WEBVTT

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00:08:06.850 --> 00:08:53.600
आज बापदादा चारों ओर के अपने बेफिक्र बादशाहों को देख रहे हैं ।

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00:09:00.000 --> 00:09:44.000
हर एक बच्चा सवेरे से उठ बेफिक्र स्थिति में स्थित हो हर कर्म करता है ।

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00:09:47.260 --> 00:10:34.400
हर एक बच्चे को अनुभव है कि यह बेफिक्र बादशाह की जीवन बादशाही भी और बेफिक्र भी , कितनी प्यारी लगती है

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00:10:37.430 --> 00:11:04.730
क्योंकि आप सभी ने बाप को फिक्र देकरके फखुर ले लिया है ।

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00:11:07.260 --> 00:11:26.860
फखुर भी अविनाशी फखुर ले लिया है ।

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00:11:28.260 --> 00:11:49.630
हर एक अनुभव करते हैं कि यह बेफिक्र जीवन कितनी प्यारी है ।

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00:11:58.600 --> 00:12:19.700
दिनरात कोई भी बात का फिक्र नहीं लेकिन फखुर है ।

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00:12:25.630 --> 00:13:07.630
जानते हो कि यह बेफिक्र रहने की जीवन बाप ने इस एक जन्म के लिए नहीं

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00:13:09.630 --> 00:13:31.200
लेकिन अनेक जन्मों के लिए बेफिक्र बादशाह बना दिया ।

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00:13:33.730 --> 00:13:47.530
अभी अनुभव करते हो बेफिक्र जीवन अगर है

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00:13:49.530 --> 00:14:09.100
तो सदा मस्तक में दिव्य ज्योति चमकती रहती है ।

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00:14:11.730 --> 00:14:38.260
और अगर फिकर है तो माथे पर अनेक प्रकार के दुःखों का टोकरा भरा हुआ होता है ।

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यह बेफिक्र जीवन की विधि बहुत सहज है ।

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00:15:09.330 --> 00:15:31.430
जो भी हद का मेरा-मेरा है उसको तेरा कर दिया ।

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00:15:34.030 --> 00:15:47.660
मेरा और तेरा में एक मात्रा का ही फर्क है ।

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00:15:48.800 --> 00:15:52.930
मे और ते ।

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00:15:54.800 --> 00:16:25.700
लेकिन मेरे को तेरा करने से जीवन कितनी खुशनुमा बन जाती है ।

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00:16:26.730 --> 00:16:30.460
बन गई है ना !

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00:16:30.460 --> 00:16:34.600
कांध हिलाओ , बन गई ।

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00:16:34.730 --> 00:16:40.360
बेफिक्र जीवन बन गई ।

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00:16:44.560 --> 00:17:06.530
अभी बापदादा यही हर बच्चे से चाहता है

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00:17:11.930 --> 00:17:31.100
कि फिकर वाली जीवन का आधार है व्यर्थ संकल्प ,

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00:17:36.660 --> 00:18:06.600
तो हर बच्चे के अन्दर व्यर्थ संकल्प का निशान भी नहीं रहे

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00:18:11.060 --> 00:18:30.930
क्योंकि जब मेरे को तेरे में बदल दिया तो आप क्या हो गये ?

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00:18:33.460 --> 00:19:01.160
आप हो गये बेफिक्र बादशाह और यह बेफिक्र बादशाह की जीवन कितनी प्यारी है ।

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हर कर्म करते बेफिक्र बादशाह ।

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00:19:23.860 --> 00:19:52.700
कोई फिक्र नहीं क्यों , क्या , कैसे , कब तक … यह सब समाप्त हो गये ।

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00:19:56.500 --> 00:20:30.860
बापदादा आज इस सीजन के लास्ट दिन यही चाहते हैं

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00:20:36.600 --> 00:20:54.230
कि हर एक बच्चा व्यर्थ को मेरे के बदले तेरा कर दे ।

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00:20:57.330 --> 00:21:01.630
बाप आपेही भस्म कर देंगे ।

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00:21:01.900 --> 00:21:13.200
आप सिर्फ एक मात्रा का अन्तर करो , मंजूर है !

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00:21:13.200 --> 00:21:15.800
हो सकता है ?

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00:21:15.800 --> 00:21:22.260
अगर हो सकता है तो हाथ उठाओ ।

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00:21:30.530 --> 00:21:55.600
बहुत अच्छा क्योंकि यह 5-6 मास आप सभी को विश्व के आगे

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00:21:59.200 --> 00:22:29.000
दुःखी आत्माओं को पावरफुल वृत्ति द्वारा सुख शान्ति की किरणें देनी हैं ।

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00:22:31.430 --> 00:22:43.960
इसी में ही अपना मन बिजी रखना है ।

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00:22:49.360 --> 00:22:54.800
व्यर्थ संकल्प भी किसमें आते हैं ?

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00:22:54.800 --> 00:23:00.060
मन में आते हैं ना !

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00:23:01.400 --> 00:23:15.100
तो बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक बेफिक्र बादशाह बच्चा

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00:23:16.330 --> 00:23:35.660
अपने मन को अर्थात् वृत्ति को इतना बिजी रखे

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00:23:41.860 --> 00:23:54.900
जो व्यर्थ को आने की मार्जिन ही नहीं रहे ।

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00:23:55.360 --> 00:24:14.200
मेहनत नहीं करनी पड़े लेकिन बाप के मोहब्बत में इतना बिजी रहो ,

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00:24:15.600 --> 00:24:32.500
वृत्ति की सेवा में इतना मन को बिजी रखो जो युद्ध भी नहीं करनी पड़े ।

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00:24:34.760 --> 00:24:47.560
कई बच्चे कहते हैं चाहते नहीं हैं लेकिन आ जाते हैं ।

45
00:24:53.330 --> 00:24:57.260
इसको क्या कहेंगे ?

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00:24:58.060 --> 00:25:19.460
कि मन को बाप के प्यार और सेवा में बिजी नहीं रखा ।

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00:25:22.330 --> 00:25:37.000
सभी से पूछते हैं कि आपका प्यार बाप से कितना है ?

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00:25:37.000 --> 00:25:41.030
तो क्या कहते ?

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00:25:41.030 --> 00:25:44.460
बेहद है ।

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00:25:47.000 --> 00:26:09.000
तो जिससे प्यार होता है उसका कहना मानना कोई मुश्किल नहीं होता ।

51
00:26:10.060 --> 00:26:26.960
तो आप सभी का बाप से अटूट प्यार है ना !

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00:26:30.060 --> 00:26:34.200
कि कभी-कभी है ?

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00:26:35.660 --> 00:26:41.460
सदा है या कभी-कभी है ?

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00:26:43.460 --> 00:26:53.660
जो कहते हैं सदा प्यार है वह हाथ उठाओ ।

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00:26:56.060 --> 00:27:08.660
सदा प्यार है , देखो सोचो , सदा प्यार है

56
00:27:13.000 --> 00:27:23.400
तो बाप का कहना और बच्चे का करना ।

57
00:27:27.930 --> 00:27:32.930
यह तो जानते हो ना !

58
00:27:38.060 --> 00:28:00.700
तो अभी इस सीजन में बापदादा बच्चों को

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00:28:03.300 --> 00:28:30.130
यही दृढ़ संकल्प कराने चाहते हैं , तैयार हो ना !

60
00:28:30.130 --> 00:28:33.000
कांध हिलाओ ।

61
00:28:33.160 --> 00:28:38.330
तैयार हो दृढ़ संकल्प करने के लिए ?

