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1
00:11:56.620 --> 00:12:47.080
आज बापदादा चारों ओर के बच्चों के स्नेह को देख रहे हैं ।

2
00:12:53.309 --> 00:13:24.399
आप सभी भी स्नेह के विमान में यहाँ पहुंच गये हो ।

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00:13:29.769 --> 00:14:06.970
यह स्नेह का विमान बहुत सहज स्नेही के पास पहुंचा देता है ।

4
00:14:13.879 --> 00:16:00.340
बापदादा देख रहे हैं कि आज विशेष सभी लवलीन आत्मायें परमात्म प्यार के झूले में झूल रही हैं ।

5
00:16:10.450 --> 00:16:57.019
बापदादा भी चारों ओर के बच्चों के स्नेह में समाये हुए हैं ।

6
00:17:02.570 --> 00:17:59.369
यह परमात्म स्नेह बाप समान अशरीरी सहज बना देता है ।

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00:18:05.140 --> 00:18:55.880
व्यक्त भाव से परे अव्यक्त स्थिति में अव्यक्त स्वरूप में स्थित कर देता है ।

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00:19:07.480 --> 00:19:57.019
बापदादा भी हर बच्चे को समान स्थिति में देख हर्षित हो रहे हैं ।

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00:20:12.049 --> 00:21:02.450
आज के दिन सभी बच्चे शिवरात्रि , शिवजयन्ती बाप और अपना जन्मदिन मनाने आये हैं ।

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00:21:12.049 --> 00:21:57.309
बापदादा भी अपने-अपने वतन से आप सभी बच्चों का जन्म दिन मनाने पहुंच गये हैं ।

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00:22:03.710 --> 00:22:47.369
सारे कल्प में यह जन्म दिन बाप का वा आपका न्यारा और अति प्यारा है ।

12
00:22:52.049 --> 00:23:44.740
सारे कल्प में कोई का भी बर्थ डे परम आत्मा नहीं मनाते , आत्मा , आत्मा का मनाते हैं

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00:23:51.140 --> 00:24:26.799
लेकिन यह अलौकिक जन्म परम आत्मा आप आत्माओं का मनाते हैं ।

14
00:24:34.339 --> 00:25:15.019
साथ में इस जन्म की विशेषता और भी अलौकिक है , जो सारे कल्प में हो नहीं सकती ।

15
00:25:19.369 --> 00:25:41.539
ऐसा कभी नहीं सुना होगा कि बाप और बच्चों का एक ही दिन बर्थ डे होता है ।

16
00:25:50.509 --> 00:26:10.000
तो इस जन्मदिन का यह भी महत्व है

17
00:26:14.849 --> 00:26:44.910
कि बाप और बच्चों का एक ही दिन जन्मदिन , आप सभी बाप के साथ मना रहे हो ।

18
00:26:58.109 --> 00:27:19.250
इस जन्मदिन को शिवजयन्ती भी कहते हैं और शिवरात्रि भी कहते हैं ।

19
00:27:28.000 --> 00:27:49.650
तो जन्म के साथ कर्तव्य का भी यादगार है ।

20
00:27:55.079 --> 00:28:22.109
अंधकार मिटने का और प्रकाश फैलने का यादगार है ।

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00:28:26.509 --> 00:29:11.599
तो ऐसे अलौकिक जन्म दिन आप बापदादा के साथ मनाने वाले भाग्यवान आत्मायें हो ।

22
00:29:27.480 --> 00:30:00.170
बाप बच्चों को पदम-पदम गुणा इस दिव्य जन्म की बधाईयां भी दे रहे हैं ,

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00:30:00.170 --> 00:30:18.109
दुआयें भी दे रहे हैं और दिल का यादप्यार भी दे रहे हैं ।

24
00:30:18.109 --> 00:30:37.250
मुबारक हो , पदमगुणा मुबारक हो , मुबारक हो ।

25
00:30:44.170 --> 00:31:22.170
भक्त लोग भी इस उत्सव को बड़ी भावना और प्यार से मनाते हैं ।

26
00:31:29.309 --> 00:32:09.420
आपने जो इस दिव्य जन्म में श्रेष्ठ अलौकिक कर्म किया है , अभी भी कर रहे हो ।

27
00:32:12.569 --> 00:32:42.170
वह यादगार रूप में चाहे अल्पकाल के लिए अल्प समय के लिए मनाते हैं

28
00:32:42.170 --> 00:32:49.539
लेकिन भक्तों की भी कमाल है ।

29
00:32:49.539 --> 00:33:12.109
यादगार मनाने वालों , यादगार बनाने वालों की भी देखो कितनी कमाल है ।

30
00:33:14.109 --> 00:33:32.000
जो कापी करने में होशियार तो निकले हैं क्योंकि आपके ही भक्त हैं ना ।

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00:33:35.019 --> 00:34:11.769
तो आपकी श्रेष्ठता का फल उन यादगार बनाने वालों को वरदान रूप में मिला है ।

32
00:34:23.710 --> 00:34:59.599
आप एक जन्म के लिए एक बार व्रत लेते हो , सम्पूर्ण पवित्रता का ।

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00:35:00.800 --> 00:35:22.340
कापी तो की है एक दिन के लिए पवित्रता का व्रत भी रखते हैं ।

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00:35:24.340 --> 00:36:05.019
आपका पूरा जन्म पवित्र अन्न का व्रत है और वह एक दिन रखते हैं ।

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00:36:09.820 --> 00:36:30.110
तो बापदादा आज अमृतवेले देख रहे थे कि आप सबके भक्त भी कम नहीं हैं ।

36
00:36:30.110 --> 00:36:52.170
उन्हों की भी विशेषता अच्छी रही है ।

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00:36:59.250 --> 00:37:27.820
तो आप सभी ने पूरे जन्म के लिए पक्का व्रत चाहे खान-पान का ,

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00:37:27.820 --> 00:38:04.800
चाहे मन के संकल्प की पवित्रता का , वचन का , कर्म का , सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हुए कर्म का

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00:38:08.849 --> 00:38:18.909
पूरे जन्म के लिए पक्का व्रत लिया है ?

40
00:38:18.909 --> 00:38:28.050
लिया है या थोड़ा-थोड़ा लिया है ?

41
00:38:29.420 --> 00:38:47.480
पवित्रता ब्राह्मण जीवन का आधार है ।

42
00:38:50.619 --> 00:38:59.480
पूज्य बनने का आधार है ।

43
00:39:02.170 --> 00:39:11.820
श्रेष्ठ प्राप्ति का आधार है ।

44
00:39:13.820 --> 00:39:37.309
तो जो भी भाग्यवान आत्मायें यहाँ पहुंच गये हैं

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00:39:39.309 --> 00:40:13.309
वह चेक करो कि यह जन्म का उत्सव पवित्र बनने का चारों प्रकार से ,

46
00:40:13.309 --> 00:40:42.110
सिर्फ ब्रह्मचर्य की पवित्रता नहीं , लेकिन मन-वचन-कर्म-सम्बन्ध सम्पर्क में भी पवित्रता ।

47
00:40:50.110 --> 00:40:59.820
यह पक्का व्रत लिया है ?

