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आज चारों ओर के बच्चों में विशेष स्नेह समाया हुआ है ।

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आज के दिन को कहते ही हैं स्मृति दिवस ।

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00:23:51.140 --> 00:24:18.680
बापदादा ने अमृतवेले से चारों ओर देखा ,

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चाहे देश में , चाहे विदेश में सभी बच्चों के दिल में बाप के स्नेह की तस्वीर दिखाई दी ।

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00:24:59.710 --> 00:25:32.339
और बाप के दिल में भी हर एक बच्चे के स्नेह की तस्वीर समाई हुई थी ।

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00:25:46.170 --> 00:26:20.049
आज के दिन को विशेष स्नेह का , स्मृति का दिवस कहते हो ।

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00:26:26.569 --> 00:27:26.910
बापदादा ने अमृतवेले से भी पहले बच्चों के तरफ से अनेक स्नेह के मोतियों की मालायें देखी ।

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00:27:31.420 --> 00:28:14.569
हर एक बच्चे के दिल में आटोमेटिक यह गीत बज रहा है - मेरा बाबा , ब्रह्मा बाबा , मीठा बाबा ।

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00:28:18.680 --> 00:28:47.480
और बापदादा के दिल में यह गीत बज रहा है मीठे बच्चे , प्यारे बच्चे ।

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00:28:51.880 --> 00:29:32.049
आज हर एक के अन्दर और शक्तियों के सिवाए स्नेह की शक्ति ज्यादा समाई हुई है ।

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00:29:42.170 --> 00:30:24.339
यह परमात्म स्नेह , ईश्वरीय स्नेह सिर्फ संगमयुग पर ही अनुभव होता है ।

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00:30:30.279 --> 00:31:12.680
यह परमात्म स्नेह जो अनुभवी जाने , हर एक बच्चे को सहजयोगी बना देता है ।

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00:31:28.170 --> 00:32:19.710
बापदादा ने देखा सर्व बच्चों में स्नेह का अनुभव बहुत-बहुत समाया हुआ है ।

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00:32:28.049 --> 00:32:47.710
आप सबका जन्म का आधार स्नेह है ।

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00:32:47.710 --> 00:33:00.680
ऐसा कोई भी बच्चा नहीं दिखाई देता ,

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और शक्तियां कम भी हों

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00:33:17.309 --> 00:34:11.369
लेकिन बाप का स्नेह या निमित्त बनी हुई विशेष आत्माओं के स्नेह का अनुभव मैजारिटी सभी के दिल में , चेहरे में दिखाई देता है ।

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00:34:15.019 --> 00:34:31.369
अभी आप सबको आज विशेष यहाँ तक किसने पहुंचाया ?

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00:34:32.449 --> 00:34:38.219
किस विमान में आये ?

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00:34:41.079 --> 00:34:50.400
ट्रेन में आये या विमान में आये ?

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00:34:52.400 --> 00:35:11.820
सबकी सूरत में स्नेह के प्लेन से पहुंच गये ।

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00:35:29.650 --> 00:35:49.880
कुछ भी करना पड़ा लेकिन स्नेह के प्लेन में सभी पहुंच गये हो ।

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00:36:00.340 --> 00:36:19.820
आज के दिन को स्मृति दिवस कहा जाता है

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लेकिन स्मृति दिवस के साथ-साथ समर्थी दिवस भी कहा जाता है ।

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00:36:54.449 --> 00:37:11.880
आज के दिन को ताजपोशी का दिन भी कहा जाता है

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क्योंकि आज के दिन बापदादा ने विशेष ब्रह्मा बाप ने निमित्त बने हुए

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00:37:52.909 --> 00:38:17.079
महावीर बच्चों को विश्व सेवा का ताज पहनाया ।

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00:38:20.219 --> 00:39:01.769
बाप , ब्रह्मा बाप खुद अननोन हुए और बच्चों को विश्व सेवा के स्मृति का तिलक दिया ।

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00:39:03.769 --> 00:39:27.369
बच्चों को करनहार बनाया और स्वयं करावनहार बनें ।

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00:39:42.969 --> 00:40:11.599
अपने समान फरिश्ते रूप का वरदान देकर लाइट का ताज पहनाया

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00:40:27.199 --> 00:41:17.710
और बापदादा ने जो ताज , तिलक का वरदान दिया , उसी प्रमाण बच्चों का कर्तव्य देख खुश है ।

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00:41:21.880 --> 00:42:11.880
बच्चों ने सेवा का वरदान कार्य में लाया , यह देख बापदादा खुश है ।

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00:42:22.619 --> 00:42:46.400
अभी तक जो पार्ट बजाया है और आगे भी बजाना है ,

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00:42:46.400 --> 00:43:14.280
उसकी पदमगुणा ब्रह्मा बाप विशेष मुबारक दे रहे हैं ।

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00:43:26.050 --> 00:43:32.400
वाह बच्चे वाह !

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00:43:38.340 --> 00:43:53.599
विदेश में भी चक्कर लगाया तो क्या देखा ?

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00:43:53.599 --> 00:44:17.769
हर बच्चा स्नेह में समाया हुआ है ।

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00:44:52.170 --> 00:45:04.909
जो बाप द्वारा समार्थियाँ मिली हैं

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00:45:05.769 --> 00:45:36.909
क्योंकि यह दिन विशेष स्नेह से समार्थियों का वरदान प्राप्त करने का दिन है ।

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00:46:26.219 --> 00:47:11.480
बापदादा ने देखा कोई-कोई बच्चे बहुत अच्छे लगन में याद में , सेवा में लगे हुए हैं ।

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00:47:13.480 --> 00:47:32.449
अमृतवेला बहुत अच्छी रीति से अनुभव करते हैं ।

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00:47:36.800 --> 00:47:46.619
अशरीरीपन का भी अनुभव करते हैं

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00:47:55.940 --> 00:48:22.510
लेकिन जब कर्मयोगी बनने का समय आता है

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तो दोनों काम योगी का भी और कर्म का भी , दो काम इकठ्ठा करने में फर्क पड़ जाता है ।

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00:49:18.170 --> 00:49:36.170
पुरूषार्थ करते हैं कि कर्म और योग का बैलेन्स हो

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00:49:36.170 --> 00:50:17.480
लेकिन जैसे अमृतवेले शक्तिशाली अवस्था का अनुभव करते हैं ,

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वैसे कर्म में फर्क पड़ जाता है , मेहनत करनी पड़ती है

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और बापदादा ने सभी बच्चों को कह दिया है

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00:51:03.309 --> 00:51:44.570
कि विश्व का विनाश अचानक होना है , अगर सारा दिन अटेन्शन के बजाए ,

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00:51:46.570 --> 00:52:13.650
किसी भी धारणा की कमी होने के कारण कर्मयोगी की स्टेज में फर्क आता है

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तो विश्व के विनाश की डेट तो बापदादा अनाउन्स नहीं करेंगे

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00:52:44.170 --> 00:53:04.679
लेकिन अपना जीवन काल समाप्त कब होना है , यह मालूम है ?

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00:53:13.139 --> 00:53:27.420
कोई को मालूम है कि मेरा मृत्यु फलानी डेट पर होना है , है मालूम ?

