WEBVTT

1
00:16:29.370 --> 00:17:04.680
आज बापदादा हर बच्चे के भाग्य की रेखायें देख रहे हैं ।

2
00:17:11.200 --> 00:17:36.450
मस्तक में चमकते हुए सितारे की रेखा ,

3
00:17:40.220 --> 00:17:56.280
नयनों में स्नेह और शक्ति की रेखा ,

4
00:17:58.280 --> 00:18:10.620
होठों में मुस्कान की रेखा ,

5
00:18:12.620 --> 00:18:39.480
पांव में हर कदम में पदम की रेखा देख रहे हैं ।

6
00:18:43.020 --> 00:19:14.510
आप सभी भी अपने भाग्य की रेखायें देख हर्षित होते हो ना !

7
00:19:25.250 --> 00:19:44.970
दिल में यही गाते वाह मेरा भाग्य !

8
00:20:04.970 --> 00:20:39.710
हर एक का मस्तक उस दिव्य सितारे से चमकता हुआ देख

9
00:20:44.050 --> 00:21:19.080
बापदादा भी खुश हो रहे हैं और यही दिल में गीत गाते वाह बच्चे वाह !

10
00:21:30.800 --> 00:21:49.710
बच्चों के दिल से क्या गीत सुन रहे हैं ?

11
00:21:50.170 --> 00:21:56.850
वाह बाबा वाह !

12
00:21:56.850 --> 00:22:01.200
तो बच्चे भी वाह !

13
00:22:01.200 --> 00:22:05.200
बाप भी वाह !

14
00:22:05.200 --> 00:22:14.620
तो यह सारी सभा क्या हो गई ?

15
00:22:14.620 --> 00:22:22.110
वाह ! वाह ! वाह !

16
00:22:25.820 --> 00:22:53.540
तो अपने भाग्य को देख सदा ऐसे ही हर्षित रहो

17
00:22:55.020 --> 00:23:05.540
जैसे अभी सब हर्षित हो रहे हैं ।

18
00:23:07.770 --> 00:23:36.050
यह भाग्य अब संगमयुग में ही मिलता है ।

19
00:23:39.080 --> 00:23:59.820
संगमयुग के हर घड़ी की बहुत बड़ी वैल्यु है ।

20
00:24:05.310 --> 00:24:27.600
संगमयुग की एक घड़ी अविनाशी हो जाती है

21
00:24:30.220 --> 00:24:49.770
क्योंकि हर घड़ी का 21 जन्मों के साथ सम्बन्ध है ।

22
00:24:51.020 --> 00:25:09.770
अब की एक घड़ी का सन्बन्ध 21 जन्मों के साथ है ।

23
00:25:16.050 --> 00:25:32.850
तो चेक करो एक घड़ी अगर व्यर्थ गई

24
00:25:33.880 --> 00:25:47.710
तो एक जन्म की बात नहीं 21 जन्म के सम्बन्ध की बात है

25
00:25:48.170 --> 00:26:14.800
इसलिए बापदादा बच्चों को समय प्रति समय अटेन्शन खिंचवा रहे हैं

26
00:26:17.710 --> 00:26:42.450
कि संगमयुग की एक घड़ी को भी एक संकल्प को भी व्यर्थ नहीं गवाओ

27
00:26:43.370 --> 00:27:02.220
क्योंकि एक जन्म व्यर्थ नहीं गंवाया लेकिन 21 जन्म में व्यर्थ गंवाया ।

28
00:27:05.310 --> 00:27:26.220
संगमयुग का महत्व हर समय याद रखो ।

29
00:27:27.650 --> 00:28:00.850
बापदादा ने व्यर्थ समय और व्यर्थ संकल्प का होमवर्क सभी को दिया था ।

30
00:28:01.540 --> 00:28:15.650
तो सभी ने होमवर्क किया ?

31
00:28:16.340 --> 00:28:44.850
जो समझते हैं हमारा अटेन्शन रहा और बहुत करके सफलता भी प्राप्त हुई ,

32
00:28:47.370 --> 00:29:09.600
लक्ष्य का लक्षण तक परिणाम है , वह हाथ उठाना ।

33
00:29:10.620 --> 00:29:14.850
अच्छा ।

34
00:29:17.770 --> 00:29:26.570
पाण्डव उठा रहे हैं ? बड़ा हाथ उठाओ ।

35
00:29:46.970 --> 00:29:54.570
अभी सभी ने काम नहीं किया है ।

36
00:29:58.800 --> 00:30:06.970
संगमयुग के महत्व को

37
00:30:11.940 --> 00:30:43.480
अगर सदा बुद्धि में याद रखो कि अविनाशी बाप द्वारा यह कार्य मिला है ।

