WEBVTT

1
00:22:41.650 --> 00:23:30.000
आज होलीएस्ट बाप अपने होली बच्चों से होली मनाने आये हैं ।

2
00:23:39.650 --> 00:24:36.740
चारों ओर के बच्चे दूर दूर से स्नेह में दिल में समा रहे हैं ।

3
00:24:49.250 --> 00:25:47.250
बापदादा चारों ओर के बच्चों के मस्तक में भाग्य का सितारा चमकता हुआ देख रहे हैं ।

4
00:26:07.599 --> 00:26:54.569
इतना बड़ा भाग्य सारे कल्प में और किसका भी नहीं होता ।

5
00:27:07.599 --> 00:27:32.619
इस संगमयुग के प्राप्ति के आधार से आप बच्चे ही

6
00:27:42.220 --> 00:28:19.650
इतने श्रेष्ठ पवित्र बनते हो जो भविष्य में आप डबल पवित्र बनते हो ।

7
00:28:22.509 --> 00:28:35.019
आत्मा भी पवित्र और शरीर भी पवित्र ।

8
00:28:40.049 --> 00:29:15.079
सारे कल्प में चक्र लगाके देखो कोई धर्मात्मा भी डबल पवित्र नहीं बना है ।

9
00:29:20.849 --> 00:30:02.220
आप बच्चे डबल पवित्र भी बनते हो और डबल पवित्रता की निशानी डबल ताजधारी बनते हो ।

10
00:30:20.509 --> 00:31:02.220
आज होली सब मनाते हैं लेकिन आप इस समय जो डबल होली बनते हो

11
00:31:06.109 --> 00:31:34.450
उसका यादगार उत्सव के रूप में होली मनाते हैं ।

12
00:31:44.849 --> 00:32:09.769
आपके ही हर कदम-कदम का जीवन का महत्व उत्सव के रूप में मनाते हैं ।

13
00:32:16.680 --> 00:32:42.000
आप इस संगम पर हर दिन , हर कदम उमंग और उत्साह में रहते हो

14
00:32:45.200 --> 00:33:09.200
तो आपके उमंग-उत्साह का यादगार यह उत्सव के रूप में मनाते हैं ।

15
00:33:12.220 --> 00:33:17.420
क्यों उमंग उत्साह रहता ?

16
00:33:17.420 --> 00:33:42.910
क्योंकि आप परमात्मा के संग के रंग की होली मनाते हो ।

17
00:33:57.650 --> 00:34:16.400
तो आपका हर कदम उत्सव के रूप में मनाते हैं ।

18
00:34:21.019 --> 00:34:44.570
अभी होली में पहले जलाते हैं फिर मनाते हैं ।

19
00:34:48.110 --> 00:35:30.219
आप भी संगम पर अभी अपने पुराने संस्कार स्वभाव को योग अग्नि में जलाते हो

20
00:35:31.480 --> 00:35:49.769
क्योंकि अपने पुराने संस्कार को जलाने के बिना

21
00:35:51.769 --> 00:36:20.170
परमात्म संग का रंग लग नहीं सकता , परमात्म मिलन हो नहीं सकता ।

22
00:36:24.570 --> 00:36:56.619
तो आपने योग अग्नि में संस्कारों को जलाया फिर परमात्म संग के रंग में रंगे ।

23
00:37:00.510 --> 00:37:17.650
तो आजकल जलाते भी हैं और रंग भी लगाते हैं

24
00:37:19.650 --> 00:37:43.940
लेकिन आपके अध्यात्मिक रूप को स्थूल रूप दे दिया है ।

25
00:37:46.510 --> 00:38:12.280
वह स्थूल आग जलाते, स्थूल रंग लगाते क्योंकि अभी बॉडीकान्सेस वृत्ति है।

26
00:38:19.880 --> 00:38:35.309
आप होली बनते हो वह होली मनाते हैं ।

27
00:38:50.340 --> 00:39:19.650
सारे कल्प में कोई भी अध्यात्मिक होली मनाके डबल होली नहीं बनें ।

28
00:39:25.880 --> 00:39:59.769
तो आप सभी जो भी जहाँ से आये हो तो परमात्म संग के होली में आये हो ।

29
00:40:01.769 --> 00:40:12.050
परमात्म संग की होली मनाने आये हैं ।

30
00:40:30.340 --> 00:41:24.050
आप होली के लिए कहते हो कि होली अर्थात् जो बात हो चुकी वह हो ली ।

31
00:41:28.909 --> 00:42:04.340
तो ड्रामा अनुसार जो बीत चुका उसको कहते हैं हो ली , बीती सो बीती ।

32
00:42:09.650 --> 00:42:56.510
कोई भी व्यर्थ बात चित पर नहीं लाते हैं , हो चुकी , ऐसी होली मनाते रहते हो ना ।

33
00:43:21.769 --> 00:44:02.969
आप सभी ने होली अर्थात् पवित्र बनने का पूर्ण पुरूषार्थ कर पवित्रता को धारण किया है

34
00:44:05.420 --> 00:44:29.539
तभी भविष्य में आपको डबल पवित्रता की निशानी डबल ताज दिखाते हैं ।

35
00:44:36.280 --> 00:45:00.400
तो आज के दिन आप हर एक बच्चा क्या जलाके जायेंगे ?

36
00:45:06.909 --> 00:45:35.019
बापदादा ने देखा कि जन्मदिन पर जो बाप ने होम वर्क दिया था -

37
00:45:43.369 --> 00:45:59.250
क्रोध को जन्मदिन पर जन्मदिन की गिफ्ट दे दो ।

38
00:46:00.909 --> 00:46:29.250
तो उसकी रिजल्ट बापदादा के पास कुछ बच्चों की आज पहुंची है ।

39
00:46:30.449 --> 00:47:00.050
बापदादा ने देखा कि कहाँ-कहाँ बच्चों ने अटेन्शन दिया है ।

40
00:47:05.710 --> 00:47:29.369
आप सबने भी अपनी रिजल्ट निकाली होगी तो जो भी आज बैठे हैं ,

41
00:47:30.449 --> 00:48:21.309
उन्होंने अपनी रिजल्ट निकाली , जिन्होंने अपनी रिजल्ट में कन्ट्रोल किया और सफलता का अनुभव किया वह हाथ उठाओ ।

42
00:48:21.820 --> 00:48:29.710
सफलता को प्राप्त किया !

