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1
00:18:45.420 --> 00:19:34.799
आज ब्राह्मण संसार के रचयिता बापदादा अपने चारों ओर के ब्राह्मण संसार को देख रहे हैं ।

2
00:19:38.799 --> 00:20:01.819
हर एक ब्राह्मण सारे संसार में विशेष आत्मा है ।

3
00:20:05.880 --> 00:20:44.680
कोटों में कोई है क्योंकि साधारण तन में आये हुए बाप को पहचान लिया ।

4
00:20:50.569 --> 00:21:32.049
बापदादा भी दिल में समाने वाले बच्चों को दिल से दिल का प्यार दे रहे हैं ।

5
00:21:35.599 --> 00:22:24.970
हर एक बच्चा अपने को ऐसे बाप का प्यारा दिल में बाप को समाया हुआ अनुभव करते हैं !

6
00:22:29.079 --> 00:23:10.970
बाप के लिए हर बच्चा अति प्यारा सर्व का प्यारा है ।

7
00:23:15.309 --> 00:23:54.569
आप सभी बच्चों का सर्व आत्माओं के प्रति चैलेन्ज है कि हम योगी जीवन वाले हैं ।

8
00:23:57.769 --> 00:24:17.369
सिर्फ योग लगाने वाले नहीं लेकिन योगी जीवन वाले हैं ।

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00:24:19.880 --> 00:24:30.680
जीवन दो चार घण्टे की नहीं होती ।

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00:24:31.599 --> 00:24:45.079
जीवन सदाकाल के लिए होती है ।

11
00:24:47.079 --> 00:25:17.309
तो चलते फिरते कर्म करते योगी जीवन वाले निरन्तर योगी हैं ।

12
00:25:23.539 --> 00:25:44.569
चाहे योग में बैठते , चाहे कोई भी कर्म करते कर्मयोगी हैं ।

13
00:25:49.200 --> 00:26:07.539
जीवन का लक्ष्य ही है सदा योगी ।

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00:26:13.079 --> 00:26:45.309
ऐसे अपनी योगी जीवन , नेचरल जीवन अनुभव करते हो ?

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00:26:47.019 --> 00:27:16.509
बापदादा हर बच्चे के मस्तक में चमकता हुआ भाग्य देखते हैं ।

16
00:27:22.000 --> 00:27:27.250
क्या देखते हैं ?

17
00:27:27.819 --> 00:27:47.200
मेरा हर बच्चा स्वमानधारी , स्वराज्य अधिकारी है ।

18
00:27:51.940 --> 00:27:55.599
क्यों ?

19
00:27:55.599 --> 00:28:17.309
जहाँ स्वमान है वहाँ देहभान आ नहीं सकता ।

20
00:28:24.680 --> 00:28:55.079
आदि से अन्त तक , अब तक बापदादा ने हर एक बच्चे को भिन्न-भिन्न स्वमान दिये हैं ।

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00:28:55.539 --> 00:29:10.049
अगर अभी भी स्वमानों को याद करो

22
00:29:12.619 --> 00:29:28.619
और एक-एक स्वमान की माला फेरते जाओ

23
00:29:30.109 --> 00:29:59.769
तो अनेक स्वमान स्वरूप बन , स्वमान में लवलीन हो जायेंगे ।

24
00:30:02.569 --> 00:30:38.109
लेकिन बापदादा को एक बात बच्चों की अब तक भी अच्छी नहीं लगती , वह जानते हो कौन सी ?

25
00:30:40.109 --> 00:30:49.250
जब कोई भी बच्चा कहता है

26
00:30:50.400 --> 00:31:11.819
कि हमें स्वमान में स्थित होने में कभी-कभी मेहनत लगती है ,

27
00:31:13.539 --> 00:31:27.250
चाहते हैं लेकिन कभी-कभी मेहनत लगती है

28
00:31:29.769 --> 00:31:47.880
तो बाप सर्वशक्तिवान बच्चों की मेहनत नहीं देख सकते ।

29
00:31:48.509 --> 00:32:04.279
क्योंकि जहाँ मोहब्बत होती है वहाँ मेहनत नहीं होती है ।

30
00:32:04.279 --> 00:32:13.940
जहाँ मेहनत है वहाँ मोहब्बत में कमी है ।

31
00:32:15.940 --> 00:33:05.480
तो आज अमृतवेले बापदादा ने चारों ओर के ब्राह्मणों के पास चाहे देश चाहे विदेश में चक्कर लगाया तो क्या देखा ?

32
00:33:12.740 --> 00:33:30.509
कोई-कोई बच्चे स्वमान में बैठे हैं ,

33
00:33:36.569 --> 00:34:02.400
सोच रहे हैं कि मैं बापदादा के दिलतख्त नशीन हूँ , सोच भी रहे हैं ,

34
00:34:11.079 --> 00:34:39.480
स्वमान में स्थित होने का पुरूषार्थ भी कर रहे हैं लेकिन कमी क्या देखी ?

35
00:34:42.739 --> 00:35:36.619
स्वमान याद है , सोच रहे हैं , लेकिन स्वमान स्वरूप बन , अनुभवी मूर्त बन अनुभव के अथॉरिटी स्वरूप बनने में कमी दिखाई दी

36
00:35:38.619 --> 00:36:04.280
क्योंकि अथॉरिटी तो बहुत है लेकिन सबसे बड़ी अथॉरिटी अनुभव की अथॉरिटी है

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00:36:10.110 --> 00:36:29.309
और यह स्वमान की अनुभूति आलमाइटी अथॉरिटी ने दी है ।

38
00:36:31.769 --> 00:36:47.420
तो मेहनत कर रहा है लेकिन अनुभव स्वरूप नहीं बना ।

39
00:36:50.739 --> 00:37:29.769
तो बापदादा ने यह देखा कि बैठते हैं , सोचते भी हैं लेकिन अनुभव स्वरूप कोई-कोई हैं ।

40
00:37:29.769 --> 00:38:02.570
अनुभव में किसी भी प्रकार का देह अभिमान जरा भी अपने तरफ खींच नहीं सकता ।

41
00:38:13.420 --> 00:38:51.369
तो अनुभव स्वरूप बन जाना , कर्म करते भी कर्मयोगी के अनुभव स्वरूप में खो जाना , इसकी अभी और आवश्यकता है ।

42
00:38:51.369 --> 00:38:57.199
स्वरूप में बन जाना ।

43
00:39:01.199 --> 00:39:19.480
हर बात में , हर सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनना ,

44
00:39:28.280 --> 00:39:54.219
चाहे ज्ञान , योग , धारणा और सेवा , चार ही सबजेक्ट में अनुभव स्वरूप बनना ।

45
00:40:01.880 --> 00:40:17.199
अनुभवी को माया भी हिला नहीं सकती

46
00:40:28.739 --> 00:41:02.050
इसलिए बापदादा आज सभी बच्चों को अनुभवी स्वरूप में देखने चाहते हैं ।

47
00:41:03.369 --> 00:41:17.769
सुनने और सोचने में फर्क है

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00:41:17.769 --> 00:42:00.280
लेकिन अनुभवी स्वरूप बनना , जो सोचा , जिस स्वमान में स्थित रहने चाहे उसके अनुभव स्वरूप में स्थित हो जाए ।

49
00:42:01.650 --> 00:42:17.079
अनुभव को कोई भी हिला नहीं सकता

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00:42:20.280 --> 00:42:56.619
क्योंकि स्वमान और देहभान , जहाँ स्वमान स्वरूप है , स्वमान के अनुभव में स्थित है वहाँ देह भान आ नहीं सकता ।

51
00:43:06.679 --> 00:43:40.619
जैसे देखो अंधकार है लेकिन स्विच आप ऑन करो रोशनी का तो अंधकार ऑटोमेटिकली गायब हो जाता ।

52
00:43:40.619 --> 00:43:56.800
अंधकार को मिटाने में , अंधकार को भगाने में मेहनत नहीं करनी पड़ती ।

53
00:43:59.710 --> 00:44:22.570
ऐसे ही जब स्वमान के सीट पर अनुभव का स्विच ऑन होता

54
00:44:24.570 --> 00:44:49.539
तो किसी भी प्रकार का देहभान , भिन्न-भिन्न प्रकार के देह भान भी हैं और भिन्न-भिन्न प्रकार के बाप ने स्वमान भी दिये हैं ।

55
00:44:49.539 --> 00:44:58.170
स्वमान को जानते हैं , पुरूषार्थ भी करते हैं

56
00:44:58.170 --> 00:45:30.110
लेकिन अनुभव का पुरूषार्थ करना और अनुभवी स्वरूप बनना उसमें अन्तर है इसलिए मेहनत करनी पड़ती है ।

57
00:45:37.250 --> 00:46:22.050
तो बापदादा को अब समय प्रमाण बाप समान बनने का लक्ष्य सम्पन्न करने समय यह मेहनत करना अच्छा नहीं लगता ,

58
00:46:22.449 --> 00:46:44.280
हर एक अपने को चेक करो कि मैं कर्मयोगी जीवन वाला हूँ ?

