WEBVTT

1
00:22:06.339 --> 00:22:47.819
आज बापदादा सभी बच्चों को देख खुश हो रहे हैं ।

2
00:22:52.740 --> 00:23:34.569
हर एक बच्चा परमात्म प्यार द्वारा पहुंच गये हैं ।

3
00:23:40.970 --> 00:24:25.019
तो आज बापदादा हर एक बच्चे के मस्तक में भाग्य की रेखायें देख रहे हैं ।

4
00:24:36.279 --> 00:25:14.569
ऐसा भाग्य और इतना बड़ा भाग्य सारे कल्प में किसी को प्राप्त नहीं है

5
00:25:23.650 --> 00:25:57.309
क्योंकि आपको भाग्य देने वाला स्वयं भाग्य दाता है ।

6
00:26:07.769 --> 00:27:12.910
हर एक के मस्तक में पहले तो चमकता हुआ सितारा का भाग्य चमक रहा है ।

7
00:27:33.819 --> 00:28:15.309
मुख में मधुर वाणी की रेखा चमक रही है ।

8
00:28:24.339 --> 00:28:47.480
होठों पर मधुर मुस्कान की रेखा चमक रही है ।

9
00:28:58.970 --> 00:29:46.049
दिल में दिलाराम बाप के लवलीन की रेखा चमक रही है ।

10
00:29:58.569 --> 00:30:37.019
हाथों में सर्व खज़ानों के श्रेष्ठता की रेखा चमक रही है ।

11
00:30:42.740 --> 00:31:07.710
पांव में हर कदम में पदम की रेखा चमक रही है ।

12
00:31:15.769 --> 00:31:50.339
अभी सोचो ऐसा भाग्य और किसका हुआ है !

13
00:31:58.509 --> 00:32:31.480
इसलिए आपके यादगार चित्रों का भी भाग्य वर्णन होता रहता है ।

14
00:32:36.569 --> 00:33:10.680
और यह भाग्य स्वयं भाग्यविधाता ने हर एक बच्चे का बनाया है ।

15
00:33:15.250 --> 00:33:59.369
बापदादा हर बच्चे का भाग्य देख हर बच्चे को मुबारक दे रहे हैं - वाह बच्चे वाह !

16
00:34:02.680 --> 00:34:39.250
और यह भाग्य इस संगम पर ही मिलता है और चलता है ।

17
00:34:49.650 --> 00:35:31.139
संगमयुग का सुख सब युगों से श्रेष्ठ है ।

18
00:35:33.769 --> 00:36:00.619
सतयुग का भाग्य भी संगम के पुरूषार्थ की प्रालब्ध है

19
00:36:15.769 --> 00:36:50.570
इसलिए संगमयुग की प्राप्ति सतयुग की प्रालब्ध से भी ज्यादा है ।

20
00:36:56.969 --> 00:37:04.170
अपने भाग्य में खो जाओ ।

21
00:37:07.480 --> 00:37:37.309
कुछ भी होता रहे अपना भाग्य स्मृति में लाओ तो क्या निकलता है ?

22
00:37:38.170 --> 00:37:44.340
वाह मेरा भाग्य !

23
00:37:52.619 --> 00:38:07.369
क्योंकि स्वयं भाग्य दाता आपका बाप है ।

24
00:38:12.570 --> 00:38:30.050
तो भाग्य दाता द्वारा हर एक को अपना भाग्य मिला है ।

25
00:38:31.199 --> 00:38:58.739
जानते हो कि हम इतने भाग्यवान हैं कि कभी-कभी जानते हो सदा नशा रहता है ?

26
00:39:01.820 --> 00:39:40.340
दुनिया वाले तो देखकर पूछते हैं आपको क्या मिला है ?

27
00:39:43.539 --> 00:39:51.139
और आप लोग उत्तर क्या देते हो ?

28
00:39:53.420 --> 00:40:02.849
जो पाना था वह पा लिया ।

29
00:40:03.820 --> 00:40:09.199
पा लिया है हाथ उठाओ ।

30
00:40:09.199 --> 00:40:14.619
पा लिया है अच्छा ।

31
00:40:14.619 --> 00:40:19.139
पा लिया है ?

32
00:40:22.800 --> 00:40:39.940
फलक से कहते हो कोई अप्राप्त वस्तु ही नहीं है ना फखुर ?

33
00:40:42.679 --> 00:40:47.820
और मिला कैसे ?

34
00:40:51.880 --> 00:41:20.050
सिर्फ बाप को जाना माना अपना बनाया तो भाग्य मिल गया ।

35
00:41:33.199 --> 00:42:15.710
इस भाग्य को जितना स्मृति में लाते रहेंगे उतना हर्षित होते रहेंगे ।

36
00:42:18.570 --> 00:42:43.250
भाग्यवान आत्मा का चेहरा सदा हर्षित रहेगा ।

37
00:42:43.250 --> 00:42:52.400
रहेगा नहीं रहता है ।

38
00:42:59.650 --> 00:44:26.340
उनकी दृष्टि उनकी वृत्ति और उनकी प्रवृत्ति सदा सन्तुष्ट आत्मा बन स्वयं भी सन्तुष्ट रहेगी और दूसरों को भी सन्तुष्ट बनायेगी ।

39
00:44:40.170 --> 00:45:05.309
तो आप सबको सन्तुष्टता का नशा रहता है ?

40
00:45:13.940 --> 00:45:32.280
क्योंकि सन्तुष्टता का आधार है सर्व प्राप्ति ।

41
00:45:33.710 --> 00:45:44.570
अप्राप्ति असन्तुष्टता का आधार है ।

42
00:45:49.309 --> 00:45:56.849
तो आप क्या अनुभव करते हो ?

43
00:46:00.969 --> 00:46:15.599
अप्राप्त कोई वस्तु है कि सर्व प्राप्ति है ?

44
00:46:30.570 --> 00:46:35.480
प्राप्ति का नशा है ?

45
00:46:36.219 --> 00:46:44.679
है सदा है या कभी-कभी है ?

46
00:46:49.880 --> 00:47:01.820
वैसे तो यही कहते हो पा लिया जो पाना था ।

47
00:47:03.820 --> 00:47:27.019
तो जहाँ सर्व प्राप्ति है वहाँ असन्तुष्टता का नाम नहीं है ।

48
00:47:40.969 --> 00:48:15.650
तो बापदादा आज देश विदेश कितने देशों से सभी बच्चे आके इकठ्ठे हुए हैं

49
00:48:17.650 --> 00:48:27.019
लेकिन सबसे दूर से आने वाला कौन ?

