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1
00:18:20.400 --> 00:19:14.279
आज बापदादा अपने सामने या चारों तरफ के अपने छोटे से संसार को देख हर्षित हो रहे हैं

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00:19:17.539 --> 00:19:47.420
क्योंकि यह संसार है छोटा लेकिन अति प्यारा है

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00:19:55.309 --> 00:20:34.680
क्योंकि यह संसार की एक-एक आत्मा श्रेष्ठ आत्मा हैं ।

4
00:20:42.799 --> 00:20:50.000
कोटों में कोई आत्मायें हैं ।

5
00:21:08.619 --> 00:21:21.650
बाप के वर्से के अधिकारी आत्मायें हैं ।

6
00:21:40.049 --> 00:22:22.000
बापदादा हर बच्चे को देख खुश होते हैं कि यह एक-एक बच्चा राजा बच्चा है ।

7
00:22:38.740 --> 00:23:11.769
बापदादा ने हर एक बच्चे को स्वराज्य अधिकारी और विश्व राज्य अधिकारी बनाया है ।

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00:23:18.000 --> 00:24:11.710
इस समय सभी स्वराज्य अधिकारी हैं अर्थात् मन-बुद्धि , संस्कार , कर्मेन्द्रियों के राजा हैं ।

9
00:24:13.539 --> 00:24:24.170
कर्मेन्द्रियों के वश नहीं हैं ।

10
00:24:25.539 --> 00:24:31.369
मन के भी मालिक हैं ।

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00:24:38.799 --> 00:25:05.309
तो ऐसे ही आप हर एक बच्चा अपने को मन के मालिक ,

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00:25:07.309 --> 00:25:21.480
संस्कारों के भी मालिक समझते हो ?

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00:25:31.250 --> 00:25:51.599
ऐसे तो नहीं कभी आप मन के मालिक होते वा कभी मन आपका मालिक होता !

14
00:25:54.109 --> 00:26:12.170
क्योंकि कहते ही हो मेरा मन , मैं मन नहीं कहते हो ।

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00:26:16.970 --> 00:26:28.680
तो मेरे के आप मालिक हो ।

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00:26:31.819 --> 00:26:44.680
चेक करो कभी मन तो मालिक नहीं बन जाता ?

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00:26:51.539 --> 00:27:24.569
क्योंकि इस समय बापदादा ने हर एक को स्वराज्य अधिकारी के सीट पर बिठाया है ।

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00:27:25.599 --> 00:27:54.109
अब के स्वराज्यधारी हो और भविष्य का राज्य तो आपका है ही ।

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00:27:56.109 --> 00:28:04.279
डबल राज्य अधिकारी हो ।

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00:28:09.309 --> 00:29:02.220
बापदादा देखते हैं हर बच्चा स्वराज्य अधिकारी के साथ स्वमानधारी भी है ।

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00:29:04.740 --> 00:29:26.799
तो मैं स्वमानधारी आत्मा हूँ , इस स्मृति में बैठो

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00:29:29.650 --> 00:29:50.799
तो देखो कितने स्वमानों की लिस्ट आपके सामने आती है ।

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00:29:56.970 --> 00:30:17.650
अनेक स्वमान की माला सामने आ जाती है ना !

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00:30:27.019 --> 00:31:09.539
बापदादा ने बच्चों के स्वमानों की माला हर बच्चे को डाली है ।

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00:31:15.940 --> 00:31:47.200
स्वमान सुनते ही आपके सामने भी अपने स्वमान स्मृति में आ गये !

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00:31:54.279 --> 00:32:29.940
याद करो , अनादि स्वरूप में आपका स्वमान कितना बड़ा है !

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00:32:36.220 --> 00:32:44.339
चले गये अनादि स्वरूप में ?

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00:32:59.940 --> 00:33:17.309
हर एक का स्वमान है एक तो बाप के साथ-साथ है

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00:33:18.910 --> 00:33:54.910
चमकती हुई आत्मा , बाप के साथ के कारण विशेष चमकती हुई दिखाई दे रही है ।

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00:33:57.880 --> 00:34:02.339
देख रहे हो ?

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00:34:06.450 --> 00:34:26.969
जैसे आकाश में भी यहाँ कोई-कोई सितारा विशेष चमकता है ,

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00:34:28.969 --> 00:34:56.849
ऐसे बाप के साथ-साथ होने कारण चमकती हुई आत्मा हो ।

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00:34:58.219 --> 00:35:09.769
याद आया अपना अनादि स्वरूप ?

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00:35:13.480 --> 00:35:34.969
सेकण्ड में अपने अनादि स्वरूप में स्थित हो सकते हो ?

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00:35:40.739 --> 00:36:32.219
अभी एक सेकण्ड में उस अनादि स्वरूप में एक सेकण्ड के लिए स्थित हो जाओ ।

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00:36:56.619 --> 00:37:03.019
कितना नशा चढ़ता है !

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00:37:29.820 --> 00:38:09.539
आगे बढ़ो , इस सृष्टि चक्र के आदि में आ गये !

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00:38:15.599 --> 00:39:14.280
यह ड्रिल करो सतयुग आदि में अपना स्वरूप देखो , कितना श्रेष्ठ सुख स्वरूप है ।

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00:39:24.619 --> 00:39:32.400
कितना सर्व प्राप्ति स्वरूप है ।

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00:39:45.139 --> 00:39:52.400
दुःख का नामनिशान नहीं है ।

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00:40:03.940 --> 00:40:23.079
प्रकृति कितनी सुन्दर सतोगुणी है ।

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00:40:38.000 --> 00:41:00.619
अनुभव करो अपने देवता स्वरूप का ।

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00:41:09.880 --> 00:41:17.139
देख रहे हो अपना स्वरूप ?

44
00:41:24.340 --> 00:42:14.800
कोई भी राजा हो , महात्मा हो , नेता हो ऐसा सर्व प्राप्ति स्वरूप कोई देखा !

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00:42:42.280 --> 00:43:07.250
तो एक सेकण्ड के लिए अपने देवता स्वरूप में स्थित हो जाओ ।

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00:43:44.170 --> 00:44:02.449
अपने स्वमान में मजा आता है ना !

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00:44:04.449 --> 00:44:37.199
हम सो देवता … बापदादा यह ड्रिल करा रहा है ।

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00:44:44.849 --> 00:45:00.000
फिर नीचे आओ कौन सा युग आ गया ?

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00:45:15.250 --> 00:45:32.849
द्वापर में भी आपका स्वमान पूज्य का है ।

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00:45:32.849 --> 00:45:38.400
पूज्य स्वरूप है ।

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00:45:42.969 --> 00:45:50.340
अपने पूज्य स्वरूप को देख रहे हो ?