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00:53:27.420 --> 00:53:32.000
वह हाथ उठाओ ।

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00:53:45.019 --> 00:54:27.079
अचानक कुछ भी हो सकता है , कोई प्रकृति का कारण बनता है तो कितने का मृत्यु साथ में हो जाता है ।

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00:54:38.909 --> 00:54:59.940
तो विश्व के डेट के संकल्प से अलबेला नहीं बनना ।

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00:55:14.849 --> 00:55:41.820
आपकी जगदम्बा का स्लोगन था - तो कभी भी कब नहीं कहो , अब ।

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00:55:43.820 --> 00:56:04.679
कल कुछ भी हो जाए लेकिन मुझे एवररेडी रहना ही है।

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00:56:10.050 --> 00:56:39.769
तो इतनी तैयारी सबके अटेन्शन में है ?

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00:56:50.400 --> 00:57:17.139
अपना कर्मों का हिसाब चुक्तू किया है ?

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00:57:22.050 --> 00:58:09.369
चार ही सबजेक्ट ज्ञान , योग , सेवा और धारणा , चार ही तरफ , चारों में ऐसी तैयारी है ?

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00:58:14.219 --> 00:58:52.170
पूरा बेहद के वैराग्य का अनुभव चेक किया है ?

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00:59:08.619 --> 00:59:38.679
अपनी दिल में यह चेक किया है कि एवररेडी हैं?

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00:59:38.679 --> 00:59:47.650
नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप

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01:00:02.000 --> 01:00:44.570
क्योंकि ब्रह्मा बाप ने भी स्वयं को पुरूषार्थ करके ऐसा बनाया जो अनुभवी बच्चों ने देखा ,

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01:00:48.909 --> 01:01:54.510
कोई भी तरफ यह वातावरण नहीं था , कोई हिसाब किताब का , अचानक अशरीरी बनने का अभ्यास अशरीरी बनाकर उड़ गये ।

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01:01:57.480 --> 01:02:16.570
कोई ने समझा कि ब्रह्मा बाप जाने वाले हैं !

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01:02:16.570 --> 01:02:49.420
लेकिन नष्टोमोहा , बच्चों के हाथ में हाथ होते कहाँ आकर्षण रही ?

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01:02:50.619 --> 01:02:56.679
फरिश्ता बन गये ।

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01:03:06.050 --> 01:03:20.000
बच्चों को फरिश्ते बनाने का तिलक दे गये ।

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01:03:30.340 --> 01:03:54.619
इसका कारण बहुत समय अशरीरीपन का अभ्यास रहा ।

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01:03:56.000 --> 01:04:26.510
कई अनुभवी बच्चे जो साथ रहे हैं उन्होंने अनुभव किया , कर्म करते करते ऐसे अशरीरी बन जाते ।

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01:04:33.880 --> 01:04:45.820
तो यह जो कर्मयोग में अन्तर पड़ जाता है ,

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इसका कारण कर्म करते यह स्मृति में इमर्ज नहीं होता ,

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01:05:24.739 --> 01:05:50.110
मैं आत्मा हूँ , यह तो सब जानते ही हैं लेकिन मैं आत्मा , कौन सी आत्मा हूँ ?

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01:05:52.110 --> 01:06:08.909
मैं करावनहार आत्मा हूँ और यह कर्मेन्द्रियां करनहार हैं ,

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01:06:12.510 --> 01:06:36.170
यह करावनहार का स्वमान कर्म करते स्मृति स्वरूप में रहे ,

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01:06:38.849 --> 01:07:04.000
चाहे कर्मेन्द्रियों से कर्म कराना है लेकिन मैं करावनहार हूँ , मालिक हूँ ,

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01:07:05.769 --> 01:07:29.139
इस सीट पर अगर सेट है तो कोई भी कर्मेन्द्रिय आर्डर में रहेगी ।

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01:07:29.139 --> 01:07:41.940
बिना सीट पर सेट होते कोई किसका नहीं मानता ।

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01:07:45.369 --> 01:08:05.650
तो करावनहार आत्मा हूँ , यह कर्मेन्द्रियां करनहार हैं , करावनहार नहीं है ।

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01:08:08.800 --> 01:08:22.109
जैसे ब्रह्मा बाप का अनुभव सुना

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01:08:22.109 --> 01:09:02.220
कि ब्रह्मा बाप ने शुरू में यह अभ्यास किया जो रोज़ समाप्ति के समय इन कर्मेन्द्रियों की राज दरबार लगाते थे ।

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01:09:03.649 --> 01:09:15.310
पुराने बच्चों ने वह डायरी देखी होगी

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01:09:16.220 --> 01:09:49.649
तो रोज दरबार लगाते थे और करावनहार मालिक बन हर कर्मेन्द्रियों का समाचार लेते थे , देते थे ।

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01:09:51.649 --> 01:10:07.539
इतना अटेन्शन शुरू में ही ब्रह्मा बाप ने भी किया

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01:10:08.340 --> 01:10:35.310
तो आपको भी करावनहार मालिक समझ , क्योंकि आत्मा राजा है यह कर्मेन्द्रियां साथी हैं ।

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01:10:38.050 --> 01:10:44.800
तो यह चेक करना चाहिए

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01:10:45.819 --> 01:11:17.310
कि आज के दिन विशेष मन-बुद्धि संस्कार , स्वभाव कहो संस्कार कहो इन्हों का क्या हाल रहा ?

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01:11:18.619 --> 01:11:32.680
और फौरन चेक करने से कर्मेन्द्रियों को अटेन्शन रहता है

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01:11:32.680 --> 01:12:04.109
कि हमारा राजा हमारा हालचाल लेगा , तो आत्मा राजा करनहार कर्मेन्द्रियों से करावनहार बन चेक करो ।

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01:12:04.109 --> 01:12:22.050
नहीं तो देखा गया है कई बच्चे कहते हैं

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01:12:30.170 --> 01:12:54.109
कि हम कर्मेन्द्रियों को आर्डर करते हैं लेकिन फिर हो जाता है ।

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01:12:56.109 --> 01:13:17.600
पुरूषार्थ करते हैं लेकिन कोई-कोई संस्कार या स्वभाव आर्डर में नहीं रहते ।

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01:13:18.680 --> 01:13:32.569
उसका कारण इसी अपने स्वमान की सीट पर सेट नहीं रहते ।

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01:13:34.569 --> 01:13:56.680
बिना सीट पर बैठने के आर्डर कितना भी करो तो आर्डर मानने वाले मानते नहीं हैं ।

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01:13:58.680 --> 01:14:21.140
तो कर्म करते अपने करावनहार मालिकपन की सीट पर सेट रहो ।

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01:14:22.279 --> 01:14:37.710
कई बच्चे यह भी बापदादा से रूहरिहान करते

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01:14:38.970 --> 01:15:12.970
कि बाबा आपने हमें सर्व शक्तिवान बनाया , शक्तिवान भी नहीं सर्वशक्तिवान का वरदान हर एक बच्चे को ब्राह्मण जन्म लेते हुए दिया है ,

100
01:15:13.710 --> 01:15:22.340
याद है अपने जन्म का वरदान !

101
01:15:24.340 --> 01:15:42.170
हर एक बच्चे को बाप ने मास्टर सर्वशक्तिवान भव का वरदान दिया है ।

102
01:15:42.739 --> 01:15:46.850
किसने वरदान दिया ?

