Avyakt murli for Thursday 6 August 1970 - 1
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106-08-70ओम शान्ति अव्यक्त बापदादा मधुबन 2बन्धन मुक्त आत्मा की निशानी 3अभी अव्यक्त स्थिति में स्थित होकर व्यक्त देह का आधार लेकर देख रहे हैं, यह अनुभव कर रहे हो? 4जैसे कोई स्थूल स्थान में प्रवेश करते हो वैसे ही इस स्थूल देह में प्रवेश कर यह कार्य कर रहे हैं।
0> > Avyakt BapDada 6th August 1970
5ऐसा अनुभव होता है? 6जब चाहें तब प्रवेश करें और जब चाहें तब फिर न्यारे हो जाएँ, ऐसा अनुभव करते हो? 7एक सेकण्ड में धारण करें और एक सेकण्ड में छोडें यह अभ्यास है?
1Are you having the experience that you have stabilised yourself in the avyakt stage, and are observing everything with the support of the corporeal form?
8वैसे और स्थूल वस्तुओं को जब चाहे तब लो और जब चाहो तब छोड़ सकते हैं ना। 9वैसे इस देह के भान को जब चाहें तब छोड़ देही अभिमानी बन जायें यह प्रैक्टिस इतनी सरल है,जितनी कोई स्थूल वस्तु की सहज होती है? 10रचयिता जब चाहे रचना का आधार ले जब चाहे तब रचना के आधार को छोड़ दे ऐसे रचयिता बने हो?
11जब चाहें तब न्यारे, जब चाहें तब प्यारे बन जाएँ। 12इतना बन्धनमुक्त बने हो? 13यह देह का भी बन्धन है। 14देह अपने बन्धन में बांधती है।
2Just as you enter a physical place, in the same way, do you experience yourself entering a physical body to carry out a task?
15अगर देह बन्धन से मुक्त हो तो यह देह बन्धन नहीं डालेगी। 16लेकिन कर्तव्य का आधार समझ आधार को जब चाहें तब ले सकते हैं ऐसी प्रैक्टिस चलती रहती है? 17देह के भान को छोड़ने अथवा उससे न्यारा होने में कितना समय लगता है?
18एक सेकण्ड लगता है? 19सदैव एक सेकण्ड लगता है व कभी कितना,कभी कितना। 20(कभी कैसी,कभी कैसी)इससे सिद्ध है कि अभी सर्व बन्धनों से मुक्त नहीं हुए हो।
3Do you enter it when you wish and become detached from it when you wish?
21जितना बन्धनमुक्त उतना ही योगयुक्त होंगे और जितना योगयुक्त होंगे उतना ही जीवनमुक्त में उंच पद की प्राप्ति होती है। 22अगर बन्धनमुक्त नहीं तो योगयुक्त भी नहीं। 23उसको मास्टर सर्वशक्तिमान कहेंगे? 24देह के सम्बन्ध और देह के पदार्थों से लगाव मिटाना सरल है लेकिन देह के भान से मुक्त हो जाना।
4Do you adopt it one second and shed it the next?
25जब चाहें तब व्यक्त में आयें। 26ऐसी प्रैक्टिस अभी जोर शोर से करनी है। 27ऐसे ही समझें जैसे अब बाप आधार ले बोल रहे हैं वैसे ही हम भी देह का आधार लेकर कर्म कर रहे हैं। 28इस न्यारेपन की अवस्था प्रमाण ही प्यारा बनना है।
5Just as you can take other physical things when you want and leave them when you want?, is it just as easy to shed the awareness of this body and become soul conscious?
29जितना इस न्यारेपन की प्रैक्टिस में आगे होंगे उतना ही विश्व को प्यारे लगने में आगे होंगे। 30सर्व स्नेही बनने के लिए पहले न्यारा बनना है। 31सर्विस करते हुए, संकल्प करते हुए भी अपने को और दूसरों को भी महसूसता ऐसी आनी चाहिए कि यह न्यारा और अति प्यारा है।
32जितना जो स्वयं न्यारा होगा उतना औरों को बाप का प्यारा बना सकेंगे। 33सर्विस की सफलता का स्वरुप क्या है? 34(भिन्न-भिन्न विचार सभी के निकले)सर्विस की सफलता का स्वरुप यही है कि सर्व आत्माओं को बाप के स्नेही और बाप के कर्तव्य में सहयोगी और पुरुषार्थ में उन आत्माओं को शक्तिरूप बनाना।
35यह है सर्विस की सफलता का स्वरुप। 36जिन आत्माओं की सर्विस करो उन आत्माओं में यह तीनों ही क्वालिफिकेशन प्रत्यक्ष रूप में देखने में आनी चाहिए। 37अगर तीनों में से कोई भी गुण की कमी है तो सर्विस की सफलता की भी कमी है।
38समझा। 39मुख्य एक बात ध्यान में रखने और कर्म में धारण करने वाली कौन सी है, जिससे इस सफलता स्वरुप को प्रैक्टिकल में ला सकते हो? 40वह कौन सी बात है? 41बहुत सहज है।
6Have you become the creators who can take the support of the creation when you wish and leave the support of the creation when you wish?
