WEBVTT

1
00:18:49.769 --> 00:19:28.279
आज होलीएस्ट बाप अपने होली बच्चों से होली मनाने आये हैं ।

2
00:19:32.799 --> 00:19:47.369
सभी बच्चे होली बच्चे हैं ।

3
00:19:49.369 --> 00:20:01.650
आप सब भी होली मनाने आये हैं ।

4
00:20:05.769 --> 00:20:44.400
सोचो आप होली आत्माओं के ऊपर कौन सा रंग लगा जो होली बन गये !

5
00:20:46.049 --> 00:21:03.369
रंग तो अनेक हैं लेकिन आपके ऊपर कौन सा रंग लगा ?

6
00:21:04.569 --> 00:21:28.279
सबसे श्रेष्ठ रंग कौन सा है जिससे आप होली बन गये ?

7
00:21:30.279 --> 00:21:49.769
सबसे बड़े ते बड़ा रंग है परमात्म संग का रंग ।

8
00:21:53.140 --> 00:22:12.849
तो परमात्म संग का रंग लगने से सहज होली बन गये

9
00:22:12.849 --> 00:22:34.220
क्योंकि परमात्म संग अविनाशी संग का रंग है

10
00:22:36.220 --> 00:22:59.940
और रंग तो थोड़े समय के लिए होता लेकिन परमात्म संग का रंग लगने से

11
00:23:03.200 --> 00:23:17.420
सहज ही होली अर्थात् पवित्र बन गये ।

12
00:23:21.019 --> 00:23:38.910
आत्मा का रंग अपवित्रता से पवित्र बन गया

13
00:23:40.509 --> 00:24:02.170
क्योंकि आप सबने परमात्मा को अपना कम्पैनियन बना लिया

14
00:24:02.170 --> 00:24:23.250
कम्पनी बना लिया इसलिए कम्बाइन्ड हो गये ।

15
00:24:25.250 --> 00:24:40.509
यह कम्बाइन्ड स्वरूप प्यारा लगता है ना !

16
00:24:44.170 --> 00:25:05.309
यह कम्बाइन्ड रूप कभी भी अलग नहीं हो सकता ।

17
00:25:05.769 --> 00:25:09.880
अनुभव है ना !

18
00:25:10.339 --> 00:25:16.400
सदा कम्बाइन्ड रहते हो ना !

19
00:25:16.400 --> 00:25:21.420
अकेले नहीं ।

20
00:25:24.970 --> 00:25:38.619
माया अकेले करने की कोशिश करती है

21
00:25:40.619 --> 00:26:00.279
लेकिन जो सदा कम्बाइन्ड रहने वाले हैं

22
00:26:00.279 --> 00:26:20.279
वह कभी भी अलग हो नहीं सकता क्योंकि माया अलग करके

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00:26:22.279 --> 00:26:37.539
फिर पुराने संस्कार को इमर्ज करती है

24
00:26:44.910 --> 00:26:56.279
और पुराने संस्कार इमर्ज हो जाते हैं

25
00:26:57.650 --> 00:27:05.769
तो शुद्ध संस्कार मर्ज हो जाते हैं ।

26
00:27:07.140 --> 00:27:24.279
पुराने संस्कार है अलबेलापन और आलस्य

27
00:27:26.279 --> 00:27:48.109
यह भिन्न-भिन्न रूप में इमर्ज होने से कम्बाइन्ड रूप अलग हो जाता है ।

28
00:27:50.109 --> 00:27:58.569
तो हर एक अपने को चेक करो

29
00:27:58.569 --> 00:28:13.650
कि सदा कम्बाइन्ड रहते हैं वा कभी अकेले भी हो जाते हैं ?

30
00:28:15.019 --> 00:28:29.880
माया के अनेक स्वरूपों को तो जान गये हो ना !

31
00:28:30.799 --> 00:28:41.539
वह चतुराई से अपना रंग लगा देती है ।

32
00:28:42.450 --> 00:28:57.650
अलग होना अर्थात् माया के रंग में रंगना ।

33
00:29:01.769 --> 00:29:19.769
यह अलबेलापन आलस्य बहुत भिन्न-भिन्न रूप से आता है ।

34
00:29:25.599 --> 00:30:44.170
उसको पहचानने के लिए माया अपने तरफ आकर्षित कर देती है और बच्चे भी यह अलबेलापन और आलस्य जो रावण का खज़ाना है यह बाप का खज़ाना नही है रावण के खज़ाने को बड़े नशे से कहते हैं कि मैं चाहता नहीं हूँ चाहती नहीं हूँ लेकिन मेरा संस्कार है।

35
00:30:45.309 --> 00:30:53.309
संस्कार मेरा कहने लगते हैं ।

36
00:30:53.309 --> 00:31:00.400
क्या यह परमात्म खज़ाना है?

37
00:31:00.400 --> 00:31:05.250
या रावण का खज़ाना है ?

38
00:31:06.400 --> 00:31:23.019
उसको मेरा संस्कार कहना सोचो राइट है ?

39
00:31:25.019 --> 00:31:39.250
मेरा बना देना यह माया की चतुराई है ।

40
00:31:42.000 --> 00:31:56.849
बाप का खज़ाना प्यारा है या यह रावण का खज़ाना प्यारा है ?

41
00:31:58.849 --> 00:32:17.880
कामन रीति से बच्चे अपने को छुडाने के लिए कह देते हैं

42
00:32:17.880 --> 00:32:26.799
मेरा संस्कार है चाहती नहीं हूँ ।

43
00:32:30.910 --> 00:32:39.819
तो सोचो क्या यह मेरा है !

44
00:32:50.109 --> 00:33:10.400
बाप कहते हैं कि रावण के खज़ाने को अपना बनाने से धीरे-धीरे

45
00:33:10.400 --> 00:33:24.049
जो शुभ संस्कार हैं वह समाप्त होते जाते हैं ।

46
00:33:29.200 --> 00:33:43.819
परमात्म संग का रंग ढीला होता जाता है

47
00:33:43.819 --> 00:33:54.849
और माया का रंग इमर्ज हो जाता है ।

48
00:34:01.200 --> 00:34:13.139
तो चलते-चलते अपने को ही चेक करना है

49
00:34:14.170 --> 00:34:24.739
कौन सा रंग चढ़ा हुआ है ?

50
00:34:29.420 --> 00:34:38.739
लोग भी होली में क्या करते हैं ?

51
00:34:39.539 --> 00:34:49.769
पहले बुराई को जलाते हैं

52
00:34:53.079 --> 00:35:01.309
फिर रंग लगाते हैं मनाते हैं ।

53
00:35:03.309 --> 00:35:20.909
तो आपके ऊपर बापदादा ने संग का रंग तो लगाया

54
00:35:20.909 --> 00:35:50.000
लेकिन साथ में ज्ञान का रंग शक्तियों का रंग गुणों का रंग वह लगाता रहता है ।

55
00:35:54.800 --> 00:36:07.650
तो सभी के ऊपर यह रूहानी रंग चढ़ा हुआ है ना !

56
00:36:07.650 --> 00:36:10.050
चढ़ा है ?

57
00:36:10.050 --> 00:36:12.280
हाथ उठाओ ।

58
00:36:12.280 --> 00:36:23.710
रूहानी रंग चढ़ गया , उतरने वाला तो नहीं है ना !

59
00:36:24.510 --> 00:36:54.969
जिसके ऊपर रूहानी रंग चढ़ गया , अविनाशी रंग चढ़ गया , उसके ऊपर और कोई रंग लग नहीं सकता ।

60
00:37:01.820 --> 00:37:11.019
इस रंग से कितने होली बन गये हो ?

61
00:37:11.019 --> 00:37:31.650
जो सारे कल्प में आप जैसा होली पवित्र और कोई बन नहीं सकता ।

62
00:37:36.679 --> 00:37:47.820
आपकी पवित्रता प्रभु के संग का रंग ,

63
00:37:48.849 --> 00:38:07.650
परमात्म कम्बाइन्ड रहने का अनुभव सबसे न्यारा और प्यारा है ।

64
00:38:10.000 --> 00:38:18.849
और जो भी होली , पवित्र बनते हैं

65
00:38:19.139 --> 00:38:30.340
तो उन्हों का शरीर पवित्र नहीं बनता , आत्मा पवित्र बनती है

66
00:38:30.340 --> 00:38:54.909
लेकिन आप ऐसे होली बनते हो , पवित्र बनते हो जो आपका शरीर और आत्मा दोनों पवित्र रहते हैं ।

67
00:38:58.170 --> 00:39:16.619
और पवित्रता को सुख , शान्ति , प्रेम , आनंद की जननी कहा जाता है ।

68
00:39:16.619 --> 00:39:38.050
जहाँ पवित्रता है वहाँ सुख शान्ति साथ में है ही है क्योंकि जहाँ जननी होती वहाँ बच्चे होते हैं

69
00:39:43.769 --> 00:39:59.420
क्योंकि बाप आके आपको ऐसा होली बनाता है

70
00:40:00.400 --> 00:40:21.650
जो आपके जड़ चित्र कलियुग के लास्ट जन्म में भी आप अपने चित्र देखते हो

71
00:40:22.170 --> 00:40:33.420
कितने विधि पूर्वक उन्हों की पूजा होती है ,

72
00:40:33.420 --> 00:40:58.679
यह पवित्रता की विशेषता है और कितने भी महान आत्मायें , धर्म आत्मायें पवित्र बने हैं लेकिन मन्दिर किसका नहीं बनता है ।

73
00:40:59.369 --> 00:41:13.539
ऐसे विधि पूर्वक पूजा किसकी भी नहीं होती है

74
00:41:15.539 --> 00:41:34.909
और लास्ट जन्म तक आपके चित्र भी दुआयें देते रहते हैं ।

75
00:41:36.909 --> 00:41:49.199
थोडे समय का सुख शान्ति अनुभव कराते हैं ।

76
00:41:50.570 --> 00:42:02.969
तो आपकी होली और दुनिया वालों की होली कितना फर्क है !

