WEBVTT

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00:15:47.710 --> 00:16:26.850
आज बापदादा चारों ओर के बच्चों के तीन रूप देख रहे हैं -

2
00:16:30.909 --> 00:17:19.539
जैसे बाप के तीन रूप जानते हो , ऐसे बच्चों के भी तीन रूप देख रहे हैं ।

3
00:17:25.769 --> 00:18:29.819
जो इस संगमयुग का लक्ष्य और लक्षण है , पहला स्वरूप ब्राह्मण , दूसरा फरिश्ता , तीसरा देवता ।

4
00:18:29.819 --> 00:18:43.769
ब्राह्मण सो फरिश्ता , फरिश्ता सो देवता ।

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00:18:50.339 --> 00:19:19.480
तो वर्तमान समय अभी विशेष क्या लक्ष्य सामने रहता है ?

6
00:19:19.480 --> 00:19:34.799
क्योंकि फरिश्ता बनने के बिना देवता नहीं बन सकते ।

7
00:19:42.339 --> 00:20:20.619
तो वर्तमान समय और स्वयं के पुरूषार्थ प्रमाण अभी लक्ष्य यही है फरिश्ता ।

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00:20:24.170 --> 00:20:52.279
संगमयुग के सम्पन्न स्वरूप फरिश्ता सो देवता बनना है ।

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00:20:54.970 --> 00:21:14.619
फरिश्ते की परिभाषा जानते भी हो ,

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00:21:16.619 --> 00:22:04.569
फरिश्ता अर्थात् पुरानी दुनिया के सम्बन्ध , संस्कार , संकल्प से हल्का हो ।

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00:22:18.220 --> 00:22:46.799
पुराने संस्कार सबमें हल्के हों ।

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00:22:49.819 --> 00:23:12.400
सिर्फ अपने संस्कार स्वभाव संसार में हल्कापन नहीं ,

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00:23:12.400 --> 00:23:49.599
लेकिन फरिश्ता अर्थात् सर्व के सम्बन्ध में आते सर्व के स्वभाव संस्कार में हल्कापन ।

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00:23:56.049 --> 00:24:12.000
इस हल्केपन की निशानी क्या है ?

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00:24:15.420 --> 00:24:29.769
वह फरिश्ता आत्मा सर्व के प्यारे होंगे ।

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00:24:33.539 --> 00:24:44.849
कोई कोई के प्यारे नहीं , सर्व के प्यारे ।

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00:24:44.849 --> 00:25:04.970
जैसे बाप , ब्रह्मा बाप को हर एक समझता है मेरा है ।

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00:25:04.970 --> 00:25:09.650
मेरा बाबा कहते हैं ।

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00:25:11.200 --> 00:25:29.539
ऐसे फरिश्ता अर्थात् सर्व के प्रिय ।

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00:25:36.339 --> 00:25:52.000
कई बच्चे सोचते हैं कि ब्रह्मा बाबा तो ब्रह्मा ही था ,

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00:25:54.000 --> 00:26:16.569
लेकिन आप सबने आप समान ब्राह्मण आत्माओं में देखा

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00:26:16.569 --> 00:26:44.279
कि आप सबकी प्यारी दादी , जिसको सभी प्यार से अनुभव करते रहे कि मेरी दादी है ।

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00:26:49.079 --> 00:27:22.220
सर्व तरफ स्वभाव , संस्कार और इस पुराने संसार में रहते न्यारी और प्यारी ,

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00:27:24.849 --> 00:27:38.910
सब हक से कहते हमारी दादी ।

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00:27:42.910 --> 00:27:47.200
तो कारण क्या ?

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00:27:48.799 --> 00:28:02.220
स्वयं स्वभाव , संस्कार में हल्के ।

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00:28:08.910 --> 00:28:22.000
सबको मेरापन अनुभव कराया ।

28
00:28:30.450 --> 00:28:36.619
तो एक्जैम्पुल रहा ।

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00:28:41.019 --> 00:28:58.569
जगत अम्बा का भी देखा लेकिन कई सोचते हैं वह तो जगत अम्बा थी ना ।

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00:28:58.569 --> 00:29:14.680
लेकिन दादी आप ब्राह्मण परिवार जैसी साथी थी ।

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00:29:16.680 --> 00:29:57.940
उनके मुख से सदैव अगर पुरूषार्थ सुनते वा पूछते तो उनके मुख में एक ही शब्द रहा - अब कर्मातीत बनना है ।

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00:30:02.400 --> 00:30:32.509
कर्मातीत की लगन में औरों को भी यही शब्द बार-बार याद दिलाती रही ।

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00:30:41.539 --> 00:31:19.769
तो हर ब्राह्मण का अभी लक्ष्य और लक्षण विशेष यही रहना चाहिए , है भी लेकिन नम्बरवार है ।

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00:31:20.170 --> 00:31:38.740
यही लगन हो अब फरिश्ता बनना ही है ।

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00:31:47.250 --> 00:32:26.910
फरिश्ता अर्थात् इस देह , साकार देह से न्यारा , सदा लाइट के देहधारी ।

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00:32:33.200 --> 00:32:59.940
फरिश्ता अर्थात् इस कर्मेन्द्रियों के राजा ।

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00:33:04.970 --> 00:33:39.140
बापदादा ने पहले भी सुनाया कि सारे सृष्टि चक्र के अन्दर एक ही बापदादा है

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00:33:39.140 --> 00:34:00.619
जो फलक से कहते हैं कि मेरा एक एक बच्चा राजा बच्चा है ।

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00:34:02.619 --> 00:34:10.110
स्वराज्य अधिकारी है ।

40
00:34:19.369 --> 00:34:37.019
तो फरिश्ता अर्थात् स्वराज्य अधिकारी ।

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00:34:40.000 --> 00:35:04.739
ऐसा स्वराज्य अधिकारी आत्मा , लाइट के स्वरूपधारी ।

42
00:35:11.369 --> 00:35:44.170
कोई भी ऐसे लाइट के डबल हल्केपन की स्थिति में स्थित होंके

43
00:35:51.940 --> 00:36:47.420
अगर कोई को भी मिलते हैं तो उनके मस्तक में आत्मा ज्योति का भान चलते फिरते भी दिखाई देगा ।

44
00:36:51.079 --> 00:37:34.110
अभी यह तीव्र पुरूषार्थ का लक्ष्य और लक्षण सदा इमर्ज रखो ।

45
00:37:38.170 --> 00:38:16.280
जैसे ब्रह्मा बाप में देखा अगर कोई भी मिलता , दृष्टि लेता तो बात करते-करते क्या दिखाई देता ?