48
00:40:59.820 --> 00:41:03.079
लिया है ?

49
00:41:03.079 --> 00:41:19.710
जिन्होंने लिया है पक्का , थोड़ा-थोड़ा कच्चा नहीं , वह हाथ उठाओ ।

50
00:41:19.710 --> 00:41:26.449
पक्का , पक्का ?

51
00:41:26.449 --> 00:41:28.969
पक्का ?

52
00:41:28.969 --> 00:41:33.420
कितना पक्का ?

53
00:41:34.909 --> 00:41:40.619
कोई हिलावे तो , हिलेंगे ?

54
00:41:41.019 --> 00:41:42.909
हिलेंगे ?

55
00:41:42.909 --> 00:41:47.599
नहीं हिलेंगे ?

56
00:41:55.139 --> 00:42:06.969
कभी-कभी तो माया आ जाती है ना , कि नहीं , माया को विदाई दे दी है ?

57
00:42:06.969 --> 00:42:17.309
या कभी कभी छुट्टी दे देते हो , आ जाती है !

58
00:42:25.369 --> 00:42:38.340
चेक करो - तो पक्का व्रत लिया है ?

59
00:42:38.340 --> 00:42:46.170
सदा का व्रत लिया है ?

60
00:42:47.369 --> 00:42:50.909
वा कभी कभी का ?

61
00:42:50.909 --> 00:43:14.449
कभी थोड़ा , कभी बहुत , कभी पक्का , कभी कच्चा - ऐसे तो नहीं हो ना !

62
00:43:19.199 --> 00:43:46.340
क्योंकि बापदादा से प्यार में सभी 100 परसेन्ट से भी ज्यादा मानते हैं ।

63
00:43:46.340 --> 00:43:58.000
अगर बापदादा पूछते हैं कि बाप से प्यार कितना है ?

64
00:43:58.909 --> 00:44:08.969
सब बहुत उमंग उत्साह से हाथ उठाते हैं ।

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00:44:10.280 --> 00:44:26.909
प्यार में परसेन्टेज कम ही की होती है , मैजारिटी की है ।

66
00:44:32.170 --> 00:45:04.619
तो जैसे प्यार में पास हो , बापदादा भी मानते हैं कि मैजारिटी प्यार में पास हैं ,

67
00:45:08.510 --> 00:45:39.599
लेकिन पवित्रता के व्रत में चारों रूप में मन्सा-वाचा-कर्मणा , सम्बन्ध-सम्पर्क

68
00:45:41.599 --> 00:46:14.800
चारों ही रूप में सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत निभाने में परसेन्टेज आ जाती है ।

69
00:46:33.820 --> 00:46:45.019
अभी बापदादा क्या चाहते हैं ?

70
00:46:46.110 --> 00:47:05.940
बापदादा यही चाहते कि जो प्रतिज्ञा की है , समान बनने की ,

71
00:47:14.000 --> 00:47:35.940
तो हर एक बच्चे की सूरत में बाप की मूर्त दिखाई दे ।

72
00:47:42.679 --> 00:48:29.650
हर एक बोल में बाप समान बोल हो , बापदादा के बोल वरदान रूप बन जाते हैं ।

73
00:48:32.969 --> 00:48:51.820
तो आप सब यह चेक करो , हमारी सूरत में बाप की मूर्त दिखाई देती है ?

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00:48:51.820 --> 00:48:58.000
बाप की मूर्त क्या है ?

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00:48:58.909 --> 00:49:13.880
सम्पन्न , सब बात में सम्पन्न ।

76
00:49:15.880 --> 00:49:44.000
ऐसे हर एक बच्चे के नयन , हर एक बच्चे का मुखड़ा बाप समान है ?

77
00:49:50.219 --> 00:50:08.570
सदा मुस्कराता हुआ चेहरा है ?

78
00:50:08.570 --> 00:50:42.219
कि कभी सोच वाला , कभी व्यर्थ संकल्पों की छाया वाला , कभी उदास ,

79
00:50:44.219 --> 00:51:02.340
कभी बहुत मेहनत वाला , ऐसा चेहरा तो नहीं है ?

80
00:51:07.710 --> 00:51:39.710
सदा गुलाब , कभी गुलाब जैसा खिला हुआ चेहरा , कभी और नहीं बन जाये ।

81
00:51:48.800 --> 00:52:09.420
क्योंकि बापदादा ने यह भी जन्मते ही बता दिया है

82
00:52:09.420 --> 00:52:28.219
कि माया आपके इस श्रेष्ठ जीवन का सामना करेगी ।

83
00:52:29.019 --> 00:53:07.139
लेकिन माया का काम है आना , आप सदा पवित्रता के व्रत लेने वाली आत्माओं का काम है दूर से ही माया को भगाना ।

84
00:53:11.940 --> 00:53:44.739
बापदादा ने देखा है कई बच्चे माया को दूर से भगाते नहीं , माया आ जाती , आ जाने दे देते हैं

85
00:53:46.739 --> 00:54:05.139
अर्थात् माया के प्रभाव में आ जाते हैं ।

86
00:54:19.940 --> 00:54:31.599
अगर दूर से नहीं भगाते तो माया की भी आदत पड़ जाती है

87
00:54:31.599 --> 00:54:44.849
क्योंकि वह जान जाती है कि यहाँ हमको बैठने देंगे ,

88
00:54:48.849 --> 00:55:16.050
बैठने देने की निशानी है माया आती है , सोचते हैं कि माया है , लेकिन फिर भी क्या सोचते ?

89
00:55:16.050 --> 00:55:27.369
अभी सम्पूर्ण थोड़ेही बने हैं , कोई नहीं सम्पूर्ण बना है ।

90
00:55:32.219 --> 00:55:56.280
अभी तो बन रहे हैं , बन जायेंगे , गें गें करने लग जाते हैं तो माया को बैठने की आदत पड़ जाती है ।

91
00:56:06.619 --> 00:56:23.539
तो आज जन्मदिन तो मना रहे हैं , बाप भी दुआयें , मुबारक तो दे रहे हैं

92
00:56:23.539 --> 00:56:50.110
लेकिन बाप हर एक बच्चे को लास्ट नम्बर वाले बच्चे को भी किस रूप में देखने चाहते हैं ?

93
00:57:00.170 --> 00:57:20.000
लास्ट नम्बर भी बाप का प्यारा तो है ना !

