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1
00:22:25.769 --> 00:23:39.200
आज चारों ओर के परमात्म तख्तनशीन भ्रकुटी तख्तनशीन और विश्व के तख्तनशीन बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं ।

2
00:23:41.880 --> 00:24:11.140
यह परमात्म दिलतख्त सिर्फ आप ब्राह्मणों के लिए ही है ।

3
00:24:23.250 --> 00:25:07.369
भ्रकुटी का तख्त तो सबके पास है लेकिन परमात्म तख्त सिर्फ ब्राह्मण आत्माओं के ही भाग्य में है ।

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00:25:12.109 --> 00:25:30.000
यह परमात्म तख्त विश्व का तख्त दिलाता है ।

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00:25:33.200 --> 00:25:54.339
तो तीनों तख्त के अधिकारी आत्मायें आप ब्राह्मण ही हो ।

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00:26:16.619 --> 00:26:52.619
यह परमात्म तख्त कितना श्रेष्ठ है और कोई युग में परमात्म तख्त प्राप्त नहीं होता ।

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00:27:09.710 --> 00:28:04.569
यह परमात्म तख्त गाया भी जाता है परमात्म तख्त के अधिकारी भक्ति मार्ग में भी माला के मणकों के रूप में गाये और पूजे जाते हैं ।

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00:28:07.940 --> 00:28:20.000
कोटों में कोई के रूप में गाये जाते हैं ।

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00:28:24.619 --> 00:28:58.450
बड़ी भावना से एक-एक मणके को कितनी ऊंची दृष्टि से देखते रहते हैं ।

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00:29:00.970 --> 00:29:14.910
तो आप सबको फखुर है ना !

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00:29:20.170 --> 00:29:24.569
है फखुर ?

12
00:29:27.369 --> 00:29:44.279
कि हमारे सिवाए कोई भी इस तख्त का अनुभव नहीं कर सकते हैं ।

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00:29:50.400 --> 00:30:06.849
लेकिन आप सबका ब्राह्मणों का जन्म सिद्ध अधिकार है ।

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00:30:13.650 --> 00:30:34.619
आपके लिए यह तख्त गले का हार है ।

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00:30:40.799 --> 00:31:29.539
तो इतना नशा भगवान के दिलतख्त के अधिकारी यह नशा और खुशी सबको सदा स्मृति में रहती है ?

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00:31:35.369 --> 00:31:39.369
हम कौन हैं !

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00:31:41.369 --> 00:31:56.339
इसका निश्चय और नशा रहता है ?

18
00:32:02.849 --> 00:32:59.369
बापदादा तो ऐसे तीन तख्त के अधिकारी बच्चों को देख खुश होते हैं वाह मेरे श्रेष्ठ अधिकारी बच्चे वाह !

19
00:33:15.480 --> 00:33:24.970
बच्चे कहते वाह बाबा वाह !

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00:33:24.970 --> 00:33:36.400
और बाप कहते वाह बच्चे वाह !

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00:33:44.049 --> 00:34:04.680
स्वयं बाप भी ऐसे बच्चों की महिमा गाते हैं ।

22
00:34:08.619 --> 00:34:17.650
तो नशा है हम कौन हैं ?

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00:34:19.650 --> 00:34:34.510
जितना निश्चय होगा उतना ही नशा होगा ।

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00:34:35.599 --> 00:35:06.570
और निश्चय का नशा आपके चेहरे और चलन से दिखाई दे रहा है ।

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00:35:06.570 --> 00:35:15.710
जिसको निश्चय है उसको नशा जरूर होता है ।

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00:35:19.650 --> 00:35:59.139
बापदादा भी अभी हर बच्चे द्वारा चेहरे और चलन से आत्माओं को अनुभव कराने चाहते

27
00:36:09.199 --> 00:36:44.170
वाणी द्वारा तो अनुभव करने लगे हैं अभी अनुभव करने का कार्य शुरू हो गया है ।

28
00:36:46.170 --> 00:37:20.050
पहले सुनते थे सोचते थे अभी आप ब्राह्मण आत्माओं की स्थिति का प्रभाव अनुभव करने लगे हैं ।

29
00:37:26.570 --> 00:38:02.110
तो अपने आपको चेक करो कि मैं सारे दिन में कितना समय परमात्म दिलतख्त पर रहता हूँ ?

