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00:21:20.279 --> 00:22:36.799
आज बापदादा सभी के मस्तक पर तीन भाग्य की चमकती हुई निशानियां देख रहे हैं ।

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00:22:42.450 --> 00:23:32.339
एक है बाप द्वारा पालना का भाग्य दूसरा है शिक्षक रूप में शिक्षा का भाग्य

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00:23:33.880 --> 00:23:50.109
तीसरा है सतगुरू द्वारा वरदानों का भाग्य ।

4
00:23:52.109 --> 00:24:14.279
तीनों भाग्य चमकता हुआ देख रहे हैं ।

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00:24:19.019 --> 00:24:40.619
हर एक का मस्तक तीनों भाग्य से चमक रहा है ।

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ऐसा भाग्य और कोई के मस्तक में चमकता हुआ दिखाई नहीं देता है ।

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00:25:22.799 --> 00:25:47.019
लेकिन आप सबका मस्तक भाग्य से चमक रहा है ।

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00:25:54.049 --> 00:26:14.680
आप सभी भी अपने भाग्य को देख रहे हो ना !

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00:27:16.799 --> 00:28:02.109
बापदादा ने देखा भाग्य तो सबको मिला है लेकिन भाग्य की चमक सभी की एक जैसी नहीं है ।

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00:28:12.970 --> 00:28:54.339
कोई की चमक बहुत तेज है कोई की चमक थोड़ी कम दिखाई देती है ।

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वैसे बापदादा ने सभी को एक साथ एक जैसा ही भाग्य दिया है ।

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00:29:50.170 --> 00:29:59.819
पढ़ाई एक ही पढ़ाते हैं ।

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00:30:07.940 --> 00:30:26.339
पालना एक जैसी दी है और वरदान भी एक जैसे दिये हैं ।

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00:30:29.369 --> 00:30:57.539
आदि रत्न वा पीछे आने वाले सभी को एक ही मुरली द्वारा पालना मिलती है पढ़ाई मिलती है ।

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00:30:58.849 --> 00:31:09.650
वरदान भी एक ही सभी को मिलते हैं ।

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00:31:17.539 --> 00:31:30.910
आदि रत्नों की मुरली अलग नहीं होती एक ही होती है ।

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00:31:33.819 --> 00:32:00.170
लेकिन नम्बरवार चमकता हुआ भाग्य दिखाई दे रहा है ।

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बाप के प्यार की पालना सभी को एक जैसी मिल रही है ।

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00:32:33.880 --> 00:33:08.170
हर एक के मुख से यही निकलता “ मेरा बाबा ” चाहे आगे आने वाले चाहे पीछे आने वाले

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00:33:08.170 --> 00:33:27.650
लेकिन हर एक अपने अधिकार से कहते मेरा बाबा ।

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00:33:36.170 --> 00:33:50.109
किसी से भी पूछो बाप से प्यार मिला है ?

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00:33:52.109 --> 00:34:09.769
तो फलक से कहते मेरे को बाप का प्यार सबसे ज्यादा मिलता है ।

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00:34:13.420 --> 00:34:39.139
यह मेरा बाबा दिल से कहने वाले क्या फलक से कहते हैं ?

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00:34:42.400 --> 00:34:50.570
कि मेरा प्यार सबसे ज्यादा है ।

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00:34:50.570 --> 00:35:15.079
बाबा का प्यार पहले मेरे से है क्योंकि प्यार ही बाप की पालना है ।

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00:35:21.820 --> 00:35:44.000
इस मेरा बाबा मानने से आप बाबा के बन गये और बाप आपका बन गया ।

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00:35:46.739 --> 00:35:59.710
आज आप सभी आये हो तो प्यार के प्लेन में आये हो ।

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00:36:04.050 --> 00:36:19.309
प्यार ने खींच के सभी को यहाँ लाया है ।

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00:36:42.449 --> 00:36:56.400
सभी प्यार से आराम से पहुंच गये ।

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00:37:01.199 --> 00:37:27.139
यह परमात्म प्यार सिर्फ अभी संगम पर प्राप्त होता है ।

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00:37:29.139 --> 00:37:58.849
देव आत्माओं का प्यार प्राप्त होता है लेकिन परमात्म प्यार इस एक जन्म में प्राप्त होता है ।

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00:38:00.739 --> 00:38:26.969
तो बापदादा भी ऐसे पात्र आत्माओं को देख क्या कहते हैं ?