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01:15:46.850 --> 01:15:54.569
आलमाइटी अथॉरिटी ने ।

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01:15:55.649 --> 01:16:16.970
लेकिन कम्पलेन करते हैं कि जिस समय जो शक्ति चाहिए वह आती नहीं है ।

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01:16:16.970 --> 01:16:22.220
आर्डर नहीं मानती है ।

106
01:16:25.369 --> 01:16:28.109
वह क्यों ?

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01:16:28.109 --> 01:16:41.939
जब आलमाइटी अथॉरिटी का वरदान है , उससे बड़ा कोई नहीं ।

108
01:16:46.850 --> 01:17:02.109
तो वरदान के स्थिति में स्थित रहकरके अगर आर्डर करो

109
01:17:02.109 --> 01:17:14.850
तो हो नहीं सकता कि आप आर्डर करो और शक्ति नहीं मानें ।

110
01:17:16.109 --> 01:17:32.000
एक तो आत्मा मालिक है , सर्वशक्तिवान का वरदान मिला हुआ है ,

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01:17:32.000 --> 01:17:44.510
उस स्वरूप में स्थित होके मालिक हूँ , वरदान है ,

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01:17:44.510 --> 01:18:02.170
दोनों स्वरूप की स्मृति के स्थिति में रहके आर्डर करो ।

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01:18:04.170 --> 01:18:19.649
शक्ति आपका नहीं मानें असम्भव

114
01:18:20.850 --> 01:18:59.770
क्योंकि वरदान और बाप के प्रापर्टी का अधिकार संगमयुग पर आप सबको सर्वशक्तिवान का टाइटिल मिला है

115
01:19:02.170 --> 01:19:10.279
सिर्फ उस स्थिति में स्थित नहीं रहते ।

116
01:19:10.279 --> 01:19:13.479
सदा नहीं रहते ।

117
01:19:13.479 --> 01:19:18.619
कभी-कभी आ जाता है ।

118
01:19:19.199 --> 01:19:35.770
यह कभी शब्द अपने ब्राह्मण डिक्शनरी से निकाल दो ।

119
01:19:37.770 --> 01:19:40.739
अभी अभी हाजिर ।

120
01:19:40.739 --> 01:19:54.399
आप कहते हो ना कि बाबा आपको हम याद करते हैं तो आप हाजिर हो जाते हैं ।

121
01:19:54.399 --> 01:19:56.800
है अनुभव ?

122
01:19:56.800 --> 01:19:59.199
हाथ उठाओ ।

123
01:19:59.199 --> 01:20:03.420
अनुभव है ?

124
01:20:03.420 --> 01:20:10.050
अभी देखो , हाथ तो उठा रहे हो ।

125
01:20:12.909 --> 01:20:16.220
बाप हाजिर हो जाता ।

126
01:20:16.800 --> 01:20:25.369
हजूर हाजिर हो जाता , तो यह शक्ति क्या है ?

127
01:20:27.369 --> 01:20:44.449
यह शक्तियां भी आपको बाप के प्रापर्टी में मिली हैं ।

128
01:20:46.739 --> 01:20:54.449
तो मालिक बनके आर्डर करो ।

129
01:20:55.420 --> 01:21:14.739
मालिक बनके आर्डर नहीं करते हो , शक्ति खो जाती है ना तो उसी स्थिति में रहते हुए आर्डर करते हो ,

130
01:21:17.250 --> 01:21:24.340
तो मालिक ही नहीं है आर्डर क्यों मानें !

131
01:21:27.770 --> 01:21:37.369
तो बापदादा अभी क्या चाहते हैं ?

132
01:21:41.479 --> 01:21:46.220
पता है ना !

133
01:21:46.850 --> 01:22:30.170
बाप अभी यही चाहते हैं कि मेरा एक-एक बच्चा कर्म करते हुए भी राजा बच्चा बन , स्वराज्य अधिकारी बन स्वराज्य की सीट को नहीं छोड़े ।

134
01:22:39.710 --> 01:22:47.420
तो राजा सारा दिन राजा ही होता है ना !

135
01:22:47.420 --> 01:22:52.340
कि कभी राजा होता है कभी नहीं ।

136
01:22:52.340 --> 01:23:01.420
तख्त पर बैठना या नहीं बैठना वह अलग बात है

137
01:23:01.420 --> 01:23:11.880
लेकिन घर में भी रहते मैं राजा हूँ , यह तो नहीं भूलता ।

138
01:23:13.199 --> 01:23:41.710
तो कर्मयोगी और अमृतवेले के यथार्थ योग शक्तिशाली स्थिति उसमें फर्क नहीं पड़ना चाहिए ।

139
01:23:43.710 --> 01:23:58.800
डबल काम है लेकिन आप कौन हो ?

140
01:24:00.800 --> 01:24:15.539
आप तो विश्व के परिवर्तक हो , विश्व कल्याणकारी हो ।

141
01:24:19.310 --> 01:24:43.250
इसलिए बाप यही चाहते कि चलते-फिरते राजापन नहीं भूलो , सीट को नहीं छोड़ो ।

142
01:24:43.250 --> 01:24:52.220
बिना सीट के कोई आर्डर नहीं मानता ।

143
01:24:52.800 --> 01:25:05.880
आजकल देखो सीट के पीछे कितना कुछ करते हैं ?

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01:25:06.970 --> 01:25:17.250
अपना हक लेने के लिए कितना प्रयत्न करते ।

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01:25:19.250 --> 01:25:27.199
अपना हक कोई छोड़ने नहीं चाहता ।

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01:25:27.199 --> 01:25:41.939
तो आप अपना परमात्म हक मैं कौन !

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01:25:45.770 --> 01:26:09.140
हर समय जो काम करते हो तो काम करते भी अपने मन का टाइमटेबल बनाके रखो ।

148
01:26:09.140 --> 01:26:20.850
यह काम करते हुए मन का स्वमान क्या रहेगा ?

149
01:26:20.850 --> 01:26:32.800
आज के दिन कौन सा लक्ष्य रखूंगा ?

150
01:26:32.800 --> 01:26:47.649
हर काम के टाइम जो भी अपने स्वमान की लिस्ट है ,

151
01:26:48.220 --> 01:27:12.109
भले भिन्न-भिन्न टाइमटेबल बनाओ जैसे स्थूल कर्म का टाइमटेबल फिक्स करते हो वैसे मन का टाइमटेबल फिक्स करो ।

152
01:27:12.680 --> 01:27:27.199
मालूम तो है इस समय यह काम करना है , उसके साथ स्वमान कौन सा रखना है ?

153
01:27:27.939 --> 01:27:42.739
मालिकपन का अधिकार किस स्वमान के रूप में रखना है , यह मन का टाइमटेबल बनाओ ।

154
01:27:42.739 --> 01:27:48.909
टाइमटेबल बनाने आता है ना !

155
01:27:48.909 --> 01:27:52.340
माताओं को आता है ?