52
00:46:07.820 --> 00:46:43.369
कितने सभी भावना से कायदे प्रमाण पूजा करते हैं ।

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00:46:43.369 --> 00:47:02.619
ऐसे कायदे प्रमाण पूजा और किसी की भी नहीं होती ।

54
00:47:03.769 --> 00:47:23.940
चाहे धर्म पितायें आये , चाहे गुरू बनें , नेतायें बनें , अभिनेतायें बनें

55
00:47:24.619 --> 00:47:44.909
लेकिन ऐसी कायदे प्रमाण पूजा किसकी नहीं होती ।

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00:47:47.650 --> 00:47:58.679
तो अपना स्वमान देखा , अनुभव किया ?

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00:48:17.139 --> 00:48:40.050
अब आओ संगम में , सब चक्र लगा रहे हो ?

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00:48:40.050 --> 00:48:45.599
पीछे वाले चक्र लगा रहे हो !

59
00:48:45.599 --> 00:48:48.280
हाथ उठाओ ।

60
00:48:50.679 --> 00:49:02.449
देखो अपना स्वमान क्योंकि स्वराज्य अधिकारी हो ना !

61
00:49:06.000 --> 00:49:19.539
तो संगम पर स्वयं भगवान ,

62
00:49:24.219 --> 00:49:57.769
आपकी जीवन में स्वयं मालिक आप बच्चों में पवित्रता की विशेषता भरता है ।

63
00:50:06.170 --> 00:50:44.340
जो पवित्रता आपके सर्व अविनाशी सुखों की खान है ।

64
00:50:48.449 --> 00:50:55.019
और बनाने वाला कौन ?

65
00:50:57.539 --> 00:51:03.369
स्वयं भगवान ।

66
00:51:09.309 --> 00:51:39.250
वह तो अभी भी प्रत्यक्ष प्रमाण आपको पवित्रता की जायदाद बाप से प्राप्त हो गई है ।

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00:51:48.619 --> 00:52:15.139
अब चेक करो - पवित्रता सर्व प्राप्तियों का आधार है ,

68
00:52:18.570 --> 00:52:41.079
पवित्रता से आप सभी मास्टर सर्वशक्तिमान बन गये ।

69
00:52:43.710 --> 00:52:56.570
तो चेक करो सर्वशक्तियां प्राप्त हैं ?

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00:52:59.079 --> 00:53:12.050
कोई-कोई बच्चे कहते हैं बाप ने तो सर्व शक्तियां दी

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00:53:12.050 --> 00:53:36.570
लेकिन कोई-कोई समय जिस शक्ति की आवश्यकता होती है वह थोड़ा टाइम के बाद आती है ।

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00:53:36.570 --> 00:53:42.570
बात पूरी हो जाती है फिर आती है ।

73
00:53:46.739 --> 00:53:52.170
इसका कारण क्या ?

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00:53:55.820 --> 00:54:11.820
वरदान में बाप ने दी फिर भी समय पर नहीं आती है उसका कारण क्या ?

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00:54:18.570 --> 00:54:41.710
अपने मास्टर सर्वशक्तिमान के स्मृति की सीट पर नहीं होते हो ,

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00:54:44.400 --> 00:54:57.309
कोई भी किसका आर्डर मानते हैं तो सीट वाले का आर्डर मानते हैं ।

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00:55:03.369 --> 00:55:30.679
तो जब भी आप कोई भी शक्ति का आर्डर करते हो , पहले यह देखो स्मृति की सीट पर हैं ?

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00:55:30.679 --> 00:55:37.650
स्वमान के सीट पर हैं ?

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00:55:51.250 --> 00:56:02.679
स्मृति की सीट पर स्थित हो जाओ

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00:56:07.480 --> 00:56:39.710
तो सर्व शक्तियां आपके पास समय पर बंधी हुई हैं आने के लिए

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00:56:45.539 --> 00:57:04.739
क्योंकि सर्वशक्तिमान बाप ने आपको मास्टर सर्वशक्तिमान बनाया है ।

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00:57:11.599 --> 00:57:34.739
तो इतने पावरफुल स्वमानधारी बन चल रहे हो ना ?

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00:57:35.599 --> 00:57:41.199
अपने स्वमान देखे ?

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00:57:44.400 --> 00:57:50.849
संगम के बाद कहाँ जायेंगे ?

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00:57:52.400 --> 00:57:58.570
रिटर्न जरनी करेंगे ना !

86
00:58:01.420 --> 00:58:34.219
इसलिए बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक सारे दिन में यह एक्सरसाइज़ करते रहें ।

87
00:58:35.369 --> 00:58:54.570
समय निकालो बार-बार यह स्वमान की माला पहनाने से , अनुभव करने से

88
00:58:58.000 --> 00:59:35.480
जो बापदादा ने स्वराज्य अधिकारी बनाया है , वह हो नहीं सकता कि स्वमान आपके आर्डर पर नहीं चले ।

89
00:59:36.449 --> 00:59:42.050
सिर्फ सीट पर सेट रहो ।

90
00:59:47.199 --> 01:00:07.710
बापदादा ने देखा सभी अटेन्शन रखते हैं

91
01:00:09.710 --> 01:00:23.940
लेकिन नियमित रूप से अपनी दिनचर्या सेट करो ।

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01:00:23.940 --> 01:00:42.110
बीच-बीच में यह अपने स्वमान के स्मृति स्वरूप में स्थित रहो ।

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01:00:47.710 --> 01:00:54.449
जैसे ट्रैफिक कन्ट्रोल करते हो

94
01:01:00.219 --> 01:01:32.510
ऐसे यह स्वमान की स्मृति आदिकाल से रिटर्न जरनी तक की , बीच-बीच में टाइम फिक्स करो ।

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01:01:34.800 --> 01:01:47.599
यह चलते फिरते भी कर सकते हो क्योंकि मन को सीट पर बिठाना है ।

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01:01:57.940 --> 01:02:20.739
बापदादा ने देखा , पहले भी कहा है योग सब लगाते हो लेकिन अब आवश्यकता किसकी है ?

