WEBVTT

1
00:23:41.480 --> 00:24:24.509
आज बापदादा अपने चारों ओर के परमात्म प्यारे बच्चों को देख रहे हैं ।

2
00:24:34.799 --> 00:24:56.740
ऐसे परमात्म प्यारे कोटो में कोई बच्चे हैं

3
00:25:10.910 --> 00:25:29.880
क्योंकि इस समय ही परमात्म प्यार का अनुभव कर सकते ,

4
00:25:31.880 --> 00:26:03.250
सारे कल्प में आत्माओं का प्यार , महात्माओं का , धर्मात्माओं का प्यार अनुभव किया

5
00:26:04.049 --> 00:26:26.220
लेकिन परमात्म प्यार सिर्फ अब संगमयुग पर होता है ,

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00:26:30.220 --> 00:26:48.220
जो आप सभी बच्चे अनुभव कर रहे हैं ।

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00:26:51.200 --> 00:27:04.619
कोई आपसे पूछे परमात्मा कहाँ है ?

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00:27:05.880 --> 00:27:11.769
तो क्या जवाब देंगे ?

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00:27:13.769 --> 00:27:19.650
मेरे साथ है ।

10
00:27:19.650 --> 00:27:26.680
मेरे साथ ही रहते हैं ।

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00:27:29.200 --> 00:27:36.740
मेरे दिल में ही रहते हैं ।

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00:27:46.279 --> 00:27:55.880
ऐसा अनुभव कर रहे हो ना !

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00:27:57.880 --> 00:28:18.339
आप ही जानते हो और आपको ही इस प्यार का अनुभव है

14
00:28:19.019 --> 00:28:34.799
कि हमारे दिल में बाप रहते और बाप के दिल में हम रहते ।

15
00:28:36.000 --> 00:29:19.710
जानते हो कि यह परमात्म प्यार का नशा हमें ही अनुभव करने का भाग्य प्राप्त हुआ है ।

16
00:29:26.509 --> 00:29:44.740
जब किसी से भी प्यार हो जाता है तो उसकी निशानी क्या होती है ?

17
00:29:49.710 --> 00:30:07.079
उसकी निशानी है उसके ऊपर कुर्बान होना ।

18
00:30:20.049 --> 00:30:39.940
तो परमपिता परमात्मा आप बच्चों से क्या चाहते हैं , वह तो आप सब जानते हो ।

19
00:30:41.309 --> 00:31:22.049
बाप की हर एक बच्चे के प्रति यही चाहना है कि मेरा एक एक बच्चा बाप समान बने ।

20
00:31:25.079 --> 00:31:51.019
जैसे बाप वैसे बच्चों की भी श्रेष्ठ स्थिति बने ।

21
00:31:51.019 --> 00:31:57.650
वह श्रेष्ठ स्थिति क्या है ?

22
00:31:58.220 --> 00:32:09.769
सम्पूर्ण पवित्रता की स्थिति ।

23
00:32:17.140 --> 00:32:42.910
ऐसी पवित्रता जो स्वप्न में भी अपवित्रता आ नहीं सके ।

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00:32:45.880 --> 00:33:04.509
ऐसी सम्पूर्ण पवित्र स्थिति बना रहे हो ?

25
00:33:10.450 --> 00:33:30.450
जिस सम्पूर्ण पवित्रता में अपवित्रता का नामनिशान नहीं ।

26
00:33:40.740 --> 00:34:11.420
वर्तमान समय समीप आने के कारण बापदादा अभी यही इशारा दे रहे हैं

27
00:34:14.800 --> 00:34:47.369
कि समय की समीपता अनुसार व्यर्थ संकल्प यह भी अपवित्रता की निशानी है ।

28
00:34:51.480 --> 00:35:41.650
सारे दिन में यह भी चेक करो कि कोई भी व्यर्थ संकल्प अभिमान का वा अपमान का अपने तरफ खींचता तो नहीं है ?

29
00:35:45.880 --> 00:36:29.650
क्योंकि चलते चलते अगर बाप की दी हुई विशेषताओं को अपनी विशेषता समझ अभिमान में आते हैं

30
00:36:32.280 --> 00:37:17.710
तो यह भी व्यर्थ संकल्प हुआ और मेरेपन के अशुभ संकल्प मैं कम नहीं हूँ ,

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00:37:17.710 --> 00:37:41.650
मैं भी सब जानता हूँ , यह मेरा संकल्प ही यथार्थ है , ऊंचा है ,

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00:37:41.650 --> 00:38:13.539
यह मेरेपन का अभिमान का संकल्प यह भी सूक्ष्म अपवित्रता का अंश है ।

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00:38:15.539 --> 00:38:54.340
तो अपने को चेक करो किसी भी प्रकार का अपवित्रता के व्यर्थ संकल्प का कोई अंश तो नहीं रह गया है ?

34
00:38:56.849 --> 00:39:36.280
क्योंकि अभी पवित्र दुनिया की स्थापना का समय समीप लाने वाले आप परमात्म प्यारे बच्चे निमित्त हो ।

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00:39:46.050 --> 00:40:10.570
तो जो निमित्त आत्मायें हैं उन्हों का वायब्रेशन चारों ओर फैलता है ।

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00:40:13.139 --> 00:40:47.250
तो चेक करो किसी भी प्रकार का व्यर्थ संकल्प भी अपने तरफ खींचता तो नहीं है ?

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00:40:59.820 --> 00:41:26.679
क्योंकि अभी पवित्र दुनिया , पवित्र राज्य समीप आ रहा है ।

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00:41:32.340 --> 00:41:56.280
दुःख और अशान्ति चारों ओर भिन्न-भिन्न स्वरूप में बढ़ रही है ।

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00:42:06.000 --> 00:42:32.280
उसके लिए पवित्रता का वायब्रेशन आवश्यक है ।

40
00:42:35.650 --> 00:42:46.679
दुःख अशान्ति का कारण अपवित्रता है ।

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00:42:49.769 --> 00:43:27.369
तो अपवित्र आत्माओं को और भक्त आत्माओं को अभी डबल सेवा चाहिए ।

42
00:43:30.400 --> 00:44:06.400
वाणी की सेवा तो बापदादा ने देखा कि चारों ओर धूमधाम से चल रही है , अपना उल्हना भी निकाल रहे हो ।

43
00:44:09.420 --> 00:44:36.110
लेकिन अभी आत्माओं को एकस्ट्रा सकाश चाहिए ।

44
00:44:39.539 --> 00:45:08.969
वह है मन्सा सेवा द्वारा सकाश देना , हिम्मत देना , उमंग-उत्साह देना ।

45
00:45:11.539 --> 00:45:30.570
तो इस समय डबल सेवा की आवश्यकता है ।

46
00:45:30.570 --> 00:45:58.110
इसके लिए बापदादा ने कहा कि हर एक बच्चा अपने को पूर्वज समझो ।

47
00:46:00.110 --> 00:46:26.110
आप इस कल्प वृक्ष का फाउण्डेशन पूर्वज और पूज्य आप आत्मायें हो ।

48
00:46:28.909 --> 00:46:47.480
बापदादा तो दुःखी बच्चों का आवाज सुनते रहते हैं ।

49
00:46:48.510 --> 00:47:14.510
आप बच्चों के पास उन्हों के पुकार का आवाज पहुंचना चाहिए ।

