WEBVTT

1
00:20:09.539 --> 00:20:49.420
आज होलीएस्ट बाप अपने बच्चों से होली मनाने आये हैं ।

2
00:20:53.309 --> 00:21:15.250
आप सभी भी होली मनाने आये हैं ।

3
00:21:16.400 --> 00:21:50.849
चारों ओर के दूर बैठे हुए बच्चे भी दूर बैठे भी होली मनाने बैठे हैं ।

4
00:21:58.339 --> 00:22:21.200
आप सभी कौन से रंग की होली मनाने आये हैं !

5
00:22:23.880 --> 00:23:00.569
जानते हैं सबसे श्रेष्ठ रंग है परमात्म संग का रंग ।

6
00:23:09.880 --> 00:23:39.200
यह रंग सदा श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ बनाने वाला है ।

7
00:23:49.710 --> 00:24:34.339
जैसे बाप ऊंचे ते ऊंचा है ऐसे यह परमात्म संग ऊंचे ते ऊंचा बनाने वाला है ।

8
00:24:40.339 --> 00:25:16.170
हर एक बच्चे के मस्तक में चमकता हुआ भाग्य का सितारा देख रहे हैं ।

9
00:25:22.970 --> 00:26:02.109
यह भाग्य का सितारा सारे कल्प में आप भाग्यशाली बच्चों के सिवाए और कोई प्राप्त नहीं कर सकता ।

10
00:26:04.569 --> 00:26:34.279
वह श्रेष्ठ भाग्य है कि आप बच्चे ही डबल पवित्र अर्थात् होली बनते हो ।

11
00:26:40.400 --> 00:27:14.849
वैसे धर्मात्मायें भी हैं लेकिन वह शरीर से पवित्र नहीं बनते हैं ।

12
00:27:19.200 --> 00:27:56.619
आप ब्राह्मण आत्माओं का भविष्य में आत्मा भी पवित्र बनती और शरीर भी पवित्र बनता है ।

13
00:28:02.339 --> 00:28:22.000
इनकी निशानी डबल पवित्र तो डबल ताज प्राप्त होता है ।

14
00:28:26.220 --> 00:29:04.220
सारे कल्प में डबल ताजधारी आप संगमयुग में बाप के संग के रंग से डबल पवित्र बनते हो ।

15
00:29:09.710 --> 00:29:39.200
संगमयुग का परमात्म संग डबल पवित्र बना देता है ।

16
00:29:44.400 --> 00:30:27.140
तो आपकी होली बाप के साथ रहने से बाप को कम्बाइन्ड बनाने से डबल पवित्र बन जाते हो ।

17
00:30:37.079 --> 00:30:58.680
सदा दिल में बाप का संग रहता है ।

18
00:31:00.680 --> 00:31:24.279
यह रंग कितना श्रेष्ठ है जो इतना श्रेष्ठ बना देता है ।

19
00:31:24.279 --> 00:31:41.200
लोग तो स्थूल रंग से होली मनाते हैं

20
00:31:41.200 --> 00:32:03.250
लेकिन आप बाप के संग के रंग से होली बन जाते हो ।

21
00:32:03.819 --> 00:32:10.339
वह भी डबल होली ।

22
00:32:22.849 --> 00:32:49.420
तो आपकी होली दुनिया से न्यारी परमात्मा की प्यारी है ।

23
00:32:55.539 --> 00:33:44.680
तो नशा रहता है ना कि हमारी होली प्रभु संग के रंग के कारण आधाकल्प ऐसा पवित्र बनाती है

24
00:33:46.109 --> 00:34:14.110
जो अब तक भी आपके चित्र कायदे प्रमाण पूजे जाते हैं

25
00:34:16.110 --> 00:34:46.619
और कोई के भी चित्र ऐसे प्रेम पूर्वक पूजे नहीं जाते हैं ।

26
00:34:51.539 --> 00:35:09.710
आप स्वयं अपने चित्रों को देख रहे हो ।

27
00:35:18.800 --> 00:35:54.219
और भी पूजे जाते हैं लेकिन इतना समय और ऐसे विधिपूर्वक पूजा नहीं होती ।

28
00:36:21.079 --> 00:36:36.849
आप सदा उमंग और उत्साह में रहते हो ।

29
00:36:36.849 --> 00:36:41.199
रहते हो ना !

30
00:36:41.199 --> 00:36:45.019
उमंग - उत्साह में रहते हो ?

31
00:36:45.019 --> 00:36:47.599
हाथ उठाओ ।

32
00:36:47.599 --> 00:36:55.880
रहते हो कभी कभी या सदा ?

33
00:36:58.909 --> 00:37:29.820
जो कहते हैं हम सदा उमंग-उत्साह में रहते भी हैं और दूसरे को भी उमंग-उत्साह दिलाते हैं वह हाथ उठाओ ।

34
00:37:33.139 --> 00:37:52.400
कभी कभी नहीं सदा । सदा शब्द को अण्डरलाइन करते हो ना !

35
00:37:53.650 --> 00:38:16.849
लेकिन आपका यादगार जो भी आपकी स्थिति रही है

36
00:38:16.849 --> 00:38:32.849
उसका यादगार आपके भक्त उत्सव के रूप में मनाते हैं ।

37
00:38:36.679 --> 00:39:07.079
आपने प्रभू के संग का रंग लगाया तो वह भी रंग लगाते हैं लेकिन बॉडीकान्सेस हैं ना तो स्थूल रंग लगा देते हैं।

38
00:39:11.650 --> 00:39:43.820
जिस रंग में खर्चा भी बहुत और फिर रिजल्ट भी कुछ अच्छी कुछ नहीं अच्छी ऐसे मनाते हैं ।

39
00:39:44.619 --> 00:40:02.570
लेकिन आपके उत्साह का यादगार उत्सव जरूर मनाया है ।

40
00:40:13.769 --> 00:40:54.110
आप परमात्मा का बनने के लिए पहले अपने पुराने संस्कारों को जलाते हो

41
00:40:56.969 --> 00:41:25.369
और फिर प्रभु के संग का रंग लगने से सदा मनाते रहते हो ।

42
00:41:34.909 --> 00:41:44.969
वह भी पहले जलाते हैं फिर मनाते हैं

43
00:41:44.969 --> 00:42:07.710
लेकिन आपका मनाना और उन्हों के मनाने में रात दिन का अन्तर है ।

44
00:42:08.400 --> 00:42:24.170
वह बॉडीकान्सेस आप आत्म अभिमानी।

45
00:42:26.449 --> 00:42:37.019
वह देह भान में आप आत्मिक भान में ।

46
00:43:01.710 --> 00:43:34.800
आपको बापदादा का डायरेक्शन है होली अर्थात् बीती सो बीती ।

47
00:43:39.820 --> 00:44:02.280
यह भी कहते हैं हो ली लेकिन अर्थ को प्रैक्टिकल में नहीं ला सकते ।

48
00:44:03.480 --> 00:44:21.820
आप सब हो ली अर्थात् बीती सो बीती करते हो ।

49
00:44:22.909 --> 00:44:26.510
करते हो ना !

