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00:20:03.819 --> 00:20:59.369
आज चारों ओर के सर्व खज़ाने जमा करने वाले सम्पन्न बच्चों को देख रहे हैं ।

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00:21:08.220 --> 00:21:54.740
साथ-साथ हर एक बच्चे ने कहाँ तक सर्व खज़ाने जमा किया है उसकी रिजल्ट देख रहे थे ।

3
00:22:04.339 --> 00:22:29.599
खज़ाने तो बापदादा द्वारा बहुत अविनाशी प्राप्त हुए हैं ।

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00:22:34.109 --> 00:23:19.940
सबसे पहले बड़े ते बड़ा खज़ाना है ज्ञान धन जिससे मुक्ति और जीवनमुक्ति की प्राप्ति हुई है ।

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00:23:23.599 --> 00:24:21.710
पुरानी देह और पुरानी दुनिया से मुक्त जीवनमुक्त स्थिति और मुक्तिधाम में जाने की सभी बच्चों को प्राप्त है ।

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00:24:24.049 --> 00:24:44.619
साथ में एक ज्ञान का खज़ाना नहीं लेकिन योग का भी खज़ाना है

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00:24:45.880 --> 00:24:58.220
जिससे सर्व शक्तियों की प्राप्ति होती है ।

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00:25:00.400 --> 00:25:24.680
साथ-साथ धारणा करने का खज़ाना जिससे सर्व गुणों की प्राप्ति होती है ।

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00:25:28.109 --> 00:25:59.369
साथ साथ सेवा का खज़ाना जिससे दुआओं का खज़ाना खुशी का खज़ाना प्राप्त होता है ।

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00:26:03.710 --> 00:26:34.450
साथ-साथ सबसे बड़े ते बड़ा खज़ाना वर्तमान संगमयुग का है समय का है

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00:26:38.450 --> 00:27:01.769
क्योंकि सारे कल्प में यह संगम का समय अमूल्य खज़ाना है ।

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00:27:03.769 --> 00:27:32.279
इस संगम के समय का एक एक संकल्प वा एक एक घड़ी बहुत अमूल्य है

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00:27:37.539 --> 00:28:01.539
क्योंकि संगम समय पर ही बापदादा और बच्चों का मधुर मिलन होता है

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00:28:03.539 --> 00:28:22.279
और कोई भी युग में परमात्म बाप और परमात्म बच्चों का मिलन नहीं होता ।

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00:28:23.940 --> 00:28:46.000
साथ-साथ संगम समय ही है जिसमें बापदादा द्वारा सर्व खज़ाने प्राप्त होते हैं ।

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00:28:47.250 --> 00:29:02.569
खज़ाना जमा होने का समय संगमयुग ही है

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00:29:05.369 --> 00:29:24.910
और कोई भी युग में जमा का खाता जमा करने की बैंक ही नहीं है ।

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00:29:26.910 --> 00:29:50.000
सिर्फ एक संगमयुग है जिसमें जितना खज़ाने जमा करने चाहो उतना कर सकते हो

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00:29:54.220 --> 00:30:10.220
और इस संगम समय का जो महत्व है वह यही है

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00:30:11.710 --> 00:30:28.170
कि एक जन्म में अनेक जन्मों के लिए खज़ाना जमा कर सकते हैं ।

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00:30:28.170 --> 00:30:41.309
इसलिए यह छोटे से युग का बहुत महत्व है

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00:30:41.880 --> 00:30:59.200
और खज़ाने भी बापदादा द्वारा प्राप्त सभी बच्चों को होता है ।

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00:30:59.599 --> 00:31:26.569
बाप सभी को देते हैं लेकिन खज़ाने को जमा करने में हर एक बच्चा अपने पुरूषार्थ अनुसार करता है ।

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00:31:28.569 --> 00:31:41.650
बाप देने वाला भी एक है और एक जैसा सबको देता है

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00:31:41.650 --> 00:32:11.250
एक ही समय पर देता है लेकिन धारण करने में क्या देखा कि बाप ने एक जैसा दिया

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00:32:11.250 --> 00:32:33.140
लेकिन धारण करने में हर एक का अपना अपना पुरूषार्थ रहा

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00:32:33.140 --> 00:32:56.970
क्योंकि खज़ाने को धारण करने के लिए एक तो अपने पुरूषार्थ से प्रालब्ध बना सकते हैं

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00:32:56.970 --> 00:33:38.970
दूसरा सदा स्वयं सन्तुष्ट रहना और सर्व को सन्तुष्ट करना सन्तुष्टता की विशेषता से खज़ाना जमा कर सकते हो

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00:33:39.880 --> 00:34:07.420
और तीसरा सेवा से क्योंकि सेवा से सर्व आत्माओं को खुशी की प्राप्ति होती है

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00:34:08.510 --> 00:34:20.849
तो खुशी का खज़ाना प्राप्त कर सकते हो ।

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00:34:22.849 --> 00:34:43.820
अपना पुरूषार्थ और सर्व को सन्तुष्ट करने का पुरूषार्थ और तीसरा सेवा का पुरूषार्थ ।

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00:34:43.820 --> 00:34:57.650
इन तीनों प्रकार से खज़ाने जमा कर सकते हो ।

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00:35:04.909 --> 00:35:52.679
खज़ाने जमा करने में विशेष सम्बन्ध-सम्पर्क में आने में एक तो निमित्त भाव निर्माण भाव निःस्वार्थ भाव

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00:35:53.710 --> 00:36:15.199
हर आत्मा प्रति शुभ भावना और शुभ कामना रखने की आवश्यकता है ।

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00:36:17.199 --> 00:36:31.369
अगर सेवा में वा सम्बन्ध-सम्पर्क में यह सब है

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00:36:31.369 --> 00:36:46.219
तो पुण्य का खाता और दुआओं का खाता बहुत सहज जमा कर सकता है ।

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00:36:46.679 --> 00:37:05.539
तो बापदादा सबके पोतामेल देख रहे थे तो क्या देखा ?

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00:37:12.400 --> 00:37:24.219
चारों ओर के बच्चों में नम्बरवार देखा ।

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00:37:29.539 --> 00:37:38.510
बाप एक है एक ही समय पर देते हैं

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00:37:38.510 --> 00:37:52.969
लेकिन जमा करने में तीन प्रकार के बच्चे देखे -

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00:37:54.969 --> 00:38:17.079
एक बच्चे तो जमा हुआ खज़ाना खाया जमा भी किया और खाके खत्म कर देते हैं ।

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00:38:19.599 --> 00:38:44.449
दूसरे खाया जमा किया और जमा करने में अटेन्शन देके बढ़ाया भी ।

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00:38:49.369 --> 00:39:01.880
खज़ाने बढ़ाने का साधन क्या है ?