50
00:47:19.539 --> 00:47:36.909
जितना सम्पूर्ण पवित्र आत्मा बनेंगे ।

51
00:47:38.909 --> 00:48:17.139
बन रहे हैं , बने भी हैं लेकिन साथ-साथ अभी मन्सा सेवा को बढ़ाना है ।

52
00:48:38.219 --> 00:49:13.769
आज विश्व में सुख-शान्ति , सन्तोष आत्माओं में कम हो रहा है ।

53
00:49:18.800 --> 00:50:11.599
तो आप परमात्म प्यार के पात्र आत्माओं को अभी प्यार की , सन्तुष्टता की , खुशी की अंचली देने की आवश्यकता है ।

54
00:50:27.880 --> 00:50:42.219
दुःखियों को सुख की अंचली देनी है ।

55
00:50:58.510 --> 00:51:44.739
एक तो मन्सा सेवा द्वारा सकाश दो और दूसरा अपने चेहरे और चलन द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करो ।

56
00:51:53.199 --> 00:52:07.480
अभी जो सेवा कर रहे हो और की है बापदादा खुश है

57
00:52:07.480 --> 00:52:40.050
कि सेवा में चारों ओर उमंग-उत्साह है लेकिन अभी एक सेवा रही हुई है ।

58
00:52:44.679 --> 00:53:31.940
अभी तक यह आवाज तो हुआ है कि ब्रह्माकुमारियां मनुष्य आत्मा को अच्छा बना देती हैं ,

59
00:53:36.510 --> 00:53:51.250
यह जो अशुद्ध व्यवहार है , अशुद्ध व्यवहार से मुक्त कर देती हैं ,

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00:53:52.219 --> 00:54:10.800
जो गवर्मेन्ट चाहती है यूथ ग्रुप के लिए , वह सेवा बहुत अच्छी करते ।

61
00:54:10.800 --> 00:54:36.219
लेकिन अभी बाप आया है , परमात्मा आ गया है ,

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00:54:36.219 --> 00:54:57.940
परमात्म ज्ञान यह दे रही हैं , मेरा बाप वर्सा देने आ गया है ,

63
00:54:57.940 --> 00:55:54.280
अभी बाप की तरफ नजर जाने से उन्हों को भी परमात्म प्यार , परमात्मा की आकर्षण आकर्षित करेगी ।

64
00:56:08.050 --> 00:56:37.420
अच्छा-अच्छा तो हो गया है लेकिन परमात्मा बाप की प्रत्यक्षता आकर्षित कर अच्छा बनायेगी ।

65
00:56:49.420 --> 00:57:17.710
तो अभी बाप के तरफ पहचान , जिसको याद करते हैं

66
00:57:18.510 --> 00:57:49.820
वह ज्ञान , वह वर्सा मिल रहा है तो अभी मन्सा द्वारा बाप के समीप लाओ ।

67
00:57:51.820 --> 00:58:11.880
अपने चेहरे और चलन द्वारा , आपके नयनों में बाप प्रत्यक्ष हो ।

68
00:58:22.340 --> 00:58:33.199
तो अभी यह आपस में प्लैन बनाओ ।

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00:58:35.199 --> 00:58:58.000
बापदादा ने देखा जो प्लैन बापदादा ने समय प्रति समय दिया है

70
00:58:58.570 --> 00:59:16.340
वह बच्चों ने बड़े विधि पूर्वक , उमंग-उत्साह से किया है , कर रहे हैं ,

71
00:59:16.340 --> 00:59:39.599
इसकी बापदादा सभी बच्चों को पदम पदम गुणा मुबारक दे रहे हैं ।

72
00:59:57.599 --> 01:00:19.139
अभी एडीशन करो कि भगवान वर्सा दे रहा है ।

73
01:00:22.570 --> 01:00:31.820
अभी वर्सा नहीं लिया तो कब लेंगे !

74
01:00:31.820 --> 01:00:53.599
बाप को रहम आता है बच्चों का दुःख , अशान्ति का वायुमण्डल देख करके ।

75
01:00:55.599 --> 01:01:10.110
और बाप और आप जानते हो कि यह तो अति में जाना ही है ।

76
01:01:11.139 --> 01:01:18.679
बिना अति के अन्त नहीं होता है ।

77
01:01:18.679 --> 01:01:56.400
ऐसे समय पर आत्माओं को यह अनुभव कराओ , सिर्फ सुनाओ नहीं , अनुभव कराओ कि भगवान वर्सा दे रहा है ।

78
01:01:58.400 --> 01:02:19.880
आप सभी भी यही पूछते हो ना कि यह बाप की प्रत्यक्षता कब और कैसे होगी !

79
01:02:22.909 --> 01:02:39.539
तो ब्रह्माकुमारियों तक पहुंचे हैं लेकिन ब्रह्माकुमारियों को सिखाने वाला कौन !

80
01:02:45.309 --> 01:02:59.369
ब्रह्माकुमारियों का , ब्रह्माकुमारों का दाता कौन !

81
01:03:02.909 --> 01:03:18.340
अभी समय को समीप लाना है , समाप्ति करनी है ।

82
01:03:18.909 --> 01:03:27.369
समाप्ति को समीप लाने वाले कौन हैं ?

83
01:03:28.050 --> 01:03:35.480
हर एक बच्चा समझता है ना कि मैं ही निमित्त हूँ ।

84
01:03:36.909 --> 01:03:49.309
बाप ने यह जिम्मेवारी अपने साथ बच्चों को दी है ।

85
01:03:49.309 --> 01:03:55.820
सन शोज फादर ।

86
01:04:00.340 --> 01:04:24.969
कोई-कोई जब बाप को जानते , तो देखो आप सबने बाप को जाना तो क्या किया ?

87
01:04:27.309 --> 01:04:44.849
पहचान लिया , जान लिया , तो बच्चा बन वर्से के अधिकारी बन गये ।

88
01:04:49.420 --> 01:05:04.400
अभी वर्सा लेने वाली आत्माओं की क्यू लगनी चाहिए ।

89
01:05:12.219 --> 01:05:21.369
और क्यू रूकी हुई क्यों है ?

90
01:05:32.619 --> 01:06:11.599
क्योंकि कोई कोई बच्चे अभी व्यर्थ संकल्पों की क्यु में लगे हुए हैं ।

91
01:06:15.139 --> 01:06:54.110
क्यों , क्या , कैसे , अभी इस समाप्ति में समय देते हैं लेकिन व्यर्थ समाप्त नहीं हुआ है ।

92
01:06:56.110 --> 01:07:09.539
व्यर्थ समर्थ बनने में रूकावट डालता है ।

93
01:07:19.599 --> 01:08:12.570
तो आज बापदादा व्यर्थ संकल्पों की समाप्ति करने के लिए सभी चारों ओर के बच्चों को हिम्मत दे रहे हैं

94
01:08:17.420 --> 01:08:44.170
कि अभी से व्यर्थ को समाप्त कर सदा समर्थ बन समर्थ बनाओ ।

95
01:08:44.170 --> 01:08:55.479
सिर्फ सन्देश नहीं दो समर्थ बनाओ , समर्थ बनो , समर्थ बनाओ ।

96
01:08:55.479 --> 01:09:02.449
व्यर्थ का समाप्ति दिवस मनाओ ।

97
01:09:07.250 --> 01:09:10.340
हो सकता है ?