50
00:48:27.480 --> 00:48:34.849
क्या अमेरिका वाले दूर से आये हैं ?

51
00:48:36.849 --> 00:48:41.710
अमेरिका वाले दूर से आये हैं ना !

52
00:48:41.710 --> 00:48:47.480
और बाप कहाँ से आया है ?

53
00:48:50.800 --> 00:49:03.480
अमेरिका तो इसी लोक में है लेकिन बापदादा कहाँ से आये हैं ?

54
00:49:03.480 --> 00:49:21.539
परमधाम से ब्रह्मा बाप भी सूक्ष्मवतन से आये हैं ।

55
00:49:21.539 --> 00:49:25.769
तो कौन दूर से आया ?

56
00:49:25.769 --> 00:49:31.820
सबसे दूर कौन ?

57
00:49:40.400 --> 00:49:55.880
यह है बाप और बच्चों के प्यार का नजारा ।

58
00:50:03.539 --> 00:50:17.199
आपने कहा मेरा बाबा और बाप ने कहा मेरा बच्चा ।

59
00:50:18.679 --> 00:50:40.340
सिर्फ एक को जानने से कितना वर्सा मिल गया ।

60
00:50:55.880 --> 00:51:09.769
दुनिया वाले सुख के लिए शान्ति के लिए ढूंढ रहे हैं -

61
00:51:11.769 --> 00:51:36.969
कहाँ शान्ति मिलेगी कहाँ सुख मिलेगा और आपकी जीवन ही सुख शान्ति सम्पन्न हो गई ।

62
00:51:51.940 --> 00:52:08.739
अभी बापदादा कहते हैं पूछते हैं बापदादा क्या चाहते हैं ?

63
00:52:10.340 --> 00:52:22.510
तो बापदादा हर बच्चे से यही चाहते हैं

64
00:52:24.510 --> 00:52:41.539
कि हर एक बच्चा सदा स्वराज्य अधिकारी बनके रहे ।

65
00:52:43.539 --> 00:53:08.909
कभी-कभी नहीं क्योंकि अभी के स्वराज्य अधिकार का वरदान

66
00:53:08.909 --> 00:53:29.769
बाप ने इस संगमयुग के लिए पूरा दिया है थोड़ा नहीं कभी-कभी वाला नहीं सदा ।

67
00:53:30.800 --> 00:53:47.710
तो सोचो सदा के लिए स्वराज्य अधिकारी बन रहते हो ?

68
00:53:51.769 --> 00:54:22.570
क्योंकि बापदादा ने सुनाया कि इन सभी कर्मेन्द्रियों के मन बुद्धि संस्कार के भी मालिक हो ।

69
00:54:24.110 --> 00:54:36.449
सबके लिए मेरा शब्द बोलते हो मैं नहीं बोलते हो मेरा बोलते हो ।

70
00:54:38.449 --> 00:54:55.710
तो मन बुद्धि संस्कार मेरा है तो मेरे के ऊपर सदा अधिकार रहता है ।

71
00:54:55.710 --> 00:55:28.050
ऐसे मन बुद्धि संस्कार के ऊपर पूरा ही अधिकारी हो इसको कहा जाता है स्वराज्यधारी ।

72
00:55:29.079 --> 00:55:52.969
जो आर्डर करो उसी प्रमाण यह कार्य करने के लिए निमित्त हैं ।

73
00:55:55.820 --> 00:56:35.369
लेकिन इसके लिए चलते फिरते कार्य करते मालिकपन का नशा होना चाहिए ।

74
00:56:35.369 --> 00:56:41.769
निश्चय और नशा ।

75
00:56:48.280 --> 00:57:15.079
अब तो आत्माओं को मन्सा द्वारा भी सेवा देने का समय है ।

76
00:57:20.280 --> 00:57:47.369
चिल्लाते रहते हे पूर्वज हमें थोड़ा सा सुख शान्ति की किरणें दे दो ।

77
00:57:55.539 --> 00:58:24.510
तो हे पूर्वज दुःखियों की पुकार सुनाई देती है ना !

78
00:58:31.940 --> 00:59:44.170
बापदादा ने इशारा दे दिया है कि कुछ भी आपदा अचानक आनी है इसके लिए सेकण्ड में फुलस्टाप ।

79
00:59:58.909 --> 01:00:12.280
वह प्रैक्टिस भी कर रहे हो

80
01:00:22.170 --> 01:00:49.769
क्योंकि उस समय पुरूषार्थ का समय नहीं होगा अभ्यास करें लगाओ फुलस्टाप और हो जाए आश्चर्य की मात्रा

81
01:00:55.940 --> 01:01:15.710
इसलिए पुरूषार्थ का समय अभी मिला हुआ है ।

82
01:01:19.139 --> 01:01:29.079
उस समय प्रैक्टिकल करने का समय है

83
01:01:35.420 --> 01:02:05.940
तो अभी से इस अभ्यास को कर भी रहे हैं बापदादा रिजल्ट देखते हैं अटेन्शन में है कर भी रहे हैं

84
01:02:07.369 --> 01:02:27.309
लेकिन और भी अटेन्शन को अण्डरलाइन करो ।

85
01:02:48.849 --> 01:02:55.250
देखो पुरूषार्थ कितना सहज है

86
01:02:55.769 --> 01:03:24.679
मैं भी बिन्दी लगाना भी बिन्दी है सिर्फ अटेन्शन देना है ।

87
01:03:36.050 --> 01:04:39.820
बापदादा विशेष बच्चों को सौगात देते हैं बच्चे मैं आपके सदा साथ हूँ ।

88
01:04:51.019 --> 01:05:10.280
बाबा कहा और बच्चों के लिए बाप सदा हाजिर है ।

89
01:05:11.019 --> 01:05:30.619
जो कहा गया है हजूर हाजर है सर्वव्यापी नहीं है लेकिन बच्चों के आगे हजूर हाजर है ।

90
01:05:44.849 --> 01:06:01.199
तो सदा विजयी बनना जहाँ भगवान साथ है वहाँ विजयी बनना क्या मुश्किल है ।

91
01:06:06.219 --> 01:06:21.250
विजय आपका जन्म सिद्ध अधिकार है ।

92
01:06:38.800 --> 01:07:00.170
सिर्फ मेरा बाबा कहा तो विजयी है ही ।

93
01:07:08.510 --> 01:07:48.050
इसलिए सदा विजयी बनना जो याद में रहता उसके लिए अति सहज है ।

94
01:07:48.050 --> 01:07:51.480
मुश्किल नहीं ।

95
01:07:51.480 --> 01:07:59.650
जहाँ भगवान है वहाँ विजय है ही ।

96
01:08:03.650 --> 01:08:36.050
तो आज बापदादा सभी बच्चों को देख खुश हो रहे हैं

97
01:08:37.079 --> 01:08:55.600
कि कितने स्नेह से कौन से साधन से आये हैं ?

