Avyakt murli for Wednesday 24 February 1988
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0> 124 - 02 - 88 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन
0> > 24-02-88 Om Shanti Avyakt Bapdada Madhuban
2वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि 3सर्वशक्तियों से सम्पन्न भव का वरदान देने वाले, टेन्शन से मुक्त कर अटेन्शन खिंचवाने वाले सद्गुरू बापदादा अपने बच्चों प्रति बोले 4आज बापदादा अपने रूहानी चात्रक बच्चों को देख रहे हैं।
5हर एक बच्चा बाप से सुनने के,मिलने के और साथ - साथ बाप समान बनने के चात्रक हैं। 6सुनने से जन्म - जन्मान्तर की प्यास मिट जाती है।
1Today BapDada is seeing the children who are like spiritual chatrak birds - anxious to listen, to meet, and to become equal to Baba.
7ज्ञान - अमृत प्यासी आत्माओं को तृप्त आत्मा बना देता है। 8सुनते - सुनते आत्मायें भी बाप समान ज्ञानस्वरूप बन जाती हैं वा यह कहें ज्ञान - मुरली सुनते - सुनते स्वयं भी मुरलीधर बच्चे' बन जाते हैं। 9रूहानी मिलन मनाने बाप के स्नेह में समा जाते हैं। 10मिलन मनाते लवलीन, मग्न स्थिति वाले बन जाते हैं,मिलन मनाते एक बाप दूसरा न कोई - इस अनुभूति में समाये हुए रहते हैं, मिलन मनाते निर्विघ्न,सदा बाप के संग के रंग में लाल बन जाते हैं।
2As you listen to the flute of knowledge, you become players of that flute.
11जब ऐसे समाये हुए वा स्नेह में लवलीन बन जाते हैं तो क्या आशा रहती है? 12बाप - समान'बनने की। 13बाप के हर कदम - पर - कदम रखने वाले अर्थात् बाप समान बनने वाले।
3As you celebrate the spiritual meeting , you become merged in Baba’s love, and lost in love - free from obstacles and coloured by Baba’s company.
14जैसे बाप का सदा सर्वशक्तिवान स्वरूप है, ऐसे बच्चे भी सदा मास्टर सर्वशक्तिवान का स्वरूप बन जाते हैं। 15जो बाप का स्वरूप है - सदा शक्तिशाली,सदा लाइट - ऐसे समान बन जाते हैं। 16समान बनने की विशेष बातें जानते हो ना, किन - किन बातों में बाप समान बनना है?
17बन रहे हो और बने भी हो। 18जैसा बाप का नाम, बच्चों का भी वही नाम है।
4As is Baba’s name, so is the children’s name - world benefactor.
19विश्व - कल्याणकारी! 20यही नाम है ना आप सबका।
5As is Baba’s form, so is the children’s form.
21जो बाप का रूप वही बच्चों का रूप, जो बाप के गुण वह बच्चों के।
6As are Baba’s virtues, so are the children’s virtues.
22बाप के हर गुण को धारण करने वाले ही बाप समान बनते हैं। 23जो बाप का कार्य, वह बच्चों का कार्य।
7So check yourself - to what extent have you become like Baba in every respect?
24सब बातों में बाप समान बनना है। 25लक्ष्य तो सभी का वही है ना। 26सम्मुख रहने वाले नहीं लेकिन समान बनने वाले हैं।
8Baba has given the blessing: “may you constantly be full of the wealth of all powers”.
27इसको ही कहा जाता है - फालो फादर करने वाले।
9These are the treasures of Brahmin life.
28तो अपने को चेक करो - सब बातों में कहाँ तक बाप समान बने हैं?
10“May you have a long life” - from Brahmin birth until the end of establishment.
