WEBVTT

1
00:17:42.400 --> 00:18:29.819
आज बच्चों के प्यार ने प्यार के सागर को भी अपने पास बुला लिया ।

2
00:18:35.880 --> 00:19:24.619
बापदादा को खुशी है कि बच्चों का बाप से दिल का प्यार अच्छा है

3
00:19:26.109 --> 00:19:52.619
और सदा ही इस प्यार के आधार से बाप समान बन ही जायेंगे ।

4
00:19:58.680 --> 00:20:29.880
वैसे भी बापदादा ने प्यार की सबजेक्ट में बच्चों को आगे रखा है ।

5
00:20:31.880 --> 00:21:44.049
तो आज बच्चों ने अपने प्यार की तार में बांध प्यार के सागर को मधुबन में विशेष बुलाए लिया ।

6
00:21:46.910 --> 00:22:19.769
ऐसा प्यार सदा इमर्ज रहे ।

7
00:22:25.769 --> 00:23:15.140
दिलाराम बाप को भी बच्चों के दिल का प्यार सदा पहुंचता रहता है लेकिन नम्बरवार जरूर है ।

8
00:23:16.619 --> 00:23:34.109
बाप यह चाहता है कि प्यार की निशानी है

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00:23:34.109 --> 00:24:16.109
कि सदा हर एक के दिल में दिलाराम साथ रहे कोई भी बच्चा अकेला न हो कम्बाइण्ड हो ।

10
00:24:19.599 --> 00:24:52.170
तो चेक करना सदा कम्बाइण्ड रहते हो वा कब कब अकेले भी बन जाते हो ?

11
00:24:59.599 --> 00:25:14.339
अकेले में माया अपना चांस ले लेती है

12
00:25:16.339 --> 00:25:54.680
इसलिए बापदादा सदा कहते हैं दिलाराम को सदा दिल में बसा लो ।

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00:25:59.140 --> 00:26:18.339
इसको कहा जाता है सच्चा और सदा प्यार ।

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00:26:19.940 --> 00:26:32.170
तो कभी अकेले बनते हो कि सदा साथ रहते हो ?

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00:26:40.619 --> 00:26:46.450
वायदा क्या है हर बच्चे का ?

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00:26:46.450 --> 00:27:00.109
खास मधुबन निवासियों का नशा है

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00:27:01.250 --> 00:27:20.049
कि साथ है साथ चलेंगे साथ राज्य करेंगे ।

18
00:27:21.309 --> 00:27:50.619
ऐसे ही जो विशेष बहुत बहुत मीठे निमित्त बच्चे बैठे हैं

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00:27:53.420 --> 00:28:29.019
उन्हों का तो बाप से दिल का वायदा है और मैजारिटी का प्रैक्टिकल भी है

20
00:28:29.019 --> 00:28:47.079
जो सदा कम्बाइण्ड रूप में रहते हैं लेकिन नम्बरवार हैं ।

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00:28:48.220 --> 00:29:10.220
बाप चाहते हैं हर बच्चा महारथी निमित्त बच्चे

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00:29:11.200 --> 00:29:38.450
तो औरों को भी अपने चेहरे द्वारा बाप का साक्षात्कार कराने वाले हैं ।

23
00:29:43.019 --> 00:30:12.279
उन्हों के चेहरे और चलन से बाप का प्रकाशमय चेहरा

24
00:30:17.819 --> 00:30:54.569
और साथ में बाप जैसी न्यारी और प्यारी चलन का साक्षात्कार होता रहता है ।

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00:30:58.619 --> 00:31:37.369
ब्रह्मा बाप को देखा ब्रह्मा बाप ने अन्त तक बाप की श्रीमत प्रमाण

26
00:31:45.309 --> 00:32:06.000
हर मुरली में कितना बारी बाबा-बाबा कहा गिनती करना ।

27
00:32:06.000 --> 00:32:17.539
हर मुरली में बाबा-बाबा कितने बारी कहते हैं ।

28
00:32:19.140 --> 00:32:56.849
और बाप जैसे सूरत से मूरत से वचन से विशेष नयन और मस्तक से बाप को प्रत्यक्ष किया

29
00:32:56.849 --> 00:33:17.140
आप बच्चे तो अनुभवी हो कि ब्रह्मा बाप को देखते क्या अनुभव होता ? बापदादा ।

30
00:33:18.109 --> 00:33:49.819
सिर्फ बाप शब्द कोई नहीं कहता सदा हर एक के मुख से बापदादा बापदादा इकठ्ठा निकलता और अनुभव होता ।