30
00:38:04.110 --> 00:38:27.599
क्योंकि यह दिलतख्त विश्व का राज्य प्राप्त कराने का आधार है ।

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00:38:46.280 --> 00:39:19.940
क्योंकि इस दिलतख्त के आधार से जितना समय आप दिलतख्त के अधिकारी रहते हो

32
00:39:19.940 --> 00:39:44.050
उतना ज्यादा समय भविष्य में राज्य घराने में अधिकारी बनते हो ।

33
00:39:47.309 --> 00:40:20.849
तो चेक करना जबसे मैं ब्राह्मण बना कितना समय दिलतख्तनशीन बना इसके आधार से तख्त पर तो नम्बरवार बैठेंगे

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00:40:20.849 --> 00:40:42.340
लेकिन सदा राज्य फैमिली में घराने में अधिकारी बनेंगे ।

35
00:40:47.369 --> 00:40:53.940
चेक किया है कभी ?

36
00:40:55.940 --> 00:41:09.769
दिलतख्त से उतर तो नहीं जाते हो ?

37
00:41:12.449 --> 00:41:41.769
अपना हिसाब निकालना क्योंकि इसके आधार से आप सदा राज्य घराने में आयेंगे ।

38
00:41:47.079 --> 00:42:07.199
चेक करना कि तख्त को छोड़ कभी मिट्टी में पांव तो नहीं रखते !

39
00:42:12.570 --> 00:42:29.880
63 जन्म का संस्कार देहभान रूपी मिट्टी में पांव रखा ।

40
00:42:35.250 --> 00:42:50.449
एक है देहभान और दूसरा है देह-अभिमान ।

41
00:42:50.449 --> 00:43:09.420
देह-अभिमान की मिट्टी गहरी है लेकिन देहभान यह भी मिट्टी है ।

42
00:43:12.969 --> 00:43:33.079
लोग भी कहते हैं जब मनुष्य चला जाता है और जलाते हैं तो यही कहते हैं मिट्टी मिट्टी में मिल गई ।

43
00:43:39.079 --> 00:43:50.000
तो चेक करो मिट्टी में पांव तो नहीं जाता !

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00:43:58.110 --> 00:44:11.019
देहभान में आना अर्थात् मिट्टी में पांव रखना ।

45
00:44:17.139 --> 00:44:47.250
बापदादा ने आप श्रेष्ठ आत्माओं के लिए तीन तख्त दिये हैं क्योंकि लाडले हो ना ।

46
00:44:47.250 --> 00:44:54.340
सिकीलधे भी हो लाडले भी हो ।

47
00:44:55.139 --> 00:45:17.480
तो जो लाडला बच्चा होता है उसको झूले में या गोदी में रखते हैं ।

48
00:45:19.480 --> 00:45:25.880
मिट्टी में पांव रखने नहीं देते ।

49
00:45:28.679 --> 00:46:11.079
तो बापदादा ने जो तीन तख्त के अधिकारी हैं उन्हों के लिए कितने भिन्न-भिन्न झूले दिये हैं ।

50
00:46:16.000 --> 00:46:42.340
कभी शान्ति के झूले में झूलो कभी सुख के झूले में झूलो कभी प्रेम के झूले में झूलो ।

51
00:46:45.539 --> 00:47:05.769
तख्त और झूले इसी में ही पांव रखना है ।

52
00:47:19.539 --> 00:47:31.019
कई बच्चे पूछते हैं हम भविष्य में कहाँ आयेंगे ?

53
00:47:31.019 --> 00:47:34.909
क्या बनेंगे ?

54
00:47:36.909 --> 00:48:00.050
तो बाप कहते हैं जितना समय से आये हो उतने समय में चेक करो

55
00:48:02.050 --> 00:48:25.880
कि मेरा पांव जितना समय हुआ है उतना ही समय झूलों में या तख्त पर रहा है ?