94
00:57:27.250 --> 00:57:55.079
तो बाप लास्ट नम्बर वाले बच्चे को भी सदा गुलाब देखने चाहते हैं , खिला हुआ ।

95
00:57:55.079 --> 00:58:00.110
मुरझाया हुआ नहीं ।

96
00:58:04.110 --> 00:58:25.650
मुरझाने का कारण है थोड़ा सा अलबेलापन ।

97
00:58:26.570 --> 00:58:49.940
हो जायेगा , देख लेंगे , कर ही लेंगे , पहुंच ही जायेंगे … तो यह गें गें की भाषा नीचे गिरा देती है ।

98
00:59:09.539 --> 00:59:46.849
तो चेक करो - कितना समय बीत गया , अभी समय की समीपता का और अचानक होने का इशारा

99
00:59:48.110 --> 01:00:09.420
तो बापदादा ने दे ही दिया है , दे रहा है नहीं , दे ही दिया है ।

100
01:00:15.250 --> 01:00:52.449
ऐसे समय के लिए एवररेडी,अलर्ट आवश्यक है।

101
01:00:54.449 --> 01:01:17.199
अलर्ट रहने के लिए चेक करो -

102
01:01:18.570 --> 01:01:41.769
हमारा मन और बुद्धि सदा क्लीन और क्लियर है ?

103
01:01:41.769 --> 01:01:50.340
क्लीन भी चाहिए , क्लियर भी चाहिए ।

104
01:02:00.570 --> 01:02:49.650
इसके लिए समय पर विजय प्राप्त करने के लिए मन में , बुद्धि में कैचिंग पावर और टचिंग पावर दोनों बहुत आवश्यक हैं ।

105
01:02:49.650 --> 01:03:14.110
ऐसे सरकमस्टांश आने हैं जो कहाँ दूर भी बैठे हो

106
01:03:15.369 --> 01:03:25.599
लेकिन क्लीन और क्लियर मन और बुद्धि होगा

107
01:03:25.599 --> 01:03:51.820
तो बाप का इशारा , डायरेक्शन , श्रीमत जो मिलनी है , वह कैच कर सकेंगे ।

108
01:03:52.969 --> 01:04:04.400
टच होगा यह करना है , यह नहीं करना है ।

109
01:04:10.110 --> 01:04:52.219
इसीलिए बापदादा ने पहले भी सुनाया है तो वर्तमान समय साइलेन्स की शक्ति अपने पास जितनी हो सके जमा करो ।

110
01:05:09.539 --> 01:05:35.079
जब चाहो , जैसे चाहो वैसे मन और बुद्धि को कन्ट्रोल कर सको ।

111
01:05:38.849 --> 01:06:01.710
व्यर्थ संकल्प स्वप्न में भी टच नहीं करे , ऐसा माइन्ड कन्ट्रोल चाहिए ।

112
01:06:04.969 --> 01:06:17.309
इसीलिए कहावत है मन जीते जगतजीत ।

113
01:06:22.679 --> 01:06:49.079
जैसे स्थूल कर्मेन्द्रिय हाथ है , जहाँ चाहो जब तक चाहो तब तक आर्डर से चला सकते हो ।

114
01:06:51.079 --> 01:07:24.400
ऐसे मन और बुद्धि की कन्ट्रोलिंग पावर आत्मा में हर समय इमर्ज हो ।

115
01:07:27.650 --> 01:08:02.849
ऐसे नहीं योग के समय अनुभव होता है लेकिन कर्म के समय , व्यवहार के समय , सम्बन्ध के समय अनुभव कम हो ।

116
01:08:06.449 --> 01:08:41.880
अचानक पेपर आने हैं क्योंकि फाइनल रिजल्ट के पहले भी बीच-बीच में पेपर लिये जाते हैं ।

117
01:08:48.050 --> 01:09:10.569
तो इस बर्थ डे पर विशेषता क्या करेंगे ?

118
01:09:10.569 --> 01:09:26.909
साइलेन्स की शक्ति जितना जमा कर सको ,

119
01:09:28.399 --> 01:09:47.479
एक सेकण्ड में स्वीट साइलेन्स की अनुभूति में खो जाओ

120
01:09:51.020 --> 01:10:05.539
क्योंकि साइन्स और साइलेन्स , साइंस भी अति में जा रही है ।

121
01:10:11.369 --> 01:10:30.399
तो साइंस पर साइलेन्स के शक्ति की विजय परिवर्तन करेगी ।

122
01:10:32.850 --> 01:10:59.600
साइलेन्स की शक्ति से दूर बैठे किस आत्मा को सहयोग भी दे सकते हो ।

123
01:11:02.510 --> 01:11:08.000
सकाश दे सकते हो ।

124
01:11:08.680 --> 01:11:19.600
भटका हुआ मन शान्त कर सकते हो ।

125
01:11:29.420 --> 01:11:52.279
ब्रह्मा बाबा को देखा जब भी कोई अनन्य बच्चा थोड़ा हलचल में वा शारीरिक हिसाब-किताब में रहा

126
01:11:54.279 --> 01:12:17.649
तो सवेरे-सवेरे उठकर बच्चे को साइलेन्स के शक्ति की सकाश दिया और वह अनुभव करते थे ।

127
01:12:29.079 --> 01:12:54.109
तो अन्त में इस साइलेन्स की सेवा का सहयोग देना पड़ेगा ।

128
01:12:54.109 --> 01:13:13.420
सरकमस्टांश अनुसार यह बहुत ध्यान में रखो ,

129
01:13:13.420 --> 01:13:40.000
साइलेन्स की शक्ति या अपने श्रेष्ठ कर्मो की शक्ति जमा करने की बैंक सिर्फ अभी खुलती है

130
01:13:40.000 --> 01:13:49.649
और कोई जन्म में जमा करने की बैंक नहीं है ।

131
01:13:56.569 --> 01:14:09.479
अभी अगर जमा नहीं किया फिर बैंक ही नहीं होगी तो किसमें जमा करेंगे !

132
01:14:14.569 --> 01:14:37.539
इसलिए जमा की शक्ति को जितना इकठ्ठा करने चाहो उतना कर सकते हो ।

133
01:14:43.710 --> 01:15:04.569
वैसे लोग भी कहते हैं जो करना है वह अब कर लो ।

134
01:15:06.569 --> 01:15:13.250
जो सोचना है अब सोच लो ।

135
01:15:14.109 --> 01:15:37.600
अभी जो भी सोचेंगे वह सोच , सोच रहेगा और कुछ समय के बाद जब समय की सीमा नजदीक आयेगी

136
01:15:37.600 --> 01:15:47.600
तो सोच पश्चाताप के रूप में बदल जायेगा ।

137
01:15:49.600 --> 01:16:06.800
यह करते थे , यह करना था … तो सोच नहीं रहेगा , पश्चाताप में बदल जायेगा ।

138
01:16:09.649 --> 01:16:26.909
इसीलिए बापदादा पहले से ही इशारा दे रहा है ।

139
01:16:36.220 --> 01:16:56.850
साइलेन्स की शक्ति , एक सेकण्ड में कुछ भी हो , साइलेन्स में खो जाओ ।

140
01:17:01.020 --> 01:17:12.050
यह नहीं पुरूषार्थ कर रहे हैं !