31
00:33:53.079 --> 00:34:01.650
ऐसे फालो फादर ।

32
00:34:02.569 --> 00:34:41.650
आपके चेहरे से बोल से चलन से दृष्टि से बाप की याद स्वतः ही देखने वाले को आवे ।

33
00:34:43.650 --> 00:35:03.539
आप सबका अभी बाप ने देखा कि मैजारिटी का यही संकल्प है

34
00:35:03.539 --> 00:35:24.449
कि हम अपने चेहरे या बोल या कर्म द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करें ।

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00:35:26.449 --> 00:35:32.280
तो फालो फादर ।

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00:35:33.369 --> 00:36:04.739
जैसे ब्रह्मा बाप ने अपने चलन चेहरे से दृष्टि से वृत्ति से संकल्प से

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00:36:04.739 --> 00:36:18.679
सदा बाप को प्रत्यक्ष किया आप सबको तो अनुभव है ना !

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00:36:19.820 --> 00:36:28.969
अकेला ब्रह्मा बाप नहीं देखते थे बापदादा ही देखते थे ।

39
00:36:36.969 --> 00:36:41.079
कारण ?

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00:36:41.079 --> 00:37:13.369
ब्रह्मा बाप ने सदा अपने नयनों में मस्तक में बाप को समाया ।

41
00:37:16.849 --> 00:37:47.710
तो आपके विशेष नयन मुख चलन बापदादा को समाया हुआ प्रत्यक्ष करें ।

42
00:37:54.219 --> 00:38:25.420
हर बोल में सिखाने वाला अनुभव हो यह जो भी बोल रही है बोल रहा है

43
00:38:26.110 --> 00:38:49.769
इसको सिखाने वाला इसमें शक्ति भरने वाला सर्वशक्तिवान बाप है भगवान है ।

44
00:38:52.969 --> 00:39:03.599
यह भगवान के बच्चे हैं भगवान के स्टूडेन्ट हैं

45
00:39:03.599 --> 00:39:22.400
भगवान को फालो करने वाले फालोअर्स नहीं लेकिन कदम में पदम बनाने वाले हैं ।

46
00:39:28.340 --> 00:39:49.539
अब समय भी आपका सहयोगी बनने के लिए तैयार है ।

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00:39:50.800 --> 00:40:01.650
हालतें बदल रही हैं ।

48
00:40:03.650 --> 00:40:19.650
जो हालतें न चाहते भी भगवान की याद दिलाती हैं ।

49
00:40:27.820 --> 00:40:49.250
तो एक समय और दूसरा आप निमित्त बने हुए दोनों ग्रुप की विशेषता है

50
00:40:49.250 --> 00:41:22.170
एक विशेष निमित्त बन बना बनाया ग्रुप मीटिंग में आये हो ।

51
00:41:26.000 --> 00:41:55.019
बापदादा ने देखा मैजारिटी आने वाले बच्चों की दिल में उमंग-उत्साह है

52
00:41:58.219 --> 00:42:15.199
कि हमें बाप को प्रत्यक्ष करना ही है ।

53
00:42:18.849 --> 00:42:53.420
चाहे सूरत से सूरत की सीरत से चाहे वाणी से चाहे कोई भी आत्मायें सम्बन्ध-सम्पर्क में हैं

54
00:42:54.679 --> 00:43:17.139
आजकल आपकी मन्सा आत्माओं के कल्याण की भावना से

55
00:43:19.820 --> 00:43:37.139
आपके कनेक्शन में आ रही हैं और आने भी चाहती हैं ।

56
00:43:41.769 --> 00:44:03.139
और जो बापदादा ने मन्सा सेवा का कार्य दिया है उसमें भी देखा

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00:44:05.420 --> 00:44:21.769
कि जो योगयुक्त होकर मन्सा सेवा का अभ्यास करते हैं

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00:44:22.219 --> 00:44:49.250
तो अभी यह वायबे्रशन चारों ओर किसी न किसी को पहुंच रहा है

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00:44:52.280 --> 00:45:19.139
कि हमें कहाँ से लाइट की किरणें सुख शान्ति की लहर आ रही है

60
00:45:19.139 --> 00:45:34.110
लेकिन कहाँ से आ रही है अभी वह स्पष्ट नहीं हुआ है ।

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00:45:34.110 --> 00:46:07.309
आ रही है लेकिन भारत के बापदादा के बच्चों से आ रही है वह स्पष्ट नहीं हुआ है ।

62
00:46:07.820 --> 00:46:13.199
नहीं तो भागेंगे ।

63
00:46:17.199 --> 00:46:54.570
अभी और शक्तिशाली किरणें ऐसी आत्माओं पर डालो

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00:46:55.309 --> 00:47:12.170
जो उन्हों को स्पष्ट हो जाए पहुंच रही है शुरू हुआ है अभी