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00:38:28.510 --> 00:38:34.800
वाह बच्चे वाह !

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00:38:45.820 --> 00:39:39.650
आप ही कोटों में कोई पात्र बने हैं और हर कल्प आप ही पात्र बनेंगे ।

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00:39:50.400 --> 00:40:17.309
ऐसा नशा चलते फिरते रहता है ना !

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00:40:20.849 --> 00:40:43.079
आपकी दिल भी यह गीत गाती है वाह मेरा भाग्य !

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00:40:57.650 --> 00:41:09.139
यह गीत गाते रहते हो ना !

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00:41:22.110 --> 00:41:56.969
बाप को भी खुशी होती है कि यह सभी बच्चे अधिकारी हैं ।

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00:42:06.739 --> 00:42:22.170
अपने को कोई भी परमात्म प्यार में कम नहीं समझते ।

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00:42:24.969 --> 00:42:31.480
प्यार में सब पास हैं ।

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00:42:40.340 --> 00:43:12.050
बापदादा पूछते हैं कि सबसे ज्यादा प्यार किसका है ?

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00:43:12.050 --> 00:43:17.539
तो कौन कहेंगे ?

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00:43:19.539 --> 00:43:33.539
सब जानते हैं कि हमारा प्यार कम नहीं है बाप भी कहते हैं

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00:43:33.539 --> 00:43:56.800
कि प्यार की सबजेक्ट में सभी पास हैं तब मेरा बाबा कहते हैं ।

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00:44:07.199 --> 00:44:32.510
कितना प्यार है वह हर एक जानता है ।

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00:44:35.139 --> 00:44:47.139
तो बापदादा ने देखा कि प्यार में तो सब पास हैं

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00:44:49.539 --> 00:45:42.000
लेकिन अभी समय के प्रमाण स्व परिवर्तन उसकी भी आवश्यकता है ।

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00:45:45.250 --> 00:46:04.400
सिर्फ स्व परिवर्तन विशेष सुनाया भी था

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00:46:08.280 --> 00:47:01.880
कि इस समय स्व परिवर्तन में विशेष संस्कार परिवर्तन स्वभाव परिवर्तन उसकी आवश्यकता है ।

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00:47:05.369 --> 00:47:42.340
अभी नया वर्ष शुरू हुआ है तो स्व परिवर्तन की गति फास्ट चाहिए ।

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00:47:44.340 --> 00:48:11.710
करते भी हो अटेन्शन भी है लेकिन गति अभी फास्ट चाहिए ।

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00:48:29.539 --> 00:48:53.539
बापदादा को याद है पहले भी बाप से वायदा किया

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00:48:54.909 --> 00:49:18.340
कि नये वर्ष में स्व परिवर्तन संस्कार परिवर्तन करना ही है

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00:49:19.420 --> 00:50:09.650
लेकिन बापदादा ने देखा कि संस्कार परिवर्तन में जितना फास्ट पुरूषार्थ चाहिए उसकी गति और फास्ट चाहिए ।

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00:50:32.909 --> 00:50:47.599
आप सभी क्या समझते हो कि समय प्रमाण जितनी फास्ट गति चाहिए

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00:50:52.619 --> 00:51:26.170
उस अनुसार हर एक का तीव्र पुरूषार्थ है या और होना चाहिए ?

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00:51:36.510 --> 00:51:57.369
क्योंकि समय अनुसार समय में परिवर्तन फास्ट हो रहा है

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00:52:02.449 --> 00:52:27.139
तो आपका भी तीव्र परिवर्तन तब होगा

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00:52:34.280 --> 00:53:41.820
जो संकल्प किया और हुआ अयथार्थ संकल्प ऐसा समाप्त होना चाहिए जैसे कोई कागज पर बिन्दी लगाओ ।

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00:53:43.079 --> 00:53:49.250
कितने में लगेगी ?

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00:53:52.280 --> 00:54:15.820
अयथार्थ अर्थात् फालतू संकल्प इतना फास्ट परिवर्तन होना चाहिए ।

62
00:54:18.969 --> 00:54:59.820
क्या ऐसी गति जो बापदादा चाहते हैं यह कर सकते हो ?

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00:54:59.820 --> 00:55:04.679
है हिम्मत ?

