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आज बापदादा अपने चारों ओर के बेफिक्र बादशाहों के संगठन को देख रहे हैं ।

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इतनी बड़ी बादशाहों की सभा सारे कल्प में इस संगम के समय होती है ।

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स्वर्ग में भी इतनी बड़ी सभा बादशाहों की नहीं होगी ।

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लेकिन अब बापदादा सर्व बादशाहों की सभा को देख हर्षित हो रहे हैं ।

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दूर वाले भी दिल के नजदीक दिखाई दे रहे हैं ।

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आप सब नयनों में समाये हुए हो , वह दिल में समाये हुए हैं ।

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00:18:20.400 --> 00:18:29.650
कितनी सुन्दर सभा है ,

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सबके चेहरों पर आज के विशेष दिवस पर अव्यक्त स्थिति के स्मृति की झलक दिखाई दे रही है ।

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सबके दिल में ब्रह्मा बाप की स्मृति समाई हुई है ।

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आदि देव ब्रह्मा बाप और शिव बाप दोनों ही सर्व बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं ।

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आज तो सवेरे दो बजे से लेकर बापदादा के गले में भिन्न-भिन्न प्रकार की मालायें पड़ी हुई थी ।

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यह फूलों की मालायें तो कामन है ।

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हीरों की मालायें भी कोई बड़ी बात नहीं है

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लेकिन स्नेह के अमूल्य मोतियों की माला अति श्रेष्ठ है ।

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हर एक बच्चे के दिल में आज के दिन स्नेह विशेष इमर्ज रहा ।

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बापदादा के पास चार प्रकार की भिन्नभिन्न मालायें इमर्ज थी ।

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00:27:43.309 --> 00:28:38.220
पहला नम्बर श्रेष्ठ बच्चों की जो बाप समान बनने के श्रेष्ठ पुरूषार्थी बच्चे हैं ,

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ऐसे बच्चे माला के रूप में बाप के गले में पिरोये हुए थे ।

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पहली माला सबसे छोटी थी ।

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दूसरी माला - दिल के स्नेह समीप समान बनने के पुरूषार्थी बच्चों की माला ,

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00:30:56.109 --> 00:31:07.539
वह श्रेष्ठ पुरूषार्थी यह पुरूषार्थी ।

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तीसरी माला थी - जो बड़ी थी वह थी स्नेही भी ,

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00:32:02.279 --> 00:32:14.799
बाप की सेवा में साथी भी

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लेकिन कभी तीव्र पुरूषार्थी और कभी , कभी-कभी तूफानों का सामना ज्यादा करने वाली ।

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लेकिन चाहने वाले , सम्पन्न बनने की चाहना भी अच्छी रहती है ।

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चौथी माला थी उल्हनें वालों की ।

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00:34:46.570 --> 00:35:13.880
भिन्न-भिन्न प्रकार के बच्चों की मालायें अव्यक्त फरिश्ते फेस के रूप में मालायें थी ।

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00:35:21.199 --> 00:36:04.510
बापदादा भी भिन्न-भिन्न मालाओं को देख खुश भी हो रहे थे और स्नेह और सकाश साथ-साथ दे रहे थे ।

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00:36:11.710 --> 00:36:37.079
अभी आप सब अपने आपको सोचो मैं कौन ?

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00:36:43.019 --> 00:37:54.510
लेकिन चारों ओर के बच्चों में विशेष संकल्प वर्तमान समय दिल में इमर्ज है कि अब कुछ करना ही है ।

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यह उमंग-उत्साह मैजारिटी में संकल्प रूप में है ।

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स्वरूप में नम्बरवार है लेकिन संकल्प में है ।

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00:38:54.219 --> 00:39:27.250
बापदादा सभी बच्चों को आज के स्नेह के दिन , स्मृति के दिन ,

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समर्थी के दिन की विशेष दिल की दुआयें और दिल की बधाईयां दे रहे हैं ।

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आज का विशेष दिन स्नेह का होने कारण मैजारिटी स्नेह में खोये हुए हैं ।

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00:41:11.250 --> 00:41:48.570
ऐसे ही पुरूषार्थ में सदा स्नेह में खोये हुए रहो ।

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00:41:49.309 --> 00:42:17.599
लवलीन रहो तो सहज साधन है स्नेह , दिल का स्नेह ।

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बाप के परिचय की स्मृति सहित स्नेह ।

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00:42:38.340 --> 00:43:02.170
बाप के प्राप्तियों के स्नेह सम्पन्न स्नेह ।

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00:43:05.199 --> 00:43:44.449
स्नेह बहुत सहज साधन है क्योंकि स्नेही आत्मा मेहनत से बच जाती है ।

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स्नेह में लीन होने के कारण , स्नेह में खोये हुए होने के कारण किसी भी प्रकार की मेहनत

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00:44:28.400 --> 00:44:44.170
मनोरंजन के रूप में अनुभव होगी ।

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00:44:46.170 --> 00:45:28.280
स्नेही स्वतः ही देह के भान , देह के सम्बन्ध का ध्यान ,

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देह की दुनिया के ध्यान से ऊपर स्नेह में स्वतः ही लीन रहती ।

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दिल का स्नेह बाप के समीप का , साथ का , समानता का अनुभव कराता है ।

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00:47:03.769 --> 00:47:39.480
स्नेही सदा अपने को बाप की दुआओं के पात्र समझते हैं ।

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00:47:41.480 --> 00:47:57.019
स्नेह असम्भव को भी सहज सम्भव कर देता है ।

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सदा अपने मस्तक पर माथे पर बाप के सहयोग का , स्नेह का हाथ अनुभव करते हैं ।

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00:48:44.739 --> 00:48:54.340
निश्चयबुद्धि , निश्चिंत रहते हैं ।

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00:49:02.170 --> 00:49:26.510
आप सभी आदि स्थापना के बच्चों को आदि के समय का अनुभव है ,

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00:49:28.510 --> 00:49:51.480
अभी भी सेवा के आदि निमित्त बच्चों को अनुभव है

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00:49:51.480 --> 00:50:26.400
कि आदि में सभी बच्चों को बाप मिला , उस स्मृति से स्नेह का नशा कितना था !

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00:50:27.369 --> 00:50:47.369
नॉलेज तो पीछे मिलती लेकिन पहला-पहला नशा स्नेह में खोये हुए हैं ।

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00:50:49.369 --> 00:51:22.110
बाप स्नेह का सागर है तो मैजारिटी बच्चे आदि से स्नेह के सागर में खोये हुए हैं ,

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00:51:24.110 --> 00:51:44.280
पुरूषार्थ की रफ्तार में बहुत अच्छे स्पीड से चले हैं ।

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00:51:53.139 --> 00:52:12.170
लेकिन कोई बच्चे स्नेह के सागर में खो जाते हैं , कोई सिर्फ डुबकी लगाके बाहर आ जाते हैं ।

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00:52:17.539 --> 00:52:39.650
इसीलिए जितना खोये हुए बच्चों को मेहनत कम लगती उतनी उन्हों को नहीं ।

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00:52:44.000 --> 00:52:56.969
कभी मेहनत , कभी मुहब्बत , दोनों में रहते हैं ।

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00:52:56.969 --> 00:53:12.280
लेकिन जो स्नेह में लवलीन रहते हैं

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00:53:18.000 --> 00:53:37.539
वह सदा अपने को छत्रछाया के अन्दर रहने का अनुभव करते हैं ।

61
00:53:39.539 --> 00:53:56.800
दिल के स्नेही बच्चे मेहनत को भी मुहब्बत में बदल लेते हैं ।

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00:53:58.800 --> 00:54:39.139
उन्हों के आगे पहाड़ जैसी समस्या भी पहाड़ नहीं लेकिन रूई समान अनुभव होती है ।

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पत्थर भी पानी समान अनुभव होता है ।

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00:55:02.969 --> 00:55:24.170
तो जैसे आज विशेष स्नेह के वायुमण्डल में रहे

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00:55:27.650 --> 00:55:44.619
तो अनुभव किया मेहनत है या मनोरंजन हुआ !

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00:55:52.170 --> 00:55:58.219
आज तो स्नेह का सबको अनुभव हुआ ना !

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00:56:01.599 --> 00:56:06.449
स्नेह में खोये हुए थे ?

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00:56:06.449 --> 00:56:18.969
खोये हुए थे सभी !

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आज मेहनत का अनुभव हुआ ?

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00:56:24.739 --> 00:56:31.480
किसी भी बात की मेहनत का अनुभव हुआ ?

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00:56:31.480 --> 00:56:39.650
क्या , क्यों , कैसे का संकल्प आया ?

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00:56:46.050 --> 00:56:52.619
स्नेह सब भुला देता है ।

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00:56:57.539 --> 00:57:20.510
तो बापदादा कहते हैं सब बापदादा के स्नेह को भूलो नहीं ।

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00:57:20.510 --> 00:57:32.280
स्नेह का सागर मिला है , खूब लहराओ ।

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00:57:35.079 --> 00:57:44.800
जब भी कोई मेहनत का अनुभव हो ना ,

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00:57:44.800 --> 00:58:06.050
क्योंकि माया बीच-बीच में पेपर तो लेती है , लेकिन उस समय स्नेह के अनुभव को याद करो ।

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00:58:08.050 --> 00:58:21.420
तो मेहनत मुहब्बत में बदल जायेगी ।

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00:58:22.219 --> 00:58:27.309
अनुभव करके देखो ।

79
00:58:29.309 --> 00:58:37.650
क्या है , गलती क्या हो जाती है !

