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आज बापदादा चारों ओर के महान बच्चों को देख रहे हैं ।

2
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क्या महानता की ?

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00:14:24.509 --> 00:15:17.480
जो दुनिया असम्भव कहती है उसको सहज सम्भव कर दिखाया वह है पवित्रता का व्रत ।

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आप सभी ने पवित्रता का व्रत धारण किया है ना !

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बापदादा से परिवर्तन का दृढ़ संकल्प का व्रत लिया है ।

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व्रत करना अर्थात् वृत्ति द्वारा परिवर्तन करना ।

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क्या वृत्ति परिवर्तन की ?

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संकल्प किया हम सब भाई-भाई हैं

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00:17:36.740 --> 00:18:26.000
इस वृत्ति परिवर्तन द्वारा कितनी बातों में भक्ति में भी व्रत लेते हैं

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00:18:29.769 --> 00:19:17.369
लेकिन आप सबने बाप से दृढ़ संकल्प किया क्योंकि ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन है पवित्रता

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00:19:18.680 --> 00:19:56.569
और पवित्रता द्वारा ही परमात्म प्यार और सर्व परमात्म प्राप्तियां हो रही हैं ।

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00:20:13.769 --> 00:20:59.769
महात्मा जिसको कठिन समझते हैं असम्भव समझते हैं और आप पवित्रता को स्वधर्म समझते हो ।

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00:21:12.849 --> 00:21:37.309
बापदादा देख रहे हैं कई अच्छे अच्छे बच्चे हैं

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जिन्होंने संकल्प किया और दृढ़ संकल्प द्वारा प्रैक्टिकल में परिवर्तन दिखा रहे हैं ।

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00:22:26.000 --> 00:23:04.109
ऐसे चारों ओर के महान बच्चों को बापदादा बहुत-बहुत दिल से दुआयें दे रहे हैं ।

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00:23:28.400 --> 00:24:24.170
आप सभी भी मन वचन कर्म वृत्ति दृष्टि द्वारा पवित्रता का अनुभव कर रहे हो ना !

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00:24:28.509 --> 00:25:01.480
पवित्रता की वृत्ति अर्थात् हर एक आत्मा प्रति शुभ भावना शुभ कामना ।

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00:25:07.019 --> 00:26:04.509
दृष्टि हर एक आत्मा को आत्मिक स्वरूप में देखना स्वयं को भी सहज सदा आत्मिक स्थिति में अनुभव करना ।

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ब्राह्मण जीवन का महत्व मन वचन कर्म की पवित्रता है ।

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00:26:36.049 --> 00:26:58.569
पवित्रता नहीं तो ब्राह्मण जीवन का जो गायन है

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00:27:03.420 --> 00:27:43.480
सदा पवित्रता के बल से स्वयं भी स्वयं को दुआ देते हैं क्या दुआ देते ?

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00:27:44.000 --> 00:28:14.170
पवित्रता द्वारा सदा स्वयं को भी खुश अनुभव करते और दूसरों को भी खुशी देते ।

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00:28:16.170 --> 00:28:29.140
पवित्र आत्मा को तीन विशेष वरदान मिलते हैं -

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एक स्वयं स्वयं को वरदान देता जो सहज बाप का प्यारा बन जाता ।

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00:29:01.480 --> 00:29:17.539
2 - वरदाता बाप का नियरेस्ट और डियरेस्ट बच्चा बन जाता

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00:29:19.539 --> 00:29:39.480
इसलिए बाप की दुआयें स्वतः प्राप्त होती हैं और सदा प्राप्त होती हैं ।

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00:29:40.339 --> 00:30:17.369
तीसरा - जो भी ब्राह्मण परिवार के विशेष निमित्त बने हुए हैं उन्हों द्वारा भी दुआयें मिलती रहती ।

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00:30:18.680 --> 00:30:44.569
तीनों की दुआओं से सदा उड़ता रहता और उड़ाता रहता ।

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00:30:49.539 --> 00:31:03.480
तो आप सभी भी अपने से पूछो अपने को चेक करो

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00:31:03.940 --> 00:31:23.599
तो पवित्रता का बल और पवित्रता का फल सदा अनुभव करते हो ?

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00:31:26.339 --> 00:31:44.509
सदा रूहानी नशा दिल में फलक रहती है ?

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00:31:49.710 --> 00:32:24.220
कभी-कभी कोई कोई बच्चे जब अमृतवेले मिलन मनाते हैं रूहरिहान करते हैं तो मालूम है क्या कहते हैं ?

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00:32:35.420 --> 00:32:55.369
पवित्रता द्वारा जो अतीन्द्रिय सुख का फल मिलता है वह सदा नहीं रहता ।

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00:32:55.940 --> 00:33:24.970
कभी रहता है कभी नहीं रहता क्योंकि पवित्रता का फल ही अतीन्द्रिय सुख है ।

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00:33:33.079 --> 00:33:43.140
तो अपने से पूछो मैं कौन हूँ ?

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00:33:43.769 --> 00:34:00.049
सदा अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति में रहते वा कभी-कभी ?

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00:34:06.799 --> 00:34:14.570
अपने को कहलाते क्या हो ?

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00:34:15.599 --> 00:34:26.570
सभी अपना नाम लिखते तो क्या लिखते हो ?

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00:34:26.570 --> 00:34:39.650
बी के फलाना … बी के फलानी ।

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00:34:41.650 --> 00:34:54.619
और अपने को मास्टर सर्वशक्तिवान कहते हो ।

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00:34:55.599 --> 00:34:58.280
सब हैं ना !