156
01:27:52.340 --> 01:28:02.850
मातायें अपना आपेही प्रोग्राम बनाओ ।

157
01:28:02.850 --> 01:28:15.770
अच्छा खाना बनाना है उस समय कौन सा स्वमान अपनी बुद्धि में इमर्ज रखना है ।

158
01:28:15.770 --> 01:28:20.970
बहुत माला है स्वमान की ।

159
01:28:21.939 --> 01:28:37.310
इतनी बड़ी माला है जो स्वमान गिनती करते जाओ और माला में समा जाओ ।

160
01:28:38.449 --> 01:29:01.020
तो अभी बहुतकाल का भी कोई बच्चे कहते हैं , अभी तक तो विनाश का कुछ दिखाई नहीं देता है ।

161
01:29:02.050 --> 01:29:17.539
अभी तो डेट फिक्स नहीं है , कर लेंगे , हो जायेगा , यह अलबेलापन है ।

162
01:29:22.000 --> 01:29:31.880
सन्देश देने में भी विश्व कल्याणकारी हैं ,

163
01:29:31.880 --> 01:29:50.050
तो कई बच्चे समझते हैं अभी समय पड़ा है , आगे चलवे सन्देश दे देंगे , लेकिन नहीं ।

164
01:29:52.050 --> 01:30:07.369
जिनको पीछे सन्देश देंगे वह भी आपको उल्हना देंगे क्या उल्हना देंगे ?

165
01:30:07.369 --> 01:30:20.619
आपने पहले क्यों नहीं बताया तो हम भी कुछ कर लेते थे , अभी आपने लास्ट में बताया ।

166
01:30:21.199 --> 01:30:38.569
तो हम तो सिर्फ पहचान कर अहो प्रभू तेरी लीला अपार है , यही कह सकेंगे ।

167
01:30:38.569 --> 01:30:44.109
पद तो पा नहीं सकेंगे ।

168
01:30:44.850 --> 01:30:46.800
क्यों ?

169
01:30:46.800 --> 01:30:56.170
बहुत समय का भी सहयोग चाहिए ।

170
01:30:56.970 --> 01:31:02.739
आप सभी वारिस बैठे हो ना !

171
01:31:02.739 --> 01:31:13.600
जो अपने को समझते हैं हम वारिस हैं , वह हाथ उठाओ , वारिस हैं ?

172
01:31:22.510 --> 01:31:36.569
अच्छा , वारिस हैं तो आपको फुल वर्सा पाना है या थोड़ा ?

173
01:31:37.020 --> 01:31:42.569
सभी कहेंगे फुल वर्सा पाना है ।

174
01:31:44.569 --> 01:32:17.310
तो फुल वर्सा है 21 जन्म पूरे , आदि से अन्त तक रॉयल प्रजा नहीं , रॉयल फैमिली में आना ।

175
01:32:17.770 --> 01:32:22.170
राज्य फैमिली में आना ।

176
01:32:22.170 --> 01:32:25.939
तख्त पर तो एक ही बैठेंगे ना ।

177
01:32:25.939 --> 01:32:29.369
युगल बैठेंगे ।

178
01:32:29.369 --> 01:32:42.970
लेकिन वहाँ की सभा जब भी लगती है

179
01:32:42.970 --> 01:32:58.399
तो रॉयल फैमिली के विशेष निमित्त आत्मायें वह ताजधारी बनके बैठते हैं ।

180
01:32:58.399 --> 01:33:02.619
बिना ताज नहीं बैठते हैं ।

181
01:33:04.050 --> 01:33:17.479
और हर कार्य में सलाह , राय देने वाले ऐसे नहीं

182
01:33:17.479 --> 01:33:26.050
कि सिर्फ वह राज्य करेगा , साथ में राय से ही करते हैं

183
01:33:26.050 --> 01:33:40.000
इसलिए अगर सम्पूर्ण वर्सा लेना है

184
01:33:40.000 --> 01:34:04.680
तो पहले जन्म से लेके अन्त तक 21 जन्म पूरे आधे भी नहीं , बीच में तो जाना नहीं है , अकाले मृत्यु तो होना नहीं है ।

185
01:34:09.020 --> 01:34:22.000
तो पूरा वर्सा लेना है कि थोड़े में खुश होना है ?

186
01:34:27.369 --> 01:34:44.510
आपकी मातेश्वरी जगत अम्बा सदा यह लक्ष्य रखती थी

187
01:34:44.510 --> 01:35:14.399
बापदादा ने जो श्रीमत , चाहे मन्सा चाहे वाचा चाहे कर्मणा , जो भी श्रीमत दी वह हमें करना ही है ।

188
01:35:18.340 --> 01:35:51.770
ऐसे पूरा वर्सा लेने वाले यही लक्ष्य बुद्धि में रखो कि अचानक एवररेडी और बहुत समय, तीनों ही शब्द साथ में याद रखो।

189
01:35:56.739 --> 01:36:25.420
इसलिए बापदादा के सभी आशाओं के दीपक बच्चों प्रति यही वरदान है

190
01:36:27.420 --> 01:36:59.710
कि सदा यह तीनों ही शब्द याद रखकर सभी आशाओं के दीपक बनने का प्रत्यक्ष सबूत दिखाओ ।

191
01:37:03.140 --> 01:37:21.819
बापदादा ने देखा बच्चों ने भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्स बनाये हैं ।

192
01:37:23.250 --> 01:37:26.050
अच्छा है ।

193
01:37:26.050 --> 01:37:50.680
बापदादा मुबारक देते हैं लेकिन अब समय प्रमाण कोर्स के बजाए फोर्स का कोर्स कराओ ।

194
01:37:52.170 --> 01:38:22.050
ऐसा फोर्स का कोर्स कराओ जो वह आत्मायें बाप के सिर्फ स्नेही-सहयोगी नहीं बनें

195
01:38:22.050 --> 01:38:45.140
लेकिन हर श्रीमत को पालन करने वाली फोर्स , सर्व फोर्स भरने वाली आत्मा बनें ।

196
01:38:47.140 --> 01:38:52.050
समीप का रत्न बनें ।

197
01:38:57.649 --> 01:39:01.600
यह हो सकता है ?

198
01:39:01.600 --> 01:39:07.079
अभी फोर्स का कोर्स कराओ ।

199
01:39:10.050 --> 01:39:28.109
क्योंकि बापदादा देख रहे हैं कि अभी प्रकृति हलचल में आ गई

200
01:39:29.140 --> 01:39:55.250
इसलिए कोई न कोई कारण प्रकृति की हलचल अपना प्रभाव दिखा रही है और दिखाती रहेगी ।

201
01:40:00.569 --> 01:40:15.079
जो ख्याल ख्वाब में बातें नहीं हैं वह प्रैक्टिकल देखते चलेंगे ।

202
01:40:28.510 --> 01:40:38.109
तो प्रकृति को भी सतोप्रधान बनाना है ।

203
01:40:39.020 --> 01:40:49.369
अभी तो अपने-अपने प्रभाव डाल रही है ,

204
01:40:49.369 --> 01:41:02.399
इसलिए समय प्रति समय नई-नई बातें होती रहती हैं ।

205
01:41:11.770 --> 01:41:21.539
लेकिन आप सब तो वारिस हो ना !

206
01:41:22.970 --> 01:41:36.109
सिर्फ स्नेही सहयोगी नहीं वारिस , फुल अधिकारी ।

207
01:41:42.050 --> 01:41:44.170
है ?

208
01:41:44.170 --> 01:41:47.819
वारिस हैं ना !

209
01:41:48.449 --> 01:41:52.340
वारिस है !

