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1
00:12:19.940 --> 00:13:06.910
आज बापदादा चारों ओर के बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं ।

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00:13:08.910 --> 00:13:42.000
चारों ओर से यही दिल का आवाज आ रहा है वाह बाबा वाह !

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00:13:45.420 --> 00:14:09.200
और बाप की दिल से यही आवाज है वाह बच्चे वाह !

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00:14:16.170 --> 00:14:50.170
आज सभी उमंग-उत्साह से दिव्य जन्म की खुशी मना रहे हैं ।

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00:14:57.420 --> 00:15:32.340
आज खुशी मना भी रहे हैं और साथ में बाप भी बच्चों की खुशी मना रहे हैं ।

6
00:15:35.250 --> 00:16:22.850
आज का ही यह विचित्र जयन्ती का दिन है जो बाप और बच्चों का इकठ्ठा दिव्य जन्म का दिन है ।

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00:16:26.110 --> 00:16:49.480
तो आप सभी भी मुबारक दे भी रहे हो और ले भी रहे हो

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00:16:51.480 --> 00:17:21.020
क्योंकि बाप ने जन्म लिया ही है यज्ञ रचने के लिए ।

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00:17:23.480 --> 00:17:35.020
तो यज्ञ में ब्राह्मण बच्चे ही चाहिए ।

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00:17:37.480 --> 00:18:02.220
तो यह एक ही जयन्ती है जो बाप और बच्चों की इकठ्ठी जयन्ती है

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00:18:04.850 --> 00:18:29.140
इसीलिए इस शिव जयन्ती को हीरे तुल्य जयन्ती कहा जाता है ।

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00:18:32.510 --> 00:19:06.450
तो बाप देख रहे हैं कि एक-एक बच्चा कितने स्नेह से मुबारक देने आये हैं

13
00:19:06.450 --> 00:19:19.710
और बाप भी मुबारक देने आये हैं ।

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00:19:33.200 --> 00:19:50.050
यह जयन्ती अति स्नेह की जयन्ती है ।

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00:19:58.340 --> 00:20:09.820
स्नेही बच्चे , स्नेही बाप और स्नेही जयन्ती है ।

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00:20:13.770 --> 00:20:51.940
बापदादा के पास चारों ओर के देश विदेश सब बच्चों का स्नेह पहुंच रहा है ।

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00:21:00.340 --> 00:21:32.970
बाप एक-एक स्नेही बच्चे को पदमगुणा स्नेह भरी मुबारक दे रहे हैं ।

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00:21:41.020 --> 00:22:17.250
यह स्नेह हर बच्चे को सहज कर्मयोगी बनाने वाला है ।

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00:22:19.820 --> 00:22:34.850
यह स्नेह सदा सहज बनाने वाला है ।

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00:22:36.850 --> 00:22:41.940
शक्तिशाली बनाने वाला है ।

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00:22:52.400 --> 00:23:11.020
बापदादा का अकेला जन्मदिन नहीं है

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00:23:11.020 --> 00:23:37.420
क्योंकि बाप सदा ही बच्चों के साथ रहने वाले हैं ।

23
00:23:40.400 --> 00:23:58.110
साथ रहेंगे , साथ चलेंगे , साथ राज्य करेंगे ।

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00:24:11.420 --> 00:24:20.050
आप सबका भी यही वायदा है ना !

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00:24:20.050 --> 00:24:32.510
साथ रहना है , साथ उड़ना है और साथ राज्य करना है !

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00:24:42.450 --> 00:25:09.880
बापदादा को आज आपके भक्त भी विशेष याद आ रहे हैं

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00:25:12.570 --> 00:25:35.140
क्योंकि आपके भक्तों ने जो आपने किया है

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00:25:35.140 --> 00:25:42.050
वह कॉपी बहुत अच्छी की है

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00:25:45.310 --> 00:26:09.200
क्योंकि द्वापर में परमधाम से पहले-पहले आये हैं

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00:26:12.450 --> 00:26:30.510
तो पहला जन्म सदा सतोप्रधान होता है

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00:26:31.420 --> 00:26:46.570
इसलिए उन्होंने कॉपी बहुत अच्छी की है ।

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00:26:46.570 --> 00:27:07.310
तो आज के दिन बच्चों के साथ आपके भक्त भी याद आ रहे हैं ।

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00:27:08.800 --> 00:27:36.740
वतन में तो आज अमृतवेले से बहुत बच्चों की रौनक थी ।

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00:27:37.420 --> 00:27:55.200
हर बच्चा समझता था कि मैं बापदादा को अपनी मुबारक दूं

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00:27:55.420 --> 00:28:17.370
और बापदादा ने भी हर बच्चे की मुबारक अति स्नेह से स्वीकार की ।

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00:28:21.080 --> 00:28:39.710
तो वतन में आज यह मेला लगा हुआ था ।

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00:28:40.450 --> 00:29:25.200
एक तरफ आप बच्चे थे , दूसरी तरफ एडवांस में गये हुए आपके साथी साथ में आये हुए थे ।

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00:29:26.450 --> 00:30:03.710
बापदादा ने देखा कि आपकी दादियां और अनन्य भाई की लिस्ट बहुत बड़ी थी ।

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00:30:05.940 --> 00:30:21.880
एक-एक दादियाँ बापदादा को भी मुबारक दे रहे थे

