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1
00:04:45.310 --> 00:05:52.220
आज बापदादा अपने चारों ओर के सन्तुष्ट रहने वाले , सन्तुष्ट मणियों को देख रहे हैं ।

2
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हर एक के चेहरे पर सन्तुष्टता की चमक दिखाई दे रही है ।

3
00:06:55.250 --> 00:07:26.910
सन्तुष्ट मणियां स्वयं को भी प्रिय हैं , बाप को भी प्रिय हैं

4
00:07:29.819 --> 00:08:06.399
और परिवार को भी प्रिय हैं क्योंकि सन्तुष्टता महान शक्ति है ।

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00:08:13.649 --> 00:08:59.250
सन्तुष्टता तब धारण होती है जब सर्व प्राप्तियां प्राप्त होती हैं ।

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00:09:06.220 --> 00:09:21.600
अगर प्राप्तियां कम तो सन्तुष्टता भी कम होती है ।

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00:09:28.049 --> 00:09:54.450
सन्तुष्टता और शक्तियों को भी आह्वान करती है ।

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00:10:00.399 --> 00:10:58.799
सन्तुष्टता का वायुमण्डल औरों को भी यथा शक्ति सन्तुष्टता का वायब्रेशन देता है ।

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00:11:07.200 --> 00:11:48.049
जो सन्तुष्ट रहता है उसकी निशानी सदा प्रसन्नचित दिखाई देता है ।

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00:11:51.769 --> 00:12:12.049
सदा चेहरा हर्षितमुख स्वतः ही रहता है ।

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00:12:22.110 --> 00:12:57.539
सन्तुष्ट आत्मा के सामने कोई भी परिस्थिति स्व स्थिति को हिला नहीं सकती ।

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00:13:00.049 --> 00:13:58.620
कितनी भी बड़ी परिस्थिति हो लेकिन सन्तुष्ट आत्मा के लिए कार्टून शो का मनोरंजन दिखाई देता है ।

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00:14:00.620 --> 00:14:42.740
इसा लिए वह परिस्थिति में परेशान नहीं होता आरै परिस्तिथितियाँ उसके ऊपर वार नहीं कर सकती , हार जाती है ।

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00:14:47.250 --> 00:15:13.080
इसलिए अतीन्द्रिय सुखमय मनोरंजन की जीवन अनुभव करता है ।

15
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मेहनत नहीं करनी पड़ती ।

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00:15:21.649 --> 00:15:30.000
मनोरंजन अनुभव होता है ।

17
00:15:43.940 --> 00:15:56.740
तो हर एक अपने को चेक करे ।

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00:15:58.000 --> 00:16:02.509
चेक करना तो आता है ना !

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00:16:02.509 --> 00:16:05.710
आता है ?

20
00:16:05.710 --> 00:16:20.620
जिसको चेक करना आता है अपने को , दूसरे को नहीं अपने को चेक करना आता है , वह हाथ उठाओ ।

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00:16:21.080 --> 00:16:23.940
चेक करना आता है ?

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00:16:23.940 --> 00:16:26.909
अच्छा ।

23
00:16:30.799 --> 00:16:35.710
मुबारक हो ।

24
00:16:44.620 --> 00:17:38.619
बापदादा का वरदान भी हर बच्चे को रोज अमृतवेले भिन्न-भिन्न रूपों से यही मिलता है , खुश रहो आबाद रहो ।

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00:17:46.109 --> 00:18:22.000
रोज का वरदान मिलता सभी को है , बापदादा सभी को एक ही जैसा एक ही साथ वरदान देता है ।

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00:18:25.420 --> 00:18:36.619
लेकिन फर्क क्या हो जाता है ?

27
00:18:38.619 --> 00:18:44.000
नम्बरवार क्यों बन जाते ?

28
00:18:46.339 --> 00:19:13.309
दाता एक है , और देन भी एक है , किसको थोड़ा किसको बहुत नहीं देते हैं , फ्राकदिली से देते हैं

29
00:19:17.539 --> 00:19:28.569
लेकिन फर्क क्या पड़ जाता है ?

30
00:19:36.680 --> 00:20:12.400
इसका अनुभव भी सभी को है क्योंकि अभी तक बापदादा के पास यह आवाज पहुंचता है ।

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00:20:14.400 --> 00:20:19.200
जानते हो ना क्या ?

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00:20:19.200 --> 00:20:57.819
कभी-कभी थोड़ा-थोड़ा , यह आवाज अभी तक भी आता है -

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00:20:58.910 --> 00:21:37.599
बापदादा ने कहा है कि ब्राह्मण आत्माओं के जीवन रूपी डिक्शनरी में यह दोनों शब्द निकल जाना चाहिए ।

34
00:21:44.619 --> 00:22:10.799
अविनाशी बाप है , अविनाशी खज़ाने हैं , आप सब भी अविनाशी श्रेष्ठ आत्मायें हो ।

35
00:22:19.819 --> 00:22:24.910
तो कौन सा शब्द होना चाहिए ?

36
00:22:24.910 --> 00:22:33.250
कभी-कभी कि सदा ?

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00:22:35.250 --> 00:22:55.769
हर खज़ाने के आगे चेक करो - सर्व शक्तियां सदा है ?

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00:22:59.079 --> 00:23:07.599
सर्व गुण सदा है ?

39
00:23:09.599 --> 00:23:29.200
आप सबके भक्त जब आपके गुण गाते तो क्या कहते हैं ?

40
00:23:31.200 --> 00:23:39.369
कभी-कभी गुणदाता , ऐसे कहते हैं ?

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00:23:53.819 --> 00:24:12.680
बापदादा ने हर वरदान में सदा शब्द कहा है ।

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00:24:13.769 --> 00:24:27.369
सदा सर्वशक्तिवान , कभी शक्तिवान , कभी सर्वशक्तिवान नहीं कहा है ।

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00:24:35.250 --> 00:25:07.250
हर समय दो शब्द आप भी कहते हो , बाप भी कहते हैं , समान बनो ।

44
00:25:07.940 --> 00:25:14.450
यह नहीं कहते थोड़ा-थोड़ा समान बनो ।

45
00:25:15.650 --> 00:25:36.619
सम्पन्न और सम्पूर्ण , तो बच्चे कभी-कभी क्या करते हैं ?

46
00:25:36.619 --> 00:25:42.799
बापदादा भी खेल तो देखते हैं ना !

47
00:25:44.279 --> 00:25:54.849
बच्चों का खेल तो देखते ही रहते हैं ।

48
00:25:57.539 --> 00:26:04.849
बच्चे क्या करते , कोई-कोई , सब नहीं ।

49
00:26:06.849 --> 00:26:43.200
जो वरदान मिला उस वरदान को सोचकर , वर्णन कर कापी में नोट करते ,

50
00:26:46.339 --> 00:27:04.170
याद भी करते लेकिन वरदान रूपी बीज को फलीभूत नहीं करते ।

51
00:27:05.250 --> 00:27:15.019
बीज से फल नहीं निकाल सकते ।

52
00:27:17.309 --> 00:27:27.480
सिर्फ वर्णन करते खुश होते बहुत अच्छा वरदान है ।

53
00:27:32.509 --> 00:27:58.509
वरदान है बीज लेकिन बीज को जितना फलीभूत करते हैं उतना ही वह वृद्धि को पाता है ।

54
00:28:01.650 --> 00:28:14.049
फलीभूत करने का रहस्य क्या है ?

55
00:28:14.049 --> 00:28:22.000
समय पर कार्य में लगाना ।

56
00:28:22.740 --> 00:28:41.309
कार्य में लगाना भूल जाते , सिर्फ कापी में देख , वर्णन करते बहुत अच्छा , बहुत अच्छा ।

57
00:28:42.109 --> 00:28:49.079
बाबा ने वरदान बहुत अच्छा दिया है ।

58
00:28:50.569 --> 00:28:56.799
लेकिन किसलिए दिया है ?

59
00:28:58.799 --> 00:29:08.619
उसको फलीभूत करने के लिए दिया है ।

60
00:29:15.539 --> 00:29:25.480
बीज से फल का विस्तार होता है ।

61
00:29:31.940 --> 00:29:57.420
वरदान को सिमरण करते हैं , लेकिन वरदान स्वरूप बनने में नम्बरवार बन जाते हैं ।

62
00:30:08.339 --> 00:30:38.400
और बापदादा हर एक के भाग्य को देख हर्षित होते रहते हैं

63
00:30:38.400 --> 00:31:03.369
लेकिन बापदादा की दिल की आश पहले भी सुनाया है ।

64
00:31:11.650 --> 00:31:56.509
सभी ने हाथ उठाया था , याद है कि हम कारण को समाप्त कर समाधान स्वरूप बनेंगे याद है होमवर्क ?

65
00:31:58.000 --> 00:32:26.109
कई बच्चों ने रूहारिहान में या पत्रों द्वारा , ईमेल द्वारा रिजल्ट लिखा भी है ।

66
00:32:29.539 --> 00:33:07.200
अच्छा है , अटेन्शन गया है लेकिन जो बापदादा को शब्द अच्छा लगता है , सदा ।

67
00:33:10.109 --> 00:33:14.569
वह है ?

68
00:33:15.019 --> 00:33:27.019
आप सभी जो भी आये हैं , चाहे सुना है , चाहे पढ़ा है

69
00:33:27.019 --> 00:33:48.619
लेकिन एक मास के होम वर्क में , एक मास हुआ है बस , ज्यादा नहीं हुआ है

70
00:33:49.880 --> 00:34:01.539
तो एक मास में लक्ष्य तो रखा है ।

71
00:34:04.400 --> 00:34:40.050
एक दो में वर्णन भी किया है लेकिन जो एक मास में होमवर्क में अच्छी मार्क्स लेने वाले बने हैं वह हाथ उठाओ ।

72
00:34:40.050 --> 00:34:45.940
जो पास हुए हैं , पास हुए हैं ।

73
00:34:45.940 --> 00:34:48.849
पास विद ऑनर ।

74
00:34:48.849 --> 00:34:53.880
पास विद ऑनर , उठो ।

75
00:34:53.880 --> 00:35:00.849
पास विद ऑनर का दर्शन करना चाहिए ना ।

76
00:35:08.340 --> 00:35:11.139
मातायें नहीं ।

77
00:35:11.139 --> 00:35:20.510
बहिनों में , टीचर्स ने हाथ नहीं उठाया ।

78
00:35:21.079 --> 00:35:23.940
कोई नहीं ।

79
00:35:24.619 --> 00:35:32.400
मधुबन वाले ?