98
01:08:55.600 --> 01:09:20.170
ट्रेन में या प्लेन में वह तो शरीर के द्वारा पहुंच गये हैं लेकिन दिल से तो प्यार आपको यहाँ लाया है ।

99
01:09:44.909 --> 01:09:54.569
है हिम्मत आपकी मदद बाप की है ही ।

100
01:10:02.680 --> 01:10:58.800
अभी बापदादा यही चाहते हैं कि हर बच्चा हर कर्म में अपने स्वराज्य की सीट पर स्थित रहे ।

101
01:11:06.340 --> 01:11:09.479
अच्छा ।

102
01:11:09.479 --> 01:11:17.420
आज पहले बारी कौन आये हैं वह हाथ उठाओ ।

103
01:11:20.850 --> 01:11:26.220
खड़े हो जाओ ।

104
01:11:44.510 --> 01:11:48.850
बहुत हैं ।

105
01:11:52.510 --> 01:12:03.539
अच्छा जैसे पहले बारी आये हो वैसे पहला नम्बर जाना है ना ।

106
01:12:03.539 --> 01:12:08.399
जाना है ?

107
01:12:13.770 --> 01:12:43.819
बाबा का वरदान है कि जो हिम्मत रखेगा

108
01:12:47.539 --> 01:13:22.000
उसको बाप की मदद भी मिलेगी और हिम्मत से जितना भी आगे बढ़ने चाहो वह चांस है

109
01:13:25.420 --> 01:13:32.340
क्योंकि टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है ।

110
01:13:37.310 --> 01:13:58.800
याद में रहो और जो प्राप्त हुआ है उससे औरों की सेवा करो ।

111
01:13:59.819 --> 01:14:31.710
जितनी सेवा करेंगे उतनी दुआयें मिलेंगी और वह दुआयें आपको आगे बढ़ाती रहेंगी ।

112
01:14:36.050 --> 01:14:48.170
सन्देश देते जाओ बाकी हर एक की तकदीर ।

113
01:14:48.170 --> 01:14:54.000
लेकिन आप सन्देश दे दो ।

114
01:14:55.649 --> 01:15:02.279
पुण्य अपना जमा करते रहो ।

115
01:15:03.539 --> 01:15:15.819
तो पुण्य आपको आगे बढ़ाता रहेगा ।

116
01:15:18.170 --> 01:15:21.770
अच्छा है ।

117
01:15:23.250 --> 01:15:32.279
अच्छा यह कराची से आये हैं क्या !

118
01:15:35.020 --> 01:15:42.909
तो देखो आदि स्थान से आये हो ।

119
01:15:43.710 --> 01:15:56.170
जहाँ स्थापना हुई उस आदि स्थान से आये हो ।

120
01:16:01.420 --> 01:16:12.399
बापदादा का यही वरदान है

121
01:16:13.479 --> 01:16:52.739
कि सदा आदि रत्न बन जो अनुभव किया है सदा खुश रहने का सदा डबल लाइट रहने का वह औरों को भी अनुभव कराते रहो ।

122
01:16:52.739 --> 01:17:06.340
बाकी बापदादा ने देखा निश्चय अचल है ।

123
01:17:06.340 --> 01:17:10.449
आगे बढ़ सकते हो ।

124
01:17:10.449 --> 01:17:31.079
बढ़ भी रहे और बढ़ भी सकते हो जितना चाहो उतना आगे बढ़ने का वरदान ले सकते हो ।

125
01:17:33.079 --> 01:17:38.279
अच्छा । यह साथ में आये हैं ।

126
01:17:38.279 --> 01:17:41.250
खुश हो ना !

127
01:17:41.250 --> 01:17:45.880
खुशी यहाँ से लेके जाना ।

128
01:17:46.449 --> 01:17:56.619
इतनी खुशी लेके जाना जो कभी खुशी कम नहीं हो ।

129
01:17:57.770 --> 01:18:06.909
और आपको खुश देख करके और भी खुश हो जायेंगे ।

130
01:18:06.909 --> 01:18:10.050
तो क्या बांटेंगे जाके ।

131
01:18:10.050 --> 01:18:16.000
कहाँ भी जाते हैं तो बांटते हैं ना ।

132
01:18:16.000 --> 01:18:19.819
तो आप क्या बांटेंगे ?

133
01:18:19.819 --> 01:18:26.619
खुशी बांटना अविनाशी खुशी ।

134
01:18:27.310 --> 01:18:39.479
जिसको खुशी प्राप्त होगी वह भी सदा खुश हो जायेंगे ।

135
01:18:41.479 --> 01:18:51.140
जो भी आयेंगे बापदादा तो खुश है ही

136
01:18:51.539 --> 01:19:15.479
लेकिन आप भी खुशी लेके जा रहे हो खुशी ले जा रहे हो इतनी खुशी जमा की ?