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00:34:58.280 --> 00:35:01.880
मास्टर सर्वशक्तिवान हैं ?

43
00:35:01.880 --> 00:35:19.940
जो समझते हैं हम मास्टर सर्वशक्तिवान हैं सदा कभी-कभी नहीं वह हाथ उठाओ ।

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00:35:19.940 --> 00:35:22.909
सदा ?

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00:35:22.909 --> 00:35:34.340
देखना सोचना सदा हैं ?

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00:35:34.340 --> 00:35:43.940
डबल फारेनर्स नहीं हाथ उठा रहे हैं थोड़े उठा रहे हैं ।

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00:35:45.369 --> 00:35:51.940
टीचर्स उठाओ हैं सदा ?

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00:35:51.940 --> 00:36:04.170
ऐसे ही नहीं उठाओ जो सदा हैं वह सदा वाली उठाओ ।

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00:36:04.170 --> 00:36:07.650
बहुत थोड़े हैं ।

50
00:36:07.650 --> 00:36:22.000
पाण्डव उठाओ पीछे वाले बहुत थोड़े हैं ।

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00:36:22.000 --> 00:36:29.199
सारी सभा नहीं हाथ उठाती ।

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00:36:32.400 --> 00:36:47.139
अच्छा मास्टर सर्वशक्तिवान हैं तो उस समय शक्तियां कहाँ चली जाती ?

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00:36:49.880 --> 00:37:06.800
मास्टर हैं इसका अर्थ ही है मास्टर तो बाप से भी ऊंचा होता है ।

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00:37:12.449 --> 00:37:36.849
तो चेक करो - अवश्य प्युरिटी के फाउण्डेशन में कुछ कमज़ोर हो ।

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00:37:40.280 --> 00:37:45.650
क्या कमज़ोरी है ?

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00:37:46.679 --> 00:38:56.219
मन में अर्थात् संकल्प में कमज़ोरी है बोल में कमज़ोरी है या कर्म में कमज़ोरी है या स्वप्न में भी कमज़ोरी है क्योंकि पवित्र आत्मा का मन-वचन-कर्म सम्बन्ध-सम्पर्क स्वप्न स्वतः शक्तिशाली होता है।

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00:38:57.309 --> 00:39:19.820
जब व्रत ले लिया वृत्ति को बदलने का तो कभी कभी क्यों ?

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00:39:23.369 --> 00:39:49.650
समय को देख रहे हो समय की पुकार भक्तों की पुकार आत्माओं की पुकार सुन रहे हो

59
00:39:56.050 --> 00:40:30.340
और अचानक का पाठ तो सबको पक्का है तो फाउण्डेशन की कमज़ोरी अर्थात् पवित्रता की कमज़ोरी ।

60
00:40:30.340 --> 00:40:52.849
अगर बोल में भी शुभ भावना शुभ कामना नहीं पवित्रता के विपरीत है

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00:40:54.849 --> 00:41:26.739
तो भी सम्पूर्ण पवित्रता का जो सुख है अतीन्द्रिय सुख उसका अनुभव नहीं हो सकता

62
00:41:32.400 --> 00:41:59.599
क्योंकि ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य ही है असम्भव को सम्भव करना ।

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00:42:01.599 --> 00:42:08.510
उसमें जितना और उतना शब्द नहीं आता ।

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00:42:08.510 --> 00:42:16.170
जितना चाहिए उतना नहीं है ।

65
00:42:20.849 --> 00:42:45.769
तो कल अमृतवेले विशेष हर एक अपने को दूसरे को नहीं सोचना दूसरे को नहीं देखना

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00:42:46.449 --> 00:43:20.000
लेकिन अपने को चेक करना - कितनी परसेन्टेज़ में पवित्रता का व्रत निभा रहे हैं ?

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00:43:22.000 --> 00:44:09.420
चार बातें चेक करना - एक वृत्ति दूसरा - सम्बन्ध-सम्पर्क में शुभ भावना शुभ कामना यह तो है ही ऐसा नहीं ।

68
00:44:11.420 --> 00:44:24.739
लेकिन उस आत्मा प्रति भी शुभ भावना ।

69
00:44:25.420 --> 00:44:47.079
जब आप सबने अपने को विश्व परिवर्तक माना है है सभी ?

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00:44:47.079 --> 00:44:53.769
अपने को समझते हैं कि हम विश्व परिवर्तक हैं ?

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00:44:53.769 --> 00:44:57.650
हाथ उठाओ ।

72
00:44:57.650 --> 00:45:00.619
इसमें उठाते हैं ।

73
00:45:00.619 --> 00:45:09.769
इसमें तो बहुत अच्छे हाथ उठाये हैं मुबारक हो इसमें भी ।

74
00:45:13.480 --> 00:45:29.880
लेकिन बापदादा एक आप सभी से प्रश्न पूछते हैं ?

75
00:45:30.340 --> 00:45:32.170
पूछें ?

76
00:45:32.170 --> 00:45:36.800
प्रश्न पूछें ?

77
00:45:40.849 --> 00:46:05.710
जब आप विश्व परिवर्तक हो तो विश्व परिवर्तन में यह प्रकृति 5 तत्व भी आ जाते हैं

78
00:46:06.449 --> 00:46:29.420
उन्हों को परिवर्तन कर सकते और अपने को या साथियों को परिवार को परिवर्तन नहीं कर सकते ?