50
00:44:26.510 --> 00:44:32.050
कि कभी कभी करते हो ?

51
00:44:34.050 --> 00:44:58.170
क्योंकि बीती को याद करने से व्यर्थ संकल्प बहुत चलते हैं ।

52
00:44:58.909 --> 00:45:07.309
समय भी व्यर्थ जाता है ।

53
00:45:14.449 --> 00:45:26.570
जो बहुत समय के संस्कार हैं

54
00:45:32.400 --> 00:45:59.139
वह न चाहते भी जब चलते हैं तो इस संगमयुग का एक-एक मिनट

55
00:46:01.650 --> 00:46:14.800
जो एक जन्म में 21 जन्म की प्रालब्ध बनाता है

56
00:46:16.050 --> 00:46:35.019
वह एक-एक संकल्प एक-एक मिनट कितना वैल्युबुल है ।

57
00:46:36.510 --> 00:46:59.369
एक सेकण्ड नहीं गया लेकिन अनेक जन्म की प्रालब्ध में फर्क पड़ जाता है ।

58
00:46:59.369 --> 00:47:37.309
बापदादा ने पहले भी कहा है कि संगम समय का समय और संकल्प कभी भी व्यर्थ नहीं गंवाना है ।

59
00:47:41.199 --> 00:47:55.139
अगर सदा प्रभु रंग में रंगे हुए हो

60
00:47:55.480 --> 00:48:11.880
अर्थात् बाप को सदा का साथी बनाके रहते हो

61
00:48:15.820 --> 00:48:47.940
तो संगमयुग के एक-एक संकल्प और समय माना एक-एक मिनट को सफल कर सकते हो ।

62
00:48:47.940 --> 00:49:09.309
तो चेक करो अपने को कि एक - एक मिनट एक-एक संकल्प सफल होता है ?

63
00:49:10.800 --> 00:49:16.969
या व्यर्थ भी जाता है ?

64
00:49:21.309 --> 00:49:36.050
क्योंकि एक मिनट नहीं 21 जन्म का कनेक्शन हर मिनट और हर संकल्प का है ।

65
00:49:36.050 --> 00:49:41.250
इतनी वैल्यु है ।

66
00:49:41.880 --> 00:50:03.650
तो अपनी दिल में सोचो कि इतनी वैल्यु सदा रहती है !

67
00:50:05.650 --> 00:50:22.000
इस संगम के समय के लिए कहा हुआ है - “ अब नहीं तो कब नहीं ।

68
00:50:32.739 --> 00:50:45.599
” इतनी वैल्यु सदा स्मृति में रहे ।

69
00:50:55.599 --> 00:51:35.420
तो आप सभी ने आज होली मनाई अर्थात् सदा बाप के संग का रंग लगाया ।

70
00:51:35.710 --> 00:51:49.599
तो सारा दिन चेक किया कि बाप का रंग लगा हुआ रहा ?

71
00:51:53.539 --> 00:52:24.619
परमात्म संग में रहे या और भी कहाँ समय वा संकल्प गया ?

72
00:52:25.940 --> 00:52:29.309
चेक किया ?

73
00:52:29.309 --> 00:52:40.849
कांध हिलाओ हाथ नहीं ऐसे करो ।

74
00:52:54.570 --> 00:53:13.539
बापदादा सदा ही इशारा देते हैं

75
00:53:16.170 --> 00:54:02.510
कि अपने मन के शुभ सतोगुणी संकल्प द्वारा प्रकृति को भी सतोगुणी बनाते रहो ।

76
00:54:10.340 --> 00:54:23.820
तो वह मन्सा सेवा याद रहती है ?

77
00:54:23.820 --> 00:54:57.079
क्योंकि अभी प्रकृति बड़े रूप में अपना कार्य करने वाली है ।

78
00:54:57.079 --> 00:55:04.849
यह तो छोटी सी बात है लेकिन

79
00:55:07.820 --> 00:55:23.539
प्रकृति को मनुष्यात्मायें तंग करती हैं तो वह भी तंग करना शुरू करती है

80
00:55:25.539 --> 00:55:54.909
इसलिए बाप कहते हैं जैसे मायाजीत बनने का अटेन्शन रखते हो ।

81
00:55:56.909 --> 00:56:01.079
रखते हो ना !

82
00:56:01.079 --> 00:56:15.139
माया से वायदा है आपका काम है आना और हमारा काम है विजय प्राप्त करना ।

83
00:56:15.940 --> 00:56:21.079
किया है ना वायदा सभी ने ? किया है ?

84
00:56:21.769 --> 00:56:28.000
मायाजीत बनना है ना !

85
00:56:28.909 --> 00:56:50.449
ऐसे ही प्रकृति जीत भी बनना है क्योंकि आपको राज्य करना है ना । आपका राज्य आ रहा है ना !

86
00:56:51.139 --> 00:56:53.650
नशा है ना !

87
00:56:53.650 --> 00:57:03.539
लोग तो बिचारे सोचते हैं क्या होगा डरते हैं ।

88
00:57:04.170 --> 00:57:24.909
लेकिन आप को पता है तो अभी संगमयुग अमृतवेला चल रहा है ।

89
00:57:26.909 --> 00:57:37.199
तो अमृतवेले के बाद क्या आता है ? सवेरा ।

90
00:57:41.199 --> 00:57:49.139
उस सवेरे में ही हमारा राज्य आना है ।

91
00:57:49.139 --> 00:57:51.420
है ना नशा !

92
00:57:51.420 --> 00:57:59.369
हमारा राज्य है कि केवल महारथियों के लिए राज्य है ?

93
00:57:59.369 --> 00:58:04.280
आप सबका राज्य है ।

94
00:58:05.880 --> 00:58:11.769
आपको चिंता नहीं क्या होगा ?

95
00:58:14.909 --> 00:58:19.940
अच्छे ते अच्छा होगा ।

96
00:58:22.739 --> 00:58:38.679
तो आपके राज्य में प्रकृति भी सतोप्रधान होनी है ।

97
00:58:39.940 --> 00:58:49.480
तो प्रकृति को तमोगुणी से सतोगुणी कौन बनायेगा ?

98
00:58:58.000 --> 00:59:03.710
कि प्रकृति जैसी भी हो चलेगी ?