98
01:09:10.340 --> 01:09:29.140
जो समझते हैं कि व्यर्थ संकल्प अपने को भी नुकसान पहुंचाते हैं ,

99
01:09:29.140 --> 01:09:55.939
समय बरबाद करते हैं , चेहरे पर सदा खुशनुमा , खुशकिस्मत का अनुभव कम कराते है ।

100
01:10:00.449 --> 01:10:18.800
इसलिए अभी समाप्ति का समय समीप लाना है , किसको ?

101
01:10:18.800 --> 01:10:22.970
आपको ना !

102
01:10:22.970 --> 01:10:54.000
जो समझते हैं कि अभी समाप्ति के समय को समीप लाना है , उसके लिए व्यर्थ को समाप्त करना ही है , करना है नहीं , करना ही है ,

103
01:10:54.000 --> 01:11:09.140
स्वप्न में भी नहीं आवे , संकल्प तो छोड़ो लेकिन स्वप्न में भी नहीं आये ,

104
01:11:09.939 --> 01:11:28.680
ऐसे हिम्मत वाले बच्चे जो अपने को समझते हैं वह हाथ उठाओ ।

105
01:11:39.369 --> 01:11:43.420
मन का हाथ उठा रहे हो ना !

106
01:11:43.420 --> 01:11:53.079
बांहों का हाथ तो बहुत इजी है लेकिन मन का हाथ उठा रहे हो ?

107
01:11:53.079 --> 01:12:01.420
जो मन का हाथ उठा रहे हैं वह हाथ उठाओ , मन का हाथ ।

108
01:12:01.420 --> 01:12:04.399
अच्छा ।

109
01:12:06.800 --> 01:12:11.710
आज के वी आई पी उठो ।

110
01:12:13.539 --> 01:12:21.310
जो आज विशेष वी आई पी आये हैं वह उठो ।

111
01:12:23.310 --> 01:12:26.850
यहाँ बैठे हैं ना !

112
01:12:27.310 --> 01:12:30.510
अच्छा ।

113
01:12:43.369 --> 01:13:07.199
बापदादा आये हुए वी आई पी , वी आई पी का अर्थ है जो स्नेही है , सहयोगी है

114
01:13:07.710 --> 01:13:36.279
और कर्तव्य जो चल रहा है , उनसे प्यार है , बहिनों से प्यार है , भाईयों से प्यार है , उसको कहते हैं वी आई पी अर्थात् स्नेही सहयोगी ।

115
01:13:36.619 --> 01:13:40.569
अभी क्या बनना पड़ेगा ?

116
01:13:42.569 --> 01:13:53.770
वी आई पी तो हैं और बापदादा खुश है ।

117
01:13:53.770 --> 01:13:57.649
अभी क्या बनेंगे ?

118
01:13:57.649 --> 01:14:02.449
एक छोटी सी बात है , बताऊं ?

119
01:14:02.449 --> 01:14:06.109
बतायें ?

120
01:14:07.250 --> 01:14:30.000
बापदादा कहते हैं स्नेह बहुत अच्छा है , याद भी करते हैं , बाबा शब्द भी मन से निकलता है ।

121
01:14:30.000 --> 01:14:41.140
बाकी एडीशन चाहिए एक , वह एडीशन क्या है ?

122
01:14:41.140 --> 01:14:50.000
सहज योगी की लिस्ट में भी आओ ।

123
01:14:52.000 --> 01:15:02.000
एक कदम तो उठाया है लेकिन आगे बढ़ने के लिए क्या किया जाता है ?

124
01:15:02.000 --> 01:15:12.850
एक कदम उठाओ , उससे आगे बढ़ेंगे तो दूसरा कदम भी उठाना पड़ेगा ।

125
01:15:14.220 --> 01:15:27.939
तो बापदादा की यही आश है स्नेही बच्चों के प्रति , सहयोगी बच्चों के प्रति ।

126
01:15:27.939 --> 01:15:37.310
तो साथ-साथ सहजयोगी भी बनो ।

127
01:15:42.449 --> 01:15:46.800
सहजयोगी बन सकते हैं ?

128
01:15:46.800 --> 01:15:53.770
बन सकते हैं , मुश्किल कुछ नहीं होगा ।

129
01:15:53.770 --> 01:15:57.420
छोड़ना नहीं पड़ेगा कुछ ।

130
01:15:57.420 --> 01:16:05.770
और ही योग की शक्ति मदद देगी ।

131
01:16:05.770 --> 01:16:13.539
आपके कार्य में वृद्धि होगी ।

132
01:16:16.850 --> 01:16:30.279
तो बापदादा को स्नेही सहयोगी बच्चे याद आते हैं ।

133
01:16:31.649 --> 01:16:35.479
क्यों याद आते हैं ?

134
01:16:36.170 --> 01:16:46.909
क्योंकि आप एक एक्जैम्पुल हो ।

135
01:16:48.170 --> 01:17:02.340
क्योंकि एक बात के लिए लोग घबराते हैं , तो शायद घरबार छोड़ना पड़ेगा ।

136
01:17:03.479 --> 01:17:12.170
लेकिन आप सब घर में रहते स्नेह और सहयोग में चलते

137
01:17:12.170 --> 01:17:21.479
तो आपको देख करके उन्हों में उमंग-उत्साह आयेगा ।

138
01:17:21.479 --> 01:17:25.250
आपकी सेवा हो जायेगी ।

139
01:17:25.250 --> 01:17:33.939
अनेकों के तकदीर का ताला खोल सकते हो ।

140
01:17:36.850 --> 01:17:39.369
पसन्द है ?

141
01:17:39.369 --> 01:17:48.850
पसन्द है तो हाथ उठाओ ।

142
01:17:52.569 --> 01:17:55.600
अच्छा ।

143
01:17:56.109 --> 01:18:05.539
अभी बापदादा एक वरदान देते हैं ।

144
01:18:07.819 --> 01:18:24.050
आपने हिम्मत रखी तो हिम्मत का फल बहुत मीठा होता है ,

145
01:18:25.199 --> 01:18:33.539
तो बापदादा यह वरदान दे रहा है

146
01:18:33.539 --> 01:18:55.939
कि आप सभी आने वाली नई दुनिया में 21 जन्म सदा खुश रहेंगे ।

147
01:18:55.939 --> 01:19:00.850
मेहनत नहीं करेंगे ।

148
01:19:00.850 --> 01:19:08.279
दुनिया की उलझनों में नहीं पड़ेंगे ।

149
01:19:08.279 --> 01:19:37.600
जो जीवन में चाहिए , तन मन धन सब मिल जायेगा । तन तन्दुरूस्त , मन खुश , धन अथाह यह आपको 21 जन्म की गैरन्टी है ।

150
01:19:40.510 --> 01:19:51.600
बापदादा को मंजूर है , आप सिर्फ एक बात करो ।

151
01:19:52.739 --> 01:20:06.050
रोज़ आश्रम में आ नहीं सकते हो तो फोन करो ।

152
01:20:07.479 --> 01:20:13.600
यह कान का फोन है ना , वह करो ।

153
01:20:14.850 --> 01:20:25.770
आपके कनेक्शन वाली टीचर जो भी है उससे अपना टाइम फिक्स करो ,

154
01:20:25.770 --> 01:20:41.539
तो इस समय हम फोन करेंगे और उसमें रोज़ का जो महावाक्य जिसको मुरली कहते हैं ,

155
01:20:41.539 --> 01:20:52.619
वह वरदान और शुरू का जो होता है आरम्भ , वह सुनो ।

156
01:20:53.770 --> 01:20:56.000
क्यों ?