56
00:48:28.849 --> 00:48:48.800
उतना ही भविष्य में रॉयल घराने में रहेंगे ।

57
00:48:49.309 --> 00:49:02.280
रॉयल प्रजा में भी नहीं आयेंगे रॉयल घराने में ही आयेंगे ।

58
00:49:08.050 --> 00:49:18.170
तो यह हिसाब हर एक अपने आप अपना निकालो ।

59
00:49:19.369 --> 00:49:30.449
दूसरे को नहीं देखना अपना हिसाब निकालना ।

60
00:49:46.110 --> 00:49:51.369
हर एक चाहता क्या है ?

61
00:49:55.369 --> 00:50:04.510
रॉयल घराने राज्य घराने में ही रहें ।

62
00:50:06.000 --> 00:50:30.000
तो अब भी जितना समय मिलता है क्योंकि समाप्ति तो अचानक होनी है ।

63
00:50:32.000 --> 00:50:57.199
तो जब तक समाप्ति हो तब तक अब भी चेक करेंगे

64
00:50:58.400 --> 00:51:24.800
तो जितना समय ज्यादा बाप की गोदी में तख्त पर झूले में रहेंगे

65
00:51:26.110 --> 00:51:47.480
उतना समय रॉयल फैमिली में रॉयल घराने में भाग्य प्राप्त करेंगे ।

66
00:52:12.050 --> 00:52:42.340
बापदादा तो हर बच्चे को सारा समय 21 जन्म ही रॉयल घराने में

67
00:52:42.340 --> 00:53:22.280
चाहे सूर्यवंशी चाहे चन्द्रवंशी दोनों युग में रॉयल फैमिली में रहने का अधिकार दे रहा है ।

68
00:53:24.280 --> 00:53:52.619
लेकिन अधिकार लेना यह हर बच्चे के ऊपर अधिकार है ।

69
00:53:56.739 --> 00:54:22.050
ब्रह्मा बाप से प्यार है तो ब्रह्मा बाप का भी आप बच्चों से प्यार है ।

70
00:54:25.199 --> 00:54:54.570
ब्रह्मा बाप आप बच्चों को साथ-साथ रॉयल घराने में देखने चाहता है ।

71
00:55:12.050 --> 00:55:54.849
आप क्या समझते हो - ब्रह्मा बाप के आसपास रॉयल घरानों में रहने वाले हो या थोड़ा समय रहेंगे ?

72
00:56:05.539 --> 00:56:11.940
फिर दूर तो नहीं जाने चाहते ना !

73
00:56:24.739 --> 00:56:34.340
सुनाया आधार है संगमयुग का ।

74
00:56:57.139 --> 00:57:41.769
बापदादा का बच्चों से इतना प्यार है जो जैसे अभी कहते हो साथ रहेंगे साथ चलेंगे

75
00:57:41.769 --> 00:58:04.739
अभी ब्रह्मा बाप और ब्राह्मण साथ हैं चाहे अव्यक्त रूप में हैं लेकिन साथ हैं ।

76
00:58:27.710 --> 00:59:33.880
अभी बापदादा ने देखा कि बच्चों को माया भी अब तक छोड़ती नहीं है उनका भी प्यार है ।

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00:59:40.969 --> 01:00:17.079
और आजकल दो रूपों में विशेष माया भी चांस लेती है ।

78
01:00:17.480 --> 01:00:42.000
दो रूप में आती है - एक व्यर्थ संकल्प

79
01:00:45.820 --> 01:01:52.570
और दूसरा कहीं-कहीं कभी-कभी भी यह भी लहर है जो मैंने किया वा सोचा मैं ही राइट हूँ मैं कम नहीं हूँ ।

80
01:02:09.309 --> 01:02:32.000
यह लहर फैली हुई है -

81
01:02:44.619 --> 01:03:46.800
मैं ही राइट हूँ लेकिन जो कनेक्शन में आते हैं या निमित्त बने हुए हैं

82
01:03:52.909 --> 01:04:29.650
वह भी आपके विचार को साथ देते हैं !