42मुश्किल बात को ध्यान देकर धारण करते हैं और सहज बात को छोड़ देने से सहज की धारणा देरी से होती है। 43यह मालूम है? 44समझा जाता है यह तो कोई बड़ी बात नहीं है। 45हो जाएगी।
7Have you become free from bondage to the extent that you become detached when you want, and loving when you want?
46फिर होता क्या है? 47हो जाएगी, हो जाएगी करते-करते ध्यान से निकल जाती है। 48इसलिए धारणा रूप भी नहीं होते।
8The body is also a bondage, and it ties you in its bondage.
49तो वह कौन-सी एक बात है। 50अगर उस बात को धारण कर लें तो सफलता स्वरूप बन सकते हैं। 51(साक्षीपन)हाँ यह बात ठीक है। 52आज बापदादा भी साक्षी अवस्था की राखी बाँधने के लिए आये हैं।
9It is easy to finish attachment with the bodily relations and physical things, but it takes effort to become free from the consciousness of the body.
53अगर यह साक्षीपन की राखी सदैव बंधी हुई हो तो सर्विस की सफलता बहुत जल्दी निकलेगी। 54अभी जिस कर्तव्य में मास लगता है उस कर्तव्य में एक घंटा भी नहीं लगेगा। 55यह साक्षीपन की राखी बांधनी है।
56औरों को तो प्यूरिटी की राखी बाँधते हो लेकिन बापदादा आज यह साक्षीपन की राखी बाँध रहे हैं। 57जितना साक्षी रहेंगे उतना साक्षात्कारमूर्त और साक्षात् मूर्त बनेंगे। 58साक्षीपन कम होने के कारण साक्षात् और साक्षात्कारमूर्त भी कम बने हैं।
59इसलिए यह अभ्यास करो। 60कौन-सा अभ्यास? 61अभी-अभी आधार लिया,अभी-अभी न्यारे हो गए। 62यह अभ्यास बढ़ाना अर्थात् सम्पूर्णता और समय को समीप लाना है।
10You now have to practise coming into the avyakt stage when you wish, with great force.
63तो अब क्या प्रयत्न करना है? 64समय और सम्पूर्णता को समीप लाओ।
11In order to be loved by all, you first have to become detached.
65और एक बात विशेष ध्यान में यह रखनी है कि अपने रिकॉर्ड को ठीक रखने के लिए सर्व को रिगार्ड दो। 66जितना जो सर्व को रिगार्ड देता है उतना ही अपना रिकॉर्ड ठीक रख सकता है। 67दूसरे का रिगार्ड रखना अपना रिकॉर्ड बनाना है।
68अगर रिगार्ड कम देते हैं तो अपने रिकॉर्ड में कमी करते हैं। 69इसलिए इस मुख्य बात की आवश्यकता है। 70समझा। 71जैसे यज्ञ के मददगार बनना ही मदद लेना है वैसे रिगार्ड देना ही रिगार्ड लेना है।
12For success in service, you have to be able to make all souls have love for the Father, be co- operative in the Fathers task, and powerful in their effort.
72देते हैं लेने के लिए। 73एक बार देना अनेक बार लेने के हक़दार बन जाते हैं। 74जैसे कहते हैं छोटों को प्यार और बड़ों को रिगार्ड। 75लेकिन सभी को बड़ा समझ रिगार्ड देना यही सर्व के स्नेह को प्राप्त करने का साधन है।
13Be a detached observer.
76यह बात भी विशेष ध्यान देने योग्य है। 77हर बात में पहले आप। 78यह वृत्ति,दृष्टि और वाणी तथा कर्म में लानी चाहिए।
14Then a task that at present takes one month will not take even one hour.
79जितना पहले आप कहेंगे उतना ही विश्व के बाप समान बन सकेंगे। 80विश्व के बाप समान का अर्थ क्या है? 81एक तो विश्व के बाप समान बनना।
15The more you remain a detached observer the more you will become an image that grants visions.
82दूसरा जब विश्व राजन बनेंगे तो भी विश्व के बाप ही कहलायेंगे ना। 83विश्व के राजन विश्व के बाप हैं ना। 84तो विश्व के बाप भी बनेंगे और विश्व के बाप समान भी बनेंगे।
85किससे?
86पहले आप करने से। 87समझा। 88निर्माण बनने से प्रत्यक्ष प्रमाण बन सकेंगे। 89निर्माण बनने से विश्व का निर्माण कर सकेंगे।
16Take support one minute, and become detached the nextः this will bring time and perfection close.