99
00:59:03.710 --> 00:59:07.650
आपके राज्य में चलेगा ?

100
00:59:07.650 --> 00:59:09.650
चलेगा ?

101
00:59:09.650 --> 00:59:13.940
हाँ करो या ना करो ।

102
00:59:15.940 --> 00:59:19.820
नहीं चलेगी ?

103
00:59:25.309 --> 00:59:31.480
तो प्रकृति को सतोगुणी कौन बनायेगा ?

104
00:59:33.250 --> 00:59:39.880
आप ही बनायेंगे ना !

105
00:59:40.849 --> 01:00:05.369
इसलिए अभी अचानक का पहला दृश्य छोटा है यह शुरू हुआ है ।

106
01:00:08.400 --> 01:00:19.480
अभी तो बड़े-बड़े आने हैं और अचानक ही आने हैं ।

107
01:00:22.170 --> 01:00:32.400
जो सोच में नहीं होगा वही होना है ।

108
01:00:36.909 --> 01:00:49.650
बापदादा ने तो बहुत समय से अचानक का पाठ पढ़ाया है ।

109
01:00:51.650 --> 01:01:10.909
लेकिन अभी प्रत्यक्ष रूप में देख करके अभी अपना काम शुरू करो ।

110
01:01:10.909 --> 01:01:15.250
घबराओ नहीं ।

111
01:01:25.369 --> 01:01:45.650
कहानी सुनाते हैं ना - चारों ओर आग लगी लेकिन परमात्मा के बच्चे सेफ रहे ।

112
01:01:48.849 --> 01:01:59.309
तो अभी भी बच्चे तो सेफ हैं ना !

113
01:02:06.110 --> 01:02:20.170
पेपर तो आने ही हैं लेकिन आपका डबल काम है ।

114
01:02:22.170 --> 01:02:39.599
एक तो निर्भय होके सामना करो दूसरा अपने भक्त

115
01:02:41.139 --> 01:02:57.480
और अपने दुःखी भाई-बहिनों की सेवा भी कौन करेगा ?

116
01:03:00.340 --> 01:03:14.400
आप प्रभु के संग में रंग लगे हुए हो

117
01:03:15.820 --> 01:03:27.250
तो जो परमात्मा के संग के रंग में प्राप्त किया है

118
01:03:28.050 --> 01:03:49.650
वह अपने भाई बहिनों को भक्तों को खूब प्यार से दिल से बांटो ।

119
01:03:52.449 --> 01:04:04.510
दुःख के समय कौन याद आता है ?

120
01:04:11.599 --> 01:04:31.940
फिर भी परमात्मा चाहे समझें चाहे नहीं समझें लेकिन मजबूरी से भी हे बाप हे परमात्मा कहेंगे जरूर ।

121
01:04:34.280 --> 01:04:59.369
तो आप परमात्म बच्चों को अभी दुःखियों का सहारा बनना है ।

122
01:05:01.369 --> 01:05:35.199
उन्हों को शुभ भावना शुभ कामना द्वारा बाप द्वारा प्राप्त हुई किरणों द्वारा सहारा बनो ।

123
01:05:40.969 --> 01:05:49.139
फिर भी आपका परिवार है ना !

124
01:05:52.739 --> 01:06:06.400
तो परिवार में एक दो को सहयोग देते हैं ना !

125
01:06:08.400 --> 01:06:21.309
तो नाम ही है सह योग श्रेष्ठ योग ।

126
01:06:23.309 --> 01:06:32.619
वही साधन है सहारा देने का ।

127
01:06:34.969 --> 01:06:46.170
सन्देश भी भेजा था कि समय फिक्स करो ।

128
01:06:46.170 --> 01:07:16.679
ऐसे नहीं हो जायेगा जैसे ट्राफिक कन्ट्रोल अमृतवेला निश्चित है तो करते हो ना ।

129
01:07:16.679 --> 01:07:43.820
ऐसे अपने कार्य प्रमाण यह मन्सा सेवा भी अभी के समय प्रमाण अति आवश्यक है ।

130
01:07:45.820 --> 01:08:00.219
तो समय निकालो रहमदिल बनो ।

131
01:08:06.219 --> 01:08:11.940
कल्याणकारी बनो ।

132
01:08:13.940 --> 01:08:19.079
आपका स्वमान क्या है ?

133
01:08:19.079 --> 01:08:25.649
विश्व कल्याणकारी ।

134
01:08:34.619 --> 01:08:40.170
तो रहम आता है ?

135
01:08:40.800 --> 01:08:45.020
कि हो जायेगा ?

136
01:08:45.770 --> 01:09:06.970
इसमें अलबेले नहीं बनना क्योंकि जिन्हों को आप सकाश देंगे वही आपके भक्त बनेंगे

137
01:09:16.449 --> 01:09:26.399
इसलिए क्या करना है ?

138
01:09:27.710 --> 01:09:30.680
है अटेन्शन है ?

139
01:09:30.680 --> 01:09:44.970
जो समझते हैं हमारा अटेन्शन है और बढ़ेगा वह हाथ उठाओ ।

140
01:09:53.770 --> 01:10:00.220
नीचे-ऊपर कर रहे हैं ।

141
01:10:00.739 --> 01:10:06.399
यहाँ देखने आ रहे हैं ।

142
01:10:20.850 --> 01:10:45.020
( टी . वी . में ) अगर इतने सभी ने अपने स्वमान को प्रैक्टिकल में लाया

143
01:10:47.020 --> 01:11:29.539
तो आत्मायें अभी भी संगम पर आपके दिल से गीत गायेंगे वाह परमात्म बच्चे वाह !

144
01:11:30.569 --> 01:11:41.819
हमें सहारा दिया ।

145
01:11:47.770 --> 01:12:09.880
आपके लिए अभी का सहारा आधाकल्प आपके गीत गाते रहेंगे ।

146
01:12:14.170 --> 01:12:18.800
आप उसके पूर्वज हो जायेंगे ।

147
01:12:19.310 --> 01:12:24.000
पूर्वज हो ।

148
01:12:25.539 --> 01:12:31.140
झाड़ में कहाँ बैठे हैं ब्राह्मण ।

149
01:12:31.140 --> 01:12:36.340
नीचे बैठे हैं ना !

150
01:12:39.479 --> 01:12:44.170
तो पूर्वज हो ना !

151
01:12:48.279 --> 01:12:55.649
आवाज सुनने आता है भक्तों का ?