79
00:46:31.420 --> 00:46:53.420
विश्व परिवर्तक अर्थात् आत्माओं को प्रकृति को सबको परिवर्तन करना ।

80
00:46:56.570 --> 00:47:12.110
तो अपना वायदा याद करो सभी ने बाप से वायदा कई बार किया है

81
00:47:16.619 --> 00:47:37.079
लेकिन बापदादा यही देख रहे हैं कि समय बहुत फास्ट आ रहा है

82
00:47:37.079 --> 00:48:29.880
सबकी पुकार बहुत बढ़ रही है तो पुकार सुनने वाले और परिवर्तन करने वाले उपकारी आत्मायें कौन हैं ?

83
00:48:31.019 --> 00:48:37.079
आप ही हो ना !

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00:48:39.079 --> 00:49:30.219
बापदादा ने पहले भी सुनाया है पर उपकारी वा विश्व उपकारी बनने के लिए तीन शब्द को खत्म करना पड़ेगा - जानते तो हो ।

85
00:49:31.480 --> 00:49:44.000
जानने में तो होशियार हो बापदादा जानता है सभी होशियार हैं ।

86
00:49:54.800 --> 00:50:33.710
एक पहला शब्द है पराचिंतन परदर्शन और तीसरा है परमत

87
00:50:33.710 --> 00:50:49.650
इन तीनों ही पर शब्द को खत्म कर पर उपकारी बनेंगे ।

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00:50:50.800 --> 00:51:09.079
जो विघ्न रूप बनता है वह यह तीन शब्द याद है ना !

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00:51:09.079 --> 00:51:13.309
नई बात नहीं है ।

90
00:51:13.309 --> 00:51:27.539
तो कल चेक करना अमृतवेले बापदादा भी चक्कर लगाता है देखेंगे क्या कर रहे हो ?

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00:51:36.449 --> 00:52:28.849
क्योंकि अभी आवश्यकता है समय प्रमाण पुकार प्रमाण हर एक दुःखी आत्मा को मन्सा सकाश द्वारा सुख शान्ति की अंचली देना ।

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00:52:42.570 --> 00:52:47.650
कारण क्या है ?

93
00:52:58.000 --> 00:53:18.679
बापदादा कभी-कभी बच्चों को अचानक देखते हैं क्या कर रहे हैं ?

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00:53:18.679 --> 00:53:31.940
क्योंकि बच्चों से प्यार तो है ना और बच्चों के साथ जाना है अकेला नहीं जाना है ।

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00:53:31.940 --> 00:53:35.019
साथ चलेंगे ना !

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चलेंगे !

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चलेंगे !

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साथ चलेंगे ?

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00:53:41.880 --> 00:53:47.769
यह आगे वाले नहीं उठा रहे हैं ?

100
00:53:48.909 --> 00:53:52.400
नहीं चलेंगे ?

101
00:53:52.400 --> 00:53:56.400
चलना है ना !

102
00:53:57.139 --> 00:54:25.480
बापदादा भी बच्चों के कारण एडवांस पार्टी भी आपकी दादियां आपके विशेष पाण्डव आप सबका इन्तजार कर रहे हैं

103
00:54:27.480 --> 00:54:39.019
उन्होंने भी दिल में पक्का वायदा किया है कि हम सब साथ में चलेंगे ।

104
00:54:39.019 --> 00:54:46.340
थोड़े नहीं सबके सब साथ चलेंगे ।

105
00:54:53.079 --> 00:55:10.619
तो कल अमृतवेले अपने को चेक करना कि किस बात की कमी है ?

106
00:55:13.480 --> 00:55:32.400
क्या मन्सा की वाणी की वा कर्मणा में आने की ।

107
00:55:34.400 --> 00:55:47.369
बापदादा ने एक बारी सभी सेन्टर्स का चक्कर लगाया ।

108
00:55:48.849 --> 00:55:53.199
बतायें क्या देखा ?

109
00:55:54.449 --> 00:56:00.219
कमी किस बात की है ?

110
00:56:02.219 --> 00:56:34.340
तो यही दिखाई दिया कि एक सेकण्ड में परिवर्तन कर फुलस्टाप लगाना इसकी कमी है ।

111
00:56:38.110 --> 00:56:49.710
जब तक फुलस्टाप लगाओ तब तक पता नहीं क्या क्या हो जाता है ।

112
00:56:56.619 --> 00:57:22.110
बापदादा ने सुनाया है कि एक लास्ट टाइम की लास्ट एक घड़ी होगी जिसमें फुलस्टाप लगाना पड़ेगा ।

113
00:57:23.139 --> 00:57:27.420
लेकिन देखा क्या ?

114
00:57:27.420 --> 00:57:37.309
लगाना फुलस्टाप है लेकिन लग जाता है क्वामा

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00:57:51.940 --> 00:58:07.420
दूसरों की बातें याद करते यह क्यों होता यह क्या होता इसमें आश्चर्य की मात्रा लग जाती ।

116
00:58:09.420 --> 00:58:34.619
तो फुलस्टाप नहीं लगता लेकिन क्वामा आश्चर्य की निशानी और क्यूं क्वेश्चन की क्यू लग जाती ।

117
00:58:41.250 --> 00:58:45.539
तो इसको चेक करना ।

118
00:58:45.539 --> 00:59:09.769
अगर फुलस्टाप लगाने की आदत नहीं होगी तो अन्त मते सो गति श्रेष्ठ नहीं होगी ।

119
00:59:09.769 --> 00:59:14.449
ऊंची नहीं होगी ।

120
00:59:16.449 --> 00:59:51.250
इसलिए बापदादा होमवर्क दे रहे हैं कि खास कल अमृतवेले चेक करना और चेंज करना पड़ेगा ।

121
00:59:53.940 --> 01:00:41.480
एक सप्ताह फुलस्टाप सेकण्ड में लगाने का बार-बार अभ्यास करो और 18 जनवरी में जनवरी का मास सभी को

122
01:00:42.800 --> 01:01:26.570
बाप समान बनने का उमंग आता है तो 18 जनवरी में सभी को अपनी चिटकी लिख करके बाक्स में डालना है कि 18 तारीख तक क्या रिजल्ट रही ?

