WEBVTT

1
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आज बापदादा अपने सदा सन्तुष्ट रहने वाले सन्तुष्ट मणियों को देख रहे हैं ।

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00:14:33.370 --> 00:15:19.139
एक-एक सन्तुष्टमणि की चमक से चारों ओर कितनी सुन्दर चमक चमक रही है ।

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00:15:29.250 --> 00:16:12.570
हर एक सन्तुष्टमणि कितनी बाप की प्यारी हर एक की प्यारी अपनी भी प्यारी है ।

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00:16:22.620 --> 00:16:39.019
सन्तुष्टता सर्व को प्यारी है ।

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00:16:58.679 --> 00:17:18.109
सन्तुष्टता सदा सर्व प्राप्ति सम्पन्न है

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क्योंकि जहाँ सन्तुष्टता है वहाँ अप्राप्त कोई वस्तु नहीं ।

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00:17:50.849 --> 00:18:11.940
सन्तुष्ट आत्मा में सन्तुष्टता का नेचरल नेचर है ।

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00:18:23.599 --> 00:18:50.170
सन्तुष्टता की शक्ति स्वतः और सहज चारों ओर वायुमण्डल फैलाती है ।

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00:18:53.420 --> 00:19:21.539
उनका चेहरा उनके नयन वायुमण्डल में भी सन्तुष्टता की लहर फैलाते हैं ।

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00:19:26.799 --> 00:19:49.200
जहाँ सन्तुष्टता है वहाँ और विशेषतायें स्वतः ही आ जाती हैं ।

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00:19:54.339 --> 00:20:12.619
सन्तुष्टता संगम पर विशेष बाप की देन है ।

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00:20:24.970 --> 00:20:46.910
सन्तुष्टता की स्थिति परस्थिति के ऊपर सदा विजयी है ।

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00:20:54.279 --> 00:21:25.940
परस्थिति बदलती रहती है लेकिन सन्तुष्टता की शक्ति सदा प्रगति को प्राप्त करती रहती है ।

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00:21:45.079 --> 00:22:14.799
कितनी भी परिस्थिति सामने आये लेकिन सन्तुष्टमणि के आगे हर समय

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प्रकृति एक पपेटशो माफिक दिखाई देती है माया और प्रकृति का पपेट शो ।

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00:22:41.369 --> 00:22:56.740
इसलिए सन्तुष्ट आत्मा कभी परेशान नहीं होती ।

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00:23:00.799 --> 00:23:14.799
परिस्थिति का शो मनोरंजन अनुभव होता है ।

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00:23:27.200 --> 00:23:39.480
यह मनोरंजन अनुभव करने के लिए

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अपने स्थिति की सीट सदा साक्षीदृष्टा में स्थित रहने वाली यह मनोरंजन अनुभव करती है ।

20
00:24:49.769 --> 00:25:10.509
दृष्य कितना भी बदलता लेकिन साक्षी दृष्टा की सीट पर स्थित रहने वाली

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00:25:11.650 --> 00:25:37.710
सन्तुष्ट आत्मा साक्षी हो हर परिस्थिति को स्व स्थिति से बदल देती है ।

22
00:25:46.910 --> 00:26:07.819
तो हर एक अपने को चेक करे कि मैं सदा सन्तुष्ट हूँ ?

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00:26:07.819 --> 00:26:11.599
सदा ?

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00:26:12.970 --> 00:26:21.480
सदा हैं वा कभी कभी हैं ?

25
00:26:29.880 --> 00:26:57.769
बापदादा हमेशा हर शक्ति के लिए खुशी के लिए डबल लाइट बन उड़ने के लिए

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00:26:58.000 --> 00:27:11.880
यही बच्चों को कहते कि सदा शब्द सदा याद रहे ।

27
00:27:16.740 --> 00:27:33.940
कभी-कभी शब्द ब्राह्मण जीवन के डिक्शनरी में है ही नहीं

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00:27:39.369 --> 00:27:56.220
क्योंकि सन्तुष्टता का अर्थ ही है सर्व प्राप्ति ।

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00:28:01.019 --> 00:28:19.599
जहाँ सर्व प्राप्ति है वहाँ कभी-कभी शब्द है ही नहीं ।

30
00:28:25.599 --> 00:28:49.369
तो सदा अनुभूति करने वाले हो वा पुरूषार्थ कर रहे हो ?

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00:28:58.400 --> 00:29:08.220
हर एक ने अपने आपसे पूछा चेक किया ?

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00:29:15.480 --> 00:29:52.339
क्योंकि आप सभी विशेष बाप के स्नेही सहयोगी लाडले मीठे मीठे स्व-परिवर्तक बच्चे हो ।

33
00:30:01.369 --> 00:30:04.799
ऐसे हो ना ?

34
00:30:04.799 --> 00:30:06.799
है ऐसे ?

35
00:30:06.799 --> 00:30:17.250
जैसे बाप देख रहे हैं ऐसे ही अपने को अनुभव करते हो ?

36
00:30:17.710 --> 00:30:31.369
हाथ उठाओ जो सदा कभी-कभी नहीं सदा सन्तुष्ट रहते हैं ।

37
00:30:39.369 --> 00:30:44.450
सदा शब्द याद है ना ।

38
00:30:44.450 --> 00:30:50.279
थोड़ा धीरे धीरे उठा रहे हैं ।

39
00:30:56.910 --> 00:30:59.140
अच्छा ।

40
00:30:59.140 --> 00:31:01.599
बहुत अच्छा ।

41
00:31:04.569 --> 00:31:13.369
थोड़े थोड़े उठा रहे हैं और सोच-सोच के उठा रहे हैं ।

42
00:31:16.450 --> 00:32:09.650
लेकिन बापदादा ने बार-बार अटेन्शन खिंचवाया है कि अब समय और स्वयं दोनों को देखो ।

43
00:32:20.970 --> 00:32:44.569
समय की रफ्तार और स्वयं की रफ्तार दोनों को चेक करो ।

44
00:32:57.599 --> 00:33:07.710
पास विद आनर तो होना ही है ना ।

45
00:33:17.819 --> 00:33:46.279
हर एक सोचो कि मैं बाप की राजदुलारी या राजदुलारा हूँ ।

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00:33:56.680 --> 00:34:06.170
अपने को राजदुलारा समझते हो ना !

47
00:34:06.970 --> 00:34:26.050
रोज़ बापदादा आपको क्या याद प्यार देते हैं ?