157
01:20:56.000 --> 01:20:59.079
बापदादा क्यों कहते हैं ?

158
01:21:01.649 --> 01:21:05.250
अगर करना है , तो हाथ उठाओ ।

159
01:21:05.250 --> 01:21:18.449
अच्छा , आजकल के जमाने के हिसाब से बातें बहुत बदलती जाती हैं ।

160
01:21:18.449 --> 01:21:26.510
गवर्मेन्ट के कायदे भी बदलने हैं , मनुष्यों की वृत्ति भी बदलनी है ।

161
01:21:26.510 --> 01:21:40.220
इसके लिए हर एक के जीवन में बातें तो आनी ही हैं , व्यर्थ बातें ,

162
01:21:40.220 --> 01:21:48.399
तो व्यर्थ को समाप्त करने के लिए समर्थ संकल्प चाहिए ।

163
01:21:48.399 --> 01:21:56.109
वेस्ट को खत्म करने के लिए बेस्ट संकल्प चाहिए ।

164
01:21:56.109 --> 01:22:03.649
वह रोज़ सुनने का है वरदान ।

165
01:22:03.939 --> 01:22:10.000
वरदान जो है वह श्रेष्ठ संकल्प है ।

166
01:22:10.000 --> 01:22:18.340
जब व्यर्थ आवे तो श्रेष्ठ संकल्प मन को चाहिए ।

167
01:22:18.340 --> 01:22:22.569
मन खाली नहीं रह सकता है ।

168
01:22:22.970 --> 01:22:27.770
मन को कुछ न कुछ संकल्प चाहिए ।

169
01:22:28.449 --> 01:22:50.220
तो व्यर्थ वेस्ट को बेस्ट करने के लिए आपको यह वरदान और स्लोगन और आदि के शब्द यह मन को चेंज करने के लिए चाहिए ।

170
01:22:50.220 --> 01:22:53.369
यह कर सकते हो ?

171
01:22:53.369 --> 01:22:56.170
कर सकते हो ?

172
01:22:56.170 --> 01:23:00.739
कोई करते भी होंगे ।

173
01:23:01.770 --> 01:23:20.739
क्योंकि बाप को यही आप अनुभवी बन औरों को अनुभवी बनाने में बहुत सेवा कर सकते हैं ।

174
01:23:21.649 --> 01:23:27.819
अभी समय फास्ट जा रहा है ।

175
01:23:28.220 --> 01:23:39.369
तो फास्ट समय में आपकी सेवा भी फास्ट होगी ।

176
01:23:43.250 --> 01:24:02.970
तो बापदादा को आप सब आये , यह खुशी है , बच्चों को देखा चाहे कभी कभी आने वाले हैं लेकिन हैं तो बच्चे ना ।

177
01:24:02.970 --> 01:24:07.939
तो बच्चों को बाप तो देखेगा ।

178
01:24:08.970 --> 01:24:39.939
इसलिए आप सिर्फ थोड़ा समय जब अमृतवेले उठते हो तो भले बेड पर लेटे हुए हो, आंख खुलती है तो पहले पहले शिवबाबा को गुडमार्निंग करो।

179
01:24:40.340 --> 01:24:44.569
कर सकते हो ?

180
01:24:47.250 --> 01:25:00.850
देखो कहावत है सारे दिन में अगर कोई अच्छे को देखते हैं तो सारा दिन अच्छा बीतता है

181
01:25:00.850 --> 01:25:07.479
कोई खराब को देख लेते हैं ना तो क्या कहते हैं ?

182
01:25:07.479 --> 01:25:18.109
कहते हैं पता नहीं किसकी शक्ल देखी जो सारा दिन खराब गया ।

183
01:25:18.109 --> 01:25:21.539
तो अच्छे ते अच्छा कौन ?

184
01:25:21.539 --> 01:25:24.050
शिवबाबा ।

185
01:25:24.050 --> 01:25:29.079
शिवबाबा से प्यार है ना ।

186
01:25:29.539 --> 01:25:37.539
तो आंख खुलते शिवबाबा गुडमार्निंग।

187
01:25:39.539 --> 01:25:53.369
और आंख बन्द करते रात्रि को , जब बेड पर जाओ तो शिवबाबा गुडनाईट ।

188
01:25:57.539 --> 01:26:00.909
यह तो सहज है ना ।

189
01:26:01.369 --> 01:26:06.510
तो सारा दिन आपका अच्छा होगा ।

190
01:26:06.510 --> 01:26:12.170
क्योंकि शुभ संकल्प भी ले लिया ना वरदान ।

191
01:26:12.170 --> 01:26:14.680
तो ऐसे करना ।

192
01:26:14.680 --> 01:26:18.909
बापदादा का प्यार है ना आप लोगों से ।

193
01:26:18.909 --> 01:26:26.510
तो यह करने से और आप आगे बढ़ते जायेंगे ।

194
01:26:26.510 --> 01:26:32.279
अपने इस जीवन में भी खुशी का अनुभव करेंगे ।

195
01:26:32.279 --> 01:26:37.369
कभी दुःख की लहर नहीं आयेगी ।

196
01:26:40.569 --> 01:26:49.539
तो मंजूर है और सहज योगी बनो बस ।

197
01:26:51.539 --> 01:26:59.420
मैं आत्मा हूँ , शिवबाबा का बच्चा हूँ , बस , यह सहजयोगी ।

198
01:26:59.420 --> 01:27:09.420
चलते फिरते यह याद करो मैं आत्मा हूँ , शिवबाबा का बच्चा हूँ ।

199
01:27:10.000 --> 01:27:15.020
यह तो याद कर सकते हो ना !

200
01:27:17.770 --> 01:27:23.939
तो बहुत अच्छा ।

201
01:27:37.649 --> 01:27:46.909
यह तो हुआ इन बच्चों से रूहरिहान ।

202
01:27:47.250 --> 01:28:03.600
अभी आप सभी जो वारिस भी हैं और वारिस बनने वाले भी हैं ।

203
01:28:05.199 --> 01:28:24.050
जो अपने आपको बापदादा का पक्का वारिस समझते हैं , वह हाथ उठाओ ।

204
01:28:26.680 --> 01:28:29.479
वारिस हैं ?

205
01:28:35.079 --> 01:28:38.800
वी आई पी भी सभी हाथ उठा रहे हैं ।

206
01:28:38.800 --> 01:28:42.909
ताली तो बजाओ ।

207
01:28:50.340 --> 01:28:53.310
अच्छा ।

208
01:28:53.649 --> 01:29:15.250
अभी वारिस क्वालिटी को आज यह संकल्प अपने से दृढ़ करेंगे ,

209
01:29:15.649 --> 01:29:50.170
बापदादा को यह संकल्प देंगे कि हम अभी से , कब से नहीं , अब से व्यर्थ संकल्प को समाप्त करके ही छोड़ेंगे ।

210
01:29:50.170 --> 01:29:52.800
मंजूर है ।

211
01:29:52.800 --> 01:29:55.199
है मंजूर ?

212
01:29:55.199 --> 01:29:58.970
है तो हाथ उठाओ ।

213
01:30:02.109 --> 01:30:05.600
अच्छा ।

214
01:30:09.770 --> 01:30:23.420
जो समझते हैं पक्का संकल्प है , मन का । हाथ उठाने का नहीं , मन का हाथ उठाने का , वह हाथ उठाओ ।

215
01:30:27.819 --> 01:30:31.020
अच्छा सब ।

216
01:30:33.939 --> 01:30:37.880
पीछे वाले उठा रहे हैं ।

217
01:30:45.140 --> 01:30:49.600
जो पक्का वह दो हाथ उठाओ ।

218
01:31:06.909 --> 01:31:15.420
तो आज है कौन सा दिन ?