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00:47:12.969 --> 00:47:24.619
लेकिन थोड़ा-थोड़ा कोई-कोई की किरणें पहुंचने लगी हैं

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00:47:28.849 --> 00:47:39.650
अभी इसको और शक्तिशाली बनाओ ।

67
00:47:53.139 --> 00:48:21.250
इसके लिए जो विघ्न पड़ता है पहुंचने में स्पष्ट होने में कारण बनता है

68
00:48:22.110 --> 00:48:54.449
योग लगाते हो अमृतवेले बैठते हो लेकिन ज्वालामुखी योग उसकी कमी है ।

69
00:48:55.309 --> 00:49:26.679
इसके कारण एक तो जिन भक्तों को या आत्माओं को आप किरणें भेजते हो वह इतनी स्पष्ट नहीं होती हैं ।

70
00:49:26.679 --> 00:49:58.449
और दूसरा ज्वालामुखी अग्नि स्वरूप योग की शक्ति न होने में या कमी होने में संस्कार

71
00:49:58.449 --> 00:50:17.420
जो बीच में विघ्न डालते हैं वह संस्कार भी समाप्त नहीं होते हैं ।

72
00:50:20.340 --> 00:50:54.619
पुरूषार्थ करते हो संस्कार परिवर्तन हो जाये लेकिन मरते हैं जलते नहीं हैं ।

73
00:51:03.820 --> 00:51:22.340
जैसे रावण को सिर्फ मारते नहीं हैं मारने के बाद जलाते हैं

74
00:51:23.019 --> 00:51:32.800
क्योंकि मारने के बाद शरीर तो रह जाता है ना !

75
00:51:37.769 --> 00:51:52.679
तो ऐसे ही आप अमृतवेले याद में बैठते हो

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00:51:53.079 --> 00:52:13.599
लेकिन योग अग्नि रूप में ज्वाला रूप में कम है ।

77
00:52:13.599 --> 00:52:47.139
मिलन मनाते हो रूहरिहान करते हो अपने जीवन की बातें भी करते हो ।

78
00:52:49.139 --> 00:53:20.170
लगातार योग अग्नि रूप हो संस्कार को मारते जरूर हो

79
00:53:20.170 --> 00:53:34.170
लेकिन वह मरता है लेकिन बीच-बीच में उठ जाता है ।

80
00:53:36.170 --> 00:53:44.510
जल जायेगा तो नाम रूप खत्म हो जायेगा ।

81
00:53:50.000 --> 00:54:09.599
अभी सभी बच्चे रूहरिहान में भी कहते हैं जितना चाहते हैं उतना नहीं है

82
00:54:15.019 --> 00:54:27.420
तो बापदादा आज यह इशारा दे रहे हैं

83
00:54:27.420 --> 00:54:55.019
क्योंकि स्पेशल महावीर बच्चे मीटिंग में आये हैं और मधुबन निवासी अर्थात् मधुबन में है क्या मधुबन अर्थात् बाबा ।

84
00:54:57.769 --> 00:55:05.079
मधुबन कहने से सबको क्या याद आता है ?

85
00:55:05.079 --> 00:55:09.769
मधुबन का बाबा ।

86
00:55:11.769 --> 00:55:27.599
तो मधुबन वालों को विशेष यह अटेन्शन रखना चाहिए

87
00:55:27.599 --> 00:55:39.420
कि मधुबन कहने से मधुबन का बाबा याद आता है !

88
00:55:43.019 --> 00:55:56.800
मधुबन में रहने वाले को किस दृष्टि से देखते हैं ?

89
00:55:59.599 --> 00:56:03.250
मधुबन वाले हाथ उठाओ ।

90
00:56:32.969 --> 00:56:36.909
बहुत हैं ।

91
00:56:36.909 --> 00:56:54.679
चाहे नीचे चाहे ऊपर लेकिन आज की सभा में सबसे ज्यादा मधुबन निवासी हैं ।

92
00:56:54.679 --> 00:57:22.000
बापदादा खुश है कि मधुबन निवासी यह कमाल अवश्य दिखायेंगे

93
00:57:24.679 --> 00:57:48.739
कि हर मधुबन निवासी के सूरत और सीरत से बाबा बाबा ही दिखाई दे ।

94
00:57:48.739 --> 00:58:15.250
बात से बाप दिखाई दे क्योंकि मधुबन में यज्ञ सेवा का बल और फल बहुत मिलता है ।

95
00:58:16.510 --> 00:58:26.679
लेने वाला लेवे लेकिन मिलता है ।

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00:58:29.539 --> 00:58:52.219
संस्कार को देखने या संस्कार मिलाने में

97
00:58:55.539 --> 00:59:16.679
और सदा अटेन्शन देने की आवश्यकता है ।

98
00:59:17.250 --> 00:59:40.000
बापदादा को हर मधुबन के बच्चों से विशेष प्यार है क्यों ?

