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00:13:40.450 --> 00:14:57.019
आज बापदादा चारों ओर के अपने रॉयल्टी और पर्सनालिटी के परिवार को देख रहे हैं ।

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00:15:06.620 --> 00:15:51.879
यह रॉयल्टी वा रूहानी पर्सनालिटी का फाउण्डेशन है सम्पूर्ण प्युरिटी ।

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00:16:03.250 --> 00:17:04.000
प्युरिटी की निशानी सभी के मस्तक में , सभी के सिर पर लाइट का ताज चमक रहा है ।

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00:17:10.680 --> 00:17:59.480
ऐसे चमकते हुए ताजधारी रूहानी रॉयल्टी , रूहानी पर्सनालिटी वाले

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00:18:01.480 --> 00:18:41.250
सिर्फ आप ब्राह्मण परिवार ही हैं क्योंकि प्युरिटी को अपनाया है ।

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00:19:00.509 --> 00:19:54.799
आप ब्राह्मण आत्माओं की प्युरिटी का प्रभाव आदिकाल से प्रसिद्ध है ।

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00:19:59.819 --> 00:20:17.019
याद आता है अपना अनादि और आदिकाल !

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00:20:25.019 --> 00:21:39.650
याद करो अनादिकाल में भी आप प्युअर आत्मायें आत्मा रूप में भी विशेष चमकते हुए सितारे , चमकते रहते हैं

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00:21:40.450 --> 00:22:22.220
और भी आत्मायें हैं लेकिन आप सितारों की चमक सबके साथ होते भी विशेष चमकती है ।

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00:22:27.480 --> 00:23:07.309
जैसे आकाश में सितारे अनेक होते हैं लेकिन कोई कोई सितारे स्पेशल चमकने वाले होते हैं ।

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00:23:10.400 --> 00:23:54.170
देख रहे हो सभी अपने को , फिर आदिकाल में आपके प्युरिटी की रॉयल्टी और पर्सनालिटी कितनी महान रही है !

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00:24:02.220 --> 00:24:08.509
सभी पहुंच गये आदिकाल में ?

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00:24:08.509 --> 00:24:14.910
पहुंच जाओ ।

14
00:24:24.970 --> 00:24:56.170
चेक करो मेरी चमकने की रेखा कितनी परसेन्ट में है ?

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00:25:09.940 --> 00:26:09.420
आदिकाल से अन्तिम काल तक आपके प्युरिटी की रॉयल्टी , पर्सनालिटी सदा रहती है ।

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00:26:24.509 --> 00:27:07.140
अनादि काल का चमकता हुआ सितारा , चमकते हुए बाप के साथ-साथ निवास करने वाले ।

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00:27:22.740 --> 00:27:54.910
अभी-अभी अपनी विशेषता अनुभव करो ।

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00:28:05.369 --> 00:28:15.140
पहुंच गये सब अनादिकाल में ?

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00:28:26.109 --> 00:29:17.309
फिर सारे कल्प में आप पवित्र आत्माओं की रॉयल्टी भिन्न-भिन्न रूप में रहती है

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00:29:18.849 --> 00:30:09.539
क्योंकि आप आत्माओं जैसा कोई सम्पूर्ण पवित्र बने ही नहीं हैं ।

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00:30:13.079 --> 00:31:04.339
पवित्रता का जन्म सिद्ध अधिकार आप विशेष आत्माओं को बाप द्वारा प्राप्त है ।

22
00:31:24.450 --> 00:31:37.819
अभी आदिकाल में आ जाओ ।

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00:32:23.650 --> 00:33:24.799
अनादिकाल भी देखा , अब आदिकाल में आपके पवित्रता की रॉयल्टी का स्वरूप कितना महान है !

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00:33:29.880 --> 00:33:35.880
सभी पहुंच गये सतयुग में ।

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00:33:35.880 --> 00:33:38.910
पहुंच गये !

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00:33:38.910 --> 00:33:43.940
आ गये ?

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00:33:49.200 --> 00:34:07.250
कितना प्यारा स्वरूप देवता रूप है ।

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00:34:17.369 --> 00:34:49.650
देवताओं जैसी रॉयल्टी और पर्सनालिटी सारे कल्प में किसी भी आत्मा की नहीं है ।

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00:35:03.019 --> 00:35:28.909
देवता रूप की चमक अनुभव कर रहे हो ना !

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00:35:32.050 --> 00:36:02.679
इतनी रूहानी पर्सनालिटी , यह सब पवित्रता की प्राप्ति है ।

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00:36:15.139 --> 00:36:41.539
अभी देवता रूप का अनुभव करते मध्यकाल में आ जाओ ।

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00:36:59.250 --> 00:37:03.369
आ गये ?

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00:37:04.449 --> 00:37:14.909
आना अनुभव करना सहज है ना ।

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00:37:16.110 --> 00:37:22.679
तो मध्यकाल में भी देखो ,

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00:37:28.050 --> 00:37:59.820
आपके भक्त आप पूज्य आत्माओं की पूजा करते हैं , चित्र बनाते हैं ।

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00:38:07.369 --> 00:38:26.739
कितने रॉयल्टी के चित्र बनाते और कितनी रॉयल्टी से पूजा करते ।

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00:38:32.219 --> 00:38:44.219
अपना पूज्य चित्र सामने आ गया है ना !

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00:38:47.139 --> 00:38:59.199
चित्र तो धर्मात्माओं के भी बनते हैं ।

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00:39:05.369 --> 00:39:16.619
धर्म पिताओं के भी बनते हैं , अभिनेताओं के भी बनते हैं

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00:39:19.539 --> 00:40:09.480
लेकिन आपके चित्र की रूहानियत और विधि पूर्वक पूजा में फर्क होता है ।

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00:40:24.619 --> 00:40:49.710
तो अपना पूज्य स्वरूप सामने आ गया !

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00:41:11.539 --> 00:41:41.710
अच्छा फिर आओ अन्तकाल संगम पर , यह रूहानी ड्रिल कर रहे हो ना !

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00:41:41.710 --> 00:42:14.969
चक्कर लगाओ और अपने प्युरिटी का , अपनी विशेष प्राप्ति का अनुभव करो ।

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00:42:20.849 --> 00:42:56.570
अन्तिमकाल संगम पर आप ब्राह्मण आत्माओं का परमात्म पालना का , परमात्म प्यार का ,

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00:42:59.539 --> 00:43:29.820
परमात्म पढ़ाई का भाग्य आप कोटों में कोई आत्माओं को ही मिलता है ।

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00:43:32.679 --> 00:44:09.079
परमात्मा की डायरेक्ट रचना , पहली रचना आप पवित्र आत्माओं को ही प्राप्त होती है ।

47
00:44:11.599 --> 00:44:41.940
जिससे आप ब्राह्मण ही विश्व की आत्माओं को भी मुक्ति का वर्सा बाप से दिलाते हो ।

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00:44:47.309 --> 00:45:09.539
तो यह सारे चक्कर में अनादिकाल , आदिकाल , मध्यकाल और अन्तिमकाल

49
00:45:12.849 --> 00:45:36.849
सारे चक्र में इतनी श्रेष्ठ प्राप्ति का आधार पवित्रता है ।

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00:45:46.219 --> 00:46:25.079
सारा चक्कर लगाया अभी अपने को चेक करो , अपने को देखो , देखने का आइना है ना !