38
00:30:45.820 --> 00:31:04.620
हर घड़ी अविनाशी बनने की है क्योंकि अविनाशी बाप ने यह वरदान दिया है ।

39
00:31:08.050 --> 00:31:17.880
तो सहज ही हो जायेगा ।

40
00:31:22.110 --> 00:31:43.370
बाप ने सुनाया कि हर एक ब्राह्मण बच्चे के कदम में पदम की रेखा है ।

41
00:31:46.280 --> 00:32:14.970
सोचो कदम में पदम की रेखा तो कितने पदमों के लिए संगमयुग पर गोल्डन चांस है ।

42
00:32:24.850 --> 00:32:51.940
हर एक को यह अपना भाग्य स्मृति में रखना है ।

43
00:33:02.000 --> 00:33:19.420
कई बच्चे सोचते हैं कि बापदादा क्या चाहते हैं ?

44
00:33:20.280 --> 00:33:47.370
बापदादा यही चाहते हैं कि एक-एक बच्चा डबल राजा बन जाये ।

45
00:33:52.170 --> 00:34:09.540
अभी स्वराज्य अधिकारी और भविष्य में विश्व राज्य अधिकारी ।

46
00:34:09.940 --> 00:34:37.420
कोई भी बच्चा डबल राजा बनने में कम नहीं हो ।

47
00:34:43.140 --> 00:34:59.080
तो हर एक बच्चा डबल राज्य अधिकारी हो ना !

48
00:34:59.080 --> 00:35:01.600
कांध हिलाओ ।

49
00:35:01.600 --> 00:35:11.710
तो हर बच्चा डबल राज्य अधिकारी है , कांध हिलाओ ।

50
00:35:19.880 --> 00:35:26.910
तो बाप को कितनी खुशी होती है ।

51
00:35:32.340 --> 00:35:57.020
बापदादा हर बच्चे का रिकार्ड रोज़ देखते हैं ।

52
00:36:02.510 --> 00:36:06.680
तो क्या देखते हैं ?

53
00:36:06.680 --> 00:36:14.970
हर एक अपने दिल में तो जान गये होंगे ।

54
00:36:18.450 --> 00:36:26.970
राज्य अधिकारी बने तो हैं

55
00:36:32.050 --> 00:36:49.820
लेकिन अभी जो स्वराज्य अधिकारी हो ,

56
00:36:52.740 --> 00:37:18.110
स्वराज्य अधिकारी अर्थात् मन-बुद्धि संस्कार को अपने कन्ट्रोल में चलाने वाला ।

57
00:37:19.480 --> 00:37:37.540
जब चाहे जैसे चाहे वैसे अधिकार में रहे ।

58
00:37:39.600 --> 00:37:58.970
जैसे यह स्थूल कर्मेन्द्रियां हाथ हैं , पांव हैं अपने कन्ट्रोल में रहते हैं

59
00:37:58.970 --> 00:38:28.220
ऐसे मन बुद्धि संस्कार जब चाहे जैसे चाहे रूलिंग पावर और कन्ट्रोलिंग पावर हो ।

60
00:38:32.000 --> 00:38:54.450
अभी देखने में नम्बरवार बहुत हैं ।

61
00:38:55.820 --> 00:39:01.650
हैं यह भी मेरे ।

62
00:39:01.650 --> 00:39:06.340
मन मैं नहीं है , मेरा है ।

63
00:39:06.340 --> 00:39:10.800
संस्कार मेरे हैं ।

64
00:39:10.800 --> 00:39:16.050
बुद्धि मेरी है ।

65
00:39:20.400 --> 00:39:34.910
तो कन्ट्रोलिंग पावर रूलिंग पावर नम्बरवार है ।

66
00:39:37.420 --> 00:40:06.850
बापदादा समय की सूचना भी समय प्रति समय देते रहे हैं ,

67
00:40:08.850 --> 00:40:39.600
उस समय के अनुसार आप लोगों का एक-एक का स्वमान है विश्व कल्याणकारी ।

68
00:40:44.450 --> 00:41:14.050
अब समय प्रमाण हर एक बच्चे को विश्व कल्याणी स्वरूप को प्रत्यक्ष करने का समय है ।

69
00:41:14.050 --> 00:41:31.200
चारों ओर दुःख अशान्ति बढ़ रही है ।

70
00:41:31.200 --> 00:42:09.420
आपके भाई आपकी बहिनें , परिवार दुःखी हो रहे हैं तो आपको अपने परिवार पर रहम नहीं आता !

