WEBVTT

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00:04:37.199 --> 00:05:44.000
आज सर्व खज़ानों के मालिक बापदादा अपने चारों ओर के खज़ाने सम्पन्न बच्चों को देख रहे हैं ।

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00:06:02.910 --> 00:06:36.050
हर एक बच्चे के खज़ाने में कितने खज़ाने जमा हुए हैं ,

3
00:06:49.709 --> 00:07:00.970
यह देख हर्षित हो रहे हैं ।

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00:07:10.569 --> 00:07:42.399
खज़ाने तो सभी को एक ही समय एक ही जैसे मिले हैं

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00:07:47.370 --> 00:08:18.000
फिर भी जमा का खाता सभी बच्चों का अलग-अलग है ।

6
00:08:23.819 --> 00:09:00.740
क्योंकि समय प्रमाण अभी बापदादा सभी बच्चों को सर्व खज़ानों से सम्पन्न देखने चाहते हैं

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00:09:10.049 --> 00:09:31.139
क्योंकि यह खज़ाने सिर्फ अभी एक जन्म के लिए नहीं हैं ,

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00:09:33.879 --> 00:09:53.539
यह अविनाशी खज़ाने अनेक जन्म साथ चलने वाले हैं ।

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00:10:01.539 --> 00:10:29.139
इस समय के खज़ानों को तो सभी बच्चे जानते ही हो ।

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00:10:31.710 --> 00:11:05.309
बापदादा ने क्या क्या खज़ाने दिये हैं वह कहने से ही सबके सामने आ गये हैं ।

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00:11:10.620 --> 00:11:32.970
सबके सामने खज़ानों की लिस्ट इमर्ज हो गई है ना !

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00:11:54.620 --> 00:12:30.679
क्योंकि बापदादा ने पहले भी बताया है कि खज़ाने तो मिले लेकिन जमा करने की विधि क्या है ?

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00:12:35.200 --> 00:13:09.649
जो जितना निमित्त और निर्मान बनता है उतना ही खज़ाने जमा होते हैं ।

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00:13:15.769 --> 00:14:05.600
तो चेक करो - निमित्त और निर्मान बनने की विधि से हमारे खाते में कितने खज़ाने जमा हुए हैं ।

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00:14:17.200 --> 00:15:16.399
जितने खज़ाने जमा होंगे , भरपूर होगा उनके चलन और चेहरे से भरपूर आत्मा का रूहानी नशा स्वतः ही दिखाई देता है ।

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00:15:25.940 --> 00:16:01.940
उसके चेहरे पर सदा रूहानी नशा वा फखुर चमकता है

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00:16:08.740 --> 00:16:33.309
और जितना ही रूहानी फखुर होगा उतना ही बेफिक्र बादशाह होगा ।

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00:16:39.710 --> 00:17:09.200
रूहानी फखुर अर्थात् रूहानी नशा बेफिक्र बादशाह की निशानी है ।

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00:17:14.450 --> 00:17:57.599
तो अपने को चेक करो कि मेरे चलन और चेहरे पर बेफिक्र बादशाह का निश्चय और नशा है ?

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00:18:01.539 --> 00:18:08.740
दर्पण तो सबको मिली हुई है ना !

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00:18:12.910 --> 00:18:31.140
तो दिल के दर्पण में अपना चेहरा चेक करो ।

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00:18:32.849 --> 00:18:47.019
किसी भी प्रकार का फिक्र तो नहीं है ।

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00:18:50.400 --> 00:18:53.769
क्या होगा !

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00:18:53.769 --> 00:18:58.450
कैसे होगा !

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00:18:58.450 --> 00:19:04.049
यह तो नहीं होगा !

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00:19:09.769 --> 00:19:35.880
कोई भी संकल्प रह तो नहीं गया है ?

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00:19:45.769 --> 00:20:13.539
बेफिक्र बादशाह का संकल्प यही होगा जो हो रहा है

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00:20:16.910 --> 00:20:44.509
वह बहुत अच्छा और जो होने वाला है वह और ही अच्छे ते अच्छा होगा ।

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00:20:53.769 --> 00:21:24.279
इसको कहा जाता है फखुर , रूहानी फखुर अर्थात् स्वमानधारी आत्मा ।

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00:21:37.079 --> 00:22:06.450
विनाशी धन वाले जितना कमाते उतना समय प्रमाण फिकर में रहते ।

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00:22:16.109 --> 00:22:34.450
आपको अपने ईश्वरीय खज़ानों के लिए फिकर है ?

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00:22:40.509 --> 00:22:45.079
बेफिक्र हो ना !

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00:22:49.480 --> 00:23:10.910
क्योंकि जो खज़ानों के मालिक और परमात्म बालक हैं

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00:23:22.619 --> 00:23:40.740
वह सदा ही स्वप्न में भी बेफिक्र बादशाह हैं

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00:23:43.369 --> 00:24:06.910
क्योंकि उसको निश्चय है कि यह ईश्वरीय खज़ाने इस जन्म में तो क्या

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00:24:07.250 --> 00:24:32.220
लेकिन अनेक जन्म साथ हैं , साथ रहेंगे ।

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00:24:32.509 --> 00:24:49.079
इसीलिए वह निश्चयबुद्धि निश्चिंत हैं ।

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00:24:53.420 --> 00:25:12.049
तो आज बापदादा चारों ओर के बच्चों का जमा का खाता देख रहे थे ।

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00:25:18.799 --> 00:25:55.250
पहले भी सुनाया है कि विशेष तीन प्रकार के खाते जमा किये हैं और कर सकते हैं ।

40
00:26:03.599 --> 00:26:20.170
एक है - अपने पुरूषार्थ प्रमाण खज़ाने जमा करना ।

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00:26:20.170 --> 00:26:25.940
यह एक खाता है ।

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00:26:26.680 --> 00:26:38.970
दूसरा खाता है - दुआओं का खाता ।

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00:26:46.000 --> 00:27:03.880
दुआओं का खाता जमा होने का साधन है

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00:27:06.220 --> 00:27:33.019
सदा सम्बन्ध-सम्पर्क और सेवा में रहते हुए

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00:27:37.309 --> 00:28:03.599
संकल्प , बोल और कर्म में , तीनों में स्वयं भी स्वयं से सन्तुष्ट

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00:28:05.599 --> 00:28:19.140
और दूसरे भी सर्व और सदा सन्तुष्ट हों ।

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00:28:21.420 --> 00:28:36.509
सन्तुष्टता दुआओं का खाता बढ़ाती है ।

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00:28:43.369 --> 00:28:57.599
और तीसरा खाता है - पुण्य का खाता ।

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00:28:59.599 --> 00:29:09.769
पुण्य के खाते का साधन है -

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00:29:16.970 --> 00:29:39.819
जो भी सेवा करते हैं , चाहे मन से , चाहे वाणी से , चाहे कर्म से , चाहे सम्बन्ध में , सम्पर्क में आते

51
00:29:40.740 --> 00:30:14.339
सदा निःस्वार्थ और बेहद की वृत्ति , स्वभाव , भाव और भावना से सेवा करना ।

52
00:30:18.109 --> 00:30:33.420
इससे पुण्य का खाता स्वतः ही जमा हो जाता है ।

53
00:30:36.170 --> 00:30:42.619
तो चेक करो - चेक करना आता है ना !

54
00:30:42.619 --> 00:30:46.509
आता है ?

55
00:30:50.109 --> 00:30:57.079
जिसको नहीं आता हो वह हाथ उठाओ ।

56
00:30:57.079 --> 00:31:08.000
जिसको नहीं आता है , कोई नहीं है माना सभी को आता है ।

57
00:31:08.619 --> 00:31:13.309
तो चेक किया है ?

58
00:31:16.049 --> 00:31:45.940
कि स्व पुरूषार्थ का खाता , दुआओं का खाता , पुण्य का खाता तीनों कितनी परसेन्ट में जमा हुआ है ?

59
00:31:49.019 --> 00:31:51.599
चेक किया है ?

60
00:31:51.599 --> 00:32:01.710
जो चेक करता है वह हाथ उठाओ ।

61
00:32:01.710 --> 00:32:04.400
चेक करते हो ?

62
00:32:04.400 --> 00:32:08.049
पहली लाइन नहीं करती है ?

63
00:32:11.539 --> 00:32:14.970
चेक नहीं करते ?

64
00:32:14.970 --> 00:32:19.480
क्या कहते हैं ?

65
00:32:24.400 --> 00:32:29.539
करते हैं ना !

66
00:32:32.279 --> 00:33:16.170
क्योंकि बापदादा ने सुना दिया है , इशारा दे दिया है कि अभी समय की समीपता तीव्रगति से आगे बढ़ रही है

67
00:33:19.940 --> 00:33:46.109
इसलिए अपनी चेकिंग बारबार करनी है ।

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00:33:53.769 --> 00:34:32.739
क्योंकि बापदादा हर बच्चे को राजा बच्चा , राजयोगी सो राजा बच्चा देखने चाहते हैं ।

69
00:34:37.420 --> 00:35:13.309
यही परमात्म बाप को रूहानी नशा है कि एक-एक बच्चा राजा बच्चा है ।

70
00:35:18.110 --> 00:35:47.019
स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी परमात्म बच्चा है ।

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00:35:59.480 --> 00:36:12.400
तो खज़ाने तो बापदादा द्वारा मिलते ही रहते हैं ।

72
00:36:25.769 --> 00:36:50.340
इस खज़ानों के जमा करने की बहुत सहज विधि है -

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00:36:52.340 --> 00:37:04.000
विधि कहो या चाबी कहो , वह जानते हो ना !