62
00:28:38.330 --> 00:28:42.660
पीछे वाले तैयार हैं ?

63
00:28:45.260 --> 00:28:49.260
मातायें भी तैयार हैं ?

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00:28:49.500 --> 00:28:53.060
पाण्डव भी तैयार हैं ?

65
00:28:53.060 --> 00:28:56.060
अच्छा हाथ उठाओ ।

66
00:28:57.830 --> 00:29:02.000
इसमें दो-दो हाथ उठाओ ।

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00:29:06.100 --> 00:29:18.600
हाथ उठाते हो तो बापदादा को खुश तो कर देते हो ।

68
00:29:25.330 --> 00:29:42.200
अभी जैसे यह हाथ उठाया ऐसे मन का हाथ उठाओ ।

69
00:29:42.400 --> 00:29:56.100
कभी भी व्यर्थ संकल्प को आने नहीं देंगे ।

70
00:29:56.560 --> 00:30:05.660
उनका काम है आना , आपका काम क्या है ?

71
00:30:06.230 --> 00:30:10.330
समाप्त कर देना ।

72
00:30:14.260 --> 00:30:32.930
तो इस सीजन में बापदादा ने पहले भी कहा है

73
00:30:33.500 --> 00:30:52.260
कि दो बातों का ध्यान रखना है एक तो संकल्प , दूसरा समय ।

74
00:30:53.660 --> 00:31:18.900
जानते हो आप , इस संगम का समय एक-एक मिनट का कनेक्शन 21 जन्म के साथ है ।

75
00:31:21.330 --> 00:31:44.500
और इस समय बापदादा का बच्चों से , बच्चों का बाप से प्यार है ।

76
00:31:47.530 --> 00:31:57.560
तो संगम समय का एक सेकण्ड , सेकण्ड नहीं है

77
00:31:59.760 --> 00:32:10.960
क्योंकि 21 जन्मों का कनेक्शन है ।

78
00:32:13.860 --> 00:32:34.960
अगर अब नहीं समय को बचाया तो 21 जन्म

79
00:32:38.530 --> 00:33:01.900
जो बाप से प्यार है और हर एक चाहता है कि बाप के साथ अब भी रहें , साथ भी चलें ।

80
00:33:01.900 --> 00:33:06.230
अपने घर लौटना है ना अभी ।

81
00:33:06.230 --> 00:33:37.930
तो घर में भी साथ में चलें और फिर राज्य में भी बापदादा के साथ विशेष ब्रह्मा बाबा के साथ राजधानी में नजदीक साथ में आयें

82
00:33:43.800 --> 00:34:07.400
इसलिए ब्रह्मा बाप तो फरिश्ता रूप में है और आपको साथ में चलना है तो क्या करना पड़े ?

83
00:34:08.630 --> 00:34:12.200
फरिश्ता बनना पड़े ना !

84
00:34:12.200 --> 00:34:18.330
फरिश्ता बनेंगे , बनना ही है ना !

85
00:34:25.030 --> 00:34:42.100
बाप ब्रह्मा के हाथ में हाथ देके साथ चलना है , तो हाथ क्या है ?

86
00:34:45.430 --> 00:34:51.160
फरिश्ते को स्थूल हाथ तो हैं नहीं ।

87
00:34:52.960 --> 00:34:56.900
ब्रह्मा बाप का हाथ क्या है ?

88
00:34:56.900 --> 00:35:00.430
श्रीमत ।

89
00:35:08.760 --> 00:35:34.560
तो बापदादा की यही श्रीमत है कि अब बेफिक्र बादशाह बन

90
00:35:41.000 --> 00:36:08.000
सदा जैसे आपकी जगदम्बा ने पुरूषार्थ किया , बाप का कहना और जगत अम्बा का करना ।

91
00:36:08.000 --> 00:36:22.500
ऐसे जगत अम्बा को फॉलो करो ।

92
00:36:26.900 --> 00:36:41.260
समय और संकल्प को सफल करना ही है ।

93
00:36:41.560 --> 00:36:45.260
व्यर्थ नहीं जाये ।

94
00:36:46.830 --> 00:37:03.030
सुनाया ना एक-एक संकल्प का 21 जन्म का कनेक्शन है ।

95
00:37:11.030 --> 00:37:35.960
तो बापदादा यही चाहते हैं कि सदा मन को बिजी रखो ।

96
00:37:42.960 --> 00:38:10.600
चाहे मुरली के मनन में , चाहे सेवा में , हर समय बिजी रहो ।

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00:38:11.800 --> 00:38:25.730
अपना चार्ट बनाओ हर समय बीच-बीच में

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00:38:25.730 --> 00:38:43.660
जो बापदादा ने ड्रिल सुनाई है भिन्न-भिन्न , जानते हो ना ड्रिल अशरीरी बनने की ।

99
00:38:44.800 --> 00:38:53.960
अपने तीन स्वरूप स्मृति की ड्रिल ।

100
00:38:56.100 --> 00:38:59.500
जानते हो ना !

101
00:38:59.500 --> 00:39:11.360
जैसे बाप के तीन रूप हैं ऐसे आपके भी तीन रूप हैं ।

102
00:39:13.360 --> 00:39:24.160
ब्राह्मण , फरिश्ता और देवता ,

103
00:39:25.860 --> 00:39:59.700
इन तीनों रूपों में ड्रिल द्वारा अपने मन को बिजी रखो इसलिए महामन्त्र क्या है ?

104
00:40:00.060 --> 00:40:05.500
मनमनाभव ।

105
00:40:18.600 --> 00:40:32.760
बाकी बापदादा का हर बच्चे से बहुत-बहुत प्यार है

106
00:40:32.760 --> 00:41:02.260
इसलिए बापदादा यही चाहते हैं कि हर बच्चा विजयी भव के वरदानी बनें ।

107
00:41:06.060 --> 00:41:12.900
सुनाया था ना कि कई बच्चे सोचते हैं

108
00:41:12.900 --> 00:41:21.060
हम विजयी तो बनें लेकिन माला तो 108 की है ,

109
00:41:21.060 --> 00:41:27.460
तो विजयी बनके माला में तो आ नहीं सकेंगे

110
00:41:27.460 --> 00:41:41.660
लेकिन बापदादा का इतना प्यार है कि आप विजयी बनो

111
00:41:41.660 --> 00:41:54.200
तो बापदादा माला में भी लड़े लगा देगा ।

112
00:41:59.630 --> 00:42:03.760
आप सिर्फ विजयी बनो ।

113
00:42:09.260 --> 00:42:12.460
तो क्या संकल्प है ?

114
00:42:12.460 --> 00:42:15.430
विजयी बनना ही है ना !

115
00:42:15.430 --> 00:42:20.260
कि सिर्फ 108 विजयी बनेंगे ?

116
00:42:22.660 --> 00:42:24.830
नहीं ।

117
00:42:26.830 --> 00:42:37.430
बाप का हर बच्चा विजयी है ।

118
00:42:37.430 --> 00:42:52.830
बापदादा हर बच्चे के मस्तक में क्या देख रहे हैं ?

119
00:42:53.860 --> 00:43:14.730
विजय का तिलक क्योंकि साधारण रूप में बाप को पहचान लिया है ना !

120
00:43:14.730 --> 00:43:26.800
चाहे लास्ट बच्चा है , पुरूषार्थ में ढीला है

121
00:43:27.330 --> 00:43:53.130
लेकिन उसमें यह विशेषता है कि साधारण रूप में आये हुए बाप को पहचान मेरा बाबा तो कहता

122
00:43:57.930 --> 00:44:31.330
इसलिए हर एक बच्चे को हिम्मत रख विजय प्राप्त करनी ही है ।

123
00:44:37.100 --> 00:44:40.500
सिर्फ क्या करना है ?