141
01:17:17.819 --> 01:17:27.479
जमा का पुरूषार्थ अभी कर सकते हो ।

142
01:17:38.279 --> 01:17:59.420
तो बापदादा का बच्चों से स्नेह है , बापदादा एक-एक बच्चे को साथ ले जाना चाहते हैं ।

143
01:18:08.800 --> 01:18:41.819
जो वायदा है साथ रहेंगे , साथ चलेंगे … वह वायदा निभाने के लिए समान साथ चलेगा ।

144
01:18:43.819 --> 01:18:55.770
सुनाया था ना - डबल फारेनर्स को हाथ में हाथ देके चलना अच्छा लगता है ,

145
01:18:56.399 --> 01:19:17.310
तो श्रीमत का हाथ में हाथ हो , बाप की श्रीमत वह आपकी मत इसको कहते हैं हाथ में हाथ ।

146
01:19:21.939 --> 01:19:35.369
तो ठीक है - आज बर्थ डे उत्सव मनाने आये हो ना !

147
01:19:37.369 --> 01:19:51.710
बापदादा को भी खुशी है कि मेरे बच्चे , फखुर है बाप को

148
01:19:51.710 --> 01:20:11.710
कि मेरे बच्चे सदा उत्साह में रहते उत्सव मनाते रहते हैं ।

149
01:20:15.420 --> 01:20:24.680
हर रोज उत्सव मनाते हो या विशेष दिन पर ?

150
01:20:24.680 --> 01:20:31.140
संगमयुग ही उत्सव है ।

151
01:20:31.140 --> 01:20:37.079
युग ही उत्सव का है ।

152
01:20:43.369 --> 01:20:57.369
और कोई युग संगमयुग जैसा नहीं है ।

153
01:21:00.739 --> 01:21:19.819
तो सबको उमंग-उत्साह है ना कि हमें समान बनना ही है ।

154
01:21:21.819 --> 01:21:24.279
है ?

155
01:21:24.279 --> 01:21:36.970
बनना ही है , या देखेंगे , बनेंगे , करेंगे , गें गें तो नहीं है ?

156
01:21:37.770 --> 01:21:45.770
जो समझते हैं बनना ही है , वह हाथ उठाओ ।

157
01:21:45.770 --> 01:22:03.880
बनना ही है , त्याग करना पड़ेगा , तपस्या करनी पड़ेगी ।

158
01:22:11.770 --> 01:22:19.140
तैयार है कुछ भी त्याग करना पड़े ।

159
01:22:19.140 --> 01:22:24.399
सबसे बड़ा त्याग क्या है ?

160
01:22:25.880 --> 01:22:41.939
त्याग करने में सबसे बड़े ते बड़ा एक शब्द विघ्न डालता है ।

161
01:22:46.000 --> 01:23:04.970
त्याग तपस्या वैराग्य , बेहद का वैराग्य , इसमें एक ही शब्द विघ्न डालता है , जानते तो हो ।

162
01:23:06.170 --> 01:23:10.340
कौन सा एक शब्द है ?

163
01:23:10.619 --> 01:23:21.770
मैं , बॉडी कान्सेस की मैं ।

164
01:23:25.420 --> 01:23:43.369
इसलिए बापदादा ने कहा जैसे अभी जब भी मेरा कहते हो तो पहले क्या याद आता ?

165
01:23:43.369 --> 01:23:46.449
मेरा बाबा ।

166
01:23:46.449 --> 01:23:51.369
आता मेरा बाबा आता है ना !

167
01:23:51.369 --> 01:24:04.680
भले मेरा और कुछ भी करो लेकिन मेरा कहने से आदत पड़ गई है पहले बाबा आता है ।

168
01:24:06.680 --> 01:24:17.140
ऐसे ही जब मैं कहते हैं ,

169
01:24:18.170 --> 01:24:32.050
जैसे मेरा बाबा भूलता नहीं है , कभी किसको मेरा कहो ना तो बाबा शब्द आता ही है ,

170
01:24:33.020 --> 01:24:47.710
ऐसे ही जब मैं कहो तो पहले आत्मा याद आवे ।

171
01:24:48.569 --> 01:24:53.420
मैं कौन , आत्मा ।

172
01:24:53.420 --> 01:25:02.619
मैं आत्मा यह कर रही हूँ ।

173
01:25:07.539 --> 01:25:17.539
मैं और मेरा , हद का बदल बेहद का हो जाए ।

174
01:25:20.340 --> 01:25:23.479
हो सकता है ?

175
01:25:23.479 --> 01:25:25.649
हो सकता है ?

176
01:25:25.649 --> 01:25:29.539
कांध तो हिलाओ ।

177
01:25:30.279 --> 01:25:39.140
आदत डालो , मैं , फौरन आवे आत्मा ।

178
01:25:43.479 --> 01:26:00.170
और जब मैं-पन आता है तो एक शब्द याद आवे - करावनहार कौन ?

179
01:26:01.710 --> 01:26:12.220
बाप करावनहार करा रहा है ।

180
01:26:12.970 --> 01:26:21.770
करावनहार शब्द करने के समय सदा याद रहे ।

181
01:26:21.770 --> 01:26:25.420
मैं-पन नहीं आयेगा ।

182
01:26:25.420 --> 01:26:39.250
मेरा विचार , मेरी ड्युटी , ड्युटी का भी बहुत नशा होता है ।

183
01:26:40.170 --> 01:26:52.510
मेरी ड्युटी … लेकिन देने वाला दाता कौन !

184
01:26:55.020 --> 01:27:02.170
यह ड्युटीज प्रभु की देन हैं ।

185
01:27:02.170 --> 01:27:14.569
प्रभु की देन को मैं मानना , सोचो अच्छा है ?

186
01:27:18.800 --> 01:27:38.220
तो बापदादा अभी लास्ट दो टर्न है , एक मास सीजन समझो ,

187
01:27:38.850 --> 01:27:49.539
इस वर्ष की सीजन समाप्त होने में ।

188
01:27:50.909 --> 01:28:07.710
तो समाप्ति में बापदादा क्या समाप्ति कराना चाहता है ?

189
01:28:13.479 --> 01:28:23.819
एवररेडी हैं कि सोचना पड़ेगा?

190
01:28:34.569 --> 01:28:59.880
चाहे यहाँ आवे या नहीं आवे लेकिन हर एक स्थान से बापदादा रिजल्ट चाहते हैं ।

191
01:29:08.909 --> 01:29:24.340
यह एक मास ऐसा नेचरल नेचर बनाओ

192
01:29:25.539 --> 01:29:36.850
क्योंकि नेचरल नेचर जल्दी में बदलती नहीं है ।

193
01:29:40.050 --> 01:29:52.970
तो नेचरल नेचर बनाओ जो बताया ना -

194
01:29:53.880 --> 01:30:32.170
सदा आपके चेहरे से बाप के गुण दिखाई दें , चलन से बाप की श्रीमत दिखाई दे ।

195
01:30:33.369 --> 01:30:48.619
सदा मुस्कराता हुआ चेहरा हो ।

196
01:30:50.619 --> 01:31:07.250
सदा सन्तुष्ट रहने और सन्तुष्ट करने की चाल हो ।

197
01:31:21.140 --> 01:31:37.250
हर कर्म में , कर्म और योग का बैलेन्स हो ।

198
01:31:44.449 --> 01:32:04.850
कई बच्चे बापदादा को बहुत अच्छी-अच्छी बातें सुनाते हैं , बतायें क्या कहते हैं ?