77
00:42:02.969 --> 00:42:12.340
भले मनोरंजन के लिए आप भी थोडा बहुत मनाते हो

78
00:42:12.340 --> 00:42:36.400
लेकिन सच्ची होली परमात्म संग के रंग की और कम्बाइन्ड स्वरूप की यथार्थ होली आप मनाते हो ।

79
00:42:38.400 --> 00:42:52.619
होली को लोग भी भिन्न-भिन्न रूप से मनाते हैं ,

80
00:42:54.619 --> 00:43:12.000
वैसे आप जानते हो कि होली शब्द का भी रहस्य है ,

81
00:43:13.710 --> 00:43:21.420
जो आप ही जानते हो , आप ही मनाते हो ।

82
00:43:22.219 --> 00:43:40.400
होली का अर्थ है , हो ली , बीत चुका सो बीत चुका ।

83
00:43:42.400 --> 00:44:11.820
तो आप सबने जो पुरानी जीवन , पुरानी बातें , पुराने संस्कार , पुराने व्यर्थ संकल्प को हो ली कर दी ना ।

84
00:44:11.820 --> 00:44:21.309
बीती सो बीती करना अर्थात् हो ली ।

85
00:44:21.309 --> 00:44:24.510
तो ऐसे किया है ?

86
00:44:24.510 --> 00:44:34.400
कि अभी भी कभी गलती से पुराने संस्कार आ जाते हैं ?

87
00:44:37.480 --> 00:44:50.000
जब हमारा जन्म ही नया है , आप सभी मरजीवा बने हो ना !

88
00:44:50.000 --> 00:44:52.050
बने हो ?

89
00:44:52.050 --> 00:44:55.199
मरजीवा बने हो ?

90
00:44:55.199 --> 00:44:57.880
हाथ उठाओ ।

91
00:44:57.880 --> 00:45:01.710
अच्छा ।

92
00:45:03.019 --> 00:45:06.739
नया जन्म हो गया ।

93
00:45:06.739 --> 00:45:12.110
तो पुराना जन्म कैसे याद आता ?

94
00:45:14.110 --> 00:45:19.309
पुराना , पुराना हो गया ।

95
00:45:19.309 --> 00:45:36.619
अगर बीती बातें या संकल्प , संस्कार इमर्ज होता है तो क्या कहेंगे ? होली मनाई ?

96
00:45:36.619 --> 00:45:42.800
हो ली किया नहीं ।

97
00:45:45.769 --> 00:45:57.079
परमात्म संग का रंग अच्छी तरह से लगा नहीं ।

98
00:45:57.079 --> 00:46:14.909
परमात्म संग का रंग लगना अर्थात् पुराना जन्म भूल जाना ।

99
00:46:17.880 --> 00:46:24.849
पुरानी बातें भूल जाना ।

100
00:46:27.710 --> 00:46:32.170
क्योंकि मरजीवा हो गये ना ।

101
00:46:32.969 --> 00:46:51.880
जैसे शरीर से एक जन्म छोडकर दूसरा लेते हो तो क्या पुराना जन्म याद रहता है ?

102
00:46:53.880 --> 00:47:09.250
तो आप सभी अभी ब्राह्मण जन्म धारण करने वाले हो ।

103
00:47:10.619 --> 00:47:29.650
तो पिछले जन्म के संस्कार जिसको कहते हो गलती से मेरे संस्कार हैं , आपके हैं ?

104
00:47:29.650 --> 00:47:38.110
हैं , ब्राह्मण जीवन के संस्कार हैं यह ?

105
00:47:38.110 --> 00:47:52.219
कभी अलबेलापन , कभी रॉयल आलस्य , आलस्य के बहुत भिन्न-भिन्न रूप हैं ।

106
00:47:52.219 --> 00:47:57.650
कभी इस पर क्लास करना ।

107
00:47:57.650 --> 00:48:10.219
आलस्य कितने प्रकार के हैं और कितने रॉयल रूप से आते हैं !

108
00:48:15.820 --> 00:48:34.739
तो ब्राह्मण जीवन अर्थात् नया जीवन इसमें पुराना कुछ हो नहीं सकता ।

109
00:48:37.769 --> 00:48:44.969
तो आज होली मनाने आये हो ना !

110
00:48:44.969 --> 00:49:12.739
तो होली अर्थात् हो ली तो आज होली मनाना अर्थात् पुराने संस्कार की होली जलाना ।

111
00:49:16.050 --> 00:49:22.449
जलाने के बाद ही मनाना होता है ।

112
00:49:26.000 --> 00:49:37.309
तो अभी आपके मनाने का स्वरूप है ।

113
00:49:37.309 --> 00:49:43.820
जला दिया अभी मनाना है ।

114
00:49:43.820 --> 00:49:54.619
प्रभु के संग के रंग का मजा लेने वाले हो ।

115
00:49:57.599 --> 00:50:11.539
कम्बाइन्ड रहने का अनुभव करने वाले हो क्यों ?

116
00:50:12.280 --> 00:50:32.280
होलीएस्ट बाप ने आपके ऊपर होली बनने का पवित्र बनने का रंग लगाया है ।

117
00:50:34.280 --> 00:50:41.769
तो आज कौन सी होली मना रहे हो ?

118
00:50:44.340 --> 00:51:14.340
आज विशेष कोई भी पुराने संस्कार को आने नहीं देना है यह होली मनानी है ।

119
00:51:16.739 --> 00:51:25.880
मना सकते हो या कभी-कभी आ जायेंगे ?

120
00:51:28.619 --> 00:51:43.139
यह रॉयल शब्द कि मैं करने नहीं चाहती थी चाहता था लेकिन मेरे संस्कार हैं ।

121
00:51:43.820 --> 00:52:06.510
यह शब्द आज दृढ़ संकल्प की विधि से समाप्त कर लो ।

122
00:52:08.510 --> 00:52:29.650
ऐसी होली आज सदा के लिए मनाने की हिम्मत रखते हो ?

123
00:52:29.650 --> 00:52:34.219
कि कभी-कभी मनायेंगे ?

124
00:52:34.219 --> 00:52:59.599
जो समझते हैं कि आज से पुराने संस्कार की होली हो ली बीती सो बीती जन्म नया है वह पुराना जन्म खत्म ।

125
00:53:01.019 --> 00:53:28.909
ऐसी हिम्मत रखने वाले आप बाप के मीठे-मीठे लाडले सिकीलधे बच्चे हो ना !

126
00:53:30.909 --> 00:53:48.219
तो यह संकल्प दृढ़ संकल्प नहीं यह दृढ़ संकल्प करने की हिम्मत है ?

127
00:53:51.309 --> 00:53:53.309
हाथ उठाओ ।

128
00:53:53.309 --> 00:54:01.650
देखो सभी ने हिम्मत रखी है ।

129
00:54:01.650 --> 00:54:09.940
चलो थोड़े रह भी गये लेकिन आप सब तो साथी हो ना ।

130
00:54:09.940 --> 00:54:13.599
पक्के साथी दो हाथ उठाओ ।

131
00:54:19.820 --> 00:54:24.000
यह फोटो निकालो सबका ।

132
00:54:32.800 --> 00:54:35.250
अच्छा ।

133
00:54:35.250 --> 00:54:40.739
डबल विदेशी भी उठा रहे हैं ।

134
00:54:47.250 --> 00:55:15.480
तो बापदादा आपको पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं होली को हो ली मनाने की ।

135
00:55:20.679 --> 00:55:30.800
अभी गलती से भी अपने मुख से यह शब्द नहीं निकालना ।

136
00:55:31.420 --> 00:55:43.650
मेरा संस्कार रावण के संस्कार को मेरा कहते हो कमाल है !