137
01:19:15.479 --> 01:19:20.510
की है ना ।

138
01:19:21.770 --> 01:19:25.880
तो खूब बांटना ।

139
01:19:27.880 --> 01:19:39.710
अपना अनुभव सुनायेंगे ना तो सुनाना हम कहाँ से आये हैं ।

140
01:19:39.710 --> 01:19:52.340
खुशी के स्थान से आये हैं आपके लिए भी खुशी लाये हैं ।

141
01:19:55.819 --> 01:19:59.250
अच्छा है ।

142
01:20:00.170 --> 01:20:12.170
बहुत आते हैं आजकल आधा क्लास तो पहले बारी वालों का होता है ।

143
01:20:14.170 --> 01:20:20.850
आप सभी पहले बारी आये हो अच्छा ।

144
01:20:21.819 --> 01:20:24.619
बहुत अच्छा ।

145
01:20:24.619 --> 01:20:53.020
बापदादा सारे परिवार के साथ आपको अपने घर में पहले बारी आने की मुबारक दे रहे हैं ।

146
01:21:03.479 --> 01:21:28.399
बस यह याद रखना मेरा बाबा मेरा बाबा भूलना नहीं क्योंकि बाबा से वर्सा मिलता है ।

147
01:21:28.399 --> 01:21:36.850
जो अप्राप्त वस्तु है वह प्राप्त होती है ।

148
01:21:38.569 --> 01:21:41.539
अच्छा ।

149
01:21:42.340 --> 01:21:53.819
सब खुश हो रहे हैं हमारे भाई अपने घर में आ गये ।

150
01:21:53.819 --> 01:22:33.079
( ताली बजाओ ) अच्छा ।

151
01:23:10.170 --> 01:24:22.109
सेवा का टर्न - ईस्टर्न जोन ( आसाम उड़ीसा बंगाल बिहार ) नेपाल तामिलनाडु बांगला देश ( टोटल 17 हजार आये हैं ) सभी जो सेन्टर पर रहने वाले हैं वह खड़े रहो बाकी बैठ जाओ ।

152
01:25:19.600 --> 01:25:24.850
बहुत अच्छा ।

153
01:25:28.399 --> 01:25:40.449
यह जोन सबसे बड़ा जोन है ।

154
01:25:46.449 --> 01:25:59.600
और एडीशन वाले जोन वह भी कम नहीं हैं

155
01:25:59.600 --> 01:26:30.909
इसलिए अभी जो भी टीचर्स आई हैं या सेन्टर पर रहने वाले आये हैं

156
01:26:31.539 --> 01:26:46.510
उन्हों को विशेष बापदादा मुबारक दे रहे हैं ।

157
01:27:01.250 --> 01:27:20.680
सेवाधारी अपनी सेवा का चैतन्य चित्र साथ में लाये हैं ।

158
01:27:25.079 --> 01:27:42.109
बापदादा खुश है क्योंकि देखा गया है

159
01:27:42.109 --> 01:28:07.539
कि हर एक ने अपने-अपने स्थान में वृद्धि करने का लक्ष्य अच्छा रखा है ।

160
01:28:09.539 --> 01:28:32.619
मेहनत तो की है लेकिन मेहनत का फल भी मिल रहा है इसकी मुबारक है ।

161
01:28:38.800 --> 01:28:44.109
अभी क्या करना है ?

162
01:28:47.020 --> 01:28:57.420
अभी जो बापदादा ने पहले भी कहा है

163
01:29:02.279 --> 01:29:31.250
कि वारिस क्वालिटी और ऐसे माइक जिनका प्रभाव दुनिया पर पड़ता है

164
01:29:31.250 --> 01:30:04.619
ऐसे माइक और वारिस जितना बड़ा जोन है इतने ही बड़े दोनों ही प्रकार के निकालो ।

165
01:30:08.050 --> 01:30:42.050
किसी भी वर्ग वाले हों लेकिन आपका बड़ा जोन है तो बड़े जोन से मिलकर ऐसी संख्या मधुबन घर में आनी चाहिए ।

166
01:30:44.569 --> 01:31:21.310
अभी ऐसे तैयार करो जो वह आपके जोन का नम्बर सामने आवे ।

167
01:31:21.770 --> 01:31:36.279
करते तो होंगे यह बाप जानता है कि जो भी निमित्त हैं वह सेवा के बिना रह नहीं सकते

168
01:31:36.279 --> 01:31:52.220
लेकिन यहाँ तक पहुंचें यह रिजल्ट बापदादा देखने चाहते हैं ।

169
01:31:52.220 --> 01:32:13.140
बाकी आप तो हो ही अच्छे ते अच्छे क्योंकि बाप के गद्दी के मालिक बन गये ।

170
01:32:13.140 --> 01:32:21.020
बाबा टीचर्स को गुरूभाई कहते हैं ।

171
01:32:24.970 --> 01:32:45.649
तो हे गुरूभाई अभी हर एक स्थान से आने चाहिए ।

172
01:32:54.109 --> 01:32:58.109
ठीक है ना !

173
01:32:59.310 --> 01:33:11.369
अच्छा है पुरूषार्थ कर रहे हो और सफलता मिलनी ही है ।

174
01:33:11.369 --> 01:33:17.310
कोई बड़ी बात नहीं है ।

175
01:33:22.109 --> 01:33:37.369
कोई बड़ा प्रोग्राम करो जिससे कनेक्शन बढ़े ।

176
01:33:39.369 --> 01:33:53.710
आजकल बापदादा जो भी जोन सेवा कर रहे हैं

177
01:33:54.909 --> 01:34:20.000
उनकी रिजल्ट सुनते हैं तो सहज ही वृद्धि भी हो रही है और माइक भी तैयार हो रहे हैं

178
01:34:24.220 --> 01:34:41.310
इसलिए इस जोन में भी सफलता हुई पड़ी है ।

179
01:34:42.850 --> 01:34:48.510
अच्छा ।

180
01:34:59.199 --> 01:35:56.619
डबल विदेशी :- बापदादा को यह बहुत अच्छा लगता है

181
01:35:58.170 --> 01:36:22.680
जो मधुबन में आके आपस में भी मिलते बाप से भी मिलते और सर्विस की लेन देन भी करते

182
01:36:26.220 --> 01:36:46.680
बाबा ने पहले भी कहा है कि यह साधन बापदादा को अच्छा लगता है ।

183
01:36:53.420 --> 01:36:58.220
कितने देशों से आये हैं ?

184
01:36:59.020 --> 01:37:34.569
( 76 देशों से आये हैं ) तो यहाँ मधुबन में आके आप कितने देशों से मिलते हैं ?

185
01:37:35.939 --> 01:37:51.479
इण्डिया के देश जितने भी आये हैं उतनों को नाम लो तो बहुत हो जायेंगे ।

186
01:37:52.050 --> 01:38:05.939
तो आपसे इण्डिया वाले खुश हो जाते और आप इण्डिया वालों को देखके खुश हो जाते ।

187
01:38:06.569 --> 01:38:14.680
दोनों का मिलन अच्छा हो जाता है ।

188
01:38:17.770 --> 01:38:31.600
आपस में मिलना अर्थात् उमंग भरना ।

189
01:38:33.079 --> 01:38:55.479
और तो कहाँ इतना बड़ा परिवार इकठ्ठा देख नहीं सकते मधुबन में ही इतना बड़ा परिवार देखते हो ।

190
01:38:55.479 --> 01:38:59.250
तो दिल में क्या आता है ?