199
01:32:04.850 --> 01:32:22.619
कहते हैं बाबा आप समझ लो ना मेरी यह नेचर है , और कुछ नहीं है , मेरी नेचर ही यह है ।

200
01:32:24.050 --> 01:32:28.220
अभी बापदादा क्या कहे ?

201
01:32:28.220 --> 01:32:32.449
मेरी नेचर है ?

202
01:32:35.369 --> 01:32:54.909
मेरा बोल ऐसा है , कई ऐसे कहते हैं , क्रोध थोड़ेही किया , मेरा बोल थोड़ा बड़ा है , थोड़ा तेज बोला , क्रोध थोड़ेही किया सिर्फ तेज बोला ।

203
01:32:54.909 --> 01:33:00.970
देखो कितनी मीठी-मीठी बातें हैं ।

204
01:33:04.050 --> 01:33:19.939
बापदादा कहते हैं जिसको आप मेरी नेचर कहते हो मेरा कहना ही रांग है ।

205
01:33:20.739 --> 01:33:34.800
मेरी नेचर यह रावण की नेचर है या आपकी नेचर है ।

206
01:33:36.800 --> 01:33:53.880
आपकी नेचर अनादिकाल आदि काल , पूज्य काल यह ओरीज्नल नेचर है ।

207
01:33:53.880 --> 01:34:05.199
रावण की चीज़ को मेरा-मेरा कहते हो ना इसीलिए जाती नहीं है ।

208
01:34:07.199 --> 01:34:16.279
पराई चीज़ को अपना बनाकर रखा है ना ,

209
01:34:17.420 --> 01:34:32.220
कोई पराई चीज़ को अपने पास सम्भालकर रखे , छिपाकर रखे , अच्छा माना जाता है ?

210
01:34:34.220 --> 01:34:46.170
तो रावण की नेचर , पराई नेचर उसको मेरा क्यों कहते हो ?

211
01:34:46.170 --> 01:34:54.680
बड़े फखुर से कहते हैं मेरा दोष नहीं है , मेरी नेचर है ।

212
01:34:54.680 --> 01:35:02.449
बापदादा को भी रिझाने की कोशिश करते हैं ।

213
01:35:09.250 --> 01:35:18.449
अभी यह समाप्ति समारोह करेंगे !

214
01:35:18.449 --> 01:35:22.220
करेंगे ?

215
01:35:22.220 --> 01:35:26.050
करेंगे ?

216
01:35:26.050 --> 01:35:39.939
देखो , दिल से कहो , मन से करो , जहाँ मन होगा ना , वहाँ सब कुछ हो जायेगा ।

217
01:35:40.510 --> 01:35:52.279
मन से मानो कि यह मेरी नेचर नहीं है ।

218
01:35:53.079 --> 01:36:01.770
यह दूसरे की चीज़ है , वह नहीं रखनी है ।

219
01:36:01.770 --> 01:36:07.020
आप तो मरजीवा बन गये ना ।

220
01:36:07.020 --> 01:36:15.939
आपकी ब्राह्मण नेचर है या पुरानी नेचर है ?

221
01:36:19.369 --> 01:36:25.649
तो समझा बापदादा क्या चाहते हैं ?

222
01:36:26.170 --> 01:36:44.569
भले मनोरंजन मनाओ , डांस करो , खेल करो लेकिन … लेकिन है ।

223
01:36:49.369 --> 01:37:00.970
सब कुछ करते भी समान बनना ही है ।

224
01:37:00.970 --> 01:37:09.539
समान बनने के बिना साथ चलेंगे कैसे !

225
01:37:11.199 --> 01:37:21.420
कस्टम में , धर्मराजपुरी में ठहरना पड़ेगा , साथ नहीं चलेंगे ।

226
01:37:27.479 --> 01:37:39.079
तो क्या , बताओ दादियां , एक मास रिजल्ट देखें !

227
01:37:39.079 --> 01:37:41.939
देखें ?

228
01:37:41.939 --> 01:37:49.649
बोलो , देखें ।

229
01:37:50.170 --> 01:37:54.340
देखें ?

230
01:37:55.600 --> 01:38:03.539
एक मास अटेन्शन रखेंगे ।

231
01:38:03.539 --> 01:38:11.710
एक मास अगर अटेन्शन रखा तो नेचरल हो जायेगा ।

232
01:38:11.710 --> 01:38:19.140
मास का एक दिन भी छोड़ना नहीं ।

233
01:38:25.649 --> 01:38:30.399
अच्छा जिम्मेवारी उठाती हैं दादियां ।

234
01:38:32.399 --> 01:38:44.970
सभी इकट्ठे होके एक दो के प्रति शुभ भावना शुभ कामना का हाथ फैलाओ ।

235
01:38:47.369 --> 01:38:55.250
जैसे कोई गिरता है ना तो उसको हाथ से प्यार से उठाते हैं

236
01:38:55.250 --> 01:39:11.880
तो शुभ भावना और शुभ कामना का हाथ , एक दो को सहयोग देके आगे बढ़ाते चलो ।

237
01:39:26.909 --> 01:39:30.220
ठीक है ?

238
01:39:31.710 --> 01:39:44.970
सिर्फ आप चेक कम करते हो , करके पीछे चेक करते हो , हो गया ना !

239
01:39:45.479 --> 01:39:50.000
पहले सोचो , पीछे करो ।

240
01:39:50.000 --> 01:39:56.000
पहले करो पीछे सोचो नहीं ।

241
01:39:56.680 --> 01:40:01.880
करना ही है ।

242
01:40:07.649 --> 01:40:11.479
डबल विदेशी क्या समझते हैं ?

243
01:40:11.479 --> 01:40:14.449
करेंगे ?

244
01:40:14.449 --> 01:40:17.079
करेंगे ?

245
01:40:17.079 --> 01:40:20.220
डबल विदेशी करेंगे ?

246
01:40:20.619 --> 01:40:22.800
बहुत अच्छा ।

247
01:40:22.800 --> 01:40:42.000
अगर डबल विदेशी एक्जैम्पुल बन जायें तो बापदादा बहुत-बहुत दुआओं की वर्षा करेगा ।

248
01:40:49.310 --> 01:40:52.970
क्या सोचा डबल विदेशियों ने ?

249
01:40:52.970 --> 01:40:58.680
एक्जैम्पुल बनेंगे ?

250
01:40:58.680 --> 01:41:04.619
बनेंगे तो दो हाथ उठाओ ।

251
01:41:08.619 --> 01:41:32.399
कमाल है , बापदादा डबल विदेशियों को अभी से हिम्मत और उमंग उत्साह की दुआयें दे रहे हैं ।

252
01:41:38.399 --> 01:41:47.079
भारत वाले भी कम नहीं हैं , वह भी अन्दर-अन्दर सोच रहे हैं ।

253
01:41:47.819 --> 01:41:53.479
वह सोचते हैं करके ही दिखायेंगे ।

254
01:41:55.479 --> 01:41:58.220
ठीक है ना भारत वाले ।

255
01:41:58.220 --> 01:42:02.279
देखो ।

256
01:42:02.279 --> 01:42:06.220
भारत ने क्या नहीं किया ?