48
00:34:28.679 --> 00:34:32.219
लाडले ।

49
00:34:34.219 --> 00:34:39.769
तो लाडला कौन होता है ?

50
00:34:47.480 --> 00:35:31.369
लाडला वही होता है जो फॉलो फादर करता है और फॉलो करना बहुत बहुत बहुत सहज है कोई मुश्किल नहीं है ।

51
00:35:37.250 --> 00:36:02.000
एक ही बात को फॉलो किया तो सहज सर्व बातों में फॉलो हो ही जायेगा ।

52
00:36:05.250 --> 00:36:21.820
एक ही लाइन है जो बाप हर रोज़ याद दिलाते हैं ।

53
00:36:28.400 --> 00:36:33.820
वह याद है ना ?

54
00:36:33.820 --> 00:36:46.969
अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो ।

55
00:36:46.969 --> 00:37:07.250
एक ही लाइन है ना और याद करने वाली आत्मा जिसको बाप का खज़ाना मिल गया

56
00:37:12.400 --> 00:37:33.079
वह सेवा के बिना रह ही नहीं सकता क्योंकि अथाह प्राप्ति है अखुट खज़ाने हैं ।

57
00:37:38.449 --> 00:37:54.000
दाता के बच्चे हैं वह देने के बिना रह नहीं सकते

58
00:38:05.599 --> 00:38:22.510
और मैजॉरिटी आप सबको टाइटिल क्या मिला है ?

59
00:38:22.510 --> 00:38:28.110
डबल फारेनर्स ।

60
00:38:32.679 --> 00:38:38.909
तो टाइटिल ही डबल है ।

61
00:38:51.880 --> 00:39:38.619
बापदादा को भी आप सबको देख खुशी होती है और सदा ऑटोमेटिक गीत गाते रहते कि वाह मेरे बच्चे वाह !

62
00:39:57.599 --> 00:40:18.280
अच्छा है भिन्न-भिन्न देश से कौन से विमान में आये हो ?

63
00:40:22.969 --> 00:40:41.139
स्थूल में तो किसी भी विमान में आये हो लेकिन बापदादा कौन सा विमान देख रहे हैं ?

64
00:40:46.280 --> 00:41:12.510
अति स्नेह के विमान में अपने प्यारे-प्यारे घर में पहुंच गये हो ।

65
00:41:33.079 --> 00:42:01.650
बापदादा हर बच्चे को आज विशेष यही वरदान दे रहे हैं

66
00:42:09.250 --> 00:42:52.219
कि हे लाडले प्यारे बच्चे सदा सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ ।

67
00:42:52.909 --> 00:43:03.820
सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना ।

68
00:43:10.110 --> 00:43:32.449
कई बच्चे कहते हैं सन्तुष्ट रहना तो सहज है लेकिन सन्तुष्ट करना यह थोड़ा मुश्किल लगता है ।

69
00:43:39.420 --> 00:44:06.170
बापदादा जानते हैं अगर हर एक आत्मा को सन्तुष्ट करना है

70
00:44:06.969 --> 00:44:31.309
तो उसकी विधि बहुत सहज साधन है

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00:44:35.710 --> 00:44:55.539
अगर कोई आपसे असन्तुष्ट होता है या असन्तुष्ट रहता है

72
00:44:59.079 --> 00:45:25.199
तो वह भी असन्तुष्ट लेकिन आपको भी उसकी असन्तुष्टता का प्रभाव कुछ तो पड़ता है ना ।

73
00:45:26.679 --> 00:45:32.739
व्यर्थ संकल्प तो चलता है ना ।

74
00:45:36.050 --> 00:45:55.820
जो बापदादा ने शुभ भावना शुभ कामना का मन्त्र दिया है

75
00:46:01.369 --> 00:46:31.769
अगर अपने आपको इस मन्त्र में स्मृति स्वरूप रखो तो आपके व्यर्थ संकल्प नहीं चलेंगे ।

76
00:46:37.420 --> 00:47:17.539
अपने को जानते हुए भी कि यह ऐसा है यह वैसा है लेकिन अपने को सदा न्यारा उसके वायब्रेशन से न्यारा और बाप का प्यारा अनुभव करो ।

77
00:47:21.420 --> 00:47:54.619
तो आपके न्यारे और बाप के प्यारे पन की श्रेष्ठ स्थिति के वायब्रेशन अगर उस आत्मा को नहीं भी पहुंचे तो वायुमण्डल में फैलेगा जरूर ।

78
00:48:06.400 --> 00:48:31.309
अगर कोई परिवर्तन नहीं होता और आपके अन्दर भी उसी आत्मा का प्रभाव पड़ता रहता व्यर्थ संकल्प के रूप में

79
00:48:31.309 --> 00:48:48.000
तो वायुमण्डल में सबके संकल्प फैलते हैं ।

80
00:48:52.110 --> 00:49:28.800
इसलिए आप न्यारा बन बाप का प्यारा बन उस आत्मा के भी कल्याण के प्रति शुभ भावना शुभ कामना रखो ।

81
00:49:38.050 --> 00:49:51.199
कई बार बच्चे कहते हैं कि उसने गलती की ना

82
00:49:51.599 --> 00:50:29.139
तो हमको भी फोर्स से कहना पड़ता है थोड़ा अपना स्वभाव भी मुख भी फोर्स वाला हो जाता है ।

83
00:50:32.449 --> 00:50:51.420
तो उसने गलती की लेकिन आपने जो फोर्स दिखाया क्या वह गलती नहीं है ?

84
00:50:58.739 --> 00:51:30.219
उसने और गलती की आपने अपने मुख से जो फोर्स से बोला जिसको क्रोध का अंश कहेंगे तो वह राइट है ?

85
00:51:30.219 --> 00:51:40.050
क्या गलत गलत को ठीक कर सकता है ?