40
00:30:21.880 --> 00:30:49.880
लेकिन साथ में आप सब भाग्यवान बच्चों को भी मुबारक दे रहे थे ।

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00:30:49.880 --> 00:31:02.340
तो वतन में आज मुबारकों का मेला था ।

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00:31:15.200 --> 00:31:44.910
सभी एडवांस पार्टी के विशेष दादियाँ और भाई

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00:31:48.170 --> 00:32:17.540
आप विशेष निमित्त साथी रहने वाली आत्माओं को याद करते हुए बहुत दिल से मुबारक दे रहे थे ।

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00:32:29.880 --> 00:32:54.680
तो आप सबको बापदादा सबकी तरफ से भी मुबारकें दे रहे हैं ।

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00:32:56.050 --> 00:33:05.250
स्वीकार किया ?

46
00:33:09.650 --> 00:33:34.620
सभी का विशेष बहिनें और भाईयों का एक ही आवाज था

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00:33:38.110 --> 00:33:59.600
कि अभी घर का गेट कब खोलेंगे !

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00:34:04.400 --> 00:34:17.310
तो विशेष दीदी दादी कह रही थी

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00:34:19.940 --> 00:35:04.740
कि हमारी सखियों को , भाईयों को हमारे तरफ से यही कहना कि घर चलने के लिए कौन सी तारीख फिक्स की है ?

50
00:35:09.420 --> 00:35:13.940
सब इकठ्ठे चलेंगे ना !

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00:35:13.940 --> 00:35:19.600
अलग-अलग तो नहीं जायेंगे ?

52
00:35:22.910 --> 00:35:41.770
दरवाजा खोलने के लिए सभी इकठ्ठे हाज़र हो जायेंगे ।

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00:35:47.080 --> 00:35:52.050
तो वह डेट मांग रहे थे ।

54
00:35:53.200 --> 00:36:09.370
बापदादा मुस्कराये क्योंकि बाप भी चाहते हैं

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00:36:10.340 --> 00:36:54.620
कि अभी गेट को खोलने के लिए सभी बच्चों को बेहद की वैराग्य वृत्ति चाहिए ।

56
00:37:05.710 --> 00:37:15.710
यही चाबी है गेट खोलने की ।

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00:37:21.480 --> 00:37:37.140
बापदादा तो सदा कहते रहते हैं

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00:37:48.570 --> 00:38:42.510
कि बेहद के वैरागी बन वेस्ट संकल्प और वेस्ट समय दोनों को मिलकर जल्दी से जल्दी त्याग करना

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00:38:42.510 --> 00:38:53.600
अर्थात् बेहद के वैरागी बनना

60
00:38:56.570 --> 00:39:22.220
क्योंकि बापदादा ने देखा है कि सबसे बड़ा विघ्न देह अभिमान है ।

61
00:39:26.680 --> 00:39:56.910
इस देह अभिमान को त्यागना चलते-फिरते देही अभिमानी बनना , यही बेहद का वैराग्य है ।

62
00:40:06.850 --> 00:40:27.420
तो सभी कहते तो हैं मेरा बाबा , मीठा बाबा , प्यारा बाबा ।

63
00:40:27.420 --> 00:40:52.220
जब दिल से कहते हैं मेरा तो यह देह अभिमान जो ‘ मैं ’ के रूप में आता है ,

64
00:41:02.400 --> 00:41:26.800
बाप सदा कहते हैं कि यह ‘ मैं ’ का भान जो आ जाता है ,

65
00:41:31.200 --> 00:41:47.940
मैं जो करता हूँ , मैं जो कहता हूँ , वही ठीक है ।

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00:41:51.080 --> 00:42:09.200
एक मैं है कामन , मैं आत्मा हूँ और यह मेरा शरीर है ।

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00:42:09.200 --> 00:42:17.020
दूसरा महीन मैं ,

68
00:42:22.400 --> 00:42:49.250
जो सुनाया मैंने यह किया , मैं यह कर सकता हूँ , मैं ही ठीक हूँ , यह महीन मैं इसको खत्म करना है ।

69
00:42:50.400 --> 00:43:00.400
यह देह अभिमान इस रूप में आता है ।

70
00:43:05.020 --> 00:43:37.480
तो आज बापदादा ने यह महीन मैं जो कभी बाप की विशेषता को भी

71
00:43:40.000 --> 00:43:57.140
मेरा मानकर ‘ मैं ’ का भान रखते हैं , इसको समाप्त करना ।

72
00:44:00.800 --> 00:44:20.170
देखो , यादगार जो बनाते हैं उसमें भी जब बलि चढ़ाते हैं

73
00:44:20.170 --> 00:44:28.510
तो खुद नहीं बलि चढ़ते हैं लेकिन किसको बलि चढ़ाते हैं ?

74
00:44:28.510 --> 00:44:31.540
बकरे को ।

75
00:44:31.820 --> 00:44:37.250
बकरे को क्यों ढूंढा ?

76
00:44:38.340 --> 00:44:46.050
क्योंकि बकरा मे मे ही करता है ।

77
00:44:48.910 --> 00:44:56.680
भक्तों ने कॉपी तो बहुत अच्छी की है ।

78
00:44:59.080 --> 00:45:44.220
तो आज के दिन यह देह अभिमान का मैं क्या पुरूषार्थ करके समाप्त कर सकते हो ?