80
00:58:38.340 --> 00:58:52.280
उस समय क्या , क्यों … इसमें बहुत चले जाते हो ।

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00:58:54.280 --> 00:59:08.219
जो आया है वह जाता भी है लेकिन जायेगा कैसे ?

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00:59:08.510 --> 00:59:20.000
स्नेह को याद करने से मेहनत चली जायेगी

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00:59:23.940 --> 00:59:54.000
क्योंकि सभी को भिन्न-भिन्न समय पर बापदादा दोनों के स्नेह का अनुभव तो है ।

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00:59:54.000 --> 00:59:56.170
है ना अनुभव !

85
00:59:56.170 --> 01:00:05.599
कभी तो किया है ना , चलो सदा नहीं है कभी तो है ।

86
01:00:06.219 --> 01:00:16.800
उस समय को याद करो - बाप का स्नेह क्या है !

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01:00:16.800 --> 01:00:27.820
बाप के स्नेह से क्या-क्या अनुभव किया !

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01:00:31.480 --> 01:00:41.880
तो स्नेह की स्मृति से मेहनत बदल जायेगी

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01:00:43.880 --> 01:01:07.309
क्योंकि बापदादा को किसी भी बच्चे की मेहनत की स्थिति अच्छी नहीं लगती ।

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01:01:09.309 --> 01:01:17.539
मेरे बच्चे और मेहनत !

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01:01:23.820 --> 01:01:29.820
तो मेहनत मुक्त कब बनेंगे ?

92
01:01:30.449 --> 01:01:54.570
यह संगमयुग ही है जिसमें मेहनत मुक्त , मौज ही मौज में रह सकते हैं ।

93
01:02:02.510 --> 01:02:36.340
मौज नहीं है तो कोई न कोई बोझ बुद्धि में है , बाप ने कहा है बोझ मुझे दे दो ।

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01:02:39.820 --> 01:02:47.480
मैंपन को भूल ट्रस्टी बन जाओ ।

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01:02:47.480 --> 01:03:25.139
जिम्मेवारी बाप को दे दो और स्वयं दिल के सच्चे बच्चे बन खाओ , खेलो और मौज करो

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01:03:30.400 --> 01:03:47.480
क्योंकि यह संगमयुग सभी युग में से मौजों का युग है ।

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01:03:48.340 --> 01:04:03.539
इस मौजों के युग में भी मौज नहीं मनायेंगे तो कब मनायेंगे ?

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01:04:05.539 --> 01:04:24.170
बापदादा जब देखते हैं ना कि बच्चे बोझ उठाके बहुत मेहनत कर रहे हैं ।

99
01:04:25.599 --> 01:04:32.280
दे नहीं देते , खुद ही उठा लेते ।

100
01:04:43.139 --> 01:04:51.599
तो बाप को तो तरस पड़ेगा ना , रहम आयेगा ना ।

101
01:04:51.599 --> 01:05:01.650
मौजों के समय मेहनत !

102
01:05:05.539 --> 01:05:17.250
स्नेह में खो जाओ , स्नेह के समय को याद करो ।

103
01:05:20.800 --> 01:05:40.400
हर एक को कोई न कोई समय विशेष स्नेह की अनुभूति होती ही है , हुई है ।

104
01:05:40.400 --> 01:05:48.800
बाप जानता है हुई है लेकिन याद नहीं करते हो ।

105
01:05:48.800 --> 01:05:58.570
मेहनत को ही देखते रहते , उलझते रहते ।

106
01:06:02.969 --> 01:06:42.570
अगर आज भी अमृतवेले से अब तक दिल से बापदादा दोनों अथॉरिटी के स्नेह का अनुभव किया होगा

107
01:06:43.880 --> 01:07:07.139
तो आज के दिन को भी याद करने से स्नेह के आगे मेहनत समाप्त हो जायेगी ।

108
01:07:13.369 --> 01:07:58.449
अभी बापदादा इस वर्ष में हर बच्चे को स्नेह युक्त , मेहनत मुक्त देखने चाहते हैं ।

109
01:08:01.820 --> 01:08:21.020
मेहनत का नामनिशान दिल में नहीं रहे , जीवन में नहीं रहे ।

110
01:08:21.819 --> 01:08:25.140
हो सकता है ?

111
01:08:25.140 --> 01:08:28.279
हो सकता है ?

112
01:08:28.279 --> 01:08:44.619
जो समझते हैं करके ही छोड़ना है , हिम्मत वाले हैं वो हाथ उठाओ ।

113
01:08:45.770 --> 01:09:14.680
आज विशेष ऐसे हर बच्चे को बाप का विशेष वरदान है - मेहनत मुक्त होने का ।

114
01:09:16.680 --> 01:09:19.479
स्वीकार है ?

115
01:09:19.479 --> 01:09:21.649
है !

116
01:09:35.600 --> 01:09:42.510
फिर कुछ हो जाए तो क्या करेंगे !

117
01:09:42.510 --> 01:09:47.020
क्या क्यों तो नहीं करेंगे ना ?

118
01:09:47.710 --> 01:09:54.680
मुहब्बत के समय को याद करना ।

119
01:09:56.680 --> 01:10:05.939
अनुभव को याद करना और अनुभव में खो जाना ।

120
01:10:07.140 --> 01:10:11.649
आपका वायदा है ।

121
01:10:12.510 --> 01:10:18.800
बाप भी बच्चों से प्रश्न पूछते हैं ,

122
01:10:18.800 --> 01:10:59.199
कि आप सबका वायदा है कि हम बाप द्वारा 21 जन्मों के लिए जीवनमुक्त अवस्था का पद प्राप्त कर रहे हैं , करेंगे ही ,

123
01:10:59.199 --> 01:11:06.340
तो जीवनमुक्त में मेहनत होती है क्या ?

124
01:11:06.340 --> 01:11:15.369
21 जन्म में एक जन्म संगम का है ।

125
01:11:16.569 --> 01:11:27.250
आपका वायदा 21 जन्मों का है , 20 जन्मों का नहीं है ।

126
01:11:33.770 --> 01:11:56.510
तो अभी से मेहनत मुक्त अर्थात् जीवनमुक्त , बेफिक्र बादशाह ।

127
01:11:58.510 --> 01:12:19.600
अभी के संस्कार आत्मा में 21 जन्म इमर्ज रहेंगे ।

128
01:12:23.369 --> 01:12:34.000
तो 21 जन्म का वर्सा लिया है ना !

129
01:12:34.000 --> 01:12:39.020
या लेना है अभी ?

130
01:12:43.770 --> 01:13:00.569
तो अटेन्शन प्लीज , मेहनत मुक्त , सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना ।

131
01:13:00.569 --> 01:13:09.819
सिर्फ रहना नहीं , करना भी है ।

132
01:13:10.909 --> 01:13:20.510
तभी मेहनत मुक्त रहेंगे ।

133
01:13:20.510 --> 01:13:39.880
नहीं तो रोज कोई न कोई बोझ की बातें , मेहनत की बातें , क्या क्यों की भाषा में आयेंगी ।

134
01:13:44.050 --> 01:14:06.909
अभी समय की समीपता को देख रहे हो ।

135
01:14:10.109 --> 01:14:43.420
जैसे समय की समीपता हो रही है ऐसे आप सबका भी बाप के साथ समीपता का अनुभव बढ़ना चाहिए ना ।

136
01:14:44.569 --> 01:14:59.649
बाप से आपकी समीपता समय की समीपता को समाप्त करेगी ।

137
01:15:01.649 --> 01:15:29.600
क्या आप सभी बच्चों को आत्माओं के दुःख अशान्ति का आवाज कानों में नहीं सुनाई देता !

138
01:15:42.680 --> 01:15:54.619
आप ही पूर्वज भी हो , पूज्य भी हो ।

139
01:16:02.000 --> 01:17:07.479
तो हे पूर्वज आत्मायें , हे पूज्य आत्मायें , कब विश्व कल्याण का कार्य सम्पन्न करेंगे ?

140
01:17:18.109 --> 01:17:49.939
बापदादा ने समाचारों में देखा है , हर वर्ग वाले अपनी-अपनी मीटिंग करते हैं , प्लैन बनाते हैं

141
01:17:53.770 --> 01:18:06.449
कि विश्व कल्याण की गति को तीव्र कैसे करें ?

142
01:18:07.600 --> 01:18:34.619
प्लैन तो बहुत अच्छे बनाते हैं , लेकिन बापदादा पूछते हैं आखिर भी कब तक ?

143
01:18:37.079 --> 01:18:46.340
इसका उत्तर दादियां देंगी - आखिर कब तक ?

144
01:18:46.340 --> 01:18:56.170
पाण्डव देंगे - आखिर कब तक ?