137
00:55:45.650 --> 00:56:04.570
रावण को दुश्मन कहा जाता है दुश्मन का खज़ाना अपना बनाना यह तो आश्चर्य की बात है !

138
00:56:09.820 --> 00:56:17.820
आपको भी आश्चर्य लग रहा है ना कि क्या कहते हैं !

139
00:56:18.679 --> 00:56:22.449
गलती से कह देते हो ।

140
00:56:22.449 --> 00:56:40.800
कह देते हैं फिर अन्दर में दिल खाती भी है महसूस भी करते हैं बाप से बातें भी करते माफी भी लेते हैं ।

141
00:56:40.800 --> 00:56:46.110
बाबा कल से नहीं करूंगी करूंगा ।

142
00:56:46.110 --> 00:56:51.079
फिर भी कर देते हैं ।

143
00:56:53.369 --> 00:56:58.219
अभी बापदादा क्या करे ?

144
00:56:58.449 --> 00:57:02.619
देखता रहे ?

145
00:57:06.800 --> 00:57:22.110
अभी इस शब्द की होली जला लो ।

146
00:57:26.340 --> 00:57:38.050
देखो जलाने में भी एक बहुत अच्छी बात बताते हैं

147
00:57:39.139 --> 00:58:06.619
कोकी को धागा बांध के पकाते हैं तो जब कोकी पक जाती है और निकालते हैं तो कोकी पक जाती लेकिन धागा नहीं जलता है ।

148
00:58:08.280 --> 00:58:21.650
यह निशानी भी आपने पहला पाठ जो पढ़ा है

149
00:58:21.650 --> 00:58:34.800
कि आत्मा अविनाशी है और शरीर विनाशी है ।

150
00:58:37.940 --> 00:58:56.619
तो बापदादा अपने यह त्योहार या शास्त्र बनाने वाले है

151
00:58:56.619 --> 00:59:13.539
तो बाप के बच्चे ही लेकिन आप हो सिकीलधे

152
00:59:14.110 --> 00:59:24.679
लेकिन बापदादा देखते हैं कि उन्हों की भी कमाल कम नहीं है ।

153
00:59:27.250 --> 00:59:37.309
आटे में नमक है लेकिन बनाया बड़ा रमणीक है ।

154
00:59:38.170 --> 00:59:48.449
हर त्योहार का आप देखो यादगार बनाया है

155
00:59:48.449 --> 01:00:01.139
लेकिन कई बातें जो सूक्ष्म है उसको स्थूल रूप दे दिया है ।

156
01:00:01.769 --> 01:00:07.139
लेकिन यादगार तो बनाया है ना !

157
01:00:08.510 --> 01:00:29.650
भक्ति में भी कम तो नहीं किया भक्ति ने द्वापर कलियुग में फिर भी कुछ न कुछ स्मृति की बातें रखी ।

158
01:00:32.570 --> 01:00:41.420
अति विकारी बनने से बचाया ।

159
01:00:42.570 --> 01:01:07.139
तो बापदादा यह सामग्री त्योहार या शास्त्र बनाने वालों को भी उनका फल देता है ।

160
01:01:09.769 --> 01:01:32.280
फिर भी भक्ति में कुछ तो याद करते हैं विकारों से थोडे टाइम के लिए बच जाते हैं ।

161
01:01:35.480 --> 01:01:43.539
तो आपने आज कौन सी होली मनाई ?

162
01:01:43.539 --> 01:01:46.219
कौन सी होली मनाई ?

163
01:01:46.219 --> 01:01:53.139
हो ली सब कहो हो ली ।

164
01:01:53.139 --> 01:01:59.019
ऐसे करो हो ली ।

165
01:02:00.170 --> 01:02:04.800
पक्का है ना !

166
01:02:19.940 --> 01:02:22.170
मनाया ?

167
01:02:22.170 --> 01:02:24.170
मनाया ?

168
01:02:24.170 --> 01:02:26.570
अच्छा ।

169
01:02:30.400 --> 01:02:48.969
फिर कल माया आयेगी क्योंकि माया भी सुन रही है लेकिन आप ऐसे नहीं करना ।

170
01:03:03.019 --> 01:03:08.000
( अपनी ओर नहीं बुलाना ) मजा है ना इसमें मजा है ना ।

171
01:03:08.000 --> 01:03:11.880
मजे में रहना ।

172
01:03:23.420 --> 01:04:00.619
बाप को याद रखना तो बाप हमें कितना रूहानी रंग डाल रहा है जिससे आप होलीहंस बन गये।

173
01:04:04.739 --> 01:04:21.769
होलीहंस अर्थात् निर्णय शक्ति वाले होली हंस।

174
01:04:23.019 --> 01:04:41.650
कोई भी काम करो ना तो एक सीट फिक्स कर लो पहले उस सीट पर सेट हो फिर निर्णय करो

175
01:04:43.019 --> 01:04:55.880
वह सीट जानते हो वह सीट है त्रिकालदर्शा की सीट ।

176
01:04:58.570 --> 01:05:18.800
पहले त्रिकालदर्शा की सीट पर सेट हो तीनों कालों को देखो सिर्फ वर्तमान नहीं

177
01:05:20.800 --> 01:05:41.599
आदि मध्य अन्त तीनों कालों को देखो तीनों काल में फायदा है या नुकसान ?

178
01:05:43.599 --> 01:05:47.139
कई बच्चे बड़े चतुर हैं ।

179
01:05:47.139 --> 01:05:51.019
चतुराई सुनाऊं ?

180
01:05:51.019 --> 01:06:13.880
क्या कहते हैं ऐसा काम को चलाना था ना इसीलिए काम चला लिया बाकी मैं समझती थी समझता हूँ करना नहीं चाहिए लेकिन कर लिया ।

181
01:06:14.679 --> 01:06:26.449
लेकिन चलो कर लिया तो कर्म का फल तो मिलेगा ना !

182
01:06:31.599 --> 01:06:39.139
तो चतुराई नहीं करना बाप को भी बहुत रिझाते हैं ।

183
01:06:39.139 --> 01:06:53.880
गलती करते हैं ना फिर बापदादा को ऐसी ऐसी बातें सुनाते हैं - बाबा आप तो रहमदिल हो ना !

184
01:06:53.880 --> 01:06:57.710
आप तो क्षमा के सागर हो ना !

185
01:06:57.710 --> 01:07:04.679
बाप को भी याद वराते हैं तो आप कौन हो !

186
01:07:06.679 --> 01:07:14.739
आपने कहा है ना मेरे को सुनाके खत्म कर दो ।

187
01:07:16.739 --> 01:07:22.909
लेकिन महसूसता से सुनाके खत्म कर लो ।

188
01:07:22.909 --> 01:07:30.449
एक अक्षर पक्का करते हो सुना तो देते हो

189
01:07:30.739 --> 01:07:49.710
लेकिन पहले दृढ़ संकल्प से स्व को परिवर्तन करके फिर सुनाओ ।

190
01:07:49.710 --> 01:07:56.170
रिझाते बहुत हैं आपने कहा है ना !

191
01:07:56.170 --> 01:08:06.110
बाप को भी याद दिलाते हैं आपने यह कहा है ना आपने यह कहा है ना ।

192
01:08:06.110 --> 01:08:10.800
बड़ी चतुराई करते हैं ।

193
01:08:16.109 --> 01:08:20.050
अभी चतुराई नहीं करना ।

194
01:08:20.050 --> 01:08:23.710
हिम्मत रखना ।

195
01:08:23.710 --> 01:08:30.220
करना ही है गे गे नहीं करना ।

196
01:08:30.739 --> 01:08:43.819
बापदादा सारे दिन में गे गे के गीत बहुत सुनते हैं ।

197
01:08:44.510 --> 01:09:02.109
करेंगे दिखायेंगे बनेंगे लेकिन स्पीड क्या ?

198
01:09:06.449 --> 01:09:18.680
गे गे वाले बाप के साथ चलेंगे ?

199
01:09:18.680 --> 01:09:32.619
बाप तो एवररेडी है और गे गे वाले एवररेडी तो नहीं हुए।

200
01:09:36.000 --> 01:09:44.510
तो बाप के साथ कैसे चलेंगे ?

201
01:09:46.510 --> 01:09:54.510
देखते रहेंगे बाप के साथ जा रहे हैं ।

202
01:10:00.680 --> 01:10:17.310
बाप को एक-एक बच्चे से पदमगुणा प्यार है ।

203
01:10:19.310 --> 01:10:36.399
बाप नहीं चाहते कि मेरे बच्चे और साथ नहीं चलें ।

204
01:10:38.399 --> 01:10:53.369
जब घर लौटने का समय आ गया है तो क्या घर नहीं चलेंगे ?