99
00:59:41.539 --> 01:00:06.570
बाप के स्थापन किये यज्ञ की सेवा में स्वयं को समर्पण किया है ।

100
01:00:11.309 --> 01:00:34.909
मधुबन निवासियों को एक तो अपने पुरूषार्थ का फल मिल रहा है

101
01:00:34.909 --> 01:01:00.000
और दूसरा जो मधुबन में आने वाले चाहे ब्राह्मण चाहे नई आत्मायें आती हैं

102
01:01:00.969 --> 01:01:17.539
उन्हों की सेवा का यज्ञ सेवा है साधारण सेवा नहीं है

103
01:01:17.539 --> 01:01:28.280
यज्ञ सेवा का एकस्ट्रा पुण्य भी मिलता है ।

104
01:01:31.710 --> 01:02:11.250
अगर कोई भी मधुबन निवासी अपने बापदादा के श्रीमत पर अमृतवेले से रात तक श्रीमत प्रमाण चलता है

105
01:02:11.880 --> 01:02:29.650
तो उनको एकस्ट्रा मधुबन वाले खुद जाने नहीं जाने अलबेले रहें

106
01:02:29.650 --> 01:02:44.170
तो भी मधुबन का सेवा का पुण्य मिलता जरूर है ।

107
01:02:48.050 --> 01:02:58.110
मधुबन निवासी बनना साधारण बात नहीं है ।

108
01:02:59.369 --> 01:03:15.139
चाहे कोई कैसा भी काम कर रहा है चलो सफाई करा रहा है ।

109
01:03:22.619 --> 01:03:39.599
लेकिन ऐसे साधारण काम का भी पुण्य बहुत है

110
01:03:40.400 --> 01:03:51.250
क्योंकि बाप का रचा हुआ यज्ञ है ।

111
01:03:51.250 --> 01:04:08.679
इस यज्ञ से ही मधुबन में ही सभी को परमात्म प्यार प्राप्त होता है

112
01:04:08.679 --> 01:04:16.909
इसलिए सिवाए मधुबन के बाप कहाँ भी नहीं आता है ।

113
01:04:16.909 --> 01:04:35.599
यह मधुबन को बाप का आने का मिलने का मिलाने का पार्ट नूंधा हुआ है ।

114
01:04:36.510 --> 01:05:15.019
तो हर एक मधुबन वाले अपने पुण्य के खाते को जानो पहचानो और उस महान प्राप्ति स्वरूप बनो ।

115
01:05:21.309 --> 01:05:47.539
कुछ भी हो आपका काम है बड़ों तक पहुंचाना पहुंचाया अर्थात् दिल से निकाला आपकी जिम्मेवारी पूरी हुई ।

116
01:05:48.170 --> 01:06:04.510
अगर आप समझते हो कुछ हो नहीं रहा है तो आपका इसमें पाप नहीं बनेगा ।

117
01:06:04.510 --> 01:06:09.079
जो जिम्मेवार है उन्हों का बनेगा ।

118
01:06:09.079 --> 01:06:12.000
आप निश्चिंत रहो ।

119
01:06:12.000 --> 01:06:32.570
देना आपका काम है लेकिन सोचना क्या हुआ क्या नहीं हुआ यह क्यों नहीं हुआ वह क्यों नहीं हुआ

120
01:06:32.570 --> 01:06:43.599
इसकी आपको आवश्यकता नहीं है और ही व्यर्थ संकल्प चलेंगे ।

121
01:06:49.250 --> 01:06:57.250
आपकी जो जिम्मेवारी है वह आप करो पहुंचाओ ।

122
01:06:57.250 --> 01:07:16.000
लेकिन पहुंचाने के बाद पहुंचाना भी रीति प्रमाण मधुबन निवासी ब्राह्मण हो ऊंच हो

123
01:07:16.000 --> 01:07:37.199
अपने मर्तबे को जान ऐसा कर्तव्य करो जो आपको सब आपके कर्तव्य को सुनकर और भी सीखें ।

124
01:07:41.650 --> 01:08:02.000
मधुबन निवासी के ऊपर सभी को भावना है ।

125
01:08:06.849 --> 01:08:17.079
तो ऐसे भावना वालों को भावना का फल दिखाओ ।

126
01:08:21.199 --> 01:08:30.680
मधुबन वालों में बापदादा जानते हैं

127
01:08:30.680 --> 01:08:58.510
कि कोई कोई बच्चे बहुत मर्यादापूर्वक स्व पुरूषार्थी बाप से स्नेही बन सहयोग देने वाले भी बच्चे हैं ।

128
01:09:05.770 --> 01:09:20.279
लेकिन बापदादा यही चाहता है बापदादा की चाहना क्या है मधुबन निवासियों के प्रति ?