86
00:51:44.969 --> 00:52:19.880
आजकल के समय अनुसार अपने बोल को फोर्सफुल बनाना

87
00:52:23.710 --> 00:52:49.599
यह भी विशेष अटेन्शन रखो क्योंकि जोर से बोलना या तंग होके बोलना

88
00:53:00.219 --> 00:53:29.079
वह तो बदलता नहीं लेकिन यह भी दूसरे नम्बर के विकार का अंश है ।

89
00:53:37.199 --> 00:53:59.539
कहा जाता है - मुख से बोल ऐसे निकले जैसे फूलों की वर्षा हो रही है ।

90
00:54:11.199 --> 00:55:09.139
मीठा बोल मुस्कराहट चेहरा मीठी वृत्ति मीठी दृष्टि मीठा सम्बन्ध-सम्पर्क यह भी सर्विस का साधन है ।

91
00:55:11.769 --> 00:55:30.969
इसलिए रिजल्ट देखो अगर मानो कोई ने गलती की गलत है

92
00:55:31.880 --> 00:55:46.739
और आपने समझाने के लक्ष्य से और कोई लक्ष्य नहीं है लक्ष्य आपका बहुत अच्छा है

93
00:55:46.739 --> 00:56:03.420
कि इसको शिक्षा दे रहे हैं समझा रहे हैं लेकिन रिजल्ट में क्या देखा गया है ?

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00:56:05.420 --> 00:56:11.199
वह बदलता है ?

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00:56:31.420 --> 00:56:46.449
और ही आगे के लिए आगे आने से डरता है ।

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00:56:53.369 --> 00:57:05.079
तो जो लक्ष्य आपने रखा वह तो होता नहीं है

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00:57:13.480 --> 00:57:59.650
इसलिए अपने मन्सा संकल्प और वाणी अर्थात् बोल और सम्बन्ध-सम्पर्क

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00:58:13.599 --> 00:59:02.969
सदा मीठा मधुरता अर्थात् महान बनाओ क्योंकि वर्तमान समय लोग प्रैक्टिकल लाइफ देखने चाहते हैं

99
00:59:09.079 --> 00:59:36.800
अगर वाणी से सेवा करते हो तो वाणी की सेवा से प्रभावित हो नज़दीक तो आते हैं यह तो फायदा है

100
00:59:38.800 --> 01:00:36.110
लेकिन प्रैक्टिकल मधुरता महानता श्रेष्ठ भावना चलन और चेहरे को देख स्वयं भी परिवर्तन के लिए प्रेरणा ले लेते हैं

101
01:00:39.539 --> 01:00:57.650
और जैसे जैसे आगे समय की हालातें परिवर्तन होनी हैं

102
01:00:59.199 --> 01:01:24.340
तो ऐसे समय पर आप सबको चेहरे और चलन से ज्यादा सेवा करनी पड़ेगी ।

103
01:01:40.110 --> 01:01:56.849
इसलिए अपने आपको चेक करो -

104
01:02:05.420 --> 01:02:46.400
आत्माओं के प्रति शुभ भावना शुभ कामना की वृत्ति और दृष्टि के संस्कार नेचर और नेचरल हैं ?

105
01:02:52.170 --> 01:03:38.510
बापदादा हर एक बच्चे को माला का मणका विजयी माला का मणका देखने चाहते हैं ।

106
01:03:41.079 --> 01:04:00.110
तो आप सभी भी अपने को समझते हो कि हम माला के मणके बनने ही वाले हैं ।

107
01:04:04.000 --> 01:04:34.679
कई बच्चे सोचते हैं कि 108 की माला में तो जो निमित्त बने हुए बच्चे हैं वही आयेंगे

108
01:04:34.679 --> 01:04:49.599
लेकिन बापदादा ने पहले भी कहा है यह तो 108 का गायन भक्ति की माला का है

109
01:04:49.599 --> 01:05:18.739
लेकिन अगर आप हर एक विजयी दाना बनेंगे तो बापदादा माला के अन्दर बहुत लड़ी लगा देगा ।

110
01:05:25.139 --> 01:05:46.800
बाप के दिल की माला में आप हर एक विजयी बच्चों को स्थान है यह बाप की गैरन्टी है ।

111
01:05:54.619 --> 01:06:27.019
सिर्फ स्वयं को मन्सा-वाचा-कर्मणा और चलन चेहरे में विजयी बनाओ ।

112
01:06:29.019 --> 01:06:33.599
है पसन्द है , बनेंगे ?

113
01:06:33.599 --> 01:06:42.400
बापदादा की गैरन्टी है विजय माला का मणका बनायेंगे ।

114
01:06:42.400 --> 01:06:47.710
कौन बनेंगे ?

115
01:06:49.710 --> 01:07:05.880
अच्छा तो बापदादा माला के अन्दर माला बनाने शुरू कर देंगे ।

116
01:07:09.650 --> 01:07:17.820
डबल फारेनर्स को पसन्द है ना !

117
01:07:18.849 --> 01:07:32.219
विजयी माला में लाना बाप का काम है लेकिन आपका काम है विजयी बनना ।

118
01:07:33.199 --> 01:07:35.599
सहज है ना !

119
01:07:35.599 --> 01:07:38.510
कि मुश्किल है ?

120
01:07:38.510 --> 01:07:41.820
मुश्किल लगता है ?

121
01:07:41.820 --> 01:07:47.369
जिसको मुश्किल लगता है वह हाथ उठाओ ।

122
01:07:48.170 --> 01:07:50.909
लगता है ?

123
01:07:51.940 --> 01:07:56.219
थोड़े-थोड़े कोई-कोई हैं ।

124
01:07:58.219 --> 01:08:27.199
बापदादा कहता है - जब बापदादा कहते हो तो बाबा कहने से क्या बाप का वर्सा नहीं मिलेगा !

125
01:08:32.510 --> 01:09:04.510
जब सभी वर्से के अधिकारी हो और कितना सहज बाप ने वर्सा दिया सेकण्ड की बात है

126
01:09:04.510 --> 01:09:15.600
आपने माना जाना मेरा बाबा और बाप ने क्या कहा ?

127
01:09:15.600 --> 01:09:17.600
मेरा बच्चा ।

128
01:09:17.600 --> 01:09:27.199
तो बच्चा तो स्वतः ही वर्से के अधिकारी है ।

129
01:09:28.000 --> 01:09:36.970
बाबा कहते हो ना सभी एक ही शब्द बोलते हो मेरा बाबा ।

130
01:09:36.970 --> 01:09:38.970
है ऐसे ?

131
01:09:38.970 --> 01:09:42.279
मेरा बाबा है ?

132
01:09:42.279 --> 01:09:46.000
इसमें हाथ उठाओ ।

133
01:09:48.739 --> 01:09:55.020
मेरा बाबा है तो मेरा वर्सा नहीं है ?