124
00:44:40.500 --> 00:44:49.530
कोई मेहनत की बात नहीं है , प्यार की बात है ।

125
00:44:51.100 --> 00:44:59.300
बापदादा से प्यार है , परिवार से प्यार है

126
00:45:02.900 --> 00:45:10.530
तो प्यार वाले से अलग नहीं रहा जाता है ।

127
00:45:10.530 --> 00:45:17.200
तो ब्रह्मा बाबा से कितना प्यार है ?

128
00:45:17.200 --> 00:45:33.460
जो समझते हैं कि ब्रह्मा बाप से शिव बाप से हमारा अटूट प्यार है वह हाथ उठाओ ।

129
00:45:33.460 --> 00:45:40.430
अटूट , अटूट ?

130
00:45:49.930 --> 00:45:53.930
बहुत अच्छा ।

131
00:45:59.030 --> 00:46:06.600
तो दूसरी सीजन में बापदादा क्या देखने चाहता है ?

132
00:46:12.330 --> 00:46:16.200
जानते तो हो ।

133
00:46:22.460 --> 00:46:47.700
5 मास 6 मास मिलना है आपको , व्यर्थ से समर्थ संकल्प करने में ।

134
00:46:59.100 --> 00:47:13.530
तो बोलो , मधुबन वाले उठो , चाहे नीचे चाहे ऊपर ।

135
00:47:30.700 --> 00:47:33.930
बहुत हैं ।

136
00:47:36.500 --> 00:47:53.600
तो मधुबन वाले बापदादा को प्यारे हैं ।

137
00:47:54.930 --> 00:48:00.860
ऐसे नहीं दूसरे प्यारे नहीं हैं ।

138
00:48:02.130 --> 00:48:22.400
वह प्यारे हैं लेकिन मधुबन वालों से एक बात का विशेष प्यार है , वह क्या ?

139
00:48:25.100 --> 00:48:33.960
मन्सा में याद तो सब करते हैं ।

140
00:48:35.030 --> 00:48:44.860
योगी तू आत्मायें तो सभी हैं , ज्ञानी आत्मायें भी सभी हैं

141
00:48:46.130 --> 00:49:08.230
लेकिन मधुबन वालों को अपना भविष्य सहज बनाने की एक लिफ्ट है ।

142
00:49:09.430 --> 00:49:13.330
वह लिफ्ट क्या है ?

143
00:49:15.860 --> 00:49:34.130
जो भी मधुबन में आते हैं , उनकी सेवा के निमित्त हैं ।

144
00:49:36.860 --> 00:49:48.930
जैसे खाना बनाने वाले जो भी कोई ड्युटी करने वाले हैं ।

145
00:49:48.930 --> 00:50:04.660
बापदादा तो कहते हैं कोई झाडू लगाने वाला भी है ना , वह भी भाग्यवान है क्यों ?

146
00:50:07.260 --> 00:50:35.600
जो भी आते हैं वह यह वायुमण्डल देख आपके दिल के प्यार की शक्ति देख खुश हो जाते हैं ।

147
00:50:35.830 --> 00:50:43.930
चाहे खाना बनाने वाला , चाहे कोई भी ड्युटी वाला है

148
00:50:45.460 --> 00:50:55.960
लेकिन मधुबन वालों को चांस है ।

149
00:50:56.300 --> 00:51:11.930
मधुबन का प्यार और शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने का ,

150
00:51:12.960 --> 00:51:29.200
इसलिए बापदादा मधुबन वालों को बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं

151
00:51:33.130 --> 00:52:01.430
कि यह सीजन समाप्त की और आगे के लिए भी अपने मन में आत्माओं को

152
00:52:01.700 --> 00:52:22.100
सन्तुष्ट करने में और शक्तिशाली अनुभव कराने में निमित्त बनते रहेंगे

153
00:52:22.230 --> 00:52:30.660
इसलिए सब ताली बजाओ मधुबन वालों के लिए ।

154
00:52:41.600 --> 00:52:43.960
अच्छा ।

155
00:53:05.360 --> 00:53:37.260
आज बापदादा को अमृतवेले मधुबन के सेवाधारी सामने आये ।

156
00:53:40.130 --> 00:54:10.600
हर एक से बापदादा वतन में भी मिले और खास आपको पहले भी बताया है

157
00:54:11.400 --> 00:54:35.000
कि चार बजे के समय आपकी एडवांस में गई हुई विशेष दादियां जरूर आती हैं ।

158
00:54:39.400 --> 00:55:00.800
तो आज भी विशेष दादियाँ और विशेष भाई पहुंचे थे ।

159
00:55:01.660 --> 00:55:27.560
उन्होंने खास मधुबन वालों को इमर्ज करने के लिए कहा ।

160
00:55:28.460 --> 00:56:03.600
विशेष दीदी और दादी दोनों ने और विशेष भाईयों ने भी मधुबन वालों को याद किया ।

161
00:56:07.030 --> 00:56:32.130
और दादी ने विशेष याद दी और साथ में वतन का आम ,

162
00:56:32.760 --> 00:56:39.330
जानते हो ना वतन का फल कितना बढ़िया होता है ,

163
00:56:40.430 --> 00:56:54.900
लाठी नहीं लगानी होती है , जो फल चाहिए वह आप हाथ से ही ले सकते हो ।

164
00:56:56.000 --> 00:57:12.400
तो दादी ने कहा आज मधुबन वालों से आम की पिकनिक करते हैं ।

165
00:57:16.930 --> 00:57:25.260
दूसरी दादियां तो साथ में थी और विशेष भाई भी थे ।

166
00:57:26.330 --> 00:57:36.800
तो बापदादा ने कहा उन्हों से पूछो

167
00:57:38.960 --> 00:57:50.060
तो मधुबन के लिए आपको मन में क्या आता है ?

168
00:57:53.060 --> 00:57:56.000
तो दादी क्या बोली ?

169
00:57:56.330 --> 00:58:06.130
पता है , जानते तो हो , दादी को तो जानते हैं ना !

170
00:58:07.330 --> 00:58:20.830
दादी कहती थी मेरी यह अभी तक भी दिल है

171
00:58:21.430 --> 00:58:40.130
कि हर एक मधुबन वाला चाहे पुरूषार्थ में कोई भी कमी अभी रह गई है

172
00:58:40.130 --> 00:58:54.330
उसका तो पुरूषार्थ करना है लेकिन मैं एक बात चाहती हूँ , मधुबन वालों से ।

173
00:58:54.630 --> 00:58:57.660
वह क्या चाहती हूँ ?

