शनिवार 21 जनवरी 2017 की दैनिक मुरली
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021/01/17 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन
1“मीठे बच्चे - ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु सो ब्रह्मा कैसे बनते हैं, दोनों एक दो की नाभी से कब निकलते हैं, यह राज़ सिद्ध कर समझाओ''
2प्रश्न:- कौन सी गुप्त बात महीन बुद्धि वाले बच्चे ही समझ सकते हैं?
3उत्तर:- हम सबकी बड़ी मां, यह ब्रह्मा है, जिसके हम मुख वंशावली हैं।
4यह बड़ी गुप्त बात है।
5ब्रह्मा की बेटी है सरस्वती।
6वह है सबसे होशियार, गॉडेज आफ नॉलेज।
7बाप ने ज्ञान का कलष माताओं पर रखा है।
8माता की लोरी गाई हुई है।
9वह सबको समझाये कि विश्व में शान्ति कैसे हो सकती है।
10गीत:- भोलेनाथ से निराला…
11ओम् शान्ति।
12बिगड़ी को बनाने वाला जरूर भगवान को ही कहेंगे न कि शंकर को।
13भोलानाथ भी शिव को ही कहेंगे, शंकर को नहीं।
14खिवैया भी शिव को ही कहेंगे, न शंकर को, न विष्णु को।
15खिवैया अथवा गॉड फादर कहने से बुद्धि निराकार तरफ चली जाती है।
16त्रिमूर्ति का चित्र तो नामीग्रामी है।
17गवर्मेन्ट का जो कोट आफ आर्मस है, वह जानवरों का बना दिया है।
18और उस पर लिख दिया है सत्यमेव जयते।
19अब जानवरों के साथ तो कोई अर्थ निकलता नहीं।
20गवर्मेन्ट के कोट ऑफ आर्मस की मोहर होती है।
21जो भी बड़ी-बड़ी राजधानियां हैं उन सबके कोट ऑफ आर्मस हैं।
22भारत में त्रिमूर्ति मशहूर है।
23ब्रह्मा विष्णु शंकर, उसमें शिव का चित्र गुम कर दिया है क्योंकि उनकी नॉलेज ही नहीं है।
24गॉड फादर कहने से बुद्धि निराकार की तरफ चली जयेगी।
25ब्रह्मा, विष्णु, शंकर को गॉड फादर नहीं कहेंगे।
26गॉड फादर है आत्माओं का।
27वह ऊंचे ते ऊंचा ठहरा।
28दिखाते भी हैं ऊंचे ते ऊंचा भगवान।
29ऐसे नहीं ऊंचे ते ऊंचा ब्रह्मा कहेंगे वा विष्णु वा शंकर को कहेंगे।
30नहीं, ऊंचे से ऊंचा एक भगवान है।
31यह सभी जानते हैं।
32सिक्ख लोग भी उनकी महिमा गाते हैं।
33गुरू नानक को भी यह ज्ञान था कि मनुष्य को देवता बनाने वाला परमपिता परमात्मा के सिवाय कोई हो नहीं सकता।
34सतयुग में तो देवतायें रहते हैं जरूर।
35परन्तु देवताओं को रचने वाला परमात्मा ही है।
36वह देवताओं को कैसे रचते हैं, यह नहीं जानते।
37महिमा गाते हैं - मूत पलीती कप्पड़ धोए।
38तो जो मनुष्य मूत पलीती थे उनको देवता बनाया।
39परन्तु बनाया कब यह नहीं लिखा है।
40तुम जानते हो बरोबर इस समय परमात्मा मनुष्य को देवता बना रहे हैं।
41जरूर दुर्गति से सद्गति की होगी, भ्रष्टाचारी को श्रेष्ठाचारी बनाया होगा!