152
01:12:58.680 --> 01:13:21.710
थोड़ा अपने को सावधान करो दुःखियों का सहारा बनना ही है तो आवाज सुनने आयेगी ।

153
01:13:31.199 --> 01:13:45.600
तो सभी ने होली तो मनाई आपकी तो सारा संगम ही होली है ।

154
01:13:45.600 --> 01:13:54.109
परमात्मा के संग के रंग में ही रहते हो ।

155
01:13:55.479 --> 01:14:13.880
यादगार मनाते हैं एक दो दिन लेकिन आप तो पूरा संगम प्रभु के संग में रहने वाले हो ।

156
01:14:14.449 --> 01:14:19.880
नशा है ना !

157
01:14:22.569 --> 01:14:34.449
लोग बिचारे मांगते रहते हैं हे प्रभु यह कर दो वह कर दो

158
01:14:35.939 --> 01:14:53.310
लेकिन आपको 21 जन्म की गैरन्टी मिली है

159
01:14:56.279 --> 01:15:13.479
कभी दुःख का स्वप्न में भी कोई दृश्य नहीं आयेगा ।

160
01:15:16.619 --> 01:15:26.510
संकल्प में भी दुःख की लहर नहीं आयेगी ।

161
01:15:31.369 --> 01:15:46.399
तो सदा हर एक को अगर राज्य लेना है

162
01:15:46.399 --> 01:16:17.199
तो अभी अपने परिवार सतयुग का साथी और रॉयल प्रजा साधारण प्रजा सब अभी बना सकते हो ।

163
01:16:18.340 --> 01:16:24.340
21 जन्म की गैरन्टी है ।

164
01:16:26.000 --> 01:16:35.079
थोड़ी सी सेवा करो समय निकालो

165
01:16:40.970 --> 01:16:50.909
क्योंकि आपके पास संकल्प शक्ति तो है ही ।

166
01:16:50.909 --> 01:17:17.250
सिर्फ जो बाप से मिला है वह अपने भाई-बहिनों को भी दो ।

167
01:17:31.539 --> 01:17:42.449
बापदादा ने पहले भी कहा था

168
01:17:48.220 --> 01:18:07.369
तो अपना सदा यह चेक करो

169
01:18:10.680 --> 01:18:37.079
कि मुझे ब्राह्मण परिवार के बीच संस्कार मिलन की रास करनी है ।

170
01:18:40.050 --> 01:18:56.510
बापदादा ने कहा था वह रास कब करेंगे उसकी डेट भी फिक्स करो ।

171
01:18:58.510 --> 01:19:03.079
फिक्स हो सकती है ?

172
01:19:03.079 --> 01:19:05.819
हो सकती है ?

173
01:19:05.819 --> 01:19:09.079
पहली लाइन बताओ ।

174
01:19:09.079 --> 01:19:11.479
हाथ उठाओ ।

175
01:19:11.479 --> 01:19:14.340
हो सकती है ?

176
01:19:14.340 --> 01:19:19.199
पाण्डव भी उठाओ ।

177
01:19:19.199 --> 01:19:24.279
पाण्डवों के बिना गति नहीं है ।

178
01:19:28.170 --> 01:19:30.970
अच्छा ।

179
01:19:31.649 --> 01:19:43.600
तो अभी लास्ट टर्न है एक टर्न रहा हुआ है ।

180
01:19:45.600 --> 01:20:09.880
उसमें हर एक अपने लिए क्या दृढ़ संकल्प है वह फिक्स करके लिखना ।

181
01:20:10.449 --> 01:20:39.939
कितना समय लगेगा जो ब्राह्मण परिवार में कहाँ भी कभी भी संस्कार अपना कार्य नहीं करे ।

182
01:20:44.449 --> 01:21:01.250
चाहे मेरा संस्कार चाहे दूसरे का संस्कार भी मेरे को प्रभाव नहीं डाले ।

183
01:21:05.880 --> 01:21:10.680
यह डेट फिक्स हो सकती है ?

184
01:21:10.680 --> 01:21:12.970
हो सकती है ?

185
01:21:12.970 --> 01:21:15.539
हाथ उठाओ ।

186
01:21:50.569 --> 01:21:56.970
अच्छा सभी का फोटो निकाला !

187
01:22:14.739 --> 01:22:24.170
क्योंकि जैसे यह अचानक सीन देखी ना ।

188
01:22:24.170 --> 01:22:32.850
ऐसे सब अचानक ही होना है

189
01:22:33.310 --> 01:22:50.399
इसलिए बापदादा तैयारी तो देखेंगे ना !

190
01:22:57.600 --> 01:23:08.510
जब दूसरों को शुभ भावना शुभ कामना देते हो

191
01:23:09.250 --> 01:23:23.420
बापदादा ने देखा यह दूसरों की सेवा का प्रोग्राम भी बनाया था

192
01:23:24.619 --> 01:23:52.800
तो अगर हर आत्मा के प्रति सदा शुभ भावना और शुभ कामना रखो नम्बरवार तो होना ही है ।

193
01:23:52.800 --> 01:24:04.220
आपकी माला यादगार एक नम्बर सब हैं क्या ?

194
01:24:04.220 --> 01:24:14.510
नम्बरवार हैं लेकिन माला में तो पिरोये हैं ना !

195
01:24:19.479 --> 01:24:23.710
नम्बर क्यों मिला ?

196
01:24:24.399 --> 01:24:45.369
भिन्न-भिन्न संस्कार हैं लेकिन हमको संस्कार देखने के बजाए शुभ भावना शुभ कामना रखनी है ।

197
01:24:45.770 --> 01:24:52.800
आखिर भी ब्राह्मण परिवार है ना ।

198
01:24:53.649 --> 01:25:01.710
कैसा भी है परिवार तो मेरा है ना !

199
01:25:07.819 --> 01:25:19.420
जैसे मेरा बाबा कहते हो वैसे मेरा परिवार भी है ।

200
01:25:26.050 --> 01:25:34.109
तो अच्छा है मैजारिटी ने हाथ उठाया है ।

201
01:25:37.310 --> 01:25:47.020
तो सभी का उमंग-उत्साह है तब तो हाथ उठाया है ना !

202
01:25:47.600 --> 01:26:29.310
तो एक दो को सहयोगी बन शुभ भावना शुभ कामना की दृष्टि वृत्ति स्मृति रखने से यह रास होना कोई बड़ी बात नहीं ।

203
01:26:37.880 --> 01:27:15.600
इस पर जो बहुत अच्छा नम्बर लेगा डेट पर प्रैक्टिकल करके दिखायेगा उनको न्यारा और प्यारा इनाम मिलेगा ।

204
01:27:16.050 --> 01:27:22.680
इनाम अभी नहीं बतायेंगे ।

205
01:27:24.680 --> 01:27:36.970
लेकिन बापदादा इनाम देंगे ।

206
01:27:39.649 --> 01:27:42.000
क्यों ?