90समझा। 91ऐसी स्थिति को धारण करने के लिए साक्षीपन की राखी बांधनी है। 92जब पहले से ही साक्षीपन की राखी बाँध के जायेंगे तो राखी की सर्विस सफलतापूर्वक होगी।
93समझा। 94पार्टियों से 95सम्मेलन कर रहे हो। 96सम्मेलन का अर्थ क्या है?
17Give regard to everyone. You first.
97सर्व आत्माओं का मिलन। 98सर्व आत्माओं का मिलन किससे करायेंगे? 99बाप से। 100आजकल समय कौन-सा है?
18To give regard means to receive regard.
101सम्पूर्णता का समय समीप आने का है तो वर्तमान समय के प्रमाण निश्चित हुई पड़ी है। 102जैसे कल्प पहले भी पुरुषार्थ निमित्तमात्र कराया था। 103ऐसे ही नहीं कि पुरुषार्थ आज और प्राप्ति कब जो जाएगी।
104नहीं। 105अभी-अभी पुरुषार्थ अभी-अभी प्राप्ति। 106ऐसा पुरुषार्थ है?
19Give it once, and you will receive it many times.
107जब स्वयं प्राप्ति स्वरुप बनेंगे तब अन्य अनेक आत्माओ को प्राप्ति करा सकेंगे। 108अगर स्वयं प्राप्ति स्वरुप नहीं होंगे तो अन्य को कैसे प्राप्ति करा सकेंगे? 109अब नहीं करायेंगे तो कब करायेंगे।
110सुनाया था ना किकब शब्द भी ख़त्म। 111हर बात में अबहो। 112इतना परिवर्तन वाणी, कर्म और संकल्प में लाना है।
20The more you say you first, the more you will become equal to the Father.
113संकल्प में भी अब यह न आये कि कब कर लेंगे या कब हो जायेगा। 114नहीं। 115अब हो ही जायेगा।
21Stop saying sometime and start saying now.
116ऐसा परिवर्तन करना है तब सर्विस की सफलता है। 117अगर स्वयं में ही कब होगा तो आप की प्रजा भी कहेगी कि अच्छा तो बहुत लगा कब कर लेंगे या कब हो जायेगा। 118कब पर छोड़ने वाले पिछली प्रजा के होते हैं।
119तो अब नजदीक की प्रजा बनानी है। 120नजदीक की प्रजा बनाने के लिए नाज़ुकपना छोड़ना पड़ेगा। 121नाजों से चलना छोड़ राजों से चलना है। 122अलबेलापन नाज़ुकपन होता है।
22Those who leave everything for later are the subjects of a later period. ow you have to create the subjects of the first period.
123जितना-जितना राज़युक्त होंगे उतना उतना नाज़ुकपन छूटता जायेगा। 124रूहानियत का एक ही रूप सदैव रहता है?
23Understand the significance of everything(raaz), and renounce being delicate (naaz).
125रूप बदलने के बजाय यह शरीर का भान छोड़ना है इस प्रैक्टिस में रहना है। 126शरीर छोड़ने का अभ्यास होगा तो रूप बदलना छूट जायेगा। 127पढ़ाई में भी रेग्यूलर होना मुख्य बात होती है। 128वह भी सिर्फ आने में नहीं लेकिन हर बात में रेग्यूलर,जितना रेग्यूलर उतना ही रूलर बनेंगे।
24Be regular in every aspect.
129तो क्या करना पड़े? 130सभी बातों में रेग्यूलर।
25The more regular you are, the more of a ruler you will become.
131अमृतबेले उठने से लेकर हर कर्म, हर संकल्प और हर वाणी में भी रेग्यूलर। 132एक भी बोल ऐसा न निकले जो व्यर्थ हो। 133इस दुनिया के जो बड़े आदमी हैं वह लोग जब स्पीच करते हैं तो उन्हों के बोलने के शब्द भी फिक्स किये जाते हैं।
134आप भी बड़े से बड़े आदमी हो ना। 135तो आपके बोल भी फिक्स होने चाहिए। 136माया की मिक्स न हो। 137ऐसे रेग्यूलर बनने वालों की सर्विस सफल हुई पड़ी है।
26Not even one word should be wasteful.
138सम्मेलन का हर कार्य करते भी यह कभी नहीं भूलना कि हम विश्व के आगे साक्षात्कारमूर्त हैं। 139साक्षात्कार मूर्त बनने से आप के द्वारा बापदादा का साक्षात्कार स्वतः ही होगा। 140वह तब कर सकेंगे जब स्वयं को ज्ञान,योग का प्रत्यक्ष प्रमाण बनायेंगे। 141जितना स्वयं को प्रत्यक्ष प्रमाण बनायेंगे उतना बाप को प्रत्यक्ष कर सकेंगे।
27* * * O M S H A N T I * * *
142अच्छा !