71
00:42:17.540 --> 00:42:32.450
अभी बापदादा यही इशारा दे रहे हैं

72
00:42:36.450 --> 00:43:10.800
स्व पुरूषार्थ के साथ विश्व सेवा जैसे वाचा की सेवा वर्तमान समय अच्छी धूमधाम से कर रहे हो ।

73
00:43:10.800 --> 00:43:39.480
बापदादा खुश है , यह 75 वर्ष की जुबली ने सभी के मन में मैजारिटी सेवा का उमंग लाया है ।

74
00:43:40.170 --> 00:43:48.620
बापदादा देख करके खुश है

75
00:43:48.620 --> 00:44:04.850
लेकिन अभी मन्सा सेवा की भी आवश्यकता है

76
00:44:07.600 --> 00:44:20.800
क्योंकि सभी तरफ विश्व कल्याणकारी बनना है

77
00:44:20.800 --> 00:44:50.220
उसमें मन्सा वाचा और कर्मणा अर्थात् चलन और चेहरे से तीनों ही सेवा की अभी आवश्यकता है ।

78
00:44:57.310 --> 00:45:28.340
रोज़ चेक करो तीनों सेवाओं में कितनी परसेन्ट सेवा की ?

79
00:45:28.680 --> 00:45:41.820
वाचा में तो बापदादा ने भी सर्टीफिकेट दिया

80
00:45:41.820 --> 00:46:24.450
लेकिन अभी मन्सा सूक्ष्म वायबे्रशन्स द्वारा आत्माओं के दुःख अशान्ति का सहारा बनना पड़े ।

81
00:46:27.420 --> 00:46:34.800
क्या आपको तरस नहीं आता ?

82
00:46:40.620 --> 00:47:05.080
बापदादा को तो बच्चों पर चाहे कैसे भी हैं लेकिन फिर भी बच्चे तो हैं ना , तरस आता है ।

83
00:47:10.340 --> 00:47:37.080
तो अभी हर बच्चे को सिर्फ सेन्टर कल्याणी नहीं , ज़ोन कल्याणी नहीं विश्व कल्याणी बनना है ।

84
00:47:49.080 --> 00:48:14.680
तो बापदादा अभी यही अटेन्शन दिला रहे हैं

85
00:48:22.000 --> 00:48:39.370
अपने भक्तों का कल्याणकारी बनो

86
00:48:50.510 --> 00:49:03.600
क्योंकि यह संगमयुग का बहुत बड़ा महत्व है ।

87
00:49:07.710 --> 00:49:29.200
अभी संगमयुग में जो चाहे जितना चाहे उतना बाप से सहयोग मिल सकता है ।

88
00:49:40.170 --> 00:49:47.020
तो सुना क्या करना है अभी ?

89
00:49:48.220 --> 00:49:53.880
मन्सा सेवा को बढ़ाओ ।

90
00:49:55.880 --> 00:50:13.200
अपने कार्य के प्रमाण जैसे ट्रैफिक कन्ट्रोल का टाइम फिक्स किया हुआ है

91
00:50:13.200 --> 00:50:32.510
ऐसे ही हर एक को मन्सा सेवा का भी टाइम फिक्स करना चाहिए ।

92
00:50:35.820 --> 00:50:59.820
जब ज्यादा दुःख होगा उस समय सभी का अटेन्शन उस हलचल में होगा

93
00:50:59.820 --> 00:51:27.310
लेकिन अभी मन्सा सेवा का समय है

94
00:51:35.540 --> 00:52:17.710
इसलिए हर बच्चे को अपने विश्व कल्याणी का स्वरूप इमर्ज करना है ।

95
00:52:23.420 --> 00:52:41.940
विश्व कल्याण में स्व कल्याण स्वतः और सहज हो जायेगा

96
00:52:42.450 --> 00:53:11.140
क्योंकि अगर मन फ्री है तो व्यर्थ आता है

97
00:53:11.140 --> 00:53:32.280
लेकिन मन बिजी होगा तो व्यर्थ सहज ही समाप्त हो जायेगा ।

98
00:53:43.880 --> 00:54:17.420
तो बापदादा जब चक्र लगाके चारों ओर देश विदेश के अज्ञानी बच्चों को देखते हैं

99
00:54:19.540 --> 00:55:04.850
तो तरस आता है इसलिए आप सब भी अब दुःख हर्ता सुख कर्ता बनो ।

100
00:55:28.510 --> 00:55:41.820
आज तो सभी होली मनाने आये हैं ।

101
00:55:53.540 --> 00:56:07.710
दुनिया वालों की होली और आपकी होली में कितना अन्तर है ।