134
01:09:55.020 --> 01:10:07.710
जब मेरा बाबा है तो मेरा वर्सा भी बंधा हुआ है और वर्सा क्या है ?

135
01:10:11.079 --> 01:10:19.310
बाप समान बनना ।

136
01:10:20.569 --> 01:10:25.880
विजयी बनना ।

137
01:10:32.399 --> 01:10:55.140
बापदादा ने देखा कि डबल फारेनर्स में मैजारिटी हाथ में हाथ लेके चलेंगे ।

138
01:10:55.140 --> 01:11:03.250
हाथ में हाथ देना चलना यह फैशन है ।

139
01:11:05.250 --> 01:11:17.939
तो अभी भी बाप कहते हैं बाप शिवबाबा का हाथ क्या है ?

140
01:11:18.340 --> 01:11:31.770
यह हाथ तो है नहीं तो शिवबाबा का हाथ पकड़ा तो हाथ कौन सा है ?

141
01:11:32.340 --> 01:11:40.680
श्रीमत बाप का हाथ है ।

142
01:11:41.140 --> 01:11:51.369
तो जैसे स्थूल में हाथ में हाथ देकर चलना पसन्द आता है

143
01:11:51.770 --> 01:12:06.279
तो श्रीमत के हाथ में हाथ देके चलना यह क्या मुश्किल है !

144
01:12:11.079 --> 01:12:48.680
ब्रह्मा बाप को देखा प्रैक्टिकल सबूत देखा कि हर कदम श्रीमत प्रमाण चलने से सम्पूर्ण फरिश्तेपन की मंज़िल में पहुंच गया ना !

145
01:12:54.399 --> 01:13:02.279
अव्यक्त फरिश्ता बन गया ना ।

146
01:13:04.279 --> 01:13:36.449
तो फॉलो फादर हर एक श्रीमत उठने से लेकर रात तक हर कदम की श्रीमत बापदादा ने बता दी है ।

147
01:13:36.449 --> 01:14:02.800
उठो कैसे चलो कैसे कर्म कैसे करो मन में संकल्प क्या-क्या करो और समय को कैसे श्रेष्ठ बिताओ ।

148
01:14:02.800 --> 01:14:14.000
रात को सोने तक श्रीमत मिली हुई है ।

149
01:14:16.000 --> 01:14:32.279
सोचने की भी जरूरत नहीं यह करूं या नहीं करूं फॉलो ब्रह्मा बाप ।

150
01:14:37.710 --> 01:15:14.170
तो बापदादा का जिगरी प्यार है बापदादा एक बच्चे को भी विजयी नहीं बनें राजा नहीं बनें यह नहीं देखने चाहते ।

151
01:15:14.170 --> 01:15:21.020
हर एक बच्चा राजा बच्चा है ।

152
01:15:21.020 --> 01:15:28.399
स्वराज्य अधिकारी है ।

153
01:15:36.909 --> 01:15:59.649
इसलिए अपना स्वराज्य भूल नहीं जाना ।

154
01:16:03.250 --> 01:16:08.109
समझा ।

155
01:16:15.880 --> 01:17:13.819
बापदादा ने कई बार इशारा दिया है कि समय अचानक और नाज़ुक आ रहा है इसलिए एवररेडी अशरीरीपन का अनुभव आवश्यक है।

156
01:17:16.340 --> 01:17:53.369
कितना भी बिजी हो लेकिन बिजी होते हुए भी एक सेकण्ड अशरीरी बनने का अभ्यास अभी से करके देखो ।

157
01:17:55.369 --> 01:18:03.140
आप कहेंगे हम बहुत बिजी रहते हैं

158
01:18:10.680 --> 01:18:26.050
अगर मानो कितने भी बिजी हो आपको प्यास लगती है क्या करेंगे ?

159
01:18:27.079 --> 01:18:31.770
पानी पि्ायेंगे ना !

160
01:18:32.000 --> 01:18:45.600
क्योंकि समझते हो प्यास लगी है तो पानी पीना जरूरी है ।

161
01:18:47.600 --> 01:19:17.250
ऐसे बीच-बीच में अशरीरी आत्मिक स्थिति में स्थित रहने का अभ्यास भी जरूरी है

162
01:19:17.250 --> 01:19:42.050
क्योंकि आने वाले समय में चारों ओर की हलचल में अचल स्थिति की आवश्यकता है ।

163
01:19:43.140 --> 01:20:08.909
तो अभी से बहुतकाल का अभ्यास नहीं करेंगे तो अति हलचल समय अचल कैसे रहेंगे !

164
01:20:13.819 --> 01:20:31.079
सारे दिन में एक-दो मिनट निकालके भी चेक करो

165
01:20:34.399 --> 01:20:53.710
कि समय प्रमाण आत्मिक स्थिति द्वारा अशरीरी बन सकते हैं ?

166
01:20:53.710 --> 01:21:05.600
चेक करो और चेंज करो । सिर्फ चेक नहीं करना चेंज भी करो ।

167
01:21:07.310 --> 01:21:27.770
तो बार-बार इस अभ्यास को चेक करने से रिवाइज़ करने से नेचरल स्थिति बन जायेगी ।

168
01:21:31.880 --> 01:21:43.710
बापदादा से स्नेह है इसमें तो सभी हाथ उठाते हैं ।

169
01:21:43.710 --> 01:21:49.369
हैं ना स्नेह !

170
01:21:51.369 --> 01:21:57.939
फुल स्नेह है फुल कि अधूरा ?

171
01:21:57.939 --> 01:22:03.140
अधूरा तो नहीं है ना ।

172
01:22:03.140 --> 01:22:10.569
तो स्नेह है तो वायदा क्या है ?

173
01:22:10.569 --> 01:22:14.000
क्या वायदा किया है ?

174
01:22:14.000 --> 01:22:17.020
साथ चलेंगे ?

175
01:22:17.020 --> 01:22:26.569
अशरीरी बन साथ चलेंगे कि पीछे-पीछे आयेंगे ?

176
01:22:26.569 --> 01:22:30.449
साथ चलेंगे ?

177
01:22:30.449 --> 01:22:39.649
और थोड़ा टाइम साथ रहेंगे भी वतन में थोड़ा ।

178
01:22:40.569 --> 01:22:54.170
और फिर ब्रह्मा बाप के साथ फर्स्ट जन्म में आयेंगे ।

179
01:22:54.170 --> 01:22:56.909
है यह वायदा ?