43
00:48:30.800 --> 00:48:35.309
बड़ा हाथ उठाओ ।

44
00:48:42.280 --> 00:49:02.219
टीचर्स हाथ उठाओ , फारेनर्स हाथ उठाओ ।

45
00:49:16.679 --> 00:49:19.539
( सभी ने उठाया ) अच्छा ।

46
00:49:19.539 --> 00:49:24.739
मुबारक हो ।

47
00:49:26.570 --> 00:50:05.820
इससे आप सबने अपने में हिम्मत रखी और हिम्मत का फल प्राप्त हो सकता है , यह अनुभव किया ।

48
00:50:08.510 --> 00:50:30.570
तो क्या अगर इस अनुभव को आगे भी लक्ष्य रखके

49
00:50:32.570 --> 00:50:55.309
बार-बार चेकिंग करते और आगे बढ़ाने चाहे तो समझते हो कि सम्भव है ?

50
00:50:55.309 --> 00:50:58.449
सम्भव है ?

51
00:50:58.449 --> 00:51:02.679
आगे हो सकता है ?

52
00:51:02.679 --> 00:51:06.170
वह हाथ उठाओ ।

53
00:51:06.170 --> 00:51:10.000
अच्छा ।

54
00:51:16.110 --> 00:51:20.739
हो सकता है ?

55
00:51:21.940 --> 00:51:29.539
टीचर्स हो सकता है ?

56
00:51:31.539 --> 00:51:41.420
पाण्डव हो सकता है ?

57
00:51:47.250 --> 00:51:50.909
अच्छा ।

58
00:52:04.219 --> 00:52:20.510
सम्भव हो सकता है , नहीं , होना ही है इसकी ताली बजाओ ।

59
00:52:36.000 --> 00:52:38.909
अच्छा ।

60
00:52:38.909 --> 00:53:35.539
अभी तो ज्यादा दिन नहीं हुए हैं लेकिन अभी हर तीन मास के बाद आज से तीन मास अटेन्शन रख क्रोध का टेन्शन खत्म कर सकते हो ?

61
00:53:36.110 --> 00:53:38.679
कर सकते हो ?

62
00:53:38.679 --> 00:53:41.250
वह हाथ उठाओ ।

63
00:53:41.250 --> 00:53:44.619
अच्छा ।

64
00:54:08.050 --> 00:54:22.000
यह तो खुशखबरी बहुत अच्छी है , क्यों ?

65
00:54:24.510 --> 00:54:30.280
क्रोध का कारण क्या होता है ?

66
00:54:30.510 --> 00:54:37.139
क्रोध का बीज क्या होता है ?

67
00:54:44.110 --> 00:55:22.340
आप सदा अपना भविष्य स्वरूप सामने रखो ,

68
00:55:25.139 --> 00:55:56.969
आपका भविष्य स्वरूप कितना सजा सजाया हर्षित चेहरा है

69
00:56:00.510 --> 00:56:29.599
और बापदादा को देखो उसमें भी ब्रह्मा बाप को सामने लाओ क्यों ? शिव बाप तो है ही निराकार

70
00:56:29.599 --> 00:57:02.170
लेकिन ब्रह्मा बाप आपके सदृश्य साकार रूपधारी , आपके सदृश्य जिम्मेवारी का ताजधारी

71
00:57:08.679 --> 00:57:35.019
फिर भी सदा मुस्कराता हुआ , खुशनुमा चेहरा

72
00:57:40.050 --> 00:58:22.849
क्योंकि इन विकारों पर विजय प्राप्त कर आपके आगे शरीर होते कार्य करते एक्जैम्पुल रहा ।

73
00:58:23.309 --> 00:58:39.769
ब्रह्मा बाप से ज्यादा आपकी जिम्मेवारी है ?

74
00:58:42.340 --> 00:58:56.510
ब्रह्मा बाप की जिम्मेवारी के आगे आपकी जिम्मेवारी तो कुछ भी नहीं है ।

75
00:59:01.769 --> 00:59:29.769
और लास्ट तक देखा कर्मातीत वायब्रेशन में अव्यक्त फरिश्ते बन गये ।

76
00:59:35.369 --> 00:59:54.739
तो अभी बापदादा को दी हुई सौगात वापस तो नहीं लेंगे ना !

77
01:00:01.250 --> 01:00:17.420
बापदादा समझते हैं कि कारोबार में आते हैं

78
01:00:23.480 --> 01:00:39.710
तो कहाँ-कहाँ ऐसे सरकमस्टांश बनते हैं ,

79
01:00:48.849 --> 01:01:04.619
कईयों ने रिजल्ट में भी लिखा कि तेज आवाज हो जाता है ।

80
01:01:05.079 --> 01:01:13.769
मूड में थोड़ी तेजी आ जाती है ।

81
01:01:19.480 --> 01:01:59.880
लेकिन जब ऐसी बातें सामने आती हैं तब ही तो विजयी बनने का चांस है ।

82
01:02:01.539 --> 01:02:34.969
बातों का काम है आना लेकिन आपका नॉलेज है बातों से पार हो विजयी बनना ।

83
01:02:42.800 --> 01:02:46.340
तो पसन्द है ?

84
01:02:46.340 --> 01:02:57.769
क्रोध को विदाई देंगे सदा के लिए या तीन मास के लिए ?

85
01:03:01.250 --> 01:03:04.400
कितना समय की हिम्मत है ?

86
01:03:04.400 --> 01:03:19.940
जो समझते हैं सदा के लिए क्रोध जीत बनना मुश्किल नहीं है , होना ही है वह हाथ उठाओ ।

87
01:03:19.940 --> 01:03:26.679
होना ही है ।

88
01:03:28.400 --> 01:03:32.050
अच्छा ।

89
01:03:37.539 --> 01:03:53.079
बापदादा खुश है क्यों ?

90
01:03:53.769 --> 01:04:07.250
आपके लास्ट जन्म में भी आपकी महिमा क्या गाते हैं ?

91
01:04:11.369 --> 01:04:37.309
आपके देवता रूप के आगे आपकी महिमा सर्वगुण सम्पन्न , सम्पूर्ण निर्विकारी यह गाते हैं ।

92
01:04:40.800 --> 01:05:00.110
तो आपका यह बनने का पार्ट अभी संगमयुग का ही गायन है ।

93
01:05:02.510 --> 01:05:26.449
बापदादा के दिल की विशेष आशा है बतायें ?