145
01:18:59.649 --> 01:19:21.880
बाप की प्रत्यक्षता हो , यही सभी हर वर्ग के प्लैन बनाने में लक्ष्य रखते हैं ।

146
01:19:22.909 --> 01:19:37.199
लेकिन प्रत्यक्षता होगी दृढ़ प्रतिज्ञा से ।

147
01:19:48.109 --> 01:20:22.109
प्रतिज्ञा में दृढ़ता , कभी किसी कारण से वा बातों से दृढ़ता कम हो जाती है ।

148
01:20:30.449 --> 01:20:43.939
प्रतिज्ञा बहुत अच्छी करते हैं , अमृतवेले अगर आप सुन सको ना , बाप तो सुनते हैं ,

149
01:20:43.939 --> 01:20:56.619
आपके पास ऐसा अभी साइंस ने साधन नहीं दिया है जो सभी के दिल का आवाज सुन सको ।

150
01:20:58.619 --> 01:21:34.510
बापदादा सुनते हैं , वायदों की मालायें , संकल्प करने की बातें इतनी अच्छी-अच्छी दिल खुश करने वाली होती हैं

151
01:21:34.510 --> 01:21:44.279
जो बापदादा कहते वाह बच्चे वाह !

152
01:21:51.479 --> 01:21:59.939
सुनायें क्या क्या करते हो !

153
01:22:00.449 --> 01:22:14.800
जब कर्म में आते हो ना , मुरली तक भी 75 परसेन्ट ठीक होते हैं ।

154
01:22:16.800 --> 01:22:34.220
लेकिन जब कर्मयोग में आते हो उसमें फर्क आ जाता है ।

155
01:22:34.220 --> 01:22:54.680
कुछ संस्कार कुछ स्वभाव , स्वभाव और संस्कार सामना करते हैं ,

156
01:22:55.819 --> 01:23:11.939
उसमें प्रतिज्ञा दृढ़ के बजाए साधारण हो जाती है ।

157
01:23:13.939 --> 01:23:22.109
दृढ़ता की परसेन्टेज कम हो जाती है ।

158
01:23:31.420 --> 01:23:51.310
बापदादा एक खेल बच्चों का देख मुस्कराते हैं ।

159
01:23:55.310 --> 01:24:02.109
कौन सा खेल करते हो , बतायें क्या ?

160
01:24:04.109 --> 01:24:13.819
बतायें तब जब इस खेल को खत्म करो ।

161
01:24:13.819 --> 01:24:20.850
करेंगे , करेंगे ?

162
01:24:21.539 --> 01:24:27.250
आज तो स्नेह की शक्ति है ना !

163
01:24:31.600 --> 01:24:34.000
करेंगे ?

164
01:24:34.000 --> 01:24:36.399
हाथ उठाओ ।

165
01:24:36.399 --> 01:24:45.939
हाथ सिर्फ नहीं , दिल का हाथ उठाना , करना ही पड़ेगा ।

166
01:24:45.939 --> 01:24:54.800
फिर बापदादा थोड़ा…, थोड़ा-थोड़ा करेगा कुछ।

167
01:25:16.399 --> 01:25:18.220
बतायें ?

168
01:25:18.220 --> 01:25:21.649
पाण्डव बोलो , बतायें ?

169
01:25:21.649 --> 01:25:28.569
यह पहली लाइन बोलो बतायें ?

170
01:25:28.569 --> 01:25:31.939
बोलो ।

171
01:25:40.569 --> 01:25:43.939
करना पड़ेगा ।

172
01:25:50.909 --> 01:25:54.109
बतायें ?

173
01:25:57.079 --> 01:26:05.819
अगर हाँ है तो पहली लाईन हाथ उठाओ ।

174
01:26:06.800 --> 01:26:14.449
यह दो लाइन वाले हाथ उठाओ ।

175
01:26:15.420 --> 01:26:21.649
मधुबन वाले भी हाथ उठायें ।

176
01:26:23.649 --> 01:26:26.680
दिल का हाथ है ना ।

177
01:26:28.680 --> 01:26:31.479
अच्छा ।

178
01:26:31.479 --> 01:26:41.770
बापदादा को तो खेल देखने में रहम आता है , मजा नहीं आता है

179
01:26:53.140 --> 01:27:20.399
क्योंकि बापदादा देखते हैं बच्चे अपनी बात दूसरे के ऊपर रखने में बहुत होशियार हैं ।

180
01:27:26.800 --> 01:27:31.710
क्या खेल करते ?

181
01:27:32.449 --> 01:27:36.510
बातें बना देते हैं ।

182
01:27:36.510 --> 01:27:47.250
सोचते हैं कौन देखने वाला है !

183
01:27:49.250 --> 01:27:54.680
मैं जानूं मेरी दिल जाने ।

184
01:27:56.050 --> 01:28:02.850
बाप तो परमधाम में , सूक्ष्मवतन में बैठा है ।

185
01:28:08.340 --> 01:28:21.880
अगर किसको कहो कि यह नहीं करना चाहिए , तो खेल क्या करते हैं पता है ?

186
01:28:21.880 --> 01:28:33.140
हाँ हुआ तो है लेकिन … लेकिन जरूर डालते हैं ।

187
01:28:33.140 --> 01:28:35.600
लेकिन क्या ?

188
01:28:35.600 --> 01:29:01.649
ऐसा था ना , ऐसा किया ना , ऐसे होता है ना , तभी हुआ , मैंने नहीं किया , ऐसे हुआ तभी अभी इसने किया , तभी किया ।

189
01:29:01.649 --> 01:29:10.970
नहीं तो मैं नहीं करता , तो यह क्या हुआ ?

190
01:29:12.970 --> 01:29:22.569
अपनी महसूसता , रियलाइजेशन कम है ।

191
01:29:28.279 --> 01:29:42.680
अच्छा , मानों उसने ऐसा किया , तभी आपने किया , चलो बहुत अच्छा ।

192
01:29:42.680 --> 01:29:50.800
पहला नम्बर वह हुआ , दूसरा नम्बर आप हुए , ठीक है ।

193
01:29:51.420 --> 01:29:54.739
बापदादा यह भी मान लेते हैं ।

194
01:29:54.739 --> 01:30:03.310
आप पहला नम्बर नहीं है , दूसरा नम्बर हैं लेकिन

195
01:30:03.310 --> 01:30:17.020
अगर आप सोचते हो कि पहला नम्बर परिवर्तन करे तो मैं ठीक हूँगा , ठीक है ?

196
01:30:17.020 --> 01:30:21.199
यह समझते हैं ना उस समय ।

197
01:30:21.199 --> 01:30:25.479
मानो पहला नम्बर परिवर्तन करता है ।

198
01:30:26.800 --> 01:30:39.819
बापदादा और सभी पहले नम्बर वाले को कहते हैं आपकी गलती है , आपको परिवर्तन करना है , ठीक है ।

199
01:30:39.819 --> 01:30:56.109
अच्छा अगर पहले नम्बर वाले ने परिवर्तन किया , तो पहला नम्बर किसको मिलेगा ? आपका तो पहला नम्बर नहीं होगा ।

200
01:30:56.109 --> 01:31:02.970
परिवर्तन शक्ति में आपका पहला नम्बर नहीं होगा ।

201
01:31:02.970 --> 01:31:09.539
पहला नम्बर आपने उसको दिया तो आपका कौन सा नम्बर हुआ ?

202
01:31:10.909 --> 01:31:14.050
दूसरा नम्बर हुआ ना ।

203
01:31:14.050 --> 01:31:20.909
अगर आपको कहें दूसरा नम्बर हैं तो मंजूर करेंगे ।

204
01:31:20.909 --> 01:31:23.479
करेंगे ?

205
01:31:23.479 --> 01:31:33.939
कहेंगे नहीं , ऐसे था , वैसे था , कैसे था … यह भाषा बहुत खेल में आती है ।

206
01:31:33.939 --> 01:31:58.000
ऐसे वैसे कैसे यह खेल बन्द करके मुझे परिवर्तन होना है ।

207
01:31:58.449 --> 01:32:23.710
मैं परिवर्तन होके दूसरे को परिवर्तन करूँ , लेकिन अगर दूसरे को परिवर्तन नहीं कर सकते हो तो शुभ भावना , शुभ कामना तो रख सकते हो !

208
01:32:24.449 --> 01:32:30.680
वह तो आपकी अपनी चीज़ है ना !

209
01:32:33.199 --> 01:32:39.710
तो हे अर्जुन मुझे बनना है ।

210
01:32:44.050 --> 01:33:11.710
पहला विश्व के राज्यधारी लक्ष्मी-नारायण के समीप आपको आना है या दूसरे नम्बर वाले को ?

211
01:33:17.420 --> 01:33:26.850
बापदादा की इस वर्ष की यही आश है

212
01:33:26.850 --> 01:34:04.510
कि सभी ब्राह्मण आत्मायें , ब्रह्माकुमार ब्रह्माकुमारी जैसे यहाँ यह बैज लगाते हो ना , सभी लगाते हैं ना !