174
00:58:57.800 --> 00:59:11.400
एक-एक मधुबनवासी बाप समान बन जाये ।

175
00:59:11.930 --> 00:59:20.800
वैसे तो सभी को बनना है लेकिन मधुबन विशेष है ,

176
00:59:20.800 --> 00:59:31.830
मधुबन वालों को दादी से प्यार था , यह दादी कहती थी मुझे पता है ।

177
00:59:32.600 --> 00:59:41.430
तो प्यार के रिटर्न में मैं यही चाहती हूँ

178
00:59:43.060 --> 01:00:00.300
कि जैसे मम्मा ने लक्ष्य रखा बाबा ने कहा मम्मा ने किया , यह तो मधुबन वाले जानते ही हैं ।

179
01:00:01.830 --> 01:00:25.900
ऐसे ही अमृतवेले से लेके रात तक हर एक मधुबन वाले अगर बाबा के साथ मेरे से भी प्यार है ,

180
01:00:25.900 --> 01:00:49.330
दादियों से भी प्यार है , तो जैसे मम्मा ने बाप की हर राय जीवन में लाई , ऐसे हमने भी लाई ।

181
01:00:49.330 --> 01:01:12.860
तो अगर दादियों से प्यार है , तो यही करके दिखायें , सवेरे से रात तक ऐसा कोई संकल्प बोल कर्म नहीं लावें

182
01:01:12.860 --> 01:01:24.860
जो दादियों को या बाप को या किसी को भी पसन्द नहीं हो ।

183
01:01:24.860 --> 01:01:33.600
यह हमारा सन्देश खास मधुबन वालों को देना ।

184
01:01:33.600 --> 01:01:59.330
तो हमने ( गुल्जार दादी ने ) दादी को कहा , दादी आप मधुबन में कभी चक्र लगाती हो ?

185
01:02:02.200 --> 01:02:13.030
अभी मैं ( गुल्जार बहन ) वतन का समाचार मधुबन वालों को सुना रही हूँ ।

186
01:02:14.400 --> 01:02:38.530
तो मैंने गुल्जार बहन ने , उनको कहा दादी मधुबन वालों को तो आप जो कहेंगे वह करेंगे ।

187
01:02:38.530 --> 01:02:43.500
तो मैंने ठीक कहा , करेंगे ?

188
01:02:43.500 --> 01:02:45.830
हाथ उठाओ ।

189
01:02:45.830 --> 01:02:51.200
दो-दो हाथ उठाओ ।

190
01:02:56.330 --> 01:02:59.200
करेंगे ?

191
01:03:03.400 --> 01:03:06.830
बहुत अच्छा ।

192
01:03:07.460 --> 01:03:30.400
तो आज इस सीजन का लास्ट है ना,तो और भी वतन में रौनक थी।

193
01:03:30.930 --> 01:03:42.600
दूसरे आप मधुबन वाले तो मिलके मर्ज हो गये ,

194
01:03:42.600 --> 01:03:53.000
लेकिन दादियों ने डबल विदेशियों को भी इमर्ज किया ।

195
01:03:54.460 --> 01:03:59.200
डबल विदेशी उठो ।

196
01:04:40.730 --> 01:04:54.460
तो विशेष दादियों के बदले , दादी कह रही थी

197
01:04:55.800 --> 01:05:18.530
तो दादी ने कहा कि मुझे डबल विदेशियों की यह बात बहुत अच्छी लगती है

198
01:05:18.800 --> 01:05:30.200
क्योंकि जब हम वहाँ थे और इन्हों की सीजन शुरू हुई

199
01:05:30.460 --> 01:05:55.760
तो मैंने देखा इन्हों को मधुबन में आने के लिए टिकेट के लिए कितनी युक्ति से इकठ्ठा करते थे टिकेट का पैसा

200
01:05:57.330 --> 01:06:10.400
और जब हम सुनती थी तो ऐसे-ऐसे इकठ्ठा करके आये हैं

201
01:06:10.400 --> 01:06:29.830
तो मुझे बहुत प्यार आता था और डबल विदेशियों का मैंने देखा उमंग उत्साह भी बहुत अच्छा था ।

202
01:06:29.830 --> 01:06:41.500
आने से ही मेरा बाबा कहके इतने खुश होते थे

203
01:06:41.660 --> 01:06:58.430
जो मेरा कहने में ही मेरा हो जाते थे , उनकी शक्ल , उनका उमंग बहुत अच्छा दिखाई देता था ,

204
01:06:58.430 --> 01:07:19.230
इसलिए डबल विदेशियों को हम और बापदादा कहते थे कि डबल विदेशी मधुबन का श्रृंगार हैं ।

205
01:07:20.460 --> 01:07:36.260
तो अभी भी डबल विदेशी जो कार्य भी मधुबन का होता है

206
01:07:36.260 --> 01:08:04.000
वह बहुत रूचि से करते हैं इसलिए हमारी भी डबल विदेशियों को बहुत बहुत बहुत बहुत यादप्यार देना और कहना

207
01:08:04.000 --> 01:08:28.060
सदा बाप के दिल में आप हो और आपके दिल में बाप है , यही वरदान हमारे तरफ से देना ।

208
01:08:28.060 --> 01:08:41.160
तो यह था आज अमृतवेले वतन का समाचार ।

209
01:08:41.160 --> 01:09:10.100
बाकी सभी चारों ओर के जो दूर बैठे हैं या सम्मुख बैठे हैं सभी को बापदादा क्या देख रहे हैं ?

210
01:09:10.930 --> 01:09:36.000
बापदादा देख रहे हैं हर एक के मस्तक में चमकती हुई ज्योति चमक रही है ।

211
01:09:40.260 --> 01:10:03.230
सभी के मन में संकल्प यही है कि हमारे को कैसा बनना है ?

212
01:10:03.530 --> 01:10:10.160
जैसे बाप वैसे हम ।

213
01:10:12.160 --> 01:10:19.460
यह उमंग उत्साह भी सभी के मन में है ।

214
01:10:19.460 --> 01:10:37.130
बाकी तो इस सीजन में बापदादा टीचर्स को विशेष उठाने चाहते हैं ।

215
01:10:38.360 --> 01:10:41.860
सब टीचर्स उठो ।

216
01:10:47.130 --> 01:10:49.600
देखो ।

217
01:10:49.830 --> 01:10:53.600
कितनी टीचर्स हैं ।

218
01:10:56.060 --> 01:11:00.830
चौथा हाल तो टीचर्स हैं ।

219
01:11:13.000 --> 01:11:31.330
तो टीचर्स को देख बापदादा भी खुश होते हैं

220
01:11:33.330 --> 01:11:51.760
क्योंकि बाप समान सीट का भाग्य मिला है ।

221
01:11:53.960 --> 01:12:05.230
बाप की मुरली सुनाने की सीट मिली है ।

222
01:12:12.060 --> 01:12:20.200
बाप हमेशा टीचर्स को साथी कहते हैं ।

223
01:12:29.600 --> 01:12:50.500
अभी टीचर्स के लिए बापदादा एक बात चाहते हैं ।

224
01:12:50.900 --> 01:12:54.930
सुनायें क्या ?

225
01:12:56.460 --> 01:13:42.460
बापदादा चाहते हैं कि हर एक टीचर चेहरे से ब्रह्मा बाप समान ऐसे खुशनुमा नज़र आये ।

226
01:13:43.400 --> 01:14:03.800
नज़र आवे अन्दर पुरूषार्थ होगा भी लेकिन आपकी सूरत से बाप प्रत्यक्ष हो ।

227
01:14:07.330 --> 01:14:20.530
कोई को भी देखे तो आपमें बाप की चमक दिखाई दे ।

228
01:14:23.630 --> 01:14:40.100
ऐसे चेहरे से सेवा करने वाली बाप को प्रत्यक्ष कर ही लेंगी ।

229
01:14:40.600 --> 01:14:57.760
अब समय आ गया है , बाप को अपने चेहरे से प्रत्यक्ष करने का ।

230
01:15:06.530 --> 01:15:21.260
तो टीचर्स को सदा मेरा बाबा तो स्वतः ही याद है ।

231
01:15:22.330 --> 01:15:29.730
अभी बाप को चेहरे से प्रत्यक्ष करना है ।

232
01:15:31.930 --> 01:15:34.660
कर सकते हैं ना !