94
01:05:30.679 --> 01:05:37.019
कांध हिलाओ बतायें ?

95
01:05:43.309 --> 01:06:27.420
बापदादा अभी से , अभी से हर एक बच्चे को सदा खिला हुआ गुलाब का पुष्प देखने चाहते हैं ।

96
01:06:38.679 --> 01:06:47.019
खुशनसीब , खुशनुमा ।

97
01:06:49.650 --> 01:07:00.050
बातों का काम है आना , यह भी समझ लो ।

98
01:07:00.050 --> 01:07:30.219
बातें आयेंगी लेकिन अपना लक्ष्य लक्षण में लाना है ।

99
01:07:36.510 --> 01:07:41.199
घबराना नहीं ।

100
01:07:48.570 --> 01:08:14.909
तो जैसे अभी कहते हैं कि ब्रह्माकुमारियां पवित्रता का बहुत पाठ पढ़ाती हैं , ऐसे प्रसिद्ध हो

101
01:08:14.909 --> 01:08:41.079
कि ब्रह्माकुमारियां क्रोधमुक्त बनाती हैं क्योंकि क्रोध से मुक्त होना सब चाहते हैं ।

102
01:08:41.079 --> 01:08:45.479
तनाव होता है ना !

103
01:08:45.479 --> 01:09:07.420
तो तनाव पैदा होता है इसलिए सभी चाहते हैं लेकिन उन्हों को विधि नहीं आती है ।

104
01:09:09.420 --> 01:09:25.079
जैसे पवित्र बनना असम्भव समझते थे

105
01:09:25.079 --> 01:09:48.510
लेकिन अभी आप सबके अनुभव के आधार से समझते हैं कि हो सकता है ।

106
01:09:49.310 --> 01:10:22.399
ऐसे अभी इस वर्ष यह लहर फैलाओ कि क्रोध जीत बनना हो सकता है , कोई मुश्किल नहीं है ।

107
01:10:22.399 --> 01:10:47.140
ऐसा एक्जैम्पुल के अनुभव प्रैक्टिकल में स्टेज पर लाओ ।

108
01:10:47.770 --> 01:11:11.369
बापदादा ने देखा है कि बहुत बच्चे कार्य करते भी क्रोध जीत बने हैं ।

109
01:11:11.369 --> 01:11:32.970
ऐसे दृष्टान्त आपके परिवार में , ब्राह्मण परिवार में बने हैं ।

110
01:11:36.340 --> 01:11:41.880
तो इस वर्ष क्या करेंगे ?

111
01:11:44.680 --> 01:11:49.140
होली मनाने आये हो ना !

112
01:11:49.140 --> 01:11:51.770
तो होली में क्या करते हैं ?

113
01:11:51.770 --> 01:11:56.739
कुछ जलाते हैं ना !

114
01:12:00.449 --> 01:12:09.710
तो आज की होली में आप क्या जलायेंगे ?

115
01:12:14.220 --> 01:12:21.939
क्रोध का तो कर लिया , इसको पक्का करेंगे !

116
01:12:21.939 --> 01:13:00.970
लेकिन बापदादा ने देखा कि तनाव में आने का कारण देह अभिमान का मैं शब्द है ।

117
01:13:03.369 --> 01:13:16.510
देहभान का मैं , एक है मैं आत्मा हूँ - यह मैं है ,

118
01:13:16.510 --> 01:13:45.079
लेकिन देहभान का मैं शब्द अभिमान का भी होता , अपमान का भी होता और दिलशिकस्त का भी मैं-मैं नीचे गिराता ।

119
01:13:49.649 --> 01:14:26.220
तो आज क्रोध जीत में आगे बढ़ने के लिए बॉडी कान्सेस का मैं इसको योग अग्नि में जलाओ ।

120
01:14:26.850 --> 01:14:41.770
अनेक मैं-मैं को जलाओ और एक मैं आत्मा हूँ ,

121
01:14:44.510 --> 01:15:03.140
इस मैं शब्द को पक्का करो और बाकी मैं आज योग अग्नि में जलाके जाओ ।

122
01:15:03.369 --> 01:15:09.770
अनेक मैं है ना ।

123
01:15:15.250 --> 01:15:24.619
तो आज जलाने की होली मनायेंगे !

124
01:15:26.619 --> 01:15:35.710
क्योंकि क्रोध का कारण तनाव बहुत होता है ।

125
01:15:41.310 --> 01:16:05.539
तो इस मैं को समाप्त करने के लिए आज अपने अन्दर संकल्प लो ।

126
01:16:09.079 --> 01:16:16.000
जलाना है क्योंकि यह भी तो बोझ है ना ।

127
01:16:16.000 --> 01:16:26.449
तो ट्रेन में जाओ , प्लेन में जाओ तो यह बोझ यहाँ जलाके जाओ ।

128
01:16:27.079 --> 01:16:32.399
जला सकते हो ?

129
01:16:33.880 --> 01:16:52.399
जो समझते हैं हिम्मते बच्चे मददे बाप साथ है ही , तो विजय भी साथ है ,

130
01:16:55.770 --> 01:17:10.569
जो यह सोचते हैं कि मुझे विजयी बनना ही है , वह हाथ उठाओ ।

131
01:17:13.770 --> 01:17:21.420
बनना ही है अच्छा ।

132
01:17:22.279 --> 01:17:30.449
जो आज वी आई पी आये हैं वह हाथ उठा रहे हैं ।

133
01:17:30.449 --> 01:17:38.340
जो वी आई पी आये हैं उठो , खड़े हो जाओ ।

134
01:17:43.250 --> 01:17:46.449
हाथ उठा रहे हैं ।

135
01:17:46.449 --> 01:17:52.850
ताली तो बजाओ ।

136
01:17:57.250 --> 01:18:00.170
विजयी बनेंगे ?