80
00:35:36.050 --> 00:35:39.480
यह तो बहुत कम रिजल्ट है ।

81
00:35:39.480 --> 00:35:45.250
( बहुत थोड़े उठे हैं ) अच्छा सेन्टर में भी होंगे ।

82
00:35:46.110 --> 00:35:55.369
मुबारक हो , ताली तो बजाओ ।

83
00:36:03.710 --> 00:36:27.019
बापदादा मुस्कराता है कि जब बापदादा पूछते हैं कि बापदादा से प्यार किसका है ?

84
00:36:27.019 --> 00:36:30.340
और कितना है ?

85
00:36:30.340 --> 00:36:34.570
तो क्या जवाब देते हैं ?

86
00:36:35.369 --> 00:36:42.909
बाबा , इतना है जो कह नहीं सकते ।

87
00:36:42.909 --> 00:37:06.449
जवाब बहुत अच्छा देते हैं बापदादा भी खुश हो जाते हैं लेकिन प्यार का सबूत क्या ?

88
00:37:09.199 --> 00:37:38.340
जिससे प्यार होता है,आजकल की दुनिया वालों का बॉडीकान्सेस का प्यार तो जान कुर्बान कर देते हैं।

89
00:37:40.340 --> 00:38:07.199
परमात्म प्यार उनके पीछे बाप ने कहा और बच्चों को करना मुश्किल क्यों ?

90
00:38:11.820 --> 00:38:16.340
गीत बहुत अच्छे-अच्छे गाते हो ।

91
00:38:16.340 --> 00:38:38.619
बाबा हम न्योछावर करने वाले परवाने हैं , शमा पर फिदा होने वाले हैं ।

92
00:38:38.619 --> 00:38:49.769
तो यह कारण शब्द को स्वाहा नहीं कर सकते ?

93
00:38:54.340 --> 00:39:11.019
तो अभी तो इस वर्ष का लास्ट टर्न आ गया ।

94
00:39:14.909 --> 00:39:34.340
दूसरे वर्ष में क्या होता वह तो आप और बाप देख रहे हैं , देखेंगे

95
00:39:35.199 --> 00:40:26.449
लेकिन क्या यह एक शब्द समय को देख , आप लोग कहते हो ना , समय की पुकार है ।

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00:40:27.820 --> 00:40:44.340
भक्तों की पुकार , समय की पुकार , दुःखी आत्माओं की पुकार ,

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00:40:47.539 --> 00:41:16.340
आपके स्नेही , सहयोगी आत्माओं की पुकार आप ही पूर्ण करेंगे ना !

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00:41:20.000 --> 00:41:25.710
आपका टाइटल क्या है ?

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00:41:27.710 --> 00:41:32.280
आपका कर्तव्य क्या है ?

100
00:41:33.769 --> 00:41:42.800
किस कर्तव्य के लिए ब्राह्मण बनें ?

101
00:41:47.139 --> 00:41:57.019
विश्व परिवर्तक आपका टाइटल है ।

102
00:41:57.710 --> 00:42:12.739
विश्व परिवर्तन आपका कार्य है और साथी कौन है ?

103
00:42:13.199 --> 00:42:26.219
बापदादा के साथ-साथ इस कार्य में निमित्त बने हो ।

104
00:42:33.650 --> 00:42:38.219
तो क्या करना है ?

105
00:42:39.480 --> 00:42:51.539
अभी भी हाथ उठवायेंगे , करेंगे तो हाथ तो सभी उठा देते हैं ।

106
00:43:06.969 --> 00:43:40.619
लक्ष्य रखा है , बापदादा ने देखा , टोटल इस वर्ष की सीजन में सभी ने संकल्प किया

107
00:43:41.539 --> 00:44:45.539
लेकिन सफलता की चाबी दृढ़ता - करना ही है , उसके बजाए कभी-कभी कर रहे हैं , चल रहे हैं , कर ही लेंगे ।

108
00:44:52.280 --> 00:45:11.139
यह संकल्प दृढ़ता को साधारण बना देता है ।

109
00:45:20.280 --> 00:45:35.820
दृढ़ता में कारण शब्द आता ही नहीं है ।

110
00:45:38.050 --> 00:45:41.309
निवारण हो जाता है ।

111
00:45:41.309 --> 00:46:08.849
कारण आते भी हैं लेकिन चेकिंग होने के कारण , कारण निवारण में बदल जाता है ।

112
00:46:15.650 --> 00:46:47.139
बापदादा ने रिजल्ट में चेक किया तो क्या देखा ?

113
00:46:52.849 --> 00:47:33.199
ज्ञानी , योगी , धारणा स्वरूप , सेवाधारी , चार ही सबजेक्ट में हर एक यथाशक्ति ज्ञानी भी है ,

114
00:47:33.199 --> 00:47:46.110
योगी भी है , धारणा भी कर रहा है , सेवा भी कर रहा है ।

115
00:47:47.309 --> 00:48:39.309
लेकिन चार ही सबजेक्ट में अनुभव स्वरूप , अनुभव के अथॉरिटी - उसकी कमी दिखाई दी ।

116
00:48:50.280 --> 00:49:34.340
अनुभवी स्वरूप , ज्ञान स्वरूप में भी अनुभवी स्वरूप अर्थात् ज्ञान को नॉलेज कहा जाता है

117
00:49:36.340 --> 00:50:04.739
तो अनुभवी मूर्त आत्मा में नॉलेज अर्थात् समझ क्या करना है , क्या नहीं करना है ,

118
00:50:06.739 --> 00:50:52.170
नॉलेज की लाइट और माइट , तो अनुभवी स्वरूप का अर्थ ही है ज्ञानी तू आत्मा के हर कर्म में लाइट और माइट नेचुरल होना चाहिए ।

119
00:50:55.250 --> 00:51:33.250
ज्ञानी माना ज्ञान , नॉलेज को जानना , वर्णन करना , उसके साथ-साथ हर कर्म में लाइट माइट हो ।

120
00:51:38.800 --> 00:52:00.800
अनुभवी स्वरूप से हर कर्म नेचुरल श्रेष्ठ और सफल होगा ।

121
00:52:00.800 --> 00:52:12.849
मेहनत नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि ज्ञान के अनुभवीमूर्त हैं ।

122
00:52:12.849 --> 00:52:22.619
अनुभव की अथॉरिटी सब अथॉरिटी से श्रेष्ठ है ।

123
00:52:24.170 --> 00:52:54.909
ज्ञान को जानना और ज्ञान के अनुभव स्वरूप के अथारिटी में हर कर्म करना , उसमें अन्तर है तो अनुभवी स्वरूप हैं ?

124
00:52:57.539 --> 00:53:00.449
चेक करो ।

125
00:53:00.449 --> 00:53:20.280
चार ही सबजेक्ट में , आत्मा हूँ लेकिन अनुभवी स्वरूप होके हर कर्म करते हैं ?

126
00:53:22.280 --> 00:53:33.820
अनुभव की अथॉरिटी की सीट पर सेट हैं

127
00:53:34.510 --> 00:54:02.849
तो श्रेष्ठ कर्म , सफलता स्वरूप कर्म अथॉरिटी के सामने नेचुरल नेचर दिखाई देगी ।

128
00:54:06.050 --> 00:54:42.400
सोचते हैं लेकिन अनुभवी स्वरूप बनना , योगयुक्त राज़युक्त नेचर हो जाए , नेचुरल हो जाए ।

129
00:54:47.820 --> 00:55:09.019
धारणा में भी सर्व गुण स्वतः ही हर कर्म में दिखाई दें ।

130
00:55:11.480 --> 00:55:44.000
ऐसे अनुभवी स्वरूप में सदा रहना , अनुभव की सीट पर सेट होना इसकी आवश्यकता का अटेन्शन रखना ,

131
00:55:44.000 --> 00:56:00.739
यह आवश्यक है अनुभव के अथॉरिटी की सीट बहुत महान है ।

132
00:56:03.019 --> 00:56:30.570
अनुभवी को माया भी मिटा नहीं सकती क्योंकी माया की अथॉरिटी से अनुभव की अथॉरिटी पदमगुणा ऊंची है ।

133
00:56:37.769 --> 00:57:04.909
सोचना अलग है , मनन करना अलग है , स्वरूप अनुभवी स्वरूप बनकर चलना , अभी इसकी आवश्यकता है ।

134
00:57:20.969 --> 00:57:31.139
तो अभी इस वर्ष में क्या करेंगे ?

135
00:57:31.880 --> 00:57:43.539
बापदादा ने देखा एक सबजेक्ट में मैजारिटी पास हैं ।

136
00:57:46.849 --> 00:57:51.250
कौन सी सबजेक्ट ?