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00:37:04.000 --> 00:37:09.539
जमा करने की चाबी क्या है ?

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00:37:09.539 --> 00:37:13.820
जानते हो ?

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00:37:14.679 --> 00:37:20.619
तीन बिन्दियां ।

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00:37:30.000 --> 00:37:35.420
है ना सभी के पास चाबी ?

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00:37:36.510 --> 00:37:47.599
तीन बिन्दियां लगाओ और खज़ाने जमा होते जायेंगे ।

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00:37:54.340 --> 00:38:05.820
माताओं को चाबी लगाने आती हैं ना , चाबी सम्भालने में होशियार होती हैं ना !

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00:38:06.619 --> 00:38:24.050
तो सभी माताओं ने यह तीन बिन्दियों की चाबी सम्भालकर रखी है , लगाई है ?

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00:38:24.050 --> 00:38:29.880
बोलो , मातायें चाबी है ?

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00:38:29.880 --> 00:38:33.079
जिसके पास है वह हाथ उठाओ ।

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00:38:33.079 --> 00:38:37.309
मातायें उठाओ ।

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00:38:41.199 --> 00:38:47.820
चाबी चोरी तो नहीं हो जाती है ?

85
00:38:58.400 --> 00:39:13.079
वैसे घर के हर चीज़ की चाबी माताओं को सम्भालने बहुत अच्छी आती है ।

86
00:39:15.079 --> 00:39:32.510
तो यह चाबी भी सदा साथ में रहती है ना ?

87
00:39:56.400 --> 00:40:20.340
तो वर्तमान समय बापदादा यही चाहते हैं -

88
00:40:21.769 --> 00:40:52.280
अभी समय समीप होने के नाते से बापदादा एक शब्द सभी बच्चों के अन्दर से ,

89
00:40:55.019 --> 00:41:13.880
संकल्प से , बोल से और प्रैक्टिकल कर्म से चेन्ज करना देखने चाहते हैं ।

90
00:41:20.800 --> 00:41:23.480
हिम्मत है ?

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00:41:23.480 --> 00:41:51.369
एक शब्द यही बापदादा हर बच्चे का परिवर्तन कराना चाहते हैं ,

92
00:41:53.369 --> 00:42:21.079
जो एक ही शब्द बार-बार तीव्र पुरूषार्थ से अलबेला पुरूषार्थी बना देता है

93
00:42:23.940 --> 00:42:37.480
और अभी समय अनुसार कौन सा पुरूषार्थ चाहिए ?

94
00:42:37.480 --> 00:42:59.539
तीव्र पुरूषार्थ और सब चाहते भी हैं कि तीव्र पुरूषार्थियों के लाइन में आयें

95
00:43:00.449 --> 00:43:14.449
लेकिन एक शब्द अलबेला कर देता है ।

96
00:43:16.449 --> 00:43:19.769
पता है वह ?

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00:43:20.739 --> 00:43:29.769
परिवर्तन करने के लिए तैयार हैं ?

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00:43:29.769 --> 00:43:32.969
है तैयार ?

99
00:43:32.969 --> 00:43:40.969
हाथ उठाओ , तैयार हैं ?

100
00:43:41.820 --> 00:43:46.000
देखो , आपका फोटो टी वी में आ रहा है ।

101
00:43:46.000 --> 00:43:54.340
तैयार हैं , अच्छा मुबारक हो ।

102
00:43:58.110 --> 00:44:15.199
अच्छा - तीव्र पुरूषार्थ से परिवर्तन करना है या कर लेंगे , देख लेंगे … ऐसे तो नहीं ?

103
00:44:17.199 --> 00:44:30.170
एक शब्द जान तो गये होंगे , क्योंकि सब होशियार हैं ,

104
00:44:31.139 --> 00:44:53.199
एक शब्द वह है कि कारण शब्द को परिवर्तन कर निवारण शब्द को सामने लाओ ।

105
00:44:54.110 --> 00:45:10.800
कारण सामने आने से वा कारण सोचने से निवारण नहीं होता है ।

106
00:45:11.940 --> 00:47:19.650
तो बापदादा संकल्प तक, सिर्फ बोलने तक नहीं लेकिन संकल्प तक यह कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन करने चाहते हैं क्योंकि कारण भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं और वह कारण शब्द सोचने में, बोलने में,कर्म में आने में तीव्र पुरूषार्थ के आगे बन्धन बन जाता है क्योंकि आप सभी का बापदादा से वायदा है, स्नेह से वायदा है कि हम सभी भी बाप के, विश्व परिवर्तन के कार्य में साथी हैं।

107
00:47:21.650 --> 00:47:33.309
बाप के साथी हैं , बाप अकेला नहीं करता है , बच्चों को साथ लाते हैं ।

108
00:47:36.739 --> 00:47:48.280
तो विश्व परिवर्तन के कार्य में आपका क्या कार्य है ?

109
00:47:48.280 --> 00:48:00.570
सर्व आत्माओं के कारणों को भी निवारण करना

110
00:48:11.940 --> 00:48:33.309
क्योंकि आजकल मैजारिटी दुःखी और अशान्त होने के कारण अभी मुक्ति चाहते हैं ।

111
00:48:35.309 --> 00:49:00.619
दुःख अशान्ति से , सर्व बन्धनों से मुक्ति चाहते हैं और मुक्तिदाता कौन ?

112
00:49:05.820 --> 00:49:20.280
बाप के साथ आप बच्चे भी मुक्तिदाता हैं ।

113
00:49:30.219 --> 00:49:47.769
आपके जड़ चित्रों से आज तक क्या मांगते हैं ?

114
00:49:55.250 --> 00:50:31.369
अभी दुःख अशान्ति बढ़ते देख सभी मैजारिटी आत्मायें आप मुक्तिदाता आत्माओं को याद करती हैं ।

115
00:50:32.219 --> 00:50:51.820
मन में दुःखी होके चिल्लाते हैं - हे मुक्तिदाता मुक्ति दो ।

116
00:50:53.820 --> 00:51:19.710
क्या आपको आत्माओं के दुःख अशान्ति की पुकार सुनने नहीं आती ?

117
00:51:34.110 --> 00:52:03.139
लेकिन मुक्तिदाता बन पहले इस कारण शब्द को मुक्त करो ।

118
00:52:04.800 --> 00:52:32.570
तो स्वतः ही मुक्ति का आवाज आपके कानों में गूंजेगा ।

119
00:52:33.079 --> 00:52:48.849
पहले अपने अन्दर से इस शब्द से मुक्त होंगे तो दूसरों को भी मुक्त कर सकेंगे ।

120
00:52:50.849 --> 00:53:19.309
अभी तो दिन-प्रतिदिन आपके आगे मुक्तिदाता मुक्ति दो की क्यू लगने वाली है ।

121
00:53:35.820 --> 00:54:12.969
लेकिन अभी तक अपने पुरूषार्थ में भिन्नभिन्न कारण शब्द के कारण मुक्ति का दरवाजा बन्द है ।

122
00:54:26.679 --> 00:54:44.280
इसीलिए आज बापदादा इस शब्द के , इसके साथ और भी कमज़ोर शब्द आते हैं ।

123
00:54:44.280 --> 00:54:55.139
विशेष है कारण फिर उसमें और भी कमज़ोरियाँ होती हैं ,

124
00:54:59.019 --> 00:55:32.000
ऐसे वैसे , कैसे , यह भी इनके साथी शब्द हैं , जो दरवाजे बन्द के कारण हैं ।

125
00:55:36.909 --> 00:55:43.820
तो आज सब होली मनाने आये हो ना ।

126
00:55:44.050 --> 00:55:48.170
सब भाग-भाग करके आये हैं ।

127
00:55:48.170 --> 00:55:54.619
स्नेह के विमान में चढ़के आये हैं ।

128
00:55:57.079 --> 00:56:07.480
बाप से स्नेह है , तो बाप के साथ होली मनाने पहुंच गये हैं ।

129
00:56:07.480 --> 00:56:12.849
मुबारक हो , भले पधारे ।

130
00:56:12.849 --> 00:56:17.710
बापदादा मुबारक देते हैं ।

131
00:56:24.619 --> 00:56:38.219
बापदादा देख रहे हैं , कुर्सी पर चलने वाले भी ,

132
00:56:40.739 --> 00:56:54.510
तबियत थोड़ी नीचे ऊपर होते भी हिम्मत से पहुंच गये हैं ।

133
00:56:55.710 --> 00:57:03.369
बापदादा यह दृश्य देखते हैं , यहाँ क्लास में आते हैं ना ।

134
00:57:03.369 --> 00:57:15.369
प्रोग्राम में आते हैं तो चेयर पर भी चलके पण्डे को पकड़कर आ जाते हैं ।

135
00:57:15.369 --> 00:57:18.849
तो इसको क्या कहा जायेगा ?