83
01:04:48.679 --> 01:04:59.369
दूसरों की भी वेरीफिकेशन मिलनी चाहिए ।

84
01:05:11.539 --> 01:05:29.019
यह व्यर्थ संकल्प टाइम वेस्ट करते हैं ।

85
01:05:41.599 --> 01:06:37.250
इसलिए बापदादा रोज की मुरली मनन करने के लिए सेवा करने के लिए होमवर्क में रोज देते हैं ।

86
01:06:42.510 --> 01:06:58.400
अगर मनन करो या मनन करते-करते मगन हो जाओ

87
01:07:03.650 --> 01:07:27.599
तो यह रोज का होमवर्क मन को बिजी करने का साधन है ।

88
01:07:29.599 --> 01:08:14.969
सुनना और मनन करना या मगन हो जाना यह बापदादा रोज का होमवर्क इसीलिए देता है ।

89
01:08:16.000 --> 01:08:33.479
जैसे बच्चों को होमवर्क इतना ज्यादा दे देते हैं जो उनकी बुद्धि करने में बिजी रहे ।

90
01:08:33.479 --> 01:08:57.020
ऐसे रोज की मुरली उसमें चार ही सबजेक्ट का होमवर्क है ।

91
01:09:03.939 --> 01:09:31.199
मन्सा का भी है वाणी का भी है कर्म का भी अटेन्शन और दिव्यता का इशारा होमवर्क है ।

92
01:09:38.510 --> 01:10:05.770
तो होमवर्क में बिजी रहेंगे तो व्यर्थ संकल्प के आने की मार्जिन नहीं रहेगी ।

93
01:10:20.739 --> 01:10:56.909
इस विधि को अपनाते रहेंगे तो व्यर्थ संकल्प स्वतः ही आपसे विदाई ले जायेंगे

94
01:11:03.770 --> 01:11:56.800
क्योंकि बापदादा ने देखा याद की यात्रा पर सभी का नम्बरवार अटेन्शन है वाचा सेवा में भी अटेन्शन है ।

95
01:12:07.199 --> 01:12:50.279
लेकिन अभी अपने संस्कार या दूसरों के संस्कार को परिवर्तन करना

96
01:12:56.569 --> 01:13:26.680
यह स्वभाव संस्कार जिसको रॉयल रूप में आप कहते हो नेचर मेरी नेचर है भाव नहीं है नेचर है

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01:13:34.800 --> 01:14:15.079
यह धारणा की सबजेक्ट अभी भी रॉयल रूप में आती रहती है ।

98
01:14:21.770 --> 01:14:39.939
तो बापदादा आजकल यही इशारा देते हैं

99
01:15:00.569 --> 01:15:29.369
कि जो भी धारणाओं में कमी होती है उसको अभी विशेष अटेन्शन दो ।

100
01:15:38.170 --> 01:16:22.170
बापदादा ने पहले भी कहा है कि अभी धारणा में यह मुख्य धारणा का अटेन्शन दो कोई भी बात हो गई

101
01:16:27.939 --> 01:16:44.970
तो चेक करो सेकण्ड में फुलस्टॉप दे सकते हो !

102
01:16:48.000 --> 01:17:02.170
कि चाहते फुलस्टॉप हैं लेकिन हो जाता है क्वेश्चनमार्क?

103
01:17:09.479 --> 01:17:25.079
फुलस्टॉप नहीं आधा फुलस्टॉप लगता है और मात्रा बन जाता है ।

104
01:17:26.739 --> 01:17:59.079
आगे चलकर ऐसे सरकमस्टांश आयेंगे जो आपको सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाना पड़ेगा ।

105
01:18:13.140 --> 01:18:42.000
उस समय क्वेश्चन मार्क आश्चर्य मार्क को ठीक करने लगो इतना समय नहीं मिलेगा ।

106
01:18:44.569 --> 01:18:59.020
सेकण्ड में फुलस्टॉप की आवश्यकता होगी

107
01:19:09.479 --> 01:19:37.020
इसका अभ्यास काफी समय पहले का चाहिए तब समय पर विजयी बन सकेंगे ।