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00:46:25.079 --> 00:46:32.110
अपने को देखने का आइना है ?

52
00:46:32.110 --> 00:46:35.250
जिसको है वह हाथ उठाओ ।

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00:46:35.250 --> 00:46:42.400
आइना है , क्लीयर है आइना ?

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00:46:46.570 --> 00:47:19.539
तो आइने में देखो मेरी पवित्रता का कितना परसेन्ट है ?

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00:47:23.480 --> 00:47:54.909
पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं लेकिन ब्रह्माचारी ।

56
00:48:06.340 --> 00:48:30.570
मन-वचन-कर्म , सम्बन्ध-सम्पर्क सबमें पवित्रता है ?

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00:48:30.570 --> 00:48:35.940
कितनी परसेन्ट में है ?

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00:48:38.969 --> 00:48:43.769
परसेन्टेज निकालने आती है ना !

59
00:48:43.769 --> 00:48:50.449
टीचर्स को आती है ?

60
00:48:50.449 --> 00:48:54.050
पाण्डवों को आती है ?

61
00:48:56.510 --> 00:49:01.019
अच्छा होशियार हो ।

62
00:49:01.420 --> 00:49:04.849
माताओं को आती है ?

63
00:49:04.849 --> 00:49:07.599
आती है माताओं को ?

64
00:49:07.599 --> 00:49:09.599
अच्छा ।

65
00:49:22.619 --> 00:49:57.079
पवित्रता की परख है - वृत्ति , दृष्टि और कृति तीनों में चेक करो ,

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00:49:59.079 --> 00:50:22.449
सम्पूर्ण पवित्रता की जो वृत्ति होगी , वह आ गई ना बुद्धि में ।

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00:50:23.139 --> 00:51:06.340
सोचो , सम्पूर्ण पवित्रता की वृत्ति अर्थात् हर आत्मा के प्रति शुभभावना , शुभकामना ।

68
00:51:10.050 --> 00:51:15.019
अनुभवी हो ना !

69
00:51:20.050 --> 00:51:26.110
और दृष्टि क्या होगी ?

70
00:51:26.619 --> 00:51:35.710
हर आत्मा को आत्मा रूप में देखना ।

71
00:51:39.019 --> 00:51:49.769
आत्मिक स्मृति से बोलना , चलना ।

72
00:51:59.019 --> 00:52:02.219
शार्ट में सुना रहे हैं ।

73
00:52:02.219 --> 00:52:39.480
डिटेल तो आप भाषण कर सकते हैं और कृति अर्थात् कर्म में सुख लेना सुख देना ।

74
00:52:47.309 --> 00:53:15.250
यह चेक करो - मेरी वृत्ति , दृष्टि , कृति इसी प्रमाण है ?

75
00:53:22.800 --> 00:53:29.599
सुख लेना , दुःख नहीं लेना ।

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00:53:31.599 --> 00:53:37.420
तो चेक करो कभी दुःख तो नहीं ले लेते हो !

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00:53:37.420 --> 00:53:43.369
कभी कभी थोड़ा-थोड़ा ?

78
00:53:48.219 --> 00:53:53.710
दुःख देने वाले भी तो होते हैं ना ।

79
00:53:54.110 --> 00:54:05.880
मानों वह दुःख देता है तो क्या आपको उसको फॉलो करना है !

80
00:54:06.449 --> 00:54:12.110
फॉलो करना है कि नहीं ?

81
00:54:12.110 --> 00:54:16.510
फॉलो किसको करना है ?

82
00:54:16.510 --> 00:54:24.510
दुःख देने वाले को वा बाप को ?

83
00:54:27.820 --> 00:54:49.650
बाप ने , ब्रह्मा बाप ने निराकार की तो बात है ही , लेकिन ब्रह्मा बाप ने किसी बच्चे का दुःख लिया ?

84
00:54:53.309 --> 00:55:02.219
सुख दिया और सुख लिया ।

85
00:55:03.940 --> 00:55:16.849
फॉलो फादर है या कभी-कभी लेना ही पड़ता है ?

86
00:55:23.710 --> 00:55:39.369
नाम ही है दुःख , जब दुःख देते हैं , इनसल्ट करते हैं ,

87
00:55:41.369 --> 00:55:58.800
तो जानते हो कि यह खराब चीज़ है , कोई आपकी इनसल्ट करता है तो उसको आप अच्छा समझते हो ?

88
00:55:58.800 --> 00:56:03.820
खराब समझते हो ना !

89
00:56:05.079 --> 00:56:15.019
तो वह आपको दुःख देता है या इनसल्ट करता है ,

90
00:56:15.599 --> 00:56:26.849
तो खराब चीज़ अगर आपको कोई देता है , तो आप ले लेते हो ?

91
00:56:30.800 --> 00:56:34.000
ले लेते हो ?

92
00:56:34.000 --> 00:56:41.880
थोड़े समय के लिए , ज्यादा समय नहीं थोड़ा समय ?

93
00:56:42.510 --> 00:56:51.480
खराब चीज़ लेनी होती है ?

94
00:56:53.480 --> 00:57:01.769
तो दुःख या इनसल्ट लेते क्यों हो ?

95
00:57:02.340 --> 00:57:19.539
अर्थात् मन में फीलिंग के रूप में रखते क्यों हो ?

96
00:57:25.250 --> 00:57:34.969
तो अपने से पूछो हम दुःख लेते हैं ?

97
00:57:34.969 --> 00:57:48.449
या दुःख को परिवर्तन के रूप में देखते हैं ?

98
00:57:56.849 --> 00:58:02.400
क्या समझते हो पहली लाइन ।

99
00:58:04.400 --> 00:58:07.480
दुःख लेना राइट है ?

100
00:58:07.480 --> 00:58:10.000
है राइट ?

101
00:58:10.000 --> 00:58:13.769
मधुबन वाले राइट है ?

102
00:58:13.769 --> 00:58:17.369
थोड़ा थोड़ा ले लेना चाहिए ?

103
00:58:20.739 --> 00:58:27.880
पहली लाइन , दुःख ले लेना चाहिए ना !

104
00:58:27.880 --> 00:58:34.449
नहीं लेना चाहिए लेकिन ले लेते हो ।

105
00:58:35.420 --> 00:58:39.769
गलती से ले लेते हो ।

106
00:58:41.769 --> 00:58:59.710
यह दुःख की फीलिंग , परेशान कौन होता ?

107
00:59:08.969 --> 00:59:21.199
मन में किचड़ा रखा तो परेशान कौन होगा ?

108
00:59:22.679 --> 00:59:29.820
जहाँ किचड़ा होगा वहाँ ही परेशान होंगे ना !

109
00:59:36.510 --> 01:00:22.110
तो उस समय अपने रॉयल्टी और पर्सनालिटी को सामने लाओ और अपने को किस स्वरूप में देखो ?

110
01:00:26.219 --> 01:00:32.400
जानते हो आपका क्या टाइटल है ?