137
00:57:52.849 --> 00:57:59.019
सेवा की सबजेक्ट ।

138
00:58:08.800 --> 00:58:31.940
चारों ओर से बापदादा के पास सेवा के रिकार्ड बहुत अच्छे अच्छे आये हैं ।

139
00:58:34.969 --> 00:59:06.219
और सेवा का उमंग उत्साह इस वर्ष के सेवा समाचारों के हिसाब से अच्छा दिखाई दिया ।

140
00:59:08.219 --> 00:59:36.510
हर एक वर्ग ने , हर एक जोन ने भिन्न-भिन्न रूप से सेवा में सफलता प्राप्त की है ।

141
00:59:40.969 --> 01:00:14.570
इसकी बापदादा हर एक जोन , हर एक वर्ग को पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं । मुबारक हो ।

142
01:00:26.619 --> 01:00:33.420
प्लैन भी अच्छे-अच्छे बनाये हैं ।

143
01:00:37.650 --> 01:00:54.170
लेकिन अभी समय के प्रमाण अचानक की सीजन है ।

144
01:00:54.849 --> 01:01:12.969
आपने देखा सुना होगा कि इस वर्ष में कितने ब्राह्मण अचानक गये हैं ।

145
01:01:20.570 --> 01:01:34.449
तो अचानक की घण्टी अभी तेज हो रही है ।

146
01:01:42.050 --> 01:02:27.420
उसी अनुसार अभी इस वर्ष मैं चार ही सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप कहाँ तक बना हूँ ,

147
01:02:30.340 --> 01:02:53.079
क्योंकि चार ही सबजेक्ट में अच्छी मार्क्स चाहिए , अगर एक भी सबजेक्ट में पास मार्क्स से कम होंगी

148
01:02:58.510 --> 01:03:28.400
तो पास विद ऑनर माला का मणका , बापदादा के गले का हार कैसे बनेगा !

149
01:03:30.400 --> 01:03:50.110
किसी भी रूप में हार खाने वाला बाप के गले का हार नहीं बन सकता ।

150
01:03:58.340 --> 01:04:08.400
और यहाँ हाथ उठवाते हैं तो सभी क्या कहते हैं ?

151
01:04:08.400 --> 01:04:14.110
लक्ष्मी नारायण बनेंगे ।

152
01:04:19.250 --> 01:04:52.619
चलो लक्ष्मी-नारायण वा लक्ष्मी-नारायण के परिवार में साथी वह भी बनना श्रेष्ठ पद है ।

153
01:05:01.250 --> 01:05:22.340
इसलिए बापदादा सिर्फ एक शब्द कहते हैं ,

154
01:05:30.969 --> 01:06:11.139
अभी तीव्र गति से उड़ती कला में उड़ते रहो

155
01:06:14.679 --> 01:06:51.139
और अपने उड़ती कला के वायब्रेशन से वायुमण्डल में सहयोग का वायुमण्डल फैलाओ ।

156
01:07:11.539 --> 01:07:43.369
क्या जब प्रकृति के लिए आप सबने चैलेन्ज की है , कि प्रकृति को भी परिवर्तन करके ही छोड़ेंगे ।

157
01:07:43.369 --> 01:07:46.400
है ना वायदा ?

158
01:07:46.400 --> 01:07:48.619
वायदा किया है ?

159
01:07:48.619 --> 01:07:50.619
किया है ।

160
01:07:51.480 --> 01:07:57.369
कांध हिलाओ , हाथ नहीं ।

161
01:07:59.019 --> 01:08:40.109
तो क्या अपने हमजिन्स मनुष्यात्माओं को दुःख और अशान्ति से परिवर्तन नहीं कर सकते ?

162
01:08:42.909 --> 01:09:15.600
एक तो आपने चैलेन्ज किया है और दूसरा बापदादा को भी वायदा किया है ,

163
01:09:17.600 --> 01:09:35.020
हम सभी अभी भी आपके कार्य में साथी हैं ,

164
01:09:36.399 --> 01:09:51.369
परमधाम में भी साथी हैं और राज्य में भी ब्रह्मा बाप के साथी रहेंगे ।

165
01:09:53.369 --> 01:09:58.619
यह वायदा किया है ना !

166
01:09:59.369 --> 01:10:14.569
तो साथ चलेंगे , साथ रहेंगे , और अभी भी साथ हैं ।

167
01:10:24.909 --> 01:10:55.140
तो बाप का इशारा समय प्रति समय प्रैक्टिकल देख रहे हो - अचानक एवररेडी।

168
01:10:57.140 --> 01:11:07.710
क्या दादी के लिए सोचा था कि जा सकती है ?

169
01:11:07.710 --> 01:11:14.000
अचानक का खेल देखा ना ।

170
01:11:21.020 --> 01:11:39.020
तो इस वर्ष एवररेडी।

171
01:11:41.880 --> 01:12:12.739
बाप के दिल की आशाओं को पूर्ण करने वाले आशाओं के दीपक बनना ही है ।

172
01:12:15.710 --> 01:12:22.340
बाप की आशाओं को तो जानते ही हो ।

173
01:12:24.340 --> 01:12:26.399
बनना है ?

174
01:12:26.399 --> 01:12:41.880
कि बन जायेंगे , देख लेंगे … जो समझते हैं बनना ही है , वह हाथ उठाओ ।

175
01:12:41.880 --> 01:12:48.970
देखो कैमरे में आ रहा है ।

176
01:12:52.279 --> 01:13:02.739
बापदादा को खुश तो बहुत अच्छा करते हो ।

177
01:13:11.250 --> 01:13:26.850
बापदादा भी बच्चों के बिना अकेला जा नहीं सकता ।

178
01:13:34.000 --> 01:14:02.279
देखो ब्रह्मा बाबा भी आप बच्चों के लिए मुक्ति का गेट खोलने के लिए इन्तजार कर रहे हैं ।

179
01:14:04.279 --> 01:14:18.109
एडवांस पार्टी भी इन्तजार कर रही है ।

180
01:14:27.600 --> 01:14:34.220
आप इन्तजाम करने वाले हैं ।

181
01:14:34.220 --> 01:14:45.420
आप इन्तजार करने वाले नहीं , इन्तजाम करने वाले हैं ।

182
01:14:55.770 --> 01:15:23.369
तो इस वर्ष लक्ष्य रखो लेकिन लक्ष्य आरै लक्षण को समान रखना ।

183
01:15:23.369 --> 01:15:32.569
ऐसे नहीं हो लक्ष्य बहुत ऊंचा और लक्षण में कमज़ोरी , नहीं ।

184
01:15:32.569 --> 01:15:40.970
लक्ष्य और लक्षण समान हो ।

185
01:15:43.479 --> 01:16:19.819
जो आपके दिल की आश है समान बनने की , वह तब पूर्ण होगी जब लक्ष्य और लक्षण समान होंगे ।

186
01:16:23.369 --> 01:16:38.449
अभी थोड़ा-थोड़ा अन्तर पड़ जाता है , लक्ष्य और लक्षण में ।

187
01:16:39.479 --> 01:16:52.970
प्लैन बहुत अच्छे बनाते हो , आपस में रूहरिहान भी बहुत अच्छी-अच्छी करते हो ।

188
01:16:54.970 --> 01:17:04.279
एक दो को अटेन्शन भी दिलाते हो ।

189
01:17:34.909 --> 01:18:18.109
अभी दृढ़ता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है , इस संकल्प को अनुभव के स्वरूप में लाओ ।

190
01:18:20.909 --> 01:18:35.420
चेक करो - जो कहते हैं उसका अनुभव भी करते हैं ?

191
01:18:45.199 --> 01:19:00.680
पहला शब्द मैं आत्मा हूँ , इसी को ही चेक करो ।

192
01:19:02.000 --> 01:19:21.939
इस आत्मा स्वरूप के अनुभव की अथॉरिटी हूँ,क्योंकि अनुभव की अथॉरिटी नम्बरवन है।

193
01:19:55.420 --> 01:19:59.770
अच्छा ।

194
01:20:04.739 --> 01:20:17.649
( हाल में कुछ हलचल हुई ) आप सब किस स्थिति में हो ? हलचल में हो ।

195
01:20:23.479 --> 01:20:36.279
अटेन्शन देने वाले दे रहे हैं , आपको क्या करना है ?

196
01:20:36.800 --> 01:20:46.170
शुभ भावना के वायब्रेशन ।

197
01:20:58.220 --> 01:21:08.220
तो सोचो हर बात सामने लाओ ।

198
01:21:08.909 --> 01:21:37.880
चाहे आत्मा , चाहे परमात्मा , चाहे चक्र सभी में अनुभव मूर्त कहाँ तक बने हैं ?

199
01:21:59.020 --> 01:22:02.340
अच्छा ।

200
01:22:02.909 --> 01:22:42.739
अभी किसी भी परिस्थिति में स्व-स्थिति पर स्थित रह सकते हो ?

201
01:24:14.279 --> 01:24:21.880
मन की एकाग्रता ( ड्रिल )

202
01:26:30.340 --> 01:26:33.880
अच्छा ।

203
01:26:33.880 --> 01:27:04.909
तीन बिन्दियों का स्मृति स्वरूप बन सकते हो ना !

204
01:27:05.369 --> 01:27:11.600
बस फुलस्टाप ।

205
01:27:23.479 --> 01:27:26.449
अच्छा ।

206
01:27:30.970 --> 01:28:32.619
सेवा का टर्न पंजाब जोन का है , ( पंजाब हिमाचल , हरियाणा , जम्मू कश्मीर , उत्तराचंल ) :- अच्छा जो कहा हुआ है ना पंजाब शेर , वह संख्या भी बहुत अच्छी लाये हैं ।

207
01:28:33.649 --> 01:28:48.800
सभी को मालूम पड़ गया तो पंजाब शेर है इसलिए सभी उमंग-उत्साह से पहुंच गये हैं

208
01:28:49.479 --> 01:28:58.739
और पंजाब का कितना बड़ा पुण्य बन गया ।

209
01:29:00.279 --> 01:29:22.680
एक ब्राह्मण की सेवा करते वह भी कैसा ब्राह्मण , और आपने कितने ब्राह्मणों की , सच्चे ब्राह्मणों की सेवा की ।

210
01:29:25.250 --> 01:29:35.539
रोज अपना पुण्य का खाता जमा किया ।

211
01:29:38.449 --> 01:30:03.819
यह भी ड्रामा में एक पुण्य के खाते में सहज वृद्धि का साधन है ।

212
01:30:07.770 --> 01:30:30.680
जो इस उमंग उत्साह से आता है वह थोडे दिनों में बहुत अपना पुण्य का खाता जमा कर सकता है ।

213
01:30:35.819 --> 01:30:56.970
और अब संगमयुग के समय का पुण्य का खाता बहुत समय काम में आयेगा

214
01:31:01.420 --> 01:31:12.279
बाकी पंजाब के सेवा की रिपोर्ट भी देखी ।

215
01:31:14.569 --> 01:31:24.170
बापदादा पहले ही मुबारक दे चुके हैं ।

216
01:31:24.850 --> 01:31:40.000
सेवाकेन्द्र भी हैं , गीता पाठशालायें भी हैं , वृद्धि भी हो रही है

217
01:31:42.909 --> 01:32:08.449
और सभी के मन में इस बारी शिवरात्रि के समय की बहुत सेवा के उमंग उत्साह की लहर है ।

218
01:32:10.220 --> 01:32:38.109
अभी जहाँ जहाँ भी चाहे मीडिया द्वारा , चाहे फंक्शन्स द्वारा सेवा का उमंग उत्साह अच्छा दिखाया है ।

219
01:32:38.109 --> 01:32:42.399
अभी क्या करना है ?