102
00:56:11.200 --> 00:56:42.110
लेकिन बापदादा ने पहले भी कहा कि आपके भक्त आप लोगों के किये हुए कार्य को कॉपी करने में होशियार हैं

103
00:56:46.680 --> 00:57:14.570
क्योंकि यह सब विधियां द्वापर में आने वाली आत्माओं ने बनाई हैं ।

104
00:57:14.570 --> 00:57:34.570
तो पहला पहला जन्म था ना इसलिए उन्हों की बुद्धि भी जैसे नियम है पहले सतोप्रधान

105
00:57:34.570 --> 00:57:54.340
फिर रजो तमो में आते हैं , तो उस समय उन्हों की बुद्धि अपने हिसाब से सतो थी

106
00:57:55.770 --> 00:58:19.880
इसलिए आपकी एक-एक विशेषता को , आप सदा उत्साह में खुशी में रहते हो

107
00:58:21.880 --> 00:58:34.220
उसको उत्सव के रूप में मनाना शुरू किया है ।

108
00:58:36.220 --> 00:58:46.850
जैसे शिवरात्रि पर भी बताया ना कॉपी करने में कितने होशियार हैं ।

109
00:58:46.850 --> 00:59:01.880
ऐसे अभी भी आप सदा संगम पर उत्साह में रहते हो

110
00:59:01.880 --> 00:59:19.540
तो आपका उत्साह उन्होंने उत्सव के रूप में यादगार बनाया है ।

111
00:59:22.910 --> 00:59:29.540
तो होली में क्या करते हैं ?

112
00:59:31.540 --> 00:59:50.110
आपने भी अपने जीवन को रंगा है लेकिन आपका रंग कौन सा है ?

113
00:59:51.140 --> 01:00:04.850
आप सभी का रंग है बाप के संग का रंग ।

114
01:00:11.540 --> 01:00:24.510
तो सारा समय बाप के संग के रंग में रहते हो ना !

115
01:00:27.020 --> 01:00:39.370
तो उन्होंने भी रंग तो बनाया लेकिन बॉडी कान्सेस है ना !

116
01:00:39.370 --> 01:00:45.250
तो स्थूल रंग बना दिया है ।

117
01:00:47.250 --> 01:01:24.850
लेकिन आप सभी सदा यह कल्याणकारी संगम में इस रंग में , संग के रंग में रहते हो ना !

118
01:01:24.850 --> 01:01:27.600
रंग लगाया है ना !

119
01:01:27.600 --> 01:01:57.420
संग का रंग लग गया और होली इंगलिश में पवित्रता को कहा जाता है ।

120
01:02:00.740 --> 01:02:19.770
तो संग के रंग में आप होली अर्थात् पवित्र बनते हो ।

121
01:02:23.250 --> 01:02:26.340
पवित्र बने हैं ना !

122
01:02:26.340 --> 01:02:34.000
पवित्रता का व्रत सभी ने लिया है ना पक्का !

123
01:02:34.000 --> 01:02:57.140
नम्बरवार भले हैं लेकिन ब्राह्मण बनना अर्थात् पवित्रता का व्रत लेना

124
01:03:04.680 --> 01:03:15.420
क्योंकि बाप सदा पवित्र है ।

125
01:03:18.220 --> 01:03:21.540
है ही पवित्र स्वरूप ।

126
01:03:21.540 --> 01:03:23.540
बनना नहीं पड़ता ।

127
01:03:23.540 --> 01:03:29.200
स्वरूप ही पवित्रता है ।

128
01:03:33.020 --> 01:03:43.020
तो होली की विशेषता जानते हो क्या है ?

129
01:03:43.480 --> 01:04:06.510
पवित्र तो आप बनते हो लेकिन आप संग के रंग में डबल पवित्र बनते हो ।

130
01:04:06.510 --> 01:04:21.770
पवित्र धर्म पितायें , महान आत्मायें बनते हैं

131
01:04:21.770 --> 01:04:30.340
लेकिन वह सिर्फ आत्मा को पवित्र बनाते हैं ।

132
01:04:30.340 --> 01:04:44.220
शरीर और आत्मा दोनों ही पवित्र वह आप भविष्य में बनते हो ।

133
01:04:44.220 --> 01:04:54.450
शुरू से लेके देखो द्वापर से जो भी आये हैं

134
01:04:54.910 --> 01:05:03.770
पवित्र बने हैं लेकिन डबल पवित्र कोई नहीं बना है ।

135
01:05:04.280 --> 01:05:11.940
शरीर भी पवित्र आत्मा भी पवित्र ।

136
01:05:15.020 --> 01:05:35.140
आप जब भविष्य में राज्य अधिकारी बनेंगे तो आत्मा और शरीर दोनों पवित्र होंगे ।

137
01:05:36.170 --> 01:05:41.250
सारा चक्र घूमो ।

138
01:05:42.340 --> 01:06:00.000
द्वापर से आये हैं , द्वापर से अब तक देखो , कोई डबल पवित्र बना है !