79
00:45:44.220 --> 00:45:55.880
बर्थ डे पर आये हो बाप के , तो कोई सौगात तो देंगे ना !

80
00:45:57.880 --> 00:46:11.940
तो बाप को और सौगात नहीं चाहिए , यह महीन मैंपन ,

81
00:46:13.540 --> 00:46:29.020
यही बाप कहते हैं आज के जन्मदिन पर बाप को सौगात दे दो ।

82
00:46:29.020 --> 00:46:33.310
दे सकते हो ?

83
00:46:33.310 --> 00:46:36.400
देना है ?

84
00:46:36.400 --> 00:46:40.000
है हिम्मत ?

85
00:46:42.000 --> 00:46:43.940
हिम्मत है ?

86
00:46:43.940 --> 00:46:46.280
हाथ उठाओ ।

87
00:47:03.200 --> 00:47:14.050
हाथ उठाके तो खुश कर दिया ।

88
00:47:23.820 --> 00:47:33.020
तो हाथ उठाया , तो सौगात दे दी ना !

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00:47:36.510 --> 00:47:46.910
दी हुई सौगात कोई वापस लेता है क्या ?

90
00:47:48.910 --> 00:48:04.740
कई बच्चे कहते हैं बाबा हम चाहते नहीं हैं लेकिन आ जाती है ।

91
00:48:09.650 --> 00:48:14.050
कारण क्या ?

92
00:48:24.800 --> 00:48:35.020
कारण अगर पूछे तो जवाब बहुत अच्छा देते हैं ।

93
00:48:35.020 --> 00:48:49.710
कहते हैं जानते भी हैं , मानते भी हैं लेकिन क्या करें वापस आ जाता है ।

94
00:48:51.710 --> 00:48:56.340
सोचो !

95
00:48:57.200 --> 00:49:08.570
दी हुई चीज़ अगर आपके पास आ जाए

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00:49:09.200 --> 00:49:19.200
तो क्या दी हुई चीज़ अपने पास रखेंगे ?

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00:49:25.020 --> 00:49:44.110
तो अगर आपने दिल से दी , अगर वापस आ भी जाती , तो रखेंगे अपने पास ?

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00:49:49.480 --> 00:49:54.110
कारण क्या है ?

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00:49:54.680 --> 00:50:00.220
बाप से प्यार है ना

100
00:50:00.220 --> 00:50:21.250
तो प्यार के कारण जो बाप कहते हैं वह करने चाहते हैं , यह बाप के पास भी रिजल्ट आती है

101
00:50:21.250 --> 00:50:37.140
लेकिन क्या है , दृढ़ता कम है , दृढ़ता को यूज़ करो ।

102
00:50:37.140 --> 00:50:58.050
संकल्प करते हो लेकिन एक है संकल्प करना , दूसरा है दृढ़ संकल्प करना ।

103
00:51:01.250 --> 00:51:23.880
तो बार-बार किये हुए संकल्प में दृढ़ता लाना , यह अटेन्शन कम है ।

104
00:51:28.110 --> 00:51:36.910
दृढ़ता सफलता की चाबी है ।

105
00:51:45.600 --> 00:51:49.370
तो आज क्या करेंगे ?

106
00:51:49.370 --> 00:51:59.200
संकल्प करेंगे या दृढ़ संकल्प करेंगे ?

107
00:52:02.800 --> 00:52:17.710
अगर आपका दृढ़ संकल्प है तो उसकी निशानी है दृढ़ता सफलता की चाबी है ।

108
00:52:17.710 --> 00:52:24.910
तो चाबी लगाने में कोई कमी रह जाती है

109
00:52:24.910 --> 00:52:34.910
इसीलिए सम्पूर्ण सफलता नहीं मिलती है ।

110
00:52:40.000 --> 00:52:50.450
तो आज बापदादा बच्चों का भी बर्थ डे है , बाप का भी बर्थ डे है ।

111
00:52:50.800 --> 00:52:55.770
तो यह तो विशेष दिन है ना !

112
00:52:56.570 --> 00:53:17.370
सारे कल्प में बाप बच्चों का एक समय जन्म यह इसी बर्थ डे की विशेषता है ।

113
00:53:20.800 --> 00:53:38.050
तो आज के दिन बाप यही चाहते हैं

114
00:53:40.340 --> 00:54:08.280
कि हर बच्चा आज अपने दिल में दृढ़ता को लाके यह दृढ़ संकल्प करे

115
00:54:10.280 --> 00:54:32.110
कि हमें व्यर्थ संकल्प और व्यर्थ समय ,

116
00:54:37.250 --> 00:54:48.910
क्योंकि अगर सारे दिन को अटेन्शन से चेक करो

117
00:54:48.910 --> 00:55:06.680
तो बीच-बीच में समय और संकल्प व्यर्थ जाता है ।

118
00:55:07.310 --> 00:55:17.080
बापदादा तो सबका रजिस्टर देखते हैं ना !

119
00:55:19.080 --> 00:55:41.600
उसको बचाना अर्थात् समाप्ति का समय समीप लाना ।

120
00:55:52.910 --> 00:55:56.970
तैयार हो ?

121
00:55:56.970 --> 00:56:04.570
कि अभी भी कहेंगे आ जाते हैं क्या करें ?