97
01:02:23.650 --> 01:03:02.800
समय की हालतों को देख पहले भी सुनाया अब ज्वालामुखी योग की आवश्यकता है , जिससे डबल काम होगा ।

98
01:03:04.800 --> 01:03:32.969
एक तो अपने पुराने संस्कार का संस्कार हो जायेगा ,

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01:03:41.309 --> 01:03:56.739
अभी संस्कारों को मारते हो लेकिन जलाते नहीं हो ।

100
01:03:59.710 --> 01:04:09.650
मारने के बाद फिर भी कभी-कभी वह जाग जाते हैं ।

101
01:04:14.219 --> 01:04:27.019
जैसे रावण को सिर्फ मारा नहीं , जलाया ।

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01:04:28.219 --> 01:04:54.340
ऐसे आप भी अपने पुराने संस्कारों को जो बीच-बीच में तीव्र पुरूषार्थ में कमी कर देते हैं ,

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01:05:02.000 --> 01:05:19.650
उसके लिए ज्वालामुखी योग की आवश्यकता है ।

104
01:05:19.650 --> 01:05:39.369
एक स्वयं के लिए और दूसरा ज्वालामुखी योग द्वारा

105
01:05:43.369 --> 01:06:02.219
औरों को भी लाइट रूप होने के कारण , माइट रूप होने के कारण

106
01:06:04.219 --> 01:06:22.000
उन्हों को भी अपनी किरणों द्वारा सहयोग दे सकते हो ।

107
01:06:30.619 --> 01:07:04.849
तो अभी सभी ने योग को ज्वालामुखी योग में परिवर्तन किया ?

108
01:07:07.820 --> 01:07:39.710
समय अनुसार अभी आत्माओं को आपके सहयोग की आवश्यकता है ।

109
01:08:00.619 --> 01:08:41.770
बाकी बापदादा तो अमृतवेले हर बच्चे को स्नेह देते हैं ।

110
01:08:48.050 --> 01:09:09.250
बापदादा देखते हैं लक्ष्य बहुत अच्छा रखते हैं ,

111
01:09:12.619 --> 01:09:19.939
हिम्मत भी रखते हैं

112
01:09:25.250 --> 01:09:59.710
लेकिन सारा दिन उसी अटेन्शन में रहें , जैसे अमृतवेले रहता है , वह कम हो जाता है ।

113
01:10:01.710 --> 01:10:08.000
कारण क्या होता है ?

114
01:10:12.170 --> 01:10:46.800
यह जो कर्म में लगते हो , कर्मयोगी बन कर्म करना , इसमें अन्तर पड़ जाता है ।

115
01:10:51.369 --> 01:11:02.399
आप सिर्फ योग लगाने वाले नहीं हो , योगी जीवन वाले हो ।

116
01:11:05.539 --> 01:11:15.020
तो जीवन सदा रहती है , कभी-कभी नहीं ।

117
01:11:20.739 --> 01:11:27.479
तो बापदादा अभी क्या चाहते हैं ?

118
01:11:40.050 --> 01:12:03.939
प्यार में तो बहुत करके पास हैं ,

119
01:12:13.199 --> 01:12:21.710
प्यार की सबजेक्ट में बाप ने देखा

120
01:12:25.420 --> 01:13:16.909
मैजारिटी बाप के साथ मेरा बाबा , मेरा बाबा कह प्यार का अनुभव करते हैं ।

121
01:13:17.199 --> 01:13:38.050
प्यार में तो मैजारिटी पास हैं , अब किसमें पास होना है ?

122
01:13:42.340 --> 01:13:48.970
बाप समान बनने में ।

123
01:13:52.170 --> 01:13:56.170
सभी क्या चाहते हैं ?

124
01:13:56.170 --> 01:14:12.340
बाप समान बनना है कि बाप बाप रहेगा आप बच्चे हैं , तो बाप समान तो बनना पड़ेगा ।

125
01:14:17.310 --> 01:14:22.220
प्यार माना क्या ?

126
01:14:23.310 --> 01:14:44.399
प्यार वाला जो कहे वह करना ही है ।

127
01:14:45.140 --> 01:14:58.399
तो सभी बाप के प्यारे हो , बाप का प्यार आपसे है , इसमें हाथ उठाओ ।

128
01:14:58.399 --> 01:15:04.619
प्यार है अच्छा , प्यार है ?

129
01:15:33.199 --> 01:16:00.399
तो अभी बापदादा यही चाहते हैं कि जैसे प्यार है , ऐसे यह लक्ष्य रखो

130
01:16:00.850 --> 01:16:13.710
कि हमें बाप समान बनना ही है , इसमें हाथ उठाओ ।

131
01:16:13.710 --> 01:16:24.569
तो निश्चय रखते हैं , हाथ तो बहुत अच्छा उठाते हैं ।

132
01:16:28.399 --> 01:16:35.140
बापदादा देख रहे हैं ।

133
01:16:46.000 --> 01:17:29.079
बापदादा चाहता है एक-एक बच्चा ऐसा खुशनुमा , खुशनसीब दिखाई दे , चेहरे से चलन से

134
01:17:36.000 --> 01:18:05.079
क्योंकि समय प्रमाण अभी आपका चेहरा बहुत सेवा करेगा ।

135
01:18:05.079 --> 01:18:09.770
आवश्यकता पड़ेगी ।

136
01:18:16.050 --> 01:18:33.369
इसके लिए बापदादा चाहता है कि अभी से लक्ष्य रखो

137
01:18:33.939 --> 01:18:54.170
जैसे अभी यह 75 वर्ष के कारण सबको उमंग है सेवा करने का ।

138
01:18:55.939 --> 01:19:06.970
ऐसे उमंग हो चेहरे से सेवा करने का

139
01:19:08.970 --> 01:19:25.770
क्योंकि दिनप्रतिदिन समय नाज़ुक आना ही है ।

140
01:19:31.939 --> 01:19:57.020
तो ऐसे समय पर आपका चेहरा आत्माओं को चियरफुल बना दे ।

141
01:20:05.079 --> 01:20:34.680
बापदादा ने आज अमृतवेले चक्र लगाया , तो क्या देखा ?