180
01:22:56.909 --> 01:22:59.310
है ना ?

181
01:22:59.310 --> 01:23:10.850
हाथ नहीं उठवाते हैं ऐसे सिर हिलाओ ।

182
01:23:10.850 --> 01:23:16.569
हाथ उठाते थक जायेंगे ना ।

183
01:23:19.199 --> 01:23:38.800
जब साथ चलना ही है पीछे नहीं रहना है तो बाप भी साथ किसको लेके जायेंगे ?

184
01:23:39.939 --> 01:23:47.199
बाप समान को साथ लेके जायेंगे ।

185
01:23:48.569 --> 01:23:59.539
बाप को भी अकेला जाना पसन्द नहीं है बच्चों के साथ जाना है ।

186
01:24:01.539 --> 01:24:06.619
तो साथ चलने के लिए तैयार है ना !

187
01:24:06.619 --> 01:24:09.250
कांध हिलाओ ।

188
01:24:09.880 --> 01:24:11.600
हैं ?

189
01:24:13.020 --> 01:24:16.109
सभी चलेंगे ?

190
01:24:16.109 --> 01:24:20.909
अच्छा सभी चलने के लिए तैयार हैं ?

191
01:24:20.909 --> 01:24:25.079
जब बाप जायेंगे तब जायेंगे ना ।

192
01:24:25.079 --> 01:24:32.510
अभी नहीं जायेंगे अभी तो फॉरेन में जाना है ना लौट के ।

193
01:24:34.510 --> 01:24:50.909
बाप आर्डर करेगा नष्टोमोहा स्मृति लब्धा का बेल बजायेगा और साथ चल पड़ेंगे ।

194
01:24:53.479 --> 01:24:58.569
तो तैयारी है ना !

195
01:24:59.369 --> 01:25:08.000
स्नेह की निशानी है साथ चलना ।

196
01:25:15.250 --> 01:25:19.770
अच्छा ।

197
01:25:23.770 --> 01:25:43.310
बापदादा हर एक बच्चे को दूर से भी नजदीक अनुभव कर रहा है ।

198
01:25:54.449 --> 01:26:08.800
जब साइंस के साधन दूर को नजदीक कर सकता है देख सकता है बोल सकता है

199
01:26:08.800 --> 01:26:24.220
तो बापदादा भी दूर बैठे हुए बच्चों को सबसे नजदीक देख रहे हैं ।

200
01:26:30.170 --> 01:26:40.000
दूर नहीं हो दिल में समाये हुए हो ।

201
01:26:50.680 --> 01:27:16.739
तो बापदादा विशेष टर्न के अनुसार आये हुए बच्चों को

202
01:27:21.250 --> 01:28:06.050
अपने दिल में नयनों में समाते हुए एक-एक को साथ चलने वाले साथ रहने वाले साथ राज्य करने वाले देख रहे हैं ।

203
01:28:12.850 --> 01:28:34.050
तो आज से सारे दिन में बार-बार कौन सी ड्रिल करेंगे ?

204
01:28:39.020 --> 01:29:23.199
अभी अभी एक सेकण्ड में आत्म-अभिमानी अपने शरीर को भी देखते हुए

205
01:29:24.569 --> 01:29:55.479
अशरीरी स्थिति में न्यारा और बाप का प्यारा अनुभव कर सकते हो ना !

206
01:29:55.649 --> 01:30:31.770
तो अभी एक सेकण्ड में अशरीरी भव !

207
01:33:17.079 --> 01:33:21.250
अच्छा ।

208
01:33:23.250 --> 01:33:58.279
( ड्रिल ) ऐसे ही बीच-बीच में सारे दिन में कैसे भी एक मिनट निकाल इस अभ्यास को पक्का करते चलो ।

209
01:34:00.279 --> 01:34:42.970
बाकी बच्चों ने चाहे विदेश वालों ने चाहे देश वालों ने दोनों ने मिलकर जो भी प्लैन प्रोग्राम बनाये

210
01:34:44.449 --> 01:34:56.850
तो बापदादा ने देखा भी सुना भी ।

211
01:34:57.600 --> 01:35:19.079
बापदादा ने बीच-बीच में आपके प्रोग्रामस के बीच में चक्कर लगाकर देखा भी ।

212
01:35:19.079 --> 01:35:31.020
तो बापदादा खुश है कि सभी ने मिलकर

213
01:35:33.250 --> 01:35:59.250
जो भविष्य तीव्र पुरूषार्थ परिवर्तन का प्लैन बनाया है वह बापदादा को पसन्द है ।

214
01:36:00.050 --> 01:36:28.739
लेकिन जो प्लैन बनाये हैं वह दूसरे साल में उसको प्रैक्टिकल में लाने वालों को बापदादा विशेष एक गुप्त सौगात देंगे ।

215
01:36:32.569 --> 01:37:14.909
तो आगे बढ़ो इस बारी के दोनों के संगठन में पर-उपकार सहयोगी बनने का उमंग अच्छा देखा गया ।

216
01:37:21.250 --> 01:37:45.710
डबल विदेशियों को बापदादा ने पहले भी कहा है कि अभी डबल विदेशी के बजाए डबल तीव्र पुरूषार्थी कहो ।

217
01:37:50.050 --> 01:38:31.079
बापदादा आप सब बच्चों को इस विश्व की स्टेज पर हीरो पार्ट बजाने वाला विश्व के आगे हीरो दिखाने चाहते हैं ।

218
01:38:36.569 --> 01:38:59.199
सभी उमंग - उत्साह से आये भी हैं और पत्र भी बहुत आये हैं हर एक ग्रुप ने भी अपना याद निशानियां भेजी है ।

219
01:38:59.199 --> 01:39:19.079
बापदादा ने देखा है जिन्होंने भी यादप्यार या ईमेल या पत्र भेजे हैं

220
01:39:20.170 --> 01:39:44.000
उन सबको बापदादा नाम सहित सम्मुख देख पदमगुणा यादप्यार दे रहे हैं ।

221
01:39:46.000 --> 01:39:57.479
चाहे दूर हैं लेकिन दिल में समाये हुए हैं ।

222
01:40:03.079 --> 01:40:32.680
और सभी ब्राह्मण परिवार को खुशी होती है कि एक ही समय 100 देशों के इकट्ठे हुए हैं ।