122
00:56:07.540 --> 00:56:26.740
व्यर्थ का काम है आना , आपका काम क्या है , बिठाना ?

123
00:56:37.770 --> 00:56:46.170
तो बिठा देते हो तभी तो उसने भी घर बना दिया है ।

124
00:56:46.170 --> 00:56:56.910
वह भी समझ गये हैं कि दृढ़ता नहीं है

125
00:56:59.650 --> 00:57:17.710
इसलिए आज के स्नेह के दिन सबके दिल में अभी क्या है ?

126
00:57:17.710 --> 00:57:26.110
अमृतवेले से लेके आज दिल में बार-बार क्या आ रहा है ?

127
00:57:26.110 --> 00:57:30.620
मेरा बाबा , मेरा बाबा , मेरा बाबा ।

128
00:57:30.620 --> 00:57:41.820
बाप के दिल में भी है मेरे बच्चे , मेरे बच्चे , मेरे बच्चे … ।

129
00:57:44.220 --> 00:58:04.850
तो जैसे मैजारिटी बाप की याद में रहे हैं ।

130
00:58:06.850 --> 00:58:15.650
दिन का प्रभाव है , बापदादा ने नोट किया ।

131
00:58:16.340 --> 00:58:37.820
स्नेह के दिन होने के कारण बार-बार सभी को मेरा बाबा , मेरा बाबा काफी समय याद रहा है ।

132
00:58:38.400 --> 00:58:40.620
ऐसे है ?

133
00:58:40.620 --> 00:58:42.970
इसमें हाथ उठाओ ।

134
00:58:42.970 --> 00:58:47.600
आज के दिन की बात है ।

135
00:58:47.600 --> 00:58:51.880
मेरा बाबा याद रहा ?

136
00:58:52.170 --> 00:58:55.200
और कुछ याद रहा ?

137
00:58:55.200 --> 00:58:57.200
नहीं ।

138
00:58:57.200 --> 00:59:06.000
ऐसे ऐसे हाथ कर रहे हैं , बहुत अच्छा ।

139
00:59:11.880 --> 00:59:43.540
तो अगर रोज़ बार-बार चेक करो संगम का हर दिन बाप के स्नेह का दिन है ।

140
00:59:44.570 --> 00:59:58.220
जैसे आज विशेष दिन होने के कारण ज्यादा याद रहा ना !

141
01:00:00.220 --> 01:00:14.800
ऐसे सदा अमृतवेले यह स्मृति में रखो

142
01:00:14.800 --> 01:00:27.080
कि यह संगम का एक-एक दिन कितना महान है ।

143
01:00:32.570 --> 01:00:49.600
एक छोटे से जन्म में 21 जन्म की प्राप्ति गैरन्टी है ।

144
01:00:50.740 --> 01:00:55.770
तो एक-एक दिन का कितना महत्व हुआ !

145
01:00:55.770 --> 01:01:09.370
कहाँ 21 जन्म और कहाँ यह छोटा सा एक जन्म ।

146
01:01:15.020 --> 01:01:44.450
तो बापदादा आज आप बच्चों से बर्थ डे की यही सौगात चाहते हैं ।

147
01:01:44.450 --> 01:01:47.420
देंगे सौगात ?

148
01:01:47.420 --> 01:01:49.420
देंगे ?

149
01:01:49.420 --> 01:01:53.480
हाथ उठाओ ।

150
01:01:54.110 --> 01:01:58.910
दृढ़ निश्चय का हाथ ।

151
01:01:58.910 --> 01:02:05.540
देखेंगे , करेंगे नहीं ।

152
01:02:05.540 --> 01:02:08.680
करना ही है ।

153
01:02:08.680 --> 01:02:16.000
कुछ भी हो जाए त्याग तो त्याग ।

154
01:02:16.000 --> 01:02:24.400
यह त्याग नहीं लेकिन भाग्य है ।

155
01:02:30.000 --> 01:02:46.400
तो आज का दिन अगर सही हाथ उठाया तो महत्व का दिन है ना !

156
01:02:52.220 --> 01:03:12.110
अभी से आपके चेहरे पर व्यर्थ की समाप्ति

157
01:03:14.110 --> 01:03:31.710
और सदा स्मृति स्वरूप की झलक चेहरे और चलन में आनी चाहिए ।

158
01:03:35.200 --> 01:03:44.340
यह माया के जो शब्द हैं ना !

159
01:03:46.340 --> 01:04:19.880
क्या , क्यों , कब , कैसे … यह समाप्त हो जाएं तब चेहरा और चलन सेवा करेंगे ।

160
01:04:21.370 --> 01:04:34.850
अभी ज्यादा प्रभाव भाषणों का है ।

161
01:04:42.510 --> 01:04:53.600
बापदादा खुश है भाषण बहुत अच्छे कर रहे हैं

162
01:04:55.940 --> 01:05:30.510
लेकिन दिनप्रतिदिन अभी जैसे यह भाषणों द्वारा , वाणी द्वारा सेवा का उमंग अच्छा रखा और सफलता भी पाई ।

163
01:05:30.850 --> 01:06:07.140
ऐसे ही अभी समय प्रमाण आपकी ज्यादा सेवा चेहरे और चलन से होगी ।

164
01:06:09.770 --> 01:06:27.140
उसका अभ्यास , जैसे भाषणों का अभ्यास करते-करते होशियार हो गये हो ना !