207
01:27:42.000 --> 01:27:46.680
सेवा करने का टाइम निकालना है ना ।

208
01:27:46.680 --> 01:27:57.020
तो यह संस्कार की खिटखिट समय अपने तरफ खींच लेती है

209
01:27:58.739 --> 01:28:12.739
इसलिए समय की अभी आवश्यकता है ।

210
01:28:17.939 --> 01:28:21.479
ठीक है ना !

211
01:28:21.479 --> 01:28:29.079
यह सभी मधुबन वाले हैं ना !

212
01:28:30.399 --> 01:28:32.850
पसन्द है ना !

213
01:28:40.850 --> 01:28:46.739
क्योंकि मधुबन वासी विशेष हैं ।

214
01:28:46.739 --> 01:29:02.340
बापदादा का भी मधुबन निवासियों प्रति दिल का प्यार है ।

215
01:29:02.739 --> 01:29:06.739
और मधुबन वालों का भी है ।

216
01:29:06.739 --> 01:29:16.850
यह भी बाबा कहते बाप से प्यार है और रहेगा ।

217
01:29:16.850 --> 01:29:20.970
मिट नहीं सकता है ।

218
01:29:20.970 --> 01:29:26.449
अमर है इसमें ।

219
01:29:27.479 --> 01:29:33.710
तब तो मधुबन वासी बने हैं ना !

220
01:29:44.340 --> 01:29:53.479
कहाँ भी मधुबन वासी जाते हैं तो किस रिगार्ड से देखते हैं ?

221
01:29:53.479 --> 01:29:59.600
मधुबन का है मधुबन का है ।

222
01:30:10.109 --> 01:30:32.569
इसलिए यह अटेन्शन रखना लास्ट टर्न के पहले सभी मधुबन में कोई स्थान मुकरर करना जहाँ अपनी चिटकी डालें ।

223
01:30:33.199 --> 01:30:45.770
लेकिन लास्ट टर्न के पहले ।

224
01:30:51.880 --> 01:31:02.970
सभी ने होली मनाई ?

225
01:31:02.970 --> 01:31:08.449
आपकी तो रोज होली है ।

226
01:31:10.449 --> 01:31:18.680
अभी भी यह तो बाहर का थोड़ा मनाना होता है ।

227
01:31:18.680 --> 01:31:21.420
कहाँ मनाने जायें ।

228
01:31:21.420 --> 01:31:25.020
यहीं तो मनायेंगे ।

229
01:31:25.020 --> 01:31:34.220
लेकिन वो हुई रीति रसम ।

230
01:31:40.109 --> 01:32:18.449
तो सभी चारों ओर के बापदादा के अति स्नेही अति प्यारे लाडले सिकीलधे स्वमानधारी हर बच्चे को

231
01:32:18.449 --> 01:32:44.970
बापदादा पदमगुणा यादप्यार भी दे रहे हैं और दिल का दुलार भी दे रहे हैं ।

232
01:32:53.199 --> 01:33:07.710
बापदादा देख रहे हैं चारों ओर सब सुनके देख के हर्षित हो रहे हैं ।

233
01:33:08.050 --> 01:33:10.220
अच्छा ।

234
01:33:10.220 --> 01:33:17.079
आज पहली बारी कौन आये हैं ?

235
01:33:17.079 --> 01:33:20.569
उठो ।

236
01:33:30.909 --> 01:33:36.970
यह सभी पहली बारी आये हैं ।

237
01:34:14.000 --> 01:34:17.939
अच्छा ।

238
01:34:23.079 --> 01:34:42.220
पहले बारी मधुबन निवासी बनने का भाग्य प्राप्त हुआ है ।

239
01:34:57.199 --> 01:35:30.109
सभी आपके भाई-बहिनें और बापदादा भी आप सभी को पहले बारी आने की मुबारक दे रहे हैं ।

240
01:35:42.399 --> 01:36:02.970
अभी बापदादा देखेंगे क्योंकि चांस है कि थोड़ी देरी से आये हैं

241
01:36:02.970 --> 01:36:34.680
लेकिन जो चाहे वह अभी भी लास्ट सो फास्ट जाकरके फर्स्ट नम्बर लेकर फर्स्ट डिवीजन में आ सकते हो ।

242
01:36:34.680 --> 01:36:50.000
यह बापदादा का जो भी आज आये हैं उन सभी बच्चों को वरदान है ।

243
01:36:55.250 --> 01:37:17.420
सिर्फ जो बाप के महावाक्य हैं उस श्रीमत पर चलते रहेंगे

244
01:37:17.420 --> 01:37:36.619
तो श्रीमत आपको श्रेष्ठ डिवीजन में ला सकती है लायेगी ।

245
01:37:41.880 --> 01:37:59.539
इतने सारे परिवार द्वारा आप सभी को वरदान तो बाप का होता है

246
01:37:59.539 --> 01:38:12.050
लेकिन शुभ भावना शुभ कामना है कि आप जितना आगे बढ़ने चाहो उतना बढ़ सकते हो ।

247
01:38:12.050 --> 01:38:22.000
सभी आपको दिल से दुआयें देंगे ।

248
01:38:23.310 --> 01:38:35.140
जहाँ भी आते हो वहाँ आपको दुआयें मिलती रहेंगी

249
01:38:35.140 --> 01:38:54.909
और वह दुआयें आपको तीव्र पुरूषार्थी बनाके आगे बढ़ायेंगी यह निश्चय रखो ।

250
01:39:01.140 --> 01:39:04.739
अच्छा ।

251
01:39:09.880 --> 01:39:37.079
सेवा का टर्न पंजाब जोन का है :- ( पंजाब हिमाचल हरियाणा जम्मू कश्मीर उतराचंल ) :-

252
01:39:59.479 --> 01:40:17.770
पंजाब तो है ही शेरे पंजाब ।

253
01:40:30.909 --> 01:40:44.909
तो पंजाब तो शेर अर्थात् वारिस निकालने वाले ।

254
01:40:50.220 --> 01:41:16.569
हर एक सेन्टर अपने वारिस क्वालिटी की लिस्ट भेजना ।

255
01:41:17.079 --> 01:41:34.680
शुरू से लेके अभी तक हर एक सेन्टर से कितने वारिस क्वालिटी निकले ?

256
01:41:38.449 --> 01:41:48.510
और वारिस क्वालिटी तो कहाँ भी छिप नहीं सकती है ।

257
01:41:58.000 --> 01:42:20.449
वैसे तो बापदादा आज वह भी देखने चाहते हैं

258
01:42:22.449 --> 01:42:33.770
कि बुलन्द स्वरूप के माइक कितने हैं ?