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00:39:03.139 --> 00:39:34.280
बढ़ाने का साधन है जो खज़ाने मिले वह समय पर जो परिस्थिति आती है उस परिस्थिति अनुसार कार्य में लगाना ।

45
00:39:35.820 --> 00:39:56.849
जो कार्य में लगाते हैं स्थिति द्वारा परिस्थिति को बदल सकते हैं उसका जमा होता है ।

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00:39:58.849 --> 00:40:08.449
जो कार्य में नहीं लगाते तो जमा नहीं होता है ।

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00:40:09.650 --> 00:40:34.909
तो हर एक अपने आपसे पूछो कि समय पर अपने प्रति वा दूसरों के प्रति कार्य में लगाते हो !

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00:40:36.909 --> 00:41:04.050
जितना कार्य में लगायेंगे उतना बढ़ता जायेगा क्योंकि कार्य में लगाने से अनुभव होता जाता है ।

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00:41:04.050 --> 00:41:14.280
तो अनुभव की अथॉरिटी एड होती जाती है ।

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00:41:16.280 --> 00:41:34.570
तो चेक करो अपने आपसे पूछो कि यह सारे खज़ाने जमा हैं ?

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00:41:34.570 --> 00:41:47.710
और बढ़ाने का साधन समय पर कार्य में लगाते हैं ?

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00:41:48.969 --> 00:41:58.449
अनुभव की अथॉरिटी बढ़ती जाती है ?

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00:41:58.449 --> 00:42:17.139
क्योंकि अथॉरिटीज में सबसे ज्यादा अनुभव की अथॉरिटी सबसे ज्यादा गाई जाती है ।

54
00:42:25.420 --> 00:42:37.940
तो हर एक को अपना खाता बढ़ाना है ।

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00:42:37.940 --> 00:42:58.679
चेक करना है क्योंकि अभी समय है चेक करके अभी भी खज़ाने बढ़ा सकते हो ।

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00:43:00.679 --> 00:43:10.849
अभी चांस है फिर चांस भी खत्म हो जायेगा ।

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00:43:10.849 --> 00:43:21.940
चाहेंगे खज़ाना बढ़ायें लेकिन बढ़ा नहीं सकेंगे ।

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00:43:23.940 --> 00:43:50.219
बापदादा ने देखा खज़ाना मिलता है खुशी-खुशी से अपने में समाने का प्रयत्न भी करते हैं

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00:43:50.219 --> 00:44:10.110
लेकिन खज़ाना जब मिलता है मुरली द्वारा ही खज़ाने मिलते हैं

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00:44:10.110 --> 00:44:26.679
तो दो प्रकार के बच्चे हैं - एक सुनने वाले और दूसरे हैं समाने वाले ।

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00:44:28.679 --> 00:44:52.510
कई बच्चे सुनके बहुत खुश होते हैं लेकिन सुनना और समाना दोनों में बहुत फर्क है ।

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00:44:54.510 --> 00:45:04.909
समाने वाले अनुभवी बनते जाते हैं

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00:45:06.400 --> 00:45:24.110
क्योंकि समाया हुआ समय पर कार्य में लगाते खज़ाने को बढ़ाते रहते हैं ।

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00:45:26.909 --> 00:45:44.849
सुनने वाले वर्णन करते हैं बहुत अच्छा सुनाया बहुत अच्छी बात बोली बाबा ने

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00:45:44.849 --> 00:46:02.510
लेकिन समाने के बिना समय पर काम में नहीं ला सकते हैं ।

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00:46:05.079 --> 00:46:29.880
तो आप सभी चेक करो समाने वाले हैं थोड़ा भी अगर कम होगा भरपूर नहीं होगा तो हलचल होगी ।

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00:46:31.880 --> 00:46:41.880
लेकिन समाया हुआ फुल होगा तो हलचल नहीं होगी ।

68
00:46:44.739 --> 00:47:04.739
इसलिए आज बापदादा ने सबके खज़ाने चेक किया ।

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00:47:06.739 --> 00:47:24.619
सुनाया ना - कि तीन प्रकार के बच्चे हैं अभी अपने आपको चेक करो मैं कौन ?

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00:47:27.480 --> 00:47:40.619
खज़ाने को बढ़ाना अर्थात् समय पर कार्य में लगाना ।

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00:47:41.650 --> 00:47:54.000
जितना कार्य में लगाते जाते उतना खज़ाना बढ़ता जाता है

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00:47:58.449 --> 00:48:11.480
क्योंकि जो भी खज़ाना है खज़ाने का मालिक खज़ाने को कार्य में लाता है ।

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00:48:11.480 --> 00:48:18.679
खज़ाना अपने को कार्य में नहीं लगाता ।

74
00:48:19.309 --> 00:48:32.280
तो आप सभी को सर्व खज़ाने बाप ने वर्से में दिया है ।

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00:48:34.280 --> 00:48:54.340
तो बाप के खज़ाने को अपना खज़ाना बनाना यह हर एक को अपना अटेन्शन देना है

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00:48:57.480 --> 00:49:25.650
क्योंकि जितना खज़ाना भरपूर होगा उतना ही भरपूर अवस्था में अचल अडोल होंगे ।

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00:49:33.420 --> 00:49:56.969
बापदादा यही चाहता है कि एक एक बच्चा सम्पन्न हो कम नहीं हो

78
00:50:01.710 --> 00:50:29.820
क्योंकि यह चांस बाप द्वारा अविनाशी खाता जमा होना यह सिर्फ अभी हो सकता है ।

79
00:50:30.679 --> 00:50:42.679
इसीलिए कहा हुआ भी है अभी नहीं तो कभी नहीं ।

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00:50:43.199 --> 00:50:54.679
यह संगम समय के लिए ही गायन है ।

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00:51:02.000 --> 00:51:25.769
भविष्य में तो जो जमा किया है उसका फल प्राप्त करेंगे लेकिन प्राप्ति का समय सिर्फ अब है ।

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00:51:28.800 --> 00:51:39.309
तो हर एक को अपना खाता देखना है ।

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00:51:41.309 --> 00:52:06.849
जिसका जितना भण्डारा भरपूर है उसके नयनों से चलन से चेहरे से मालूम होता है

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00:52:08.849 --> 00:52:30.000
उसकी चलन और चेहरा ऐसे लगेगा जैसे खिला हुआ गुलाब का पुष्प ।

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00:52:31.539 --> 00:53:02.340
बापदादा हर एक के चलन और चेहरे से देखता रहता कि कितना हर्षित कितना खुशमिजाज़ रहता है !