136
00:57:18.849 --> 00:57:24.000
परमात्म प्यार ।

137
00:57:24.000 --> 00:57:40.050
बापदादा भी ऐसे हिम्मतवान स्नेही , दिल के स्नेही

138
00:57:40.050 --> 00:58:02.619
बच्चों को बहुत-बहुत दिल की दुआयें , दिल का प्यार विशेष दे रहे हैं ।

139
00:58:04.110 --> 00:58:18.000
हिम्मत रखके आये हैं , बाप के और परिवार की मदद है ही ।

140
00:58:18.849 --> 00:58:26.739
सभी को स्थान ठीक मिला है ?

141
00:58:26.739 --> 00:58:28.739
मिला है ?

142
00:58:28.739 --> 00:58:36.619
जिसको स्थान ठीक मिला है वह हाथ उठाओ ।

143
00:58:36.619 --> 00:58:42.909
फॉरेनर्स को ठीक मिला है ?

144
00:58:50.679 --> 00:58:55.019
मेला है मेला ।

145
00:58:56.449 --> 00:59:08.280
वहाँ मेले में तो रेत भी चलती रहती है , खाना भी चलता रहता है ।

146
00:59:10.800 --> 00:59:17.710
आपको ब्रह्मा भोजन अच्छा मिला , मिलता है ?

147
00:59:17.710 --> 00:59:21.199
अच्छा हाथ हिला रहे हैं ।

148
00:59:21.599 --> 00:59:27.769
सोने की तीन पैर पृथ्वी मिली ।

149
00:59:30.739 --> 00:59:40.739
ऐसा मिलन फिर 5 हजार वर्ष के बाद संगम पर ही होगा ।

150
00:59:40.739 --> 00:59:45.820
फिर नहीं होगा ।

151
00:59:47.820 --> 01:00:07.480
तो आज बापदादा को संकल्प है कि सब बच्चों के जमा खाते को देखें ।

152
01:00:07.480 --> 01:00:29.769
देखा भी है , आगे भी देखेंगे क्योंकि बापदादाने यह पहले ही बच्चों को सूचना दे दी है

153
01:00:30.679 --> 01:00:48.050
कि जमा के खाते जमा करने का समय अब संगमयुग है ।

154
01:00:48.739 --> 01:01:01.139
इस संगमयुग पर अबजितना जमा करने चाहो ,

155
01:01:03.139 --> 01:01:12.739
सारे कल्प का खाता अब जमा कर सकते हो ।

156
01:01:13.019 --> 01:01:20.969
फिर जमा के खाते की बैंक ही बन्द हो जायेगी ।

157
01:01:20.969 --> 01:01:25.199
फिर क्या करेंगे ?

158
01:01:28.400 --> 01:01:39.710
इसलिए बापदादा को बच्चों से प्यार है ना ।

159
01:01:40.340 --> 01:01:56.849
तो बापदादा जानते हैं कि बच्चे अलबेलेपन में कभी भूल जातेहैं ,

160
01:01:56.849 --> 01:02:10.340
हो जायेगा , देख लेंगे , कर तो रहे हैं , चल तो रहे हैं ना ।

161
01:02:10.340 --> 01:02:23.309
बड़े मजे से कहते , आप देख नहीं रहे हो , हम कर रहे हैं , हाँचल तो रहे हैं और क्या करें ?

162
01:02:25.309 --> 01:02:36.619
लेकिन चलना और उड़ना कितना फर्क है ?

163
01:02:39.480 --> 01:02:45.199
चल रहे हो मुबारक है ।

164
01:02:45.199 --> 01:02:59.420
लेकिन अभी चलने कासमय समाप्त हो रहा है ।

165
01:02:59.420 --> 01:03:05.420
अभी उड़ने का समय है ।

166
01:03:05.420 --> 01:03:11.710
तभी मंज़िल पर पहुंच सकेंगे ।

167
01:03:12.739 --> 01:03:27.650
साधारण प्रजा में आना , भगवान का बच्चाऔर साधारण प्रजा !

168
01:03:27.650 --> 01:03:32.280
शोभता है ?

169
01:03:34.619 --> 01:03:57.480
इसीलिए बापदादा यही चाहता है कि आज से होली का अर्थ है ना - बीती सो बीती ।

170
01:03:58.619 --> 01:04:23.019
तोहोली मनाने आये हो , तो बीती सो बीती , कोई भी कारण से अगर कोई भी कमज़ोरी रही हुई है

171
01:04:23.880 --> 01:04:47.940
तो अब घड़ी बीती सो बीती कर अपना चित्र स्मृति में लाओ ,

172
01:04:47.940 --> 01:05:01.769
अपना ही चित्रकार बन अपना चित्र निकालो ।

173
01:05:05.079 --> 01:05:32.050
पता है - बापदादा अभी भी एक-एक बच्चे का कौन सा चित्र सामने देख रहा है ?

174
01:05:34.050 --> 01:05:40.849
पता है कौन सा चित्र देख रहे हैं ?

175
01:05:47.369 --> 01:05:56.170
अभी आप सभी भी अपना चित्र खींचो ।

176
01:05:58.170 --> 01:06:04.050
आता है चित्र खींचने आता है ना !

177
01:06:06.050 --> 01:06:35.250
श्रेष्ठ संकल्प की कलम से अपना चित्र अभी-अभी सामने लाओ ।

178
01:06:45.420 --> 01:06:57.019
पहले सभी ड्रिल करो , माइन्ड ड्रिल ।

179
01:06:58.000 --> 01:07:07.480
कर्मेन्द्रियों की ड्रिल नहीं , मन की ड्रिल करो ।

180
01:07:07.480 --> 01:07:13.539
रेडी , ड्रिल करने के लिए रेडी हैं ।

181
01:07:13.539 --> 01:07:18.219
कांध हिलाओ ।

182
01:07:23.599 --> 01:07:58.219
देखो सबसे श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ चित्र होता है , ताज , तख्त , तिलकधारी का ।

183
01:08:02.219 --> 01:08:14.739
तो अपना चित्र सामने लाओ ।

184
01:08:18.510 --> 01:08:50.800
और सब संकल्प किनारे कर देखो , आप सभी बापदादा के दिलतख्त नशीन हैं ।

185
01:08:50.800 --> 01:08:54.000
तख्त है ना !

186
01:08:54.000 --> 01:09:00.399
ऐसा तख्त तो कहाँ भी नहीं मिलेगा ।

187
01:09:00.399 --> 01:09:22.909
तो पहले यह चित्र निकालो कि मैं विशेष आत्मा , स्वमानधारी आत्मा ,

188
01:09:22.909 --> 01:09:51.369
बापदादा की पहली रचना श्रेष्ठ आत्मा , बापदादा के दिलतख्तनशीन हूँ ।

189
01:10:02.569 --> 01:10:07.539
तख्तनशीन हो गये !

190
01:10:09.369 --> 01:11:00.850
साथ में परमात्म रचना इस वृक्ष के जड़ में बैठी हुई पूर्वज और पूज्य आत्मा हूँ, इस स्मृति का तिलकधारी हूँ।

191
01:11:05.649 --> 01:11:12.399
स्मृति का तिलक लगाया !

192
01:11:17.020 --> 01:11:42.340
साथ में बेफिकर बादशाह , सारा फिकर का बोझ बापदादा को

193
01:11:45.770 --> 01:12:03.819
अर्पण कर डबल लाइट की ताजधारी हूँ ।

194
01:12:15.140 --> 01:13:04.739
तो ताज , तिलक और तख्तधारी , ऐसी बाप अर्थात् परमात्म प्यारी आत्मा हूँ ।

195
01:13:18.800 --> 01:13:30.449
तो यह चित्र अपना खींच लिया ।

196
01:13:35.479 --> 01:14:02.800
सदा यह डबल लाइट का ताज चलते फिरते धारण कर सकते हो ।

197
01:14:03.649 --> 01:14:21.539
कभी भी अपना स्वमान याद करो

198
01:14:22.569 --> 01:14:58.000
तो यह ताज , तिलक , तख्तनशीन आत्मा हूँ , यह अपना चित्र दृढ़ संकल्प द्वारा सामने लाओ ।

199
01:15:04.850 --> 01:15:45.819
याद है - शुरू-शुरू में आप लोगों का अभ्यास बार-बार एक शब्द की स्मृति में रहता था , वह एक शब्द था - मैं कौन ?

200
01:15:49.710 --> 01:15:54.449
यह मैं कौन ?

201
01:15:56.449 --> 01:16:07.819
यह शब्द बार-बार स्मृति में लाओ

202
01:16:09.020 --> 01:16:26.510
और अपने भिन्न-भिन्न स्वमान , टाइटल , भगवान के मिले हुए टाइटल ।

203
01:16:26.510 --> 01:16:45.140
आजकल लोगों को , मनुष्य को मनुष्य से टाइटल मिलता तो भी कितना महत्व समझते हैं

204
01:16:45.880 --> 01:16:59.369
और आप बच्चों को बाप द्वारा कितने टाइटल मिले हैं ?