220
01:32:42.970 --> 01:33:07.770
अभी जो हर एक ने संकल्प किया है , बाप को प्रत्यक्ष करना ही है ।

221
01:33:09.770 --> 01:33:26.970
उसकी डेट अपने परिवर्तन की कलम से सेट करो ।

222
01:33:28.449 --> 01:33:55.369
पैन्सिल से सेट नहीं होगा , यह आपके परिवर्तन के तीव्र पुरूषार्थ की कलम से प्रत्यक्षता की डेट सहज ही फिक्स हो जायेगी ।

223
01:33:55.369 --> 01:34:11.710
तो अभी बापदादा देखेंगे कि किस जोन की पहला नम्बर रिपोर्ट आती है

224
01:34:11.710 --> 01:34:42.800
कि सारा जोन मन्सा-वाचा-कर्मणा , सम्बन्ध-सम्पर्क में निर्विघ्न है और दृढ़ ही रहेगा ।

225
01:34:43.369 --> 01:34:47.420
इसमें नम्बरवन कौन रहता है?

226
01:34:47.420 --> 01:35:10.619
सिर्फ सेन्टर नहीं , पहले सेन्टर को मजबूत करो फिर अपने कनेक्शन के सेन्टर को मजबूत करो , फिर जोन को मजबूत करो ।

227
01:35:11.600 --> 01:35:32.050
विदेश वाले भी देश विदेश दोनों को बापदादा कार्य दे रहे हैं ।

228
01:35:32.050 --> 01:35:38.449
नम्बरवन कौन आता है।

229
01:35:38.449 --> 01:36:03.369
भारत में जोन के रूप में है और विदेश में अपने रूप से बनाये हुए हैं ना ।

230
01:36:03.369 --> 01:36:11.479
अमेरिका जोन , अफ्रीका जोन बना दिया है ।

231
01:36:13.479 --> 01:36:18.220
कौन नम्बरवन आता है?

232
01:36:19.020 --> 01:36:22.680
निर्विघ्न ।

233
01:36:32.850 --> 01:36:35.770
हो सकता है ना !

234
01:36:35.770 --> 01:36:44.109
सारा जोन निर्विघ्न हो जाए , हो सकता है ?

235
01:36:44.109 --> 01:36:47.710
हो सकता है ?

236
01:36:47.710 --> 01:37:00.279
बोलो , पहली लाइन बोले ।

237
01:37:00.279 --> 01:37:03.140
हो सकता है ?

238
01:37:03.140 --> 01:37:11.020
जयन्ती बोलो , हो सकता है ?

239
01:37:15.819 --> 01:37:22.279
अच्छा - टीचर्स उठो ।

240
01:37:41.140 --> 01:37:55.880
बापदादा इतनी टीचर्स को देख खुश हो रहे हैं ।

241
01:37:58.569 --> 01:38:05.649
क्यों टीचर्स गुरूभाई हैं ।

242
01:38:05.649 --> 01:38:21.250
( 2100 टीचर्स आई हैं ) अच्छा है टीचर्स निमित्त हैं ।

243
01:38:21.250 --> 01:38:33.079
निर्विघ्न बन निर्विघ्न वायुमण्डल बनाने के लिए ।

244
01:38:38.850 --> 01:38:53.770
तो टीचर्स लक्ष्य रखेंगी , लक्ष्य रखेंगी और डेट फिक्स आप करना , बाप नहीं करेगा ।

245
01:38:59.250 --> 01:39:16.850
हर एक जोन एक दो में प्लैन बनाओ और एक दो को भी प्रेरणा दो ।

246
01:39:16.850 --> 01:39:32.279
जिस भी जोन में कोई भी नया उमंग उत्साह का प्लैन बने ,

247
01:39:32.279 --> 01:39:48.449
तो एक दो को भी उमंग उत्साह देकर सभी को निर्विघ्न बनाना है ।

248
01:39:51.140 --> 01:40:01.020
हाथ उठे , अभी तो पुरूषार्थ के हाथ उठते हैं ,

249
01:40:01.020 --> 01:40:31.479
प्रत्यक्षता के पहले सभी का हाथ उठे कि हम सदा के लिए निर्विघ्न है , निर्विघ्न रहेंगे ।

250
01:40:32.510 --> 01:40:48.619
जब सभा में सभी का ऐसा हाथ उठेगा तो कितनी वाह ! वाह ! हो जायेगी ।

251
01:40:48.619 --> 01:40:57.710
आपके भक्त भी खुश हो जायेंगे वह भी अपने अपने स्थान पर तालियां बजायेंगे ।

252
01:40:57.710 --> 01:41:06.109
वाह मेरे ईष्ट देव वाह !

253
01:41:08.109 --> 01:41:11.600
तो करना है ना ।

254
01:41:11.600 --> 01:41:13.600
करना है ?

255
01:41:13.600 --> 01:41:24.619
मधुबन वाले , मधुबन वालों को पहला नम्बर आना है ।

256
01:41:25.140 --> 01:41:31.199
आना नहीं है , करना है ।

257
01:41:32.510 --> 01:41:42.109
क्योंकि मधुबन की तरफ सबकी आकर्षण है ।

258
01:41:45.770 --> 01:41:58.220
मधुबन कहने से ही मधुबन का बाबा याद आता है ।

259
01:42:00.220 --> 01:42:07.199
मधुबन की विशेषता यह है ।

260
01:42:09.710 --> 01:42:20.000
तो बाप समान नम्बरवन बनना है।

261
01:42:23.140 --> 01:42:34.850
सिर्फ एक बात मधुबन वालों को बाबा कहे , कहे ?

262
01:42:34.850 --> 01:42:36.850
हाथ उठाओ ।

263
01:42:40.510 --> 01:42:43.250
करना पड़ेगा ।

264
01:42:43.250 --> 01:42:45.600
करेंगे ?

265
01:42:45.600 --> 01:42:48.170
करेंगे ?

266
01:42:48.170 --> 01:42:51.539
इसमें हाथ कम उठाये ।

267
01:43:13.369 --> 01:43:38.050
मधुबन निवासी एक-एक अपने को जिम्मेवारी दे

268
01:43:38.909 --> 01:44:01.770
तो मुझे बाप समान बनना ही है काई बने नहीं बने ,

269
01:44:01.770 --> 01:44:14.680
मुझे बनना है अपनी रेस्पोंसिबिलिटी तो उठा सकते हैं ना ।

270
01:44:14.680 --> 01:44:26.800
दूसरे की छोड़ो , अपनी रेसपान्सिबिल्टी उठाये मुझे बनना है ।

271
01:44:26.800 --> 01:44:30.909
मुझे करके दिखाना है ।

272
01:44:30.909 --> 01:44:44.619
तो आप सबका वायुमण्डल अनेक आत्माओं को मदद देगा ।

273
01:44:44.619 --> 01:44:56.050
यह नहीं देखो यह तो करते नहीं हैं , यह तो बदलते नहीं हैं , मैं बदलूं ।

274
01:44:59.939 --> 01:45:09.479
दूसरा आपेही बदलेंगे , मैं अपनी जिम्मेवारी लूं ।

275
01:45:13.710 --> 01:45:16.739
करेंगे ?

276
01:45:16.739 --> 01:45:21.710
पीछे भी बैठे हैं मधुबन वाले ।

277
01:45:26.000 --> 01:45:31.140
अच्छा कितना समय दें ?

278
01:45:32.279 --> 01:45:38.970
रिजल्ट 6 मास के बाद पूछें ।

279
01:45:38.970 --> 01:45:46.050
6 मास ठीक है ।

280
01:45:48.449 --> 01:45:55.250
जो समझते हैं मैं बदलूं , दूसरे को नहीं देखो ।

281
01:45:55.250 --> 01:46:00.850
दूसरे को बापदादा देखेगा ।

282
01:46:02.279 --> 01:46:10.449
न दूसरे का वर्णन करो , यह ऐसा है , यह ऐसा है , नहीं ।

283
01:46:10.449 --> 01:46:20.399
वह बाप देखेगा , मुझे बदलना है ।

284
01:46:24.569 --> 01:46:36.170
मधुबन की बहनें हैं , हाथ उठाओ मधुबन की बहनें ।

285
01:46:36.170 --> 01:46:41.310
अच्छा ।

286
01:46:43.600 --> 01:46:48.619
बहनें भी करेंगी ना ।

287
01:46:50.619 --> 01:46:56.449
शक्ति सेना को तो आगे रहना ही है ।

288
01:46:57.649 --> 01:47:08.909
6 मास में दूसरे को नहीं देखना , कारण नहीं बताना इसने किया ना ।

289
01:47:08.909 --> 01:47:20.850
करेंगे जरूर , परेशानी देंगे , क्योंकि माया सुन रही है ना ।

290
01:47:22.220 --> 01:47:25.310
बातें आयेंगी ।

291
01:47:25.310 --> 01:47:41.199
आप कहो बातें ही नहीं आवें , यह नहीं होगा , लेकिन मझ्ु ो बदलना है ।

292
01:47:43.199 --> 01:47:44.850
ठीक है ।

293
01:47:44.850 --> 01:47:51.710
अच्छा । टीचर्स , टीचर्स तो निमित्त हैं ।

294
01:47:52.109 --> 01:47:57.539
सब टीचर चाहे छोटी चाहे बड़ी ।

295
01:47:57.539 --> 01:48:03.649
इसमें छोटे नहीं हो ना , सब बड़े हैं ।

296
01:48:04.050 --> 01:48:14.680
सभी टीचर्स भी हिम्मत रखती हो , हिम्मत है ?