29समान बनने का वरदान आदि से बाप ने बच्चों को दिया है। 30आदि का वरदान है - सर्व शक्तियों से सम्पन्न भव'। 31लौकिक जीवन में बाप वा गुरू वरदान देते हैं। 32धनवान भव', पुत्रवान भव', बड़ी आयु भव',या सुखी भव' का वरदान देते हैं।
11If the soul goes towards old sanskars, away from Brahmin life, this is taking birth again, but with a short life span - some are such that it is as if they are in a coma - that living is equivalent to being dead.
33बापदादा ने क्या वरदान दिया? 34सदा ज्ञान - धन, शक्तियों के धन से सम्पन्न भव'। 35यही ब्राह्मण जीवन का खज़ाना है।
12So have a long life span - live the elevated, divine, Brahmin life of all attainments from the beginning until the end.
36जब से ब्राह्मण जन्म लिया,तब से संगमयुग की स्थापना के कार्य में अन्त तक जीना अर्थात् बड़ी आयु भव'। 37बीच में अगर ब्राह्मण जीवन से निकल पुराने संस्कारों या पुराने संसार में चले जाते हैं तो इसको कहा जाता है - जन्म लिया लेकिन छोटी आयु वाले,क्योंकि ब्राह्मण जीवन से मर गये। 38कोई - कोई ऐसे भी होते हैं जो कोमा में चले जाते हैं, होते हुए भी ना के बराबर होते हैं और कभीकभी जाग भी जाते हैं लेकिन वह जिंदा होना भी मरने के समान ही होता है। 39तो बड़ी आयु भव' अर्थात् सदा आदि से अन्त तक ब्राह्मण जीवन वा श्रेष्ठ दिव्य जीवन की सर्व प्राप्तियों में जीना।
13“May you be free from disease”.
40बड़ी आयु के साथ - साथ निरोगी भव' का भी वरदान आवश्यक है। 41अगर आयु बड़ी है लेकिन माया की व्याधि बार - बार कमज़ोर बना देती है तो वह जीना भी जीना नहीं है। 42तो बड़ी आयु भव' के साथ सदा तन्दुरूस्त रहना अर्थात् निर्विघ्न रहना है।
43बार - बार उलझन में वा दिलशिकस्त की स्थिति के बिस्तर हवाले नहीं होना है। 44जो कोई बीमार होता है तो बिस्तरे हवाले होता है ना।
14If the lifespan is long but the sickness of Maya makes the soul weak again and again, that living is not living - so remain healthy: free from obstacles.
45छोटी - छोटी उलझन तो चलते - फिरते भी खत्म कर देते हो लेकिन जब कोई बड़ी समस्या आ जाती,उलझन में आ जाते, दिलशिकस्त बन जाते हो तो मन की हालत क्या होती है? 46जैसे शरीर बिस्तरे के हवाले होता है तो कोई दिल नहीं होती - उठने की, चलने की वा खाने - पीने की कोई दिल नहीं होती। 47ऐसे यहाँ भी योग में बैठेंगे तो भी दिल नहीं लगेगी, ज्ञान भी सुनेंगे तो दिल से नहीं सुनेंगे।
48सेवा भी दिल से नहीं करेंगे; दिखावे से वा डर से,लोकलाज से करेंगे। 49इसको सदा तन्दुरूस्त जीवन नहीं कहेंगे। 50तो बड़ी आयु भव'अर्थात् निरोगी भव'इसको कहा जाता है।
15“May you have many children” - may you be stable on the stage of master creator - with the blessing of unlimited children.
51पुत्रवान भव' वा सन्तान भव'। 52आपके सन्तान हैं? 53दो - चार बच्चे नहीं पैदा किये हैं? 54सन्तान भव'का वरदान है ना।
16Have the consciousness of each soul, and the elements of nature, as your creation, and have good wishes and pure feelings of benefit for each one.