205
01:16:59.369 --> 01:17:02.850
स्वमान मिले हैं ?

206
01:17:02.850 --> 01:17:17.539
सदा स्वमान की लिस्ट अपने बुद्धि में मनन करते रहो ।

207
01:17:18.279 --> 01:17:22.279
मैं कौन ?

208
01:17:22.909 --> 01:17:26.449
लिस्ट लाओ ।

209
01:17:26.449 --> 01:17:48.569
इसी नशे में रहो तो कारण जो हैं ना , वह शब्द मज र् हो जायेगा और निवारण , हर कर्म में दिखाई देगा ।

210
01:17:50.569 --> 01:18:01.079
जब निवारण का स्वरूप बन जायेंगे

211
01:18:06.619 --> 01:18:39.479
तो सव र् आत्माओं को निर्वाणधाम , मुक्तिधाम में सहज जाने का रास्ता बताए मुक्त कर लेंगे ।

212
01:18:46.619 --> 01:19:00.680
दृढ़ संकल्प करो - आता है दृढ़ संकल्प करना ?

213
01:19:01.199 --> 01:19:21.710
जब दृढ़ता होती है तो दृढ़ता सफलता की चाबी है ।

214
01:19:25.140 --> 01:19:39.880
जरा भी दृढ़ संकल्प में कमी नहीं लाओ

215
01:19:41.880 --> 01:19:56.279
क्योंकि माया का काम है हार खिलाना और आपका काम क्या है ?

216
01:19:58.279 --> 01:20:15.020
आपका काम है - बाप के गले का हार बनना , न माया से हार खाना ।

217
01:20:20.279 --> 01:20:48.449
तो सभी यह संकल्प करो मैं सदा बाप के गले की विजय माला हूँ ।

218
01:20:48.449 --> 01:20:53.479
गले का हार हूँ ।

219
01:20:53.479 --> 01:21:02.569
गले का हार विजयी हार है ।

220
01:21:05.770 --> 01:21:15.819
तो बापदादा हाथ उठवाते हैं तो आप क्या बनेंगे ?

221
01:21:15.819 --> 01:21:20.970
सब क्या उत्तर देते हैं ?

222
01:21:20.970 --> 01:21:27.479
एक ही उत्तर देते हैं लक्ष्मी-नारायण बनेंगे ।

223
01:21:27.479 --> 01:21:32.399
रामसीता नहीं ।

224
01:21:35.369 --> 01:21:49.939
तो लक्ष्मी-नारायण बनने वाले हम बापदादा के विजयी माला के मणके हैं ,

225
01:21:54.800 --> 01:22:17.939
पूज्य आत्मायें हैं , आपके माला का मणका जपते जपते अपनी समस्याओं को समाप्त करते हैं ।

226
01:22:20.850 --> 01:22:28.619
ऐसे श्रेष्ठ मणके हो ।

227
01:22:33.819 --> 01:22:37.649
तो आज बापदादा को क्या देंगे ?

228
01:22:37.649 --> 01:22:43.649
होली की कोई तो गिफ्ट देंगे ना !

229
01:22:44.510 --> 01:22:59.600
यह कारण शब्द , यह तो तो , और कारण , तो तो करेंगे तो तोता बन जायेंगे ना ।

230
01:23:00.340 --> 01:23:15.479
तो तो भी नहीं , ऐसे वैसे भी नहीं , कोई भी प्रकार का कारण नहीं , निवारण ।

231
01:23:26.909 --> 01:23:57.420
तो आज , होली बापदादा के सदा संग में रहने की , कम्बाइण्ड रहने की होली मनाई ?

232
01:23:58.399 --> 01:24:11.140
सबसे पक्के में पक्का संग में रहना है कम्बाइण्ड रूप ।

233
01:24:12.680 --> 01:24:26.000
साथ वाला फिर भी आगे पीछे हो सकता लेकिन कम्बाइण्ड सदा साथ रहता है ।

234
01:24:26.680 --> 01:24:40.399
तो होली अर्थात् बाप के संग के रंग में रहना ।

235
01:24:45.479 --> 01:24:56.680
बाप का रंग लगाना है अर्थात् समान बनना है ।

236
01:25:03.880 --> 01:25:10.739
तो कम्बाइण्ड हैं ना कि कभी-कभी हैं !

237
01:25:10.739 --> 01:25:22.970
कई बच्चे देखा है पुरूषार्थ करके थोड़े कमज़ोर हो जाते हैं ना

238
01:25:22.970 --> 01:25:38.970
तो अकेलापन पसन्द करते हैं , कोई को साथ नहीं पसन्द करते , अकेला रहना , अकेला सोचना ,

239
01:25:40.170 --> 01:25:49.369
यह अकेलापन भी नहीं ठीक , प्रभू परिवार है ।

240
01:25:49.369 --> 01:26:00.220
इतने प्रभु परिवार के साथी अकेले कैसे होंगे !

241
01:26:02.220 --> 01:26:07.770
यह माया की चालाकी हैं ।

242
01:26:09.770 --> 01:26:18.000
पहले अकेला कर देती फिर वार करती ।

243
01:26:21.199 --> 01:26:29.310
माला में देखो अकेला मोती है ?

244
01:26:30.449 --> 01:26:37.199
माला में विशेषता क्या है ?

245
01:26:37.199 --> 01:26:55.600
एक मोती का दूसरे मोती से समीप का सम्बन्ध है , जरा भी बीच में धागा नहीं दिखता है ।

246
01:26:59.310 --> 01:27:18.739
स्नेही , सहयोगी , साथी यही आपका यादगार है ।

247
01:27:22.510 --> 01:27:25.939
तो होली मनाई ?

248
01:27:25.939 --> 01:27:38.449
बाप समान बनना अर्थात् संग के रंग में आ जाना ।

249
01:27:40.449 --> 01:27:44.000
तो सबका संकल्प क्या है ?

250
01:27:44.000 --> 01:27:48.109
समान बनना है ना !

251
01:27:48.109 --> 01:28:05.420
बाप को खुशी है , बापदादा एक-एक बच्चे को समान बनने की ,

252
01:28:05.420 --> 01:28:19.020
श्रेष्ठ संकल्प करने की पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं ।

253
01:28:19.020 --> 01:28:29.199
मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

254
01:28:40.050 --> 01:28:58.510
नशा है ना - हमारे जितना पदम-पदम भाग्यवान कौन ?

255
01:29:11.250 --> 01:29:18.680
इसी नशे में रहो ।

256
01:29:24.739 --> 01:29:40.909
जो पहले बारी मिलने आये हैं वह हाथ उठाओ ।

257
01:30:11.819 --> 01:30:25.079
तो पहले बारी जो बच्चे हिम्मत रखके आये हैं

258
01:30:26.680 --> 01:30:52.279
उन्हों को विशेष बापदादा इस संगठन के मौज मनाने की मुबारक दे रहे हैं

259
01:30:55.710 --> 01:31:15.819
और साथ में विशेष वरदान दे रहे हैं - वह वरदान है अमर भव ।

260
01:31:28.510 --> 01:32:01.310
यह वरदान सदा अमृतवेले मिलन मनाने के बाद सारे दिन के लिए बार-बार याद रखना ।

261
01:32:01.880 --> 01:32:16.970
अमर हूँ , अमर बाप का बच्चा हूँ , अमरपद प्राप्त करने वाली आत्मा हूँ ।

262
01:32:17.649 --> 01:32:29.420
जन्म भले लेंगे लेकिन सुख शान्ति अमर रहेगी ।

263
01:32:36.449 --> 01:32:40.399
अच्छा ।

264
01:32:55.020 --> 01:33:26.279
सेवा का टर्न दिल्ली-आगरा का है :- बापदादा ने देखा है

265
01:33:26.510 --> 01:33:44.279
जिस भी जोन को टर्न मिलता है ना वह बड़ी दिल से , खुली दिल से सभी को चांस दिला देते हैं ।

266
01:33:44.279 --> 01:33:51.600
अच्छा है यह , डबल फायदा हो जाता है ।

267
01:33:51.600 --> 01:34:06.340
एक है यज्ञ सेवा का और दूसरा यज्ञ सेवा का पुण्य तो बहुत बड़ा है ।

268
01:34:06.340 --> 01:34:17.079
एक का लाख गुणा फल मिलता है ।

269
01:34:17.079 --> 01:34:25.649
यज्ञ की महिमा कम नहीं है ।

270
01:34:30.569 --> 01:34:38.680
तो जो भी आते हैं उनको बहुत फायदे हैं ।

271
01:34:38.680 --> 01:34:48.399
एक यज्ञ सेवा का पुण्य जमा होता है

272
01:34:48.399 --> 01:35:10.109
और दूसरा इतनी श्रेष्ठ आत्मायें मधुबन में ही इकट्ठी मिलती हैं ।

273
01:35:13.140 --> 01:35:27.369
चाहे पाण्डव हैं , चाहे दादियां हैं , चाहे महारथी बहन-भाई हैं

274
01:35:27.369 --> 01:35:39.420
और साथ में इतना बेहद का परिवार कहाँ मिलेगा आपको ।

275
01:35:39.420 --> 01:35:46.909
सतयुग में भी छोटा परिवार होगा ।

276
01:35:50.619 --> 01:35:58.680
अभी कितनी संख्या आई है ?