123
01:01:28.570 --> 01:01:37.309
फुलस्टाप लगा वा और मात्रायें लग गई ?

124
01:01:39.309 --> 01:01:42.219
पसन्द है ?

125
01:01:42.219 --> 01:01:44.619
पसन्द है ?

126
01:01:44.619 --> 01:02:08.449
कांध हिलाओ क्योंकि बापदादा का बच्चों से बहुत प्यार है अकेला नहीं जाने चाहता तो क्या करेंगे ?

127
01:02:46.000 --> 01:02:54.400
अभी फास्ट तीव्र पुरूषार्थ करो ।

128
01:02:54.400 --> 01:03:07.139
अभी ढीला-ढाला पुरूषार्थ सफलता नहीं दिला सकेगा ।

129
01:03:25.880 --> 01:03:54.000
प्युरिटी को पर्सनैलिटी , रीयल्टी , रॉयल्टी कहा जाता है ।

130
01:03:56.000 --> 01:04:09.420
तो अपनी रॉयल्टी को याद करो ।

131
01:04:13.369 --> 01:04:35.940
अनादि रूप में भी आप आत्मायें बाप के साथ अपने देश में विशेष आत्मायें हो ।

132
01:04:35.940 --> 01:05:01.880
जैसे आकाश में विशेष सितारे चमकते हैं ऐसे आप अनादि रूप में विशेष सितारा चमकते हो ।

133
01:05:03.019 --> 01:05:14.449
तो अपने आदिकाल की रॉयल्टी याद करो ।

134
01:05:16.449 --> 01:05:32.449
फिर सतयुग में जब आते हैं तो देवता रूप की रॉयल्टी याद करो ।

135
01:05:36.219 --> 01:05:52.449
सभी के सिर पर रॉयल्टी की लाइट का ताज है ।

136
01:05:58.000 --> 01:06:07.309
अनादि आदि कितनी रॉयल्टी है ।

137
01:06:09.309 --> 01:06:32.510
फिर द्वापर में आओ तो भी आपके चित्रों जैसी रॉयल्टी और किसकी नहीं है ।

138
01:06:44.849 --> 01:06:57.420
नेताओं के अभिनेताओं के धर्म आत्माओं के चित्र बनते हैं

139
01:06:57.420 --> 01:07:19.480
लेकिन आपके चित्रों की पूजा और आपके चित्रों की विशेषता कितनी रॉयल है ।

140
01:07:23.250 --> 01:07:32.170
चित्र को देख कर ही सब खुश हो जाते हैं ।

141
01:07:33.309 --> 01:07:44.280
चित्रों द्वारा भी कितनी दुआयें लेते हैं ।

142
01:07:46.570 --> 01:07:57.199
तो यह सब रॉयल्टी पवित्रता की है ।

143
01:08:00.000 --> 01:08:14.110
पवित्रता ब्राह्मण जीवन का जन्म सिद्ध अधिकार है ।

144
01:08:16.109 --> 01:08:26.909
पवित्रता की कमी समाप्त होना चाहिए ।

145
01:08:28.109 --> 01:08:47.020
ऐसे नहीं हो जायेगा उस समय वैराग्य आ जायेगा तो हो जायेगा बातें बहुत अच्छी-अच्छी सुनाते हैं ।

146
01:08:47.020 --> 01:08:55.939
बाबा आप फिक्र नहीं करो हो जायेगा ।

147
01:08:58.800 --> 01:09:24.970
लेकिन बापदादा को इस जनवरी मास में स्पेशल पवित्रता में हर एक को सम्पन्न करना है ।

148
01:09:26.970 --> 01:09:43.020
पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं व्यर्थ संकल्प भी अपवित्रता है ।

149
01:09:43.819 --> 01:10:07.250
व्यर्थ बोल व्यर्थ रूप बोल का जिसको कहते हैं क्रोध का अंश रोब

150
01:10:18.399 --> 01:10:42.109
संस्कार ऐसे बनाओ जो दूर से ही आपको देख पवित्रता के वायब्रेशन लें

151
01:10:44.109 --> 01:11:12.109
क्योंकि आप जैसी पवित्रता जो रिजल्ट में आत्मा भी पवित्र शरीर भी पवित्र डबल पवित्रता प्राप्त है ।

152
01:11:20.449 --> 01:11:31.369
जब भी कोई भी बच्चा पहले आता है तो बाप का वरदान कौन सा मिलता है ?

153
01:11:31.369 --> 01:11:34.739
याद है ?

154
01:11:35.819 --> 01:11:42.909
पवित्र भव योगी भव ।

155
01:11:49.199 --> 01:12:02.569
तो दोनों बात को एक पवित्रता और दूसरा फुलस्टाप योगी ।

156
01:12:06.170 --> 01:12:08.680
पसन्द है ?