55दो - चार बच्चों का वरदान नहीं मिलता लेकिन जब बाप समान मास्टर रचयिता की स्टेज पर स्थिति हो तब तो यह सब अपनी रचना लगती है। 56बेहद के मास्टर रचयिता बनना,यह बेहद कापुत्रवान भव', सन्तान भव'हो जाता। 57हद के नहीं कि जो दो - चार जिज्ञासु हमने बनाया, यह मेरे हैं।
58नहीं। 59मास्टर रचता की स्टेज बेहद की स्टेज है। 60किसी भी आत्मा को वा प्रकृति के तत्वों को भी अपनी रचना समझ विश्व - कल्याण्कारी स्थिति से हर एक के प्रति कल्याण की शुभ भावना, शुभ कामना रहती है। 61रचता की रचना प्रति यही भावनायें रहती हैं।
17The seed, the creator of the tree, will stand on top of the kalpa tree - together with Baba the soul will become the unlimited master creator, and spread the rays of powers, virtues, good wishes, pure feelings, love and co-operation.
62जब बेहद के मास्टर रचयिता बन जाते हो तो कोई हद की आकर्षण आकर्षित नहीं कर सकेगी। 63सदा अपने को कहाँ खड़ा हुआ देखेंगे? 64जैसे वृक्ष का रचता बीज',जब वृक्ष की अन्तिम स्टेज आती है तो वह बीज ऊपर आ जाता है ना।
65ऐसे बेहद के मास्टर रचयिता सदा अपने को इस कल्प वृक्ष के ऊपर खड़ा हुआ अनुभव करेंगे,बाप के साथ - साथ वृक्ष के ऊपर मास्टर बीजरूप बन शक्तियों की,गुणों की,शुभभावना - शुभ कामना की,स्नेह की,सहयोगी की किरणें फैलायेंगे। 66जैसे सूर्य ऊँचा रहता है तो सारे विश्व में स्वतः ही किरणें फैलती हैं ना। 67ऐसे मास्टर रचयिता वा मास्टर बीजरूप बन सारे वृक्ष को किरणे वा पानी दे सकते हो?
68तो कितनी सन्तान हुई? 69सारी विश्व आपकी रचना हो गई ना। 70तो मास्टर रचता भव'। 71इसको कहते है पुत्रवान भव'।
18The sun’s rays spread automatically over the entire world, because the sun is high above.
72तो कितने वरदान हैं! 73इसको ही कहा जाता है - बाप समान बनना। 74जन्मते ही यह सब वरदान हर एक ब्राह्मण आत्मा को बाप ने दे दिये है।
19In the same way, become master creator and master seed and give rays and water to the entire tree.
75वरदान मिले हैं ना। 76वा अभी मिलने हैं?
20So how many children do you have?
77जब कोई भी वरदान किसी को मि्ालता है तो वरदान के साथ वरदान को कार्य में लगाने की विधि भी सुनाई जाती है। 78अगर वह विधि नहीं अपनाते तो वरदान का लाभ नहीं ले सकते। 79तो वरदान तो सभी को मिला हुआ है लेकिन हर एक वरदान को विधि से वृद्धि को प्राप्त कर सकते हैं। 80वृद्धि को कैसे प्राप्त कर सकते, उसकी विधि सबसे सहज और सबसे श्रेष्ठ यही है - जैसा समय उस प्रमाण वरदान स्मृति में आये।
21The entire world is your creation!
81और स्मृति में आने से समर्थ बन जायेंगे और सिद्धि स्वरूप बन जायेंगे। 82जितना समय प्रमाण कार्य में लगायेंगे,उतना वरदान वृद्धि को प्राप्त करता रहेगा अर्थात् सदा वरदान का फल अनुभव करते रहेंगे। 83इतने श्रेष्ठ शक्तिशाली वरदान मिले हुए हैं - न सिर्फ अपने प्रति कार्य में लगाए फल प्राप्त कर सकते हो लेकिन अन्य आत्माओं को भी वरदाता बाप से वरदान प्राप्त कराने के योग्य बना सकते हो! 84यह संगमयुग का वरदान 21जन्म भिन्न रूप से साथ में रहता है।
22So, Baba gave all these blessings to each Brahmin soul, as soon as each one took birth.