277
01:36:03.199 --> 01:36:28.619
( 17 , 500 भाई-बहनें आये हैं , उसमें 500 बच्चे हैं ) 500 बच्चे आये हैं तो कितने तकदीरवान हैं ।

278
01:36:33.079 --> 01:36:51.770
इतने हजारों का परिवार न सतयुग में मिलेगा , न त्रेता में मिलेगा , न द्वापर , कलियुग में मिलेगा ।

279
01:36:51.770 --> 01:36:59.710
ऐसा एक परिवार 17 हजार का परिवार , कभी सुना है !

280
01:36:59.710 --> 01:37:04.000
सम्भालना ही मुश्किल हो जाए ।

281
01:37:05.079 --> 01:37:13.310
लेकिन यहाँ देखो सभी मजे मजे से रह रहे हैं ।

282
01:37:13.880 --> 01:37:18.279
तो कितना फायदा है ।

283
01:37:18.279 --> 01:37:26.909
परिवार से मिलना कब नहीं होता है ।

284
01:37:27.710 --> 01:37:40.170
और यह तो विशेष भगवान का परिवार है ।

285
01:37:46.220 --> 01:37:58.340
अच्छा दिल्ली वालों ने भविष्य राजधानी दिल्ली को बनाना है ना ।

286
01:37:58.340 --> 01:38:00.399
पक्का है ना !

287
01:38:00.399 --> 01:38:03.310
तैयार हो ना !

288
01:38:03.600 --> 01:38:14.399
तो सभी के लिए बहुत बड़ा परिवार है , सभी आपकी दिल्ली में आयेंगे ।

289
01:38:14.399 --> 01:38:18.909
साथी बनेंगे आपके ?

290
01:38:19.479 --> 01:38:23.199
तो तैयारी भी तो करनी है ना ।

291
01:38:23.199 --> 01:38:26.109
तो तैयारी की है दिल्ली में ?

292
01:38:26.109 --> 01:38:31.600
आह्वाहन किया है सभी को ?

293
01:38:34.909 --> 01:38:41.479
अभी तो दिल्ली खिटपिट में हो ।

294
01:38:42.739 --> 01:38:50.340
रोज खबरें सुनो तो क्या खबरें आती हैं ?

295
01:38:50.340 --> 01:38:54.220
गड़बड़ सड़बड़ ।

296
01:38:54.220 --> 01:38:58.680
और अब क्या बनेंगी ?

297
01:38:58.680 --> 01:39:01.939
कौन सी दिल्ली बनेंगी ?

298
01:39:01.939 --> 01:39:07.369
सोने की दिल्ली बनेंगी ।

299
01:39:10.569 --> 01:39:14.680
सभी को स्थान देंगे ना ।

300
01:39:16.680 --> 01:39:21.770
सभी को राजधानी में मंगायेंगे ना ।

301
01:39:24.510 --> 01:39:32.050
तो दिल्ली वालों को पहले दिल्ली को तैयार करना पड़ेगा ।

302
01:39:32.050 --> 01:39:36.680
तब तो आयेंगे ना सभी ।

303
01:39:40.399 --> 01:39:48.970
दिल्ली वालों में विशेषतायें हैं ।

304
01:39:48.970 --> 01:40:06.800
बापदादा ने देखा है कि दिल्ली वालों ने कई सेवाओं की विशेषतायें इमर्ज की हैं ।

305
01:40:08.800 --> 01:40:12.850
निमित्त बनें हैं ।

306
01:40:17.939 --> 01:40:58.449
अभी दिल्ली को सोने की दिल्ली बनाने के लिए ऐसा कोई प्लैन बनाओ जो सबके दिल से निकले वाह !

307
01:40:58.449 --> 01:41:12.050
निमित्त दिल्ली वाले आपने हमको स्वर्ग का राज्य भाग्य दिला दिया !

308
01:41:18.170 --> 01:41:21.939
क्योंकि दिल्ली में ही स्वर्ग बनना है ।

309
01:41:21.939 --> 01:41:27.420
स्थापना तो वहाँ होनी है ।

310
01:41:27.939 --> 01:41:51.020
अच्छा है , संगठन भी अच्छा है और सेवा के प्लैन बनाने में भी विशेष आत्मायें हैं ।

311
01:41:56.569 --> 01:42:23.819
और दिल्ली से साकार ब्रह्मा और जगदम्बा और निमित्त बनी हुई सर्व दादियों का प्यार रहा है ।

312
01:42:25.819 --> 01:42:30.399
कोई दादी है जो दिल्ली में नहीं गई हो !

313
01:42:32.399 --> 01:42:35.479
कोई नहीं है ।

314
01:42:50.220 --> 01:43:01.539
तो दिल्ली वाले अभी सेवा में भी कोई नया प्लैन बनाओ ।

315
01:43:03.819 --> 01:43:15.479
अभी सभी जोन नवीनता चाहते हैं , क्योंकि बहुत कर चुके हैं ना ।

316
01:43:15.479 --> 01:43:36.220
अभी अमृतवेले खास बैठना और कोई नये प्लैन को सोचना , निकल आयेगा ।

317
01:43:46.000 --> 01:43:55.939
अभी भी जो सेवा कर रहे हो वह अच्छी कर रहे हो ।

318
01:43:55.939 --> 01:44:05.420
सभी जोन कुछ न कुछ करते तो रहते हैं ।

319
01:44:10.109 --> 01:44:34.800
बापदादा ने सुना - कि जहाँ बापदादा ने बच्चों को सेवा करने के लिए गिफ्ट में स्थान बनाके दिया है ,

320
01:44:34.800 --> 01:44:53.079
चाहे दिल्ली ओ आर सी में , चाहे हैदराबाद में , हैदराबाद वाली कहाँ है ( कुलदीप बहन को )

321
01:44:53.079 --> 01:45:08.739
अभी वहाँ भी अच्छी सेवा की लहर आरम्भ हो गई है ।

322
01:45:09.310 --> 01:45:25.199
अच्छी हिम्मत रखी है , हिम्मत की बापदादा विशेष मुबारक दे रहे हैं ।

323
01:45:27.939 --> 01:45:43.710
दिल्ली में भी भिन्न-भिन्न प्रकार से स्थान बिजी रखने में अच्छी मेहनत कर रहे हैं ।

324
01:45:51.600 --> 01:46:11.369
वैसे बापदादा के पास सभी जोन भिन्न-भिन्न रूप में , जैसे गुजरात है

325
01:46:11.369 --> 01:46:21.710
वह यूथ की कर रहे हैं , चाहे गांव में कर रहे हैं , चाहे यूथ की कर रहे हैं ।

326
01:46:24.050 --> 01:46:44.619
तो हर एक जोन अपने-अपने हिसाब से सेवा में अच्छी रूचि रख रहे हैं

327
01:46:44.619 --> 01:47:02.449
क्योंकि हर एक जोन में भिन्न-भिन्न वर्ग होने के कारण वर्गीकरण की सेवा सहज है ।

328
01:47:03.250 --> 01:47:16.449
समाचार तो बापदादा के पास आता है , बापदादा खुश होते हैं लेकिन अभी चाहिए ,

329
01:47:17.649 --> 01:47:39.479
जैसे पहले छोटा-छोटा बेल बजाके एडवरटाइज करते हैं और कहाँ-कहाँ बड़े ते बड़ा ढोल बजाते हो ,

330
01:47:39.479 --> 01:47:45.710
वार्निग देते हैं यह होना है , यह होना है ।

331
01:47:45.710 --> 01:47:55.250
अभी ऐसा कोई बुलन्द आवाज का बड़ा ढोल बजाओ ।

332
01:47:55.250 --> 01:48:01.020
छोटे-छोटे ढोल बज रहे हैं ।

333
01:48:03.649 --> 01:48:29.649
शिवरात्रि पर बापदादा ने देखा कि कईयों ने बोर्ड भी लगाये , आ गया , आ गया … लेकिन सबके दिलों तक नहीं पहुंचा है ।

334
01:48:32.399 --> 01:48:52.340
अभी सबके दिल में यह आवाज आवे , हमारा बाबा आ गया ।

335
01:48:57.310 --> 01:49:02.340
तो कौन सा जोन पहले करेगा ?