191
01:38:59.250 --> 01:39:10.619
वाह बाबा और वाह मेरा ईश्वरीय परिवार !

192
01:39:21.140 --> 01:39:32.739
और बापदादा को कितनी खुशी होती है अपने बच्चों को देख ।

193
01:39:33.939 --> 01:39:53.649
वैसे तो अमृतवेले बापदादा सभी तरफ चक्र लगाते हैं उनके लिए चक्र लगाना क्या बड़ी बात है ।

194
01:39:57.140 --> 01:40:07.310
और बापदादा ने यह भी कह दिया है

195
01:40:07.819 --> 01:40:24.510
कि चार बजे के मिलन की विशेषता यह भी है

196
01:40:24.510 --> 01:40:42.510
कि 4 बजे बापदादा सभी बच्चों को सहज ही वरदान देते हैं ।

197
01:40:43.079 --> 01:40:56.170
वरदान दाता का पार्ट अमृतवेले होता है विशेष ।

198
01:40:57.420 --> 01:41:13.600
जो भी वरदान चाहिए वह बापदादा दे देते हैं ।

199
01:41:13.600 --> 01:41:22.050
ट्रायल करके देखना ।

200
01:41:29.939 --> 01:41:56.739
लेकिन आप सभी भी वरदान लेने के लिए अलर्ट रहना ।

201
01:41:59.600 --> 01:42:16.970
अगर अलर्ट नहीं रहे तो बापदादा चक्र लगाके चला जायेगा और आप सोचते रहेंगे ।

202
01:42:23.600 --> 01:42:54.909
इसलिए अमृतवेले का महत्व देते तो हैं लेकिन और अटेन्शन देना ।

203
01:42:59.250 --> 01:43:18.800
बापदादा ने देखा है कि समय अनुसार सेवा भी बढ़ रही है

204
01:43:20.800 --> 01:43:49.649
और सेवा के कारण बाप से वरदान लेना उससे दूर रह नहीं सकते ।

205
01:43:55.369 --> 01:44:29.880
बाकी डबल फारेनर्स मैजारिटी पुरूषार्थ करते भी हैं

206
01:44:35.079 --> 01:44:54.569
फिर भी अटेन्शन को अन्डरलाइन करना ।

207
01:45:00.050 --> 01:45:32.170
बाकी बापदादा मधुबन में कैसे भी पहुंच जाते हो उसकी विशेष सभी बच्चों को मुबारक दे रहे हैं ।

208
01:45:37.649 --> 01:46:01.880
बापदादा ने सुना कि जो बापदादा ने संस्कार के ऊपर इशारा दिया है

209
01:46:02.569 --> 01:46:46.000
उसके ऊपर समझते हैं कि हमें करना ही है और करने के लिए रोज अमृतवेले जैसे स्वमान रखते हैं

210
01:46:47.250 --> 01:47:32.000
उसके साथ-साथ कोई एक भिन्न-भिन्न प्रकार से एक संस्कार के ऊपर अटेन्शन दो आज के दिन इस संस्कार के ऊपर विशेष अटेन्शन देना है

211
01:47:32.340 --> 01:47:50.800
और फिर रात्रि को जब बापदादा को अपने सारे दिन का चार्ट देते हो

212
01:47:51.079 --> 01:48:13.420
उस समय उस संस्कार की रिजल्ट भी विशेष सुनाओ तो विशेष अटेन्शन हो जायेगा

213
01:48:13.880 --> 01:48:24.449
किसी न किसी संस्कार के ऊपर अटेन्शन रखना है

214
01:48:24.619 --> 01:48:45.600
तो जैसे याद के ऊपर अटेन्शन देते हो उसके साथ-साथ उसी समय यह भी रिजल्ट बापदादा को दो ।

215
01:48:47.600 --> 01:49:15.310
अगर मानो आप चाहते हो लेकिन उस दिन आपके सामने कोई संस्कार मिटाने का कार्य नहीं हुआ

216
01:49:17.079 --> 01:49:44.569
तो अपने आपको बाप की मुबारक देना और रोज ऐसे बाप की मुबारक विशेष इस संस्कार प्रति लेते जाना

217
01:49:44.569 --> 01:49:54.619
तो संस्कार कार्य में आने में कमी पड़ती जायेगी ।

218
01:49:58.109 --> 01:50:19.479
तो जैसे योग के बारे में चेक करते हो वैसे संस्कार के लिए रोज आता नहीं है कभी-कभी आता है

219
01:50:20.909 --> 01:50:33.250
जो पुरूषार्थी हैं उनका बाईचांस पेपर आता है बाकी रोज नहीं आता है ।

220
01:50:34.569 --> 01:50:50.109
लेकिन चेकिंग रोज होगी तो यह भी अटेन्शन टेन्शन को खत्म करता जायेगा ।

221
01:50:54.510 --> 01:51:20.449
क्योंकि बापदादा ने देखा है फॉरेन वालों में से कोई-कोई बच्चे कोई कार्य शुरू करते हैं तो अटेन्शन देते हैं ।

222
01:51:21.020 --> 01:51:31.020
तो अटेन्शन देने वाले ही मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं ।

223
01:51:31.020 --> 01:51:36.970
बाबा का भी वरदान है ।

224
01:51:38.170 --> 01:51:42.510
समझा ।

225
01:51:42.510 --> 01:52:05.420
अभी इसके पीछे लग जायेंगे ना रोज चेकिंग करेंगे ना रिजल्ट तो संस्कार स्वयं ही ढीला हो जायेगा ।

226
01:52:10.220 --> 01:52:40.109
और जो बापदादा चाहता है कि संस्कार की सबजेक्ट में नम्बरवन जाओ जो संस्कार चाहते हो वही कार्य में लगे।

227
01:52:45.250 --> 01:52:48.399
हो जायेगा ।

228
01:52:48.399 --> 01:52:55.369
अटेन्शन में आया है ना तो हो जायेगा ।

229
01:52:56.220 --> 01:53:11.880
लेकिन अटेन्शन देना ऐसे नहीं हो जायेगा लेकिन अटेन्शन देना पड़ेगा ।

230
01:53:13.880 --> 01:53:43.250
संगठन में ही यह संस्कार निकलते हैं क्यों ?

