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00:21:25.019 --> 00:22:18.680
आज का दिन विशेष ब्रह्मा बाप के अव्यक्त होने का स्मृति का दिन है ।

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00:22:21.880 --> 00:22:52.400
सभी बच्चों के नयनों में ब्रह्मा बाप का स्नेह समाया हुआ है ।

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00:22:59.880 --> 00:23:42.509
आज चार बजे से भी पहले बच्चों का स्नेह वतन में पहुंच गया ।

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00:23:43.710 --> 00:24:54.509
ब्रह्मा बाप से मिलन मनाने और स्नेह की अपने दिल के स्नेह की निशानियां मालायें ब्रह्मा बाप के पास पहुंच गई ।

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हर एक माला के खुशबू में बच्चों का स्नेह समाया हुआ था ।

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00:25:40.170 --> 00:26:17.079
हर एक बच्चे के नयन और मुस्कराहट दिल की बातें बोल रही थी ।

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00:26:33.309 --> 00:26:59.819
ब्रह्मा बाप भी हर एक को स्नेह का रिटर्न दे रहे थे ।

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00:27:14.400 --> 00:28:22.450
बाप देख रहे हैं कि अभी भी हर बच्चा नयनों की भाषा में अपने दिल का स्नेह दे रहे हैं

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00:28:35.940 --> 00:29:29.079
क्योंकि यह परमात्म स्नेह हर बच्चे को सहज बाप का बनाने वाला है ।

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00:29:34.910 --> 00:30:29.309
यह अलौकिक स्नेह मेरा बाबा के अनुभव से अपना बनाने वाला है ।

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00:30:32.799 --> 00:31:09.420
यह स्नेह बाप के खज़ानों का मालिक बनाने वाला है

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00:31:13.769 --> 00:32:02.450
क्योंकि बच्चों ने कहा मेरा बाबा तो मेरा बाबा कहना और सर्व खज़ानों के मालिक बनना ।

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00:32:11.480 --> 00:33:00.339
यह स्नेह देह का भान सेकण्ड में भुलाकर देही अभिमानी बना देता है ।

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00:33:13.880 --> 00:33:52.000
सिवाए बाप के और कुछ भी आत्मा को आकर्षित नहीं करता ।

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00:34:02.799 --> 00:34:22.449
इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है ।

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00:34:23.599 --> 00:34:39.710
सिर्फ स्मृति दिवस नहीं लेकिन समर्थी दिवस है

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00:34:52.679 --> 00:35:26.679
क्योंकि इस दिन बाप ने बच्चों को विश्व सेवा के लिए

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00:35:38.449 --> 00:36:27.480
स्वयं करावनहार बन बच्चों को करनहार बनाने का तिलक दिया ।

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00:36:31.019 --> 00:37:00.679
सन शोज फादर का करनहार निमित्त बनाया ।

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00:37:15.250 --> 00:37:47.599
सेवा में सफलता का साधन स्वयं करावनहार बना

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00:37:49.309 --> 00:38:50.570
और बच्चों को करनहार बनाया क्योंकि सेवा में सफलता का साधन मैं करनहार हूँ करावनहार करा रहा है

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00:38:51.420 --> 00:39:09.480
यह स्मृति वा यह स्थिति बहुत आवश्यक है

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00:39:10.000 --> 00:39:42.219
क्योंकि 63 जन्म की स्मृति मैं पन देह अभिमान में ले आती है ।

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00:39:43.710 --> 00:39:57.599
करावनहार करा रहा है मैं निमित्त करनहार हूँ

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00:40:00.400 --> 00:40:30.400
इस स्मृति से ही अपने को निमित्त समझने से देह अभिमान समाप्त हो जाता है ।

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00:40:35.420 --> 00:41:02.510
तो बच्चों को इसीलिए करनहार बनाया स्वयं करावनहार बनें ।

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00:41:07.710 --> 00:41:35.250
करनहार बनने से स्वतः ही निमित्त हैं निर्माण बन जाते हैं ।

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00:41:42.909 --> 00:42:32.570
अभी भी बापदादा बच्चों को सेवा में निमित्त बन करने के कारण बाप ने देखा

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00:42:33.880 --> 00:43:19.079
कि जो सेवाधारी हैं उन्हों के मस्तक में सेवा का फल सितारा चमक रहा है ।

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00:43:24.280 --> 00:43:56.849
मैजारिटी बच्चों की सेवा को देख बापदादा खुश है

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00:43:58.849 --> 00:44:47.820
इसलिए ऐसे बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप वाह बच्चे वाह ! कहके मुबारक दे रहे हैं ।

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00:45:21.420 --> 00:45:50.679
ब्रह्मा बाप विशेष खुश भी हो रहे हैं

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00:45:57.199 --> 00:46:45.650
और आगे भी सेवा को निमित्त बन आगे बढ़ाने के लिए मुबारक दे रहे हैं ।

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00:46:55.820 --> 00:48:08.280
अभी भी ब्रह्मा बाप बच्चों को आप समान फरिश्ता स्थिति में रहने के लिए इशारे दे रहे हैं ।

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00:48:08.909 --> 00:48:28.849
बापदादा ने देखा है कि बच्चों का अटेन्शन है