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00:53:03.250 --> 00:53:38.739
नयनों से रूहानियत , चेहरे से मुस्कराहट और कर्म से हर एक गुण सभी को अनुभव होता है ।

87
00:53:42.050 --> 00:53:56.400
तो हर एक अपने आपको चेक करे ।

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00:54:01.139 --> 00:54:23.940
बापदादा की हर एक बच्चे में यही शुभ भावना है

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00:54:24.449 --> 00:54:46.909
कि हर एक बच्चा अनेक आत्माओं को ऐसा खज़ानों से सम्पन्न बनावे ।

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00:54:48.340 --> 00:55:17.599
आज विश्व की आत्मायें सभी यही चाहती हैं कि कुछ न कुछ आध्यात्मिक शक्ति मिल जाए ।

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00:55:20.170 --> 00:55:34.909
और आध्यात्मिक शक्ति के दाता आप ब्राह्मण आत्मायें ही हैं

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00:55:36.909 --> 00:55:54.110
क्योंकि होलीएस्ट हाइएस्ट और रिचेस्ट आप आत्मायें ही हैं ।

93
00:55:55.139 --> 00:56:06.449
होलीएस्ट भी सब आत्माओं से ज्यादा आप हो ।

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00:56:07.480 --> 00:56:26.000
आप आत्माओं की पूजा जैसे विधिपूर्वक होती है वैसे और किसकी भी नहीं होती ।

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00:56:28.000 --> 00:57:04.400
अभी लास्ट जन्म में भी आप आत्माओं की पूजा और कोई भी धर्मपिता वा महान आत्मायें जो निमित्त बनी हैं उन्हों की नहीं है ।

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00:57:07.250 --> 00:57:26.909
विधिपूर्वक पूजा भले यादगार बनाते हैं लेकिन विधिपूर्वक पूजा नहीं होती ।

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00:57:29.539 --> 00:58:07.139
और आप जैसा खज़ाना रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड आप ब्राह्मण आत्माओं का एक जन्म का खज़ाना गैरन्टी 21 जन्म चलना ही है

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00:58:13.539 --> 00:58:30.000
क्योंकि बाप द्वारा बाप का वर्सा मिला है ।

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00:58:33.650 --> 00:58:54.219
तो जैसे बाप अविनाशी है वैसे ही बाप द्वारा मिला हुआ खज़ाना भी अविनाशी हो जाता है ।

100
00:59:07.710 --> 00:59:22.340
इसलिए रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड होलीएस्ट इन दी वर्ल्ड ।

101
00:59:32.969 --> 01:00:00.679
तो सभी अपने को ऐसे विशेष सेवाधारी समझते हो ना !

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01:00:02.679 --> 01:00:24.739
आज के समय अनुसार विश्व की आत्माओं को आवश्यकता किस चीज़ की है जानते हो ना !

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01:00:26.000 --> 01:00:47.369
आज विश्व को खुशी शक्ति और स्नेह की आवश्यकता है ।

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01:00:52.739 --> 01:01:28.679
आत्मिक स्नेह चाहते हैं लेकिन आप ब्राह्मण आत्मायें अभी समय अनुसार दाता बनो ।

105
01:01:30.679 --> 01:01:54.570
मन्सा से शक्तियां दो वाचा से ज्ञान दो और कर्मणा से गुणदान दो ।

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01:01:59.769 --> 01:02:24.280
ब्रह्मा बाप ने अन्त में तीन शब्द सभी बच्चों को सौगात में दिये याद है ना -

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01:02:25.019 --> 01:02:47.199
इन तीन शब्दों को अगर सेवा में लगाओ तो बहुत आत्माओं को सन्तुष्ट कर सकते हो ।

108
01:02:48.000 --> 01:03:05.420
वह तीन शब्द हैं - निराकारी निरहंकारी और निर्विकारी ।

109
01:03:07.420 --> 01:03:29.199
तो मन्सा द्वारा निराकारी वाचा द्वारा निरहंकारी और कर्मणा द्वारा निर्विकारी ।

110
01:03:31.199 --> 01:03:40.800
यह तीनों शब्द सेवा में लगाओ ।

111
01:03:47.820 --> 01:04:22.110
अभी विश्व को आपके शक्ति द्वारा थोड़ा सा दिल का आनंद सुख की प्राप्ति हो

112
01:04:24.110 --> 01:04:43.599
सब निराश हैं और आप विश्व के लिए आशाओं के सितारे हो

113
01:04:50.570 --> 01:05:13.309
और बापदादा सभी बच्चों को बाप के आशाओं के सितारे देखते हैं ।

114
01:05:14.219 --> 01:05:32.000
सिर्फ उम्मीदों के सितारे नहीं लेकिन आशायें पूर्ण करने वाले आशाओं के सितारे हो ।

115
01:05:36.170 --> 01:06:06.969
बापदादा के पास बच्चों का स्नेह सदा पहुंचता है और सबसे सहज पुरूषार्थ कौन सा है?

116
01:06:06.969 --> 01:06:21.650
भिन्न भिन्न पुरूषार्थ हैं लेकिन सबसे सहज पुरूषार्थ स्नेह है ।

117
01:06:23.650 --> 01:06:37.019
स्नेह में मेहनत भी मुहब्बत के रूप में बदल जाती है ।

118
01:06:44.170 --> 01:06:56.739
तो बाप के स्नेही बनना अर्थात् सहज पुरूषार्थ करना ।

119
01:07:02.050 --> 01:07:25.940
स्नेह में आप सभी अपने को स्नेही समझते हैं कभी कभी नहीं सदा स्नेही ।

120
01:07:33.769 --> 01:07:59.250
जो अपने को सदा स्नेह के सागर में समाये हुए समझते हैं सदा और स्नेह के सागर में समाया हुआ ।

121
01:07:59.250 --> 01:08:07.820
डुबकी लगाने वाले नहीं समाये हुए ।

122
01:08:11.539 --> 01:08:30.050
समझते हैं स्नेह के सागर में समाये हुए जो अपने को ऐसे समझते हैं वह हाथ उठाओ ।

123
01:08:30.619 --> 01:08:32.739
सदा ?

124
01:08:32.739 --> 01:08:38.220
सदा शब्द को अण्डरलाइन करो ।

125
01:08:44.619 --> 01:08:51.710
हाथ उठाओ सदा सदा ?