111
01:00:34.969 --> 01:00:51.880
आपका टाइटल है सहनशीलता की देवी , सहनशीलता का देव ।

112
01:01:02.449 --> 01:01:05.079
तो आप कौन हो ?

113
01:01:05.079 --> 01:01:14.909
सहनशीलता की देवियां हो , सहनशीलता के देव हो ?

114
01:01:17.820 --> 01:01:20.510
कि नहीं ?

115
01:01:21.309 --> 01:01:26.280
कभी-कभी हो जाते हैं ।

116
01:01:30.619 --> 01:01:44.739
अपना पोजीशन याद करो , स्वमान याद करो ।

117
01:01:49.940 --> 01:01:54.570
मैं कौन !

118
01:01:59.019 --> 01:02:04.570
यह स्मृति में लाओ ।

119
01:02:14.679 --> 01:02:36.050
सारे कल्प के विशेष स्वरूप की स्मृति को लाओ ।

120
01:02:47.940 --> 01:02:54.219
स्मृति तो आती है ना !

121
01:03:07.139 --> 01:03:47.710
बापदादा ने देखा कि जैसे मेरा शब्द को सहज याद में परिवर्तन किया है ।

122
01:03:48.849 --> 01:04:05.480
तो मेरा के विस्तार को समेटने के लिए क्या कहते हो ? मेरा बाबा ।

123
01:04:06.340 --> 01:04:19.480
जब भी मेरा मेरा आता तो मेरा बाबा में समेट लेते हो ।

124
01:04:19.480 --> 01:04:44.510
और बार-बार मेरा बाबा कहने से याद भी सहज हो जाती है और प्राप्ति भी ज्यादा होती है ।

125
01:04:46.510 --> 01:05:20.340
ऐसे ही सारे दिन में अगर किसी भी प्रकार की समस्या या कारण आता है ,

126
01:05:20.800 --> 01:05:32.000
उसके यह दो शब्द विशेष हैं - मैं और मेरा ।

127
01:05:38.340 --> 01:05:49.309
तो जैसे बाबा शब्द कहते ही मेरा शब्द पक्का याद हो गया है ।

128
01:05:49.309 --> 01:05:53.079
हो गया है ना ?

129
01:05:53.079 --> 01:06:02.219
सभी अभी बाबा बाबा नहीं कहते , मेरा बाबा कहते हैं ।

130
01:06:05.250 --> 01:06:14.739
ऐसे ही यह जो मैं शब्द है ,

131
01:06:16.739 --> 01:06:48.739
इसको भी परिवर्तन करने के लिए जब भी मैं शब्द बोलो तो अपने स्वमान की लिस्ट सामने लाओ ।

132
01:06:48.739 --> 01:06:53.309
मैं कौन ?

133
01:06:57.199 --> 01:07:17.539
क्योंकि मैं शब्द गिराने के निमित्त भी बनता और मैं शब्द स्वमान की स्मृति से ऊंचा भी उठाता है ।

134
01:07:20.340 --> 01:07:33.539
तो जैसे मेरा बाबा का अभ्यास हो गया है ,

135
01:07:34.800 --> 01:08:06.170
ऐसे ही मैं शब्द को बॉडीकान्सेसनेस की स्मृति के बजाए अपने श्रेष्ठ स्वमान को सामने लाओ ।

136
01:08:07.019 --> 01:08:44.909
मैं श्रेष्ठ आत्मा हूँ , तख्तनशीन आत्मा हूँ , विश्व कल्याणी आत्मा हूँ , ऐसे कोई न कोई स्वमान मैं से जोड़ लो ।

137
01:08:46.340 --> 01:08:57.020
तो मैं शब्द उन्नति का साधन हो जाए ।

138
01:08:57.020 --> 01:09:14.220
जैसे मेरा शब्द अभी मैजारिटी बाबा शब्द याद दिलाता है

139
01:09:18.800 --> 01:09:49.819
क्योंकि समय प्रकृति द्वारा अपनी चैलेन्ज कर रहा है ।

140
01:09:59.479 --> 01:10:19.819
समय की समीपता को कामन बात नहीं समझो ।

141
01:10:38.569 --> 01:11:20.000
अचानक और एवररेडी शब्द को अपने कर्मयोगी जीवन में हर समय स्मृति में रखो।

142
01:11:29.199 --> 01:12:07.020
अपने शान्ति की शक्ति का स्वयं प्रति भी भिन्न-भिन्न रूप से प्रयोग करो ।

143
01:12:08.279 --> 01:12:29.600
जैसे साइन्स अपना नया-नया प्रयोग करती रहती है ।

144
01:12:34.220 --> 01:12:54.569
जितना स्व के प्रति प्रयोग करने की प्रैक्टिस करते रहेंगे

145
01:12:55.479 --> 01:13:19.250
उतना ही औरों प्रति भी शान्ति की शक्ति का प्रयोग होता रहेगा ।

146
01:13:22.569 --> 01:14:09.819
अभी विशेष अपने शक्तियों की सकाश चारों ओर फैलाओ ।

147
01:14:15.020 --> 01:15:02.800
जब आपकी प्रकृति सूर्य की शक्ति , सूर्य की किरणें अपना कार्य कितने रूप से कर रहा है ।

148
01:15:04.800 --> 01:15:14.569
पानी बरसाता भी है , पानी सुखाता भी है ।

149
01:15:15.770 --> 01:15:32.619
दिन से रात , रात से दिन करके दिखाता है ।

150
01:15:37.369 --> 01:16:11.939
तो क्या आप अपने शक्तियों की सकाश वायुमण्डल में नहीं फैला सकते ?

151
01:16:19.880 --> 01:17:00.000
आत्माओं को अपनी शक्तियों की सकाश से दुःख अशान्ति से नहीं छुड़ा सकते !

152
01:17:00.000 --> 01:17:11.880
ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो ।

153
01:17:12.220 --> 01:17:20.050
किरणें फैलाओ , सकाश फैलाओ ।

154
01:17:24.399 --> 01:18:02.000
जैसे स्थापना के आदिकाल में बापदादा के तरफ से अनेक आत्माओं को

155
01:18:08.449 --> 01:18:30.109
सुख-शान्ति की सकाश मिलने का घर बैठे अनुभव हुआ ।

156
01:18:32.850 --> 01:18:41.880
संकल्प मिला जाओ ।

157
01:18:50.340 --> 01:19:42.109
ऐसे अब आप मास्टर ज्ञान सूर्य बच्चों द्वारा सुख-शान्ति की लहर फैलाने की अनुभूति होनी चाहिए ।

158
01:19:45.199 --> 01:20:04.739
लेकिन वह तब होगी , इसका साधन है मन की एकाग्रता ।

159
01:20:06.739 --> 01:20:15.140
याद की एकाग्रता ।

160
01:20:31.939 --> 01:21:07.079
एकाग्रता की शक्ति को स्वयं में बढ़ाओ ।

161
01:21:15.310 --> 01:21:44.680
जब चाहो जैसे चाहो जब तक चाहो तब तक मन को एकाग्र कर सको ।

162
01:21:52.680 --> 01:22:32.109
अभी मास्टर ज्ञान सूर्य के स्वरूप को इमर्ज करो और शक्तियों की किरणें , सकाश फैलाओ ।