165
01:06:29.370 --> 01:07:06.280
ऐसे अभी चेहरे और चलन से किसी को खुशी का वरदान दो ,

166
01:07:06.280 --> 01:07:19.770
यह अभ्यास करो क्योंकि समय कम मिलेगा

167
01:07:21.770 --> 01:07:54.850
इसलिए समय और संकल्प का महत्व रखते हुए आगे बढ़ते जाओ ।

168
01:08:00.340 --> 01:08:25.020
होना सब अचानक है इसलिए बर्थ डे तो याद रहता है ना !

169
01:08:26.400 --> 01:08:34.510
बर्थ डे आना है , आना है कितना समय याद आया ?

170
01:08:37.140 --> 01:08:48.850
बापदादा आना है , आना है , मिलना है यह कितने समय से याद रखा ?

171
01:08:50.850 --> 01:09:26.910
अब यह संकल्प करो , दृढ़ता से व्यर्थ समय और संकल्प को समाप्त करना है ।

172
01:09:28.000 --> 01:09:44.000
मेरा बाबा , मेरा बाबा दिल में समाते , कहना अलग चीज़ है

173
01:09:44.000 --> 01:10:04.450
लेकिन दिल में समाना , दिल की बात कभी भूलती नहीं है ।

174
01:10:05.600 --> 01:10:24.510
मुख की बात भूल सकती है लेकिन दिल की बात अच्छी या व्यर्थ दोनों नहीं भूलती है ।

175
01:10:32.680 --> 01:10:57.370
तो आज बापदादा को सौगात तो दी ना बाप को ।

176
01:10:57.600 --> 01:11:02.280
दो-दो हाथ उठाओ ।

177
01:11:02.280 --> 01:11:04.850
अरे वाह !

178
01:11:06.850 --> 01:11:11.880
यह फोटो निकालो ।

179
01:11:19.420 --> 01:11:32.340
बापदादा सिर्फ हाथ को नहीं देखते , बापदादा आपके दिल को देख रहे हैं ।

180
01:11:45.250 --> 01:11:56.850
तो आज के दिन की सौगात अपने को भी दी और बाप को भी दी ।

181
01:11:57.310 --> 01:12:15.140
अगर आपका व्यर्थ समय और संकल्प बच गया तो आपका दिन कैसे बीतेगा ?

182
01:12:18.910 --> 01:12:32.110
सदा खुशनसीब और खुशनुमा बन जायेंगे ।

183
01:12:38.450 --> 01:12:59.310
तो अभी संकल्प को अमृतवेले बापदादा से मिलन मनाने के बाद

184
01:13:01.940 --> 01:13:19.370
यह रोज़ स्मृति में लाना और सारे दिन में बीच-बीच में चेक करना ।

185
01:13:19.370 --> 01:13:31.710
बापदादा टाइम फिक्स नहीं करते लेकिन आप अपना टाइम फिक्स करो ।

186
01:13:31.710 --> 01:13:37.710
बीच-बीच में चेक करना

187
01:13:38.050 --> 01:14:01.600
तो जो बापदादा के आगे बर्थ डे पर वायदा किया वह वायदा निभा रहे हैं ?

188
01:14:01.600 --> 01:14:07.820
यह अपने आपसे चेक करना ।

189
01:14:13.880 --> 01:14:16.800
चाहते तो सभी हैं ।

190
01:14:16.800 --> 01:14:29.250
बापदादा आज शक्लें देख रहे हैं कि चाहते हैं हाँ करेंगे , करेंगे , करेंगे

191
01:14:29.250 --> 01:14:44.800
लेकिन यह वेस्ट आ जाता है ना तो बाप से किया हुआ वायदा भी भुला देता है ।

192
01:14:49.820 --> 01:14:54.400
तो वेस्ट खत्म ।

193
01:15:08.570 --> 01:15:34.570
एक मिनट अभी भी एक मिनट पावरफुल आत्मा बन संकल्प करो

194
01:15:35.310 --> 01:15:46.400
वेस्ट को खत्म करना ही है ।

195
01:17:52.220 --> 01:17:56.800
अच्छा ।

196
01:17:58.800 --> 01:18:37.250
बापदादा एक भी बच्चे को अपने समान बनाने के बिना रहने नहीं चाहता ।

197
01:18:37.600 --> 01:18:40.340
प्यार है ना !

198
01:18:40.340 --> 01:18:47.650
देखो प्यार की निशानी आज का दिन है ।

199
01:18:47.650 --> 01:19:07.310
बाप और बच्चे का सारे कल्प में ऐसा दिन नहीं होता जो बाप और बच्चे का जन्म ही एक दिन हो ।

200
01:19:12.170 --> 01:19:26.510
बाप का एक-एक बच्चे से दिल का प्यार है

201
01:19:28.910 --> 01:19:55.310
कि मेरा बच्चा , परमात्मा का बच्चा , जो संकल्प करो वह संकल्प सफल हो ।

202
01:19:58.050 --> 01:20:11.540
एक-एक संकल्प में शक्ति हो , कहना और करना एक हो ।

203
01:20:12.340 --> 01:20:16.450
कहा अर्थात् हुआ ।

204
01:20:16.450 --> 01:20:21.020
शुद्ध संकल्प हो ।

205
01:20:21.940 --> 01:20:47.250
तो व्यर्थ स्वतः ही खत्म हो जायेगा क्योंकि एडवांस पार्टी डेट चाहती है ।

206
01:20:55.420 --> 01:21:10.800
तो आपकी बड़ी-बड़ी दादियां हैं , बड़े-बड़े भाई हैं , प्यार तो है ना उन्हों से ।

207
01:21:16.220 --> 01:21:19.310
कितना याद करते हैं ?