259
01:42:36.220 --> 01:42:59.939
जिसका आवाज दिल का सुनके औरों की दिल भी दिलाराम के तरफ आकर्षित हो

260
01:43:04.109 --> 01:43:17.479
लेकिन बापदादा ने सुना है कि वर्ग बहुत मिलने हैं वह वर्गो से पूछेंगे ।

261
01:43:18.279 --> 01:43:36.850
लेकिन पंजाब वाले सभी सेन्टर चाहे छोटा है या बड़ा है वारिस क्वालिटी कितने निकले हैं ?

262
01:43:36.850 --> 01:43:41.880
कब से निकले हैं ?

263
01:43:45.079 --> 01:43:59.819
क्योंकि पंजाब भी पहले पहले निकला है ।

264
01:44:05.020 --> 01:44:41.880
पंजाब में भी बहुत महावीर महारथी सेवा के अधिकारी बने हैं पालना मिली है ।

265
01:44:52.050 --> 01:45:04.909
कई पूर्वज भी सेवा करके गये हैं ।

266
01:45:09.710 --> 01:45:24.619
बापदादा का भी पंजाब से प्यार है क्यों ?

267
01:45:27.819 --> 01:45:32.399
क्यों प्यार है ?

268
01:45:34.399 --> 01:45:45.539
क्योंकि पंजाब में नदियां भी बहुत हैं

269
01:45:46.680 --> 01:46:14.800
तो जैसे पंजाब की नदियां मशहूर हैं ऐसे ही बापदादा की तरफ से पंजाब के सेवाधारी भी प्रसिद्ध हैं ।

270
01:46:18.340 --> 01:46:30.279
त्याग करने और कराने में भी होशियार हैं

271
01:46:36.000 --> 01:46:50.970
इसलिए वारिस क्वालिटी निकालना भी सहज है ।

272
01:46:56.510 --> 01:47:19.020
बापदादा हर जोन को नम्बरवन देने चाहते हैं।

273
01:47:27.079 --> 01:47:37.649
बापदादा ने देखा है कि जब जोन आते हैं

274
01:47:38.800 --> 01:47:49.880
तो अभी तक कोई भी जोन कम नहीं आया है ।

275
01:47:53.140 --> 01:48:23.770
एक दो से आगे आये हैं इसलिए पंजाब को जो निकले हुए सेवा से हैं

276
01:48:23.770 --> 01:48:38.000
उन्हों को खास सेवा करके वारिस क्वालिटी में लाना है ।

277
01:48:38.000 --> 01:48:42.399
ला सकते हैं ।

278
01:48:42.909 --> 01:48:50.800
ध्यान देंगे तो निकल जायेंगे ।

279
01:48:51.710 --> 01:49:14.619
सिर्फ क्वालिटी को समझकर उनके ऊपर थोड़ा शुभ भावना शुभ कामना की

280
01:49:19.600 --> 01:49:41.819
विशेष मेहनत करना थोड़ा सा विशेष मेहनत करनी पड़ेगी लेकिन क्वालिटी है ।

281
01:49:48.170 --> 01:50:14.449
अभी समय भी थोड़ा सा वैराग्य का है चारों ओर अल्पकाल का वैराग्य आया हुआ है ।

282
01:50:16.449 --> 01:50:47.649
ऐसे समय पर हर जोन ऐसी क्वालिटी को समझ आगे सहज बढ़ा सकते हो ।

283
01:50:51.020 --> 01:51:17.819
यज्ञ स्नेही यज्ञ रक्षक बना सकते हो ।

284
01:51:19.819 --> 01:51:32.510
अभी ताजा वैराग्य है ।

285
01:51:40.970 --> 01:51:55.600
तो पहले आज पंजाब का टर्न है तो पंजाब पहला नम्बर आरम्भ करे ।

286
01:52:07.539 --> 01:52:10.680
अच्छा है ।

287
01:52:10.680 --> 01:52:24.800
बापदादा सबका मुखड़ा देख रहे हैं । चाहे दूर हैं लेकिन टी . वी . में नजदीक हैं ।

288
01:52:24.800 --> 01:52:28.220
देख रहे हैं ।

289
01:52:45.310 --> 01:52:50.170
अच्छा ।

290
01:52:54.909 --> 01:54:55.199
8 विंग्स वाले आये हैं :- समाज सेवा विंग दो ट्रांसपोर्ट मीडिया प्रशासक साइंस एण्ड इंजीनियर मेडिकल सिक्युरिटी आई . टी . ( सभी विंग के भाई बहिनों को खड़ा किया )

291
01:55:03.140 --> 01:55:30.170
मैजारिटी तो विंग वाले ही दिखाई देते हैं और बापदादा जो भी सभी विंग्स आये हैं और सेवा कर रहे हैं

292
01:55:30.170 --> 01:55:53.199
तो बापदादा ने देखा विंग्स के सेवा की रिजल्ट अच्छे ते अच्छी हो रही है

293
01:55:59.140 --> 01:56:16.510
क्योंकि चारों ओर सेवा करने से अलग-अलग हो गये हैं ना

294
01:56:16.510 --> 01:56:46.170
तो हर एक अपने-अपने विंग में दिनप्रतिदिन उन्नति कर और आत्माओं को नजदीक ला रहे हैं

295
01:56:47.369 --> 01:57:04.970
इसलिए बापदादा हर एक विंग के ऊपर सेवा के ऊपर खुश है ।

296
01:57:06.970 --> 01:57:14.739
ताली तो बजाओ ।

297
01:57:39.710 --> 01:57:48.109
अभी आगे बढ़के क्या करना है ?

298
01:57:48.510 --> 01:57:54.109
सेवा तो विस्तार को प्राप्त हो रही है

299
01:57:54.109 --> 01:58:34.220
लेकिन अभी जो सेवा से समीप आये हैं उन्हों को हर एक विंग इकठ्ठा करके उन्हों को यज्ञ स्नेही बनाओ ।

300
01:58:38.800 --> 01:58:52.909
यज्ञ स्नेही बनने से एक बारी आये यज्ञ में वह अलग बात है

301
01:58:52.909 --> 01:59:11.140
लेकिन उन्हों को यज्ञ क्या चीज है यज्ञ के प्यार से क्या होता है नजदीक लाओ । थोड़ा घरू बनाओ ।

302
01:59:12.399 --> 01:59:22.619
भाषण सुनते हैं भाषण करते हैं इसमें पास हैं

303
01:59:24.619 --> 01:59:49.649
लेकिन परिवार का साथी बन जायें वह भी लिस्ट निकालो ।

304
01:59:50.109 --> 02:00:09.819
हर एक विंग से कितने यज्ञ के सम्पर्क में आये हैं ।