336
01:49:03.079 --> 01:49:13.020
जो भी जोन करे बापदादा सभी को चांस देते हैं ।

337
01:49:13.479 --> 01:49:22.909
कम से कम जो वर्ग का प्रोग्राम करते हो

338
01:49:23.710 --> 01:49:50.449
उसमें आई हुई सारी सभा दिल से कहे , नारा नहीं लगाये आ गया , आ गया , दिल से कहे हमारा बाबा आ गया ।

339
01:49:55.140 --> 01:50:16.340
थोड़े बोलते हैं , थोड़े समझते हैं लेकिन सारी सभा अपने उमंग उत्साह से कहे आ गया ।

340
01:50:24.340 --> 01:50:27.369
यह तो कर सकते हो ।

341
01:50:27.369 --> 01:50:33.939
सारी सभा को तैयार करो ।

342
01:50:33.939 --> 01:50:44.970
आते तो हैं , लेकिन मानें भी ।

343
01:50:53.079 --> 01:51:02.510
समय तो समीप आ ही रहा है तो मुबारक है दिल्ली वालों को ।

344
01:51:02.510 --> 01:51:12.340
क्योंकि दिल्ली वालों की जिम्मेवारी बहुत बड़ी है ।

345
01:51:14.800 --> 01:51:26.569
और पहले-पहले सेवा की स्थापना कायदे प्रमाण ,

346
01:51:27.819 --> 01:51:42.399
आजकल के कायदे प्रमाण सेन्टर नहीं , लेकिन सेवा का आरम्भ दिल्ली से हुआ है ।

347
01:51:50.970 --> 01:51:54.619
तो अभी और कमाल करना ।

348
01:51:54.619 --> 01:52:00.619
कोई की भी बुद्धि में प्लैन आ सकता है ।

349
01:52:03.600 --> 01:52:10.220
अच्छा - मुबारक हो ।

350
01:52:29.310 --> 01:52:55.479
आगरा वाले उठो - थोड़े हैं ।

351
01:52:55.479 --> 01:53:06.850
फिर भी आगरा वाले विशेष सेवा कर सकते हैं ।

352
01:53:08.850 --> 01:53:28.399
जो आजकल की गवर्मेन्ट है उस गवर्मेन्ट द्वारा आगरा में सेवा होती है ,

353
01:53:28.399 --> 01:53:50.800
उससे भी ज्यादा आगरा में आलमाइटी गवर्मेन्ट द्वारा सेवा होनी है ।

354
01:53:51.600 --> 01:54:12.399
तो अभी ऐसा प्लैन आगरा वाले बनाओ जो आलमाइटी गवर्मेन्ट की सेवा का नाम बुलन्द हो ।

355
01:54:14.109 --> 01:54:33.539
जब दूसरे बारी आओ तो सारी सेवा का आपस में प्लैन बनाके कोई साथी बनाना हो ,

356
01:54:33.880 --> 01:55:01.079
कोई की मदद लेनी हो तो मदद भी लेके बापदादा को प्रैक्टिकल रिजल्ट बताना कि इस वर्ष यह यह सेवा विशेष हुई ।

357
01:55:01.079 --> 01:55:06.739
टीचर्स कहाँ हैं ?

358
01:55:06.739 --> 01:55:10.109
तो करेंगे ?

359
01:55:10.109 --> 01:55:13.600
सारा प्लैन बनाके आना ।

360
01:55:13.600 --> 01:55:27.770
कहाँ-कहाँ की , जैसे कई जोन बनाके लाते हैं , कहाँ-कहाँ की , क्या नवीनता की ,

361
01:55:27.770 --> 01:55:34.909
कहॉ तक आवाज फैला यह सारा रिकार्ड ले आना ।

362
01:55:35.479 --> 01:55:37.420
ठीक है ।

363
01:55:37.420 --> 01:55:47.479
हैं थोड़े लेकिन 5 पाण्डवों ने क्या नहीं किया ।

364
01:55:48.619 --> 01:56:01.079
तो आप यह कमाल दिखाओ , संख्या कम और सेवा सबसे ज्यादा ।

365
01:56:03.079 --> 01:56:04.739
ठीक है ।

366
01:56:04.739 --> 01:56:07.770
अच्छा है ।

367
01:56:07.770 --> 01:56:17.479
ब्रह्मा बाप का तो आगरा के ऊपर बहुत ध्यान रहा ।

368
01:56:18.909 --> 01:56:26.510
तो ब्रह्मा बाप को सबूत देना ।

369
01:56:27.020 --> 01:56:30.109
अच्छा ।

370
01:56:30.109 --> 01:56:36.399
अच्छा है सेवा का चांस लिया , बहुत अच्छा ।

371
01:56:40.850 --> 01:57:02.220
डबल विदेशी - 50 देशों के 700 भाई बहिने आये हैं :- अंकल जी भी आये हैं वाह !

372
01:57:02.220 --> 01:57:15.819
बापदादा को खुशी होती है इस युगल को देख करके , परिवार को देख करके ।

373
01:57:15.819 --> 01:57:42.399
क्योंकि ब्राह्मण परिवार में कायदे प्रमाण जो पहला पहला वी आई पी निमित्त बना वह आप बने हो ।

374
01:57:42.399 --> 01:57:52.279
ताली तो बजाओ ।

375
01:57:55.819 --> 01:58:06.739
और कमाल यह है कि ड्युटी पर गवर्मेन्ट की ड्युटी पर होते

376
01:58:06.739 --> 01:58:22.449
सेन्टर स्थापन किया और अनेक वी आई पीज को परिचय दिया ।

377
01:58:24.449 --> 01:58:38.109
चाहे ग्याना में खोला , लेकिन ग्याना ही अमेरिका की सेवा के निमित्त बना ।

378
01:58:38.800 --> 01:58:47.020
तो सिर्फ ग्याना के नहीं हो , अमेरिका सेवा के भी निमित्त हो ।

379
01:58:48.109 --> 01:59:07.020
इसीलिए बापदादा को बहुत दुआयें भी हैं , दिल का यादप्यार भी पदम पदम गुणा है ।

380
01:59:07.710 --> 01:59:10.340
आण्टी कहाँ है ?

381
01:59:12.340 --> 01:59:15.199
बच्चियां भी आई है ना ।

382
01:59:19.250 --> 01:59:30.800
लाडली हैं , परिवार की भी लाडली , बापदादा की भी लाडली ।

383
01:59:30.800 --> 01:59:33.770
हैं ना ।

384
01:59:34.449 --> 01:59:37.250
अच्छा है ।

385
01:59:56.970 --> 02:00:05.079
डबल फारेनर्स को बापदादा ने टाइटल क्या दिया ?

386
02:00:05.079 --> 02:00:15.020
डबल तीव्र पुरूषार्थी ।

387
02:00:18.279 --> 02:00:42.680
वह तो सदा बापदादा कहते हैं कि डबल फारेनर्स ने बापदादा का विश्व परिवर्तक का टाइटल सिद्ध किया ।

388
02:00:43.600 --> 02:00:52.050
नहीं तो सब कहते थे भारत कल्याणी हैं ,

389
02:00:52.510 --> 02:01:03.140
विदेश के कारण विश्व कल्याणकारी बनें प्रैक्टिकल में ।

390
02:01:08.510 --> 02:01:30.220
और बापदादा ने देखा है कि हर सीजन में डबल फॉरेनर्स की संख्या बढ़ती जाती है

391
02:01:31.479 --> 02:01:59.140
और विशेष परिवर्तन यह है कि पहले जो यह आवाज निकलता है हमारा कल्चर , भारत का कल्चर , यह आवाज नहीं है ।

392
02:01:59.420 --> 02:02:02.510
परिवर्तन हो गया ।

393
02:02:02.510 --> 02:02:12.510
अभी सभी का एक ही कल्चर हो गया , ब्राह्मण कल्चर ।

394
02:02:12.510 --> 02:02:14.510
पसन्द है ना ।

395
02:02:14.510 --> 02:02:18.340
ब्राह्मण कल्चर पसन्द है ?

396
02:02:19.250 --> 02:02:37.710
पसन्द है , इसलिएबापदादा को भी आप डबल फॉरेनर्स बहुत - बहुत बहुत पसन्द हो ।

397
02:02:46.000 --> 02:03:02.340
क्योंकि विशेषता यह है कि अगर करेंगे कोई भी कार्य तो पूरा करेंगे ।

398
02:03:02.680 --> 02:03:11.020
हिम्मत रख करके हाँ तो हाँ , ना तो ना ।

399
02:03:11.020 --> 02:03:15.369
इसमें होशियार हैं ।

400
02:03:15.369 --> 02:03:23.420
लेकिन मैजारिटी हाँ जी , हाँ जी हैं ।

401
02:03:23.420 --> 02:03:42.739
मीठा बाबा , मीठी दादियां , मीठा परिवार , हाँ जी , हाँ जी करने में अच्छे आगे जा रहे हैं ।

402
02:03:45.600 --> 02:03:57.770
पहले फॉरेन में कहते थे स्टूडेन्ट का बढ़ना बहुत मुश्किल है ।

403
02:03:57.770 --> 02:04:01.140
अभी मुश्किल है ?

404
02:04:01.140 --> 02:04:05.199
अभी आ रहे हैं ना ।

405
02:04:05.199 --> 02:04:13.649
अभी वी आई पी भी सम्बन्ध सम्पर्क में आ रहे हैं ।

406
02:04:17.420 --> 02:04:38.680
तो आप सबकी दिल का उमंग उत्साह आपको भी आगे बढ़ा रहा है और सेवा को भी आगे बढ़ा रहा है ।

407
02:04:39.420 --> 02:04:42.680
आगे बढ़ रहे हैं ना !

408
02:04:42.680 --> 02:04:45.250
बढ़ रहे हैं ना ?

409
02:04:45.250 --> 02:04:48.850
सन्तुष्ट हो ना !