205
01:10:54.800 --> 01:11:04.449
क्योंकि घर जाके फिर राज्य में आना है ।

206
01:11:04.449 --> 01:11:23.819
घर नहीं चलेंगे साथ में तो ब्रह्मा बाप के साथ राज्य में भी नहीं आयेंगे पीछे आयेंगे ।

207
01:11:26.800 --> 01:11:30.510
तो आपका वायदा क्या है ?

208
01:11:30.510 --> 01:11:39.539
साथ चलेंगे या आ जायेंगे … इसमें भी गे गे लगायेंगे ।

209
01:11:39.539 --> 01:11:47.479
पहुंच जायेंगे देखना बाबा जरूर पहुंच जायेंगे ।

210
01:11:51.020 --> 01:11:59.770
तो यह भाषा अभी समाप्त करो ।

211
01:12:06.109 --> 01:12:26.850
आज बापदादा ने वतन में भी होली मनाई किसके साथ ?

212
01:12:28.050 --> 01:12:31.880
आप तो अभी मनायेंगे ।

213
01:12:31.880 --> 01:12:41.880
एडवांस पार्टी वालों के साथ होली मनाई ।

214
01:12:41.880 --> 01:12:49.020
एडवांस पार्टी है ना नाम ही एडवांस पार्टी है ।

215
01:12:49.020 --> 01:13:02.510
तो बापदादा ने एडवांस होली मनाई ।

216
01:13:05.420 --> 01:13:11.939
जानते हो क्या होली मनाई ?

217
01:13:17.539 --> 01:13:44.739
सभी एडवांस पार्टी वाले नये वा पुराने आजकल के गये हुए महारथियों को भी आप याद करते हो ना उन्हों को भी इमर्ज किया

218
01:13:45.420 --> 01:14:15.250
क्योंकि अभी जाने वाले जो भी हैं उन्होंने बचपन से लेके यानी काफी समय से अपना सेवा का पार्ट बजाया ।

219
01:14:19.140 --> 01:14:28.170
आप भी उन साथियों को याद तो करते हो ना !

220
01:14:28.170 --> 01:14:34.909
जगह तो भरनी पड़ती है ना ।

221
01:14:36.909 --> 01:15:14.510
तो आज वतन में मम्मा और दीदी और दादी त्रिमूर्ति को विशेष सभी के संगठन के बीच खड़ा किया

222
01:15:18.569 --> 01:15:48.569
और साथी तो थे लेकिन इन तीनों को विशेष पार्ट से खड़ा किया और इन्हों को याद दिलाया याद है भी ।

223
01:15:48.569 --> 01:15:56.970
लेकिन इन्हों को गुप्त रूप में सेवा करनी पड़ती है ।

224
01:15:56.970 --> 01:16:14.109
अमृतवेले यह भी वतन में इमर्ज होते हैं और सेवा पर जाते हैं ।

225
01:16:14.909 --> 01:16:25.310
सेवा जो विशेष आत्मायें हैं उन्होंने छोडी नहीं है ।

226
01:16:25.310 --> 01:16:43.369
वतन में अमृतवेले इन्हों का फिक्स है आना अपने असली ब्राह्मण जीवन में इमर्ज होना

227
01:16:43.369 --> 01:17:04.970
और चारों ओर कोई न कोई सेवा अर्थ मन्सा सेवा मन्सा से मन और बुद्धि द्वारा

228
01:17:04.970 --> 01:17:17.539
आत्माओं के मन और बुद्धि को आकर्षण करने की विशेष सेवा करते हैं ।

229
01:17:20.279 --> 01:17:34.220
तो बापदादा ने आज इन त्रिमूर्ति से पूछा कि आप क्या कर रहे हो ?

230
01:17:35.369 --> 01:17:45.420
बाप जानता तो है फिर भी पूछता तो है ना ।

231
01:17:45.420 --> 01:17:57.539
तो इन्होंने कहा कि हम दो प्रकार से प्रेरणा देते हैं

232
01:17:57.539 --> 01:18:14.739
एक हलचल मचाने वालों को भी और दूसरा नये सृष्टि के निमित्त बनने वालों को भी

233
01:18:18.340 --> 01:18:33.020
क्योंकि हम इन्तजार कर रहे हैं तो मम्मा ने कहा कि हमें तो बहुत टाइम हो गया है इन्तजार करते ।

234
01:18:35.880 --> 01:18:56.680
तो हमारी सखियों से पूछना कि क्या अभी तक इन्तजार कराना है या कुछ इंतजाम करना है !

235
01:19:02.569 --> 01:19:18.510
तो मम्मा की या दादी दीदी की सखियां तो बहुत बैठी हैं सखे भी बैठे हैं ।

236
01:19:19.710 --> 01:19:29.079
साथ रहने वाले भाई भी हैं बहिनें भी हैं

237
01:19:29.079 --> 01:19:48.510
तो उन्हों का प्रश्न है तो इन्तजार करना हमारा काम है आपका एडवांस स्टेज वालों का क्या पार्ट है ?

238
01:19:48.510 --> 01:20:00.050
हम तो इन्तजार कर रहे हैं आपका काम है इन्तजाम करना ।

239
01:20:00.739 --> 01:20:05.649
हमारा काम है इन्तजार करना ।

240
01:20:06.619 --> 01:20:10.739
तो कब डेट फिक्स करेंगे ?

241
01:20:10.739 --> 01:20:28.800
आप सब बाबा के बच्चे जब समान सम्पूर्ण बनेंगे तब इन्तजाम होगा ।

242
01:20:34.569 --> 01:20:57.079
तो दीदी ने कहा तो मेरी तरफ से एक प्रश्न सभी से पूछो ।

243
01:20:59.079 --> 01:21:04.739
दीदी ने क्या कहा ?

244
01:21:07.939 --> 01:21:25.479
तो आप सभी जानते भी हो कहते भी हो एवररेडी।

245
01:21:27.479 --> 01:21:38.909
तो सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने में एवररेडी हो?

246
01:21:43.020 --> 01:21:46.739
और दादी ने क्या कहा ?

247
01:21:46.739 --> 01:21:51.819
आज रूहरिहान चल रही थी ।

248
01:21:51.819 --> 01:22:04.399
दादी ने कहा तो मेरे से जब भी कोई मिलता था

249
01:22:04.399 --> 01:22:25.710
तो देखा सब कहते भी थे मेरे को तो दादी आपको तो कर्मातीत कर्मातीत बनना है यही तात लगी हुई है ।

250
01:22:25.710 --> 01:22:31.140
हम भी तो साथ में चलेंगे ना ।

251
01:22:32.510 --> 01:22:55.369
तो अभी भी मैं अपने साथियों को यही कहती हूँ कि कर्मातीत बनना ही है कब ?

252
01:22:58.340 --> 01:23:07.250
कब को अब में कब बदली करेंगे ?

253
01:23:12.109 --> 01:23:21.199
तो बाप तो मुस्कराते रहते हैं ।

254
01:23:21.880 --> 01:23:29.939
तो आज पहले इन्हों की रूहरिहान चल रही थी

255
01:23:29.939 --> 01:23:49.880
और भी सभी उन्हों को साथ देते थे मम्मा यह बहुत अच्छा कहा दीदी आप थोड़ा फोर्स भरो ना

256
01:23:51.020 --> 01:24:02.970
और दादी को कहते थे तो दादी आपने तो सभी को साथ दिया ।

257
01:24:02.970 --> 01:24:21.079
बाबा के अव्यक्त होते जो आपने पार्ट बजाया हम सभी के दिलों में दादी की यह बात याद है

258
01:24:21.079 --> 01:24:35.880
तो और साथी जो उन्हों के थे तो कहा दादी अभी आपकी बात को याद करके चलो

259
01:24:35.880 --> 01:24:44.399
बाप अव्यक्त है शिव बाबा निराकार है वह अव्यक्त फरिश्ता है ।

260
01:24:44.399 --> 01:24:57.880
लेकिन दादी तो साकार में थी अभी आपने जो सोचा था वह करके तो दिखावे ।

261
01:24:58.510 --> 01:25:05.649
दादी जैसी जिम्मेवारी तो लेके दिखावे ।

262
01:25:06.170 --> 01:25:15.140
मतलब तो आज दिल खोल के रूहरिहान कर रहे थे ।

263
01:25:17.140 --> 01:25:20.340
सुना ।

264
01:25:21.600 --> 01:25:25.649
अभी क्या करना है ?

265
01:25:25.649 --> 01:25:30.850
होली तो मनाई ना !