46
00:38:16.280 --> 00:39:17.599
और लास्ट में अनुभव किया कि ब्रह्मा बाप ज्यादा बात करते-करते भी मीठी अशरीरी स्थिति में स्थित हो जाता ।

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00:39:19.599 --> 00:39:37.820
दूसरे को भी चाहे कितना भी सर्विस समाचार हो ,

48
00:39:41.769 --> 00:40:09.309
लेकिन सेकण्ड में अशरीरीपन का अनुभव कराते रहे

49
00:40:13.420 --> 00:40:34.739
और बार-बार कोई भी मुरली में चेक करो ,

50
00:40:36.510 --> 00:41:19.539
बार-बार मैं अशरीरी आत्मा हूँ , आत्मा का पाठ एक ही मुरली में कितने बार याद दिलाता रहा ।

51
00:41:29.710 --> 00:41:48.510
तो अभी समय अनुसार छोटी-छोटी विस्तार की बातें ,

52
00:41:49.539 --> 00:42:25.079
स्वभाव-संस्कार की बातें अशरीरी अवस्था से दूर कर देती हैं ।

53
00:42:26.110 --> 00:42:32.170
अभी परिवर्तन चाहिए ।

54
00:42:33.199 --> 00:42:59.019
बापदादा ने देखा सेवा में रिजल्ट अच्छी हो रही है ,

55
00:42:59.820 --> 00:43:19.599
सेवा के लिए मैजारिटी को उमंग-उत्साह है , प्लैन भी बनाते रहते हैं

56
00:43:20.110 --> 00:43:51.880
लेकिन सेवा के साथ , सन्देश देना यह भी आवश्यक है

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00:43:51.880 --> 00:44:24.800
और बापदादा ने आज भी भिन्न-भिन्न वर्ग की , भिन्न-भिन्न स्थान की सेवा की अच्छी रिजल्ट देखी

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00:44:26.280 --> 00:45:06.849
लेकिन अशरीरीपन का वायुमण्डल मेहनत कम और प्रभाव ज्यादा डालता है ।

59
00:45:13.079 --> 00:46:06.110
सुना हुआ अच्छा तो लगता है , लेकिन वायुमण्डल से अशरीरीपन की दृष्टि से अनुभव करते हैं

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00:46:14.050 --> 00:46:24.909
और अनुभव भूलता नहीं है ।

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00:46:41.139 --> 00:47:11.650
तो फरिश्तेपन की धुन अभी सेवा में विशेष एडीशन करो ।

62
00:47:14.340 --> 00:47:37.079
कोई न कोई शान्ति का , खुशी का , सुख का , आत्मिक प्रेम का अनुभव कराओ ।

63
00:47:45.880 --> 00:48:17.769
चलन में प्यार प्रेम और जो खातिरी करते हो , सम्बन्ध से , परिवार से वह तो अनुभव करके जाते हैं

64
00:48:19.769 --> 00:49:17.199
लेकिन अतीन्द्रिय सुख की फीलिंग , शान्ति का रूहानी नशा अभी वायुमण्डल और वायब्रेशन द्वारा विशेष अटेन्शन में रखो ।

65
00:49:22.679 --> 00:49:34.679
विशेष अनुभव कराओ , कोई न कोई अनुभव कराओ ।

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00:49:38.170 --> 00:50:04.739
जैसे सिस्टम में प्रभावित होके जाते हैं ऐसी सिस्टम परिवार के प्यार की और कहाँ भी नहीं मिलती ,

67
00:50:09.420 --> 00:50:57.199
ऐसे अभी कोई न कोई शक्ति का , कोई न कोई प्राप्ति का अनुभव करके जायें ।

68
00:50:59.199 --> 00:51:35.250
अभी 70-72 वर्ष पूरे हो रहे हैं , इस समय में रिजल्ट में क्या देखा !

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00:51:42.340 --> 00:52:00.969
मेहनत की है , लेकिन अभी तक ब्रह्माकुमारियां काम कर रही हैं ,

70
00:52:00.969 --> 00:52:07.940
ब्रह्माकुमारियों का ज्ञान अच्छा है ।

71
00:52:10.679 --> 00:52:15.420
देने वाला कौन !

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00:52:15.420 --> 00:52:19.369
चलाने वाला कौन !

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00:52:20.219 --> 00:52:25.079
सोर्स कौन !

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00:52:31.250 --> 00:52:44.510
बाबा शब्द आप सबका सुन करके कहते भी हैं बाबा है इन्हों का ,

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00:52:44.510 --> 00:53:09.539
लेकिन मेरा वही बाबा है , बाप की प्रत्यक्षता अभी गुप्त रूप में है ।

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00:53:16.570 --> 00:53:47.710
बाबा बाबा कहते हैं , लेकिन मेरा बाबा , मैं बाबा का , बाबा मेरा , यह कोटों में कोई निकलता है ।

77
00:53:52.219 --> 00:54:09.309
तो संगमयुग का लक्ष्य क्या है ?

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00:54:24.400 --> 00:54:44.739
हम सब आत्माओं का बाप आ गया , वर्सा तो बाप द्वारा मिलेगा ना !

79
00:54:50.570 --> 00:55:06.679
वह प्रभाव फरिश्ता अवस्था से वायुमण्डल फैलेगा ।

80
00:55:06.679 --> 00:55:37.199
इन्हों की दृष्टि से लाइट मिलती है , इन्हों की दृष्टि में रूहानियत की लाइट नज़र आती है ,

81
00:55:43.420 --> 00:56:18.449
तो अभी तीव्र पुरूषार्थ का यही लक्ष्य रखो मैं डबल लाइट फरिश्ता हूँ ,

82
00:56:18.449 --> 00:56:41.599
चलते फिरते फरिश्ता स्वरूप की अनुभूति को बढ़ाओ ।

83
00:56:49.199 --> 00:57:00.570
अशरीरीपन के अनुभव को बढ़ाओ ।

84
00:57:01.199 --> 00:57:58.219
सेकण्ड में कोई भी संकल्पों को समाप्त करने में , संस्कार स्वभाव में डबल लाइट ।

85
00:57:58.219 --> 00:58:14.570
कई बच्चे कहते हैं हम तो हल्के रहते हैं लेकिन हमको दूसरे जानते नहीं हैं ।

86
00:58:20.170 --> 00:58:46.510
लेकिन ऐसे डबल लाइट फरिश्ता , डबल लाइट उसकी लाइट छिप सकती है ।

87
00:58:46.510 --> 00:59:05.139
छोटी सी स्थूल लाइट टार्च हो या माचिस की तीली हो लाइट कहाँ भी जलेगी , छिपेगी नहीं

88
00:59:07.940 --> 00:59:37.369
और यह तो रूहानी लाइट है तो अपने वायुमण्डल से उन्हों को अनुभव कराओ कि यह कौन हैं !

89
00:59:45.769 --> 01:00:02.170
चाहे जगदम्बा चाहे दादी ने कहा नहीं कि मुझे जानते नहीं हैं ।

90
01:00:09.309 --> 01:00:17.599
अपने वायुमण्डल से सर्व की प्यारी ।

91
01:00:24.510 --> 01:00:43.369
इसीलिए दादी का मिसाल देते हैं क्योंकि ब्रह्मा बाप के लिए भी सोचते हैं ब्रह्मा बाबा में तो शिवबाबा था ,

92
01:00:43.369 --> 01:01:04.739
शिव बाप के लिए भी सोचते कि वह तो है ही निराकार , न्यारा और निराकार , हम तो स्थूल शरीरधारी हैं ।

93
01:01:05.420 --> 01:01:20.050
इतने बड़े संगठन में रहने वाले हैं , हर एक के संस्कार के बीच में रहने वाले हैं ,

94
01:01:23.769 --> 01:01:39.199
संस्कार को मिलाना अर्थात् फरिश्ता बनना ।

95
01:01:39.199 --> 01:01:53.420
संस्कार को देख कई बच्चे दिलशिकस्त भी हो जाते हैं ,

96
01:01:53.420 --> 01:02:07.480
बाबा बहुत अच्छा , ब्रह्मा बाप बहुत अच्छा , ज्ञान बहुत अच्छा , प्राप्तियां बहुत अच्छी ,