59
00:46:44.280 --> 00:46:57.369
जीवन नेचरल और सदाकाल की होती है , कभी-कभी की नहीं ।

60
00:47:00.510 --> 00:47:22.449
ऐसा अनुभवी स्वरूप बनाओ जो लक्ष्य है योगी जीवन का ,

61
00:47:22.449 --> 00:47:49.199
जो लक्ष्य है अनुभवी मूर्त बनने का वह लक्ष्य सम्पन्न है ?

62
00:47:52.000 --> 00:48:15.480
सदा मस्तक से चमकती हुई लाइट खुद को भी अनुभव हो ,

63
00:48:16.110 --> 00:48:38.449
खुद भी उस स्वरूप में स्थित हो , स्मृति स्वरूप हो , स्मृति करने वाला नहीं स्मृति स्वरूप हो

64
00:48:38.449 --> 00:48:58.340
और स्मृति स्वरूप है या नहीं , उनका प्रमाण यह है

65
00:48:58.340 --> 00:49:28.849
कि जहाँ स्मृति के अनुभवी स्वरूप हैं वहाँ अपने में समर्थी हर कार्य करते हुए भी अनुभव होगी ।

66
00:49:30.000 --> 00:49:55.599
कार्य भिन्न-भिन्न होंगे लेकिन अनुभव स्वरूप की स्थिति भिन्न-भिन्न नहीं हो ।

67
00:49:58.449 --> 00:50:19.820
तो आज बापदादा ने देखा कि मेहनत क्यों करनी पड़ती ?

68
00:50:27.480 --> 00:50:47.369
अनुभव स्वरूप बनने का नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार देखा ।

69
00:50:50.340 --> 00:51:09.420
तो बापदादा का हर एक बच्चे से जिगरी प्यार है

70
00:51:09.420 --> 00:51:24.400
तो प्यार वाले की मेहनत देखी नहीं जाती ।

71
00:51:26.110 --> 00:51:38.110
चाहे किसी भी सबजेक्ट में मेहनत करनी पडती है ,

72
00:51:45.079 --> 00:51:57.199
कभी-कभी शब्द यूज करना पड़ता है ,

73
00:51:59.199 --> 00:52:17.880
इसका कारण है अनुभवी स्वरूप बनने की कमी ।

74
00:52:18.570 --> 00:52:32.170
पुरूषार्थी है लेकिन स्वरूप नहीं बने हैं ।

75
00:52:35.650 --> 00:53:09.769
एक सेकण्ड में चार ही सबजेक्ट में अपने स्वमान के अनुभवी स्वरूप की अनुभूति होनी चाहिए ।

76
00:53:12.050 --> 00:53:24.510
जो देह अभिमान नजदीक आ नहीं सके ।

77
00:53:25.079 --> 00:53:39.199
जैसे रोशनी के आगे अंधकार ठहर नहीं सकता ।

78
00:53:40.570 --> 00:54:02.570
निकालना नहीं पड़ता , नेचरल जहाँ अंधकार है वहाँ रोशनी कम है या नहीं है ।

79
00:54:09.139 --> 00:54:23.940
तो सबसे बड़े में बड़ी अथॉरिटी अनुभव गाया हुआ है ।

80
00:54:23.940 --> 00:54:42.110
अनुभव को हजारों लोग बदलने चाहे , बदल नहीं सकते ।

81
00:54:44.510 --> 00:54:55.139
जैसे आप सबने चीनी का अनुभव करके देखा है

82
00:54:55.139 --> 00:55:17.599
कि वह मीठी होती है , अगर हजारों लोग आपको बदलने चाहे , बदल सकते हो ?

83
00:55:28.849 --> 00:55:47.309
तो जो भी सबजेक्ट हैं , चाहे ज्ञान की , चाहे योगी की , चाहे धारणा की , चाहे सेवा की ,

84
00:55:51.019 --> 00:56:24.570
किसी में भी चार में से एक में भी मेहनत लगती है , मिटाने की , सेवा में भी सफलता ,

85
00:56:26.570 --> 00:56:54.909
धारणा में भी स्वभाव परिवर्तन की , योग में भी अचल रहने की , योगी जीवन की अनुभूति करने की ,

86
00:56:54.909 --> 00:57:11.820
जहाँ मेहनत है या कभी-कभी कहते हो ,

87
00:57:14.679 --> 00:57:30.619
इसका अर्थ है उस सबजेक्ट में आप अनुभवीमूर्त नहीं बने हो ।

88
00:57:30.619 --> 00:57:41.539
अनुभव कभी-कभी नहीं होता , नेचरल नेचर होती है ।

89
00:57:51.079 --> 00:58:00.570
तो अभी सुना मेहनत करने का कारण क्या ?

90
00:58:03.880 --> 00:58:25.539
जिस भी समय आपको अनुभव होगा कि जब अनुभव की सीट पर सेट होते हो ,

91
00:58:26.739 --> 00:58:50.570
किसी भी वरदान के स्वरूप में अनुभवी बन अनुभव करते हो तो उस समय मेहनत करनी होती है ?

92
00:58:51.250 --> 00:58:58.570
नेचरल अनुभूति होती है ।

93
00:59:03.710 --> 00:59:19.599
इसलिए अभी समय प्रमाण सब अचानक होना है ।

94
00:59:23.820 --> 00:59:30.280
बताके नहीं होना है ।

95
00:59:30.909 --> 00:59:56.400
जैसे अभी प्रकृति का अचानक बातों का खेल चल रहा है , आरम्भ हुआ है अभी ।

96
01:00:00.110 --> 01:00:27.820
नई-नई बातें अचानक अर्थक्वेक हुआ , थोड़े समय में लाखों आत्मायें चली गई ,

97
01:00:29.079 --> 01:00:39.710
क्या उन्हों को पता था कि कल हम होंगे या नहीं ?

98
01:00:43.019 --> 01:01:07.079
ऐसे कई एक्सीडेंट , भिन्न-भिन्न स्थान पर अचानक होना आरम्भ हो गया है ।

99
01:01:11.820 --> 01:01:47.940
इकट्ठे के इकट्ठे एक समय अनेकों की टिकेट कट रही है तो ऐसे समय में आप एवररेडी हैं?

100
01:01:58.510 --> 01:02:14.219
यह तो नहीं कहेंगे कि पुरूषार्थ कर रहा हूँ ?

101
01:02:24.800 --> 01:04:11.599
एवररेडी अर्थात् कोई भी वरदान या स्वमान का संकल्प किया और स्वरूप बना इसलिए बापदादा आज इस बात पर अटेन्शन दिला रहे हैं कि किसी भी वरदान को फलीभूत कर वरदान या स्वमान के स्वरूप के अनुभवी बन सकते हो?

102
01:04:11.599 --> 01:04:17.309
बनना ही पड़ेगा ।

103
01:04:21.250 --> 01:04:28.510
कोशिश कर रहा हूँ ,

104
01:04:34.170 --> 01:04:48.849
अगर कोशिश भी करनी है तो अभी से

105
01:04:56.050 --> 01:05:09.480
क्योंकि बहुत समय का अभ्यास समय पर मदद देगा ।

106
01:05:11.940 --> 01:05:47.880
पुरूषार्थी नहीं , अनुभवी क्योंकि अनुभव की अथॉरिटी आप सबको आलमाइटी अथॉरिटी ने दी है ।

107
01:05:55.599 --> 01:06:17.079
जैसे देह भान के अनुभवी है , तो देहभान को याद करना पड़ता है क्या कि मैं फलाना हूँ !

108
01:06:18.219 --> 01:06:32.050
मानों आपका नाम देह पर पड़ा , तो देहभान हो गया ना , मैं फलाना हूँ ,

109
01:06:32.050 --> 01:06:53.309
अगर हजारों लोग भी आपको कहे कि आप फलाना नहीं हो , आप यह हो , नाम बदली करके कहे तो आप मानेंगे ?