129
01:09:25.369 --> 01:10:01.939
मधुबन निवासी हर बाप का बच्चा यज्ञ स्नेही सहयोगी बन अपने चलन द्वारा सभी को बाप का परिचय दे

130
01:10:01.939 --> 01:10:19.710
कि हम मधुबन निवासियों का कितना बड़ा भाग्य है भाग्य को प्रसिद्ध करो

131
01:10:20.619 --> 01:10:35.649
क्योंकि यज्ञ निवासी हो परमात्मा ने क्या रचा पहले ? यज्ञ रचा ।

132
01:10:37.880 --> 01:10:47.140
और यज्ञ की धरनी निमित्त मधुबन है ।

133
01:10:58.220 --> 01:11:11.819
जानते हो ना मधुबन की महिमा जो जानते हैं मधुबन की महिमा वह हाथ उठाओ ।

134
01:11:17.770 --> 01:11:23.770
बापदादा यहाँ देखते हैं ।

135
01:11:49.880 --> 01:11:54.220
अच्छा बहुत अच्छा ।

136
01:11:54.220 --> 01:12:25.600
बापदादा बहुत बहुत शक्तिशाली दिल का प्यार दिल की दुआयें हर मधुबन निवासियों को दे रहा है ।

137
01:12:40.619 --> 01:12:57.539
और महारथियों को मीटिंग वालों को देख तो बहुत वाह बच्चे वाह !

138
01:12:57.539 --> 01:13:03.250
का दिल में गीत गा रहे हैं ।

139
01:13:03.250 --> 01:13:32.279
लेकिन जो भी मीटिंग में आये हैं उन्हों को एक बात में आगे बढ़ना है ।

140
01:13:32.279 --> 01:13:49.649
जो भी जितने भी आपके सेवा साथी हैं

141
01:13:52.510 --> 01:14:20.970
उन्हों को सदा अपने खुशी और प्राप्ति द्वारा सन्तुष्ट रखना

142
01:14:22.340 --> 01:14:36.399
अगर शिक्षा भी देते हो तो शिक्षा के साथ स्नेह भी देना ।

143
01:14:37.649 --> 01:14:51.479
जिससे वह स्नेह के आधार से अपने को आगे बढ़ा सके ।

144
01:14:51.479 --> 01:15:05.600
ऐसा स्नेह नहीं देना जो वह स्नेह का लाभ उठावे जो भी करो माफ है ।

145
01:15:08.279 --> 01:15:14.340
ऐसा स्नेह नहीं देना ।

146
01:15:20.619 --> 01:15:32.619
बापदादा खुश है जो निमित्त बने हैं अटेन्शन देते भी हैं

147
01:15:32.619 --> 01:15:45.020
लेकिन और अटेन्शन देके सन्तुष्ट भी करो

148
01:15:45.020 --> 01:16:08.970
और विश्व को सन्तुष्टी की किरणें पहुंचे यह भी कार्य निमित्त वालों को करना है ।

149
01:16:08.970 --> 01:16:18.800
उसका कारण कि जो निमित्त हैं

150
01:16:18.800 --> 01:16:46.109
उन्हों को अपने अपने हैण्डस के संस्कार परिवर्तन कराने में थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी ।

151
01:16:46.850 --> 01:17:02.739
सेवा कराते हो रहने खाने का प्रबन्ध मैजारिटी सेन्टर देते हैं

152
01:17:04.050 --> 01:17:32.680
लेकिन उन्हों में शक्ति ऐसी भरो जो बाप से शक्ति ले आपके सेवास्थान का वायुमण्डल ऐसा बनाये

153
01:17:32.680 --> 01:17:46.739
जो भी आवे वह पहले तो वायुमण्डल की आकर्षण में आ जाये

154
01:17:51.250 --> 01:18:14.909
क्योंकि आजकल सब यही चाहते हैं कि ऐसे कोई कार्य हो जो आने से ही अनुभव हो कुछ ।

155
01:18:16.909 --> 01:18:24.449
देखने से ही अनुभव हो कुछ ।

156
01:18:26.449 --> 01:18:36.800
सुनने का अनुभव होता है योग का अनुभव होता है

157
01:18:36.800 --> 01:19:03.939
लेकिन वायुमण्डल का भी अनुभव हो यह अटेन्शन निमित्त बनी हुई आत्माओं को रखना उनकी विशेष सेवा है ।