223
01:40:37.770 --> 01:40:43.880
यह संगठन कितना अच्छा लगता है ।

224
01:40:44.569 --> 01:41:06.680
कहाँ-कहाँ से आये और अपने घर और परिवार बापदादा से भी मिलन मनाया ।

225
01:41:11.479 --> 01:41:24.850
इसलिए बापदादा डबल फॉरेनर्स का टर्न है

226
01:41:29.819 --> 01:41:51.420
विशेष देखो डबल फॉरेनर्स का अलग टर्न बनाया है तो विशेष उड़ना पड़ेगा ।

227
01:41:53.770 --> 01:41:59.199
चलना नहीं उड़ना ।

228
01:42:01.199 --> 01:42:17.140
और डबल तीव्र पुरूषार्थी नाम ही आपका यह है डबल तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप ।

229
01:42:26.170 --> 01:42:35.649
वैसे भी वैरायटी चीजे अच्छी लगती हैं

230
01:42:37.199 --> 01:43:02.619
तो यह भी वैरायटी देशों से एक स्थान में संगठन का दृश्य भी बहुत अच्छा लग रहा है ।

231
01:43:02.619 --> 01:43:10.850
अभी आप तो देख नहीं सकते बाप तो देख रहे हैं ना ।

232
01:43:13.369 --> 01:43:19.199
अच्छा टी वी में देख रहे हैं ।

233
01:43:19.199 --> 01:43:31.539
साइंस आप लोगों की सेवा के लिए पुरूषार्थ के लिए निकली है

234
01:43:31.539 --> 01:43:39.770
और आप सम्पन्न हो जायेंगे तो साइंस समाप्त हो जायेगी ।

235
01:43:40.170 --> 01:43:49.020
रिफाइन होके फिर हमारे राज्य में आयेगी ।

236
01:43:49.020 --> 01:44:00.970
साइंस के साधन आप सबकी सेवा करेंगे लेकिन निर्विघ्न ।

237
01:44:20.000 --> 01:44:46.569
जिन्होंने भी निमित्त बनके प्लैन बनाया प्रैक्टिकल लाये वह निमित्त टीचर्स उठके खड़े हो यहाँ ही ।

238
01:44:46.569 --> 01:44:59.079
जो सेवा में फॉरेनर्स टीचर्स निमित्त बनें वह उठो ।

239
01:45:30.170 --> 01:45:55.880
तो बापदादा निमित्त बने हुए सर्विसएबुल ग्रुप को विशेष यादप्यार दे रहे हैं ।

240
01:46:03.079 --> 01:46:19.770
जी हाजिर किया उसके लिए बहुत-बहुत मुबारक है ।

241
01:46:33.250 --> 01:46:37.250
अच्छा ।

242
01:46:40.220 --> 01:47:01.939
अभी जो भी डबल पुरूषार्थी फॉरेनर्स पाण्डव आये हैं पाण्डव सेना उठो ।

243
01:47:03.420 --> 01:47:10.970
डबल फॉरेनर्स पाण्डव सेना ।

244
01:47:34.399 --> 01:47:45.140
देखो पाण्डवों की विशेषता क्या गाई हुई है ?

245
01:47:46.619 --> 01:48:06.739
पाण्डवों की विशेषता यही गाई हुई है कि वह विजयी तब बनें जब बाप का साथ लिया ।

246
01:48:07.710 --> 01:48:19.539
पाण्डवपति का साथ लेने से विजयी बन गये ।

247
01:48:21.539 --> 01:48:41.710
तो पाण्डव यही याद रखना कि हम पाण्डवपति के साथी हैं साथ भी हैं साथी भी हैं ।

248
01:48:45.310 --> 01:48:49.020
तो आपका टाइटल क्या है ?

249
01:48:49.020 --> 01:48:57.199
साधारण पाण्डव नहीं विजयी पाण्डव ।

250
01:48:58.050 --> 01:49:10.050
कभी भी पाण्डवों का नाम लेंगे ना तो यही प्रसिद्ध है विजयी पाण्डव ।

251
01:49:11.880 --> 01:49:15.310
तो वही हो ना ।

252
01:49:15.819 --> 01:49:20.449
कितने बार विजय प्राप्त की है ?

253
01:49:20.970 --> 01:49:34.850
अनेक बार विजयी बने हो और अनेक बार बनते रहेंगे ।

254
01:49:40.850 --> 01:49:44.050
संगठन अच्छा है ।

255
01:50:01.539 --> 01:50:15.140
अभी सभी चाहे देश की चाहे विदेश की सभी शिव शक्तियां उठो ।

256
01:50:43.939 --> 01:51:07.819
देखो शिव शक्तियों का झुण्ड बड़ा है और आपकी विशेषता क्या है ?

257
01:51:07.819 --> 01:51:14.510
शिव शक्तियों की विशेषता क्या है ?

258
01:51:14.510 --> 01:51:36.850
देखो आप लोगों का इतना बाप से सम्बन्ध है जो यादगार में भी शिव शक्ति कहते हैं ।

259
01:51:38.170 --> 01:51:54.510
बाप से नाता सारा आधाकल्प भी शिव शक्ति के नाम से गाया जाता है

260
01:51:54.510 --> 01:52:08.399
और अब भी शिव बाप के साथ हो और साथी भी हो ।

261
01:52:10.909 --> 01:52:37.420
बापदादा जब भी सर्विसएबुल बच्चों को या बच्चियों को देखते हैं तो फखुर आता है वाह ! मेरे विश्व परिवर्तक साथी वाह !

262
01:52:43.250 --> 01:52:46.739
तो सबसे मिले ना ।

263
01:52:46.739 --> 01:52:55.250
यह तो समय पर कुछ तो बदली होता ही है ।

264
01:53:04.510 --> 01:53:18.220
बापदादा को तन को भी चलाना तो पड़ेगा ना ।

265
01:53:18.220 --> 01:53:22.800
देखना तो पड़ेगा ।

266
01:53:24.170 --> 01:53:48.170
फिर भी बापदादा दोनों को समाने का पार्ट बच्ची ने भी अच्छा बजाया है ।

267
01:54:00.170 --> 01:54:21.199
40 वर्ष पार्ट बजाने को हो रहा है अभी 39 वर्ष हुए हैं कमाल है अव्यक्त पार्ट की ।

268
01:54:28.220 --> 01:55:23.819
बापदादा इन दोनों को ( आओ नीलू और हंसा ) और साथी भी हैं लेकिन इन दोनों ने शरीरों की नब्ज को जानकर अच्छा शरीर को चलवाना सिखाया ।