85यह संगम का रूप अलग है और 21 जन्म यही वरदान जीवन के हिसाब से चलता रहता है। 86लेकिन वरदाता और वरदान प्राप्त होने का समय अभी है। 87तो यह चेक करो कि सर्व वरदान कार्य में लगाते सहज आगे बढ़ रहे हो? 88यह वरदान की विशेषता है कि वरदानी को कभी मेहनत नहीं करनी पड़ती।
23Everyone has received blessings, but you can increase your blessing with the accurate method: remember each blessing according to the time, and by remembering it you will become powerful and the embodiment of success.
89जब भक्त आत्मायें भी मेहनत कर थक जाती हैं तो बाप से वरदान ही मांगती हैं।
24The more you use it according to the time, the more the blessing will increase.
90आपके पास भी जब लोग आते हैं, योग लगाने की मेहनत नहीं करने चाहते तो क्या भाषा बोलते हैं? 91कहते हैं - सिर्फ हमें वरदान दे दो,माथे पर हाथ रख लो। 92आप ब्राह्मण बच्चों के ऊपर वरदाता बाप का हाथ सदा है।
25You have received such elevated powerful blessings that not only can you achieve fruits by using them for yourself, but you can also make other souls worthy to claim blessings from BapDada, the Bestower of Blessings.
93श्रेष्ठ मत ही हाथ है। 94स्थूल हाथ तो 24घण्टे नहीं रखेंगे ना!
26Now is the time to meet the Bestower of Blessings and so receive blessings.
95यह बाप के श्रेष्ठ मत का वरदान रूपी हाथ सदा बच्चों के ऊपर है। 96अमृतवेले से लेकर रात को सोने तक हर श्वाँस के लिए,हर संकल्प के लिए, हर कर्म के लिए श्रेष्ठ मत का हाथ है ही। 97इसी वरदान को विधिपूर्वक चलाते चलो तो कभी भी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। 98जैसे देवताओं के लिए गायन है - इच्छा - मात्रम् - अविद्या।
27The one who has received blessings does not have to labour.
99यह है फरिश्ता जीवन की विशेषता। 100देवताई जीवन में तो इच्छा की बात ही नहीं।
28The hand of Baba, the Bestower of Blessings, is constantly over you the Brahmin children.
101ब्राह्मण जीवन सो फरिश्ता जीवन बन जाती अर्थात् कर्मातीत स्थिति को प्राप्त हो जाते। 102किसी भी शुद्ध कर्म वा व्यर्थ कर्म वा विकर्म वा पिछला कर्म,किसी भी कर्म के बन्धन में बंधकर करना - इसको कर्मातीत अवस्था नहीं कहेंगे। 103एक ही कर्म का सम्बन्ध,एक है बन्धन। 104तो जैसे यह गायन है - हद की इच्छा से अविद्या, ऐसे फरिश्ता जीवन वा ब्राह्मण जीवन अर्थात्मुश्किल' शब्द की अविद्या, बोझ से अविद्या,मालूम ही नहीं कि वह क्या होता है!
29The elevated directions are the hand.
105तो वरदानी आत्मा अर्थात् मुश्किल जीवन से अविद्या का अनुभव करने वाली। 106इसको कहा जाता है - वरदानी आत्मा।
30There is praise for the deities - that they have no knowledge of any desires - this is really the speciality of an angelic life.
107तो बाप समान बनना अर्थात् सदा वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों से पलना, सदा निश्चिन्त,निश्चित विजय अनुभव करना। 108कई बच्चे पुरूषार्थ तो बहुत अच्छा करते। 109लेकिन पुरूषार्थ का बोझ अनुभव होना - यह यथार्थ पुरूषार्थ नहीं है। 110अटेन्शन रखना - यह ब्राह्मण जीवन की विधि है।
31There is no question of any desires in a deity life.