110
01:06:54.170 --> 01:06:58.800
भूलेंगे अपना नाम !

111
01:07:00.800 --> 01:07:19.599
जन्म लेते जो नाम पड़ा वह देहभान कितना पक्का और नेचरल रहता है ।

112
01:07:22.619 --> 01:07:34.570
कोई और को भी आपके नाम से बुलायेंगे , आपको नहीं बुलाना है ,

113
01:07:34.570 --> 01:07:41.539
लेकिन आपके नामधारी को बुला रहे हैं ,

114
01:07:41.539 --> 01:07:54.400
आपका कान नाम सुनते अटेन्शन जायेगा मुझे बुला रहा है ।

115
01:07:56.969 --> 01:08:13.420
तो देहभान इतना पक्का हो गया है ।

116
01:08:14.909 --> 01:08:41.649
ऐसे देही अभिमानी , स्वमानधारी , स्वराज्य अधिकारी इतना पक्का हो ।

117
01:08:44.399 --> 01:09:04.619
आप कहते हो ना , हमारा जीवन परिवर्तन है तो परिवर्तन क्या किया ?

118
01:09:05.539 --> 01:09:23.250
देह भान से स्वमान , स्वराज्य अधिकारी बनें ।

119
01:09:24.220 --> 01:09:33.649
तो चेक करो ज्ञान स्वरूप बना हूँ ?

120
01:09:33.649 --> 01:09:43.020
या ज्ञान सुनने और सुनाने वाला बना हूँ ?

121
01:09:44.340 --> 01:10:07.250
ज्ञान अर्थात् नॉलेज , नॉलेज का प्रैक्टिकल रूप है , नॉलेज को कहते हैं , नॉलेज इज लाइट , नॉलेज इज माइट ,

122
01:10:08.510 --> 01:10:28.449
तो ज्ञान स्वरूप बनना अर्थात् जो भी कर्म करेंगे वह लाइट और माइट वाला होगा ।

123
01:10:28.449 --> 01:10:33.600
यथार्थ होगा ।

124
01:10:33.600 --> 01:10:42.739
इसको कहा जाता है ज्ञान स्वरूप बनना ।

125
01:10:42.739 --> 01:10:51.140
ज्ञान सुनाने वाला नहीं , ज्ञान स्वरूप बनना ।

126
01:10:51.880 --> 01:11:07.600
योग स्वरूप का अर्थ है कर्मेन्द्रियों जीत बनना ।

127
01:11:07.600 --> 01:11:17.310
हर कर्मेन्द्रिय पर स्वराज्यधारी ।

128
01:11:22.170 --> 01:11:36.970
इसको कहा जाता है योग अर्थात् युक्तियुक्त जीवन ।

129
01:11:40.569 --> 01:11:58.569
ऐसे अगर ज्ञान योग का स्वरूप है तो हर गुण की धारणा ऑटोमेटिकली होगी ।

130
01:12:00.569 --> 01:12:21.079
जहाँ ज्ञान , योग है , योगयुक्त है वहाँ गुणों की धारणा ऑटोमेटिकली होगी ।

131
01:12:21.079 --> 01:12:36.850
सेवा हर समय ऑटोमेटिक होगी ।

132
01:12:37.649 --> 01:13:16.510
समय अनुसार चाहे मन्सा सेवा करे, चाहे वाचा करे, चाहे कर्मणा करे, चाहे स्नेह सम्बन्ध में करे, सेवा भी हर समय अखण्ड चलती रहेगी।

133
01:13:18.510 --> 01:13:30.109
सम्बन्ध सम्पर्क में भी सेवा होती है ।

134
01:13:35.710 --> 01:14:06.909
मानो कोई आपके भाई या बहन ब्राह्मण परिवार में थोड़ा-सा मायूस है , थोड़ा पुरूषार्थ में डल है , कोई संस्कार के वश है ,

135
01:14:08.050 --> 01:14:30.340
ऐसे सम्पर्क वाली आत्मा को आपने उमंग-उत्साह दिलाया , सहयोग दिया , स्नेह दिया ,

136
01:14:31.020 --> 01:14:41.939
यह भी सेवा का पुण्य आपका जमा होता है ।

137
01:14:42.850 --> 01:14:51.479
गिरे हुए को उठाना यह पुण्य गाया जाता है ।

138
01:14:53.479 --> 01:15:16.970
तो सम्बन्ध और सम्पर्क में भी सेवा करना यह सच्चे सेवाधारी का कर्तव्य है ।

139
01:15:19.600 --> 01:15:36.619
सेवा मिले या सेवा दी जाए तो सेवा है , वह नहीं ।

140
01:15:37.600 --> 01:16:02.449
स्वयं मन्सा , वाचा , कर्मणा , सम्पर्क सम्बन्ध में सेवा ऑटोमेटिकली होती रहे ।

141
01:16:06.109 --> 01:16:30.340
कई बार बापदादा ने देखा कि सम्पर्क में कोई-कोई बच्चा देखता भी है

142
01:16:30.340 --> 01:16:53.939
कि इनका स्वभाव संस्कार थोड़ा जो होना चाहिए वह नहीं है ,

143
01:16:55.079 --> 01:17:08.340
लेकिन यह तो है ही ऐसा , यह बदलना नहीं है ,

144
01:17:09.819 --> 01:17:35.939
इसकी सेवा करना टाइम वेस्ट है , ऐसा संकल्प करना क्या यथार्थ है ?

145
01:17:35.939 --> 01:17:53.819
जब आप मानते हो कि हम प्रकृति को भी सतोप्रधान बनाने वाले हैं ,

146
01:17:53.819 --> 01:18:11.310
प्रकृति को और वह मनुष्यात्मा है , ब्राह्मण कहलाता है

147
01:18:11.310 --> 01:18:34.510
लेकिन संस्कार वश है , जब प्रकृति का संस्कार बदलने की चैलेन्ज की है

148
01:18:34.510 --> 01:18:44.619
तो वह तो प्रकृति से पुरूष है , आत्मा है ।

149
01:18:45.310 --> 01:18:53.140
आपके सम्बन्ध में है ।

150
01:18:55.369 --> 01:19:27.600
तो सच्चा सेवाधारी अपने सेवा का पुण्य कमाने का शुभ भावना अवश्य रखेगा ।

151
01:19:27.600 --> 01:19:45.479
यह तो है ही ऐसा , यह बदल ही नहीं सकता , यह शुभ भावना नहीं , यह सूक्ष्म घृणा भावना है ,

152
01:19:45.479 --> 01:20:03.079
फिर भी अपना भाई बहन है , फिर भी मेरा बाबा तो कहता है ना !

153
01:20:05.649 --> 01:20:39.710
तो सच्चे सेवाधारी सेवा के बिना शुभ भावना देना इस सेवा में भी पुण्य कमायेंगे ।

154
01:20:43.369 --> 01:20:50.569
गिरे हुए को गिराना नहीं , उठाना ।

155
01:20:50.569 --> 01:21:11.710
सहयोग देना , इसको कहेंगे सच्चे सेवाधारी , पुण्य आत्मा ।

156
01:21:22.449 --> 01:21:56.970
तो ऐसे अपने को चेक करो इतना सेवा का उमंग-उत्साह है ?

157
01:22:02.109 --> 01:22:17.140
इसको कहा जाता है अनुभव के अथॉरिटी वाला ।

158
01:22:21.649 --> 01:22:52.170
तो अभी बापदादा यही चाहता है , अनुभवी मूर्त बनो , अनुभव की अथॉरिटी को कार्य में लगाओ ।

159
01:23:05.539 --> 01:23:44.340
तो चार ही सबजेक्ट में जो अपने को अनुभवी स्वरूप बन अनुभव के अथॉरिटी को कार्य में लगायेंगे ,

160
01:23:46.569 --> 01:24:07.369
जो कमी हो उसको सम्पन्न करेंगे , इतना अटेन्शन देंगे अपने पर वह हाथ उठाओ ।

161
01:24:09.880 --> 01:24:13.819
मन का हाथ उठा रहे हो ना !