108
01:19:43.880 --> 01:20:28.800
तो हलचल के समय जब संस्कार स्वभाव का पेपर हो उसके लिए अभी से ऐसे समय में अभ्यास करो

109
01:20:40.739 --> 01:21:02.399
तो बहुत समय का अभ्यास आगे चल आपका बहुत सहयोगी बनेगा ।

110
01:21:17.140 --> 01:22:07.079
तो बापदादा अमृतवेले चक्कर लगाते हैं तो हर एक के पुरूषार्थ को चेक करते हैं ।

111
01:22:13.369 --> 01:22:39.539
क्या चार ही सबजेक्ट में पुरूषार्थ तीव्र है वा साधारण है ?

112
01:22:44.109 --> 01:22:49.199
तो क्या देखा ?

113
01:22:55.479 --> 01:23:41.710
समय की रफ्तार प्रमाण अभी पुरूषार्थ में सदा तीव्र पुरूषार्थ की आवश्यकता है ।

114
01:23:57.420 --> 01:24:44.569
तो बापदादा इशारा दे रहा है समय तीव्रगति से समीपता के नजदीक आ रहा है ।

115
01:25:04.909 --> 01:26:05.020
उस हिसाब से अभी विशेष स्वभाव और संस्कार के परिवर्तन में तीव्रगति चाहिए ।

116
01:26:38.510 --> 01:27:12.279
अभी बापदादा सभी बच्चों को समान बनाने चाहते हैं ।

117
01:27:12.279 --> 01:27:22.109
आपका लक्ष्य भी है बाप समान बनना ही है ।

118
01:27:28.569 --> 01:27:54.970
इसके लिए सबसे सहज साधन है ब्रह्मा बाप को फॉलो करो ।

119
01:27:56.970 --> 01:28:10.739
टैली करो जो भी कर्म करो पहले टैली करो मिलान करो ।

120
01:28:11.939 --> 01:28:30.050
ब्रह्मा बाप का यह कर्म या बोल या संकल्प है ?

121
01:28:31.600 --> 01:28:43.710
कहा भी जाता है पहले सोचो फिर करो ।

122
01:28:52.680 --> 01:29:02.000
बोलने के पहले तोलो फिर बोलो ।

123
01:29:14.970 --> 01:29:27.420
तो सुना बापदादा अभी क्या चाहते हैं ?

124
01:29:28.279 --> 01:29:46.619
आप भी चाहते तो हो जब रूहरिहान करते हो ना तो बापदादा बहुत मीठी-मीठी बातें सुनते हैं ।

125
01:29:48.970 --> 01:30:04.340
उमंग की बातें भी बहुत अच्छी करते हो यह करके दिखायेंगे यह करना ही है यह होना ही है !

126
01:30:21.600 --> 01:30:49.710
संकल्प बहुत उमंग के होते हैं लेकिन कर्म तक आने में कुछ बदल जाते हैं कुछ होते हैं ।

127
01:30:54.340 --> 01:31:24.909
बाकी बापदादा भिन्न-भिन्न प्रकार की सेवा के प्लैन जो बनाते हो वह सब पसन्द करते हैं ।

128
01:31:41.600 --> 01:31:56.680
प्रोग्रामस भी जहाँ तहाँ अच्छे चल रहे हैं

129
01:31:56.680 --> 01:32:34.340
लेकिन अभी जितना वाचा द्वारा या भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा कर रहे हो

130
01:32:35.539 --> 01:32:44.449
सफलता भी है बापदादा खुश भी है

131
01:32:45.079 --> 01:33:36.000
सिर्फ अभी मन्सा द्वारा अनेक आत्माओं को सुख की किरण शान्ति की किरण खुशी की किरण प्रेम की किरण पहुंचाना यह सेवा भी साथ-साथ करो ।

132
01:33:37.310 --> 01:34:39.600
अपने ही संस्कार परिवर्तन या दूसरों के संस्कार को सहयोग देना इसमें टाइम कईयों का ज्यादा जाता है ।