137
01:18:00.170 --> 01:18:02.800
देखो ।

138
01:18:17.539 --> 01:18:32.170
जो भी विजयी बनेंगे , उस एक-एक को माला पहना रहे हैं ।

139
01:18:38.909 --> 01:18:43.649
मुबारक हो , मुबारक हो ।

140
01:18:45.649 --> 01:18:49.250
अच्छा ।

141
01:18:56.449 --> 01:19:19.539
हिम्मत वाले अभी जो भी वी आई पी आये हैं हिम्मत वाले हैं इसीलिए बापदादा वरदान दे रहे हैं ।

142
01:19:22.449 --> 01:19:40.050
इस समय आप जो भी वी आई पी किसी भी कार्य में बने हो एक जन्म के लिए

143
01:19:40.850 --> 01:20:01.600
लेकिन बापदादा आप हिम्मत वाले बच्चों को अब वी आई पी नहीं कहेंगे , बच्चे कहेंगे ।

144
01:20:04.279 --> 01:20:27.310
बापदादा यह वरदान देते हैं , गैरन्टी देते हैं कि आप सभी 21 जन्म वी आई पी बनेंगे ।

145
01:20:31.479 --> 01:20:39.369
यह इलेक्शन , सेलेक्शन नहीं चलेगी ।

146
01:20:42.569 --> 01:20:53.880
तो सभी सिर्फ एक बात छोड़ना नहीं ,

147
01:20:53.880 --> 01:21:06.800
जैसे अभी सम्बन्ध में सम्पर्क में आये हो

148
01:21:06.800 --> 01:21:22.909
ऐसे इस ब्राह्मण परिवार के कनेक्शन को छोड़ना नहीं ।

149
01:21:23.939 --> 01:21:43.199
जितना कनेक्शन रखेंगे उतना रिलेशन पक्का होगा और बाप का वरदान प्राप्त कर ही लेंगे ।

150
01:21:44.619 --> 01:21:47.140
तो मंजूर है ?

151
01:21:47.140 --> 01:21:50.569
कनेक्शन रखना मंजूर है ?

152
01:21:50.569 --> 01:21:53.250
हाथ उठाओ ।

153
01:22:00.510 --> 01:22:04.340
अच्छा ।

154
01:22:08.170 --> 01:22:45.310
और आप सभी नये बच्चे वा रीयल गोल्ड बच्चे सदा बाप के आज्ञाकारी हो ना !

155
01:22:48.170 --> 01:23:09.310
तो आज इस मैं को जलाके ही जाना ।

156
01:23:20.680 --> 01:23:30.109
जो पहले बारी आये हैं वह उठो ।

157
01:23:55.819 --> 01:23:58.739
अच्छा ।

158
01:23:58.739 --> 01:24:27.420
बापदादा पहले बारी आने वाले बच्चों को पहले बारी आने की पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं ।

159
01:24:34.340 --> 01:25:03.479
लेकिन जैसे अभी पहले बारी आये हो ऐसे ही पहला नम्बर फर्स्ट डिवीजन , पहला नम्बर में

160
01:25:04.619 --> 01:25:26.970
तो फिक्स है लेकिन फर्स्ट डिवीजन में आयेंगे , यह हिम्मत है , हाथ उठाओ जिसमें हिम्मत है ?

161
01:25:26.970 --> 01:25:32.619
देखो सोच के उठाओ ।

162
01:25:38.569 --> 01:25:41.939
अच्छा ।

163
01:25:55.710 --> 01:26:27.819
तो लक्ष्य रखो कि हम लास्ट आये हैं लेकिन फास्ट जायेंगे क्योंकि समय का कोई भरोसा नहीं ।

164
01:26:28.449 --> 01:26:44.170
अभी जो करना है वह तीव्र पुरूषार्थी बन कर लो

165
01:26:44.850 --> 01:27:05.539
क्योंकि बहुत समय का पुरूषार्थ आप सबको थोड़े समय में पूरा करना पड़ेगा ।

166
01:27:06.800 --> 01:27:09.539
तो हिम्मत है ?

167
01:27:09.539 --> 01:27:12.170
है हिम्मत ?

168
01:27:12.170 --> 01:27:15.250
हाथ उठाओ ।

169
01:27:15.819 --> 01:27:22.279
देखो फोटो निकल रहा है आपका ।

170
01:27:23.420 --> 01:27:49.880
बापदादा ऐसे हिम्मत वालों को मुबारक देते हैं कि हिम्मत आपकी मदद बाप की ।

171
01:27:52.510 --> 01:28:01.310
लेकिन हिम्मत नहीं हारना ।

172
01:28:02.340 --> 01:28:18.109
अपने भाग्य का सितारा सदा चमकाते रहना

173
01:28:19.310 --> 01:28:45.310
क्योंकि इस जन्म का तीव्र पुरूषार्थ , पुरूषार्थ नहीं तीव्र पुरूषार्थ अनेक जन्मों का भाग्य बनाने वाला है

174
01:28:46.050 --> 01:28:54.680
इसलिए हिम्मत कभी नहीं हारना ।

175
01:28:54.680 --> 01:29:16.739
बातें आयेंगी लेकिन बात महावीर नहीं है , आप सर्वशक्तिवान के बच्चे हो , आपके आगे बात क्या है !

176
01:29:16.739 --> 01:29:23.479
बात आती है और चली जाती है ।

177
01:29:23.479 --> 01:29:39.939
जो चली जाने वाली है उसके पीछे अपनी तकदीर नहीं गंवाना ।

178
01:29:52.800 --> 01:29:56.510
अच्छा बैठो ।

179
01:30:23.880 --> 01:31:02.569
तो सभी को बापदादा स्नेह से मुबारक दे रहे हैं , किस बात की ?

180
01:31:04.850 --> 01:31:32.739
हिम्मत रखी है और बापदादा हर एक बच्चे के हिम्मत के संकल्प पर खुश है ।

181
01:31:43.600 --> 01:31:46.279
तो होली मनाई ?

182
01:31:46.279 --> 01:31:52.170
जलाने की होली तो मनाई ।

183
01:31:58.970 --> 01:32:11.939
और परमात्म संग के रंग की होली भी मनाई ।

184
01:32:13.199 --> 01:32:19.770
जलाई भी मनाई भी ।

185
01:32:27.140 --> 01:32:52.279
अभी बापदादा सभी बच्चों को एक ड्रिल कराने चाहते हैं ।

186
01:33:20.510 --> 01:33:54.569
वह ड्रिल है , चारों ओर की परिस्थितियां हैं , कहाँ कोई परिस्थिति है , कहाँ कोई परिस्थिति है ,

187
01:33:55.369 --> 01:34:47.250
ऐसे चारों ओर के परिस्थितियों के बीच में आप एक सेकण्ड में एकाग्र हो सकते हो ?