233
01:15:34.660 --> 01:15:39.660
कर सकते हैं तो करो ।

234
01:15:39.660 --> 01:15:48.660
देखो अभी तक की रिजल्ट में क्या सभी कहते हैं ।

235
01:15:48.660 --> 01:15:59.500
ब्रह्माकुमारियां बहुत अच्छा काम कर रही हैं , बाप प्रत्यक्ष नहीं है ।

236
01:15:59.500 --> 01:16:03.430
वह अभी भी गुप्त है ।

237
01:16:04.630 --> 01:16:10.500
तो अभी समय समीप आ रहा है

238
01:16:11.700 --> 01:16:32.260
तो आप द्वारा चाहे निमित्त टीचर्स हैं या कोई भी बच्चा है , अभी बाप को प्रत्यक्ष करो ।

239
01:16:33.200 --> 01:16:43.530
ब्रह्माकुमारियां अच्छा कार्य कर रही हैं , यह तो हो गया ।

240
01:16:44.060 --> 01:16:48.030
यहाँ तक पहुंच गये हो ।

241
01:16:48.330 --> 01:16:56.660
लेकिन अभी यह प्रत्यक्ष करो

242
01:16:57.400 --> 01:17:23.660
कि स्वयं परमात्मा ब्रह्मा तन में प्रत्यक्ष हो ब्रह्माकुमारियों को ऐसे योग्य बना रहे हैं ।

243
01:17:25.660 --> 01:17:30.730
अभी यह प्वाइंट रही हुई है ।

244
01:17:35.630 --> 01:17:43.600
गीत तो गाते हैं मेरा बाबा आ गया ,

245
01:17:43.600 --> 01:18:03.800
लेकिन अभी अन्य आत्माओं के अन्दर यह प्रत्यक्ष हो

246
01:18:05.130 --> 01:18:28.600
कि भगवान स्वयं प्रत्यक्ष हो यह कार्य बहिनों द्वारा या भाईयों द्वारा करा रहे हैं ।

247
01:18:36.300 --> 01:18:44.130
यह प्रत्यक्षता करनी है ना !

248
01:18:46.530 --> 01:18:49.830
कब करेंगे ?

249
01:18:49.830 --> 01:18:51.830
अब ।

250
01:18:51.830 --> 01:18:54.400
क्या कहेंगे ?

251
01:18:54.660 --> 01:18:57.860
अब ना !

252
01:19:08.930 --> 01:19:25.060
( अभी शुरू करेंगे , अगली सीजन तक हो जायेगा ) आप सभी साथ में हो , अगली सीजन तक हो जायेगा ?

253
01:19:25.360 --> 01:19:30.460
हाथ उठाओ जो समझते हैं !

254
01:19:40.400 --> 01:19:48.460
थोड़े हाथ उठा रहे हैं ।

255
01:19:58.130 --> 01:20:06.060
जो हाथ नहीं उठा रहे हैं वह देखेंगे , और आप करेंगे ।

256
01:20:08.830 --> 01:20:15.700
टीचर्स ने तो संकल्प किया है ना !

257
01:20:18.260 --> 01:20:34.500
क्योंकि देख रहे हो बापदादा तो कहते ही हैं कि सब अचानक होना है ।

258
01:20:35.000 --> 01:20:44.000
कोई बच्चे समझते हैं अचानक , अचानक भी बहुत समय हो गया है ।

259
01:20:44.000 --> 01:20:48.030
अभी होना चाहिए ।

260
01:20:50.800 --> 01:21:06.060
लेकिन अचानक तब हो जब बच्चे भी बाप समान बन जायें ।

261
01:21:08.260 --> 01:21:22.700
आपकी सूरत मूरत एक-एक बोल बाप को प्रत्यक्ष करे ।

262
01:21:29.100 --> 01:21:32.730
हो जाना तो है ही ।

263
01:21:32.730 --> 01:21:40.600
होना ही है अभी सिर्फ निमित्त बनना है ।

264
01:21:55.560 --> 01:22:03.130
अभी अगली सीजन में क्या करेंगे ?

265
01:22:07.100 --> 01:22:24.060
एक तो अपने को बाप समान बनायेंगे ।

266
01:22:24.060 --> 01:22:35.200
जो भी कमी रह गई है , उसको सम्पन्न करेंगे ।

267
01:22:43.030 --> 01:22:54.630
और बापदादा को खुशी है किस बात की ?

268
01:22:55.700 --> 01:23:34.060
तो बच्चों ने जैसे अभी छोटे मोटे सेन्टर ने वाणी द्वारा प्रसिद्ध किया कि हम क्या कार्य कर रहे हैं ।

269
01:23:34.060 --> 01:23:39.130
वायुमण्डल को चेंज किया है ।

270
01:23:41.730 --> 01:23:46.400
इसकी बापदादा मुबारक दे रहे हैं ।

271
01:23:46.400 --> 01:23:59.460
जिन्होंने जहाँ भी प्रोग्राम्स किये हैं , अच्छे किये हैं ,

272
01:24:00.000 --> 01:24:09.560
और सभी के अटेन्शन में भी आया है

273
01:24:10.560 --> 01:24:33.130
कि ब्रह्माकुमारियां सचमुच गुप्त रूप में अपने कार्य का समय 75 वर्ष पूरा किया है ।

274
01:24:34.760 --> 01:24:51.530
अभी यह कहें कि ब्रह्माकुमारियों का भगवान बाबा आ गया है ।

275
01:24:58.400 --> 01:25:01.830
लक्ष्य है ना !

276
01:25:01.830 --> 01:25:14.700
तो अगले सीजन तक यह कार्य आरम्भ हो जाना चाहिए ।

277
01:25:17.130 --> 01:25:25.060
इसका प्रत्यक्ष प्रोग्राम बनाना ।

278
01:25:25.300 --> 01:25:32.200
प्रोग्राम बनाते हैं ना , मीटिंग करते हैं ना !

279
01:25:32.200 --> 01:25:37.260
तो मीटिंग में यह प्रोग्राम बनाओ

280
01:25:37.630 --> 01:26:00.760
कि अभी सब बच्चों को पता तो पड़े कि वर्सा देने वाला बाप आ गया ।

281
01:26:01.100 --> 01:26:05.230
वंचित नहीं रह जाएं ।

282
01:26:06.100 --> 01:26:15.230
बाप को तो बच्चों के दुःख को देख बहुत तरस पड़ता है ।

283
01:26:19.160 --> 01:26:36.260
जब दुःख में चिल्लाते हैं , बाप को तरस पड़ता है ।

284
01:26:40.730 --> 01:26:49.300
आप देव और देवियों को भी बहुत पुकारते हैं ।

285
01:26:52.960 --> 01:27:07.230
तो अगली सीजन में एक तो व्यर्थ का नामनिशान नहीं , मंजूर है ?

286
01:27:07.230 --> 01:27:10.660
मंजूर है !