257
01:42:06.220 --> 01:42:15.140
भारत वाले बाप को ऊपर से नीचे ले आये ।

258
01:42:27.819 --> 01:42:32.619
कमाल तो की ना भारत वालों ने ।

259
01:42:33.310 --> 01:42:39.250
उसके आगे यह क्या बड़ी बात है ।

260
01:42:39.939 --> 01:43:02.170
अच्छा - जो समझते हैं कि बाप से और दादी से भी बहुतबहुत प्यार है वह हाथ उठाओ ।

261
01:43:02.170 --> 01:43:08.970
प्यार है , अच्छा ।

262
01:43:14.850 --> 01:43:19.939
कितना प्यार है ?

263
01:43:30.569 --> 01:43:36.739
अभी आपका दिल कौन सा गीत गाता है ?

264
01:43:45.770 --> 01:43:52.739
इतना प्यार करेगा कौन ?

265
01:43:57.250 --> 01:44:05.310
जितना बच्चे करते बाप को , बाप करता बच्चों को ।

266
01:44:05.310 --> 01:44:11.770
इतना प्यार कोई करेगा ।

267
01:44:13.079 --> 01:44:31.939
तो प्यार के पीछे क्या छोड़ना थोड़ेही है , यह तो पाना है , छोड़ना नहीं है ।

268
01:44:43.199 --> 01:45:02.399
बापदादा शिव मन्त्र चलाके सभी को सम्पन्न रूप में देखते हैं ।

269
01:45:06.279 --> 01:45:11.479
आपके पास भी शिव मन्त्र है ना !

270
01:45:11.479 --> 01:45:13.479
है ?

271
01:45:13.479 --> 01:45:14.970
है ना ?

272
01:45:14.970 --> 01:45:19.710
छू मन्त्र नहीं , शिव मन्त्र ।

273
01:45:19.710 --> 01:45:24.619
तो शिव मन्त्र चलाओ ।

274
01:45:35.369 --> 01:45:47.819
तो अगली बार सोच समझ करके अपना प्लैन आपेही बनाओ ।

275
01:45:47.819 --> 01:46:07.079
बनाके देते हैं ना तो बहाने बहुत करते हैं , यह हो गया , यह हो गया … अपना प्लैन आप ही बनाओ ।

276
01:46:13.880 --> 01:46:23.939
आज बाप का जन्म दिन मना रहे हो ना , तो जन्म दिन पर क्या करते हैं ?

277
01:46:23.939 --> 01:46:28.050
कोई न कोई गिफ्ट देते हैं ।

278
01:46:28.050 --> 01:46:31.710
देते हैं ना ?

279
01:46:31.710 --> 01:46:37.420
तो बाप को क्या गिफ्ट देंगे ?

280
01:46:37.819 --> 01:46:49.819
जो बाप ने कहा वह करके दिखाना , यही गिफ्ट देना ।

281
01:46:54.220 --> 01:47:09.770
और बापदादा भी आप सबको गिफ्ट दे रहा है , आपका भी तो जन्म दिन है ना , क्या गिफ्ट दे रहे हैं ?

282
01:47:11.369 --> 01:47:19.140
पक्का , जो लेने चाहे वह ले सकते हैं ।

283
01:47:19.140 --> 01:47:47.310
विशेष वरदान है , लेकिन वरदान काम में तब आयेगा जब रोज अमृतवेले इस वरदान को रिवाइज करेंगे ।

284
01:47:47.880 --> 01:47:53.770
गिफ्ट को रिवाइज करेंगे ।

285
01:47:53.770 --> 01:48:02.449
तो बापदादा यही गिफ्ट दे रहे हैं -

286
01:48:03.369 --> 01:48:30.170
एक कदम हिम्मत का कभी नहीं छोड़ना , तो बापदादा हजार कदम मदद का देगा ।

287
01:48:36.050 --> 01:48:46.909
ऐसे नहीं देखना देखें बाबा मदद करता है या नहीं , इम्तहान नहीं लेना ।

288
01:48:50.340 --> 01:48:53.310
बंधा हुआ है बाप ।

289
01:48:53.310 --> 01:49:02.449
आप भी बंधे हुए हो बाप भी बंधा हुआ है ।

290
01:49:06.000 --> 01:49:17.199
तो इस गिफ्ट को रोज बार-बार देखना ।

291
01:49:17.199 --> 01:49:26.970
कोई बढ़िया गिफ्ट होती है तो उसको बार बार देखते हैं बहुत बढ़िया , बहुत बढ़िया ।

292
01:49:28.970 --> 01:49:47.140
तो रोज अमृतवेले देखना और कर्म करते कर्मयोगी जीवन में भी बीच-बीच में रिवाइज करना ।

293
01:49:50.510 --> 01:49:54.909
अच्छा ।

294
01:49:56.399 --> 01:50:01.770
गिफ्ट ली , गिफ्ट दी ।

295
01:50:02.569 --> 01:50:05.420
अच्छा है ।

296
01:50:05.420 --> 01:50:24.170
बापदादा तो चारों ओर देख रहे हैं , सब अपनी अपनी कुटिया में , स्क्रीन में देख रहे हैं , सामने दिखाई दे रहे हैं ।

297
01:50:30.220 --> 01:50:52.220
जो नहीं भी आये हैं , सभी को बापदादा यह गिफ्ट दे रहे हैं ।

298
01:50:56.510 --> 01:51:21.649
बापदादा देखते हैं , सभी को चाहे दिन है , चाहे रात है , चाहे टाइम का फर्क है लेकिन प्यार जागरण करा देता है ।

299
01:51:26.510 --> 01:51:38.449
बाकी सभी बच्चों का कार्ड भेजा नहीं भेजा , ईमेल भेजा नहीं भेजा ,

300
01:51:38.449 --> 01:51:58.970
लेकिन दिल के संकल्प का ईमेल बापदादा के पास सभी का पहुंच गया है ।

301
01:52:02.109 --> 01:52:14.739
उत्साह में नाच रहे हैं , यह भी बापदादा देख रहे हैं ।

302
01:52:18.170 --> 01:52:40.680
तो जो भी जहाँ भी हैं , एक बच्चे का भी यादप्यार नहीं पहुंचा हो , यह है ही नहीं । सबका पहुंच गया है ।

303
01:52:42.680 --> 01:53:09.369
और बापदादा रेसपान्ड कर रहे हैं सदा उमंग-उत्साह का उत्सव मनाते रहना ।

304
01:53:15.250 --> 01:53:19.600
अच्छा ।

305
01:53:22.909 --> 01:53:35.539
अभी बापदादा कौन सी ड्रिल कराने चाहते हैं ?