188
01:34:49.250 --> 01:35:09.819
ऐसी प्रैक्टिस स्वयं में अनुभव करते हो ?

189
01:35:10.970 --> 01:35:45.539
या समझो जिस समय आपको कारणे अकारणे किसी बात के प्रति व्यर्थ संकल्प का तूफान आ गया है ,

190
01:35:46.800 --> 01:36:10.220
ऐसे समय पर आप अपने मन बुद्धि को एकाग्र कर सकते हो ?

191
01:36:16.000 --> 01:36:44.170
यह एकाग्रता के शक्ति की ड्रिल समय पर करके देखी है ?

192
01:36:47.310 --> 01:37:21.649
अगर ऐसे समय पर एक सेकण्ड में एकाग्रता की शक्ति कार्य में नहीं आती

193
01:37:28.399 --> 01:37:45.079
तो आगे चलकर ऐसी परिस्थिति बार-बार आयेगी ।

194
01:37:47.770 --> 01:38:35.420
तो आज बापदादा सेकण्ड में फुलस्टाप अर्थात् एकाग्र स्थिति के अभ्यास पर अटेन्शन खिंचवाना चाहता है

195
01:38:43.369 --> 01:39:09.649
क्योंकि प्रकृति अपने भिन्न-भिन्न रंग दिखाने शुरू कर दिये हैं ।

196
01:39:12.399 --> 01:39:29.819
चारों ओर क्या-क्या हो रहा है , वह आप सब ज्यादा जानते हो ।

197
01:39:34.569 --> 01:40:00.220
तो ऐसे मन-बुद्धि को भटकाने वाली बातें आनी ही हैं ,

198
01:40:09.079 --> 01:40:27.479
तो अभी यह प्रैक्टिस करो

199
01:40:29.479 --> 01:40:56.449
कि मन को बुद्धि को आप एक सेकण्ड में परमधाम में टिका सकते हो !

200
01:41:29.600 --> 01:41:46.680
अभी अपने को फरिश्ते रूप में टिकाओ ।

201
01:43:28.170 --> 01:43:53.199
अभी अपने को मैं ब्राह्मण मास्टर सर्वशक्तिवान स्थिति में हूँ ,

202
01:43:53.819 --> 01:44:06.170
इस मास्टर सर्वशक्तिवान स्थिति में स्थित हो जाओ ।

203
01:46:28.109 --> 01:47:08.109
( बापदादा ने ड्रिल कराई ) ऐसी प्रैक्टिस सारे दिन में जब भी समय मिले , बार-बार मन को एकाग्र करके देखो ।

204
01:47:08.109 --> 01:47:19.880
जहाँ चाहो , जो चाहो वहाँ मन एकाग्र हो ।

205
01:47:21.479 --> 01:47:37.310
पुरूषार्थ एक मिनट लगे , एक सेकण्ड में फुलस्टॉप

206
01:47:47.600 --> 01:48:02.220
क्योंकि ऐसा समय हलचल का अभी तैयारी कर रहा है

207
01:48:11.420 --> 01:48:54.680
इसलिए माइण्ड कन्ट्रोल - मन मेरा है , मैं मन नहीं , मेरा मन है तो मेरे के ऊपर मैं का कन्ट्रोल है ?

208
01:49:06.220 --> 01:49:22.170
यह ड्रिल बहुत आवश्यक है ।

209
01:49:37.199 --> 01:50:09.079
तो सभी जो भी आये हैं , बापदादा को एक-एक बच्चा प्यारा है ।

210
01:50:15.819 --> 01:50:20.109
क्यों ?

211
01:50:26.000 --> 01:51:07.250
कैसा भी है लेकिन बापदादा हर बच्चे को कोटों में कोई आत्मा देखते हैं ।

212
01:51:13.079 --> 01:51:51.710
चाहे पुरूषार्थ में कमज़ोर है लेकिन बाप का प्यारा बना है ।

213
01:51:54.109 --> 01:52:22.449
दिल से कहते हैं मेरा बाबा इसलिए बाप का भी अति प्यारा है ।

214
01:52:30.569 --> 01:52:49.539
सिर्फ बापदादा एक बात फिर से याद दिला रहा है

215
01:52:52.109 --> 01:53:16.739
कि अपना चेहरा सदा खुशनुमा , खुशी में चमकता रहे ।

216
01:53:20.510 --> 01:53:27.600
बातें चली जायें लेकिन खुशी नहीं जाये ।

217
01:53:27.600 --> 01:53:45.310
संगमयुग की खुशी परमात्म गिफ्ट है ।

218
01:53:58.279 --> 01:54:23.939
तो होली अर्थात् कोई ऐसी बातें आवें तो याद करना कि होली मनाके आये हैं , जो होली बात हो ली , खुशी नहीं जाये ।

219
01:54:38.449 --> 01:54:51.369
परमात्म सौगात , खज़ाना खुशी है ।

220
01:54:54.220 --> 01:55:24.170
बापदादा सदा कहते हैं यह स्लोगन सदा याद रहे खुश रहना है और खुशी बांटनी है ।

221
01:55:27.479 --> 01:55:59.140
जितना बांटेंगे उतनी बढ़ेगी और खुशनुमा चेहरा चलते फिरते ऑटोमेटिक सेवा करता रहेगा ।

222
01:56:01.140 --> 01:56:14.000
जो भी देखेगा वह यही सोचेगा क्या मिला है ।

223
01:56:23.819 --> 01:56:38.619
तो आज होली की दिलखुश मिठाई है खुशी ।

224
01:56:39.649 --> 01:56:46.220
सबने खाई ?