266
01:25:32.850 --> 01:25:43.020
कल की बातें भी गई तो अगले जन्म की बातें क्या सोचना ।

267
01:25:45.539 --> 01:25:59.939
तो सभी चिटचैट कर रहे थे ना तो बापदादा ने होली मनाना शुरू कर दी ।

268
01:26:01.939 --> 01:26:11.819
सभी सफेद डे्रस में थी और वतन में तो फरिश्ते रूप में थी ।

269
01:26:13.250 --> 01:26:23.250
तो बापदादा ने अचानक ही बताया नहीं कि होली मना रहे हैं

270
01:26:23.250 --> 01:26:32.510
लेकिन सभी अर्ध चन्द्रमा के रूप में बैठे हुए थे खड़े नहीं थे ।

271
01:26:32.510 --> 01:26:47.710
बैठे हुए थे 4-5 लाइने थी और कायदेसिर बैठे थे छोटे फिर बड़े फिर और बड़े ।

272
01:26:48.399 --> 01:26:52.850
तो बापदादा ने क्या किया ?

273
01:26:53.420 --> 01:27:10.000
अचानक ही 7 रंगों के हीरे जानते हो ना उसको पाउडर किया ।

274
01:27:10.000 --> 01:27:36.739
पाउडर के रूप में सभी के ऊपर डाला तो एक तो फरिश्ता डे्रस थी चमक रही थी और उसके ऊपर 7 रंगों के पाउडर गिराया फैल गया ।

275
01:27:36.739 --> 01:27:58.449
तो आप इमर्ज करो तो चमकते हुए डे्रस में जब 7 रंगों का पाउडर फैल गया होगा तो कैसी डे्रस लगती होगी ?

276
01:27:58.449 --> 01:28:04.800
सतयुग में भी ऐसी डे्रस नहीं मिलेगी ।

277
01:28:06.800 --> 01:28:10.909
तो सभी चमक गये ।

278
01:28:10.909 --> 01:28:24.510
और यह डे्रस चमक गई ना तो दीदी नशे में चली गई ।

279
01:28:24.510 --> 01:28:37.199
जैसे यहाँ नशे में जाती थी ना तो नशे में जाकर डांस करने लगे सभी ।

280
01:28:37.199 --> 01:28:41.479
एक दो को पकड़ करके ।

281
01:28:42.449 --> 01:29:04.050
फिर बाबा ने जो मधुबन में आप गेवर ( मिठाई ) बनाते हो ना तो वतन में गेवर इमर्ज कराये ।

282
01:29:06.050 --> 01:29:17.539
मधुबन से तो आये नहीं थे तो गेवर सभी को खिलाया ।

283
01:29:21.140 --> 01:29:32.279
तो सभी ने बहुत मौज से मनाया ।

284
01:29:33.539 --> 01:29:47.020
तो आप भी फरिश्ता डे्रस जैसे भिन्न-भिन्न डे्रस बदली करते हो ना

285
01:29:47.020 --> 01:30:06.800
वैसे बीच-बीच में सारे दिन में ऐसे फरिश्ता डे्रस बदली करके टेस्ट लो यह भी ।

286
01:30:06.800 --> 01:30:19.369
बस बापदादा इमर्ज करो 5 मिनट के लिए 10 मिनट के लिए इमर्ज करो

287
01:30:19.369 --> 01:30:33.140
मैं फरिश्ते रूप में हूँ वस्त्र बदली किया साधारण से फरिश्ते रूप की डे्रस पहनी

288
01:30:33.140 --> 01:30:55.020
और बापदादा कभी ज्ञान की कभी शक्तियों की कभी गुणों का रंग डाल रहे हैं ।

289
01:30:56.449 --> 01:31:09.710
फरिश्ता ड्रेस में फरिश्ता बनके 5-10 मिनट अनुभव करो फिर वस्त्र बदली कर दो ।

290
01:31:09.710 --> 01:31:13.600
कर्मयोगी हैं ना ।

291
01:31:13.600 --> 01:31:26.850
तो यह दिन में जब भी टाइम मिले फरिश्ते की ड्रेस पहन लो ।

292
01:31:27.819 --> 01:31:49.199
और बाप द्वारा यह रंग लग रहे हैं यह अनुभव अभी से प्रैक्टिस करेंगे ना फरिश्ता डे्रस की ।

293
01:31:49.199 --> 01:32:03.819
तो डे्रस पहनने से नशा चढ़ेगा और मदद मिलेगी फरिश्ता बनने में ।

294
01:32:05.819 --> 01:32:23.600
तो होली की यह सौगात बापदादा चारों ओर के बच्चों को दे रहे हैं ।

295
01:32:25.199 --> 01:32:31.819
ड्रेस पहनते ट्रायल करते रहना भूलना नहीं ।

296
01:32:31.819 --> 01:32:41.819
फरिश्ता ड्रेस होली की सौगात दे रहे हैं ।

297
01:32:43.819 --> 01:32:50.800
तो बीच-बीच में यह अभ्यास करना ।

298
01:32:50.800 --> 01:32:53.140
सहज है ना !

299
01:32:53.140 --> 01:32:56.970
ड्रेस बदलना तो आता है ना ।

300
01:32:56.970 --> 01:32:58.970
आता है ?

301
01:32:58.970 --> 01:33:02.449
आता है ना !

302
01:33:02.449 --> 01:33:10.619
जैसे यह ड्रेस बदलते हो ना रोज़ बदलते हो ना ।

303
01:33:11.140 --> 01:33:18.449
तो फरिश्ता ड्रेस भी बदलके देखो ।

304
01:33:20.449 --> 01:33:29.250
कितनी सुन्दर कितनी चमकती हुई है ।

305
01:33:33.770 --> 01:33:35.939
सुना ।

306
01:33:35.939 --> 01:33:40.000
आज वतन का समाचार सुनाया ।

307
01:33:40.000 --> 01:33:46.000
आप सब भी याद करते हो ना !

308
01:33:46.000 --> 01:34:05.880
एडवांस पार्टी के अपने सभी क्योंकि कोई न कोई स्थान से भिन्न-भिन्न गये हुए हैं ।

309
01:34:11.770 --> 01:34:19.250
तो गये हुए को याद तो करते हो ना !

310
01:34:31.020 --> 01:34:47.420
बापदादा भी अमृतवेले विशेष एडवांस पार्टी से सेवा कराते हैं

311
01:34:49.420 --> 01:35:05.020
क्योंकि सारी दुनिया तो सोई हुई होती है और यह डे्रस बदलके वतन में आ जाते हैं ।

312
01:35:13.140 --> 01:35:16.220
सुना ।

313
01:35:16.220 --> 01:35:21.819
अभी क्या करेंगे ?

314
01:35:25.310 --> 01:35:28.680
यह ड्रिल भूलना नहीं ।

315
01:35:28.680 --> 01:35:41.770
वस्त्र बदली करना दिन में जितना बार फरिश्ता डे्रस में बैठ सको

316
01:35:42.109 --> 01:36:04.569
चाहे 3 मिनट बैठो लेकिन बैठो जरूर बदली करो जरूर अभी से संस्कार डालो फरिश्ता बनने के बिना देवता बन नहीं सकते ।

317
01:36:12.680 --> 01:36:16.680
अच्छा ।

318
01:36:42.680 --> 01:37:04.170
पहले सभी चारों ओर के बच्चों को भी बापदादा देख रहे हैं

319
01:37:04.170 --> 01:37:31.199
कि दूर बैठे भी साइंस के साधन द्वारा मैजारिटी स्थानों में सेन्टर्स पर वह भी बापदादा को देखते रहते हैं

320
01:37:31.199 --> 01:37:39.600
आप टोली खाते हो ना तो वह भी टोली बांटते हैं ।

321
01:37:42.279 --> 01:37:50.449
तो सभी को बापदादा भी देख रहे हैं

322
01:37:50.449 --> 01:38:00.619
कि कैसे दूर बैठे नजदीक का अनुभव कर रहे हैं ।

323
01:38:00.619 --> 01:38:28.510
तो चारों ओर के बच्चों को जो सदा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना है

324
01:38:28.510 --> 01:38:54.000
इस संकल्प को धारण किया हुआ है और दृढ़ता का बल समय प्रति समय इस संकल्प को देते रहते हैं

325
01:38:54.000 --> 01:39:46.850
ऐसे चारों ओर के शुभ संकल्प धारण करने वाले साथ-साथ बाप की आशाओं को पूर्ण करने वाले आशाओं के सितारे साथ-साथ दादी के बोल कर्मातीत होना ही है

326
01:39:47.939 --> 01:39:54.970
होना ही है होना ही है …

327
01:39:54.970 --> 01:40:21.710
और मम्मा के यह बोल कि सदा जो करना है सो आज करो कल पर नहीं छोडो

328
01:40:24.909 --> 01:40:54.220
और दीदी के यह बोल अब घर चलना है यह कानों में गूंजना चाहिए ।

329
01:40:55.140 --> 01:41:03.710
बार-बार अब घर चलना है ।

330
01:41:07.770 --> 01:41:22.739
तो धुन लगा दो - कर्मातीत होना है अब घर चलना है ।

331
01:41:29.539 --> 01:43:07.140
यह बोल बार-बार स्मृति में लाने वाले समर्थ आत्माओं को बापदादा का होली बच्चों को होली की मुबारक हो और साथ में सभी को बापदादा पहले ही मधुबन के गेवर के पहले सभी मुख खोलो और गेवर खाओ खाया तो सभी को बहुत-बहुत पदमगुणा बापदादा और एडवांस पार्टी के सर्व बच्चों का यादप्यार और बाप की नमस्ते।

332
01:43:22.279 --> 01:43:49.600
यू पी बनारस और पश्चिम नेपाल की सेवा का टर्न है :- यू पी के साथ , मोहिनी बहन उठो ।

333
01:44:09.539 --> 01:44:26.510
अच्छा है , यू पी में विशेषता क्या है ?