133
01:34:54.619 --> 01:35:39.819
तो मन्सा सेवा द्वारा भिन्न-भिन्न किरणें आत्माओं को देना इसका अटेन्शन आगे चलके बहुत आवश्यकता पड़ेगी उसके ऊपर भी ध्यान देते रहो ।

134
01:35:42.619 --> 01:36:05.600
जो बच्चे समझते हैं कि यह सेवा मैं करता रहता हूँ वह हाथ उठाओ ।

135
01:36:30.510 --> 01:36:35.710
अच्छा ।

136
01:36:36.449 --> 01:37:02.510
कर रहे हैं उन्हों को मुबारक है और जो नहीं कर रहे हैं उनको करना चाहिए

137
01:37:04.050 --> 01:37:32.680
क्योंकि आगे चलके सरकमस्टांश ऐसे बनेंगे जो सुनने और सुनाने वाले दोनों का मेल मुश्किल हो जायेगा

138
01:37:36.449 --> 01:37:58.050
इसलिए दोनों सेवा अभी से जितना हो सके उतनी आदत डालो ।

139
01:37:58.050 --> 01:38:10.680
मन बिजी भी रहेगा तो मनमनाभव होना सहज हो जायेगा ।

140
01:38:12.909 --> 01:38:32.000
मन बिजी होने से संस्कार स्वभाव को सहज परिवर्तन करने में मदद मिलेगी ।

141
01:38:40.909 --> 01:39:16.909
आज खास डबल फारेनर्स के मिलन का दिन है बापदादा को खुशी है वाह डबल फारेनर्स वाह !

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बापदादा को खुशी है कि विश्व के कोने - कोने में जो बाप के कल्प पहले वाले बच्चे छिपे हुए हैं

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तो विश्व की सेवा में डबल फारेनर्स निमित्त बने हैं

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और बापदादा ने सुना कि हर एक अपनी-अपनी एरिया में गांव-गांव या शहरों में जो रहे हुए हैं

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उसमें पहुंचने का प्लैन बनाते रहते हैं ।

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इसकी मुबारक हो मुबारक हो ।

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नहीं तो जब समाप्ति होनी होगी हालतें बदलेंगी

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तो आप सबको चाहे भारत चाहे विदेश बहुत-बहुत-बहुत उल्हनें मिलेंगे

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कि हमारा बाप आया और आपने हमें बताया भी नहीं ।

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सन्देश तो देते बहुत उल्हनें मिलेंगे ।

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इसलिए अभी कर रहे हैं और ज्यादा कोई कोना रह नहीं जाये इसका प्रयत्न करना ।

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बाकी बापदादा डबल फारेनर्स या देश वाले दोनों बच्चे जो चारों ओर अपना पुरूषार्थ कर रहे हैं

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उन्हों को देख खुश है बहुत बहुत खुश है ।

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क्यों ?

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क्यों खुश है ?

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अभी देश में विदेश में यह प्लैन बना रहे हैं बापदादा को पसन्द है

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किसी भी साधन से सन्देश पहुंचना चाहिए ।

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यह साइंस वास्तव में आप लोगों के लिए बहुत समय पर मददगार है ।

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साधन दिनप्रतिदिन नये नये निकलते रहते हैं उसको कार्य में निर्विघ्न बन लगाते जाओ ।

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बापदादा जहाँ भी मीटिंग करते हो सर्विस बढ़ाने की वह सुनते हैं

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और खुश होते हैं कि बच्चों की बुद्धि अभी आलराउण्ड जा रही है साधनों को सेवा में लगाने के लिए ।

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इसीलिए जो भी आप प्लैन बनाते हो वह बापदादा सुनते हैं चक्कर लगाते हैं ना !

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आप कहाँ भी मीटिंग करो चाहे दिल्ली में करो देश में किसी भी शहर में करो

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चाहे विदेश में कहाँ भी करो बापदादा सब सुनते रहते हैं ।

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बापदादा के पास भी साधन है ।

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इसके लिए बापदादा फारेन के एक-एक देश से जो भी आये हैं हर एक को क्या देते हैं ?