157
01:12:08.680 --> 01:12:20.050
बापदादा अमृतवेले चक्र लगायेंगे सेन्टरों के भी चक्र लगायेंगे ।

158
01:12:25.710 --> 01:12:37.310
बापदादा तो एक सेकण्ड में चारों ओर का चक्र लगा सकता ।

159
01:12:44.109 --> 01:13:09.600
तो इस जनवरी अव्यक्ति मास का कोई नया प्लैन बनाओ ।

160
01:13:11.600 --> 01:13:27.199
मन्सा सेवा मन्सा स्थिति और अव्यक्त कर्म और बोल इसको बढ़ाओ ।

161
01:13:38.680 --> 01:13:50.220
तो 18 जनवरी को बापदादा सभी की रिजल्ट देखेंगे ।

162
01:13:50.220 --> 01:14:04.399
प्यार है ना 18 जनवरी को अमृतवेले से प्यार की ही बातें करते हो ।

163
01:14:05.649 --> 01:14:13.600
सभी उल्हना देते हैं बाबा अव्यक्त क्यों हुआ ?

164
01:14:13.600 --> 01:14:38.619
तो बाप भी उल्हना देता है कि साकार में होते बाप समान कब तक बनेंगे ?

165
01:14:46.800 --> 01:15:00.970
तो आज थोड़ा सा विशेष अटेन्शन खिंचवा रहे हैं ।

166
01:15:00.970 --> 01:15:11.600
प्यार भी कर रहे हैं सिर्फ अटेन्शन नहीं खिंचवा रहे हैं प्यार भी है

167
01:15:12.399 --> 01:15:24.850
क्योंकि बाप यही चाहते हैं कि मेरा एक बच्चा भी रह नहीं जाए ।

168
01:15:31.020 --> 01:15:57.199
हर कर्म की श्रीमत चेक करना अमृतवेले से लेके रात तक जो भी हर कर्म की श्रीमत मिली है वह चेक करना ।

169
01:16:03.710 --> 01:16:05.880
मजबूत है ना !

170
01:16:05.880 --> 01:16:08.399
साथ चलना है ना !

171
01:16:08.399 --> 01:16:10.399
चलना है !

172
01:16:10.399 --> 01:16:13.140
हाथ उठाओ ।

173
01:16:13.140 --> 01:16:15.600
चलना है ?

174
01:16:17.600 --> 01:16:19.250
अच्छा ।

175
01:16:25.140 --> 01:16:27.600
टीचर्स ?

176
01:16:27.600 --> 01:16:29.600
अच्छा ।

177
01:16:29.600 --> 01:16:34.109
पीछे वाले हाथ उठाओ ।

178
01:16:34.109 --> 01:16:42.109
कुर्सा वाले हाथ उठाओ पाण्डव हाथ उठाओ ।

179
01:16:52.279 --> 01:17:00.909
तो समान बनेंगे तब तो हाथ में हाथ देकर चलेंगे ना ।

180
01:17:04.399 --> 01:17:13.649
करना ही है बनना ही है यह दृढ़ संकल्प करो ।

181
01:17:13.649 --> 01:17:29.420
15 - 20 दिन यह दृढ़ता रहती है फिर धीरे-धीरे थोड़ा अलबेलापन आ जाता है ।

182
01:17:34.000 --> 01:17:39.600
तो अलबेलापन को खत्म करो ।

183
01:17:45.079 --> 01:18:09.140
ज्यादा में ज्यादा देखा है एक मास फुल उमंग रहता है दृढ़ता रहती है फिर एक मास के बाद थोड़ा थोड़ा अलबेलापन शुरू हो जाता है ।

184
01:18:19.140 --> 01:18:40.170
तो अभी यह वर्ष समाप्त होगा तो क्या समाप्त करेंगे ?

185
01:18:40.170 --> 01:19:06.279
वर्ष समाप्त करेंगे कि वर्ष के साथ जो भी जिस संकल्प में भी धारणा में भी कमज़ोरी है उसको समाप्त करेंगे ?

186
01:19:08.279 --> 01:19:09.939
करेंगे ना !

187
01:19:09.939 --> 01:19:12.279
हाथ नहीं उठाते हैं ?

188
01:19:27.310 --> 01:19:47.020
तो ऑटोमेटिक दिल में यह रिकार्ड बजना चाहिए अब घर चलना है ।

189
01:19:53.880 --> 01:20:04.680
सिर्फ चलना नहीं है लेकिन राज्य में भी आना है ।

190
01:20:12.399 --> 01:20:24.619
अच्छा जो पहली बारी आये हैं बापदादा से मिलने वह हाथ उठाओ ।

191
01:21:06.569 --> 01:21:25.310
तो पहली बारी आने वालों को विशेष मुबारक दे रहे हैं ।

192
01:21:31.539 --> 01:21:41.539
लेट आये हो , टूलेट में नहीं आये हो ।

193
01:21:46.000 --> 01:22:05.649
लेकिन तीव्र पुरूषार्थ का वरदान सदा याद रखना , तीव्र पुरूषार्थ करना ही है ।

194
01:22:05.649 --> 01:22:13.140
करेंगे , गे गे नहीं करना , करना ही है ।

195
01:22:13.140 --> 01:22:22.340
लास्ट सो फास्ट और फर्स्ट आना है ।

196
01:22:28.449 --> 01:22:33.649
अच्छा । अभी क्या करना है ?

197
01:22:46.619 --> 01:23:39.819
सेवा का टर्न पंजाब जोन का है , ( पंजाब , हरियाणा , हिमाचल , जम्मू कश्मीर , उत्तरांचल ) - अच्छा है , यह चांस जो मिलता है वह अच्छा लगता है ?