126
01:09:03.710 --> 01:09:07.939
हाथ तो अच्छा उठाया है ।

127
01:09:08.449 --> 01:09:23.020
बापदादा हाथ को देखके खुश होते हैं क्योंकि हिम्मत रखते हैं ।

128
01:09:23.600 --> 01:09:35.539
अगर कुछ कम भी होगा तो याद तो आयेगा कि हाथ उठाया है

129
01:09:37.880 --> 01:09:54.449
क्योंकि बापदादा का एक एक बच्चे से अति स्नेह है ।

130
01:09:57.770 --> 01:10:00.449
क्यों ?

131
01:10:00.449 --> 01:10:14.170
क्योंकि बापदादा जानते हैं कि यह एक एक आत्मा

132
01:10:19.020 --> 01:10:42.909
अनेक बार स्नेही बनी है अभी भी बनी है और हर कल्प यही आत्मायें स्नेही बनेंगी ।

133
01:10:45.479 --> 01:11:02.109
नशा है खुशी है कि हम ही हर कल्प के अधिकारी आत्मायें हैं ?

134
01:11:09.199 --> 01:11:34.569
बापदादा ऐसे अधिकारी आत्माओं को देख दिल की दुआयें दे रहे हैं ।

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01:11:35.939 --> 01:11:52.050
सदा अथक बन उड़ते चलो ।

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01:12:03.079 --> 01:12:23.539
कभी भी अगर कोई परिस्थिति आती है तो स्व-स्थिति को नीचे ऊपर नहीं करो ।

137
01:12:24.170 --> 01:12:38.569
स्व-स्थिति के आगे परिस्थिति कुछ नहीं कर सकती ।

138
01:12:47.140 --> 01:12:50.569
अच्छा ।

139
01:12:51.250 --> 01:13:03.600
पहली बारी कौन आये हैं वह हाथ उठाओ ।

140
01:13:11.939 --> 01:13:17.420
बहुत आते हैं ।

141
01:13:38.340 --> 01:14:02.569
बापदादा को एक एक बच्चे को देख नाज़ है वाह मेरे बच्चे वाह !

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01:14:08.050 --> 01:14:23.770
जैसे आप दिल में गीत गाते हो ना आटोमेटिक वाह बाबा वाह !

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01:14:23.770 --> 01:14:26.800
मेरा बाबा वाह !

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01:14:26.800 --> 01:14:47.250
ऐसे ही बाप भी बच्चों के प्रति यही गीत गाते कि वाह हर एक बच्चा वाह !

145
01:14:54.050 --> 01:15:15.310
क्योंकि बाप को भी कल्प के बाद आप बच्चे मिलते हो और एक एक विश्व के आगे महान है ।

146
01:15:16.220 --> 01:15:26.800
तो बाप भी गीत गाते हैं वाह बच्चे वाह !

147
01:15:26.800 --> 01:15:30.850
वाह वाह हो ना !

148
01:15:30.850 --> 01:15:40.170
वाह ! वाह ! बच्चे हो ना ! वाह ! वाह ! बच्चे हाथ उठाओ ।

149
01:15:48.739 --> 01:15:58.220
तो सदा यही याद रखो हम वाह वाह!

150
01:15:58.569 --> 01:16:15.079
बच्चे हैं।चाहे पुरूषार्थी हैं लेकिन हैं वाह!वाह!बच्चे बाप के वाह!वाह!बच्चे बाप के साथ ही चलेंगे।

151
01:16:23.479 --> 01:16:28.850
रह तो नहीं जायेंगे ना !

152
01:16:30.449 --> 01:16:49.649
बाप तो कहते हैं हर एक बच्चे को स्नेह की गोदी में साथ ले जायें ।

153
01:16:54.909 --> 01:16:57.770
तो तैयार हो !

154
01:16:57.770 --> 01:17:02.109
तैयार हैं ?

155
01:17:03.880 --> 01:17:10.399
रास्ते में रूक तो नहीं जायेंगे ?

156
01:17:16.619 --> 01:17:34.619
साथ चलेंगे क्योंकि वायदा है वायदा तो निभाने वाले हो ।

157
01:17:43.710 --> 01:18:10.340
तो अभी बापदादा यही चाहते हैं कि फरिश्ता रूप अपना इमर्ज करो ।

158
01:18:11.939 --> 01:18:27.199
चलते फिरते फरिश्ता डे्रस वाले अनुभव कराओ ।

159
01:18:30.449 --> 01:18:37.710
बापदादा ने ड्रिल सुनाई ना ।

160
01:18:38.909 --> 01:18:46.399
वस्त्र बदली करने की आदत तो है ना !

161
01:18:46.399 --> 01:19:16.619
तो जैसे शरीर की डे्रस बदली करते हो ऐसे ही आत्मा का स्वरूप फरिश्ता बार-बार अनुभव करो ।

162
01:19:18.000 --> 01:19:26.510
फरिश्ता की डे्रस पसन्द है ना !

163
01:19:31.140 --> 01:19:47.199
जैसे ब्रह्मा बाप अव्यक्त फरिश्ता रूप में वतन में बैठे हैं

164
01:19:47.199 --> 01:20:09.250
ऐसे बाप समान आप सब भी चलते फिरते फरिश्ते रूप में अनुभव करो

165
01:20:16.050 --> 01:20:26.680
क्योंकि फरिश्ता रूप होगा तभी देवता बनेंगे ।

166
01:20:27.479 --> 01:20:36.399
जैसे बाप के तीन रूप याद रहते हैं ना ।

167
01:20:36.399 --> 01:20:49.880
बाप शिक्षक और सतगुरू ऐसे अपने भी तीन रूप याद करो -

168
01:20:49.880 --> 01:21:01.710
ब्राह्मण सो फरिश्ता और फरिश्ता सो देवता ।

169
01:21:03.710 --> 01:21:09.819
यह तीन रूप पक्के हैं ना !

170
01:21:10.279 --> 01:21:22.909
कभी ब्राह्मण की डे्रस पहनो कभी फरिश्ते की कभी देवता की ।

171
01:21:27.880 --> 01:21:59.710
इस तीनों रूप में स्वतः ही त्रिकालदर्शा के सीट में बैठ साक्षी होके हर कार्य करते रहेंगे ।

172
01:22:08.449 --> 01:22:34.170
तो सभी से बापदादा यही चाहते हैं कि सदा बाप के साथ रहो अकेले नहीं बनो ।

173
01:22:35.649 --> 01:22:43.880
साथ रहेंगे तब साथ चलेंगे ।

174
01:22:43.880 --> 01:22:56.970
अगर अभी कभी कभी रहेंगे तो साथ कैसे चलेंगे !