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बहुत-बहुत प्यार दे रहे हैं ।

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सिर्फ अभी थोड़ी तीव्रता लाओ ।

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प्लैन को प्रैक्टिकल में नई नई बातें लाते रहो ।

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यह सब देखो आपका यह यज्ञ आरम्भ होने के थोड़े वर्ष पहले यह सब इन्वेन्शन शुरू हुई हैं ।

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साइन्स भी आपकी सेवा की मददगार है ।

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खूब लाभ उठाओ आपके लिए ही निकली है ।

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01:49:16.510 --> 01:49:29.369
दिनप्रतिदिन देखो कितनी नई-नई बातें अभी अभी निकल रही हैं ।

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यह ड्रामा आपको सहयोग दे रहा है ।

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साधन आपको सहयोग दे रहा है ।

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अच्छा ।

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सभी सदा खुश तो हो ना !

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सदा खुश हैं ?

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जो सदा खुश रहता है वह हाथ उठाओ सदा खुश ।

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कोई बात हो जाए तो भी खुश ?

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बातें आती हैं ना तो भी खुश रहते हो ?

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रहते हो ?

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बड़ा हाथ उठाओ ।

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वेलकम करते हो ना !

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घबराते नहीं हो वेलकम करते हो ।

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अनुभवी बनाते हैं ।

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यह विघ्न अनुभव की अथॉरिटी को बढ़ाते हैं ।

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माया आ गई माया आ गई यह नहीं कहो यह पेपर है माया-माया कहते माया को आगे बढ़ाते हो ।

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पेपर है ।

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माया को तो आप जान गये हो कितने वर्षों से जान गये हो ।

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माया क्या है ?

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इसलिए माया से घबराओ नहीं पेपर समझके खुशी-खुशी से पेपर दो और अनुभव की क्लास में आगे बढ़ो ।

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यह क्लास बढ़ाना है मूंझना नहीं है क्या करूं कैसे करूं क्या क्यों यह ब्राह्मणों का सोचने का काम नहीं है ।

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त्रिकालदर्शी हो क्या क्यों कैसे यह उठ ही नहीं सकता ।

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पेपर आया अनुभव की क्लास में आगे बढ़े ।

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खुश हो ।

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अभी तो अनुभवी बन गये हो और बनते रहेंगे ।

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अच्छा । फॉरेन की टीचर्स हाथ उठाओ ।

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सभी को जो भी निमित्त बने हैं सभी को बापदादा टीचर्स माना बाप समान

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क्योंकि बाप जैसे रोज मुरली चलाते हैं ऐसे आप भी मुरली चलाने के तख्तनशीन हो ।

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तो बाप के साथी हो ।

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तो साथी के स्वरूप में बापदादा आप सभी टीचर्स को चाहे इण्डिया की हो चाहे फारेन की हो

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लेकिन सभी टीचर्स को खास क्या दे रहे हैं ?

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शाबास बच्चे शाबास !

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अच्छा ।

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अभी जो भी आज यहाँ हाल में बैठे हैं कहाँ के भी हो

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लेकिन दुबारा जब मधुबन में आयेंगे बाप से मिलेंगे तो बापदादा क्या देखने चाहता है ?

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कहें ?

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कोई न कोई जो कुछ पुरूषार्थ में खुद समझो कि यह नहीं होना चाहिए

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समझते तो सभी हैं कि यह नहीं होना चाहिए वह परिवर्तन करके आयेंगे !

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करेंगे ?

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यह अपने आपको देखना क्योंकि दूसरा कोई देख नहीं सकता ।

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तो यह करने के लिए कौन तैयार हैं ?

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दो-दो हाथ उठाओ ।

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बिन्दी लगा दिया ना ।

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फिर बापदादा उन्हों को चाहे छोटी चाहे मोटी गिफ्ट देंगे ।

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परिवर्तन सेरीमनी मनायेंगे ।

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पसन्द है ना !

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पसन्द है ?