97
01:02:07.480 --> 01:02:22.800
लेकिन संस्कार स्वभाव मिलाना अर्थात् सर्व के प्यारे बनना ।

98
01:02:22.800 --> 01:02:44.739
कोई कोई के प्यारे नहीं , क्योंकि कई बच्चे कहते हैं कि कोई कोई से प्यार विशेषता को देख करके भी हो जाता है ।

99
01:02:45.769 --> 01:03:00.679
इनका भाषण बहुत अच्छा है , इसमें फलानी विशेषता बहुत अच्छी है ,

100
01:03:00.679 --> 01:03:19.769
वाणी बहुत अच्छी है , फरिश्ता बनने में यह विघ्न आता है ।

101
01:03:23.710 --> 01:03:42.619
प्यारा भले बनाओ , लेकिन मैं आत्मा न्यारी हूँ , न्यारी स्टेज से प्यारा बनाओ ।

102
01:03:43.710 --> 01:03:47.880
विशेषता से प्यारा नहीं ।

103
01:03:47.880 --> 01:04:04.340
यह इसका गुण मुझे बहुत अच्छा लगता है ना वह धारण भले करो लेकिन इसके कारण सिर्फ प्यारा बनना वह रांग है ।

104
01:04:04.340 --> 01:04:09.769
फरिश्ता सभी का प्यारा ।

105
01:04:10.340 --> 01:04:39.420
हर एक कहे मेरा , अपनापन , ऐसी फरिश्ते अवस्था में विघ्न दो चीज़ें डालती हैं ।

106
01:04:40.969 --> 01:04:59.019
एक तो देह भान , वह तो नेचुरल सबको अनुभव है , 63 जन्म का फिर फिर देहभान प्रगट हो जाता है

107
01:04:59.019 --> 01:05:27.940
और दूसरा है देह अभिमान , देह भान और देह अभिमान , ज्ञान में जितना आगे जाते हैं ,

108
01:05:29.480 --> 01:05:59.880
तो स्वयं के प्रति भी कभी कभी देह अभिमान आ जाता है , वह अभिमान नीचे गिराता है , देह - अभिमान क्या आता है ?

109
01:05:59.880 --> 01:06:28.170
जो भी कोई विशेषता है ना , उस विशेषता के कारण अभिमान रहता है , मैं कोई कम हूँ , मेरा भाषण सबको पसन्द आता है ।

110
01:06:28.170 --> 01:06:54.510
मेरी सेवा का प्रभाव पड़ता है , कोई भी कला मेरी हैंडलिंग बहुत अच्छी है , मेरा कोर्स कराना बहुत अच्छा ।

111
01:06:56.510 --> 01:07:18.849
कोई न कोई ज्ञान में आगे बढ़ने में , सेवा में आगे बढ़ने में यह अभिमान अपने प्रति भी आता

112
01:07:19.599 --> 01:07:34.969
और दूसरे के गुण या कला , या विशेषता प्रति भी प्यार हो जाता ।

113
01:07:37.650 --> 01:07:44.739
लेकिन याद कौन आयेगा ?

114
01:07:47.309 --> 01:08:02.800
देहभान ही याद आयेगा ना , फलाना बुद्धि का बहुत अच्छा है , मेरी हैंडलिंग बहुत अच्छी है ,

115
01:08:04.280 --> 01:08:27.020
यह अभिमान सेवा वा पुरूषार्थ में आगे बढ़ने वालों को अभिमान के रूप में आता है ।

116
01:08:27.819 --> 01:08:48.970
तो यह भी चेक करना है , और अभिमान वाले को अभिमान है इसको चेक करने का साधन है ,

117
01:08:48.970 --> 01:09:19.649
अभिमान वाले को जरा भी कोई ने अपमान किया , उसके विचार का , उसकी राय का , उसकी कला का , उसकी हैंडलिंग का अपमान बहुत जल्दी महसूस होगा ।

118
01:09:22.220 --> 01:09:50.170
और अपमान महसूस हुआ , उसकी और सूक्ष्म निशानी क्रोध का अंश पैदा होता है , रोब ।

119
01:09:56.569 --> 01:10:02.220
वह फरिश्ता बनने नहीं देता ।

120
01:10:05.079 --> 01:10:22.569
तो वर्तमान समय के हिसाब से बापदादा फिर से इशारा दे रहा है ,

121
01:10:27.250 --> 01:10:52.399
अपना संगमयुग का लास्ट स्वरूप फरिश्ता अब जीवन में प्रत्यक्ष करो , साकार में लाओ ।

122
01:10:54.399 --> 01:11:12.109
फरिश्ता बनने से अशरीरी बनना बहुत सहज हो जायेगा ।

123
01:11:18.680 --> 01:11:56.399
अपनी चेकिंग करो , सूक्ष्म रूप में भी लगाव कोई विशेषता या अपनी या और किसकी , अभिमान तो नहीं है ?

124
01:11:58.399 --> 01:12:24.800
कई बच्चों की छोटी सी बात भी होगी ना , तो अवस्था नीचे ऊपर हो जाती है ।

125
01:12:26.800 --> 01:13:17.199
दिलखुश , चेहरा खुश उसके बजाए या चिंतन वाला चेहरा या चिंता वाला चेहरा , और चलते चलते दिलशिकस्त भी हो जाते ।

126
01:13:20.050 --> 01:13:29.420
दिलखुश के बजाए दिलशिकस्त ।

127
01:13:42.510 --> 01:14:14.449
तो समझा , अब अपने संगमयुग की लास्ट स्टेज फरिश्तेपन के संस्कार इमर्ज करो ।

128
01:14:16.449 --> 01:14:25.250
जैसे ब्रह्मा बाप को देखा , फॉलो फादर करना है ना ।

129
01:14:26.050 --> 01:14:36.000
बात करते करते लास्ट में कई बच्चों को अनुभव है ,

130
01:14:36.000 --> 01:15:10.619
सुनाने आये समाचार लेकिन समाचार से परे , आवाज से परे स्थिति का अनुभव किया हुआ देखा है ।

131
01:15:12.619 --> 01:15:30.449
बातों का समाचार सुनाने , बहुत प्लैन बनाकर आते यह बताऊंगा , यह बताऊंगा , यह पूछूंगा

132
01:15:31.369 --> 01:15:43.020
लेकिन सामने आते क्या बोलना था वही भूल जाता ।

133
01:15:49.770 --> 01:15:59.649
तो यह है फरिश्ता अवस्था ।

134
01:16:02.850 --> 01:16:06.680
तो क्या आज पाठ पक्का किया ?

135
01:16:06.680 --> 01:16:08.680
मैं कौन ?