213
01:34:10.739 --> 01:34:24.850
यहाँ भी आते हो तो आपको बैज मिलता है ना , चाहे कागज का , चाहे सोने का , चाहे चांदी का ।

214
01:34:25.649 --> 01:34:48.220
तो जैसे यहाँ बैज लगाते हो वैसे दिल में , मन में यह बैज लगाओ , मुझे परिवर्तन होना है ।

215
01:34:49.199 --> 01:34:56.909
मुझे निमित्त बनना है ।

216
01:34:56.909 --> 01:35:12.109
परिवर्तन के कार्य में ब्रह्मा बाप समान पहले मैं ,

217
01:35:13.880 --> 01:35:22.000
दूसरी बातों में भले पीछे रहो , व्यर्थ बातों में ।

218
01:35:23.479 --> 01:35:32.170
लेकिन परिवर्तन में पहले मैं ।

219
01:35:33.369 --> 01:35:36.739
ठीक है ना !

220
01:35:36.739 --> 01:35:39.939
मंजूर है ?

221
01:35:44.279 --> 01:36:02.220
तो कल अमृतवेले बापदादा देखेगा , बापदादा को देरी नहीं लगती है , स्वीच आन हुआ तो सब वर्ल्ड दिखाई देती है ।

222
01:36:03.020 --> 01:36:15.140
तो कल अमृतवेले सभी बाप से मिलन मनायेंगे ना ।

223
01:36:15.140 --> 01:36:22.619
तो मिलन मनाते हुए यह बैज लगाना ।

224
01:36:22.619 --> 01:36:28.850
देखेंगे कौन बैज लगाता है प्रैक्टिकल में ।

225
01:36:28.850 --> 01:36:42.739
ऐसे नहीं , शो के लिए नहीं लगाना है , परिवर्तन होना ही है ।

226
01:36:44.739 --> 01:36:47.880
दृढ़ता है ना ।

227
01:36:47.880 --> 01:36:52.000
दृढ़ हैं ना !

228
01:36:52.619 --> 01:37:06.909
हाथ उठाते हैं ना सभी , तो बापदादा को थोड़ा सा लगता है पता नहीं करेंगे , या नहीं करेंगे ।

229
01:37:07.539 --> 01:37:31.420
यह भी अच्छा , यह हाथ उठाते हो तो एक सेकण्ड तो संकल्प अच्छा किया , लेकिन करके ही छोड़ना है ।

230
01:37:31.939 --> 01:37:41.770
मुझे बदलना है , बदलकर बदलाना है ।

231
01:37:43.770 --> 01:37:57.819
यह बदले , यह बात बदले , यह व्यक्ति बदले , यह सरकमस्टांश बदले , नहीं ।

232
01:37:57.819 --> 01:38:02.279
मुझे बदलना है ।

233
01:38:04.279 --> 01:38:24.399
बातें तो आयेंगी , आप ऊंचे जा रहे हो , ऊंचे स्थान पर समस्यायें भी तो ऊंची आती है ना !

234
01:38:32.739 --> 01:39:03.710
लेकिन जैसे आज नम्बरवार यथाशक्ति स्नेह के स्मृति का वायुमण्डल था ।

235
01:39:04.739 --> 01:39:43.939
ऐसे अपने मन में सदा स्नेह में लवलीन रहने का वायुमण्डल सदा इमर्ज रखो ।

236
01:39:57.649 --> 01:40:08.970
बापदादा के पास समाचार बहुत अच्छे अच्छे आते हैं ।

237
01:40:14.340 --> 01:40:20.279
संकल्प तक बहुत अच्छे हैं ।

238
01:40:22.279 --> 01:40:32.050
स्वरूप में आने में यथाशक्ति हो जाते हैं ।

239
01:40:52.220 --> 01:42:17.479
अभी दो मिनट के लिए सभी परमात्म स्नेह , संगमयुग के आत्मिक मौज की स्थिति में स्थित हो जाओ ।

240
01:44:38.449 --> 01:45:07.020
अच्छा - इसी अनुभव में बार-बार हर दिन में समय प्रति समय अनुभव करते रहना ।

241
01:45:07.939 --> 01:45:13.079
स्नेह को नहीं छोड़ना ।

242
01:45:13.880 --> 01:45:19.819
स्नेह में खो जाना सीखो ।

243
01:45:23.140 --> 01:45:28.510
अच्छा ।

244
01:45:30.510 --> 01:45:46.909
सेवा का टर्न गुजरात जोन का है :- गुजरात के कुमार उठो ।

245
01:46:11.539 --> 01:46:44.510
अच्छा है - कुमार का अर्थ ही है कि शरीर में शक्तिशाली , मन की शक्ति में भी शक्तिशाली

246
01:46:47.199 --> 01:47:01.079
और शरीर से भी हल्के , आत्मा में भी हल्के ।

247
01:47:02.220 --> 01:47:06.000
तो ऐसे कुमार हो ?

248
01:47:06.000 --> 01:47:11.199
हाथ हिलाओ , हैं ?

249
01:47:11.199 --> 01:47:16.170
कोई बोझ की रिपोर्ट तो नहीं आयेगी ।

250
01:47:16.170 --> 01:47:29.770
आज से गुजरात के यूथ की कोई रिपोर्ट नहीं आयेगी ना !

251
01:47:29.770 --> 01:47:33.079
ऐसा होगा ?

252
01:47:33.079 --> 01:47:37.939
रिपोर्ट नहीं आयेगी या आयेगी ?

253
01:47:37.939 --> 01:47:44.000
जो कहते हैं रिपोर्ट नहीं आयेगी वह हाथ उठाओ ।

254
01:47:48.970 --> 01:47:53.539
हाँ फोटो निकालो ।

255
01:47:55.310 --> 01:48:00.220
पक्का काम करना है ना ।

256
01:48:00.680 --> 01:48:03.199
अच्छा है ।

257
01:48:03.199 --> 01:48:13.880
बापदादा के पास एक यूथ ग्रुप का समाचार भी आया है ,

258
01:48:13.880 --> 01:48:29.600
अच्छा पुरूषार्थ किया है , हिम्मत अच्छी रखी है , प्रोग्राम की विधि भी अच्छी है ।

259
01:48:29.600 --> 01:48:42.970
अगर कोई और जोन वाले इस विधि को अपनाने चाहे

260
01:48:42.970 --> 01:48:50.850
तो बापदादा को अच्छा लगा है , प्रोग्राम जो बनाया है

261
01:48:52.050 --> 01:49:11.880
और अभी किया है , उसके लिए बापदादा की तरफ से अमरभव का वरदान है ।

262
01:49:16.850 --> 01:49:41.539
अभी सभी जो भी यूथ आये हैं , सभी को पहले मैं परिवर्तन में आगे कदम उठाऊंगा , यह मंजूर है ना ।

263
01:49:41.539 --> 01:49:45.880
पहले मैं या पहले यह ?

264
01:49:45.880 --> 01:49:56.399
पहले मैं वाला हाथ उठाओ देखो , आप अच्छी तरह से फोटो निकालो ।

265
01:49:57.420 --> 01:50:02.050
बापदादा को रिजल्ट देखनी है ना ।

266
01:50:02.050 --> 01:50:05.420
अच्छा है ।

267
01:50:06.109 --> 01:50:22.800
यूथ सारे विश्व विद्यालय की रिजल्ट को प्रत्यक्ष कर सकते हैं ।

268
01:50:23.250 --> 01:50:33.310
गवर्मेन्ट की प्राब्लम्स दूर कर सकते हैं , दोनों गवर्मेन्ट ।

269
01:50:34.340 --> 01:50:55.140
आलमाइटी गवर्मेन्ट भी निर्विघ्न देखने चाहती और आजकल की गवर्मेन्ट भी निर्विघ्न भारत को देखने चाहती ,

270
01:50:55.140 --> 01:51:00.850
लेकिन निमित्त यूथ को बनाने चाहती ।

271
01:51:03.250 --> 01:51:10.340
तो करके दिखाना है , अमर रहना है ।

272
01:51:10.340 --> 01:51:15.819
वायदे निभाने में भी अमर रहना ।

273
01:51:16.739 --> 01:51:32.800
बाकी पुरूषार्थ कर रहे हैं , संकल्प किया है , आगे भी करते और कराते रहना ।

274
01:51:33.310 --> 01:51:44.050
तो गुजरात के युवा आज से निर्विघ्न ।

275
01:51:44.050 --> 01:51:48.619
निर्विघ्न रहेंगे ना !

276
01:51:48.619 --> 01:51:51.250
बहुत अच्छा ।

277
01:51:59.310 --> 01:52:44.279
मातायें उठो :- अच्छा है , माताओं को वरदान है

278
01:52:46.279 --> 01:53:07.250
क्योंकि दुनिया वाले भी यही नवीनता देखते हैं कि मातायें विश्व परिवर्तक बन गई हैं ।

279
01:53:09.250 --> 01:53:36.909
तो मातायें सदा यह पाठ पक्का कर लो कि हमें सदैव शुभचिंतक और शुभचिंतन में रहना है ।

280
01:53:38.909 --> 01:53:42.800
रह सकती हो ?

281
01:53:42.800 --> 01:53:45.310
रहेंगे ?