297
01:48:14.680 --> 01:48:18.109
6 मास देते हैं ।

298
01:48:18.109 --> 01:48:22.569
हाथ उठाओ जो करेंगी ।

299
01:48:22.569 --> 01:48:25.079
बातें आयेंगी ।

300
01:48:25.079 --> 01:48:32.399
यह नहीं कहना मैंने कोशिश की , कोशिश नहीं ।

301
01:48:32.399 --> 01:48:39.939
बाप के प्यार की कशिश , कोशिश नहीं ।

302
01:48:40.970 --> 01:48:43.600
ठीक है टीचर्स ।

303
01:48:43.600 --> 01:48:51.770
टीचर्स हाथ उठाओ , दो-दो हाथ उठाओ ।

304
01:48:56.619 --> 01:49:00.970
सभी देख रहे हो ।

305
01:49:02.220 --> 01:49:04.970
हाथ उठाया है ।

306
01:49:04.970 --> 01:49:08.800
मुबारक हो ।

307
01:49:10.569 --> 01:49:21.020
टीचर्स और मधुबन निवासी नम्बरवन।

308
01:49:21.020 --> 01:49:28.109
जो ओटे सो अर्जुन ।

309
01:49:28.109 --> 01:49:33.649
अर्जुन माना बाप समान ।

310
01:49:35.649 --> 01:49:48.220
कारण नहीं बताना , कारण तो आयेंगे , पहाड़ जैसे कारण आयेंगे , हिम्मत नहीं हारना ।

311
01:49:48.220 --> 01:49:51.710
वेलकम ।

312
01:49:51.710 --> 01:50:00.279
कारणों को कहो वेलकम और सेकण्ड में विदाई दे दो ।

313
01:50:03.880 --> 01:50:14.569
तीन बिन्दियों की चाबी , सफलता की चाबी तीन बिन्दियां ।

314
01:50:15.250 --> 01:50:20.510
यह हमेशा साथ में रखना ।

315
01:50:21.770 --> 01:50:27.479
अच्छा । अभी टीचर्स बैठ जाओ ।

316
01:50:34.170 --> 01:51:24.680
कर्नाटक जोन वाले एक साल स्वार्णिम कनार्टक बनाने की सेवा करके आये हैं :- बापदादा ने देखा सर्विस अच्छी की है ।

317
01:51:25.020 --> 01:51:40.050
जितना भी तन-मन-धन उमंग-उत्साह लगाया है ।

318
01:51:40.050 --> 01:52:05.819
वह दिल से लगाया है बापदादा जैसे स्वर्णिम कनार्टक मनाया है

319
01:52:05.819 --> 01:52:32.970
तो बापदादा भी दिल की दुआयें और दिल की मुबारक पदम पदमगुणा दे रहे हैं ।

320
01:52:36.449 --> 01:52:44.279
प्लैन भी अच्छा बनाया और प्रैक्टिकल किया है ।

321
01:52:44.279 --> 01:52:58.109
बापदादा ने आपके बोर्ड यहाँ दिखाने के पहले देख लिया ।

322
01:53:01.939 --> 01:53:07.199
बैठ जाओ ।

323
01:53:13.420 --> 01:53:45.649
डबल विदेशी :- अभी डबल विदेशियों को सिर्फ डबल विदेही नहीं कहो , डबल तीव्र पुरूषार्थी ।

324
01:53:46.680 --> 01:53:52.170
हैं ना डबल पुरूषार्थी ?

325
01:53:54.170 --> 01:53:57.539
अच्छा है ।

326
01:53:57.539 --> 01:54:18.680
बापदादा ने देखा कि स्व पुरूषार्थ के ऊपर जो भी ग्रुप टर्न बाई टर्न आये

327
01:54:18.680 --> 01:54:26.850
उन्हों का अटेन्शन अच्छा रहा है ।

328
01:54:26.850 --> 01:54:42.680
टीचर्स ने भी मेहनत की है और स्वयं भी पुरूषार्थ अच्छा किया है ।

329
01:54:42.680 --> 01:54:52.619
कईयों के पत्र भी बाप के पास पहुंचे हैं ।

330
01:54:53.420 --> 01:55:03.079
तीव्र पुरूषार्थ की अनुभूति की है ।

331
01:55:04.279 --> 01:55:22.279
इसलिए डबल पुरूषार्थी नहीं लेकिन डबल तीव्र पुरूषार्थी ।

332
01:55:25.369 --> 01:55:46.680
बापदादा देख रहे हैं कि सेवा का लक्ष्य डबल तीव्र पुरूषार्थी बच्चों ने अपनी-अपनी एरिया में

333
01:55:46.680 --> 01:55:56.569
कोई गाँव भी रह नहीं जाए , यह अटेन्शन अच्छा दिया है ।

334
01:55:57.600 --> 01:56:02.909
और प्लैन बनाया भी है ।

335
01:56:06.619 --> 01:56:11.140
उल्हना तो नहीं रहेगा ना ।

336
01:56:11.369 --> 01:56:32.619
कोई भी गांव वाला या शहर वाला आपको यह तो उल्हना नहीं देगा कि आपने बताया नहीं , हमारा बाप आया और आपने हमें बताया नहीं ।

337
01:56:32.619 --> 01:56:41.880
उस समय तो चिल्लायेंगे ना !

338
01:56:42.909 --> 01:56:56.399
इसलिए सेवा का उमंग है और अटेन्शन भी है स्व उन्नति के प्रति ।

339
01:57:02.170 --> 01:57:26.109
तीव्र पुरूषार्थ का अर्थ ही है जो गलती एक बार करेक्ट किया , वह दुबारा नहीं हो ।

340
01:57:26.109 --> 01:57:40.680
ऐसे नहीं कि एक ही गलती बार-बार होती रहे और कहो हम तीव्र पुरूषार्थी हैं

341
01:57:41.140 --> 01:57:45.649
इसको तीव्र परूषार्थ नहीं कहेंगे ।

342
01:57:45.649 --> 01:58:00.970
बापदादा ने सुना है कि मधुबन में भी तीव्र पुरुषार्थियों का ग्रुप है , वह हाथ उठाओ ।

343
01:58:03.649 --> 01:58:05.939
उठो ।

344
01:58:05.939 --> 01:58:11.020
तीव्र पुरूषार्थी ।

345
01:58:11.770 --> 01:58:18.800
बहनें नहीं हैं ।

346
01:58:23.539 --> 01:58:49.420
तो तीव्र पुरूषार्थ का अर्थ समझा , एक बार जो गलती हो जाए , जगदम्बा माँ ने शुरू-शुरू में सभी को यह अटेन्शन खिंचवाया ।

347
01:58:50.680 --> 01:59:04.170
कहते तीव्र पुरूषार्थी हैं और एक गलती बार-बार होती रहे , तो करेक्शन क्या किया ?

348
01:59:05.710 --> 01:59:22.739
इसीलिए तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप मधुबन निवासी वा मधुबन के पास रहने वाले

349
01:59:22.739 --> 01:59:41.649
जो भी हैं डबल फारेनर्स भी बापदादा ने टाइटल दिया है , डबल तीव्र पुरूषार्थी ।

350
01:59:42.800 --> 01:59:58.569
तो बार-बार वही भूल होती रहे तो तीव्र पुरूषार्थी का नाम खराब हो जाता है ।

351
01:59:59.310 --> 02:00:10.050
इसालिए आप तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप ध्यान देना ।

352
02:00:10.050 --> 02:00:12.050
अच्छा है ।

353
02:00:12.050 --> 02:00:19.710
आपस में ग्रुप बनाया है , अच्छा करते ।

354
02:00:29.710 --> 02:00:53.819
अच्छा डबल विदेशी , बापदादा खुश है लेकिन खुश है एक और बात की खुशी लानी है ,

355
02:00:54.000 --> 02:01:12.970
कभी भी अपने को कम्बाइण्ड रूप से अकेला नहीं करना ।

356
02:01:14.220 --> 02:01:24.399
अकेला करना अर्थात् माया को वेलकम करना ।

357
02:01:26.399 --> 02:01:39.199
इसलिए कम्बाइण्ड सर्वशक्तिवान का फायदा उठाना

358
02:01:39.939 --> 02:01:51.310
और समय पर ही माया अकेला करती है , यह अटेन्शन रखना ।

359
02:01:57.479 --> 02:02:16.569
सदा कम्बाइण्ड , बापदादा ने पहले भी कहा है तो डबल विदेशियों को कम्पनी अच्छी लगती है , कम्पेनियन अच्छा लगता है ।

360
02:02:19.310 --> 02:02:27.649
तो कभी भी अकेला नहीं बनना ।

361
02:02:29.649 --> 02:02:51.479
जब बाप ऑफर कर रहा है , मैं साथ देने के लिए सदा साथ हूँ ।

362
02:02:55.770 --> 02:02:58.680
अच्छी रिजल्ट है ।

363
02:02:58.680 --> 02:03:09.770
रिजल्ट अच्छी है लेकिन और अच्छे ते अच्छी दिखानी ही है ।

364
02:03:11.250 --> 02:03:14.970
अच्छा ।

365
02:03:17.649 --> 02:03:30.449
हर टर्न में आना , यह बहुत अच्छी सिस्टम बनाई है ।