42तुम समझा सकते हो इस भारत में ही श्रेष्ठाचारी देवता थे।
43गुरू नानक जब आये तब तो भ्रष्टाचारी दुनिया थी ना, तब तो गाते थे।
44लक्ष्मी-नारायण आदि के चित्र तो रहते हैं ना, जिनके साथ ही इनकी कम्पीटीशन होती है।
45गुरू गोविन्दसिंह का जन्म बड़े धूमधाम से मनाते हैं।
46सिक्ख धर्म का रचयिता है।
47खुद कहते हैं भगवान निराकार-निरहंकारी है।
48आकर मनुष्य को पतित से पावन देवता बनाते हैं।
49श्रीकृष्ण मनुष्य को देवता नहीं बना सकते।
50गीता में भी है मैं तुमको सहज राजयोग सिखलाकर श्रेष्ठाचारी महाराजा महारानी बनाता हूँ।
51पतित-पावन गॉड फादर को ही कहेंगे।
52वह जरूर आयेंगे भ्रष्टाचारी दुनिया में।
53उनको कहते हैं आकर पावन बनाओ।
54श्रेष्ठाचारी बनाने वाला तो एक ही निराकार बाप ऊंचे ते ऊंचा भगवान है फिर है ब्रह्मा, विष्णु, शंकर, यह हुई रचना परमपिता परमात्मा की।
55जिसका चित्र तो है नहीं।
56अब बाप समझाते हैं विष्णु की नाभी से ब्रह्मा निकला फिर ब्रह्मा की नाभी से विष्णु कैसे निकलेंगे क्योंकि ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु सो ब्रह्मा बनते हैं।
57ब्रह्मा द्वारा स्थापना फिर वही ब्रह्मा सरस्वती दूसरे जन्म में विष्णु के दो रूप लक्ष्मी-नारायण बन पालना करते हैं।
58तो ब्रहमा सरस्वती सो लक्ष्मी-नारायण।
59ब्रह्मा कहेंगे हम सो विष्णु के दो रूप लक्ष्मी-नारायण बनते हैं।
60लक्ष्मी-नरायण फिर कहेंगे हम सो ब्रह्मा सरस्वती तो एक दो के नाभी से निकले ना।
61हम सो देवता फिर क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र बनें।
62यह बहुत समझने की बातें हैं।
63बाबा ने समझाया जिस ब्रह्मा के तन में मैंने प्रवेश किया है उनके पूरे 84 जन्म हुए हैं।
64बाकी कोई रथ आदि की बात नहीं।
65वह सब झूठ है।
66इस संगम के समय का किसको पता नहीं है।
67मनुष्यों को घोर अंधकार में डाल दिया है।
68कलियुग की आयु इतने लाखों वर्ष की है।
69सतयुग की आयु इतनी है।
70ऐसी-ऐसी बातें सुनाए घोर अंधकार में डाल दिया है।
71बाप कहते हैं मैं उन बच्चों के आगे सम्मुख होता हूँ जो मुझे पहचानते हैं।
72बाकी तो मुझे पहचानते ही नहीं।
73वह समझेंगे भी नहीं कि यह कौन हैं।
74कोई बड़ी सभा में जाओ तो वह समझेंगे थोड़ेही।
75तुम्हारे में भी मुश्किल ही समझते हैं।
76घड़ी-घड़ी भूल जाते हैं।
77यह तो बड़े ते बड़ी हाइएस्ट अथॉरिटी है।
78पोप का देखो कितना रिगार्ड रखते हैं।
79पोप कौन है?