410
02:04:48.850 --> 02:05:02.569
अच्छा है , यह आबू में जो संगठन करते हो ना , यह सबमें बल भर जाता है ।

411
02:05:02.569 --> 02:05:26.000
इसीलिए अवश्य हर सीजन में आते रहो , आते रहो , यज्ञ की शोभा बढ़ाते रहो ।

412
02:05:32.340 --> 02:05:56.800
बापदादा को इन्हों की जो मीटिंग रखते हैं और प्रोग्रामस रखते हैं , डायलॉग का , समय की पुकार का , अच्छा लगता है ।

413
02:06:00.170 --> 02:06:14.109
अच्छा मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

414
02:06:33.649 --> 02:06:36.510
अच्छा ।

415
02:06:36.510 --> 02:07:09.539
मातायें सभी हाथ उठाओ :- ( 10 हजार मातायें आई हैं ) अच्छे हाथ दिखाई दे रहे हैं , बापदादा भी हाथ हिला रहे हैं ।

416
02:07:12.340 --> 02:07:35.420
माताओं को वरदान है विशेष जिस सेन्टर में मातायें बहुत अच्छी पुरूषार्थी हैं ,

417
02:07:35.420 --> 02:08:02.850
स्नेही हैं बापदादा का वरदान है , जहाँ मातायें हैं वहाँ यज्ञ का भण्डारा और यज्ञ की भण्डारी सदा भरपूर है ।

418
02:08:11.649 --> 02:08:28.399
अच्छा है । माताओं के स्नेह की जो यज्ञ सेवा है उसमें बरक्कत है ।

419
02:08:28.399 --> 02:08:38.399
तो बरक्कत होने के कारण भण्डारी और भण्डारे में भी बरक्कत हो जाती है

420
02:08:38.399 --> 02:08:52.680
इसीलिए माताओं को बापदादा विशेष मुबारक दे रहे हैं ।

421
02:08:52.680 --> 02:08:59.539
मुबारक दे रहे हैं , मुबारक दे रहे हैं ।

422
02:09:00.109 --> 02:09:11.140
अच्छा । पाण्डव हाथ उठाओ :- पाण्डव भी बहुत हैं ।

423
02:09:18.399 --> 02:09:38.170
देखो , पाण्डवों के बिना सेन्टर की सेवा में उन्नति नहीं हो सकती है ।

424
02:09:41.369 --> 02:10:03.939
पाण्डव एक तो सेवा के प्लैन बहुत अच्छे-अच्छे बनाते हैं , पाण्डवों को यह वरदान मिला हुआ है ।

425
02:10:03.939 --> 02:10:22.800
सेवा के नये-नये प्लैन अच्छे बनाते हैं और शक्तियों के रखवाले हैं ।

426
02:10:24.220 --> 02:10:52.170
सदा पाण्डव यही समझें , कहाँ भी रहते हो चाहे सेन्टर पर रहते हो , चाहे घर में रहते हो लेकिन शक्तियों के रखवाले हो ।

427
02:10:52.170 --> 02:11:07.310
कोई की भी कोई उल्टी सुल्टी नज़र न जाये ।

428
02:11:11.479 --> 02:11:20.109
ऐसे सेवाधारी हो ।

429
02:11:22.109 --> 02:11:43.479
और पाण्डव अगर नहीं आते तो जो इस श्रेष्ठ ज्ञान की विशेष नवीनता है

430
02:11:43.479 --> 02:12:10.909
कि यहाँ प्रवृत्ति में रहते न्यारे और प्यारे , परिवार में रहते न्यारे और प्यारे , मोहजीत नष्टोमोहा ,

431
02:12:10.909 --> 02:12:20.739
वह पाण्डव नहीं होते , सिर्फ शक्तियां होती तो कैसे चलता !

432
02:12:20.739 --> 02:12:39.369
इसीलिए कहाँ शक्तियों की महिमा है , कहाँ पाण्डवों की है और इसका चित्र चतुर्भुज का चित्र है ।

433
02:12:43.199 --> 02:12:59.649
पाण्डवों के बिना भी बाप का कार्य आगे नहीं बढ़ सकता और शक्तियों के बिना भी बाप का कार्य पूरा नहीं ।

434
02:13:00.050 --> 02:13:15.939
इसीलिए परिवार के परिवार की आवश्यकता क्या , महत्व है ।

435
02:13:16.569 --> 02:13:25.199
छोटे बच्चे भी कम नहीं है , छोटे बच्चों को देखकर सब खुश होते हैं ।

436
02:13:25.539 --> 02:13:31.079
जो छोटे बच्चे आये हैं वह उठो ।

437
02:13:39.819 --> 02:13:43.079
हाथ हिलाओ ।

438
02:13:51.770 --> 02:13:55.600
तो आपको क्या कहेंगे ?

439
02:13:55.600 --> 02:13:59.250
वाह ! बच्चे वाह !

440
02:14:10.000 --> 02:14:22.909
बच्चों की भी महिमा है , अगर बच्चे नहीं चलते तो प्रवृत्ति थोड़ेही कहेंगे ।

441
02:14:23.819 --> 02:14:34.510
प्रवृत्ति में बच्चे भी चाहिए , पाण्डव भी चाहिए , शक्ति भी चाहिए ।

442
02:14:35.079 --> 02:14:45.020
तो सुना बच्चों ने भी रिट्रीट की है ।

443
02:14:45.420 --> 02:14:52.220
कुमारों की रिट्रीट हुई है , कुमारियों की भी रिट्रीट हुई है ।

444
02:14:52.220 --> 02:14:57.420
जिनकी रिट्रीट हुई है वह उठो ।

445
02:15:04.619 --> 02:15:11.020
अधरकुमार भी उठो , यूथ भी उठो ।

446
02:15:29.649 --> 02:15:37.539
बापदादा के पास सारा समाचार आता है ।

447
02:15:37.539 --> 02:15:52.000
आप लोगों ने जो पुरूषार्थ किया , चाहे कुमारों ने चाहे अधरकुमारों ने ,

448
02:15:52.000 --> 02:16:09.250
बापदादा खुश है कि मधुबन के वायुमण्डल में आकर अपनी स्थिति को ,

449
02:16:09.250 --> 02:16:22.109
अपने पुरूषार्थ को आगे बढ़ाया , यह बहुत अच्छा है ।

450
02:16:22.680 --> 02:16:32.049
क्योंकि यहाँ जैसा वायुमण्डल और कहाँ नहीं मिलता ।

451
02:16:33.079 --> 02:16:43.250
अभी सिर्फ चाहे यूथकुमार , चाहे अधरकुमार ,

452
02:16:43.250 --> 02:16:56.850
जो यहाँ तीव्र पुरुषार्थ की अनुभूति की , अनुभूति की तीव्र पुरूषार्थ की ?

453
02:17:04.799 --> 02:17:08.340
वह अमर रखना ।

454
02:17:08.340 --> 02:17:16.399
अमर भव का वरदान सदा याद रखना ।

455
02:17:18.399 --> 02:17:27.540
ऐसे नहीं वहाँ जाओ तो कहो तीव्र पुरूषार्थ नहीं , पुरूषार्थ है नहीं ।

456
02:17:27.540 --> 02:17:35.940
और ही कहना हम तो और ही उड़ती कला में उड़ रहे हैं ।

457
02:17:35.940 --> 02:17:38.219
ठीक है ।

458
02:17:38.219 --> 02:17:42.909
ऐसी रिजल्ट निकालना ।

459
02:17:42.909 --> 02:17:45.879
बहुत अच्छा किया ।

460
02:17:45.879 --> 02:17:48.850
बापदादा खुश है ।

461
02:18:06.049 --> 02:18:10.219
अच्छा ।

462
02:18:17.079 --> 02:19:14.000
अभी एक सेकण्ड में सभी ब्राह्मण अपने राजयोग का अभ्यास करते हुए

463
02:19:16.000 --> 02:20:10.620
मन को एकाग्र करने का मालिक बन मन को जहाँ चाहो , जितना समय चाहो , जैसे चाहो वैसे अभी-अभी मन को एकाग्र करो ।

464
02:20:10.620 --> 02:20:32.909
कहाँ भी मन यहाँ-वहाँ चंचल नहीं हो ।

465
02:20:37.819 --> 02:21:21.940
मेरा बाबा , मीठा बाबा , प्यारा बाबा इस स्नेह के संग के रंग की , आध्यात्मिक होली मनाओ ।

466
02:24:08.110 --> 02:24:13.479
( ड्रिल ) अच्छा ।

467
02:24:19.020 --> 02:24:56.569
चारों ओर के श्रेष्ठ विशेष होली और हाइएस्ट बच्चों को ,

468
02:25:00.450 --> 02:26:01.200
सदा स्वयं को बाप समान सर्व शक्तियों से सम्पन्न मास्टर सर्वशक्तिवान अनुभव करने वाले ,

469
02:26:08.280 --> 02:27:01.709
सदा हर कमज़ोरियों से मुक्त बन अन्य आत्माओं को भी मुक्ति दिलाने वाले मुक्तिदाता बच्चों को ,