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जो समझते हैं कि अब से इतनी रफ्तार से बिन्दी लगा सकते हैं

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00:55:50.969 --> 00:56:07.019
हिम्मते बच्चे मददे बाप वह हाथ उठाओ ।

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00:56:16.170 --> 00:56:50.400
बापदादा बच्चों का दृढ़ संकल्प देख मुबारक देते हैं ।

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00:56:56.170 --> 00:57:26.449
बापदादा ने पहले भी सुनाया है कि दृढ़ संकल्प के संकल्प हैं - करना ही है ।

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00:57:31.139 --> 00:57:54.110
तो आज की सभा में सभी ने यह दृढ़ संकल्प किया है ना !

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00:57:55.019 --> 00:58:07.079
आपने देखा दादियों ने देखा सभी ने हाथ मैजारिटी ने उठाया ।

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00:58:17.420 --> 00:58:21.940
देखा !

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00:58:25.369 --> 00:58:56.969
तो कल से स्वभाव संस्कार समाप्ति की सेरीमनी मनानी चाहिए ।

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00:59:04.849 --> 00:59:08.050
मनायें ?

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00:59:08.050 --> 00:59:22.110
जिन्होंने हाथ उठाया वह हाथ उठाओ सेरीमनी मनायें ?

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00:59:28.000 --> 00:59:39.880
इसकी सेरीमनी तो बहुत धूमधाम से मनाना ।

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00:59:45.420 --> 01:00:20.050
जैसे लक्ष्य हिम्मत का रखा है वैसे लक्षण भी हिम्मत का रखेंगे तो कोई बड़ी बात नहीं है ।

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01:00:23.599 --> 01:01:02.000
जब लक्ष्य ही है बाप समान बनने का तो अभी लक्ष्य और लक्षण एक करना है ।

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01:01:10.340 --> 01:01:17.420
फालो ब्रह्मा बाप ।

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01:01:23.250 --> 01:01:50.000
जो भी संकल्प बोल कर्म करो पहले ब्रह्मा बाप से मिलाओ ।

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01:01:54.280 --> 01:01:59.199
कॉपी करो ।

80
01:02:03.199 --> 01:02:22.110
दुनिया में कॉपी करना मना है लेकिन बापदादा कहते हैं ब्रह्मा बाप को कॉपी करो ।

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01:02:26.849 --> 01:02:44.619
निराकार बाप के लिए तो कहेंगे उसको देह नहीं तो देहभान क्या है !

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01:02:44.619 --> 01:02:57.019
लेकिन ब्रह्मा बाप देहधारी रहे हैं ।

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01:03:13.539 --> 01:03:44.050
वास्तव में देखो आप जो सरेन्डर हुए सरेन्डर होने वाले हाथ उठाओ जो सरेन्डर हैं वह हाथ उठाओ ।

84
01:03:44.909 --> 01:03:55.769
जब सरेन्डर किया तो क्या संकल्प किया ?

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01:03:56.280 --> 01:04:08.280
तन मन धन सब बाप आपका ।

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01:04:08.280 --> 01:04:12.050
ऐसे किया ना !

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01:04:12.050 --> 01:04:14.050
किया ?

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01:04:14.050 --> 01:04:16.679
किया था ?

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01:04:16.679 --> 01:04:20.909
इसमें हाथ उठाओ ।

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01:04:26.219 --> 01:04:45.250
तो अभी सरेन्डर किया मेरा नहीं तन भी मेरा नहीं धन भी मेरा नहीं

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01:04:50.340 --> 01:05:14.000
जैसे ब्रह्मा बाप ने बाप को सेवार्थ शरीर दे दिया

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01:05:16.449 --> 01:05:37.139
तो ब्रह्मा बाप जानते थे कि यह शरीर मेरा नहीं सेवार्थ है ।

93
01:05:38.110 --> 01:06:11.650
तो जब आपने तन मन धन तीनों अर्पण किया तो आपका शरीर बाप के सेवार्थ निमित्त है ।

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01:06:11.650 --> 01:06:26.969
जैसे ब्रह्मा बाप का शरीर सेवा अर्थ रहा ।

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01:06:30.280 --> 01:06:43.820
तो आपका शरीर आपका नहीं है सेवार्थ है ।

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01:06:44.969 --> 01:07:12.000
तो यह जो संस्कार हैं देह अभिमान वा देहभान का यह होना चाहिए ?

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01:07:19.139 --> 01:07:55.309
अगर यह स्मृति में रखो कि यह तन विश्व सेवा अर्थ है मेरा नहीं है बाप ने आपको सेवार्थ दिया है ।

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01:08:05.880 --> 01:08:26.800
तो देहभान वा देह अभिमान देह अभिमान ज्यादा नुकसान करता है ।

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01:08:26.800 --> 01:08:59.020
देहभान उससे हल्का है लेकिन दोनों जब दे दिया फार्म भरते हो तो क्या लिखते हो ?