219
01:31:18.510 --> 01:31:28.340
व्यर्थ को समाप्त करना अर्थात् समर्थ बनना ।

220
01:31:28.340 --> 01:31:38.800
सदा समर्थ और दूसरा कार्य कौन सा है ?

221
01:31:40.800 --> 01:31:54.109
दुःख और अशान्ति की समाप्ति का दिवस समीप लाना ।

222
01:31:55.310 --> 01:31:59.140
दो काम हैं ।

223
01:31:59.140 --> 01:32:12.970
एक सदा समर्थ बनना और दूसरा समर्थ समय को समीप लाना ।

224
01:32:13.369 --> 01:32:15.310
ठीक है ।

225
01:32:15.310 --> 01:32:18.850
दोनों ही काम ठीक है ?

226
01:32:18.850 --> 01:32:21.140
कांध हिलाओ ।

227
01:32:31.020 --> 01:32:50.739
क्योंकि बापदादा के पास पुकार और दुःख की आह बहुत सुनाई देती है ।

228
01:32:50.739 --> 01:32:58.569
आपके पास पता नहीं क्यों नहीं सुनाई देती है ।

229
01:33:04.449 --> 01:33:14.220
बापदादा जब ऐसे सुनते रहते हैं

230
01:33:14.850 --> 01:33:34.569
तो आप बच्चों को जो अपने को वारिस समझते हैं , वर्सा लेने वाले हैं ,

231
01:33:36.569 --> 01:33:58.850
तो वर्सा लेने वाले को दूसरों को वर्सा दिलाने के ऊपर रहम आना चाहिए ना ।

232
01:34:03.539 --> 01:34:08.279
रहम क्यों नहीं आता ?

233
01:34:10.680 --> 01:34:24.680
वैराग्य , बेहद का वैराग्य और रहम आना चाहिए ।

234
01:34:26.680 --> 01:34:42.000
छोटी छोटी बातों में क्यों , क्या के क्यूं में टाइम नहीं देना है ।

235
01:34:47.250 --> 01:35:21.420
अभी हे बापदादा के सिकीलधे पदम पदम वरदानों के वरदानी बच्चे !

236
01:35:22.680 --> 01:35:34.340
अभी संकल्प को दृढ़ करो ।

237
01:35:35.250 --> 01:35:41.310
और दृढ़ता की चाबी लगाओ ।

238
01:35:44.170 --> 01:35:50.050
कर्मयोगी बनो ।

239
01:35:50.569 --> 01:35:57.420
कर्मयोगी लाइफ वाले हो ।

240
01:35:57.420 --> 01:36:05.310
लाइफ सदाकाल होती है , कभी कभी नहीं ।

241
01:36:10.680 --> 01:36:37.880
तो अभी अपना कृपालु , दयालु , दुःखहर्ता , सुख देता स्वरूप को इमर्ज करो ।

242
01:36:44.050 --> 01:37:01.600
बापदादा ने अचानक का समय बहुतकाल से बताया है ।

243
01:37:09.140 --> 01:37:24.619
तो अचानक के पहले भक्तों की पुकार तो पूरी करो ।

244
01:37:27.250 --> 01:37:36.970
दुःखियों के दुःख के आवाज तो सुनो ।

245
01:37:41.710 --> 01:38:14.850
अभी हर एक छोटा बड़ा विश्व-परिवर्तक , विश्व के दुःख परिवर्तन कर सुख की दुनिया लाने वाले जिम्मेवार समझो ।

246
01:38:23.369 --> 01:38:34.680
बापदादा का यह आना जाना भी कब तक ?

247
01:38:44.739 --> 01:38:53.369
इसलिए सब अचानक होना है ।

248
01:39:02.800 --> 01:39:25.079
तो अभी वारिस क्वालिटी , वर्सा दिलाना , रहमदिल बनने का पार्ट बजाओ ।

249
01:39:36.619 --> 01:39:44.850
ऐसे नहीं सोचना कब तक होगा !

250
01:39:45.369 --> 01:39:49.649
अचानक होगा ।

251
01:40:06.220 --> 01:40:21.420
इसलिए व्यर्थ को समाप्त करना ही है ।

252
01:40:21.420 --> 01:40:29.479
होना है नहीं , करना ही है ।

253
01:40:37.649 --> 01:40:56.279
बापदादा ने रिजल्ट देखी सभी के कर्मो के गति को चेक किया ।

254
01:40:56.850 --> 01:41:04.279
पुरूषार्थ की गति को चेक किया ।

255
01:41:06.510 --> 01:41:15.600
खज़ाने जमा का खाता चेक किया ।

256
01:41:24.399 --> 01:41:29.310
तो रिजल्ट में क्या देखा ?

257
01:41:48.739 --> 01:41:59.250
जमा करने का पुरूषार्थ बहुत अच्छा करते हैं

258
01:42:01.250 --> 01:42:31.880
लेकिन जो जमा करते हो उसमें परसेन्टेज भिन्न-भिन्न है ।

259
01:42:34.340 --> 01:43:08.909
जितना सोचते हो जमा किया , होता है जमा लेकिन परसेन्टेज , थोड़ा जमा होता है , सदा के लिए जमा नहीं ।

260
01:43:10.220 --> 01:43:22.109
जितना करते हो उतना सदा के लिए जमा में फर्क है ।

261
01:43:25.939 --> 01:43:49.600
इसलिए बापदादा अभी एक एक बात पर दृढ़ संकल्प कराता है ।

262
01:43:51.600 --> 01:44:23.479
क्रोध पर कराया , लेकिन मन से भी किसके प्रति हलचल नहीं हो ।

263
01:44:24.220 --> 01:44:30.000
क्यों , क्या नहीं हो ।

264
01:44:35.939 --> 01:45:02.399
मुख से कन्ट्रोल किया है , कोई कोई ने अच्छा किया है लेकिन मन से थोड़ा थोड़ा चलता है ।

265
01:45:03.939 --> 01:45:29.539
मिटाने की कोशिश कर रहे हैं फिर भी बापदादा खुश है कि अटेन्शन गया है ।

266
01:45:33.369 --> 01:45:47.250
समझने लगे हैं कि इसमें मेरे को ही नुकसान है ।

267
01:45:53.600 --> 01:45:59.199
समझा ।

268
01:46:12.050 --> 01:46:16.970
अच्छा ।

269
01:46:31.479 --> 01:47:55.250
सेवा का टर्न ईस्टर्न ज़ोन , ( बंगाल बिहार , उड़ीसा , आसाम ) नेपाल और तामिलनाडु :- पौना हाल तो इसी ज़ोन वाले हैं ।

270
01:48:04.050 --> 01:48:06.279
अच्छा ।

271
01:48:06.279 --> 01:48:19.600
सेवाधारी , सिर्फ सेवाधारी उठो बाकी ऐसे जो साथ आये हैं वह बैठ जाओ ।

272
01:48:26.449 --> 01:48:29.539
बहुत हैं ।

273
01:48:29.539 --> 01:48:33.479
अच्छा है ।

274
01:48:34.220 --> 01:48:44.569
तो अभी विशेष है ईस्टर्न ज़ोन ।

275
01:48:45.600 --> 01:48:55.479
ईस्टर्न में भी बहुत ही भाग हैं ।

276
01:48:59.140 --> 01:49:35.479
तो ईस्टर्न ज़ोन की तो विशेषता है , उसमें भी विशेष है कलकत्ता , जहाँ ज्ञान सूर्य प्रगट हुआ ।

277
01:49:44.000 --> 01:49:59.649
तो जिस धरनी पर ज्ञान सूर्य प्रगट हुआ वह धरनी कितनी महान है ।

278
01:50:05.649 --> 01:50:24.850
और बंगाल बिहार , बिहार भी कम नहीं ।

279
01:50:24.850 --> 01:50:54.850
क्योंकि बापदादा ने देखा कि बिहार में सेवा का साधन बहुत अच्छा है ।

280
01:50:55.539 --> 01:51:00.170
क्यों अच्छा है ?