162
01:24:13.819 --> 01:24:21.649
शरीर का हाथ नहीं , मन का हाथ ।

163
01:24:22.680 --> 01:24:24.850
उठाओ ।

164
01:24:24.850 --> 01:24:39.369
मन का हाथ उठाना क्योंकि बापदादा शिवरात्रि पर रिजल्ट लेंगे ।

165
01:24:42.569 --> 01:25:12.109
मन में कोई का भी कमी का संस्कार अपनी शुभ भावना को कम नहीं करे ।

166
01:25:15.140 --> 01:25:28.109
उसका संस्कार तो ढीला है लेकिन वह इतना तो पावरफुल है

167
01:25:28.109 --> 01:25:39.880
जो आपकी शुभ भावना को कम कर लेता है

168
01:25:44.170 --> 01:26:09.079
इसलिए जैसे ब्रह्मा बाप ने क्या नहीं देखा , क्या नहीं किया , जिम्मेवार होते

169
01:26:14.569 --> 01:26:46.449
फिर भी अन्त में शुभ भावना , शुभ कामना के तीन शब्द सभी को शिक्षा देके गये ।

170
01:26:46.449 --> 01:26:50.619
याद है ना !

171
01:26:50.619 --> 01:26:56.739
तीन शब्द याद हैं ना !

172
01:26:58.739 --> 01:27:29.369
स्वयं भी निराकारी , निरहंकारी , निर्विकारी इसी स्थिति में अव्यक्त बनें ,

173
01:27:32.050 --> 01:27:47.649
किसी को भी कर्मभोग की फीलिंग नहीं दिलाई ,

174
01:27:47.649 --> 01:27:59.199
किसने समझा कि कर्मभोग समाप्त हो रहा है !

175
01:28:02.220 --> 01:28:06.800
क्या हो गया ?

176
01:28:06.800 --> 01:28:12.000
अव्यक्त हो गया ।

177
01:28:23.250 --> 01:28:47.649
ऐसे ब्रह्मा बाप समान फरिश्ता भव का वरदान

178
01:28:54.109 --> 01:29:15.539
जो बाप ने करके दिखाया , फॉलो ब्रह्मा बाप ।

179
01:29:34.850 --> 01:29:46.000
ब्रह्मा बाप से प्यार रहा ,

180
01:29:46.449 --> 01:29:58.800
अभी भी चाहे साकार में नहीं देखा

181
01:29:58.800 --> 01:30:14.680
लेकिन अव्यक्त बाप के रूप में भी स्नेह सबका है ।

182
01:30:14.680 --> 01:30:30.739
बापदादा दोनों से स्नेह में देखा गया है

183
01:30:30.739 --> 01:30:43.710
कि स्नेह की सबजेक्ट में मैजारिटी पास हैं ।

184
01:30:44.619 --> 01:30:49.770
स्नेह ही चला रहा है ।

185
01:30:51.479 --> 01:31:03.939
चाहे धारणा नहीं भी हो , कोई भी सबजेक्ट में कमी हो ,

186
01:31:03.939 --> 01:31:19.310
लेकिन स्नेह की सबजेक्ट में मैजारिटी सभी पास हैं ।

187
01:31:20.000 --> 01:31:24.619
स्नेह चला रहा है ।

188
01:31:24.619 --> 01:31:28.170
आप सभी क्यों आये हैं ?

189
01:31:28.170 --> 01:31:33.770
किस विमान में आये हो ?

190
01:31:35.770 --> 01:31:43.479
स्नेह के विमान में पहुंचे हो ।

191
01:31:51.479 --> 01:32:05.250
और बापदादा का भी लास्ट बच्चे से भी प्यार है ।

192
01:32:07.649 --> 01:32:20.340
कैसा भी है लेकिन प्यार में पास है

193
01:32:26.800 --> 01:32:43.420
क्योंकि बाप का हर बच्चे के प्रति दिल का प्यार है ।

194
01:32:43.420 --> 01:32:52.279
चाहे कैसा भी है लेकिन मेरा है ।

195
01:32:54.279 --> 01:33:03.140
जैसे आप कहते हो मेरा बाबा , तो बाप क्या कहते हैं ?

196
01:33:03.140 --> 01:33:07.310
मेरे बच्चे हैं ।

197
01:33:10.909 --> 01:33:34.340
ऐसी शुभ भावना आपस में परिवार की भी होना आवश्यक है ।

198
01:33:34.340 --> 01:33:54.619
स्वभाव नहीं देखो , बाप जानते हैं , भाव स्वभाव है , लेकिन भाव स्वभाव , प्यार को खत्म नहीं करे ,

199
01:33:54.619 --> 01:34:12.170
सम्बन्ध को खत्म नहीं करे , कार्य को सफल कम करे यह राइट नहीं ।

200
01:34:15.420 --> 01:34:18.449
परिवार है ।

201
01:34:18.449 --> 01:34:21.420
कौन सा परिवार है ?

202
01:34:21.420 --> 01:34:31.819
प्रभु परिवार , परमात्म परिवार ।

203
01:34:34.739 --> 01:34:49.939
इसमें कोई भी कारण से प्यार की कमी नहीं होनी चाहिए ।

204
01:34:56.619 --> 01:34:58.909
ऐसे है ?

205
01:34:58.909 --> 01:35:03.479
है प्यार की कमी ?

206
01:35:04.510 --> 01:35:12.279
प्यार अर्थात् शुभ भावना जरूर हो ।

207
01:35:16.399 --> 01:35:26.449
कैसा भी है , परमात्म परिवार है ।

208
01:35:31.710 --> 01:35:56.510
जिसने माना कि मैं प्रभु परिवार का हूँ , तो परिवार अर्थात् प्यार ।

209
01:35:56.510 --> 01:36:04.800
अगर परिवार में प्यार नहीं तो परिवार नहीं ।

210
01:36:12.050 --> 01:36:24.680
इसलिए आज क्या पाठ पढ़ा ?

211
01:36:27.310 --> 01:36:30.109
पक्का किया ?

212
01:36:30.109 --> 01:36:53.310
हर आत्मा से शुभ भावना , शुभ भाव ।

213
01:36:56.170 --> 01:37:09.649
यह परमात्म परिवार एक से एक समय ही होता है ,

214
01:37:11.649 --> 01:37:26.909
इतना बड़ा परिवार परमात्मा के सिवाए और किसका हो ही नहीं सकता ।

215
01:37:33.770 --> 01:37:47.140
तो चेक करना क्योंकि यह भी पुरूषार्थ में विघ्न पड़ता है ।

216
01:37:52.000 --> 01:38:24.510
तो विघ्न मुक्त होंगे तभी अनुभवी बन अनुभव के अथॉरिटी द्वारा सभी को अनुभवी बनायेंगे ।

217
01:38:32.569 --> 01:38:36.909
अच्छा ।

218
01:38:46.800 --> 01:38:59.369
आज जो पहली बार आये हैं वह उठके खड़े हो ।

219
01:39:06.340 --> 01:39:10.279
हाथ हिलाओ ।

220
01:39:25.199 --> 01:39:49.479
बापदादा पहले बारी आने वालों को विशेष मुबारक दे रहे हैं

221
01:39:50.909 --> 01:40:07.649
क्योंकि टूलेट के बजाए लेट में भी आ तो गये ।

222
01:40:20.739 --> 01:40:44.340
और बापदादा सभी आने वालों को यह खुशखबरी सुनाते हैं

223
01:40:44.340 --> 01:41:17.539
कि अगर देरी से आने वाले भी तीव्र पुरूषार्थ अर्थात् उड़ती कला का पुरूषार्थ कर आगे बढ़ने चाहे

224
01:41:20.340 --> 01:41:28.279
तो तीव्र पुरूषार्थ द्वारा आगे जा सकते हो ।

225
01:41:28.279 --> 01:41:35.939
लेकिन तीव्र पुरूषार्थ ।

226
01:41:40.850 --> 01:41:47.939
साधारण पुरूषार्थी नहीं ।

227
01:41:53.600 --> 01:42:19.479
हर बारी बापदादा पहले बारी आने वालों को देख खुश भी होते हैं

228
01:42:20.109 --> 01:42:47.250
और सभी आने वाले को परिवार , सारा ही परिवार आपको देख करके खुश होते हैं ।

229
01:42:49.250 --> 01:43:02.399
आ तो गये हैं , कुछ न कुछ वर्सा लेने के अधिकारी तो बनेंगे

230
01:43:05.819 --> 01:43:36.970
इसलिए बापदादा भी कहते हैं भले पधारे , बाप के बिछुडे हुए बच्चे भले पधारे ।

231
01:43:41.939 --> 01:43:47.310
अच्छा । बैठे जाओ ।

232
01:43:58.050 --> 01:44:03.140
अच्छा ।

233
01:44:24.800 --> 01:45:12.279
सेवा का टर्न - राजस्थान और इन्दौर का है :- अच्छा पहले इन्दौर वाले हाथ उठाओ ।