366
02:03:31.250 --> 02:03:45.420
अभी तो विदेश ऐसे हो गया है जो इन्डिया और ही दूर लगता है , विदेश नजदीक लगता है ।

367
02:03:54.800 --> 02:04:12.449
विदेशी चतुरसुजान हैं , अगले साल के लिए पहले ही टिकेट का इन्तजाम कर लेते हैं ।

368
02:04:20.619 --> 02:04:36.909
बापदादा को यह विदेशियों की चतुराई अच्छी लगती है ।

369
02:04:44.619 --> 02:04:49.079
अच्छा ।

370
02:04:52.510 --> 02:05:05.420
अभी मातायें उठो :- मातायें और कुमारियां ।

371
02:05:28.399 --> 02:05:37.539
पौना हाल माताओं और कुमारियों का है ।

372
02:05:46.000 --> 02:05:52.510
माताओं को कुमारियों को नशा है ।

373
02:05:52.850 --> 02:06:08.279
संगमयुग की मातायें , शिव शक्तियां कम नहीं हैं ।

374
02:06:18.800 --> 02:06:32.739
बापदादा तो माताओं को देख एक बात में खुश होते हैं ,

375
02:06:32.739 --> 02:06:50.909
पाण्डवों को देखकर भी खुश होते हैं लेकिन मातायें अबला से शिव शक्ति बन गई ।

376
02:06:55.250 --> 02:07:19.310
मातायें चैलेन्ज कर रही हैं , हम भारत को स्वर्ग बनाके ही छोड़ेंगे ।

377
02:07:23.420 --> 02:07:28.739
तो माताओं में हिम्मत है ।

378
02:07:28.739 --> 02:07:43.020
बापदादा भी माताओं को विशेष नमस्ते करते हैं ।

379
02:07:53.880 --> 02:07:55.819
अच्छा ।

380
02:07:55.819 --> 02:08:01.020
शिव शक्ति सेना हो ।

381
02:08:01.020 --> 02:08:06.449
कमाल करके ही दिखानी है ।

382
02:08:07.369 --> 02:08:15.819
नशा रखो हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा ।

383
02:08:24.340 --> 02:08:27.140
अच्छा ।

384
02:08:39.250 --> 02:09:33.420
पाण्डव उठो :- पाण्डवों की विशेषता है ।

385
02:09:33.420 --> 02:09:48.050
सदा पाण्डवपति के साथ-साथ साथी रहे हैं ।

386
02:09:53.020 --> 02:10:06.050
विजय प्राप्त करने में भी यादगार में पाण्डव दिखाया हुआ है ।

387
02:10:06.050 --> 02:10:25.310
तो पाण्डवों की विशेषता है पाण्डव , पाण्डवपति के प्यारे हैं ।

388
02:10:29.770 --> 02:10:39.420
पाण्डवों का नाम ही है पाण्डवपति के साथी ।

389
02:10:40.739 --> 02:10:45.600
शिव शक्तियों का पार्ट अपना है ।

390
02:10:45.600 --> 02:11:06.569
पाण्डवों के बिना सेवा में वृद्धि का आधार कम हो जाता है ।

391
02:11:11.020 --> 02:11:30.050
शिवशक्तियां हैं सकाश देने वाली और पाण्डव हैं वारिस और सहयोगी बनाने वाले ।

392
02:11:36.109 --> 02:11:46.109
देखो , बड़े बड़े प्रोग्राम पाण्डवों के बिना हो नहीं सकते ।

393
02:11:53.079 --> 02:12:03.479
इसीलिए चतुर्भुज रूप का यादगार है ।

394
02:12:06.569 --> 02:12:22.680
शिव शक्तियां पाण्डवों के बिना नहीं कर सकती पाण्डव शक्तियों के बिना नहीं कर सकते ।

395
02:12:24.050 --> 02:12:47.710
इसलिए हर एक पाण्डव के मस्तक में विजय का तिलक लगा हुआ है , उसको इमर्ज करो ।

396
02:12:49.710 --> 02:13:03.939
बापदादा हर पाण्डव के मस्तक में विजयी पाण्डव का तिलक देखते हैं ।

397
02:13:10.909 --> 02:13:24.850
तो अच्छा है , सभी समझते हैं इस वर्ष का लास्ट बारी है , तो इसीलिए सभी से मिले ना ।

398
02:13:25.420 --> 02:13:30.109
मधुबन वालों से भी मिले ।

399
02:13:30.569 --> 02:13:41.479
और बापदादा को छोटा सा संगम भवन भी याद है ।

400
02:13:41.479 --> 02:13:50.909
बहुत मेहनत करते हैं और प्यार से मेहनत करते हैं ।

401
02:13:54.340 --> 02:14:00.279
संगमभवन वाले उठो ।

402
02:14:51.369 --> 02:14:53.770
अच्छा ।

403
02:14:53.770 --> 02:14:57.479
चाहे सेवा में हैं ।

404
02:14:57.710 --> 02:15:02.050
लेकिन दिल से सेवा करते हैं ।

405
02:15:02.050 --> 02:15:09.770
दिन-रात मेहनत अच्छी करते हैं , प्यार से करते हैं

406
02:15:09.770 --> 02:15:25.079
इसलिए बापदादा भी , है छोटा लेकिन कार्य बड़ा करते हैं ।

407
02:15:25.420 --> 02:15:38.800
और इन्हों के कार्य के प्यार के आधार से आप सभी को सैलवेशन मिली हैं ।

408
02:15:38.800 --> 02:15:52.340
पहले यहाँ इतनी ट्रेनें नहीं आती थी , अभी कितनी ट्रेनें आती हैं

409
02:15:52.619 --> 02:16:02.340
तो इन्हों के सेवा के प्रभाव से आपको सैलवेशन अच्छी मिलती है ।

410
02:16:02.340 --> 02:16:18.909
इसलिए सभी इन थोड़े से सेवाधारियों को दिल से मुबारक दो ।

411
02:16:34.399 --> 02:16:37.770
अच्छा ।

412
02:16:39.770 --> 02:16:52.399
अभी मिलन हो गया , किसकी शिकायत नहीं रहेगी मिले नहीं । सबसे मिले ना ।

413
02:16:57.309 --> 02:17:33.540
( बच्चे रह गये ) बहुत बच्चे हैं ।

414
02:17:34.399 --> 02:17:38.170
बहुत अच्छा ।

415
02:17:43.020 --> 02:17:54.450
बच्चों के बिना तो रौनक नहीं होती है ।

416
02:17:57.200 --> 02:18:10.909
और बच्चों को देखके सभी को बच्चों के प्रति बहुत प्यार पैदा होता है ।

417
02:18:10.909 --> 02:18:30.739
बापदादा को भी खुशी होती है कि वाह ! बच्चों का लक , जो बचपन से ही कितनी बातों से बच गये ।

418
02:18:30.739 --> 02:18:42.049
बच्चे वह जो माया की बातों से बचे हुए हैं ।

419
02:18:42.049 --> 02:18:45.139
ऐसे बच्चे हो ना ।

420
02:18:45.139 --> 02:18:47.139
ऐसे हो ?

421
02:18:47.139 --> 02:18:48.680
हाथ उठाओ ।

422
02:18:48.680 --> 02:18:51.020
बचे हुए हो ।

423
02:18:51.020 --> 02:18:55.709
बच्चा अर्थात् बचा हुआ ।

424
02:19:00.049 --> 02:19:11.020
और बच्चे तो सिकीलधे होते हैं , तो आगे बढ़ते चलो ।

425
02:19:11.020 --> 02:19:16.620
बच्चे भी कमाल करते हैं ।

426
02:19:18.620 --> 02:19:36.049
जो बापदादा का स्लोगन है बड़े तो बड़े हैं लेकिन छोटे समान अल्लाह हैं ।

427
02:19:37.020 --> 02:19:41.250
समान बनेंगे ना !

428
02:19:41.649 --> 02:19:55.020
बाप समान बनके विश्व के आगे निमित्त बनेंगे ।

429
02:19:55.600 --> 02:20:05.250
सभी बच्चे तीव्र पुरूषार्थ करना ।

430
02:20:05.250 --> 02:20:11.020
पुरूषार्थ नहीं तीव्र पुरूषार्थ ।

431
02:20:13.020 --> 02:20:16.850
ऐसे अच्छे बच्चे हो ना ।

432
02:20:16.850 --> 02:20:18.850
अच्छे हो ।

433
02:20:18.850 --> 02:20:22.680
हाथ उठाओ जो अच्छे बच्चे हैं ।

434
02:20:29.770 --> 02:20:33.309
कुमारियां भी हैं ।

435
02:20:34.000 --> 02:20:36.909
अच्छा है ।

436
02:20:38.000 --> 02:20:49.649
कई बार बापदादा ने देखा है , माँ बाप से भी बच्चे पुरूषार्थ में बहुत आगे होते ।

437
02:20:49.649 --> 02:21:09.079
बच्चे माँ बाप को याद दिलाते हैं , माँ बाप थोड़ा नीचे ऊपर करते हैं ना तो बच्चे कहते हैं कि टीचर को सुनायेंगे ।

438
02:21:11.020 --> 02:21:20.799
लेकिन प्यार से कहना , गुस्से से नहीं कहना , प्यार से कहना ।

439
02:21:26.340 --> 02:21:28.680
अच्छा है ।

440
02:21:30.049 --> 02:21:43.600
जनक , बच्चों की खास पार्टी करना ।

441
02:21:46.739 --> 02:21:57.540
आप और निर्वैर दोनों मिलके पार्टी देना ।

442
02:22:01.200 --> 02:22:04.850
खुश हो जायेंगे बच्चे ।

443
02:22:04.850 --> 02:22:11.250
और सदा खुश रहना , रोना नहीं ।

444
02:22:11.250 --> 02:22:18.170
कभी कभी भी नहीं , सदा खुश ।

445
02:22:18.170 --> 02:22:25.309
रोना नहीं , रूसना नहीं ।

446
02:22:28.280 --> 02:22:31.309
अच्छा पार्टी देना ।

447
02:22:44.049 --> 02:22:47.709
अच्छा ।

448
02:22:47.709 --> 02:22:58.969
अभी तो सबसे मिल लिया , फिर लाइन में क्यों आयेंगे ?