281
01:51:03.369 --> 01:51:15.819
क्योंकि बिहार के लोग चाहना बहुत अच्छी रखते हैं

282
01:51:17.819 --> 01:51:42.000
और बिहार में अभी अभी जो हलचल हुई , उसमें बहिनों ने बिहार के भाईयों ने जो कार्य किया है ,

283
01:51:43.600 --> 01:52:08.510
जो उन्हों को चाहिए था , जीवन के लिए वह प्राप्त कराने का और ज्ञान सुनाने का , मन का भोजन और तन की परवरिश दोनों की है ,

284
01:52:09.600 --> 01:52:20.850
इसलिए बिहार में नाम बहुत अच्छा फैला है ।

285
01:52:22.850 --> 01:52:45.770
प्यार से सुनते हैं , यह सेवा दिल से की है , बापदादा ऐसी सेवा डबल , सिर्फ चीजे देने की नहीं , सेन्टर भी खोले हैं ,

286
01:52:46.109 --> 01:53:04.619
ऐसे डबल सेवा करने वाले बिहार के बच्चों को बापदादा विशेष मुबारक दे रहे हैं ।

287
01:53:07.310 --> 01:53:22.340
वैसे तो देखा जाए और जगह पर भी करते हैं , और की है ।

288
01:53:22.340 --> 01:53:28.449
उन्हों का नाम नहीं लेते लेकिन करते रहते हैं ।

289
01:53:28.449 --> 01:53:39.819
फारेन में भी किया है , इन्डिया में भी किया है लेकिन बिहार की विशेषता यह है

290
01:53:39.819 --> 01:53:50.909
कि वहाँ जगह जगह पर ज्ञान की वर्षा बहुत अच्छी की है ।

291
01:53:52.909 --> 01:53:58.510
कितने सेन्टर खोले हैं ?

292
01:54:28.000 --> 01:54:53.079
( एक वर्ष में 12 सेन्टर 12 जिलों में खोले हैं ) गीता पाठशालायें भी खोली होगी ।

293
01:54:53.079 --> 01:54:56.050
( वह भी खुली हैं ) अच्छा है ।

294
01:54:56.050 --> 01:55:02.449
बापदादा को यह सेवा बहुत अच्छी लगती है ।

295
01:55:02.449 --> 01:55:12.970
जहाँ भी ऐसी हालत हो वहाँ यह डबल सेवा करनी चाहिए ।

296
01:55:12.970 --> 01:55:24.399
सेन्टर खोलने में निमित्त आपको बनना पड़ेगा क्योंकि वहाँ की हालत खराब होती है

297
01:55:24.399 --> 01:55:35.140
लेकिन फिर थोड़े समय में आपके सहयोगी अच्छे बन जायेंगे ।

298
01:55:38.680 --> 01:55:58.279
और बापदादा ने देखा कि अभी इस ज़ोन में भी सेवा फैल रही है

299
01:55:58.279 --> 01:56:17.880
चाहे बंगाल , चाहे बिहार , चाहे उनके साथी हैं , नेपाल भी है , उड़ीसा , आसाम और तामिलनाडु ।

300
01:56:17.880 --> 01:56:31.819
इनके साथी बहुत हैं क्योंकि ज्ञान सूर्य प्रगटा ना तो सेन्टर भी बहुत हैं साथी भी बहुत हैं ।

301
01:56:31.819 --> 01:56:53.880
और आज तक बापदादा ने देखा कि हर एक एरिया को चाहे बड़ा ज़ोन नहीं है , छोटे हैं

302
01:56:53.880 --> 01:57:02.000
लेकिन छोटों में सेवा का उमंग और बहुत है ।

303
01:57:03.250 --> 01:57:10.449
और रूचि से किया भी है , कर भी रहे हैं ।

304
01:57:10.449 --> 01:57:34.909
इसलिए इन सब ज़ोन में जो भी नाम ले रहे हैं , उन सब तरफ सेवा का बोलबाला हो गया है ।

305
01:57:37.420 --> 01:57:53.420
और रिजल्ट में यह भी देखा गया तो रेग्युलर स्टूडेन्ट भी बने हैं ।

306
01:57:55.420 --> 01:58:15.420
चाहे बड़े या छोटे प्रोग्रामस , मीडिया का भी साथ है लेकिन अभी जो बाबा ने कहा है

307
01:58:16.220 --> 01:58:33.079
कि समय को समीप लाओ , उसकी तैयारी जल्दी से जल्दी करना है ।

308
01:58:36.279 --> 01:58:38.340
अच्छा ।

309
01:58:38.340 --> 01:58:58.619
बापदादा जो बंगाल बिहार की तरफ से आये हैं उन सबको भी मुबारक देते हैं

310
01:58:58.619 --> 01:59:17.020
कि यज्ञ सेवा का पुण्य का कार्य अच्छा सम्भाल भी रहे हैं , भीड़ थोड़ी ज्यादा है

311
01:59:17.020 --> 01:59:44.170
लेकिन बापदादा ने एक बात देखी कि सभी को कम संख्या में आने के बजाए बड़ी संख्या में आना पसन्द आ गया है ।

312
01:59:44.850 --> 01:59:50.800
दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है ।

313
01:59:51.939 --> 02:00:08.510
फिर भी कुम्भ के मेले से शुद्ध खाना तो मिलता है ।

314
02:00:08.510 --> 02:00:17.649
रहने के लिए चलो टेन्ट भी तो मिलता है ।

315
02:00:18.449 --> 02:00:35.310
लेकिन जो भी आते हैं बापदादा उन्हों का प्यार देख करके ,

316
02:00:35.310 --> 02:00:47.939
क्योंकि प्यार में कुछ भी देखना पड़ता या करना पड़ता ,

317
02:00:47.939 --> 02:00:56.739
तो वह पता नहीं पड़ता है , कर रहे हैं , खुशी खुशी से करते हैं ।

318
02:00:58.739 --> 02:01:11.140
तो बंगाल बिहार के ज़ोन ने भी सेवा का पार्ट अच्छा बजाया ।

319
02:01:11.140 --> 02:01:26.340
अच्छा । यहाँ जो बैठे हैं इन्हों में से किसी को तकलीफ है सोने की या खाने की वह हाथ उठाओ ।

320
02:01:26.340 --> 02:01:34.510
जिसको खाने की सोने की तकलीफ हो तो हाथ उठाओ ।

321
02:01:34.510 --> 02:01:38.739
हाँ बड़ा हाथ उठाओ ।

322
02:01:48.970 --> 02:01:51.369
अच्छा ।

323
02:03:01.770 --> 02:03:33.079
तामिलनाडु :- क्योंकि आजकल तामिलनाडु भी सेवा के उमंग उत्साह में है ।