234
01:45:25.649 --> 01:45:32.109
अभी राजस्थान वाले हाथ उठाओ ।

235
01:45:39.250 --> 01:45:42.340
अच्छा ।

236
01:46:10.050 --> 01:46:31.250
दोनों ने अपनी सेवा का पार्ट अच्छा बजाया है ।

237
01:46:33.250 --> 01:47:06.050
बापदादा ने देखा है कि यह सेवा का चांस सभी उमंग-उत्साह से करते भी हैं और कराते भी हैं ।

238
01:47:09.140 --> 01:47:39.369
सेवा का यह पार्ट इन 10-15 दिन में भिन्न-भिन्न कमाई का साधन है ।

239
01:47:41.939 --> 01:48:06.970
एक फायदा यह है कि सेवा का मेवा हर एक का पुण्य जमा होता है ।

240
01:48:09.710 --> 01:48:28.510
दूसरा फायदा यहाँ मधुबन का ज्ञान का वायुमण्डल ,

241
01:48:29.310 --> 01:48:58.800
बड़े परिवार का वायुमण्डल , स्नेह का पुरूषार्थ में भी बल मिलता है ।

242
01:48:59.369 --> 01:49:37.079
क्योंकि वायुमण्डल वायबे्रशन और ज्ञान स्नान एक बारी तीर्थो पर स्नान करने जाते हैं

243
01:49:37.079 --> 01:50:07.250
तो अपना बहुत पुण्य मानते हैं और यहाँ जितने दिन भी रहते हो उतने दिन ज्ञान स्नान , ज्ञान के वचन कानों में पड़ते रहते हैं ।

244
01:50:09.250 --> 01:50:32.569
और योगी आत्मायें , प्रभु प्यार वाली आत्मायें उनका वायबे्रशन भी आटोमेटिकली मिलता रहता है ।

245
01:50:33.600 --> 01:50:44.340
एकान्त के वायुमण्डल का लाभ मिलता है ।

246
01:50:44.340 --> 01:51:03.649
अगर कोई अपने काम में और पढ़ाई में फायदों में अपने को बिजी रखता है

247
01:51:03.649 --> 01:51:25.199
तो उनको थोड़े दिनों में अपना भविष्य ऊंचा बनाने का चांस मिलता है ।

248
01:51:25.939 --> 01:51:45.020
इसलिए यज्ञ का काम भी चलता और आने वालों का पुण्य भी जमा होता ।

249
01:51:47.020 --> 01:52:38.510
दोनों ही ज़ोन आये हैं लेकिन बापदादा ने देखा कि आजकल के वायुमण्डल में सेवा का उमंग मैजारिटी सभी ज़ोन में है ।

250
01:52:45.819 --> 01:53:06.970
इन्दौर भी सेन्टर बढ़ा भी रहे हैं और सन्देश देकर बाप के बना रहे हैं ।

251
01:53:08.970 --> 01:53:21.710
राजस्थान भी ऐसे ही आगे बढ़ रहे हैं ।

252
01:53:21.710 --> 01:53:34.449
आजकल की लहर सेवा का उमंग सभी में है

253
01:53:34.449 --> 01:53:47.770
और बापदादा भी इशारा दे रहे हैं

254
01:53:48.170 --> 01:54:07.819
कि जिस भी ज़ोन वाले हों , जहाँ से भी आये हो , शिवरात्रि बाप का जन्म भी है ,

255
01:54:07.819 --> 01:54:26.909
सेवा का आरम्भ भी है और विशेष आत्माओं का भी जन्म दिन है ।

256
01:54:28.340 --> 01:54:50.170
ऐसे जैसे कोई आजकल के गवर्मेन्ट का नामीग्रामी का जन्म होता है

257
01:54:50.170 --> 01:54:59.250
तो उस जन्म को धूमधाम से मनाते हैं ,

258
01:55:01.250 --> 01:55:19.539
जैसे गांधी बापू जी का जन्म दिन कितना मनाते हैं , कोशिश करते हैं

259
01:55:19.539 --> 01:55:38.850
कि ऐसे दिन एक-एक को भारत का यादगार झण्डी या झण्डा लहराना चाहिए ।

260
01:55:40.399 --> 01:55:57.140
ऐसे यह विशेष जन्म महारथियों का भी है , बाप का भी है ।

261
01:55:57.939 --> 01:56:01.880
बापदादा का भी है ।

262
01:56:01.880 --> 01:56:14.909
तो ऐसे दिन पर हर एक को क्या मनाना है ?

263
01:56:19.539 --> 01:56:46.000
बापदादा का यह संकल्प है कि इस शिवरात्रि पर या एक सप्ताह पहले या एक सप्ताह पीछे

264
01:56:46.800 --> 01:57:13.770
इन दिनों में अपने परिचित , अपने मोहल्ले वाले , अपने दफ्तर के कार्य करने वाले साथी ,

265
01:57:14.680 --> 01:57:44.050
इन्हों को सन्देश जरूर दो कि अगर बाप से वर्सा लेना है तो ले लो , यह सन्देश जरूर दे दो ।

266
01:57:44.050 --> 01:58:02.109
आपके मोहल्ले में कोई ऐसा नहीं रहे जो कहे कि हमको अभी लास्ट में सन्देश क्यों दिया ।

267
01:58:04.109 --> 01:58:24.050
थोड़ा पहले तो देते तो हम भी कुछ बना तो लेते , नहीं तो लास्ट में तो सिर्फ अहो प्रभू कहते रहेंगे ।

268
01:58:24.050 --> 01:58:32.850
आप आये हमने नहीं पहचाना ।

269
01:58:32.850 --> 01:58:36.909
उल्हना देते रहेंगे ।

270
01:58:37.250 --> 01:58:59.369
तो इस शिवरात्रि पर किसी भी विधि से ऐसा प्रोग्राम आपस में बनाओ जो पहचान वालों को सन्देश मिल जाये ।

271
01:58:59.369 --> 01:59:03.770
फिर रहा उन्हों की तकदीर ।

272
01:59:03.770 --> 01:59:14.680
लेकिन आपने अपना कार्य पूरा किया ।

273
01:59:14.680 --> 01:59:31.819
तो हर एक को ऐसे किसी भी रूप में उन्हों को सन्देश पहुंच जाए

274
01:59:31.819 --> 01:59:48.739
फिर जैसी नेचर , जैसा स्वभाव उसी प्रमाण अपने-अपने तरीके से सन्देश जरूर दो ।

275
01:59:49.310 --> 01:59:57.250
बड़ा दिन है , खुशखबरी आपको सुनाते हैं ।

276
02:00:00.970 --> 02:00:07.600
तो यह उल्हना निकल जाए ।

277
02:00:09.600 --> 02:00:31.420
अभी भी प्रोग्राम करते हो तो क्या कहते हैं , ऐसे भी कहते हैं अभी भी , कि हमको तो अभी पता पड़ा है ।

278
02:00:31.939 --> 02:00:38.000
आपने पहले क्यों नहीं किया ?

279
02:00:40.279 --> 02:01:00.850
इसलिए बच्चों का , बापदादा का जन्म दिन है , जो पुराने हैं वह अपना जन्मदिन कौन सा मनाते हैं ?

280
02:01:00.850 --> 02:01:06.510
शिवरात्रि मनाते हैं ना !

281
02:01:09.649 --> 02:01:24.800
तो इतनों के जन्म दिन पर यह सन्देश देने की मिठाई बांटों ।

282
02:01:31.600 --> 02:01:33.880
ठीक है !

283
02:01:33.880 --> 02:01:37.649
बांटेंगे !

284
02:01:40.510 --> 02:01:43.420
हाथ उठाओ ।

285
02:01:43.420 --> 02:02:08.970
कोई भी वंचित नहीं रहे , किसी भी विधि से , फंक्शन करो या पोस्ट द्वारा भेजो , लेकिन कोई रहे नहीं ।

286
02:02:10.399 --> 02:02:20.279
किसी भी साधन से उनको सन्देश जरूर पहुंचाओ ।

287
02:02:20.680 --> 02:02:30.909
वह आप आपस में राय कर तीन चार तरीके बनाओ ।

288
02:02:33.770 --> 02:03:02.109
वर्ग वाले भी अपने सभी कनेक्शन वालों को शिवरात्रि के महत्व का सन्देश जरूर दें ।

289
02:03:08.569 --> 02:03:13.199
पसन्द है ?