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02:00:06.109 --> 02:00:23.020
अपने-अपने क्लासेज वालों को भी कहना जितने भी परिवर्तन करें उतना अच्छा है ।

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02:00:23.020 --> 02:00:28.109
समय को समीप लायेंगे ।

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02:00:33.420 --> 02:00:35.770
अच्छा ।

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80 देशों से 2200 डबल विदेशी आये हैं :- तो बापदादा हर एक बच्चे को दिल के प्यार की गिफ्ट दे रहे हैं ।

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जो फर्स्ट टाइम आये हैं वह उठो ।

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आप सबको अपने आध्यात्मिक जन्म दिन की मुबारक हो मुबारक हो

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क्योंकि आप हर एक परिवार की शोभा हो श्रृंगार हो ।

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इसीलिए बापदादा यही चाहते कि भले लेट आये हो लेकिन टूलेट के पहले आये हो

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इसकी विशेष परिवार को आपके आने की खुशी है ।

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आ गये हमारे बिछुड़े हुए परिवार के साथी आ गये ।

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अभी समय अनुसार आपको तीव्र पुरूषार्थ करना पड़ेगा ।

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स्लो पुरूषार्थ ढीला पुरूषार्थ नहीं करना तीव्र पुरूषार्थ करेंगे तो लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट आ सकते हैं ।

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करेंगे ना !

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करेंगे ?

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अच्छा है ।

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बहुत बहुत परिवार की तरफ से बापदादा की तरफ से बहुत-बहुत-बहुत यादप्यार लेते रहना और बढ़ते रहना ।

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02:05:42.619 --> 02:05:45.939
अच्छा ।

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मीडिया से कनेक्टेड :- अच्छा है मीडिया एक साधन है साधनों को सेवा में लगाना यह आपका काम है ।

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बाकी बापदादा ने सुना अच्छी मीटिंग्स की हैं और बापदादा भी चाहता है

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02:06:53.140 --> 02:07:04.680
कि मीडिया द्वारा कोने-कोने में सन्देश पहुंचे ।

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उल्हना नहीं मिले ।

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अच्छा किया अच्छा करते रहेंगे और चारों ओर आत्माओं को अपने पिता का पैगाम मिलता रहेगा ।

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बापदादा ने देखा जो भी प्रोग्राम चला रहे हो यह भी चला रहे हैं ना प्रोग्राम ।

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( निजार भाई से ) यह भी अच्छा है और जो आजकल जगह-जगह पर भविष्य का सन्देश देने के प्रोग्राम बना रहे हो

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वह भी अच्छे चल रहे हैं रिजल्ट कुछ न कुछ निकल रही है ।

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02:08:43.880 --> 02:08:52.909
मुबारक हो ।

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02:08:58.569 --> 02:09:02.279
अच्छा ।

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02:09:04.279 --> 02:09:27.420
जो भी पत्र फोन जिन्हों के भी याद प्यार या सन्देश बापदादा के प्रति आये हैं

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उन सभी बच्चों को बापदादा अपने नयनों में समाते हुए

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यादप्यार या सर्विस समाचार या मन का पुरूषार्थ का समाचार दिया है

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02:10:09.140 --> 02:10:47.199
उन सबको बापदादा मन्सा द्वारा इमर्ज कर सुख की शान्ति की खुशी की किरणें दे रहे हैं ।

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चाहे कोई ने यहाँ नहीं भेजा है लेकिन दिल में भी संकल्प किया वह संकल्प भी बाप के पास पहुंच गया है ।

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चारों ओर के हिम्मते बच्चे मददे बाप मीठे-मीठे बच्चों को बापदादा यादप्यार दे रहे हैं ।

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02:12:07.770 --> 02:12:43.420
और इस वर्ष अपने प्रति या सेवाकेन्द्र प्रति या विश्व की आत्माओं प्रति कोई न कोई ऐसा प्लैन बनाना

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जो सेवा का बल और फल सर्व आत्माओं को प्राप्त हो जाए ।

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चारों ओर के बच्चों को बापदादा का विशेष दिल का याद और प्यार स्वीकार हो ।

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02:13:52.569 --> 02:14:01.939
ओम् शान्ति ।