324
02:03:33.079 --> 02:03:53.079
बापदादा ने समाचार भी सुना कि यह जो शिव का मेला बनाया है , उसकी सेवा जगह जगह पर जाके भी करते हैं ।

325
02:03:53.079 --> 02:04:02.050
फायदा और देशों को भी पहुंचाते हैं यह बहुत अच्छा है

326
02:04:02.050 --> 02:04:11.020
क्योंकि फिर भी विशेष तो शिवबाबा का परिचय है ना ।

327
02:04:11.020 --> 02:04:18.800
उसमें शिवबाबा का ही परिचय मिलता है

328
02:04:18.800 --> 02:04:36.619
तो यह सेवा और देशों में भी जाकर करते हैं यह बापदादा को अच्छा सेवा का समाचार लगा ।

329
02:04:36.619 --> 02:04:41.079
करते रहो ।

330
02:04:41.079 --> 02:04:54.000
और अच्छा है आपस में जिस ज़ोन की युनिटी है ,

331
02:04:54.970 --> 02:05:09.079
युनिटी स्वतः ही पुण्य का काम कराती है , उमंग उत्साह बढ़ाती है ।

332
02:05:09.079 --> 02:05:25.819
बापदादा ने देखा कि सभी ने सारे ज़ोन ने मिलके जो हॉल बनाया है ,

333
02:05:25.819 --> 02:05:36.850
सबके सहयोग से ज़ोन के सहयोग से जो हाल बनाया है ,

334
02:05:36.850 --> 02:05:49.649
यह एक दो में ज़ोन वालों का सहयोग यह बात भी अच्छी है ।

335
02:05:52.279 --> 02:06:11.770
क्योंकि जोन इकठ्ठा इसीलिए किया जाता है कि एक दो के नजदीक होने के कारण एक दो को सहयोग देना सहज हो जाता है ।

336
02:06:12.970 --> 02:06:26.569
तो यह भी सहयोगी बनना , मेरी एरिया नहीं , सब मेरे हैं ।

337
02:06:26.569 --> 02:06:33.819
आवश्यकता जहाँ है वह मेरा है ।

338
02:06:35.819 --> 02:06:55.140
चाहे ज़ोन नाम अलग अलग है लेकिन जहाँ आवश्यकता है , आवश्यकता के समय सहयोग देना यह महापुण्य है ।

339
02:06:57.140 --> 02:07:05.420
अगर अपना पुण्य का खाता जमा करना है ,

340
02:07:05.420 --> 02:07:21.199
तो सहयोगी बनो और सेवा को और चार चांद लगाओ ।

341
02:07:22.739 --> 02:07:27.600
यह बापदादा को अच्छा लगा ।

342
02:07:27.600 --> 02:07:33.939
तो इस संगठन को बढ़ाते रहना ।

343
02:07:33.939 --> 02:07:38.220
बढ़ाते रहेंगे ना , हाथ उठाओ ।

344
02:07:41.199 --> 02:07:45.880
सभी ने हाथ उठाया ।

345
02:07:45.880 --> 02:07:48.510
अच्छा ।

346
02:07:55.600 --> 02:08:10.000
हम सब एक हैं , यह तो सेवा के कारण , कोई देख-रेख हो सके इसके कारण जोन बनाया है ,

347
02:08:10.000 --> 02:08:21.479
बाकी एक ही हैं , एक ही रहेंगे , एक के हैं , एक के रहेंगे ।

348
02:08:21.479 --> 02:08:25.770
अच्छा ।

349
02:08:43.199 --> 02:09:12.850
नेपाल :- नेपाल की सर्विस का समाचार सुनते रहते हैं ।

350
02:09:14.850 --> 02:09:31.479
वहाँ जैसा वायुमण्डल हैं उस हिसाब से सेवा की वृद्धि युक्ति से अच्छी कर रहे हैं ।

351
02:09:31.479 --> 02:09:42.340
बापदादा नेपाल की सर्विस सुन करके खुश होते हैं

352
02:09:42.340 --> 02:09:56.109
कि कुछ भी हो जाए लेकिन यह आध्यात्मिक सेवा कम नहीं होती है ।

353
02:09:56.109 --> 02:10:01.020
बढ़ती है लेकिन कम नहीं होती है ।

354
02:10:01.020 --> 02:10:10.170
सेन्टर बढ़ रहे हैं , हलचल में अचल हैं ।

355
02:10:10.170 --> 02:10:24.399
इसलिए बापदादा को नेपाल की सेवा पर नाज है ।

356
02:10:27.770 --> 02:10:30.739
बहुत अच्छा ।

357
02:10:31.420 --> 02:10:34.739
यह सब नेपाल उठा है ।

358
02:10:38.569 --> 02:10:42.619
नेपाल वाले हाथ ऊंचा करो ।

359
02:10:52.739 --> 02:11:07.079
यह अच्छा बनाया है कि ज़ोन ज़ोन को मिलने से वह जी भरके आ जाते हैं ।

360
02:11:09.079 --> 02:11:19.420
और सेवा भी करते हैं सभी को सैलवेशन भी मिल जाती है ।

361
02:11:19.420 --> 02:11:24.510
अच्छा ।

362
02:11:27.600 --> 02:12:32.279
डबल विदेशी :- डबल विदेशियों को बापदादा ने टाइटल दिया है डबल पुरूषार्थी ।

363
02:12:33.420 --> 02:12:41.420
तो बताओ डबल पुरूषार्थी हो , हाथ उठाओ ।

364
02:12:41.420 --> 02:12:51.479
डबल विदेशी नहीं डबल पुरूषार्थी ।

365
02:12:52.970 --> 02:12:56.279
बहुत अच्छा ।

366
02:13:02.000 --> 02:13:24.909
बापदादा हमेशा कहते आये हैं कि विदेश की सेवा ने बाप को विश्व सेवाधारी सिद्ध किया ।

367
02:13:25.420 --> 02:13:50.680
पहले सिर्फ भारत सेवाधारी थे लेकिन अभी हर टर्न में 90 देशों से 80 देशों से डबल विदेशी आते हैं ।

368
02:13:50.970 --> 02:14:12.399
तो बापदादा को खुशी है कि हर सीजन में विदेश में भी सेवा बढ़ती जाती है

369
02:14:13.310 --> 02:14:23.310
और कितने उमंग से हर टर्न में पहुंच जाते हैं ।

370
02:14:25.770 --> 02:14:39.649
चाहे कितना भी प्रयत्न करना पड़ता है बापदादा को पता है

371
02:14:39.649 --> 02:15:04.739
तो पहले शुरूआत में एक बार होके जाते थे और दूसरे साल के लिए बाक्स में टिकेट के लिए इकठ्ठा करते थे , आते जरूर थे ।

372
02:15:04.739 --> 02:15:20.279
लेकिन अभी तन मन धन सबमें आगे जा रहे हैं ।

373
02:15:21.479 --> 02:15:37.770
और बापदादा ने पहले भी सुनाया कि यह मधुबन में आके जो रिफ्रेश होते है और ग्रुप ग्रुप रिफ्रेश होते हैं ,

374
02:15:37.770 --> 02:15:59.939
पर्सनल अटेन्शन देते हैं यह बापदादा को पसन्द है और इस बारी की रिजल्ट भी बापदादा ने सुनी ।