80वह है क्रिश्चियन घराने का।
81यह है अन्तिम जन्म।
82क्राइस्ट के समय से पुनर्जन्म लेते अब तमोप्रधान अवस्था में है।
83सभी पतित हैं।
84एक दो को दुःख देते रहते हैं।
85बाप कहते हैं - यह भी बना बनाया खेल है।
86तो ऊंचे ते ऊंचा है निराकार भगवान फिर ब्रह्मा विष्णु शंकर।
87ब्रह्मा द्वारा स्थापना।
88जिससे स्थापना होती है उनसे ही पालना होगी।
89तो इन ब्रह्मा सरस्वती को फिर लक्ष्मी-नारायण बनना है।
90लक्ष्मी-नारायण ही अभी आकर ब्रह्मा सरस्वती बने हैं।
91प्रजापिता की यह हैं मुख वंशावली।
92कृष्ण को प्रजापिता नहीं कहेंगे।
93इनका नाम ही प्रजापिता ब्रह्मा है।
94ब्रह्मा द्वारा जरूर ब्राह्मण चाहिए।
95बाप कहते हैं ब्रह्मा को एडाप्ट करता हूँ।
96मुझे इनको ही ब्रह्मा बनाना है, जो पूरे 84 जन्म भोग अभी अन्तिम जन्म में है।
97ब्रह्मा तो एक ही होगा ना।
98यह अपने जन्मों को नहीं जानते हैं तो जैसे ब्रह्मा को बैठ समझाते हैं तो जरूर ब्राह्मण भी होंगे।
99ब्राह्मण हैं ब्रह्मा के मुख वंशावली।
100यह सब एडाप्टेड चिल्ड्रेन कुमार-कुमारियां हैं।
101प्रजापिता के जरूर मुख वंशावली होंगे।
102यह बहुत समझने की बातें हैं।
103खुद समझाते हैं मुझे बहुत जन्मों के अन्त में आना पड़ता है।
104सतयुग में पहले-पहले यह लक्ष्मी-नारायण थे।
105जरूर इन्होंने ही 84 जन्म लिए होंगे।
106औरों ने जरूर कम लिये होंगे।
107यह ब्रह्मा ही फिर विष्णु युगल बनेगा।
108तो कितनी समझने की बातें हैं।
109पहले-पहले तो यह निश्चय चाहिए कि यह नॉलेज कृष्ण नहीं दे सकते।
110अच्छा फिर गाते हैं आपेही पूज्य, आपेही पुजारी।
111भक्ति मार्ग में पुजारी हैं, ज्ञान मार्ग में पूज्य हैं।
112विष्णु के दो रूप बरोबर पूज्य थे।
113फिर यह ब्रह्मा ही पुजारी बन विष्णु की पूजा करते थे।
114कहते हैं हम सो पुजारी थे विष्णु के।
115अब हम सो विष्णु पूज्य बन रहा हूँ, तत्त्वम्।
116इसको गुह्य ते गुह्य बात कही जाती है।
117ब्रह्मा कहाँ से आया!
118विष्णु कहाँ गया!
119यह तुम ही जानते हो।
120विष्णु के दो रूप लक्ष्मी-नारायण को 84 जन्म पूरे कर अन्त में पतित बनना है।
121डिनायस्टी ही पतित हो तब तो मैं आकर स्थापना करूँ और सब धर्मों को खलास कर दूँ।
122फिर से सहज राजयोग सिखलाकर श्रेष्ठाचारी देवी-देवता धर्म की स्थापना कर, बाकी जो भ्रष्टाचारी धर्म हैं उन सबका विनाश कराता हूँ।
123रामराज्य में दूसरा कोई धर्म होता नहीं।
124अभी सब धर्म हैं।
125भारत का असली धर्म है नहीं, वह फिर से स्थापन हो रहा है।
126चित्र भी हैं।
127त्रिमूर्ति के ऊपर शिव भी है।
128ब्रह्मा सरस्वती सो लक्ष्मी-नारायण, वही राधे कृष्ण थे।
129राजधानी राधे की अपनी थी।
130तो कृष्ण अपनी राजधानी के थे।
131ज्ञान की सितार राधे के पास नहीं है।
132सरस्वती नॉलेज से भविष्य में राधे बनी है।
133सरस्वती को गॉडेज आफ नॉलेज कहते हैं।
134उनको जरूर बाप द्वारा नॉलेज मिली होगी।
135सरस्वती है ब्रह्मा की बेटी।
136प्रजापिता ब्रह्मा तो जगत अम्बा भी चाहिए।
137वास्तव में यह है गुप्त बात।
138बड़ी अम्बा तो यह ब्रह्मा है।
139इन द्वारा ज्ञान देते हैं माताओं को।
140जो बड़ी बेटी जगत अम्बा गाई जाती है।
141नहीं तो ब्रह्मा मुख द्वारा एडाप्ट होते हो तो माता यह हो गई।
142होशियार में होशियार ब्रह्मा की बेटी सरस्वती है।
143वह कहाँ से आई?