231
01:53:43.479 --> 01:53:59.770
आपके चित्रों में जो पूजा करते हैं वह आपके संस्कार कितने अच्छे गाते हैं ।

232
01:54:04.170 --> 01:54:11.369
तो बने हैं तभी तो वर्णन करते हैं ।

233
01:54:15.020 --> 01:54:29.649
अपना देवताई चित्र इमर्ज करो क्या गाते हैं ?

234
01:54:34.109 --> 01:54:42.109
ऐसे देवता तो बनना ही है ना ।

235
01:54:48.279 --> 01:55:08.850
अच्छा । बाकी सब डबल विदेशी पुरूषार्थ में सफलता का अनुभव करते रहते हैं ना !

236
01:55:08.850 --> 01:55:11.250
करते हैं ?

237
01:55:11.250 --> 01:55:17.539
हाथ उठाओ जो सफलता अनुभव करते हैं ।

238
01:55:17.539 --> 01:55:19.880
वाह !

239
01:55:19.880 --> 01:55:26.619
हाथ तो अच्छे उठा रहे हैं ।

240
01:55:29.710 --> 01:55:39.140
तो लक्ष्य रखेंगे अभी इसके पीछे अटेन्शन देना ही है ।

241
01:55:39.140 --> 01:55:45.479
इसमें भी नम्बर लेना ही है ।

242
01:55:47.479 --> 01:56:01.420
तो आपको देख औरों को भी उमंग आयेगा क्योंकि आप निमित्त हो ना ।

243
01:56:01.420 --> 01:56:19.770
और निमित्त वालों को बापदादा की विशेष मदद भी मिलती है ।

244
01:56:27.710 --> 01:56:42.569
बाकी बाबा खुश है कि सेन्टर्स वृद्धि को प्राप्त होते रहते हैं ।

245
01:56:43.199 --> 01:56:50.000
पुरूषार्थ की तरफ अटेन्शन है

246
01:56:50.000 --> 01:57:17.369
लेकिन अभी परिवर्तन के निमित्त बनने वाले बनो तो आपको देख औरों को भी परिवर्तन शक्ति का उमंग आयेगा ।

247
01:57:19.819 --> 01:57:39.600
बाकी बापदादा खुश है कि पुरूषार्थ में नम्बरवार तो होते ही हैं वह तो अन्डरस्टुड है

248
01:57:39.600 --> 01:57:52.170
लेकिन पुरूषार्थ की तरफ अटेन्शन है और बढ़ाना है ।

249
01:57:55.369 --> 01:58:08.399
बाकी बापदादा की रोज यादप्यार तो मिलती रहती है ।

250
01:58:08.399 --> 01:58:32.279
देखो घर बैठे भी बापदादा की यादप्यार एक दिन भी मिस नहीं होता अगर रोज विधिपूर्वक मुरली पढ़ते हैं तो ।

251
01:58:34.279 --> 01:58:39.710
एक दिन भी यादप्यार मिस नहीं करते ।

252
01:58:39.710 --> 01:58:42.449
मिलती है ना !

253
01:58:42.449 --> 01:58:44.449
मिलती है ?

254
01:58:44.449 --> 01:58:48.340
यादप्यार मिलती है रोज ।

255
01:58:50.680 --> 01:58:55.479
सभी को मिलती है ना ?

256
01:59:00.399 --> 01:59:08.850
यह है बापदादा के प्यार की निशानी ।

257
01:59:13.649 --> 01:59:22.619
मुरली मिस तो यादप्यार भी मिस ।

258
01:59:23.939 --> 01:59:41.020
सिर्फ मुरली नहीं मिस की लेकिन बापदादा का यादप्यार वरदान सब मिस किया ।

259
01:59:46.109 --> 02:00:07.020
मुरली तो पढ़ भी लेंगे लेकिन जो समय फिक्स है बापदादा की यादप्यार लेने का वह तो मिस हुआ ना ।

260
02:00:16.739 --> 02:00:24.739
तो उमंग है इस पर बापदादा खुश भी है ।

261
02:00:27.819 --> 02:00:36.170
अच्छा मुरली मिस करने वाले हैं ?

262
02:00:36.170 --> 02:00:48.170
डबल फॉरेनर्स में हैं कोई है जो मुरली मिस करता हो ?

263
02:00:48.680 --> 02:00:52.850
कारण से ?

264
02:00:53.369 --> 02:00:56.279
नहीं है ।

265
02:00:56.279 --> 02:00:59.479
नहीं मिस करते ।

266
02:00:59.479 --> 02:01:04.340
एक ने उठाया है ।

267
02:01:09.079 --> 02:01:15.600
अभी मिस नहीं करना मुरली मिस नहीं करना ।

268
02:01:15.600 --> 02:01:24.739
चाहे फोन द्वारा सुनो ।

269
02:01:27.880 --> 02:01:36.850
पढ़ नहीं सकते हैं तो कैसे भी सुनो जरूर ।

270
02:01:36.850 --> 02:01:41.600
हाजिरी जरूर लगाओ ।

271
02:01:46.279 --> 02:01:48.909
अच्छा ।

272
02:01:48.909 --> 02:01:58.050
बाकी जो भी सभा में आये हैं नये भी हैं पुराने भी हैं

273
02:01:58.050 --> 02:02:09.770
तो यह पक्का पक्का पक्का नोट करो मुरली नहीं मिस करनी है ।

274
02:02:14.619 --> 02:02:34.800
क्योंकि बाप रोज परमधाम से आते हैं कितना दूर से आते हैं बच्चों के लिए आता है ना !

275
02:02:36.800 --> 02:02:47.819
जैसे बाप मुरली मिस नहीं करते ऐसे बच्चों को भी मुरली मिस नहीं करना है ।

276
02:02:51.369 --> 02:02:56.399
अच्छा ।

277
02:03:10.050 --> 02:03:37.310
अभी जो मधुबन में आता है ना तो जैसे फार्म भरते हैं उसमें यह भी लिखो कि मुरली रोज सुनी या कितने दिन मिस किया ?

278
02:03:44.510 --> 02:03:47.310
मंजूर है ?