449
02:23:04.340 --> 02:23:18.219
अच्छा लगता है , मधुबन में मेला नहीं लगे तो सूना हो जाये ।

450
02:23:18.219 --> 02:23:39.370
इसीलिए आप सभी मेले में आये हो , यह परमात्म प्यार आपको खींच के लाया है ।

451
02:23:39.370 --> 02:23:46.170
जो पहले बारी आये हैं वह हाथ उठाओ ।

452
02:24:12.569 --> 02:24:32.219
तो पहले बारी आने वाले सिकीलधे बच्चों को पहले बारी की मुबारक है ।

453
02:24:34.219 --> 02:24:48.850
और सभी को बापदादा विशेष वरदान दे रहा है ,

454
02:24:48.850 --> 02:25:10.510
वरदान है कि जैसे अभी पुरूषार्थ कर आने के पात्र बने हो ,

455
02:25:10.510 --> 02:25:25.079
यह भाग्य लिया है ऐसे ही अमर भव रहना ।

456
02:25:30.219 --> 02:25:40.909
माया आवे तो माया का गेट बन्द कर देना ।

457
02:25:42.909 --> 02:25:47.940
माया का गेट जानते हो ?

458
02:25:47.940 --> 02:25:57.309
बॉडीकान्सेस का मैं और मेरा।

459
02:25:58.799 --> 02:26:07.020
इस गेट को बन्द कर देंगे तो अमर रहेंगे ।

460
02:26:07.649 --> 02:26:10.680
तो अमर हैं ना ।

461
02:26:10.680 --> 02:26:14.049
अमर हैं ?

462
02:26:16.049 --> 02:26:19.370
माया आयेगी तो क्या करेंगे ?

463
02:26:19.370 --> 02:26:26.280
तीव्र पुरूषार्थ करेंगे ?

464
02:26:29.540 --> 02:26:39.940
अमर रहना और औरों को भी अमर बनाना ।

465
02:26:41.940 --> 02:26:45.879
अच्छा ।

466
02:27:34.569 --> 02:28:37.309
अभी एक सेकण्ड में अपने श्रेष्ठ स्वमान बापदादा के दिलतख्त नशीन हैं ,

467
02:28:43.370 --> 02:29:09.709
इस रूहानी स्वमान के नशे में स्थित हो जाओ ।

468
02:29:14.620 --> 02:29:37.600
तख्तनशीन आत्मा हूँ , इस अनुभव में लवलीन हो जाओ ।

469
02:32:40.799 --> 02:32:44.620
अच्छा ।

470
02:32:45.770 --> 02:33:19.940
चारों ओर के अति लवली सदा बाप के लव में लीन रहने वाले ,

471
02:33:22.799 --> 02:34:14.739
सदा स्वमानधारी , स्वराज्यधारी विशेष आत्माओं को चारों आरे के उमंग-उत्साह के पखों से उडने वाले

472
02:34:15.940 --> 02:34:51.020
आरै अपने मन के वायब्रेशन से वायुमण्डल को शान्त श्रेष्ठ बनाने वाले

473
02:34:54.799 --> 02:35:32.569
सभी को बाप का सन्देश दे दुःख से छुड़ाए मुक्ति का वर्सा दिलाने वाले ,

474
02:35:39.879 --> 02:37:00.969
सदा दृढ़ता द्वारा सफलता प्राप्त करने वाले ऐसे चारों ओर के दिल के समीप रहने वाले और सम्मुख आने वाले

475
02:37:03.139 --> 02:37:48.280
सभी बच्चों को दिल का दुलार और दिल की दुआयें , यादप्यार और नमस्ते ।

476
02:37:57.770 --> 02:38:33.649
दादियों से :- आप लोगों को देख सभी खुश हो जाते हैं क्योंकि आदि रत्न हो ना और निमित्त बने हुए हो ।

477
02:38:38.450 --> 02:39:18.850
आपस में मिलकर एक दो की राय को महत्व देते हुए यह परिवर्तन का कार्य कर रहे हो और करते रहेंगे ।

478
02:39:19.200 --> 02:39:23.819
यह छोटा सा संगठन है ना ।

479
02:39:26.739 --> 02:40:11.139
एक दो की राय को रिगार्ड देते हुए सभी को निमित्त और निर्माण बनाने वाले विशेष कार्य के निमित्त बने हुए हो ।

480
02:40:16.399 --> 02:40:19.200
अच्छा है ।

481
02:40:19.200 --> 02:40:24.680
आपस में संगठन बनाया है ना ।

482
02:40:27.370 --> 02:40:44.850
तो इस संगठन को जितना अच्छी तरह से बढ़ायेंगे ,

483
02:40:45.600 --> 02:41:05.709
समय देंगे उतना ही सबके दिल में उमंग उत्साह बढ़ायेंगे ।

484
02:41:11.479 --> 02:41:16.909
ठीक चल रहा है ना !

485
02:41:16.909 --> 02:41:21.079
चलता रहेगा ।

486
02:41:28.969 --> 02:41:35.020
बापदादा सब देखते रहते हैं ।

487
02:41:40.399 --> 02:42:17.879
जितना आपका संगठन सैलवेशन देने के निमित्त बनेगा उतना ही चारों ओर का वायुमण्डल शक्तिशाली बनेगा ।

488
02:42:23.819 --> 02:42:58.510
अभी मधुबन में जो विशेष इशारा दिया है कि हर एक अपने को चेक करे , अपने को बाप समान बनाये ।

489
02:43:01.770 --> 02:43:18.219
तो एक-एक अपने को करने से संगठन स्वतः ही बदलता रहेगा ।

490
02:43:23.020 --> 02:43:32.680
यह स्मृति बार-बार दिलाते रहो ।

491
02:43:36.000 --> 02:43:51.940
स्व-परिवर्तन से औरों को भी परिवर्तन और विश्व भी परिवर्तन ।

492
02:43:52.510 --> 02:44:01.819
पहले आपस में परिवर्तन फिर विश्व में परिवर्तन ।

493
02:44:06.219 --> 02:44:11.250
तो सब ठीक चल रहा है ना !

494
02:44:17.540 --> 02:44:24.969
ठीक चल रहा है , सहज चल रहा है ।

495
02:44:30.739 --> 02:44:51.309
एक-एक को वरदान स्वरूप बनने की स्थिति स्मृति में दिलाते रहो ।

496
02:44:56.399 --> 02:45:06.799
वरदान अच्छा है नहीं , अच्छा बनना है ।

497
02:45:17.479 --> 02:45:21.600
ठीक है ।

498
02:45:24.850 --> 02:45:30.219
अच्छा ।

499
02:45:56.049 --> 02:46:46.680
रमेश भाई से :- एकाउन्ट सहज हो जाए उसके लिए एक दो की बात को इशारे से समझ और इशारा देते रहो

500
02:46:47.600 --> 02:46:59.309
क्योंकि बहनों को यह हिसाब-किताब कम आता है ।

501
02:47:00.680 --> 02:47:08.850
लेकिन आपने फिर भी इतना लायक बनाया है ।

502
02:47:15.709 --> 02:47:25.709
अभी औरों को भी अनुभवी बनाते चलो ।

503
02:47:27.479 --> 02:47:37.649
कानून तो बदलेगी , इनका काम ही क्या है ।

504
02:47:38.850 --> 02:47:52.510
ऐसे ही चलाते चलें तो क्या कहेंगे , यह गवर्मेन्ट ने क्या किया तो कुछ बदलेगी कुछ बनायेगी यह तो होगा ही ।

505
02:47:54.510 --> 02:48:10.399
यह तो अभी सीखती जाती है , काफी सीख गई हैं और भी आप सिखाते रहेंगे तो होशियार हो जायेंगी ।

506
02:48:13.309 --> 02:48:16.510
उषा बहन से :- ठीक है ।

507
02:48:16.510 --> 02:48:20.340
अच्छा है ना ।

508
02:48:21.309 --> 02:48:27.540
सूली से कांटा तो है ना ।

509
02:48:30.110 --> 02:48:37.250
हिम्मत है , हिम्मत रखने से सहज हो जाता है ।

510
02:48:37.250 --> 02:48:48.219
सोचने से बड़ी बात हो जाती है और हिम्मत से छोटी बात हो जाती है ।

511
02:48:48.219 --> 02:49:00.969
तो हिम्मत अच्छी रखी है बापदादा भी मुबारक दे रहे हैं हिम्मत की ।

512
02:49:09.079 --> 02:49:17.250
डा अनिला बहन से :- यह सदा एकरस रही है ।

513
02:49:23.819 --> 02:49:30.450
झंझटों में नहीं फंसी है ।

514
02:49:33.940 --> 02:49:39.600
अच्छा है , पार्ट अच्छा है ।

515
02:49:44.739 --> 02:49:51.250
अभी हिम्मत है ना !