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00:48:29.880 --> 00:49:00.739
कि सदा जैसे ब्रह्मा बाप जीवन में रहते जीवनमुक्त थे

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00:49:15.769 --> 00:49:41.650
इतनी जिम्मेवारी होते भी इतने बड़े परिवार को सम्भालना

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00:49:50.000 --> 00:50:20.449
सभी को योगी जीवन वाला बनाना इतनी सेवा की जिम्मेवारी सम्भालना

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00:50:25.309 --> 00:51:00.050
सेवा में सदा आगे बढ़ाना सब कुछ जिम्मेवारी होते भी जीवनमुक्त के मजे में रहा

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00:51:07.309 --> 00:51:29.139
इसलिए भक्ति मार्ग में ब्रह्मा का आसन कमल आसन दिखाते हैं ।

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00:51:38.340 --> 00:51:55.250
जीवनमुक्त बन अभी जीवनमुक्त का मजा लिया

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00:52:15.250 --> 00:52:32.280
और आप सभी बच्चों को भी ऐसा ही बनाया ।

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00:52:42.110 --> 00:53:29.820
अभी भी आप बच्चों को फरिश्ता बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियां बताए आप समान बनाने चाहते हैं ।

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00:53:33.820 --> 00:53:54.679
बापदादा ने देखा लक्ष्य हर बच्चे का अच्छा है

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00:53:55.769 --> 00:54:11.599
कोई से भी पूछते हैं आपका लक्ष्य क्या है तो क्या कहते हो ?

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00:54:11.599 --> 00:54:15.539
याद है क्या कहते हो ?

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00:54:16.050 --> 00:54:20.909
बाप समान बनना ही है ।

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00:54:21.539 --> 00:54:26.849
तो बाप समान क्या बनेंगे ?

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00:54:33.940 --> 00:54:59.710
इसी जीवन में जीवनमुक्त जीवन का सैम्पुल बनेंगे ।

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00:55:09.650 --> 00:55:22.110
बापदादा ने देखा है जो होमवर्क देते हैं

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00:55:25.539 --> 00:55:56.280
उसमें अटेन्शन तो देते हैं अनुभव भी करते हैं लेकिन सदा नहीं करते हैं ।

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00:55:58.280 --> 00:56:45.309
अभी भी जो काम दिया था उसकी रिपोर्ट कई बच्चों ने पुरूषार्थ कर एक-एक मास अटेन्शन दिया है ।

53
00:56:46.000 --> 00:57:08.969
कई जोन की रिपोर्ट एक मास की रिजल्ट में अच्छी भी आई है ।

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00:57:08.969 --> 00:57:41.820
जिन्होंने रिपोर्ट भेजी है जिस जोन वालों ने भेजी है उसको बापदादा वाह बच्चे वाह!

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00:57:44.969 --> 00:58:06.340
कह करके मुबारक दे रहे हैं लेकिन बापदादा अभी क्या चाहता है?

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00:58:12.800 --> 00:58:26.909
अभी बापदादा हर बच्चे से यही चाहता है

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00:58:31.820 --> 00:58:50.619
कि अभी कभी-कभी ठीक रहते हैं लेकिन बाप सदा चाहता है ।

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00:59:01.309 --> 00:59:20.000
योगी भी अच्छे बने हैं लेकिन सदा योगी बनाने चाहते हैं ।

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00:59:24.619 --> 00:59:51.710
आजकल बापदादा ने बच्चों को काम भी दिया था सदा रहने के लिए

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00:59:57.940 --> 01:00:29.880
हर घण्टे अपने ऊपर कोई न कोई युक्ति रखो जो कभी-कभी को बदल सदा शब्द आ जाए ।

61
01:00:32.280 --> 01:01:29.539
अभी बापदादा यही चाहते हैं जैसे कहावत है मन जीते जगतजीत मन को जो संकल्प दो वही करे ।

62
01:01:31.539 --> 01:01:34.909
क्यों ?

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01:01:34.909 --> 01:01:55.420
जैसे और कर्मेन्द्रियां जब चाहो जैसे चाहो वैसे करती हैं ना !

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01:01:58.570 --> 01:02:15.079
ऐसे ही मन को भी जो आर्डर करो वही करे ।

65
01:02:16.000 --> 01:02:34.110
अभ्यास करते हो लेकिन कभी-कभी नहीं भी करते हैं ।

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01:02:39.139 --> 01:03:17.199
बापदादा अभी यही चाहते हैं कि मन को शक्तियों की लगाम से जैसे चलाने चाहो वैसे चलाओ ।

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01:03:18.570 --> 01:03:31.710
जो गायन है मन जीते जगतजीत वह किसका गायन है ?