279
02:03:49.649 --> 02:03:56.510
जिसको मंजूर है वह हाथ उठाओ ।

280
02:04:06.850 --> 02:04:13.710
मधुबन वाले भी हाथ उठाओ ।

281
02:04:16.399 --> 02:04:27.819
किसी भी कारण से मुरली मिस नहीं करनी है ।

282
02:04:27.819 --> 02:04:47.539
जैसे खाना नहीं मिस करते हो तो यह भी भोजन है ना ।

283
02:04:49.539 --> 02:04:57.020
वह शरीर का भोजन यह आत्मा का भोजन ।

284
02:05:09.310 --> 02:05:16.220
अच्छा लगा ।

285
02:05:18.399 --> 02:05:26.109
जो नये भी आये हैं आने को तो मिला है ना ।

286
02:05:26.109 --> 02:05:32.399
उन्हों को भी यह नियम पालन करना है ।

287
02:05:32.970 --> 02:05:40.000
जैसे और नियम हैं वैसे यह भी नियम है ।

288
02:05:40.000 --> 02:05:49.819
ब्राह्मण माना मुरली सुनने वाला सेवा करने वाला ।

289
02:06:00.399 --> 02:06:03.649
अच्छा ।

290
02:06:04.279 --> 02:06:14.340
जो भी जोन आये हैं वह एक-एक अलग उठाओ ।

291
02:06:27.140 --> 02:06:50.800
तामिलनाडु :- यह सेवा के लिए आये हैं ।

292
02:06:52.800 --> 02:06:54.800
बहुत अच्छा ।

293
02:06:54.800 --> 02:07:04.279
सेवा माना मेवा खाना ।

294
02:07:34.850 --> 02:07:47.079
नेपाल :- बहुत अच्छा ।

295
02:07:47.079 --> 02:08:04.170
सेवा के लिए इतने आना यह बापदादा को बहुत अच्छा लगा ।

296
02:08:07.140 --> 02:08:19.479
सेवा में आना अर्थात् यज्ञ से प्यार है ।

297
02:08:20.220 --> 02:08:45.199
जो भी आये हैं सबको बापदादा यही मुबारक देते हैं कि सभी यज्ञ स्नेही यज्ञ सहयोगी आत्मायें हैं ।

298
02:08:55.939 --> 02:09:18.800
बंगाल :- अच्छा है बापदादा ने देखा कि जो भी सभी आये हैं

299
02:09:18.800 --> 02:09:30.000
वह अच्छी संख्या में अच्छे उमंग उत्साह में आये हैं ।

300
02:09:30.000 --> 02:09:42.220
सदा यज्ञ स्नेही और यज्ञ सेवक बनके ही रहना ।

301
02:09:42.220 --> 02:09:57.079
चाहे तन से चाहे मन से चाहे धन से यज्ञ किसने रचा ?

302
02:09:57.079 --> 02:09:59.479
बाप ने रचा ।

303
02:09:59.479 --> 02:10:02.109
किसके लिए रचा ?

304
02:10:02.109 --> 02:10:06.170
बच्चों के लिए रचा ।

305
02:10:06.170 --> 02:10:14.619
अगर आप ब्राह्मण नहीं होते तो यज्ञ नहीं रचा जाता ।

306
02:10:15.819 --> 02:10:22.449
तो सभी ने सेवा अच्छी की है ना ।

307
02:10:25.819 --> 02:10:33.479
निमित्त बने हुए द्वारा सर्टीफिकेट भी मिल रहा है सभी को ।

308
02:10:33.479 --> 02:10:43.199
बहुत अच्छी सेवा की है और आगे भी करते रहेंगे अमर हैं ।

309
02:10:46.050 --> 02:11:19.649
बिहार :- नाम ही बिहार है देखो नाम कितना अच्छा है ।

310
02:11:19.649 --> 02:11:28.510
बिहार माना जहाँ सदा बहार है ।

311
02:11:32.680 --> 02:11:36.569
अच्छा ।

312
02:11:37.819 --> 02:12:15.770
उड़ीसा :- हर एक ने संख्या अच्छी लाई है ।

313
02:12:19.770 --> 02:12:37.020
बापदादा जो भी जोन आये हैं सभी की संख्या देख करके खुश है कि सेवा से प्यार है ।

314
02:12:40.970 --> 02:12:50.220
सदा आगे बढ़ते रहना बढ़ रहे हो बढ़ते रहना ।

315
02:12:55.939 --> 02:13:39.079
आसाम :- बापदादा ने देखा कि एक दो से सब आगे हैं ।

316
02:13:39.079 --> 02:13:49.539
जो भी आये हैं एक दो से आगे उमंग उत्साह वाले हैं ।

317
02:13:52.000 --> 02:14:12.279
सेवा का पुण्य तो पुण्य कमाने वाली आत्मायें हो क्योंकि सेवा से दुआयें मिलती हैं ।

318
02:14:13.250 --> 02:14:21.420
तो सेवा नहीं की लेकिन पुण्य जमा करके जा रहे हो ।

319
02:14:22.619 --> 02:14:27.140
अच्छा ।

320
02:14:27.140 --> 02:14:43.649
बांगला देश :- थोड़े हैं ।

321
02:14:54.340 --> 02:15:20.399
जितनों ने भी सेवा की उतनों ने यह यज्ञ स्नेह का यज्ञ सेवा का अपने ऊपर स्टैम्प लगा दिया ।

322
02:15:21.880 --> 02:15:28.050
टाइटल ही यह है यज्ञ स्नेही ।

323
02:15:29.420 --> 02:15:32.850
अच्छा ।

324
02:15:35.600 --> 02:15:39.710
बहुत अच्छा किया ।

325
02:15:40.399 --> 02:16:15.140
झारखण्ड :- भले थोड़े हैं लेकिन सेवा से तो प्यार है ना ।

326
02:16:15.140 --> 02:16:21.539
तो जितने भी हैं उन्होंने अपना भविष्य बनाया ।

327
02:16:21.539 --> 02:16:25.310
बनाते रहना ।

328
02:16:25.310 --> 02:16:34.799
जितनी यज्ञ सेवा करेंगे उतना जमा करेंगे ।

329
02:16:35.709 --> 02:16:41.649
ज्यादा सेवा ज्यादा जमा ।

330
02:16:42.739 --> 02:16:46.799
अच्छा ।

331
02:17:02.219 --> 02:17:12.620
अभी आप तो सम्मुख बैठे हो

332
02:17:12.620 --> 02:17:36.620
लेकिन आपसे ज्यादा संख्या बापदादा के आगे भिन्न-भिन्न स्थानों की बापदादा देख रहे हैं ।