375
02:16:01.420 --> 02:16:27.199
तो एक दो के स्नेही , सहयोगी बनकर एक दो को कोई भी इशारा देने में पुरूषार्थ तीव्र करने में कोई कमी है

376
02:16:27.199 --> 02:16:33.309
तो खुली दिल से एक दो में दी है ।

377
02:16:33.309 --> 02:16:44.280
यह बापदादा को समाचार पसन्द आया

378
02:16:44.969 --> 02:17:00.799
क्योंकि जब तक अपनी कमी को जाना नहीं , पहचाना नहीं तो परिवर्तन हो नहीं सकता ।

379
02:17:01.879 --> 02:17:16.450
इसलिए बापदादा को पुरूषार्थ की विधि अच्छी लगी ।

380
02:17:17.200 --> 02:17:33.079
थोड़े थोड़े आपस में मिलके जो मीटिंग करते हैं उसमें अटेन्शन ज्यादा जाता ।

381
02:17:37.940 --> 02:17:56.850
तो डबल विदेशी डबल पुरूषार्थी हैं यह बापदादा ने मधुबन के समाचार में ज्यादा देखा ।

382
02:18:00.280 --> 02:18:17.479
बाकी सभी जो भी आये हो अभी अपने को निर्विघ्न समझते हो ?

383
02:18:17.479 --> 02:18:25.649
निर्विघ्न समझते हो वह हाथ उठाओ , निर्विघ्न ।

384
02:18:34.219 --> 02:18:37.200
अच्छा ।

385
02:18:46.620 --> 02:18:50.000
मैजारिटी है ।

386
02:18:50.000 --> 02:18:53.420
कोई कोई नहीं भी हैं ।

387
02:18:53.420 --> 02:18:57.770
मैजारिटी हैं ।

388
02:19:01.649 --> 02:19:21.770
तो बापदादा आज डबल विदेशियों को डबल वरदान देते हैं

389
02:19:24.399 --> 02:19:40.280
एक तो सेवा कर सेन्टर की वृद्धि बढ़ाओ ।

390
02:19:40.569 --> 02:19:47.420
रेग्युलर स्टूडेन्ट बढ़ाते चलो ।

391
02:19:47.420 --> 02:19:50.680
बढ़ेंगे ।

392
02:19:51.479 --> 02:20:12.510
और दूसरा एक दो को पुरूषार्थ करने और कराने का जो मीटिंग बनाई है ,

393
02:20:13.479 --> 02:20:33.819
जो हर वर्ष करते रहते हैं उसका भी फायदा जितना उठाना चाहिए उतना और उठाते चलेंगे ।

394
02:20:33.819 --> 02:20:48.340
बाकी आपस में जो बनाया है वह विधि अच्छी है इससे और ज्यादा प्रोग्रेस हो सकती है ,

395
02:20:48.340 --> 02:20:56.620
इसको अटेन्शन देके और बढ़ायेंगे तो बढ़ जायेगी ।

396
02:20:57.250 --> 02:21:00.110
सुना ।

397
02:21:00.110 --> 02:21:04.620
बापदादा खुश है ।

398
02:21:04.620 --> 02:21:13.819
और दिल में क्या याद करते ?

399
02:21:13.819 --> 02:21:18.680
वाह बच्चे वाह !

400
02:21:21.540 --> 02:21:25.079
अच्छा ।

401
02:21:58.739 --> 02:22:23.020
फर्स्ट टाइम वालों से :- अभी की सीजन में मैजारिटी आधी क्लास से भी ज्यादा पहली बार वाले होते हैं

402
02:22:23.020 --> 02:22:32.219
क्योंकि रेग्युलर तो बाहर बैठते हैं क्लास में तो नये बैठते हैं ।

403
02:22:42.799 --> 02:22:54.569
अच्छा सभी ने देखा कितना परिवार बढ़ रहा है ।

404
02:22:55.309 --> 02:23:06.340
बापदादा कहते हैं वाह परिवार वाह !

405
02:23:11.200 --> 02:23:23.709
अभी तो जो भी स्थान बनायेंगे ना वह छोटा होना ही है ।

406
02:23:24.850 --> 02:23:28.620
प्लैन बनाना है ना ।

407
02:23:29.770 --> 02:23:46.909
क्योंकि अभी आप सभी का अटेन्शन सन्देश देने में अच्छी तरह से गया ।

408
02:23:47.600 --> 02:23:59.250
तो जो इतनी सेवा होती है उनमें से वृद्धि तो होगी ना ।

409
02:24:00.000 --> 02:24:23.649
तो पहले बारी आने वालों को बापदादा पहले बारी आने की बहुत-बहुत पदमगुणा मुबारक देते हैं ।

410
02:24:25.770 --> 02:24:55.940
अभी निर्विघ्न बन आने वाली समस्याओं को स्वयं वा सहयोग से जल्दी से जल्दी समाप्त कर उड़ते चलो ।

411
02:24:56.510 --> 02:25:07.600
अभी चलने का समय पूरा हो गया , आप जब आये हो तो उड़ने का समय है ।

412
02:25:08.170 --> 02:25:15.479
तो उड़ने के समय पर चलना नहीं , उड़ना ।

413
02:25:15.940 --> 02:25:39.420
तो उड़ेंगे रहेंगे और आगे बढ़ते रहेंगे यह बापदादा का विशेष वरदान और एकस्ट्रा मदद पहले आने वालों को है ।

414
02:25:47.770 --> 02:25:51.020
अच्छा ।

415
02:26:07.879 --> 02:26:36.799
अभी चारों ओर के परमात्म प्रेमी बच्चों को जो सदा बाप के प्यार में उड़ते रहते हैं तीव्र

416
02:26:36.799 --> 02:26:53.309
पुरूषार्थी हैं और सेवा में निर्विघ्न सच्चे सेवाधारी हैं ,

417
02:26:53.540 --> 02:27:11.420
ऐसे चारों ओर के बच्चों को बापदादा भी देख रहे हैं , साथ साथ दूर वालों को भी देख रहे हैं

418
02:27:11.420 --> 02:27:27.479
और यहाँ शान्तिवन में भी जो जगह जगह पर स्क्रीन पर देख रहे हैं , सुन रहे हैं ,

419
02:27:27.479 --> 02:27:53.309
उन सभी बच्चों को बापदादा सदा के लिए खुश रहो और खुशी बांटों , यह वरदान दे रहे हैं ।

420
02:27:57.020 --> 02:28:08.909
खुश चेहरा , कोई भी आपका चेहरा देखे वह चेहरा देखके खुश हो जाए ।

421
02:28:08.909 --> 02:28:19.250
कैसा भी हो आपका चेहरा खुशनुमा देखके खुद भी खुश हो जाए ,

422
02:28:19.250 --> 02:28:39.250
यह वरदान चारों ओर के बच्चे या जो सम्मुख बैठे हैं उन सभी के लिए एक वरदान है ।

423
02:28:39.250 --> 02:28:44.569
कभी चेहरा मुरझाया हुआ नहीं ।

424
02:28:45.420 --> 02:28:55.940
अगर आप मुरझायेंगे तो विश्व का हाल क्या होगा !

425
02:28:58.170 --> 02:29:17.770
आपको सदा खुशनुमा चेहरा और खुशनुमा चलन में रहना है और रहाना है ।

426
02:29:19.770 --> 02:29:51.479
ऐसे सभी तीव्र पुरूषार्थी बच्चों को बापदादा का यादप्यार और मीठे मीठे बच्चों को नमस्ते ।