142
01:20:40.279 --> 01:20:52.680
बैठते सभी अपने रूचि से भी हैं

143
01:20:56.449 --> 01:21:24.000
लेकिन सबसे बड़ी अथॉरिटी है अनुभव की ।

144
01:21:30.220 --> 01:22:24.340
तो देखा बैठते हैं लेकिन अनुभव की अथॉरिटी , स्मृति में बैठते हैं लेकिन स्मृति स्वरूप अनुभव हो ।

145
01:22:34.739 --> 01:23:02.279
अनुभव की अथॉरिटी का आनंद वह थोड़ा समय होता है ।

146
01:23:10.569 --> 01:23:29.079
सोचते हैं मैं बापदादा के तख्तनशीन हूँ

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01:23:34.000 --> 01:24:11.880
लेकिन स्वरूप के स्मृति स्वरूप अनुभवी मूर्त , अनुभव में खो जाये

148
01:24:16.680 --> 01:24:44.970
उसका अभी और भी आगे बढ़ाना होगा क्योंकि अनुभव की अथॉरिटी सबसे बड़े ते बड़ी है ।

149
01:24:49.310 --> 01:25:01.939
स्मृति स्वरूप रहना इसको कहा जाता है अनुभव ।

150
01:25:12.619 --> 01:25:29.770
तो अनुभव में खो जाना जो स्वरूप की स्मृति रखते हैं

151
01:25:30.109 --> 01:25:59.079
उस स्वरूप की अनुभूति में रहना इसकी और आवश्यकता है

152
01:26:01.079 --> 01:26:14.569
क्योंकि अनुभव कभी भी भूलता नहीं है ।

153
01:26:22.850 --> 01:26:45.199
किसी को भी आप किसी के अनुभव द्वारा सुनाने की कोशिश करते हो क्योंकि अनुभव का प्रभाव पड़ता है ।

154
01:26:49.020 --> 01:27:02.970
तो स्वयं को जो स्वरूप स्मृति में रखते हो

155
01:27:04.970 --> 01:27:19.539
उसके स्वरूप की अनुभूति में खो जाये ,

156
01:27:25.600 --> 01:27:44.399
अनुभव अपने पुरूषार्थ में भी बहुत मदद करता है ।

157
01:27:52.399 --> 01:28:11.710
तो बापदादा ने देखा अनुभव की अथॉरिटी में नम्बरवार हैं ।

158
01:28:20.800 --> 01:28:44.449
तो अभी इस अनुभव की अथॉरिटी के अभ्यास के ऊपर और अटेन्शन दो ।

159
01:28:50.050 --> 01:29:29.880
अनुभव स्वरूप की स्थिति सदा समाई हुई रहती है , उसकी शक्ल , चलन सेवा करती है ।

160
01:29:37.250 --> 01:30:04.800
तो आज बापदादा बच्चों का रिकार्ड देख रहे थे ।

161
01:30:12.220 --> 01:30:44.449
तो एक तो ज्वालामुखी योग के ऊपर और अटेन्शन दो जिससे स्वभाव संस्कार परिवर्तन में सहयोग मिलेगा ।

162
01:30:59.020 --> 01:31:24.739
संस्कार अभी भी जिसको आप नेचर कहते हो वह अभी भी अपना कार्य बीच-बीच में कर लेती है ।

163
01:31:34.109 --> 01:31:46.800
बाकी बापदादा खुश है , किस बात पर ?

164
01:31:46.800 --> 01:31:57.079
जानते हो , किस बात पर बापदादा खुश है ?

165
01:31:58.000 --> 01:32:01.880
जानते हो ?

166
01:32:12.279 --> 01:32:57.140
आजकल की मुरलियां सुनते हुए बापदादा ने देखा अपने दिनचर्या में अटेन्शन ज्यादा गया है ।

167
01:33:11.199 --> 01:33:26.739
अटेन्शन बढ़ा है तो टेन्शन संस्कारों का कम होता जायेगा ।

168
01:33:29.079 --> 01:33:47.819
बापदादा ने पहले भी कहा जब भी टेन्शन आवे ना , ए लगा दो , एड कर दो ए अटेन्शन ।

169
01:33:52.050 --> 01:33:56.279
चलना तो सबको है ही ।

170
01:33:56.279 --> 01:34:00.970
यह तो वायदा है ही पक्का ।

171
01:34:00.970 --> 01:34:09.539
साथ चलेंगे , साथ राज्य करेंगे ।

172
01:34:31.199 --> 01:34:37.770
तो सभी खुश है ?

173
01:34:37.770 --> 01:34:43.140
कि कभी-कभी खुश है ?

174
01:34:44.510 --> 01:35:04.739
जो समझते हैं हम सदा खुश हैं , कभी-कभी नहीं , सदा खुश हैं , देखो सोचके हाथ उठाओ ।

175
01:35:18.109 --> 01:35:20.510
अच्छा ।

176
01:35:20.510 --> 01:35:28.619
हाथ भी सोचके उठा रहे हैं ।

177
01:35:53.140 --> 01:36:14.680
खुशी अपनी चीज़ है ।

178
01:36:14.680 --> 01:36:19.939
अपनी चीज़ क्यों जाये ?

179
01:36:30.569 --> 01:36:34.569
तो अभी क्या करेंगे ?

180
01:36:34.569 --> 01:36:40.220
आगे चलना तो है ही ।

181
01:36:40.220 --> 01:36:45.649
तो अभी आगे क्या करेंगे ?

182
01:36:57.420 --> 01:37:44.399
हर सेन्टर निर्विघ्न , व्यर्थ संकल्प रहित हो सकता है ?

183
01:37:44.399 --> 01:37:49.420
हो सकता है ?

184
01:37:54.220 --> 01:37:59.770
कि इसके लिए समय चाहिए ?

185
01:38:01.310 --> 01:38:20.569
अभी तक बापदादा के पास कोई सेन्टर ने यह रिपोर्ट नहीं दी है कि हमारा सेन्टर सदा निर्विघ्न है ।

186
01:38:21.020 --> 01:38:24.340
साथी भी ।

187
01:38:24.340 --> 01:38:36.909
सिर्फ स्वयं नहीं , साथी भी निर्विघ्न ।

188
01:38:47.199 --> 01:38:52.909
वह भी टाइम आना है ।

189
01:38:59.939 --> 01:39:20.170
हो जायेगा क्योंकि बनना तो बच्चों को ही है और कोई एक्जैम्पुल में आयेंगे जो पीछे तीव्र पुरुषार्थी बन आगे जायेंगे

190
01:39:20.170 --> 01:39:29.649
लेकिन मैजारिटी तो आपको ही आगे जाना है ।

191
01:39:45.770 --> 01:39:59.140
बापदादा ने देखा मुरली से प्यार मैजारिटी का है

192
01:40:12.050 --> 01:40:34.909
लेकिन जैसे जगत अम्बा ने प्रत्यक्ष जीवन में दिखाया

193
01:40:35.250 --> 01:41:07.250
कि जो बाप ने कहा वह करना ही है , लक्ष्य रखा और पुरूषार्थ के तरफ अटेन्शन भी दिया ।

194
01:41:10.970 --> 01:41:26.800
आपकी दीदी दादियां जो एडवांस पार्टी में भी गई हैं

195
01:41:31.250 --> 01:41:43.710
उन्होंने भी अटेन्शन दिया ,

196
01:41:54.449 --> 01:42:04.739
अभी आप लोगों का इन्तजार कर रहे हैं ।

197
01:42:12.220 --> 01:42:32.279
पूछती हैं वह कि समाप्ति का गेट कब खोलेंगे ?