210
01:41:56.279 --> 01:42:02.340
डबल फारेनर्स भी वारिस हैं ना !

211
01:42:02.340 --> 01:42:06.619
वारिस है ?

212
01:42:10.399 --> 01:42:13.819
फुल वर्सा लेने वाले ।

213
01:42:13.819 --> 01:42:18.279
अधूरा नहीं ।

214
01:42:21.479 --> 01:42:32.000
पाण्डव फुल वर्सा लेने वाले हो ?

215
01:42:53.199 --> 01:43:04.970
तो बापदादा की आशा का दीपक हूँ ।

216
01:43:27.369 --> 01:43:48.569
तो यही याद रखो - स्मृति दिवस पर हर एक बच्चा चाहे आये हैं , चाहे अभी नहीं आये हैं ,

217
01:43:48.569 --> 01:44:24.449
चाहे दूर बैठे दिल में समाये हुए हैं , हर एक को बापदादा की यह आज्ञा -

218
01:44:27.369 --> 01:44:47.079
बनना और मानना है कि मुझे कभी शब्द नहीं कहना है ।

219
01:44:47.079 --> 01:45:03.539
अभी-अभी , कल भी किसने देखा , आज ।

220
01:45:04.109 --> 01:45:14.619
जो करना है वह करना ही है , सोचना नहीं ।

221
01:45:14.619 --> 01:45:26.050
सोचेंगे , करेंगे , हो जायेगा , यह बाप को भी दिलासा देते हैं ।

222
01:45:26.050 --> 01:45:36.220
बाबा आप ख्याल नहीं करो हम समय पर ठीक हो जायेंगे ।

223
01:45:37.250 --> 01:45:57.600
लेकिन बापदादा यही चाहते कि अभी-अभी कोई भी पेपर आ जाए तो हर एक बच्चा फुल पास हो जाए ।

224
01:45:57.600 --> 01:46:00.680
हो सकता है ?

225
01:46:00.680 --> 01:46:03.079
हो सकता है ?

226
01:46:03.079 --> 01:46:07.770
फुल पास होना है ?

227
01:46:14.569 --> 01:46:16.619
अच्छा ।

228
01:46:16.619 --> 01:46:23.710
आज जो पहली बार आये हैं वह उठो ।

229
01:46:44.569 --> 01:47:06.449
पहले बारी आने वालों को बापदादा आने की बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं

230
01:47:10.800 --> 01:47:32.340
और वरदान दे रहे हैं कि तीव्र पुरूषार्थी बन आप चाहो तो आगे से आगे आ सकते हो ।

231
01:47:32.340 --> 01:47:45.600
यह वरदान प्रैक्टिकल में लाने चाहे तो बापदादा का वरदान है ।

232
01:47:49.479 --> 01:48:08.449
इसके लिए पहले आने वालों के लिए बापदादा खुशखबरी सुना रहे हैं

233
01:48:08.449 --> 01:48:24.619
कि लास्ट सो फास्ट , फास्ट सो फर्स्ट , यह दिल खुश मिठाई खा लो ।

234
01:48:32.510 --> 01:48:41.140
बापदादा को यह खुशी है

235
01:48:41.880 --> 01:49:00.340
कि फिर भी टू लेट के बोर्ड के पहले आ गये , यह बहुत खुशी की बात है ।

236
01:49:10.050 --> 01:49:24.449
आप लोग अगर आगे गये तो हम सब खुश होंगे यह नहीं कहेंगे कि आप क्यों , हम क्यों नहीं , नहीं ।

237
01:49:24.449 --> 01:49:28.569
पहले आप ।

238
01:49:30.569 --> 01:49:37.770
अच्छा - बैठ जाओ , दिलखुश मिठाई खाई !

239
01:49:55.539 --> 01:50:47.369
सेवा का टर्न इन्दौर ज़ोन का है :- इन्डोर का अर्थ ही है , लकीर के अन्दर रहने वाले ।

240
01:50:52.800 --> 01:51:11.250
तो बापदादा को हर एक ज़ोन की सेवा का उमंग उत्साह देख खुशी होती है

241
01:51:12.000 --> 01:51:41.600
और चांस भी सभी अच्छी तरह से लेते रहते हैं क्योंकि जानते हो कि सेवा का मेवा मिलता है ।

242
01:51:42.399 --> 01:51:46.449
कौन सा मेवा मिलता है ?

243
01:51:48.909 --> 01:51:57.140
सभी की आशीर्वाद मिलती है ।

244
01:51:59.140 --> 01:52:13.819
लोग तो समझते हैं एक ब्राह्मण को खिलाया , बहुत पुण्य जमा हुआ ।

245
01:52:13.819 --> 01:52:22.000
लेकिन आप कितने ब्राह्मणों को खिलाते हो ।

246
01:52:25.079 --> 01:52:37.140
कितना पुण्य और सभी सच्चे ब्राह्मण हैं ।

247
01:52:39.880 --> 01:52:49.479
तो आप सभी ने सेवा का मेवा खाया ?

248
01:52:49.479 --> 01:52:53.819
खाया ?

249
01:52:55.199 --> 01:52:59.079
तो तन्दरूस्त हो ना !

250
01:52:59.079 --> 01:53:05.819
मेवा खाने से तन्दरूस्त बनते हैं ।

251
01:53:11.649 --> 01:53:14.279
तो अच्छा है ।

252
01:53:14.279 --> 01:53:25.710
हर ज़ोन में देखा गया कि संख्या बढ़ती जाती है

253
01:53:25.710 --> 01:53:43.420
लेकिन बापदादा ने पहले भी कहा है कि संख्या बढ़ रही है , यह तो बहुत अच्छा ।

254
01:53:43.420 --> 01:54:03.819
सन्देश मिला , बाप का पैगाम मिला और बाप के बने इसके लिए बहुत-बहुत मुबारक हो

255
01:54:03.819 --> 01:54:22.220
लेकिन अभी समय अनुसार पहले भी बाप ने कहा है कि वारिस बनाओ ।

256
01:54:26.050 --> 01:54:40.279
इन्दौर ने पक्के वारिस , क्योंकि बापदादा उन वारिसों का पेपर लेंगे ।

257
01:54:42.279 --> 01:55:08.109
पहले नाम भेजो फिर बापदादा देखेंगे कि वारिस क्वालिटी कहाँ तक वारिसपन निभा रही हैं ।

258
01:55:10.619 --> 01:55:42.000
और दूसरा बापदादा ने कहा अनुभवी नामीग्रामी जिनका अनुभव सुनकर औरों को उमंग आवे , मैं भी बनूं ,

259
01:55:44.510 --> 01:55:52.170
वह माइक क्वालिटी भी तैयार करनी है ।

260
01:55:58.170 --> 01:56:04.909
तो किया , काम किया ?

261
01:56:05.369 --> 01:56:09.420
इन्दौर ने किया ?