163
01:22:34.340 --> 01:23:17.420
बापदादा ने सुना और खुश है कि बच्चे सेवा के उमंग-उत्साह में जगह-जगह पर सेवा अच्छी कर रहे हैं ,

164
01:23:17.770 --> 01:23:33.710
बापदादा के पास सेवा के समाचार सब तरफ के अच्छे अच्छे पहुंचे हैं ,

165
01:23:33.710 --> 01:23:49.079
चाहे प्रदर्शनी करते हैं ,

166
01:23:49.770 --> 01:24:15.079
चाहे समाचार पत्रों द्वारा , टी वी द्वारा सन्देश देने का कार्य बढ़ाते जाते हैं ।

167
01:24:16.399 --> 01:24:27.020
सन्देश भी पहुंचता है , सन्देश अच्छा पहुंचा रहे हो ।

168
01:24:29.020 --> 01:24:43.710
गांव में भी जहाँ रहा हुआ है , हर एक जोन अच्छा अपनी अपनी एरिया को बढ़ा रहा है ।

169
01:24:48.399 --> 01:25:10.000
अखबारों द्वारा टी वी द्वारा भिन्न भिन्न साधनों द्वारा उमंग उत्साह से कर रहे हो ।

170
01:25:10.000 --> 01:25:32.399
उसकी सब करने वाले बच्चों को बापदादा बहुत स्नेहयुक्त दुआओं भरी मुबारक दे रहे हैं ।

171
01:25:35.250 --> 01:25:49.880
लेकिन अभी सन्देश देने में तो अच्छा उमंग-उत्साह है

172
01:25:50.449 --> 01:26:03.479
और चारों ओर ब्रह्माकुमारीज क्या है ,

173
01:26:03.479 --> 01:26:10.850
बहुत अच्छा शक्तिशाली कार्य कर रही हैं ,

174
01:26:10.850 --> 01:26:21.539
यह भी आवाज अच्छा फैल रहा है और बढ़ता जा रहा है ।

175
01:26:22.739 --> 01:26:28.510
लेकिन , लेकिन सुनायें क्या ?

176
01:26:28.510 --> 01:27:06.800
सुनायें लेकिन … लेकिन ब्रह्माकुमारियों का बाबा कितना अच्छा है , वह आवाज अभी बढ़ना चाहिए ।

177
01:27:08.279 --> 01:27:42.109
ब्रह्माकुमारियां अच्छा काम कर रही हैं लेकिन कराने वाला कौन हैं , अभी यह प्रत्यक्षता आनी चाहिए ।

178
01:27:49.250 --> 01:28:12.170
बाप आया है , यह समाचार मन तक पहुंचना चाहिए ।

179
01:28:17.539 --> 01:28:21.649
इसका प्लैन बनाओ ।

180
01:28:21.649 --> 01:28:44.510
बापदादा से बच्चों ने प्रश्न पूछा कि वारिस या माइक किसको कहें ?

181
01:28:48.800 --> 01:29:42.109
माइक निकले भी हैं , लेकिन बापदादा माइक अभी के समय अनुसार ऐसा चाहते हैं या आवश्यक है जिसके आवाज की महानता हो ।

182
01:29:44.109 --> 01:29:58.909
अगर साधारण बाबा शब्द बोल भी देते हैं , अच्छा करते हैं इतने तक भी लाया है ,

183
01:29:58.909 --> 01:30:26.850
तो बापदादा मुबारक देते हैं लेकिन अभी ऐसे माइक चाहिए जिनके आवाज की भी लोगों तक वैल्यु हो ।

184
01:30:33.420 --> 01:30:49.199
ऐसे प्रसिद्ध हो , प्रसिद्ध का मतलब यह नहीं कि श्रेष्ठ मर्तबे वाला हो

185
01:30:49.199 --> 01:31:10.449
लेकिन उसका आवाज सुनकर समझें कि यह कहने वाला जो कहता है , इसकी आवाज में वैल्यु है ।

186
01:31:10.449 --> 01:31:20.739
अगर यह अनुभव से कहता है , तो उसकी वैल्यु हो ।

187
01:31:22.739 --> 01:31:39.819
जैसे माइक तो बहुत होते हैं लेकिन माइक भी कोई पावर वाला कितना होता है , कोई कितना होता है ,

188
01:31:40.449 --> 01:31:59.140
ऐसे ही ऐसा माइक ढूंढो , जिसकी आवाज में शक्ति हो ।

189
01:32:01.140 --> 01:32:19.479
उसकी आवाज को सुनकर समझ में आवे कि यह अनुभव करके आया है

190
01:32:19.479 --> 01:32:47.420
तो अवश्य कोई बात है लेकिन फिर भी वर्तमान समय हर जोन , हर वर्ग में माइक निकले जरूर हैं ।

191
01:32:49.420 --> 01:33:04.970
बापदादा यह नहीं कहते कि सेवा का प्रत्यक्ष रिजल्ट नहीं निकली है , निकली है ।

192
01:33:06.970 --> 01:33:35.020
लेकिन अभी समय कम है और सेवा के महत्व वाली आत्मायें अभी निमित्त बनानी पड़ेंगी ।

193
01:33:38.510 --> 01:33:44.739
जिसके आवाज की वैल्यु हो ।

194
01:34:03.939 --> 01:34:19.649
मर्तबा भले नहीं हो लेकिन उनकी प्रैक्टिकल लाइफ और प्रैक्टिकल अनुभव की अथॉरिटी हो ।

195
01:34:19.649 --> 01:34:29.140
उनके बोल में अनुभव की अथॉरिटी हो ।

196
01:34:38.680 --> 01:34:44.569
समझा कैसा माइक चाहिए ?

197
01:34:48.619 --> 01:34:53.420
वारिस को तो जानते ही हो ।

198
01:34:53.770 --> 01:35:24.170
जिसके हर श्वांस में , हर कदम में बाप और कर्तव्य और साथ-साथ

199
01:35:25.310 --> 01:35:41.369
मन-वचन-कर्म , तन-मन-धन सबमें बाबा और यज्ञ समाया हुआ हो ।

200
01:35:48.000 --> 01:35:53.649
बेहद की सेवा समाई हुई हो ।

201
01:35:56.050 --> 01:36:01.880
सकाश ने की समर्थी हो ।

202
01:36:14.220 --> 01:36:37.420
अच्छा - अभी किसका टर्न है ?

203
01:36:55.420 --> 01:37:15.479
तामिलनाडु , ईस्टर्न और नेपाल :- तो पहले कौन ?

204
01:37:18.050 --> 01:37:26.800
निमित्त बंगाल , बंगाल वाले उठो ।

205
01:37:58.399 --> 01:38:02.000
अच्छा ।

206
01:38:10.340 --> 01:38:22.109
बंगाल वालों ने सेवा का चांस लिया है ।

207
01:38:23.479 --> 01:39:00.970
तो इन थोड़े दिनों में अपने आपको देखा कि कर्मणा सेवा द्वारा यज्ञ सेवा के महत्व को जान ,

208
01:39:02.569 --> 01:39:20.000
अपने अन्दर यज्ञ सेवा का पुण्य का खाता कितना जमा किया ?