470
02:27:08.510 --> 02:27:39.879
सदा स्वमान की सीट पर सेट रहने वाले ,

471
02:27:49.479 --> 02:28:11.709
सदा अमर भव के वरदान के अनुभव स्वरूप रहने वाले ,

472
02:28:12.850 --> 02:28:52.909
ऐसे चारों ओर के , चाहे सामने बैठने वाले , चाहे दूर बैठे स्नेह में समाये हुए

473
02:28:54.909 --> 02:29:22.000
बच्चों को यादप्यार वा अपने उमंग-उत्साह , पुरूषार्थ के समाचार देने वालों को

474
02:29:25.309 --> 02:29:56.969
बापदादा का बहुत-बहुत दिल का यादप्यार और दिल की पदम पदमगुणा यादप्यार स्वीकार हो

475
02:29:56.969 --> 02:30:26.049
और सभी राजयोगी सो राज्य अधिकारी बच्चों को नमस्ते ।

476
02:30:30.340 --> 02:30:48.110
मोहिनी बहन से :- ( तबियत का समाचार सुनाया ) अच्छा किया समय पर पूरा करके आ गई ।

477
02:30:50.799 --> 02:30:58.909
यह बुद्धि की होशियारी है ।

478
02:30:58.909 --> 02:31:03.940
बहुत अच्छा ।

479
02:31:33.200 --> 02:31:40.620
( दादी जानकी से ) मजा आ रहा है ना ।

480
02:31:42.620 --> 02:31:51.540
( क्या बताऊं , कैसे बताऊं ) आंखों से ।

481
02:31:59.709 --> 02:32:06.799
यह अच्छा है , चलाने वाला चला रहा है ।

482
02:32:32.799 --> 02:32:38.219
( एज में सबसे बड़ी हूँ ) मुबारक हो ।

483
02:32:38.219 --> 02:33:03.479
( सब बापदादा को देख लें ) यह आंखें देखें ना , दुनिया देखे बाबा क्या करता है , कैसे करता है ।

484
02:33:05.819 --> 02:33:09.649
अच्छा , ( दादियों से ) सभी ठीक हैं !

485
02:33:14.340 --> 02:33:16.739
सब आदि रत्न हैं ।

486
02:33:22.110 --> 02:33:24.510
बहुत अछा ।

487
02:33:26.510 --> 02:33:29.770
उड़ रहे हैं ।

488
02:33:32.280 --> 02:33:35.250
अच्छा ।

489
02:33:35.250 --> 02:33:40.969
ठीक , बैठ जाओ ।

490
02:33:52.850 --> 02:34:02.399
पुरानी चीज़ें जो होती हैं ना अमूल्य होती हैं , उन्हों का मूल्य बहुत होता है ।

491
02:35:37.479 --> 02:35:41.020
रमेश भाई , ऊषा बहन , डा अनिला बहन से :- बहुत अच्छा किया ।

492
02:35:41.020 --> 02:35:44.620
यह तो आदि रत्न है ।

493
02:35:44.620 --> 02:35:49.420
सेवा का आदि रत्न ।

494
02:35:53.540 --> 02:36:07.479
पहला परिवार है जहाँ जगदम्बा रही है ।

495
02:36:14.340 --> 02:36:19.309
तो लकी परिवार है ।

496
02:36:19.309 --> 02:36:23.020
( ऊषा बहन से ) अच्छा पार्ट बजाया ।

497
02:36:30.969 --> 02:36:49.709
लेकिन जैसे इनकी नेचर है उसी प्रमाण बहुत-बहुत-बहुत अच्छा पार्ट बजाया ।

498
02:36:50.909 --> 02:37:05.020
इसीलिए सबका प्यार है और सब खुश हैं कि बहुत अच्छा पार्ट बजाया ।

499
02:37:06.450 --> 02:37:10.000
अच्छा किया ।

500
02:37:19.370 --> 02:37:26.219
डायरेक्ट पालना लेने वाली है ।

501
02:37:27.540 --> 02:37:30.909
यह आदि फैमिली है ।

502
02:37:37.540 --> 02:37:53.770
जिसने साकार बाप की भी पालना नजदीक से ली और सेवा में भी पार्ट बजाया ।

503
02:37:53.770 --> 02:37:58.739
( डा अनीला बहन से ) इसको भी वरदान है ।

504
02:38:12.969 --> 02:38:50.340
शान्ति बहन ( सिरीफोर्ट ) से :- देखा जाता है कि अभी शरीर के हिसाब को मैजारिटी पास करने में पास हो जाते हैं ।

505
02:38:51.020 --> 02:38:57.879
आपने भी पास का सर्टीफिकेट ले लिया ।

506
02:39:00.620 --> 02:39:04.850
बहुत अच्छा पार्ट बजाया है ।

507
02:39:06.219 --> 02:39:11.940
आजकल तो डाक्टर्स की सेवा बहुत हो जाती है ।

508
02:39:12.850 --> 02:39:23.649
वह फर्क देखते हैं ना , प्रैक्टिकल लाइफ , उसका असर होता है ।

509
02:39:26.049 --> 02:39:31.600
( सेवा करने वाली बहनों से ) यह बहुत लाडली है ।

510
02:39:31.600 --> 02:39:43.250
यह छोटी बहुत लाडली है , दिल से सेवा की है ।

511
02:39:46.680 --> 02:39:50.680
दिल की सेवा का बहुत महत्व है ।

512
02:39:50.680 --> 02:40:00.049
सेवा सब करते हैं लेकिन जो दिल से करता है उसका महत्व है ।

513
02:40:06.219 --> 02:40:12.739
यह पुरूषार्थ में आगे जा रही है बहुत अच्छा ।

514
02:40:44.620 --> 02:41:00.680
( डा अनीला बहन से ) बाप से दिल का स्नेह , परिवार से दिल का स्नेह तो परिवार की भी दुआयें , बाप की भी दुआयें हैं ।

515
02:41:24.280 --> 02:41:47.940
विदेश की मुख्य बड़ी बहनों से :- अच्छा है , मधुबन रहने का भी चांस और सेवा का भी विशेष चांस है ।

516
02:41:48.799 --> 02:42:12.000
फिर भी देखो आप सेवा का जो दूसरा ग्रुप निमित्त बना उसके मुख्य एक्टर्स हो ।

517
02:42:12.000 --> 02:42:37.940
आदि के समय का तो यह ग्रुप बैठा है लेकिन सेवा के आदि रत्न , सेवा के साथी बनके साथी बनाने वाले वह आप लोगों का ग्रुप है ।

518
02:42:38.969 --> 02:42:52.850
तो बापदादा जितना इन्हों की महिमा करता है , आदि स्थापना के रत्नों की ,

519
02:42:52.850 --> 02:43:06.680
इतना आदि सेवा के साथी उन्हों की भी महिमा करता है ।

520
02:43:07.250 --> 02:43:15.600
चाहे फॉरेन है लेकिन निमित्त आप लोग हो ।

521
02:43:17.020 --> 02:43:26.340
मैजारिटी सब सेवा की स्थापना के रत्न हो ।

522
02:43:27.649 --> 02:43:34.110
तो आप लोगों को भी चांस तो अच्छा मिला है ।

523
02:43:37.540 --> 02:43:53.250
मेहनत जरूर करनी पड़ती है क्योंकि उन्हों का रहना सहना , कल्चर न्यारा होता है

524
02:43:53.250 --> 02:44:03.649
उसको एक कल्चर में जोड़ना इसकी आप लोगों को मुबारक हो ।

525
02:44:07.879 --> 02:44:12.000
अच्छी मेहनत की है ।

526
02:44:12.969 --> 02:44:20.510
मेहनत तो करनी पड़ी है लेकिन सफलता हुई है ।

527
02:44:20.510 --> 02:44:30.049
मेहनत व्यर्थ नहीं गई है , अभी रेसपाण्ड तो अच्छा मिलता है ।

528
02:44:31.139 --> 02:44:41.600
विदेशी भी सेवा में साथी तो अच्छे बनते हैं ।

529
02:44:44.510 --> 02:44:54.799
हर सेन्टर पर आपको साथ देने वाले तो बने हैं ।

530
02:44:54.799 --> 02:44:58.110
बने हैं ना !

531
02:44:58.909 --> 02:45:03.770
बापदादा खुश है ।

532
02:45:17.540 --> 02:45:27.709
तो एक-एक को पदम पदमगुणा मुबारक हो , मुबारक हो ।

533
02:45:27.709 --> 02:45:39.770
चन्द्रहास बाबू जी से :- ठीक है ।

534
02:45:43.079 --> 02:45:45.819
मन मजबूत है ना ।

535
02:45:45.819 --> 02:45:53.370
मन मजबूत है तो तन ठीक हो जायेगा ।

536
02:45:55.370 --> 02:46:02.049
मन सदा खुशी में नाचता रहे ।

537
02:46:05.370 --> 02:46:13.600
चाहे स्ट्रेचर पर जाये लेकिन माइण्ड डांस होती रहे ।

538
02:46:13.600 --> 02:46:16.280
फिकर तो नहीं है ना ।

539
02:46:16.280 --> 02:46:20.510
बेफिकर बादशाह ।