262
01:56:17.710 --> 01:56:27.250
अभी बापदादा के पास लिस्ट नहीं आई है ।

263
01:56:39.600 --> 01:56:42.619
अच्छा ।

264
01:56:42.619 --> 01:57:24.569
( छतीसगढ़ की पूरी गवर्मेन्ट यहाँ आई , वह अभी माइक बनकर अच्छी सेवा कर रहे हैं ) अच्छा है ।

265
01:57:29.020 --> 01:57:33.479
यह सारे इन्दौर के हैं ।

266
01:57:33.479 --> 01:57:38.170
काफी संख्या है ।

267
01:57:44.739 --> 01:57:47.420
अच्छा है ।

268
01:57:49.420 --> 01:57:51.819
अच्छा ।

269
01:57:51.819 --> 01:59:00.050
बापदादा की इन्दौर में एक विशेष उम्मींद है क्योंकि यह ब्रह्मा बाप के अन्तिम समय पर खुद बापदादा ने इन्दौर सेन्टर खुलवाया है, इसलिए आज स्मृति दिवस मना रहे हैं तो इन्दौर को कोई ऐसी बात करनी है जो अभी तक न्यारी और प्यारी हो।

270
01:59:06.510 --> 01:59:24.569
सभी ज़ोन पुरूषार्थ कर रहे हैं अच्छा , बापदादा के पास समाचार तो सबका आता भी है ।

271
01:59:26.569 --> 01:59:45.649
लेकिन बापदादा अभी फास्ट आगे बढ़ने का जो चाहना रखते हैं ,

272
01:59:45.649 --> 02:00:07.199
निर्विघ्न ज़ोन , हर ज़ोन में जितने भी सेवाकेन्द्र हैं , उपसेवाकेन्द्र हैं

273
02:00:07.199 --> 02:00:22.000
लेकिन हर एरिया निर्विघ्न सेवाकेन्द्र हो ।

274
02:00:25.199 --> 02:00:36.510
हर एक में तीव्र पुरूषार्थ की लहर हो ।

275
02:00:38.510 --> 02:00:44.619
तो नम्बर इन्दौर ले लेवे ।

276
02:00:45.819 --> 02:01:06.680
इसमें नम्बरवन कोई भी ज़ोन ने रिपोर्ट नहीं दी है कि सारा ज़ोन निर्विघ्न है।

277
02:01:06.680 --> 02:01:31.079
पुरूषार्थ कर रहे हैं लेकिन चारों ओर चाहे गीता पाठशाला हो लेकिन निर्विघ्न हो ।

278
02:01:31.079 --> 02:01:39.479
यह रिर्पोट बापदादा चाहते हैं ।

279
02:01:49.140 --> 02:01:53.939
अच्छा ।

280
02:02:00.340 --> 02:02:38.449
मेडिकल विंग :- इस विंग में प्रैक्टिकल डाक्टर्स कितने हैं ?

281
02:02:38.449 --> 02:02:44.220
डाक्टर्स हाथ उठाओ ।

282
02:02:49.880 --> 02:02:54.739
अच्छा इतने डाक्टर्स हैं

283
02:03:01.020 --> 02:03:19.079
क्योंकि बापदादा ने देखा कि समय प्रमाण डाक्टर्स की सेवा और आगे बढ़ेगी

284
02:03:20.050 --> 02:03:38.279
क्योंकि आजकल के समय में चिंता और भय फैला हुआ है ।

285
02:03:39.199 --> 02:03:45.600
तो डाक्टर्स यह तो डबल डाक्टर्स होंगे ही ।

286
02:03:45.600 --> 02:03:55.939
डाक्टर्स जो डबल डाक्टर हैं वह हाथ उठाओ ।

287
02:03:55.939 --> 02:04:01.250
मन के भी तन के भी ।

288
02:04:03.250 --> 02:04:14.279
क्योंकि आजकल मन का रोग और बढ़ता जायेगा

289
02:04:14.279 --> 02:04:29.939
इसलिए डबल डाक्टर्स की सेवा और बढ़ती जायेगी ।

290
02:04:31.939 --> 02:04:47.369
प्रकृति की हलचल के कारण नये-नये रोग निकलते हैं

291
02:04:49.369 --> 02:05:02.170
तो ऐसे समय पर डबल डाक्टर्स की आवश्यकता है ।

292
02:05:04.170 --> 02:05:20.569
तो आप सभी एवररेडी हो, कहाँ भी बुलावा हो तो सेवा दे सकते हो?

293
02:05:20.569 --> 02:05:28.680
जो सेवा दे सकते हैं वह हाथ उठाओ ।

294
02:05:33.649 --> 02:05:35.880
बहुत अच्छा ।

295
02:05:35.880 --> 02:05:50.109
नाम नोट करके देना क्योंकि निमन्त्रण तो आते हैं तो समय निकालेंगे ?

296
02:05:50.109 --> 02:05:53.770
निकालेंगे ?

297
02:05:53.770 --> 02:06:01.079
जो समय के लिए भी तैयार हैं वह हाथ उठाओ ।

298
02:06:04.970 --> 02:06:07.199
अच्छा ।

299
02:06:07.199 --> 02:06:12.909
बहिनें कम उठा रही हैं ।

300
02:06:12.909 --> 02:06:17.710
सेवाकेन्द्र चलाना है ।

301
02:06:20.170 --> 02:06:26.970
इनका नाम नोट करके देना ।

302
02:06:29.600 --> 02:06:44.970
बापदादा डाक्टर्स की महिमा करते हैं क्यों महिमा करता है ?

303
02:06:44.970 --> 02:06:59.199
क्योंकि डाक्टर्स भी बापदादा के समान दुःख लेके सुख तो दे देते हैं ।

304
02:07:00.800 --> 02:07:06.050
लेकिन अल्पकाल के लिए देते हैं ।

305
02:07:06.050 --> 02:07:10.970
बाप सदाकाल के लिए देते हैं

306
02:07:10.970 --> 02:07:22.399
इसीलिए कहा कि डबल डाक्टर होंगे और समय निकालेंगे

307
02:07:22.399 --> 02:07:33.880
तो आप लोगों को आगे चल करके डबल डाक्टर्स की वैल्यु होगी ।

308
02:07:33.880 --> 02:07:44.109
बापदादा ने सुना कि डाक्टर्स को फुर्सत नहीं होती है

309
02:07:44.909 --> 02:07:58.109
लेकिन डाक्टर्स हर एक बिजी होते भी बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं ।

310
02:07:58.680 --> 02:08:10.399
पहले भी बापदादा ने सुनाया कि हर एक डाक्टर अपना कार्ड तो छपाते हो ।

311
02:08:10.399 --> 02:08:13.939
छपाते हो ना कार्ड ?