209
01:39:21.649 --> 01:39:36.220
सेवा तो वहाँ भी करते रहते हो लेकिन यज्ञ सेवा का महत्व अपना है ।

210
01:39:37.199 --> 01:40:05.020
तो डबल सेवा की , एक कर्मणा सेवा की और दूसरी सेवा से वायुमण्डल शक्तिशाली बनाया , सन्तुष्ट करने का बनाया ,

211
01:40:05.020 --> 01:40:23.020
उसका भी डबल पुण्य यज्ञ सेवा का प्रत्यक्षफल भी खाया , खुशी हुई ना ।

212
01:40:23.020 --> 01:40:27.939
खुश रहे ना बहुत सभी ।

213
01:40:27.939 --> 01:40:41.939
तो खुशी का प्रत्यक्षफल भी मिला और भविष्य भी जमा हुआ , डबल प्राप्ति की ।

214
01:40:42.510 --> 01:40:52.850
क्योंकि सब देख करके खुश होते हैं कि कितनी निर्विघ्न सेवा हो रही है ।

215
01:40:53.710 --> 01:40:57.880
कितने स्नेह से सेवा हो रही है ।

216
01:40:57.880 --> 01:41:13.199
यह वायुमण्डल फैलाना वा निमित्त बनना इसका भी बड़ा पुण्य मिलता है ।

217
01:41:15.199 --> 01:41:34.850
तो जिसको भी चांस मिलता है वह यही समझे विशेष पुण्य का खाता जमा करने का चांस मिलाहै ।

218
01:41:35.710 --> 01:41:38.399
तो जमा किया ?

219
01:41:38.399 --> 01:41:45.140
हाथ हिलाओ ।

220
01:41:47.140 --> 01:41:54.340
वर्तमान भी जमा भविष्य में भी जमा ।

221
01:41:55.420 --> 01:42:07.140
यह साधन है डबल फल प्राप्त करने का ।

222
01:42:09.140 --> 01:42:14.340
अच्छा है ।

223
01:42:17.079 --> 01:42:26.909
तो बंगाल वालों ने कोई नवीनता दिखाई ?

224
01:42:26.909 --> 01:42:31.079
कोई नया कार्य किया है ?

225
01:42:31.079 --> 01:42:35.420
कोई इन्वेन्शन की है ?

226
01:42:35.420 --> 01:42:42.449
की है ?

227
01:42:47.369 --> 01:43:07.140
क्योंकि बंगाल में बाप की पधरामणी हुई है , प्रवेशता हुई है ।

228
01:43:08.449 --> 01:43:21.079
तो नया कार्य करना है ना !

229
01:43:21.710 --> 01:43:47.369
कोई नई इन्वेन्शन निकालो , बापदादा ने पहले भी कहा कि अभी यह जो सेवा कर रहे हो , अच्छी कर रहे हो , बापदादा ने मुबारक दी लेकिन अभी कुछ नया निकालो ।

230
01:43:48.619 --> 01:43:58.170
किसी भी जोन ने नया कोई प्लैन बनाया है ?

231
01:43:58.170 --> 01:44:01.649
किसी ने भी ?

232
01:44:03.649 --> 01:44:07.140
कि वही रिपीट कर रहे हैं ?

233
01:44:09.140 --> 01:44:13.079
फारेन वालों ने कुछ नया निकाला ?

234
01:44:13.649 --> 01:44:24.050
सेवा का साधन कोई नया निकालो ।

235
01:44:24.680 --> 01:44:43.880
जो चल रहे हैं वह तो अच्छा है लेकिन और अच्छा , कोई ने भी निकाला हो वह हाथ उठाओ ।

236
01:44:45.880 --> 01:44:49.479
कोई ने नहीं निकाला है ।

237
01:44:51.479 --> 01:45:00.000
वर्गीकरण की सेवा भी अभी तो बहुत समय से चल रही है ।

238
01:45:03.420 --> 01:45:09.710
अभी कुछ तो नवीनता होनी चाहिए ।

239
01:45:11.710 --> 01:45:17.539
तो कौन , बंगाल निकालेगा ?

240
01:45:21.199 --> 01:45:23.369
बाकी अच्छा है ।

241
01:45:23.369 --> 01:45:34.909
बापदादा को यह अच्छा लगता है कि हर जोन को चांस मिलता है ।

242
01:45:43.479 --> 01:45:52.680
सेवा तो वृद्धि को पा रही है , यह तो बापदादा को समाचार मिलते हैं ।

243
01:45:52.680 --> 01:46:09.649
सेन्टर बढ़ रहे हैं , स्टूडेन्टस भी बढ़ रहे हैं , यह तो है ।

244
01:46:12.739 --> 01:46:30.000
लेकिन कम खर्चा बालानशीन , ऐसा कोई नया साधन निकालो ।

245
01:46:35.649 --> 01:46:52.170
बाकी बापदादा बंगाल के जोन ( इस्टर्न जोन ) में वृद्धि को देख करके खुश है ।

246
01:47:02.850 --> 01:47:05.420
अच्छा ।

247
01:47:05.420 --> 01:47:21.939
तो पुण्य जमा किया और यह पुण्य की पूंजी साथ में जायेगी ।

248
01:47:23.140 --> 01:47:27.079
हाथ खाली नहीं जायेंगे ।

249
01:47:29.079 --> 01:47:34.220
पुण्य की पूंजी साथ में ले जायेंगे ।

250
01:47:35.140 --> 01:47:44.850
जितना पुण्य जमा करने चाहो उतना कर सकते हो ।

251
01:47:51.420 --> 01:48:02.000
बाकी हिम्मत अच्छी की है , हर एक एरिया के सेवासाथी अच्छे हैं ।

252
01:48:02.000 --> 01:48:11.939
यज्ञ सेवा में पहुंच भी गये हैं और सफल भी किया है ।

253
01:48:29.939 --> 01:48:34.680
ईस्टर्न में बहुत नदियां इकट्ठी है ।

254
01:48:35.310 --> 01:48:57.770
बंगाल , बिहार , उड़ीसा , आसाम , नेपाल , तामिलनाडु , आधी सभा है ।

255
01:49:22.000 --> 01:49:32.340
इतने योग्य बनाया है , इसकी बहुत-बहुत बधाई हो ।

256
01:49:37.020 --> 01:49:41.539
देखो , टी वी में देखो कितने हैं ।

257
01:49:41.539 --> 01:49:46.340
बहुत अच्छे अच्छे हैं ।

258
01:49:47.600 --> 01:49:50.340
हाथ हिलाओ ।

259
01:49:59.020 --> 01:50:02.569
बहुत अच्छा ।

260
01:50:02.569 --> 01:50:26.850
बापदादा को खुशी है कि यज्ञ सेवा से कितना प्यार है और कितने पहुंच गये हैं ।

261
01:50:29.649 --> 01:50:44.970
अभी 5 ही नदियां मिलके कोई नया प्लैन बनाओ ।

262
01:50:47.369 --> 01:50:57.140
आवाज फैलाने का तो किया , अभी और कुछ करो ।

263
01:51:01.539 --> 01:51:18.970
बाकी बापदादा को खुशी है , कि 5 ही तरफ की संख्या बहुत अच्छी आई है ।