306
01:53:43.420 --> 01:54:11.819
एक सेकण्ड में शान्ति की शक्ति स्वरूप बन जाओ ।

307
01:54:35.479 --> 01:54:49.710
एकाग्र बुद्धि , एकाग्र मन ।

308
01:56:11.539 --> 01:56:35.600
सारे दिन में एक सेकण्ड बीच-बीच में निकाल अभ्यास करो ।

309
01:56:39.649 --> 01:56:54.850
साइलेन्स का संकल्प किया और स्वरूप हुआ ।

310
01:57:03.649 --> 01:57:13.020
इसके लिए समय की आवश्यकता नहीं ।

311
01:57:15.020 --> 01:57:24.739
एक सेकण्ड का अभ्यास करो , साइलेन्स ।

312
01:57:55.310 --> 01:57:59.819
अच्छा ।

313
01:58:04.449 --> 01:58:59.199
सेवा का टर्न इन्दौर जोन का है :- अच्छा है शक्ति सेना ज्यादा है ।

314
01:59:02.109 --> 01:59:07.479
पाण्डव भी कम नहीं हैं ।

315
01:59:14.800 --> 01:59:41.880
तो देखो नाम ही है इन्डोर , सदा अन्तर्मुखता की तपस्या में रहने वाले ।

316
01:59:48.909 --> 02:00:04.510
अच्छा है , देखो इन्दौर की स्थापना में विशेषता है ।

317
02:00:04.510 --> 02:00:38.340
जानते हो ना - ब्रह्मा बाप के अव्यक्त होने से पहले ब्रह्मा बाप की प्रेरणा से यह इन्दौर का फाउण्डेशन पड़ा है ।

318
02:00:38.340 --> 02:01:10.569
कितना लक्की हैं और ब्रह्मा बाप की आशाओं को पूर्ण कर रहे हैं ना !

319
02:01:11.140 --> 02:01:29.770
जिस उमंग से , जिस विशेषता से बापदादा ने प्रेरणा दी

320
02:01:29.770 --> 02:01:51.079
उसी प्रेरणा प्रमाण सभी बापदादा को रेसपाण्ड कर रहे हैं ना !

321
02:01:57.649 --> 02:02:16.170
अच्छा है - सेवा का उमंग उत्साह अच्छा रहा है और रहता रहेगा ।

322
02:02:17.250 --> 02:02:31.140
अभी इन्दौर कमाल करे , क्या कमाल करेंगे टीचर्स ?

323
02:02:32.050 --> 02:02:35.819
पहला नम्बर लेंगे !

324
02:02:35.819 --> 02:02:38.449
परिवर्तन ।

325
02:02:38.449 --> 02:02:46.050
जो बापदादा ने कहा है उसमें पहला नम्बर इन्दौर ले ।

326
02:02:46.850 --> 02:02:48.619
लेंगे !

327
02:02:48.619 --> 02:02:53.250
लेंगे ?

328
02:02:58.279 --> 02:03:06.449
क्योंकि संगठन की शक्ति तो है ।

329
02:03:07.369 --> 02:03:25.020
संगठन की शक्ति देखो , 5 पाण्डव , तो 5 के संगठन ने क्या कमाल की ?

330
02:03:27.020 --> 02:03:34.850
तो संगठन में शक्ति होती है ।

331
02:03:35.250 --> 02:03:45.939
तो इतना बड़ा संगठन है तो क्या नहीं कर सकते हैं !

332
02:03:45.939 --> 02:03:51.710
जो चाहे वह कर सकते हैं ।

333
02:03:55.710 --> 02:04:09.479
तो कमाल करके दिखाओ , जो अभी तक नहीं किया है वह करके दिखाओ ।

334
02:04:20.340 --> 02:04:23.310
है हिम्मत !

335
02:04:23.310 --> 02:04:27.600
हिम्मत है ना टीचर्स !

336
02:04:27.600 --> 02:04:31.539
है हिम्मत ?

337
02:04:33.539 --> 02:04:37.369
अच्छी हैं ।

338
02:04:38.739 --> 02:04:49.880
देखो हिम्मत कर बड़े-बड़े प्रोग्राम्स भी तो करते हो ना ।

339
02:04:55.250 --> 02:05:08.850
तो नम्बरवन हर सबजेक्ट में बनना ही है, यह दृढ़ संकल्प करो।

340
02:05:14.220 --> 02:05:36.279
बापदादा ने देखा है जो हिम्मत रखते हैं , उनको बाप की मदद का अनुभव होता जरूर है ।

341
02:05:36.279 --> 02:05:47.369
लेकिन अलबेलापन बीच में आता है , यह तो होता ही है ।

342
02:05:50.220 --> 02:06:02.800
तीव्र पुरूषार्थ के बजाए कभी पुरूषार्थी , कभी तीव्र पुरूषार्थी बन जाते हैं ।

343
02:06:04.220 --> 02:06:21.079
सदा तीव्र पुरूषार्थ की लहर स्वयं में भी और सर्व को भी दिलावे ,

344
02:06:21.079 --> 02:06:29.880
यह नहीं समझो हम तो ठीक चल रहे हैं ।

345
02:06:31.880 --> 02:06:47.420
एक दो को सहयोग देके संगठित रूप में नम्बरवन बनें।

346
02:06:49.420 --> 02:07:08.340
कैसा भी गिरा हुआ हो , उसको भी साथी बनाके चलना सिखाओ ।

347
02:07:09.310 --> 02:07:15.020
सहयोगी बनो ।

348
02:07:21.539 --> 02:07:27.020
तो क्या करेंगे इन्दौर ?

349
02:07:29.020 --> 02:07:44.279
संगठन को निर्विघ्न , विघ्न का नाम-निशान नहीं हो ।

350
02:07:44.909 --> 02:08:07.020
जिसको भी देखो उसके चेहरे में बापदादा की चलन दिखाई दे ।

351
02:08:13.310 --> 02:08:16.619
क्या समझते हैं पाण्डव ?

352
02:08:16.619 --> 02:08:19.369
करेंगे ?

353
02:08:19.369 --> 02:08:22.850
करेंगे ।

354
02:08:24.850 --> 02:08:31.079
शक्तियां क्या समझती हैं ?