225
01:56:48.220 --> 01:56:53.199
सदा खाते रहना ।

226
01:56:53.649 --> 01:57:00.449
इसमें कोई बीमारी नहीं होगी ।

227
01:57:15.250 --> 01:57:17.880
अच्छा ।

228
01:57:43.420 --> 01:59:11.819
सेवा का टर्न दिल्ली और आगरा ज़ोन का है :- दिल्ली वाले बड़ी दिल वाले

229
01:59:11.819 --> 01:59:34.909
क्योंकि दिल्ली राजधानी , अब की भी राजधानी और भविष्य में भी राजधानी ।

230
01:59:39.369 --> 02:00:09.079
और दिल्ली में बापदादा की दिल की आशायें भी हैं और आशायें पूरी भी की हैं ।

231
02:00:23.420 --> 02:00:40.970
सेवा के हिसाब से दिल्ली में भी सेवा हो रही है

232
02:00:40.970 --> 02:01:20.739
और आजकल जो बच्चों ने छोटे बड़े शहरों में उमंग से सेवा की है उसकी रिजल्ट में बापदादा खुश है ।

233
02:01:20.739 --> 02:01:27.819
दिल्ली वालों पर भी खुश है ।

234
02:01:47.479 --> 02:02:19.939
दिल्ली वाले अभी एक ऐसी कमाल दिखायें , बोलें ?

235
02:02:21.310 --> 02:03:09.420
जो बापदादा की शुरू से एक बात रही हुई है कि दिल्ली वाले या कोई भी , लेकिन आज दिल्ली है गीता का भगवान कौन ?

236
02:03:14.569 --> 02:03:41.649
इस बात को किसी भी विधि से ऐसा ग्रुप बनावे

237
02:03:42.170 --> 02:04:02.800
जो खुद कहे कि गीता का भगवान परमात्मा है ,

238
02:04:05.770 --> 02:04:17.770
ऐसा पहले छोटा ग्रुप तैयार करके दिखावे ।

239
02:04:18.000 --> 02:04:32.800
एनाउन्स नहीं करे लेकिन ऐसा छोटा ग्रुप , कई कनेक्शन वाले हैं ,

240
02:04:36.050 --> 02:05:04.970
कई जज आते हैं , कई बड़े-बड़े कनेक्शन में आते हैं , उन्हों को समझाके उन्हों को तैयार करे , ग्रुप करे कि सचमुच भगवान कौन ?

241
02:05:09.310 --> 02:05:13.420
यह हो सकता है ?

242
02:05:13.420 --> 02:05:19.020
हो सकता है ?

243
02:05:19.020 --> 02:05:24.109
नई बात करके दिखाओ ।

244
02:05:24.510 --> 02:05:38.739
पहले ग्रुप तैयार करो जिसमें सभी पोजीशन वाले हों , भिन्न-भिन्न पोजीशन वाले हो ,

245
02:05:39.710 --> 02:06:02.109
धार्मिक लोग भी हो , जज भी हो , वकील भी हो , साधारण पोजीशन वाले भी हो , ऐसा ग्रुप तैयार करो

246
02:06:06.800 --> 02:06:16.399
क्योंकि यह बात प्रसिद्ध होनी है ना !

247
02:06:16.399 --> 02:06:34.850
प्रत्यक्ष करनी ही है गीता का भगवान कौन ?

248
02:06:39.479 --> 02:06:49.600
तो दिल्ली में सब प्रकार के लोग हैं

249
02:06:53.369 --> 02:07:14.800
और जहाँ धर्म स्थान हैं , वहाँ जाके भी अगर कोई ऐसे निकलें तो वह भी कर सकते हैं ।

250
02:07:15.539 --> 02:07:20.510
एक ग्रुप तैयार करो ।

251
02:07:30.970 --> 02:07:54.000
बाकी बापदादा ने बच्चों का पुरूषार्थ और हिम्मत देखी

252
02:07:54.000 --> 02:08:10.220
कि बाप ने कहा बच्चों ने चारों ओर सेवा की धूम मचाई ।

253
02:08:10.220 --> 02:08:25.710
इसके लिए बापदादा दिल से दुआयें दे रहे हैं

254
02:08:26.449 --> 02:08:45.020
कि बच्चों में उमंग उत्साह है और आगे भी और बढ़ता रहेगा ।

255
02:08:53.600 --> 02:09:06.510
बाकी बापदादा ने समाचार सुना है

256
02:09:06.510 --> 02:09:35.020
अभी भिन्न-भिन्न प्रोग्राम दिल्ली में चल रहे हैं , बाप की सौगात जो बच्चों को मिली है , स्थान मिला है , ( ओ आर सी ) उसको कार्य में ला रहे हैं ।

257
02:09:35.020 --> 02:09:43.819
इसकी विशेष मुबारक दे रहे हैं ।

258
02:09:54.109 --> 02:10:12.170
उमंग-उत्साह बच्चों में है , सिर्फ थोड़ा सा समय डाल देते हैं ।

259
02:10:36.109 --> 02:10:54.569
दिल्ली में बाप और जगत अम्बा दोनों ने सेवा की है ।

260
02:10:55.600 --> 02:11:24.619
ब्रह्मा बाप ने भी सेवा की और जगदम्बा ने भी सेवा की है और जमुना का किनारा तो दिल्ली में ही है ।

261
02:11:28.220 --> 02:11:41.420
राजधानी भी अपनी जमुना किनारे होनी है ।

262
02:11:43.199 --> 02:11:57.420
तो दिल्ली वालों को सभी को स्थान देना पड़ेगा ।

263
02:12:04.279 --> 02:12:08.050
दिल बड़ी है ना !

264
02:12:08.050 --> 02:12:11.649
बड़ी दिल ।

265
02:12:21.250 --> 02:12:44.109
बापदादा हर स्थान के बच्चों की महिमा करते हैं वाह मेरे बच्चे वाह !

266
02:12:44.109 --> 02:13:17.020
तो दिल्ली के बच्चों की भी , टर्न है आपका तो विशेष बापदादा सेवा के सहयोग की , स्नेही बनाने की मुबारक हो , मुबारक हो ।

267
02:13:25.770 --> 02:13:28.909
अभी यह करके दिखाओ ।

268
02:13:28.909 --> 02:13:43.939
ऐसा कोई ग्रुप , जो भी ज़ोन हिम्मत रखे ऐसा ग्रुप बनाके लावे ।

269
02:13:45.420 --> 02:14:04.850
जो निमित्त बने आवाज फैलाने का , जो रही हुई प्वाइंटस हैं उसको अभी करके दिखाओ ।

270
02:14:15.310 --> 02:14:18.000
अच्छा है ।

271
02:14:18.000 --> 02:14:25.880
बापदादा बच्चों की सेवा भी देखते रहते हैं

272
02:14:25.880 --> 02:14:47.199
तो सेवा भी हो रही है और सेवा के साथ स्व की स्थिति में आगे बढ़ने का उमंग भी अच्छा है ।

273
02:14:54.569 --> 02:14:58.680
अच्छा है ।

274
02:15:11.939 --> 02:15:47.479
डबल विदेशी :- बापदादा ने सुना कि 90 देशों से आये हैं ।

275
02:15:49.310 --> 02:16:04.279
तो बापदादा कहते हैं वाह डबल विदेशी वाह !