287
01:27:10.660 --> 01:27:13.860
दिल का हाथ उठाओ ।

288
01:27:15.830 --> 01:27:19.630
दिल का हाथ उठाना ।

289
01:27:24.360 --> 01:27:32.860
व्यर्थ होता क्या है , यह मालूम ही गुम हो जाए ।

290
01:27:33.260 --> 01:27:40.130
जैसे स्वर्ग की शहजादियां आती हैं ना

291
01:27:41.560 --> 01:27:56.830
तो उनको दुःख और अशान्ति का पता ही नहीं है , कहते हैं क्या कहते हैं , यह क्या होता है ।

292
01:27:57.600 --> 01:28:14.300
ऐसे ही ब्राह्मण परिवार में व्यर्थ का पता ही न हो , व्यर्थ होता क्या है ।

293
01:28:16.930 --> 01:28:26.900
स्वचिंतन , स्वचिंतक ।

294
01:28:27.700 --> 01:28:33.230
सेवा का टर्न दिल्ली और आगरा :-

295
01:29:00.230 --> 01:29:11.060
अच्छा है , सभी टी . वी . में रौनक देखो (

296
01:29:30.900 --> 01:29:33.130
मेरा बाबा की पट्टी सब हिला रहे हैं ) बहुत अच्छा ।

297
01:29:33.130 --> 01:29:38.430
अभी झण्डे नीचे करो ।

298
01:29:49.700 --> 01:29:52.900
अच्छा ।

299
01:29:54.560 --> 01:30:04.530
दिल्ली वालों को तो अपनी दिल बड़ी करनी पड़ेगी ।

300
01:30:07.900 --> 01:30:10.500
क्यों ?

301
01:30:11.100 --> 01:30:19.460
जो भी ब्राह्मण हैं वह देवता बनके कहाँ आयेंगे ?

302
01:30:19.800 --> 01:30:23.800
दिल्ली में ही आयेंगे ना !

303
01:30:34.230 --> 01:30:44.500
तो दिल्ली वालों को बहुत बड़ी दिल बनानी पड़ेगी ।

304
01:30:48.060 --> 01:31:02.300
देखो अगर ब्रह्मा बाप भी कृष्ण बनके आयेंगे , तो भी कहाँ आयेंगे !

305
01:31:02.300 --> 01:31:06.860
दिल्ली में ही आयेंगे ।

306
01:31:18.560 --> 01:31:39.060
तो दिल्ली वालों को अभी भी दिल्ली के ब्राह्मण संख्या दिल खोलके बढ़ानी पड़ेगी ।

307
01:31:40.630 --> 01:31:51.530
सब ज़ोन से ज्यादा संख्या दिल्ली में होनी चाहिए ।

308
01:31:52.900 --> 01:32:06.430
झण्डा लहराया है ना यहाँ , ऐसे एक-एक दुःखी आत्माओं के दिल में बाप का झण्डा लहराओ ।

309
01:32:11.360 --> 01:32:29.630
तो झण्डे यह व्यर्थ नहीं जायें , यही झण्डे सत्य रूप से दुःखियों के दिल में लहराओ ।

310
01:32:32.330 --> 01:32:39.830
बाकी सेवा तो हो रही है ।

311
01:32:39.830 --> 01:33:00.160
सेवा तो करते हैं लेकिन बापदादा ने देखा कि इस वर्ष कोई भी ज़ोन सेवा में पीछे नहीं गया है ।

312
01:33:01.360 --> 01:33:17.100
सभी ने दिल बड़ी करके खुशी-खुशी से जो भी प्रोग्राम किये हैं ,

313
01:33:17.660 --> 01:33:43.500
बहुत सुन्दर रूप से और लोगों में यह स्पष्ट किया है कि आप आत्मा हो , शरीर नहीं हो ।

314
01:33:45.500 --> 01:34:02.230
यह बात मैजारिटी ने माना है ।

315
01:34:04.900 --> 01:34:17.930
अब आत्मा जैसे प्रत्यक्ष की है , ऐसे परमात्मा की प्रत्यक्षता का पक्का करो ।

316
01:34:21.230 --> 01:34:33.300
इसमें बापदादा देखेंगे कि नम्बरवन कौन लेता है?

317
01:34:35.960 --> 01:34:42.460
आत्मा का पाठ तो कईयों ने पक्का किया है

318
01:34:43.430 --> 01:34:55.300
अभी परमात्मा वर्सा दे रहा है , कुछ तो वर्सा ले लेवें ।

319
01:34:55.300 --> 01:34:59.700
आपका परिवार है ना !

320
01:34:59.700 --> 01:35:02.900
वंचित नहीं रह जायें ।

321
01:35:09.600 --> 01:35:13.230
तो क्या करना है ?

322
01:35:13.500 --> 01:35:17.700
वह भी बता दिया ।

323
01:35:19.430 --> 01:35:32.230
बाकी दिल्ली फाउण्डेशन है ।

324
01:35:36.960 --> 01:35:57.000
वह भी दिन आयेगा जो यह सारी मिनिस्ट्री सोचेगी

325
01:35:59.830 --> 01:36:19.430
कि यह जो कह रहे हैं वह मानना ही पड़ेगा ।

326
01:36:23.730 --> 01:36:27.360
यह कमाल करके दिखाओ ।

327
01:36:27.360 --> 01:36:36.960
नम्बरवन दिल्ली करे या कोई भी करे,उसको बापदादा इनाम देंगे।

328
01:36:40.230 --> 01:36:46.800
अभी जो रही हुई बात है उसको पूरा करो ।

329
01:36:47.960 --> 01:36:50.500
उमंग है ना !

330
01:36:50.500 --> 01:36:53.600
उमंग है ?

331
01:36:56.830 --> 01:37:01.460
दिल्ली वालों को तो है ना !

332
01:37:10.100 --> 01:37:12.300
अच्छा ।

333
01:37:17.660 --> 01:37:29.160
डबल विदेशी :-

334
01:37:37.500 --> 01:38:06.500
बापदादा चाहते हैं कि जैसे आपको टाइटिल मिला है डबल विदेशी , ऐसे आपका टाइटिल हो डबल पुरूषार्थी ।

335
01:38:06.960 --> 01:38:10.630
तीव्र पुरूषार्थी ।

336
01:38:10.630 --> 01:38:18.400
तीव्र पुरूषार्थी डबल विदेशी आये हैं ।

337
01:38:18.400 --> 01:38:21.700
हो सकता है ?

338
01:38:25.830 --> 01:38:34.300
जैसे डबल विदेशी हो वैसे तीव्र पुरूषार्थी ।

339
01:38:38.560 --> 01:38:42.460
कोई भी साधारण पुरूषार्थी नहीं ।

340
01:38:42.830 --> 01:38:51.760
बापदादा खुश होते हैं , हिम्मत रख करके पहुंच जाते हैं ।

341
01:38:52.360 --> 01:39:05.830
कोई भी टर्न इस सीजन में नहीं देखा है जिसमें विदेशी नहीं आये हों ।

342
01:39:09.400 --> 01:39:20.760
तो जैसे यह हिम्मत रख करके कर रहे हो ।

343
01:39:21.600 --> 01:39:40.530
ऐसे ही अभी यह एक्जैम्पुल दिखाओ कि डबल विदेशी अर्थात् तीव्र पुरूषार्थी ।

344
01:39:43.400 --> 01:39:45.600
हो सकता है ?

345
01:39:45.600 --> 01:39:49.960
हाथ उठाओ ।

346
01:39:52.230 --> 01:40:03.030
तो अगले ग्रुप में जो भी आयेंगे वह तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप ।

347
01:40:07.860 --> 01:40:26.600
जो आगे बढ़े , ऐसे अगले सीजन में बापदादा सभी को उठवायेंगे ,

348
01:40:26.900 --> 01:40:42.530
जो भी तीव्र पुरूषार्थी बने हैं , बीच में रूकावट नहीं हुई है , उसको उठायेंगे ।

349
01:40:42.860 --> 01:40:47.400
तो डबल विदेश तो उठेंगे ही ।

350
01:40:48.960 --> 01:41:08.430
और भी तीव्र पुरूषार्थ करना और ऐसा तीव्र पुरूषार्थ करना जो बापदादा के आगे हाथ उठा सको ।

351
01:41:08.900 --> 01:41:12.100
ठीक है मंजूर है ?