198
01:42:35.310 --> 01:42:41.880
एक दो तो नहीं खोलेगा ना !

199
01:42:56.170 --> 01:43:18.109
तो अभी पुरूषार्थ करो कि समय को , गेट खुलने के समय को समीप लाओ ।

200
01:43:18.109 --> 01:43:26.970
सम्पन्न बनना अर्थात् समीप लाना ।

201
01:43:48.909 --> 01:43:52.680
अच्छा ।

202
01:43:53.539 --> 01:44:29.770
सभी चारों ओर के बच्चों को बापदादा दिल का स्नेह दे रहे हैं ।

203
01:44:37.250 --> 01:45:10.279
साथ-साथ जो बापदादा ने दो मास का कार्य दिया है , उसकी भी स्मृति दिला रहे हैं क्यों ?

204
01:45:12.800 --> 01:45:45.199
बहुत करके यह व्यर्थ संकल्प पुरूषार्थ को तीव्र के बजाए साधारण कर देते हैं

205
01:45:49.649 --> 01:46:17.310
इसलिए चारों ओर के बच्चों को बापदादा यादप्यार के साथ यह भी स्मृति दिला रहे हैं

206
01:46:17.310 --> 01:46:53.649
कि अब संगम का समय कितना श्रेष्ठ सुहावना हैं , इस संगम के समय ही सर्व खज़ाने बाप द्वारा प्राप्त होते हैं ,

207
01:46:54.909 --> 01:47:08.680
संगम का एक - एक सेकण्ड महान है

208
01:47:20.800 --> 01:47:48.970
इसलिए संगम के समय का मूल्य सदा अपने बुद्धि में रखो ।

209
01:47:49.649 --> 01:48:02.109
संगम का एक सेकण्ड प्राप्ति कितना कराता है ।

210
01:48:04.619 --> 01:48:17.479
आपसे कोई पूछे आपको क्या मिला है , तो क्या जवाब देंगे ?

211
01:48:21.539 --> 01:48:35.369
अप्राप्त नहीं कोई वस्तु हम ब्राह्मणों के दिल में ।

212
01:48:35.369 --> 01:48:42.680
पाना था वो पा लिया ।

213
01:48:43.710 --> 01:49:02.569
अब उसको कार्य में लगाते हुए तीव्र पुरूषार्थी बन समय को समीप लाओ ।

214
01:49:07.140 --> 01:49:10.800
अच्छा ।

215
01:49:10.800 --> 01:49:27.369
बापदादा देखते हैं सभी को उमंग भी आता है

216
01:49:30.800 --> 01:49:47.250
और यह उमंग सदा आगे बढ़ाते रहो ।

217
01:49:49.250 --> 01:49:51.310
अच्छा ।

218
01:49:55.420 --> 01:50:06.850
सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है :-

219
01:51:19.939 --> 01:51:26.800
आधा हाल तो पंजाब है ।

220
01:51:36.619 --> 01:51:40.399
अच्छा है ।

221
01:51:42.399 --> 01:52:29.539
पंजाब वालों ने पंजाब में सेवा का चांस लेकरके सेवास्थान और स्टूडेन्ट अच्छे बनाये हैं ।

222
01:52:33.649 --> 01:52:48.619
पंजाब में एक विशेषता यह है

223
01:52:51.079 --> 01:53:29.539
कि सभी को सन्देश पहुंचाने में अच्छा पुरूषार्थ किया है

224
01:53:30.220 --> 01:53:43.939
और पंजाब के जो वी . आई . पीज हैं

225
01:53:45.939 --> 01:53:59.369
उन्हों को भी सम्बन्ध-सम्पर्क में लाया है

226
01:53:59.369 --> 01:54:29.539
इसलिए बापदादा पंजाब की सेवा में सेवाधारी बच्चों के ऊपर खुश है ।

227
01:54:32.850 --> 01:54:41.939
हिम्मत , टीचर्स भी हिम्मत वाली हैं ।

228
01:54:42.970 --> 01:54:53.649
संख्या भी टीचर्स की बहुत है ।

229
01:54:55.649 --> 01:55:07.020
अभी पंजाब वारिस क्वालिटी लायेगा ।

230
01:55:09.020 --> 01:55:12.340
ठीक है ना !

231
01:55:12.340 --> 01:55:15.939
एक्जैम्पुल आप लाना ।

232
01:55:15.939 --> 01:55:21.199
पहला नम्बर आप ले लो ।

233
01:55:21.880 --> 01:55:36.510
कोई सहयोगी को , जिनका आवाज अनेकों को उमंग दिलाये ,

234
01:55:36.510 --> 01:55:49.310
ऐसे वारिस क्वालिटी तैयार करके बाप के सामने लाना ।

235
01:55:49.310 --> 01:55:51.939
ला सकते हैं ।

236
01:55:51.939 --> 01:55:59.250
ऐसी कोई बात नहीं है मुश्किल , सहज है ।

237
01:56:04.739 --> 01:56:08.510
तो अब क्या करेंगे ?

238
01:56:08.970 --> 01:56:12.850
वारिस लायेंगे ना !

239
01:56:14.050 --> 01:56:18.680
लायेंगे ?

240
01:56:22.449 --> 01:56:36.000
निमित्त टीचर्स अच्छी हैं , कर सकती हैं ।

241
01:56:36.909 --> 01:56:39.710
अभी नम्बर ले लेना ।

242
01:56:39.710 --> 01:56:46.680
पहले पंजाब वारिस लाये , सब देखेंगे ।

243
01:56:46.680 --> 01:57:19.880
अभी और भी सीजन है आगे तो इस वर्ष की सीज़न में कोई ऐसा लाओ जो पंजाब नम्बरवन हो जाए।

244
01:57:21.020 --> 01:57:29.420
कोई बड़ी बात नहीं , सिर्फ संकल्प करने की बात है ।

245
01:57:34.340 --> 01:57:47.140
तो अच्छे हैं , स्टूडेन्ट भी अच्छे हैं ।

246
01:57:57.199 --> 01:58:15.020
बापदादा ने देखा कि स्टूडेन्ट भी उमंग-उत्साह वाले हैं ।

247
01:58:15.020 --> 01:58:24.449
जहाँ उमंग-उत्साह है वहाँ सफलता है ही है ।

248
01:58:29.420 --> 01:58:48.680
तो बापदादा पंजाब के शेर कहते हैं ना ।

249
01:58:54.680 --> 01:59:04.399
तो पंजाब के शेर बच्चों पर खुश है ।

250
01:59:14.000 --> 01:59:29.600
अभी जाके प्लैन बनाना कि नम्बरवन पंजाब वारिस लावे, यह अभी मार्जिन है।