175
01:22:58.970 --> 01:23:12.279
स्नेही स्नेही को कभी भूल नहीं सकता ।

176
01:23:23.310 --> 01:23:34.220
सारे दिन में यह अभ्यास करते रहो ।

177
01:23:36.220 --> 01:23:47.250
अभी अभी ब्राह्मण अभी अभी फरिश्ता अभी अभी देवता ।

178
01:23:55.539 --> 01:23:58.449
अच्छा ।

179
01:23:58.449 --> 01:24:24.569
चारों ओर के सर्व बच्चों को जो सदा खज़ाने से सम्पन्न हैं

180
01:24:24.569 --> 01:24:42.000
सदा अपनी चलन और चेहरे से सेवाधारी हैं

181
01:24:42.800 --> 01:25:04.619
क्योंकि आप सबका वायदा है कि हम विश्व परिवर्तक बन विश्व का परिवर्तन करेंगे

182
01:25:06.619 --> 01:25:19.479
तो चलते फिरते भी सेवाधारी सेवा में तत्पर रहते हैं ।

183
01:25:20.850 --> 01:25:45.310
ऐसे विश्व सेवाधारी विश्व परिवर्तक हर एक को बाप के खज़ानों से भरपूर करने वाले

184
01:25:46.050 --> 01:26:14.340
बापदादा के चारों ओर के बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिल से दुआयें और नमस्ते ।

185
01:26:19.600 --> 01:26:23.710
अच्छा ।

186
01:26:27.479 --> 01:27:17.710
सेवा का टर्न महाराष्ट्र ज़ोन का है :- ( सभी ने नो प्राबलम का ताज पहना हुआ है ) अच्छा किया है सभी ने अपने ऊपर ताज लगा दिया है ।

187
01:27:22.680 --> 01:27:35.140
जैसे ताजधारी नो प्राबलम लगाया है

188
01:27:35.140 --> 01:28:02.680
तो सभी के तरफ से बापदादा यही दुआ दे रहे हैं कि सदा नो प्राबलम भव ।

189
01:28:07.539 --> 01:28:29.199
ऐसे हर एक मन-वाणी-कर्म संगठन में ऐसे ही सदा नो प्राबलम रहने वाले ।

190
01:28:31.880 --> 01:28:44.510
प्राबलम सेकण्ड में परिवर्तन हो जाए ।

191
01:28:45.199 --> 01:29:00.109
प्राबलम के रूप में आये और सम्पन्न स्वरूप में बदल जाये ।

192
01:29:03.079 --> 01:29:11.020
अच्छा है सीन देख रहे हो कितनी अच्छी है ।

193
01:29:11.600 --> 01:29:28.619
संकल्प और श्वांस में नो प्राबलम ।

194
01:29:33.770 --> 01:29:48.050
तो सभी के तरफ से जो ताजधारी बने हैं उन्हों को बधाई दो ताली बजाओ ।

195
01:30:02.399 --> 01:30:17.310
सभी बड़ी स्क्रीन में देखो देखो कितना अच्छा लगता है ।

196
01:30:29.310 --> 01:30:43.710
बापदादा एक एक बच्चे को जिन्होंने संकल्प किया है नो प्राबलम

197
01:30:43.710 --> 01:31:12.109
अर्थात् बाप समान सदा रहेंगे इसीलिए बापदादा पदमगुणा बधाईयां दे रहे हैं ।

198
01:31:21.649 --> 01:31:24.850
अच्छा ।

199
01:31:24.850 --> 01:31:32.279
नाम ही महाराष्ट्र है ।

200
01:31:34.279 --> 01:31:57.880
तो महाराष्ट्र अर्थात् महान स्वरूप द्वारा महान सेवा करने वाले ।

201
01:32:03.310 --> 01:32:16.850
अभी महाराष्ट्र ने कोई बड़ा प्रोग्राम नहीं किया है बहुत समय हो गया है

202
01:32:16.850 --> 01:32:37.140
कोई विशेष इन्वेन्शन कर महान सेवा का पार्ट बजाने में बापदादा को याद है

203
01:32:37.140 --> 01:32:52.449
कि महाराष्ट्र ने प्रदर्शनी निकालने का अच्छा पार्ट बजाया

204
01:32:52.449 --> 01:33:07.479
जो अभी तक भी प्रदर्शनी द्वारा सेवा हो रही है ।

205
01:33:09.479 --> 01:33:27.369
तो जैसे यह विशेष भाई रमेश बच्चा निमित्त बना निमित्त बना अभी तक वह यादगार है ।

206
01:33:28.510 --> 01:33:41.539
ऐसी कोई इन्वेन्शन अभी महाराष्ट्र को करना है ।

207
01:33:41.539 --> 01:33:43.710
करना है ?

208
01:33:43.710 --> 01:33:47.600
कोई नई बात करो ।

209
01:33:48.220 --> 01:34:03.020
जैसे दिल्ली वालों ने हिम्मत रखी है ना तो सभी को सन्देश दे दें ।

210
01:34:03.020 --> 01:34:09.649
बड़े मैदान में सन्देश तो दे दें ।

211
01:34:09.649 --> 01:34:26.739
चाहे अखबार द्वारा चाहे टी वी द्वारा मीडिया द्वारा सन्देश देना ही है उल्हना नहीं रह जाए ।

212
01:34:26.739 --> 01:34:36.170
ऐसे कुछ न कुछ करते रहो

213
01:34:36.970 --> 01:34:53.079
क्योंकि बिचारी आत्मायें अभी समझती हैं कि आध्यात्मिकता आवश्यक है

214
01:34:53.310 --> 01:35:02.220
शान्ति चाहिए लेकिन विचारों को साधन नहीं मिलता ।

215
01:35:02.220 --> 01:35:11.199
कोई उमंग उल्हास दिलाने वाला नहीं मिला है

216
01:35:11.199 --> 01:35:21.770
इसलिए हर एक ज़ोन को कुछ न कुछ करते रहना चाहिए ।

217
01:35:22.569 --> 01:35:40.399
मधुबन में जैसे कोई न कोई प्रोग्राम चलता रहता है ऐसे कोई न कोई प्रोग्राम चलते रहना चाहिए ।

218
01:35:40.399 --> 01:35:59.880
चाहे ब्राह्मणों का प्रोग्राम चाहे सन्देश देने का प्रोग्राम चाहे अपने उन्नति का नया नया प्रोग्राम

219
01:36:01.250 --> 01:36:18.680
क्योंकि कोई भी नया प्रोग्राम निकलता है तो बापदादा ने देखा है देश विदेश रूचि से करते हैं ।

220
01:36:40.050 --> 01:36:43.079
अच्छा है ।

221
01:36:43.079 --> 01:36:51.600
करते रहते हो और करते चलो ।

222
01:36:57.939 --> 01:37:00.739
अच्छा ।

223
01:37:00.739 --> 01:37:04.170
अभी कोई नया प्लैन बनायेंगे ना ?