290
02:03:13.199 --> 02:03:17.539
अच्छा ।

291
02:03:19.199 --> 02:03:35.880
गांव गांव में भी , जैसे गांव में रहने वाले ब्राह्मण तो बने ही हैं कोई न कोई ,

292
02:03:35.880 --> 02:03:53.250
उनको अपने गांव में किसी भी रीति से चाहे पर्चा भेजो , चाहे सम्मुख जाओ लेकिन सन्देश जरूर दो ।

293
02:03:53.250 --> 02:04:02.569
घर-घर में मालूम हो कि यह शिवरात्रि क्या है ।

294
02:04:11.369 --> 02:04:20.739
इसमें देखेंगे कौन सा ज़ोन कितना नम्बर लेता है ।

295
02:04:20.739 --> 02:04:23.770
हिसाब रखना ।

296
02:04:23.770 --> 02:04:39.710
बापदादा रिजल्ट देखेंगे , कितनों को पर्चे बांटे , कितनों से प्रैक्टिकल मिले , सब रिजल्ट निकालना ।

297
02:04:39.710 --> 02:04:48.739
हर एक को बिजी रहना है , कोई भी फ्री नहीं रहे ।

298
02:04:55.880 --> 02:04:58.449
अच्छा ।

299
02:04:58.449 --> 02:05:05.880
इन्दौर और राजस्थान ।

300
02:05:07.199 --> 02:05:19.710
दोनों की विशेषता ब्रह्मा बाप के लाडले ।

301
02:05:21.199 --> 02:05:46.909
ब्रह्मा बाप द्वारा इन्दौर का फाउण्डेशन पड़ा और राजस्थान में ब्रह्मा बाप या बापदादा द्वारा पहला म्यूजियम बना ।

302
02:05:48.909 --> 02:06:09.479
तो दोनों ही ब्रह्मा बाबा के , बाप के तो हैं ही लेकिन विशेष ब्रह्मा बाप के लाडले हैं ।

303
02:06:10.800 --> 02:06:24.909
तो ब्रह्मा बाप की छत्रछाया दोनों के ऊपर सदा रहती है ।

304
02:06:31.479 --> 02:06:39.710
है तो सभी ज़ोन पर लेकिन इन्हों की विशेषता है ।

305
02:06:42.050 --> 02:06:56.170
ब्रह्मा बाप जब सन्देशी जाती है और एडवांस पार्टी इमर्ज होती है

306
02:06:56.170 --> 02:07:13.539
तो उन्हों से यह पहली शुरू-शुरू की बातें बहुत रूहरिहान में करते हैं ।

307
02:07:16.279 --> 02:07:30.220
आप सबके महारथी जो स्थापना के निमित्त बने हैं ,

308
02:07:30.220 --> 02:07:55.020
वह बहुत साथी एडवांस पार्टी में निमित्त बने हैं तो उन्हों से बापदादा आदि की रूहरिहान बहुत करते हैं ।

309
02:07:55.539 --> 02:08:21.079
और बापदादा और एडवांस पार्टी दोनों का एक ही संकल्प है कि अब कब गेट खोलने आयेंगे ।

310
02:08:21.079 --> 02:08:37.199
क्योंकि अकेले एडवांस पार्टी भी खोल नहीं सकती , बापदादा भी खोल नहीं सकते , साथ खोलेंगे ।

311
02:08:39.710 --> 02:09:18.109
तो पूछते हैं एडवांस पार्टी वाले और बापदादा भी कहते हैं कि आखिर भी सभी निराकारी फरिश्ते स्वरूप में कब एवररेडी होंगे!

312
02:09:20.109 --> 02:09:40.739
आजकल प्रकृति भी बहुत पुकारती है , बोझ बहुत बढ़ता जाता है ।

313
02:09:41.649 --> 02:09:48.279
मन का भी , शरीरों का भी ।

314
02:09:51.819 --> 02:10:05.079
इसलिए सभी आपका आवाह्न कर रहे हैं ।

315
02:10:18.000 --> 02:10:38.340
अब थोडा-थोडा अपना एवररेडी का नज़ारा दिखाओ।

316
02:10:38.340 --> 02:11:04.619
वह नज़ारा है ज्यादा में ज्यादा समय या फरिश्ता रूप या निराकारी रूप , प्रैक्टिकल में प्रत्यक्ष करो अपना ।

317
02:11:04.619 --> 02:11:31.250
गुप्त पुरूषार्थ करते हैं लेकिन अभी प्रत्यक्ष दिखाई दे , आपके मस्तक से लाइट का प्रकाश अनुभव हो ।

318
02:11:31.710 --> 02:11:45.079
नयनों से रूहानियत की शक्ति अनुभव हो ।

319
02:11:48.279 --> 02:12:06.800
मुख से , चेहरे से मधुरता , मुस्कुराता चेहरा अनुभव हो ।

320
02:12:19.369 --> 02:12:29.140
तारीख पूछेंगे तो हर एक सोचेगा

321
02:12:31.710 --> 02:12:54.000
क्योंकि संगठन रूप में जो भी महावीर हैं , तीव्र पुरूषार्थी हैं उनको संगठन रूप में जाना है ।

322
02:12:54.000 --> 02:12:59.479
आगे पीछे नहीं जाना है ।

323
02:13:00.050 --> 02:13:22.619
पहले यहाँ एवररेडी का रूप प्रत्यक्ष होना है, जिससे प्रत्यक्षता हो बापदादा की, कार्य की।

324
02:13:25.420 --> 02:13:43.250
तो अभी तीव्र पुरूषार्थ करो , एक दो को सहयोग दो , आगे बढ़ाओ ।

325
02:13:43.880 --> 02:13:51.600
कमज़ोर को सहारा दो ।

326
02:14:00.050 --> 02:14:07.020
ऐसा संगठन बनाओ ।

327
02:14:12.109 --> 02:14:14.399
अच्छा ।

328
02:14:16.399 --> 02:15:07.649
ग्राम विकास विंग , साइंस इंजीनियर विंग और स्पार्क :- अपना परिचय अच्छी तरह दे रहे हैं ।

329
02:15:46.680 --> 02:15:59.710
अच्छा तीनों ही वर्ग का समाचार बापदादा ने सुना है ।

330
02:15:59.710 --> 02:16:22.000
तो हर एक वर्ग जो भी आये हो उन्होंने आपस में अच्छी प्रगतिशील मीटिंग की है

331
02:16:22.000 --> 02:16:35.649
और मीटिंग में अपना-अपना आगे का प्लैन भी बनाया है ।

332
02:16:36.170 --> 02:17:01.420
बापदादा खुश है कि आजकल वर्ग वाले सेवा में हर एक नम्बरवन लेना चाहते हैं।

333
02:17:02.399 --> 02:17:40.280
यह तीव्र पुरूषार्थ का उमंग उत्साह देख बापदादा सभी वर्गों को खास इन तीनों वर्गों को पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं ।

334
02:17:40.280 --> 02:17:45.200
प्लैन अच्छे बनाये हैं ।

335
02:17:45.879 --> 02:17:53.709
अच्छे बनाये हैं और उमंग का बनाया है ।

336
02:17:54.510 --> 02:18:16.909
इसलिए बापदादा तीनों को कहते हैं जो प्लैन बनाये हैं वह अभी जल्दी से जल्दी प्रैक्टिकल में लाओ ।

337
02:18:17.649 --> 02:18:22.450
बापदादा को पसन्द है ।

338
02:18:22.450 --> 02:18:40.969
सिर्फ बीच-बीच में आजकल तो फोन सिस्टम भी है , आपस में कान्फ्रेन्स करने की ।

339
02:18:41.540 --> 02:19:02.739
तो हर एक वर्ग का जो विशेष निमित्त है , वह बीच-बीच में फोन कान्फ्रेन्स करके भी उमंग उत्साह बढ़ाओ ।

340
02:19:02.739 --> 02:19:15.479
क्योंकि अपने-अपने शहर में उमंग उत्साह दिलायेंगे

341
02:19:16.399 --> 02:19:23.420
तो जैसे मीटिंग में उमंग उत्साह आता है विशेष ।

342
02:19:23.420 --> 02:19:37.200
ऐसे बीच-बीच में रिजल्ट पूछ उन्हों को भी उमंग में लाओ ।

343
02:19:42.620 --> 02:19:45.420
अच्छा है ।

344
02:19:45.420 --> 02:19:52.620
यह बोर्ड पब्लिक के तरफ करो ।

345
02:20:28.510 --> 02:20:37.309
नेचर की भी आजकल सभी को चिंता है ।

346
02:20:38.680 --> 02:20:55.479
तो आप विशेष सन्देश दो , मन की नेचर द्वारा प्रकृति की नेचर को कैसे सुधार सकते हैं ।