198
01:23:40.449 --> 01:24:14.619
स्पेशल है और पंजाब का अर्थ ही है जैसे स्थूल नदियां कहते हैं पावन करती हैं

199
01:24:15.710 --> 01:24:49.079
तो पंजाब के पतित-पावन बच्चे , पंजाब को पावन आत्मायें बनाने में तोफर्स्ट नम्बर होंगे ना ।

200
01:24:55.199 --> 01:25:06.109
देखो पंजाब की एक बात की विशेषता है -

201
01:25:06.109 --> 01:25:22.449
तो पहले-पहले आदि जो भाषण किया है , वह महात्मा के निमन्त्रण पर किया है ।

202
01:25:23.140 --> 01:25:26.279
याद है ना !

203
01:25:26.279 --> 01:25:29.649
बच्ची ( दादी जानकी ) को याद है ।

204
01:25:29.649 --> 01:25:49.819
और कहाँ भी महात्माओं की स्टेज पर भाषण का निमन्त्रण मिले , पहला पहला , यह नहीं हुआ है ।

205
01:25:51.819 --> 01:26:01.310
तो जब पंजाब शेर कहा जाता है , तो शेर का काम तो किया ।

206
01:26:03.310 --> 01:26:16.739
सभी साधू सन्त के बीच में ललकार की , तो पंजाब शेर तो हुआ ना ।

207
01:26:22.909 --> 01:27:03.079
अभी भी बच्चे ने ( अमीरचन्द भाई ने ) लिस्ट दी है , जो बापदादा ने कहा था वी आई पी हर एक के सम्बन्ध में कितने कितने है , वह हर वर्ग वाले लिस्ट देवे तो बापदादा को बच्चे की लिस्ट मिली , लिस्ट दी है , ताली बजाओ ।

208
01:27:05.939 --> 01:27:08.399
अच्छा है ।

209
01:27:08.399 --> 01:27:31.710
अभी इन सभी को लिस्ट देखी अच्छी है , लेकिन इन्हों की पीठ करो , वी आई पी के वी आई पी नहीं रहें , पहली स्टेज में तो लाया है

210
01:27:31.710 --> 01:27:45.880
लेकिन दूसरी स्टेज है हर कार्य में समय प्रति समय स्नेही सहयोगी बनें ।

211
01:27:48.850 --> 01:28:07.250
और फिर उसके आगे ब्राह्मण परिवार के साथी बनें , परिवार का अपने को समझें ।

212
01:28:09.649 --> 01:28:24.279
कहाँ कहाँ के वी आई पी आगे बढ़े हैं , बापदादा उन्हों को मुबारक भी दे रहे हैं

213
01:28:24.279 --> 01:28:45.140
लेकिन जितनी सेवा इस ज्ञान सरोवर शुरू होते हुई है , जितने वर्ग बने हैं ,

214
01:28:45.140 --> 01:29:04.510
जितना समय और जितनी सेवा हुई है , उस प्रमाण वी आई पी घरू बन जायें ,

215
01:29:06.510 --> 01:29:19.710
फोन करो पहुंच जायें , हाँ जी , हाँ जी करें , साथी तो बनें ।

216
01:29:20.680 --> 01:29:46.739
अभी हर वर्ग यह लक्ष्य रखे सहज सहयोगी बनें , ऐसे नहीं मान देवें , खास सीट देवें तभी आवें ।

217
01:29:49.600 --> 01:29:53.250
थोड़ा होमली बनाओ ।

218
01:29:53.250 --> 01:30:14.680
अपने सेन्टर पर , आबू में नहीं आ सकते हैं मानो , तो अपने जोन में भी जो बड़े बड़े सेन्टर हैं उसमें उन्हों को बुलाओ ।

219
01:30:16.170 --> 01:30:32.569
कम से कम तीन मास या 6 मास में उनसे मिलते रहो , होमली बनाते जाओ ।

220
01:30:33.600 --> 01:30:47.250
तो समय पर जब यह हालतें बदलेंगी तो समय पर काम में तो आवें ।

221
01:30:52.050 --> 01:31:00.109
तो सभी वर्ग वाले सुन रहे हैं ।

222
01:31:04.569 --> 01:31:12.279
कहाँ कहाँ बने भी हैं लेकिन थोड़े बने हैं ।

223
01:31:16.970 --> 01:31:24.569
तो पंजाब वाले शेर हो , हाँ दोनों हाथ उठाओ ।

224
01:31:29.369 --> 01:31:32.619
सब शेर हैं ।

225
01:31:34.619 --> 01:31:43.310
तो पहला नम्बर आप करना , पंजाब के वी आई पी होमली बन जायें ।

226
01:31:45.310 --> 01:31:49.369
महात्मायें भी होमली बन जायें ।

227
01:31:50.510 --> 01:31:57.539
निमन्त्रण पर नहीं आवे खुद कहें हम आयेंगे ।

228
01:32:04.050 --> 01:32:10.449
अच्छी हैं , वृद्धि तो की है पंजाब में ।

229
01:32:10.449 --> 01:32:26.619
बापदादा का भी पंजाब से प्यार है क्यों प्यार है ?