208
01:21:19.310 --> 01:21:26.620
दादी को , दीदी को , चन्द्रमणि को ।

209
01:21:26.620 --> 01:21:30.050
सभी के नाम लेते जाओ ।

210
01:21:30.510 --> 01:21:35.880
सभी को याद करते हैं ।

211
01:21:37.370 --> 01:21:46.740
तो वह जो चाहती हैं वह करके बताओ ना ।

212
01:21:51.200 --> 01:21:59.310
तो आज का संकल्प क्या रहा ?

213
01:21:59.310 --> 01:22:09.420
कहना और करना एक हो ।

214
01:22:19.650 --> 01:22:23.080
ठीक है !

215
01:22:23.080 --> 01:23:15.820
तो आज चारों ओर के बच्चों को बापदादा बर्थ डे की सौगात यही दे रहे हैं “ कहना और करना ” एक करो ।

216
01:23:26.510 --> 01:24:02.510
दृढ़ता की सौगात आज के दिन की बापदादा हर बच्चे को दे रहे हैं ।

217
01:24:04.110 --> 01:24:15.650
शुभ कार्य दृढ़ता से सफल करो ।

218
01:24:21.940 --> 01:24:36.400
बाकी जो भी आज पहले बारी आये हैं , वह उठो ।

219
01:24:55.310 --> 01:25:00.220
हाथ हिलाओ ।

220
01:25:26.170 --> 01:26:10.280
बापदादा आने वाले बच्चों को आ गये , जान लिया मेरा बाबा , इसकी बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं ।

221
01:26:12.280 --> 01:26:44.340
बापदादा को खुशी है फिर भी हलचल जो होनी है उसके पहले पहुंच गये हो , इसकी मुबारक हो ।

222
01:26:46.340 --> 01:27:02.280
अभी आने वाला हर बच्चा यह संकल्प करो

223
01:27:04.280 --> 01:27:21.140
दृढ़ , साधारण संकल्प नहीं , दृढ़ संकल्प करो कि तीव्र पुरूषार्थी बनना ही है ।

224
01:27:21.140 --> 01:27:27.650
तीव्र , साधारण नहीं ।

225
01:27:30.170 --> 01:27:47.540
तो आने वाले अपने राज्य में आ जायेंगे

226
01:27:47.940 --> 01:27:58.850
इसलिए साधारण संकल्प का समय पूरा हुआ ।

227
01:27:58.850 --> 01:28:17.480
अभी तीव्र पुरूषार्थ का समय है , चांस है , फिर भी चांस लेने वाले चांसलर तो बन गये ।

228
01:28:20.220 --> 01:28:34.800
तो बापदादा हर बच्चे को देख खुश है

229
01:28:35.540 --> 01:28:57.370
और हर बच्चे को कह रहे हैं कि तीव्र पुरूषार्थ करेंगे तो साथ जायेंगे , साथ रहेंगे ।

230
01:29:02.400 --> 01:29:11.420
तो मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

231
01:29:44.800 --> 01:30:02.050
सेवा का टर्न यू . पी . बनारस और पश्चिम नेपाल :-

232
01:30:41.080 --> 01:30:57.650
यू . पी . वाले आदि स्थापना से भाग्यवान हैं

233
01:30:58.220 --> 01:31:34.620
क्योंकि ब्रह्मा बाप और जगदम्बा जितना समय बच्चों से मिलने गये हैं ,

234
01:31:36.800 --> 01:31:53.940
उतना औरों के पास सिवाए बाम्बे और दिल्ली के , नहीं गये हैं ।

235
01:31:53.940 --> 01:32:21.080
तो लकी हैं जो ब्रह्मा बाप और जगदम्बा का पांव पड़ते बच्चों को स्नेह मिला है ।

236
01:32:21.480 --> 01:32:36.800
डायरेक्ट ब्रह्मा बाप और जगदम्बा की पालना मिली है

237
01:32:38.220 --> 01:33:04.000
इसीलिए यू . पी . भाग्यवान है और बापदादा ने देखा

238
01:33:06.510 --> 01:33:36.910
कि सेवा की एक विशेषता है कि सेवाकेन्द्र भी अच्छे खोले हैं ।

239
01:33:39.420 --> 01:33:54.280
कई कुमारियों को टीचर बनने का भाग्य मिला है

240
01:33:58.170 --> 01:34:21.880
इसलिए अनेक टीचर्स सेवा में लगी हुई हैं

241
01:34:21.880 --> 01:34:31.420
और साथ में आवाज भी फैलाया है ।

242
01:34:31.880 --> 01:34:42.170
बाकी बापदादा जो अभी चाहता है वह तो जानते हो

243
01:34:42.170 --> 01:35:02.170
कि अभी बापदादा हर ज़ोन को यही कहता है कि अभी वारिस क्वालिटी बाप के सामने लाओ ।