144ब्रह्मा को स्त्री तो नहीं है।
145वह है ही प्रजापिता।
146तो वह है मुख वंशावली।
147यह ड्रामा भी अनादि बना बनाया है।
148तो गॉडेज आफ नॉलेज सरस्वती है।
149अब रिलीजस कान्फ्रेन्स होती है उसमें निराकार शिवबाबा तो जा नहीं सकते।
150ब्रह्मा को भी नहीं बिठा सकते।
151माता की महिमा है।
152सभी धर्म वालों की हेड माता होनी चाहिए।
153सभी की माता जगत अम्बा बैठ लोरी दे।
154बच्चे पैदा होते हैं माँ द्वारा।
155जगत अम्बा सबकी माता ठहरी, तो सबको उनके आगे माथा झुकाना पड़े।
156माता समझा सकती है - यह भ्रष्टाचारी दुनिया श्रेष्ठाचारी कैसे बने वा इस भारत में शान्ति कैसे स्थापन हो।
157रावणराज्य में शान्ति हो न सके।
158शान्ति कहाँ से मिलती है - यह माता ही समझा सकती है।
159शान्तिधाम है निर्वाणधाम।
160यह है दुःखधाम।
161सतयुग है सुखधाम।
162बरोबर सतयुग में एक राज्य था।
163सुख शान्ति पवित्रता सब कुछ था।
164अभी नहीं है।
165तो जरूर ड्रामा पूरा होगा।
166झाड़ की भी आयु पूरी हुई है।
167देवताओं के भी 84 जन्म पूरे हुए हैं।
16884 लाख जन्म तो हो न सके।
169इस्लामी, बौद्धी धर्म वालों को इतने वर्ष हुए तो फिर 84 लाख जन्म कैसे होंगे।
170बाल युवा वृद्ध होने में समय लगता है।
17184 लाख जन्म हो तो फिर लम्बा चौड़ा कल्प हो जाए।
172तो यह माता समझायेगी तुम्हारा परमपिता परमात्मा से क्या सम्बन्ध है।
173वह तो फादर रचयिता है ना।
174पहले ब्रह्मा, विष्णु शंकर को रचते होंगे फिर ब्रह्मा द्वारा मनुष्य सृष्टि रचते हैं।
175ऐसे नहीं कोई नई दुनिया रचते हैं।
176अगर ऐसा हो तो फिर मनुष्य ऐसे नहीं कहें कि पतित-पावन आओ।
177इस समय सारी दुनिया पतित है, सब दुर्गति को पाये हुए हैं।
178याद करते रहते हैं ओ गॉड फादर रहम करो।
179हमको इन मायावी दुःखों से छुड़ाओ।
180तो वह फिर दुःख कैसे देंगे।
181दुःख देने वाला जरूर और है।
182सतयुग में जब एक धर्म था तो और सब धर्म की आत्माएं निर्वाणधाम में थी।
183अभी तो सभी आत्माएं यहाँ हैं तो फिर जरूर बाप को आकर एक धर्म की स्थापना करनी है।
184ब्रह्मा द्वारा स्थापना फिर वही ब्रह्मा, विष्णु बनते हैं।
185फिर विष्णु की नाभी से ब्रह्मा निकलते हैं।
186उनसे बैठ ज्ञान देता हूँ जो फिर देवता बनते हैं।
187राजयोग सीखते हैं।
188बाकी दुनिया वालों ने जो अनेक चित्र बनाये हैं, वह हैं सब दन्त कथायें।
189मुख्य बात है गीता माता का भगवान कौन?