264
01:51:22.340 --> 01:51:41.310
इतने यहाँ हैं , वहाँ कितने होंगे , इतनी वृद्धि की है , इसकी सब परिवार को भी खुशी है , बापदादा को भी खुशी है ।

265
01:51:43.819 --> 01:51:59.369
तो अभी स्व परिवर्तन और सेवा में नवीनता इसकी प्राइज लेना ।

266
01:51:59.369 --> 01:52:02.800
नम्बर लेंगे ना ।

267
01:52:02.800 --> 01:52:11.600
5 हैं , और बड़े बड़े हैं छोटे नहीं हैं ।

268
01:52:13.079 --> 01:52:15.939
कमाल करके दिखाना ।

269
01:52:15.939 --> 01:52:24.739
आपस में मीटिंग करके कोई नवीनता का प्लैन निकालो

270
01:52:25.479 --> 01:52:47.140
क्योंकि अभी कई आत्मायें ऐसी हैं जो सुनते हैं ना , मेला है , प्रदर्शनी है , यात्रायें हैं , कानफ्रेन्स है ,

271
01:52:47.140 --> 01:52:56.000
तो वह समझते हैं यह तो हमने कर लिया है , देख लिया है ।

272
01:52:56.000 --> 01:53:02.000
इसलिए नवीनता निकालो ।

273
01:53:04.340 --> 01:53:08.970
बाकी अच्छी हिम्मत रखी है ।

274
01:53:08.970 --> 01:53:19.819
बाप की विशेष 5 ही को बहुत-बहुतदिल की दुआयें ।

275
01:53:21.819 --> 01:53:29.479
वरदान भी है , वरदान बतायें कौन सा है ?

276
01:53:29.479 --> 01:53:35.819
अमरभव का वरदान है ।

277
01:53:37.819 --> 01:53:54.000
अमर हैं , अमर रहेंगे और बापदादा के साथ अमरलोक में चलेंगे ।

278
01:53:59.539 --> 01:54:02.800
चलेंगे ना !

279
01:54:02.800 --> 01:54:06.170
पहले जन्म में आना ।

280
01:54:06.850 --> 01:54:11.939
दूसरे तीसरे में नहीं आना ।

281
01:54:16.739 --> 01:54:22.050
सभी को उमंग है ना ।

282
01:54:22.050 --> 01:54:34.569
पहले साथ चलेंगे अपने घर में फिर राज्य में जब आयेंगे तो पहले जन्म में आना ।

283
01:54:34.569 --> 01:54:39.600
दूसरे तीसरे में मजा नहीं आयेगा ।

284
01:54:44.399 --> 01:54:49.939
पहले जन्म में कौन आयेंगे ?

285
01:54:49.939 --> 01:54:53.539
सभी आयेंगे ।

286
01:55:02.050 --> 01:55:09.479
पहले जन्म की विधि का पता है ना !

287
01:55:10.220 --> 01:55:27.479
विधि का पता है - जो पहला नम्बर चार ही सबजेक्ट में होंगे , एक सबजेक्ट भी कम नहीं ।

288
01:55:28.000 --> 01:55:33.479
सब सबजेक्ट में पहला नम्बर ।

289
01:55:34.399 --> 01:55:38.510
वह पहले जन्म में साथी बनेंगे ।

290
01:55:39.369 --> 01:55:45.079
हैं हिम्मत ?

291
01:55:45.819 --> 01:56:09.770
कोई भी देखो स्थूल पढ़ाई में भी अगर एक सबजेक्ट में भी फेल होते हैं, कम मार्क्स लेते हैं तो वह नम्बरवन तो नहीं आता ना।

292
01:56:10.569 --> 01:56:21.539
तो वन जन्म में आना अर्थात् वन नम्बर में आना ।

293
01:56:22.449 --> 01:56:24.970
मंजूर है ।

294
01:56:24.970 --> 01:56:27.369
अभी हाथ उठाओ ।

295
01:56:27.369 --> 01:56:32.619
सोचके हाथ उठाना ।

296
01:56:35.539 --> 01:56:38.680
अच्छा है ।

297
01:56:39.369 --> 01:56:45.880
अमर रहना और अमर बनाना ।

298
01:56:46.569 --> 01:56:50.850
अच्छा ।

299
01:56:57.079 --> 01:57:40.619
( तामिलनाडु जोन में 12 ज्योर्तिलिंगम् दिखा करके योग की अनुभूति करा रहे हैं , छोटे छोटे स्थानों में यह सेवा बहुत अच्छी तरह से हो रही है , इसमें खर्चा बहुत कम है ) सफलता है ?

300
01:58:11.710 --> 01:58:16.340
अच्छा है , मुबारक है ।

301
01:58:20.000 --> 01:58:30.449
यह भी देखो नई इन्वेन्शन की ना , ऐसे और भी कोई नई इन्वेन्शन करो

302
01:58:30.850 --> 01:58:47.479
और जगह जगह पर ट्रायल करके देखो कम खर्चा है और है भी शिव के प्रतिमा की यादगार ।

303
01:58:47.939 --> 01:58:58.340
तो सबकी बुद्धि में एक बाप की यादगार रहेगी ।

304
01:58:58.340 --> 01:59:01.140
अच्छा है ।

305
01:59:01.140 --> 01:59:04.970
रिजल्ट तो ठीक है ।

306
01:59:04.970 --> 01:59:11.479
अभी और भी करके देखो ।

307
01:59:12.050 --> 01:59:15.079
अच्छा है ।

308
01:59:15.770 --> 01:59:27.140
सभी को सुनाना क्लास में तो कैसे करते हैं , क्या होता है , अनुभव सुनाना ।

309
01:59:27.140 --> 01:59:29.819
बाकी अच्छा है ।

310
01:59:29.819 --> 01:59:34.449
बधाई हो ।

311
01:59:47.140 --> 01:59:51.600
अच्छा बिहार वालों ने कुछ किया है ?

312
01:59:56.619 --> 02:00:40.279
( बिहार में आई बहार इसका एक प्रोजेक्ट बनाया है , बिहार में जहाँ जहाँ सन्देश नहीं पहुंचा है , उसे इस वर्ष में पूरा करेंगे , हर महीने नया सेवाकेन्द्र खोलेंगे ) अच्छा किया

313
02:00:40.279 --> 02:00:52.970
क्योंकि बिहार में देखा गया है कि ज्यादा में ज्यादा सन्देश मिलना चाहिए ।

314
02:00:52.970 --> 02:01:02.739
प्रोग्राम बनाया है , यह उमंग उत्साह की मुबारक ।

315
02:01:06.800 --> 02:01:10.170
अभी बहार आयेगी ना ।

316
02:01:10.170 --> 02:01:17.539
तो बहार को सब देखेंगे , मजा लेंगे ना बहार का ।

317
02:01:21.939 --> 02:01:36.970
अच्छा । सेवा का तो सब जो भी कर रहे हैं , हर जोन में कोई न कोई सेवा हो रही है , हर वर्ग भी कर रहा है ,

318
02:01:36.970 --> 02:01:47.250
सेवा का उमंग उत्साह अच्छा है और अच्छा रहना चाहिए ।

319
02:01:49.250 --> 02:01:52.850
ठीक है ना ।

320
02:01:53.479 --> 02:01:56.909
अच्छा ।

321
02:01:56.909 --> 02:02:36.569
डबल विदेशी :- डबल विदेशी अर्थात् डबल पुरूषार्थी ।

322
02:02:36.569 --> 02:02:43.369
बापदादा ने अभी नाम रखा है डबल पुरूषार्थी ।

323
02:02:43.369 --> 02:02:45.770
हैं ?