282
01:53:45.310 --> 01:54:05.310
कोई भी आत्मा हो , लेकिन आप शुभचिंतक रहो और सदा शुभचिंतन , व्यर्थ चिंतन नहीं ।

283
01:54:07.310 --> 01:54:11.819
खराब चिंतन नहीं ।

284
01:54:12.739 --> 01:54:16.800
शुभचिंतन ।

285
01:54:17.600 --> 01:54:42.050
जो शुभचिंतन और शुभचिंतक है वही 21 जन्म के वर्से के अधिकारी बनते हैं ।

286
01:54:42.050 --> 01:54:52.449
तो याद रखना - दो शब्द शुभचिंतक और शुभचिंतन ।

287
01:54:53.310 --> 01:54:56.399
अच्छी संख्या है ।

288
01:54:56.399 --> 01:55:04.850
कभी पराचिंतन नहीं करना , व्यर्थ चिंतन भी नहीं करना ।

289
01:55:05.600 --> 01:55:09.020
यह रिजल्ट दिखायेंगी ।

290
01:55:23.770 --> 01:55:46.000
टीचर्स सभी अपने-अपने सेन्टर्स में यह गुजरात की वरदानों को वरदान है , यह पक्का कराना और रिजल्ट देना ।

291
01:55:46.680 --> 01:55:55.649
पराचिंतन बन्द , व्यर्थ चिंतन बन्द ।

292
01:55:55.649 --> 01:56:01.770
शुभचिंतन और शुभचिंतक ।

293
01:56:01.770 --> 01:56:21.649
हर आत्मा के प्रति , चाहे आपके पीछे ही पड़ा रहे , आपका उल्टा मित्र बना हआ हो ।

294
01:56:21.649 --> 01:56:32.449
तो भी शुभचिंतन , पक्का ।

295
01:56:32.449 --> 01:56:44.399
मातायें हाथ उठाओ आप टीचर्स रिजल्ट देखना , हर सप्ताह इस बात की रिजल्ट देखना ।

296
01:56:44.399 --> 01:56:48.850
देख सकती हैं ना ।

297
01:56:54.340 --> 01:57:00.000
अच्छा ।

298
01:57:01.539 --> 01:57:30.800
पाण्डव उठो :- पाण्डवों की संख्या भी कम नहीं है ।

299
01:57:33.369 --> 01:57:37.880
अच्छा पाण्डव क्या करेंगे !

300
01:57:38.170 --> 01:57:42.850
पाण्डवों का गायन क्या है ?

301
01:57:44.000 --> 01:57:57.479
पाण्डव सदा पाण्डवपति के साथ और साथी रहे हैं ।

302
01:57:58.340 --> 01:58:11.369
साथ भी रहे हैं , साथी भी रहे हैं इसीलिए पाण्डवों का टाइटिल क्या है ?

303
01:58:11.369 --> 01:58:14.220
विजयी पाण्डव ।

304
01:58:14.220 --> 01:58:18.569
विजय हो गई ना पाण्डवों की ।

305
01:58:18.569 --> 01:58:21.199
कारण ?

306
01:58:21.199 --> 01:58:29.369
परमात्मा साथ और साथी है ।

307
01:58:35.710 --> 01:58:52.050
तो आज से दिल से मन से बाप का साथ नहीं छोड़ना है ।

308
01:58:54.050 --> 01:59:03.250
साथ छोड़ते हैं तो माया आती है ।

309
01:59:04.050 --> 01:59:16.739
बाप का साथ छोड़ना अर्थात् माया के आने का फाटक खोलना ।

310
01:59:17.420 --> 01:59:21.819
जब दरवाजा खोलते हो तो वह आयेगी ना ।

311
01:59:21.819 --> 01:59:28.739
क्यों नहीं आयेगी , 63 जन्म की पुरानी है ना ।

312
01:59:28.739 --> 01:59:39.600
तो बाप को भूलो नहीं , भूलना माना माया का आना ।

313
01:59:41.310 --> 02:00:04.680
तो सदा साथ रहना है और सेवा में विश्व के परिवर्तन के कार्य में सदा साथी होके रहना है ।

314
02:00:04.680 --> 02:00:25.770
परमात्म कार्य के साथी , इसी में ही मन्सा वाचा कर्मणा अर्थात् चेहरे और चलन में साथी रहो ।

315
02:00:26.569 --> 02:00:29.369
पसन्द है ?

316
02:00:29.369 --> 02:00:35.479
साथ रहेंगे , साथी रहेंगे ?

317
02:00:35.710 --> 02:00:39.649
माया का दरवाजा बन्द ?

318
02:00:39.649 --> 02:00:46.279
डबल लॉक लगाया , सिंगल लॉक नहीं लगाना ।

319
02:00:46.279 --> 02:00:49.020
डबल लॉक ।

320
02:00:49.020 --> 02:01:01.020
निरन्तर सेवाधारी और निरन्तर याद ।

321
02:01:01.020 --> 02:01:06.569
यह डबल लॉक लगाना ।

322
02:01:08.000 --> 02:01:10.000
ठीक है ?

323
02:01:10.000 --> 02:01:13.310
पाण्डव भी निर्विघ्न ।

324
02:01:13.310 --> 02:01:21.600
निर्विघ्न , हाथ उठाओ ।

325
02:01:21.600 --> 02:01:25.880
दिल से हाथ उठा रहे हो ?

326
02:01:25.880 --> 02:01:33.710
जो दिल से उठा रहे हैं वह ज्यादा हिलाओ ।

327
02:01:37.420 --> 02:01:40.109
देखना टीचर्स ।

328
02:01:40.109 --> 02:01:43.369
हाथ उठा रहे हैं ।

329
02:01:43.369 --> 02:01:45.770
अच्छा है ।

330
02:01:45.770 --> 02:01:48.800
पड़ोसी हो ना गुजरात ।

331
02:01:48.800 --> 02:01:56.970
मधुबन के पड़ोसी हो , तो पड़ोसी तो कमाल करेंगे ना ।

332
02:01:56.970 --> 02:02:01.819
अच्छा ।

333
02:02:09.710 --> 02:02:54.569
टीचर्स और कुमारियां दोनों ही उठो :- जो भी कुमारियां हैं , वह बननी तो टीचर्स है ना ।

334
02:02:54.569 --> 02:02:57.539
कुमारियां क्या बननी है !

335
02:02:57.539 --> 02:03:00.970
टीचर्स तो बननी है ना ।

336
02:03:00.970 --> 02:03:07.250
इसलिए टीचर्स के साथ उठाया है ।

337
02:03:09.250 --> 02:03:26.449
नौकरी करनी भी पड़ती है तो भी बापदादा कहते हैं अगर टीचर वा विश्व सेवा का लक्ष्य है ,

338
02:03:26.449 --> 02:03:47.369
कुमारियों को तो भी हर शनिवार जब छुट्टी होती है तो सेन्टर पर रहना है ।

339
02:03:49.369 --> 02:04:02.850
लेकिन वहाँ सेवा करनी है , ऐसे ही नहीं रहना है ।

340
02:04:03.369 --> 02:04:08.619
सेवा का अभ्यास करना है ।

341
02:04:08.619 --> 02:04:27.880
तो थोड़ा हिसाब किताब है तो उसे पूरा करें , अगर आवश्यक हिसाब है तो , चल नहीं सकते हैं इसलिए नौकरी करते हैं तब तो फेल हैं ।

342
02:04:28.970 --> 02:04:43.880
सचमुच कोई कारण है , कईयों के सरकमस्टांश हैं लेकिन कईयों की दिल भी है ।

343
02:04:46.220 --> 02:04:52.800
शनिवार और इतवार सेवा करो ।

344
02:04:52.800 --> 02:04:59.479
इतवार के दिन पूरी सेवा करो ।

345
02:04:59.479 --> 02:05:02.449
संस्कार डालो ।

346
02:05:02.449 --> 02:05:08.619
सिर्फ रहने के संस्कार नहीं , सेवा के संस्कार डालो ।

347
02:05:08.619 --> 02:05:18.800
समझो मैं सर्विसएबुल बनने के कारण आई हूँ ।

348
02:05:19.710 --> 02:05:36.970
प्रैक्टिस करते रहो , जितना प्रैक्टिस करती रहेंगी ना , मजा आ जायेगा तो आपेही भी कोई बहाना बनाके अपने को छुड़ा सकेंगी ।

349
02:05:37.939 --> 02:05:46.970
कुमारियां चतुर होती हैं , भोलीभाली नहीं होती हैं ।

350
02:05:50.619 --> 02:06:04.909
इसीलिए कुमारियां अर्थात् स्व-उन्नति में हर समय कदम उठाती रहें ।

351
02:06:04.909 --> 02:06:21.479
सिर्फ नौकरी नहीं , स्व उन्नति में अपने सरकमस्टांश अनुसार कदम आगे बढ़ाती रहें ।

352
02:06:22.340 --> 02:06:35.880
ऐसे नहीं बस चल रही हैं , नौकरी करनी है , कब तक करेंगे , कब तक नहीं करेंगे , कुछ सोच नहीं ।

353
02:06:36.510 --> 02:06:44.000
कुमारियां ब्रह्माकुमारी तो हो ही ।

354
02:06:44.000 --> 02:06:47.479
सभी कुमारियां ब्रह्माकुमारी हैं ।

355
02:06:47.479 --> 02:07:04.970
सर्विस करने वाली भी ब्रह्माकुमारी है , लेकिन ब्रह्माकुमारी वह जो विश्व कल्याण की भावना , कामना रखे ।

356
02:07:07.649 --> 02:07:19.199
तो बापदादा देखेंगे कि कुमारियां योग्य टीचर बनी , खिटखिट वाली नहीं बनना ।