158
01:19:08.109 --> 01:19:30.850
स्वयं अगर योगयुक्त बन वायुमण्डल में ठीक स्थिति में रहते हैं

159
01:19:30.850 --> 01:19:43.479
तो उनका प्रभाव सेवास्थान पर आटोमेटिकली पड़ता है ।

160
01:19:43.479 --> 01:19:59.539
जैसे बापदादा वा बड़े निमित्त आत्मायें का वायुमण्डल वायबे्रशन पड़ता है ना ।

161
01:19:59.539 --> 01:20:09.479
बापदादा का वायुमण्डल बदलता है ना ।

162
01:20:09.479 --> 01:20:20.279
तो हर बच्चे को वायुमण्डल बनाने का

163
01:20:20.279 --> 01:20:40.680
क्योंकि अभी अपने सेन्टर्स का वायुमण्डल बदलेंगे तब संसार का वायुमण्डल बदलेगा ।

164
01:20:41.420 --> 01:20:49.939
निमित्त आपके सेवास्थान से ।

165
01:20:58.340 --> 01:21:11.880
पुरूषार्थ है लक्ष्य है लेकिन इस लक्ष्य को और पावरफुल बनाओ ।

166
01:21:20.739 --> 01:21:36.970
जिसको देखें लोग शक्ल से वायबे्रशन से जान जाते हैं आजकल

167
01:21:38.399 --> 01:21:53.199
क्योंकि आसुरी शक्ति का भी प्रभाव उन्हों की बुद्धि में है नॉलेज का भी प्रभाव है

168
01:21:55.199 --> 01:22:07.369
इसलिए जो भी मीटिंग में आये हो हर एक जिम्मेवार हो ।

169
01:22:07.369 --> 01:22:13.420
नहीं तो मीटिंग में नाम क्यों डाला ।

170
01:22:15.819 --> 01:22:47.369
हिम्मत है ना तब आपका नाम हुआ ना इसलिए अपना फर्ज प्रत्यक्ष करो ।

171
01:22:55.079 --> 01:23:04.850
करने चाहते भी हो बापदादा जानते हैं करने का प्रयत्न भी कर रहे हो

172
01:23:04.850 --> 01:23:16.050
लेकिन थोड़ा प्रयत्न को बढ़ाओ ।

173
01:23:21.310 --> 01:23:26.109
समझा ।

174
01:23:26.109 --> 01:23:39.539
आज खास बुलाया है प्यार के पाठ में तो जीत लिया ।

175
01:23:47.020 --> 01:23:56.279
चाहे मधुबन वालों का संकल्प था

176
01:23:56.970 --> 01:24:25.140
तो उन्हों के संकल्प की शक्ति आपके बुलाने की प्रैक्टिकल शक्ति प्यार से हुज्जत से बोला मधुबन वालों का भी कहना था

177
01:24:25.140 --> 01:24:34.340
लेकिन आपके मिलने से डबल हो गया ।

178
01:24:44.510 --> 01:24:47.649
अच्छा ।

179
01:24:47.649 --> 01:25:14.800
अभी और कुछ कहना है अभी बापदादा सबकी रिजल्ट देखने चाहते हैं ।

180
01:25:14.800 --> 01:25:29.310
मधुबन वाले या मीटिंग वाले दोनों की रिजल्ट देखने चाहते हैं ।

181
01:25:31.310 --> 01:25:55.140
जो जगत अम्बा का विशेष पुरूषार्थ रहा बाप का कहना और जगत अम्बा का करना ।

182
01:25:56.449 --> 01:26:10.800
आपकी दीदी का यही शब्द था अब घर चलना है अब घर चलना है ।

183
01:26:10.800 --> 01:26:31.819
आपकी दादी का यही संकल्प रहा अब कर्मातीत होना है कर्मातीत होने के क्लास कराना कर्मातीत का उमंग दिलाना ।

184
01:26:35.020 --> 01:26:49.310
आपके पाण्डव जो गये उन्हों का भी यही दिल में संकल्प रहा

185
01:26:49.310 --> 01:27:01.479
कि हमें जो पाण्डव पाण्डवों को विजयी कहा जाता है

186
01:27:02.619 --> 01:27:15.939
तो पाण्डवों का जो लक्ष्य रहा और है भी कि जो गायन है

187
01:27:15.939 --> 01:27:27.140
विजयी पाण्डव पाण्डव कहो तो क्या याद आता है विजय ।

188
01:27:27.819 --> 01:27:39.710
चाहे अक्षोणी सेना थी तो भी पाण्डव शब्द कहने से विजय याद आती है ।