139
01:06:03.370 --> 01:06:13.250
तो क्यों आप डबल पवित्र , इतने महान बने हैं ?

140
01:06:13.600 --> 01:06:20.170
क्योंकि आपको रंग कौनसा लगा है ?

141
01:06:20.620 --> 01:06:27.140
परमात्मा के संग का रंग लगा है ।

142
01:06:27.770 --> 01:06:46.340
तो जैसे परम आत्मा पवित्र है तो आप भी 21 जन्म डबल पवित्र रहते हो ।

143
01:06:47.710 --> 01:06:58.110
चाहे धर्मपिता आये लेकिन वह भी डबल पवित्र नहीं ।

144
01:07:01.080 --> 01:07:09.880
आपका भाग्य है क्योंकि आप रहते ही परमात्मा के संग में हो ।

145
01:07:09.880 --> 01:07:21.770
संग का रंग इतना पक्का रहता है जो डबल पवित्र बन जाते हो ।

146
01:07:29.080 --> 01:07:41.770
और होली का दूसरा अर्थ है हो ली ।

147
01:07:41.770 --> 01:07:49.770
हो गया , जो बीता सो बीता ।

148
01:07:50.910 --> 01:07:53.250
हो ली ।

149
01:07:53.250 --> 01:07:58.340
तो हो ली करना आता है ?

150
01:07:58.340 --> 01:08:04.510
जो हो चुका वह हो चुका ।

151
01:08:05.140 --> 01:08:13.310
हो ली शब्द का अर्थ क्या निकलता ?

152
01:08:13.310 --> 01:08:19.650
बीती सो बीती ।

153
01:08:25.310 --> 01:08:42.800
इससे आप डबल होली 21 जन्म रहते हो ।

154
01:08:42.800 --> 01:09:03.820
एक जन्म नहीं क्योंकि संगम के एक एक सेकण्ड का कनेक्शन 21 जन्मों का है ।

155
01:09:03.820 --> 01:09:32.110
यहाँ आपने अगर एक सेकण्ड या एक मिनट सफल किया तो 21 जन्म आपका सफल रहेगा ।

156
01:09:33.420 --> 01:09:38.450
गैरन्टी है ।

157
01:09:39.650 --> 01:09:43.940
तो ऐसी होली मनाई है ?

158
01:09:44.620 --> 01:09:47.370
होली करना आता है ?

159
01:09:47.370 --> 01:09:55.200
जो बीता वह बीत गया , हो ली ।

160
01:09:59.310 --> 01:10:04.620
और तीसरी रूप रेखा क्या करते हैं ?

161
01:10:04.620 --> 01:10:11.310
पहले जलाते हैं फिर मनाते हैं ।

162
01:10:11.310 --> 01:10:17.370
तो आपने क्या किया ?

163
01:10:18.680 --> 01:10:36.740
योग अग्नि से अपने कमज़ोरियों को , संस्कारों को

164
01:10:38.110 --> 01:10:51.600
जो अनेक जन्मों के उल्टे संस्कार हैं उसको योग अग्नि से जलाया है ना !

165
01:10:51.600 --> 01:11:00.450
जलाया है कि अभी भी जला रहे हैं ?

166
01:11:06.170 --> 01:11:08.620
जलाया है ?

167
01:11:08.620 --> 01:11:31.370
जो समझते हैं हमने योग अग्नि से अपने पहले के संस्कार जलाया है , जल गये वह हाथ उठाओ ।

168
01:11:31.370 --> 01:11:38.220
जल गये कि अभी भी आते हैं ?

169
01:11:38.620 --> 01:11:43.540
थोड़ा-थोड़ा तो आते हैं ?