100
01:08:59.020 --> 01:09:09.140
टीचर्स फार्म भराती हो ना तो क्या भराती हो ?

101
01:09:09.880 --> 01:09:20.510
कि यह मेरा जीवन अभी सेवा प्रति है ।

102
01:09:30.220 --> 01:10:04.909
सभी ने जो भी ब्राह्मण बने हैं उन सभी का बाप से वायदा है तन मन धन बाप का मेरा नहीं ।

103
01:10:05.420 --> 01:10:24.619
तो यह संस्कार जो पैदा होते हैं वह देह भान या देह अभिमान में होते हैं

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01:10:32.680 --> 01:11:00.050
इसलिए जो आज भी वायदा किया है संस्कार समाप्ति का

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01:11:10.000 --> 01:11:39.199
क्योंकि जो विघ्न डालते हैं बाप को प्रत्यक्ष करने में सभी को उमंग यह है

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01:11:39.199 --> 01:11:50.050
बापदादा सुनते रहते हैं कहते भी रहते हो

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01:11:51.140 --> 01:12:11.819
कि बाप को प्रत्यक्ष करना है अभी तक ब्रह्माकुमारियाँ ब्रह्माकुमार प्रत्यक्ष हुए हैं

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01:12:16.279 --> 01:12:47.199
भगवान बाप आ गया यह बाप की प्रत्यक्षता गुप्त है ।

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01:12:49.199 --> 01:13:44.619
पुरूषार्थ कर रहे हैं लेकिन यह प्रत्यक्ष आवाज फैले हमारा बाप आ गया भगवानुवाच है न कि ब्रह्माकुमारियों के वाच हैं ।

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01:13:46.619 --> 01:14:05.880
अभी यह प्रत्यक्षता होनी ही है

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01:14:13.310 --> 01:14:51.939
यह स्वभाव संस्कार परिवर्तन होना आप एक-एक के चेहरे और चलन से प्रत्यक्ष होगा ।

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01:15:00.399 --> 01:15:23.819
बाप को प्रत्यक्ष करना है कर रहे हैं लेकिन सबके कानों में यह आवाज गूंजे

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01:15:28.279 --> 01:15:42.050
भगवान आ गया बाप आ गया होना है ना !

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01:15:42.050 --> 01:15:49.420
हाथ उठाओ होना है होना है ?

115
01:15:51.420 --> 01:15:57.939
हाथ तो बहुत अच्छा उठाया ।

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01:16:03.539 --> 01:16:29.079
बापदादा खुश है कि सभी के मन में लगन है और होना ही है ।

117
01:16:50.680 --> 01:17:16.510
इसके लिए जैसे कल से संस्कार स्वभाव को परिवर्तन करेंगे

118
01:17:20.279 --> 01:17:47.819
वैसे ही उसका साधन है कि हर एक जो भी ब्राह्मण हैं

119
01:17:50.510 --> 01:18:35.250
हर ब्राह्मण को अपने चार्ट में शुभ भावना शुभ कामना का विशेष अटेन्शन रखना होगा ।

120
01:18:37.250 --> 01:19:02.170
जैसे दुनिया वालों को काम दिया कि कितना समय शुभ भावना कामना रख सकते हैं

121
01:19:05.939 --> 01:19:17.250
उनको कहा रख सकते हैं और आप तो रख ही सकते हैं ।

122
01:19:22.970 --> 01:20:01.369
किसी भी समय किसका भी स्वभाव संस्कार तब सामना करता है

123
01:20:14.000 --> 01:20:30.109
जब शुभ भावना शुभ कामना उस आत्मा प्रति उस समय नहीं है ।

124
01:20:36.050 --> 01:21:25.079
तो आप भी अगर अमृतवेले से यह संकल्प करो कि मुझे हर आत्मा प्रति शुभ भावना शुभ कामना रखनी ही है

125
01:21:30.000 --> 01:21:52.000
तो जो संकल्प किया परिवर्तन करना ही है वह पूरा कर सकेंगे ।

126
01:21:54.800 --> 01:22:13.420
बातें आयेंगी बातों का काम है आना माया है ना !