244
01:35:08.000 --> 01:35:20.570
अभी बापदादा सभी ज़ोन को कहते हैं

245
01:35:20.570 --> 01:35:40.850
हर एक ज़ोन में या हर एक सेन्टर में वारिस क्वालिटी कितने हैं

246
01:35:42.340 --> 01:36:06.740
वह बापदादा के पास हर ज़ोन , डबल विदेशी भी हर स्थान के वारिस बच्चों की लिस्ट देवे

247
01:36:08.340 --> 01:36:37.140
क्योंकि समय समीप आ रहा है इसलिए अभी सेवा की गति फास्ट करो ।

248
01:36:38.280 --> 01:36:47.080
रेग्युलर स्टूडेन्ट तो बहुत हैं हर ज़ोन में

249
01:36:47.080 --> 01:37:18.740
लेकिन वारिस क्वालिटी अर्थात् तन-मन-धन से , सम्बन्ध-सम्पर्क से हर कार्य में सहयोगी हो ।

250
01:37:19.650 --> 01:37:39.310
सिर्फ अपने सेन्टर के सहयोगी नहीं , लेकिन यज्ञ स्नेही वारिस हो ।

251
01:37:39.310 --> 01:37:48.450
वारिस माना सेन्टर की सेवा में बहुत अच्छा है नहीं ,

252
01:37:49.020 --> 01:38:05.480
वारिस का अर्थ ही है स्नेह सहयोग और सेवाधारी ।

253
01:38:06.680 --> 01:38:17.820
ऐसे हर एक ज़ोन लिस्ट भेजना ।

254
01:38:17.820 --> 01:38:26.850
आप लोग मधुबन वाले लिस्ट देखना , मंगाना ।

255
01:38:28.220 --> 01:38:46.400
फिर बापदादा सुनायेंगे रिजल्ट वारिस किसको कहा जाता और वारिस को क्या-क्या करना होता है !

256
01:38:51.540 --> 01:39:02.620
बाकी यू . पी . वाले जो अपना टर्न बजाने आये हैं ,

257
01:39:03.200 --> 01:39:09.600
तो इस टर्न का फायदा काफी उठाया है ।

258
01:39:09.600 --> 01:39:19.080
हर ज़ोन उठाता है यू . पी . वालों ने भी अच्छा चांस लिया है ।

259
01:39:19.080 --> 01:39:33.710
अनेक आत्माओं को चांस दिलाया है इसकी मुबारक हो , मुबारक हो ।

260
01:39:40.450 --> 01:40:02.570
बापदादा हर एक बच्चे को , जो भी उठे हो हर बच्चे को बर्थ डे की मुबारक दे रहे हैं

261
01:40:03.600 --> 01:40:20.450
और साथ में भविष्य में तीव्र पुरूषार्थी भव का वरदान दे रहे हैं ।

262
01:40:25.710 --> 01:40:28.450
अच्छा ।

263
01:40:43.940 --> 01:40:58.110
95 देशों से 1300 डबल विदेशी आये हैं :-

264
01:41:31.140 --> 01:41:45.020
बहुत अच्छा मधुबन का श्रंगार मधुबन में पहुंच गया है ।

265
01:41:48.910 --> 01:42:03.420
डबल विदेशियों का मधुबन से प्यार कितना है

266
01:42:03.770 --> 01:42:12.220
और मधुबन वालों का भी डबल फॉरेनर्स से प्यार है ।

267
01:42:12.220 --> 01:42:19.420
डबल फॉरेनर्स मधुबन का श्रृंगार हैं ।

268
01:42:27.770 --> 01:42:53.600
सभी ने अच्छी रीति से जो भी कांफ्रेंस प्रोग्राम करना था , वह आराम से किया ।

269
01:42:55.540 --> 01:43:04.910
जगह थोड़ी कम मिली है , यह भी हो जायेगा आगे ।

270
01:43:07.940 --> 01:43:29.480
बाकी डबल फारेनर्स को बापदादा यही वरदान दे रहे हैं

271
01:43:30.740 --> 01:43:52.450
कि जगत अम्बा के दो शब्द बाप का कहना और बच्चे का करना ,

272
01:43:53.820 --> 01:44:14.110
यह सदा जगत अम्बा की सौगात याद रखना ।

273
01:44:15.080 --> 01:44:38.970
बापदादा जानता है मुरली से प्यार सबका है , बाकी परिवार से भी प्यार है ।

274
01:44:38.970 --> 01:45:30.050
बाप से तो है ही , अभी अपने में हर धारणा , हर सेवा में सफलतामूर्त एक-एक में यह दोनों ही विशेषता हो ,

275
01:45:31.420 --> 01:45:58.050
जो बापदादा सेवा में आप लोगों का दृष्टान्त देकर औरों को भी उमंग में लाये ।

276
01:46:07.140 --> 01:46:15.480
ऐसा पुरूषार्थ कर एक्जैम्पुल बनो ।

277
01:46:21.080 --> 01:46:45.710
करने में दृढ़ संकल्प से सफलता के अधिकारी हो इसलिए एक्जैम्पुल बनो ।

278
01:46:46.450 --> 01:46:59.770
तीव्र पुरूषार्थी बनने का एक्जैम्पुल बनो , साधारण तो सभी हैं