516
02:49:54.000 --> 02:50:06.049
पेपर तो आते हैं लेकिन आप पास विद ऑनर ।

517
02:50:08.739 --> 02:50:10.680
ठीक है ना ।

518
02:50:10.680 --> 02:50:17.079
सहज है ना , मुश्किल तो नहीं लगता ।

519
02:50:17.079 --> 02:50:30.000
हिम्मत है और सबका प्यार भी है ।

520
02:50:33.020 --> 02:50:38.450
सारे परिवार से प्यार है ।

521
02:51:05.309 --> 02:51:18.049
भूपाल भाई सेःनिर्विघ्न कारोबार ।

522
02:51:20.049 --> 02:51:23.940
अच्छा ।

523
02:51:25.079 --> 02:51:32.850
गोलक भाई से :- कार्य चल रहा है ना , चलाते चलो ।

524
02:52:03.079 --> 02:52:24.620
वार्षिक मीटिंग के लिए विशेष :- मीटिंग में चार ही सबजेक्ट को हर एक स्थान में कवर कैसे करें ,

525
02:52:25.770 --> 02:52:37.879
कभी सर्विस आगे हो जाती है , कभी स्व-उन्नति , धारणा आगे हो जाती है ।

526
02:52:38.569 --> 02:52:55.139
तो चार ही सबजेक्ट में पास विद ऑनर बनना , यह अटेन्शन दिलाना है ।

527
02:52:57.139 --> 02:53:26.340
एक सबजेक्ट में भी अगर पास विद ऑनर नहीं तो विजय माला का मणका बनना मुश्किल हो जायेगा ।

528
02:53:29.079 --> 02:53:45.649
और एक दो के प्रति कैसे भी हो लेकिन ब्राह्मण परिवार का तो है ,

529
02:53:46.909 --> 02:54:05.200
हर एक के प्रति शिक्षा भी हो और साथ में क्षमा भी हो ।

530
02:54:06.569 --> 02:54:16.000
इसी विधि से संगठन को पक्का करें ।

531
02:54:20.280 --> 02:54:36.340
क्योंकि अभी सेन्टर में , हर एक सेन्टर तो निर्विघ्न बनें ।

532
02:54:39.940 --> 02:54:55.139
उसके लिए हर एक अपने विधि प्रमाण कोई नई नई बातें निकालें ।

533
02:54:55.139 --> 02:55:10.000
सेन्टर पर क्या होता है , वह सब अनुभवी हैं और क्या करें , किस बात का अटेन्शन रखें

534
02:55:10.000 --> 02:55:22.450
जो पहले सेन्टर निर्विघ्न बनें , फिर जोन निर्विघ्न बनें ।

535
02:55:24.450 --> 02:55:34.680
स्वभाव तो भिन्न भिन्न होंगे और पेपर भी आयेंगे

536
02:55:37.020 --> 02:56:11.479
लेकिन इनको पास कैसे करें , यह विधि पक्की ध्यान में रहे और बीच बीच में हर जोन भी आपस में रिजल्ट निकालते रहें ।

537
02:56:12.739 --> 02:56:18.170
आगे क्या करें, आगे क्या करें…।

538
02:56:19.649 --> 02:56:37.420
यह हुआ , यह हुआ , इसको कम करें , आगे क्या करें उसका स्पष्टीकरण ज्यादा हो ।

539
02:56:51.479 --> 02:57:00.399
( इस वर्ष के लिए टाइटल ) आप निकालो फिर फाइनल करेंगे ।

540
02:57:06.000 --> 02:57:18.620
डबल विदेशी बड़ी बहिनों से :- इस बारी बापदादा ने भी देखा तो अटेन्शन बहुत अच्छा दिया है ।

541
02:57:18.620 --> 02:57:39.370
लास्ट ग्रुप तक दिल से सेवा करके दिखाया और रिटर्न में रिजल्ट भी देखी ।

542
02:57:42.680 --> 02:57:53.819
क्योंकि यह मधुबन का ही चांस मिलता है इकट्ठे होने का ।

543
02:57:53.819 --> 02:58:12.340
चाहे ग्रुप ग्रुप हो लेकिन सब तरफ के इकट्ठे होते हैं , तो इस बारी यह रिजल्ट अच्छी दिखाई दी ।

544
02:58:14.340 --> 02:58:19.250
मेहनत भी की ।

545
02:58:37.649 --> 02:58:58.000
( जयन्ती बहन ने इटली वालों की याद दी ) इटली वालों को कहना कि आपकी खुशी हिम्मत उमंग उत्साह कभी टलने वाली नहीं है ।

546
02:58:58.000 --> 02:59:06.399
इटली का अर्थ है कभी टलेगी नहीं ।

547
03:00:20.680 --> 03:00:48.799
( मीरा बहन से ) यह भी साथी रही है ।

548
03:01:02.280 --> 03:01:04.620
अच्छा है ।

549
03:01:04.969 --> 03:01:12.049
अभी फारेन वाले भी समझ गये हैं सभी बातों को ।

550
03:01:12.049 --> 03:01:21.879
पहले नये नये थे ना अभी सब जान गये हैं क्या करना है , क्या नहीं करना है ।

551
03:01:21.879 --> 03:01:24.510
समझ भी गये हैं ।

552
03:01:24.510 --> 03:01:32.049
अपने पुरूषार्थ को भी समझ गये हैं , अच्छा है ।

553
03:01:54.799 --> 03:01:57.940
चन्द्रहास बाबू जी सेःहिसाब किताब आया है ।

554
03:01:58.280 --> 03:02:07.250
हिसाब किताब चुक्तू तो करना पड़ता है ना ।

555
03:02:09.079 --> 03:02:32.049
आप अपने में हिम्मत समझते हो , आपरेशन कराने की हिम्मत समझते हो ?

556
03:02:32.049 --> 03:02:54.739
( डाक्टर्स ने कहा है इस उम्र में आपरेशन न करायें तो ठीक है ) यह तो अच्छा है ।

557
03:02:55.709 --> 03:02:59.479
दवाई और दुआयें ।

558
03:02:59.479 --> 03:03:09.370
दवा में दुआयें भरकर दवा लेना तो डबल काम हो जायेगा ।

559
03:03:11.819 --> 03:03:16.850
तो मुक्त हो गये ।

560
03:03:37.309 --> 03:03:45.250
करसन भाई पटेल ( निरमा ग्रुप के मालिक ) :- आपकी एक विशेषता है , जानते हो ?

561
03:03:48.510 --> 03:03:58.569
विशेषता यह है कि मुरली से प्यार है ।

562
03:03:59.940 --> 03:04:09.200
जिसका मुरली से प्यार है , उसका मुरलीधर से आटोमेटिक है ।

563
03:04:11.200 --> 03:04:18.680
तो मुरली के कारण आगे बढ़ रहे हो ।

564
03:04:20.680 --> 03:04:27.819
मुरली श्रीमत देती है ।

565
03:04:29.819 --> 03:04:44.399
और श्रीमत मिलते ही उस पर चलने से आटोमेटिकली शक्ति मिलती है ।

566
03:04:46.399 --> 03:04:52.739
तो बापदादा खुश है , दोनों पर ।

567
03:05:02.569 --> 03:05:07.649
( सब बाबा के बन जाएं ) बनेंगे कहाँ जायेंगे ।

568
03:05:27.020 --> 03:05:45.309
यह जानता है , ग्रुप बनाओ , निमन्त्रण देकर सन्देश दे दो , उल्हना नहीं दें ।

569
03:05:52.510 --> 03:05:59.020
यह होशियार है , देगा ।

570
03:06:40.399 --> 03:06:47.479
अपने को सदा बेफिकर बादशाह रखो ।

571
03:06:48.680 --> 03:06:52.739
फिकर कोई नहीं रखो ।

572
03:06:54.280 --> 03:07:03.370
फिकर आवे ना , तो बहनों को बता दो , बाप को दे दो ।

573
03:07:04.340 --> 03:07:20.739
आप तो ट्रस्टी हो ना , मालिक तो बाप है ना , तो कोई भी बात होती है , मालिक के ऊपर छोड़ो , आप ट्रस्टी बनके चलो ।

574
03:07:20.739 --> 03:07:26.219
इसमें बेफिक्र रहेंगे ।

575
03:08:17.600 --> 03:08:31.200
जो स्वयं को अनुभव होता है , वह औरों को देने के बिना रह नहीं सकते ।

576
03:08:31.540 --> 03:08:36.280
खुशी है ना ।

577
03:08:36.280 --> 03:08:44.219
तो खुशी बांटने के बिना रह नहीं सकेंगे ।

578
03:08:47.479 --> 03:08:50.739
और आप भी खुशी देंगे ।

579
03:08:50.739 --> 03:09:00.569
सब खुश होंगे ना यह खुश क्यों रहता है , तो सेवा हो जायेगी ।

580
03:09:01.370 --> 03:09:06.170
यह भी सेवा करते ।

581
03:09:17.139 --> 03:09:27.139
2 - जिसका मुरली से प्यार है ना , वह समझो निर्विघ्न हो जायेगा ।

582
03:09:30.850 --> 03:09:40.000
आप मुरली पढ़ते हो , सुनते हो ?

583
03:09:44.909 --> 03:10:06.049
घर में पढ़ो , एक प्वाइंट भी पढ़ो , लेकिन मुरली जरूर पढ़ो , फिर प्यार हो जायेगा फिर कोई कहेगा ना , नहीं करो तो भी करेंगे ।

584
03:10:13.649 --> 03:10:27.370
अच्छे हैं, अभी सहयोगी भी हैं, स्नेही भी है, अभी सहजयोग में नम्बरवन।

585
03:10:31.819 --> 03:10:39.709
सारा ग्रुप सहजयोगी में नम्बरवन।

586
03:10:45.940 --> 03:10:49.139
इनको भी उमंग बहुत है ।

587
03:10:51.139 --> 03:10:53.540
तीनों चारों को है ।

588
03:10:53.540 --> 03:11:00.909
बापदादा उमंग उत्साह की मुबारक देते हैं ।

589
03:11:58.620 --> 03:12:08.850
3 - अभी तो ब्राह्मण परिवार के हो गये ना ।

590
03:12:11.770 --> 03:12:28.340
ब्राह्मण परिवार कितना ऊंचा परिवार है और कितना बड़ा परिवार है ।

591
03:12:29.479 --> 03:12:39.079
तो ब्राह्मण बनना यह बहुत बड़ा भाग्य है ।

592
03:12:40.219 --> 03:12:48.909
तो आपने अपना भाग्य ले लिया ।

593
03:12:51.200 --> 03:12:55.370
ले लिया ना ।

594
03:12:57.370 --> 03:13:12.280
हर कदम में अपने श्रेष्ठ भाग्य को स्मृति में रख आगे बढ़ते चलो ।

595
03:13:14.280 --> 03:13:18.620
अच्छा है ।