136
01:16:08.680 --> 01:16:11.369
फरिश्ता ।

137
01:16:11.369 --> 01:16:37.140
किसी बातों से , किसी विशेषताओं से , अपनी विशेषता से , देह अभिमान से परे डबल लाइट फरिश्ता

138
01:16:41.369 --> 01:16:50.909
क्योंकि फरिश्ता बनने के बिना देवता का ऊंचा पद नहीं मिलेगा ।

139
01:16:50.909 --> 01:17:12.050
सतयुग में तो आ जायेंगे , क्योंकि बच्चे बने हैं , वर्सा तो मिलेगा लेकिन श्रेष्ठ पद नहीं ।

140
01:17:19.880 --> 01:17:37.020
जो वायदा है सदा साथ रहेंगे , साथ साथ राज्य करेंगे , तख्त पर भले नहीं बैठे

141
01:17:37.020 --> 01:17:52.800
लेकिन राज्य अधिकारी बनें , वहाँ की राज्य सभा देखी है ना ।

142
01:17:52.800 --> 01:18:23.369
जो भी राज्य सभा के अधिकारी हैं , वह तिलक और ताजधारी , राज्य तिलक , राज्य की निशानी ताज ।

143
01:18:26.569 --> 01:18:42.170
तो बहुत समय से स्वराज्य अधिकारी , बीच-बीच में नहीं ।

144
01:18:45.140 --> 01:18:56.850
बहुत समय के स्वराज्य अधिकारी तख्त पर भले नहीं बैठे

145
01:18:56.850 --> 01:19:10.050
लेकिन रॉयल फैमिली के अधिकारी बन जाते हैं ।

146
01:19:15.710 --> 01:19:20.399
अच्छा ।

147
01:19:25.939 --> 01:19:34.680
अच्छा आज जो पहली बारी आये हैं वह उठो ।

148
01:19:36.680 --> 01:19:39.479
अच्छा ।

149
01:20:02.680 --> 01:20:11.939
पौनी सभा तो उठी हुई है ।

150
01:20:13.939 --> 01:20:49.649
अच्छा जो भी पहली बारी आये हैं उन सभी को बाप से साकार में मिलने की , पहले बारी की जन्म की मुबारक हो ।

151
01:20:58.510 --> 01:21:17.310
बापदादा का सभी आये हुए बच्चों को यही वरदान है

152
01:21:19.310 --> 01:21:36.739
कि आये , टूलेट के समय हैं

153
01:21:36.739 --> 01:21:57.079
लेकिन नये आये हुए बच्चों प्रति एक विशेष वरदान है

154
01:21:59.079 --> 01:22:17.600
कि कभी भी यह संकल्प नहीं करना कि हम आगे कैसे जा सकते ?

155
01:22:20.449 --> 01:22:37.140
टूलेट आने वालों को अभी तो लेट में आये हो टूलेट में नहीं आये हो ।

156
01:22:40.850 --> 01:23:17.310
और अभी आप सबको विशेष बापदादा और निमित्त बने हुए ब्राह्मण परिवार के भाई बहिनों की विशेष सहयोग की भावना है

157
01:23:17.310 --> 01:23:37.079
कि अगर आप थोड़े समय को एक एक सेकण्ड को सफल करने का ,

158
01:23:37.079 --> 01:23:53.770
क्योंकि थोड़े समय में बहुत पाना है , एक सेकण्ड भी व्यर्थ नहीं गंवाना , कर्मयोगी बनके चलना ,

159
01:23:53.770 --> 01:24:12.739
कर्म नहीं छोड़ना है लेकिन कर्म में योग एड करते , कर्म और योग का बैलेन्स रखना है ।

160
01:24:14.739 --> 01:24:24.619
तो बैलेन्स रखने वाले को ब्लैसिंग एकस्ट्रा मिलती है ।

161
01:24:25.819 --> 01:24:49.310
तो जो भी लेट में आये हो , टूलेट अभी आगे लगना है , आपको चांस है , थोड़े समय में बहुत पुरूषार्थ कर सकते हो ।

162
01:24:49.310 --> 01:25:07.310
बापदादा वरदान देते हैं कि हिम्मते बच्चे मददे बाप है ही ।

163
01:25:22.000 --> 01:25:55.939
सेवा का टर्न गुजरात का है :- अच्छा गुजरात के जो नये पहली बारी आये हैं वह उठो ।

164
01:26:31.369 --> 01:26:59.140
जो बाप से पहले बारी मिलने आये हैं गुजरात के , हाथ हिलाओ ।

165
01:27:04.739 --> 01:27:27.140
( गुजरात से 6 हजार आये हैं ) अच्छा हुआ , आ तो गये ।

166
01:27:33.020 --> 01:27:47.819
अपना मधुबन बापदादा का मधुबन तो देखा ।

167
01:27:47.819 --> 01:27:53.079
इसकी भी मुबारक हो ।

168
01:27:53.079 --> 01:27:59.819
अच्छा । अभी सभी गुजरात के उठो ।

169
01:28:15.250 --> 01:28:36.850
बापदादा शुरू से गुजरात को मधुबन का कमरा समझते हैं ।

170
01:28:40.619 --> 01:29:17.250
सबसे नजदीक सहयोगी , स्नेही और अभी वर्तमान समय बापदादा ने देखा रिजल्ट में

171
01:29:19.250 --> 01:29:28.399
तो जो बापदादा ने होमवर्क दिया था ,

172
01:29:28.399 --> 01:29:57.079
कि हर एक जोन आपस में मिलके जोन को निर्विघ्न बनाने का प्रोग्राम बनाके और निर्विघ्न बनाओ ,

173
01:29:57.079 --> 01:30:12.279
तो बापदादा ने देखा सभी जोन अपने अपने रूप में करते होंगे

174
01:30:12.279 --> 01:30:34.340
लेकिन गुजरात ने हर मास में रिकार्ड दिखाया ,

175
01:30:34.340 --> 01:30:53.649
हर मास में टापिक और समाचार की लेन देन इससे संगठन में उमंग आता है ।

176
01:30:53.649 --> 01:31:14.399
अलग अलग पुरूषार्थ करते हैं ना उससे अगर संगठन में नियम प्रमाण , कायदेमुजीब प्रोग्राम रखते हैं

177
01:31:14.399 --> 01:31:19.819
तो उससे अटेन्शन अच्छा होता है ।

178
01:31:20.569 --> 01:31:37.819
निर्विघ्न बने या नहीं बनें वह रिजल्ट अभी आनी चाहिए

179
01:31:37.819 --> 01:31:55.369
कि इस प्रोग्राम चलते किस किस में अन्तर आया है , क्लास चले , यह तो मुबारक है ।

180
01:31:55.369 --> 01:32:17.250
टापिक निकाली है यह भी मुबारक है लेकिन प्रैक्टिकल में अन्तर क्या आया है , वह रिजल्ट अभी आनी चाहिए ।

181
01:32:18.220 --> 01:32:33.420
बाकी बापदादा मुबारक देते हैं कि होमवर्क को बुद्धि में रख पुरूषार्थ किया है ,

182
01:32:33.420 --> 01:32:45.020
तो पुरूषार्थ का बाबा बधाई दे रहा है ।

183
01:32:49.539 --> 01:33:39.880
ऐसे ही छोटे छोटे ग्रुप बनाओ, जैसे देखा है बापदादा ने तो यह वर्गीकरण का जो ग्रुप बनाते हैं, तो ग्रुप टर्न बाई टर्न आपस में भी मिलते रहते और छोटा ग्रुप होने के कारण आपस में लेन देन कर सकते हैं, बाकी वर्गीकरण वाले भी बहुत आये हैं।

184
01:33:41.199 --> 01:34:03.939
उन्हों को भी बापदादा यही कह रहे हैं , कि जैसे सर्विस के प्लैन बनाते हो , रिजल्ट में बापदादा ने देखा , तीन चार की रिजल्ट भी आई है

185
01:34:04.909 --> 01:34:19.479
लेकिन जैसे सेवा का प्लैन बनाते हो और उसको प्रैक्टिकल में करते हो ,

186
01:34:19.479 --> 01:34:34.109
और प्रैक्टिकल में जो सहयोगी बने हैं , सहयोगी कम बने हैं , स्नेही बने हैं ,

187
01:34:34.449 --> 01:35:00.970
तो जैसे वह रिजल्ट निकालते हो , वैसे हर वर्ग को धारणा के लिए अपने वर्ग को निर्विघ्न बनाने के लिए भी अटेन्शन देना चाहिए ।

188
01:35:00.970 --> 01:35:28.680
कोई कोई करते हैं , धारणा का प्वाइंट भी रखते हैं लेकिन रिजल्ट किया नहीं किया , वृद्धि है या नहीं है , परिवर्तन हुआ या नहीं हुआ , वह रिजल्ट भी आनी चाहिए ।

189
01:35:29.479 --> 01:35:32.170
क्या रिजल्ट रही ?