251
01:59:35.140 --> 01:59:37.079
अच्छा है ।

252
01:59:37.079 --> 01:59:44.739
यह चांस जो मिलता है इसमें भी शक्ति भर जाती है ।

253
01:59:44.739 --> 02:00:00.970
बापदादा को खुशी होती है एक ही ज़ोन आलराउण्ड सेवा के निमित्त बनता है ।

254
02:00:01.420 --> 02:00:09.649
चांस भी मिलता है और भाग्य भी बनता है ।

255
02:00:13.199 --> 02:00:34.340
अभी तक जो भी ज़ोन सेवा करते हैं , बापदादा ने देखा बहुत करके सन्तुष्ट करके ही जाते हैं ।

256
02:00:34.340 --> 02:00:36.340
ठीक है ?

257
02:00:36.340 --> 02:00:41.310
रिपोर्ट ठीक है ना !

258
02:00:45.770 --> 02:00:48.850
अच्छा है ।

259
02:00:49.079 --> 02:00:54.050
बापदादा खुश है ।

260
02:00:59.819 --> 02:01:03.539
अच्छा ।

261
02:01:09.770 --> 02:01:24.449
चार विंग्स की मीटिंग है :- ( स्पार्क , मीडिया , स्पोर्ट , रिलीजस ) :-

262
02:02:04.399 --> 02:02:30.000
अच्छा यह चार ही विंग सर्विस के लिए बहुत मददगार हैं भी और आगे भी बन सकते हैं

263
02:02:31.079 --> 02:02:50.220
क्योंकि चार ही विंग्स अनेकों को कनेक्शन में ला सकते हैं ।

264
02:02:50.220 --> 02:03:17.020
चाहे मीडिया है तो मीडिया अभी तो घर-घर में सन्देश पहुंचाने का प्लैन अच्छा बना रहे हैं ।

265
02:03:17.600 --> 02:03:41.079
बापदादा खुश है कि एक दो सहयोगी बन कर रहे हैं , आगे बढ़ गये हैं , बढ़ भी रहे हैं ।

266
02:03:41.819 --> 02:03:56.399
तो बापदादा अभी मीडिया द्वारा यही चाहते हैं

267
02:03:57.199 --> 02:04:32.510
कि सन्देश यह मिले कि अब समय प्रमाण हर एक आत्मा को अपने बाप से वर्सा लेने की प्रेरणा आवे ।

268
02:04:33.649 --> 02:04:58.909
सुनते तो हैं लेकिन कितने वारिस निकले , मीडिया द्वारा कितने वारिस अभी तक भी निकले हैं , वह लिस्ट आनी चाहिए ।

269
02:05:00.909 --> 02:05:14.340
बापदादा ने सुना है प्रभाव अच्छा है और स्टूडेन्ट बढ़ते भी हैं

270
02:05:14.340 --> 02:05:32.170
लेकिन लिस्ट निकालो , हर एक सेन्टर पर , हर एक ज़ोन में कितने मीडिया सेवा से निकले हैं ।

271
02:05:32.170 --> 02:05:43.819
ऐसे ही जो भी वर्ग हैं वह अभी लिस्ट निकालो ,

272
02:05:43.819 --> 02:05:58.619
कईयों ने आज लिस्ट दी भी है कनेक्शन में आने वालों की , वी . आई . पी . हैं वह लिस्ट दी भी है

273
02:05:58.619 --> 02:06:12.970
लेकिन उन्हों का संगठन करके उन्हों को उमंग उत्साह देके आगे बढ़ाओ ।

274
02:06:12.970 --> 02:06:25.140
कनेक्शन में तो आते हैं लेकिन आगे के लिए ऐसा प्रोग्राम बनाओ

275
02:06:25.140 --> 02:06:35.250
जो वह भी समझे तो हमको आगे क्या करना है ।

276
02:06:35.250 --> 02:06:50.569
सुना , लेकिन आगे बढ़ना है उसका स्पष्टीकरण थोड़ा सुनाओ ।

277
02:06:50.909 --> 02:07:04.680
और लिस्ट निकालो कितने इस वर्ग के तरफ से एड होते हैं ।

278
02:07:05.819 --> 02:07:12.279
होते हैं लेकिन पता नहीं पड़ता है ।

279
02:07:14.279 --> 02:07:29.079
बाकी बापदादा सभी विंग्स को मुबारक दे रहे हैं

280
02:07:31.479 --> 02:07:51.939
क्योंकि हर एक विंग यह कोशिश करती है कि सेवा की वृद्धि हो और वृद्धि के प्लैन भी अच्छे बनाती है ।

281
02:07:55.310 --> 02:08:05.310
चार ही वर्ग अपनी-अपनी सेवा अच्छी कर रहे हैं

282
02:08:05.310 --> 02:08:14.050
क्योंकि विंग्स अभी समझते हैं हम जिम्मेवार हैं ।

283
02:08:16.050 --> 02:08:35.479
कोशिश भी अच्छी करते हैं विंग्स इसीलिए बापदादा खुश है

284
02:08:35.479 --> 02:08:47.819
और इसी रीति से जैसे अटेन्शन देकरके विंग्स के कार्य में लगे हुए हो

285
02:08:47.819 --> 02:09:00.170
ऐसे और भी आगे बढ़ते रहो , मुबारक बापदादा देते हैं ।

286
02:09:00.170 --> 02:09:09.539
बढ़ रहे हैं बढ़ते रहो ।

287
02:09:12.800 --> 02:09:18.680
चार ही विंग्स के लिए बापदादा कह रहे हैं ।

288
02:09:19.140 --> 02:09:29.770
कोई भी विंग कमज़ोर नहीं है अपने हिसाब से आगे ही बढ़ रही है ।

289
02:09:31.020 --> 02:09:44.739
बाकी बापदादा ने जो काम दिया है वह तो ध्यान पर होगा ही ।

290
02:09:49.770 --> 02:10:05.649
कोई ऐसे समझदार वी . आई . पी . हर विंग से आते हैं उन्हें तैयार करो ।

291
02:10:05.649 --> 02:10:13.420
ऐसे समझदार हिम्मत वाले का एक ग्रुप बनाओ

292
02:10:13.420 --> 02:10:27.819
जो वह भिन्न-भिन्न वर्ग वाले ग्रुप मिल करके एक-एक बात को स्पष्ट करे ।