127
01:22:16.050 --> 01:22:29.199
और आपका काम है विजय प्राप्त करना ।

128
01:22:44.619 --> 01:23:17.539
तो कल आपस में ग्रुप बनाके जो निमित्त हैं उन्हों को आपस में रूहरिहान कर

129
01:23:19.539 --> 01:23:46.109
जो संकल्प किया है उसको आगे प्रैक्टिकल में कैसे लायें उस पर रूहरिहान करना ।

130
01:23:48.510 --> 01:23:55.939
फिनिस बिन्दी लगा देना ।

131
01:24:03.539 --> 01:24:07.710
हाथ तो उठाया है ना !

132
01:24:07.939 --> 01:24:14.619
आगे वालों ने हाथ उठाया ।

133
01:24:16.279 --> 01:24:29.939
तो आपको निमित्त बनना पड़ेगा ।

134
01:24:37.420 --> 01:25:17.600
जैसे ब्रह्मा बाप के आगे कितने संस्कार वाले पहले-पहले आये आदि में ब्रह्मा बाप ने कितने संस्कारों का खेल देखा ।

135
01:25:19.600 --> 01:26:09.420
लेकिन बाप के सहयोग से आगे बढ़ते औरों को भी बढ़ाते रहे जिसकी रिजल्ट आज कितनी संख्या हो गई है ।

136
01:26:22.569 --> 01:26:37.250
हिलाने वाली बातें आते भी अचल रहे ।

137
01:26:46.109 --> 01:27:08.569
उसका परिणाम कितने सेन्टर खुले कितने प्रोग्राम हो रहे हैं ।

138
01:27:11.310 --> 01:27:23.250
आजकल कितने प्रोग्राम हो रहे हैं ?

139
01:27:23.250 --> 01:27:27.140
हुए हैं ना !

140
01:27:29.140 --> 01:27:49.880
यह सारी रिजल्ट ब्रह्मा बाप की हिम्मत पहले अकेला ब्रह्मा बाप था

141
01:27:50.680 --> 01:28:04.399
आप पीछे आये हो लेकिन अकेला हिम्मत रख आगे बढ़ा ।

142
01:28:11.310 --> 01:28:27.369
रिजल्ट में प्रैक्टिकल प्रमाण आप सब साथी हो ।

143
01:28:36.569 --> 01:28:39.939
तो है ना हिम्मत !

144
01:28:39.939 --> 01:28:54.909
ब्रह्मा बाप ने अकेला हिम्मत रखी आप तो बहुत साथी हैं ।

145
01:28:57.710 --> 01:29:02.340
तो फालो फादर ।

146
01:29:22.850 --> 01:30:09.079
सभी अपने को ब्रह्मा बाप के बच्चे साथी बच्चे समझते हो ना साथ हैं

147
01:30:10.220 --> 01:30:27.020
साथ चलेंगे और ब्रह्मा बाप के साथ राज्य में आयेंगे ।

148
01:30:33.539 --> 01:31:09.710
तो अभी समय है जैसे ब्रह्मा बाप ने हिम्मत रखी रिजल्ट देख रहे हो

149
01:31:16.619 --> 01:31:38.619
तो इतने संगठन में हिम्मत का पांव रखो तो क्या नहीं हो सकता है !

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01:31:38.619 --> 01:31:47.649
कल्प कल्प हुआ है होना ही है ।

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01:31:55.140 --> 01:32:09.310
तो अभी बाप क्या चाहता है वह सुनाया ।

152
01:32:25.649 --> 01:32:48.800
सिर्फ आप सभी एक बात करो वह एक बात है

153
01:32:56.449 --> 01:33:12.109
साधारण पुरूषार्थ को तीव्र पुरूषार्थ में परिवर्तन करो ।

154
01:33:14.909 --> 01:34:09.819
बापदादा ने देखा कि कहाँ कहाँ अलबेलापन हो ही जाना है विजय तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है

155
01:34:16.109 --> 01:34:54.909
ऐसे ज्ञान के हिसाब से निश्चित है लेकिन अलबेलेपन में भी यही शब्द आते हैं हमारी विजय तो है ही हुई पड़ी है ।

156
01:34:58.170 --> 01:35:09.649
कोई काम रूका नहीं है होना ही है ।

157
01:35:10.800 --> 01:35:23.199
एक है पुरूषार्थ के यह शब्द दूसरे अलबेलेपन के भी यही शब्द है ।