333
02:17:37.309 --> 02:17:47.370
आप सम्मुख हो वह दूर बैठे भी दिल में समाये हुए हैं ।

334
02:17:47.370 --> 02:17:57.200
आप तो हो ही तब तो चलके पहुंचे हो ना ।

335
02:17:57.770 --> 02:18:13.309
लेकिन बापदादा ने देखा कि दूर बैठे भी प्यार से सुनते हैं ।

336
02:18:13.770 --> 02:18:18.909
और देखते भी सब अच्छा हैं ।

337
02:18:18.909 --> 02:18:30.000
बापदादा ने शुरू में कहा था यह साइंस आपके काम में आयेगी ।

338
02:18:30.000 --> 02:18:44.850
तो देखो दूर बैठे भी नजदीक अनुभव करने वाला यह साइंस का साधन है ।

339
02:18:47.600 --> 02:19:06.450
विनाश में भी मदद करेगी वह भी जरूरी है और आपको यहाँ भी ब्राह्मण लाइफ में गोल्डन चांस दिया है ।

340
02:19:07.250 --> 02:19:13.600
तो साइंस वाले भी आपके मददगार हैं ।

341
02:19:13.600 --> 02:19:19.200
उन्हों को बुरा नहीं समझना यह क्या करते हैं ।

342
02:19:19.200 --> 02:19:21.770
नहीं ।

343
02:19:21.770 --> 02:19:28.399
जिसका जो काम है वह तो करना पड़ेगा ।

344
02:19:30.399 --> 02:19:49.600
बाकी साइंस भी आपके मददगार है भी और आगे भी बनती रहेगी ।

345
02:19:53.540 --> 02:19:59.079
अच्छा ।

346
02:19:59.079 --> 02:20:18.000
यह जो मीटिंग्स वगैरा करने वाले सभी आगे बैठे हैं विदेश की टीचर्स हैं निमित्त हैं ।

347
02:20:18.000 --> 02:20:35.200
बापदादा सुनते सब हैं चक्र जरूर लगाते हैं और चक्र लगाते सार समझ जाते हैं ।

348
02:20:35.200 --> 02:20:51.250
जिस समय आपकी आवश्यक बात फाइनल की होती है उस समय बापदादा चक्र लगाते सुन लेता है

349
02:20:51.600 --> 02:21:02.000
और मुबारक भी देते हैं लेकिन आप बिजी बहुत होते हो ।

350
02:21:06.909 --> 02:21:11.600
बाकी बापदादा को अच्छा लगता है

351
02:21:11.600 --> 02:21:23.540
क्योंकि छोटे बड़े सेन्टर विस्तार से फैले हुए हैं और भाषायें भी भिन्न-भिन्न हैं

352
02:21:24.170 --> 02:21:32.909
तो सारे फॉरेन को भिन्न-भिन्न इण्डिया में भी भाषायें तो हैं

353
02:21:32.909 --> 02:21:52.000
लेकिन फॉरेन में भी भिन्न-भिन्न भाषायें होते हुए भी सबको मिलाके एक कर रहे हैं और हो रहे हैं

354
02:21:52.969 --> 02:22:00.969
सबको अच्छा भी लगता है इसलिए बापदादा खुश है ।

355
02:22:00.969 --> 02:22:20.450
आओ मीटिंग करो और सबको एक नियम में एक रसम में एक जैसा करो ।

356
02:22:20.909 --> 02:22:42.450
बापदादा को एक बात की खुशी है तो पहले कल्चर कल्चर है इण्डियन कल्चर है यह आवाज आता था लेकिन अभी यह आवाज नहीं हैं ।

357
02:22:42.450 --> 02:22:56.000
सभी ब्राह्मण कल्चर के हो गये हैं इसलिए मुबारक हो । मेहनत की है ।

358
02:23:05.020 --> 02:23:17.540
इण्डिया वाले भी बहुत कोन्फेरेंस करते हैं और मीटिंग्स भी करते हैं ।

359
02:23:25.540 --> 02:23:33.940
बापदादा सभी बच्चों से खुश है

360
02:23:33.940 --> 02:23:55.370
लेकिन रोज रात्रि को अपने को बापदादा का यादप्यार देना और मुबारक देना

361
02:23:55.370 --> 02:24:10.170
बापदादा की मुबारक रोज अपने को देना बापदादा देता है और आप अपने आपको देना ।

362
02:24:10.170 --> 02:24:29.879
बापदादा छोड़ते नहीं हैं चाहे इण्डिया है चाहे विदेश है जैसे अमृतवेले चक्र लगाते हैं ऐसे रात को गुडनाइट भी सबसे करते हैं।

363
02:24:34.969 --> 02:24:41.600
इसलिए अपने आपको मुबारक देके सोना ।

364
02:24:50.620 --> 02:24:54.799
अच्छा ।

365
02:24:54.799 --> 02:25:27.649
अभी सभी तरफ के बच्चों को बापदादा यादप्यार के साथ मुबारक भी दे रहे हैं ।

366
02:25:31.370 --> 02:25:45.879
सदा उमंग उत्साह में आगे बढ़ भी रहे हो और बढ़ते रहना ।

367
02:25:45.879 --> 02:25:59.020
कभी अपना उमंग-उत्साह किसी भी कारण से किसी भी बात से कम नहीं करना ।

368
02:25:59.020 --> 02:26:15.139
बात बात हो जाती है लेकिन पुरूषार्थ और बाप का प्यार वह अपना है

369
02:26:15.139 --> 02:26:33.540
इसीलिए कभी भी अपने बुद्धि को बाप के बिना और कोई बातों में बिजी नहीं करना ।

370
02:26:33.540 --> 02:26:49.879
बाप और बाप की मुरली और बाप द्वारा सर्विस जो मिली है वह सर्विस करते रहना ।

371
02:26:56.620 --> 02:27:00.739
अच्छा ।

372
02:27:01.479 --> 02:27:09.540
अभी क्या कहें साथ तो रहना है ना ।

373
02:27:10.909 --> 02:27:16.399
तो छुट्टी लेते हैं यह भी नहीं कह सकते ।

374
02:27:19.139 --> 02:27:30.450
साथ रहेंगे साथ चलेंगे और साथ आयेंगे ।

375
02:27:36.280 --> 02:27:39.600
अच्छा ।

376
02:27:39.600 --> 02:27:44.620
अभी समाप्ति ।