224
01:37:04.170 --> 01:37:08.619
कितने टाइम में बनायेंगे ?

225
01:37:11.770 --> 01:37:17.479
कितना मास चाहिए तैयारी में ?

226
01:37:19.479 --> 01:37:51.199
आपस में मीटिंग करना तारीख फिक्स करना क्योंकि देहली और बाम्बे दोनों स्थानों में महारथी सर्विसएबुल अच्छे अच्छे हैं

227
01:37:53.199 --> 01:38:10.909
और अभी हर एक ज़ोन में भी देखा है कि सर्विसएबुल बच्चे बढ़ते जाते हैं ।

228
01:38:13.310 --> 01:38:23.939
सर्विस के प्लैन करने वाले अथॉरिटीज़ बहुत हैं ।

229
01:38:25.140 --> 01:38:42.170
चाहे छोटा ज़ोन है चाहे बड़ा लेकिन सर्विसएबुल बन गये हैं इसीलिए अभी धूम मचाओ ।

230
01:38:42.970 --> 01:39:09.710
एक ऐसा प्रोग्राम बनाओ जो सभी ज़ोन में एक साथ हो और मीडिया द्वारा एनाउन्स हो फलाने फलाने स्थान पर एक ही प्रोग्राम चल रहा है

231
01:39:12.399 --> 01:39:32.399
हर एक ज़ोन में और अखबार में डाला जाए तो इस इस स्थान में प्रोग्राम हो रहा है ।

232
01:39:35.369 --> 01:39:48.050
सारे स्थानों की एडे्रस और टॉपिक टॉपिक एक ही हो ।

233
01:39:50.050 --> 01:40:03.020
एक ही समय हो एक ही टॉपिक हो जहाँ भी जायें यही टॉपिक देखें ।

234
01:40:10.340 --> 01:40:13.539
यह हो सकता है ना !

235
01:40:13.539 --> 01:40:17.880
हो सकता है ?

236
01:40:21.199 --> 01:40:29.819
विदेश में भी इसी तारीख पर यही प्रोग्राम ।

237
01:40:33.770 --> 01:40:38.800
तो चारों ओर एक हो ।

238
01:40:40.399 --> 01:41:26.510
( इस वर्ष की थीम रखी गयी है - परमात्मा के वरदानों को प्राप्त करना ) यह टॉपिक तो अच्छी है कुछ भी आपस में फाइनल करो ।

239
01:41:26.510 --> 01:41:42.800
आपस में मिलके डेट टापिक और एडवरटाइज कैसे हो यह बनाके दो ।

240
01:41:42.800 --> 01:41:54.050
जो भी टापिक रखेंगे पहले से ही बापदादा को पसन्द है ।

241
01:42:05.939 --> 01:42:35.250
अच्छा है क्योंकि अभी इच्छुक हैं पहले सुनते थे तो दूर भागते थे अभी चाहते हैं कि कुछ सुनें ।

242
01:42:35.250 --> 01:42:42.569
वी आई पी भी इन्टे्रस्ट लेते हैं ।

243
01:42:43.250 --> 01:42:47.140
अभी एक ही आवाज फैले ।

244
01:42:47.140 --> 01:42:54.510
चारों ओर जहाँ भी जायें तो सुनें यही ।

245
01:42:55.819 --> 01:42:57.710
अच्छा ।

246
01:42:57.710 --> 01:43:14.170
अच्छा है चारों ओर देखा जाता है कि वृद्धि भी अच्छी हो रही है ब्राह्मण बढ़ रहे हैं ।

247
01:43:14.170 --> 01:43:27.600
अभी नम्बरवार हैं लेकिन बापदादा यही चाहते कि नम्बरवन बनें।

248
01:43:27.600 --> 01:43:34.850
नम्बरवार नहीं नम्बरवन।

249
01:43:39.420 --> 01:43:42.279
अच्छा है ।

250
01:43:42.909 --> 01:44:02.340
महाराष्ट्र कोई नई इन्वेन्शन निकालके सेवा में एक नवीनता का आवाज फैलायेगा ।

251
01:44:03.310 --> 01:44:06.050
अच्छा है ।

252
01:44:06.050 --> 01:44:21.939
बापदादा को बहुत बहुत महारथी सर्विसएबुल बच्चे दिखाई दे रहे हैं ।

253
01:44:26.000 --> 01:44:55.819
टीचर्स भी अच्छे अन्दाज में अपना अपना सेवाकेन्द्र सम्भाल रही हैं इसकी मुबारक हो और पदमगुणा बापदादा दुआयें दे रहे हैं ।

254
01:44:58.220 --> 01:45:02.449
अच्छा ।

255
01:45:10.109 --> 01:45:26.970
धार्मिक विंग स्पोर्ट विंग :- अच्छा ।

256
01:45:56.739 --> 01:46:00.909
यह झण्डी हिला रहे हैं ।

257
01:46:00.909 --> 01:46:04.909
अच्छा है ।

258
01:46:17.310 --> 01:46:42.000
अभी खेल वाले ऐसा कोई खेल निकालो जो खेल खेल में सन्देश मिल जाए ।

259
01:46:44.000 --> 01:47:02.569
जैसे आजकल इन्डिया खेल में नम्बर ले रहा है

260
01:47:02.569 --> 01:47:18.220
ऐसे आध्यात्मिक खेल ऐसे निकालो जैसे समाचार में आया था

261
01:47:18.220 --> 01:47:33.710
तो अमेरिका में पंतग उड़ाने के बहाने से सर्विस अच्छी हो गई

262
01:47:33.710 --> 01:47:50.909
और अभी भी गवर्मेन्ट चाहती है कि इस विधि से लोगों को सन्देश मिल जाए ।

263
01:47:50.909 --> 01:48:07.939
ऐसे ही ऐसा कोई खेल तैयार करो जो चारों ओर खेल में सन्देश मिल जाए ।

264
01:48:08.619 --> 01:48:11.479
समझा ।

265
01:48:11.479 --> 01:48:16.279
ऐसा खेल तैयार करो ।

266
01:48:21.369 --> 01:48:41.880
आजकल ट्रांसपोर्ट तो इन्डिया में ट्रांसपोर्ट की हालत बहुत खराब है