347
02:20:56.280 --> 02:21:12.399
प्लैन बनाया है लेकिन अभी हर जगह मिलकर प्रोग्राम द्वारा एनाउन्स करो ,

348
02:21:12.399 --> 02:21:23.200
छोटे-छोटे प्रोग्राम भी बनाओ लेकिन आवाज फैलाओ ।

349
02:21:25.200 --> 02:21:50.909
अभी जो भी प्रोग्राम चल रहे हैं बापदादा ने देखा कि हर एक प्रोग्राम में आवाज फैलाने का तरीका बहुत अच्छा बनाया है

350
02:21:51.649 --> 02:22:27.709
और भी जो कर रहे हैं , उसमें सबके निमित्त बने हुए सेवाधारियों की राय लेकर और प्रोग्राम में चार चांद और लगाओ ।

351
02:22:31.479 --> 02:22:52.399
जहाँ भी जायें विशेष या छोटे-छोटे स्थान में भी आवाज हो , ब्रह्माकुमारियां कुछ प्रोग्राम कर रही हैं ।

352
02:22:54.399 --> 02:23:09.479
शान्ति में नहीं बैठो , अभी उमंग उत्साह से आवाज फैलाओ ।

353
02:23:11.079 --> 02:23:16.739
अभी नजदीक आने का समय है ।

354
02:23:19.200 --> 02:23:42.569
वायुमण्डल अभी वैराग्य वृत्ति का नवीनता देखने और सुनने का इच्छुक है ।

355
02:23:45.200 --> 02:24:06.620
एक दो में राय कर और उत्साह उमंग का चारों ओर आवाज फैलाओ ।

356
02:24:08.620 --> 02:24:26.399
मुख्य जो स्थान हैं , देश हैं उसमें वर्तमान समय इकठ्ठा सन्देश पहुंचे ,

357
02:24:26.399 --> 02:24:42.049
हर मुख्य स्थान पर अखबारों में आवे , यह हुआ , यह हुआ … यह कर रहे हैं , यह कर रहे हैं …

358
02:24:51.600 --> 02:25:06.969
चाहे रेडियो , चाहे टी वी सब तरफ से आवाज फैलाओ ।

359
02:25:15.709 --> 02:25:32.450
अपने-अपने एरिया में भी टी वी द्वारा रेडियो द्वारा आवाज फैला सकते हो ।

360
02:25:45.540 --> 02:25:47.649
अच्छा ।

361
02:25:47.649 --> 02:26:08.110
बहुत-बहुत मुबारक हो , वर्ग आजकल उत्साह में कर रहे हैं , और करते रहना ।

362
02:26:08.850 --> 02:26:10.909
अच्छा ।

363
02:26:14.340 --> 02:27:00.969
सिंधी ग्रुप :- सिंधी ग्रुप वाले हाथ उठाओ ।

364
02:27:06.799 --> 02:27:20.399
यह उमंग सेवा का तरीका बहुत अच्छा बना लिया है ।

365
02:27:20.399 --> 02:27:53.309
बापदादा विशेष निमित्त बनने वाले उन्हों को मुबारक देते हैं क्योंकि इसी कारण सभी को सन्देश तो मिल गया ।

366
02:27:53.940 --> 02:28:04.280
आये कितने भी लेकिन परिचय कितनों को मिला ।

367
02:28:05.309 --> 02:28:21.250
और सभी औरों को भी यह आपका साधन अच्छा लगेगा ।

368
02:28:21.250 --> 02:28:29.020
सेवा भी हो गई और मनाना भी हो गया ।

369
02:28:29.020 --> 02:28:47.079
डबल काम हो गया और जो भी साथ में आये हैं उन्हों की दुआयें भी मिल जायेंगी ।

370
02:28:52.340 --> 02:28:56.219
अच्छा है ।

371
02:28:57.420 --> 02:29:16.170
बाप को , शिवबाबा को अपने अवतरण का स्थान कौन सा पसन्द आया ?

372
02:29:16.170 --> 02:29:22.219
सिन्ध पसन्द आई ना !

373
02:29:30.280 --> 02:29:34.000
तो भाग्य है ना !

374
02:29:34.000 --> 02:29:42.170
अवतरण के स्थान का महत्व कितना होता है !

375
02:29:43.479 --> 02:30:02.280
जो भी धर्म पिता आये हैं उन्हों के जन्म स्थान का कितना यादगार रहता है ।

376
02:30:09.200 --> 02:30:22.110
तो सिन्ध जन्म भूमि उसका भी बहुत महत्व है ।

377
02:30:24.620 --> 02:30:42.110
अभी यह प्लैन बना रही है , जनक प्रोग्राम बना रही है ,

378
02:30:46.680 --> 02:31:02.340
अभी आप भी अपने-अपने पहचान वाले को जो वहाँ बैठे हैं ,

379
02:31:02.340 --> 02:31:24.620
अगर परिचय है तो उन्हों को समाचार सुनाओ कि अभी यह स्थान अपना स्थान लिया है ।

380
02:31:24.620 --> 02:31:30.280
छोटे से बड़ा हो जायेगा ।

381
02:31:30.799 --> 02:31:49.309
लेकिन बापदादा यह अटेन्शन दिलाते हैं कि जिस समय जाओ

382
02:31:49.309 --> 02:32:06.219
उस समय के वायुमण्डल को जानकर फिर कदम उठाना

383
02:32:06.219 --> 02:32:21.770
क्योंकि यह इन लोगों के बदलने में देरी नहीं लगती है ।

384
02:32:25.309 --> 02:32:40.510
बाकी अच्छा है , जहाँ जन्म स्थान है वहाँ प्रत्यक्षता होनी ही चाहिए ।

385
02:32:41.079 --> 02:32:54.450
चाहे कोई भी धर्म वाले हों लेकिन है तो एक ही बाप के बच्चे ।

386
02:32:56.450 --> 02:33:09.079
बाप का सन्देश सुनने के लिए सभी का हक लगता है ।

387
02:33:17.649 --> 02:33:26.680
तो बापदादा आपका यह प्लैन देखकर खुश है ।

388
02:33:26.680 --> 02:33:44.399
सभी को जो भी आये हैं उन सबको बापदादा विशेष मुबारक दे रहे हैं । मुबारक हो , मुबारक हो ।

389
02:33:56.799 --> 02:34:26.850
डबल विदेशी - बापदादा ने देखा कि डबल विदेशी चांस लेने में बहुत होशियार हैं ।

390
02:34:29.309 --> 02:35:00.000
कहाँ से भी पहुंच भी जाते और अपने सर्विस के प्लैन अच्छे-अच्छे बनाके संगठन भी अपना मजबूत कर लेते ।

391
02:35:00.510 --> 02:35:08.450
स्थान बहुत अच्छा ढूंढा है ।

392
02:35:13.079 --> 02:35:28.799
बाप से भी मिलना , परिवार से भी मिलना और अपनी प्रोग्रेस भी करना ।

393
02:35:29.479 --> 02:35:37.370
यह बापदादा को पसन्द है ।

394
02:35:46.000 --> 02:36:02.000
विदेशी ऐसा सैम्पुल बनके दिखाओ

395
02:36:03.139 --> 02:36:25.709
जो जिस देश में निमित्त हो उस देश में जो भी सेन्टर हो , जितने भी सेन्टर हो

396
02:36:25.709 --> 02:36:49.600
वह निर्विघ्न बनने का एक्जैम्पुल बनाके दिखाओ ।

397
02:36:51.600 --> 02:36:57.200
नम्बर लो ।

398
02:36:57.649 --> 02:37:20.850
इन्डिया के ज़ोन भी पुरूषार्थ कर रहे हैं , अभी एनाउन्स नहीं हुआ है लेकिन आप नम्बर ले लो ।

399
02:37:20.850 --> 02:37:25.940
जो भी ले ।

400
02:37:32.909 --> 02:37:47.250
हिम्मत अच्छी है और सहयोग भी अच्छा मिला हुआ है ।

401
02:37:59.020 --> 02:38:35.420
बापदादा ने देखा कि जो बनाते हैं उसकी जो पैकिंग करते हैं , इन्डियन भाषा में कहा जाता है पीठ करते हैं ।

402
02:38:35.819 --> 02:38:56.399
कनेक्शन जोड़के किसी भी साधन से कनेक्शन में आगे बढ़ाते हैं ।

403
02:39:10.799 --> 02:39:13.600
अच्छा है ।

404
02:39:13.600 --> 02:39:22.620
उमंग उत्साह की लहर फैलाते रहते हो

405
02:39:30.510 --> 02:39:45.540
और हर साल कुछ न कुछ विशेषता एड भी करते ।

406
02:39:53.649 --> 02:40:19.879
इसलिए बापदादा पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं ।

407
02:40:31.709 --> 02:40:36.850
अभी इन्दौर क्या करेगा ?