355
02:08:31.939 --> 02:08:38.000
यही सोचो हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा ।

356
02:08:38.000 --> 02:08:41.710
हम ही करेंगे ।

357
02:08:42.800 --> 02:08:50.109
ऐसे उमंग उत्साह सदा रखो ।

358
02:08:53.600 --> 02:08:55.600
और कर सकते हो ।

359
02:08:55.600 --> 02:09:02.449
संगठन में बहुत ताकत होती है ।

360
02:09:08.510 --> 02:09:12.050
अच्छा ।

361
02:09:12.050 --> 02:09:24.449
नम्बरवन विजयी भव का वरदान सदा याद रखना।

362
02:09:32.850 --> 02:09:53.079
55 देशों से 1 हजार डबल विदेशी आये हैं :-

363
02:10:10.619 --> 02:10:36.109
बापदादा ने देखा है कि डबल विदेशी अपना नियम बहुत अच्छा निभाते हैं ।

364
02:10:37.310 --> 02:11:09.310
आना है तो आते ही हैं और सभी ने मधुबन के सीजन की रौनक बढ़ाने का संकल्प कर लिया है

365
02:11:09.310 --> 02:11:30.220
तो हर टर्न में देखा गया है डबल विदेशियों का श्रृंगार मधुबन में होता ही है ।

366
02:11:32.220 --> 02:11:39.600
ताली बजाओ ।

367
02:11:46.800 --> 02:11:51.020
अच्छा है ।

368
02:11:51.369 --> 02:12:19.369
दिनप्रतिदन विदेश के सेवास्थानों में भी एक दो को उमंग उत्साह मिलन मनाते हुए ,

369
02:12:19.369 --> 02:12:51.819
उमंग-उल्हास दिलाने में भी बापदादा ने देखा कि इस समय एक दो के स्थान में भी आके शुभ भावना रखने का अच्छा कर रहे हैं ।

370
02:12:55.479 --> 02:13:01.539
सिस्टम भी अच्छी बनाते रहते हैं ।

371
02:13:04.850 --> 02:13:19.819
बापदादा खुश होते हैं कि कैसे भी पहुंच जाते हैं ।

372
02:13:19.819 --> 02:13:28.800
दूरदेशी नहीं लगते हैं , जैसे यहाँ के ही लगते हैं ।

373
02:13:33.199 --> 02:13:40.279
वैसे तो सबसे दूरदेश वाला कौन है ?

374
02:13:40.279 --> 02:13:45.649
डबल फारेनर्स कि बापदादा ?

375
02:13:59.369 --> 02:14:11.710
तो दूरदेशी को अपने हमजिन्स दूरदेशी प्यारे लगते हैं ।

376
02:14:18.449 --> 02:14:22.569
अच्छा ।

377
02:14:23.819 --> 02:15:23.369
डबल विदेशी कुछ प्रॉमिस करना चाहते हैं ( न्युयार्क की मोहिनी बहन ने वायदे पढ़े और सभी ने रिपीट किया ) दृढ़ संकल्प है कि

378
02:15:23.369 --> 02:15:37.079
हम हर कदम पर श्रीमत की पालना करेंगे ।

379
02:15:39.079 --> 02:15:48.510
मैं सब विघ्नों से सदा के लिए दूर रहूंगी रहूंगा ।

380
02:15:50.510 --> 02:16:10.399
स्वमान की सीट पर रहेंगे और सदा सबको सम्मान देंगे ।

381
02:16:11.250 --> 02:16:21.880
बापदादा की जो उम्मीदें हैं वह सब पूरा करेंगे ।

382
02:16:21.880 --> 02:16:33.649
मीठा बाबा , प्यारा बाबा , शुक्रिया बाबा ।

383
02:16:34.340 --> 02:16:39.819
) शुक्रिया बच्चे ।

384
02:16:44.110 --> 02:17:07.250
( माताओं की रिट्रीट भी चली ) बापदादा ने सुना था समाचार अच्छा है ।

385
02:17:18.049 --> 02:17:23.940
बहुत अच्छा ।

386
02:17:30.340 --> 02:17:49.479
अच्छा है , डबल फारेनर्स आगे से आगे उड़ते चलो और उड़ाते चलो ।

387
02:17:51.479 --> 02:17:56.680
अच्छा ।

388
02:18:46.680 --> 02:19:12.450
चारों ओर के जन्म उत्सव मनाने वाले भाग्यवान आत्माओं को

389
02:19:13.770 --> 02:19:37.540
सदा उत्साह में रहने वाले संगमयुग के उत्सव को मनाने वाले ,

390
02:19:39.540 --> 02:20:03.940
ऐसे सर्व उमंग उत्साह के पंखों से उड़ने वाले बच्चों को ,

391
02:20:05.370 --> 02:20:34.739
सदा मन और बुद्धि को एकाग्रता के अनुभवी बनाने वाले महावीर बच्चों को ,

392
02:20:34.739 --> 02:21:08.399
सदा समान बनने के उमंग को साकार रूप में लाने वाले फॉलो फादर करने वाले बच्चों को ,

393
02:21:09.649 --> 02:21:45.370
सदा एक दो के स्नेही सहयोगी हिम्मत दिलाने वाले बाप से मदद का वरदान दिलाने वाले वरदानी बच्चों को ,

394
02:21:45.370 --> 02:22:16.340
महादानी बच्चों को बापदादा का यादप्यार और पदम पदम पदम पदमगुणा मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

395
02:22:54.000 --> 02:23:21.649
दादियों से :- बापदादा के दिल में तो आप एक एक रतन महान हो क्योंकि अनेक आत्माओं के उमंग उत्साह बढ़ाने के निमित्त हो ।

396
02:23:22.510 --> 02:23:32.110
आपका उमंग देख स्वतः ही उन्हों में उमंग आता है ।

397
02:23:32.110 --> 02:23:40.799
दिलाना नहीं पड़ता है , नेचरल पहुंच जाता है ।

398
02:23:40.799 --> 02:23:49.200
आपका संगठन बहुत-बहुत पक्का है ।

399
02:23:49.200 --> 02:23:54.450
पक्का करना नहीं है , है ।

400
02:23:55.200 --> 02:24:04.399
एक-एक रत्न संगठन का श्रृंगार है ।

401
02:24:09.819 --> 02:24:47.079
( मनोहर दादी से ) क्लास में जाती तो है , आज्ञाकारी रही , बाप ने कहा आपने किया इसीलिए आज्ञाकारी लिस्ट में है ।

402
02:24:49.079 --> 02:24:59.479
और आप तो सारा संगठन जी हाँ , जी हाँ करने वाले हो ।

403
02:25:14.799 --> 02:25:50.219
( दादी जानकी ने कहा कि बाबा आपने कहा था - सदा हजूर हाजिर रहेगा , वही अनुभव होता रहता है ) बंधा हुआ है बाप ।

404
02:26:00.170 --> 02:26:14.049
देखो निमित्त बने हुए ग्रुप पर तो विशेष नज़र रहती है ना ।

405
02:26:14.049 --> 02:26:23.370
निमित्त वालों के ऊपर बापदादा का प्यार और नज़र सदा रहती है ।

406
02:26:23.370 --> 02:26:34.680
( बाबा आंखे गुलाबी हो जाएं तो हर्जा तो नहीं है ) वह प्यार है , आंसू नहीं है ।

407
02:26:41.309 --> 02:26:51.600
( अभी क्या करना है ) बनके बनाना है ।

408
02:26:52.510 --> 02:26:57.139
आपको बनाने की ड्युटी है ।

409
02:26:57.139 --> 02:27:01.540
उड़ाने की ड्युटी है ।

410
02:27:04.850 --> 02:27:09.309
सहज है ।

411
02:27:42.739 --> 02:27:52.510
( मोहनी बहन ने अंकल आंटी , परदादी आदि सबकी याद बापदादा को दी ) सभी की याद बाप के पास पहुंच गई ।