190
01:35:32.170 --> 01:35:42.399
परिवर्तन का कोई ऐसा दृष्टान्त दिखाना चाहिए ।

191
01:35:45.880 --> 01:35:59.479
जैसे सेवा पर अटेन्शन देते हो तो सेवा वृद्धि को तो पाई है ना , बापदादा खुश है

192
01:35:59.479 --> 01:36:09.539
लेकिन अभी धारणा के ऊपर अटेन्शन और चाहिए ।

193
01:36:09.539 --> 01:36:25.649
क्योंकि अन्त में सेवा चाहेंगे तो भी नहीं कर सकेंगे , अभी कर ली सो कर ली ,

194
01:36:26.800 --> 01:36:50.800
उस समय फरिश्ता लाइफ या अशरीरी बनने का सेकण्ड में बिन्दु लगाने का यही काम में आना है ।

195
01:36:50.800 --> 01:36:55.819
और अचानक होना है ।

196
01:36:56.279 --> 01:37:10.279
इसका अभ्यास अगर सेवा भी की , लेकिन इसका अभ्यास कम होगा ,

197
01:37:10.279 --> 01:37:22.569
सेवा में ही लगे रहे , सेवा में लगना है लेकिन दोनों का बैलेन्स चाहिए ।

198
01:37:29.079 --> 01:37:39.079
बापदादा बार-बार इशारा दे रहा है कि अचानक होना है

199
01:37:39.079 --> 01:37:56.970
और ऐसी सरकमस्टांश में होना है इसीलिए बाप को उल्हना कोई नहीं दे कि आपने बताया नहीं ।

200
01:37:58.340 --> 01:38:05.649
बार-बार भिन्न-भिन्न ईशारे दे रहे हैं ।

201
01:38:05.649 --> 01:38:16.170
सेवा का फल मिलता है , सेवा की मार्क्स , क्योंकि चार सबजेक्ट हैं ना

202
01:38:16.170 --> 01:38:28.170
तो सेवा की सबजेक्ट की मार्कस मिलेंगी लेकिन और तीन सबजेक्ट ,

203
01:38:29.420 --> 01:38:44.800
अगर एक सबजेक्ट में आपने मार्कस ले ली और तीन में कम ली तो नम्बर क्या मिलेगा ?

204
01:38:47.250 --> 01:38:55.310
चार ही में फर्स्ट नम्बर आना चाहिए ।

205
01:38:57.649 --> 01:39:07.600
यह बापदादा की हर बच्चों के प्रति शुभ आश है ।

206
01:39:07.600 --> 01:39:13.649
तो बाप की आशाओं के सितारे कौन हैं ?

207
01:39:15.649 --> 01:39:18.170
हाथ उठाओ ।

208
01:39:20.170 --> 01:39:32.399
बाप की आशाओं के सितारे हो तो बापदादा की यही सबसे बड़ी आश है

209
01:39:35.539 --> 01:39:44.000
कि चार ही सबजेक्ट में नम्बर अच्छा हो ।

210
01:39:44.000 --> 01:39:50.279
नहीं तो पास विद आनर में नहीं आयेंगे ।

211
01:39:58.680 --> 01:40:14.970
महारथी उसको कहा जाता है जो चार ही सबजेक्ट में अच्छे नम्बर ले ।

212
01:40:16.970 --> 01:40:23.539
कहने में भले महारथी महारथी आता है ,

213
01:40:23.539 --> 01:40:41.939
लेकिन अगर नम्बर नहीं लेते तो बापदादा के उम्मीदों के तारे हैं , आशाओं के तारे नहीं ।

214
01:40:50.680 --> 01:40:53.079
तो बनना क्या है ?

215
01:40:53.079 --> 01:40:57.880
उम्मीदों के सितारे ?

216
01:41:05.310 --> 01:41:14.340
आशाओं के सितारे , सफलता के सितारे ।

217
01:41:20.399 --> 01:41:32.449
तो गुजरात अच्छा लक्ष्य तो रखा है ।

218
01:41:36.909 --> 01:41:43.880
लेकिन रिजल्ट बापदादा को भेज देना

219
01:41:44.619 --> 01:41:59.710
क्योंकि आपको देख करके फिर औरों को भी उमंग आयेगा , कि इस संगठन से फायदा क्या हुआ ।

220
01:42:00.619 --> 01:42:14.970
प्लैन तो अच्छा है और रेग्युलर करते आये हैं , इसकी मुबारक भी है ।

221
01:42:19.199 --> 01:42:21.600
ठीक है ।

222
01:42:21.600 --> 01:42:27.880
मुबारक भी है और होमवर्क भी है । दोनों है ।

223
01:42:29.880 --> 01:42:34.050
अच्छा ।

224
01:42:39.770 --> 01:43:28.569
इस ग्रुप में 5 वर्ग की मीटिंग है :- ( बिजनेस महिला समाज सेवा ट्रांसपोट और ग्राम विकास ) अच्छा सभी ने अपनी निशानी रखी है ।

225
01:43:29.880 --> 01:43:40.739
अभी जिसने जो कुछ निशानियां बनाई है ना , उसका एक एक सामने आवे ।

226
01:43:45.250 --> 01:43:50.220
बोर्ड है या सिम्बल है ।

227
01:43:50.970 --> 01:43:54.850
एक दो आ जाओ ।

228
01:44:13.880 --> 01:44:19.649
सब आगे आओ ।

229
01:45:00.340 --> 01:45:09.770
यह भी अच्छा है । अभी ऐसे सामने फेश करो ।

230
01:45:30.800 --> 01:45:32.970
अच्छा ।

231
01:45:39.199 --> 01:45:41.539
अच्छा किया है ।

232
01:45:41.539 --> 01:45:54.109
यह भी एक एकस्ट्रा उमंग-उत्साह भरने का साधन है ।

233
01:45:54.850 --> 01:46:03.880
अभी प्लेन किसने नहीं देखा हो तो प्लेन तो देख लिया ।

234
01:46:06.449 --> 01:46:10.050
( ट्रांसपोर्ट वालों ने फ्लैक्स पर प्लेन बनाया है ) अपने प्लेन में तो चढ़ते हो ना !