189
01:27:39.710 --> 01:27:46.680
5 पाण्डव लेकिन विजयी ।

190
01:27:46.680 --> 01:27:58.109
कैसा भी वायुमण्डल हो अक्षोणी सेना का वायुमण्डल था

191
01:27:58.569 --> 01:28:17.600
लेकिन पाण्डव पाण्डवपति की श्रीमत से विजयी बने और विजय का नाम बाला किया ।

192
01:28:17.600 --> 01:28:35.939
अभी वही पाण्डव विजयी बन औरों को भी विजय दिलाने वाले ।

193
01:28:36.970 --> 01:28:51.079
तो पाण्डवों को देख करके बापदादा खुश होते हैं किस बात में खुश होते हैं ?

194
01:28:51.079 --> 01:28:59.600
कि शक्तियों के साथी हैं ।

195
01:29:01.199 --> 01:29:14.220
शक्तियों को सहयोग दे आगे बढ़ाने में साथी हैं ।

196
01:29:14.800 --> 01:29:31.939
जैसे बाप ने शक्तियों को शिवशक्ति का मन्त्र दे कम्बाइन्ड बनाया

197
01:29:31.939 --> 01:29:49.310
ऐसे पाण्डव भी शक्तियों को जो पाण्डवों में विशेषता है

198
01:29:49.310 --> 01:30:04.109
उस विशेषताओं में शक्तियों को सहयोग देके आगे रखने वाले अच्छे हैं

199
01:30:04.109 --> 01:30:17.310
और सदा अच्छे ते अच्छे बन आगे बढ़ने वाले हैं ।

200
01:30:23.600 --> 01:30:49.020
अच्छा । बापदादा आज आपके स्नेह को देख आप सबको स्नेह का हार पहनाते हैं ।

201
01:31:05.079 --> 01:31:25.199
बस आप भी हर एक को स्नेह सहयोग का हार पहनाओ ।

202
01:31:25.199 --> 01:31:34.909
बांहों का हार नहीं दिल में सहयोग का हार पहनाओ ।

203
01:31:35.369 --> 01:31:53.770
बापदादा ने पहले भी कहा है हर एक बच्चे के जेब में सहयोग के नोट होने चाहिए ।

204
01:31:57.479 --> 01:32:08.619
तो गलतियां नोट नहीं लेकिन सहयोग के नोट से जेब भरा हुआ होना चाहिए ।

205
01:32:08.619 --> 01:32:19.250
कहाँ भी देखो सहयोग चाहिए तो सहयोग का नोट दो ।

206
01:32:23.420 --> 01:32:25.310
है जेब में ?

207
01:32:25.310 --> 01:32:28.399
सहयोग के नोट हैं ?

208
01:32:28.399 --> 01:32:31.020
भरा हुआ है ।

209
01:32:31.020 --> 01:32:39.020
खीसा भरा हुआ है खाली तो नहीं है ?

210
01:32:41.420 --> 01:32:57.079
आप सहयोग का नोट दो और वह आपको दुआओं का हार पहनायेंगे ।

211
01:33:03.649 --> 01:33:18.050
तो अगली सीजन में जब आयेंगे तो क्या खुशखबरी सुनायेंगे ?

212
01:33:18.909 --> 01:33:29.310
संस्कार का संस्कार हो गया ।

213
01:33:34.399 --> 01:33:36.569
रेडी ?

214
01:33:36.569 --> 01:33:39.199
सब रेडी है ?

215
01:33:39.199 --> 01:33:41.420
रेडी है ?

216
01:33:41.420 --> 01:33:47.819
यह पहली लाइन हाथ नहीं उठाती है ।

217
01:33:51.420 --> 01:33:54.449
हाथ उठाया ।

218
01:33:58.510 --> 01:34:01.369
सभी ने उठाया ।

219
01:34:01.369 --> 01:34:04.739
पीछे वालों ने उठाया ।

220
01:34:10.220 --> 01:34:26.800
तो एडवांस में यह खुशखबरी सुनायेंगे ना !

221
01:34:30.399 --> 01:34:47.199
संस्कार मिटाते हो लेकिन जलाते नहीं हो इसलिए फिर निकल आते हैं ।

222
01:34:56.850 --> 01:35:12.399
इसीलिए कहा कि संस्कार का संस्कार कर देना ।

223
01:35:14.399 --> 01:35:38.909
दबाना नहीं संस्कार कर देना क्योंकि समय को आपको समीप लाना है ।

224
01:35:40.279 --> 01:36:11.819
आपके एडवांस पार्टी की विशेष आत्मायें और बाप सूक्ष्मवतन निवासी इंतजार कर रहे हैं ।

225
01:36:16.340 --> 01:36:21.880
आपको उन्हों का संकल्प पहुंचता है ।

226
01:36:21.880 --> 01:36:27.819
वह डेट मांगते हैं ?