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01:03:34.969 --> 01:03:39.710
आप बच्चों का ही तो गायन है ।

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01:03:39.710 --> 01:03:50.050
हर कल्प किया है तभी गायन है

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01:03:52.050 --> 01:04:16.280
क्योंकि जैसे और कर्मेन्द्रियों को मेरी कहते हो वैसे ही मन को भी मेरा कहते हो ।

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01:04:19.820 --> 01:04:29.539
मेरा कहना अर्थात् मालिक बनो ।

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01:04:34.050 --> 01:04:51.820
मन में जो संकल्प करने चाहो जितना समय वह संकल्प करने चाहो

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01:04:54.510 --> 01:05:05.019
वह बंधा हुआ है क्योंकि मेरा है ।

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01:05:07.369 --> 01:05:32.739
तो बापदादा इस स्नेह के दिन यही होमवर्क देने चाहते हैं

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01:05:34.110 --> 01:06:07.820
कि जो संकल्प करने चाहो वही चले अगर आप शुद्ध संकल्प करने चाहते हो

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01:06:08.280 --> 01:06:25.880
तो व्यर्थ संकल्प शुद्ध संकल्प व्यर्थ को खत्म कर दे ।

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01:06:26.800 --> 01:06:47.199
चाहो योग लगाना और संस्कार के कारण व्यर्थ संकल्प चलें

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01:06:48.849 --> 01:07:02.570
या योग की सिद्धि नहीं मिले यह कन्ट्रोल होना चाहिए ।

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01:07:02.570 --> 01:07:29.820
अगर एक घण्टा योग लगाने चाहते हो तो मन डिस्टर्ब नहीं करे ।

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01:07:35.199 --> 01:08:12.170
आत्मा मालिक है मन मालिक नहीं है मन तो आत्मा का साथी है ।

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01:08:13.769 --> 01:08:39.939
तो साथी को प्यार से आर्डर करो मनजीत बनो

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01:08:44.800 --> 01:09:06.680
क्योंकि बापदादा के पास बहुत बच्चों का समाचार आता है -

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01:09:13.199 --> 01:09:24.569
व्यर्थ संकल्प समय प्रति समय आते हैं ।

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01:09:25.140 --> 01:09:31.710
नहीं चाहते हैं तो भी आते हैं ।

85
01:09:32.340 --> 01:09:38.800
तो क्या यह मालिक कहेंगे !

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01:09:42.569 --> 01:09:52.050
तो ब्रह्मा बाप से स्नेह है ना

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01:09:54.050 --> 01:10:35.539
तो बाप आज स्नेह में अपने दिल की चाहना सुना रहे हैं कि अभी मनजीत जगतजीत बनना ही है ।

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01:10:37.770 --> 01:10:58.619
तो ब्रह्मा बाप को यह स्नेह की सौगात देंगे ?

89
01:11:00.619 --> 01:11:04.619
स्नेह में क्या दिया जाता है ?

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01:11:04.619 --> 01:11:09.199
गिफ्ट दी जाती है ना !

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01:11:09.770 --> 01:11:31.479
तो आज ब्रह्मा बाप बच्चों से यह सौगात देने के लिए कह रहे हैं ।

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01:11:33.479 --> 01:11:36.170
तैयार हैं ?

93
01:11:36.170 --> 01:11:38.619
तैयार हैं ?

94
01:11:38.619 --> 01:11:40.619
हाथ उठाओ ।

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01:12:12.170 --> 01:12:53.710
तो अभी जब भी आर्डर करे तो आज के दिन से व्यर्थ संकल्प आने नहीं देना कर सकते हो ?

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01:12:55.250 --> 01:13:15.310
आज दो घण्टा चार घण्टा योग की स्टेज में कर्म भी करो योग भी लगाओ कर सकते हो ?

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01:13:17.310 --> 01:13:22.340
कर सकते हो करेंगे ?

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01:13:22.340 --> 01:14:10.850
चलो अभी बीती सो बीती लेकिन अब आर्डर करें कि आज के दिन व्यर्थ संकल्प को फुलस्टॉप तो करना पड़ेगा ना ।

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01:14:14.970 --> 01:14:42.680
आज योग में यही लक्ष्य रखो उसी प्रमाण सारे दिन का पुरूषार्थ करना पड़ेगा ना !

100
01:14:46.619 --> 01:15:06.850
बाप से स्नेह में जो बाप कहे वह करना है ।

101
01:15:13.020 --> 01:15:41.539
संकल्प व्यर्थ बन्द इसकी युक्ति है ब्रह्मा बाप के स्नेह को दिल से याद करो ।

102
01:15:45.199 --> 01:16:10.680
चाहे साकार में देखा चाहे नहीं देखा लेकिन बुद्धिबल द्वारा तो सभी ने देखा है ना !

103
01:16:10.680 --> 01:16:14.909
देखा है या नहीं देखा है ?

104
01:16:14.909 --> 01:16:38.800
जो कहते हैं मैंने बाबा का प्यार देखा मैंने ब्रह्मा बाप की पालना देखी तो क्या उसी से चल रहा हूँ वह हाथ उठाओ ।

105
01:16:38.800 --> 01:16:42.050
अच्छा ।

106
01:16:45.649 --> 01:16:53.939
हाथ उठाके तो खुश कर दिया ।

107
01:16:58.909 --> 01:17:08.449
बापदादा को खुशी है हिम्मत तो रखी है ना ।

108
01:17:09.250 --> 01:17:25.600
लेकिन जब भी कोई ताकत कम हो जाए ना

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01:17:27.079 --> 01:17:54.449
तो सदा बाप के सम्बन्ध कितने सम्बन्ध हैं कभी बाप कभी बच्चा भी बन जाता है ।

110
01:17:58.109 --> 01:18:24.800
कभी बाप तो कभी सखा भी बन जाते हैं इसलिए या संबंध याद करो या प्राप्तियां याद करो ।

111
01:18:24.800 --> 01:18:40.399
प्राप्तियां और संबंध जैसे आज दिल से याद कर रहे हो ना !