293
02:10:28.050 --> 02:10:31.939
यह काम जरूर करो ।

294
02:10:33.020 --> 02:10:43.939
यह काम आगे वाले कर सकते हैं , हिम्मत दिला सकते हैं ।

295
02:10:51.539 --> 02:11:06.800
अभी प्रैक्टिकल में आवाज निकले कि ब्रहमाकुमारियां क्या चाहती हैं ।

296
02:11:11.479 --> 02:11:27.479
इस 75 वर्ष की सर्विस ने सभी को ब्रह्माकुमारीज़ का महत्व स्पष्ट किया है ।

297
02:11:27.479 --> 02:11:43.479
आवश्यक है , कर सकती हैं , यहाँ तक आये हैं , सब वर्ग का सहयोग है ।

298
02:11:44.510 --> 02:11:53.420
लेकिन परमात्मा आया है , ब्रह्माकुमारियों तक पहुंचे हैं ।

299
02:11:53.420 --> 02:12:09.939
परमात्मा आ गया अभी यह समझ में आता भी है जिस समय सुनते हैं उस समय नशा चढ़ता है

300
02:12:10.399 --> 02:12:17.420
लेकिन मैदान में आवे वह हिम्मत अभी आ रही है ।

301
02:12:17.420 --> 02:12:20.970
आयेगी ।

302
02:12:21.420 --> 02:12:25.539
आनी तो है ही ।

303
02:12:30.739 --> 02:12:51.939
अभी आने की हिम्मत आई है , कोई भी प्रोग्राम आप देखेंगे डल नहीं जाता है , सक्सेस जाता है ,

304
02:12:52.170 --> 02:12:57.369
पहले नाम सुनके ही भागते थे ना ।

305
02:12:57.369 --> 02:13:12.680
अभी समझते हैं कि ब्रह्माकुमारियां कार्य अच्छा कर रही हैं और विधिपूर्वक करते हैं ।

306
02:13:13.770 --> 02:13:18.220
इतना अटेन्शन गया है ।

307
02:13:23.140 --> 02:13:36.850
बापदादा चार ही विंग के नाम भी देखे , जिन्होंने दिये हैं ,

308
02:13:36.850 --> 02:13:48.340
कनेक्शन में तो अच्छे हैं लेकिन उन्हों को थोड़ा सामने लाओ ।

309
02:13:49.539 --> 02:13:53.539
उन्हों का प्रोग्राम करो ।

310
02:13:54.050 --> 02:14:01.250
प्लैन दो उन्हों को क्या कर सकते हैं हम ।

311
02:14:02.619 --> 02:14:22.449
धरनी तैयार हुई है अभी फल निकलना है इसलिए बापदादा खुश हैं ।

312
02:14:22.449 --> 02:14:27.819
मेहनत करते हो उस पर खुश हैं ।

313
02:14:28.739 --> 02:14:39.710
तो चार ही विंग्स को मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

314
02:14:53.079 --> 02:14:59.310
अच्छा पुरूषार्थ कर रहे हो ।

315
02:15:03.310 --> 02:15:06.050
अच्छा ।

316
02:15:10.800 --> 02:15:22.220
डबल विदेशी सभी मुख्य भाई बहिनें आये हैं :-

317
02:15:57.310 --> 02:16:13.250
डबल विदेशियों को टाइटल दिया है मधुबन का श्रृंगार हैं ।

318
02:16:13.710 --> 02:16:30.800
मधुबन में रौनक कर देते हैं और फर्क भी अच्छा लाया है ।

319
02:16:30.800 --> 02:16:44.000
बापदादा पुरूषार्थ और परिवर्तन दोनों ही देख करके खुश है ।

320
02:16:44.000 --> 02:16:56.170
पहले व्हाई व्हाई करते थे , अभी वाह ! वाह ! करते हैं ।

321
02:17:06.620 --> 02:17:10.969
चेंज अच्छी लाई है ।

322
02:17:12.680 --> 02:17:23.200
अभी कोई बात में मुश्किल नहीं लगता ।

323
02:17:23.200 --> 02:17:56.170
कोई भी बात, नियम,बापदादा का जो मुरली में डायरेक्शन जाता है वह करने में एवररेडी हैं और सहयोग भी अच्छा है।

324
02:17:57.020 --> 02:18:04.850
स्नेही है लेकिन सहयोगी भी अच्छे हैं ।

325
02:18:05.649 --> 02:18:24.569
बापदादा रिकार्ड देखते हैं तो गुप्त सहयोगी भी अच्छे - अच्छे निकले हैं ।

326
02:18:26.569 --> 02:18:29.420
तो दिल के भी बड़े हैं ।

327
02:18:29.420 --> 02:18:33.940
छोटी दिल वाले नहीं हैं ।

328
02:18:41.420 --> 02:19:00.510
तो बापदादा खुश है , सेवा भी चारों ओर की अच्छी चल रही है ।

329
02:19:00.969 --> 02:19:24.510
बापदादा को दो चीज़ चाहिए , एक सेवा की वृद्धि हो और दूसरा निर्विघ्न हो ।

330
02:19:28.399 --> 02:19:42.799
तो देखा इन दोनों बातों में अभी काफी फर्क आ गया है ।

331
02:19:48.399 --> 02:20:08.280
और यह तो बापदादा को बहुत अच्छा लगता है कि मधुबन में सब निमित्त बने हुए इकठ्ठे हो जाते हैं ।

332
02:20:15.079 --> 02:20:31.709
एक तो मधुबन का श्रृंगार बन जाते हैं दूसरा जो परिवर्तन किया है

333
02:20:31.709 --> 02:20:42.799
वह कहाँ न कहाँ से आते हैं तो पता भी पड़ता है , अनुभव सुनते भी हैं

334
02:20:42.799 --> 02:20:56.969
उससे भी प्रभाव पड़ता है कि जब विदेशी कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं ।

335
02:20:56.969 --> 02:21:01.020
उमंग आता है ।

336
02:21:05.649 --> 02:21:43.079
अभी जो बापदादा चाहते हैं ज्वालामुखी योग हो, इसमें विदेशी नम्बरवन लो क्योंकि विदेशियों के संस्कार हैं जो लक्ष्य रखते हैं ना वह पूरा करते हैं।

337
02:21:50.569 --> 02:22:13.250
दो बातों में नम्बर लो - एक व्यर्थ समाप्ति और दूसरा सर्विस में निर्विघ्न ।

338
02:22:21.309 --> 02:22:26.219
प्यार तो सारे परिवार का भी है ।

339
02:22:26.219 --> 02:22:39.600
सिर्फ बापदादा का नहीं है लेकिन सारे परिवार का भी डबल विदेशियों से प्यार है ।