170
01:11:45.540 --> 01:11:56.280
बापदादा के पास जब अपना चार्ट भेजते हैं ना

171
01:11:56.800 --> 01:12:05.650
तो कहते हैं बहुत तो चले गये , चतुर हैं ना कहने में ।

172
01:12:05.650 --> 01:12:15.880
कहते हैं बहुत तो खत्म हो गये , कभी-कभी थोड़ा इमर्ज हो जाता है ।

173
01:12:22.110 --> 01:12:26.400
लेकिन जलना माना जलना ।

174
01:12:26.400 --> 01:12:34.000
जलने के बाद नाम निशान ही नहीं रहता ।

175
01:12:34.510 --> 01:12:44.970
मारने के बाद शरीर का यादगार तो दिखाई देता है ,

176
01:12:44.970 --> 01:12:50.570
लेकिन जलने के बाद समाप्त हो जाता है ।

177
01:12:50.570 --> 01:13:02.510
जैसे रावण को भी देखो सिर्फ मारा नहीं जलाया भी ।

178
01:13:03.420 --> 01:13:08.050
जो बिल्कुल नाम निशान खत्म ।

179
01:13:08.400 --> 01:13:26.110
तो आप भी सब अपने को नोट करो संस्कारों को मारा है या जलाया है ? भस्म किया है ?

180
01:13:28.110 --> 01:13:45.650
पुराने संस्कार को अगर जलाया नहीं , तो बीच-बीच में इमर्ज हो जाते हैं ।

181
01:13:46.340 --> 01:13:52.340
लेकिन भक्तों ने कॉपी सब की है ।

182
01:13:52.340 --> 01:14:05.370
आप जलाते हो वह भी जलाते हैं फिर मनाते हैं ।

183
01:14:05.370 --> 01:14:13.540
बिना जलाने के मनाते नहीं हैं ।

184
01:14:15.820 --> 01:14:33.080
तो आप तो संस्कारों को जलाते हुए होली बन गये हो ।

185
01:14:33.080 --> 01:14:41.940
कोई बन रहे हो , कोई बन गये हो ।

186
01:14:44.510 --> 01:14:48.280
तो आपने होली मनाई ?

187
01:14:48.280 --> 01:14:52.400
बाप के संग के रंग की ।

188
01:14:52.400 --> 01:15:02.170
अभी संग में बैठे हो ना तो संग के रंग की होली मना ली ना !

189
01:15:02.170 --> 01:15:04.170
मनाई ?

190
01:15:04.170 --> 01:15:07.310
हाथ उठाओ ।

191
01:15:07.310 --> 01:15:11.420
मना ली ।

192
01:15:12.050 --> 01:15:23.600
होली मनाना अर्थात् होली बनना , पवित्र बनना ।

193
01:15:25.600 --> 01:15:33.650
जैसे बाप वैसे बच्चे हैं ।

194
01:15:34.570 --> 01:15:46.800
अगर मानों आपका कोई संस्कार जो जला नहीं है ,

195
01:15:47.250 --> 01:15:55.770
इमर्ज हो जाता है तो अच्छा लगता है ?

196
01:15:57.770 --> 01:16:10.400
संकल्प आता है ना कि अभी तीव्र पुरूषार्थ से इसको जलाना ही है ।

197
01:16:11.140 --> 01:16:20.740
मारना नहीं है , क्या है कोई-कोई संस्कार को मारा है ,

198
01:16:20.740 --> 01:16:25.880
तो मरे हुए में कभी जान फिर से आ जाती है ।

199
01:16:25.880 --> 01:16:33.880
अगर जला दो तो फिर कभी नहीं आयेगा ।

200
01:16:35.880 --> 01:16:49.540
तो आज जलाना है या मारा हुआ ही ठीक है ?

201
01:16:51.540 --> 01:16:55.250
जलाने की शक्ति है ?

202
01:16:55.250 --> 01:16:57.770
है शक्ति ?

203
01:16:57.770 --> 01:17:02.340
संकल्प कर सकते हैं ?

204
01:17:02.340 --> 01:17:08.450
कई कहते हैं बापदादा से रूहरिहान करते हैं ना ।

205
01:17:08.450 --> 01:17:29.370
बहुत मीठी मीठी रूहरिहान करते हैं , कहते हैं बाबा हमने तो बहुत कोशिश की , फिर फिर आ जाता है ।

206
01:17:30.110 --> 01:17:35.940
चाहता नहीं हूँ लेकिन आ जाता है ।

207
01:17:36.450 --> 01:17:40.050
कारण पता है ?

208
01:17:40.050 --> 01:18:02.850
जलाते हो , बापदादा देखते हैं , पुरूषार्थ बहुत करते हैं लेकिन पुरूषार्थ के साथ दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है ।

209
01:18:03.820 --> 01:18:11.650
दृढ़ता सफलता की चाबी है ।

210
01:18:14.850 --> 01:18:33.140
जो दृढ़ संकल्प किया जाता है , दृढ़ का अर्थ ही है फिर वापस नहीं आयेगा ।

211
01:18:35.370 --> 01:18:41.940
फिर पता है बहुत मीठी मीठी बातें करते हैं ।

212
01:18:42.510 --> 01:18:49.310
जब फिर आ जाता है ना तो क्या कहते हैं ?