111इसको भी यथार्थ अटेन्शन नहीं कहा जायेगा। 112जैसे जीवन में स्थूल नॉलेज रहती है कि यह चीज़ अच्छी है,यह बात करनी है, यह नहीं करनी है।
32Brahmin life becomes the angelic life - that is you reach the karmateet stage, and then perform no sinful or impure or useless or karma-bound action.
113तो नॉलेज के आधार पर जो नॉलेजफुल होते हैं, उनकी निशानी है - उनको नैचरल अटेन्शन रहता - यह खाना है, यह नहीं खाना है;यह करना है,यह नहीं करना है। 114हर कदम में टेन्शन नहीं रहता कि यह करूँ या नहीं करूँ, यह खाऊँ या नहीं खाऊँ, ऐसे चलूँ वा नहीं? 115नैचरल नॉलेज की शक्ति से अटेन्शन है। 116ऐसे, यथार्थ पुरूषार्थी का हर कदम, हर कर्म में नैचरल अटेन्शन रहता है कि क्योंकि नॉलेज की लाइट - माइट स्वतः यथार्थ रूप से,यथार्थ रीति से चलाती है।
33There may be relationship with karma, but no bondage - this is called an angel.
117तो पुरूषार्थ भले करो। 118अटेन्शन जरूर रखो लेकिन टेन्शन' के रूप में नहीं।
34Just as there is ignorance of desires, in Brahmin life there is ignorance of burden.
119जब टेन्शन में आ जाते हो तो चाहते हो बहुत काम करने वा बनने चाहते हो नम्बरवन लेकिन टेन्शन'जितना चाहते हो उतना करने नहीं देता, जो बनने चाहते हो वह बनने नहीं देता और टेन्शन, टेन्शन को पैदा करता है, क्योंकि जो चाहते हो वह नहीं होता है तो और टेन्शन बढ़ता है। 120तो पुरूषार्थ सभी करते हो लेकिन कोई ज्यादा पुरूषार्थ को भारी कर देते और कोई फिर बिल्कुल अलबेले हो जाते - जो होना होगा हो जायेगा, देखा जायेगा, कौन देखता है, कौन सुनता है…। 121तो न वह अच्छा,न वह अच्छा है।
122इसलिए बैलेन्स से बाप की ब्लैसिंग, वरदानों का अनुभव करो। 123सदा बाप का हाथ मेरे ऊपर है - इस अनुभव को सदा स्मृति में रखो। 124जैसे भक्त आत्मायें स्थूल चित्र को सामने रखती हैं कि माथे पर वरदान का हाथ है, तो आप भी चलते - फिरते बुद्धि में यह अनुभव का चित्र सदा स्मृति रखो।
125समझा?
126बहुत पुरूषार्थ किया, अब वरदानों से पलते उड़ते चलो। 127बाप के ज्ञान - दाता,विधाता का अनुभव किया, अब वरदाता का अनुभव करो। 128अच्छा! 129सदा हर कदम में बाप को फालो करने वाले,सदा अपने को वरदाता बाप के वरदानी श्रेष्ठ आत्मा अनुभव करने वाले, सदा हर कदम सहज पार करने वाले,सदा सर्व वरदान समय पर कार्य में लगाने वाले,ऐसे बाप समान बनने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को बापदादा का वरदाता के रूप में यादप्यार और नमस्ते।
35This is called a blessed soul.
130'' 131मुख्य महारथी भाईयों से मुलाकात 132जन्म से कितने वरदान मिले हुए हैं!
36Always be carefree, and experience victory as a certainty.
133हर एक को अपने - अपने वरदान मिले हुए हैं। 134जन्म ही वरदानों से हुआ। 135नहीं तो,आज इतना आगे नहीं बढ़ सकते। 136वरदान से जन्म हुआ, इसलिए बढ़ रहे हो।
37Some children make good effort - but to experience effort as a burden is not accurate effort.
137पाण्डवों की महिमा कम थोड़े ही है। 138हरेक की विशेषता का वर्णन करें तो कितनी है! 139यह जो भागवत् बना हुआ है, वह बन जाये। 140बाप की नजर में हरेक की विशेषतायें हैं।
38To pay attention is the accurate method of a Brahmin, but attention changes into tension.