112
01:18:42.680 --> 01:18:56.619
ऐसे याद करने से प्यार पैदा हो जायेगा ।

113
01:18:57.649 --> 01:19:09.079
आज भी सबके दिल में ब्रह्मा बाप का प्यार आ रहा है ना !

114
01:19:10.510 --> 01:19:28.850
तो जब कुछ नीचे ऊपर हो तो सम्बन्ध और प्राप्तियां याद करना ।

115
01:19:28.850 --> 01:19:44.449
बाप हर बच्चे के साथ सहयोगी है सिर्फ आप याद करना ।

116
01:19:48.170 --> 01:19:54.279
तो समझा आज क्या करना है ?

117
01:19:55.020 --> 01:20:11.199
मनजीत जगतजीत जो गायन है वह स्वरूप धारण करना है ।

118
01:20:14.850 --> 01:20:20.000
आर्डर से चलाओ ।

119
01:20:22.000 --> 01:20:32.680
अभी थोड़ा फ्री छोड़ दिया है ना तो वह अपना काम करता है ।

120
01:20:33.649 --> 01:20:39.600
अभी अटेन्शन दो ।

121
01:20:46.739 --> 01:21:03.250
मन मेरे आर्डर में चले न कि आप मन के आर्डर में चलो ।

122
01:21:05.250 --> 01:21:24.510
चाहते हो ज्ञान की बातों का रमण करें और आ जाती फालतू बात ।

123
01:21:27.819 --> 01:21:30.800
तो क्या हुआ ?

124
01:21:33.770 --> 01:21:41.880
मन मालिक बना या आप मालिक बनें ?

125
01:21:50.449 --> 01:22:03.819
तो सभी ने यह होमवर्क समझा !

126
01:22:03.819 --> 01:22:09.649
मन जीत बनना है ।

127
01:22:11.649 --> 01:22:26.970
जो आर्डर करें वह मानेगा जरूर मानेगा अटेन्शन देना पड़ेगा बस ।

128
01:22:30.800 --> 01:22:40.510
मातायें या टीचर्स हो सकता है ?

129
01:22:40.510 --> 01:22:43.140
हो सकता है ?

130
01:22:43.140 --> 01:22:47.079
टीचर्स हाथ उठाओ ।

131
01:22:53.420 --> 01:22:59.600
टीचर्स हाथ उठा रहे हैं ।

132
01:23:01.600 --> 01:23:11.250
अगर समझते हैं हो सकता है तो हाथ हिलाओ ।

133
01:23:16.680 --> 01:23:22.399
पहली लाइन तो हिलाओ ।

134
01:23:45.880 --> 01:23:51.539
भाई हाथ हिलाओ ।

135
01:23:51.939 --> 01:23:55.250
वाह !

136
01:24:01.479 --> 01:24:20.220
फिर तो ब्रहमा बाप को स्नेह की सौगात दी इसकी मुबारक हो मुबारक हो ।

137
01:25:23.020 --> 01:25:45.310
अच्छा है बापदादा से स्नेह बहुत सहयोग देता है ।

138
01:25:51.140 --> 01:26:06.909
मेरा बाबा कहा दिल से तो मेरा बाबा कहा तो मैं कौन ?

139
01:26:06.909 --> 01:26:12.399
बाप का सिकीलधा बच्चा ।

140
01:26:15.600 --> 01:26:25.420
सभी कितने बारी कहते हो मेरा बाबा मेरा बाबा कितने बार कहते हो ?

141
01:26:25.420 --> 01:26:36.050
बाप सुनता है ना सब नोट करता है ।

142
01:26:46.739 --> 01:26:52.850
डबल फॉरेनर्स भी सुन रहे हैं ना ।

143
01:27:00.850 --> 01:27:22.109
बापदादा ने देखा कि फुल सीजन में डबल फॉरेनर्स ने हाजिरी भरी है ।

144
01:27:24.109 --> 01:27:34.739
मधुबन में हर टाइम हाजिर रहे हैं ।

145
01:27:36.739 --> 01:27:47.140
अभी भी 350 से हैं ।

146
01:27:58.279 --> 01:28:03.369
अपने टर्न में भी आते हैं

147
01:28:03.369 --> 01:28:20.000
लेकिन हर टर्न में भी थोड़े-थोड़े कहाँ न कहाँ से आते हैं ।

148
01:28:31.479 --> 01:28:58.109
तो अभी यह रिजल्ट बापदादा भी देखते रहेंगे

149
01:28:58.510 --> 01:29:18.050
और आप सब भी साक्षी होकर अपने आपकी रिजल्ट देखते रहना ।

150
01:29:22.739 --> 01:29:49.020
यही याद रखना कि बापदादा को मालिक बनने का वायदा किया है ।

151
01:29:49.020 --> 01:30:11.250
बापदादा अभी बच्चों को कम से कम एक एक जोन को

152
01:30:16.399 --> 01:30:34.220
तो यह कार्य दे सकते हैं कि यह जोन इस सप्ताह

153
01:30:37.420 --> 01:30:56.170
या 15 दिन रिजल्ट दे कि व्यर्थ संकल्प नहीं

154
01:30:56.170 --> 01:31:12.340
लेकिन जो विषय मन को दिया वह किया या नहीं किया ?