305
02:00:11.020 --> 02:00:29.250
बापदादा को सुनाया था कि कई आत्मायें मुरली तक पहुंचे हैं ।

306
02:00:31.539 --> 02:00:35.479
यह भी अच्छा है ।

307
02:00:35.479 --> 02:01:24.569
जैसे मुरली तक पहुंचे हैं वैसे यज्ञ स्नेही क्या होता है यज्ञ स्नेही निमित्त आत्मा क्या-क्या कर स्वयं को आगे बढ़ा सकती हैं अभी ऐसे निमित्त आत्मायें निकालो।

308
02:01:26.569 --> 02:02:24.279
भाषण में मददगार बने हैं औरों को भी परिचय देने के निमित्त बने हैं इसकी तो बापदादा ने मुबारक दी मुरली तक भी पहुंचे हैं अभी उन्हों को आगे बढ़ाओ।

309
02:02:27.420 --> 02:02:43.539
जो अपने को सिर्फ सहयोगी नहीं लेकिन स्नेही भी अनुभव करें ।

310
02:02:43.539 --> 02:03:03.479
यज्ञ स्नेही यज्ञ सहयोगी परिवार का भाती हूँ ।

311
02:03:07.369 --> 02:03:23.600
चाहे वी . आई . पी है लेकिन परिवार का भाती है परिवार के समीप है

312
02:03:24.850 --> 02:03:52.340
ऐसे धीरे-धीरे उन्हें जैसे आप निमित्त हो सेवा करने वाले ऐसे वह भी अपने को जिम्मेवार समझें ।

313
02:03:58.449 --> 02:04:17.649
तो वर्ग बनने के बाद सेवा में वृद्धि हुई है

314
02:04:18.909 --> 02:04:29.880
कई आत्माओं को पता ही नहीं था वह पता हुआ है ।

315
02:04:30.800 --> 02:04:43.710
ब्रह्माकुमारियां क्या करती हैं कर्तव्य का भी परिचय पड़ा है ।

316
02:04:47.479 --> 02:05:01.710
अभी आगे बढ़ाओ ।

317
02:05:01.710 --> 02:05:17.310
एक तो रेग्युलर प्रेजन्ट मार्क चाहे सामने नहीं आ सकते

318
02:05:17.310 --> 02:05:32.850
लेकिन फोन द्वारा या किसी भी विधि द्वारा अपनी प्रेजन्ट मार्क करें

319
02:05:33.250 --> 02:05:42.680
क्योंकि घर का भाती है तो प्रेजन्ट मार्क तो करेगा ना ।

320
02:05:47.250 --> 02:05:56.739
ऐसी लिस्ट बापदादा ने पहले भी कहा है

321
02:05:56.739 --> 02:06:12.279
तो हर जोन से निकालो और उन्हों का संगठन करके उन्हों को उमंग-उत्साह में लाओ ।

322
02:06:16.109 --> 02:06:27.939
हर एक जोन वाला सिर्फ अपने रहने वाले सेन्टर का नहीं लेकिन

323
02:06:27.939 --> 02:06:43.079
जो वर्ग हैं जो हेड हैं वर्ग के वह सभी जोन में ऐसी निकालके तैयार करें ।

324
02:06:43.710 --> 02:06:47.649
उन्हों का संगठन करे ।

325
02:06:47.649 --> 02:06:55.770
तो एक दो को देखके भी उमंग में आते हैं ।

326
02:06:57.140 --> 02:07:09.310
उस संगठन का समाचार नहीं आया है

327
02:07:09.710 --> 02:07:26.850
कि हमने अपने वर्ग का सभी जोन का इकठ्ठा संगठन किया और यह-यह क्वालिटी आई ।

328
02:07:33.539 --> 02:07:59.140
बाकी बापदादा खुश है कि कॉमन रीति से अटेन्शन गया है अटेन्शन देके कर भी रहे हैं अभी संगठन तैयार करो ।

329
02:08:04.279 --> 02:08:14.619
जो भी कनेक्शन में आये हैं चाहे वी . आई . पी हैं चाहे आई . पी . हैं

330
02:08:15.369 --> 02:08:34.109
लेकिन उन्होंने सेवा कितनी की सन्देश कितनो को दिया यह समाचार लेना पड़ेगा ।

331
02:08:35.369 --> 02:08:48.279
उन्हों को भी रूचि बढ़ेगी कि हमारी रिजल्ट मधुबन में जाती है ।

332
02:08:52.170 --> 02:09:10.449
बाकी बापदादा ने पहले ही आप सबको सुनाया कि सेवा का उमंग है सेवा कर भी रहे हैं

333
02:09:11.250 --> 02:09:18.619
उसकी मुबारक तो बापदादा पहले ही दे चुके हैं ।

334
02:09:26.000 --> 02:09:28.800
अच्छा ।

335
02:09:28.800 --> 02:09:40.170
हर एक वर्ग जैसे एक-एक उठे हो ना ।

336
02:09:40.170 --> 02:10:03.140
तो हर एक वर्ग यह समझे कि बापदादा के सामने हर एक वर्ग है चाहे पीछे भी है तो भी सामने है ।

337
02:10:03.140 --> 02:10:18.109
बापदादा आप एक-एक वर्ग को अपने नजदीक ही देख रहे हैं

338
02:10:18.109 --> 02:10:39.649
इसलिए पदम पदमगुणा मुबारक हो मुबारक हो ।

339
02:10:59.020 --> 02:11:15.250
600 डबल विदेशी भाई बहिनें 50 देशों से आये हैं :-

340
02:12:13.420 --> 02:12:41.819
बापदादा को विदेशी विशेष याद आते हैं ।

341
02:12:43.819 --> 02:12:48.850
याद तो सब बच्चे आते ही हैं

342
02:12:48.850 --> 02:13:17.770
लेकिन विदेशियों का नाम सुनकर भारतवासियों को उमंग आता है

343
02:13:18.109 --> 02:13:35.649
कि जब विदेश वाले परमात्मा को जान वर्से के अधिकारी बने हैं

344
02:13:36.619 --> 02:13:46.800
तो हम वंचित नहीं रह जाएं उमंग आता है ।

345
02:13:46.800 --> 02:14:14.220
इसलिए अभी सेवा में विदेशी और भारतवासी इकठ्ठा प्रोग्राम करने शुरू किया है ।

346
02:14:19.770 --> 02:14:41.420
जानते हैं कि जब विदेश वाले पहचान गये तो हम रह नहीं जाएं उमंग आता है ।

347
02:14:42.680 --> 02:15:04.619
तो आप भारतवासियों को आगे बढ़ने का उमंग दिलाने वाले निमित्त आत्मायें हो ।