269
01:55:28.619 --> 01:55:41.250
और साथी भी हैं साथी भी हाथ उठाओ ।

270
01:55:52.000 --> 01:56:19.479
शरीर के नब्ज को जानकर योगयुक्त होकर चलाने का बहुत अच्छा पार्ट बजाया और बजाते रहना ।

271
01:56:56.109 --> 01:57:00.619
अच्छा ।

272
01:57:03.250 --> 01:57:47.369
अभी भारत की जो विशेष निमन्त्रण पर आई वह उठो पाण्डव भी आये हैं जो पाण्डव विशेष निमन्त्रण पर आये वह भी उठो ।

273
01:57:50.569 --> 01:57:53.770
अच्छा ।

274
01:58:06.569 --> 01:58:21.369
भारत वाले तो अपने को भी और बाप भी समझते हैं

275
01:58:21.369 --> 01:58:41.140
कि इन आत्माओं का भी विशेष पार्ट है जो पालना ली भी है

276
01:58:41.140 --> 01:59:00.569
और पालना दे भी रहे हैं और जो भी पालना के निमित्त बनते हैं

277
01:59:00.569 --> 01:59:21.020
उन्हों को एकस्ट्रा भाग्य भी मिलता है चाहे पाण्डव हैं चाहे शक्तियां हैं

278
01:59:21.710 --> 01:59:43.649
लेकिन विशेष पार्ट बजाने वालों के विशेष भाग्य की लकीर मस्तक में चमकती है ।

279
01:59:47.079 --> 02:00:06.399
बापदादा अब भारत की सीजन में होमवर्क पूछेगा कौन सा ज़ोन नम्बरवन हुआ?

280
02:00:06.399 --> 02:00:12.449
ज़ोन सेन्टर नहीं ।

281
02:00:13.479 --> 02:00:16.970
कौन सा ज़ोन ?

282
02:00:16.970 --> 02:00:25.770
चाहे मधुबन मधुबन भी इस रेस में है ।

283
02:00:26.279 --> 02:00:30.510
नम्बरवन कौन है?

284
02:00:31.140 --> 02:00:40.970
यह होमवर्क जो दिया उसकी रिजल्ट पूछेंगे ।

285
02:00:48.850 --> 02:01:06.050
चाहे अभी थोड़ा समय है लेकिन परिवर्तन आने में लाने में कोई देरी नहीं लगती ।

286
02:01:06.050 --> 02:01:24.109
सिर्फ दृढ़ संकल्प हो मधुबन वालों को भी चांस है नम्बर लेने का ।

287
02:01:28.000 --> 02:01:36.000
बाकी अच्छा है बापदादा खुश है डबल लॉटरी मिल गई ।

288
02:01:36.000 --> 02:01:51.539
संगठन भी और इतने कहाँ कहाँ से 100 देशों से आये हुए हैं

289
02:01:54.800 --> 02:02:17.250
तो एक ही समय इतने परिवार से मिलना और बाप से भी मिलना प्रोग्रामस भी बनाना तो लकी हो ।

290
02:02:19.880 --> 02:02:22.000
अच्छा ।

291
02:02:31.770 --> 02:02:35.250
तो सबसे मिले ना ।

292
02:02:35.250 --> 02:02:37.600
कहेंगे नहीं मिले ?

293
02:02:37.600 --> 02:02:42.170
सबसे मिल लिया ना ।

294
02:02:56.050 --> 02:03:20.000
आप सबकी शुभ भावना और शुभ दुआओं से यह रथ भी चल रहा है ।

295
02:03:27.020 --> 02:03:43.420
आप सबके स्नेह की जो खुराक है वह पार्ट को चला रही है ।

296
02:03:54.970 --> 02:04:08.800
बच्ची चलते फिरते कहती है कि कहावत है - रास्ते चलते ब्राह्मण फंस गया ।

297
02:04:09.600 --> 02:04:20.510
तो मैं भी फंस नहीं गई लेकिन निमित्त बन गई ।

298
02:04:29.020 --> 02:04:40.000
लेकिन थोड़ा सा देखना भी पड़ता है ।

299
02:04:40.000 --> 02:04:44.680
आप लोग तो सन्तुष्ट है ना ।

300
02:04:44.680 --> 02:04:47.199
सन्तुष्ट हैं ?

301
02:04:51.539 --> 02:04:57.020
सिर्फ ग्रुप-ग्रुप से नहीं मिल सकते ।

302
02:05:03.880 --> 02:05:42.399
बापदादा भी इस पार्ट को देखके मुस्कराते रहते हैं दादी ने हिम्मत से निमित्त बनाया ।

303
02:05:51.310 --> 02:05:56.109
अच्छा ।

304
02:06:03.369 --> 02:06:06.510
ड्रिल तो याद है ना ।

305
02:06:06.510 --> 02:06:36.800
भूल तो नहीं गये हैं क्योंकि बापदादा जानते हैं आगे का समय अति हाहाकार का होगा ।

306
02:06:40.970 --> 02:07:11.819
आप सबको सकाश देनी पड़ेगी और सकाश देने में ही आपका अपना तीव्र पुरूषार्थ हो जायेगा ।

307
02:07:19.880 --> 02:07:39.479
थोड़े समय में सकाश द्वारा सर्व शक्तियां देनी पड़ेंगी

308
02:07:40.800 --> 02:08:18.050
और जो ऐसे नाजुक समय में सकाश देंगे जितनों को देंगे चाहे बहुतों को चाहे थोड़ों को उतने ही द्वापर और कलियुग के भक्त उनके बनेंगे ।

309
02:08:21.140 --> 02:08:50.680
तो संगम पर हर एक भक्त भी बना रहे हैं क्योंकि दिया हुआ सुख और शान्ति उनके दिल में समा जायेगा

310
02:08:55.079 --> 02:09:04.970
और भक्ति के रूप में आपको रिटर्न करेंगे ।

311
02:09:14.000 --> 02:09:18.569
अच्छा ।

312
02:09:21.600 --> 02:10:19.539
चारों ओर के बापदादा के नयनों के नूर विश्व के आधार और उद्धार करने वाली आत्मायें मास्टर दुःख हर्ता सुख कर्ता

313
02:10:20.800 --> 02:10:59.140
विश्व परिवर्तक बच्चों को बहुत-बहुत दिल का स्नेह दिल का यादप्यार और पदम-पदम वरदान स्वीकार हो ।