324
02:02:45.770 --> 02:02:50.619
डबल पुरूषार्थी हैं ?

325
02:02:52.619 --> 02:03:10.510
जो समझते हैं वर्तमान समय डबल पुरूषार्थ का लक्ष्य है और कर भी रहे हैं , वह हाथ उठाओ ।

326
02:03:10.510 --> 02:03:13.310
डबल पुरूषार्थ ।

327
02:03:13.310 --> 02:03:15.310
डबल ?

328
02:03:25.250 --> 02:03:28.220
बहुत अच्छा ।

329
02:03:28.569 --> 02:03:35.880
डबल पर तो ताली बजाओ ।

330
02:03:44.170 --> 02:03:47.819
अच्छा है ।

331
02:03:48.050 --> 02:04:05.079
आपको देख करके सब खुशी से आगे बढ़ने का लक्ष्य रखेंगे ।

332
02:04:05.939 --> 02:04:34.619
और आज देख रहे हैं कि विदेश के जो मेन क्वालिटी है , सर्विसएबुल , नॉलेजफुल , सक्सेसफुल वह पहुंच गई है ।

333
02:04:39.020 --> 02:04:44.279
और मीटिंग भी अच्छी कर रहे हैं ।

334
02:04:44.279 --> 02:04:54.000
पहली मीटिंग का समाचार तो बापदादा ने सुना

335
02:04:54.569 --> 02:05:20.970
कि सभी इन्टरनेशनल हर देश के विशेष आत्मायें मिलकर जो बनाया है

336
02:05:20.970 --> 02:05:36.970
वह बहुत अच्छा और सहज एकमत से सहज पास हो गया ।

337
02:05:37.710 --> 02:05:58.220
तो आप विशेष आत्मायें जो निमित्त बनी उनको बापदादा पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं ।

338
02:06:07.479 --> 02:06:13.250
पुराने पुराने फाउण्डेशन आये हैं ।

339
02:06:13.250 --> 02:06:19.600
बापदादा को खुशी होती है ।

340
02:06:21.600 --> 02:06:25.649
पाण्डव भी कम नहीं हैं ।

341
02:06:25.649 --> 02:06:39.600
पाण्डव भी एक दो से आगे हैं और शक्तियां भी एक दो से आगे हैं ।

342
02:06:42.399 --> 02:07:09.539
अच्छा । सभी बापदादा के वरदानों को अमर बनाने के लिए सहज विधि यह अपनाओ

343
02:07:09.539 --> 02:07:39.770
कि अमृतवेले और साथ में कर्मयोगी बनने के समय भी बार-बार वरदान को रिवाइज कर स्वरूप में स्थित हैं !

344
02:07:39.770 --> 02:07:51.369
या नहीं है तो अपने को वरदान के स्वरूप में स्थित करो ।

345
02:07:51.369 --> 02:07:54.850
बार-बार रिवाइज करो ।

346
02:07:55.369 --> 02:08:15.880
बापदादा तो दे देते हैं वरदान , लेकिन वरदान को कायम रखने के लिए बार-बार रिवाइज करके स्वरूप में लाओ ।

347
02:08:15.880 --> 02:08:20.399
अनुभव करो उस वरदान का ।

348
02:08:20.399 --> 02:08:32.970
रूहानी नशे का अनुभव करो तो वह वरदान आपका अमर वरदान हो जायेगा

349
02:08:44.220 --> 02:08:59.079
क्योंकि वरदान के पात्र आप विशेष आत्मायें हो ।

350
02:09:00.109 --> 02:09:10.909
भक्तों को भी वरदान मिलता है लेकिन वह अल्पकाल का , एक जन्म के लिए है ।

351
02:09:11.140 --> 02:09:20.680
आपका संगम का वरदान जन्म जन्मान्तर साथ रहता है ।

352
02:09:21.479 --> 02:09:38.739
इसलिए वरदान को स्वरूप में लाते रहेंगे तो वरदान की सफलता का अनुभव करते रहेंगे ।

353
02:09:40.170 --> 02:09:49.710
सिर्फ बुद्धि में नहीं स्वरूप में लाओ ।

354
02:09:52.220 --> 02:09:57.420
उस नशे में रहो ।

355
02:10:03.649 --> 02:10:06.449
फलक में रहो ।

356
02:10:06.449 --> 02:10:14.569
फलक रहे मैं वरदाता की वरदानी हूँ ।

357
02:10:15.250 --> 02:10:20.850
डायरेक्ट वरदाता ने वरदान दिया है ।

358
02:10:20.850 --> 02:10:30.109
वरदान को अमर बनाओ , कभी कभी वाला नहीं ।

359
02:10:34.220 --> 02:10:49.140
और डबल विदेशियों के ऊपर सभी ब्राह्मण आत्माओं का विशेष स्नेह है

360
02:10:52.399 --> 02:11:11.479
क्योंकि आपने जो आदि भारत के सेवाधारी हैं उनको बहुत सहयोग दिया है ।

361
02:11:12.340 --> 02:11:34.109
विश्व कल्याणकारी का जो बाप ने टाइटल दिया उसको साकार रूप में भिन्न भिन्न देशों में भिन्न भिन्न कलचर और भिन्न-भिन्न भाषायें ,

362
02:11:34.109 --> 02:11:50.050
उसमें आप सभी विश्व कल्याण की सेवा में सफलता देने में सहयोगी बने ।

363
02:11:50.800 --> 02:12:04.850
इसीलिए भारतवासियों को आपकी सेवा पर बहुत-बहुत स्नेह है ।

364
02:12:18.800 --> 02:12:22.970
अच्छा ।

365
02:12:29.199 --> 02:12:36.970
विशेष जो पहली मीटिंग वाले आये हैं वह हाथ उठाओ ।

366
02:12:37.539 --> 02:12:45.140
कान्स्टीट्युशन की मीटिंग वाले ऊंचा हाथ उठाओ ।

367
02:13:00.050 --> 02:13:03.939
अच्छा है ।

368
02:13:08.850 --> 02:13:19.649
बापदादा को संगठन बहुत अच्छा लगता है ।

369
02:13:24.050 --> 02:13:32.170
और मेहनत प्यार से की है , थके नहीं हैं ।

370
02:13:32.170 --> 02:13:52.050
उमंग उत्साह और अथकपन से किया , भारत वालों ने भी और डबल विदेशियों ने भी बहुत अच्छा किया है ।

371
02:13:52.050 --> 02:13:56.050
बापदादा को भी पसन्द है ।

372
02:13:56.050 --> 02:14:00.739
भारत के भी उठो ।

373
02:14:09.770 --> 02:14:22.510
तीनों पाण्डवों को विशेष बधाई है क्यों बधाई है ?