357
02:07:20.000 --> 02:07:31.140
योग्य टीचर , क्योंकि योग्य टीचर्स की आवश्यकता है ।

358
02:07:33.140 --> 02:07:54.000
आजकल क्या होता है , ट्रेनिंग भी कर लेती हैं , लेकिन सेन्टर पर जाते ही कोई प्राब्लम हो जाती , तो हैण्डस तो नहीं बन सकेंगी ना ।

359
02:07:54.000 --> 02:08:09.020
कुमारी अर्थात् बापदादा के सेवा साथी और निर्विघ्न साथी ।

360
02:08:09.020 --> 02:08:17.199
अपने को एडजेस्ट करने वाली ।

361
02:08:26.680 --> 02:08:45.199
एडजेस्ट करने वाली हो ना कि अगेन्स्ट होने वाली हो किसी के प्रति भी अगेन्स्ट नहीं हो , एडजस्ट हानेवाली ।

362
02:08:48.399 --> 02:08:55.420
अच्छा तो ऐसी कुमारियां बनेंगी , हाथ उठाओ ।

363
02:08:55.420 --> 02:08:58.909
एडजेस्ट होने वाली ।

364
02:08:58.909 --> 02:09:03.420
सोच के हाथ उठाओ ।

365
02:09:08.739 --> 02:09:12.399
तो सबसे मिलनसार ।

366
02:09:12.399 --> 02:09:20.619
सबसे अपने को साथी बनाने वाली ।

367
02:09:22.800 --> 02:09:26.680
निर्विघ्न ।

368
02:09:27.939 --> 02:09:33.649
तब तो बहुत हैण्डस बन सकते हैं ।

369
02:09:34.170 --> 02:09:45.819
अभी हैण्डस की कमी है , बापदादा सभी कुमारियों को कह रहा है ।

370
02:09:53.140 --> 02:09:58.170
मददगार बनेंगी ना ।

371
02:09:59.140 --> 02:10:06.800
जो मददगार बनेंगी वह हाथ उठाओ लेकिन कौन-सी मददगार !

372
02:10:06.800 --> 02:10:10.399
निर्विघ्न मददगार ।

373
02:10:10.619 --> 02:10:15.539
अभी उठाओ निर्विघ्न मददगार ?

374
02:10:21.369 --> 02:10:32.619
फिर इनएडवांस मुबारक हो, मुबारक हो,मुबारक हो।

375
02:10:50.739 --> 02:10:57.079
टीचर्स से :- टीचर्स भी गुजरात में बहुत हैं ।

376
02:10:59.079 --> 02:11:04.510
अभी टीचर्स को क्या करना है ?

377
02:11:08.000 --> 02:11:32.619
टीचर्स को अभी बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल फैलाना है ।

378
02:11:35.020 --> 02:12:00.850
चाहे सेन्टर पर , चाहे विश्व में विश्व में भी वैराग्य वृत्ति के वायुमण्डल की आवश्यकता है

379
02:12:00.850 --> 02:12:11.710
क्योंकि भ्रष्टाचार पापाचार बढ़ रहा है ।

380
02:12:13.710 --> 02:12:30.850
बिना वैराग्य वृत्ति के इन आत्माओं का कल्याण नहीं होगा ।

381
02:12:32.850 --> 02:12:44.739
जो सन्देश देने का कार्य कर रहे हो , अच्छा कर रहे हो ।

382
02:12:44.739 --> 02:13:05.479
बापदादा को पसन्द है लेकिन उससे सहयोगी बनते हैं , माइक बनते हैं ।

383
02:13:17.710 --> 02:13:41.710
आप जैसे बाप के वारिस बच्चे समर्पण बच्चे कम बनते हैं ।

384
02:13:45.649 --> 02:14:11.880
चारों ओर के सेन्टर्स पर वैराग्य वृत्ति की आवश्यकता है ।

385
02:14:12.909 --> 02:14:30.619
वैराग्य वृत्ति सिर्फ खाने पीने पहनने की नहीं , साधनों की नहीं ,

386
02:14:32.619 --> 02:14:59.479
लेकिन टोटल मानसिक वृत्ति , दृष्टि और कृति्ा , चारों ओर के जोन में

387
02:15:00.619 --> 02:15:24.510
अभी वैराग्य वृत्ति से उपराम , देहभान से उपराम वह अभी लहर चाहिए ।

388
02:15:27.420 --> 02:15:44.619
बेहद की वैराग्य वृत्ति पहले देह भान की वैराग्य वृत्ति ,

389
02:15:50.800 --> 02:16:12.279
देह की बातों से वैराग्य वृत्ति , देह की भावना , भाव , इससे वैराग्य वृत्ति चाहिए ।

390
02:16:15.539 --> 02:16:31.479
तो बापदादा चारों ओर के बच्चों को यह अटेन्शन खिंचवा रहे हैं

391
02:16:33.479 --> 02:17:03.250
कि तीव्रगति से चाहे ब्राह्मण , चाहे सहयोगी आत्माओं में श्रेष्ठ उन्नति तब होगी

392
02:17:03.250 --> 02:17:29.879
जब वैराग्य वृतति का वायुमण्डल स्वयं में और सर्व में फैलायेंगे तब आवाज फैलेगा ।

393
02:17:33.479 --> 02:17:57.079
सभी वर्ग वाले भी यही सोचते हैं प्रत्यक्षता करने चाहते हैं , प्रोग्राम भी बनाते हैं लेकिन अभी तक हुई नहीं है क्यों ?

394
02:18:02.399 --> 02:18:34.620
कारण है चारों ओर , चाहे पाप कर्म चाहे भ्रष्टाचार , चाहे बातों में , पोजीशन में वैराग्य वृत्ति नहीं है ।

395
02:18:40.280 --> 02:18:49.420
तो प्रत्यक्षता सहज नहीं हो सकती है ।

396
02:18:50.799 --> 02:19:34.340
तो अभी चारों ओर बेहद की वैराग्य वृत्ति , ब्रह्मा बाप को अन्त तक देखा कितनी बेहद की वैराग्य वृत्ति रही ।

397
02:19:42.680 --> 02:19:49.139
अपनी देह से भी वैराग्य वृत्ति ।

398
02:19:51.139 --> 02:19:56.969
बच्चों के सम्बन्ध में भी वैराग्य वृत्ति ।

399
02:20:09.079 --> 02:20:13.770
तो क्या करेंगे ?

400
02:20:19.479 --> 02:20:27.020
यही लक्ष्य लक्षण में लाना ।

401
02:20:27.709 --> 02:20:40.000
अच्छा । गुजरात वाले तो सेवा में सदा हाजिर होने वाले हैं ।

402
02:20:44.799 --> 02:20:56.969
वृद्धि भी सेवा की अच्छी है , संख्या भी अच्छी है ,

403
02:21:02.969 --> 02:21:19.020
अभी वारिस और माइक , ऐसे माइक निकालो जिसके आवाज का प्रभाव हो ।

404
02:21:19.020 --> 02:21:32.110
सबके मुख से निकले , यह कहता है , यह कहता है … कुछ तो होगा ।

405
02:21:35.600 --> 02:21:40.850
अच्छा , मुबारक हो सेवा की ।

406
02:21:40.850 --> 02:21:53.600
निर्विघ्न सेवा की इसकी बहुत-बहुत मुबारक ।

407
02:21:58.170 --> 02:22:41.420
डाक्टर्स ( मेडीकल ) और इंजीनियर विंग :- अच्छा ।

408
02:22:43.420 --> 02:22:51.649
दोनों ही वर्ग बहुत आवश्यक हैं ।

409
02:22:56.510 --> 02:23:09.709
बापदादा ने दोनों ही वर्गो के प्लैन सुने ।

410
02:23:15.479 --> 02:23:24.969
डाक्टर्स ने जो प्लैन बनाया है , अच्छा बनाया है ।

411
02:23:24.969 --> 02:23:28.739
बापदादा को पसन्द है ।

412
02:23:28.739 --> 02:23:42.850
मुबारक हो क्यों पसन्द है ?