314
02:11:07.310 --> 02:11:13.539
अच्छा ।

315
02:11:55.369 --> 02:12:12.220
अच्छा - साक्षी होके हिसाब किताब चुक्तू कर रही है ।

316
02:12:23.079 --> 02:12:34.619
परदादी से :- देखो सबकी प्यारी और न्यारी आत्मा हो ।

317
02:12:40.000 --> 02:12:57.939
सभी आप लोगों को चाहे बेड पर भी हो तो भी आप सबके साथ दिल का स्नेह बहुत है ।

318
02:12:59.939 --> 02:13:07.649
बेड पर नहीं हो सभी के दिल में हो ।

319
02:13:14.970 --> 02:13:17.140
अच्छा ।

320
02:14:17.140 --> 02:14:53.649
विदेश की बड़ी बहिनों से :- ( एक बुक बापदादा को दी ) मेहनत अच्छी की है ।

321
02:15:17.479 --> 02:15:37.199
अच्छा रॉयल बनाया है किसको भी देने के लिए अच्छी गिफ्ट बन गई ।

322
02:15:44.680 --> 02:15:51.880
अच्छी मेहनत भी की है मुहब्बत भी दिखाई है ।

323
02:16:00.449 --> 02:16:22.279
डबल विदेशियों को पालना दे रहे हो यह भी बहुत अच्छी हिम्मत रख करके आगे बढ़ रहे हो और बढ़ते रहेंगे ।

324
02:16:24.279 --> 02:16:31.770
अच्छा संगठन भी आपस में अच्छा किया है ।

325
02:16:31.770 --> 02:16:36.110
बापदादा खुश है ।

326
02:16:37.600 --> 02:16:48.799
उमंग-उत्साह भरने का एक साधन है नवीनता चाहिए ना सबको ।

327
02:16:50.000 --> 02:16:57.139
अच्छा है सिर्फ इसको पीठ करते रहना ।

328
02:16:57.540 --> 02:17:06.510
जिससे सबमें उमंग आवे हम भी पार्ट लें हम भी करके दिखाये ।

329
02:17:06.969 --> 02:17:10.680
हो जायेगा ।

330
02:17:33.540 --> 02:17:46.340
( सुदेश बहन ने लण्डन का समाचार सुनाया ) बापदादा की मुबारक है , मुबारक है ।

331
02:17:49.540 --> 02:18:42.969
मनमोहिनी काम्पलेक्स विभाग के कन्ट्रक्शन के निमित्त भाई :- आप ब्राह्मणों के लिए

332
02:18:44.000 --> 02:19:06.739
बापदादा की तरफ से आप बच्चों की तरफ से परिवार के लिए मनमोहिनी वन में भवन बन रहे हैं

333
02:19:07.649 --> 02:19:38.399
बापदादा को खुशी है कि सबके सहयोग से ब्राह्मण आत्माओं को आराम से रहने अपने को रिफ्रेशकरने के लिए

334
02:19:38.399 --> 02:19:57.309
सभी प्यार से बना भी रहे हैं और सहयोग भी दे रहे हैं

335
02:19:57.309 --> 02:20:28.510
तो कुछ बन गया है और कुछ बन रहा है तो सबके सहयोग से ब्राह्मणों के लिए जितना बनाओ उतना कम होता जाता है

336
02:20:30.510 --> 02:20:43.600
क्योंकि ब्राह्मण बढ़ते रहते हैं और बढ़ते ही रहने हैं ।

337
02:20:45.600 --> 02:21:06.739
इसलिए आप सबके बूंद-बूंद से यह कम्पलीट हो रहा है ।

338
02:21:07.540 --> 02:21:29.709
खुशी होती है ना हमारे भाई बहिन आयेंगे आराम से रहेंगे और सफलता को प्राप्त करेंगे ।

339
02:21:31.709 --> 02:21:44.450
आप सबको खुशी है वाह हमारा घर बढ़ता जा रहा है ।

340
02:21:46.450 --> 02:21:55.540
तो अपना घर देख करके कितनी खुशी होती है ।

341
02:21:56.340 --> 02:22:28.909
अभी तो हद का वैराग्य होने दो फिर देखो आपके पास कितनी आत्मायें दुआयें लेने सुख शान्ति लेने के लिए आती हैं ।

342
02:22:28.909 --> 02:22:49.479
तो आप सुख दाता उन्हों को शरीर के आराम का सुख भी देंगे ना तो यह तो बढ़ता रहेगा और आप बढ़ाते रहेंगे ।

343
02:22:49.940 --> 02:23:02.739
वर्तमान समय यह है फिर और भी बढ़ेगा बनेगा कि बहुत हो गया ?

344
02:23:05.879 --> 02:23:18.969
आप तो आवाहन कर रहे हो ना जो भी आवे अंचली तो ले ले ।

345
02:23:18.969 --> 02:23:23.540
दुआयें कितनी निकलेंगी ।

346
02:23:24.680 --> 02:23:32.850
खुशी है हमारा घर बन रहा है कि मधुबन का घर बन रहा है ?

347
02:23:32.850 --> 02:23:40.680
आपका बन रहा है ना ।

348
02:23:46.510 --> 02:23:48.799
बहुत अच्छा ।

349
02:23:48.799 --> 02:23:57.819
मेहनत करने वाले भी अच्छी मेहनत प्यार से कर रहे हैं ।

350
02:24:00.219 --> 02:24:03.309
अच्छा ।

351
02:24:13.079 --> 02:24:38.000
मनोहर दादी की याद दी :- आप सबको अपनी प्यारी दादी मनोहर इन्द्रा याद है ना ।

352
02:24:38.620 --> 02:25:18.280
सदा अपना पार्ट अच्छे ते अच्छा बजाया है तो अभी भी सबके स्नेह और शुभ संकल्प से अपना पार्ट बजा रही है और बजाती रहेगी ।

353
02:25:21.940 --> 02:25:26.969
हर एक का फिक्स पार्ट है ।

354
02:25:29.540 --> 02:25:46.049
वह तो वतन में मौज मना रही है इस शरीर में नहीं है लेकिन वतन में मौज मना रही है ।

355
02:25:53.940 --> 02:25:59.879
उसके दिल की आश पूरी हो रही है ।

356
02:26:08.219 --> 02:26:13.200
अच्छा ।