334
01:44:27.140 --> 01:44:44.970
जब आदि में सेन्टर खुले तो यू पी का सेन्टर विशेष था ।

335
01:44:46.000 --> 01:45:07.310
बापदादा मम्मा पहले पहले यू पी के सेन्टर पर रहे हैं ।

336
01:45:10.680 --> 01:45:22.279
और यू पी में ज्ञान नदियों का भी सम्मेलन है ।

337
01:45:25.770 --> 01:45:49.310
बड़े में बड़ी गंगा नदी , जमुना दिल्ली में है और यू पी में गंगा नदी है , गंगा नदी का गायन क्या है ?

338
01:45:49.310 --> 01:45:53.880
पतित पावनी ।

339
01:45:55.420 --> 01:46:21.479
तो यू पी वालों को सदा यही लगन होगी पतित पावनी बन , पतित आत्माओं को कुछ न कुछ अंचली देने की ।

340
01:46:23.479 --> 01:46:30.220
अभी यू पी में सेन्टर बढ़ रहे हैं ना ।

341
01:46:30.220 --> 01:46:33.539
बढ़े हैं ?

342
01:46:34.109 --> 01:46:39.710
आदि में तो रौनक रही है ।

343
01:46:42.050 --> 01:46:54.109
समर्पण युगल यू पी से आरम्भ हुए ।

344
01:47:02.680 --> 01:47:15.140
तो अभी भी यू पी कोई नया कार्य करके दिखाओ ।

345
01:47:15.600 --> 01:47:38.510
यह फंक्शन , यह सम्मेलन यह तो होंगे , होते रहेंगे लेकिन कोई नया कुछ करके दिखाओ ।

346
01:47:46.680 --> 01:47:57.020
सभी जोन सोचते हैं कुछ करके दिखायें ।

347
01:47:57.020 --> 01:48:02.970
दिल्ली वाले भी सोच रहे हैं ना !

348
01:48:06.680 --> 01:48:09.939
अच्छा है ।

349
01:48:10.850 --> 01:48:32.279
कुछ न कुछ करते रहो , जो ब्राह्मण संसार में कोई न कोई खबर छपती रहे , आपकी भी तो अखबारे हैं ना ।

350
01:48:32.279 --> 01:48:41.880
तो कोई नया समाचार अखबारों में आना चाहिए ।

351
01:48:46.340 --> 01:48:55.770
बाकी यज्ञ सेवा में यू पी भी कम नहीं है ।

352
01:48:55.770 --> 01:48:59.479
अच्छी संख्या आई है ।

353
01:48:59.479 --> 01:49:04.970
बापदादा खुश है ।

354
01:49:06.970 --> 01:49:16.399
टीचर्स भी काफी हैं लेकिन कौन सी टीचर्स ?

355
01:49:17.880 --> 01:49:51.369
बापदादा का जानती हो कि ऐसी टीचर्स जो अपने फीचर्स चलन और चेहरे से सभी को फ्युचर दिखाये ।

356
01:49:51.369 --> 01:49:56.739
अभी का फ्यूचर क्या है ? फरिश्ता ।

357
01:49:56.739 --> 01:50:03.710
भविष्य का फ्युचर देवता ।

358
01:50:04.279 --> 01:50:18.800
तो हर एक टीचर अभी का फ्युचर जो फरिश्ता है ,

359
01:50:19.369 --> 01:50:24.850
चलो देवता तो भविष्य में बनेंगे

360
01:50:24.850 --> 01:50:38.109
लेकिन जो लास्ट घड़ी का स्वरूप है फरिश्ता ,

361
01:50:38.109 --> 01:50:54.170
वह फीचर्स अर्थात् चलन और चेहरे से स्पष्ट दिखाई दे ।

362
01:50:56.909 --> 01:51:25.539
जैसे शुरू-शुरू में जब आप सेवा में गये , 14 वर्ष तपस्या और बापदादा माँ की पालना का साथ लिया ,

363
01:51:25.539 --> 01:52:00.510
तो पहले शुरू में जब सेवा में गये तो आप कोई कोई सेवाधारी आत्माओं का जिज्ञासु को कभी लाइट का ताज और कभी मस्तक में चमकता हुआ बिन्दू ,

364
01:52:00.510 --> 01:52:19.600
यह दिखाई देता था और परखने की शक्ति आप में बहुत तीव्र थी ,

365
01:52:19.600 --> 01:52:31.020
कोई भी आसुरी स्वभाव वाला आता था क्योंकि कुमारियां नाम था ना

366
01:52:31.020 --> 01:53:03.649
लेकिन उसकी चाल नहीं चलती थी इतनी ताकत थी जो वह स्वयं पांव पर गिरकर कहते थे कि हमने क्या सोचा और आप कौन हो !

367
01:53:06.000 --> 01:53:24.739
यह पवित्रता का जो चमत्कार था वह प्रत्यक्ष चलन में स्वप्न तक था ।

368
01:53:24.739 --> 01:53:41.539
अपवित्रता का स्वप्न मात्र भी नहीं था था है नहीं कहते हैं था ।

369
01:53:44.170 --> 01:54:20.050
अब फिर से अपने साथियों में यह लाइट माइट की दृढ़ता लाते रहो ।

370
01:54:29.310 --> 01:54:31.819
इजी नहीं ।

371
01:54:31.819 --> 01:55:07.710
समझते तो हो सभी टीचर्स निमित्त हो ना बाबा की तरफ से और बापदादा को टीचर्स छोटी चाहे बड़ी उनके लिए दिल में बहुत प्यार है

372
01:55:08.510 --> 01:55:22.680
क्योंकि बाप के कार्य में सहयोगी हो ।

373
01:55:22.680 --> 01:55:28.619
निमित्त हो सहयोगी हो ।

374
01:55:30.619 --> 01:55:49.479
चारों ओर सभी स्टूडेन्ट के सामने साकार रूप में आप टीचर्स हो ।

375
01:55:51.020 --> 01:56:04.850
अव्यक्त रूप में बापदादा है और एडवांस पार्टी भी आपको सकाश देती रहती है

376
01:56:04.850 --> 01:56:19.310
जब अमृतवेले वतन में आते हैं तो सखियों को भी याद करती है सेन्टर्स को भी याद करती है ।

377
01:56:23.250 --> 01:56:40.569
तो यू.पी. सबसे नम्बरवन बनना है बन रहे हैं।

378
01:56:44.619 --> 01:56:49.420
कमाल करेंगे ।

379
01:56:52.850 --> 01:56:58.109
करनी ही है ।

380
01:57:10.109 --> 01:57:58.510
स्पार्क और साइंस इंजीनियर विंग की मीटिंग है :- अच्छा मीटिंग्स तो आप लोग करते रहते हो

381
01:57:59.479 --> 01:58:12.800
और अच्छा उमंग उत्साह से करते हो यह बापदादा देखता और सुनता भी रहता है ।

382
01:58:13.199 --> 01:58:19.600
धारणा के प्लैन भी बनाते रहते हो ।

383
01:58:19.600 --> 01:58:25.079
बापदादा ने समाचार सुना ।

384
01:58:25.310 --> 01:58:44.850
सभी अपनी स्व उन्नति और सेवा के प्लैन नये नये भी बनाते रहते हो ।

385
01:58:46.050 --> 01:59:05.539
अभी यही लक्ष्य रखना है कि दुनिया वालों को अभी दिलासा देने की आवश्यकता है ।

386
01:59:05.539 --> 01:59:16.619
वह बिचारे सरकमस्टांश को देख भयभीत हो रहे हैं ।

387
01:59:16.619 --> 01:59:21.600
डर फैल रहा है ।

388
01:59:21.600 --> 01:59:35.939
तो ऐसे समय पर आपको विशेष तो सारी आत्मायें आपकी हैं

389
01:59:35.939 --> 01:59:46.170
लेकिन विशेष आप अपने वर्ग को दिलासा दिलाओ

390
01:59:46.170 --> 02:00:08.050
कि आप अगर मेडीटेशन का कोर्स करेंगे तो आपका यह डर वा टेन्शन समाप्त हो जायेगा