413
02:23:42.850 --> 02:23:53.420
क्योंकि सब डिटेल क्लीयर रूप से बनाया है ।

414
02:23:53.420 --> 02:24:17.139
क्या करना है , किसको करना है , कब तक करना है , रिजल्ट क्या निकालनी है , यह सारा स्पष्ट रूप से बनाया है ।

415
02:24:22.340 --> 02:24:41.420
बापदादा जैसे गांव वालों ने , यूथ ग्रुप ने अपना क्लीयर बनाकरके और प्रैक्टिकल किया

416
02:24:41.420 --> 02:24:55.079
इसलिए बापदादा इन दोनों के प्लैन और प्रैक्टिकल में भी मुबारक देते हैं ,

417
02:24:55.079 --> 02:25:12.049
ऐसे ही डाक्टर्स ने भी जो अभी प्लैन बनाया है वह बहुत स्पष्ट बनाया है

418
02:25:14.049 --> 02:25:26.799
और हेल्थ का नाम सुन करके तो सभी इच्छुक होते ही हैं

419
02:25:28.280 --> 02:25:40.680
क्योंकि दिन प्रतिदिन नई नई बीमारियां तो निकल ही रही हैं , इलाज भी बहुत निकल रहे हैं

420
02:25:40.680 --> 02:25:49.649
तो बीमारियां भी बहुत निकल रही हैं और तंग हैं बीमारियों से ।

421
02:25:50.799 --> 02:26:01.879
तो यह प्लैन देख करके सेवा सहज हो सकती है ।

422
02:26:09.819 --> 02:26:14.850
तो अच्छी हिम्मत रखी है ।

423
02:26:17.819 --> 02:26:32.680
सभी सहयोगी भी अच्छे अच्छे आ गये हैं और चारों ओर आवाज फैलाने का प्लैन बनाया है , एक जोन का नहीं है ,

424
02:26:32.680 --> 02:26:59.600
सारे भारत का है , तो चारों ओर आवाज फैलने से अच्छा आवाज फैल जाता है ।

425
02:27:01.600 --> 02:27:04.399
मुबारक हो ।

426
02:27:04.399 --> 02:27:19.020
प्लैन को अभीप्रैक्टिकल करते चलो , सफलता आपका जन्म सिद्ध अधिकार है ।

427
02:27:35.139 --> 02:27:41.879
डाक्टर्स की संख्या भी बहुत है ।

428
02:27:42.799 --> 02:27:54.569
अगर सारे वर्ल्ड के डाक्टर्स इकट्ठे करें तो बहुत संख्या है ।

429
02:27:56.569 --> 02:27:59.600
काम में आयेंगे डाक्टर्स ।

430
02:27:59.600 --> 02:28:04.620
पिछाड़ी के समय आपको बहुत सेवा करनी पड़ेगी ।

431
02:28:04.620 --> 02:28:08.739
बहुत दुःख खत्म करने पड़ेंगे ।

432
02:28:08.739 --> 02:28:22.000
सब चिल्लायेंगे और आप तन और मन के डबल डाक्टर बनके सेवा करेंगे ।

433
02:28:26.219 --> 02:28:39.600
अच्छा । इन्जीनियर और साइंस :- दोनों ही डिपार्टमेंट बाढिया है

434
02:28:40.799 --> 02:29:02.170
तो ऐसा प्लैन बनाओ जिसमें जैसे साइंस प्रत्यक्ष एक्साम्प्ल दिखाती है ,

435
02:29:02.170 --> 02:29:14.450
ऐसे ही साइलेन्स पावर के प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाओ

436
02:29:18.969 --> 02:29:34.340
क्योंकि आजकल सुनने के बजाए , प्रमाण देखने चाहते हैं ।

437
02:29:36.969 --> 02:29:58.680
तो ऐसे कोई प्रमाण बनाओ , जैसे साइंस सिद्ध करके सुनाती है , साइन्स से यह प्रमाण है , फायदा हुआ है ,

438
02:29:58.909 --> 02:30:13.649
या परिवर्तन हुआ है , ऐसे आप भी साइलेन्स शक्ति के प्रत्यक्ष प्रमाण निकालो ।

439
02:30:15.649 --> 02:30:20.969
तो लोगों में आकर्षण होगी ।

440
02:30:23.600 --> 02:30:26.219
ठीक है ना ।

441
02:30:26.219 --> 02:30:34.969
अभी इस वर्ष में इस रूप का कोई प्लैन बनाओ ।

442
02:30:35.819 --> 02:30:38.909
बन सकता है , होशियार हो ।

443
02:30:38.909 --> 02:30:43.139
बना देंगे ।

444
02:30:45.139 --> 02:30:46.680
अच्छा ।

445
02:30:46.680 --> 02:30:49.079
फिर भी अच्छा है ।

446
02:30:49.079 --> 02:30:57.020
वर्गीकरण जबसे बने हैं , सेवा में वृद्धि तो हुई है ।

447
02:31:00.969 --> 02:31:04.280
अच्छा ।

448
02:31:08.850 --> 02:31:58.000
डबल विदेशी :- बापदादा को बहुत अच्छा लगता है

449
02:31:58.000 --> 02:32:15.940
कि विदेशियों ने चतुराई बहुत की है , हर टर्न में चांस लेते हैं ।

450
02:32:18.219 --> 02:32:25.709
और सभी कितने देशों से आये हैं !

451
02:32:25.709 --> 02:32:35.940
35 देशों से आ गये हैं ।

452
02:32:36.969 --> 02:32:43.600
तो 35 देशों का कल्याण तो हो रहा है ना ।

453
02:32:43.600 --> 02:32:53.200
जहाँ से आप आये हो उस देश का कल्याण तो हो रहा है ना ।

454
02:33:07.020 --> 02:33:16.799
तो यह टाइटल यथार्थ है ना , विश्व कल्याणकारी हैं ।

455
02:33:17.649 --> 02:33:21.420
कोई भी कोना रह नहीं जाये ।

456
02:33:21.420 --> 02:33:44.510
बापदादा ने समाचार सुना है कि विदेश में भी यही प्लैन बनाया है , कि कोई भी कोना सन्देश के बिना खाली नहीं रहे ।

457
02:33:46.510 --> 02:33:50.000
बनाया है ना ?

458
02:33:50.000 --> 02:33:53.139
बनाया है ।

459
02:34:05.540 --> 02:34:30.340
तो बाप के इस विश्व कल्याणी टाइटल को आपने अच्छा प्रैक्तिकल में लाया है ।

460
02:34:31.420 --> 02:34:48.680
पहले सिर्फ भारत कल्याणकारी था , अभी फलक से कहते हैं विश्व कल्याणकारी ।

461
02:34:49.770 --> 02:35:08.969
तो बाप का यह टाइटल विश्व कल्याणकारी का आप डबल विदेशियों ने प्रैक्टिकल में लाया है

462
02:35:10.969 --> 02:35:28.620
और विदेशी एक बात में चारों ओर होशियार हैं , बतायें कौन सी ?

463
02:35:28.620 --> 02:35:39.200
हमेशा विदेशी हाथ में हाथ देके चलते हैं ।

464
02:35:43.370 --> 02:35:47.139
आदत है ।

465
02:35:48.340 --> 02:36:01.370
तो डबल विदेशी बाप को हाथ में हाथ देकरके चलने वाले ।

466
02:36:01.370 --> 02:36:03.940
हैं ?

467
02:36:03.940 --> 02:36:07.879
हाथ में हाथ है ?

468
02:36:08.170 --> 02:36:11.020
हाथ कौन सा है ?

469
02:36:11.020 --> 02:36:15.309
निराकार को तो हाथ है नहीं ?

470
02:36:15.709 --> 02:36:24.399
निराकार का हाथ है श्रीमत ।

471
02:36:26.799 --> 02:36:37.770
तो श्रीमत पर हाथ में हाथ देकर चलने वाले हो ना ।

472
02:36:37.770 --> 02:36:43.020
कभी थक तो नहीं जाते हो हाथ में हाथ देने में ।

473
02:36:43.020 --> 02:36:44.969
थकते हो !

474
02:36:44.969 --> 02:36:48.739
थोड़ा-थोड़ा ?

475
02:36:52.399 --> 02:37:11.370
सदा बाप के श्रीमत रूपी हाथ में हाथ अर्थात् साथी सहयोगी बनने वाले ।

476
02:37:11.370 --> 02:37:19.770
जो बाप ने कहा वह किया ।

477
02:37:20.170 --> 02:37:22.850
ऐसे हो ना ?

478
02:37:22.850 --> 02:37:25.309
ऐसे हो ?

479
02:37:25.309 --> 02:37:31.709
सामने वाले ऐसे हो ?

480
02:37:31.709 --> 02:37:34.850
पक्का ?

481
02:37:34.850 --> 02:37:42.110
देखना , बापदादा पोतामेल देखेगा ना !

482
02:37:43.200 --> 02:37:56.399
बाप ने कहा बच्चे ने किया , वह है सुपात्र बच्चा ।

483
02:37:56.399 --> 02:38:12.049
सोचे नहीं , करूं नहीं करूं , यह तो नहीं होगा , वह तो नहीं होगा …

484
02:38:12.049 --> 02:38:24.739
बाप ने कहा मैंने किया , यह हैं पक्के वारिस ।

485
02:38:25.879 --> 02:38:33.420
सोचने वाले नहीं , करने वाले ।

486
02:38:33.420 --> 02:38:43.770
कई कहते हैं ना करेंगे , देखना करेंगे जरूर , नहीं ।

487
02:38:44.510 --> 02:39:09.649
तुरत कर्म , वह तो तुरत दान कहते हैं लेकिन यहाँ बापदादा कहते हैं तुरत हर कर्म में फॉलो करना महापुण्य है ।

488
02:39:12.510 --> 02:39:20.510
महापुण्य और पुण्य में भी फर्क है ।

489
02:39:24.680 --> 02:39:41.079
जैसे भक्ति में देखा है ना जब बालि चढाते हैं तो जो झाटकू होता है उसको महाप्रसाद कहा जाता है ,

490
02:39:41.879 --> 02:39:52.399
अगर सोच सोच के मरता है तो उसको महाप्रसाद नहीं कहा जाता है ।

491
02:39:58.399 --> 02:40:11.940
तो श्रीमत को फौरन फॉलो करना इसको कहा जाता है महापुण्य ।