190समझाना है - परमपिता परमात्मा जन्म देते हैं विष्णु को।
191ब्रह्मा को भी जन्म देंगे ना।
192वह तो देवताये हैं सतयुग के।
193ब्रह्मा कहाँ का?
194जरूर कलियुग का होगा।
195बहुत जन्मों के अन्त का जन्म जरूर देवताओं का ही होगा।
196जो श्रेष्ठाचारी थे, अब भ्रष्टाचारी हैं।
197दो युग में सूर्यवंशी, चन्द्रवंशियों का राज्य, 4 भाग हैं।
198लाखों वर्ष की बात नहीं।
199कहते हैं क्राइस्ट से 3 हजार वर्ष पहले भारत स्वर्ग था।
200यह सब अच्छी तरह समझाना पड़े।
201बाप कहते हैं यह सब एडाप्टेड चिल्ड्रेन हैं।
202अब विनाश सामने खड़ा है।
203भ्रष्टाचारी भारत को कोई मनुष्य श्रेष्ठाचारी बना नहीं सकता।
204बाबा ने समझाया है तो जब देवतायें वाम मार्ग में जाते हैं तो फिर यह सन्यासी पवित्रता के बल से भारत को थमाते हैं।
205इस समय तो सब पतित बन गये हैं।
206नदी तो सागर से निकलती है, नदियों को पतित-पावनी कह उसमें स्नान करते हैं।
207अब नदियां तो सब जगह हैं।
208नदी कैसे पतित-पावन हो सकती है।
209पतित-पावन तो एक ही परमपिता परमात्मा है।
210यहाँ तो ज्ञान गंगायें चाहिए जो मनुष्य को भ्रष्टाचारी से श्रेष्ठाचारी बनायें - सहज राजयोग से।
211बाप कहते हैं मैं सर्वशक्तिमान हूँ, मेरे से योग लगाने से ही सर्व विकर्म विनाश होंगे।
212अच्छा -
213मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग।
214रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
215धारणा के लिए मुख्य सार-
2161) सबसे बड़े ते बड़ी हाइएस्ट अथॉरिटी बाप है, उसे यथार्थ रूप से पहचान कर रिगार्ड रखना है।
217उनकी श्रीमत पर पूरा-पूरा चलना है।
2182) बाप ने ज्ञान का कलष माताओं को दिया है, उन्हें आगे रखना है।
219वरदान:- सर्व शक्तियों को आर्डर प्रमाण चलाने वाले शक्ति स्वरूप मास्टर रचयिता भव
220जो बच्चे मास्टर सर्वशक्तिमान् की अथॉरिटी से शक्तियों को आर्डर प्रमाण चलाते हैं, तो हर शक्ति रचना के रूप में मास्टर रचयिता के सामने आती है।
221ऑर्डर किया और हाजिर हो जाती है।
222तो जो हजूर अर्थात् बाप के हर कदम की श्रीमत पर हर समय “जी-हाजिर'' वा हर आज्ञा में “जी-हाजिर'' करते हैं। 223तो जी-हाज़िर करने वालों के आगे हर शक्ति भी जी-हाज़िर वा जी मास्टर हज़ूर करती है। 224ऐसे आर्डर प्रमाण शक्तियों को कार्य में लगाने वालों को ही मास्टर रचयिता कहेंगे। 225स्लोगन:- सिम्पल बन अनेक आत्माओं के लिए सैम्पल बनना - यह भी बहुत बड़ी सेवा है।
0 21/01/17 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban
226तपस्वी मूर्त बनो
227ज्वाला स्वरूप याद द्वारा पाप कटेश्वर वा पापहरनी बनो।
228आपकी याद ऐसी शक्तिशाली तपस्वी स्वरूप की हो जो अनेक आत्माओं की निर्बलता दूर हो जाए।
229इसके लिए हर सेकण्ड, हर श्वांस बाप और आप कम्बाइन्ड होकर रहो।
230स्नेह और शक्ति दोनों रूप कम्बाइन्ड हो।