227
01:36:36.050 --> 01:36:57.310
आपकी बड़ी बड़ी दादियां और दादायें दोनों डेट का इंतजार कर रहे हैं ।

228
01:36:57.770 --> 01:37:02.680
तो उन्हों को डेट देंगे !

229
01:37:02.680 --> 01:37:04.680
देंगे ?

230
01:37:04.680 --> 01:37:07.250
पहली लाइन बताओ ।

231
01:37:07.250 --> 01:37:10.800
डेट देंगे ?

232
01:37:11.369 --> 01:37:18.619
कि कहेंगे वेट एण्ड सी ।

233
01:37:31.479 --> 01:37:36.170
हर एक इसमें क्या करना है ?

234
01:37:36.170 --> 01:37:50.109
हर एक अपने रहे हुए संस्कारों का संस्कार कर लो समय समीप आ जायेगा ।

235
01:37:53.250 --> 01:38:03.020
समय को समीप लाने का यही तरीका है ।

236
01:38:03.020 --> 01:38:15.079
जो विघ्न डाल रहा है रहे हुए संस्कार ।

237
01:38:22.399 --> 01:38:39.479
तो अभी जब दूसरे बारी सीजन शुरू होगा उसमें दिन हैं काफी दिन हैं ।

238
01:38:40.279 --> 01:38:59.939
राज़ कोई न कोई संस्कार का संस्कार कर देना ।

239
01:39:03.479 --> 01:39:11.770
एक एक का करते जाओ इतने दिन हैं ।

240
01:39:18.000 --> 01:39:29.079
तो कौन कहता है अगले बारी जब बापदादा आये

241
01:39:29.079 --> 01:39:41.020
तो हम हाथ उठायेंगे संस्कार का संस्कार हो गया ।

242
01:39:41.539 --> 01:39:45.369
हाथ उठाओ वह ।

243
01:39:45.369 --> 01:39:49.079
हो गया ?

244
01:39:59.819 --> 01:40:02.569
हाथ तो उठा रहे हैं ।

245
01:40:02.569 --> 01:40:16.970
बापदादा एडवांस में बहुत बहुत बहुत मुबारक दे रहे हैं ।

246
01:40:21.079 --> 01:40:23.140
अच्छा ।

247
01:40:23.140 --> 01:40:29.939
बाप ने वायदा निभाया ना ।

248
01:40:31.310 --> 01:40:39.420
तो आप भी वायदा निभाने में होशियार हैं ।

249
01:40:46.800 --> 01:40:54.800
बाप को हर बच्चा प्यारा है ।

250
01:40:54.800 --> 01:41:05.939
कोई भी अपने को यह नहीं समझे कि बापदादा को हम प्यारे कहाँ होंगे ।

251
01:41:05.939 --> 01:41:09.539
हम तो पीछे हैं हम तो यह हैं ।

252
01:41:09.539 --> 01:41:24.279
पीछे वाला भी बाप को अति अति अति प्यारा है क्योंकि बाप को मेरा बाबा तो कहा ना।

253
01:41:29.649 --> 01:42:42.340
तो अभी चारों ओर के बच्चे जिन्हों को भी मालूम होगा वह दूर बैठे बच्चों को भी बापदादा मुबारक दे रहे हैं और इनएडवांस विजयी बनने की खुशखबरी का रेसपान्ड दिल में समा रहे हैं।

254
01:42:42.340 --> 01:42:49.199
अभी साकार में देखेंगे ।

255
01:42:55.600 --> 01:42:57.770
अच्छा ।

256
01:42:57.770 --> 01:43:02.909
आज तो और कुछ करना नहीं है ।

257
01:43:03.649 --> 01:43:15.369
मिलना और खुश करने का ही आज का पार्ट है ।

258
01:43:17.369 --> 01:43:41.880
बापदादा को खुशी है अच्छा मधुबन वाले जो मुख्य स्थान है उनका नाम लेते जाओ और हाथ उठावें ।

259
01:43:52.109 --> 01:45:34.170
( पाण्डव भवन ज्ञान सरोवर शान्तिवन निवासी हॉस्पिटल संगम भवन पीस पार्क म्युजियम आबू निवासी कालोनी सहित सभी को अलग-अलग ग्रुप में खड़ा किया )

260
01:47:17.369 --> 01:47:27.479
सबसे ज्यादा शान्तिवन में हैं ।