348
02:15:08.510 --> 02:15:26.800
इसीलिए हर एक वर्ग वाले भी कोशिश करते हैं जैसे अभी दिल्ली में भी मिलके प्रोग्राम बनाया है ना

349
02:15:28.000 --> 02:15:35.020
चाहे छोटे रूप में हो चाहे बड़े रूप में हो

350
02:15:35.020 --> 02:15:57.140
लेकिन जो एक-दो भी विदेशी अपना दिल से उमंग से अनुभव सुनाते हैं वा टॉपिक पर बोलते हैं

351
02:15:57.140 --> 02:16:14.220
तो सुनके खुश होते हैं क्योंकि बापदादा ने पहले ही कहा है

352
02:16:14.220 --> 02:16:24.050
कि विदेश वाले भारत को जगाने के निमित्त बनेंगे ।

353
02:16:24.050 --> 02:16:28.739
तो देखा गया है

354
02:16:32.510 --> 02:16:53.479
तो यह सेवा दिन प्रतिदिन विदेशी भी करते हैं और भारत वाले भी मिलाने की कोशिश करते हैं ।

355
02:16:55.940 --> 02:17:02.739
कोई भी बड़ा प्रोग्राम कहाँ हो

356
02:17:03.250 --> 02:17:32.000
तो जैसे आदि में विदेश की तरफ से कोई न कोई विशेष वी . आई . पी आता रहा है शुरू में ।

357
02:17:32.000 --> 02:17:53.600
ऐसे ही अभी भी यह कोशिश करो कि कोई भी ऐसा प्रोग्राम कहाँ भी हो

358
02:17:54.280 --> 02:18:04.739
तो कोई न कोई वी . आई . पी निमन्त्रण पर आवे ।

359
02:18:05.309 --> 02:18:15.020
शुरू-शुरू में यह बहुत अच्छा पार्ट चला है ।

360
02:18:15.649 --> 02:18:43.600
अभी भी एक तो ब्राह्मण आत्माओं का अनुभव और दूसरा वी . आई . पी . कोई न कोई पार्टधारी बनें

361
02:18:43.600 --> 02:18:56.510
तो भारत और विदेश विदेश भारत को जगायेगा भारत विदेश को जगायेगा

362
02:18:57.479 --> 02:19:24.620
यह सेवा होते-होते आखिर भी विदेश में हमारे राज्य में कौन-कौन आने हैं यह प्रसिद्ध होता जायेगा

363
02:19:27.649 --> 02:19:40.569
क्योंकि गवर्मेन्ट जो विशेष आत्मायें आती हैं तो गवर्मेन्ट तक आवाज पहुंचता है ।

364
02:19:40.569 --> 02:19:52.219
उन्हों को उनकी देखभाल करनी पड़ती है अखबार में नाम आता है ।

365
02:19:52.969 --> 02:20:08.969
तो इससे सेवा बढ़ने का सहज साधन है ।

366
02:20:13.540 --> 02:20:30.680
तो विदेश सेवा कर रहा है यह बापदादा के पास रिकॉर्ड है

367
02:20:32.680 --> 02:20:43.600
और अभी सभी वर्ग वाले भी चाहते हैं कि कोई भी प्रोग्राम हो

368
02:20:43.600 --> 02:21:07.020
तो प्रोग्राम प्रमाण जैसा प्रोग्राम है उसी अनुसार विदेश भारत को जगावे

369
02:21:07.020 --> 02:21:22.110
और भारतवासियों का इतना बड़ा रूप देख करके विदेशी भी जागें ।

370
02:21:25.879 --> 02:21:38.620
तो बापदादा खुश है कि हर बात में विदेशी एवररेडी हैं।

371
02:21:38.620 --> 02:21:46.909
एवररेडी का पाठ अच्छा बजा रहे हैं ना नहीं करते हैं।

372
02:21:46.909 --> 02:22:11.139
तो भारत के वर्ग वाले भी ऐसे प्रोग्राम बनावें जोन वाले भी ऐसे प्रोग्राम बनावें जिसमें दोनों का मेल होता जाए ।

373
02:22:11.819 --> 02:22:24.219
बापदादा ने देखा कि विदेशी भी एवररेडी हैं।

374
02:22:27.940 --> 02:22:36.969
भारतवासी भी एवररेडी हैं लेकिन प्रोग्राम ऐसे बनाओ।

375
02:22:41.309 --> 02:22:54.799
बाकी विदेशी बच्चों को देख बापदादा खुश होते हैं

376
02:22:54.799 --> 02:23:03.540
मेरे बच्चे बिछुड़कर कहाँ-कहाँ चले गये ।

377
02:23:04.219 --> 02:23:11.770
बापदादा ने ढूंढ लिया ना आप लोगों को ।

378
02:23:13.770 --> 02:23:17.770
कितने देशों के आते हैं ।

379
02:23:17.770 --> 02:23:26.170
तो हर देश में अपने बच्चों को बाप ने ढूंढ लिया है ।

380
02:23:26.680 --> 02:23:29.079
खुशी होती है ना ।

381
02:23:29.079 --> 02:23:45.200
आप तो बाप को ढूंढ नहीं सके लेकिन बाप ने कोने-कोने से आपको ढूंढ लिया ।

382
02:23:47.709 --> 02:23:51.940
क्योंकि कल्प-कल्प के अधिकारी हो ।

383
02:23:51.940 --> 02:24:00.969
हर कल्प बापदादा आपको निकालते ही रहते हैं ।

384
02:24:00.969 --> 02:24:05.020
मिस हो नहीं सकते हो ।

385
02:24:07.819 --> 02:24:17.479
बाप के बच्चे बाप के पास आने ही हैं ।

386
02:24:17.940 --> 02:24:25.940
तो बिछुड़े हुए बच्चों को देख बाप खुश तो होता है ना ।

387
02:24:25.940 --> 02:24:33.200
वाह मेरे बच्चे वाह मेरे बच्चे !

388
02:24:39.020 --> 02:24:45.540
मधुबन को भी सजाते रहते हो ।

389
02:24:45.540 --> 02:25:10.799
बापदादा ने देखा है विदेश की तरफ से बापदादा को बहुत सहयोग चाहे तन में चाहे मन में चाहे धन में

390
02:25:10.799 --> 02:25:35.479
सब रीति से यज्ञ स्नेही बापदादा के स्नेही हैं और आगे-आगे बढ़ते जा रहे हैं बढ़ते रहेंगे ।

391
02:25:52.049 --> 02:25:56.850
अच्छा ।

392
02:25:57.309 --> 02:26:13.649
एक-एक को बापदादा दिल का प्यार और दुलार दे रहे हैं ।

393
02:26:17.940 --> 02:26:22.969
अच्छा ।