391
02:00:08.050 --> 02:00:32.449
और ज्ञान नहीं दो पहले लेकिन मेडीटेशन करो और कराओ उसका निमन्त्रण दो टेन्शन फ्री लाइफ का अनुभव करने का प्रोग्राम ज्यादा करो ।

392
02:00:32.449 --> 02:00:45.079
करते हो लेकिन अभी ज्यादा करो उन्हों को आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव कराओ ।

393
02:00:45.079 --> 02:00:56.340
सिर्फ भाषण नहीं लेकिन अनुभव कराओ भले छोटे छोटे ग्रुप को कराओ ।

394
02:00:56.340 --> 02:01:01.420
बड़े ग्रुप को कराओ लेकिन अनुभव कराओ ।

395
02:01:01.420 --> 02:01:08.909
अनुभव वाला व्यक्ति कभी रह नहीं सकता ।

396
02:01:08.909 --> 02:01:17.420
और अनुभव की अथॉरिटी नम्बरवन है।

397
02:01:18.680 --> 02:01:26.449
अनुभव वाला किसी के बहकावे में नहीं आ सकता ।

398
02:01:27.369 --> 02:01:41.710
समस्या में घबरा नहीं सकता क्योंकि मेडीटेशन से शक्ति अनुभव होती है ।

399
02:01:42.449 --> 02:01:52.619
तो मेडीटेशन की टैम्पटेशन ज्यादा अनुभव कराओ ।

400
02:01:55.369 --> 02:01:59.600
बाकी प्रोग्राम तो करते रहते हो ।

401
02:01:59.600 --> 02:02:09.420
वह तो चलते रहेंगे और चलाओ लेकिन यह विशेष ध्यान दो ।

402
02:02:11.420 --> 02:02:26.850
कोई भी आता है कोर्स करता है लेकिन कोर्स के बीच में अनुभव किया या सिर्फ नॉलेज ली ।

403
02:02:30.050 --> 02:02:33.140
अनुभव जरूर कराओ ।

404
02:02:33.140 --> 02:02:52.340
किसी भी बात का चाहे ज्ञान के हिसाब से परमात्म ज्ञान है यह अनुभव हो योग द्वारा अपने में शक्तियों की अनुभूति हो

405
02:02:52.340 --> 02:03:03.420
हिम्मत आवे कोई भी बात की समस्याओं को हल करने की हिम्मत आवे

406
02:03:03.420 --> 02:03:14.569
और धारणा की हिम्मत आवे नहीं तो धारणा सुन करके घबरा जाता है ।

407
02:03:15.369 --> 02:03:32.619
पहले प्राप्ति सुनाओ प्राप्ति क्या होती है प्राप्तियों की आकर्षण से सभी शुरू कर देते हैं ।

408
02:03:35.539 --> 02:03:53.770
परमात्मा का परिचय भी देते हो तो पहले प्राप्तियां क्या होती है वह सुनाओ तो प्राप्तियों के आधार से आकर्षित होते हैं ।

409
02:03:56.739 --> 02:04:18.399
क्या मिलेगा क्या बनेगा कैसे समस्यायें आपके लिए सहज हो जायेंगी ऐसी ऐसी अनुभव की बातें सुनाओ ।

410
02:04:21.199 --> 02:04:34.220
बाकी आपस में मिलते हो बापदादा के पास रिपोर्ट आती है बापदादा खुश है

411
02:04:34.220 --> 02:04:46.340
कि यह भी संगठन में मेल होता है ब्राह्मणों को भी रिफ्रेशमेंट मिलती है ।

412
02:04:46.340 --> 02:04:54.909
मिलते हैं ना आपस में कुछ न कुछ राय तो देते ही हैं ।

413
02:04:56.909 --> 02:05:08.279
तो दोनों वर्ग अच्छा कर रहे हो और आगे भी करते रहेंगे ।

414
02:05:08.279 --> 02:05:14.909
यह बापदादा को खुशी है ।

415
02:05:16.909 --> 02:05:21.199
अच्छा ।

416
02:05:29.420 --> 02:06:17.479
डबल विदेशी भाई बहिनें 80 देशों से आये हैं :- इस बारी जो डबल फारेनर्स ने भिन्न भिन्न प्रोग्राम बनाये हैं

417
02:06:17.479 --> 02:06:29.479
युगलों का टीचर्स का … युगल हाथ उठाओ जो युगल आये हैं ।

418
02:06:35.770 --> 02:06:45.880
बापदादा ने देखा युगल तैयार तो अच्छे हो गये हैं ।

419
02:06:45.880 --> 02:06:54.909
लेकिन बाबा की जो आशा है उसको पूर्ण नहीं किया है ।

420
02:06:56.909 --> 02:07:00.340
कौन सी आशा है ?

421
02:07:00.340 --> 02:07:21.880
कोई महामण्डलेश्वर को चरणों में झुकाओ क्योंकि आप लोग सहज उनको फेल कर सकते हो ।

422
02:07:22.449 --> 02:07:31.479
आप कहते हो हो नहीं सकता और हमने सहज किया है ।

423
02:07:31.479 --> 02:07:44.109
अपने अनुभव की अथॉरिटी से उन्हों को झुका सकते हो तभी गीता का भगवान भी सिद्ध होगा ।

424
02:07:45.310 --> 02:07:58.399
युगलों में यह ताकत है वह जब ढीले हो जायेंगे ना फिर सब बातें मानने लगेंगे ।

425
02:07:59.140 --> 02:08:07.819
तो बापदादा को अच्छा लगता है युगल बहुत कमाल कर सकते हैं क्यों ?

426
02:08:07.819 --> 02:08:25.250
अभी भी किया है जब से युगल-युगल चलते रहते हो पुराने भी हो गये हो

427
02:08:25.250 --> 02:08:34.800
तो यह देख करके सुन करके कितनी संख्या बढ़ गई है ।

428
02:08:35.600 --> 02:08:53.420
एक काम तो किया है उमंग उत्साह लोगों में बढ़ाया है कि हम भी कर सकते हैं छोड़ना नहीं पड़ेगा डरते हैं ना छोडने से ।

429
02:08:53.420 --> 02:09:00.279
लेकिन आपने छोडा नहीं बनाया है ।

430
02:09:02.279 --> 02:09:06.340
कुछ छोडा है ?

431
02:09:06.340 --> 02:09:21.310
सफेद ड्रेस पहनी रंगीन पहनने की मना नहीं है लेकिन स्कूल की भी तो ड्रेस होती है ना ।

432
02:09:22.739 --> 02:09:27.310
बाकी तो कोई मना नहीं है ।

433
02:09:29.710 --> 02:09:37.140
तो युगल बहुत कमाल चैलेन्ज कर सकते हैं ।

434
02:09:38.220 --> 02:09:42.279
ऐसा प्रोग्राम बनाओ ।

435
02:09:42.680 --> 02:09:49.140
देखें कौन से युगल तैयार होते हैं ।

436
02:09:49.539 --> 02:10:07.140
पहले तो ट्रायल करो कोई ऐसा कनेक्शन वाला हो उससे ट्रॉयल करके देखो ।

437
02:10:07.140 --> 02:10:14.909
फिर एक ढीला हुआ तो और भी बन जायेंगे ।

438
02:10:17.649 --> 02:10:27.079
तो अच्छा लगता है बापदादा को युगलों का सम्मेलन अच्छा लगता है ।

439
02:10:42.000 --> 02:10:45.539
अच्छा

440
02:10:46.510 --> 02:11:42.619
अभी फारेन की टे्रानिंग वाली टीचर्स उठो :- अच्छा टीचर्स समझती हो कि टे्रानिंग मिलना अच्छा है ?