155
01:31:15.020 --> 01:31:19.819
यह मंजूर है टीचर्स ?

156
01:31:19.819 --> 01:31:22.739
मंजूर है ?

157
01:31:22.739 --> 01:31:29.710
जोन को कार्य देवें ?

158
01:31:30.619 --> 01:31:33.310
हाथ उठाओ ।

159
01:31:33.310 --> 01:31:36.000
टीचर्स ।

160
01:31:41.310 --> 01:31:45.819
महाराष्ट्र है ना ।

161
01:31:45.819 --> 01:31:54.279
तो महाराष्ट्र को तो महान काम देंगे ना ।

162
01:31:59.140 --> 01:32:17.310
बापदादा को हर एक जोन के लिए प्यार है

163
01:32:19.310 --> 01:32:49.880
और सदा यह निश्चय रखते हैं कि यह बच्चे बाप ने कहा और बच्चों ने किया ।

164
01:32:51.880 --> 01:32:54.399
ऐसा है ?

165
01:32:54.399 --> 01:33:04.050
महाराष्ट्र जो बाप ने कहा वह किया ऐसा है ?

166
01:33:04.050 --> 01:33:07.770
महाराष्ट्र वाले हाथ उठाओ ।

167
01:33:10.220 --> 01:33:13.710
बहुत हैं ।

168
01:33:16.800 --> 01:33:22.800
पौना क्लास है ।

169
01:33:31.199 --> 01:33:45.819
तो हर एक जोन बाप के आज्ञाकारी हैं कांध हिला रहे हैं सभी ।

170
01:33:45.819 --> 01:34:00.399
बाप को भी निश्चय है कि यह मेरे बच्चे हैं ही निश्चयबुद्धि ।

171
01:34:15.710 --> 01:34:36.909
बापदादा यही चाहते हैं कि जो रोज के महावाक्य सुनते हो वह होम वर्क है ।

172
01:34:38.909 --> 01:34:53.310
अगर रोज की मुरली जो बाप ने कहा और बच्चों ने किया

173
01:34:54.109 --> 01:35:18.909
तो उसको कहा जाता है बाप के सिकीलधे बच्चे आज्ञाकारी बच्चे ।

174
01:35:28.399 --> 01:35:37.420
क्या करना है वह रोज की मुरली पढ़ लो ।

175
01:35:44.510 --> 01:36:05.649
क्योंकि बापदादा ने देखा है मैजारिटी बच्चे मुरली से प्यार रखते हैं ।

176
01:36:06.000 --> 01:36:14.109
अगर कोई नहीं भी रखता हो

177
01:36:16.399 --> 01:36:38.000
तो बापदादा को कोई बच्चा कहे बाबा आपसे मेरा बहुत प्यार है लेकिन बाप का प्यार किससे है ?

178
01:36:39.600 --> 01:36:43.140
मुरली से ।

179
01:36:44.050 --> 01:36:53.310
मुरली के लिए कितना दूर से आते हैं ।

180
01:36:55.310 --> 01:37:08.510
कोई टीचर ऐसा होगा जो इतना दूर से पढ़ाई पढ़ाने आये ।

181
01:37:08.510 --> 01:37:17.770
तो जब बाप का प्यार मुरली से है

182
01:37:17.770 --> 01:37:34.909
तो जो मेरा बाबा कहता है उसका पहला प्यार बाप के साथ बाप की मुरली से होना चाहिए ।

183
01:37:38.109 --> 01:37:51.199
देखो ब्रह्मा बाप ने एक दिन भी मुरली मिस नहीं की ।

184
01:37:53.199 --> 01:38:02.569
चाहे बाम्बे भी जाते रहे कारणे अकारणे

185
01:38:02.569 --> 01:38:20.970
तो मुरली लिखते थे और मातेश्वरी वह मुरली सुनाती थी ।

186
01:38:22.970 --> 01:38:39.250
लास्ट डे तबियत थोड़ी ढीली थी सवेरे का क्लास नहीं कराया

187
01:38:39.250 --> 01:38:55.710
लेकिन शाम को क्लास कराने के बाद अव्यक्त हुए ।

188
01:38:57.140 --> 01:39:04.050
तो ब्रह्मा बाप का प्यार किससे हुआ ? मुरली से ।

189
01:39:04.050 --> 01:39:12.220
जो कोई समझते हैं कि मेरा बाबा से प्यार है

190
01:39:12.220 --> 01:39:24.800
तो बाप का जिससे प्यार रहा बच्चे का रहना चाहिए ना !