374
02:14:22.850 --> 02:14:29.369
क्योंकि ढांचा आपने बनाया ।

375
02:14:30.510 --> 02:14:39.600
और डबल विदेशियों को इस बात की बधाई है

376
02:14:39.600 --> 02:14:53.600
कि जो भी बना उसमें सहयोग और समय देकरके फाइनल किया ।

377
02:14:53.600 --> 02:15:01.369
देखेंगे नहीं कहा , कर लिया , इसकी बापदादा को खुशी है ।

378
02:15:01.369 --> 02:15:07.939
बधाई हो , बधाई हो , सभी को ।

379
02:15:07.939 --> 02:15:21.420
भारत वालों को भी और डबल विदेशियों को भी , शक्तियों को भी बधाई ।

380
02:15:43.250 --> 02:16:09.539
अभी ऐसा माइक , जो बापदादा ने सुनाया , विशेष माइक देखते हैं कहाँ से निकलता है , भारत से निकलता है या विदेश से निकलता है ।

381
02:16:16.050 --> 02:16:29.310
हर एक सोचता है हम करेंगे , यह तो आपका उमंग , आपका चेहरा दिखा रहा है ।

382
02:16:41.540 --> 02:16:44.969
अच्छा ।

383
02:16:44.969 --> 02:18:10.799
मीडिया विंग और स्पार्क विंग वाले आये हैं:-(गीत गाया - हम होंगे कामयाब एक दिन…) दोनों ही अपना अपना कार्य कर रहे हैं।

384
02:18:10.799 --> 02:18:18.680
अभी बापदादा को समाचार मिलते रहते हैं ।

385
02:18:19.479 --> 02:18:27.020
तो मीडिया भी दिनप्रतिदिन आगे बढ़ रहा है ।

386
02:18:27.940 --> 02:18:37.309
जो टी वी में प्रोग्राम्स आते हैं वह आवाज अच्छा फैला रहे हैं ।

387
02:18:39.309 --> 02:18:54.850
अभी पांव तो रख लिया है , अखबारों में भी अभी मेहनत के बिना जगह दे देते हैं

388
02:18:54.850 --> 02:19:06.969
और टी वी में भी अभी सहज जगह मिलती रहती है , चांस मिलता है ।

389
02:19:06.969 --> 02:19:17.309
तो इतना तो किया है , तो मीडिया को भी मुबारक है ।

390
02:19:19.819 --> 02:19:39.709
अभी कोशिश करो कि विदेश में अभी शुरू तो हुआ है , विदेश में भी टी वी में कोई कोई समय तो जाता है

391
02:19:40.450 --> 02:20:00.680
लेकिन विदेश और देश का इतना नजदीक का कनेक्शन हो जाए जो चारों तरफ आवाज फैलता जाए ।

392
02:20:00.680 --> 02:20:12.399
बाकी मेहनत की सफलता मिली है यह बापदादा को भी अच्छा लगता है ।

393
02:20:13.250 --> 02:20:19.600
मेहनत की है फल भी मिला है ।

394
02:20:22.799 --> 02:20:35.479
और स्पार्क वाले भी अपना प्लैन बना रहे हैं ,

395
02:20:35.479 --> 02:20:50.219
अच्छा है अभी ऐसा कुछ करके दिखाओ जो जैसे साइंस प्रत्यक्ष फल दिखाती है ,

396
02:20:50.219 --> 02:21:07.139
ऐसे साइलेन्स की शक्ति इतना स्पष्ट और सहज प्रत्यक्ष रूप में अनुभव कराये

397
02:21:07.649 --> 02:21:20.620
जो सब कहें ब्रह्माकुमारियों के पास सहज साधन है ।

398
02:21:22.620 --> 02:21:32.620
इन्वेन्शन कर रहे हैं और होगा भी ।

399
02:21:33.879 --> 02:21:49.370
सब बुद्धि अच्छी चला रहे हैं तो बुद्धि द्वारा कोई न कोई प्रत्यक्ष फल निकल आयेगा ।

400
02:21:54.909 --> 02:21:57.649
अच्छा है ।

401
02:21:57.649 --> 02:22:09.649
मेहनत अच्छी है , फल निकल रहा है , निकलता रहेगा , यह तो होना ही है ।

402
02:22:12.850 --> 02:22:17.139
अच्छा ।

403
02:22:49.079 --> 02:23:37.420
अभी एक सेकण्ड में , एक सेकण्ड हुआ , एक सेकण्ड में सारी सभा जो भी जहाँ है

404
02:23:38.340 --> 02:24:07.020
वहाँ मन को एक ही संकल्प में स्थित करो

405
02:24:12.049 --> 02:24:59.479
मैं बाप और मैं परमधाम में अनादि ज्योतिबिन्दु स्वरूप हूँ , परमधाम में बाप के साथ बैठ जाओ ।

406
02:26:42.569 --> 02:26:46.680
अच्छा ।

407
02:26:49.370 --> 02:26:54.969
अभी साकार में आ जाओ ।

408
02:27:07.370 --> 02:27:32.340
अभी वर्तमान समय के हिसाब से मन-बुद्धि को एकाग्र करने का अभ्यास ,

409
02:27:34.909 --> 02:28:21.540
जो कार्य कर रहे हो उसी कार्य में एकाग्र करो , कन्ट्रोलिंग पावर को ज्यादा बढ़ाओ ।

410
02:28:21.540 --> 02:28:32.399
मन-बुद्धि संस्कार तीनों के ऊपर कन्ट्रोलिंग पावर ।

411
02:28:46.569 --> 02:29:04.620
यह अभ्यास आने वाले समय में बहुत सहयोग देगा ।

412
02:29:08.280 --> 02:29:27.079
वायुमण्डल के अनुसार एक सेकण्ड में कन्ट्रोल करना पड़ेगा ।

413
02:29:29.079 --> 02:29:42.049
जो चाहे वही हो ।

414
02:29:50.170 --> 02:30:04.850
तो यह अभ्यास बहुत आवश्यक है ।

415
02:30:06.850 --> 02:30:10.450
इसको हल्का नहीं करना ।

416
02:30:10.450 --> 02:30:21.649
क्योंकि समय पर यही अन्त सुहानी करेगा ।

417
02:30:41.770 --> 02:31:48.340
अच्छा - चारों ओर के डबल तख्तनशीन , बापदादा के दिलतख्तनशीन , साथ में विश्व राज्य तख्त अधिकारी ,

418
02:31:51.709 --> 02:32:41.309
सदा अपने अनादि स्वरूप , आदि स्वरूप , मध्य स्वरूप , अन्तिम स्वरूप में जब चाहे तब स्थित रहने वाले

419
02:32:43.309 --> 02:33:17.200
सदा सर्व खज़ानों को स्वयं कार्य में लगाने वाले और औरों को भी खज़ानों से सम्पन्न बनाने वाले

420
02:33:22.510 --> 02:33:42.110
सर्व आत्माओं को बाप से मुक्ति का वर्सा दिलाने वाले

421
02:33:47.139 --> 02:34:21.879
ऐसे परमात्म प्यार के पात्र आत्माओं को बापदादा का यादप्यार , दिल की दुआयें और नमस्ते ।