213
01:18:49.310 --> 01:18:53.200
रूहरिहान तो सभी करते हैं ना !

214
01:18:53.200 --> 01:19:04.450
बहुत मीठी रूहरिहान करते हैं कहते हैं चाहते तो नहीं है , आ जाता है ।

215
01:19:04.850 --> 01:19:07.710
तो शक्ति कम है ना !

216
01:19:07.710 --> 01:19:12.050
दृढ़ता कम है ना !

217
01:19:12.050 --> 01:19:20.050
दृढ़ संकल्पधारी बनो ।

218
01:19:25.310 --> 01:19:30.800
करना ही है ।

219
01:19:34.340 --> 01:19:46.450
और उस दृढ़ संकल्प को रोज़ चेक करो

220
01:19:46.450 --> 01:19:56.620
किस कारण से फिर दृढ़ता में कमज़ोरी आई ?

221
01:19:59.140 --> 01:20:19.880
और उस सरकमस्टांश के ऊपर विशेष अटेन्शन देते रहो कि यह फिर से नहीं आवे ।

222
01:20:21.080 --> 01:20:39.600
मास्टर सर्वशक्तिवान के सीट पर बैठके उस संकल्प को , संस्कार को समाप्त करो ।

223
01:20:41.080 --> 01:21:00.170
कई बच्चे कहते हैं कि हम कई बार अनुभव करते हैं

224
01:21:00.850 --> 01:21:13.770
कि कभी-कभी जब कोई शक्ति चाहते हैं ना तो उस समय पर वो शक्ति नहीं आती ।

225
01:21:14.170 --> 01:21:28.050
वैसे शक्ति है लेकिन समय पर कभी शक्ति को इमर्ज करते हैं ना तो भी नहीं आती ।

226
01:21:28.510 --> 01:21:31.650
है मास्टर सर्वशक्तिमान ।

227
01:21:31.650 --> 01:21:34.800
टाइटिल क्या है आपका ?

228
01:21:34.800 --> 01:21:41.310
मास्टर सर्वशक्तिमान और कहते क्या हैं ?

229
01:21:41.310 --> 01:21:47.140
शक्ति समय पर नहीं आती ।

230
01:21:48.280 --> 01:21:51.820
कारण ?

231
01:21:52.280 --> 01:22:04.850
अपने मास्टर सर्वशक्तिमान की सीट पर सेट नहीं होते ।

232
01:22:07.370 --> 01:22:25.710
अभी दफ्तर में भी जाओ तो जो करने वाले को अथॉरिटी होगी वह आर्डर करेगा तो मानते हैं ना ।

233
01:22:25.710 --> 01:22:31.310
ऐसा दूसरा कोई कहे तो मानेंगे क्या ?

234
01:22:31.310 --> 01:22:37.880
तो आपकी सीट है मास्टर सर्वशक्तिमान ।

235
01:22:37.880 --> 01:22:52.280
उस सीट पर सेट नहीं होते तो आह्वान करते भी शक्ति समय पर नहीं आती ।

236
01:22:56.000 --> 01:23:14.620
इसके लिए बापदादा ने बार-बार कहा है अपने मन को बिजी रखो ।

237
01:23:18.340 --> 01:23:27.480
कभी किस शक्ति को सारे दिन में इमर्ज रखो ।

238
01:23:27.480 --> 01:23:39.600
कभी किसी शक्ति को इमर्ज करके देखो कि उसकी ताकत क्या है ?

239
01:23:40.620 --> 01:23:59.020
ऐसे अनुभव करते रहेंगे , अपनी सीट पर सेट रहेंगे

240
01:23:59.020 --> 01:24:07.370
तो शक्ति आपके आगे सदा जी हाजिर होगी ।

241
01:24:07.370 --> 01:24:12.050
आपकी शक्ति है ना !

242
01:24:18.340 --> 01:24:22.450
तो होली मनाई ?

243
01:24:22.450 --> 01:24:26.400
आप तो सदा होली मनाते रहते ।

244
01:24:26.400 --> 01:24:36.450
सदा बाप के संग का रंग लगाते ही रहते ।

245
01:24:38.450 --> 01:24:44.280
रंग में रंगे हुए हैं ना ?

246
01:25:04.800 --> 01:25:17.940
अच्छा । बापदादा का जो कार्य मिला है ,

247
01:25:19.480 --> 01:25:34.000
उस कार्य को अगर कोई ने अभी तक नहीं भी किया है

248
01:25:34.000 --> 01:25:54.620
तो बापदादा विशेष एक सप्ताह देते हैं एकस्ट्रा ।

249
01:25:54.620 --> 01:26:13.080
जो डेट है वह तो है लेकिन एक सप्ताह एकस्ट्रा देते हैं कि इस होमवर्क को पूरा करना ही है ।

250
01:26:13.080 --> 01:26:15.600
हो सकता है ?