191
01:39:29.770 --> 01:39:49.199
इसलिए आप समझते हो कि मुरली पढ़ना या क्लास में पढ़ो

192
01:39:49.199 --> 01:40:05.880
अगर मजबूरी है बहाना नहीं है सही कारण है तो किससे सुनो ।

193
01:40:12.279 --> 01:40:29.649
जो समझते हैं कि मुरली का इतना महत्व रखूंगा वह हाथ उठाओ ।

194
01:40:58.970 --> 01:41:11.369
अच्छा यहाँ तो सब दिखाई दे रहा है बाप आप पीछे वालों को भी देख रहा है ।

195
01:41:22.399 --> 01:41:27.420
अच्छा बहुत अच्छा ।

196
01:41:27.819 --> 01:41:35.600
बाप बीच-बीच में पेपर लेगा ।

197
01:41:35.600 --> 01:41:46.220
आज किसने मुरली नहीं सुनी वह टीचर लिखके भेजे ।

198
01:41:58.050 --> 01:42:15.819
आज ब्रह्मा बाप हर बच्चों से मिलकर बहुत-बहुत नयनों द्वारा हर बच्चे को स्नेह से नयनों द्वारा स्नेह दे रहे हैं।

199
01:43:25.199 --> 01:43:28.449
अच्छा –

200
01:43:28.449 --> 01:43:43.880
चारों ओर से बच्चों द्वारा सन्देश आये हैं ।

201
01:43:46.569 --> 01:44:13.939
चारों ओर के आये हुए प्यार के मीठे-मीठे भाव

202
01:44:20.050 --> 01:45:05.649
या भिन्न-भिन्न शब्दों की याद चारों ओर से भिन्न-भिन्न पत्र आये हैं सभी को बापदादा रेसपान्ड कर रहे हैं

203
01:45:07.649 --> 01:45:39.600
हर बच्चा स्नेह में बाप के दिल में समाया हुआ है

204
01:45:44.850 --> 01:46:18.279
और यह अविनाशी स्नेह सदा बाप का और बच्चों का अनादि अविनाशी है

205
01:46:22.340 --> 01:46:47.079
और सारा संगमयुग यह बाप बच्चों का मिलन निश्चित ही है ।

206
01:46:50.399 --> 01:46:55.199
अच्छा ।

207
01:46:57.199 --> 01:48:18.909
महाराष्ट्र बाम्बे आन्ध्र प्रदेश :- ( 14 हजार आये हैं ) :- सभी को विशेष बापदादा का स्नेही दिन पर स्नेह है और सदा यह स्नेह अमर रहेगा ।

208
01:48:26.619 --> 01:48:35.880
बाकी आने वाले तो सब उठे ही हैं

209
01:48:35.880 --> 01:48:52.510
टर्न बाई टर्न आने का जो चांस मिलता है वह पसन्द है ना !

210
01:48:52.510 --> 01:48:54.739
पसन्द है ?

211
01:48:54.739 --> 01:48:57.310
कोई का भी उल्हना नहीं रह सकता ।

212
01:49:10.000 --> 01:49:14.970
हर जोन को टर्न मिलता है ।

213
01:49:16.970 --> 01:49:23.079
तो यह सिस्टम पसन्द है ?

214
01:49:23.079 --> 01:49:27.310
पसन्द है ?

215
01:49:27.310 --> 01:49:32.569
यह सिस्टम पसन्द है ना !

216
01:49:42.279 --> 01:49:46.569
अच्छा है ।

217
01:49:48.050 --> 01:49:59.770
देखा गया हर एक जोन खुली दिल से अपने तरफ के साथी ले आते हैं ।

218
01:50:03.079 --> 01:50:19.079
यज्ञ सेवा का चांस भी है और मिलने का चांस भी है ।

219
01:50:19.079 --> 01:50:33.880
यह यज्ञ सेवा चाहे थोड़े से दिन मिलते हैं

220
01:50:33.880 --> 01:51:09.369
लेकिन यज्ञ सेवा करके जाने के बाद आपके जीवन में यज्ञ की आकर्षण अनुभव हो जाती है

221
01:51:12.850 --> 01:51:36.680
इसलिए परिवार क्या है यहाँ इतना परिवार इकठ्ठा होता है जोन में भी इतना परिवार इकठ्ठा नहीं होगा

222
01:51:36.680 --> 01:52:00.569
लेकिन मधुबन में आना बापदादा से मिलना साथ में परिवार से भी मिलना होता है ।

223
01:52:01.310 --> 01:52:19.939
एक बार यज्ञ सेवा की तो सदा यज्ञ नयनों में आता रहेगा ।

224
01:52:24.050 --> 01:52:39.880
देखी हुई चीज और सुनी हुई चीज में फर्क हो जाता है ना ।

225
01:52:41.310 --> 01:52:50.050
मधुबन हर एक बच्चे का घर है ।

226
01:52:52.050 --> 01:53:09.250
यह तो सेवा अर्थ भिन्न-भिन्न स्थान में भेजा गया है क्योंकि विश्वसेवक बनना है ना ।

227
01:53:09.250 --> 01:53:34.449
उल्हना नहीं रह जाए हमको पता नहीं पड़ा हमारा बाप आया वर्सा देके गया और हमें पता नहीं पड़ा यह उल्हना रह नहीं जाए

228
01:53:34.449 --> 01:54:06.399
इसीलिए बापदादा हर समय यही कहते अड़ोसी-पड़ोसी गांव-गांव एरिया-एरिया में यह सन्देश जरूर दो

229
01:54:06.399 --> 01:54:28.170
कि आपका बाप आ गया मानें न मानें उन्हों का अपना भाग्य है लेकिन उल्हना नहीं रह जाए ।