267
01:48:41.880 --> 01:48:58.399
राज़ एक्सीडेंट होते रहते हैं तो एक्सीडेंट से बचे कैसे करने वाले

268
01:48:58.399 --> 01:49:20.399
उसके लिए कोई ऐसे तैयार करो जो चलाने वाले सावधान रहें ।

269
01:49:20.399 --> 01:49:46.909
ऐसी कोई विधि निकालो जो चलाने वाले को सिखाने से सुनाने से उन्हों का मन शीतल हो जाए एकाग्र हो जाए ।

270
01:49:46.909 --> 01:50:05.939
इसको थोड़ा विस्तार से चारों ओर सेवा करना पड़ेगा क्योंकि आजकल इसकी आवश्यकता है ।

271
01:50:05.939 --> 01:50:10.569
और बढ़ता ही जाता है ।

272
01:50:10.569 --> 01:50:27.819
तो ऐसे बढ़ने वाले कार्य को परिवर्तन का प्रैक्टिकल स्वरूप दिखाओ गवर्मेन्ट को ।

273
01:50:27.819 --> 01:50:37.310
तो इस कार्य करने से कैसे फर्क हुआ है ।

274
01:50:37.310 --> 01:50:44.619
आजकल प्रैक्टिकल देखने चाहते हैं ।

275
01:50:44.619 --> 01:51:09.479
तो ऐसा ग्रुप तैयार करो जो चलाने वाले ड्राइवर ऐसा कोई कर्तव्य करके दिखावे गवर्मेन्ट के आगे एक्जैम्पुल तैयार करके दिखाओ ।

276
01:51:11.020 --> 01:51:16.399
तभी सभी का अटेन्शन जायेगा ।

277
01:51:16.399 --> 01:51:34.619
कोर्स कराते हो प्रोग्राम भी करते हो लेकिन ऐसा ग्रुप तैयार करके दिखाओ जो एक्सीडेंट करने वाले परिवर्तन हो गये ।

278
01:51:34.619 --> 01:51:57.600
जैसे शराब पीने वाले बदलके दिखाते हो ना ऐसे एक्सीडेंट करने वाले परिवर्तन हो करके दिखायें ऐसा ग्रुप गवर्मेन्ट के आगे लाओ ।

279
01:52:02.569 --> 01:52:16.569
अभी बापदादा ने देखा गांव वाले जो सब्जियां वगैरा पैदा करते हैं

280
01:52:16.569 --> 01:52:37.199
वह बिना खराब चीज़ें ( हानिकारक दवाईयाँ व खाद आदि ) डालने के योगबल द्वारा सब्जियां तैयार करते हैं और गवर्मेन्ट को प्रैक्टिकल मिसाल दिखाते हैं ।

281
01:52:38.279 --> 01:52:56.909
बापदादा ने सुना यहाँ आबू में भी प्रैक्टिस की है तो यह ऐसा ऐसा प्रूफ गवर्मेन्ट को दिखाना चाहिए ।

282
01:52:58.909 --> 01:53:08.680
जो गवर्मेन्ट की प्राबलम है ना उसमें उन्हों को सहयोग मिले ।

283
01:53:08.680 --> 01:53:12.569
फायदा मिले ।

284
01:53:14.569 --> 01:53:24.619
ऐसे हर एक विंग प्रैक्टिकल प्रूफ तैयार करो ।

285
01:53:26.800 --> 01:53:41.649
सुनते हैं कि ऐसा हो रहा है लेकिन प्रैक्टिकल प्रूफ वाला ग्रुप जो है वह गवर्मेन्ट के आगे लाओ ।

286
01:53:46.680 --> 01:54:02.220
हर एक वर्ग ने सेवा अच्छी की है सेवा की वृद्धि हुई है और सब बिजी भी हो गये हैं

287
01:54:03.020 --> 01:54:17.539
लेकिन अभी बापदादा हर एक गवर्मेन्ट के डिपार्टमेंन्ट में प्रूफ दिखाने चाहते हैं ।

288
01:54:19.539 --> 01:54:28.170
एक एक मिनिस्ट्री में कोई न कोई सबूत होना चाहिए ।

289
01:54:31.710 --> 01:54:37.819
जैसे हार्ट का प्रूफ है ना ।

290
01:54:37.819 --> 01:54:59.710
कईयों की हार्ट बिना आपरेशन के बिना दवाईयों के ठीक हुआ है ऐसे हर एक वर्ग अपना प्रूफ दिखाये ।

291
01:55:01.710 --> 01:55:03.939
अच्छा ।

292
01:55:03.939 --> 01:55:07.310
ऐसा खेल तैयार करना ।

293
01:55:07.310 --> 01:55:10.680
बापदादा भी देखेगा ।

294
01:55:52.279 --> 01:56:07.140
बापदादा देखेगा कौन सा वर्ग ऐसा ग्रुप तैयार करके बाप के आगे रिपोर्ट देंगे ।

295
01:56:08.449 --> 01:56:17.539
हर एक मिनिस्ट्री में होना चाहिए ।

296
01:56:18.970 --> 01:56:33.420
अगर एक एक मिनिस्ट्री में प्रूफ होगा तो आटोमेटिकली यह खबर एक दो से पहुंचती है ।

297
01:56:35.420 --> 01:56:57.539
और गवर्मेन्ट के पास हर एक डिपार्टमेंट में सेवा के लिए पैसे भी बहुत हैं लेकिन प्रैक्टिकल में यूज़ नहीं होता है ।

298
01:57:00.449 --> 01:57:04.739
सहयोग दे सकते हैं ।

299
01:57:04.739 --> 01:57:09.710
लेकिन प्रूफ चाहिए ।

300
01:57:16.170 --> 01:57:32.170
जैसे गांव वालों को गवर्मेन्ट ने मदद देकरके सैलवेशन दी है ।

301
01:57:34.170 --> 01:57:42.220
हर एक वर्ग वाले ऐसे दिखायें ।

302
01:57:44.739 --> 01:57:50.220
दो चार गांव तो तैयार किये हैं ना ।

303
01:57:59.369 --> 01:58:02.569
अच्छा ।

304
01:58:03.079 --> 01:58:33.539
डबल विदेशी :- यूथ ग्रुप भी है हाथ उठाओ ।

305
01:58:34.170 --> 01:58:37.140
अच्छा ।

306
01:59:01.539 --> 01:59:37.880
डबल विदेशियों ने मधुबन में अपनी और अपने साथियों की उन्नति के प्रोग्राम अच्छे बनाये हैं और रिजल्ट भी बापदादा ने सुने ।