230
01:32:26.619 --> 01:32:44.569
जम्मू कश्मीर उसको भी अपना बनाया है लेकिन थोड़ा और जम्मू कश्मीर का नाम मशहूर है ,

231
01:32:44.569 --> 01:32:58.909
चाहे पाकिस्तान में , चाहे अमेरिका में … सबकी नज़र जम्मू कश्मीर पर है ।

232
01:33:01.479 --> 01:33:18.050
तो वहाँ कोई जलवा निकालो , ऐसे नहीं कि वहाँ की बहिनें करें , आप सहयोग देकर उसमें कुछ ऐसा वन्डरफुल बात करके दिखाओ ।

233
01:33:18.050 --> 01:33:24.970
थोड़ा अटेन्शन दो नाम बाला हो जायेगा ।

234
01:33:24.970 --> 01:33:34.680
जिस पर झगड़ा है वहाँ शान्ति का झण्डा फहराओ ।

235
01:33:38.800 --> 01:33:41.079
ठीक है ।

236
01:33:41.079 --> 01:33:57.020
संख्या तो बहुत है , एक निर्विघ्न बनो और दूसरा सेवा में शान्ति का झण्डा लहराओ ।

237
01:33:57.020 --> 01:34:09.939
सबको दिखाई दे झण्डा कि हाँ अशान्ति के स्थान में शान्ति का झण्डा लहर रहा है ।

238
01:34:12.850 --> 01:34:18.279
ठीक है । अच्छा ।

239
01:34:23.819 --> 01:34:56.739
डबल फारेनर्सः अभी डबल विदेशी नहीं अभी डबल तीव्र पुरूषार्थी ।

240
01:34:56.739 --> 01:34:59.600
ठीक है ना ।

241
01:34:59.600 --> 01:35:02.850
डबल है ?

242
01:35:03.710 --> 01:35:08.970
डबल पुरूषार्थी हैं ?

243
01:35:10.970 --> 01:35:42.109
अच्छा है , आप सबका नाम भी कि इतने देशों के आते हैं , इतने देशों में सेवाकेन्द्र हैं , यह सुनके भी सभी खुश हो जाते हैं ।

244
01:35:46.569 --> 01:36:01.880
भले अपने अपने देशों में झण्डा नहीं लहराया है , एक लण्डन में झण्डा है ,

245
01:36:01.880 --> 01:36:10.970
एक ही लण्डन में झण्डा है और कोई देश में है ?

246
01:36:10.970 --> 01:36:14.970
है हाथ उठाओ ।

247
01:36:14.970 --> 01:36:22.279
खुली रीति से झण्डा लगा हुआ है ?

248
01:36:22.279 --> 01:36:27.539
कोई एतराज़ नहीं , अच्छा ।

249
01:36:27.539 --> 01:36:32.510
कितने देशों में है ?

250
01:36:36.970 --> 01:36:44.279
10-12 देशों में होगा ?

251
01:36:46.000 --> 01:36:49.020
तो यह भी अच्छा है ।

252
01:36:49.020 --> 01:37:05.710
लेकिन बापदादा को खुशी है कि कई आत्माओं के दिल में तो झण्डा लहराया है ।

253
01:37:08.850 --> 01:37:28.399
तो आपको देखके खुश होते हैं कि यह वर्ल्ड के सेवाधारी हैं , सिर्फ भारत के सेवाधारी नहीं , विश्व के सेवाधारी हैं ।

254
01:37:28.399 --> 01:37:34.340
जो टाइटल है ना विश्व सेवाधारी ।

255
01:37:34.340 --> 01:37:51.140
तो सिर्फ भारत नहीं लेकिन विश्व के कोने कोने में है और अभी तो अच्छी सेवा बढ़ा रहे हैं ना ।

256
01:37:51.140 --> 01:37:56.569
मुस्लिम देशों में भी सेवा अच्छस है ।

257
01:37:56.569 --> 01:38:02.619
बापदादा ने समाचार सुना है अच्छा है ।

258
01:38:05.420 --> 01:38:10.909
कराची का भी प्लैन बनाया है , अच्छा है ।

259
01:38:12.909 --> 01:38:19.420
जो होगा ड्रामा अच्छे ते अच्छा होगा ।

260
01:38:25.880 --> 01:38:57.140
जो नये नये शहरों में जो बच्चे रहे हुए हैं वहाँ अभी सेवा के उमंग उत्साह में है और सबसे हिम्मत वाली आपकी एक बच्ची है , वह हिम्मत वाली है ।

261
01:38:57.140 --> 01:39:10.800
बापदादा उनको रोज़ अमृतवेले वरदान देता है और बच्ची भी एक्यूरेट है ।

262
01:39:11.649 --> 01:39:15.199
क्या नाम है ?

263
01:39:15.539 --> 01:39:39.140
( वजीहा ) ऐसा काम करके दिखाओ , हिम्मत वाली है , डरती नहीं है ।

264
01:39:41.140 --> 01:39:54.399
और देखो अपने घर वालों को भी युक्ति से ठीक किया , होशियार है

265
01:39:56.399 --> 01:40:04.970
और नैरोबी वालों ने भी बहुत अच्छा पुरूषार्थ किया ।

266
01:40:04.970 --> 01:40:15.819
उन्हों की विशेषता , नैरोबी के साइड की विशेषता यह है

267
01:40:15.819 --> 01:40:34.340
कि बहनें कम हो जाती हैं तो जो स्टूडेन्ट निकले हैं वह सेन्टर सम्भालते हैं यह भी विशेषता है ।

268
01:40:34.340 --> 01:40:48.850
तो सबकी विशेषता इकट्ठी करके हर एक अपने अपने स्थान को विशेष बनाओ ।

269
01:40:48.850 --> 01:41:05.199
बाकी अच्छा है डबल पुरूषार्थीअच्छा पुरूषार्थ करके बढ़ रहे हैं लेकिन बाबा चार्ट देखेगा ।

270
01:41:05.199 --> 01:41:17.420
जो कहा है ना समाचार , वह चार्ट देखेगा सम्पूर्ण पवित्रता का ।