352
01:41:12.100 --> 01:41:16.900
पहली लाइन मंजूर है !

353
01:41:23.130 --> 01:41:29.960
मधुबन वालों को पसन्द है ना !

354
01:41:29.960 --> 01:41:34.860
यह सब मधुबन वाले बैठे हैं ।

355
01:41:36.400 --> 01:41:38.630
पसन्द है ?

356
01:41:38.630 --> 01:41:43.500
मधुबन वाले फिर उठो ।

357
01:41:50.300 --> 01:41:53.000
अच्छा ।

358
01:41:55.500 --> 01:41:59.030
यह टी . वी में आ रहे हैं ।

359
01:41:59.030 --> 01:42:10.760
अगर बापदादा कहे कि यह कौन-कौन थे , वह टी . वी . से निकाल सकते हैं ।

360
01:42:10.760 --> 01:42:12.760
अच्छा ।

361
01:42:14.760 --> 01:42:22.960
तो जो भी आये हैं , वैसे तो सुन सभी रहे हैं

362
01:42:22.960 --> 01:42:31.430
लेकिन मधुबन वाले तीव्र पुरूषार्थियों में हाथ उठायेंगे ।

363
01:42:31.430 --> 01:42:34.430
उठायेंगे ?

364
01:42:34.430 --> 01:42:36.930
अभी हाथ उठाओ ।

365
01:42:36.930 --> 01:42:38.930
अच्छा ।

366
01:42:43.230 --> 01:42:49.060
आपको तो पदमगुणा मुबारक है ।

367
01:42:58.100 --> 01:43:00.300
बहुत अच्छा ।

368
01:43:00.300 --> 01:43:10.130
बापदादा नोट करेंगे , हर एक ज़ोन से कितने तीव्र पुरूषार्थी हैं ।

369
01:43:10.130 --> 01:43:13.660
आप लिस्ट देना ।

370
01:43:13.860 --> 01:43:19.800
हर एक ज़ोन वाले , जो नहीं भी आवे

371
01:43:19.800 --> 01:43:30.760
तो लिस्ट जरूर ले आवे जो तीव्र पुरूषार्थ करते हैं उन्हों का नाम लिस्ट लावें ।

372
01:43:31.260 --> 01:43:32.930
ठीक है ।

373
01:43:35.430 --> 01:43:40.500
पीछे वाले , ठीक लगता है ?

374
01:43:42.860 --> 01:43:48.160
आपको ठीक लगता है ?

375
01:43:49.100 --> 01:43:51.830
बहुत अच्छा ।

376
01:43:51.830 --> 01:44:00.130
बापदादा को तीव्र पुरूषार्थी बहुत पसन्द हैं ।

377
01:44:02.130 --> 01:44:07.900
कब तक साधारण पुरूषार्थ करेंगे ।

378
01:44:08.760 --> 01:44:13.560
चलना है ना अभी तो घर जाना है ना !

379
01:44:14.030 --> 01:44:19.230
तो तीव्र पुरूषार्थी बनके जाना है ना !

380
01:44:25.400 --> 01:44:41.560
बापदादा को , सुनाया भी हर एक बच्चा विजयी हो , यह अच्छा लगता है ।

381
01:44:42.360 --> 01:44:50.660
यह हुआ , यह हुआ … यह समाचार सुनना अच्छा नहीं लगता है ।

382
01:44:55.230 --> 01:45:13.600
तो कम से कम जो भी ज़ोन हैं , वह इन 6 मास में ,

383
01:45:14.060 --> 01:45:23.330
सभी ने तीव्र पुरूषार्थ किया , यह रिजल्ट तो दे सकते हो ।

384
01:45:23.960 --> 01:45:32.200
अगर 6 मास तीव्र पुरूषार्थ करेंगे तब तो आदत पड़ जायेगी ।

385
01:45:32.530 --> 01:45:35.630
पड़ जायेगी ना आदत !

386
01:45:36.730 --> 01:45:46.300
तो रिजल्ट लेंगे तीव्र पुरूषार्थी 6 मास में कितने बनें ?

387
01:45:47.300 --> 01:45:55.500
और बापदादा इनाम भी देंगे ।

388
01:45:55.830 --> 01:46:08.400
जिस ज़ोन में ज्यादा से ज्यादा तीव्र पुरूषार्थी होंगे उनको इनाम भी देंगे ।

389
01:46:12.930 --> 01:46:14.930
मंजूर है !

390
01:46:14.930 --> 01:46:18.700
मंजूर है मधुबन वाले ?

391
01:46:18.700 --> 01:46:21.430
अच्छा ।

392
01:46:28.730 --> 01:47:11.260
पहली बार बहुत आये हैं :- बहुत अच्छा ।

393
01:47:12.900 --> 01:47:41.000
जो भी पहले बारी आये हैं उन्हों को बापदादा बहुत-बहुत मुबारकें दे रहे हैं ।

394
01:47:46.300 --> 01:47:49.300
क्यों ?

395
01:47:51.300 --> 01:48:12.900
क्योंकि इस दुःख के वायुमण्डल को पार करते हुए

396
01:48:14.230 --> 01:48:32.260
सुख चैन के तरफ पहुंच तो गये हैं ।

397
01:48:35.500 --> 01:49:07.160
हर एक आने वाला अपने जीवन द्वारा और आत्माओं को भी परिचय तो दे सकेंगे ।

398
01:49:11.400 --> 01:49:23.560
और आने वालों को यह भी मालूम हो

399
01:49:25.230 --> 01:49:52.330
कि लास्ट सो फास्ट जाकरके आप भी पुरूषार्थी बन ऊंच बन सकते हो क्योंकि बाप को मान लिया ना !

400
01:49:52.330 --> 01:50:02.060
तो बाप द्वारा वर्से के अधिकारी बन गये ।

401
01:50:06.760 --> 01:50:41.700
बापदादा को खुशी है कि समय समाप्त होने के पहले अपने घर में तो पहुंच गये ।

402
01:50:45.600 --> 01:51:02.430
बाप को भी खुशी है कि बच्चे अपने परिवार में पहुंच गये हैं ।

403
01:51:04.830 --> 01:51:09.360
अपने घर में पहुंच गये हैं ।

404
01:51:13.900 --> 01:51:19.600
वह है कार्य करने का स्थान

405
01:51:20.030 --> 01:51:28.160
लेकिन घर परमात्मा का घर सो आपका घर

406
01:51:33.830 --> 01:51:52.300
इसलिए बाप पदमगुणा खुश है

407
01:51:53.360 --> 01:52:10.660
कि बिछुड़े हुए बच्चे अपने परिवार में , अपने घर में पहुंच गये हैं ।

408
01:52:16.600 --> 01:52:25.530
अभी लास्ट सो फास्ट बन सकते हो ।

409
01:52:25.530 --> 01:52:29.830
मार्जिन है ।

410
01:52:29.830 --> 01:52:41.360
अगर तीव्र पुरूषार्थ करेंगे तो जितना आगे बढ़ने चाहो उतना बढ़ सकते हो ।

411
01:52:41.830 --> 01:52:46.430
सिर्फ अटेन्शन देना पड़ेगा बस ।

412
01:52:48.960 --> 01:52:59.160
और बापदादा को तो खुशी होगी कि वाह बच्चे वाह !