230
01:54:30.170 --> 01:54:48.000
सन्देश देना आपका काम है मानना भाग्य बनाना वह उन्हों के हाथ में है ।

231
01:54:48.000 --> 01:54:59.020
लेकिन आपके तरफ से कोई उल्हना नहीं रहना चाहिए ।

232
01:55:05.600 --> 01:55:21.079
तो बहुत अच्छा है महाराष्ट्र में सेवा का विस्तार बहुत अच्छा है ।

233
01:55:21.079 --> 01:55:39.479
इसके लिए बापदादा टीचर्स या सेवा करने वालों को विशेष मुबारक दे रहा है ।

234
01:55:47.079 --> 01:55:56.739
जैसा नाम है वैसे ही काम है विस्तार किया है ।

235
01:56:05.819 --> 01:56:21.710
बाकी नये-नये प्लैन जैसे अभी दिल्ली वाले प्लैन बना रहे हैं

236
01:56:23.710 --> 01:56:42.850
बाप ने ही कहा और प्रैक्टिकल में ला रहे हैं ऐसे महाराष्ट्र भी कोई न कोई नया प्लैन वही नहीं

237
01:56:42.850 --> 01:57:00.399
लेकिन कोई नये रूप से सेवा का प्लैन बनाए और चारों ओर आवाज फैलाये ।

238
01:57:00.399 --> 01:57:15.770
महाराष्ट्र में तो फैला रहे हैं लेकिन चारों ओर फैलाने के लिए कोई न कोई प्लैन बनाओ ।

239
01:57:15.770 --> 01:57:29.819
जिससे भिन्नभिन्न देश में आपके द्वारा सेवा का आवाज जाये ।

240
01:57:32.510 --> 01:57:36.000
अच्छा लगता है ।

241
01:57:36.000 --> 01:57:45.079
बिजी रहना अर्थात् मायाजीत बनना ।

242
01:57:48.109 --> 01:57:58.909
तो बापदादा खुश है महाराष्ट्र पर ।

243
01:58:07.199 --> 01:58:12.569
टीचर्स भी खुश हैं ना !

244
01:58:20.680 --> 01:58:25.939
अच्छा ।

245
01:58:33.710 --> 01:59:36.680
डबल विदेशी भाई बहिनें :- डबल विदेशी जब सुनते हैं

246
01:59:36.680 --> 01:59:45.649
तो दिल में सबके बहुत प्यार होता है ।

247
01:59:45.649 --> 01:59:55.250
ब्राह्मण परिवार में भी प्यार की लहर घूम जाती है ।

248
01:59:57.250 --> 02:00:21.310
कितना भी दूर हो लेकिन दूर को दिल के स्नेह से नजदीक बनाना यह डबल विदेशियों की विशेषता है ।

249
02:00:22.340 --> 02:00:31.310
सेवा भी फैला रहे हैं ।

250
02:00:31.310 --> 02:00:44.449
यह भी समाचार बापदादा सुनते रहते हैं ।

251
02:00:47.420 --> 02:01:10.340
अभी-अभी कोई भी संख्या रह नहीं जाए उल्हना नहीं दे हमको तो सन्देश मिला नहीं ।

252
02:01:10.340 --> 02:01:50.510
तो बापदादा ने देखा कि अभी फॉरेन वाले इन्डिया वालों से मिलके चारों ओर सन्देश देने में अच्छे प्रैक्टिकल ला रहे हैं ।

253
02:01:50.510 --> 02:01:59.479
कोई भी धर्म रहना नहीं चाहिए ।

254
02:01:59.479 --> 02:02:26.220
सन्देश देना चाहिए और फॉरेन की सेवा शुरू से वायुमण्डल में फैलने का साधन यह है

255
02:02:26.220 --> 02:02:48.279
जो शुरू में ही सब एक स्टेज पर एक समय में इकठ्ठे बैठते थे क्रिश्चियन भी मुस्लिम भी है

256
02:02:48.800 --> 02:03:03.020
जो भी सभी हैं भिन्न-भिन्न वह सब एक समय स्टेज पर इकठ्ठे बैठते थे

257
02:03:03.939 --> 02:03:32.970
तो यह सर्व का पिता है इसका प्रत्यक्ष स्वरूप दिखाई देता है तो कोई भी ऐसे रहना नहीं चाहिए ।

258
02:03:33.479 --> 02:03:41.819
ऐसे ही भारत में भी विदेश में भी ।

259
02:03:45.310 --> 02:03:58.170
कोई भी चाहे शाखायें हैं लेकिन सन्देश जरूर पहुंचना चाहिए

260
02:04:01.310 --> 02:04:18.739
क्योंकि अभी समय भी सबका दिमाग थोड़ा बदल रहा है ।

261
02:04:21.199 --> 02:04:34.340
दुःख अशान्ति की लहर विदेश में भी फैल रही है ।

262
02:04:35.199 --> 02:04:39.539
भारत में तो है ही ।

263
02:04:42.399 --> 02:04:56.050
इसलिए अभी सुनने की इच्छा बढ़ रही है ।

264
02:04:56.909 --> 02:05:19.199
अभी देखो निमन्त्रण देते हैं तो आपका हॉल तो भर जाता है लेकिन और भी रह जाते हैं ।