276
02:16:16.800 --> 02:16:32.110
सभी खुशी में तो उड़ते रहते हो ना !

277
02:16:38.110 --> 02:17:15.370
सेवा का उमंग और तीव्र पुरूषार्थ का उमंग , दोनों ही एक दो में सहयोगी बन दिलाते रहते हैं ।

278
02:17:18.909 --> 02:17:36.510
बापदादा को मधुबन में आके हर ग्रुप को रिफ्रेश करना ,

279
02:17:36.510 --> 02:17:59.370
हिम्मत बढ़ाना यह बहुत अच्छा लगता है और आजकल जो लहर फैलाई है ,

280
02:18:00.110 --> 02:18:22.620
स्पेशल भट्ठी करना , एकान्तवासी बनना , यह लहर बहुत अच्छा है ।

281
02:18:24.620 --> 02:18:42.280
चाहे जनरल प्रोग्राम तो चलते हैं लेकिन यह छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर

282
02:18:42.280 --> 02:19:02.510
जो स्व-उन्नति के लिए प्रोग्राम करते हैं यह उन्नति का साधन बहुत अच्छा है ।

283
02:19:04.510 --> 02:19:08.680
टीचर्स ने भी किया है ।

284
02:19:08.680 --> 02:19:12.399
अच्छा है ।

285
02:19:12.399 --> 02:19:34.739
पाण्डवों ने भी किया है क्योंकि यह स्पेशल अटेन्शन जाता है , स्व के प्रति ।

286
02:19:42.739 --> 02:20:01.540
तो मधुबन में जो रिफ्रेशमेंट करने उमंग से आते हैं , यह बापदादा को बहुत अच्छा लगता है ।

287
02:20:01.540 --> 02:20:11.819
समय निकाला और समय का लाभ लेके जाते हैं ।

288
02:20:12.680 --> 02:20:32.850
एक जनरल प्रोग्राम का लाभ , बापदादा से मिलने का लाभ और स्पेशल अपनी स्व-उन्नति का लाभ ।

289
02:20:34.850 --> 02:20:50.909
वैसे बापदादा सभी तरफ वालों को यही राय देते हैं

290
02:20:50.909 --> 02:21:17.200
कि अपने-अपने यहाँ भी छोटे-छोटे ग्रुप को स्व-उन्नति का चांस देके अनुभव को बढ़ाओ ।

291
02:21:19.200 --> 02:21:28.450
चाहे 5 का ग्रुप बनाओ , छोटे सेन्टर हैं ।

292
02:21:33.479 --> 02:21:47.200
आजकल विशेष अटेन्शन फर्स्ट स्व-उन्नति ।

293
02:21:51.709 --> 02:21:56.170
कन्ट्रोलिंग पावर ।

294
02:21:58.170 --> 02:22:09.600
जो ड्रिल बताई एकाग्रता की शक्ति पर अटेन्शन ।

295
02:22:17.770 --> 02:22:58.909
तो बापदादा देश वाले और विदेश वाले दोनों से अटेन्शन देने में सेवा में और स्व-उन्नति में अटेन्शन है , लेकिन और भी बढ़ाते जाओ

296
02:22:59.649 --> 02:23:30.049
क्योंकि बापदादा ने दो बातें बार-बार अटेन्शन में दी हैं एक अचानक और दूसरा बहुतकाल का पुरूषार्थ जमा होना चाहिए ।

297
02:23:35.940 --> 02:23:48.170
हो जायेगा नहीं , हो रहा है नहीं , तीव्र है ?

298
02:23:52.850 --> 02:24:11.770
अभी कोई भी धारणा में तीव्र है परिवर्तन कर रहे हैं , नहीं ।

299
02:24:11.770 --> 02:24:16.739
अभी-अभी करना है ।

300
02:24:16.739 --> 02:24:21.649
हो जायेगा नहीं ।

301
02:24:22.280 --> 02:24:27.309
कभी नहीं , अभी ।

302
02:24:31.819 --> 02:24:50.110
बाकी बापदादा डबल विदेशियों की वृद्धि को देख भी खुश है ।

303
02:24:50.799 --> 02:25:09.540
हर एक कोशिश कर रहा है जो भी एरिया रही हुई है वह विदेश में भी पूरी करें ।

304
02:25:14.680 --> 02:25:22.219
उल्हना विदेश में भी रहना नहीं चाहिए ।

305
02:25:25.250 --> 02:25:37.479
हो रहा है बापदादा खुश है लेकिन और भी अगर कहाँ कोना रहा हुआ हो

306
02:25:37.479 --> 02:25:47.200
तो अटेन्शन देके वह भी उल्हना पूरा कर दो ।

307
02:25:49.709 --> 02:25:59.020
कब शब्द नहीं बोलना , अब ।

308
02:26:05.649 --> 02:26:17.020
तो बापदादा हर एक पर खुश है ।

309
02:26:24.969 --> 02:26:34.280
अमृतवेले विदेश में भी चक्र लगता है ।

310
02:26:34.280 --> 02:26:45.200
ऐसे नहीं सिर्फ मधुबन में या भारत में चक्र लगाते हैं ।

311
02:26:49.649 --> 02:27:00.280
विदेश में चक्र लगाना बापदादा को कितना टाइम चाहिए ?

312
02:27:06.170 --> 02:27:28.620
तो हर एक बच्चे के चार्ट को बापदादा चक्र लगाके देखते रहते हैं ।

313
02:27:28.620 --> 02:27:33.309
प्यार भी है ना !

314
02:27:33.600 --> 02:27:41.770
प्यार है बच्चों का , बाप का भी तो क्या करेंगे ?

315
02:27:41.770 --> 02:27:46.280
चक्र तो लगायेंगे ना !

