्तन की शक्ति कार्य में लगाके बापदादा को या जिन टीचर्स ने सेवा की , उसको सबूत दिखायेंगे ऐसी हिम्मत रखने वाले हाथ उठाओ ।

384
02:21:39.420 --> 02:21:44.170
दिल का हाथ उठाया है ना !

385
02:21:44.969 --> 02:21:52.909
कुछ भी हो जाए , सी फादर ।

386
02:21:57.649 --> 02:22:06.620
औरों की विशेषता को देखना लेकिन फॉलो फादर ।

387
02:22:12.969 --> 02:22:18.110
अच्छा । कितने हैं ग्रुप में ?

388
02:22:21.940 --> 02:22:48.340
( 70 बहिने हैं ) तो आप सभी अपनी टीचर द्वारा मधुबन में रिजल्ट लिखते रहना , बार बार नहीं लिखना ,

389
02:22:48.340 --> 02:22:59.819
15 दिन में टीचर द्वारा ओ के लिखना , बस ।

390
02:23:00.969 --> 02:23:07.420
छोटा सा कार्ड भेजना , लम्बा पत्र नहीं भेजना ।

391
02:23:10.219 --> 02:23:25.309
सुनाया था ना - अगर कोई कमज़ोरी आ भी जाए तो सिर्फ ओ के के बीच में लाइन लगा देना ।

392
02:23:26.450 --> 02:23:34.850
तो यहाँ से फिर आपको याद दिलाते रहेंगे ।

393
02:23:36.850 --> 02:23:47.200
अभी 70 तो निर्विघ्न आत्मायें बन गई ना और निर्विघ्न बनायेंगी भी ।

394
02:23:47.200 --> 02:23:58.510
जहाँ भी जायेंगी वहाँ निर्विघ्न बन निर्विघ्न बनायेंगी ।

395
02:24:01.709 --> 02:24:03.940
है ना हिम्मत ?

396
02:24:03.940 --> 02:24:07.139
हिम्मत है ?

397
02:24:07.139 --> 02:24:10.110
अच्छा ।

398
02:24:10.110 --> 02:24:14.219
रिजल्ट देखना ।

399
02:24:15.250 --> 02:24:20.510
रिपोर्ट आती जायेगी ना तो पता पड़ता जायेगा ।

400
02:24:21.079 --> 02:24:26.799
अच्छा ।

401
02:24:49.020 --> 02:24:53.200
सब कुछ सुना ।

402
02:24:56.969 --> 02:25:07.250
जैसे सुनना सहज लगता है ना !

403
02:25:07.250 --> 02:25:34.909
ऐसे ही सुनने से परे स्वीट साइलेन्स की स्थिति भी जब चाहो

404
02:25:36.049 --> 02:26:21.600
जितना समय चाहो उतना समय मालिक होके , पहले विशेष है मन के मालिक , इसीलिए कहा जाता है , मन जीते जगतजीत ।

405
02:26:23.600 --> 02:27:26.799
तो अभी सुना , देखा , आत्मा राजा बन मन बुद्धि संस्कार को अपने कन्ट्रोल में कर सकते हो ?

406
02:27:32.739 --> 02:27:54.739
मन-बुद्धि-संस्कार तीनों के मालिक बन ऑर्डर करो स्वीट साइलेन्स ,

407
02:28:00.450 --> 02:28:27.370
तो अनुभव करो कि आर्डर करने से , अधिकारी बनने से तीनों ही आर्डर में रहते हैं ?

408
02:28:34.909 --> 02:28:47.420
अभी-अभी अधिकारी की स्टेज पर स्थित हो जाओ ।

409
02:33:05.770 --> 02:33:09.200
अच्छा ।

410
02:33:11.200 --> 02:33:59.479
चारों ओर के सदा स्वमानधारी , सत्यता के शक्ति स्वरूप , पवित्रता के सिद्धि स्वरूप ,

411
02:34:04.909 --> 02:34:50.219
सदा अचल अडोल स्थिति के अनुभवी स्व परिवर्तक और विश्व परिवर्तक ,

412
02:35:00.450 --> 02:35:33.370
सदा अधिकारी स्थिति द्वारा सर्व आत्माओं को बाप द्वारा अधिकार दिलाने वाले

413
02:35:36.000 --> 02:35:57.250
चारों तरफ के बापदादा के लकी और लवली आत्माओं को

414
02:35:59.250 --> 02:36:44.510
परमात्म यादप्यार और दिल की दुआयें स्वीकार हो और बापदादा का मीठे मीठे बच्चों को नमस्ते ।