158
01:35:29.079 --> 01:35:37.369
कोई काम रूकना नहीं है होना ही है …

159
01:35:40.050 --> 01:36:03.250
तो यह अलबेलापन है यह भी संस्कार चेक करना ।

160
01:36:12.569 --> 01:36:50.220
अलबेलेपन की निशानी है कि उनके जीवन में छोटी-छोटी बातों में थकावट दिखाई देगी ।

161
01:36:55.880 --> 01:37:24.340
शक्ल में वह खुशी की झलक नहीं दिखाई देगी सेवा से पुण्य बन रहा है तो चेहरे पर खुशी होनी चाहिए ।

162
01:37:24.340 --> 01:37:42.340
किसी न किसी प्रकार की थकावट का कारण कोई न कोई बात का अलबेलापन है ।

163
01:37:46.739 --> 01:38:02.220
जब करना ही है तो खुशी से करो ।

164
01:38:07.939 --> 01:38:22.739
चेहरा आपकी सेवा करे चलन आपकी सेवा करे ।

165
01:38:32.220 --> 01:39:24.739
तो आज मैजारिटी का संस्कार समाप्ति का हाथ देख बापदादा बार-बार मुबारक दे रहा है ।

166
01:39:36.449 --> 01:39:52.970
अच्छा - इस ग्रुप में जो पहली बार आये हैं वह उठो ।

167
01:40:04.970 --> 01:40:11.539
देखा कितने हैं ?

168
01:40:16.399 --> 01:40:21.420
बहुत हैं ।

169
01:40:32.449 --> 01:40:35.600
हाथ हिलाओ ।

170
01:41:16.050 --> 01:41:48.449
जो पहली बार आये हैं उनको अपने बाप से मिलने की मुबारक हो ।

171
01:41:56.510 --> 01:42:21.600
तो विशेष समय प्रमाण अभी आपको तीव्र पुरूषार्थ करना पड़ेगा

172
01:42:22.399 --> 01:42:44.050
और बापदादा का यह कहना है कि जो तीव्र पुरूषार्थ करेगा ढीला ढाला नहीं

173
01:42:44.850 --> 01:42:58.739
वह लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट हो जायेगा ।

174
01:43:00.739 --> 01:43:05.199
ऐसी कमाल करना ।

175
01:43:09.880 --> 01:43:13.250
चांस है ।

176
01:43:13.880 --> 01:43:25.880
ऐसे नहीं समझो हम तो आये लास्ट हैं नहीं फास्ट जा सकते हो ।

177
01:43:25.880 --> 01:43:37.770
लेकिन हर समय तीव्र पुरूषार्थ करना ही है ।

178
01:43:37.770 --> 01:43:41.369
बदलना ही है ।

179
01:43:41.369 --> 01:43:54.680
गे-गे नहीं करना देखेंगे सोचेंगे … गे-गे नहीं करना ।

180
01:44:07.140 --> 01:44:29.880
अच्छा है अपना घर दाता का घर अच्छा लगा ना !

181
01:44:37.420 --> 01:44:56.909
तो सभी भाई बहिनें भी आपका स्वागत करते हैं ।

182
01:45:11.710 --> 01:45:17.600
अच्छा ।

183
01:45:20.050 --> 01:46:04.109
अभी चारों ओर के ब्राह्मण बच्चों को बापदादा का स्नेह भरा यादप्यार स्वीकार हो

184
01:46:04.109 --> 01:46:28.739
बापदादा जानते हैं दूर बैठे भी कई बच्चे देख भी रहे हैं

185
01:46:28.739 --> 01:46:54.850
मिलन भी मना रहे हैं उन चारों ओर के बच्चों को बापदादा यही कहते

186
01:46:58.000 --> 01:47:36.970
जैसे अभी सभी मैजारटी ने हाथ उठाया संस्कार समाप्त अभी आप सभी भी मिलकर

187
01:47:36.970 --> 01:48:14.850
एक ही संकल्प रूपी हाथ उठा ही रहे हो कि हम सब मिलकर समाप्ति के समय को समीप लाने के लिए

188
01:48:15.600 --> 01:49:13.880
यह संकल्प कर रहे हैं और चारों ओर सम्पूर्ण समय होने पर ब्रह्मा बाप शिव बाप दोनों को प्रत्यक्ष करेंगे कि हमारा बाप आ गया ।

189
01:49:19.880 --> 01:50:03.250
सबके मुख पर बाप की प्रत्यक्षता हो जाए अभी इस वर्ष में यही दृढ़ संकल्प रखो कि बाप को प्रत्यक्ष करना ही है ।