340
02:22:50.569 --> 02:23:01.309
अभी दोनों बातों में विदेश नम्बरवन जाके दिखाये।

341
02:23:17.879 --> 02:23:20.620
जायेंगे ।

342
02:23:20.620 --> 02:23:24.620
कोई बड़ी बात नहीं है ।

343
02:23:27.420 --> 02:23:38.680
बापदादा चक्र भी लगाते हैं विदेश में ।

344
02:23:47.770 --> 02:23:53.309
अमृतवेले भी चक्र लगाते हैं ।

345
02:24:01.079 --> 02:24:20.510
इसमें अभी अनुभव स्वरूप बनके बैठना , इसमें और अटेन्शन

346
02:24:22.909 --> 02:24:29.879
क्योंकि अनुभव की अथॉरिटी बहुत बड़ी है ।

347
02:24:35.709 --> 02:24:40.969
लक्ष्य अच्छा रखके बैठते हैं

348
02:24:40.969 --> 02:25:02.969
लेकिन उसका प्रभाव सुबह की ताकत का कर्मयोग में भी पड़े , सेन्टर के वायुमण्डल में भी पड़े , यह थोड़ा एडीशन चाहिए ।

349
02:25:16.739 --> 02:25:22.909
बाकी बापदादा खुश है ।

350
02:25:22.909 --> 02:25:42.110
हिम्मत नहीं छोड़ते हैं , हिम्मत रखते हैं और एक दो को भी हिम्मत देके चला रहे हैं और बाप भी मदद करते हैं ।

351
02:25:54.110 --> 02:26:14.000
तो विदेश वाले नहीं लेकिन अपना जो देश है परमधाम ,

352
02:26:14.000 --> 02:26:38.450
उसके अच्छे अनुभव करके बस समय को समीप करना है , इसमें पान का बीड़ा उठाओ ।

353
02:26:40.000 --> 02:26:44.399
पहले हम करके दिखायेंगे ।

354
02:26:44.399 --> 02:26:49.770
निमित्त बनके दिखायेंगे ।

355
02:26:52.620 --> 02:26:55.250
अच्छा है ।

356
02:26:55.250 --> 02:27:04.620
बापदादा खुश तो है , तो नहीं खुश है ।

357
02:27:21.649 --> 02:27:31.200
टीचर्स को देख करके खुश हो रहे हैं ।

358
02:27:31.940 --> 02:27:43.309
हिम्मत रखके , हिम्मत रखाके आगे बढ़ाते हैं ।

359
02:27:48.340 --> 02:28:01.940
और जो सभी विशेष टीचर्स इकठ्ठी होती हैं यह दृश्य बापदादा को बहुत अच्छा लगता है ।

360
02:28:05.540 --> 02:28:14.450
सभी बातें स्पष्ट हो जाती हैं ।

361
02:28:25.709 --> 02:28:44.280
उमंग-उत्साह भरके भी जाते हो और आपको देख करके यहाँ उमंग उत्साह आता है वह भी करते हैं ।

362
02:28:52.049 --> 02:29:07.940
अच्छा है , एक-एक रत्न को बापदादा विशेष दिल का प्यार

363
02:29:07.940 --> 02:29:32.399
और साथ में प्यार के साथ में मन के उमंग-उत्साह की लहर भी दे रहे हैं ।

364
02:29:36.850 --> 02:29:41.020
अच्छा ।

365
02:29:56.049 --> 02:30:11.819
सभी ने अपने लिए यादप्यार लिया कि सिर्फ वर्ग वाले या डबल विदेशियों ने लिया ।

366
02:30:11.819 --> 02:30:34.799
सबको बापदादा देखता है , नज़र दौड़ाता है तो नज़र से यादप्यार देते हैं ।

367
02:30:39.819 --> 02:30:42.340
अच्छा ।

368
02:30:42.340 --> 02:30:48.850
आज पहली बार आने वाले उठो ।

369
02:31:22.620 --> 02:31:32.909
पहले बारी आये हो तो कमाल करो ।

370
02:31:35.819 --> 02:31:40.569
क्या कमाल करो ?

371
02:31:42.569 --> 02:31:49.879
पहले नम्बर का पुरूषार्थ करो ।

372
02:31:56.049 --> 02:32:08.110
लास्ट से फास्ट और फर्स्ट होके दिखाओ ।

373
02:32:10.450 --> 02:32:30.000
हो सकता है , कोई रत्न ऐसे भी निकलने हैं तो आप ही दिखाओ ।

374
02:32:33.940 --> 02:32:43.540
बापदादा की मदद सभी को है ।

375
02:32:50.170 --> 02:33:04.340
तीव्र पुरूषार्थ , आने से ही साधारण पुरूषार्थ नहीं , तीव्र पुरूषार्थ करो ।

376
02:33:06.340 --> 02:33:13.020
करना ही है , बनना ही है ।

377
02:33:13.020 --> 02:33:16.110
आगे जाना ही है ।

378
02:33:16.110 --> 02:33:42.620
यह दृढ़ संकल्प रखो और ऐसे कोई एक्जैम्पुल निकलने भी हैं ।

379
02:33:49.770 --> 02:34:07.540
बापदादा को खुशी है कि समय से पहले तो आ गये ।

380
02:34:17.819 --> 02:34:24.000
वर्से के अधिकारी तो बन गये ।

381
02:34:33.479 --> 02:34:36.510
अच्छा ।

382
02:34:36.739 --> 02:35:00.219
बापदादा खुश है , आये , भले आये , आपका सीज़न था लेकिन अभी आगे से आगे जाके दिखाओ ।

383
02:35:02.219 --> 02:35:12.049
हम पीछे आये हैं यह नहीं सोचो , आगे जा सकते हो ।

384
02:35:14.510 --> 02:35:24.340
बापदादा की , ड्रामा की मदद मिलेगी ।

385
02:35:26.680 --> 02:35:29.940
अच्छा है ।

386
02:35:29.940 --> 02:35:33.879
देखो , कितने आते हैं ।

387
02:35:33.879 --> 02:35:43.879
आधा क्लास तो पहले बारी का आता है ।

388
02:35:53.079 --> 02:36:04.170
बापदादा को खुशी है कि बाप को पहचान तो लिया ।

389
02:36:07.600 --> 02:36:17.370
वर्से के अधिकारी बन तो गये ।

390
02:36:24.049 --> 02:36:26.569
अच्छा ।

391
02:36:26.569 --> 02:36:47.020
सभी को बापदादा और सारे परिवार की मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