279
01:46:59.770 --> 01:47:11.420
लेकिन आप तीव्र पुरूषार्थ का सैम्पुल बनो ।

280
01:47:20.280 --> 01:47:26.570
उम्मीदवार हैं ।

281
01:47:28.910 --> 01:47:52.110
बापदादा ने देखा डबल विदेशियों में निज़ी संस्कार होता है कि जो सोचा वह करना ही है ।

282
01:47:55.420 --> 01:48:07.650
तो अभी तीव्र पुरूषार्थी का ऐसे सैम्पुल बनो ,

283
01:48:07.650 --> 01:48:27.080
जो बापदादा आपका दृष्टान्त देकरके औरों को भी उमंग-उल्हास में लाये ।

284
01:48:31.820 --> 01:48:34.800
उम्मीदवार हो ।

285
01:48:34.800 --> 01:48:42.850
जो संकल्प करो वह कर सकते हो

286
01:48:50.170 --> 01:49:14.050
इसलिए बापदादा आज के दिन की पदम पदम पदम मुबारक दे रहे हैं ।

287
01:49:24.570 --> 01:49:32.340
बापदादा सुनते हैं क्या-क्या करते हो ?

288
01:49:32.340 --> 01:50:02.800
खुश होते हैं बापदादा और मधुबन के वायुमण्डल में पहुंच जाते हो इसकी भी मुबारक हो , मुबारक हो , मुबारक हो ।

289
01:50:11.080 --> 01:50:42.450
( देश सम्भालने वाले , सेन्टर सम्भालने वालों की मीटिंग हुई और 150 पुराने 25 साल से समार्पित टीचर्स की सेरीमनी थी )

290
01:50:47.770 --> 01:50:59.310
सब डिपार्टमेंट ने जो कुछ फाइनल किया है

291
01:50:59.540 --> 01:51:12.340
मिल करके और दादियों के सहयोग से उसके लिए खुश है

292
01:51:12.800 --> 01:51:24.910
कि फैसला यथार्थ किया है और आगे बढ़ते चलेंगे ।

293
01:51:25.370 --> 01:51:30.620
ओम् शान्ति ।

294
01:51:34.620 --> 01:51:44.510
आपकी दादी ओम् शान्ति बहुत कराती है ना ।

295
01:52:03.250 --> 01:52:07.080
अच्छा ।

296
01:52:21.370 --> 01:52:40.510
बापदादा हर बच्चे को देख चाहे पीछे बैठे हैं चाहे कोने में बैठे हैं ,

297
01:52:40.510 --> 01:53:19.540
लेकिन एक-एक बच्चे को सदा तीव्र पुरूषार्थी बन औरों को भी तीव्र पुरूषार्थी अपने संग से भी बना सकते हैं ।

298
01:53:22.400 --> 01:53:53.650
किसी भी आत्मा को कोई सहयोग चाहिए वह दिल से सहयोग दे तीव्र पुरूषार्थी बनाते चलो ।

299
01:53:54.850 --> 01:54:00.170
हर बच्चा तीव्र पुरूषार्थी हो ।

300
01:54:01.370 --> 01:54:09.710
नम्बरवार नहीं , तीव्र पुरूषार्थी ।

301
01:54:15.540 --> 01:54:44.340
कम से कम अपने सम्पर्क में रहने वाले , आने वाले हर स्थान तीव्र पुरूषार्थी स्थान हो ।

302
01:54:50.450 --> 01:55:17.420
यही संकल्प हर एक रखे और फिर बापदादा इसकी रिजल्ट देखेंगे ।

303
01:55:17.420 --> 01:55:33.820
जहाँ सेन्टर वाले सब तीव्र पुरूषार्थी स्वरूप में है

304
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उनको बापदादा कोई-कोई नहीं , सभी साथी हो उनको एक गिफ्ट देंगे ।

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हो सकता है ना !

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कि मुश्किल है ?

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नहीं ।

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कम से कम अपने स्थान को तो बना सकते हैं ।

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अपने सेवाकेन्द्र को तो बना सकते हैं ।

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ऐसा एक्जैम्पुल अभी बापदादा देखने चाहते हैं ।

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जैसे मोहजीत की कहानी है ना , जिसे भी मिले मोहजीत ।

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तो सुनने में अच्छी लगती है ना ।

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ऐसे जिसे भी देखें तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप ।

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लक्ष्य रखो , लक्ष्य से लक्षण आ ही जायेंगे ।

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हर एक सेन्टर सन्तुष्टमणियों का सेन्टर हो ।

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अच्छा ।

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बापदादा दिल से चाहते हैं एक बच्चा भी पीछे नहीं रह जाए ।

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साथ में चले ।

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पीछे-पीछे आने वाले अच्छे नहीं लगते हैं ।

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साथ हो , हाथ हो , चलना है ना घर में ।

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रिटर्न जरनी है ।

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उसके लिए जैसे ब्रह्मा बाप फरिश्ता है , ऐसे फॉलो फादर ।

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साकार में होते फरिश्ता , जिसको भी देखो फरिश्ता ही फरिश्ता , तब गेट खुल जायेगा ।

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अच्छा ।

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सभी बच्चों को सदा खुशनसीब , खुशनुमा स्वरूप की यादप्यार ।