190
01:50:03.770 --> 01:50:25.539
आधा काम तो किया है बच्चों को बाप ने विश्व के आगे प्रत्यक्ष किया है

191
01:50:26.909 --> 01:50:51.600
अभी बच्चों का कार्य है भगवान आ गया यह आवाज विश्व के एक एक बच्चे तक पहुंचे ।

192
01:51:10.340 --> 01:52:12.170
तो सभी को बापदादा देख हर एक को दिल का स्नेह दिल का प्यार दिल के उमंग उत्साह सहित यादप्यार दे रहे हैं ।

193
01:52:16.569 --> 01:52:18.449
अच्छा ।

194
01:53:12.170 --> 01:54:37.020
सेवा का टर्न कर्नाटक जोन का है :- सेवा का चांस लेना अर्थात् बाप के समीप आने का चांस मिलना ।

195
01:54:41.079 --> 01:54:58.340
देखो सेवा के कारण कितने लोगों को आने का चांस मिलता है ।

196
01:54:59.020 --> 01:55:34.680
सबकी दुआयें आप निमित्त टीचर्स को मिलती हैं क्योंकि सेवा की हिम्मत रखी और चांस इतनों को मिला ।

197
01:55:34.680 --> 01:56:08.510
बापदादा ने देखा कि नये नये भी पहले बारी बहुत आये हैं जो पहले बारी आये हैं कर्नाटक वाले वह लम्बा हाथ उठाओ ।

198
01:56:12.279 --> 01:56:17.880
पहले बारी भी बहुत आये हैं ।

199
01:56:28.680 --> 01:56:32.220
अच्छा है ।

200
01:56:33.600 --> 01:56:49.369
कर्नाटक की वृद्धि अच्छी है

201
01:56:50.220 --> 01:57:23.020
अभी जैसे वृद्धि हुई है वैसे तीव्र पुरूषार्थ की विधि उसकी भी चारों ओर लहर फैलाओ ।

202
01:57:26.619 --> 01:57:30.000
नम्बर ले लो ।

203
01:57:30.000 --> 01:57:40.800
संस्कार समाप्ति का नम्बर ले लो ।

204
01:57:41.770 --> 01:57:46.050
ले सकते हो ?

205
01:57:46.399 --> 01:57:57.710
जो समझते हैं हम पहला नम्बर ले सकते हैं वह हाथ उठाओ ।

206
01:58:06.399 --> 01:58:08.970
अच्छा है ।

207
01:58:12.000 --> 01:58:33.079
ऐसा आपस में संगठन करके प्रोग्राम बनाओ सब एक हैं ।

208
01:58:34.449 --> 01:58:43.939
भिन्न-भिन्न स्थान हैं लेकिन हैं एक ।

209
01:58:49.079 --> 01:58:54.800
यह कमाल करके दिखाओ ।

210
01:59:04.739 --> 01:59:06.970
है ना हिम्मत ?

211
01:59:06.970 --> 01:59:09.199
हिम्मत है ?

212
01:59:13.479 --> 01:59:22.000
तो बापदादा के पास समाचार तो आता रहता है ।

213
01:59:23.600 --> 01:59:40.000
तो मधुबन में हर मास अपने परिवर्तन का समाचार लिखना ।

214
01:59:47.819 --> 01:59:50.680
लिखेंगे ना !

215
01:59:50.680 --> 01:59:54.909
हर मास का ।

216
02:00:00.510 --> 02:00:12.739
बीती सो बीती अब नम्बरवन होके दिखाओ।

217
02:00:17.770 --> 02:00:20.109
अच्छा है ।

218
02:00:20.109 --> 02:00:37.199
बापदादा ने देखा सेवा अच्छी है अभी संगठन देखना चाहते हैं ।

219
02:00:44.739 --> 02:00:49.250
एक्जैम्पुल बनो ।

220
02:00:54.569 --> 02:00:56.680
रेडी ।

221
02:00:56.680 --> 02:00:59.310
रेडी हैं ?