312
02:08:14.850 --> 02:08:25.939
तो एक तरफ तो अपना परिचय देते हो और दूसरा तरफ खाली होता है ,

313
02:08:26.850 --> 02:08:41.710
तो उस खाली तरफ आप मन की दवाई के लिए फलानी एड्रेस है ,

314
02:08:41.710 --> 02:08:59.600
यह अगर कार्ड जितने भी पेशेन्ट हैं उनको दो तो आपकी घर बैठे सेवा हो जायेगी ।

315
02:09:01.079 --> 02:09:08.000
क्योंकि डाक्टर्स का सभी मानते हैं ।

316
02:09:08.680 --> 02:09:16.000
कोई कितना भी कहेगा नहीं यह नहीं खाओ फिर भी खाते रहेंगे ।

317
02:09:16.000 --> 02:09:24.220
लेकिन डाक्टर्स अगर कहेंगे कि यह हो जायेगा , यह हो जायेगा ।

318
02:09:24.220 --> 02:09:26.220
तो कर लेते हैं ।

319
02:09:27.079 --> 02:09:34.680
मजबूरी से करें या प्यार से करें लेकिन करते हैं

320
02:09:34.680 --> 02:09:51.600
इसीलिए बापदादा कहते हैं कि डाक्टर्स बहुत सेवा कर सकते हैं और अच्छा है ।

321
02:09:51.600 --> 02:10:07.250
देखा गया है तो प्रोग्राम करते रहते हैं लेकिन थोड़ा और तेजी से होना चाहिए ।

322
02:10:09.250 --> 02:10:26.170
आपके भिन्न-भिन्न ज़ोन के डाक्टर्स अपने ज़ोन में ऐसा प्रोग्राम बनाओ

323
02:10:26.170 --> 02:10:40.449
जो वहाँ ही प्रोग्राम इकठ्ठा होके करते रहें तो आप बहुत सेवा कर सकते हो ।

324
02:10:44.220 --> 02:11:00.680
बापदादा को डाक्टर्स की सेवा आवश्यक लगती है क्योंकि यह तो बीमारियां बढ़नी ही हैं ।

325
02:11:01.250 --> 02:11:12.000
मन की बीमारी तो चारों ओर फैली हुई है

326
02:11:13.539 --> 02:11:24.739
तो आप लोगों के आक्युपेशन के डर से सभी मान सकते हैं ।

327
02:11:29.939 --> 02:11:33.939
अच्छा है ।

328
02:11:33.939 --> 02:11:46.800
बापदादा को पसन्द है इस वर्ग की सेवा और जोर-शोर से बढ़ाओ ।

329
02:11:52.109 --> 02:11:55.539
अच्छा ।

330
02:11:56.800 --> 02:12:40.220
डबल विदेशी :- ( 40 देशों से आये हैं ) :- आज तो विशेष सेरीमनी मनाने भी आये हैं ।

331
02:12:40.220 --> 02:13:04.170
बापदादा को खुशी है कि मधुबन में सेरीमनी मनाने के निमित्त सभी को उमंग-उत्साह आता है ।

332
02:13:04.170 --> 02:13:11.710
हाथ उठाओ जो सेरीमनी मनाने आये हैं ?

333
02:13:19.020 --> 02:13:21.310
अच्छा ।

334
02:13:21.310 --> 02:13:26.850
जिनकी सेरीमनी है वह हाथ उठाओ ।

335
02:13:27.479 --> 02:13:34.399
दो हाथ उठाओ ।

336
02:13:40.279 --> 02:13:43.770
बहुत अच्छा किया ।

337
02:13:44.449 --> 02:14:01.140
निमन्त्रण देने का , आबू की यात्रा कराने का यह चांस बहुत अच्छा लिया

338
02:14:03.140 --> 02:14:15.649
क्योंकि बापदादा की पधरामणी सिन्ध में हुई ।

339
02:14:15.649 --> 02:14:21.939
फाउण्डेशन सिन्ध है ।

340
02:14:24.569 --> 02:14:41.819
तो सिन्ध वाले अपना हक रखते हैं कि हम तो सिन्धी हैं ।

341
02:14:46.619 --> 02:14:59.420
अच्छा है यह भी एक विधि है सभी को यात्रा कराने की ।

342
02:15:00.449 --> 02:15:09.600
तो बापदादा विशेष मुबारक दे रहे हैं ।

343
02:15:16.970 --> 02:15:19.880
अच्छा लगा ना ।

344
02:15:19.880 --> 02:15:21.880
अपना घर ।

345
02:15:21.880 --> 02:15:27.140
अच्छा लगा ?

346
02:15:30.510 --> 02:15:43.770
क्योंकि यहाँ देखा होगा किसी भी कमरे में किसका नाम नहीं ।

347
02:15:45.770 --> 02:15:56.569
क्योंकि यह बाप का घर है ।

348
02:15:58.569 --> 02:16:08.000
तो आप बाप के बच्चे कहाँ आये हो ?

349
02:16:08.000 --> 02:16:12.050
अपने घर में ।

350
02:16:17.600 --> 02:16:23.250
यह भी अभी आये हैं ना ?

351
02:16:23.250 --> 02:16:25.420
तो कहाँ आये हो ?

352
02:16:25.420 --> 02:16:29.649
अपने घर में आये हो ।

353
02:16:33.020 --> 02:16:39.649
अपने परिवार में आये हो ।

354
02:16:47.709 --> 02:17:00.620
बापदादा यही कहते हैं कि राज्य और आध्यात्मिकता

355
02:17:00.620 --> 02:17:33.370
अगर दोनों मिलकर विशेष बापू गांधी जी के संकल्प को पूर्ण करने चाहें तो कर सकते हैं । सहज कर सकते हैं और करते जा रहे हैं ।

356
02:17:33.370 --> 02:17:54.569
बापदादा को खुशी है कि किसी न किसी संग के साथ अभी नेताओं में भी नाम फैल रहा है ।

357
02:17:59.250 --> 02:18:22.850
तीनों शक्तियां साइंस , आध्यात्मिकता और राज्य सत्ता , तीनों ही सत्तायें मिलकरके एक संकल्प करें , सहयोगी बनें

358
02:18:22.850 --> 02:18:49.479
तो हम बापू गांधी जी और बापू का भी बापू परमात्मा दोनों बाप की आशायें पूर्ण करेंगे तो बहुत सहज हो जायेगा ।

359
02:18:57.879 --> 02:19:23.540
अच्छा । डबल विदेशी - विदेश में भी भिन्न-भिन्न प्रकार की सेवायें चल रही हैं और चलती रहेंगी ।

360
02:19:23.540 --> 02:19:36.680
बापदादा ने देखा कि नये-नये प्लैन बनाते रहते हैं

361
02:19:36.680 --> 02:19:55.600
और प्रैक्टिकल में कर भी रहे हैं , फारेन वाले इन्डिया वालों को अपना अनुभव सुनाके सेवा कर रहे हैं

362
02:19:55.600 --> 02:20:17.079
और इन्डिया वाले फारेन वालों को अपने अनुभव सुना करके देश विदेश में आवाज फैला रहे हैं ,

363
02:20:17.079 --> 02:20:22.680
अभी भी प्रोग्राम कर रहे हैं ना ।

364
02:20:22.909 --> 02:20:26.280
अच्छा है ।

365
02:20:26.280 --> 02:20:31.200
अभी दूसरा नम्बर है ।

366
02:20:31.200 --> 02:20:48.000
( अभी सर्व इन्डिया प्रोग्राम चेन्नई में है ) बापदादा के पास सभी का उमंग उत्साह का पत्र और यादप्यार एडवांस में मिली है ,

367
02:20:48.000 --> 02:21:04.620
जो भी करते हैं , आरम्भ करते हैं तो पहले छोटा होता है फिर बढ़ता जाता है

368
02:21:05.079 --> 02:21:16.399
क्योंकि आजकल के समय में सभी को आवश्यकता लगती है ,

369
02:21:16.399 --> 02:21:34.280
तीन सत्ता होते भी धर्म सत्ता भी है , आध्यात्मिकता अलग है , धर्म सत्ता अलग है लेकिन सत्ता तो है ।

370
02:21:34.280 --> 02:21:43.139
तो भी जो चाहते हैं वह नहीं हो रहा है ।

371
02:21:43.879 --> 02:21:52.219
तो सभी सोचने लगते हैं कि कमी किसकी है ?