251
01:26:15.600 --> 01:26:18.000
हो सकता है ?

252
01:26:18.000 --> 01:26:20.000
हाथ उठाओ ।

253
01:26:20.000 --> 01:26:23.710
करना पड़ेगा हाथ उठाया ।

254
01:26:23.710 --> 01:26:32.510
हाथ ऐसा अच्छा उठाते हो जो बापदादा खुश हो जाता है

255
01:26:32.510 --> 01:26:59.600
लेकिन करना ही है क्योंकि अभी समय की गति को देख रहे हो ।

256
01:27:00.110 --> 01:27:12.510
और बापदादा तो बहुत समय से अचानक की वारानिंग दे रहे हैं

257
01:27:21.480 --> 01:27:46.510
इसलिए अभी बापदादा हर बच्चे को एक स्वमान देते हैं -

258
01:27:46.510 --> 01:28:04.050
हर बच्चा दृढ़ संकल्पधारी विशेष आत्मा बनो ।

259
01:28:05.370 --> 01:28:16.970
संकल्प किया और हुआ , इसको कहा जाता है दृढ़ संकल्प ।

260
01:28:17.250 --> 01:28:26.170
कहते हैं दृढ़ संकल्प किया लेकिन दृढ़ता माना ही सफलता ।

261
01:28:26.450 --> 01:28:34.340
अगर सफलता नहीं है तो दृढ़ता नहीं कहेंगे ।

262
01:28:34.340 --> 01:28:40.910
तो अभी दृढ़ता भव !

263
01:28:40.910 --> 01:29:05.310
यह अपना विशेष स्वमान रोज़ अमृतवेले स्मृति में लाना और उस विधि पूर्वक आगे बढ़ना ।

264
01:29:05.310 --> 01:29:17.200
अभी दो टर्न हैं , इन दो टर्न में क्या करेंगे ?

265
01:29:17.820 --> 01:29:22.400
क्या करेंगे ?

266
01:29:22.400 --> 01:29:24.400
बोलो ।

267
01:29:24.400 --> 01:29:29.770
पहली लाइन बोलो क्या करेंगे ?

268
01:29:33.020 --> 01:29:38.220
करना ही है ।

269
01:29:38.800 --> 01:29:45.480
करेंगे नहीं , करना ही है ।

270
01:29:47.940 --> 01:30:01.200
बहुतकाल का बाप समान बनना , बहुत समय की प्राप्ति है ।

271
01:30:05.020 --> 01:30:13.020
संगमयुग का समय बहुत प्यारा है ,

272
01:30:13.020 --> 01:30:26.450
एक सेकण्ड नहीं है एक सेकण्ड एक वर्ष की प्राप्ति समान है

273
01:30:26.970 --> 01:30:43.480
इसलिए बापदादा कहते ही रहते हैं एक सेकण्ड भी व्यर्थ नहीं जाये ।

274
01:30:43.480 --> 01:30:49.140
एक संकल्प भी व्यर्थ नहीं जाये ।

275
01:30:49.140 --> 01:30:57.080
समर्थ बनो और समर्थ बनाओ ।

276
01:30:58.400 --> 01:31:01.020
ठीक है ना !

277
01:31:01.420 --> 01:31:04.400
ठीक है टीचर्स ।

278
01:31:04.400 --> 01:31:08.400
टीचर्स कांध हिला रही हैं ।

279
01:31:08.970 --> 01:31:17.820
बापदादा का टीचर्स के ऊपर बहुत प्यार है ।

280
01:31:17.820 --> 01:31:30.000
है तो सभी बच्चों के ऊपर फिर भी टीचर्स जिम्मेवार हैं ना !

281
01:31:33.020 --> 01:31:42.000
बापदादा की दिल को पूर्ण करने वाली कौन ?

282
01:31:42.000 --> 01:31:44.000
कौन ?

283
01:31:44.000 --> 01:31:47.250
कहो हम टीचर्स ।

284
01:31:47.250 --> 01:31:49.600
हाथ उठाओ ।

285
01:31:49.600 --> 01:31:54.450
हाँ देखो कितनी टीचर्स हैं ?

286
01:31:54.450 --> 01:32:03.880
अरे वाह !

287
01:32:15.140 --> 01:32:17.940
अच्छा ।

288
01:32:17.940 --> 01:32:27.880
होली भी मनाई अभी क्या करना है ?