265
02:05:21.199 --> 02:05:37.199
तो लोगों की चाहना भी बढ़ रही है इसलिए खूब सेवा फैलाओ ।

266
02:05:37.199 --> 02:06:09.539
चांस भी मिल रहे हैं तो विदेश वालों को सेवा का उमंग उत्साह है यह दिनप्रतिदिन देखने में आता है ।

267
02:06:13.539 --> 02:06:36.000
लेकिन बाप चाहे गांव से कोई आये हैं चाहे विदेश से चाहे कहाँ से भी आये हो सभी को बापदादा यही कहता है कि सेवा खूब करो ।

268
02:06:36.000 --> 02:06:41.140
कभी भी समय बदल सकता है ।

269
02:06:41.140 --> 02:06:54.850
जो चाहो सेवा करने लेकिन कर भी नहीं पाओ ऐसा समय भी आने वाला है ।

270
02:06:56.109 --> 02:07:06.109
इसलिए जो करना है वह अब करो ।

271
02:07:06.109 --> 02:07:11.880
कब नहीं अब ।

272
02:07:14.279 --> 02:07:25.020
बापदादा हमेशा कहते हैं कि कल पर नहीं छोड़ो ।

273
02:07:25.020 --> 02:07:30.220
आज पर भी नहीं अब ।

274
02:07:33.710 --> 02:08:02.510
क्योंकि समय पांचों तत्व बाप के पास आते हैं हमको बताओ कब तक दुःख चलेगा !

275
02:08:05.539 --> 02:08:14.340
खुद दुःखी हो रहे हैं तो क्या करेंगे ?

276
02:08:16.340 --> 02:08:22.739
मनुष्यात्माओं को भी दुःखी करेंगे ना ।

277
02:08:24.970 --> 02:08:35.710
इसलिए जो भी आये हैं उसको संकल्प करना है

278
02:08:35.710 --> 02:09:02.680
कि जैसे ब्राह्मण जीवन आवश्यक है वैसे अभी के समय अनुसार हर एक को सेवा भी जरूरी है ।

279
02:09:06.970 --> 02:09:13.939
करो या कराओ ।

280
02:09:17.819 --> 02:09:41.369
तो डबल फॉरेनर्स को देख सारा परिवार भी खुश और स्वयं भी खुश और बापदादा भी खुश ।

281
02:09:42.510 --> 02:10:04.909
बाकी जो बापदादा ने होमवर्क दिया मनजीत जगतजीत बनना ही है ।

282
02:10:05.420 --> 02:10:13.479
आपका ही गायन है उसको रिपीट करना है ।

283
02:10:17.819 --> 02:10:23.079
अच्छा ।

284
02:10:25.079 --> 02:10:47.770
कलकत्ता के भाई बहिनों ने फूलों का श्रृंगार किया है :- अच्छा है

285
02:10:50.739 --> 02:11:21.369
मेहनत बहुत करनी पड़ती है लेकिन यह मेहनत आपकी दिल का स्नेह फूलों में दिखाई देता है ।

286
02:11:26.739 --> 02:11:38.000
चाहे हाथ से मेहनत करो चाहे उत्साह दिलाने की मेहनत करो

287
02:11:38.000 --> 02:11:51.649
लेकिन मेहनत का बल और मेहनत का फल मिलता जरूर है ।

288
02:11:53.250 --> 02:12:14.340
तो बहुत-बहुत स्नेह बापदादा खास कलकत्ते वालों को दे रहे हैं

289
02:12:17.600 --> 02:12:31.939
क्योंकि ब्रह्मा बाप में प्रवेशता भी कलकत्ता में ही हुई है ।

290
02:12:36.680 --> 02:12:55.199
इसलिए कलकत्ता वाले ही निमित्त बने हैं स्नेह का रेसपान्ड देने के लिए ।

291
02:12:56.220 --> 02:13:07.079
अच्छे प्यार से करते हैं इसकी मुबारक हो मुबारक हो मुबारक हो ।

292
02:13:13.479 --> 02:13:22.170
आप सबको भी पसन्द आता है ना !

293
02:13:23.420 --> 02:13:28.220
परिवर्तन तो चाहिए ना ।

294
02:13:28.220 --> 02:13:37.710
तो यह अपना स्नेह प्रत्यक्ष रूप में करते हैं ।

295
02:13:39.710 --> 02:13:44.909
अच्छा ।

296
02:14:06.109 --> 02:14:26.279
अभी जो बच्चे सम्मुख है या दूर बैठे भी देख रहे हैं

297
02:14:26.970 --> 02:14:45.250
बापदादा ने सुना कि अभी तो चारों ओर यह कोशिश की है

298
02:14:45.250 --> 02:14:59.880
कि हर एक देश में सेन्टर पर भी जाके देखते हैं सुनते हैं

299
02:14:59.880 --> 02:15:10.279
चाहे रात का कितना भी बजता है तो भी देखते हैं

300
02:15:10.279 --> 02:15:25.939
यह भी साइंस का साधन आपके लिए ही निकले हैं और आपको ही लाभ हो रहा है ।

301
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अगर साइंस द्वारा विनाश होगा तो भी आपके राज्य के लिए कर रहे हैं ।

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तो चारों ओर के स्नेही बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप का यादप्यार दिल का दुलार दिल का प्यार स्वीकार हो ।