408
02:40:36.850 --> 02:40:56.850
कोई एक्जैम्पुल नम्बरवन बनाके दिखायेगा, चाहे इन्दौर करे चाहे राजस्थान करे, नम्बर ले लो।

409
02:41:00.969 --> 02:41:03.540
है हिम्मत ।

410
02:41:05.420 --> 02:41:09.540
है ना हिम्मत ?

411
02:41:12.340 --> 02:41:22.049
बापदादा को साथी तो बनाया ही है ।

412
02:41:26.000 --> 02:41:34.739
तो बापदादा साथ है सिर्फ निमित्त बनना है ।

413
02:41:42.049 --> 02:41:45.540
अच्छा ।

414
02:42:07.020 --> 02:42:24.620
बापदादा हर एक बच्चे की विशेषता को देख रहे हैं ।

415
02:42:29.770 --> 02:42:56.399
हर एक बच्चे में किसी न किसी सबजेक्ट में विशेषता समाई हुई है

416
02:43:07.020 --> 02:43:45.250
इसलिए बापदादा इन्डिविज्युअल एक-एक बच्चे को होवनहार विजयी स्वरूप में देख रहे हैं

417
02:43:52.170 --> 02:44:01.600
क्योंकि सबको साथी बनके चलना है ।

418
02:44:01.600 --> 02:44:08.969
साथ है , साथ चलेंगे ।

419
02:44:08.969 --> 02:44:27.020
ब्रह्मा बाप के साथ में राज्य करेंगे ।

420
02:44:32.399 --> 02:44:35.940
अच्छा ।

421
02:44:36.569 --> 02:45:20.000
चारों ओर के बच्चों को बापदादा देख देख खुश हो गीत गाते वाह बच्चे वाह !

422
02:45:25.139 --> 02:45:41.879
हर बच्चे के दिल में बाप है और बाप के दिल में हर बच्चा है ।

423
02:45:52.850 --> 02:46:27.200
और यहाँ इतना परिवार मधुबन निवासी देखकर यह भी खुशी होती है वाह मधुबन वाह !

424
02:46:29.770 --> 02:47:12.170
सबका एशलम मधुबन है ही है इसलिए मधुबन में भागकर आ जाते हैं ।

425
02:47:17.649 --> 02:47:41.649
अब बाप की जो आशा है वह जल्दी से जल्दी पूर्ण करना है ।

426
02:47:46.110 --> 02:48:08.850
चार ही सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनना ही है ।

427
02:48:15.479 --> 02:48:45.309
बापदादा देश विदेश चारों ओर के बच्चे यहाँ बैठे देख रहे हैं ।

428
02:48:50.569 --> 02:49:02.450
सभी कैसे देख देख हर्षित हो रहे हैं ।

429
02:49:03.250 --> 02:49:19.940
यह साधन , यह साइंस इसी समय प्रोग्रेस में जा रही है ,

430
02:49:19.940 --> 02:49:42.170
नई नई इन्वेन्शन दुनिया के हैं लेकिन आपके फायदे के साधन अच्छे अच्छे निकाल रहे हैं ।

431
02:49:42.170 --> 02:49:49.649
दूर होते भी साथ हैं ।

432
02:49:57.139 --> 02:50:09.819
तो साइंस वालों को भी मुबारक है जो साधन तो बनाये हैं ।

433
02:50:16.680 --> 02:50:50.219
अच्छा । सभी बच्चों को देश विदेश के सभी बच्चों को बहुत-बहुत दिल का प्यार और याद स्वीकार हो

434
02:50:55.139 --> 02:51:22.170
और विशेष ऐसे विशेष बच्चों को नमस्ते ।

435
02:51:30.280 --> 02:51:37.200
दादियों से :- उमंग उत्साह भी अच्छा है और प्रबन्ध भी मिल रहा है ।

436
02:51:37.200 --> 02:51:52.110
यह साधन आपके समय ही निकले हैं , आपको ही सुख मिल रहा है ।

437
02:51:59.600 --> 02:52:10.049
वह विनाश की बातें ही करते और आप फायदा ले रहे हो ।

438
02:52:11.139 --> 02:52:13.200
अच्छा है ।

439
02:52:13.200 --> 02:52:36.969
मोहिनी बहन मुम्बई हॉस्पिटल में हैं , उन्हों ने विशेष याद भेजी है :- अभी लग गई है ना ठीक करने में , तो ठीक करके ही आवे ।

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02:52:37.649 --> 02:52:45.709
याद तो आती है लेकिन तबियत को भी साथ चलाना है ।

441
02:52:47.020 --> 02:52:57.079
बापदादा को भी याद कर रही है , बापदादा के पास पहुंच रहा है ।

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02:52:57.079 --> 02:53:04.510
उसको विशेष याद प्यार भी दे रहे हैं ।

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02:54:05.649 --> 02:54:17.079
दीदी निर्मलशान्ता से :- आपकी हिम्मत शरीर को चला रही है ।

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02:54:20.850 --> 02:54:28.569
बाप मददगार है और आपकी हिम्मत है ।

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02:54:48.569 --> 02:54:57.250
रतनमोहिनी दादी से :- उड़ा भी रहे हैं , उड़ भी रहे हैं ।

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02:55:27.479 --> 02:55:34.569
शान्तामणि दादी से :- ठीक है , खुश है ।

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02:55:40.510 --> 02:55:47.709
दृष्टि ले रही है बहुत अच्छी ।

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02:59:03.420 --> 02:59:22.110
तीनों भाईयों से :- तीनों ही मिलके शिवरात्रि का प्लैन बनाना ।

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02:59:24.110 --> 02:59:44.280
जो भी विशेष स्थान हैं उसमें एक ही समय एक ही जैसा अपना-अपना करें , लेकिन मुख्य स्थानों में एडवरटाइज करो । सभी स्थानो पर हो ।

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02:59:45.079 --> 02:59:54.000
क्योंकि मुख्य स्थान तो कहाँ न कहाँ प्रबन्ध करके कर सकते हैं

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02:59:54.000 --> 03:00:17.709
जैसे एक ही समय बड़े प्रोग्राम किये ना ऐसे शिवरात्रि का प्रोग्राम जगह जगह पर हो और सभी तरफ का इकठ्ठा करके जैसे पहले दिखाया वैसे दिखाओ ।

452
03:00:21.649 --> 03:00:46.969
मद्रास का प्रोग्राम बहुत अच्छा हुआ है :- यह भी आपस में सेवा में कुछ एडीशन करना हो या नवीनता करनी हो

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03:00:46.969 --> 03:00:54.170
तो आपस में मीटिंग करके उसको भी आगे बढ़ा सकते हो ।

454
03:00:54.170 --> 03:01:09.540
निमित्त हैं , निमित्त बनके काम तो अच्छा कर रहे हो लेकिन फिर भी इसमें एडीशन करनी हो तो कर सकते हो ।

455
03:02:04.969 --> 03:02:09.940
निजार भाई से :- अच्छा मुबारक हो ।

456
03:02:09.940 --> 03:02:20.510
प्रोग्राम तो अच्छा चल रहा है फिर भी आपस में राय करके

457
03:02:20.510 --> 03:02:32.450
अगर कुछ एडीशन करनी हो तो एडीशन भी करो , चलाते चलो ।

458
03:02:32.969 --> 03:02:46.969
जो राय हो वह सुनो , अगर पसन्द आवे तो उसको बढ़ाओ ।

459
03:02:48.280 --> 03:02:51.770
बाकी अच्छा है ।

460
03:02:54.680 --> 03:03:11.819
मीटिंग में जो भी राय हो वह दो और बाकी फिर सभी मिलकर फाइनल करने के बाद फिर उसको करके देखो ।

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03:27:34.450 --> 03:28:00.110
डायमण्ड हॉल में नई स्क्रीन लगाई गई है , जिसे बापदादा देख रहे हैं :- सभी खुशी में उड़ रहे हो , यही बापदादा देख रहे हैं कि सभी एक-एक उड़ रहे हैं ।