235
01:46:10.050 --> 01:46:34.569
इसमें तो टिकेट खर्च करनी पड़ेगी और आपका प्लेन , मन और बुद्धि का प्लेन सेकण्ड में कहाँ से कहाँ तीन लोकों में पहुंच सकता है ।

236
01:46:37.310 --> 01:46:42.000
मेहनत अच्छी की है ।

237
01:46:43.310 --> 01:46:45.600
अच्छा ।

238
01:46:45.880 --> 01:47:02.569
सभी को खुशी होती है ना , अच्छा कौन से विंग्स हैं ।

239
01:47:02.680 --> 01:47:09.600
अच्छा बिजनेस वाले हाथ उठाओ ।

240
01:47:09.600 --> 01:47:39.819
अच्छा यह बिजनेस वाले और ट्रांसपोर्ट , ट्रांसपोर्ट दोनों ही ट्रांसपोर्ट ने हाथ उठाया ।

241
01:47:39.819 --> 01:47:43.369
दोनों ही उठाओ ।

242
01:47:49.020 --> 01:47:50.850
अच्छा ।

243
01:47:50.850 --> 01:47:52.850
महिलायें ।

244
01:47:55.199 --> 01:47:57.710
अच्छा ।

245
01:47:57.710 --> 01:48:01.310
इनकी निशानी बता रही है ।

246
01:48:06.569 --> 01:48:34.109
बाबा की अभी एक बात प्रैक्टिकल में लाना रह गई है , वह ग्रुप कहाँ भी इकठ्ठा करो ।

247
01:48:34.109 --> 01:48:53.880
मानों जोन में इकठ्ठा करो या दो तीन जोन जो नजदीक हैं उसमें जो वी आई पी स्नेही , आया गया वह नहीं

248
01:48:53.880 --> 01:49:19.079
लेकिन स्नेही है कनेक्शन में है और रिलेशन रख रहा है , रिलेशन यह है , जो रोज मुरली सुनने नहीं भी आता है ,

249
01:49:19.079 --> 01:49:41.199
तो फोन में भी सुनता रहे , वरदान सुने , स्लोगन सुने , और जो लास्ट में मुरली का सार होता है ,

250
01:49:41.199 --> 01:49:47.140
वह चलते फिरते फोन में भी सुने , कनेक्शन रखे ।

251
01:49:47.140 --> 01:49:54.279
ऐसे नहीं 6 मास के बाद बुलाओ तो आ गया ।

252
01:49:54.279 --> 01:50:02.220
कनेक्शन में रहे तो रिलेशन पक्का होगा ।

253
01:50:02.220 --> 01:50:09.539
कनेक्शन ऐसा होता है जो खींचता है ।

254
01:50:11.539 --> 01:50:26.220
जब वर्गीकरण होगा तब आयेगा , एक साल के बाद उसको रिलेशन नहीं कहा जाता ।

255
01:50:27.140 --> 01:50:34.569
नजदीक का रिलेशन हो , अपनी प्रेजन्ट मार्क तो डाले ।

256
01:50:34.569 --> 01:50:45.479
फोन में ही डाले , लेकिन मैं हूँ , यह प्रेजन्ट मार्क तो डाले ।

257
01:50:46.680 --> 01:50:56.680
और जितना हो सके उतना जोन या दो तीन जोन मिलके ,

258
01:50:56.680 --> 01:51:09.539
जहाँ नजदीक पड़ता हो आने जाने में , 6 मास में 3 मास में एक संगठन तो करो ।

259
01:51:11.539 --> 01:51:25.199
और एक दो में पहले अपने अपने जोन में करो , दो तीन नजदीक वाले मिलके करो

260
01:51:25.199 --> 01:51:36.340
और फिर एक बारी सबको इकठ्ठा एक स्थान पर करें तो परिचय भी हो जावे ना ,

261
01:51:36.340 --> 01:51:52.739
कौन कौन अनुभव कर रहा है , मानों डाक्टर्स हैं , अभी देखें

262
01:51:52.739 --> 01:52:02.909
तो इतने बड़े बड़े डाक्टर्स भी अभ्यास कर रहे हैं तो प्रभाव तो पड़ता है ना ।

263
01:52:02.909 --> 01:52:14.569
ऐसे ही सभी वर्ग वालों को एक दो को देख करके प्रभाव पड़ता है ।

264
01:52:14.569 --> 01:52:26.340
यह भी चल रहे हैं , यह भी चल रहे हैं और एक दो का अनुभव सुनते हैं तो भी प्रभाव पड़ता है ।

265
01:52:28.340 --> 01:52:40.170
तो अभी दूसरा टर्न आपका आवे उसमें यह रिजल्ट बताना ।

266
01:52:40.170 --> 01:52:54.680
कितने बार संगठन किया , कहाँ कहाँ किया , कितने आये , उसकी रिजल्ट ।

267
01:52:57.770 --> 01:53:00.170
यह तो सहज है ना ।

268
01:53:00.170 --> 01:53:04.510
सहज है या मुश्किल है ?

269
01:53:04.510 --> 01:53:07.600
सब वर्ग करेंगे ना ।

270
01:53:07.600 --> 01:53:12.340
दूसरे भी सुनेंगे ।

271
01:53:14.340 --> 01:53:17.310
अच्छा ।

272
01:53:38.050 --> 01:54:28.510
डबल विदेशी भाई बहिनें :- ( 80 देशों से आये हैं ) अच्छा है , यह जो प्रोग्राम बनाया है ,

273
01:54:28.510 --> 01:54:44.279
मधुबन में सबका संगठन हो , यह बापदादा को बहुत पसन्द है

274
01:54:44.279 --> 01:54:57.079
क्योंकि मधुबन में आने से परिवार कितना बड़ा है !

275
01:54:57.079 --> 01:55:06.399
सेवायें चारों ओर कैसे हो रही हैं !

276
01:55:06.399 --> 01:55:25.140
भारत वाले फारेन की सेवा से लाभ उठाते कि फारेन में यह कर रहे हैं , हम भी करें

277
01:55:25.140 --> 01:55:41.880
और फारेन वाले इन्डिया के समाचार सुनकर अपने स्थान में जहाँ हो सकता है ,

278
01:55:41.880 --> 01:56:02.000
वहाँ फायदा लेते हैं और फारेन के फारेन में मिलना , मुश्किल है , मधुबन में डबल फायदा है ।

279
01:56:02.000 --> 01:56:12.510
बापदादा से मिलना भी हो जाता और परिवार से मिलना भी हो जाता ।

280
01:56:12.510 --> 01:56:44.850
तो अभी कुछ समय से कायदे प्रमाण मधुबन में मीटिंग या छोटे छोटे संगठन यह बापदादा को बहुत पसन्द आया

281
01:56:44.850 --> 01:57:01.880
और प्लैन भी अच्छे - अच्छे बनाते रहे हो और प्रैक्टिकल में भी कर रहे हो ,

282
01:57:01.880 --> 01:57:27.020
इसकी भी हर साल वृद्धि देखक्र बापदादा चारों ओर के डबल फारेनर्स को बधाईयां देते हैं , बधाईयां देते हैं ।

283
01:57:32.800 --> 01:57:44.279
और अभी जितना-जितना संगठन होता रहा है ना ,

284
01:57:44.279 --> 01:58:04.510
तो उससे एक दो का अनुभव सुनने से कईयों को अनुभव द्वारा भी बल मिलता है ।

285
01:58:05.310 --> 01:58:30.109
मानों कोई दिलशिकस्त हो जाता है तो दूसरे का अनुभव सुनता , तो यह सदा खुशमिजाज रहता है इसकी शक्ल कभी मुरझाये नहीं , दिलखुश ।

286
01:58:31.369 --> 01:58:42.000
तो एक दो का अनुभव सुनने से उल्हास में आ जाते ।

287
01:58:43.369 --> 01:59:03.880
एक दो का अनुभव कम नहीं होता है , हर एक को ड्रामानुसार कोई न कोई विशेषता बाप द्वारा मिली हुई है ।

288
01:59:03.880 --> 01:59:14.739
तो वह अनुभव सुनने से उमंग आता है , यह कर सकता है तो मैं क्यों नहीं कर सकता !