141और कुछ देखते भी नहीं देखते हैं, जानते भी नहीं जानते हैं। 142तो विशेषता सदा आगे बढ़ा रही है और बढ़ाती रहेगी। 143जो जन्म से वरदानी आत्मायें हैं,वह कभी भी पीछे नहीं हट सकती। 144सदा उड़ने वाली वरदानी आत्मायें हो।
39Accurate attention is natural with the power of knowledge - the light and might of knowledge enables you to move in an accurate way, with an accurate method.
145वरदाता बाप के वरदान आगे बढ़ा रहे हैं। 146पाण्डव गुप्त रहते हैं लेकिन बापदादा के दिल पर सदा प्रत्यक्ष हैं।
40So by all means make effort - definitely pay attention, but not in the form of tension.
147अच्छे - अच्छे प्लैन तो पाण्डव ही बनाते हैं। 148शक्तियाँ शिकार करती लेकिन कमाल तो लाने वालों की है।
41Tension creates further tension, because what you wish to happen does not happen.
149अगर लाने वाले लायें ही नहीं तो शिकार क्या करेंगी? 150इसलिए पाण्डवों को विशेष अपना वरदान है। 151याद' और सेवा' का बल विशेष मिला हुआ है।
42So be neither heavy, nor careless - but, through balance, experience Baba’s blessings.
152याद का बल' भी विशेष मिलता है, सेवा'का बल भी विशेष मिलता है क्यों? 153उसका भी कारण है। 154क्योंकि जो जितना आवश्यकता के समय कार्य में आये हैं, उसको विशेष वरदान मिला हुआ है। 155जैसे आदि में जब स्थापना हुई तो आप पाण्डव मर्ज थे, इमर्ज नहीं थे।
43Always remember that Baba’s hand is over your head.
156शक्तियाँ एग्जाम्पल बनीं और उन्हों के एग्जाम्पल को देख और आगे बढ़े। 157तो यह आवश्यकता के एग्जाम्पल बने। 158इसलिए,जितना जो आवश्यकता के समय सहयोगी बने हैं - चाहे जीवन से, चाहे सेवा से… उनको ड्रामा अनुसार विशेष बल मिलता है।
159अपना पुरूषार्थ तो है ही लेकिन एकस्ट्रा बल मिलता है। 160अच्छा!
44You have made a lot of effort - now be sustained by blessings, and fly.
161सेवा करने से जो सर्व आत्मायें खुश होती हैं,उसका भी बहुत बल मिलता है। 162जो अनुभवी आत्मायें हैं,उन्हों के सेवा की आवश्यकता है। 163क्योंकि जिन्होंने साकार में पालना ली है,उन्हों को देखकर के सदा बाप ही याद आता है।
164कभी भी आप लोग (दादियाँ) कहाँ जायेंगी तो विशेष क्या पूछेंगे? 165चरित्र सुनाओ, कोई बाप की बातें सुनाओ। 166तो विशेषता है ना।
45You have experienced Baba as the Bestower of Knowledge and Wisdom - now experience Him as the Bestower of Blessings.
167इसलिए सेवा की विशेषता का वरदान मिला हुआ है। 168चाहे स्टेज पर खड़े होकर भाषण न भी करो लेकिन यह सबसे बड़ा भाषण है। 169चरित्र सुनाकर चरित्रवान बनने की प्रेरणा देना - यह सबसे बड़ी सेवा है। 170तो सेवा पर जाना ही है और सेवा के निमित्त बनना ही है।
46To those who constantly follow the Father at every step, who constantly experience themselves to be elevated blessed souls who belong to the Bestower of Blessings; to those who always use the blessings at the appropriate time; to such elevated souls who are to become equal to Baba, BapDada’s love, remembrance, and namaste.
171अच्छा!
47* O M S H A N T I*