372
02:21:52.219 --> 02:22:04.450
तीन तो काम कर रही हैं , तो भी जो चाहते हैं वह नहीं हो रहा है ।

373
02:22:05.649 --> 02:22:17.200
तो अभी चाहते हैं लेकिन समय का बहाना देते हैं ।

374
02:22:17.200 --> 02:22:20.340
समय नहीं हैं ।

375
02:22:20.340 --> 02:22:39.770
क्या करें , क्या नहीं करें … लेकिन ऐसे अगर एक दो ग्रुप अपने को सहयोगी बनायें

376
02:22:40.569 --> 02:22:54.569
तो बापदादा का वरदान है कि भारत स्वर्ग बनना ही है ।

377
02:23:00.340 --> 02:23:09.139
दोनों बापू की आशायें पूर्ण होनी ही है ।

378
02:23:10.739 --> 02:23:21.600
तो फारेन वाले भी मन्सा सेवा से सहयोगी हैं ना !

379
02:23:22.510 --> 02:23:39.020
बापदादा ने देखा कि वृद्धि सब धर्मो में हो रही है , एक धर्म नहीं सिर्फ हिन्दू नहीं

380
02:23:39.020 --> 02:24:02.450
लेकिन मुस्लिम , बुद्धिष्ठ सब धर्म , क्रिश्चियन , सब धीरे धीरे आध्यात्मिकता में रूची ले रहे हैं ।

381
02:24:03.020 --> 02:24:17.879
पहले देखो ब्रह्माकुमारियों का नाम सुनके डरते थे , विनाश-विनाश क्या कहती हैं ।

382
02:24:17.879 --> 02:24:20.799
और अभी क्या कहते हैं ?

383
02:24:20.799 --> 02:24:32.049
अभी कहते हैं बताओ विनाश कब होगा , कैसे होगा और क्या करें ?

384
02:24:35.020 --> 02:24:47.079
इसलिए होना तो है ही यह तो गैरन्टी है ।

385
02:24:53.250 --> 02:25:10.340
आप सबको गैरन्टी है ना चाहे विदेश वाले चाहे भारत वाले गैरन्टी है ना , आपका सहयोग है ही है ।

386
02:25:12.340 --> 02:25:17.540
होना ही है ।

387
02:25:17.540 --> 02:25:24.680
ताली बजाओ ।

388
02:25:46.000 --> 02:25:52.219
सभी को उमंग अच्छा है ।

389
02:25:57.139 --> 02:26:21.370
और निमित्त बनी हुई आत्मायें चाहे पाण्डव , चाहे शक्तियां दोनों में उमंग उत्साह है ।

390
02:26:21.370 --> 02:26:39.079
सिर्फ अभी बापदादा ने जो इशारा दिया पुरूषार्थ को तीव्र करो ।

391
02:26:39.079 --> 02:26:52.110
पुरूषार्थ नहीं , पुरूषार्थ का समय गया अभी तीव्र पुरूषार्थ का समय है ।

392
02:26:52.850 --> 02:27:03.420
और कभी-कभी पर नहीं ठहरो , अभी ।

393
02:27:03.420 --> 02:27:10.799
अभी करना है , अभी बनना है ।

394
02:27:12.799 --> 02:27:16.620
तो होना ही है ।

395
02:27:16.620 --> 02:27:21.879
अच्छा ।

396
02:27:24.969 --> 02:28:01.250
कलकत्ता वालों ने आज फूलों का श्रृंगार किया है :- बापदादा ने देखा कि दिल से करते हैं ।

397
02:28:01.250 --> 02:28:12.680
श्रृंगार करना कोई बड़ी बात नहीं है , आपसे भी अच्छे करने वाले हैं

398
02:28:12.680 --> 02:28:31.540
लेकिन आपको बाप से प्यार है , बाप की पहचान थोड़ी बहुत है

399
02:28:31.540 --> 02:28:47.479
इसलिए जो भी श्रृंगार करते हो ना , उसमें सिर्फ काम नहीं लेकिन प्यार भी है ।

400
02:28:47.479 --> 02:29:02.569
तो जहाँ प्यार है वहाँ प्यार की खुशबू सबको अच्छी लगती है ।

401
02:29:05.709 --> 02:29:09.600
और हर साल आते हैं ।

402
02:29:10.739 --> 02:29:20.680
अपनी ड्युटी समझकर नहीं , लेकिन अपना काम समझ करके करते हैं ।

403
02:29:21.370 --> 02:29:27.079
तो मुबारक हो आप सबको ।

404
02:29:30.850 --> 02:29:39.139
निमित्त बने हुए उमंग हुल्लास दिलाते हैं ।

405
02:29:44.049 --> 02:29:47.770
बहुत अच्छा करते हो ।

406
02:29:48.340 --> 02:30:03.540
स्मृति दिवस आता है और कलकत्ता को याद करते हैं , विशेषता है ।

407
02:30:03.540 --> 02:30:06.280
मुबारक हो ।

408
02:30:15.309 --> 02:30:19.819
अच्छा ।

409
02:30:22.850 --> 02:30:50.170
चारों ओर के तीव्र पुरूषार्थी सदा उमंग उत्साह से कदम आगे बढ़ाने वाले

410
02:30:52.170 --> 02:31:11.770
जो सच्ची दिल से करते हैं उनके मस्तक पर विजय का तिलक बापदादा देख रहे हैं ,

411
02:31:14.620 --> 02:31:41.079
सभी को निश्चय है , नशा है तो हम विजयी हैं , विजयी थे और विजयी रहेंगे ,

412
02:31:41.079 --> 02:32:00.739
इसलिए हर एक के मस्तक में बापदादा विजय का तिलक देख रहे हैं ।

413
02:32:01.309 --> 02:32:25.940
चारों ओर के स्नेही भी हैं , आज अमृतवेले से बहुत-बहुत स्नेह की मालायें बापदादा के पास आई

414
02:32:26.510 --> 02:32:49.079
और बापदादा आप सभी बच्चों को रिटर्न में सदा विजयी बनने की माला डाल रहे हैं ।

415
02:32:51.250 --> 02:33:02.280
तो चारों ओर के बच्चे देख भी रहे हैं

416
02:33:02.280 --> 02:33:17.479
क्योंकि साइंस ने यह सब साधन आपके लिए भी बनाये हैं ,

417
02:33:18.450 --> 02:33:32.000
जो कहाँ भी बैठे देख सकते हो , सुन सकते हो , तो बापदादा देख रहे हैं ,

418
02:33:32.799 --> 02:33:47.079
जगह-जगह पर कैसे देख भी रहे हैं और सुन भी रहे हैं ,

419
02:33:47.079 --> 02:34:08.219
तो चारों ओर के बच्चों को बापदादा स्मृति दिवस की यादप्यार दे रहे हैं ।

420
02:34:09.020 --> 02:34:21.200
बापदादा के दिल में हर बच्चा समाया हुआ है

421
02:34:22.219 --> 02:34:52.049
और हर बच्चे की दिल में बाप समाया है , बाप की दिल में बच्चा समाया है , तो मुबारक हो , मुबारक हो और मुबारक के साथ नमस्ते भी ।