289
01:59:14.739 --> 01:59:22.109
कभी भी दिल छोटी नहीं करना ।

290
01:59:22.109 --> 01:59:26.909
बड़ी दिल , बड़ा बाबा ।

291
01:59:26.909 --> 01:59:38.850
छोटा बाबा है क्या , बड़े ते बड़ा बाबा है , तो बच्चों की दिल सदा बड़ी ।

292
01:59:39.710 --> 01:59:56.680
बापदादा का स्लोगन है बड़ी दिल सच्ची दिल , साफ दिल तो हर मुराद हांसिल ।

293
01:59:59.420 --> 02:00:13.310
जो भी किचड़ा आवे ना , किचड़े की दुनिया है ना , तो कभी वायुमण्डल में किचड़ा उड़के आ जाता है

294
02:00:13.600 --> 02:00:20.510
लेकिन किचड़ा अपने पास नहीं रखो ।

295
02:00:21.310 --> 02:00:35.880
जैसे स्थूल कमरे में सोते हो और किचड़ा हो जाए तो क्या होता है , सफाई नहीं करो

296
02:00:35.880 --> 02:00:51.250
तो मच्छर हो जाते हैं , फिर बीमारियां होती हैं , तो यह भी अगर मन में कोई भी बात रख ली ,

297
02:00:51.250 --> 02:00:59.710
निकाला नहीं तो वह वृद्धि को पाती रहती ।

298
02:01:01.710 --> 02:01:11.250
बस बाबा , मेरा बाबा कहो तो हाजिर बाबा , बंधा हुआ है ।

299
02:01:11.250 --> 02:01:32.279
बच्चा , बाप का बच्चा , भगवान का बच्चा , याद करे मेरा बाबा और बाबा हाजर नहीं हो , यह हो नहीं सकता ।

300
02:01:35.479 --> 02:01:46.680
आपके पास बाप को बांधने की रस्सी है !

301
02:01:46.680 --> 02:01:50.000
क्या है ?

302
02:01:50.510 --> 02:01:55.079
दिल का प्यार ।

303
02:01:56.340 --> 02:02:08.619
कईयों को बाप से प्यार है , नहीं है यह नहीं कहेंगे , लेकिन दो प्रकार का प्यार है -

304
02:02:08.619 --> 02:02:19.479
एक है नॉलेज के आधार से , मैं आत्मा हूँ , शरीर तो हूँ ही नहीं

305
02:02:19.479 --> 02:02:33.770
और आत्मा का बाप परमात्मा ही है और परमात्मा ज्योति के सिवाए और कोई सबका परमात्मा हो ही नहीं सकता ।

306
02:02:33.770 --> 02:02:58.800
तो बाप बाप तो है , ज्योति स्वरूप है , सहयोग देता है , लेकिन हर समय दिल के स्नेह से मेरा बाबा निकले ऑटोमेटिकली ।

307
02:02:58.800 --> 02:03:12.170
साथी बनाया जाता है समय के लिए , आईवेल के लिए साथी काम में आता है ,

308
02:03:12.170 --> 02:03:25.770
तो आपने बाप को कम्बाइन्ड रखा है , साथी बनाया है तो समय पर साथ लो ।

309
02:03:25.770 --> 02:03:37.479
स्नेह से याद करो , एक है नॉलेज के आधार से स्नेह , एक है दिल के प्यार से स्नेह ।

310
02:03:37.880 --> 02:03:45.140
तो चेक करो दिल का प्यार है ?

311
02:03:45.140 --> 02:03:50.569
प्यार वाले को भूलना मुश्किल है ।

312
02:03:51.710 --> 02:04:08.050
रिवाजी चीज़ देखो , सुगर वालों को मीठा मना है , और उसका प्यार है मीठे से , तो मीठा याद आता है , भूलता है ?

313
02:04:08.050 --> 02:04:14.619
डाक्टर की दवाई करेंगे लेकिन मीठा खायेंगे ।

314
02:04:14.619 --> 02:04:27.020
तो चीज़ से प्यार है तो कहने से भी नहीं छोड़ते हैं और यह तो बाप है ,

315
02:04:28.050 --> 02:04:33.880
सर्व प्राप्ति का अनुभव कराने वाला है ।

316
02:04:33.880 --> 02:04:38.000
सभी सुन रहे हैं ना ।

317
02:04:38.000 --> 02:04:52.340
भले निमित्त फारेनर्स हैं लेकिन सभी सुन रहे हैं , तो अभी चेक करो कि दिल का प्यार है ?

318
02:04:52.340 --> 02:04:56.050
खुदा को दोस्त बनाया है ?

319
02:04:56.050 --> 02:04:59.199
दोस्त किसलिए बनाते हैं ?

320
02:04:59.199 --> 02:05:06.680
बाप से भी दोस्त से ज्यादा प्यार होता है ।

321
02:05:08.680 --> 02:05:12.170
तो खुदा दोस्त बनाया है ना !

322
02:05:12.680 --> 02:05:19.369
कोई भी बात आवे , बाबा आप सम्भालो ।

323
02:05:19.369 --> 02:05:24.970
छोटे बच्चे बन जाओ , बड़े नहीं बनो ।

324
02:05:28.109 --> 02:05:31.649
तो बाप ले लेगा ।

325
02:05:31.649 --> 02:05:42.680
प्यार की रस्सी से ऐसा बांधके रखो जो हिल नहीं सके ।

326
02:05:50.109 --> 02:05:52.739
समझा !

327
02:05:52.739 --> 02:05:56.449
सभी ने समझा ना !

328
02:05:56.449 --> 02:06:05.880
कई बार कहते हैं बाबा आज मुझे बाबा भूल गया ।

329
02:06:06.279 --> 02:06:13.539
बापदादा को सुनके कितना आश्चर्य लगता होगा !

330
02:06:13.539 --> 02:06:16.739
भूल गया !

331
02:06:18.739 --> 02:06:28.220
63 जन्म भूले , अभी भी भूल गये ।

332
02:06:30.220 --> 02:06:39.819
एक जन्म और छोटा सा जन्म !

333
02:06:41.819 --> 02:06:52.909
21 फुल जन्म भूल गये , अभी भी भूलना रहा हुआ है क्या ?

334
02:06:57.819 --> 02:07:11.880
इसीलिए अभी माया की चतुराई को समझ जाओ ।

335
02:07:14.399 --> 02:07:22.279
माया की कभी-कभी खातिरी भी कर देते हैं ।

336
02:07:24.739 --> 02:07:32.170
कहते हैं हम समय पर तैयार हो जायेंगे ।

337
02:07:32.170 --> 02:07:36.449
अभी तो टाइम पड़ा है ना थोड़ा !

338
02:07:36.449 --> 02:07:41.079
अभी टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है ना !

339
02:07:41.079 --> 02:07:54.970
हम हो जायेंगे और माया भी सहारा देकरके , खातिरी देकरके चाय पानी पीती रहती है ।

340
02:07:59.140 --> 02:08:07.020
बाप को फॉलो फादर करने के बजाए , माया को फॉलो कर लेते हैं ।

341
02:08:07.020 --> 02:08:16.510
पुरूषार्थी हैं ना , सम्पूर्ण थोड़ेही बने हैं , यह तो होता ही है ना !