222
02:00:59.310 --> 02:01:04.619
हाथ उठाओ ।

223
02:01:16.619 --> 02:01:25.649
आप देखना एक मास में रिजल्ट आयेगी ।

224
02:01:34.050 --> 02:01:46.340
अच्छा बहुत-बहुत विशेष यादप्यार ।

225
02:02:47.819 --> 02:03:12.170
कैड ग्रुप :- अच्छा - नाम ही दिलवाले हैं तो दिल वाले तो सदा दिल में समाये हुए हो ।

226
02:03:14.850 --> 02:03:48.449
अच्छा किया है आप दिल के निमित्त एक्जैम्पुल बने हो औरों के भी लेकिन कितना ऊंचा भाग्य बनाने के निमित्त बनते हो ।

227
02:03:48.850 --> 02:04:05.939
तो बापदादा को पसन्द है कि दिल वाले औरों की भी सेवा अच्छी करते हैं ।

228
02:04:17.079 --> 02:04:55.479
जो निमित्त बने हैं अपना समाचार सुनाकर औरों को भी बाप का बनाने के ऐसे निमित्त बनने का चांस लेने वालों को बापदादा मुबारक देते हैं ।

229
02:04:56.279 --> 02:05:21.819
सबको यही मुबारक है कि आगे बढ़ते चलो और औरों को भी बढ़ाते चलो ।

230
02:05:21.819 --> 02:05:34.850
बाकी बापदादा को यह सेवा पसन्द है ।

231
02:05:35.770 --> 02:05:59.369
सिर्फ बीमारी की नहीं परमात्म दिल में समाने का भी चांस मिलता है तो बढ़ते रहो औरों को भी आगे बढ़ाते रहो ।

232
02:06:14.340 --> 02:07:04.680
डबल विदेशी :- बापदादा को अच्छा लगता है हर ग्रुप में विदेशी भी आते ही हैं ।

233
02:07:06.680 --> 02:07:32.569
तो बापदादा ने देखा कि विदेशियों को जैसे डबल फारेनर्स का टाइटिल देते हैं वैसे डबल प्यार है ।

234
02:07:32.850 --> 02:07:41.420
बाबा कहने से खुशी में झूमते हैं ।

235
02:07:46.170 --> 02:08:10.109
सेवा भी करते हैं डबल सेवा भी करते उस गवर्मेन्ट की भी और आलमाइटी गवर्मेन्ट की भी ।

236
02:08:10.909 --> 02:08:31.600
ऐसे बाबा से प्यार भी बहुत अच्छा है ।

237
02:08:32.279 --> 02:08:38.569
फर्क भी बहुत अच्छा आ रहा है ।

238
02:08:39.819 --> 02:08:52.109
अभी सभी परमात्म कलचर के हो गये हैं ।

239
02:08:52.109 --> 02:08:59.250
फारेन कलचर नहीं परमात्म कलचर वाले ।

240
02:08:59.250 --> 02:09:02.569
सहज हो गये हैं ।

241
02:09:02.569 --> 02:09:20.909
पहले सोचते थे यह कलचर कैसे बदले लेकिन अभी बाबा ने देखा है

242
02:09:21.600 --> 02:09:40.619
कि ऐसे समझते हैं कि हमारा पहले यही कलचर था वही कलचर बन गया ।

243
02:09:41.310 --> 02:09:48.800
सहज मुश्किल नहीं लगता है क्यों ?

244
02:09:48.800 --> 02:10:10.909
क्योंकि हर कल्प में आप बाप के बने हैं वह कल्प पहले वाला अपना हक ले रहे हैं ।

245
02:10:12.909 --> 02:10:16.850
बहुत अच्छा ।

246
02:10:17.770 --> 02:10:34.619
पुरूषार्थ में भी आगे बढ़ रहे हो यह बाबा को बहुत खुशी है ।

247
02:10:35.819 --> 02:10:41.770
आप भी डबल खुशी में रहते हो ?

248
02:10:41.770 --> 02:10:44.739
डबल खुशी है ?

249
02:10:44.739 --> 02:10:47.079
हाथ उठाओ ।

250
02:10:54.050 --> 02:11:08.050
अच्छा लगता है बेहद का बाप बेहद का संगठन हो जाता है ।

251
02:11:10.050 --> 02:11:38.680
तो बाप को भी खुशी है कि जगह जगह से सभी अपने बेहद के घर में पहुंच जाते हैं ।

252
02:11:45.819 --> 02:11:59.140
अच्छी रिजल्ट है और आगे भी अच्छी रिजल्ट होनी ही है ।

253
02:11:59.140 --> 02:12:03.420
निश्चित है ।

254
02:12:07.199 --> 02:12:25.819
इसलिए आने की मुबारक हो मुबारक हो ।

255
02:12:30.000 --> 02:12:35.710
अच्छा ।