413
01:53:05.030 --> 01:53:22.960
तो भले आये , और आते हुए अपने आपको आगे बढ़ाते रहना ।

414
01:53:23.830 --> 01:53:33.530
तीव्र पुरूषार्थ करते रहना , ओम् शान्ति ।

415
01:53:44.630 --> 01:53:47.900
अच्छा ।

416
01:53:48.200 --> 01:54:18.530
सभी चारों ओर के बच्चों को बापदादा का दिल का यादप्यार

417
01:54:19.760 --> 01:55:02.630
और साथ-साथ बाप हर एक बच्चे को अपने स्वमान के नशे में निश्चय में देख हर्षित होते हैं ,

418
01:55:02.630 --> 01:55:09.100
कभी भी स्वमान को नहीं छोड़ना ।

419
01:55:10.560 --> 01:55:32.430
स्वमानधारी अर्थात् सदा सर्व प्राप्तिवान , स्वमान की लिस्ट बड़ी लम्बी है ,

420
01:55:32.700 --> 01:55:54.500
रोज़ एक-एक स्वमान स्मृति में रख स्वरूप में लाते तीव्र पुरूषार्थी बन आगे बढ़ते चलो ।

421
01:55:54.960 --> 01:56:12.160
बापदादा को दिल में बिठाके और अपने को बापदादा के दिल में बिठाके

422
01:56:16.430 --> 01:56:32.960
निर्भय होके मास्टर सर्वशक्तिवान बन चलते रहो , उड़ते रहो और उड़ाते रहो ।

423
01:56:32.960 --> 01:56:36.000
ओम् शान्ति ।

424
01:56:42.300 --> 01:56:48.630
मोहिनी बहन से :- चलना आ गया है ना ।

425
01:56:49.030 --> 01:56:52.030
चलते जाना ।

426
01:57:01.500 --> 01:57:07.230
साथ हैं , हाथ है और क्या चाहिए ।

427
01:57:14.700 --> 01:57:24.630
( दादी जानकी जी आज तबियत के कारण स्टेज पर नहीं आई हैं )

428
01:57:27.300 --> 01:57:46.500
बापदादा तो सामने देख रहा है , बच्ची कहाँ भी है लेकिन बाप के दिल में बैठी है ।

429
01:57:48.500 --> 01:58:06.730
बापदादा बच्ची को सर्व शक्तियों की किरणें दे रहे हैं ।

430
01:58:10.130 --> 01:58:20.960
सेवा के निमित्त बनी हुई आत्मा हो

431
01:58:23.200 --> 01:58:47.630
इसलिए सभी आत्मायें भी परिवार भी आपको यादप्यार दे रहा है ।

432
01:58:49.630 --> 01:58:57.600
निमित्त हो , निमित्त बनना ही है ।

433
01:58:57.600 --> 01:59:12.960
बाकी यह थोड़ा बहुत हिसाब किताब , यह भी चुक्तू हो ही जायेगा ।

434
01:59:16.000 --> 01:59:31.200
बापदादा और परिवार की शुभ आशायें आपके साथ हैं और सदा रहेंगी ।

435
01:59:35.760 --> 01:59:44.700
परदादी से :- ठीक है , हर्षितमुख ।

436
01:59:45.960 --> 01:59:49.260
बहुत अच्छा है ।

437
01:59:49.760 --> 01:59:57.800
कितनी भी कुछ तकलीफ हो लेकिन शक्ल से नहीं लगता ।

438
01:59:57.800 --> 02:00:03.100
साक्षी होके चल रही हो ।

439
02:00:05.430 --> 02:00:11.660
साक्षी होके चलने में होशियार हो ।

440
02:00:13.660 --> 02:00:17.300
नम्बर ले लेंगी ।

441
02:00:18.630 --> 02:00:45.100
तीनों भाइयों से :- यह मिलने की विधि बहुत अच्छी है ।

442
02:00:52.130 --> 02:01:04.200
अभी विशेष यही है कि वायुमण्डल को और पावरफुल बनाओ ।

443
02:01:05.230 --> 02:01:20.660
जो दरवाजे से कोई आवे तो अनुभव करे कि कौन से स्थान पर आ रहे हैं ।

444
02:01:22.100 --> 02:01:40.760
शान्ति तो अनुभव करते हैं लेकिन शक्ति की अनुभूति हो कि यहाँ से जो चाहे वह मिल सकता है ।

445
02:01:42.400 --> 02:01:51.400
ऐसा वायुमण्डल कहाँ नहीं देखा है , विचित्र स्थान है यह ।

446
02:01:51.400 --> 02:01:54.930
यह अनुभव करें ।

447
02:01:55.530 --> 02:02:05.300
और आपस में मिलकर जो भी डिपार्टमेंट वाले हैं

448
02:02:05.830 --> 02:02:32.660
उन्हों को सप्ताह में एक या दो बारी आपस में कोई विषय पर टाइम निकालके हालचाल पूछके कोई प्रबन्ध चाहिए , सैलवेशन चाहिए , वह भी पूछे

449
02:02:32.900 --> 02:02:46.060
और साथ-साथ कोई न कोई प्वाइंट का होमवर्क देवे जो फिर दूसरी बारी पूछे ।

450
02:02:46.360 --> 02:02:53.900
तो हर एक डिपार्टमेंट में यह होना चाहिए ।

451
02:02:54.930 --> 02:03:02.360
नहीं तो सिर्फ कामकाज करते हैं ना बिजी हो जाते हैं ।

452
02:03:02.360 --> 02:03:06.500
आपस में कुछ रूहरिहान भी करें ।

453
02:03:06.500 --> 02:03:11.830
जैसे तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप करता है ना ।

454
02:03:11.830 --> 02:03:15.230
तो यह इतना नहीं कर सकते ।

455
02:03:15.230 --> 02:03:25.400
हफ्ते दो में यह प्रोग्राम अपने डिपार्टमेंट में रखें

456
02:03:27.400 --> 02:03:31.400
तो पता पड़ेगा क्या है क्या नहीं ।

457
02:03:31.900 --> 02:03:43.330
कुछ चाहिए सैलवेशन तो बतावे , फिर सोच समझके देवें ।

458
02:03:45.330 --> 02:03:54.200
मतलब कुछ ज्ञान का भी डिपार्टमेंट में हो सिर्फ काम काम नहीं ।

459
02:03:56.460 --> 02:03:59.030
यह हो सकता है ना ।

460
02:03:59.030 --> 02:04:02.360
हो सकता है ?

461
02:04:02.360 --> 02:04:05.560
तो यह करो ।

462
02:04:13.660 --> 02:04:23.230
सेन्टर वाले आपस में रात में बैठते हैं और बैठना चाहिए ।

463
02:04:23.230 --> 02:04:27.900
चाहे हफ्ते में बैठें चाहे 15 दिन में बैठें ।

464
02:04:47.300 --> 02:04:54.560
पॉजिटिव करेंगे तो निगेटिव दबता जायेगा ।

465
02:04:57.230 --> 02:05:06.030
सब राय करके यह मीटिंग होगी ना उसमें राय करो ।

466
02:05:30.760 --> 02:05:39.030
( हू एम आई फिल्म को एज्युकेशनल फिल्म के रूप में गवर्मेन्ट ने पास किया है ) सभी को यह खबर पहुंचाओ ।

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02:05:44.430 --> 02:05:48.430
कुछ न कुछ आवाज फैलाते जाओ ।

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02:05:48.430 --> 02:05:53.900
अभी क्या है , वायुमण्डल ठीक है ।

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02:05:53.900 --> 02:06:00.830
अभी जो भी करेंगे ना उसका प्रभाव पड़ेगा ।

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02:06:40.200 --> 02:06:46.500
( अभी 6 मास तो नहीं मिलेंगे ) मिलते रहेंगे , अमृतवेले तो मिलेंगे ।