342
02:08:16.510 --> 02:08:23.710
यह है माया के फॉलोअर बनना ।

343
02:08:28.279 --> 02:08:51.770
तो अभी बापदादा कभी भी चक्र लगाने आये तो सदा शक्ल देखे तो कैसी शक्ल देखे !

344
02:08:53.770 --> 02:08:59.479
कभी कभी शक्ल अच्छी नहीं होती है ।

345
02:09:02.170 --> 02:09:17.710
सोच में , सोच बहुत करते हैं । क्या करूं , यह करूं , नहीं करूं , फायदा होगा , ठीक होगा , सोचते बहुत हैं ।

346
02:09:19.140 --> 02:09:28.279
बाप को फॉलो करो , ब्रह्मा बाप पहुंच गया ना !

347
02:09:28.279 --> 02:09:35.140
ज्यादा सोचते क्यों हो ? सिर्फ फॉलो फादर ।

348
02:09:37.140 --> 02:09:44.739
व्यर्थ संकल्प आते हैं , लहर आ जाती है ।

349
02:09:49.600 --> 02:09:57.199
यह सिर्फ फारेनर्स को नहीं सुना रहे हैं , सबको सुना रहे हैं ।

350
02:10:08.279 --> 02:10:47.250
( विदेश के डेविड भाई से ) बापदादा ने देखा भी और जाना भी कि बच्चे को उमंग-उत्साह बहुत है ।

351
02:10:48.510 --> 02:11:13.079
अभी उमंग - उत्साह को प्रैक्टिकल में लाने में सहयोगी बन करके सहयोग लेते रहेंगे सहयोग देते रहेंगे तो आगे जा सकते हो ।

352
02:11:14.000 --> 02:11:20.739
उमंग उत्साह कभी ढीला नहीं करना बातें आयेंगी ।

353
02:11:20.739 --> 02:11:30.680
लेकिन उमंग उत्साह के पंख ढीले नहीं करना ।

354
02:11:31.420 --> 02:11:34.220
उड़ते रहना ।

355
02:11:34.220 --> 02:11:37.880
पंख है उड़ने के लिए ।

356
02:11:37.880 --> 02:11:47.079
उमंग-उल्हास जरा भी कम हुआ तो ऊंचा उड़ नहीं सकते ।

357
02:11:47.079 --> 02:11:56.340
बात चली जाती है लेकिन खुशी नहीं जाये उमंग उत्साह नहीं जाये ।

358
02:11:56.340 --> 02:12:08.569
बाकी बापदादा ने देखा उमंग अच्छा है अब सदा कायम रखना ।

359
02:12:08.569 --> 02:12:13.310
जम्प दे सकते हो ।

360
02:12:15.310 --> 02:12:54.449
फिलीपीन्स की सहानी बहन से - यह तो पुरानी है ।

361
02:12:54.449 --> 02:12:58.109
अच्छे हैं ।

362
02:12:58.109 --> 02:13:03.369
सेवा करके साथ लाई है ।

363
02:13:04.220 --> 02:13:10.569
अच्छे हैं सुना ना उमंग-उत्साह कब नहीं छोड़ना ।

364
02:13:10.569 --> 02:13:14.170
उड़ते रहना ।

365
02:13:14.170 --> 02:13:23.710
कोई भी बात आये आप उड़ जाओ बात नीचे रह जायेगी आप ऊपर हो जायेंगी ।

366
02:13:27.140 --> 02:13:34.449
अच्छा ।

367
02:13:48.220 --> 02:14:36.970
चारों ओर के दिलखुश , दिल सच्ची , दिल साफ वालों को हर संकल्प , मुराद हांसिल । इसका अर्थ है जो भी संकल्प किया उसकी सफलता प्राप्त होना ।

368
02:14:36.970 --> 02:15:01.369
तो ऐसे तीनों विशेषता , बड़ी दिल , साफ दिल और सच्ची दिल वाले , ऐसे चारों ओर के बच्चों को

369
02:15:02.050 --> 02:15:29.939
बापदादा देख पदमगुणा से भी ज्यादा खुश होते हैं और ऑटोमेटिक गीत बजता है , वाह !

370
02:15:29.939 --> 02:15:34.970
वाह मेरे बच्चे वाह !

371
02:15:36.109 --> 02:15:44.279
सदा मुबारक के पात्र बच्चे वाह !

372
02:15:47.819 --> 02:16:04.050
सदा बाप को साथी बनाके चलने वाले ,

373
02:16:05.420 --> 02:16:17.250
हाथ में हाथ मिलाके , हाथ है श्रीमत ,

374
02:16:18.340 --> 02:16:36.739
तो सदा हाथ में हाथ मिलाके उड़ने वाले , चलना तो खत्म हुआ , उड़ने वाले ,

375
02:16:43.600 --> 02:16:57.819
श्रीमत को हर कदम में ब्रह्मा बाप को फॉलो करने वाले

376
02:16:58.510 --> 02:17:13.940
और सोचो नहीं , करूं नहीं करूं , ठीक होगा , नहीं होगा , पता नहीं पसन्द आयेगा , नहीं आयेगा ।

377
02:17:15.420 --> 02:17:32.510
फॉलो करो , ब्रह्मा बाप ने क्या किया , जो बाप ने किया वह राइट है , सोचने की जरूरत नहीं ।

378
02:17:37.250 --> 02:17:40.909
फॉलो करना तो सहज है ना ।

379
02:17:40.909 --> 02:17:43.879
सोचने की क्या जरूरत ।

380
02:17:43.879 --> 02:17:46.799
फिर माथा भारी हो जाता है ।

381
02:17:46.799 --> 02:17:56.909
फिर कहते हैं आज मुझे पता नहीं क्या हुआ है , भारी भारी हो गया है ।

382
02:17:58.909 --> 02:18:07.020
क्योंकि कोई न कोई बात पर सोचने लग जाते हैं ।

383
02:18:09.770 --> 02:18:34.450
तो सभी चारों ओर के बच्चों को बापदादा के दिल की दुआयें और पदमगुणा बधाईयां हो ।

384
02:18:36.450 --> 02:19:02.620
जो शिव रात्रि पर अपनी सेवा में रहेंगे , उन्हों को अभी से शिवरात्रि आपके बर्थ डे की दुआयें और मुबारक दे रहे हैं

385
02:19:04.170 --> 02:19:29.020
और आने वाले अथवा जो पत्र ईमेल भेजते हैं उन्हों का सेकण्ड से भी कम समय में बापदादा के पास पहुंच जाता है ।

386
02:19:31.709 --> 02:19:54.510
उन्हों को भी और बापदादा की प्यासी आत्मायें , बांधेलियां जो मार को भी गले का हार बना देती हैं ,

387
02:19:56.049 --> 02:20:19.709
ऐसी आत्माओं को भी यादप्यार और नये-नये स्नेही आत्मायें जो अभी निकल रही हैं , लेकिन कम ।

388
02:20:23.020 --> 02:20:32.340
स्नेही और सहयोगी डबल होना चाहिए ।

389
02:20:35.709 --> 02:21:06.219
तो चारों ओर के सभी युवा, वृद्ध, बच्चे, मातायें, पाण्डव, सभी को इनएडवांस आपके, बाप के बर्थ डे की मुबारक हो।

390
02:21:13.309 --> 02:21:16.680
अच्छा ।