492
02:40:14.799 --> 02:40:18.219
ठीक है ।

493
02:40:18.219 --> 02:40:24.280
समझदार तो बहुत हो ।

494
02:40:27.819 --> 02:40:37.200
अच्छा लगता है , यह सिन्धियों का ग्रुप भी अच्छा लगता है ।

495
02:40:40.049 --> 02:40:46.510
मधुबन का श्रृंगार हैं ना ।

496
02:40:52.569 --> 02:41:02.450
तो बहुत अच्छा है , तो डबल फारेनर्स डबल पुरूषार्थी ।

497
02:41:04.450 --> 02:41:19.250
आगे ग्रुप में वरदान दिया था डबल फारेनर्स का अर्थ ही है डबल पुरूषार्थी ।

498
02:41:20.510 --> 02:41:26.110
सोचने वाले पुरूषार्थी नहीं ।

499
02:41:30.799 --> 02:41:42.219
अच्छा , बाकी सेवा करते हो , जहाँ से भी आये हो , सेवा अच्छी कर रहे हो ,

500
02:41:43.250 --> 02:41:55.770
स्व पुरूषार्थ में भी अटेन्शन है और आगे तीव्र करना ।

501
02:41:57.020 --> 02:42:11.819
पुरूषार्थ है लेकिन तीव्र करना क्योंकि समय बहुत फास्ट जा रहा है ।

502
02:42:12.399 --> 02:42:17.600
अचानक कुछ भी हो सकता है ।

503
02:42:24.569 --> 02:42:27.770
अच्छा ।

504
02:42:27.770 --> 02:42:41.020
सभी को दुआयें भी हैं और दिल का यादप्यार भी है ।

505
02:43:00.969 --> 02:43:05.250
अच्छा ।

506
02:43:17.770 --> 02:43:52.969
चारों ओर के योगयुक्त , युक्तियुक्त , राज़युक्त , खुद भी राज़ को जान

507
02:43:53.649 --> 02:44:20.049
सदा राजी करने वाले और राजी रहने वाले , सिर्फ स्वयं राजी नहीं रहना है , राजी करना भी है ,

508
02:44:24.450 --> 02:44:42.170
ऐसे सदा स्नेह के सागर में लवलीन बच्चों को ,

509
02:44:44.620 --> 02:45:08.909
सदा बाप समान बनने के तीव्रगति के पुरूषार्थी बच्चों को ,

510
02:45:10.450 --> 02:45:36.450
सदा असम्भव को भी सहज सम्भव करने वाली श्रेष्ठ आत्माओं को ,

511
02:45:37.649 --> 02:46:04.620
सदा बाप के साथ रहने वाले और बाप की सेवा में साथी रहने वाले

512
02:46:06.620 --> 02:46:39.600
ऐसे बहुत-बहुत लक्की और लवली बच्चों को आज के अव्यक्त दिवस की ,

513
02:46:41.020 --> 02:46:56.850
अव्यक्त फरिश्ते स्वरूप की यादप्यार और दिल की दुआयें , अच्छा ।

514
02:47:10.340 --> 02:47:17.020
आज बहुत अच्छा वतन का दृश्य था ।

515
02:47:17.020 --> 02:47:39.819
आज बापदादा ने वतन में सभी एडवांस पार्टी वालों को बुलाया ।

516
02:47:44.170 --> 02:48:16.049
एडवांस पार्टी ने कहा कि हम सब एडवांस पार्टी वालों का एडवांस स्टेज वालों को यादप्यार देना ।

517
02:48:19.370 --> 02:48:28.110
तो आप एडवांस स्टेज वाले हो , वह एडवांस पार्टी वाले हैं ,

518
02:48:28.739 --> 02:49:25.420
तो आपको बहुत यादप्यार दिया और आज बापदादा ने काफी वर्ष अव्यक्त पार्ट चलाने के निमित्त दादी को और गुल्जार को , दोनों को अपने साथ बिठाया ।

519
02:49:25.940 --> 02:49:52.739
काफी वर्ष अव्यक्त पार्ट को हो गया है , व्यक्त की सेवा से भी अधिक अलौकिक पार्ट का चला है ।

520
02:49:53.200 --> 02:50:25.079
तो बापदादा ने आज दोनों को बहुत-बहुत स्नेह दिया और एडवांस पार्टी वालों ने बहुत स्वागत की ।

521
02:50:25.709 --> 02:50:53.079
बापदादा ने दोनों को बाहों का हार पहनाया , गले लगाया और दोनों के कार्य का सुनाया ।

522
02:50:53.479 --> 02:51:15.139
दादी के लिए कहा तो दादी ने परिवार और सेवा को , साथियों को , सभी को

523
02:51:15.139 --> 02:51:28.799
बहुत अच्छी तरह से चलाया , निमित्त बनी चलाने के और निमित्त समझके चलाया ।

524
02:51:29.819 --> 02:51:42.569
और गुल्जार बच्ची ने बापदादा को समाने का कार्य किया ।

525
02:51:42.569 --> 02:52:21.200
तो दोनों का कार्य विशेष रहा इसीलिए दोनों को विशेष वतन में स्वागत की और साथ में जो आदि से आदि रत्न दादियां कहो , उन्हों की भी स्वागत की ।

526
02:52:21.200 --> 02:52:44.340
बापदादा ने यही विशेषता सुनाई कि दोनों के कार्य में सफलता का कारण मैंपन नहीं ,

527
02:52:45.649 --> 02:53:07.940
गुल्जार बच्ची की भी महिमा की कि निर्मल निर्मान , सेवा के निमित्त बनी और समाने की शक्ति प्रमाण ,

528
02:53:07.940 --> 02:53:30.110
परमात्मा और आत्मा दोनों को ब्रह्मा बाप आत्मा और परमात्मा को समाने की शक्ति बाप द्वारा जो प्राप्त हुई , उसको कार्य में लगाया ।

529
02:53:31.139 --> 02:54:04.620
दादी को जो अन्त में हाथ में हाथ देके बापदादा ने विल पावर्स की विल की उस विल पावर से कार्य निर्विघ्न चलाया , तो दोनों की विशेषता कम नहीं हैं ।

530
02:54:05.020 --> 02:54:18.510
दोनों ने अपना अच्छा , अच्छे ते अच्छा पार्ट बजाया है और अभी भी पार्ट बजाते रहेंगे ।

531
02:54:18.510 --> 02:54:40.909
तो बापदादा कहते हैं कि जो विशेष कार्य के निमित्त बनते हैं उनको बापदादा की और ब्राह्मणों की बधाईयां जरूर मिलती हैं ।

532
02:54:40.909 --> 02:54:55.600
उनकी मुबारकें शुभ भावनायें , शुभ कामनायें बहुत मिलती हैं , तो दोनों का पार्ट अपना अपना रहा ।

533
02:54:55.600 --> 02:55:03.819
लेकिन सफल रहा , सफल रहेगा ।

534
02:55:03.819 --> 02:55:27.819
अव्यक्त पार्ट भी चल रहा है , चलता रहेगा और दादी का भी सकाश देने का , समय को समीप लाने का पार्ट अच्छा चलेगा

535
02:55:27.819 --> 02:55:50.049
और साथ में सभी दादियों को और दोनों के साथी बहिनें जो सेवा के निमित्त बनी , साथ में रही , बहुत अच्छा योगयुक्त हो सेवा की है , कर रही हैं

536
02:55:50.049 --> 02:56:11.479
उन्हों को भी बापदादा ने इमज र् किया और वरदान दिया - सदा ऐसे ही योगयुक्त राज़युक्त बनके चलते चलो ।

537
02:56:11.479 --> 02:56:29.879
बाप की दुआओं का हाथ आपके मस्तक पर है , ऐसे वहाँ वतन में सीन चली और सभी एडवांस पार्टी वाले

538
02:56:29.879 --> 02:56:38.680
और जो आदि रत्न सेवा साथी रहे हैं वह सभी इमर्ज थे ।

539
02:56:38.680 --> 02:56:51.709
उन्होंने दोनों के ऊपर आज वतन में सोने के पुष्प डाले ।

540
02:56:51.709 --> 02:56:57.649
देखा है , सोने के फूल देखे हैं ?

541
02:56:58.399 --> 02:57:05.709
बहुत हल्के होते हैं , भारी नहीं होते हैं जो लगें , दर्द करें , ऐसे नहीं होते हैं ।

542
02:57:05.709 --> 02:57:15.370
बहुत हल्के से पतरे के होते हैं लेकिन बहुत रंगबिरंगी अच्छी डिजाइन के होते हैं ,

543
02:57:15.370 --> 02:57:31.940
तो बापदादा ने आज दोनों के पार्ट की विशेषता सुनाते हुए सभी द्वारा सोने के पुष्पों की वर्षा कराई ।

544
02:57:31.940 --> 02:57:36.510
बापदादा ने दोनों को बहुत प्यार किया ।

545
02:57:37.250 --> 02:57:53.250
और दोनों बाबा बाबा कह रही थी , बाबा आपने कराया , बाबा आपने कराया , बाबा आपने कराया ऐसे ही गीत गा रहे थी ।

546
02:57:53.250 --> 02:57:58.739
यह था दृश्य आज वतन का ।