316
02:27:47.250 --> 02:28:02.000
सभी जगह जाते हैं , ऐसे नहीं सिर्फ लण्डन अमेरिका , नहीं , सभी जगह चक्र लगाते हैं ।

317
02:28:19.479 --> 02:28:42.909
और बापदादा की हर सीजन में विदेशी मिस नहीं होते , अभी यह जो रीति बनाई है , यह अच्छी बनाई है ।

318
02:28:42.909 --> 02:28:47.020
रौनक है ।

319
02:28:48.510 --> 02:29:02.340
बापदादा हमेशा कहते हैं मधुबन का बच्चे श्रृंगार हैं ।

320
02:29:04.969 --> 02:29:20.399
तो डबल विदेशियों के आने से मधुबन का श्रृंगार हो जाता है ।

321
02:29:23.600 --> 02:29:32.170
हाँ , ताली बजाओ ।

322
02:29:39.600 --> 02:29:43.370
आप सभी को भी अच्छा लगता है ना !

323
02:29:43.370 --> 02:29:55.540
डबल विदेशी हर टर्न में आते हैं , हिम्मत रखते हैं ।

324
02:29:55.540 --> 02:30:04.340
आज 90 देशों से आये हैं ।

325
02:30:12.399 --> 02:30:34.799
बापदादा को बच्चों का प्यार देखके कुछ भी हो , सरकमस्टांश नहीं देखते , स्नेह को देखते हैं ।

326
02:30:37.309 --> 02:30:49.139
तो यह 90 देशों से किससे आये हैं ? स्नेह से ।

327
02:30:52.170 --> 02:31:23.479
तो बापदादा खास जैसे डबल विदेशी कहते हैं वैसे सौगुणा मुबारक और दुआयें दे रहे हैं ।

328
02:31:28.399 --> 02:31:34.680
अच्छा बैठ जाओ ।

329
02:31:37.370 --> 02:32:42.799
आई टी ग्रुप :- अच्छा है , बापदादा ने देखा है कि आई टी ग्रुप द्वारा बच्चों को भी लाभ मिला है , जो दूर बैठे सामने देखते हैं ।

330
02:32:43.709 --> 02:33:02.620
और सेवा में भी टी वी द्वारा सन्देश अच्छे मिलते रहे हैं ।

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02:33:03.819 --> 02:33:27.479
सिर्फ इस डिपार्टमेंट को हर देश के टी वी ग्रुप को ऐसा उमंग उत्साह में लाना है

332
02:33:27.479 --> 02:33:50.909
जो देश की देश में भी सेवा हो , जैसे अभी एक स्टूडेन्ट द्वारा सेवा जहाँ तहाँ हो रही है ,

333
02:33:50.909 --> 02:34:11.709
ऐसे हर ज़ोन में हर बड़े स्थान में जहाँ सन्देश पहुंच सकता है , वहाँ भी इसका फायदा लेना चाहिए ।

334
02:34:11.709 --> 02:34:24.739
जहाँ तहाँ प्रोग्राम चलते हैं वह भी दिखा सकते हैं , अपनी एरिया में ।

335
02:34:31.309 --> 02:35:00.000
जो अपनी एरिया के साधन होते हैं , अच्छी बातें फैलाने की , वह भी हर देश कर रहा है , या नहीं कर रहा है उसकी भी चेकिंग होनी चाहिए ।

336
02:35:03.540 --> 02:35:08.280
बाकी साधन अच्छा है ।

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02:35:08.280 --> 02:35:15.139
कर भी रहे हो , लेकिन बढ़ाते चलो ।

338
02:35:18.049 --> 02:35:37.200
ऐसे अट्रेक्शन के प्रोग्राम बनाते रहो और चारों ओर भेजते रहो तो चारों ओर फैलता जाए ।

339
02:35:39.200 --> 02:36:08.909
बाकी बापदादा खुश है कि दिन प्रतिदिन इस डिपार्टमेंट को भी कायदे में ला रहे हैं और आगे बढ़ता रहेगा , यह बापदादा को खुशी है ।

340
02:36:16.739 --> 02:36:19.020
अच्छा है ।

341
02:36:19.020 --> 02:36:39.479
आपस में मीटिंग की , उमंग उल्हास बढ़ाया , ऐसे ही उमंग उत्साह , समाचार की लेन देन बढ़ाते रहो ।

342
02:36:47.879 --> 02:36:52.510
अच्छा है , मुबारक हो ।

343
02:37:04.510 --> 02:37:10.399
अच्छा ।

344
02:37:24.450 --> 02:37:59.139
बापदादा फिर से इशारा दे रहे हैं कि स्व पुरूषार्थ , स्व पुरूषार्थ से स्व उन्नति और सेवा की उन्नति

345
02:37:59.139 --> 02:38:26.049
दोनों तरफ अटेन्शन देते रहो , आगे बढ़ते रहो और सदा उड़ते रहो , उड़ाते रहो ।

346
02:38:32.510 --> 02:38:36.170
अच्छा ।

347
02:38:36.170 --> 02:38:54.219
चारों ओर के बापदादा के स्नेह में समाये हुए

348
02:38:56.219 --> 02:39:15.020
याद और सेवा में आगे से आगे बढ़ने और बढ़ाने वाले ,

349
02:39:15.020 --> 02:39:32.799
अमृतवेला सबसे अच्छा पावरफुल बनाने वाले

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02:39:33.709 --> 02:40:16.850
और मन्सा सेवा द्वारा रहमदिल , दयालु , कृपालु बन आत्माओं को कुछ न कुछ अंचली देने वाले अपने इस विधि को आगे बढ़ाते चलो ।

351
02:40:20.450 --> 02:40:48.340
बापदादा देखते हैं कि हर एक बच्चा उमंग उत्साह में रहता है लेकिन अभी एडीशन क्या करो ?

352
02:40:48.340 --> 02:40:54.620
सदा शब्द एडीशन करो ।

353
02:40:54.620 --> 02:41:04.340
कभी-कभी शब्द डिक्शनरी से निकाल दो ।

354
02:41:07.540 --> 02:41:26.000
तो चारों ओर के बच्चों ने होली भी मनाई, जलाई भी और संग का रंग भी लगाया, बीती सो बीती की होली भी मनाई, इसीलिए बापदादा चारों ओर के बच्चों को सम्मुख दिल में देख रहे हैं।