307
01:59:37.880 --> 01:59:53.770
तो सभी अच्छा मधुबन के वायुमण्डल में रिफ्रेश होके जाते हैं

308
01:59:54.850 --> 02:00:05.600
और टीचर्स भी अच्छी प्यार से मेहनत कर रही हैं ।

309
02:00:06.000 --> 02:00:26.399
तो डबल विदेशी स्वयं भी लाभ ले रहे हैं और औरों को भी लाभ दिला रहे हैं ।

310
02:00:27.539 --> 02:00:43.140
यह समाचार बापदादा ने सुना है और रिजल्ट भी सुनी है ।

311
02:00:43.649 --> 02:00:47.539
अच्छा है ।

312
02:00:48.909 --> 02:01:17.420
अभी बापदादा डबल विदेशियों द्वारा चाहे यूथ चाहे टीचर्स चाहे बच्चों का भी जो करते रहते हैं वह सुना ।

313
02:01:17.420 --> 02:02:00.680
लेकिन अभी विदेशियों द्वारा एक प्रोग्राम ऐसा भारत में हो जो वी आई पी हर शहर के विशेष विशेष सम्बन्ध सम्पर्क वाले वी आई पी का इिन्डया में प्रोग्राम हो ।

314
02:02:00.680 --> 02:02:04.970
वी आई पी का ।

315
02:02:04.970 --> 02:02:13.479
हर एक देश में कोई न कोई वी आई पी तो होते हैं

316
02:02:17.369 --> 02:02:41.770
तो विशेष जो मुख्य देश है उनमें जो भी सम्पर्क वाले वी आई पी हैं ब्राह्मण नहीं वी आई पी ब्राह्मणों का तो बनाया है वह भी अच्छा है ।

317
02:02:41.770 --> 02:02:49.420
एक तरफ ब्राह्मणों का चले एक तरफ वी आई पी का चले ।

318
02:02:49.880 --> 02:03:04.850
जो मीडिया में आवे कि देश विदेश के सम्पर्क वाले भी लाभ ले रहे हैं ।

319
02:03:09.939 --> 02:03:34.569
बाकी तो सेवा अच्छी बढ़ा रहे हैं हर टर्न में अनेक देशों के ब्राह्मण इकट्ठे होते हैं यह भी एक ब्राह्मण परिवार के लिए शोभा है ।

320
02:03:35.310 --> 02:03:49.649
इससे सिद्ध होता है तो विश्व की आत्माओं का इन्टे्रस्ट है ।

321
02:03:52.399 --> 02:04:04.170
जैसे अभी मिडिलइस्ट वालों में आवाज अच्छा फैल रहा है ।

322
02:04:04.170 --> 02:04:26.970
चाहे दूसरे धर्म वाले हैं लेकिन इन्ट्रेस्ट अच्छा है ऐसे वी आई पीज का भी ग्रुप इकठ्ठा लाओ तो बहुत अच्छा है ।

323
02:04:30.449 --> 02:04:33.880
ठीक है ना ।

324
02:04:33.880 --> 02:04:35.880
अच्छा है ।

325
02:04:35.880 --> 02:04:41.819
इसने पान का बीडा उठाया है आओ ।

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02:05:04.970 --> 02:05:14.000
( डा निर्मला दीदी को बापदादा ने स्टेज पर बुलाया ) बहुत अच्छा ।

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02:05:14.000 --> 02:05:33.819
देश विदेश इन्डिया में भी और विदेश में भी दोनों तरफ अटेन्शन दे अपनी जिम्मेवारी सम्भाली है

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02:05:33.819 --> 02:05:49.310
इसलिए बापदादा को विदेश के ब्राह्मणों के ऊपर नाज़ है

329
02:05:53.770 --> 02:06:03.420
विदेश और देश दोनों की जिम्मेवारी सम्भाली है ।

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02:06:05.939 --> 02:06:10.569
बापदादा खुश है ।

331
02:06:15.710 --> 02:06:40.279
अच्छा । अभी विदेश वाले हर एक देश में एक ही समय पर एक टॉपिक सारे विदेश के मुख्य शहरों में फैल जाए

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02:06:40.279 --> 02:06:51.479
कि ब्रह्माकुमारियों का प्रोग्राम हर देश में एक ही समय पर हो रहा है ।

333
02:06:53.479 --> 02:07:00.510
यह भी आपस में मिल करके प्रोग्राम बनाना ।

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02:07:02.510 --> 02:07:08.739
देश में भी विदेश में भी ।

335
02:07:08.739 --> 02:07:13.250
पसन्द है ना !

336
02:07:18.619 --> 02:07:20.739
अच्छा ।

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02:07:20.739 --> 02:07:38.680
विदेश वाले बापदादा को एक बात में अच्छे लगते हैं

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02:07:38.680 --> 02:07:45.710
कौन सी बात में मैजारिटी मिक्स तो होते ही हैं

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02:07:45.710 --> 02:08:17.199
लेकिन मैजारिटी अपने दिल में कोई भी बात अगर नियम के विरूध होती है तो स्पष्ट बोलने में स्पष्ट कह देते हैं ।

340
02:08:17.199 --> 02:08:27.420
ज्यादा टाइम दिल में नहीं रखते हैं दिल से निकल ही जाता है ।

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02:08:28.680 --> 02:08:43.539
इसलिए जो भी बात है वह ज्यादा समय दिल में नहीं रखना ।

342
02:08:43.539 --> 02:09:03.199
कोई भी कमज़ोरी को अगर ज्यादा समय दिल में रखते हैं तो फिर संस्कार बन जाते हैं नेचर बन जाती है ।

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02:09:03.600 --> 02:09:19.770
इसलिए यह संस्कार अच्छा है जो भी कमज़ोरी आवे वह जल्दी सुनाके परिवर्तन कर लो ।

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02:09:21.770 --> 02:09:34.970
और करने में कोई कोई बहुत अच्छे बच्चे हैं जो अपना हाल स्पष्ट सुना देते हैं ।

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02:09:36.109 --> 02:09:41.479
तो यह बहुत अच्छी बात है ।

346
02:09:43.479 --> 02:09:51.369
मिक्स तो होता है लेकिन मैजारिटी ।

347
02:09:55.819 --> 02:10:04.850
बाकी तो उन्नति हो रही है और उन्नति होती रहेगी ।

348
02:10:04.850 --> 02:10:07.710
अच्छा ।

349
02:10:07.710 --> 02:10:16.000
बापदादा खुश है ।

350
02:10:33.880 --> 02:10:38.449
अच्छा ।