271
01:41:23.140 --> 01:41:25.140
अच्छा है ।

272
01:41:25.140 --> 01:41:37.250
लक्ष्य सबका बहुत अच्छा है लेकिन बीच में अलबेलेपन की माया बहुत आती है ।

273
01:41:41.600 --> 01:41:46.000
अभी उसकी विदाई करना ।

274
01:41:46.619 --> 01:41:56.800
अलबेलेपन की विदाई और फुलस्टाप का आह््वान ।

275
01:42:02.279 --> 01:42:06.680
ठीक है ना , करेंगे ना ।

276
01:42:06.680 --> 01:42:10.050
अलबेलापन नहीं दिखाना ।

277
01:42:10.050 --> 01:42:19.819
बापदादा ने अलबेलेपन के बहुत खेल देख लिये हैं ।

278
01:42:21.420 --> 01:42:32.220
अभी सेकण्ड में फुलस्टाप का खेल दिखाना ।

279
01:42:33.649 --> 01:42:46.109
सबसे जो हिसाब में भी देखो , सबसे सहज फुलस्टाप है ।

280
01:42:51.710 --> 01:42:59.819
पेन्सिल रखो फुलस्टाप आ गया ।

281
01:43:01.819 --> 01:43:03.649
अच्छा ।

282
01:43:03.649 --> 01:43:17.420
डबल विदेशी सदा टर्न लेते रहते हैं यह बहुत अच्छा है , लेते रहना ।

283
01:43:20.449 --> 01:43:24.569
अच्छा ।

284
01:43:25.140 --> 01:44:07.020
दिल वाले , कैड ग्रुपः अच्छा नया कोई प्लैन बनाया है ?

285
01:44:31.420 --> 01:44:37.539
( गुप्ता जी से ) अच्छा , कार्य तो चल रहा है ।

286
01:44:38.800 --> 01:45:04.739
अभी कोशिश कर रहे हो , गवर्मेन्ट द्वारा आफीशल सबको यह मालूम पड़े कि बिना खर्चे के हार्ट ठीक हो सकती है ।

287
01:45:06.739 --> 01:45:22.680
पहले सब देखते हैं एक क्वेश्चन पूछते हैं , बापदादा से भी एक क्वेश्चन पूछा है , बतायें ।

288
01:45:23.539 --> 01:45:39.199
कहते हैं कि ब्राह्मण बच्चों की हार्ट क्यों ठीक नहीं करते , वह क्यों वहाँ जाते ?

289
01:45:40.220 --> 01:45:49.310
उन्हों की भी ट्रायल करो ना , यह है उन्हों की भी गलती है

290
01:45:49.310 --> 01:46:10.109
क्योंकि नियमों पर नहीं चलते , जो परहेज बताई जाती है दूसरे परहेज पूरी करते हैं और ब्राह्मण जो हैं वह अपना घर समझके परहेज कम करते हैं

291
01:46:10.109 --> 01:46:27.020
लेकिन ब्राह्मणों में भी ऐसा कोई विशेष एक्जैम्पुल बनाओ जो ब्राह्मण भी समझें कि हम भी कर सकते हैं ।

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बाकी काम अच्छा है , आवाज पहुंचा है लेकिन आवाज थोड़ा बड़ा करो तो चारों ओर फैले ।

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शुभ भावना शुभ कामना भी कार्य कर रही है ।

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हर एक वर्ग को , आगे से आगे जाना है ।

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अच्छा है ।

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और आगे बढ़ो और बढ़ाते चलो ।

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अच्छा ।

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चारों ओर के महान पवित्र आत्माओं को बापदादा का विशेष दिल की दुआयें , दिल का प्यार और दिल में समाने की मुबारक हो ।

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बापदादा जानते हैं कि जब भी पधरामनी होती है तो ईमेल या पत्र भिन्न-भिन्न साधनों से चारों ओर के बच्चे यादप्यार भेजते हैं

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और बापदादा को सुनाने के पहले कोई देवे , उसके पहले ही सबके यादप्यार पहुंच जाते हैं

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क्योंकि ऐसे जो सिकीलधे याद करने वाले बच्चे हैं उनका कनेक्शन बहुत फास्ट पहुंचता है ,

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आप लोग तीन चार दिन के बाद सम्मुख मिलते हो लेकिन उन्हों का यादप्यार जो सच्चे पात्र आत्मायें हैं उनका उसी घड़ी बापदादा के पास यादप्यार पहुंच जाता है ।

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तो जिन्होंने भी दिल में भी याद किया , साधन नहीं मिला , उन्हों का भी यादप्यार पहुंचा है ,

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और बापदादा हर एक बच्चे को पदम पदम पदम गुणा यादप्यार का रेसपान्ड दे रहे हैं ।

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बाकी चारों ओर अभी दो शब्द की लात-तात लगाओ - एक सम्पूर्ण पवित्रता , सारे ब्राह्मण परिवार में फैलानी है ।

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जो कमज़ोर हैं उसको सहयोग देके भी बनाओ ।

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यह बड़ा पुण्य है ।

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छोड़ नहीं दो , यह तो है ही ऐसा , यह तो बदलना ही नहीं है , यह श्राप नहीं दे दो , पुण्य का काम करो ।

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बदलके दिखायेंगे , बदलना ही है ।

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उनकी उम्मीदें बढ़ाओ , गिरे हुए को गिराओ नहीं , सहारा दो , शक्ति दो ।

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तो चारों ओर खुशनसीब खुशमिजाज , खुशी बांटने वाले बच्चों को बहुत-बहुत यादप्यार और नमस्ते ।