441
02:11:43.199 --> 02:11:55.079
जो समझते हैं कि यह जरूरी है अच्छा है वह ऐसे हाथ उठाओ ।

442
02:12:02.680 --> 02:12:08.970
तो मुबारक है निमित्त टीचर्स को ।

443
02:12:08.970 --> 02:12:26.449
क्योकि मेहनत अच्छी की है और डायरेक्ट सेवा यह करेंगी और पुण्य आप निमित्त वालों को मिल जायेगा ।

444
02:12:28.449 --> 02:12:43.250
यह अच्छा है नई नई टीचर्स बनती जाती हैं यह भी ड्रामा में पार्ट है ।

445
02:12:43.250 --> 02:12:53.420
फारेन में देखो कितने नये नये सेन्टर्स खुलते रहते हैं

446
02:12:53.420 --> 02:13:16.739
तो बहुत खुशी की बात है कि टे्रानिंग लेके आप जो आने वाले हैं उन्हों को भी जल्दी से जल्दी उड़ाने के निमित्त बनेंगे ।

447
02:13:16.739 --> 02:13:31.310
बापदादा सभी फारेनर्स को एक तो मुबारक देते ही हैं

448
02:13:31.310 --> 02:13:45.479
कि जॉब भी करते और सेन्टर भी सम्भालते सब ताली बजाओ ।

449
02:14:05.710 --> 02:14:22.909
वैसे टीचर बनके सेन्टर चलाना यह भी बहुत बड़ा भाग्य है

450
02:14:23.770 --> 02:14:47.819
कॉमन चीज़ नहीं है क्योंकि टीचर बनना अर्थात् वर्तमान बाप की गद्दी के मालिक बनना वह है मुरली सुनाना ।

451
02:14:47.819 --> 02:14:56.510
मुरली द्वारा आत्माओं को रिफ्रेश करना ।

452
02:14:58.510 --> 02:15:19.880
बापदादा टीचर्स को गुरूभाई कहते हैं क्योंकि मुरली सुनाने के तख्त के अधिकारी बनते हो ।

453
02:15:19.880 --> 02:15:23.199
निमित्त बनते हो ।

454
02:15:23.199 --> 02:15:28.970
फायदा भी है और कायदा भी है ।

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02:15:28.970 --> 02:15:32.970
दोनों है ।

456
02:15:34.970 --> 02:15:53.420
लेकिन बापदादा खुश है कि आप अपने रूचि से टाइम निकालके आये हो ।

457
02:15:53.420 --> 02:16:03.479
टे्रानिंग करना यह बापदादा को बहुत पसन्द आता है ।

458
02:16:09.539 --> 02:16:22.449
तो बहुत अच्छा किया जो इतने सबने टे्रानिंग किया ।

459
02:16:23.140 --> 02:16:36.399
निमित्त हो और निमित्त का फल बहुत बड़ा पुण्य का खाता जमा होना है ।

460
02:16:36.399 --> 02:16:44.739
निमित्त भाव नहीं छोड़ना मैं नहीं लाना ।

461
02:16:44.739 --> 02:16:51.649
मैं यह सांप है काला सांप ।

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02:16:51.649 --> 02:16:55.879
हप कर लेता है ।

463
02:16:57.020 --> 02:17:11.770
निमित्त हूँ करावनहार करा रहा है चलाने वाला चला रहा है ।

464
02:17:12.850 --> 02:17:15.879
और कम्बाइन्ड रहना ।

465
02:17:15.879 --> 02:17:18.850
अकेले नहीं बनना ।

466
02:17:18.850 --> 02:17:26.909
अकेले बने माया को दरवाजा खोला ।

467
02:17:29.479 --> 02:17:36.049
बापदादा खुश है मुबारक दे रहे हैं ।

468
02:17:36.049 --> 02:17:41.309
अच्छा ।

469
02:18:00.850 --> 02:18:15.020
सभी फारेनर्स कुछ न कुछ हर साल करते रहो ।

470
02:18:18.569 --> 02:18:20.909
अच्छा है ।

471
02:18:20.909 --> 02:18:25.250
सर्विस के प्लैन भी बनाते रहते हैं ।

472
02:18:25.250 --> 02:18:35.540
एक दो को उमंग उत्साह बढ़ाते रहना यह सबसे बड़ी सेवा है ।

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02:18:37.770 --> 02:19:02.510
बापदादा ने देखा कि निमित्त टीचर्स जिन्होंने टे्रानिंग कराया वह उठो ।

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02:19:14.049 --> 02:19:17.200
यह भी अच्छा ।

475
02:19:17.200 --> 02:19:25.540
( चारले भाई से ) भाई सबमें चांस लेते हैं यह बहुत अच्छा ।

476
02:19:27.540 --> 02:19:37.309
बापदादा आपके सेवा की रिजल्ट देख करके खुश है ।

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02:19:37.309 --> 02:19:50.110
सभी की सूरत से उमंग उत्साह लग रहा है यह बहुत अच्छा है ।

478
02:19:53.139 --> 02:19:57.079
अच्छा ।

479
02:20:02.110 --> 02:20:19.940
अभी सभी को होली की सौगात क्या देनी है वह याद है ?

480
02:20:19.940 --> 02:20:24.340
याद है ना !

481
02:20:33.200 --> 02:20:45.819
बापदादा का एक एक बच्चे से स्पेशल प्यार है

482
02:20:45.819 --> 02:21:11.370
ऐसे नहीं कि सिर्फ निमित्त बनने वालों से लेकिन एक-एक बच्चा कोटों में कोई तो है ही लास्ट नम्बर भी कोटो में कोई है ।

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02:21:11.940 --> 02:21:20.170
तो जो कोटो में कोई है वह तो महान हो गया ना ।

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02:21:20.620 --> 02:21:44.170
लेकिन कैसा भी कोई हो लास्ट हो उसके प्रति भी सदा उसको आगे बढ़ाने के लिए

485
02:21:45.479 --> 02:22:08.510
एक तो एक दो को स्वमान की दृष्टि से देखो हर एक का स्वमान है लास्ट नम्बर का भी स्वमान है कोटो में कोई है ।

486
02:22:08.510 --> 02:22:13.540
प्रेजीडेंट से तो अच्छा है ।

487
02:22:15.540 --> 02:22:22.569
पहचाना तो है मेरा बाबा तो कहता है ।

488
02:22:25.370 --> 02:22:34.909
तो स्वमान में रहो और सम्मान दो ।

489
02:22:35.940 --> 02:22:49.079
एकता लास्ट नम्बर भी एक बाबा का बच्चा है ।

490
02:22:50.569 --> 02:22:59.200
बाबा को सामने लाओ उसकी गलती को सामने नहीं लाओ ।

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02:22:59.200 --> 02:23:26.909
परिवार का है उसमें उमंग लाओ उत्साह लाओ चलो गलतियां भी करते हैं बापदादा को मालूम है क्या क्या गलतियां करते हैं वह छिपती नहीं हैं

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02:23:30.569 --> 02:23:50.569
लेकिन हर एक अपने आपसे पूछे मैं ब्रह्माकुमारी ब्रह्माकुमार बना क्यों लक्ष्य क्या ?

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02:23:52.569 --> 02:24:08.280
जो लक्ष्य रखके आये सिर्फ अपने को बचाने का नहीं दालरोटी मिल रही है संगठन अच्छा है

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02:24:08.280 --> 02:24:22.280
ब्राह्मण जीवन में खिटराग से सेफ हो गये … इस लक्ष्य से नहीं आये ।

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02:24:24.280 --> 02:24:44.170
लक्ष्य बहुत अच्छा ले आये लेकिन अभी कहाँ कहाँ लक्ष्य और लक्षण में अन्तर आ गया है ।

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बापदादा को सब पता है सिर्फ नाम नहीं लेते कभी वह भी समय आयेगा ।

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02:25:02.110 --> 02:25:18.280
जो करता है बापदादा ने देखा कि मैजारिटी संगदोष में बहुत आते हैं ।

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02:25:19.879 --> 02:25:40.969
दिल भी खाती है करना नहीं चाहिए लेकिन संग का रंग बाप के संग का रंग कम लगा है इसीलिए वह रंग लग जाता है ।

499
02:25:40.969 --> 02:26:16.569
बापदादा फिर भी सभी बच्चों को प्यार देकर कहते हैं कि अपना वर्तमान और भविष्य निर्विघ्न बनाओ ।

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02:26:19.479 --> 02:26:23.479
संगदोष में नहीं आओ ।

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02:26:23.479 --> 02:26:41.770
संगदोष में आ जाते हैं टैम्पटेशन है संगदोष में नहीं आओ ।

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02:26:42.909 --> 02:26:54.510
हद की प्राप्तियों के आकर्षण में नहीं आओ

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02:26:54.510 --> 02:27:15.819
क्योंकि बापदादा को तरस पड़ता है कि कहता है मेरा बाबा कहता है मेरा बाबा और करता क्या है ?

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02:27:16.969 --> 02:27:33.649
इसलिए आज होली का दिन है ऐसी ऐसी बातें समझदार बनके जला दो ।

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02:27:40.850 --> 02:27:59.020
फिर भी टूलेट के बोर्ड से आगे बदल जाओ बापदादा मदद करेगा लेकिन सच्ची दिल को ।

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02:28:01.020 --> 02:28:12.049
साफ दिल मुराद हांसिल करके देखो दिल से ।

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02:28:12.049 --> 02:28:20.969
सच्ची दिल और मुराद हांसिल नहीं हो हो नहीं सकता ।

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02:28:23.709 --> 02:28:32.850
होली में रंग लगाते हैं ना उल्टा सुल्टा भी लगा देते हैं ।

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02:28:36.280 --> 02:28:48.340
तो आज होली मनाओ उल्टे रंग को बाप के रंग में रंग लो ।

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02:28:51.819 --> 02:28:55.020
अच्छा ।

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आज होली है ना तो बापदादा ने भी कह दिया है तरस पड़ता है ।

512
02:29:15.479 --> 02:29:22.799
अच्छा - ओम् शान्ति ।

